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<title>Tej Rafter News &#45; : लाइफ स्टाइल</title>
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<description>Tej Rafter News &#45; : लाइफ स्टाइल</description>
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<title>Sock Odor Removal: मोजे की बदबू से होना पड़ता है शर्मिंदा? इस आसान ट्रिक से पूरी तरह मिल जाएगी निजात</title>
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Sock Odor Removal: अक्सर आपने भी महसूस किया होगा कि जूते उतारते ही पैरों और मोजों से आने वाली तेज बदबू आपके लिए परेशानी बन जाती होगी. यह न सिर्फ खुद को असहज महसूस कराती है, बल्कि आसपास बैठे लोग को भी परेशान कर देती है. गर्मियों में यह समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि ज्यादा पसीना और नमी बैक्टीरिया को पनपने का मौका देती है, जो बदबू का कारण बनते हैं. दरअसल पैरों में शरीर के अन्य हिस्सों के तुलना में ज्यादा पसीने की ग्रंथियां होती है. जब पूरे दिन पैर जूते और और मोजों के अंदर बंद रहते हैं, तो हवा नहीं लग पाती है और पसीना सूख नहीं पाता. यही नमी बैक्टीरिया के अनुकूल माहौल बनाती है जो पसीने को तोड़कर बदबू पैदा करते हैं. ऐसे में अगर मोजे सही तरीके के न हो या उन्हें समय पर न बदला जाए तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर आपको भी मोजे की बदबू से शर्मिंदा होना पड़ता है तो किस आसन ट्रिक से आपको इस शर्मिंदगी से पूरी तरह निजात मिल जाएगी?
मोजे की बदबू से बचने के आसान उपाय
इस समस्या से राहत पाने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं. सबसे पहले पैरों की सफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. रोजाना पैरों को साबुन से धोकर अच्छी तरह सुखाएं, ताकि नमी न रहे. वहीं अगर पैरों में ज्यादा पसीना आता है, तो मोजे पहनने से पहले टैल्कम पाउडर या एंटी फंगल पाउडर का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे पसीना कम होगा और बदबू भी नहीं आएगी. कई लोग मोजे पर हल्का परफ्यूम छिड़क कर भी बदबू को कंट्रोल करते हैं.
सही मोजे और जूते का चयन भी जरूरी
गर्मियों में हल्के और सांस लेने वाली फैब्रिक के मोजे पहनना ज्यादा फायदेमंद रहता है. कॉटन या बांस फाइबर वाले मोजे पसीने को सोखते हैं और पैरों को सुखा रखते हैं. वहीं नायलॉन या सिंथेटिक मोजे बदबू को बढ़ा सकते हैं, क्योंकि इनमें हवा का प्रवाह कम होता है. इसके अलावा जूते भी ऐसे पहनने चाहिए, जो हवादार हो और ज्यादा टाइट न हो. तंग जूतों में पसीना ज्यादा आता है और बदबू जल्दी बनने लगती है. जूते को रोजाना पहनने के बजाए बीच-बीच में बदलकर भी पहनना चाहिए, ताकि उनमें जमा नमी को सूखने के लिए समय मिल सके.
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जूते की सफाई भी जरूरी
जूते और उनके इनसोल को समय-समय पर साफ करना जरूरी है. जूते को धोने के बाद धूप या खुली हवा में अच्छी तरह सुखाना चाहिए. नमी खत्म होने से बैक्टीरिया पनप नहीं पाते और बदबू कम हो जाती है. एक आसान घरेलू ट्रिक के तौर पर रात में जूते के अंदर टी बैग रखकर छोड़ दिया जाए, तो सुबह तक बदबू काफी हद तक कम हो जाती है. इसके अलावा बेकिंग सोडा, नमक या अखबार जूतों की नमी सोखने में मदद करते हैं.
एसेंशियल ऑयल और डियोड्रेंट का इस्तेमाल
मोजों या जूते में लैवेंडर या टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदें डालने से भी बदबू कम की जा सकती है. इनमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं. वहीं पैरों पर डियोड्रेंट या फुट स्प्रे का इस्तेमाल भी कारगर साबित होता है.
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:01:54 +0530</pubDate>
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<title>Akshaya Tritiya 2026 पर लक्ष्मी जी को बुलाना चाहते हैं घर में, तो गरुड़ पुराण का ये उपाय करें?</title>
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<description><![CDATA[ Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है. इस दिन किए गए दान, जप और पूजन का फल &#039;अक्षय&#039; यानी कभी भी खत्म न होने वाला माना जाता है. खास तौर से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा इस दिन अत्यंत फलदायी मानी गई है.
इस साल अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल 2026, रविवार के दिन पड़ रहा है. अक्षय तृतीया के मौके पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा पाने के लिए गरुड़ पुराण से जुड़ा खास उपाय करने से फायदा मिल सकता है. आइए जानते हैं इसके बारे में.&amp;nbsp;
गरुड़ पुराण में लक्ष्मी साधना का वास्तविक मतलब
भगवान विष्णु द्वारा बताए गए सिद्धांतों में धन और समृद्धि को मात्र मंत्रों से नहीं, बल्कि धर्म, कर्म और सदाचार से भी जोड़ा गया है.&amp;nbsp;
गरुड़ पुराण में साफ-साफ लिखा है कि,&amp;nbsp;
जहां सच, स्वच्छता और दान का प्रभाव अधिक होता है, मां लक्ष्मी वहीं वास करती हैं.लालच, आलस्य और अधर्म से लक्ष्मी जी नाराज हो जाती हैं.&amp;nbsp;
मतलब साफ है कि, केवल नाम जपना पर्याप्त नहीं है, जीवनशैली भी वैसी होनी चाहिए.&amp;nbsp;

मां लक्ष्मी के 5 स्वरूप क्या दर्शाते हैं?
मां लक्ष्मी के अलग-अलग स्वरूप जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े होते हैं-
आदिलक्ष्मीयह मूल शक्ति का प्रतीक है. जीवन में स्थिरता और शांति देती हैं.
धन लक्ष्मीधन, वैभव और आर्थिक समृद्धि का प्रतीक
धान्यलक्ष्मीअन्न, भोजन और पोषण का प्रतिनिधित्व करती हैं.&amp;nbsp;
गजलक्ष्मीराजसी सुख, प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रतीक&amp;nbsp;
वीरलक्ष्मीसाहस, शक्ति और निर्णय क्षमता प्रदान करती हैं.&amp;nbsp;
सबसे जरूरी बात यह है कि मां लक्ष्मी के नाम ये चमत्कारी नहीं हैं, बल्कि जीवन के अलग-अलग पहलुओं को बैलेंस करने का प्रतीक हैं.&amp;nbsp;
मोबाइल, टीवी या फ्रिज खरीदने का प्लान? अप्रैल 2026 में जानें कौन-सी तारीख है सबसे शुभ?
अक्षय तृतीया पर कैसे करें जाप?
अक्षय तृतीया के मौके पर अगर आप सच में इसका लाभ लेना चाहते हैं, तो इसे सही तरीके से जाप करें-
सुबह नहाने के बाद साफ कपड़े पहनें.&amp;nbsp;घर के मंदिर में घी का दीपक जलाएं.&amp;nbsp;चावल (अक्षत) को शुद्धता के तौर पर हाथ में लें.&amp;nbsp;एक-एक करके इन 5 नामों का जाप करेंं.&amp;nbsp;आखिर में चावल को एक लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या पूजा कक्ष में रखें.&amp;nbsp;
क्या अक्षय तृतीया पर इन उपायों से पैसा डबल हो सकता है? जवाब है बिल्कुल भी नहीं.
कोई भी शास्त्र यह दावा नहीं करता कि केवल मंत्र जपने से पैसा डबल हो जाएगा. अगर ऐसा होता, तो दुनिया में हर कोई अमीर होता.
लक्ष्मी जी की कृपा का असल मतलब है,&amp;nbsp;

सही अवसर मिलना
मेहनत का फल मिलना
आर्थिक स्थिरता आना

अक्षय तृतीया पर मां लक्ष्मी के इन 5 नामों का जाप करने से सकारात्मक और आध्यात्म के प्रति रुचि बढ़ती है.
अगर आप सच में चाहते हैं कि, लक्ष्मी आपके घर में स्थायी रूप से आएं, तो&amp;nbsp;

ईमानदारी के साथ अपना काम करें.&amp;nbsp;
घर को साफ रखें.
जरूरतमंदों की मदद करें.&amp;nbsp;
नियमित रूप से पूजा-पाठ करें.&amp;nbsp;

Akshaya Tritiya 2026: बच्चों के लिए क्या खरीदें ? ये 5 चीजें बनेंगी उनके उज्ज्वल भविष्य का आधार
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive. com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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<title>Air New Zealand Skynest: इकोनॉमी में भी बंक&#45;बेड देने की तैयारी कर रही यह एयरलाइन, जानें किस रूट पर मिलेगा फायदा?</title>
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<description><![CDATA[ What Is Air New Zealand Skynest: लंबी दूरी की फ्लाइट्स को लेकर एक बड़ा बदलाव आने वाला है. एयर न्यूजीलैंड ने अपने इकोनॉमी स्काईनेस्ट का एलान किया है, जो आने वाले समय में लंबी हवाई यात्राओं का अनुभव पूरी तरह बदल सकता है. एयरलाइन के प्रेस रिलीज के अनुसार, यह एक बंक बेड स्टाइल स्लीपिंग सिस्टम है, जिसे खास तौर पर इकॉनमी और प्रीमियम इकॉनमी क्लास के यात्रियों के लिए तैयार किया गया है, खासकर उन फ्लाइट्स के लिए जो 16 से 18 घंटे या उससे ज्यादा लंबी होती हैं.
कब शुरू होगी बुकिंग?
एयरलाइन ने बताया है कि स्काईनेस्ट की बुकिंग 18 मई 2026 से शुरू होगी और यह सुविधा नवंबर 2026 से उनकी नई Boeing 787-9 Dreamliner फ्लाइट्स में उपलब्ध होगी. यह दुनिया में अपनी तरह का पहला ऐसा कॉन्सेप्ट है, जिसे कई सालों की रिसर्च और टेस्टिंग के बाद तैयार किया गया है.
क्या होगी सुविधा?
Skynest के तहत विमान में कुल छह स्लीपिंग पॉड्स होंगे. ये छोटे-छोटे बंक बेड की तरह होंगे, जहां यात्री पूरी तरह लेटकर आराम कर सकेंगे, जो कि आमतौर पर इकॉनमी सीट्स में संभव नहीं होता. हर पॉड की लंबाई लगभग 6.6 फीट (करीब 203 सेमी) और चौड़ाई करीब 64 सेमी होगी, ताकि सीमित जगह में भी आरामदायक नींद मिल सके. यात्रियों को इसमें ताजा बिस्तर दिया जाएगा, जिसमें तकिया, चादर और कंबल शामिल होंगे. इसके अलावा एक छोटा अमेनिटी किट भी मिलेगा, जिसमें आई मास्क, मोजे और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स होंगे. हर पॉड में प्राइवेसी के लिए पर्दे, पढ़ने के लिए लाइट, वेंटिलेशन, यूएसबी चार्जिंग पोर्ट, सीट बेल्ट और ईयरप्लग जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी.
टिकट का दाम कितना होगा?
हालांकि यह सुविधा टिकट के बेस प्राइस में शामिल नहीं होगी. इसे इस्तेमाल करने के लिए यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा. जानकारी के मुताबिक, एक यात्री चार घंटे के लिए करीब लगभग 28,000 में बुक कर सकता है. हर यात्री को एक ही सेशन बुक करने की अनुमति होगी और एक फ्लाइट में दो सेशन उपलब्ध होंगे, यानी कुल मिलाकर 12 यात्री इस सुविधा का फायदा उठा सकेंगे.
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क्या है रूल इसके लिए?
एयरलाइन ने इसके लिए कुछ नियम भी तय किए हैं, जैसे पॉड के अंदर खाना खाने की अनुमति नहीं होगी और एक पॉड में दो लोग साथ नहीं रह सकते. हालांकि खर्राटे लेने पर कोई रोक नहीं है. यह सुविधा सबसे पहले उन रूट्स पर शुरू की जाएगी जो दुनिया की सबसे लंबी फ्लाइट्स में गिने जाते हैं, जैसे ऑकलैंड से न्यूयॉर्क का रूट, जो करीब 17&amp;ndash;18 घंटे का होता है. एयरलाइन के सीईओ निखिल रविशंक के अनुसार, यह पहल यात्रियों को लंबी उड़ानों में बेहतर आराम देने के लिए की गई है, जिससे यात्रा ज्यादा सहज और सुविधाजनक बन सके.
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<title>Types Of Yogurt: कितनी तरह का होता है दही, कहीं गलत चीज तो नहीं खा रहे आप? यहां जानें</title>
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Types Of Yogurt: दही हमारे इंडियन खाने का एक बहुत जरूरी हिस्सा माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनियाभर में दही सिर्फ एक ही तरह का नहीं होता है. अलग-अलग देश और कल्चर में दही और उससे जुड़े प्रोडक्ट अलग-अलग तरीके से बनाएं और खाए जाते हैं. कई बार लोग दही और दूसरे फर्मेंटेड मिल्क प्रोडक्ट्स को एक ही समझ लेते हैं, जबकि उनके बीच फर्क होता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि दही कितनी तरह का होता है और कहीं आप भी तो गलत चीज &amp;nbsp;नहीं खा रहे हैं. क्या होता है दही?आज के समय में दही को एक ऐसे उत्पाद के रूप में जाना जाता है, जो दूध को खास तरह के बैक्टीरिया से फर्मेंट करके बनाया जाता है. हालांकि हर देश में इसका बनाने का तरीका, इस्तेमाल होने वाला दूध और स्वाद अलग-अलग हो सकता है.दुनिया भर में दही के अलग-अलग रूप केफिर दही यह दही जैसा ही एक ड्रिंक होता है, लेकिन थोड़ा पतला और हल्का झागदार होता है. इसमें बैक्टीरिया और यीस्ट दोनों का इस्तेमाल होता है, जिससे इसमें हल्की मात्रा में अल्कोहल भी बन सकती है. यह आमतौर पर रूस और सेंट्रल एशिया में खाया जाता है. ग्रीक योगर्ट ग्रीक योगर्ट गाढ़ा और क्रीमी होता है. इसे बनाने के लिए दूध से पानी निकाल दिया जाता है, जिससे इसमें प्रोटीन ज्यादा हो जाता है. इसे डीप या मिठाई के रूप में भी खाया जाता है. वहीं यह आमतौर पर ग्रीस में खाया जाता है. अमासी अमासी बिना पेस्ट राइज्ड दूध को फर्मेंट करके बनाया जाता है. इसका टेक्सचर थोड़ा दानेदार और स्वाद खट्टा होता है, जो वहां की पारंपरिक डिश का हिस्सा माना जाता है. यह आमतौर पर दक्षिण अफ्रीका में खाया जाता है. कुमिसकुमिस को मध्य एशिया और चीन में खाया जाता है. यह घोड़ी के दूध से तैयार किया जाने वाला दही होता है और इसमें भी हाल्की मात्रा में अल्कोहल हो सकती है. वहीं पारंपरिक रूप से इसे मेहमानों को परोसा जाता है. नाई लाओनाई लाओ दही को इंपीरियल योगर्ट भी कहा जाता है. इसमें दूध को चावल की वाइन के साथ फर्मेंट किया जाता है और उसमें मेवे या किशमिश मिलाकर मिठाई की तरह खाया जाता है. यह भी आमतौर पर चीन में खाया जाता है.लस्सी भारत में दही से बनने वाला सबसे पॉपुलर ड्रिंक लस्सी है. यह लस्सी मीठी और नमकीन दोनों तरह की होती है. इसमें दही, पानी और मसाले या चीनी मिलाकर तैयार किया जाता है. ये भी पढ़ें-घर पर ऐसे बना सकते हैं परफेक्ट लस्सी, इन बातों का जरूर रखें ध्यान&amp;nbsp;
लाबन लाबन भी दही का ही एक रूप होता है, जिसे छानकर तैयार किया जाता है. वहीं इसे सबसे ज्यादा मिडिल ईस्ट में खाया जाता है. इसे खाने के साथ या ड्रिंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. स्किरयह दही और चीज के बीच का एक प्रोडक्ट माना जाता है, जो आइसलैंड में खाया जाता है. इसका टेक्सचर गाढ़ा होता है और इसे फल या सीरियल के साथ खाया जाता है. अयरान आयरन दही को ठंडा पानी में मिलाकर बनाए जाने वाला ड्रिंक है, जिसमें नमक और कभी-कभी पुदीना या नींबू भी मिलाया जाता है. वहीं इससे सबसे ज्यादा तुर्की में पिया जाता है.
ये भी पढ़ें-Tips To Keep Curd Fresh Longer: ऐसे जमाएंगे तो कभी खट्टा नहीं होगा दही, जान लें ट्रिक
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:01:53 +0530</pubDate>
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<title>महाकाल से जगन्नाथ धाम तक सितारों की लगी लाइन, सेलेब्स में दिखी बढ़ती आध्यात्मिक लहर!</title>
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<description><![CDATA[ भारत में धर्म के प्रति आस्था केवल एक भावना नहीं, बल्कि जीवनशैली का अहम हिस्सा बन चुका है. यही कारण है कि, आम लोगों से लेकर बड़े सेलिब्रिटीज तक समय-समय पर देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन करते दिख जाते हैं.
इस हफ्ते बी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब फिल्म स्टार, फिटनेस आइकन और ब्यूटी पेजेंट कंटेस्टेंट्स आध्यात्मिक यात्रा करते दिखाई दिए. महाकाल की नगरी उज्जैन से लेकर पुरी तक इनकी मौजूदगी ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि, आस्था की भावना सभी को आपस में जोड़ती है.&amp;nbsp;



