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<title>Tej Rafter News &#45; : Would News</title>
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<description>Tej Rafter News &#45; : Would News</description>
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<dc:rights>TEJ RAFTER NEWS</dc:rights>

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<title>लेबनान&#45;इजरायल की 34 साल बाद मुलाकात, ट्रंप का पहले सीजफायर का ऐलान, फिर 10वें वॉर पर किया ये दावा</title>
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<description><![CDATA[ Israel Lebanon War: मिडिल ईस्ट में इजरायल और लेबनान के बीच जारी तनाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. एक तरफ जहां ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में दूसरे दौर की वार्ता की संभावना है तो वहीं दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के सीजफायर का ऐलान किया है. इसके बाद ट्रंप की तरफ से 10वें वॉर को रुकवाने का दावा किया गया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई बातचीत के बाद 16 अप्रैल को शाम 5 बजे से 10 दिनों का युद्धविराम लागू होगा.
34 साल बाद मिले इजरायल-लेबनान के नेता: ट्रंप
यह साजीफायर इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच एक महीने से अधिक समय से चल रहे जंग के बाद आया है. डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर कहा, &#039;मैंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से बात की. दोनों देशों के नेता 34 साल बाद पहली बार वाशिंगटन डीसी में विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मिले. मैंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो को संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ के हेड डैन रजिन केन के साथ मिलकर इजरायल और लेबनान के साथ स्थायी शांति स्थापित करने के लिए काम करने का निर्देश दिया.&#039;
उन्होंने पोस्&amp;zwj;ट में आगे कहा, &#039;मैं इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन को व्हाइट हाउस में आमंत्रित करूंगा. यह 1983 के बाद से इजरायल और लेबनान के बीच पहली सार्थक बातचीत होगी. दोनों पक्ष शांति चाहते हैं और मेरा मानना ​​है कि ऐसा होगा और वह भी बहुत जल्द.&#039;
लेबनान के राष्ट्रपति ने डोनाल्ड ट्रंप का क&amp;zwj;िया धन्&amp;zwj;यवाद
अमेरिका भले ही खुद को एक निर्णायक समझौते के मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही नजर आ रही है. आज ही दिन में जोसेफ आउन ने नेतन्याहू के साथ सीधे बातचीत करने से इनकार कर दिया था. इस बीच लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने सीजफायर के प्रयासों के ल&amp;zwj;िए डोनाल्ड ट्रंप का धन्&amp;zwj;यवाद किया.
उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा, लेबनान में सीजफायर कराने और स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से किए जा रहे प्रयासों के लिए उनका धन्यवाद. इन प्रयासों से इस क्षेत्र में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है.&#039; उन्होंने कामना की कि इन प्रयासों को जारी रखा जाए, ताकि जल्द से जल्द संघर्ष को रोका जा सके.
ये भी पढ़ें : सऊदी में फाइटर जेट की तैनाती के बाद आंखों की किरकिरी बना पाकिस्तान? आसिम मुनीर भागे-भागे पहुंचे ईरान ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:59:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>पाकिस्तान ने की स्वदेशी एंटी&#45;शिप मिसाइल की टेस्टिंग, जानें कितना खतरनाक</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की नौसेना ने स्वदेशी रूप से विकसित जहाज से दागी जाने वाली एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. यह मिसाइल लक्ष्यों को सटीकता से निशाना बनाने में सक्षम है. सेना की मीडिया इकाई इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने एक बयान में कहा कि मिसाइल गाइड सिस्टम और एडवांस्ड मोबेलिटी से लैस है, जो इसे खतरों से बचने, बदलती परिस्थितियों के अनुसार ढलने और सटीकता के साथ हमला करने में सक्षम बनाती है.
पाकिस्तान ने की स्वदेशी एंटी-शिप मिसाइल की टेस्टिंग
आईएसपीआर ने बयान में कहा, &amp;lsquo;पाकिस्तान नौसेना ने स्वदेशी रूप से विकसित और जहाज से दागी जाने वाली एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षण किया और लंबी दूरी पर तेज गति के साथ सटीक रूप से अपने लक्ष्य पर हमला किया. इसमें आधुनिक नेविगेशन सिस्टम है. इससे दुश्मन के खतरे से बचना, बदलती परिस्थितियों में खुद को ढालना और सटीक हमला करना आसान हो जाता है. यह मिसाइल युद्धपोत से छोड़ी जाती है. यह दूर तक मौजूद लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है.&#039;
पाक नौसेना प्रमुख एडमिरल नवीद अशरफ ने प्रमुख वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के साथ मिसाइल को लॉन्च होते देखा. इस मिसाइल का पिछला परीक्षण पिछले साल नवंबर में किया गया था. आईएसपीआर ने कहा कि यह हथियार प्रणाली समुद्र और जमीनी दोनों लक्ष्यों को बेहद सटीकता से निशाना बनाने में सक्षम है.

पाकिस्तान को सऊदी ने दिया कर्ज
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तीन देशों, सऊदी अरब, कतर और तुर्किए, के दौरे पर हैं. पीएम शहबाज के दौरे के बीच सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर की मदद दी है. दरअसल, पाकिस्तान को संयुक्त अरब अमीरात ने इस महीने के अंत तक तीन अरब डॉलर का कर्ज लौटाने के लिए कहा था. ऐसे में पाकिस्तान ने अब सऊदी अरब से मदद मांगी है, ताकि वह यूएई से लिया कर्ज लौटा सके.
पाकिस्तानी मीडिया डॉन ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) ने गुरुवार को पुष्टि की है कि पाकिस्तान को सऊदी अरब से 2 अरब डॉलर मिले हैं. सेंट्रल बैंक ने कहा कि राशि 15 अप्रैल 2026 की वैल्यू डेट में मिली थी.यह डेवलपमेंट ऐसे समय में हुआ है, जब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मिडिल ईस्ट में शांति को बढ़ावा देने और डिप्लोमैटिक कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए सऊदी अरब गए हैं.
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:59:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई जिंदा या है नहीं? अमेरिका ने किया बड़ा दावा</title>
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<description><![CDATA[ Mojtaba Khamenei: अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की हेल्थ से जुड़ा बड़ा दावा अमेरिका की तरफ से किया गया है. अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के घायल होने का अनुमान है. फिलहाल वे जीवित हैं. अमेरिकी रक्षा सचिव ने यह बयान एक ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गुरुवार को दिया है. इससे पहले खबर आई थी कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अभी भी चेहरे और पैरों मे लगी चोट से उभर रहे हैं.&amp;nbsp;
मोजतबा के सहयोगियों ने क्या जानकारी दी थी?
मोजतबा को यह चोटें हवाई हमले में लगी थीं. इसमें उनके पिता और तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इस हादसे में उनका चेहरा बुरी तरह बिगड़ गया. उनके दोनों पैरों में भी चोटें आई है. यह जानकारी मोजतब के सहयोगियों के हवाले से न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की तरफ से दी गई थी. साथ ही कहा था कि मेंटली वो काफी फीट हैं.&amp;nbsp;
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ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले हेगसेथ, कहा- अमेरिका ईरान की नौसेनिक घेराबंदी जारी रखेगा
अलजजीरा के मुताबिक, वॉशिंगटन डीसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका ईरान की नौसैनिक घेराबंदी तबतक जारी रखेगा, जबतक इसकी जरूरत होगी. हमारे साथ बने रहें. हम आपके लिए उनकी ब्रीफिंग के सभी मुख्य बिंदु लेकर आ रहे हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;अमेरिकी संदेश लेकर पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर पहुंचे तेहरान, US-ईरान 2.0 वार्ता पर जल्द निकलेगा रास्ता?
हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के समुद्री ट्रैफिक को कंट्रोल कर रही है. ईरान के पास अब कोई नौसेना नहीं है. साथ ही कहा कि अगर ईरान किसी समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका की सेनाएं फिर से लड़ाई शुरू करने के लिए तैयार है.&amp;nbsp;
हेगसेथ ने ईरान को चेताते हुए कहा कि हम आप पर नजर रख रहे हैं. अमेरिका को पता है कि ईरान किन सैन्य संपत्तियों को बाहर निकाल रहा है.&amp;nbsp;

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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:59:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>पाकिस्तान पर नहीं भरोसा या ट्रंप धोखेबाज? क्या अमेरिका&#45;ईरान के बीच दोबारा होगी बातचीत, शहबाज सरकार ने दिया जवाब</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान ने गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर के लिए अभी तक कोई तारीख तय नहीं की गई है. विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी का यह बयान उन खबरों के बीच आया है कि पाकिस्तानी पक्ष की ओर से ईरानी नेतृत्व सहित क्षेत्रीय नेताओं के साथ किए गए हालिया संपर्क के बाद बातचीत का एक और दौर संभव है. बातचीत के दूसरे दौर की संभावना को खारिज करने से परहेज करते हुए कहा, &#039;अभी तक कोई तारीख तय नहीं की गई है.&#039;
दूसरे दौर की वार्ता को लेकर क्या बोला पाकिस्तान
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर के लिए प्रतिनिधिमंडलों के आगमन से जुड़े सवालों पर अंद्राबी ने कहा, &#039;कौन आएगा, प्रतिनिधिमंडल कितना बड़ा होगा, कौन रुकेगा और कौन जाएगा, यह दोनों पक्षों को तय करना है.&#039; उन्होंने कहा, &#039;हमारे यहां जो बातचीत हुई, उससे संबंधित जानकारी हमें बातचीत करने वाले पक्षों ने सौंपी थी.&#039; अंद्राबी ने ये भी कहा कि परमाणु मुद्दा उन विषयों में से एक है जिन पर देशों द्वारा चर्चा की जा रही है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा, &#039;हम तेहरान और वार्ता में शामिल पक्षों के रुख पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. यह हम पर पक्षों के भरोसे का हिस्सा है.&#039; ताहिर अंद्राबी ने कहा, &#039;दोनों पक्षों के बीच बातचीत उच्च स्तर के विश्वास और गोपनीयता के साथ होगी. &amp;nbsp;शांति वार्ता के लिए लेबनान में शांति जरूरी है.&#039; उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्किए की चार दिवसीय यात्रा पर हैं, जबकि सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ईरान गया है.

सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश दिए गए: पाकिस्तान
जियो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पाकिस्तान में अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को वार्ता के अगले दौर से पहले आवश्यक प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं. एक दिन पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ वार्ता का दूसरा दौर अगले दो दिनों में इस्लामाबाद में आयोजित किया जा सकता है.
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:59:04 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;ईरान के साथ जल्द ही...&amp;apos; उधर आसिम मुनीर पहुंचे तेहरान, इधर डोनाल्ड ट्रंप ने कर दिया बड़ा ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत की कोशिशें तेज हैं. इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (16 अप्रैल) को दावा किया है कि ईरान रिच यूरेनियम के अपने भंडार को सौंपने पर सहमत हो गया है. उन्होंने कहा 6 सप्ताह के संघर्ष के बाद दोनों पक्ष शांति समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं.
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रिच यूरेनियम का जिक्र करते हुए कहा, &#039; वह हमें &#039;न्यूक्लियर डस्ट&#039; लौटाने के लिए तैयार हो गए हैं.&#039; अमेरिका दावा करता आया है कि तेहरान इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने के लिए कर सकता है. ट्रम्प ने कहा, &#039;वे लगभग सभी बातों पर सहमत हो गए हैं. उन्हें अब बातचीत के लिए बैठना होगा.&#039;

ईरान के साथ डील पर क्या बोले ट्रंप?
वहीं, ईरान के साथ डील को लेकर भी ट्रंप ने सकारात्मक संकेत दिए हैं. ट्रंप ने आगे कहा कि समझौते पर पहुंचने की बहुत अच्छी संभावना है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान के साथ डील हो जाती है और इस्लामाबाद में वह फाइनल होती है तो वह भी पाकिस्तान जा सकते हैं.
ट्रम्प ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि ईरान उन शर्तों पर सहमत हो गया है, जिनका वह लंबे समय से विरोध कर रहा था, जिनमें परमाणु हथियार बनाने के मकसद को छोड़ना और परमाणु सामग्री सौंपना शामिल है. उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते में होर्मुज स्ट्रेट का खुलना भी शामिल होगा. हालांकि अब तक ईरान की ओर से इसको लेकर आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
यह भी पढ़ें - PM Modi Trump Talk: फोन कॉल में दिखी केमिस्ट्री! प्रसिडेंट ट्रंप बोले, &#039;पीएम मोदी से हुई शानदार बातचीत वे हमारे...&#039;
&#039;सीजफायर बढ़ाने की उम्मीद नहीं&#039;
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ दो सप्ताह के सीजफायर को आगे बढ़ाने की शायद जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्होंने दावा किया कि जल्द ही इसका समाधान हो जाएगा. आगे उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर जरूरी हुआ तो वह इसे बढ़ा देंगे. ट्रम्प ने कहा, &#039;वे लगभग हर बात पर मान गए हैं. अब बस उन्हें मेज पर आकर (समझौते पर) साइन करने की जरूरत है.&#039;
इजरायल-लेबनान के बीच 10 दिन का सीजफायर
गुरुवार को ट्रंप ने घोषणा की कि इजरायल और लेबनान 10 दिनों के युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं. यह फैसला क्षेत्रीय तनाव को कम करने के मकसद से उठाया गया है. उन्होंने कहा कि सीजफायर न्यूयॉर्क समयानुसार शाम 5 बजे से शुरू होगा. उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वैंस,विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन को &quot;स्थायी शांति समाधान के लिए इजरायल और लेबनान के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया.
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp; लेबनान-इजरायल की 34 साल बाद मुलाकात, ट्रंप का पहले सीजफायर का ऐलान, फिर 10वें वॉर पर किया ये दावा ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:59:03 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;हां, मैं पाकिस्तान जाऊंगा...आसिम मुनीर बहुत अच्छे&amp;apos;, PAK के लिए क्यों प्यार लुटाने लगे ट्रंप?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस पाकिस्तान को अपने पहले कार्यकाल में लताड़ते नहीं थकते थे, दूसरे कार्यकाल में वह उसका खूब गुणगान कर रहे हैं. ईरान के साथ करीब 7 सप्ताह के संघर्ष के बाद पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता बेनतीजा रहने के बाद ट्रंप ने ईरान के साथ डील को लेकर फिर बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि अगर ईरान के साथ इस्लामाबाद में समझौता होता है तो वह पाकिस्तान जा सकते हैं.
&#039;पाकिस्तान जा सकता हूं&#039;
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (लोकल टाइम के मुताबिक) को कहा पाकिस्तान उनको बेहद पसंद करता है, उनके अफसर चाहते हैं कि वह वहां जाएं.&amp;nbsp; उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता पाकिस्तान में फाइनल होता है तो वह इस्लामाबाद जाने पर विचार कर सकते हैं. ट्रंप के इस बयान से ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर इस्लामाबाद की संभावित भूमिका का संकेत मिलता है.

क्या बोले ट्रंप?
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, &#039;अगर समझौता इस्लामाबाद में होता है तो मैं जा सकता हूं. वे (पाकिस्तान) चाहते हैं कि मैं जाऊं.&#039; अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता को आसान बनाने में पाकिस्तान की भूमिका की भी तारीफ की और उसकी भागीदारी को बेहतर बताया. ट्रंप ने शहबाज शरीफ-मुनीर का गुणगान करते हुए कहा, &#039;फील्ड मार्शल बहुत अच्छे हैं, शहबाज शरीफ भी बहुत अच्छे हैं, इसलिए शायद मैं जाऊं.&#039;
यह भी पढ़ें- &#039;ईरान के साथ जल्द ही...&#039; उधर आसिम मुनीर पहुंचे तेहरान, इधर डोनाल्ड ट्रंप ने कर दिया बड़ा ऐलान
&#039;ईरान के साथ जल्द हो सकता है समझौता&#039;
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौते पर बातचीत में पाकिस्तान का बतौर मध्यस्थ योगदान अच्छा रहा है. इसके अलावा, &#039;उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही ईरान के साथ समझौता हो सकता है. उन्होंने कहा, &#039;मुझे लगता है कि इस समय हमारे बीच बहुत अच्छी बातचीत हो रही है. अगर समझौता हो जाता है तो इसकी घोषणा जल्द कर दी जाएगी. इससे होर्मुज स्ट्रेट फ्री होगा, तेल मिलेगा, सब कुछ अच्छा होगा. मुझे लगता है कि तेल की कीमतें पहले से भी कम हो जाएंगी.&#039;
ईरान-अमेरिका के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर कोशिशें तेज हो गई हैं. इस बीच, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने गुरुवार (16 को तेहरान में ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ से मुलाकात की. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यह दौरा अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते के प्रयासों के बीच हुआ है.
यह भी पढ़ें- PM Modi Trump Talk: फोन कॉल में दिखी केमिस्ट्री! प्रसिडेंट ट्रंप बोले, &#039;पीएम मोदी से हुई शानदार बातचीत वे हमारे...&#039; ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:59:02 +0530</pubDate>
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<title>PM Modi Trump Talk: होर्मुज को लेकर पीएम मोदी से फोन कॉल पर क्या हुई बात? ट्रंप ने कर दिया खुलासा, बोले&#45; &amp;apos;वो हमारे...&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई थी. इसे प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अच्छा करार दिया है. उन्होंने ANI की तरफ से पूछे गए एक सवाल पर कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी उनके दोस्त हैं और दोनों के बीच काफी सकारात्मक चर्चा हुई थी. यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में युद्ध जारी है और इसे रोकने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं.
मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को दोनों नेताओं ने फोन पर बात की थी. इस दौरान भारत और अमेरिका के आपसी संबंधों की समीक्षा की गई और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दी. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में अच्छी प्रगति हुई है और आने वाले समय में इस साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर खास बातचीत
इस बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई. खासतौर पर समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों नेताओं ने चिंता जताई. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) जैसे अहम समुद्री रास्ते खुले और सुरक्षित रहने चाहिए, क्योंकि यह रास्ता वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी है. इसी बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी जानकारी दी कि इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के युद्ध विराम पर सहमति बनी है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच कई हफ्तों से लड़ाई जारी है. इस युद्ध में लेबनान को काफी नुकसान हुआ है और करीब 2,200 लोगों की जान जा चुकी है.

#WATCH | Responding to ANI&#039;s question on his conversation with PM Narendra Modi, US President Donald Trump says, &quot;I had a very good talk with him and he&#039;s a friend of mine from India and he&#039;s doing great. We had a very good conversation&quot;(Source: US Network Pool Via Reuters) pic.twitter.com/W9vBuSzHlU
&amp;mdash; ANI (@ANI) April 16, 2026



हिज़्बुल्लाह का बयान
लेबनान में सक्रिय हिज़्बुल्लाह ने साफ कहा है कि युद्ध विराम पूरे लेबनान में लागू होना चाहिए और इसमें इजरायल को किसी तरह की सैन्य छूट नहीं मिलनी चाहिए. उधर, पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने भी ईरान का दौरा किया और वहां के अधिकारियों से मुलाकात की. इस मुलाकात का मकसद पश्चिम एशिया में तनाव को कम करने और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत को फिर से शुरू कराने की कोशिश करार दी गई है.
ये भी पढ़ें: लेबनान-इजरायल की 34 साल बाद मुलाकात, ट्रंप का पहले सीजफायर का ऐलान, फिर 10वें वॉर पर किया ये दावा ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:59:02 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US War: खुशी से फूला नहीं समाएगा पाकिस्तान! ट्रंप के बाद अब ईरान के राष्ट्रपति ने की तारीफ, बोले&#45; &amp;apos;युद्ध रोकने में...&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कहा है कि उसने युद्ध को रोकने में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने जिस तरह से बातचीत के जरिए हालात को संभालने की कोशिश की, वह काफी जिम्मेदारी भरा और असरदार कदम था. यह बयान उस समय आया, जब पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और ईरानी राष्ट्रपति के बीच मुलाकात हुई. इस मुलाकात के बाद पेजेशकियान ने साफ कहा कि इस पूरे मामले में पाकिस्तान ने एक मध्यस्थ के रूप में काम किया और तनाव कम करने में मदद की.
ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनका देश क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहता है और इसके लिए वह लगातार प्रयास करता रहेगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा हालात में सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे संघर्ष न हों और शांति बनी रहे. ईरान ने पाकिस्तान के प्रयासों को न सिर्फ सराहा, बल्कि यह भी संकेत दिया कि आगे भी ऐसे सहयोग की जरूरत बनी रहेगी, जिससे पूरे क्षेत्र में संतुलन और सुरक्षा कायम रखी जा सके.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान
पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर के ईरान दौरे के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ जल्द ही समझौता हो सकता है. उन्होंने बताया कि इस समय दोनों पक्षों के बीच बातचीत अच्छी चल रही है और अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्दी ही किसी समझौते की घोषणा की जा सकती है. ट्रंप ने यह भी कहा कि इस बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका एक मध्यस्थ के रूप में सकारात्मक रही है. उनके मुताबिक, पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने में मदद की है, जिससे समझौते की संभावना बढ़ी है. उन्होंने यह भी बताया कि अगर यह समझौता हो जाता है तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा. खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज &amp;nbsp;खुला रहेगा, जिससे तेल की सप्लाई बेहतर होगी. ट्रंप का कहना है कि इससे तेल की कीमतें भी कम हो सकती हैं और वैश्विक बाजार में स्थिरता आएगी.
ये भी पढ़ें: Iran-US war: हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर संयुक्त राष्ट्र में भारत का अल्टीमेटम- &#039;हमले बर्दाश्त नहीं....&#039; ]]></description>
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<title>&amp;apos;अमेरिकी नेता हवा में महल बना रहे...&amp;apos;, ईरान ने फिर ट्रंप को कर दिया ट्रोल, ऊंट वाली कहावत सुनाकर उड़ाई खिल्ली</title>
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<description><![CDATA[ ईरान की सरकारी मीडिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे का मजाक उड़ाया है कि अमेरिका ईरान के साथ एक समझौते के करीब था, जिससे अमेरिका को मुफ्त तेल और होर्मुज स्ट्रेट को आजादी मिल जाएगी.&amp;nbsp;
ईरान के सरकारी चैनल इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर ट्रंप के मीडिया से बातचीत का एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि अमेरिकी नेता हवा में महल बना रहे हैं. IRIB ने एक फारसी कहावत भी शेयर की, &quot;ऊंट कपास के बीज का सपना देखता है, कभी उसे निगल जाता है, कभी दाने-दाने करके खाता है.&quot;

Building castles in the air!Or in Persian we have a similar proverb:&#039;The camel dreams of cottonseed; sometimes gulping it down, sometimes eating it grain by grain!&#039;شتر در خواب بیند پنبه&amp;zwnj;دانهگهی لپ&amp;zwnj;لپ خورد گه دانه دانه pic.twitter.com/HA15h1aQVU
&amp;mdash; IRIB (Islamic Republic of Iran Broadcasting) (@iribnews_irib) April 16, 2026



ये कहावत अक्सर ऐसे व्यक्ति के लिए इस्तेमाल की जाती है, जिसकी इच्छाएं या सपने वास्तविकता से बहुत दूर हों और जिनके पूरे होने की संभावना न हो. अतीत में ईरान के अंतिम सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने भी ट्रंप का मजाक उड़ाने के लिए इसका इस्तेमाल किया था. खामेनेई 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमले में मारे गए.
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वॉशिंगटन और तेहरान शांति समझौते के बहुत करीब- ट्रंपअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान शांति समझौते के बहुत करीब हैं और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान समृद्ध यूरेनियम सौंपने पर सहमत हो गया है, जो बातचीत में एक अहम मुद्दा था. ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि तेहरान के साथ समझौता होने की बहुत अच्छी संभावना है.

ट्रंप ने यह भी विश्वास जताया कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है और संकेत दिया कि जल्द ही कोई सफलता मिल सकती है. उन्होंने कहा, &quot;मुझे लगता है कि इस समय हमारी बातचीत बहुत सफल चल रही है.&quot; उन्होंने आगे कहा, &amp;ldquo;अगर ऐसा हुआ तो इसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी और इससे हमें मुफ्त तेल मिलेगा. सब कुछ अच्छा हो जाएगा. मुझे लगता है कि तेल की कीमतें पहले से भी कम हो जाएंगी.&amp;rdquo;
आसिम मुनीर ने ईरानी स्पीकर से की मुलाकातट्रंप का ये बयान पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ की तेहरान में हुई मुलाकात के बाद आया है. यह मुलाकात अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराने के इस्लामाबाद के प्रयासों का हिस्सा थी.
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:59:01 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US war: हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर संयुक्त राष्ट्र में भारत का अल्टीमेटम&#45; &amp;apos;हमले बर्दाश्त नहीं....&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने ईरान और खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध को लेकर भारत का स्पष्ट रुख सामने रखा है. उन्होंने बताया कि 28 फरवरी 2026 को जब इस क्षेत्र में लड़ाई शुरू हुई, उसी समय से भारत ने गहरी चिंता जताई थी. भारत ने सभी देशों से अपील की थी कि वे संयम रखें, हालात को और बिगाड़ने से बचें और सबसे ज्यादा ध्यान आम लोगों की सुरक्षा पर दें.
उन्होंने कहा कि भारत लगातार यह कहता रहा है कि इस तरह के युद्ध को कम करने का सबसे अच्छा तरीका बातचीत और कूटनीति है. भारत ने सभी देशों से यह भी आग्रह किया कि वे आपसी मतभेदों को शांति से सुलझाएं और किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई से बचें. साथ ही हर देश की संप्रभुता और उसकी सीमा की इज्जत करना जरूरी है.
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कॉर्मशियल जहाजों को भी निशाना बनाया गया
हरीश ने इस बात पर दुख जताया कि इस युद्ध के दौरान कॉर्मशियल जहाजों को भी निशाना बनाया गया. उन्होंने बताया कि इन हमलों में जहाजों पर काम कर रहे भारतीय नाविकों की जान भी गई, जो बेहद दुखद है. भारत का मानना है कि व्यापारिक जहाजों पर हमला करना बिल्कुल गलत है, क्योंकि इससे निर्दोष लोगों की जान खतरे में पड़ती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी प्रभावित होता है. उन्होंने खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का जिक्र किया, जो दुनिया के लिए एक बहुत अहम समुद्री रास्ता है.
भारत ने साफ कहा कि इस रास्ते पर आवाजाही और व्यापार बिना किसी रुकावट के होना चाहिए. यहां किसी भी तरह की बाधा या खतरा अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. भारत ने सभी देशों से फिर से अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करें और यह सुनिश्चित करें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए जहाजों की आवाजाही और वैश्विक व्यापार सुरक्षित और सही ढंग से चलता रहे.
ये भी पढ़ें: PM Modi Trump Talk: होर्मुज को लेकर पीएम मोदी से फोन कॉल पर क्या हुई बात? ट्रंप ने कर दिया खुलासा, बोले- &#039;वो हमारे...&#039; ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:59:01 +0530</pubDate>
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<title>Explained: होर्मुज पर ईरान और ट्रंप के डबल ब्लॉकेड ने बढ़ाई मुसीबत, भारत के ऊपर कितना बड़ा असर?</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई रूट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब दोहरी नाकाबंदी के चलते संकट में है. पहले ईरान ने इसे बंद किया और अब डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने भी यहां जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने का फैसला किया है. इस कदम ने वैश्विक ऊर्जा संकट को और गहरा कर दिया है और भारत जैसे देशों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
क्या है पूरा मामला?ईरान ने पहले अमेरिका-इज़राइल हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था. इसके बाद अमेरिका ने भी जवाबी कदम उठाते हुए यहां से गुजरने वाले जहाजों पर नाकाबंदी लगा दी. हालांकि अमेरिकी सेना ने साफ किया कि सिर्फ ईरान के बंदरगाहों से जुड़े जहाजों पर असर पड़ेगा, लेकिन इसका असर वैश्विक व्यापार पर पड़ना तय है.
दुनिया में क्यों मचा हड़कंप?होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है. यहां रुकावट आने से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गिरावट देखने को मिली. इससे पहले ही ईरान की नाकाबंदी से ऊर्जा संकट पैदा हो चुका था, अब अमेरिकी कदम ने इसे और गंभीर बना दिया है.
भारत के लिए क्यों बड़ी चिंता?भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जो इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में होर्मुज में रुकावट से भारत की सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ रहा है.
ईरान के साथ रिश्तों से मिली राहतहालांकि भारत के ईरान के साथ पुराने अच्छे रिश्तों के कारण कुछ भारतीय जहाजों को इस संकट के बीच भी गुजरने की अनुमति मिली. भारत ने साफ किया कि उसने सुरक्षित रास्ते के लिए कोई शुल्क नहीं दिया, बल्कि रिश्तों की वजह से यह संभव हो पाया.

रूस से तेल खरीद पर फिर नजरइस संकट के बीच भारत ने रूस से तेल खरीद फिर शुरू करने की कोशिश की है, लेकिन इसके लिए अमेरिका से मिली छूट 11 अप्रैल को खत्म हो चुकी है. अब भारत इस छूट को बढ़ाने की मांग कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
चीन और अन्य देशों की भूमिकाचीन पहले से ही ईरान का बड़ा तेल खरीदार है और यह साफ नहीं है कि अमेरिका चीन से जुड़े जहाजों पर सख्ती करेगा या नहीं. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान जहाजों से सुरक्षित रास्ते के बदले शुल्क भी ले रहा है, जिससे तनाव और बढ़ गया है.
भारत के सामने बड़ी कूटनीतिक चुनौतीअगर अमेरिका से अनुमति नहीं मिलती और भारत रूस से तेल खरीद जारी रखता है, तो वॉशिंगटन के साथ रिश्तों पर असर पड़ सकता है. खासकर तब, जब दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है और पहले ही टैरिफ विवाद सामने आ चुका है.
आगे क्या?होर्मुज में यह दोहरी नाकाबंदी न सिर्फ वैश्विक अर्थव्यवस्था बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन गई है. आने वाले दिनों में भारत को संतुलन बनाकर कूटनीतिक और आर्थिक फैसले लेने होंगे. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 09:04:52 +0530</pubDate>
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<title>यूएस&#45;ईरान की बातचीत बिगड़ने के बाद चीन ने दिया फॉर्मूला, कहा&#45; इससे आएगी मिडिल ईस्ट में शांति</title>
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<description><![CDATA[ China Four Point Praposal: चीन ने मंगलवार को मिडिल ईस्ट में शांति के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है. इसमें विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तरफ से की टिप्पणी शेयर की है. शी ने आबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयन के साथ हुई बैठक में प्रस्ताव रखा था. यह घटनाक्रम पहले दौर की विफल बातचीत के बाद सामने आया है. चीनी मीडिया के मुताबिक, शी ने कहा कि चीन इस इलाके में शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में रचनात्मक भूमिका निभाना जारी रखेगा.&amp;nbsp;
शिन्हुआ न्यूज एजेंसी की मानें तो शी जिनपिंग ने शांति को बढ़ावा देने और बातचीत की अपील करने के चीन के सैद्धांतिक रुख पर जोर दिया. वह इस रचनात्मक भूमिका को निभाना जारी रखेगा. एक्स पर पोस्ट करते हुए माओ ने कहा कि यह प्रस्ताव शांति सह अस्तित्व, संप्रभुता, इंटरनेशनल कानून जैसे सिद्धांतो पर केंद्रित है. शी जिनपिंग ने कहा कि मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता की रक्षा और उसे बढ़ावा देने के चार प्रस्ताव रखे. पहला बिंदु खाड़ी देशों के बीच शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के महत्व पर जोर देता है.

चीन ने अपने चार सूत्रीय प्रस्ताव में किन बातों का जिक्र किया है&amp;nbsp;

चीन ने कहा कि मिडिल ईस्ट में ऐसे करीबी पड़ोसी है, जो एक दूसरे से अलग नहीं हो सकते. खाड़ी देशों को उनके संबंधों को बेहतर बनाने में सहायता देना, मध्यपूर्व और खाड़ी इलाके के लिए एक साझा, व्यापाक, सहयोगात्मक और सुरक्षा ढांचा बनाने की दिशा में काम करने के लिए बेहद जरूरी है. इसके अलावा चीन की तरफ से संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान का आह्वान करता है. संप्रभुता सभी देशों के लिए विशेष रूप से विकासशील देशों के अस्तित्व और समृद्धि के लिए आधार का काम करती है. इसका उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए.&amp;nbsp;
इसके अलावा चीन की तरफ से कहा गया है कि इंटरनेशनल कानून के सिद्धांत के प्रति प्रतिबद्ध रहें. इंटरनेशनल प्रणाली, इंटरनेशनल कानून, इंटरनेशनल व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों द्वारा समर्थित इंटरनेशनल रिश्तों को कंट्रोल करने वाले बुनियादी मानदंडों को द्दढ़ता से बनाए रखना महत्वपूर्ण है.&amp;nbsp;
चीन की तरफ से कहा गया कि संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का पूरी गंभीरता के साथ सम्मान किया जाना चाहिए. उनके कर्मचारियों, सुविधाओं और संसाधनों की सुरक्षा का पूरी मुस्तैदी से सुनिश्चित किया जाना चाहिए. सुरक्षा विकास के लिए एक अनिवार्य शर्त है. विकास सुरक्षा की रक्षा का काम करता है. सभी पक्षों को खाड़ी देशों के विकास के लिए अनुकूल महौल बनाने और उसमें सकारात्मक ऊर्जा लाने की दिशा में काम करना चाहिए. इसके अलावा कहा है कि चीन खाड़ी देशों के साथ आधुनिकीकरण से मिलने वाले अवसरों को साझा करने और क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने को तत्पर है.&amp;nbsp;

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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 09:04:51 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान की वो ‘डील’, जिससे न चाहते हुए भी ईरान वॉर में इस्लामाबाद कूदने को हो जाएगा  मजबूर</title>
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<description><![CDATA[ Iran US War: सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के डिफेंस पैक्ट से जुड़ी बातें अब उसे ईरान युद्ध में खींच सकती है. जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर पाकिस्तान कोशिशें कर रहा है, तो वहीं, अब डिफेंस पैक्ट एक बड़ी मुसीबत के तौर पर उसके सामने है.&amp;nbsp;
पाकिस्तान ने सऊदी अरब में स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट के तहत फाइटर जेट तैनात किए हैं. शनिवार को जिस वक्त पाकिस्तान के फाइटर जेट किंग अब्दुल अजीज एयरबेस पर उतर रहे थे, उसी दिन पाकिस्तान ईरान अमेरिका के बीच शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा था. &amp;nbsp;
ऐसे में बातचीत टूट गई. अब खबर है कि दोनों पक्ष एक बार फिर 21 अप्रैल को 2 हफ्ते के सीजफायर खत्म होने से पहले इस्लामाबाद लौटने पर विचार कर रहे हैं. अगर बातचीत बेनतीजा रही, तो पाकिस्तान को रियाद के साथ अपने डिफेंस फैक्ट को मानने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.&amp;nbsp;
इस पैक्ट को कभी भी सार्वजनिक नहीं किया गया है. न ही पाकिस्तान की संसद ने उसका रिव्यू किया है. इधर, ड्रॉप साइट न्यूज ने बताया कि नए पैक्ट के तहत इस्लामाबाद को साफ तौर पर सऊदी अरब की रक्षा के लिए मिलिट्री फोर्स भेजने की जिम्मेदारी दी गई है.&amp;nbsp;
क्या है पैक्ट में शामिल, और क्यों पाकिस्तान को सऊदी की बात माननी पड़ेगी?&amp;nbsp;
ड्रॉप साइट न्यूज के मुताबिक, इस पैक्ट का लेटेस्ट वर्जन 2025 में साइन किया गया. इसमें पाकिस्तान को अपनी संप्रभुता या सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे के खिलाफ सऊदी आर्म्ड फोर्सेस को सपोर्ट करने, सैन्य संपत्ति को तैनात करने और ट्रेनिंग से आगे बढ़कर ऑपरेशनल डिफेंस सपोर्ट में सहयोग बढ़ाने के लिए मजबूर करता है. इसके अलावा पाकिस्तान आग्रह के बाद सऊद अरब में अपने सेना भेजने के लिए मजबूर है.&amp;nbsp;
दोनों देशों के बीच यह साझेदारी नई नहीं है. पिछले कुछ सालों में यह काफी बदल गया था. दस्तावेजों से पता चला है कि दोनों देशों के बीच साल 1982 में पहला कॉन्फिडेंशियल डिफेंस एग्रीमेंट साइन किया था. इस सैन्य कोऑपरेशन एग्रीमेंट को साल 2005 में ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक्स रिश्तों को शामिल करने के लिए बढ़ाया गया था.&amp;nbsp;

साल 2021 और 2024 के बीच सीधे सैन्य डिफेंस ऑब्लिगेशन में बदलाव किए. इसका नतीजा स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट के रूप में सामने आया. इसपर 2025 में साइन किए गए. ड्रॉप साइट के मुताबिक, अगस्त 2021 में एग्रीमेंट में नए बदलाव से जुड़ी समरी उस समय के पीएम इमरान खान को भेजी गई. बदलाव में ऐसे क्लॉज हैं, जो असल में इस्लमाबाद को रिक्वेस्ट के बाद रियाद की फिजिकल डिफेंस में शामिल होने के लिए इस्लामाबाद को बाध्य करते हैं.&amp;nbsp;
इमरान खान इस पैक्ट से क्यों डरे हुए थे?
रिपोर्ट में कहा गया कि यह प्रपोजल इमरान खान की डेस्क पर एक साल तक रखा रहा. सऊदी सरकार के कहने पर जिस खतरे से निपटना था, वह विदेशी था या घरेलू. पुराने अधिकारियों के हवाले ड्रॉप साइट ने बताया कि खान एक ऐसे एग्रीमेंट पर साइन करने को डरे हुए थे, जिससे पाकिस्तानी सेना को किसी विदेशी युद्ध में हिस्सा लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता था.&amp;nbsp;
खान की सत्ता हटने के बाद फरवरी 2024 में सैन्य सपोर्ट करने वाली केयरटेकर सरकार ने आखिरकार बदलावों की समरी पर साइन किए. नए अमेंडमेंट के बाद सेना के अंदर इसकी भाषा पर कथित तौर पर गरमागरम बहस हुई. एक वजह और है, जिस वजह से पाकिस्तान पर प्रेशर बना हुआ है. सऊदी अरब ने पाकिस्तान की अस्थिर अर्थव्यवस्था को फाइनेंशियल मदद दी है. किंगडम के पास अभी भी स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान में 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा डिपॉजिट है. जिन्हें समय पर आगे बढ़ाया जाता है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 09:04:51 +0530</pubDate>
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<title>रोहिंग्या&#45;बांग्लादेशियों से भरी नाव अंडमान सागर में डूबी, 250 लोग लापता</title>
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<description><![CDATA[ रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों को ले जा रही एक नाव के अंडमान सागर में पलट गई. इस हादसे में करीब नौ लोगों को बचा लिया गया है, जबकि 250 लोग लापता हैं. मलेशिया जा रहे इस नाव में कई लोग अवैध रूप से सवार थे. इस हादसे के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन (IOM) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों की सहायता के लिए फंडिंग बढ़ाने का आग्रह किया.
तेज हवाओं के कारण डूबी नाव: UNHCR
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHCR) ने कहा, &#039;दक्षिणी बांग्लादेश के टेक्नाफ से रवाना होकर मलेशिया जा रही यह नाव कथित तौर पर तेज हवाओं और अधिक भीड़ के कारण डूब गई.&#039; बांग्लादेशी कोस्ट गार्ड ने बताया कि बांग्लादेश का झंडा लगा जहाज MT मेघना प्राइड चटगांव से इंडोनेशिया जा रहा था.

UNHCR ने बताया क्यों होती है ऐसी घटनाएं?
UNHCR के अनुसार गलत सूचना और मानव तस्करी के नेटवर्क के कारण कई लोग खतरनाक समुद्री यात्रा करने पर मजबूर हो जाते हैं. उन्होने बताया कि अक्सर विदेश में अधिक वेतन और बेहतर सुविधाओं के झूठे वादे कर इन लोगों को यहां से अवैध तरीके से समंदर के रास्ते दूसरी जगह ले जाया जाता है. उन्होंने कहा कि अंडमान सागर में ऐसी यात्राओं के दौरान कई बार लोगों की जान जा चुकी है.
पिछले हफ्ते 9 लोगों को बचाया गया था
द डेली स्टार के अनुसार, बांग्लादेश के ध्वज वाले एक जहाज ने 9 अप्रैल को अंडमान द्वीप समूह के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से 9 लोगों को बचाया गया था. रोहिंग्या समुदाय के एक पीड़ित रफीकुल इस्लाम ने बताया कि उन्हें नौकरी का लालच देकर टेक्नाफ में कैद कर लिया गया था, फिर समंदर के किनारे ले जाकर जबरन मछली पकड़ने वाली नाव पर चढ़ा दिया गया. उन्होंने दावा किया कि उस नाव में महिलाओं और बच्चों समेत करीब 280 लोग सवार थे, जिनमें से कई को स्टोर रूम में ठूंस दिया गया था.
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 09:04:50 +0530</pubDate>
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<title>ईरान के साथ पाकिस्तान में ही होगी यूएस की दूसरे दौर की वार्ता, अगले दो दिनों में बातचीत संभव</title>
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<description><![CDATA[ US Iran Peace Talks: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता फिर से Pakistan में ही होने की संभावना जताई गई है. अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि अगले दो दिनों के भीतर पाकिस्तान में ही ईरान युद्ध को लेकर नई बातचीत हो सकती है.
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए वहां के सैन्य नेतृत्व, खासकर Asim Munir की तारीफ की. उन्होंने कहा कि ऐसी वार्ता किसी ऐसे देश में होनी चाहिए जो सीधे तौर पर इस मुद्दे से जुड़ा हो, न कि किसी ऐसे देश में जिसका इस संघर्ष से कोई संबंध नहीं है.
इस घटनाक्रम से साफ है कि पाकिस्तान एक बार फिर इस पूरे संकट में मध्यस्थ की अहम भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है और खुद को क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया के केंद्र में स्थापित करना चाहता है.
द पोस्ट के रिपोर्टर को ट्रंप ने दोबारा कॉल किया था
रिपोर्ट्स की मानें तो द पोस्ट के एक रिपोर्टर से अमेरिका और ईरान के बीच भविष्य की बातचीत करने की संभावनाओं के बारे में बात करने से कुछ देर बाद ट्रंप ने एक अपडेट देने के लिए दोबारा से कॉल किया. इसमें उन्होंने कहा कि आपको वहीं रहना चाहिए. क्योंकि अगले दो दिन में कुछ भी हो सकताहै. हमारा झुकाव वहीं जाने की तरफ ज्यादा है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि संभावना ज्यादा है. क्योंकि वहां फील्ड मार्शल बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं.&amp;nbsp;