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मिलिंद सोमन पत्नी के साथ पहुंचे महाकाल के दरबार&amp;nbsp;
फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन (Milind Soman) अपनी पत्नी Ankita Konwa के साथ श्री महाकालेश्वर मंदिर (Shri Mahakaleshwar Temple) दर्शन के लिए पहुंचे. यहां उन्होंने सुबह के समय होने वाली भस्म आरती में हिस्सा भी लिया.
भस्म आरती भगवान शिव को समर्पित बेहद ही खास और प्राचीन परंपरा है, जिसे ब्रह्म मुहूर्त में किया जाता है. यह आरती जीवन और मृत्यु चक्र का प्रतीक है, जिससे जुड़कर भक्त एक गहरी आध्यात्मिक अनुभूति को प्राप्त करते हैं.&amp;nbsp;
मिलिंद सोमन पहले भी कई बार अपने इंटरव्यू में कह चुके हैं कि, फिटनेस के साथ मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन बेहद जरूरी है. महाकाल मंदिर में उनकी उपस्थिति इस सोच को दर्शाती है.&amp;nbsp;

&#039;धुरंधर&#039; फिल्म की एक्ट्रेस सारा अर्जुन महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंची. महाकालेश्वर में उन्होंने भस्म आरती में शामिल होकर आशीर्वाद लिया.इस दौरान उनका भक्तिमय अंदाज़ देखने को मिला.#Mahakal #Ujjain #Mahakaleshwar #SaraArjun #Dhurandhar #HindiNews #ABPNews pic.twitter.com/BbfDTlFLpq
&amp;mdash; ABP News (@ABPNews) April 11, 2026



Gen Z कलाकारों में भी बढ़ रही आध्यात्मिक रुचि
युवा अभिनेत्री सारा अर्जुन (Sara Arjun) &amp;nbsp;भी हाल ही उज्जैन स्थित महाकाल के दर्शन करने पहुंची थीं. उन्होंने भी भस्म आरती में शामिल होकर इस खास अनुभव को अपने करियर का सबसे यादगार पल बताया.
भस्म आरती सुबह करीब 3.30 बजे से 5.30 बजे के बीच होती है, और इसमें शामिल होने हर किसी के लिए आसान नहीं होता है. इसके लिए सबसे पहले रजिस्ट्रेशन और नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
सारा अर्जुन का यह फैसला दर्शाता है कि, नई पीढ़ी भी अब केवल ग्लैमर तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों और आध्यात्म से जुड़ने का प्रयास कर रही है.

पुरी जगन्नाथ में भी दिखी अटूट श्रद्धा
वहीं दूसरी ओर बॉलीवुड एक्टर गोविंदा (Govinda) ने भी श्री जगन्नाथ मंदिर (Shri Jagannath Temple) में दर्शन किए. इस दौरान वह पारंपरिक कपड़ों में पहुंचे और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया.
पुरी का जगन्नाथ धाम देश के सबसे पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है. यहां हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, खासकर रथ यात्रा (Rath Yatra) के दौरान यहां का माहौल और भी भव्य हो जाता है.&amp;nbsp;

मिस इंडिया कंटेस्टेंट्स ने भी लिया आशीर्वाद
इस बीच Femina Miss India 2026 की कुछ प्रतिभागी भी पुरी पहुंचीं. पारंपरिक पाटा साड़ी पहनें इन प्रतिभागियों ने मंदिर में दर्शन किए और अपने फाइनल से पहले आशीर्वाद प्राप्त किया.
उन्होंने कोणार्क के सूर्य मंदिर (Konark Sun Temple)और Chandrabhaga Beach का भी दौरा किया. कंटेस्टेंट्स ने इस अनुभव को बेहद भावुक और यादगार बताया.
पेजेंट का ग्रैंड फिनाले 18 अप्रैल को KIIT में आयोजित किया जाएगा.&amp;nbsp;
इन सभी बातों को ध्यान से देखा जाए तो एक बात साफ है कि, चाहे युवा कलाकार हो या अनुभवी अभिनेता या फिर ग्लैमरस दुनिया से जुड़े लोग सभी अपने जीवन में स्थिरता और शांति की खोज के लिए आध्यात्मिक राह का ही सहारा लेते हैं.&amp;nbsp;
हालांकि इस बात को भी समझने की जरूरत है कि, ये यात्राएं केवल ट्रेंड या शोऑफ का हिस्सा नहीं होना चाहिए. अगर आप केवल फोटो या सोशल मीडिया के लिए मंदिर के दर्शन कर रहे हैं, तो उसका असली अर्थ खत्म हो जाता है.&amp;nbsp;
आस्था को समझने का मतलब अंदर से जुड़ना, अनुशासन के जीवन जीना और मन में लोक भावना बनाए रखना. उज्जैन की भस्म आरती हो या पुरी का जगन्नाथ धाम मंदिर ये जगहें केवल धार्मिक नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आत्मचिंतन का भी केंद्र है. यही कारण है कि, यहां हर उम्र के लोग खिंचे चले आते हैं.&amp;nbsp;
आखिर में इन सेलिब्रिटी विजिट्स से एक संदेश मिलता है कि, सफलता चाहे जितनी भी बड़ी क्यों न हो, सुकून और शांति के लिए इंसान अपनी जड़ों की ओर ही लौटता है.
महाकालेश्वर मंदिर यात्रा: भस्म आरती से लेकर दर्शन तक, उज्जैन में 2-3 दिन में कैसे करें प्लान? ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:01:53 +0530</pubDate>
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<title>Vaishakh Amavasya 2026: अगर आपकी कुंडली में &amp;apos;काल सर्प दोष&amp;apos; है, तो डरें नहीं! वैशाख अमावस्या पर करें खास उपाय...</title>
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<description><![CDATA[ Vaishakh Amavasya 2026 Kaal Sarp Dosha Upay: इस साल वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026, शुक्रवार के दिन है, जिसे कई लोग सतुवाई अमावस्या या वैशाखी अमावस्या के नाम से भी जानते हैं.&amp;nbsp;जिस भी व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प दोष होता है, उसे आमतौर पर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
अमावस्या का दिन इस दोष से मुक्ति पाने के लिए बेहद ही शुभ माना जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं कि, अमावस्या के दिन आप इस दोष के प्रभावों को बेहतर तरीके से कैसे कम कर सकते हैं?
काल सर्प दोष क्या है?
वैदिक ज्योतिष के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सभी सात प्रमुख ग्रह छाया ग्रहों राहु और केतु के बीच स्थित होते हैं, यानी कि वे सभी एक ही अक्ष पर संरेखित होते हैं, तो इस ग्रहीय स्थिति को काल सर्प दोष कहा जाता है.
ज्योतिष में इसे चुनौतीपूर्ण योग कहा जाता है, जो व्यक्ति के प्रयासों में बाधाएं उत्पन्न करने से साथ जीवन में संघर्ष को भी तीव्र कर देता है.&amp;nbsp;
Vaishakh Amavasya 2026: आज वैशाख अमावस्या, करें ये 8 काम, सफलता के खुलेंगे रास्ते
दोष के संकेत?
जब किसी कुंडली में काल सर्प दोष होता है, तो व्यक्ति को आमतौर पर डरावने और बुरे सपने आने लगते हैं और वह लगातार अस्पष्ट डर की भावना से घिर जाता है.&amp;nbsp;
भय के कारण अचानक नींद से जाग जाना, साथ ही सपनों में बार-बार सांपों को देखना भी काल सर्प दोष के मुख्य लक्ष्णों में से एक है.&amp;nbsp;
अधिक मेहनत करने के बाद भी व्यक्ति सफलता प्राप्त करने में विफल रहता है, और उसकी योजनाएं अक्सर अंतिम पल में विफल साबित हो जाते हैं.&amp;nbsp;
घर में लगातार कलह और तनाव का माहौल बना रहना भी काल सर्प दोष का कारण माना जाता है.&amp;nbsp;
इस दोष के कारण व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट कारण के अन्य लोगों के साथ शत्रुता या संघर्ष विकसित कर सकता है.&amp;nbsp;

#WATCH प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): बैसाख अमावस्या पर स्नान और दान के लिए बड़ी संख्या में भक्त संगम घाट पहुंचे।&quot; pic.twitter.com/bZlRrfQZut
&amp;mdash; ANI_HindiNews (@AHindinews) April 17, 2026