अमेरिका के राष्ट्रपति लगातार फील्ड मार्शल मुनीर की बात कर रहे थे. ट्रंप का जुड़ाव मुनीर से पाकिस्तान के खिलाफ चलाए भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ था. यह भारत की पहलगाम हमले के जवाब में बड़ी कार्रवाई थी. उस वक्त ट्रंप ने कहा था कि यह युद्ध उनकी वजह से रुका, हालाकिं, भारत उनके इस दावे को नकारता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: US Iran War: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच PM मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप का फोन, होर्मुज खोलने पर चर्चा, 40 मिनट तक हुई बात ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 09:04:50 +0530</pubDate>
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<title>यूएई ने मांगा अपना पैसा तो औकात पर आया पाकिस्तान, सऊदी और चीन के सामने शहबाज ने फैलाए हाथ</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की तरफ से कर्ज दिया गया पैसा वापस मांगने के बाद पाकिस्तान दूसरे देशों के आगे फिर से हाथ फैलाने लगा है. पाकिस्तान को यूएई को कुल 3.5 अरब डॉलर का कर्ज इसी महीने चुकाने हैं. पाकिस्तान को ये झटका ऐसे समय में लगा है जब पीएम शहबाज शरीफ अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनकर खद ही अपनी पीठ थपथपा रहे हैं. PAK फिर से यूएस-ईरान के बीच वार्ता का दावा भी कर रहा है और पैसे के लिए दर-दर भटक भी रहा है.
सऊदी और चीन के सामने शहबाज ने फैलाए हाथ
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान यूएई को कर्ज चुकाने की तैयारियों के बीच चीन और सऊदी अरब से कर्ज लेने को लेकर बातचीत कर रहा है. इस समय पाकिस्तान अगर यूएई को पैसा लौटाता है तो उसका विदेशी मुद्रा भंडार गिर जाएगा. 27 मार्च तक पाकिस्तान के पास करीब 16 अरब डॉलर का रिजर्व है, जो सिर्फ तीन महीने के आयात के लिए पर्याप्त है. ईरान पर हुए अमेरिकी हमले के बाद तेहरान ने यूएई-सऊदी अरब सहित पड़ोसी देशों पर मिसाइल दागे. इसी बीच यूएई ने पाकिस्तान से अपना पैसा वापस मांग लिया है.
पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने क्या कहा?
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने बताया, &#039;फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले से पहले पाकिस्तान के पास फॉरेन एक्सचेंज काफ मजबूत था. हम इस स्थिति में थे कि कर्ज वापस कर सकें.&#039; PAK वित्त मंत्री अपने अधिकारियों के साथ इस समय आईएमएफ और विश्व बैंक की बैठक में हिस्सा लेने के लिए वाशिंगटन में हैं. औरंगजेब ने कहा कि पाकिस्तान चार साल के अंतराल के बाद पहली बार यूरो बॉन्ड जारी करके इस साल ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में वापसी करने की तैयारी कर रहा है.
IMF से भी कर्ज लेने की फिराक में है पाकिस्तान
पाकिस्तान को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का कार्यकारी बोर्ड जल्द ही बैठक करेगा और 7 अरब डॉलर के राहत पैकेज कार्यक्रम की किश्त को मंजूरी देगा. मुहम्मद औरंगजेब ने कहा कि फिलहाल पाकिस्तान तेल संकट की वजह से अपने मुख्य कार्यक्रम में तेजी लाने या उसे बढ़ाने का अनुरोध करने पर विचार नहीं कर रहा है. उन्होंने कहा, &#039;अगर हमारी आर्थिक स्थिति कमजोर होती है तो हम आईएमएफ से बात करेंगे.&#039;
ये भी पढ़ें : उधर UAE से निकले जयशंकर, इधर जिनपिंग ने अबू धाबी के प्रिंस को बुलाया लिया चीन, रख दिया ये प्रस्ताव ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 09:04:50 +0530</pubDate>
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<title>ईरान वॉर के बीच अचानक भारत की तारीफों के पुल बांधने लगा पाकिस्तान, क्यों अब याद आया ऑपरेशन सिंदूर</title>
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<description><![CDATA[ रूस में पाकिस्तान के राजदूत ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद के परमाणु सुरक्षा रिकॉर्ड की सराहना करते हुए दावा किया कि दोनों देशों ने एक-दूसरे की परमाणु सुविधाओं पर हमला न करने की पारस्परिक गारंटी दी है. न्यूज पोर्टल आरटीवीआई डॉट कॉम को दिए इंटरव्यू में मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष के मद्देनजर ऐसी गारंटी का विशेष महत्व है.
&#039;भारत और पाकिस्तान का अच्छा इतिहास&#039;
पाकिस्तानी राजदूत फैसल नियाज तिरमिजी ने कहा, &amp;lsquo;भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी गारंटी का एक बहुत अच्छा इतिहास रहा है कि हम एक-दूसरे की परमाणु सुविधाओं पर हमला नहीं करेंगे. हमारी परमाणु सुविधाएं पूरी तरह से सुरक्षित हैं और निश्चित रूप से हम रूस के साथ सहयोग कर बहुत प्रसन्न होंगे, लेकिन इस (पश्चिम एशिया) संघर्ष के संबंध में हमने ठीक इसी बात पर चर्चा की थी.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
न्यूज पोर्टल ने पाकिस्तान के राजदूत का साक्षात्कार अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई पहली सीधी बातचीत से ठीक पहले 10 अप्रैल को रिकॉर्ड किया था. तिरमिजी ने कहा, &amp;lsquo;पश्चिम एशिया में हुए हालिया संघर्ष में, हमने दुर्भाग्यवश देखा कि इजरायल ने बुशहर पर हमला किया. अगर बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर सीधा हमला होता तो इसके परिणाम न केवल ईरान, बल्कि फारस की खाड़ी और पाकिस्तान के लिए भी गंभीर होते. मुझे उम्मीद है कि इजरायल इससे सबक लेगा. इस पर कभी हमला नहीं किया जाना चाहिए.&amp;rsquo;
पाकिस्तान को याद आया ऑपरेशन सिंदूर
पाकिस्तानी राजदूत ने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान जंग को रोकने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, &amp;lsquo;&amp;lsquo;हमने भारतीयों से कहा कि हम बातचीत करना चाहते हैं.और हां राष्ट्रपति ट्रंप ने तनाव कम करने में भूमिका निभाई.&amp;rsquo; भारत लगातार यह कहता रहा है कि पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष रोकने पर सहमति दोनों सेनाओं के डीजीएमओ (सैन्य अभियान महानिदेशकों) के बीच सीधी बातचीत के बाद बनी थी.
ब्रिक्स में शामिल होना चाहता पाकिस्तान
फैसल नियाज तिरमिजी ने पाकिस्तान और भारत के संबंधों को बेहतर बनाने में रूस द्वारा मध्यस्थ की भूमिका निभाने के सवाल पर सकारात्मक रुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;खैर, रूस की हमेशा से इसमें भूमिका रही है क्योंकि भारत के साथ उसके बहुत करीबी संबंध हैं इसीलिए हम भारतीय पक्ष को बताते हैं कि हम पहले से ही एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) में साझेदार हैं और हम ब्रिक्स में शामिल होना चाहते हैं. इसलिए, भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को बेहतर बनाने में रूस हमेशा एक निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है.&amp;rsquo; ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 09:04:49 +0530</pubDate>
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<title>क्या थमेगी जंग या और भड़केगा संकट? वॉशिंगटन में इजरायल&#45;लेबनान के बीच वार्ता जारी, मार्को रुबियो भी मौजूद</title>
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<description><![CDATA[ Israel Lebanon Talks: दशकों बाद इजरायल और लेबनान के बीच सीधे तौर पर बातचीत शुरू हो गई है. वॉशिंगटन डीसी में अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट में चल रही इस अहम बैठक को वैश्विक स्तर पर बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, इसी बीच दक्षिणी लेबनान में इजरायल के हमलों ने तनाव और बढ़ा दिया है, जिससे संघर्षविराम पर खतरा मंडराने लगा है.
इजरायल और लेबनान के राजदूतों के बीच वॉशिंगटन डीसी में बैठक शुरू हो गई है. यह मीटिंग अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट में हो रही है. लेबनान की ओर से राजदूत निदा अमावी और इजरायल की ओर से राजदूत येचिल लिटर इस वार्ता में शामिल हैं. इस अहम बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद हैं.
दशकों बाद आमने-सामने बातचीत
न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार,&amp;nbsp; इजरायल और लेबनान के अधिकारी मंगलवार को वॉशिंगटन में दुर्लभ प्रत्यक्ष वार्ता कर रहे हैं. दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं इसलिए यह बैठक बेहद असामान्य मानी जा रही है. इस वार्ता में अमेरिका में तैनात दोनों देशों के राजदूत शामिल हैं और स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार अमेरिकी विदेश मंत्री भी इसमें भाग ले रहे हैं. इसी बीच इजरायल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने व्यापक सैन्य अभियान के तहत दक्षिणी लेबनान में नए हमले शुरू कर दिए हैं. इस बढ़ते संघर्ष ने मौजूदा संघर्षविराम को खतरे में डाल दिया है.
&#039;यह प्रक्रिया है, कोई एक घटना नहीं&#039;
बैठक से पहले मार्को रुबियो ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह बातचीत भविष्य की वार्ताओं के लिए एक ढांचा तैयार करेगी. उन्होंने कहा, &amp;ldquo;यह एक प्रक्रिया है, कोई एक घटना नहीं है. इस मुद्दे की जटिलताएं अगले छह घंटों में हल नहीं होंगी.&amp;rdquo;
लेबनान के भीतर भी बढ़ा विरोध
वॉशिंगटन में हो रही यह वार्ता लेबनान के भीतर भी विवाद का कारण बन गई है. देश में इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद सामने आ रहे हैं. हिजबुल्लाहने इन वार्ताओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है. हाल के दिनों में उसके समर्थकों ने बेरूत की सड़कों पर उतरकर इस बातचीत के खिलाफ प्रदर्शन भी किया है. इस स्थिति ने देश में अस्थिरता की आशंका को और बढ़ा दिया है.
बैठक से पहले जब यह सवाल पूछा गया कि क्या इजरायल हिजबुल्लाहके साथ संघर्षविराम पर सहमत हो सकता है, तो रुबियो ने कहा, &amp;ldquo;यह सिर्फ उसी तक सीमित नहीं है. यह इस क्षेत्र में पिछले 20-30 साल से हिजबुल्लाहके प्रभाव को खत्म करने से जुड़ा मामला है.&amp;rdquo; लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों में 2,124 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6,921 लोग घायल हुए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 09:04:49 +0530</pubDate>
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<title>इजरायल की वजह से US के सहयोगी देश भी हो रहे उससे दूर, अब दक्षिण कोरिया पर क्यों भड़का यरूशलेम?</title>
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<description><![CDATA[ Middle East Conflict: इजरायल के कारण अमेरिका के सहयोगी देश &amp;nbsp;भी उससे दूर हो रहे हैं. इसमें सबसे नया नाम साउथ कोरिया का है. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने पुराने वीडियो शेयर किए हैं. इससे इजरायल भड़क गया है. कोरिया की राष्ट्रपति भी अब पीछे कदम लेने के मूड में नहीं है.&amp;nbsp; साउथ कोरिया हमेशा से फिलिस्तीन को मान्यता नहीं देने वाले बयान से बचता रहा है. साथ ही वोटिंग से दूरी बनाए रखी है.
ऐसे में होर्मुज पर हुई नाकेबंदी कोरिया को चुभ रही है. कोरिया को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है. दक्षिण कोरिया दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. अपना ज्यादातर तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आयात करता है. फिलहाल कम से कम 26 कोरियाई टैंकर वहां फंसे हुए हैं. ऐसे में इजराइल-ईरान युद्ध के कारण होर्मुज बंद होने का खतरा है. यह कोरिया की अर्थव्यवस्था के लिए आपातकाल जैसा है.&amp;nbsp;
इसलिए ली सीजफायर और मानवाधिकारों की अपील कर रहे हैं. ट्रंप को संदेश भी दे रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहयोगी देशों कोरिया, यूरोप, जापान को फ्रीराइडिंग कह रहे हैं और युद्ध में सपोर्ट मांग रहे हैं. ली का यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका को संकेत है कि कोरिया अनचाहे युद्ध में नहीं फंसना चाहता. वे पहले मानवाधिकार वकील थे, इसलिए अन्याय पर बोलने की आदत है.
आखिर क्यों द कोरिया और इजरायल के बीच तनाव गहरा गया है&amp;nbsp;
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग &amp;nbsp;ने सोशल मीडिया पर 2024 का एक पुराना वीडियो शेयर किया. इसमें इजरायली सैनिकों को कब्जे वाले वेस्ट बैंक में एक इमारत की छत से एक शव को नीचे फेंकते दिखाया गया. इस पोस्ट के कारण इजरायल और दक्षिण कोरिया के बीच 60 साल पुराने राजनयिक संबंधों में तल्खी आ गई है और सार्वजनिक तौर पर विवाद छिड़ गया.
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने लिखा कि हमें जांच करनी चाहिए कि यह सच है या नहीं, और अगर है तो क्या कार्रवाई की गई. उन्होंने कहा कि युद्धकालीन हत्याएं, होलोकॉस्ट और जापानी उपनिवेश काल में कोरियाई महिलाओं के यौन दासता के बीच कोई फर्क नहीं है. बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सितंबर 2024 की वास्तविक घटना है. इसकी अमेरिका ने भी निंदा की थी. उन्होंने जोर दिया कि किसी भी परिस्थिति में इंटरनेशनल कानून का पालन होना चाहिए.
विवाद शुक्रवार को शुरू हुआ. ली ने एक क्लिप पर टिप्पणी की थी. उस क्लिप में इजरायल के सैनिक एक छत से किसी शव को नीचे धकेल रहे हैं. यह फ़ुटेज फिलिस्तीन कार्यकर्ता के अकाउंट से पोस्ट किया गया था. इसके साथ एक कैप्शन भी था. इसमें झूठा दावा किया गया था. दावा था कि यह किसी बच्चे को यातना दिए जाने और उसे एक इमारत से नीचे फेंके जाने का लाइव फ़ुटेज है.
यह भी पढ़ें: ईरान के साथ पाकिस्तान में ही होगी यूएस की दूसरे दौर की वार्ता, अगले दो दिनों में बातचीत संभव ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 09:04:48 +0530</pubDate>
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<title>US Iran War: 10000+ सेना, 100 से ज्यादा विमान और दर्जनों युद्धपोत... होर्मुज की नाकेबंदी पर US ने झोंकी ताकत</title>
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<description><![CDATA[ US Iran War:&amp;nbsp;अमेरिका ने तेहरान के साथ शांति वार्ता फेल होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना के जरिए नाकेबंदी कर दी है. अमेरिका ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी के 24 घंटे के दौरान कोई भी जहाज अमेरिकी नाकेबंदी को पार नहीं कर सका और 6 व्यापारिक जहाजों ईरानी बंदरगाह की तरफ वापस लौट गए.
सेंटकॉम ने अमेरिकी नाकेबंदी की साझा की जानकारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने मंगलवार (14 अप्रैल, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. पोस्ट में सेंटकाम ने होर्मुज स्ट्रेट में की गई अमेरिकी नाकेबंदी में तैनात अमेरिकी सेना की संख्या, युद्धपोत और विमानों के बारे में जानकारी साझा की.

More than 10,000 U.S. Sailors, Marines, and Airmen along with over a dozen warships and dozens of aircraft are executing the mission to blockade ships entering and departing Iranian ports. During the first 24 hours, no ships made it past the U.S. blockade and 6 merchant vessels&amp;hellip; pic.twitter.com/dpWAAknzQp
&amp;mdash; U.S. Central Command (@CENTCOM) April 14, 2026



सेंटकॉम ने कहा, &amp;lsquo;अमेरिका के 10 हजार से ज्यादा नौसैनिक, मरीन और वायुसेना के जवान, एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत और दर्जनों विमान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के बंदरगाहों में प्रवेश करने और वहां से निकलने वाले जहाजों की नाकेबंदी के मिशन को अंजाम दे रहे हैं.&amp;rsquo; सेंटकॉम ने कहा, &amp;lsquo;पहले 24 घंटों के दौरान, कोई भी जहाज अमेरिकी नाकेबंदी को पार नहीं कर सका और 6 व्यापारिक जहाजों ने अमेरिकी बलों के निर्देश का पालन करते हुए ओमान की खाड़ी में स्थित किसी ईरानी बंदरगाह की ओर वापस लौट गए.&amp;rsquo;
सभी देशों के जहाजों पर निष्पक्ष रूप से लागू की जा रही नाकेबंदीः सेंटकॉम
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने आगे कहा, &amp;lsquo;यह नाकेबंदी सभी देशों के जहाजों पर निष्पक्ष रूप से लागू की जा रही है, जो ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं, जिसमें अरब सागर और ओमान की खाड़ी में स्थित सभी ईरानी बंदरगाह शामिल हैं.&amp;rsquo; सेंटकॉम ने इस बात पर जोर देते हुए कहा, &amp;lsquo;अमेरिकी सेना गैर-ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट में आवागमन की आजादी बनाए रखने में भी सहयोग कर रहे हैं.&amp;rsquo;

नाकेबंदी में अमेरिका की ओर से तैनात बल
अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी के मिशन के सफल तरीके से अंजाम देने के लिए 10 हजार से ज्यादा सैन्य कर्मी, 100 से ज्यादा लड़ाकू और निगरानी विमान के साथ एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत को तैनात किया है, जिसमें एयरक्राफ्ट कैरियर, एम्फीबियस असॉल्ड शिप, एम्फीबियस ट्रांसपोर्स डॉक शिप, डॉक लैंडिंग शिप, गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रोयर, लिटोरल कॉम्बैट शिप, लैंड एंड सी बेस्ड फाइटर एयरक्राफ्ट, मानव रहित विमान (UAV), रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट के साथ खुफिया, निगरानी और टोही विमान शामिल है.
यह भी पढ़ेंः यूएई ने मांगा अपना पैसा तो औकात पर आया पाकिस्तान, सऊदी और चीन के सामने शहबाज ने फैलाए हाथ ]]></description>
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<title>इस्लामाबाद में हाई अलर्ट: अमेरिका&#45;ईरान वार्ता से पहले पुलिस और काउंटर टेररिज्म विभाग ने ली 323 घरों की तलाशी, 26 संदिग्ध हिरासत में</title>
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<description><![CDATA[ इस्लामाबाद में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल की बैठक से पहले इस्लामाबाद में आतंकी हमले और अमेरिका विरोधी प्रदर्शन को रोकने के लिए इस्लामाबाद पुलिस और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने कल रात से आज सुबह तक इस्लामाबाद के 323 घरों की तलाशी ली. साथ ही 26 लोगों को शक की वजह से हिरासत में ले लिया गया. इसके अलावा कल रात से लेकर आज सुबह तक इस्लामाबाद पुलिस 901 लोगों से पूछताछ और तलाशी ले चुकी है.
26 लोग गिरफ्तारसूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को शक था कि कहीं जिस समय अमेरिकी और ईरानी डेलीगेशन इस्लामाबाद में वार्ता के लिए मौजूद होगा उसी समय या तो तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (TTP) या फिर ज़नैबुइयोन ब्रिगेड (लश्कर ए ज़ैनब) किसी बड़े हमले को अंजाम दे सकता है. इसी कड़ी में इस्लामाबाद पुलिस ने कल देर रात इस्लामाबाद के पश्तून और बलूच बाहुल्य इलाके में तलाशी अभियान चलाया और 26 लोगों को गिरफ्तार कर लिया.
285 ग्राम ड्रग्स बरामदइसी तरह इस्लामाबाद पुलिस ने सड़क पर भी काउंटर टेररिज्म विभाग (CTD) के साथ मिलकर नाका लगाकर 180 मोटर साइकिल सवार और 73 कार सवार लोगों की गाड़ियों की तलाशी ली और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया जिसके पास 285 ग्राम ड्रग्स मिला था. इस्लामाबाद पुलिस ने फ़िलहाल अभी सार्वजनिक नहीं किया है कि जिन 26 लोगों को उसने शक के आधार पर हिरासत में लिया है उनका आख़िर क्या दोष था लेकिन सूत्रों के मुताबिक ये गिरफ्तारियां इस्लामाबाद में किसी भी तरह के आतंकी हमले और अमेरिका के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिये की गई हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:56:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>इमैनुअल मैक्रों के कॉम्पटीटर से इटली की राजकुमारी को हुआ प्यार, साथ छुट्टियां मनाते तस्वीरें आईं सामने</title>
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<description><![CDATA[ इटली की राजकुमारी मारिया कैरोलिना की लव स्टोरी इन दिनों चर्चा में है. उनका नाम फ्रांस के राजनेता जॉर्डन बार्डेला के साथ जोड़ा जा रहा है. सेलिब्रिटी मैग्जीन पैरिस मैच में दोनों की नजदीकियों की खबर छपी है. इतना ही नहीं साथ हॉलीडे मनाते हुए दोनों की तस्वीरें भी छापी गई हैं. 30 साल के जॉर्डन बार्डेला रेसेंबलमेंट नेशनल (RN) पार्टी के प्रमुख हैं और उन्हें फ्रांस के अगले राष्ट्रपति का मजबूत उम्मीदवार भी माना जा रहा है.
पैरिस मैच ने इस हफ्ते की मैग्जीन के फ्रंट पेज पर मारिया कौरोलिना और जॉर्डन बार्डेला की कोर्सिका में साथ छुट्टियां मनाते हुए तस्वीरें छापी हैं और इसका टाइटल है- वह सुखद पल जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी. दोनों की अफेयर की खबरें काफी पहले से ही सुर्खियों में थीं, लेकिन अब ये तस्वीरें सामने आने के बाद उनके रिलेशनशिप की खबरें पुख्ता हो गई हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों ने रिलेशनशिप को ऑफिशियल करने का फैसला कर लिया है. उधर, फ्रांस के कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि जॉर्डन को अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर क्लेरिटी रखनी चाहिए.
जनवरी में भी दोनों को पैरिस में साथ देखा गया था और वहीं से दोनों के लिंकअप की खबरों को लेकर चर्चा शुरू हुई थी. दोनों यहां न्यूजपेपर Le Figaro की 200वीं शताब्दी पर आयोजित इवेंट में शामिल हुए थे. हालांकि, दोनों ने कभी इस मामले पर बात नहीं की है, जॉर्डन बार्डेला से एक इंटरव्यू में भी जब इसे लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने सवाल टाल दिया और कहा कि अपनी पर्सनल पर बात नहीं करना चाहते.
अगले साल फ्रांस में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में जॉर्डन बार्डेला की फ्रेंच प्रेजिडेंट के लिए उम्मीदवार होने की पूरी संभावना है. अगर जुलाई में कोर्ट में उनकी पार्टी की नेता मरीन ले पेन उन पर लगे यूरोपीय यूनियन संसदीय फंड का गलत इस्तेमाल के आरोपों में दोषी पाई जाती हैं, तो जॉर्डन ही अपनी पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होंगे. सर्वे के अनुसार फ्रांस का अगला राष्ट्रपति उनकी पार्टी से हो सकता है क्योंकि दोनों ही उम्मीदवारों के जीतने की प्रबल संभावना है.
मारिया कैरोलिना 22 साल की हैं और वह कास्त्रो के राजा प्रिंस कार्लो की बेटी हैं. वह 19वीं शताब्दी में सिसिली और दक्षिण इटली पर शासन करने वाले बोबोर्न-टू सिसिली शाही घराने के नेतृत्व के लिए दावेदार भी हैं. इटली के एकीकरण के वक्त उनके उत्तराधिकारियों ने अपना सिंहासन खो दिया था.
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:56:44 +0530</pubDate>
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<title>US Iran Peace Talk: ईरान का ट्रंप को अल्टीमेटम! सिर्फ इन 10 पॉइंट्स पर अमेरिका से होगी बात, कहा&#45; &amp;apos;हथियार उठाने का नहीं देंगे मौका&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ US Iran Peace Talks in Pakistan: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता होगी. इससे ठीक पहले ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दे डाली है. ईरान ने कहा है कि वे दुश्मनों को दोबारा हथियार उठाने का मौका नहीं देंगे. उसने कहा है कि दस्तावेजों पर तब तक हस्ताक्षर नहीं होंगे, जब तक सीजफायर की गारंटी न मिल जाए. अहम बात यह भी है कि ईरान के उपविदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने बताया है कि बातचीत सिर्फ 10 पॉइंट्स पर ही आधारित होगी.
&#039;प्रेस टीवी&#039; की रिपोर्ट के मुताबिक तख्त-रवांची ने कहा, &#039;ईरान ऐसा सीजफायर नहीं चाहता जो दुश्मन को फिर से हथियार जुटाने और फिर से हमला करने का मौका दे दे. ईरान इस बात पर जोर देता है कि किसी भी समझौते के बाद दोबारा अटैक न हो और इसकी गारंटी मिलनी चाहिए. ईरान के दस पॉइंट्स वाले प्रस्ताव को वार्ता के आधार के रूप में स्वीकार कर लिया गया है. ईरान कूटनीति और बातचीत का समर्थन करता है, लेकिन गलत सूचनाओं पर आधारित वार्ता या किसी भी ऐसी प्रक्रिया को अस्वीकार करता है.&#039;
ईरान ने उठाया लेबनान का मुद्दा
अमेरिका और ईरान के बीच करीब 40 दिनों के बाद सीजफायर पर सहमति बनी थी, लेकिन लेबनान के हालात अभी भी ठीक नहीं है. इजरायल उस पर कई बार हमले कर चुका है. ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत में लेबनान को लेकर भी शर्त रखी है. उसका कहना है कि लेबनान को भी सीजफायर डील में शामिल किया जाना चाहिए.
शांति वार्ता से पहले अमेरिका ने इस्लामाबाद क्या-क्या भेजा&amp;nbsp;
अमेरिका-ईरान बातचीत के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के इस्लामाबाद पहुंचने से पहले अमेरिकी वायुसेना के गुरुवार (9 अप्रैल) से लेकर अब तक 5 विमान रावलपिंडी के नूरखान एयरबेस पर लैंड हो चुके हैं. दो विमानों में अमेरिकी सीक्रेट सर्विसेज के अधिकारी और जेडी वेंस के सुरक्षा अधिकारी पहुंचे थे. वहीं बाकी तीन विमानों में जेडी वेंस और सुरक्षा अधिकारियों के काफिले की 10 शेवरलेट सबअर्बन SUV गाड़ियां, तीन हेलीकॉप्टर, जैमिंग इक्विपमेंट्स और अन्य सुरक्षा उपकरण पहुंचे हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें : क्या ईरान भारतीय जहाजों से भी वसूल रहा पैसा? होर्मुज पार करने के लिए बाकी देश दे रहे 20 लाख डॉलर, विदेश मंत्रालय ने क्या बताया ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:56:44 +0530</pubDate>
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<title>यूएस&#45;ईरान बातचीत से पहले एक्शन में पाकिस्तान, मिडिल ईस्ट की तरफ उड़ाए लड़ाकू विमान, किस चीज का खौफ?</title>
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<description><![CDATA[ US Iran Peace Talks: इस्लामाबाद में शनिवार को होने जा रही अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर जहां एक तरफ उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है. दो हफ्ते के सीजफायर के बावजूद मिडिल ईस्ट में तनाव बना हुआ है, ऐसे में ईरान से हवाई मार्ग के जरिए आने वाले प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान अलर्ट पर है, खासकर इजरायल की संभावित गतिविधियों को देखते हुए.
पाकिस्तान ने सुरक्षा के मद्देनज़र अपने लड़ाकू विमान, C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, रिफ्यूलिंग टैंकर्स और AWACS (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) को मिडिल ईस्ट दिशा में तैनात कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की तैयारी इस्लामाबाद पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव को भी दर्शाती है, क्योंकि यह बैठक क्षेत्रीय शांति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है.
एक्शन में पाकिस्तान
संभावित खतरों को देखते हुए इस्लामाबाद को लगभग एक किले में तब्दील कर दिया गया है. दक्षिणी और पश्चिमी एयरस्पेस में डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय कर दिए गए हैं. पाकिस्तान के मंत्री Mohsin Naqvi ने कहा कि सभी विदेशी मेहमानों की &amp;ldquo;फुल-प्रूफ सिक्योरिटी&amp;rdquo; सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं.
उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद के लिए रवाना हो चुका है, जहां अमेरिकी और ईरान के बीच अहम शांति वार्ता होने वाली है. ईरान की ओर से इस वार्ता में संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araghchi शामिल होंगे, जो इस बातचीत को और भी महत्वपूर्ण बना देता है.
छावनी बना इस्लामाबाद
खास बात यह है कि Iranian Revolution के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के बीच इतनी बड़ी और हाई-लेवल आमने-सामने (face-to-face) बैठक होने जा रही है, जिससे इसे ऐतिहासिक माना जा रहा है. यह बैठक सिर्फ कूटनीतिक पहल नहीं बल्कि पाकिस्तान के लिए एक बड़ी परीक्षा भी है, जहां उसकी सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय साख दोनों दांव पर हैं.
ईरान की एयरफोर्स को युद्ध में भारी नुकसान होने के बाद अब सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां सामने आ गई हैं. ऐसे में पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में अपने लड़ाकू विमानों को तैनात किया है, ताकि Persian Gulf और इस्लामाबाद पहुंच रहे ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. पाकिस्तान की यह तैयारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अगर शांति वार्ता में किसी तरह की बाधा आती है या बातचीत पटरी से उतरती है, तो किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई को तुरंत रोका जा सके.
इसी बीच, पाकिस्तान और इजरायल के बीच हाल ही में बयानबाज़ी भी तेज हो गई थी. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने इजरायल को &amp;ldquo;शैतान&amp;rdquo; और &amp;ldquo;मानवता के लिए अभिशाप&amp;rdquo; तक कह दिया था, जिस पर इजरायल के पीएम Benjamin Netanyahu ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. हालांकि, बाद में ख्वाजा आसिफ ने अपना बयान वापस लेते हुए पोस्ट डिलीट कर दिया. ऐसे तनावपूर्ण माहौल के बीच पाकिस्तान ने ईरानी अधिकारियों की हवाई सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर संसाधन झोंक दिए हैं, जिससे साफ है कि वह इस शांति वार्ता को हर हाल में सफल बनाना चाहता है.
ये भी पढ़ें: ईरान का ट्रंप को अल्टीमेटम! सिर्फ इन 10 पॉइंट्स पर अमेरिका से होगी बात, कहा- &#039;हथियार उठाने का नहीं देंगे मौका&#039; ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:56:43 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान में किस जगह होगी US&#45;ईरान वार्ता? तय हो गया वेन्यू, इमरजेंसी की हालत में किया ये इंतजाम</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) देर रात अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने के उम्मीद है. दोनों देश 11 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक दूसरे के साथ बैठक करेंगे. सूत्रों के मुताबिक इस्लामाबाद के E-9 सेक्टर में स्थित पाकिस्तान एयरफोर्स ऑफिसर्स मेस बिल्डिंग दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात और बैठक हो सकती है.
इस्लामाबाद वार्ता के लिए ये जगह हुआ फाइनल
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI, पाकिस्तानी सेना, इस्लामाबाद पुलिस और पाकिस्तानी रेंजर्स ने एयरफोर्स ऑफिसर्स मेस बिल्डिंग को सुरक्षा की दृष्टि से सबसे उपयुक्त बताते हुए यहीं पर बैठक करने की सिफारिश की है. साथ ही विकल्प के तौर पर प्रधानमंत्री आवास, विदेश मंत्रालय के दफ्तर को रखा है और आखिरी मौके पर अगर कुछ बदलाव होता है या इमरजेंसी के हालात होने पर रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय पर बैठक कराने की सिफारिश की है.
जानकारी के मुताबिक E-9 सेक्टर की तरफ जाने वाले रास्तों को 2 किलोमीटर पहले ही ब्लॉक किया गया है. साथ ही इलाके में एंटी ड्रोन सिस्टम और जैमिंग सिस्टम एक्टिवेट किया गया है. E-9 सेक्टर में पाकिस्तान एयरफोर्स के हेडक्वार्टर परिसर के भीतर ऑफिसर्स मेस बिल्डिंग स्थित है. PAF ऑफिसर्स मेस में रविवार (12 अप्रैल 2026) तक एयरफोर्स के अधिकारियों के प्राइवेट कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है.
दो किलोमीटर पहले ही ये रास्ते बंद
इस्लामाबाद पुलिस और सेना ने पाकिस्तान एयरफोर्स ऑफिसर्स मेस की ओर जाने वाले सभी रास्ते कंस्टीट्यूशन एवेन्यू, मर्गला रोड, जिन्ना एवेन्यू, रफीक रोड, मुशफ एवेन्यू को 2 किलोमीटर पहले ही बंद कर दिया है. हालांकि अभी तक पाकिस्तान की सरकार ने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल किस जगह पर वार्ता करेंगे इसका वेन्यू नहीं तय किया है और इस पर आखिरी फैसला पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को लेना है.
पाकिस्तान में लगाया जाएगा अघोषित कर्फ्यू&amp;nbsp;
पाकिस्तान के J-5 सेक्टर में स्थित सेरेना होटल को रविवार तक दोनों देशों के प्रतिनिधियों के ठहरने की वजह से खाली करवा दिया गया है और जानकारी के मुताबिक ईरान और अमेरिका के डेलीगेट्स सेरेना होटल में ठहरेंगे. साथ ही ISI, पाकिस्तानी सेना, रेंजर्स और इस्लामाबाद पुलिस ने अपनी सिफारिश में यह भी कहा है कि सेरेना होटल में अगर वार्ता करवाना तय होता है तो ऐसी स्थिति में पूरा रेड जोन भीतर से भी ब्लॉक किया जाएगा और अघोषित कर्फ्यू जैसे स्थिति लगानी पड़ेगी.
ये भी पढ़ें :&amp;nbsp; इस्लामाबाद में हाई अलर्ट: अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले पुलिस और काउंटर टेररिज्म विभाग ने ली 323 घरों की तलाशी, 26 संदिग्ध हिरासत में ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:56:43 +0530</pubDate>
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<title>7 दिन तक बिना रुके उड़ान, न्यूक्लियर अटैक में भी सुरक्षित, जानिए अमेरिका के डूम्सडे प्लेन की ताकत</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका का बेहद खास विमान &#039;डूम्सडे प्लेन&#039; दरअसल Boeing E-4B है, जिसे परमाणु हमले और बड़े आपात हालात में कमांड सेंटर के रूप में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है. 1974 में शीत युद्ध के दौरान शुरू हुई यह परियोजना आज भी अमेरिका की सैन्य ताकत का अहम हिस्सा है.
क्या है डूम्सडे प्लेन का मकसदइस विमान को इस तरह डिजाइन किया गया है कि अगर अमेरिका में हालात नियंत्रण से बाहर हो जाएं या जमीन पर मौजूद कमांड सेंटर नष्ट हो जाएं, तो यह हवा में ही पूरा कंट्रोल संभाल सके.
युद्ध के समय उड़ता कमांड सेंटरयह विमान युद्ध या संकट के समय अमेरिका के राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री और सेना के शीर्ष अधिकारियों के लिए हवाई कमांड सेंटर का काम करता है, ताकि वे देश की स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखें और लगातार संपर्क में रहें.
7 दिन तक बिना रुके उड़ानडूम्सडे प्लेन लगातार 7 दिनों तक बिना रुके उड़ सकता है. यह फाइटर जेट्स से भी तेज गति से उड़ान भरने की क्षमता रखता है. अमेरिका के पास ऐसे कुल 4 E-4B विमान हैं, जिन्हें सालभर नियमित उड़ान में रखा जाता है ताकि सैन्य तैयारी बनी रहे.
नए विमान बनाने की तैयारीUS Air Force अब 5 नए Boeing 747-8 विमानों को तैयार कर रही है, जो पुराने E-4B की जगह लेंगे. ये विमान पहले Korean Air के पास थे. इनकी कुल लागत लगभग 13 अरब डॉलर बताई जा रही है.
एडवांस तकनीक से लैसइन नए विमानों में रेडिएशन और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स (EMP) से बचाव, एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम, एंटेना, कंप्यूटर, मिशन सिस्टम, मॉडर्न इंटीरियर और हवा में ही फ्यूल भरने की सुविधा होगी.
परमाणु हमले में भी सुरक्षितडूम्सडे प्लेन को इस तरह बनाया गया है कि यह परमाणु हमले, साइबर अटैक और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हमलों को भी झेल सकता है. इसमें मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता भी है. इसमें 67 एंटेना लगे हैं, जिससे यह दुनिया के किसी भी हिस्से से संपर्क कर सकता है. साथ ही इसमें थर्मल और न्यूक्लियर शील्ड भी लगी होती है. यह विमान 4 इंजनों से चलता है, इसमें स्वेप्ट विंग डिजाइन है और यह हवा में ही फ्यूल भर सकता है.
E-4A से E-4B तक का सफरअमेरिका ने पहले E-4A विमान बनाए थे, जिन्हें 1974 तक इस्तेमाल किया गया. बाद में इन्हें अपग्रेड कर E-4B बनाया गया. 1980 में पहला B सीरीज विमान मिला और 1985 तक पूरी फ्लीट अपग्रेड हो गई.
आपात स्थिति में अहम भूमिकाइसका उपयोग राष्ट्रीय आपातकाल या जमीन पर कमांड सेंटर नष्ट होने की स्थिति में सेना को निर्देश देने के लिए किया जाता है. यह विमान तूफान, भूकंप जैसी आपदाओं के बाद भी विभिन्न कमांड सेंटर से संपर्क बनाए रखने में मदद करता है. यह Boeing 747-200 का सैन्य संस्करण है.
युद्ध के समय आदेश जारी करने का केंद्रयह हवाई केंद्र युद्ध के समय आपात आदेश जारी करने और सिविल प्रशासन के काम को समन्वित करने में मदद करता है, जब तक हालात सामान्य न हो जाएं.
डूम्सडे प्लेन की खास खूबियां