अमावस्या पर काल सर्प दोष से बचने के उपाय
अमावस्या के दिन चांदी से बनी दो सर्प की मूर्तियां(नर और मादा) को बहते पानी में विसर्जित कर दें.&amp;nbsp;
अमावस्या पर पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं.&amp;nbsp;
निर्धारित विधि-विधान के साथ भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा कर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.&amp;nbsp;
भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक कर काले तिल को पवित्र गंगाजल में मिलाएं.&amp;nbsp;
जरूरतमंदों को भोजन और कपड़ों का दान करने से काल सर्प दोष का प्रभाव कम होता है.
इस दोश से मुक्ति पाने के लिए अमावस्या के दिन गरीबों को काले कंबल जैसी वस्तुएं भी दान करनी चाहिए.&amp;nbsp;
अमावस्या पर अन्य प्रभावी उपाय
काल सर्प दोष को लेकर डरने या घबराने की जरूरत नहीं है. व्यक्ति को इस दोष के निवारण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेकम और राहु-केतु के लिए खास उपास करने से इस दोष के नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक कम हो जाते हैं.&amp;nbsp;
शनिवार के दिन पीपल के पेड़ को जल अर्पित करने के साथ 7 परिक्रमा लगाने से भी काल सर्प दोष की समस्या कम हो जाती है. इसके साथ ही अमावस्या से राहत पाने के लिए आप उज्जैन या नासिक के महाकालेश्वर मंदिर में काल सर्प दोष पूजा भी करवा सकते हैं.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:01:52 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Vaishakh, Amavasya, 2026:, अगर, आपकी, कुंडली, में, काल, सर्प, दोष, है, तो, डरें, नहीं, वैशाख, अमावस्या, पर, करें, खास, उपाय...</media:keywords>
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<title>Summer Health Issues: क्या आजकल आप भी बुखार और पेटदर्द से हैं परेशान, जानें किस वजह से हो रहीं ये बीमारियां?</title>
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<description><![CDATA[ Why Fever And Stomach Issues Increase In Summer: अगर आपको हाल ही में बुखार, तेज सिरदर्द और पेट खराब जैसी दिक्कतें एक साथ महसूस हो रही हैं, तो आप अकेले नहीं हैं. साल के इस समय में फूड और वाटर-बॉर्न बीमारियां तेजी से बढ़ती हैं. यह सिर्फ संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे मौसम की बड़ी भूमिका होती है. डॉ. सौरदीप &amp;nbsp;के अनुसार, गर्मी और नमी का मेल बैक्टीरिया और वायरस के लिए सबसे अनुकूल माहौल बना देता है. यानी जो मौसम हमें असहज लगता है, वही इन के पनपने के लिए परफेक्ट होता है. जैसे ही ये शरीर में प्रवेश करते हैं, सबसे पहले आपका डाइजेशन सिस्टम प्रभावित होता है.
क्या होते हैं इसके लक्षण?
शुरुआत पेट से होती है, मतली, उल्टी, पेट में ऐंठन, दस्त, गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं सामने आती हैं. यह स्थिति काफी परेशान करने वाली होती है और इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है. असली समस्या तब बढ़ती है, जब उल्टी और दस्त के कारण शरीर से पानी तेजी से निकलने लगता है और डिहाइड्रेशन हो जाता है.
डिहाइड्रेशन से क्या होती है दिक्कत?
डिहाइड्रेशन सिर्फ प्यास लगने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे शरीर के संतुलन को बिगाड़ देता है. इसी वजह से बुखार और सिरदर्द भी शुरू हो जाते हैं. शरीर इंफेक्शन से लड़ने की कोशिश करता है, लेकिन जब पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है, तो रिकवरी और मुश्किल हो जाती है. सिरदर्द लंबे समय तक बना रहता है और कमजोरी बढ़ती जाती है.&amp;nbsp;
किन लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है?
कुछ लोग इस समय ज्यादा जोखिम में होते हैं. बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है. इसके अलावा जो लोग बाहर का खाना ज्यादा खाते हैं, बार-बार यात्रा करते हैं या साफ पानी नहीं पीते, उनमें इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है. अगर शरीर पहले से ही डिहाइड्रेटेड या कमजोर है, तो बीमारी जल्दी पकड़ लेती है.&amp;nbsp;
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कैसे कर सकते हैं इससे बचाव?
बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि पानी और खाने को लेकर सख्ती. हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं. बाहर का कच्चा या खुला खाना खाने से बचें, चाहे वह कितना भी अच्छा क्यों न लगे. हमेशा ताजा और गरम खाना ही खाएं, क्योंकि गर्मी से ज्यादातर बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं. हाथ धोना एक साधारण लेकिन बेहद जरूरी आदत है. खाने से पहले और टॉयलेट के बाद हाथ जरूर धोएं। यह छोटी सी आदत आपको कई बीमारियों से बचा सकती है. अगर आप बीमार हो जाते हैं, तो हाइड्रेशन सबसे जरूरी हो जाता है। सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि ओआरएस या नारियल पानी जैसे तरल पदार्थ लें, ताकि शरीर को जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स मिल सकें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:01:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>आज हम लोग जाने गए अपने&#45;आप हेल्थ कवर कर बिल्कुल ठीक समय पर पूर्ण नियंत्रण कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग सिर्फ एक बार फिर इस तरह दूर स्थित घर 🏩</title>
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<description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर बने वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर को देखने का सुअवसर मिला। इससे वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होने के साथ ही पर्यटन और व्यापार के लिए भी नए अवसर बनेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 15:24:32 +0530</pubDate>
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<title>Kitchen Safety Tips: चॉपिंग बोर्ड खिसकने से कट सकता है हाथ! क्या आपने ट्राई किया यह वायरल हैक?</title>
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<description><![CDATA[ How To Stop Cutting Board From Slipping: रसोई में काम करते समय छोटी-सी चूक भी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है. मान लीजिए आप आराम से प्याज काट रहे हैं और अचानक आपका कटिंग बोर्ड काउंटर के किनारे की तरफ खिसकने लगता है, यह वो पल है जिसे हर होम कुक अच्छे से समझता है. हम महंगे चाकू खरीदते हैं, ऑर्गेनिक सब्जियां लाते हैं, लेकिन किचन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक अस्थिर काम करने की जगह पर ध्यान ही नहीं देते. दिलचस्प बात यह है कि इसका समाधान किसी महंगे प्रोडक्ट में नहीं, बल्कि एक बेहद साधारण चीज में छिपा है, वह है हल्का गीला किचन टॉवल. चलिए बताते हैं कि यह कैसे काम करता है.&amp;nbsp;
हल्का गीला किचन टॉवल कैसे काम करता है?
कटिंग बोर्ड के नीचे एक हल्का नम कपड़ा रखने से वह अपनी जगह पर मजबूती से टिक जाता है. यह तरीका जितना आसान लगता है, उतना ही प्रभावी भी है और इसके पीछे साफ-साफ साइंस काम करता है. जब सूखा लकड़ी या प्लास्टिक का बोर्ड चिकनी सतह पर रखा होता है, तो उनके बीच घर्षण बहुत कम होता है, जिससे बोर्ड आसानी से खिसक सकता है. लेकिन जैसे ही आप उसके नीचे गीला कपड़ा रखते हैं, पानी की वजह से सतहों के बीच पकड़ बढ़ जाती है.
किन समस्याओं के लिए कारगर उपाय?
यह तरीका सिर्फ फिसलन रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग सतहों की समस्याओं को भी संभालता है. एवाल्यूएशन ऑफ डिफरेंट टाइप्स ऑफ वेजिटेबल चॉपिंग बोर्ड्स नाम की स्टडी में बताया गया है कि बोर्ड की सतह और उसकी बनावट उसके इस्तेमाल को प्रभावित करती है. लकड़ी के बोर्ड भले ही खूबसूरत लगते हैं, लेकिन अगर वे सीधे पानी के संपर्क में ज्यादा समय तक रहें तो खराब हो सकते हैं. ऐसे में हल्का गीला टॉवल उन्हें न सिर्फ स्थिर रखता है, बल्कि अतिरिक्त नमी से बचाने में भी मदद करता है.
इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;बाथरूम का शॉवर ग्लास हो गया है धुंधला? इन 2 घरेलू चीजों से मिनटों में शीशे जैसी मिलेगी चमक
लकड़ी और प्लास्टिक बोर्ड को लेकर हमेशा बहस रहती है, लेकिन दोनों ही मामलों में यह ट्रिक काम आती है.स्टडी के मुताबिक लकड़ी बैक्टीरिया को सोख लेती है और सूखने पर उन्हें खत्म भी कर देती है, इसलिए गीले के बजाय हल्के नम कपड़े का इस्तेमाल करना बेहतर होता है. दूसरी ओर, प्लास्टिक बोर्ड नीचे से काफी स्मूद होते हैं और जल्दी फिसलते हैं, इसलिए उनके लिए यह तरीका और भी जरूरी हो जाता है.
कैसे कर सकते हैं यूज?
इसे अपनाना बेहद आसान है, एक पतला कपड़ा लें, उसे हल्का गीला करें और अच्छी तरह निचोड़ लें. फिर उसे काउंटर पर फैलाकर उसके ऊपर कटिंग बोर्ड रखें. हल्का दबाने पर बोर्ड अपनी जगह पर टिक जाएगा. हालांकि सिलिकॉन मैट या रबर बेस वाले बोर्ड जैसे विकल्प भी मौजूद हैं, लेकिन यह साधारण तरीका अपनी सादगी और असर के कारण आज भी सबसे भरोसेमंद है. सिर्फ कुछ सेकंड की यह तैयारी आपकी कुकिंग को ज्यादा सुरक्षित, तेज और प्रोफेशनल बना सकती है.
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 09:05:35 +0530</pubDate>
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<title>Persian Carpet Real Vs Fake: खरीदने जा रहे हैं पर्शियन कालीन, ऐसे करें असली&#45;नकली की पहचान</title>
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<description><![CDATA[ Tips To Buy Authentic Persian Carpet: अगर आप पर्शियन कालीन खरीदने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ उसकी खूबसूरती देखकर फैसला लेना भारी पड़ सकता है. ये कालीन अपनी बारीक कारीगरी, शानदार डिजाइन और शाही लुक के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं. ऊन और रेशम जैसे प्राकृतिक धागों से हाथ से बुने गए ये कालीन सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि एक तरह की कला माने जाते हैं. भारत में भी मुगल काल से इनका चलन रहा है और आज दिल्ली, भदोही और मिर्जापुर जैसे बाजारों में ये आसानी से मिल जाते हैं. लेकिन बढ़ती डिमांड के साथ नकली कालीनों का खेल भी बढ़ गया है, जो असली के नाम पर ऊंचे दामों में बेचे जाते हैं. ऐसे में जरूरी है कि आप खरीदने से पहले असली-नकली की पहचान करना सीख लें.&amp;nbsp;
किन बातों का रखें ध्यान?
सबसे आसान तरीका है कालीन के फ्रिंज यानी किनारों को ध्यान से देखना. असली पर्शियन कालीन में फ्रिंज अलग से नहीं लगाए जाते, बल्कि ये उसी धागे का हिस्सा होते हैं जिससे कालीन बुना जाता है. अगर आपको किनारे सिलकर या चिपकाकर लगाए गए दिखें, तो समझ लीजिए कि कालीन मशीन से बना है.
&amp;nbsp;बैक साइड देखना
दूसरा तरीका है कालीन को पलटकर उसकी बैक साइड देखना. क्योंकि असली कालीन हाथ से बुने जाते हैं, इसलिए उनकी पीछे की सतह पर हल्की-फुल्की असमानता और गांठें दिखाई देती हैं. यही छोटी-छोटी खामियां उसकी असलियत का सबूत होती हैं. वहीं मशीन से बने कालीन के पीछे का पैटर्न एकदम परफेक्ट और एक जैसा दिखेगा.
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मटेरियल &amp;nbsp;से भी कर सकते हैं पता 
मटेरियल भी बहुत कुछ बता देता है. असली पर्शियन कालीन ऊन, रेशम या कॉटन जैसे प्राकृतिक धागों से बनते हैं, जो छूने में मुलायम, लचीले और हल्के गर्म महसूस होते हैं. इसके उलट नकली कालीन अक्सर नायलॉन या पॉलीप्रोपाइलीन जैसे सिंथेटिक मटेरियल से बनते हैं, जो ज्यादा चमकीले और प्लास्टिक जैसे लगते हैं.
डिजाइन और पैटर्न
डिजाइन और पैटर्न पर भी नजर डालना जरूरी है. हाथ से बने कालीन में डिजाइन पूरी तरह एक जैसा नहीं होता, उसमें हल्का फर्क नजर आता है. यही उसकी खासियत है. जबकि मशीन से बने कालीन में पैटर्न बिल्कुल एक जैसा और बिना किसी बदलाव के होता है. अगर आप पूरी तरह सुनिश्चित होना चाहते हैं, तो एक छोटा सा बर्न टेस्ट भी कर सकते हैं. किसी धागे को जलाने पर अगर बाल या ऊन जैसी गंध आए, तो वह प्राकृतिक है. लेकिन अगर धागा पिघलने लगे और प्लास्टिक जैसी स्मेल आए, तो वह नकली हो सकता है. हालांकि यह टेस्ट बहुत सावधानी से करना चाहिए.
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 09:05:35 +0530</pubDate>
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<title>Happy Bengali New Year 2026 Live: शुभो नबो बरसो!</title>
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<description><![CDATA[ Happy Bengali New Year 2026 Live:&amp;nbsp;पोईला बैसाख पर हाल खाता रस्म भी निभाई जाती है. इस दिन व्यापारी वर्ग के लोग अपने पुराने खाते को बंद कर नया खाता तैयार करते हैं. इसे ही हाल खाता कहा जाता है.
डिजिटल दौर जहां ऑनलाइट पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है, इसके बाद भी पोईला बैसाख पर यह परंपरा पूर्ण श्रद्धा से निभाई जाती है. इसके साथ ही पोईला बोइशाख के दिन को मांगलिक कार्यों के लिए भी शुभ माना जाता है. इसलिए इस दिन लोग गृह प्रवेश, खरीदारी, नया व्यापार शुरू करना, घर खरीदने आदि जैसे काम भी करते हैं. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 09:05:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>Happy Bengali New Year 2026 Live: पोइला बैसाख यानी बंगाली नववर्ष 15 अप्रैल</title>
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<description><![CDATA[ Happy Bengali New Year 2026 Live:&amp;nbsp;पोईला बैसाख पर हाल खाता रस्म भी निभाई जाती है. इस दिन व्यापारी वर्ग के लोग अपने पुराने खाते को बंद कर नया खाता तैयार करते हैं. इसे ही हाल खाता कहा जाता है.
डिजिटल दौर जहां ऑनलाइट पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है, इसके बाद भी पोईला बैसाख पर यह परंपरा पूर्ण श्रद्धा से निभाई जाती है. इसके साथ ही पोईला बोइशाख के दिन को मांगलिक कार्यों के लिए भी शुभ माना जाता है. इसलिए इस दिन लोग गृह प्रवेश, खरीदारी, नया व्यापार शुरू करना, घर खरीदने आदि जैसे काम भी करते हैं. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 09:05:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>Yellow Toilet Seat: रोज सफाई के बाद भी पीली पड़ रही है टॉयलेट सीट? गंदगी नहीं ये है असली वजह, ऐसे करें साफ</title>
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<description><![CDATA[ Best Way To Clean Plastic Toilet Seat Yellow Stains: बाथरूम की साफ-सफाई के बावजूद अगर टॉयलेट सीट पीली पड़ जाए, तो यह सिर्फ गंदगी नहीं बल्कि एक साइंटफिक प्रक्रिया का नतीजा भी हो सकता है. अक्सर लोग इसे सतही समस्या समझकर बार-बार सफाई करते हैं, लेकिन असली कारण प्लास्टिक के अंदर होने वाले रासायनिक बदलाव होते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि यह कैसे होता है और इसके कैसे ठीक किया जा सकता है.&amp;nbsp;
क्यों होती है दिक्कत?
ज्यादातर आधुनिक टॉयलेट सीट प्लास्टिक से बनी होती हैं, जिनमें सुरक्षा के लिए कुछ केमिकल एडिटिव्स मिलाए जाते हैं, जैसे फ्लेम रिटार्डेंट्स. समय के साथ ये तत्व ऑक्सीजन, नमी और रोशनी के संपर्क में आकर प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे प्लास्टिक में ऑक्सीडेशन होता है और उसका रंग पीला पड़ने लगता है. इस प्रक्रिया को समझाने के लिए फोटो-डिग्रेडेशन ऑफ ब्रोमिनेटेड फ्लेम रिटार्डेंट्स इन पॉलिमर सिस्टम्स: क्वांटम यील्ड्स, प्रोडक्ट्स एंड इन्फ्लुएंसिंग फैक्टर्स नामक स्टडी जिसे जर्नल:पॉलिमर डिग्रेडेशन एंड स्टेबिलिटी में पब्लिस किया गया, उसमें बताया गया कि ये केमिकल बदलाव धीरे-धीरे दिखाई देने वाली पीली परत में बदल जाते हैं.
ये भी होते हैं कारण
इसके अलावा, रोजमर्रा के इस्तेमाल से पानी में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स, सफाई उत्पादों के अवशेष और त्वचा के तेल सतह पर जमा होते रहते हैं. एनालिसिस ऑफ कैल्शियम कार्बोनेट स्केल्स इन वाटर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम्स एंड इन्फ्लुएंस ऑफ द इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ट्रीटमेंट स्टडी &amp;nbsp;के अनुसार ये मिनरल्स समय के साथ सतह को फीका और मैला बना देते हैं.&amp;nbsp;
इसे भी पढ़ें-अगले 3 महीने की शॉपिंग लिस्ट अभी निपटा लें! हवाई सफर महंगा, डिलीवरी और इलेक्ट्रॉनिक्स पर संकट&amp;nbsp;कैसे कर सकते हैं इसको ठीक?
यहीं पर हाइड्रोजन पेरॉक्साइड एक असरदार समाधान के रूप में सामने आता है।.आम ब्लीच के विपरीत, जो प्लास्टिक को और नुकसान पहुंचा सकता है, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड गहराई में जाकर काम करता है. फंडामेंटल रिएक्शन मेकैनिज्म्स ऑफ हाइड्रोजन पेरॉक्साइड ब्लीचिंग स्टडी &amp;nbsp;में बताया गया है कि यह एक ऑक्सीडाइजिंग एजेंट की तरह काम करता है और उन &amp;nbsp;केमिकल बंधनों को तोड़ता है, जो रंग बदलने के लिए जिम्मेदार होते हैं. इससे पीले रंग के अणु रंगहीन हो जाते हैं और सतह फिर से साफ दिखने लगती है.
कैसे करें इस्तेमाल?
&amp;nbsp;इसे इस्तेमाल करना भी आसान है. पहले हल्के साबुन और पानी से सीट को साफ करें, फिर 3 प्रतिशत हाइड्रोजन पेरॉक्साइड को कपड़े या स्पंज से लगाएं और कुछ घंटों के लिए छोड़ दें। अगर संभव हो तो इसे धूप में रखें, क्योंकि रोशनी इस प्रक्रिया को तेज कर देती है. इसके बाद में धोकर सुखा लें. हालांकि, इससे तुरंत परिणाम नहीं मिलते, लेकिन नियमित इस्तेमाल से बेहतर और लंबे समय तक टिकने वाला असर दिखता है. इसके साथ ही, बाथरूम में अच्छी वेंटिलेशन रखना जरूरी है ताकि नमी कम हो और मिनरल्स जमा न हों. हल्की और नियमित सफाई करने से भी गंदगी जमने से पहले ही हट जाती है.
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:57:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>Vacation Benefits For Health: दिल&#45;दिमाग की खुशी के लिए कितने दिन मिलनी चाहिए छुट्टियां? साइंस ने सुलझाई ऑफिस ऑवर्स की गुत्थी</title>
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<description><![CDATA[ How Many Days Vacation Is Ideal For Mental Health: समंदर किनारे घूमने के सपने, फ्लाइट ट्रैक करना, नए कपड़े खरीदना और नए खाने की जगह ढूंढना, क्या ये सब आपको खुशी देते हैं? अगर हां, तो इसके पीछे सिर्फ भावना नहीं, बल्कि साइंस भी काम कर रही है. रिसर्च बताती है कि समय-समय पर छुट्टियां लेना तनाव कम करने और मानसिक सेहत बेहतर बनाने में मदद करता है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं.&amp;nbsp;
छुट्टियों के लिए सही समय
आजकल ज्यादातर लोग काम के दबाव के चलते लंबी छुट्टियां नहीं ले पाते और वीकेंड में ही सब समेटने की कोशिश करते हैं. लेकिन स्टडीज कहती हैं कि छुट्टियों की सही अवधि भी बहुत मायने रखती है. रिसर्च के अनुसार, 3 से 4 दिन की छोटी ट्रिप शरीर को रिफ्रेश करने के लिए काफी होती है, जबकि 8 दिन की छुट्टी गहरे आराम के लिए बेहतर मानी जाती है. ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड की एक स्टडी में पाया गया कि छोटी छुट्टियां ज्यादा फायदेमंद होती हैं, क्योंकि लंबी छुट्टियों में लोग अक्सर काम से जुड़े काम करने लगते हैं. यानी फायदा सिर्फ समय का नहीं, बल्कि इस बात का है कि आप उस समय को कैसे बिताते हैं.&amp;nbsp;
रिसर्च में क्या निकला?
रिसर्च में यह भी सामने आया कि जो लोग छुट्टियां लेते हैं, उनका ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट उन लोगों की तुलना में कम होता है जो ब्रेक नहीं लेते. साल 2025 की एक स्टडी के मुताबिक, छोटी लेकिन बार-बार ली गई छुट्टियां लंबे समय तक मानसिक संतुलन बनाए रखने में ज्यादा असरदार होती हैं. अगर आप सोचते हैं कि छुट्टियां सिर्फ मौज-मस्ती के लिए होती हैं, तो ऐसा नहीं है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि लगातार काम करते रहने से स्ट्रेस धीरे-धीरे क्रॉनिक हो जाता है, जो मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है. यही वजह है कि छुट्टी लेना एक तरह की रिकवरी प्रक्रिया है.
इसे भी पढ़ें-अगले 3 महीने की शॉपिंग लिस्ट अभी निपटा लें! हवाई सफर महंगा, डिलीवरी और इलेक्ट्रॉनिक्स पर संकट
छुट्टी की प्लानिंग से भी खुशी
दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ छुट्टी मनाना ही नहीं, बल्कि उसकी प्लानिंग भी खुशी देती है. एक सर्वे के अनुसार, करीब 97 प्रतिशत लोगों ने माना कि ट्रिप की प्लानिंग ही उन्हें पहले से ज्यादा खुश कर देती है. यानी कैलेंडर में छुट्टी की तारीख होना भी मूड को बेहतर बना देता है. एक स्टडी में यह भी पाया गया कि लोग भौतिक चीजों की तुलना में अनुभवों से ज्यादा खुश होते हैं. यानी कोई महंगी चीज खरीदने के बजाय अगर आप कहीं घूमने जाते हैं, तो उसकी यादें लंबे समय तक खुशी देती हैं.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
नीदरलैंड्स की यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन की प्रोफेसर डॉ जेसिका डी ब्लूम के अनुसार, छुट्टी के दौरान लोगों की खुशी और सेहत तेजी से बेहतर होती है, लेकिन काम पर लौटते ही यह असर धीरे-धीरे कम हो जाता है. यही वजह है कि एक्सपर्ट्स बार-बार छोटी छुट्टियां लेने की सलाह देते हैं.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:57:11 +0530</pubDate>
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<title>Raw Egg Hair Wash Pregnancy Myth: क्या कच्चे अंडों से सिर धोने से जल्दी होती है प्रेग्नेंसी, जानें कितनी सही है वायरल पोस्ट?</title>
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<description><![CDATA[ Raw Egg Hair Wash Pregnancy Myth: क्या कच्चे अंडों से बाल धोने से प्रेग्नेंसी जल्दी हो सकती है? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे दावों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. कई महिलाएं इन घरेलू नुस्खों को अपनाने लगी हैं, लेकिन एक्सपर्ट इसे भ्रामक और नुकसानदायक मानते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इससे आपको क्या नुकसान हो सकता है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, दक्षिण टाइनसाइड की रहने वाली 35 वर्षीय बारबोरा ग्रे भी ऐसी ही एक वायरल पोस्ट से प्रभावित हुई थीं. उन्हें गर्भधारण में दिक्कत हो रही थी और इसी दौरान उन्होंने ऑनलाइन एक सलाह देखी, जिसमें कच्चे अंडे से बाल धोने की बात कही गई थी. उन्होंने यह तरीका अपनाया, लेकिन बाद में महसूस किया कि यह सही दिशा नहीं थी. बारबोरा बताती हैं कि शुरुआत में यह सब सामान्य लगा, लेकिन धीरे-धीरे वह हर चीज को लेकर चिंतित रहने लगीं कि चाहे वह शैंपू हो या घर में इस्तेमाल होने वाले अन्य प्रोडक्ट्स. उन्हें एहसास हुआ कि सोशल मीडिया पर बिना वैज्ञानिक आधार के दी गई जानकारी लोगों को भ्रमित कर सकती है, खासकर तब जब वे किसी समस्या से जूझ रहे हों.&amp;nbsp;
इसी अनुभव के बाद उन्होंने She Thrives नाम से एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया, जिसका मकसद महिलाओं को स्वास्थ्य से जुड़ी सही और प्रमाण आधारित जानकारी देना है. यह प्लेटफॉर्म मानसिक स्वास्थ्य, पीरियड्स और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाने का काम करता है और महिलाओं को एक सुरक्षित जगह उपलब्ध कराता है, जहां वे सही जानकारी हासिल कर सकें.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
बीबीसी उर्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक्सपर्ट का भी मानना है कि सोशल मीडिया पर फैली गलत जानकारी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. कम्युनिटी गाइनाकोलॉजी डॉ. कैथरीन गिल्मोर कहती हैं कि उनके पास अक्सर ऐसे मरीज आते हैं, जो इंटरनेट पर देखी गई गलत जानकारी से प्रभावित होते हैं.
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डॉक्टर की सलाह जरूरी
उनके मुताबिक, समय की कमी के कारण महिलाएं अक्सर सोशल मीडिया को जानकारी का आसान सोर्स मान लेती हैं, लेकिन वहां मौजूद हर जानकारी सही नहीं होती. कई बार डर फैलाने वाले या बिना साइंटफिक आधार के दावे लोगों को गलत दिशा में ले जाते हैं. असल में, कच्चे अंडे से बाल धोने और प्रेग्नेंसी के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध साबित नहीं हुआ है. प्रेग्नेंसी से जुड़ी समस्याएं हार्मोन, स्वास्थ्य स्थिति और मेडिकल कारणों पर निर्भर करती हैं, जिनका इलाज सही डॉक्टर की सलाह से ही संभव है. &amp;nbsp;एक्सपर्ट कहते हैं सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर घरेलू नुस्खे पर भरोसा करना सही नहीं है. खासकर जब बात प्रेग्नेंसी जैसी गंभीर विषय की हो, तो एक्सपर्ट की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित और सही रास्ता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:57:10 +0530</pubDate>
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<title>Baisakhi 2026: बैसाखी पर क्यों लगता है मेला और होता है भांगड़ा&#45;गिद्दा ? जानें परंपरा का इतिहास</title>
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<description><![CDATA[ Baisakhi 2026: बैसाखी पर क्यों लगता है मेला और होता है भांगड़ा-गिद्दा ? जानें परंपरा का इतिहास ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:57:10 +0530</pubDate>
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<title>Obesity Hypoventilation Syndrome: क्या मोटापा ले सकता है जान? 160 किलो की महिला का सांस लेना हुआ मुश्किल, डॉक्टरों ने ऐसे बचाया</title>
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<description><![CDATA[ Obesity Related Breathing Disorder: कभी- कभी कुछ मामले ऐसे आते हैं अस्पतालों में, &amp;nbsp;जिनमें अगर मरीज जिंदा बच जाए, तो वह किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता है. ऐसा ही कुछ गुरुग्राम के सीके बिड़ला अस्पताल में हुआ, जहां डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद मुश्किल और जोखिम भरे केस में 75 वर्षीय महिला की जान बचाकर उसे सुरक्षित डिस्चार्ज कर दिया. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर मामला क्या है.&amp;nbsp;
किस बीमारी से जूझ रही थी महिला?
&amp;nbsp;160 किलो वजन की उस महिला कोओबेसिटी हाइपोवेंटिलेशन सिंड्रोम नाम की गंभीर बीमारी थी, जिसमें शरीर पर्याप्त रूप से सांस नहीं ले पाता और खून में ऑक्सीजन का स्तर गिरने लगता है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ जाती है. महिला को कई अन्य बीमारियां भी थीं, जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, एंग्जायटी और लंबे समय तक बिस्तर पर रहने की वजह से बेडसोर की समस्या थी. &amp;nbsp;वह अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में गंभीर हालत में लाई गई थीं, जहां उन्हें दोनों फेफड़ों में निमोनिया और हार्ट की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा था. हालत इतनी नाजुक थी कि तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा.&amp;nbsp;
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धीरे- धीरे हुआ सुधार
ICU में पहले 24 घंटों के इलाज के दौरान उनकी स्थिति में कुछ सुधार दिखा. बुखार और इंफेक्शन कम होने लगे, छाती के एक्स-रे में भी सुधार नजर आया और दिल से जुड़े संकेतक भी बेहतर होने लगे. &amp;nbsp;इन पॉजिटिव संकेतों के आधार पर डॉक्टरों ने करीब 36 घंटे बाद वेंटिलेटर हटाने का फैसला लिया. लेकिन जैसे ही वेंटिलेटर हटाया गया, मरीज की हालत अचानक बिगड़ गई. उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरा और उन्हें फिर से तुरंत वेंटिलेटर पर रखना पड़ा.
डॉक्टरों ने क्या कहा?
इस पूरे मामले में अस्पताल में पल्मोनोलॉजी और क्रिटिकल केयर के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. कुलदीप कुमार ग्रोवर ने बताया कि यह समस्या मोटापे से जुड़ी सांस लेने की गंभीर बाधा की वजह से हुई. उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों में लंग्स की क्षमता कम हो जाती है और शरीर खुद से पर्याप्त सांस नहीं ले पाता. डॉ. ग्रोवर ने आगे बताया कि इस केस में मरीज के इंफेक्शन और दिल से जुड़े पैरामीटर तो सुधर रहे थे, लेकिन मोटापे के कारण उनकी सांस लेने की क्षमता बहुत कमजोर थी. यही वजह रही कि पहली बार वेंटिलेटर हटाने की कोशिश असफल रही.
ऐसे बची जान
इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने अपनी रणनीति बदली. मरीज को लंबे समय तक धीरे-धीरे खुद सांस लेने की ट्रेनिंग दी गई, प्रेशर सपोर्ट को धीरे-धीरे कम किया गया और ब्रोंकोस्कोपी की मदद से एयरवे को पूरी तरह तैयार किया गया. इस सावधानी और प्लानिंग के बाद दूसरी बार वेंटिलेटर हटाने की प्रक्रिया सफल रही. भारत में मोटापे के बढ़ते मामलों के साथ OHS जैसी बीमारियां भी तेजी से सामने आ रही हैं. कई स्टडीज के मुताबिक, स्लीप से जुड़ी सांस की समस्याओं वाले मरीजों में इसका प्रतिशत 5 से 16 फीसदी तक पाया गया है, लेकिन अक्सर यह बीमारी तब तक पहचान में नहीं आती जब तक स्थिति गंभीर न हो जाए. डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते जांच, वजन नियंत्रित रखना और नियमित मेडिकल चेकअप ही ऐसी गंभीर स्थितियों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:57:10 +0530</pubDate>
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<title>Shower Glass Cleaning: बाथरूम का शॉवर ग्लास हो गया है धुंधला? इन 2 घरेलू चीजों से मिनटों में शीशे जैसी मिलेगी चमक</title>
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<description><![CDATA[ Best Way To Clean Cloudy Shower Glass At Home: अगर आपके बाथरूम का शॉवर ग्लास बार-बार धुंधला और गंदा दिखने लगता है, तो यह सिर्फ सफाई की कमी नहीं बल्कि हार्ड वॉटर के असर का नतीजा होता है. कई बार आप इसे बार-बार साफ करते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में वही धुंधली परत फिर से दिखने लगती है. दरअसल, यह समस्या धीरे-धीरे बनने वाले मिनरल डिपॉजिट्स की वजह से होती है, जो समय के साथ कांच की चमक को खत्म कर देते हैं.&amp;nbsp;
क्यों होती है दिक्कत?
पानी में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स, जब पानी सूखता है तो सतह पर जम जाते हैं. यही वजह है कि शॉवर ग्लास पर एक हल्की सफेद या धुंधली परत बन जाती है. &amp;nbsp;वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की ड्रिंकिंग वॉटर गाइडलाइंस से जुड़े रिसर्च में भी बताया गया है कि ये मिनरल्स समय के साथ सतह से चिपक जाते हैं और उन्हें हटाना मुश्किल होता जाता है. अक्सर लोग सोचते हैं कि इस समस्या का हल सिर्फ महंगे क्लीनर हैं, लेकिन असल में होटल्स ऐसा नहीं करते. वहां का ग्लास इसलिए चमकता है क्योंकि वे नियमित और सही तरीके से सफाई करते हैं, न कि सिर्फ मजबूत केमिकल्स का इस्तेमाल करके.&amp;nbsp;
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घर पर सफाई करने के लिए क्या हैं तरीके?
घर पर भी आप आसान तरीकों से वही चमक पा सकते हैं. इसके लिए बेकिंग सोडा, लिक्विड साबुन और हल्के गर्म पानी से एक पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को स्पंज की मदद से ग्लास पर लगाएं और फिर गर्म पानी से धो लें. यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के अनुसार, गर्म पानी सफाई में ज्यादा असरदार होता है क्योंकि यह तेल और गंदगी को तेजी से तोड़ता है और क्लीनिंग एजेंट्स को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है.
सफेद सिरका भी फायदेमंद
एक और आसान तरीका है सफेद सिरका. &amp;nbsp;इसकी हल्की एसिडिक प्रकृति मिनरल डिपॉजिट्स को घोलने में मदद करती है. अगर इसमें थोड़ा डिश सोप मिला दिया जाए, तो यह और भी बेहतर रिजल्ट देता है. लेकिन सबसे बड़ा राज क्लीनिंग प्रोडक्ट नहीं, बल्कि टाइमिंग है. होटल्स बार-बार हल्की सफाई करते हैं, जिससे गंदगी जमने का मौका ही नहीं मिलता. अगर आप भी रोज या हर दूसरे दिन हल्की सफाई करेंगे, तो आपको भारी मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कुछ छोटी आदतें इस समस्या को काफी हद तक रोक सकती हैं. जैसे नहाने के बाद ग्लास को कपड़े या स्क्वीजी से सुखा देना. इससे पानी के दाग बनने से पहले ही हट जाते हैं. इसके अलावा, बाथरूम में सही वेंटिलेशन रखना भी जरूरी है, ताकि नमी जमा न हो और मिनरल्स चिपकने की संभावना कम हो.
शॉवर में फिल्टर लगाना भी अच्छा विकल्प
अगर आपके घर में बहुत ज्यादा हार्ड वॉटर है, तो शॉवर में फिल्टर लगाना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है. यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, हार्ड वॉटर में मिनरल्स की मात्रा ज्यादा होती है, जो घर की सतहों पर जल्दी जमाव बनाते हैं, लेकिन फिल्ट्रेशन से इस असर को कम किया जा सकता है.
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:57:10 +0530</pubDate>
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<title>Bakrid 2026 Date: 27 या 28 मई कब होगी बकरीद, ईद&#45;उल&#45;अजहा की तारीख पर मौलाना ने क्या कहा</title>
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<description><![CDATA[ Bakrid 2026 Date: माह-ए-रमजान और ईद की समाप्ति के बाद मुसलमानों को बकरीद का बेसब्री से इंतजार रहता है. बकरीद को बकरा ईद या ईद-उल-अजहा के नाम से जाना जाता है. ईद के बाद बकरीद मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है.
बकरीद 2026 कब
बकरीद कब मनाई जाएगी, यह सवाल हर मुसलमान के जहन में है. लेकिन मुस्लिम त्योहारों की तिथि चांद दिखने के बाद ही निर्धारित होती है. इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, बकरीद या ईद-उल-अजह का त्योहार जिलहिज्जा या जुल हिज्जा (इस्लामिक कैलेंडर का आखिरी महीना) की 10वीं तारीख को मनाया जाता है. जानकारों के अनुसार, इस साल 2026 में बकरीद 27 या 28 मई को मनाए जाने की उम्मीद है. लेकिन तारीख पर अंतिम फैसला चांद दिखाई देने के बाद ही तय होती है.
बकरीद की तारीख पर मौलाना ने क्या कहा
मौलाना समीरुद्दीन कासमी से एक भारतीय मुसलमान ने बकरीद की तारीख पर सवाल किया, जिसके जवाब में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है. बता दें कि, समीरुद्दीन कासमी ब्रिटेन में रहने वाले एक भारतीय इस्लामी विद्वान हैं. ये जो इस्लामी खगोल विज्ञान, हदीस, हनफी न्यायशास्त्र और इस्लामी धर्म-नीतियों में विशेषज्ञता रखते हैं. ईद-उल-अजहा की तारीख को लेकर समीरुद्दीन कासमी कहते हैं-

17 मई 2026 को भारत में चांद की ऊंचाई 9 डिग्री और उमर है 17 घंटे 39 मिनट. बर्मा में 8 डिग्री, &amp;nbsp;बांग्लादेश में 9 डिग्री, नेपाल में 9 डिग्री. वैसे तो चांद 10 डिग्री में नजर आता है और यहां 9 डिग्री है ऐसे में दूरबीन की मदद से चांद मुश्किल से नजर आ सकता है. लेकिन बहुत अधित संभावना है कि, भारत में 17 मई को जुलहिज्जा की पहली तारीख नहीं होगी.
वहीं 18 मई 2026 भारत में चांद की ऊंचाई 23 डिग्री और उमर है 41 घंटे 40 मिनट. बर्मा में 22 डिग्री, &amp;nbsp;बांग्लादेश में 23 डिग्री, नेपाल में 23 डिग्री. चांद 10 डिग्री में नजर आता है और यहां काफी ज्यादा है. ऐसे में चांद नजर आएगा और देर तक देखा जाएगा. इसलिए 19 मई को जुलहिज्जा (Dhul Hijjah 1447) की पहली तारीख हो सकती है.
भारत और पाकिस्तान में अलग-अलग दिन बकरीद!
दूसरी ओर 17 मई को कराची में 10 डिग्री, पेशावर में 10 डिग्री, ईरान में 10 डिग्री और अफगानिस्तान में 10 डिग्री है. चांद 10 डिग्री में नजर आता है और यहां 10 डिग्री तो है लेकिन चांद की उमर कब है. लेकिन इन जगहों पर 18 मई को जुलहिज्जा की पहली तारीख हो सकती है. मौलाना कहते हैं कि, इस बार पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान की बकरीद इस बार सऊदी अरब के साथ 27 मई 2026 को बकरीद हो सकती है. वहीं बर्मा, नेपाल, बांग्लादेश और भारत में बकरीद 28 मई 2026 को हो सकती है.&amp;nbsp;