यह विमान 7 दिन तक लगातार उड़ सकता है.
इसमें मौजूद लोग दुनिया के किसी भी कोने से संपर्क कर सकते हैं.
इसकी ताकत अमेरिका की एयर डिफेंस फोर्स से भी ज्यादा मानी जाती है.
इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह परमाणु हमले, उल्कापिंड और अन्य खतरों से सुरक्षित रहे.
इसके इंजन 24 घंटे, 365 दिन तैयार रहते हैं, यानी कभी भी तुरंत उड़ान भर सकता है.
इसकी कीमत करीब 223 मिलियन डॉलर है.

रूस भी रखता है ऐसा विमानअमेरिका के अलावा रूस ही एक ऐसा देश है जिसके पास इस तरह का विमान है. यह विमान तीन मंजिल का होता है और इसमें अत्याधुनिक उपकरण लगे होते हैं, जो इसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रभावों से भी सुरक्षित बनाते हैं.
अंदर से पूरी सरकार पर नजरइस विमान के पायलट और कमांडर अंदर लगी स्क्रीन से राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और अटॉर्नी जनरल की लोकेशन देख सकते हैं. समुद्र की गहराई में छिपी पनडुब्बियों तक भी यह विमान किसी भी समय आदेश पहुंचा सकता है.
&amp;lsquo;Air Force One&amp;rsquo; से अलगयह विमान Air Force One से बिल्कुल अलग है. Air Force One का इस्तेमाल राष्ट्रपति की सामान्य यात्राओं के लिए होता है, जबकि डूम्सडे प्लेन सिर्फ आपात और युद्ध जैसी स्थितियों के लिए बनाया गया है.&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:56:42 +0530</pubDate>
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<title>घंटों का सफर तय कर हॉर्मुज पहुंचा था बांग्लादेशी जहाज, ईरान ने लौटाया, कहा&#45; &amp;apos;जहां से आ आए, वहीं चले जाओ...&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-ईरान जंग की वजह से दुनिया के कई देश प्रभावित हुए हैं, लेकिन बांग्लादेश समेत कुछ देशों को भयंकर नुकसान पहुंचा है. बांग्लादेश तेल और गैस के संकट से जूझ रहा है. इस बीच उसको एक और झटका देने वाली खबर है. ईरान ने एक बांग्लादेशी जहाज को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पार करने की इजाजत नहीं दी और उसे वापस लौटने के लिए भी कह दिया. अहम बात यह है कि बांग्लादेशी जहाज करीब 40 घंटे का सफर तय करके पहुंचा था.
&#039;द डेली स्टार&#039; की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश शिपिंग कॉर्पोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर महमुदुल मलिक ने बताया कि बांग्लादेशी जहाज सऊदी अरब के रास अल खैर बंदरगाह से केपटाउन के लिए रवाना हुआ था. इसमें 37,000 टन फॉस्फेट उर्वरक लदा हुआ है, लेकिन जैसे ही जहाज हॉर्मुज पहुंचा, उसे लौटने के लिए कह दिया गया. जहाज ने हॉर्मुज पार करने की इजाजत मांगी थी, लेकिन उसे रास्ता नहीं दिया गया.
शारजाह में रुका बांग्लादेशी जहाज
बांग्लादेश जहाज को हॉर्मुज पार करने की इजाजत नहीं मिली तो वह यूएई के शारजाह में खड़ा हो गया. ईरान ने उसे सुरक्षित स्थान पर रहने के लिए कहा है. ईरानी अधिकारियों ने जहाज से जब दो बार संपर्क करने की कोशिश की तो बात नहीं हो पाई, लेकिन जब तीसरी बार बात हुई तो उन्होंने क्लियरेंस से इनकार कर दिया. अहम बात भी है कि जहाज पर सवार नाविकों का भत्ता बढ़ा दिया गया है.&amp;nbsp;
अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा हो चुकी है और अब दोनों ही देश इस्लामाबाद में शांति वार्ता करेंगे. इसके लिए अमेरिका की ओर से जेडी वेंस जा रहे हैं. वहीं ईरानी डेलीगेशन को लेने के लिए पाकिस्तान से एयरक्राफ्ट जा रहा है. इस बीच ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ुल्फ़िकारी ने अमेरिका को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा, &#039;जब तक लेबनान पर हमले जारी रहेंगे ईरान किसी बातचीत में शामिल नहीं होगा और हमारी सैन्य जवाबी कार्रवाई जल्द ही होने वाली है जो बेहद विनाशकारी होगी.
यह भी पढ़ें : US Iran Peace Talks: यूएस के साथ शांति पर बात से पहले ईरान ने रखी ये 2 शर्त, बोला- पहले करो पूरा, फिर बढ़ेंगे आगे ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:56:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>US Iran Peace Talks: यूएस के साथ शांति पर बात से पहले ईरान ने रखी ये 2 शर्त, बोला&#45; पहले करो पूरा, फिर बढ़ेंगे आगे</title>
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<description><![CDATA[ US Iran Peace Talks in Pakistan: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को होने जा रही अहम शांति वार्ता से पहले ही हालात काफी संवेदनशील हो गए हैं. ईरान ने बातचीत शुरू होने से ठीक पहले दो बड़ी शर्तें रख दी हैं, जिससे इस बैठक का महत्व और बढ़ गया है. ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि वार्ता से पहले दो मुद्दों का समाधान जरूरी है- पहला Lebanon में सीजफायर लागू किया जाए और दूसरा ईरान के ब्लॉक किए गए एसेट्स को रिलीज़ किया जाए. उनका साफ कहना है कि इन दोनों शर्तों को पूरा किए बिना बातचीत शुरू नहीं होनी चाहिए.
अगले कुछ घंटे अहम
वहीं ईरानी सेना के प्रवक्ता Ebrahim Zolfaqari ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक Lebanon पर हमले जारी रहेंगे, तब तक ईरान किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होगा. उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य जवाबी कार्रवाई &amp;ldquo;बहुत जल्द&amp;rdquo; हो सकती है और वह &amp;ldquo;बेहद विनाशकारी&amp;rdquo; होगी. उनका बयान इस बात का संकेत देता है कि आने वाले कुछ घंटे बेहद अहम हो सकते हैं और क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है.
ईरानी प्रवक्ता ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को चेतावनी देते हुए कहा कि वे अपनी &amp;ldquo;हार स्वीकार करें&amp;rdquo; और ईरानी जनता तथा सशस्त्र बलों को धमकाना बंद करें. उन्होंने दावा किया कि ईरान की सेनाएं अत्याधुनिक हथियारों और तकनीक के दम पर अमेरिका और इजरायल की सेनाओं का सामना करने और उन्हें परास्त करने में सक्षम हैं.
साथ ही, ईरान ने अपनी पुरानी शर्तें दोहराते हुए कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले दो बातें अनिवार्य हैं- पहला, लेबनान में तत्काल संघर्ष-विराम और दूसरा, ईरान की ज़ब्त की गई संपत्तियों की रिहाई. इस बयान से साफ है कि शांति वार्ता से ठीक पहले माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है, जिससे बातचीत की सफलता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
बातचीत से पहले ईरान की 2 शर्तें
दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेन्स ने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वह अमेरिका के साथ &amp;ldquo;खेल&amp;rdquo; न खेले, क्योंकि वह युद्ध खत्म करने के उद्देश्य से इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं. इस बीच, ईरान के पूर्व विदेश मंत्री Kamal Kharrazi का निधन भी चर्चा में है, जो हाल ही में हुए हवाई हमले में घायल हुए थे. वे Mohammad Khatami के कार्यकाल में विदेश मंत्री रहे थे और परमाणु कार्यक्रम पर उनके बयानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता भी बढ़ाई थी.
उधर, पाकिस्तान ने इस हाई-प्रोफाइल बैठक को लेकर अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम किए हैं. गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सुरक्षा समीक्षा करते हुए कहा कि इस वार्ता की मेजबानी पाकिस्तान के लिए सम्मान की बात है. इस्लामाबाद में 10,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, &amp;lsquo;रेड जोन&amp;rsquo; को सील कर दिया गया है और पूरे शहर में सख्त निगरानी रखी जा रही है.
एक्शन में पाकिस्तान
इस्लामाबाद में शनिवार को होने जा रही अमेरिकी और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर जहां उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं पाकिस्तान किसी भी तरह का जोखिम लेने को तैयार नहीं है. दो हफ्ते के सीजफायर के बावजूद मिडिल ईस्ट में तनाव बरकरार है, ऐसे में ईरान से हवाई मार्ग से आने वाले प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान अलर्ट मोड में आ गया है, खासकर Israel की संभावित गतिविधियों को देखते हुए.
पाकिस्तान ने एहतियात के तौर पर अपने लड़ाकू विमान, C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, रिफ्यूलिंग टैंकर्स और AWACS को मिडिल ईस्ट दिशा में तैनात कर दिया है. अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मानते हैं कि यह कदम इस्लामाबाद पर बढ़ते वैश्विक दबाव को भी दिखाता है, क्योंकि हाल के वर्षों में यह एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक मानी जा रही है.
इससे पहले पाकिस्तान ने अपने सहयोगी चीन की मदद से अमेरिका-ईरान के बीच करीब 40 दिनों से चल रहे संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकने में भूमिका निभाई थी, जिसमें लगभग 2 हजार लोगों की जान जा चुकी है. अब पाकिस्तान इस संघर्ष को स्थायी रूप से खत्म करने की दिशा में प्रयास कर रहा है.
संभावित खतरे को देखते हुए इस्लामाबाद को एक तरह से अभेद किले में बदल दिया गया है. शहर के दक्षिणी और पश्चिमी एयरस्पेस में डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय कर दिए गए हैं. पाकिस्तान यह अच्छी तरह जानता है कि इस बैठक की सफलता उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि से जुड़ी है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही.
ये भी पढ़ें: यूएस-ईरान टॉक्स से पहले अमेरिकी की चेतावनी, जेडी वेंस बोले- अबकी बार न चलना &#039;चाल&#039; ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:56:41 +0530</pubDate>
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<title>यूएस&#45;ईरान टॉक्स से पहले अमेरिका की चेतावनी, जेडी वेंस बोले&#45; अबकी बार न चलना &amp;apos;चाल&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका के बीच स्थाई शांति के उद्देश्य से इस्लमाबाद में होने वाली बैठक में शामिल होने के लिए जेडी वेंस पाकिस्तान रवाना हो चुके हैं. उन्होंने ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत की उम्मीद जताने के साथ-साथ चेतावनी भी दी है. जेडी वेंस ने कहा कि इस्लामाबाद वार्ता को लेकर अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें कुछ दिशा-निर्देश दिए हैं और हम सकारात्मक बातचीत करने की कोशिश करेंगे.
जेडी वेंस ने ईरान को दी चेतावनी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, &#039;हम बातचीत का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. मुझे लगता है कि यह सकारात्मक होगी, जैसा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने भी कहा है. अगर ईरानी लोग सद्भावना के साथ बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम निश्चित रूप से उनकी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने को तैयार हैं. अगर वे हमारे साथ चाल चलने की कोशिश करेंगे तो उन्हें पता चल जाएगा कि हमारी बातचीत करने वाली टीम इतनी नरम नहीं है.&#039;
इस्लामाबाद को कीले में तब्दील किया गया
अमेरिका और ईरान दो सप्ताह के सशर्त युद्धविराम पर बुधवार को सहमत हुए, जिसके बाद मतभेदों को सुलझाने और मौजूदा युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने के लिए इस्लामाबाद में बैठक होगी. दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल के आगमन से पहले शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई. प्रस्तावित बैठक को लेकर इस्लामाबाद में 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इन दिनों एक असामान्य खामोशी में डूबी हुई है. सड़कों पर सामान्य चहल-पहल की जगह सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने ले ली है और कई इलाकों में आवागमन सीमित कर दिया गया है.&amp;nbsp;
इस्लामाबाद वार्ता पर उठ रहे सवाल
सीजफायर के ऐलान के बाद इजरायल की ओर से जो किया गया और अमेरिका की ओर से जो कहा गया, उसने वर्तमान स्थिति के भरोसे को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. पाकिस्तान रवाना होने से पहले 9 अप्रैल को जेडी वेंस से लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयान में ऐसा बहुत कुछ था जो ईरान सीजफायर के भविष्य पर सवाल खड़े करता है.
इजरायल का लेबनान पर हमला, एक ही दिन में सैकड़ों को मारने का दावा और फिर खुद ट्रंप का कहना कि हिज्बुल्लाह को लेकर समझौते में कोई जिक्र नहीं है, इस समझौते पर सवाल खड़े करता है. हालांकि पाकिस्तान का कहना था कि हिज्बुल्लाह इसका अंग था. इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक बड़ी चुनौती भरोसे की कमी है. ईरान के भीतर ही इस बात को लेकर शंका जताई जा रही है कि क्या यह वार्ता वास्तव में किसी ठोस समाधान तक पहुंच पाएगी या यह केवल तनाव को अस्थायी रूप से टालने का एक प्रयास भर है.&amp;nbsp; ]]></description>
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<title>इजरायली खुद ही नहीं मान रही कि ईरान के खिलाफ जीत पाए युद्ध, जनता के सर्वे में नेतन्याहू की थू&#45;थू</title>
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<description><![CDATA[ Israel Iran War: पश्चिम एशिया में ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल एक महीने से ज्यादा समय तक चले युद्ध, संघर्ष और तनाव में फंसे रहे. अमेरिका और इजरायल दोनों एक पक्ष में ईरान के विरुद्ध आक्रामक सैन्य कार्रवाइयों को अंजाम दे रहे थे, लेकिन हाल ही में दोनों पक्ष युद्ध के अंत और शांति की स्थापना के लिए पाकिस्तान की मेजबानी में बातचीत की मेज पर एक साथ बैठकर चर्चा करने के लिए राजी हुए हैं.
ईरान युद्ध से वैश्विक स्तर पर मची उथल-पुथल
ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी तनाव की खत्म होने और वैश्विक स्तर पर मची उथल-पुथल के स्थिर होने की संभावनाएं जताई जा रही है, लेकिन इस युद्ध के खत्म होने की चर्चा के बीच इजरायल के निवासियों में इस युद्ध के नतीजे को लेकर गहरी नाराजगी है. इजरायली नागरिक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस दावे को मानने को तैयार नहीं हैं कि जिसमें यह कहा जा रहा है कि उन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध में जीत हासिल की है.
ईरान युद्ध के अब तक के नतीजों से इजरायली जनता नाखुश
28 फरवरी, 2026 से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ यह युद्ध इन तीन देशों के अलावा पूरी दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति में बाधा बन रहा था, जो अभी भी कायम है, लेकिन इस बीच अमेरिका और इजरायल दोनों ईरान पर अपनी जीत हासिल करने के दावे लगातार करते आ रहे हैं. इस बीच इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू अपने ही देश में उठ रहे एक राजनीतिक तूफान के बीच में फंस गए हैं. दरअसल, एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि लगभग इजरायल के आधे नागरिक इस बात को नहीं मानते हैं कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध को जीता है.
नेतन्याहू के नेतृत्व और जवाबदेही पर उठ रहे सवाल
जेरूशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में बात सामने आई है कि इजरायल की जनता इस युद्ध के नतीजे से नाखुश है और देश में राजनीतिक हलका बुरी तरह से विभाजित हो गया है, जबकि शीर्ष सैन्य अधिकारियों को जनता का मजबूत विश्वास हासिल है, लेकिन ईरान युद्ध में इजरायल का नेतृत्व करने वाले पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की जवाबदेही और युद्ध की वास्तविक सच्चाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
यह भी पढ़ेंः यूएस-ईरान टॉक्स से पहले अमेरिका की चेतावनी, जेडी वेंस बोले- अबकी बार न चलना &#039;चाल&#039; ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:56:40 +0530</pubDate>
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<media:keywords>इजरायली, खुद, ही, नहीं, मान, रही, कि, ईरान, के, खिलाफ, जीत, पाए, युद्ध, जनता, के, सर्वे, में, नेतन्याहू, की, थू-थू</media:keywords>
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<title>Iran&#45;US Ceasefire: डोनाल्ड ट्रंप ने किया युद्ध रोकने का ऐलान, होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा... अमेरिका&#45;ईरान सीजफायर में अब तक के 10 बड़े अपडेट</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (08 अप्रैल, 2025) को ईरान के साथ सीजफायर का ऐलान कर दिया है. जंग के 40 दिन बाद दोनों देश सीजफायर पर सहमत हुए हैं. इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि डेडलाइन खत्म होने से पहले अगर ईरान सीजफायर नहीं करता है तो उसके पावर प्लांट और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया जाएगा. आइए जानते हैं अब तक के बड़े अपडेट क्या हैं-&amp;nbsp;&amp;nbsp;
1- ट्रंप ने ईरान की ओर से पेश किए गए 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को व्यावहारिक बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के पावर प्लांट, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने से परहेज करेगा. मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में मीटिंग होगी.&amp;nbsp;
2- कूटनीतिक प्रयासों में तेजी आने के बावजूद जमीनी स्तर पर अनिश्चितता और हिंसा जारी रही. ईरान ने सीजफायर समझौते को स्वीकार कर लिया है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में हमलों की आशंका बनी रही. व्हाइट हाउस की ओर से सीजफायर पर सहमति जताए जाने के बावजूद, इज़रायली सेना ने ईरान पर हमले जारी रखे.
3- ट्रंप ने ऐलान करते हुए कहा, &#039;मैं आज रात ईरान पर भेजे जा रहे विनाशकारी बल को रोक रहा हूं और अगर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत होता है तो मैं दो सप्ताह की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को निलंबित करने पर सहमत हूं.&#039;
4- ईरान ने कहा, &#039;अगर उस पर हमले रोक दिए जाते हैं तो हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं अपने रक्षात्मक अभियान बंद कर देंगी.&#039; ईरान ने यह भी कहा कि वह अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव पर आधारित वार्ता के अनुरोध पर विचार कर रहा है. साथ ही वाशिंगटन द्वारा ईरान की 10 सूत्रीय योजना को वार्ता के ढांचे के रूप में स्वीकार करने पर भी विचार कर रहा है.&#039;
5- तेहरान ने आगे कहा कि दो सप्ताह की अवधि के लिए, ईरान के सशस्त्र बलों के समन्वय और तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवागमन संभव होगा.
6- ईरान ने इसे तेहरान की जीत बताया और उसकी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि ट्रंप ने शत्रुता समाप्त करने के लिए ईरान की शर्तें मान ली हैं. हालांकि, व्हाइट हाउस ने जवाब दिया कि वास्तविकता यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेना ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए मजबूर किया था.
7- व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इज़राइल ईरान के खिलाफ बमबारी अभियान को रोकने पर सहमत हो गया है. हालांकि, इजरायली सैन्य अधिकारियों ने कहा कि देश अभी भी हमले कर रहा है. तेल अवीव की ओर से औपचारिक बयान का इंतजार है.
8- ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर का ऐलान हो चुका है, इसके बावजूद सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत सहित खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल अलर्ट जारी किए गए.
9- खबरों के मुताबिक, ईरान की दीर्घकालिक शांति योजना में ओमान के साथ समन्वय में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाना शामिल है. तेहरान का कहना है कि इस राजस्व का उपयोग पुनर्निर्माण के लिए किया जाएगा. इसके अलावा युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की शर्तों में क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी, प्रतिबंधों को हटाना और उसकी जब्त संपत्तियों को जारी करना शामिल है.
10- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि युद्धविराम में इजरायल और हिजबुल्लाह से लेबनान में लड़ाई रोकने की भी मांग की गई है. उन्होंने ईरान और अमेरिका के डेलीगेशन को शुक्रवार को इस्लामाबाद में मिलने का निमंत्रण दिया है और स्थायी शांति और आने वाले दिनों में और अच्छी खबरें मिलने की कामना की है.&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>पांच हफ्ते बाद 40वें दिन सीजफायर, लाखों बेघर, हजारों मारे गए, पढ़ें ईरान&#45;अमेरिका और इजरायल जंग की पूरी Timeline</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-ईरान (US Iran War) के बीच दो सप्ताह का सीजफायर हुआ है. ट्रंप ने इसका ऐलान ऐसे समय में किया, जब कुछ ही घंटों पहले उन्होने ईरान में भारी तबाही और पूरी सभ्यता को खत्म करने की धमकी दी थी. 28 फरवरी से छिड़ी इस जंग में ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को बाधित करने, खाड़ी देशों में हमले, हूती विद्रोहियों की भागीदारी के बीच भीषण सैन्य संघर्ष देखने को मिला.बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप की कड़ी धमकियों के बाद दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा हुई है.
अमेरिका-ईरान युद्ध की टाइमलाइन (US Iran War Timeline)
12 मार्च - नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपना पहला लिखित बयान जारी करते हुए सेना को होर्मुज स्ट्रेट को बाधित करने की कार्रवाई जारी रखने का निर्देश दिया.&amp;nbsp;
छह अमेरिकी सैनिकों की मौत&amp;nbsp;इराक में KC-135 सैन्य ईंधन भरने वाले विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से छह अमेरिकी क्रू सदस्यों की मौत हो गई. इसके साथ ही युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम से कम 13 हो गई.
13 मार्च - अमेरिकी सेना ने ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर बड़ा बमबारी अभियान चलाया. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमले में सैन्य ढांचे को निशाना बनाया गया, जबकि तेल सुविधाओं को नुकसान नहीं पहुंचाया गया. यह द्वीप ईरान के लगभग 90 प्रतिशत तेल निर्यात के लिए जिम्मेदार है.
17 मार्च - इजरायली सेना ने ईरान के दो शीर्ष नेताओं राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारिजानी और बसीज प्रमुख गुलामरेज़ा सुलेमानी को मार गिराया. 28 फरवरी के बाद यह ईरान के नेतृत्व पर सबसे बड़ा झटका माना गया.
18 मार्च - ईरान और अमेरिका के सहयोगियों के बीच खाड़ी क्षेत्र में अहम ऊर्जा ढांचे पर हमले हुए. इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जो देश के 70&amp;ndash;75 प्रतिशत प्राकृतिक गैस उत्पादन का स्रोत है. वहीं, कतर ने दावा किया कि ईरान ने उसके रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमला किया, जो दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यात केंद्र है.
23 मार्च - डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत चल रही है. युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली सार्वजनिक कूटनीतिक पहल का संकेत था.
27 मार्च - सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरानी हमले में 12 अमेरिकी सैनिक घायल हो गए. इसे युद्ध की शुरुआत के बाद अमेरिकी वायु रक्षा में सबसे गंभीर सेंध माना गया.
28 मार्च - यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने युद्ध में शामिल होते हुए इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिसे बीच में ही रोक लिया गया.
3 अप्रैल - ईरान ने अमेरिकी वायुसेना के F-15E लड़ाकू विमान को मार गिराया, जिसमें दो क्रू सदस्य सवार थे. एक को उसी दिन सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि दूसरे को निकालने के लिए दो दिन तक चला जोखिम भरा अभियान चलाया गया. इस युद्ध में पहली बार किसी अमेरिकी लड़ाकू विमान को गिराया गया.
7 अप्रैल- राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सभ्यता को ख़त्म करने की धमकी दी.
8 अप्रैल - डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की. ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी इस समझौते की पुष्टि करते हुए इसे अपनी जीत बताया.
&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:21 +0530</pubDate>
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<title>US Iran War Ceasefire: डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर वाले ऐलान पर मुज्तबा खामेनेई का पहला रिएक्शन, कहा&#45; ये युद्ध का अंत नहीं...</title>
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<description><![CDATA[ डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर वाले ऐलान पर ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई का पहला रिएक्शन सामने आया है. उन्होंने ईरान की सेना को गोलीबारी रोकने का आदेश दिया है, लेकिन चेतावनी भी दी है कि यह युद्ध का अंत नहीं है. ईरान ने क्लीयर कर दिया है कि सीजफायर का मतलब युद्ध की समाप्ति नहीं है और दुश्मन द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने पर उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा.&amp;nbsp;
सरकारी चैनल इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) पर पढ़े गए एक बयान में खामेनेई ने कहा, &#039;यह युद्ध का अंत नहीं है, लेकिन सभी सैन्य शाखाओं को सर्वोच्च नेता के आदेश का पालन करना चाहिए और गोलीबारी बंद कर देनी चाहिए.&#039;&amp;nbsp;
ट्रंप ने किया था सीजफायर का ऐलान
युद्धविराम की घोषणा के बाद जारी एक बयान में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा, &#039;यह स्पष्ट किया जाता है कि इसका अर्थ युद्ध की समाप्ति नहीं है. हमारे हाथ ट्रिगर पर हैं और यदि दुश्मन द्वारा जरा सी भी गलती की जाती है तो उसका पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा.&#039;
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, &#039;मैं ईरान पर बमबारी और हमले को दो सप्ताह की अवधि के लिए स्थगित करने पर सहमत हूं. यह एक द्विपक्षीय सीजफायर होगा.&#039; उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ हुई बातचीत पर मैंने विनाशकारी सैन्य शक्ति रोक दी है. इसे होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने और सुरक्षित रखने की शर्त पर किया गया है.&amp;nbsp;
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, &#039;मैं ईरान की ओर से 10 बिंदुओं का एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है और हमें विश्वास है कि यह बातचीत के लिए एक व्यवहार्य आधार है. अतीत के लगभग सभी विवादित मुद्दों पर अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बन चुकी है.&#039;
ईरान ने रखी थीं ये 10 शर्तें
&amp;nbsp;-आक्रामकता न करना-होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण जारी रखना-संवर्धन को स्वीकार करना-सभी प्राथमिक प्रतिबंध हटाना-सभी द्वितीयक प्रतिबंध हटाना- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों को रद्द करना-आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को रद्द करना-ईरान को मुआवजा देना-क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी- लेबनान के वीर इस्लामी प्रतिरोध सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:21 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Iran, War, Ceasefire:, डोनाल्ड, ट्रंप, के, सीजफायर, वाले, ऐलान, पर, मुज्तबा, खामेनेई, का, पहला, रिएक्शन, कहा-, ये, युद्ध, का, अंत, नहीं...</media:keywords>
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<title>&amp;apos;आज रात एक सभ्यता खत्म हो जाएगी&amp;apos;, सीजफायर के बाद ट्रंप की धमकी पर ईरान ने फोटो शेयर कर दिया जवाब  </title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान हो चुका है. यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो 15 दिनों के सीजफायर पर सहमत हुए हैं और ईरान होर्मुज स्ट्रेट को खोलने को तैयार हो चुका है. इस बीच ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी का जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी.&amp;nbsp;
भारत में ईरानी राजदूत ने एक फोटो शेयर कर लिखा है, &#039;ईरान की सभ्यता के आगे झुक जाओ.&#039; इस फोटो में ईरान के राजा घोड़े पर बैठे हुए हैं और उनके हाथ में ईरान का राष्ट्रीय ध्वज है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप घुटनों पर बैठे हुए हैं. इसे ट्रंप की धमकी का जवाब माना जा रहा है.