कुर्बानी का त्योहार है बकरीद
बकरीद का त्योहार मुख्य रूप से कुर्बानी की मिसाल के तौर पर मनाया जाता है. इस दिन बकरे, भेड़ आदि जैसे पशु की कुर्बानी दी जाती है. कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है, जिसमें पहला हिस्सा रिशतेदारों और दोस्तों के लिए, &amp;nbsp;दूसरा गरीब और जरुरतमंद लोगों के लिए और तीसरा परिवार के लिए रखा जाता है.
ये भी पढ़ें: Jagannath Rath Yatra 2026 Date: जगन्नाथ रथ यात्रा कब है, जानें तिथि, महत्व और रीति-रिवाजDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:57:09 +0530</pubDate>
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<title>Child Safety: अप्रैल में कभी धूप&#45;कभी बारिश, बदलते मौसम में ऐसे रखें अपने बच्चों का ख्याल</title>
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<description><![CDATA[ Child Safety:&amp;nbsp;अप्रैल का मौसम जितना हमारे लिए सुहाना और सुंदर होता है, बच्चों के लिए यह उतना ही खतरनाक साबित हो सकता है. बदलते मौसम में कभी खिली धूप और कभी झमाझम बारिश इसका सबसे बड़ा कारण है. इस तरह के मौसम में बच्चों का शरीर जल्दी एडजस्ट नहीं कर पाता, दिन में गर्मी और रात में ठंड जैसा माहौल बच्चों में सर्दी-जुकाम, गले में खराश और वायरल इंफेक्शन जैसी समस्या का खतरा बढ़ा देता है. हवा में नमी और धूल बढ़ने के कारण एलर्जी और स्किन प्रॉब्लम्स भी देखने को मिलते हैं. ऐसे में आइए जानें कैसे रखें इस बदलते मौसम में अपने बच्चे का ख्याल.
सही कपड़ों का चयन है जरूरी
इस मौसम में यही कोशिश रहनी चाहिए कि बच्चों को ना तो बहुत भारी या ना हल्के कपड़े पहनाएं. उन्हें हमेशा एक से अधिक कपड़े पहनाकर रखें ताकि जरूरत के हिसाब से कपड़ो को कम या ज्यादा किया जा सकें. बाहर जाते समय संग में शॉल या जैकेट रखना फायदेमंद हो सकता है, खासकर शाम में जब ठंड ज्यादा रहती है.
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खानपान का रखें खास ध्यान
बदलते मौसम में बच्चों का खान-पान भी बहुत मायने रखता है. उन्हें विटामिन से भरी ताजे फल-सब्जियां देना चाहिए, साथ ही उन्हें ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक्स देने से बचें. यह भी सुनिश्चित करें कि वे पर्याप्त मात्रा में पानी पी रहे हैं या नहीं, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और इम्युनिटी मजबूत बनी रहे.
डॉक्टर की सलाह और सतर्कता
इस मौसम में इंफेक्शन का खतरा बहुत ज्यादा होता है, इसलिए बच्चों में साफ-सफाई की आदत डलवाना एक कारगर उपाय साबित हो सकता है, जैसे कि बाहर से आते ही हाथ-पैर धोना, टाइम से नहाना और साफ कपड़े पहनना. साथ ही जल्दी सोने की आदत डालवाने से उनकी नींद भी पूरी होती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है. परहेजों के बावजूद अगर बच्चे को समस्या आ रही है तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से जाकर मिलें, ताकि समस्या बढ़ने से पहले उसका समाधान हो सके.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:57:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>Rashifal 11 April 2026:  मेष से मीन तक 11 अप्रैल का राशिफल, किसे मिलेगा फायदा, किसकी मेहनत पर फिरेगा पानी</title>
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<description><![CDATA[ Rashifal: आज 11 अप्रैल 2026 दिन शनिवार है. आपकी राशि पर पड़ने वाले ग्रह तथा नक्षत्रों के प्रभाव कैसा रहेगा आइए जानते है,ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से मेष से लेकर मीन राशि के लिए आज का दिन कैसा रहेगा.
मेष राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की दशम भाव में संचरण करेगे.आपके लिए थोड़ा भागदौड़ भरा लेकिन फायदेमंद रहने वाला है. छोटी-छोटी बातों में भी आपको सीख मिलेगी. मन में कुछ नया करने की इच्छा जागेगी, जो आगे चलकर फायदा दे सकती है.

पारिवारिक जीवन: घर में हल्का-फुल्का तनाव हो सकता है, लेकिन समझदारी से संभाल लेंगे.
व्यापार तथा नौकरी: काम में तेजी आएगी, लेकिन जल्दबाजी से बचें.
करियर तथा शिक्षा: स्टूडेंट्स को फोकस बनाए रखना होगा, तभी रिजल्ट मिलेगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पार्टनर के साथ समय बिताने से रिश्ते मजबूत होंगे.
स्वास्थ्य: सिरदर्द या थकान हो सकती है.
लकी अंक: 9
लकी कलर: पीला
उपाय: हनुमान जी को गुड़ अर्पित करें.
आज क्या करें: किसी पुराने काम को पूरा करने की कोशिश करें.

वृषभ राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की नवम भाव में संचरण करेगे.आपके लिए संतुलन बनाने का है. हर काम को सोच-समझकर करना बेहतर रहेगा. दिन में कुछ अच्छे मौके मिल सकते हैं.

पारिवारिक जीवन: परिवार में खुशी का माहौल रहेगा, सबका साथ मिलेगा.
व्यापार तथा नौकरी: बिजनेस में छोटा फायदा हो सकता है.
करियर तथा शिक्षा: पढ़ाई में मन लगेगा और नया सीखने को मिलेगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: रिश्ते में मधुरता बढ़ेगी.
स्वास्थ्य: पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है.
लकी अंक: 6
लकी कलर: क्रीम
उपाय: गाय को हरा चारा खिलाएं.
आज क्या करें: नए प्लान बनाने से पहले सलाह जरूर लें.

मिथुन राशि
आज आपका दिन आज चंद्रमा आपके राशि की अष्टम भाव में संचरण करेगे.काफी एक्टिव रहेगा. कई काम एक साथ आ सकते हैं, लेकिन आप उन्हें संभाल लेंगे. दिमाग तेज चलेगा और सही फैसले लेने में मदद करेगा.

पारिवारिक जीवन: भाई-बहनों से सहयोग मिलेगा.
व्यापार तथा नौकरी: ऑफिस में आपकी तारीफ हो सकती है.
करियर तथा शिक्षा: नई स्किल सीखने का मौका मिलेगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पार्टनर से छोटी नोकझोंक हो सकती है.
स्वास्थ्य: गले या सर्दी की परेशानी हो सकती है.
लकी अंक: 5
लकी कलर: हरा
उपाय: तुलसी के पौधे में जल दें.
आज क्या करें: समय का सही उपयोग करें.

कर्क राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की सातवें भाव में संचरण करेगे.भावनात्मक रूप से थोड़ा संवेदनशील बना सकता है. आप छोटी-छोटी बातों को दिल पर ले सकते हैं. खुद को शांत रखने की जरूरत है.

पारिवारिक जीवन: घर में शांति बनाए रखने की कोशिश करें.
व्यापार तथा नौकरी: काम में ध्यान देना जरूरी है.
करियर तथा शिक्षा: स्टूडेंट्स को मेहनत बढ़ानी होगी.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: रिश्ते में समझदारी से काम लें.
स्वास्थ्य: नींद पूरी न होने से थकान महसूस होगी.
लकी अंक: 2
लकी कलर: सफेद
उपाय: चावल का दान करें.
आज क्या करें: खुद के लिए थोड़ा समय निकालें.

सिंह राशि
आज आपका दिन आज चंद्रमा आपके राशि की छठे भाव में संचरण करेगे.आत्मविश्वास और ऊर्जावान रहेगा. आपके आसपास के लोग आपकी लीडरशिप और निर्णय क्षमता से प्रभावित होंगे. नए प्रोजेक्ट या जिम्मेदारी लेने का समय अनुकूल है. आज जो भी निर्णय आप लेंगे, वह भविष्य में आपको लाभ पहुंचा सकता है.

पारिवारिक जीवन: परिवार में हर किसी का सहयोग मिलेगा. माता-पिता से मार्गदर्शन मिलेगा और घर का माहौल खुशियों से भरा रहेगा. छोटे बच्चों के साथ समय बिताना आज लाभकारी रहेगा.
व्यापार तथा नौकरी: ऑफिस में आपकी मेहनत की सराहना होगी. उच्च अधिकारियों से संबंध मजबूत होंगे. बिजनेस में नए क्लाइंट और ऑर्डर मिलने की संभावना है.
करियर तथा शिक्षा: छात्रों के लिए दिन अनुकूल है. नए विषय सीखने का मौका मिलेगा और जो मेहनत कर रहे हैं, उन्हें अच्छे परिणाम मिलेंगे.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पार्टनर के साथ रोमांटिक समय मिलेगा. सिंगल लोग आज किसी नए व्यक्ति से आकर्षित हो सकते हैं.
स्वास्थ्य: आपकी ऊर्जा अच्छी रहेगी. हल्की-फुल्की थकान महसूस हो सकती है, इसलिए आराम जरूरी है.
लकी अंक: 1
लकी कलर: गोल्डन
उपाय: सूर्य देव को जल अर्पित करें और सुबह सूरज को देखें.
आज क्या करें: अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें और किसी भी नए प्रोजेक्ट में पहल करें.

कन्या राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की पंचम भाव में संचरण करेगे.सोच-समझकर निर्णय लेने का रहेगा. आपके धैर्य और विवेक की परीक्षा हो सकती है. जो काम आपने लंबे समय से अधूरे छोड़े थे, उन्हें पूरा करने का अच्छा मौका है.

पारिवारिक जीवन: घर में तालमेल बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा. किसी बुजुर्ग की सलाह आपको नई दिशा दिखा सकती है. घर के छोटे बच्चों के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा.
व्यापार तथा नौकरी: ऑफिस में आपका काम व्यवस्थित रहेगा. किसी नई जिम्मेदारी को संभालने की संभावना है. बिजनेस में छोटे-छोटे निवेश सोच-समझकर करें.
करियर तथा शिक्षा: छात्रों के लिए दिन अच्छा है. पढ़ाई में मन लगाकर काम करें. प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों को फायदा मिलेगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पार्टनर के साथ संवाद मजबूत रहेगा. किसी नकारात्मक स्थिति को समझदारी से सुलझाना आवश्यक होगा.
स्वास्थ्य: थोड़ी कमजोरी महसूस हो सकती है. खानपान में संतुलन बनाए रखें.
लकी अंक: 7
लकी कलर: नीला
उपाय: भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें.
आज क्या करें: हर काम को प्लानिंग और समयबद्ध तरीके से करें.

तुला राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की चौथे भाव में संचरण करेगे. आपके लिए संतुलन और समझदारी से काम करने का है. कोई भी निर्णय लेने से पहले हर पहलू पर विचार करें. दिन के मध्य में आपकी मेहनत का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकता है.

पारिवारिक जीवन: परिवार में भावनात्मक तालमेल बना रहेगा. छोटे-मोटे मतभेद धैर्य से सुलझ जाएंगे.
व्यापार तथा नौकरी: ऑफिस में सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी है. नए काम की शुरुआत करने के लिए समय अनुकूल है.
करियर तथा शिक्षा: छात्रों के लिए दिन शुभ रहेगा. नई किताबें या कोर्स आपके लिए लाभकारी साबित होंगे.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: रिश्तों में प्यार और समझदारी बढ़ेगी. पार्टनर का पूरा सहयोग मिलेगा.
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य सामान्य रहेगा. मानसिक शांति के लिए ध्यान और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज लाभकारी है.
लकी अंक: 4
लकी कलर: गुलाबी
उपाय: माता लक्ष्मी को सुगंधित फूल अर्पित करें.
आज क्या करें: अपने मन की सुनें और किसी भी विवाद में गुस्सा न करें.

वृश्चिक राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की तीसरे भाव में संचरण करेगे.गहन सोच और रणनीति बनाने का है. आपकी समझदारी और निर्णायक क्षमता आज काफी मददगार साबित होगी. किसी पुराने काम को पूरा करने का सही समय है.

पारिवारिक जीवन: परिवार के किसी सदस्य की मदद करने की आवश्यकता पड़ सकती है. भावनात्मक तालमेल बनाए रखें.
व्यापार तथा नौकरी: बिजनेस में लाभ मिलने की संभावना है. ऑफिस में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है.
करियर तथा शिक्षा: छात्रों को मेहनत के अच्छे परिणाम मिलेंगे. किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले लोगों को सफलता मिलेगी.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पार्टनर के साथ विश्वास और प्रेम बढ़ेगा. रिश्तों में समझदारी से काम लेना लाभकारी होगा.
स्वास्थ्य: पेट या पाचन से जुड़ी समस्या हो सकती है. खानपान में संतुलन बनाए रखें.
लकी अंक: 8
लकी कलर: मैरून
उपाय: शिवलिंग पर जल अर्पित करें और प्रतिदिन आरती करें.
आज क्या करें: अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें और रणनीति बनाएं.

धनु राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की दूसरे भाव में संचरण करेगे.आपके लिए उत्साह और नई संभावनाओं से भरा रहेगा. आप नए अवसर पहचानेंगे और उन्हें अपनाने में सक्षम रहेंगे. यात्रा या नए संपर्क का समय अनुकूल है.

पारिवारिक जीवन: घर में खुशी और सकारात्मक माहौल रहेगा. परिवार के साथ बातचीत और समय बिताना लाभकारी रहेगा.
व्यापार तथा नौकरी: काम में प्रगति होगी. नए प्रोजेक्ट की शुरुआत सफल रहेगी.
करियर तथा शिक्षा: छात्रों को नई दिशा मिलेगी और पढ़ाई में मन लगेगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पार्टनर के साथ सामंजस्य बना रहेगा. नए रिश्ते में रुचि बढ़ सकती है.
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. हल्की-फुल्की एक्सरसाइज बनाए रखें.
लकी अंक: 3
लकी कलर: लाल
उपाय: केले के पेड़ को जल दें.
आज क्या करें: नए अवसरों को अपनाएं और खुद पर भरोसा रखें.

मकर राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की पहले भाव में संचरण करेगे.जिम्मेदारी और मेहनत से भरा रहेगा. आप अपने कामों को समय पर पूरा करने पर ध्यान देंगे. आज आपकी योजना और अनुशासन का फायदा मिलेगा.

पारिवारिक जीवन: परिवार का सहयोग मिलेगा. बुजुर्गों की सलाह महत्वपूर्ण रहेगी. घर में खुशियों का माहौल रहेगा.
व्यापार तथा नौकरी: मेहनत का परिणाम मिलेगा. किसी नई योजना को लागू करना फायदेमंद रहेगा.
करियर तथा शिक्षा: छात्रों को मेहनत जारी रखनी होगी. किसी प्रतियोगी परीक्षा या प्रोजेक्ट में सफलता मिल सकती है.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: रिश्तों में स्थिरता रहेगी. पार्टनर के साथ विश्वास मजबूत होगा.
स्वास्थ्य: थकान या हल्की कमजोरी महसूस हो सकती है.
लकी अंक: 1
लकी कलर: ग्रे
उपाय: शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाएं.
आज क्या करें: समय का सही इस्तेमाल करें और अनुशासन बनाए रखें.

कुंभ राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की द्वादश भाव में संचरण करेगे.आपके लिए विचारशील और रचनात्मक रहेगा. नई योजनाओं पर काम करना फायदेमंद होगा. आप किसी पुराने मुद्दे को सुलझाने में सक्षम होंगे.

पारिवारिक जीवन: परिवार में शांति और सहयोग बना रहेगा. किसी बुजुर्ग की सलाह महत्वपूर्ण रहेगी.
व्यापार तथा नौकरी: ऑफिस में काम के नए तरीके अपनाने से फायदा होगा. बिजनेस में नए संबंध बन सकते हैं.
करियर तथा शिक्षा: छात्रों के लिए दिन अच्छा रहेगा. नई टेक्निक सीखना फायदेमंद साबित होगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पार्टनर का पूरा सहयोग मिलेगा. रिश्तों में समझदारी और अपनापन बढ़ेगा.
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य सामान्य रहेगा. ध्यान और हल्की एक्सरसाइज लाभकारी है.
लकी अंक: 5
लकी कलर: आसमानी
उपाय: जरूरतमंदों को कपड़े दान करें.
आज क्या करें: अपने आइडिया पर काम शुरू करें और नए प्रयोग करें.

मीन राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की एकादश भाव में संचरण करेगे.आपके लिए भावनात्मक और रचनात्मक रहेगा. आप अपने कामों में दिल लगाकर प्रयास करेंगे और दूसरों की मदद करने में आगे रहेंगे.

पारिवारिक जीवन: परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा. बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा.
व्यापार तथा नौकरी: काम में सुधार होगा. नई योजना या प्रोजेक्ट में सफलता मिल सकती है.
करियर तथा शिक्षा: छात्रों के लिए पढ़ाई में मन लगेगा और मेहनत रंग लाएगी.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: रिश्तों में अपनापन और समझ बढ़ेगी. पार्टनर के साथ समय बिताना लाभकारी रहेगा.
स्वास्थ्य: मानसिक तनाव से बचें. ध्यान और योग मददगार होंगे.
लकी अंक: 3
लकी कलर: बैंगनी
उपाय: भगवान विष्णु का स्मरण करें.
आज क्या करें: सकारात्मक सोच बनाए रखें और खुद को प्रेरित रखें.