Bow down to the Iranian civilization pic.twitter.com/7d9eRkVE9n
&amp;mdash; Iran in India (@Iran_in_India) April 8, 2026



ट्रंप ने क्या दी थी ईरान को धमकी?&amp;nbsp;दरअसल ट्रंप ने ईरान को धमकाते हुए कहा था, &#039;आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी, जिसे वापस नहीं लाया जा सकेगा. मैं ऐसा नहीं चाहता, लेकिन शायद ऐसा होगा.&#039; उन्होंने आगे कहा कि अब हमने ईरान में सत्ता बदल दी है. अब वहां पहले की तुलना में स्मार्ट और कम कट्टरपंथी लोग हैं. किसे पता कि कुछ क्रांतिकारी कदम उठा लिया जाए? हमें आज रात पता चल जाएगा. यह दुनिया के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण पल हो सकता है. 47 साल की उगाही, भ्रष्टाचार और मौत का तांडव आखिरकार खत्म होगा.&amp;nbsp;
अमेरिका और ईरान बता रहे अपनी-अपनी जीत
सीजफायर के ऐलान को अमेरिका अपनी तो ईरान अपनी जीत बता रहा है. जहां ईरान ने कहा है कि अमेरिका उसकी 10 सूत्रीय शर्तों पर सहमत हो गया है. वहीं व्हाइट हाउस ने इसका जवाब देते हुए कहा कि ट्रंप और अमेरिकी सेना ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए मजबूर कर दिया है. &amp;nbsp;

You started the war, but Iran will set the conditions for its end.Iran&#039;s 10-point conditions that the US has accepted as &quot;workable&quot;:The US is fundamentally committed to:🔹 Non-aggression🔹 Continuation of Iran&#039;s control over the Strait of Hormuz🔹 Acceptance of enrichment&amp;hellip;
&amp;mdash; Iran in India (@Iran_in_India) April 8, 2026



ईरान ने बताईं अपनी 10 शर्तें
भारत में ईरानी दूतावास ने इससे पहले पोस्ट किया था कि आपने युद्ध शुरू किया, लेकिन ईरान ही इसके अंत की शर्तें तय करेगा. ईरान की उन 10 शर्तों के बारे में भी बताया गया है, जिन्हें अमेरिका ने व्यवहार्य माना है. ये शर्तें हैं-&amp;nbsp;&amp;nbsp;-आक्रामकता न करना-होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण जारी रखना-संवर्धन को स्वीकार करना-सभी प्राथमिक प्रतिबंध हटाना-सभी द्वितीयक प्रतिबंध हटाना- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों को रद्द करना-आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को रद्द करना-ईरान को मुआवजा देना-क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी- लेबनान के वीर इस्लामी प्रतिरोध सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:21 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;मोदी को झटका, 56 इंच का सीना...&amp;apos; अमेरिका&#45;ईरान सीजफायर में पाकिस्तान के रोल पर कांग्रेस की पहली प्रतिक्रिया</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर हुए समझौते पर कांग्रेस की ओर से पहली प्रतिक्रिया सामने आई है. कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया है. उन्होंने लिखा, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के सीजफायर का दुनिया सावधानीपूर्वक स्वागत करेगी. कांग्रेस सांसद ने युद्ध विराम में पाकिस्तान के रोल का जिक्र करते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा.
उन्होंने कहा, &#039;यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान में सत्ता के शीर्ष नेताओं और अधिकारियों की लक्षित हत्याओं के साथ शुरू हुआ था. ये हत्याएं प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा के ठीक दो दिन बाद हुईं, जिस यात्रा ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और रुतबे को धूमिल कर दिया. पीएम मोदी ने गाजा में इजरायल द्वारा किए जा रहे नरसंहार और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में उसकी आक्रामक विस्तारवादी नीतियों के बारे में कुछ नहीं कहा था.&#039;
पीएम मोदी और सरकार पर साधा निशाना
जयराम रमेश ने लिखा, &#039;युद्धविराम कराने में पाकिस्तान की भूमिका प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत कूटनीति के सार और शैली दोनों को करारा झटका है. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को अलग-थलग करने और विश्व को यह भरोसा दिलाने की नीति कि वह एक विफल राष्ट्र है, स्पष्ट रूप से सफल नहीं हुई है. जैसा कि डॉ. मनमोहन सिंह ने मुंबई आतंकी हमलों के बाद हासिल किया था.&#039;
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उठाए सवाल
उन्होंने आगे लिखा, &#039;उन्होंने (पीएम मोदी) या उनकी टीम ने यह भी कभी नहीं बताया कि 10 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर को अचानक क्यों रोक दिया गया, जिसकी पहली घोषणा अमेरिकी विदेश मंत्री ने की थी और जिसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने तब से लगभग सौ बार श्रेय लिया है.&#039;
कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री और सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा, &#039;विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को दलाल बताकर खारिज कर दिया, लेकिन अब &#039;स्वघोषित विश्वगुरु&#039; पूरी तरह से बेनकाब हो गए हैं, उनका खुद का घोषित 56 इंच का सीना सिकुड़ गया है.&#039; सांसद का आरोप है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने भारत के खिलाफ गलत शब्दों का इस्तेमाल किया है, फिर भी प्रधानमंत्री चुप हैं.

The entire world will cautiously welcome the two-week ceasefire in the West Asia conflict between the US and Israel on the one side and Iran on the other. The conflict had begun on Feb 28th with the targeted assassinations of the topmost echelons of the regime in Iran. These&amp;hellip;
&amp;mdash; Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) April 8, 2026



अमेरिका-ईरान सीजफायर पर क्या बोलों प्रियंका गांधी?
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ईरान के लोगों की प्रशंसा की और कहा कि नफरत, गुस्सा, हिंसा व अन्याय कभी नहीं जीतते. साहस हमेशा जीतता है. प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;एक्स&#039; पर पोस्ट किया, &#039;ईरानी पुरुषों और महिलाओं ने अपने देश के संसाधनों के चारों ओर मानव श्रृंखला बनाई, जबकि पश्चिमी ताकतों ने घिनौनी भाषा का इस्तेमाल करते हुए एक सभ्यता के अंत की घोषणा की. दुनिया देख रही है और समझ रही है कि कैसे पश्चिम के चेहरे से नैतिकता का नकाब हट रहा है. नफरत, गुस्सा, हिंसा और अन्याय कभी नहीं जीतते. साहस हमेशा जीतता है.&#039; ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:20 +0530</pubDate>
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<title>US Iran War Ceasefire: ईरान के साथ सीजफायर के ऐलान के बाद डोनाल्ड ट्रंप का नया मैसेज, कहा&#45; होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका....</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान हो चुका है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान करते हुए कहा कि हम ईरान के साथ अगले दो हफ्ते तक सीजफायर करते हैं. उन्होंने शर्त रखते हुए कहा कि इसके लिए ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी हटानी होगी और जहाजों को सुरक्षित निकालना होगा. यह ऐलान करने के बाद ट्रंप ने ईरान को नया मैसेज दिया है.&amp;nbsp;
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के ट्रैफिक से निपटने में ईरान की मदद करेगा. दरअसल युद्ध की शुरुआत के बाद से ही ईरान ने होर्मुज में नाकेबंदी कर दी थी और सभी जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी, हालांकि बाद में ईरान ने क्लीयर कर दिया था कि उसके मित्र राष्ट्रों के लिए होर्मुज हमेशा खुला है, लेकिन दुश्मन देशों के लिए होर्मुज पूरी तरह बंद है.&amp;nbsp;
ट्रंप ने दी ईरान को बड़ी राहत
इसके साथ ही यूएस प्रेसिडेंट ने ईरान को बड़ी राहत दी है. उन्होंने तेहरान को बड़ी झूठ देते हुए कहा कि अब ईरान युद्ध में क्षतिग्रस्त हुए अपने बुनियादी ढांचों का फिर से निर्माण शुरू कर सकता है. इस युद्ध में इजरायल और अमेरिका ने भारी बमबारी की, जिसमें तेहरान और कौम जैसे बड़े शहरों में भारी तबाही मची. अमेरिका ने ईरान के सबसे बड़े ब्रिज को भी उड़ा दिया था. इसके अलावा यूनिवर्सिटी, कॉलेज, स्कूल और अस्पतालों पर भी अमेरिका-इजरायल ने बम बरसाए थे. हालांकि अब ट्रंप के इस ऐलान से ईरान को बड़ी राहत मिली है. &amp;nbsp;
होर्मुज टैक्स से निर्माण कार्य करेगा ईरान
ईरान जल्द से जल्द अपने ध्वस्त हुए ढांचों का पुनर्निमाण करना चाहता है. उसने सीजफायर की शर्तों में एक शर्त ये भी रखी थी कि वो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों-तेल टैंकरों से टोल वसूलेगा, जिसका इस्तेमाल पुनर्निमाण कार्यो में करेगा. हालांकि इससे पहले ईरान की मांग रही थी कि अमेरिका-इजरायल उसे हर्जाना दे ताकि वो निर्माण कार्य कर सके.
ईरान ने क्या रखीं 10 शर्तें?&amp;nbsp;-आक्रामकता खत्म करना&amp;nbsp;-होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का पूरा नियंत्रण जारी रहे-यूरेनियम इनरिचमेंट को स्वीकार करना-सभी प्रतिबंध हटाए जाएं-सभी द्वितीयक प्रतिबंध भी हटाए जाएं- UNSC के सभी प्रस्तावों को रद्द करना-IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को रद्द करना-ईरान को मुआवजा देना-क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी- लेबनान के वीर इस्लामी प्रतिरोध सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति&amp;nbsp;
ट्रंप ने सीजफायर का ऐलान कर क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर का ऐलान करते हुए कहा कि ईरान पर हमले को दो सप्ताह की अवधि के लिए स्थगित करने पर सहमत हूं. यह एक द्विपक्षीय सीजफायर होगा. उन्होंने पाकिस्तान और शहबाज-मुनीर का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह खोलने पर सहमत है. ट्रंप ने कहा, &#039;मैं ईरान की ओर से 10 बिंदुओं का एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है और हमें विश्वास है कि यह बातचीत के लिए एक व्यवहार्य आधार है. अतीत के लगभग सभी विवादित मुद्दों पर अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बन चुकी है.&#039; ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:20 +0530</pubDate>
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<title>होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल से अमेरिकी सेना की वापसी तक, क्या हैं सीजफायर की वो शर्तें जिन पर राजी हुए ट्रंप और ईरान</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-ईरान के बीच 40 दिनों से छिड़े भीषण युद्ध पर आखिरकार ब्रेक लग गया है. यूएस-ईरान के बीच 14 दिनों के सीजफायर पर सहमति बन गई है. समझौते के तहत तेहरान अपनी शर्तों पर होर्मुज स्ट्रेट को खोलने पर तैयार हो गया है. वहीं व्हाइट हाउस ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान को &#039;जीत&#039; करार दिया है और कहा कि सैन्य उपलब्धियों ने कूटनीतिक बातचीत के लिए रास्ता बनाया है. आखिर ट्रंप और ईरान किन शर्तों के तहत युद्ध विराम के लिए राजी हुए हैं, आइए जानते हैं.
पाकिस्तान की क्या भूमिका?
अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौते से कुछ घंटे पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया तो ईरान के ब्रिज, पावर प्लांट्स और बुनियादी ढांचों को तबाह कर दिया जाएगा. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड आसिम मुनीर ने दोनों पक्षों के बीच आखिरी कुछ घंटों में डील करवाई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दोनों का जिक्र किया. साथ ही शहबाज शरीफ ने एक्स पर पोस्ट कर 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत की बात कही.
सीजफायर के लिए ईरान की शर्तें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बयान जारी कर कहा, अगर ईरान के खिलाफ हमलों को पूरी तरह रोक दिया जाता है तो ईरान की सेना अपनी रक्षात्मक कार्रवाई बंद कर देगी. समझौते के तहत अगले दो हफ्तों के लिए होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा, लेकिन यह आवाजाही ईरान की सेना के समन्वय के अधीन होगी. ईरान ने पाकिस्तान के जरिए एक 10 सूत्रीय प्रस्ताव अमेरिका को भेजा है. जो इस्लामाबाद में प्रस्तावित बैठक का मुख्य आधार होगा.
ईरान का 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव
- ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना- क्षेत्रीय सैन्य बेस से अमेरिकी सेना की वापसी और इजरायल-ईरान संघर्ष में भविष्य की कार्ययोजना &amp;nbsp;शामिल है.- होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण जारी रखना.- ईरान को पहुंचाए गए नुकसान के लिए मुआवजे का भुगतान.- ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को स्वीकार करना.- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना.- भविष्य में दोबारा हमला न करने की गारंटी.- अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को खत्म करना.लेबनान में हिजबुल्लाह समेत सभी मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति.
ट्रंप की शर्त और सीजफायर पर बयान
ट्रंप ने सोशल मीडिया ट्रुथ पर पोस्ट कर लिखा, &#039;हमें ईरान से 10-सूत्रीय प्रस्ताव मिला है और हमारा मानना है कि यह बातचीत शुरू करने के लिए व्यवहारिक आधार है.&#039; डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की है. वहीं, ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी इस समझौते की पुष्टि करते हुए इसे अपनी जीत बताया. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:19 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US Ceasefire: सीजफायर के बाद ईरान का अल्टीमेटम! ‘जंग खत्म होगी तो हमारी शर्तों पर ही...’, जानें क्या बोला</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका सीजफायर के बीच अब एक नई जानकारी सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान अपनी शर्तों पर आगे बढ़ना चाहता है. ईरान की तरफ से साफ मैसेज दिया गया है कि युद्ध की शुरुआत भले किसी ने की हो, लेकिन इसका अंत किन शर्तों पर होगा यह ईरान तय करेगा.
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने 10 अहम शर्तें रखी हैं, जिन्हें अमेरिका ने बातचीत के आधार के रूप में काम करने योग्य माना है. इन शर्तों में सबसे पहले अमेरिका से यह अपेक्षा की गई है कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई नहीं करेगा. ईरान ने यह भी कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका नियंत्रण बना रहेगा और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए. इसके साथ ही उसने अपने परमाणु कार्यक्रम के तहत यूरेनियम संवर्धन को भी मान्यता देने की मांग रखी है.
क्या है ईरान की प्रमुख मांग
ईरान की प्रमुख मांगों में यह भी शामिल है कि उस पर लगे सभी प्रकार के प्रतिबंध हटा दिए जाएं, इसमें सीधे लगाए गए प्रतिबंधों के साथ-साथ अन्य देशों के जरिए लगाए गए प्रतिबंध भी खत्म करने की बात कही गई है. इसके अलावा, ईरान चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की ओर से उसके खिलाफ जारी सभी प्रस्ताव और फैसले भी समाप्त किए जाएं. ईरान ने युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजा देने की मांग भी रखी है. साथ ही उसने यह शर्त भी रखी है कि अमेरिका अपने सभी लड़ाकू सैनिकों को इस क्षेत्र से वापस बुलाए.
आस-पास के क्षेत्रों में न हो लड़ाई- ईरान
ईरान ने कहा है कि सिर्फ उसके खिलाफ ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में चल रहे युद्ध को खत्म किया जाए, जिसमें लेबनान में जारी लड़ाई भी शामिल है. इन शर्तों से साफ है कि ईरान इस बार बातचीत में मजबूत स्थिति में दिखना चाहता है और वह चाहता है कि किसी भी समझौते में उसकी रणनीतिक और राजनीतिक स्थिति को पूरी तरह मान्यता मिले.
ये भी पढ़ें: US Iran War Ceasefire: ईरान के साथ सीजफायर के ऐलान के बाद डोनाल्ड ट्रंप का नया मैसेज, कहा- होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका.... ]]></description>
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<title>सीजफायर के बाद तेहरान की सड़कों पर जश्न! लहराए झंडे, ईरानी महिला बोली&#45; &amp;apos;अमेरिका पहले भी कई बार...&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की घोषणा के बाद राजधानी तेहरान में लोगों ने सड़कों पर निकलकर जश्न मनाया. एंगेलाब स्क्वायर पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और झंडे लहराते नजर आए. सड़कों पर गाड़ियां चल रही थीं और लोग इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे. हालांकि जश्न के बीच कई लोगों के मन में सवाल और नाराजगी भी साफ दिखाई दी. एक महिला ने कार में बैठकर कहा कि अमेरिका पहले भी कई बार ऐसा कर चुका है. उन्होंने कहा कि जब भी बातचीत की कोशिश होती है, अमेरिका हमला कर देता है और फिर सीजफायर करके खुद को मजबूत करने की कोशिश करता है.
ईरानी महिला ने यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि अमेरिका ने इस बार सीजफायर क्यों माना. उनके मुताबिक, यह कदम शायद इजरायल को समय देने के लिए उठाया गया है. इसी दौरान दूसरी महिला ने बीच में बोलते हुए कहा कि उन्होंने अपने नेता को खो दिया है, जिससे लोगों में दुख भी है. एक और महिला ने कहा कि अगर देश के नए नेता खुद इस सीजफायर को मानते तो लोग भी इसे स्वीकार करते, लेकिन उनके अनुसार यह फैसला उन पर थोपा गया है, इसलिए लोग पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं.
फैसले को लेकर असमंजस और नाराजगी&amp;nbsp;सड़कों पर खड़ी कुछ महिलाओं ने यह भी सवाल उठाया कि सीजफायर की जरूरत ही क्या है. उन्होंने कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज &amp;nbsp;बंद रखने की बात कही जा रही है तो उसे फिर क्यों खोला जाए. ईरान में एक तरफ लोग सड़कों पर आकर जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कई लोग इस फैसले को लेकर असमंजस और नाराजगी भी जता रहे हैं. यह दिखाता है कि हालात सिर्फ शांत नहीं हुए हैं, बल्कि लोगों के मन में अभी भी कई तरह की भावनाएं चल रही हैं.
ये भी पढ़ें: पांच हफ्ते बाद 40वें दिन सीजफायर, लाखों बेघर, हजारों मारे गए, पढ़ें ईरान-अमेरिका और इजरायल जंग की पूरी टाइमलाइन ]]></description>
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<title>&amp;apos;थैंक्यू पाकिस्तान...&amp;apos;, अमेरिका&#45;ईरान के सीजफायर पर बोला ब्रिटेन, जानें मलेशिया के PM ने क्या कहा?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान हो चुका है. ट्रंप ने सीजफायर की बातचीत में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की भूमिका का भी जिक्र किया है. ईरान युद्ध के सीजफायर के लिए ब्रिटेन और मलेशिया ने पाकिस्तान का आभार जताया है.&amp;nbsp;
पाकिस्तान में ब्रिटेन की हाई कमिश्रनर जेन मैरियट ने कहा कि इस महत्वपूर्ण सीजफायर को संभव बनाने के लिए हम पाकिस्तान को धन्यवाद देते हैं. उन्होंने पाकिस्तान का जिक्र कर कहा, &#039;आपने जो शांत, प्रभावी और कूटनीतिक भूमिका निभाई है, उसके लिए हम आपको धन्यवाद देते हैं.&#039;