Sawan 2026 Start Date: सावन 2026 में कब शुरू ? नोट करें डेट
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 08:57:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>अप्रैल&#45;मई में क्यों टूटते हैं ज्यादा बाल? जानिए पित्त, सीजन और साइंस का सीधा कनेक्शन?</title>
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<description><![CDATA[ क्या आपने भी हाल के दिनों में कंघी, बाथरूम या तकिए पर ज्यादा बाल गिरते हुए नोटिस किए हैं? अगर हां, तो यह केवल आपकी समस्या नहीं है. दरअसल अप्रैल और मई के महीनों में बालों का झड़ना आम बात है.
दिलचस्प बात यह है कि, इस बदलाव को आयुर्वेद ने हजारों साल पहले ही समझ लिया था और आधुनिक विज्ञान भी इस बात पर काफी हद तक सहमत है.&amp;nbsp;
Tulsi: तुलसी पत्ते को चबाने से क्यों रोकते हैं धर्म और विज्ञान, वजह जानकर चौंक जाएंगे
आयुर्वेद के अनुसार बाल झड़ने की मुख्य वजह
आयुर्वेदिक ग्रंथ चरक संहिता के अनुसार, &amp;ldquo;यत् खलित्य रोमपातं च करोति तत् पित्तम्&amp;rdquo;मतलब, पित्त दोष का बढ़ना ही बाल झड़ने का मुख्य कारण है.
अष्टांग हृदयम के ऋतुचर्या अध्याय के मुताबिक, शिशिर ऋतु (सर्दियों का अंत) में शरीर में कफ जमा होता है. जैसे ही वसंत और गर्मी की शुरुआत होती है, सूर्य की गर्मी से यह कफ पिघलता है और शरीर में पित्त बढ़ने लगता है.
यह बढ़ा हुआ पित्त बालों की झड़ों यानी केश भूमि को कमजोर करता है, जिससे बाल झड़ने लगते हैं.&amp;nbsp;

आधुनिक विज्ञान क्या कहता है?
केवल आयुर्वेद ही नहीं, बल्कि आधुनिक शोध भी इस seasonal hair fall को मानते हैं. एक peer-reviewed स्टडी (823 महिलाओं पर) में पाया गया कि अप्रैल और मई के दौरान बालों का झड़ने का चरण जिसे telogen phase भी कहा जाता है, बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
इसके पीछे एक वजह दिन की बढ़ती रोशनी भी है. लंबे दिन और ज्यादा घूप के कारण शरीर में melatonin हार्मोन का लेवल कम होता है, जिससे हेयर ग्रोथ साइकिल प्रभावित होती है और बाल झड़ने लगते हैं.&amp;nbsp;
यह गौर करने वाली बात यह है कि, विज्ञान इसे hormonal और biological cycle से जोड़कर देखता है, जबकि आयुर्वेद इसे दोष imbalance के रूप में देखता है.&amp;nbsp;
बाल झड़ने से बचने के सरल उपाय
तेल से नियमित मालिश (Oil Massage)हफ्ते में कम से कम दो बार हल्के हाथों से 10 मिनट तक सिर की मालिश करें. इससे स्कैल्प में खून का प्रवाह बढ़ता है और बालों की जड़ों तक पोषण पहुंचता है.&amp;nbsp;
खानपान पर नियंत्रणबालों का ज्यादा टूटना खान-पान पर भी निर्भर करता है. तीखा, तला-भुना और ज्यादा नमकीन खाना पित्त को बढ़ाने का काम करता है. इसके बजाय रोज आंवला खाना चाहिए, जिसे आयुर्वेद में पित्त शांत करने वाला माना गया है.&amp;nbsp;
योग और प्राणायामकुछ खास योगासन जिनमें सिर नीचे की ओर होता है, खासतौर पर लाभदायक माने जाता है-

सर्वांगासन
शीर्षासन
विपरीत करनी
पर्वतासन
उत्तानासन

ये सभी आसन स्कैल्प तक ब्लड फ्लो को बढ़ाते हैं, जिससे बालों की जड़ों को बेहतर पोषण मिलता है.
अप्रैल और मई में बाल झड़ना एक सामान्य प्रक्रिया हो सकती है, जिसे नजरअंदाज करने की बजाय समझना बेहद जरूरी है. आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों अलग-अलग नजरिए से इसे एक्सप्लेन करते हैं, लेकिन दोनों इस बात पर सहमत हैं कि, सही देखभाल और लाइफस्टाइल से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.&amp;nbsp;
बालों में तेल लगाने की प्राचीन कला! आयुर्वेद का रहस्य, स्वस्थ बालों का राज़! जानें सही तरीका और फायदे
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 16:19:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>कालाष्टमी 2026: नजर दोष और नकारात्मक ऊर्जा खत्म करने के 5 गुप्त उपाय! तुरंत मिलेगा रिजल्ट</title>
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<description><![CDATA[ Kalashtami 2026 Upay:&amp;nbsp;हिंदू धर्म में कालाष्टमी का दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव जी को समर्पित है. प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का जाती है. हिंदू शास्त्रों में काल भैरव को काशी का कोतवाल और संकटों को हरने वाला देवता माना गया है.
कालाष्टमी का दिन खास है, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष से मुक्ति पाने के लिए काफी अनुकूल है. अप्रैल में कालाष्टमी का त्योहार 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार के दिन है.&amp;nbsp;
अगर आपके बनते काम बिगड़ जाते हैं, घर में अक्सर क्लेश बना रहता है या सेहत आए दिन खराब हो जाती है, तो कालाष्टमी पर किए गए कुछ गुप्त उपाय आपको बड़ी राहत दे सकते हैं, आइए जानते हैं इसके बारे में.&amp;nbsp;
Khatu Shayam: खाटूश्याम मंदिर की 13 सीढ़ियों का रहस्य! क्या यहीं से होता है बाबा से सीधा संपर्क?
कालाष्टमी से नजक दोष से जुड़े गुप्त उपाय
काला धागाकालाष्टमी के दिन काल भैरव के मंदिर जाकर उनके पैरों में थोड़ा सिंदूर लेकर एक काले धारे पर लगाएं. इस धागे को भैरव जी के मंत्र &quot;ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं&quot; का जाप करते हुए अपने दाएं हाथ की कलाई या गले में पहनना अच्छा माना जाता है.
यह काला धागा एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और बुरी नजर से बचाता है.
सरसों तेल के दीपक का उपायकालाष्टमी के दिन सरसों के तेल का एक चौमुखी दीपक मुख्य द्वारा पर जलाएं. इस दीपक की लौ से काजल बनाएं. इस काजल का टीका घर में मौजूद बच्चों और अन्य सदस्यों के कान के पीछे लगाएं.
कालाष्टमी पर भैरव जी के सम्मुख जलाए गए दीए का काजल इस्तेमाल करने से नजर दोष की समस्या तुरंत खत्म हो जाती है.
नजर दोष से सुरक्षा के लिए भगवान काल भैरव का यह मंत्र उच्चारण करें?
कालाष्टमी वाले दिन ॐ कालभैरवाय नम: मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें. जाप के दौरान अपने सामने एक दीपक जलाकर रखें और भैरव बाबा से अपनी सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें.&amp;nbsp;
कालाष्टमी पर ये काम जरूर करें?

कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को गुड़ वाली रोटी खिलाएं. ऐसा करने से नजर दोष दूर होता है.&amp;nbsp;
इस दिन पूर्ण रूप से तामसिक भोजन को परहेज करें.&amp;nbsp;
अपनी क्षमता अनुसार जितना हो सके जरूरतमंदों को कपड़ों और भोजन का दान करें.&amp;nbsp;
इस दिन गरीबों की मदद करने से लाभ मिलता है.&amp;nbsp;

कालाष्टमी की रात क्यों शक्तिशाली होती है?
शास्त्रों में भगवान काल भैरव को काशी का कोतवाल माना गया है. कालाष्टमी की रात भगवान भैरव की शक्तियां काफी ज्यादा प्रबल होती हैं. तांत्रिकों का मानना है कि, इस रात की गई साधना का फल अक्षय होता है और भगवान भैरव जी के आशीर्वाद से साधक को डर पर जीत हासिल होती है.&amp;nbsp;
दरअसल अमावस्या नजदीक होने के कारण रात का अंधकार काफी गहरा होता है. तंत्र साधना में अंधकार को शून्य माना गया है, जहां से नई ऊर्जा का निर्माण होता है. इस दौरान तामसिक और सात्विक दोनों तरह की अदृश्य शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं, जिन्हें साधक मंत्रों के माध्यम से जगाते हैं.&amp;nbsp;
Sita Navami 2026 Date: सीता नवमी का दिन बढ़ाता है धन-सौभाग्य, अप्रैल में कब है ये व्रत, नोट करें डेट

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
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<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 16:19:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>Ram Mandir: राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर, चिलचिलाती गर्मी से राहत के लिए सरयू जल का स्प्रे</title>
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<description><![CDATA[ Ayodhya: अयोध्या नगर निगम ने रामनगरी में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गर्मी से राहत देने के लिए एक अनोखी पहल की है. चिलचिलाती गर्मी में राम पथ और मंदिर क्षेत्र में पवित्र सरयू जल का स्प्रे किया जा रहा है.
यह कदम न केवल तापमान को नियंत्रित करने के लिए है, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और अनुभव को भी सम्मान देता है.
फॉगिंग मशीनों से ठंडक
नगर निगम ने विशेष फॉगिंग मशीनों का इस्तेमाल करते हुए सुबह, दोपहर और शाम के समय सरयू जल का छिड़काव शुरू किया है. इसके जरिए वॉटर वेपर्स के माध्यम से माहौल को ठंडा रखा जा रहा है, ताकि दर्शन के लिए आए राम भक्तों को राहत मिले. इस पहल से भक्तों में उत्साह और प्रसन्नता देखने को मिल रही है.
श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान

नगर निगम का कहना है कि यह पहल सिर्फ गर्मी कम करने तक सीमित नहीं है. पवित्र सरयू जल का उपयोग करके श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक अनुभव को भी सम्मानित किया जा रहा है. भक्तों का कहना है कि जल छिड़काव से न केवल गर्मी में राहत मिल रही है, बल्कि माहौल में पवित्रता और शांति का एहसास भी बढ़ रहा है.
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हनुमानगढ़ी क्षेत्र में अतिरिक्त इंतजाम
नगर निगम ने हनुमानगढ़ी क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए धूप से बचाव के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए हैं. स्थायी शेड का निर्माण जारी है और अस्थायी तौर पर तिरपाल लगाने की भी तैयारी की जा रही है. इसका उद्देश्य लाइन में खड़े लोगों को तेज धूप से बचाना और दर्शन के अनुभव को सहज बनाना है.
अयोध्या नगर निगम की यह पहल न केवल गर्मी से राहत देने में सफल हो रही है, बल्कि पवित्र सरयू जल के माध्यम से श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान भी कर रही है. फॉगिंग मशीनों से जल छिड़काव और हनुमानगढ़ी क्षेत्र में अतिरिक्त इंतजाम शहर में आने वाले भक्तों के अनुभव को आरामदायक और सुखद बना रहे हैं. इस प्रकार अयोध्या में धार्मिक आस्था और सुविधा का अद्भुत संयोजन देखने को मिल रहा है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 16:19:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>नरेंद्रनगर राजमहल की खास परंपरा: तिल से बनता पवित्र गाडू घड़ा तेल, जिससे होता है बदरी विशाल का श्रृंगार!</title>
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<description><![CDATA[ टिहरी जिले के नरेंद्रनगर राजमहल में हाल ही में एक विशिष्ट और पावन कार्यक्रम आयोजित किया गया. महारानी की देखरेख में सुहागिन महिलाओं द्वारा ओखली और मूसल से तिल पिरोकर गाडू घड़ा तेल तैयार किया गया.
इस पवित्र तेल को कलश में भरकर पारंपरिक रूप से बद्रीनाथ धाम ले जाया जाता है, जहां इसका उपयोग भगवान बदरी विशाल के अभिषेक और श्रृंगार में किया जाता है.
अभिषेक की परंपरा
गाडू घड़ा तेल का मुख्य महत्व भगवान बदरी विशाल के कपाट खुलने के दिन के अभिषेक से जुड़ा है. शीतकाल के बाद होने वाले पहले विशेष अभिषेक में इस तेल का प्रयोग किया जाता है. इसे भगवान की मूर्ति को स्नान कराने और श्रृंगार के लिए उपयोग किया जाता है.
यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे धार्मिक विश्वास और भक्ति का प्रतीक माना जाता है.
गाडू घड़ा यात्रा
तेल तैयार होने के बाद इसे कलश में रखा जाता है और नरेंद्रनगर से बद्रीनाथ धाम तक पारंपरिक गाडू घड़ा कलश यात्रा निकाली जाती है. यह यात्रा धार्मिक भक्ति और समुदाय के सहयोग का प्रतीक होती है. श्रद्धालु इस यात्रा में हिस्सा लेकर भगवान के प्रति अपनी निष्ठा और समर्पण दिखाते हैं.
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पवित्रता और शुचिता
तेल बनाने की पूरी प्रक्रिया महारानी की देखरेख में की जाती है. वे पीले वस्त्र धारण करके व्रत रखती हैं और सुहागिन महिलाएं पारंपरिक तरीके से तिलों से तेल निकालती हैं. यह प्रक्रिया न केवल धार्मिक श्रद्धा बल्कि शुचिता और समर्पण का प्रतीक भी है.

छह महीने तक श्रृंगार में उपयोग
गाडू घड़ा तेल का महत्व केवल अभिषेक तक सीमित नहीं है. यह तेल अगले छह महीने तक भगवान बदरी विशाल की सुबह की पूजा (ब्रह्म बेला) में श्रृंगार हेतु उपयोग किया जाता है. तेल का कलश कपाट खुलने से पहले ही बद्रीनाथ धाम पहुंच जाता है, जिससे भक्ति और परंपरा का संपूर्ण चक्र पूरा होता है.
नरेंद्रनगर राजमहल में महारानी की देखरेख में तिल से तैयार किया गया यह गाडू घड़ा तेल धार्मिक परंपरा, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है. यह न केवल भगवान बदरी विशाल के अभिषेक और श्रृंगार में महत्व रखता है, बल्कि समुदाय और संस्कृति में जुड़ाव का भी एक मजबूत संदेश देता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 16:19:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>Rashifal 9 April 2026: मिथुन, सिंह समेत 5 राशियों के करियर में होगा बड़ा बदलाव, मेष से मीन तक 9 अप्रैल का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ Rashifal: 09 अप्रैल 2026 दिन गुरुवार है.पंचांग के अनुसार बैशाख कृष्णपक्ष की सप्तमी तिथि संध्या 06 बजकर 00 मिनट तक रहेगा,उपरांत अष्टमी तिथि आरम्भ हो जाएगी. आपकी राशि पर पड़ने वाले ग्रह तथा नक्षत्रों के प्रभाव कैसा रहेगा आइए जानते है,ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से मेष से लेकर मीन राशि के लिए आज का दिन कैसा रहेगा.
मेष राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की नवम भाव में संचरण करेगे.आज का दिन आपके लिए ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा. नई जिम्मेदारियां आ सकती हैं, लेकिन आपके अंदर की जज्बात और हिम्मत इसे संभालने में मदद करेगी. परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना आपके मूड को खुशगवार बनाएगा.

पारिवारिक जीवन: घर में हल्की-फुल्की बहस हो सकती है, लेकिन आप शांत रहकर सब ठीक कर सकते हैं.
व्यापार तथा नौकरी: नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. योजना बनाकर काम करें.
करियर तथा शिक्षा: पढ़ाई में फोकस बनाए रखें, आज कुछ नया सीखने का मौका मिलेगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: साथी के साथ समय बिताने से रिश्ते में मिठास बढ़ेगी.
स्वास्थ्य: हल्का पेट दर्द या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है.
लकी अंक: 7
लकी कलर: पेस्टल ग्रीन
उपाय: शाम को थोड़ा मेडिटेशन करें, मानसिक शांति मिलेगी.
आज क्या करें: महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लें, जल्दबाजी न करें.

वृषभ राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की आठवें भाव में संचरण करेगे.आज आपका मूड थोड़ा चिड़चिड़ा हो सकता है, लेकिन मानसिक स्थिरता बनाए रखना जरूरी है. आर्थिक मामलों में लाभ देखने को मिलेगा और छोटी-छोटी खुशियों से मन प्रसन्न रहेगा. समय का सही इस्तेमाल करना आज आपके लिए बहुत लाभकारी साबित होगा.

पारिवारिक जीवन: परिवार के सदस्यों के साथ संवाद बढ़ाना जरूरी है.
व्यापार तथा नौकरी: निवेश या कारोबार में नई संभावनाएं खुल सकती हैं.
करियर तथा शिक्षा: ऑफिस में आपकी मेहनत का फल मिलेगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: प्यार के मामलों में थोड़ी दूरी जरूरी हो सकती है.
स्वास्थ्य: सिर दर्द या थकान महसूस हो सकती है.
लकी अंक: 3
लकी कलर: कोरल पिंक
उपाय: सुबह हल्का व्यायाम करें, ताजगी महसूस होगी.
आज क्या करें: किसी पुराने काम को पूरा करने में समय दें.