Thank you Pakistan for the quiet, effective, diplomatic role you have played in bringing about this vital ceasefire. @CMShehbaz @ForeignOfficePk https://t.co/frHAYxtYTS
&amp;mdash; Jane Marriott (@JaneMarriottUK) April 8, 2026



मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भी अमेरिका-ईरान के बीच हुए सीजफायर का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि मैं ईरान और अमेरिका द्वारा स्वीकार की गई 10 सूत्रीय योजना के लिए दोनों देशों का स्वागत करता हूं. उन्होंने लिखा, &#039;यह प्रस्ताव न केवल इस क्षेत्र में बल्कि पूरे विश्व में शांति और स्थिरता की बहाली के लिए शुभ संकेत है. पूरी उम्मीद है कि बातचीत सद्भावना से संचालित होगी और इस क्षेत्र में वर्तमान में व्याप्त समस्याओं का स्थायी समाधान खोजने के दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ेगी. अगर कार्यवाही छल और कपटपूर्ण व्यवहार से घिरी हो तो शांति वार्ता सफल नहीं हो सकती.&#039;

I wholeheartedly welcome the latest development in the current US-Iran war, in respect of the ten-point plan as proposed by Iran and positively received by the US. This proposal augurs well for the restoration of peace and stability, not only to the region but also the rest of&amp;hellip; pic.twitter.com/Gyy9vtjJPD
&amp;mdash; Anwar Ibrahim (@anwaribrahim) April 8, 2026