मिथुन राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की सातवां भाव में संचरण करेगे.आज का दिन आपको नए लोगों से मिलने और नेटवर्क बनाने का अवसर देगा. आपका मूड ऊर्जावान और उत्साही रहेगा, जिससे काम और पढ़ाई दोनों में फायदा होगा. सोशल एक्टिविटी में भाग लेने से मानसिक हल्कापन महसूस होगा.

पारिवारिक जीवन: घर में खुशियां बनी रहेंगी, किसी की मदद करना फायदेमंद होगा.
व्यापार तथा नौकरी: काम में तेजी आएगी, नए प्रोजेक्ट शुरू हो सकते हैं.
करियर तथा शिक्षा: पढ़ाई में उत्साह बना रहेगा, ऑनलाइन कोर्स लाभकारी साबित होंगे.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: रोमांटिक मूड रहेगा, छोटे गिफ्ट्स की प्लानिंग करें.
स्वास्थ्य: आंखों या दृष्टि में हल्की समस्या हो सकती है.
लकी अंक: 5
लकी कलर: स्काई ब्लू
उपाय: घर के उत्तर-पश्चिम दिशा में दीपक जलाएं.
आज क्या करें: पुराने दोस्तों से संपर्क करें, सुखद अनुभव होगा.

कर्क राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की छठे भाव में संचरण करेगे. आज भावनाएं थोड़ी बढ़ी हुई रहेंगी, इसलिए धैर्य बनाए रखना जरूरी है. छोटे-छोटे मसलों को नजरअंदाज न करें, वरना बाद में परेशानी हो सकती है. अपने मन को शांत रखने के लिए ध्यान या हल्का योग फायदेमंद रहेगा.

पारिवारिक जीवन: घर में बुजुर्गों की सलाह महत्वपूर्ण रहेगी.
व्यापार तथा नौकरी: काम में धैर्य बनाए रखें, जल्दबाजी न करें.
करियर तथा शिक्षा: सहकर्मी आपकी मदद कर सकते हैं.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: साथी के साथ किसी विषय पर चर्चा होगी.
स्वास्थ्य: पेट या पेट संबंधी परेशानी हो सकती है.
लकी अंक: 2
लकी कलर: मैरून
उपाय: रोजाना हल्का योग करें, तनाव कम होगा.
आज क्या करें: किसी नए प्रोजेक्ट में हाथ डालने से पहले योजना बनाएं.









सिंह राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की पंचम भाव में संचरण करेगे.आज का दिन आपके पंचम आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला है. आपके निर्णयों में मजबूती रहेगी और लोग आपकी सराहना करेंगे. व्यवसाय और निजी जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है.

पारिवारिक जीवन: परिवार के साथ समय बिताना जरूरी है.
व्यापार तथा नौकरी: प्रमोशन या सराहना मिलने की संभावना है.
करियर तथा शिक्षा: प्रतियोगिता में सफलता मिल सकती है.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: रोमांस में नए अवसर मिलेंगे.
स्वास्थ्य: हल्की थकान या नींद की कमी हो सकती है.
लकी अंक: 9
लकी कलर: गोल्डन येलो
उपाय: सुबह सूर्य को देखकर शांति मंत्र पढ़ें.
आज क्या करें: काम और परिवार में संतुलन बनाए रखें.

कन्या राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की चौथे भाव में संचरण करेगे.आज का दिन समझदारी और योजना का है. आपके पास समय का सही प्रबंधन करने की क्षमता है. छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान देने से बड़ा फायदा मिलेगा.

पारिवारिक जीवन: घर में बच्चों के साथ समय बिताएं.
व्यापार तथा नौकरी: काम में धीमी प्रगति रहेगी, पर चिंता न करें.
करियर तथा शिक्षा: पढ़ाई में थोड़ी मेहनत और चाहिए.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: साथी के साथ छोटे-मोटे मतभेद हो सकते हैं.
स्वास्थ्य: पेट और कब्ज से परेशानी हो सकती है.
लकी अंक: 8
लकी कलर: टील
उपाय: हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाएं.
आज क्या करें: अपने लक्ष्य लिखकर दिन की शुरुआत करें.

तुला राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की तीसरे भाव में संचरण करेगे.आज आपका मूड हल्का और खुशमिजाज रहेगा. आपके आस-पास के लोग आपकी ऊर्जा से प्रेरित होंगे. समय का सदुपयोग करने से दिन सफल और संतोषजनक रहेगा.

पारिवारिक जीवन: घर में रिश्तों में सामंजस्य बढ़ेगा.
व्यापार तथा नौकरी: काम में सुधार होगा, नए क्लाइंट्स मिल सकते हैं.
करियर तथा शिक्षा: सीखने का उत्साह बढ़ेगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: प्यार के मामले में सकारात्मक बदलाव होगा.
स्वास्थ्य: हल्की थकान या नींद की कमी हो सकती है.
लकी अंक: 6
लकी कलर: लाइट पर्पल
उपाय: शाम को थोड़ी सैर करें, ताजगी महसूस होगी.
आज क्या करें: किसी नए विचार पर काम शुरू करें.

वृश्चिक राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की दूसरा भाव में संचरण करेगे.आज आपका फोकस और एकाग्रता बढ़ा रहेगा. आपके प्रयासों का परिणाम जल्दी सामने आएगा. आर्थिक मामलों में सावधानी बरतना जरूरी है.

पारिवारिक जीवन: परिवार के साथ तालमेल बढ़ाने का दिन है.
व्यापार तथा नौकरी: वित्तीय मामलों में सावधानी बरतें.
करियर तथा शिक्षा: मेहनत का फल मिलेगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: साथी से बातचीत करने से रिश्ते मजबूत होंगे.
स्वास्थ्य: सिर या कान में हल्की समस्या हो सकती है.
लकी अंक: 1
लकी कलर: डार्क रेड
उपाय: घर में तुलसी के पौधे की देखभाल करें.
आज क्या करें: जरूरी काम पूरा करने पर ध्यान दें.

धनु राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की पहला भाव में संचरण करेगे.आज का दिन नए अवसर और उत्साह लेकर आया है. आप जोखिम लेने में हिचकिचाएं नहीं, लेकिन समझदारी से कदम बढ़ाएं. आपके प्रयासों का परिणाम संतोषजनक रहेगा.

पारिवारिक जीवन: परिवार के साथ आउटिंग या छोटी यात्रा फायदेमंद होगी.
व्यापार तथा नौकरी: करियर में नई दिशा मिल सकती है.
करियर तथा शिक्षा: पढ़ाई में नई उपलब्धि हासिल हो सकती है.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: साथी के साथ योजना बनाना जरूरी होगा.
स्वास्थ्य: जोड़ों या पीठ में हल्की परेशानी हो सकती है.
लकी अंक: 4
लकी कलर: ऑरेंज
उपाय: हल्का योग करें और ध्यान लगाएं.
आज क्या करें: नए विचारों को नोट करें और लागू करें.

मकर राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की द्वादश भाव में संचरण करेगे.पहले आज का दिन मेहनत और धैर्य का है. किसी भी काम में जल्दबाजी न करें, परिणाम धीरे-धीरे मिलेगा. आपकी स्थिरता और अनुशासन आपकी सफलता की कुंजी बनेंगे.

पारिवारिक जीवन: घर में बुजुर्गों की बात मानना फायदेमंद होगा.
व्यापार तथा नौकरी: नई जिम्मेदारी मिल सकती है.
करियर तथा शिक्षा: पढ़ाई या काम में स्थिरता रहेगी.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: साथी से तालमेल बनाए रखें.
स्वास्थ्य: हल्की सर्दी या गले में खराश हो सकती है.
लकी अंक: 6
लकी कलर: ब्राउन
उपाय: सुबह गर्म पानी में नींबू डालकर पिएं.
आज क्या करें: महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर लें.

कुम्भ राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की एकादश भाव में संचरण करेगे.आज चंद्रमा आपके राशि की चौथे भाव में संचरण करेगे.आज आपकी ऊर्जा सकारात्मक रहेगी. समाजिक काम या दोस्तों के साथ समय बिताना अच्छा रहेगा. आपकी मेहनत और सोच आगे बढ़ने में मदद करेगी.

पारिवारिक जीवन: घर में खुशियां बनी रहेंगी.
व्यापार तथा नौकरी: काम में सुधार और सफलता मिलेगी.
करियर तथा शिक्षा: पढ़ाई और करियर में नया मोड़ मिल सकता है.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: साथी के साथ संवाद बढ़ाना जरूरी है.
स्वास्थ्य: हल्की थकान या नींद की कमी हो सकती है.
लकी अंक: 5
लकी कलर: नेवी ब्लू
उपाय: घर के पूर्व दिशा में साफ-सफाई करें.
आज क्या करें: पुराने प्रोजेक्ट्स को पूरा करने पर ध्यान दें.

मीन राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की दशम भाव में संचरण करेगे.आज आपका मूड रचनात्मक और संवेदनशील रहेगा. कला, संगीत या क्रिएटिव काम में समय बिताने से मानसिक संतोष मिलेगा. भावनाओं पर नियंत्रण रखना आज जरूरी रहेगा.

पारिवारिक जीवन: परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा.
व्यापार तथा नौकरी: वित्तीय मामले में सोच-समझकर कदम उठाएं.
करियर तथा शिक्षा: कला या क्रिएटिव कार्यों में फायदा होगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: रोमांटिक पल मिल सकते हैं.
स्वास्थ्य: हल्की थकान या माइग्रेन हो सकता है.
लकी अंक: 8
लकी कलर: लैवेंडर
उपाय: शाम को हल्का ध्यान या मेडिटेशन करें.
आज क्या करें: रचनात्मक काम या हौबी में समय दें.





Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर वाहन खरीदने का शुभ मुहूर्त क्या है ?

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 16:19:32 +0530</pubDate>
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<title>क्लाइमेट चेंज से डायबिटीज पर असर, जानें मौसम कैसे बदल रहा आपका ब्लड शुगर? पढ़ें सेफ्टी टिप्स</title>
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<description><![CDATA[ Climate change impacts diabetes : आज का मौसम और बढ़ती गर्मी सिर्फ हमारी लाइफस्टाइल ही नहीं बदल रही, बल्कि हमारी सेहत पर भी गहरा असर डाल रही है. खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए गर्म मौसम एक बड़ी चुनौती बन सकता है. अगर हम अपने शरीर की जरूरतों का ध्यान न रखें, तो ब्लड शुगर को &amp;nbsp;कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है. हाल ही में डॉक्टर ने बताया है कि जलवायु परिवर्तन सीधे हमारे शरीर के काम करने के तरीके को बदल देता है. जब तापमान बढ़ता है, तो शरीर को अपना संतुलन बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसका सीधा असर इंसुलिन और शुगर कंट्रोल पर पड़ता है. ऐसे में गर्म मौसम डायबिटीज पर कैसे असर डालता है और इसके लिए सुरक्षा टिप्स क्या हैं.
क्लाइमेट चेंज से डायबिटीज पर असर
हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से शुगर को कंट्रोल करने के तरीके रखता है. &amp;nbsp;ठंडे मौसम में शरीर एक खास प्रकार की फैट का इस्तेमाल करता है, जो कैलोरी जलाकर शरीर को गर्म रखता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाता है, लेकिन जब लंबे समय तक गर्मी रहती है, तो यह प्रक्रिया कम होती है. इसका मतलब है कि शरीर के लिए ब्लड शुगर को संतुलित रखना मुश्किल हो जाता है.साथ ही, ज्यादा गर्मी के कारण लोग बाहर जाने और एक्सरसाइज करने से बचते हैं. कम फिजिकल एक्टिविटी डायबिटीज और वजन बढ़ने का बड़ा कारण बन सकती है.&amp;nbsp;
मौसम कैसे बदल रहा है आपका ब्लड शुगर?
1. पानी की कमी और डिहाइड्रेशन - गर्मी में पसीना ज्यादा आता है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
2. शरीर को ठंडा करने में मुश्किल - डायबिटीज नसों और ब्लड वेसल्स को प्रभावित करता है, जो पसीने की ग्रंथियों को कंट्रोल करती हैं. इसके कारण शरीर ठंडा होने में असमर्थ होता है, जिससे हीट एक्सॉर्शन या गर्मी से थकान का खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
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3. दवाओं और इंसुलिन का असर - हाई टेंपरेचर इंसुलिन और अन्य दवाओं को प्रभावित कर सकता है. गर्मी और बिजली कटौती के समय, अगर दवाओं को ठीक से स्टोर न किया जाए, तो उनका असर कम हो सकता है.
इसके लिए सुरक्षा टिप्स क्या हैं?
1. हाइड्रेशन और निगरानी - लगातार पानी पीते रहें. पानी किडनी को शरीर से अतिरिक्त शुगर निकालने में मदद करता है. &amp;nbsp;ब्लड शुगर की जांच ज्यादा बार करें क्योंकि गर्मी में ब्लड शुगर अस्थिर हो सकता है. शराब और कैफीन से बचें, क्योंकि ये शरीर को और ज्यादा डिहाइड्रेट कर सकते हैं.&amp;nbsp;
2. शरीर को ठंडा रखें - अगर शरीर पसीना नहीं निकाल पाता, तो ठंडा रहने के लिए फैंस, गीले तौलिये और ढीले कपड़े पहनें. एक्सरसाइज या चलने-फिरने का समय सुबह जल्दी या शाम को रखें, जब तापमान कम हो.&amp;nbsp;
3. दवाओं और मेडिकल सप्लाइज की सुरक्षा - इंसुलिन और डायबिटीज टेस्ट किट्स गर्मी में खराब हो सकती हैं. इन्हें कार में या धूप में न रखें. यात्रा करते समय इंसुलिन और टेस्ट किट्स को इंसुलेटेड कूलिंग पाउच में रखें. दवाओं और किट्स को ठंडी और सूखी जगह पर स्टोर करें.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>lalla musa dal recipe: घर में कैसे बनाएं दुबई की मशहूर लल्ला मूसा दाल? उंगलियां चाटता रह जाएगा हर कोई</title>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:53 +0530</pubDate>
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<title>अयोध्या में बढ़ती गर्मी के बीच रामलला की पूजा&#45;सेवा और दिनचर्या में बड़ा बदलाव! जानिए क्या&#45;क्या बदला?</title>
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<description><![CDATA[ Ayodhya Ram lalla: अयोध्या में बढ़ती गर्मी का प्रभाव अब राम मंदिर की व्यवस्थाओं पर भी साफ तौर पर नजर आने लगा है. तपते तापमान के बीच रामलला की सेवा-पूजा और दैनिक दिनचर्या में कई खास बदलाव किए गए हैं, ताकि उन्हें किसी भी तरह की असुविधा न हो और पूरी विधि-विधान के साथ उनकी देखभाल भी की जा सके.
मंदिर प्रशासन ने मौसम को ध्यान में रखते हुए हर छोटी-बड़ी व्यवस्था को नए सिरे से ढल दिया है.
बढ़ती गर्मी को देखते हुए रामलला की दिनचर्या में बड़ा बदलाव
भीषण गर्मी के इस दौर में रामनगरी अयोध्या में विराजमान रामलला की दिनचर्या पूरी तरह से मौसम के अनुरूप कर दी गई है. जहां पहले उन्हें गुनगुने पानी से स्नान कराया जाता था, वहीं, अब शीतल जल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे उन्हें गर्मी से राहत
मिल सके. इसी तरह भोग व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. अब उन्हें भोग में दही, ताजे मौसमी फल, ठंडा पेय, जूस और लस्सी जैसी चीजें शामिल की जा रही हैं, ताकि भगवान को ठंडक पहुंचाई जा सके.
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रामलला की पोशाक में भी परिवर्तन
इसके अलावा रामलला के कपड़ों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. जहां पहले अपेक्षाकृता भारी वस्त्र पहनाए जाते थे, अब उनकी जगह हल्के और सूती कपड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे गर्भगृह के तापमान के अनुसार रामलला को आराम मिल सके.
यह परिवर्तन न केवल परंपरा के अनुरूप है, बल्कि मौसम के प्रभाव को संतुलित करने की भी एक कोशिश है.&amp;nbsp;
पूजा पद्धति भी बढ़ती गर्मी के अनुकूल
पूजा पद्धति में भी बढ़ती गर्मी को देखते हुए परिवर्तन किया गया है. अब दीपों की जगह फूलों से आरती की जा रही है, जिससे अतिरिक्त गर्मी पैदा न हो. मंदिर प्रशासन ने बताया कि, रामलला की सेवा एक पांच वर्ष के बालक की तरह की जाती है, इसलिए हर व्यवस्था में खास सावधानी और संवेदनशीलता बरती जाती है.&amp;nbsp;
इसके साथ ही गर्भगृह में कूलर भी लगाए जा चुके हैं और आने वाले दिन एयर कंडीशनर लगाने की भी तैयारी चल रही है. कुल मिलाकर बढ़ती गर्मी के बीच रामलला की सेवा में किसी भी तरह की कमी न आए, इसके लिए हर संभव कोशिश किया जा रहा है, ताकि तपती अयोध्या में भी उन्हें दिक्कत न आए.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:53 +0530</pubDate>
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<title>हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए कितना होना चाहिए नट्स का सही पोर्शन? जानें खाने का सही तरीका और मात्रा</title>
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<description><![CDATA[ हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए कितना होना चाहिए नट्स का सही पोर्शन? जानें खाने का सही तरीका और मात्रा ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:52 +0530</pubDate>
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<title>Khatu Shayam: खाटूश्याम मंदिर की 13 सीढ़ियों का रहस्य! क्या यहीं से होता है बाबा से सीधा संपर्क?</title>
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<description><![CDATA[ Khatu Shayam: खाटूश्याम मंदिर की 13 सीढ़ियों का रहस्य! क्या यहीं से होता है बाबा से सीधा संपर्क? ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:52 +0530</pubDate>
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<title>Vaccination: इन बीमारियों की वैक्सीन एकदम फ्री लगाती है सरकार, एक क्लिक में देख लें पूरी लिस्ट</title>
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<description><![CDATA[ Vaccination: दुनिया भर में हर दिन तरह- तरह की बीमारियां फैलती है, ऐसे में इससे बचाव के समय पर टीकाकरण बहुत जरूरी हो जाता है. ऐसे में अच्छी बात यह है कि भारत सरकार ने लोगों की सेहत का ध्यान रखते हुए, जानलेवा और गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए मुफ्त टीकाकरण की सुविधा दी है. ताकि हर नागरिक खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित रखा जा सके. यह सुविधा मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत चलाई जाती है. ऐसे में कई लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है, आइए जानते है किन-किन बीमारियों की वैक्सीन मुफ्त में लगती है?
मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम क्या है?
भारत में मुफ्त टीकाकरण मुख्य रूप से सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (Universal Immunization Programme - UIP) के अंतर्गत होता है. यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का हिस्सा है और 100% केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित है, जिसके तहत सरकारी अस्पतालों, PHC और आंगनवाड़ी केंद्रों में टीके मुफ्त लगते हैं.
यह भी पढ़ेंः 30 की उम्र पार करते ही शरीर में पनप सकती हैं ये बीमारियां, भूलकर भी न टालें ये टेस्ट
किन बीमारियों की वैक्सीन मिलती है फ्री?
भारत में &amp;nbsp;UIP के तहत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर 12 से अधिक गंभीर बीमारियों के लिए मुफ्त टीकाकरण &amp;nbsp;उपलब्ध होते है जैसेः&amp;nbsp;