इब्राहिम ने कहा, &#039;यह बहुत ही जरूरी है कि 10 सूत्रीय योजना को एक व्यापक शांति समझौते में परिवर्तित किया जाए, न केवल ईरान के लिए बल्कि इराक, लेबनान और यमन के लिए भी. इसके अलावा संबंधित पक्षों का यह दायित्व है कि वे फिलिस्तीन, विशेषकर गाजा में, लोगों के नरसंहार और विस्थापन को समाप्त करें.&#039;
अनवर इब्राहिम ने की पाकिस्तान की तारीफ
मलेशियाई पीएम ने इस सीजफायर में भूमिका के लिए पाकिस्तान की भी सराहना की. उन्होंने कहा, &#039;पाकिस्तान की बिना किसी डर या पक्षपात के सभी पक्षों से बातचीत करने की तत्परता मुस्लिम एकजुटता और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी की सर्वोच्च परंपराओं को दर्शाती है. मलेशिया इस संबंध में सभी प्रयासों का समर्थन और सहयोग करने के लिए तत्पर है. हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह भी अपील करते हैं कि वे इस युद्ध से प्रभावित सभी नागरिकों तक निर्बाध मानवीय सहायता पहुंचाना सुनिश्चित करें. यह स्थायी शांति की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो. दुनिया इससे कम कुछ भी बर्दाश्त नहीं कर सकती.&#039;
सीजफायर का ऐलान कर क्या बोले ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से पेश किए गए 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को व्यावहारिक बताया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के पावर प्लांट, पुलों और बुनियादी ढांचों को निशाना नहीं बनाएगा. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में मीटिंग होगी. यूएस प्रेसिडेंट ने कहा कि मैं आज रात ईरान भेजी जाने वाली विनाशकारी सैन्य सहायता को इस शर्त पर रोक रहा हूं कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को खोलेगा. जहां ईरान ने इसे अपनी जीत बताया है तो वहीं व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रंप और यूएस आर्मी की वजह से ईरान मजबूरी में होर्मुज को खोल रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:18 +0530</pubDate>
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<title>US Iran War: मिडिल&#45;ईस्ट में महायुद्ध की आहट! 50 हजार US सैनिकों की तैनाती, क्या ट्रंप करने वाले हैं सर्जिकल स्ट्राइक?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब और ज्यादा खतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है. दावा किया जा रहा है कि अमेरिका सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप मिडिल ईस्ट में ग्राउंड ऑपरेशन के लिए 50 हजार सैनिकों की तैनाती कर सकते हैं. वे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास के द्वीपों को निशाना बना सकते हैं.
अमेरिकी अखबार &#039;न्यूयॉर्क टाइम्स&#039; ने बड़ा खुलासा करते हुए जानकारी दी है की ईरान के खिलाफ ऑपरेशन करने के लिए इस समय अमेरिका के 50 हज़ार से ज़्यादा थल सैनिक और कमांडो मध्य पूर्व में पहुंच चुके हैं. ऐसे में इस बात की संभावना जतायी जा रही है कि अमेरिका खर्ग आइलैंड पर कब्ज़ा करने के लिए अपने थल सैनिक उतार सकता है.&amp;nbsp;
एबीपी न्यूज़ के साथ बातचीत करते हुए रक्षा विशेषज्ञ कर्नल तेज टिक्कू (रिटायर्ड) ने कहा कि जिस तरह अमेरिका के 50 हज़ार के आसपास थल सैनिक मध्य एशिया में मौजूद हैं, ऐसे में ये इस बात का बड़ा संकेत है कि अमेरिका ईरान के खर्ग आइलैंड के अलावा स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ के आसपास स्थित लवण आइलैंड, हेंड्रोबी आइलैंड, हेंगम आइलैंड और क़िस्म पर अपने थल सैनिक उतार सकता है क्योंकि अमेरिका लगातार दावा कर रहा है कि वो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को व्यापार के लिए खुलवाना चाहता है.
ट्रंप मिडिल ईस्ट में तैनात कर सकते हैं 50 हजार सैनिक
कर्नल तेज टिक्कू (रिटायर्ड) के मुताबिक इस बात की संभावना बेहद कम है कि इन सैनिकों का प्रयोग अमेरिका इराक़ या फिर कुवैत जैसे करे, जहां उसकी सेना के कई कोर देश के भीतर मैदान पर उतरे थे, लेकिन हां 50 हज़ार सैनिकों से ना सिर्फ़ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास आइलैंड अमेरिका अपने थल सैनिक तैनात कर सकता है और साथ में अमेरिका किसी न्यूक्लियर प्लांट के पास पारा ड्रॉपिंग करके अपने सैनिकों को ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम लेने के लिए भेज सकता है जहाँ पर अमेरिकी कमांडो जैसे सील कमांडो ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम लेकर कुछ घंटों में ऑपरेशन को अंजाम देकर वापस चले जाएं.
क्या ग्राउंड ऑपरेशन में हिस्सा नहीं लेगा इजरायल
इजराइली मीडिया ने दावा किया कि ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका के ग्राउंड ऑपरेशन में इजरायल अपने थल सैनिक नहीं उतारेगा. इस दावे के बाद कयास लगाए जाने लगे हैं कि कुछ दिन पहले खबर आई थी कि इजरायली सेना में सैनिकों की कमी है ऐसे में नेतन्याहू थल सैनिक भेजने से डर गए हैं, हालांकि तेज टिक्कू इस दावे से इत्तेफाक नहीं रखते और उनके मुताबिक जब भी दो देश मिलकर युद्ध लड़ते हैं तो हर देश अपनी अलग अलग जिम्मेदारी लेता है.
ऐसे में ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल के संयुक्त युद्ध में अमेरिका ने थल सैनिक की जिम्मेदारी ली है ऐसे में डरने की बात इजराइल के खिलाफ राजनैतिक प्रोपगैंडा है, रही बात सौनिकों की कमी की तो रिज़र्व फोर्स मिलकर इजराइल के पास कुल साढ़े 4 लाख सैनिक ही हैं, ऐसे में जिस तरह से इजराइल 3.5 फ्रंट जंग लड़ता है तो उसके लिए अपने सैनिक भेजना ख़ुद की सुरक्षा पर ख़तरा डालना होगा जो हमास, हिजबुल्लाह से उसे है.
अमेरिका को नए बेस बनाने के लिए क्यों बोल रहा इजरायल
जिस तरह से दावा किया जा रहा है कि इजरायल ने अमेरिका को अपने यहां नए बेस बनाने और खाड़ी के बाकी देशों के बेस अपने यहां शिफ्ट करने के लिए कहा है, इस पर रक्षा विशेषज्ञ कर्नल तेज टिक्कू (रिटायर्ड) ने कहा, अगर इजराइल से बेस शिफ्ट करने को कहा है तो ये प्रैक्टिकली संभव नहीं है, क्योंकि अमेरिकी सेना के कई बड़े कोर अरब देशों जैसे बहरीन, कतर, सऊदी अरब में हैं, जिन्हें अमेरिका कभी शिफ्ट नहीं करेगा, हां क्योंकि इजराइल अपने देश में आयरन डोम को आने वाले 6-8 सालों में सशक्त कर रहा है, जिससे दुश्मन की एक भी मिसाइल इजराइल में टारगेट को ना लगे. 
यह भी पढ़ें : ईरान वॉर पर ट्रंप की नई धमकी के बीच अब आया चीन का बयान, बढ़ेगी US प्रसिडेंट की टेंशन ]]></description>
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:11:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>दुनिया को डराने वाली ईरान की नई प्लानिंग? परमाणु बम के करीब पहुंचा तेहरान, आखिरी अड़चन कर लिया पार</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच ईरान ऐसा कदम उठाने जा रहा है, जो अमेरिका और इजरायल दोनों की निंद उड़ा देगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि ईरान पर हमला इसलिए किया गया क्योंकि वह परमाणु हथियार बनाने करीब था, जिससे वॉशिंगटन को खतरा था. वहीं अब ईरान की संसद में परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर निकलने की चर्चा चल रही है. इस फैसले का मतलब होगा कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने के लिए स्वतंत्र होगा.
NPT से बाहर निकलने पर विचार कर रहा ईरान
एनपीटी से बाहर निकलने का मतलब होगा कि ईरान पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी खत्म हो जाएगी और ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने वाले प्रतिबंध हट जाएंगे. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि सरकार इस मामले पर विचार कर रही है और जल्द ही फैसला लिया जाएगा. ईरान के इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है. ईरान के एनपीटी से बाहर निकलने के फैसले का मतलब होगा कि वह परमाणु हथियार विकसित करने के लिए स्वतंत्र होगा.
परमाणु हथियार बनाने को लेकर ईरान का बयान
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार (30 मार्च 2026) को कहा, ऐसी संधि में शामिल होने का क्या फायदा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हम पर दवाब डाला जाता है और अपने अधिकारों को लाभ नहीं लेने देते. इतना ही नहीं हमारे परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला भी करते हैं.&#039; हालांकि उन्हों साफ किया कि ईरान ने परमाणु हथियार बनाने की कोशिश न तो पहली की थी और न भविष्य में करेगा. ईरान का कहना है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है, लेकिन वह परमाणु अप्रसार संधि पर अपनी स्थिति की समीक्षा कर रहा है.
पिछले साल अमेरिका ने परमाणु ठिकानों को बनाया था निशाना
पिछले साल जून में हुए 12 दिनों के संघर्ष के बाद ईरानी सांसदों ने एनपीटी से बाहर निकलने के विकल्प पर भी चर्चा की थी, जिस वजह से इजरायल और अमेरिका ने उस पर हमला किया था. तब ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों फोर्डो यूरेनियम संयंत्र, नतांज परमाणु संयंत्र और इस्फहान को निशाना बनाया था.
चार परमाणु हथियार संपन्न देश भारत, पाकिस्तान, इजरायल और उत्तर कोरिया एनपीटी ढांचे का हिस्सा नहीं हैं. इनमें से भारत, पाकिस्तान, इजरायल और दक्षिण सूडान ने कभी भी संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जबकि उत्तर कोरिया पहले इसमें शामिल हुआ था, लेकिन 2003 में इससे बाहर निकल गया. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:11:04 +0530</pubDate>
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<title>दो दिन पहले अचानक यू&#45;टर्न लेकर आए चीनी जहाजों ने पार किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, ईरान के इस कदम ने बढ़ाई US&#45;इजरायल की टेंशन</title>
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<description><![CDATA[ चीन के दो जहाजों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर लिया है. ये दोनों जहाज चीन की सरकारी कंपनी COSCO शिपिंग लाइंस के हैं. इन्होंने सोमवार को होर्मुज पार किया. मरीन ट्रैफिक जहाज ने जानकारी देते हुए आंकड़े जारी किए हैं. इसमें बताया गया है कि होर्मुज बंद होने के बाद पहली बार है, जब किसी बड़े कंटेनर कैरियर ने समुद्री रास्ते को पार किया है.&amp;nbsp;
यह जहाज चीन की कंपनी कोस्को की मेक्स सर्विस से संचालित होते हैं. यह ओशन अलायंस नेटवर्क का हिस्सा हैं. चीन के ये दोनों जहाज मलेशिया के पोर्ट क्लांग की ओर जा रहे हैं. इन्हीं दोनों कंटेनर जहाजों को शुक्रवार को होर्मुज पार करने से रोक दिया गया था. तब यह यूटर्न &amp;nbsp;लेकर वापस आ गए थे. हालांकि, ईरान ने इन्हें निकलने के लिए सुरक्षित रास्ता दिया था लेकिन यह वापस लौट आए थे. क्रू सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा था.&amp;nbsp;
मरीन ट्रैफिक ने क्या जानकारी दी?&amp;nbsp;
इसके अलावा अल्ट्रा-लॉर्ज जहाज सीएससीएल इंडियन ओशियन और सीएसएसीएल आर्टिक ओशियन के होर्मुज पार करने की जानकारी मरीन ट्रैफिक ने जानकारी दी. सोशल मीडिया पर जानकारी पोस्ट करते हुए लिखा कि सीएससीएल इंडियन ओसियन ने होर्मुज पार किया. फिर सीएसएसीएल आर्टिक ओशियन ने समुद्री रास्ता पार किया.&amp;nbsp;
हमले के बाद से ईरान ने कर रखी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी
इधर, युद्ध के चलते ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी कर दी है. इससे कच्चे तेल और ईंधन की सप्लाई में कमी आई है. ईरान ने इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद इस रास्ते की नाकेबंदी कर दी है. वहीं ईरान ने साफ कहा है कि वह इजरायल और अमेरिका से जुड़े जहाज नहीं गुजरने देगा. उन पर हमले करेगा. इधर, भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान, इराक जैसे देशों में कुछ जहाज रास्ते से गुजर रहे हैं. इसके अलावा ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट फीस लगाने की योजना भी बना रहा है. वहां की संसद एक ड्राफ्ट बिल भी लाने वाली है, इसपर काम जारी है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:11:04 +0530</pubDate>
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<title>Iran Israel War: ‘ये नहीं हमारी लड़ाई’, ईरान वॉर में बुरे फंसे ट्रंप, इस सहयोगी देश का भी साथ देने से इनकार</title>
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<description><![CDATA[ ईरान वॉर में यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुरे फंस गए हैं. यूके के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने ईरान में सेना भेजने से साफ इनकार कर दिया है. इसके अलावा स्पेन ने भी अमेरिका को झटका देते हुए ईरान युद्ध के लिए अपना एयरस्पेस देने से मना कर दिया है. स्पेन ने बयान जारी करते हुए कहा है कि हमारे दोनों बेस लड़ाई या रिफ्यूलिंग के लिए इस्तेमाल न हों.&amp;nbsp;
ब्रिटेन ने सेना भेजने से किया इनकारब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ईरान में सेना भेजने से इनकार करते हुए कहा है कि ऐसा करके उन्होंने इस संघर्ष में यूके की सीधी भागीदारी से खुद को अलग कर लिया है. साथ ही इस बात पर जोर दियाहै कि ब्रिटेन की भूमिका केवल रक्षात्मक बनी रहेगी.&amp;nbsp;
स्टार्मर ने बयान में कहा, यह हमारी लड़ाई नहीं है. हम इसमें शामिल नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि यूके ब्रिटिश लोगों की जान, ब्रिटिश हितों और जाहिर है, इस क्षेत्र में हमारे सहयोगियों की रक्षा के लिए रक्षात्मक कार्रवाई कर रहा है. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने में मदद करने के अपने प्रयास जारी रखेगा. साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि हम इस लड़ाई में नहीं घसीटे जाएंगे. हालांकि, ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरानी ठिकानों पर हमले करने के लिए ब्रिटिश ठिकानों के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है.&amp;nbsp;
स्पेन ने भी अमेरिका को दिया झटकास्पेन ने ईरान युद्ध में शामिल एयरक्राफ्ट को अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने से बैन कर दिया है. लड़ाई या रीफ्यूलिंग के लिए अपने रोटा और मोरोन बेस के इस्तेमाल को रोक दिया है. इस वजह से, US ने स्पेन में मोरोन एयर बेस पर B-52 और B-1 बॉम्बर तैनात करने का प्लान छोड़ दिया. स्पेन के इकॉनमी मिनिस्टर ने कहा कि युद्ध में हिस्सा लेने वाली फ्लाइट्स के लिए एयरस्पेस बंद करने का मकसद इंटरनेशनल कानून का उल्लंघन न करना है.
यह भी पढ़ें: यूएस के &#039;शांति दूत&#039; बने पाकिस्तान का बड़ा अपमान, खाड़ी में जंग के बीच ईरान ने दिखाया आईना ]]></description>
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:11:04 +0530</pubDate>
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<title>Middle East Tensions: अब धुआं&#45;धुआं होगा तेहरान! ईरान पर बारुद बरसाने के लिए इजरायल पहुंची हथियारों की खेप</title>
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<description><![CDATA[ West Asia Tensions: पिछले महीने 28 फरवरी, 2026 से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ युद्ध अब एक बेहद भयावह रूप ले चुका है. इस युद्ध में अमेरिका और इजरायल ने एक साथ मिलकर ईरान ने हजारों हमलों को अंजाम दिया है, जबकि ईरान ने US और इजरायल से इकट्ठा लड़ते हुए दोनों देशों पर जोरदार पलटवार किए हैं. दोनों तरफ से हुए इन हमलों में अब तक कई हजार लोगों की जान जा चुकी है. इसके अलावा, अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति यानी कच्चे तेल, LPG और LNG जैसे ऊर्जा स्रोतों की आपूर्ति पर भी काफी ज्यादा हुआ है.
अमेरिका ने भारी मात्रा में भेजे हथियारः इजरायली रक्षा मंत्रालय
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तनाव के बीच एक खबर सामने आई है, जिसके मुताबिक ईरान के साथ जंग की शुरुआत के बाद अमेरिका ने इजरायल को भारी मात्रा में गोला-बारूद और हथियारों की सप्लाई की है. जानकारी के मुताबिक, युद्ध की शुरू होने के बाद से लेकर अब तक अमेरिका ने गोला-बारूद और हथियारों से लदे 200 से ज्यादा विमान इजरायल में भेजे हैं
इजरायली रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी विमानों ने इजरायल को बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और हथियार पहुंचाए हैं, ताकि ईरान पर लगातार हमले जारी रखकर युद्ध में जीत हासिल की जा सके. इसके अलावा, इजरायल के रक्षा उद्योग ने भी अपने एयर डिफेंस मिसाइलों के प्रोडक्शन को तीन गुना बढ़ा दिया है और तेल अवीव इस उत्पादन को अब चार गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है.
ईरान ने सऊदी में मार गिराया अमेरिका के AWACS एयरक्राफ्ट
मध्य पूर्व में जारी जंग के बीच ईरान ने रविवार (29 मार्च, 2026) को सऊदी अरब में स्थित अमेरिका के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों और हमलावर ड्रोन्स के जरिए उसके एक AWACS विमान को मार गिराने का दावा किया. ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. पोस्ट में ईरानी न्यूज एजेंसी ने अमेरिकी वायु सेना के AWACS एयरक्राफ्ट के हमले में तबाह होने से पहले और बाद की तस्वीर साझा की. ईरान के इस हमले में 10 अमेरिकी कर्मचारी भी घायल हुए थे.
यह भी पढ़ेंः हॉर्मुज को खोलो या फिर उड़ाएंगे पावर प्लांट और तेल कुएं, जिद पर अड़े ईरान को ट्रंप की नई धमकी ]]></description>
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:11:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>पाकिस्तान में मसूद अजहर के भाई ताहिर अनवर की मौत, संदिग्ध हालत में मिला शव</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के सबसे बड़े भाई ताहिर अनवर की सोमवार (30 मार्च, 2026) की शाम अज्ञात कारणों से बहावलपुर में मौत हो गई है. मसूद का भाई ताहिर अनवर जैश ए मोहम्मद के सैन्य मामलों का प्रमुख था और आतंकियों की ट्रेनिंग से लेकर ट्रेनिंग कैम्प लगाने की पूरी जिम्मेदारी साल 2001 से संभाल रहा था.
62 साल का ताहिर अनवर 12 भाई बहनों में सबसे बड़ा था और आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के गठन से पहले मुर्गी पालन का काम करता था.
जैश के नए हेडक्वार्टर में परिवार के साथ रहता था अनवर
अभी फिलहाल आतंकी ताहिर अनवर जैश ए मोहम्मद के नए हेडक्वार्टर मरकज उस्मान ओ अली में अपने परिवार के साथ रह रहा था और आतंकियों के ट्रेनिंग कैम्प, ट्रेनिंग की व्यवस्था के अलावा मसूद का सबसे बड़ा भाई ताहिर अनवर जैश ए मोहम्मद की आतंकी गतिविधि के लिए हथियारों की खरीद फरोख्त का भी काम करता था. भारतीय समयानुसार रात साढ़े 11 बजे ताहिर अनवर का नमाज ए जनाजा नए हेडक्वार्टर मरकज उस्मान ओ अली में हुआ है, जिसमें सूत्रों के मुताबिक, जैश ए मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर समेत उसके भाई और आतंकी इब्राहिम अजहर, तल्हा अल सैफ, अब्दुर रऊफ, मोहम्मद अम्मार अल्वी मौजूद थे.
ऑपरेशन सिंदूर में बच गया था आतंकी ताहिर अनवर
सूत्रों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मरकज सुभानल्लाह में भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक में ताहिर अनवर और उसका बेटा हम्माद गंभीर रूप से घायल हुए थे, लेकिन दोनों की जान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बच गई थी, लेकिन आज सोमवार (30 मार्च, 2026) को शाम 6 बजे के आसपास जानकारी के मुताबिक ताहिर अनवर ने अज्ञात परिस्थितियों में दम तोड़ दिया है.
PAK सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही अनवर की मौत की खबर
जैश के आतंकवादी ताहिर अनवर की मौत की खबर पाकिस्तान के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी तेजी से वायरल हो रही है. इस बीच एक पोस्ट सामने आया है कि जिसमें लिखा गया है, &amp;lsquo;अल्लाह की मर्जी से मौलाना मसूद अजहर के बड़े भाई हकीम मोहम्मद ताहिर अनवर की मौत हो गई है.&amp;rsquo;
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:11:03 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;मानवीय सहायता सामग्री लाने दिल्ली जाने वाला था विमान, US ने किया हमला&amp;apos;, युद्ध के बीच ईरान का बड़ा दावा </title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और तनाव के बीच ईरान ने सोमवार (30 मार्च, 2026) को एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान के लिए राहत और मानवता सामग्री वाले एक जहाज को मार गिराया है. यह विमान मानवीय सहायता सामग्री को लाने के लिए भारत की राजधानी नई दिल्ली जाने वाला था.
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ईरान सरकार के सूत्रों का दावा है कि अमेरिका ने रजावी खुरासान प्रांत के मशहद हवाई अड्डे पर एक हवाई हमला कर महान एयर के एक विमान को क्षतिग्रस्त कर दिया. दिल्ली जा रहे इस विमान में युद्ध पीड़ितों के लिए 11 टन से ज्यादा मानवतावादी दवाएं थीं.
ईरान ने इसे सहायता पर सीधा हमला करार दिया है. हालांकि, अभी तक इस दावे की अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों या वैश्विक मीडिया की ओर से पुष्टि नहीं की गई है.
महान एयरलाइन IRGC का करती है समर्थन
महान एयर ईरान की एयरलाइन कंपनी है. ईरान के इस एयरलाइन कंपनी को पहले से ही संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) की ओर से प्रतिबंधित किया जा चुका है, क्योंकि यह एयरलाइन कंपनी ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का खुले तौर पर समर्थन करती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, यह विमान आने वाले कुछ दिनों में मानवीय सहायता सामग्री, जिसमें दवाइयां भी शामिल थीं, को लेकर जाने के लिए नई दिल्ली पहुंचने वाला था. भारत की ओर से ईरान के लिए मानवीय सहायता के तौर पर भेजी जाने वाली यह दूसरी खेप थी. भारत ने मार्च महीने की शुरुआत में ही ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के जरिए तेहरान को मानवीय सहायता की पहली खेप भेजी थी.
ईरान ने जंग के समय समर्थन देने वालों का जताया आभार
ईरान ने हाल ही में अमेरिका और इजरायल के साथ जंग के बीच समर्थन करने वालों के प्रति आभार जताया है. ईरान ने इजरायल पर दागे जाने वाले मिसाइलों पर अपने समर्थन करने वालों के लिए धन्यवाद कहा. तेहरान ने जिन देशों के प्रति आभार जताया उसमें भारत, पाकिस्तान, जर्मनी का नाम शामिल था.
दरअसल, भारत के कश्मीर में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इजरायल-अमेरिका के साथ जारी जंग के बीच मदद के तौर पर ईरान को नकद रुपये, सोने-चांदी के गहने, पीतल-तांबे के बर्तन, जमीन, कार-बाइक समेत 500 करोड़ रुपये से ज्यादा कई चीजें दान में दी थी.
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:11:03 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran War: खार्ग द्वीप ईरान के लिए कितना महत्वपूर्ण? जिस पर अमेरिका करना चाहता है कब्जा, जानें पूरी कहानी</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में पिछले चार हफ्तों से ज्यादा समय से इजरायल और अमेरिका का ईरान के साथ युद्ध लगातार जारी है. इस युद्ध के दौरान कई बार फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग द्वीप पर अमेरिका की तरफ से हमला और कब्जा करने की बात सामने आई है, लेकिन 22 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैले इस छोटे से द्वीप की सुरक्षा में ईरान पूरी तरह से लगा हुआ है और ऐसे इसलिए है क्योंकि खार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है.
करीब 8 किलोमीटर लंबा और 4 से 5 किलोमीटर की चौड़ाई वाला यह द्वीप आकार में भले ही छोटा है, लेकिन इसका ईरान के लिए इसका रणनीतिक और आर्थिक महत्व काफी बड़ा है, क्योंकि यह छोटा सा द्वीप ईरान के तेल के खजाने का मुख्य द्वार है. इस अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप की विशेषता को देखते हुए प्रसिद्ध ईरानी लेखक जलाल अल-ए-अहमद ने 1960 के दशक में इसे फारस की खाड़ी का एक अनाथ मोती कहा था.
ईरान के लिए क्या है खार्ग द्वीप का महत्व?
खार्ग द्वीप ईरान के बुशेहर पोर्ट से करीब 55 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है, जबकि यह देश की मुख्यभूमि से करीब 15 नॉटिकल मील (लगभग 28 किमी) दूर है. अगर ईरान के लिए इस द्वीप के महत्व की बात करें तो यह बेहद असाधारण है. यह द्वीप देश के कुल तेल निर्यात का करीब 90 प्रतिशत प्रोसेस करता है और हर साल करीब 950 मिलियन यानी 95 करोड़ बैरल तेल का संचालन करता है. यह द्वीप ईरान के ऑयल फील्ड्स और वैश्विक बाजारों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है. इसी कारण से इसे ईरान की आर्थिक जीवनरेखा यानी इकोनॉमिक लाइफलाइन और क्राउन ज्वेल भी कहा जाता है.
खार्ग द्वीप के तेल से ईरान की सालाना कितनी होती है कमाई?
खार्ग द्वीप से कच्चे तेल का होने वाला निर्यात ईरान की अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती देती है. जानकारी के मुताबिक, खार्ग द्वीप से ईरान को हर साल लगभग 78 बिलियन डॉलर (करीब 7.38 लाख करोड़ रुपये) का राजस्व प्राप्त होता है. वहीं, साल 2025 में ईरान ने वैश्विक बाजार में तेल निर्यात से करीब 53 बिलियन डॉलर (करीब 5 लाख करोड़ रुपये) की कमाई की, जो उसकी सालाना GDP का लगभग 11 प्रतिशत है. ईरान के खार्ग द्वीप से कच्चे तेल के निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन को जाता है, जो पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी तेल का एक प्रमुख खरीदार बना हुआ है.
खार्ग द्वीप पर हमले से ईरान को कितना होगा नुकसान?
अगर खार्ग द्वीप पर हमला होता है और इसके एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचता है तो इससे ईरान का करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात ठप हो सकता है और इसका असर न सिर्फ ईरान तक ही सीमित रहेगा, बल्कि इससे वैश्विक तेज बाजार में भी बड़ी उथल-पुथल हो सकती है.
क्या पहले कभी खार्ग द्वीप पर हुआ है हमला?
ईरान का खार्ग द्वीप पहले भी क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान निशाना बनाया जा चुका है. 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान इराकी सेना ने इस द्वीप पर कई बार बमबारी की थी. इन हमलों में ईरान के कच्चे तेल के एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान हुआ था.
ईरान ने खार्ग द्वीप को मजबूत सुरक्षा से किया लैस
ईरान ने इन्हीं खतरों के देखते हुए खार्ग द्वीप को मजबूत सुरक्षा से लैस किया है. इसमें एयर डिफेंस सिस्टम्स की तैनाती, मजबूत संरचनाएं और अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक्स शामिल हैं. इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि लगातार सैन्य हमलों के बावजूद भी यहां से ईरान के तेल निर्यात जारी रह सके.
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:11:02 +0530</pubDate>
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<title>ट्रंप की हमले की धमकियों के बीच क्यूबा की मदद को आगे आया रूस, क्रूड ऑयल से भरा टैंकर भेजा; मानसास पोर्ट पर पहुंचा</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में चल रही जंग से दुनिया में मचे ऊर्जा संकट की जद में कई देश आए हैं. ऐसे में सोमवार को क्यूबा की मदद करने के लिए रूस आगे आया है. रूस ने क्यूबा को क्रूड ऑयल से भरा एक लाख टन कार्गो पहुंचाया है. यह रूसी टैंकर क्यूबा के तट पर पहुंच गया है. इसकी पुष्टी रूसी परिवहन मंत्रालय ने की है. उन्होंने बताया कि जहाज फिलहाल मानसास पोर्ट पर अनलोडिंग के लिए इंतजार कर रहा है. रूस से यह मदद ऐसे समय आई है, जब डोनाल्ड ट्रंप क्यूबा पर हमले की धमकी दे रहे हैं.&amp;nbsp;
क्रेमलिन प्रवक्ता पेसकोव ने अपने बयान में क्या बताया?
इससे अलावा क्रेमलिन प्रवक्ता पेसकोव ने बयान जारी करते हुए कहा कि रूस क्यूबा की मदद करना अपना कर्तव्य समझता है. पेसकोव ने कहा कि मॉस्को को खुशी है कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की खेप क्यूबा पहुंच गई है. यह लाइफ सपोर्ट सिस्टम को चलाने, बिजली बनाने और लोगों को मेडिकल हेल्प समेत अन्य सर्विस देने के लिए जरूरी है.&amp;nbsp;
संकट में क्यों है क्यूबा?&amp;nbsp;
दरअसल, अमेरिका ने हाल ही में तेल पर बैन लगाया हुआ है. इससे क्यूबा के हालात बेहद ही खराब हो गए हैं. यहां गाड़ियों को तेल नहीं मिल रहा है. फ्यूल की कमी के चलते हवाई सेवाएं ठप हो गई है.&amp;nbsp;
इसके अलावा एक हफ्ते में दो बार देश का नेशनल पावर ग्रिड भी फेल हो चुका है. इससे लगभग पूरा देश अंधेरे में डूब गया था. हालात इतने बुरे हैं कि अस्पतालों में भी बिजली नहीं मिल रही. इसकी वजह से मरीजों के ऑपरेशन तक नहीं हो पा रहे हैं.
अमेरिका क्यूबा पर जल्द हमला कर सकता है: ट्रंपएक तरफ क्यूबा अपने उर्जा संकट से जूझ रहा है तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई जंग का ऐलान करते हुए दुनिया को चौंकाया है. ईरान युद्ध के बीच ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका जल्द ही क्यूबा पर हमला कर सकता है. ट्रंप लगातार क्यूबा पर हमलावर रहे हैं. वह क्यूबा के खिलाफ उसी तरह की बयानबाजी कर रहे हैं, जो उन्होंने ईरान और वेनेजुएला को लेकर की थी. इस साल के शुरुआत में अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया था. इसके अलावा 28 फरवरी को अमेरिका पर हमला कर दिया. अब लगातार ट्रंप अपने बयान के जरिए क्यूबा को हमले की धमकी दे रहे हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: ईरान ने कबूली IRGC नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसीरी की मौत, इजरायल ने किया था मारने का दावा ]]></description>
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:11:02 +0530</pubDate>
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<title>Middle East Conflict: ईरान से युद्ध में हर दिन 1 अरब डॉलर फूंक रहा अमेरिका, सेकंड दर सेकंड हो रहा बड़ा खर्चा</title>
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<description><![CDATA[ ईरान से युद्ध करना अमेरिका की आर्थिक और मानवीय स्थिति के लिए सही साबित नहीं हुआ है. यहां कीमतों में तेजी से विस्तार हो रहा है. अबतक अमेरिका इस युद्ध में अरबो डॉलर फूंक चुका है. ईरान के कॉस्ट टिकर ने डेटा जारी करते हुए कहा है कि हमलों के बाद से अमेरिका का अबतक 35 अरब डॉलर खर्च हो चुका है. इसमें करीबन 11.3 डॉलर अरब तो सिर्फ 6 दिनों में खर्च हुए हैं. हर दिन 1 अरब डॉलर खर्च हो रहा है. यानी हर सेंकड में हजारों डॉलर खर्च हो रहे हैं.&amp;nbsp;
सैन्य संपत्तियों को नुकसान, अबतक 2.9 अरब डॉलर नुकसान का अनुमान
इसके अलावा अमेरिका के सैन्य संपत्तियों को भी काफी नुकसान हुआ है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की मानें तो पिछले तीन हफ्तों में नुकसान और मरम्मत का खर्च 1.4 अरब से 2.9 अरब डॉलर होने का अनुमान लगाया गया है. दरअसल, ईरान ने अमेरिका के बुनियादी ढांचे पर अपने सस्ते लड़ाकू ड्रोन से हमला किया है.&amp;nbsp;
100 मिलियन के लड़ाकू विमान फ्रेंडली फायर में तबाह
इसके अलावा अमेरिका के तीन लड़ाकू विमान F-15E जिनकी कीमत ही 100 मिलियन डॉलर है, फ्रेंडली फायर घटना में तबाह हो चुके हैं. वहीं एक F-35A जिसकी कीमत 80 मिलियन डॉलर से ज्यादा आंकी गई है, उसकी इमरजेंसी लैंडिंग कराना पड़ी है. एक अन्य KC-135 टैंकर की हवा में एक जानलेवा टक्कर हो गई है.&amp;nbsp;
30 मिलियन डॉलर कीमत के ड्रोन भी हुए नष्ट
इसके अलावा दर्जन से ज्यादा की संख्या में एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी नष्ट हुए हैं. इनकी कीमत 30 मिलियन डॉलर है. साथ ही कई रडार और मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भी नुकसान पहुंचा है. इनकी कीमत करोड़ो डॉलर है. मानवीय नुकसान की बात करें तो अमेरिका के इस हमले में 13 जवान मारे गए हैं. वहीं 200 घायल हुए हैं. 28 फरवरी से चल रहे इस युद्ध की समाप्ति के आसार कम नजर आ रहे हैं. ऐसे में ग्लोबल ऊर्जा मार्केट में हलचल साफ देखी जा सकती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: &amp;lsquo;ये नहीं हमारी लड़ाई&amp;rsquo;, ईरान वॉर में बुरे फंसे ट्रंप, इस सहयोगी देश का भी साथ देने से इनकार ]]></description>
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:11:02 +0530</pubDate>
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<title>ईरान से जंग के बीच श्रीलंका ने दिखाई ट्रंप को आंख, अमेरिकी फाइटर जेट को नहीं दी लैंडिंग की इजाजत</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच श्रीलंका ने अपनी जमीन पर अमेरिकी लड़ाकू विमानों को उतरने की अनुमति नहीं देकर डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दिया है. श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने संसद को बताया कि सरकार ने मार्च की शुरुआत में अमेरिका के दो फाइटर जेट को देश के दक्षिण-पूर्व स्थित मत्ताला इंटरनेशल एयरपोर्ट पर उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.
हम झुकेंगे नहीं: श्रीलंका की US को दो टूक
दिसानायके ने कहा कि जिबूती स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे से दो युद्धक विमानों ने चार और आठ मार्च को श्रीलंका आने की अनुमति मांगी थी, लेकिन दोनों अनुरोध अस्वीकार कर दिए गए. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;हम कई तरह के दबावों के बावजूद अपनी तटस्थता बनाए रखना चाहते हैं. हम झुकेंगे नहीं. पश्चिम एशिया का युद्ध चुनौतियां पैदा कर रहा है, लेकिन हम तटस्थ रहने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे.&#039;
एंटी शिप मिसाइल से लैस था फाइटर जेट
राष्ट्रपति ने कहा, &amp;lsquo;अमेरिकी जिबूती स्थित अड्डे से आठ एंटी शिप मिसाइलों से लैस दो फाइटर जेट को मत्ताला अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर लाना चाहते थे और हमने मना कर दिया.&#039;
दिसानायके का यह बयान दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर से उनकी मुलाकात के एक दिन बाद आया है. बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा, बंदरगाहों को सुरक्षित बनाने, पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने तथा स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को आगे बढ़ाने के प्रयासों पर चर्चा की.
श्रीलंका के पास ईरानी शिप को US ने बनाया निशाना
अमेरिका ने 4 मार्च 2026 श्रीलंका के दक्षिणी तटीय शहर गाले के निकट ईरान के &amp;lsquo;IRIS DENA&amp;rsquo; पोत को निशाना बनाया, जिसमें 84 नाविकों की मौत हो गई, जबकि 32 को बचा लिया गया. यह शिप भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित नौसैनिक बेड़े की समीक्षा में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था.
दो दिन बाद ईरान का एक अन्य पोत &amp;lsquo;IRIS बुशहर&amp;rsquo; 219 नाविकों के साथ कोलंबो बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति चाहता था. श्रीलंका ने उसे कोलंबो तट के बाहर लंगर डालने के बाद पूर्वी बंदरगाह त्रिंकोमाली की ओर जाने को कहा. पोत के 204 नाविकों को फिलहाल कोलंबो के निकट नौसैनिक प्रतिष्ठान में ठहराया गया है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:05 +0530</pubDate>
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<title>इजरायल में ईरान का जासूस गिरफ्तार, UN  महासचिव ने की युद्ध रोकने की अपील, रूस ने इजरायली राजदूत को किया तलब</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी देते हुए कहा कि&amp;nbsp;इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक आग बन सकता है. ऐसी आग जिसे कोई भी कंट्रोल नहीं कर सकता. उन्होंने इजरायल और ईरान से युद्ध को रोकने और शांति की ओर बढ़ने की अपील की है. इसी बीच एक अहम जानकारी सामने आई है. इजरायल ने एक रिजर्व सैनिक पर ईरान के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया है. उसको गिरफ्तार कर लिया गया है.
अकसर सुना जाता रहा है कि ईरान में इजरायल के जासूस बड़ी तदाद में मौजूद हैं. लेकिन इजरायल में ईरान का जासूस मौजूद है. वही आयरन डोम से जुड़ी जानकारी लीक कर रहा है. इजरायल की तरफ से आरोप लगाया गया है कि आयरन डोम प्रणाली में तैनात एक रिजर्व सैनिक ईरान के लिए जासूसी कर रहा था. उसे टेलीग्राम पर भर्ती किया गया था. उसने ही बेसों के ग्रिड कोर्डिनेट्स और पदाधिकारियों के नाम ईरान को भेजे थे.&amp;nbsp;
हालांकि, इजरायल ने उस रिजर्व सैनिक को गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी ऑपरेशन रोअर ऑफ द लायन के एक दिन बाद हुई है. उसने अपराधों को कबूल कर लिया है. अभियोजन पक्ष ने उसके गिरफ्तारी के मुकदमे के अंत तक बढ़ाने की मांग की है. इसके अलावा ईरान के लिए जासूसी करने वाले अन्य इजरायली जासूस की गिरफ्तारी हुई है.&amp;nbsp;
रूस ने इजरायली राजदूत को तलब किया
रूस ने लेबनान में अपने चैनल के पत्रकारों को निशाना बनाए जाने के मामले में इजरायल के राजदूत को तलब किया है. रूस का आरोप है कि इजरायल ने जानबूझकर हमला किया है. यह इंटरनेशनल कानून का उल्लंघन है. इधर, पूरे मामले पर इजरायल की सेना ने कहा है कि उन्होंने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया था. ईरान के बसीज संगठन के सीक्रेट ऑफिसर और कमांडर के डिप्टी इस्माइल अहमदी की हत्या कर दी थी.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: &#039;6 महीने इजरायल-अमेरिका से टक्कर...&#039;, कहने वाले ईरान के ब्रिगेडियर अली मोहम्मद की जंग में मौत ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:05 +0530</pubDate>
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<title>LPG Crisis: तेल संकट के बीच भारत के लिए खुशखबरी! स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जल्दी निकलेंगे LPG के 2 टैंकर</title>
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<description><![CDATA[ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए दुनिया भर के देशों में कच्चे तेल, गैस और व्यापारिक जहाजों के आवाजाही पर ईरान की ओर से की गई नाकाबंदी के बीच भारत के लिए एक खुशखबरी आई है. आने वाले दिनों में भारत के राष्ट्रीय ध्वज लगे हुए दो LPG के टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की तैयारी कर रहे हैं. इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अराघची की फोन पर बात होने के बाद भारत के दो जहाज होर्मुज स्ट्रेट से निकलकर आए थे. हालांकि पिछले 24 घंटों में कच्चे तेल से लदा कोई भी टैंकर इस रास्ते से होकर नहीं गुजरा है.
खाड़ी इलाके में लंगर डाले खड़े हैं दोनों भारतीय टैंकर
अलजजीरा ने डेटा एनालिटिक्स फर्म कपलर (Kpler) के हवाले से रिपोर्ट किया है कि भारतीय झंडे लगे ये दोनों एलपीजी टैंकर फिलहाल खाड़ी क्षेत्र के जलक्षेत्र में लंगर डाले हए हैं और हालात के सुधरने का इंतजार कर रहे हैं. एक खाली कच्चे तेल का टैंकर, जिस पर अमेरिका के प्रतिबंध लागू हैं, बुधवार (18 मार्च, 2026) को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर वापस ईरानी जलक्षेत्र की ओर लौट गया.
दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है. यह समुद्री रास्ता खाड़ी देश के जलक्षेत्र को हिंद महासागर के साथ जोड़ता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में इस इलाके में किसी भी तरह से दिक्कत या बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और आपूर्ति पर पड़ सकता है.
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में की है नाकाबंदी
इजरायल और अमेरिका के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री रास्ते पर पूरी तरह से नाकाबंदी कर रखी है. ईरान इस रास्ते से होकर गुजरने वाले दुनिया के हर देश के जहाज को अपने ड्रोन और मिसाइलों का निशाना बना रही है. हालांकि, ईरान ने भारत के तेल और गैस टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरने की अनुमति दे दी है.
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:04 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;खाड़ी देश भारत को सुपरपावर...&amp;apos;, ईरान से जंग के बीच बाइडेन सरकार में अमेरिका के टॉप अफसर का बड़ा बयान</title>
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<description><![CDATA[ इजरायल और अमेरिका के साथ ईरान की जंग शुरू हुए तीन हफ्ते का समय बीत चुका है. इस दौरान जहां ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने और वहां से गुजरने वाले समुद्री जहाजों पर हमलों के कारण पूरी दुनिया में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है, वहीं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के शासन में कार्यरत वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है.
डैनियल बेनैम ने भारत को 21वीं सदी का सबसे प्रमुख मध्यस्थ करार देते हुए कहा कि खाड़ी के देश नई दिल्ली को भविष्य के एक सुपरपॉवर के तौर पर देखते हैं.
अमेरिकी पूर्व अधिकारी ने क्या कहा?
अरेबियन पेनिनसुला के एक्सपर्ट डैनियल बेनैम ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि खाड़ी देश भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों की खूब सराहना करते हैं और इसे भविष्य की एक बड़ी ताकत के तौर पर भी देखते हैं. इसके अलावा, उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान की दोस्ती और संबंधों पर कहा कि खाड़ी क्षेत्र के देश भारत के साथ बड़ी, व्यापक और रणनीतिक संबंधों को विस्तार देने के लिए पूरी तरह से संकल्पबद्ध हैं.
ओमान जैसे देश के भारत के हैं करीबी रिश्तेः बेनैम
बेनैम ने कहा कि गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल (GCC) के सभी देशों के साथ बातचीत करने के बाद यह स्पष्ट होता है कि इस इलाके के लगभग सभी देश भारत को भविष्य की बड़ी शक्ति के तौर पर देखते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं है कि भारत से उन्हें लेबर मिलते हैं और पूंजी भेजते हैं, बल्कि वे भारत को 21वीं सदी के सबसे बड़ा मध्यस्थ मानते है.
उन्होंने कहा कि अगर तुरंत नहीं तो निश्चित रूप से समय के साथ ऐसा होगा. यही भविष्य की दिशा है. सभी इसे देख रहे हैं और इसकी सराहना कर रहे हैं. यही कारण है कि ओमान जैसे देश के साथ समझौता हुआ है, लेकिन यही कारण है कि पीएम मोदी और मोहम्मद बिन जायद के बीच इतने मजबूत रिश्ते हैं.
यह भी पढ़ेंः भारत में प्रीमियल पेट्रोल के दाम बढ़े, रेगुलर फ्यूल में बदलाव नहीं, जानें दिल्ली, मुंबई से UP-बिहार तक कितनी कीमतें ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:04 +0530</pubDate>
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<title>‘मिसाइलों और ड्रोन से परे हम वैश्विक घमंड से लड़ने...’, मुज्तबा खामेनेई ने ईरान को दिया ईद का बधाई संदेश</title>
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<description><![CDATA[ इजरायल और अमेरिका के साथ जारी युद्ध के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मुज्तबा खामेनेई ने शुक्रवार (20 मार्च, 2026) को देशवासियों और दुनिया भर के मुसलमानों को फारसी नववर्ष (नवरोज) और ईद-उल-फितर की मुबारकबाद दी. उन्होंने कहा कि मैं पूरी दुनिया के मुसलमानों को ईद की बधाई देता हूं.&amp;nbsp;
ईद-उल-फितर के मौके पर देश के लोगों को संदेश देते हुए सुप्रीम लीडर ने कहा कि इस साल आध्यात्मिक वसंत और प्रकृति का वसंत एक साथ आए हैं, जो इन दोनों त्योहारों को और भी खास बनाता है. यह समय एकता, धैर्य और आस्था को मजबूत करने का है.
पिछले साल ईरान की जनता ने तीन लड़ाई लड़ीं: खामेनेई
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पिछले साल ईरान की जनता ने सैन्य और सुरक्षा से जुड़े तीन बड़े मुकाबलों को सामना किया, लेकिन जनता ने साहस और दृढ़ता का परिचय दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि दुश्मनों ने ईरान पर हमला कर देश में डर और निराशा फैलाने की कोशिश की, लेकिन वे अपने इरादों में जीत नहीं पाए. हम मिसाइलों और ड्रोन के हमलों से परे वैश्विक घमंड के लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.
इजरायल पर झूठे षड्यंत्र रचने का आरोप
सुप्रीम लीडर ने विश्वास जताते हुए कहा कि ईरान के लोगों के बीच एकता और मजबूत होगी और विरोध करने वालों को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि इजरायल झूठे षड्यंत्रों के जरिए ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहा है.
जंग में मारे गए लोगों के प्रति जताई संवेदना
इसके साथ ही उन्होंने तथाकथित थोपे गए दूसरे युद्ध, जनवरी के तख्तापलट, तीसरे थोपे गए युद्ध और सुरक्षा और सीमा पर शहीद हुए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा कि इन शहीदों के बलिदान को देश हमेशा याद रखेगा और उनके परिवारों के साथ पूरा देश एकजुटता के साथ खड़ा है. आखिर में उन्होंने नवरोज और ईद उल फितर के विशेष संयोग को देश के लिए एक सकारात्मक ऊर्जा और एकता का प्रतीक करार दिया.
पहली जंग के दौरान दुश्मन को भ्रम था: खामेनेई
मुज्तबा खामेनेई ने आगे कहा कि जून में हुए पहली जंग के दौरान दुश्मन को यह भ्रम था कि लोग खुद इस्लामी शासन को सत्ता से बेदखल कर देंगे, लेकिन लोगों की सतर्कता और इस्लाम के लड़ाकों की अद्वितीय बहादूरी के कारण दुश्मन में निराशा की झलक दिखाई देने लगी और आखिर में उसे मध्यस्थता और सीजफायर के जरिए खुद को बचाना पड़ा.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः भारत में प्रीमियल पेट्रोल के दाम बढ़े, रेगुलर फ्यूल में बदलाव नहीं, जानें दिल्ली, मुंबई से UP-बिहार तक कितनी कीमतें ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:04 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US War: वियतनाम युद्ध की याद दिलाकर ईरान ने अमेरिका को घेरा, कहा&#45; &amp;apos;जीत के झूठे दावे बंद...&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे जंग को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आज की स्थिति कुछ हद तक वियतनाम युद्ध जैसी लग रही है. उनका मतलब यह था कि जैसे वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिका बार-बार जीत का दावा करता था, लेकिन जमीन पर हालात अलग थे, वैसा ही कुछ अब भी हो सकता है. ANI रिपोर्ट के मुताबिक अराघची ने खास तौर पर फाइन O क्लॉक Follies का जिक्र किया. यह 1960 के दशक में साइगोन में होने वाली रोज की प्रेस ब्रीफिंग थी, जहां अमेरिकी सेना यह दिखाने की कोशिश करती थी कि वे युद्ध जीत रहे हैं, जबकि असल में हालात खराब थे.
वियतनाम युद्ध के समय अमेरिकी जनरल विलियम वेस्टमोरलैंडने भी कहा था कि युद्ध में प्रगति हो रही है और अब जीत करीब है, &amp;nbsp;लेकिन इसके कुछ ही समय बाद 1968 में टेट आक्रामक हुआ, जिसमें दुश्मन ने बड़े पैमाने पर हमला किया और अमेरिका के दावों पर सवाल खड़े हो गए. अराघची का कहना है कि आज भी अमेरिका कुछ ऐसा ही दावा कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार कहती है कि वह जीत रही है, लेकिन जमीन पर हालात अलग हैं.
अमेरिका के बड़े-बड़े दावे
अब्बास अराघची ने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका का एक F-35 Lightning II को नुकसान पहुंचा है. अमेरिकी युद्धपोत जैसे यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन पीछे हटते दिख रहे हैं. हालांकि अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि F-35 ने सुरक्षित लैंडिंग की और मामले की जांच चल रही है. इस मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप को अपने देश के अंदर भी आलोचना झेलनी पड़ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, उनके एक अधिकारी जो केंट ने इस्तीफा तक दे दिया. वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका जीत रहा है और ईरान की एयर डिफेंस कमजोर हो चुकी है.
वियतनाम युद्ध से क्या सीख?
वियतनाम युद्ध में अमेरिका ने लाखों सैनिक भेजे और भारी बमबारी की, लेकिन अंत में उसे पीछे हटना पड़ा. वियतनाम युद्ध में अमेरिका के 58,000 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे. करीब 20 से 30 लाख वियतनामी लोगों की मौत हुई थी. 1975 में युद्ध खत्म हुआ और उत्तर वियतनाम जीत गया था. रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान युद्ध में अब तक 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए. करीब 200 घायल हुए. ईरान में 1400 से ज्यादा लोगों की मौत और 18,000 घायल बताए जा रहे हैं अराघची का मैसेज क्लियर है. वे अमेरिका को चेतावनी दे रहे हैं कि सिर्फ हम जीत रहे हैं कहने से हालात नहीं बदलते. अगर जमीनी सच्चाई अलग है तो यह स्थिति वियतनाम जैसी भी हो सकती है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:03 +0530</pubDate>
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<title>मिडिल ईस्ट में 3 वॉरशिप भेजेगा अमेरिका, ट्रंप ने नाटो को सुनाई खरी&#45;खोटी... ईरान युद्ध में 5 बड़े अपडेट्स</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में जारी तनाव और इजरायल-अमेरिका के साथ ईरान की जंग में हर रोज नया घटनाक्रम सामने आ रहे हैं. ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में की गई नाकाबंदी को लेकर अमेरिका ने अपनी नाराजगी जाहिर की है. जबकि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मुज्तबा खामेनेई ने ईद-उल-फितर के मौके पर दुनिया भर के मुसलमानों को बधाई दी है. इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर ईरान के खिलाफ झूठे षड्यंत्र बनाने का आरोप लगाया है. जानें ईरान युद्ध से जुड़े पांच बड़े अपडेट्स-&amp;nbsp;
मिडिल ईस्ट में तीन वॉरशिप भेज रहा अमेरिका 
ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिका का पेंटागन मिडिल ईस्ट में तीन वॉरशिप और हजारों की संख्या में अतिरिक्त मरीन सेना भेज रहा है. हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वह ईरान में जमीन पर सैनिकों को तैनात नहीं करेंगे.
अमेरिका की ओर से मध्य पूर्व में भेजे जाने वाले तीन वॉरशिप्स में USS बॉक्सर और दो एम्फीबियस असॉल्ट रेडी वॉरशिप्स शामिल हैं. इसके अलावा, पेंटागन 11वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के लगभग 2,200 से 2,500 मरीन सैनिकों की भी तैनाती कर रहा है.
मुज्तबा खामेनेई का ईरान को संदेश 
फारसी नववर्ष और ईद-उल-फितर के मौके पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मुज्तबा खामेनेई ने देशवासियों के नाम बधाई संदेश दिया है. इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका और इजरायल को आड़े हाथ लेते हुए धमकी भी दी. मुज्तबा खामेनेई ने कहा कि पिछले साल ईरान की जनता ने सैन्य और सुरक्षा से जुड़े तीन बड़े मुकाबलों का सामना किया.
उन्होंने आरोप लगाया कि दुश्मनों ने ईरान पर हमला कर देश में डर का माहौल फैलाने की कोशिश की, लेकिन वे अपने इरादों में जीत नहीं पाए. हम मिसाइलों और ड्रोन के हमलों से परे वैश्विक घमंड के लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.
ट्रंप ने नाटो देशों को सुनाई खरी-खोटी&amp;nbsp;
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक तेल संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी को लेकर नाटो देशों पर नाराजगी जताई है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध में अकेले लड़ रहा है और नाटो के सदस्य देश इसका साथ नही दे रहे हैं. अब जब खतरा कम हो गया है तो वे तेल की दामों को लेकर शिकायत कर रहे हैं, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को खोलने में मदद करने को तैयार नहीं है. ये लोग कायर हैं और हम इन्हें याद रखेंगे.&amp;nbsp;
IRGC के टॉप कमांडर नैनी मारे गए
ईरान के सरकारी न्यूज चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी की अमेरिका और इजरायल की ओर से की गई संयुक्त कार्रवाई में मौत हो गई है. उनकी मौत खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिकों को मौजूद होने के दावों को चुनौती के साथ धमकी देने के कुछ घंटों के बाद ही हो गई.&amp;nbsp;
श्रीलंका ने अमेरिका के फाइटर जेट को नहीं दी लैंडिंग परमिशन
वहीं, ईरान के साथ जंग के बीच एशियाई देश श्रीलंका ने अमेरिकी फाइटर जेट को अपनी जमीन पर लैंडिंग करने के लिए इजाजत देने से इनकार कर दिया. श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने अपने देश की संसद में कहा कि सरकार ने मार्च महीने की शुरुआत में अमेरिका के दो लड़ाकू विमानों के देश के मत्ताला इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः &#039;खाड़ी देश भारत को सुपरपावर...&#039;, ईरान से जंग के बीच बाइडेन सरकार में अमेरिका के टॉप अफसर का बड़ा बयान ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:03 +0530</pubDate>
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<title>ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर की संभावना से किया इनकार, जानें चीन&#45;जापान का जिक्र कर क्या कहा?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह ईरान के साथ चल रहे युद्ध में सीजफायर नहीं चाहते. उन्होंने ये भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट समय आने पर खुद ही खुल जाएगा और अगर चीन इसमें शामिल हो जाए तो यह अच्छा होगा.
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता पाने के लिए बहुत मदद की जरूरत है. अगर चीन और जापान जैसे देश इसमें शामिल हों तो अच्छा होगा.
&#039;युद्धविराम नहीं चाहता&#039;मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ट्रंप ने युद्धविराम की संभावना से इनकार करते हुए कहा, &quot;देखिए, हम बातचीत कर सकते हैं लेकिन मैं युद्धविराम नहीं चाहता. आप जानते हैं, जब आप दूसरे पक्ष को पूरी तरह से नष्ट कर रहे हों तो युद्धविराम नहीं किया जाता है.&quot;&amp;nbsp;
क्या इजरायल युद्ध खत्म करने के लिए तैयार होगा?&amp;nbsp;जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई पूरी करने के बाद इजरायल युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार होगा, तो ट्रंप ने कहा, &quot;मुझे लगता है ऐसा होगा.&quot; अमेरिकी राष्ट्रपति ने ब्रिटेन की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में मदद देने में उन्हें तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए थी.&amp;nbsp;
ट्रंप ने एक बार फिर उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्यों और चीन सहित अपने सैन्य सहयोगियों पर होर्मुज जलमार्ग को खोलने में मदद करने से इनकार करने के लिए जमकर निशाना साधा. होर्मुज जलमार्ग वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस प्रवाह के लगभग पांचवें हिस्से का परिवहन करता है.
चीन और जापान का जिक्र कर क्या कहाअमेरिकी राष्ट्रपति ने होर्मुज के बारे में कहा, &amp;ldquo;नाटो हमारी मदद कर सकता है, लेकिन उन्होंने अभी तक ऐसा करने की हिम्मत नहीं दिखाई. होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में बात करते हुए ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि एक समय ऐसा आएगा जब यह अपने आप खुल जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज से सुरक्षित आवागमन के लिए काफी मदद की जरूरत है और अगर चीन और जापान जैसे देश इसमें शामिल हों तो अच्छा होगा.
युद्ध की शुरुआत से ही ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से घेर रखा है, जिससे समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में भारी वृद्धि देखने को मिल रही है.
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Saudi Arab Oil Impact: तेल की किल्लत से सऊदी अरब की तिजोरियां भरीं! फिर भी तीन वजहों से खुश नहीं, दुनिया में बदनामी का डर क्यों? ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:03 +0530</pubDate>
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<title>ईरान में अब तक 2000 लोगों की मौत, अमेरिका&#45;इजरायल पर भड़का तेहरान, जानें क्या कहा</title>
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<description><![CDATA[ तेहरान विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर फाउड इजादी&amp;nbsp;ने अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों को &#039;गैरकानूनी&#039; बताते हुए कहा है कि इन हमलों में 2,000 से अधिक नागरिक मारे गए, जिनमें 165 बच्चियां भी शामिल थीं. उन्होंने इसे अनावश्यक युद्ध करार दिया और कहा कि ईरान अमेरिका के लिए कोई खतरा नहीं था.
अमेरिकी दबाव और इजरायल का हाथइजादी ने दावा किया कि यह हमला इजरायल के दबाव में हुआ. उन्होंने कहा कि इजरायल इस क्षेत्र में प्रभुत्व स्थापित करने के लिए अमेरिकी सैनिकों का इस्तेमाल कर रहा है. उनका कहना है कि इसने न केवल ईरान बल्कि भारत समेत कई अन्य देशों के लिए भी कठिनाइयां पैदा की हैं. इजरायल का मकसद ईरानी तेल पर नियंत्रण हासिल करना है, जैसा उन्होंने 1953 में एक तख़्ता पलट के दौरान किया था.

#WATCH | Tehran, Iran: On US-Israel joint attack on Iran, Foad Izadi, Associate Professor at the University of Tehran, says, &quot;We have lost over 2,000 civilians, including 165 little girls, when their school was hit by American Tomahawk missiles on the first day of the illegal&amp;hellip; pic.twitter.com/ndeTlCrbDc
&amp;mdash; ANI (@ANI) March 21, 2026



ईरानी प्रतिशोध और तेल सुविधाओं की रक्षाईरानी प्रोफेसर ने कहा कि ईरान ने शुरुआत में सिर्फ अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, क्योंकि वे&amp;nbsp; वैलिड सैन्य टारगेट हैं. उन्होंने बताया कि ईरान ने तेल सुविधाओं को तब तक निशाना नहीं बनाया जब तक कि दूसरी तरफ से ईरानी तेल सुविधाओं पर हमला नहीं किया गया. उनका कहना है कि तेल रिफाइनरी सामान्यत: वैध सैन्य लक्ष्य नहीं होती, लेकिन जब हमारी तरफ हमला किया गया, तो ईरान के पास जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.
अंतरराष्ट्रीय प्रभावइजादी के अनुसार, यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और राजनीतिक स्थिरता पर भी असर डाल रहा है. उनका यह बयान ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव की गंभीरता को दर्शाता है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:02 +0530</pubDate>
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<title>US Iran War: &amp;apos;इतनी मोहब्बत है तो ईरान चले जाओ...&amp;apos;, आसिम मुनीर ने शिया धर्मगुरुओं को दी धमकी, पाकिस्तान में मचा बवाल</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के चीफ ऑफ़ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने बीते गुरुवार (19 मार्च 2026) को रावलपिंडी में जनरल हेडक्वार्टरस (GHQ) में पाकिस्तान के एक दर्जन से ज़्यादा शिया धर्मगुरुओं के साथ मुलाक़ात की थी, साथ ही ईरान युद्ध और देश के हालात पर चर्चा की थी लेकिन उस मुलाकात में किस तरफ से शिया समुदाय के लोगों को आसिम मुनीर ने नीचा दिखाया था और ईरान चले जाने तक की बात कही थी इस बात का खुलासा आसिम मुनीर के साथ बैठक में मौजूद पाकिस्तानी शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी ने शुक्रवार (20 मार्च 2026) को इस्लामाबाद में किया.
पाकिस्तानी शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी &amp;nbsp;ने आज इस्लामाबाद स्थित अपनी मस्जिद में लोगो को बताया की पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने शिया धर्मगुरुओं के साथ मुलाकात में कहा की &amp;ldquo;अगर आपको ईरान से इतनी ही मोहब्बत है तो आप ईरान चले जाओ. शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी के मुताबिक मुलाकात के दौरान शुरुआत में आसिम मुनीर ने अयातुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने के बाद इस्लामाबाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगिट बाल्टिस्तान में हुए प्रदर्शन पर नाराज़गी जाहिर की साथ ही कहा जिस तरह से उस दिन पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगिट बाल्टिस्तान में सेना की इमारत को जलाया गया था वो बर्दाश्त करने लायक नहीं है.
पाकिस्तानी शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी
पाकिस्तानी शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी &amp;nbsp;के मुताबिक आसिम मुनीर बड़े ग़ुस्से से शिया धर्मगुरुओं से बात कर रहा था ऐसे में उन्होंने आसिम मुनीर को टोका और याद दिलाया की पाकिस्तानी फौज में कई शिया अफसर काम करते हैं और ख़ुद पाकिस्तानी शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी &amp;nbsp;के मामा अमीर हयात को सितार ए जुर्रत मिला था साथ ही उनके परिवार के अन्य सदस्य भी पाकिस्तान की फौज में काम कर रहे हैं, साथ ही इस्लामाबाद में हुए बवाल में जहां पुलिस के साथ शिया समुदाय के लोगो का टकराव हुआ था उस दौरान हिंसा करने वाले लोग शिया धर्मगुरुओं की बात ही नहीं मान रहे थे और इस बात की तस्दीक ख़ुद आईजी इस्लामाबाद ने की थी.
अल्लामा आगा शिफा नजफी ने आसिम मुनीर पर क्या कहा?
अल्लामा आगा शिफा नजफी &amp;nbsp;के मुताबिक उनकी ये बात कहने पर आसिम मुनीर का लहजा थोड़ा नरम जरूर हुआ लेकिन उसके बाद आसिम मुनीर ने सीधा अफसोसनाक बात कही की अगर आपको ईरान से इतनी ही मोहब्बत है तो आप ईरान चले जाओ&amp;rdquo;. अल्लामा आगा शिफा नजफी ने दुख के साथ कहा कि आज हमसे कहा जा रहा है ईरान चले जाओ, कभी इस्लामाबाद, कराची में किसी शिया समुदाय के व्यक्ति ने कभी भी क्या किसी सैनिक की जान ली है क्या ??
अल्लामा आगा शिफा नजफी उठाए सवाल
अल्लामा आगा शिफा नजफी ने सवाल उठाते हुए कहा की जिन लोगो ने सैनिकों के सिर को काट कर उनके सिरो से फुटबॉल खेलने का काम किया, इस्लामाबाद में सिटिंग जर्नल को मारा था क्या कभी उनसे कहा की अफगानिस्तान चले जाओ लेकिन आज हमसे कहा जा रहा है की ईरान चले जाओ. आगे अल्लामा आग़ा शिफा नज़फ़ी ने बताया की आसिम मुनीर ने शिया समुदाय के धर्मगुरुओं को बताया की सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान का रक्षा समझौता है और ईरान सऊदी पर हमला कर रहा है ऐसे में आसिम मुनीर ने ईरान से कह दिया है कि ईरान सऊदी पर हमला जारी रखता है तो पाकिस्तान को सऊदी की रक्षा के लिए उतारना पड़ेगा. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:02 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Iran, War:, इतनी, मोहब्बत, है, तो, ईरान, चले, जाओ..., आसिम, मुनीर, ने, शिया, धर्मगुरुओं, को, दी, धमकी, पाकिस्तान, में, मचा, बवाल</media:keywords>
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<title>गैस_खत्म,_पूरी_सच्चाई_आई_सामने!_LPG_Cylinder_Crisis_!_LPG_Gas_Shortage_in_India</title>
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<description><![CDATA[ Saudi_Prince_Begs_India_for_Rice_After_Iran_Blocks_Hormuz___Ankit_Awasthi_Sirसायरा,_शरीफ,_सलमा_हुईं_गिरफ्तार,_पलटा_तरुण_केस!_Delhi_Uttam_Nagar_Murder_Case ]]></description>
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<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 23:30:03 +0530</pubDate>
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<title>Ayatollah_Ali_Khamenei_की_बहन_निकली_मास्टरमाइंड,_हुआ_होश_उड़ाने_वाला_खुलासा!_Iran_!_Israel</title>
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<description><![CDATA[ Khamenei_का_खात्मा_होते_ही_Irani_लड़कियों_ने_खूब_मनाया_जश्न,_वीडियो_वायरल_।_RSM_Newsईरान_ने_दुबई_में_बम_से_गिराया_सलमान-शाहरुख_खान_के_घर,_बाल-बाल_बच्चे_सलमान_खान!_Iran-israel_War ]]></description>
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<title>सरकार_ने_8वें_वेतन_आयोग_की_शर्तों_को_मंजूरी_दी__1_जनवरी_2026_से_लागू&#45;_जानिए_कितनी_बढ़ेगी_सैल</title>
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<title>दुनिया_का_छठा_सबसे_बड़ा_भूकंप,_8.8_तीव्रता__दुनिया_के_12_देशों_में_सुनामी_का_अलर्ट_!_20_लाख_लो</title>
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<title>Owaisi_on_Bihar_Voter_List__बिहार_वोटर_लिस्ट_मामले_पर_भड़के_AIMIM_चीफ_ओवैसी,_किसे_सुना_गए</title>
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<title>Iran_Israel_War__इजरायल_ने_ईरानी_राष्ट्रपति_Masoud_Pezeshkian_को_जान_ने_मारने_की_कोशिश_की!__</title>
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<title>Delhi_NCR_Earthquake__दिल्ली_एनसीआर_में_दूसरे_दिन_भूकंप_के_झटके_।_Jhajjar_।_Breaking_News_। TRN LIVE</title>
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