तपेदिक (TB) के लिए बीसीजी वैक्सीन
डिप्थीरिया, काली खांसी (Pertussis), टिटनेस के लिए &amp;nbsp;डीपीटी और टीडी (Td) टीके
पोलियो के लिए ओरल पोलियो वैक्सीन (bOPV)खसरा और रूबेला (Measles-Rubella) के लिए एमआर (MR) टीका
हेपेटाइटिस B के लिए &amp;nbsp;हेपेटाइटिस बी का टीका
मेनिनजाइटिस और निमोनिया के लिए &amp;nbsp;हिब (Hib) और पीसीवी (PCV) टीके
रोटावायरस डायरिया के लिए रोटावायरस वैक्सीन (RVV)
जापानी इंसेफलाइटिस के लिए जेई (JE) टीका
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer) 9 से 14 वर्ष की लड़कियों के लिए HPV वैक्सीन&amp;nbsp;

इसके बाद तय समय पर अन्य टीके लगाए जाते हैं ताकि उनकी इम्युनिटी मजबूत बनी रहे.
सरकारी अभियान और पहल&amp;nbsp;
सरकार समय-समय पर विशेष अभियान भी चलाती है, जैसे Mission Indradhanush (IMI), पल्स पोलियो कार्यक्रम, और एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान जिसका उद्देश्य उन बच्चों, किशोरियों और गर्भवती महिलाओं तक टीकाकरण पहुंचाना है जो नियमित कार्यक्रम से छूट गए हैं. इस अभियान के जरिए देश के दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में भी टीकाकरण की पहुंच सुनिश्चित की जाती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः लंग कैंसर के मरीजों के लिए नई उम्मीद, AI टूल पहले ही भांप लेगा इलाज का असर ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:52 +0530</pubDate>
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<title>Rajasthan Mystery Illness: किस रहस्यमयी बीमारी ने राजस्थान में रोकीं 6 बच्चों की सांसें, जानें लक्षण और यह कितनी खतरनाक?</title>
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<description><![CDATA[ What Is Causing Fever Deaths In Rajasthan Children: राजस्थान के सलूम्बर जिले के लसाड़िया इलाके में पिछले कुछ दिनों में सामने आए बच्चों की मौत के मामलों ने हेल्थ सिस्टम को अलर्ट मोड पर ला दिया है. 1 अप्रैल से 5 अप्रैल के बीच दो गांवों में छह छोटे बच्चों की बुखार के बाद मौत और 652 मरीज का इलाज&amp;nbsp; होने से प्रशासन और मेडिकल विभाग हरकत में आ गया है. अब इस पूरी घटना को एक संभावित स्वास्थ्य संकट के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी गहन जांच शुरू कर दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार,&amp;nbsp; डॉक्टर इसको लेकर वायरल इन्सेफलाइटिस की आशंका जता रहे है.&amp;nbsp;
मेडिकल टीम जांच में जुटी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उदयपुर स्थित आरएनटी मेडिकल कॉलेज के एक्सपर्ट की एक टीम को मौके पर भेजा गया है. यह टीम जमीनी स्तर पर जाकर बीमारी के कारणों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह कोई इंफेक्शन है, मौसमी बीमारी है या फिर कोई नई स्वास्थ्य समस्या उभर रही है. इसके अलावा जयपुर से डायरेक्टर ऑफ हेल्थ सर्विस की टीम भी निगरानी और कंट्रोल के लिए तैनात की गई है. मुख्यमंत्री भजन लाल ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. उन्होंने साफ कहा है कि मौतों के सही कारण का पता लगाया जाए और बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं.
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2 से 4 साल के बच्चों की मौत
मृत बच्चों की उम्र 2 से 4 साल के बीच बताई गई है, जो इस घटना को और भी संवेदनशील बना देती है. छोटे बच्चों में अचानक बुखार और फिर गंभीर हालत बनने के मामलों ने हेल्थ एक्सपर्ट को सतर्क कर दिया है. राज्य के मुख्य सचिव &amp;nbsp;वी. श्रीनिवास ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्थिति की समीक्षा की और सभी विभागों को मिलकर काम करने के निर्देश दिए. वहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौर ने स्पष्ट किया कि किसी भी बच्चे में लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज शुरू किया जाएगा. गंभीर मामलों को बिना देरी के जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर करने के निर्देश दिए गए हैं.
एन्सेफलाइटिस क्या होता है?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट mayoclinic के अनुसार, एन्सेफलाइटिस एक गंभीर स्थिति है, जिसमें ब्रेन में सूजन आ जाती है. यह आमतौर पर वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होता है, लेकिन कई बार शरीर की इम्यून ही गलती से मस्तिष्क पर हमला करने लगती है, जिसे ऑटोइम्यून एन्सेफलाइटिस कहा जाता है. इस बीमारी के वायरस मच्छर और टिक जैसे कीड़ों के काटने से भी फैल सकते हैं. कुछ मामलों में इसका कारण क्लियर नहीं हो पाता.
क्या होते हैं इसके लक्षण?
यह बीमारी समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर जानलेवा भी हो सकती है, इसलिए तुरंत मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है. इसके लक्षण शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसे होते हैं, जैसे बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, थकान और कमजोरी. लेकिन कुछ ही समय में यह गंभीर रूप ले सकती है. अगर इसमें मरीज की जान बच जाए, तो उसे भविष्य में सुनने की दिक्कत या मिर्गी के दौरे की दिक्कत का सामना करना पड़ता है.&amp;nbsp;
बच्चे ही क्यों होते हैं चपेट में ज्यादा
एन्सेफलाइटिस बच्चों को ज्यादा प्रभावित करती है। इसका कारण यह है कि बच्चों की इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती, जिससे वे सामान्य वायरल इंफेक्शन के प्रति अधिक संवेदनशील रहते हैं. हर्पीस और एंटेरोवायरस जैसे वायरस आसानी से शरीर में प्रवेश कर ब्रेन तक पहुंच सकते हैं और वहां सूजन पैदा कर सकते हैं. वैसे यह बुखार हर उम्र के लोगों की अपनी चपेट में ले सकता है, लेकिन बच्चों की इम्यून क्षमता कमजोर होने के कारण वो जल्दी इसकी चपेट में आ जाते हैं.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:51 +0530</pubDate>
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<title>Heart Disease Prevention: हार्ट अटैक का खतरा 31% तक होगा कम! डायबिटीज मरीजों के लिए वरदान साबित होगी यह नई दवा</title>
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<description><![CDATA[ Can Evolocumab Prevent First Heart Attack: दिल की बीमारियां आज भी दुनिया भर में मौत की सबसे बड़ी वजह बनी हुई हैं. अक्सर लोग तब इलाज शुरू करते हैं, जब हालत गंभीर हो चुकी होती है, जैसे धमनियों में ब्लॉकेज या हार्ट अटैक के बाद. लेकिन अब नई रिसर्च इशारा कर रही है कि अगर इलाज पहले और ज्यादा प्रभावी तरीके से शुरू किया जाए, तो इन खतरों को पहले ही रोका जा सकता है.&amp;nbsp;
हार्ट से जुड़ी दिक्कत को कम किया जा सकता है
अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल ब्रिगहम &amp;nbsp;की एक नई स्टडी, जो JAMA में पब्लिश हुई और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के सालाना साइंटिस्ट सत्र में पेश की गई, उसमें बताया गया कि इवोलोक्यूमैब नाम की दवा हाई-रिस्क डायबिटीज मरीजों में दिल से जुड़ी पहली बड़ी घटना के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है. भले ही उनमें अभी &amp;nbsp;आर्टरीज की बीमारी के साफ संकेत न हों.
क्यों बढ़ता है खतरा
हमारा हार्ट शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए साफ और खुली ब्लड वेसल्स पर निर्भर करता है. लेकिन समय के साथ आर्टरीज की दीवारों में प्लाक नाम का पदार्थ जमा होने लगता है, जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है. जब यह जमाव बढ़ जाता है, तो ब्लड फ्लो रुक सकता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. इस प्रक्रिया के पीछे एक बड़ा कारण एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल होता है. लंबे समय से डॉक्टर इसे कम करने के लिए स्टैटिन दवाओं का इस्तेमाल करते आ रहे हैं. हालांकि ये दवाएं असरदार हैं, लेकिन हाई-रिस्क मरीजों में हमेशा पर्याप्त कमी नहीं ला पातीं.
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नए विकल्प आते हैं
यहीं पर इवोलोक्यूमैब जैसे नए विकल्प सामने आते हैं. यह एक पीसीएसके9 इनहिबिटर दवा है, जो स्टैटिन से अलग तरीके से काम करती है और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को लगभग 60 प्रतिशत तक कम कर सकती है. अब तक इसका उपयोग मुख्य रूप से उन मरीजों में किया जाता था, जिन्हें पहले से दिल की बीमारी हो. इस स्टडी में यह जांचा गया कि क्या इस दवा का इस्तेमाल पहले से, यानी बीमारी के गंभीर होने से पहले, किया जाए तो क्या यह दिल की समस्याओं को रोक सकती है. इसके लिए 3,655 हाई-रिस्क डायबिटीज मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें लंबे समय से डायबिटीज, इंसुलिन पर निर्भरता या छोटी ब्लड वेसल्स में नुकसान जैसी स्थितियां थीं, लेकिन एथेरोस्क्लेरोसिस के स्पष्ट संकेत नहीं थे.
करीब एक साल बाद नतीजे सामने आए कि इवोलोक्यूमैब लेने वालों में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल लगभग 51 प्रतिशत तक कम हो गया. &amp;nbsp;लेकिन असली असर लंबे समय में दिखा. करीब पांच साल के फॉलो-अप में पाया गया कि इस दवा का इस्तेमाल करने वालों में पहली बार हार्ट अटैक, स्ट्रोक या दिल से जुड़ी मौत का खतरा 31 प्रतिशत तक कम था.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:51 +0530</pubDate>
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<title>क्या मां बनने के बाद महिलाओं में घटती है फिजिकल रिलेशन बनाने की इच्छा, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?</title>
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<description><![CDATA[ How To Improve Libido After Pregnancy: मां बनना किसी भी महिला के जीवन का बेहद खास और इमोशनल अनुभव होता है. लेकिन इसके साथ ही शरीर और मन में कई बड़े बदलाव भी आते हैं, जिनका असर रिश्तों और खासकर फिजिकल इंटिमेसी पर पड़ सकता है. यही वजह है कि कई महिलाओं में बच्चे के जन्म के बाद फिजिकल इंटिमेसी यानी शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा कम हो जाती है. एक्सपर्ट इसे एक सामान्य और अस्थायी बदलाव मानते हैं.&amp;nbsp;
क्या होते हैं कारण?
&amp;nbsp;डिलीवरी के बाद सबसे बड़ा कारण होता है थकान. नवजात शिशु की देखभाल में दिन-रात का फर्क मिट जाता है. नींद पूरी नहीं हो पाती और शरीर लगातार थका हुआ महसूस करता है। ऐसे में फिजिकल रिलेशन की इच्छा कम होना स्वाभाविक है. इसके अलावा पोस्टनेटल डिप्रेशन भी एक बड़ी वजह है. कई महिलाएं बच्चे के जन्म के बाद मानसिक दबाव, चिंता और भावनात्मक उतार-चढ़ाव से गुजरती हैं. यह स्थिति न सिर्फ उनके मूड को प्रभावित करती है, बल्कि पार्टनर के साथ नजदीकी पर भी असर डालती है.&amp;nbsp;
हॉर्मोनल बदलाव का भी अहम रोल
हॉर्मोनल बदलाव भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हॉर्मोन का स्तर अचानक कम हो जाता है. इससे शरीर की प्राकृतिक लुब्रिकेशन प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे इंटिमेसी के दौरान असहजता महसूस हो सकती है और इच्छा में कमी आ सकती है.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
यूरोपीय जर्नल ऑफ मिडवाइफरी में पब्लिश एक रिसर्च में बताया गया कि ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं में यह समस्या और ज्यादा देखने को मिलती है. ब्रेस्टफीडिंग &amp;nbsp;के दौरान भी एस्ट्रोजन का स्तर कम रहता है, जिससे फिजिकल इंटिमेसी पर असर पड़ता है. कुछ स्टडीज में यह भी सामने आया है कि जो महिलाएं एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं, उनमें लुब्रिकेशन की कमी और दर्द जैसी समस्याएं ज्यादा हो सकती हैं.
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शरीर में होते हैं बदलाव
इसके साथ ही शरीर में आए बदलाव भी महिलाओं के आत्मविश्वास को प्रभावित करते हैं. प्रेग्नेंसी के बाद वजन बढ़ना, स्ट्रेच मार्क्स या शरीर के आकार में बदलाव कई बार महिलाओं को असहज महसूस कराते हैं. इससे उनकी बॉडी इमेज पर असर पड़ता है और वे खुद को पहले जैसा आकर्षक नहीं मान पातीं, जिसका सीधा असर उनकी इंटिमेसी पर पड़ता है. हालांकि एक्सपर्ट साफ कहते हैं कि यह स्थिति स्थायी नहीं होती.
पार्टनर के साथ खुलकर बात करना
सही समय, बातचीत और देखभाल से इसे बेहतर किया जा सकता है. पार्टनर के साथ खुलकर बात करना, खुद के लिए समय निकालना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या काउंसलर की मदद लेना फायदेमंद हो सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि हर महिला का शरीर अलग होता है और डिलीवरी के बाद उसमें बदलाव आना पूरी तरह सामान्य है. ऐसे में खुद को समय देना और अपने शरीर को स्वीकार करना ही इस दौर से बाहर निकलने का सबसे बेहतर तरीका माना जाता है.
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<title>Personality Test: मीटिंग में आपकी सीट बताती है आपकी पर्सनैलिटी, जानें बैठने का तरीका कैसे खोलता है कई राज?</title>
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<description><![CDATA[ Meeting behavior analysis: क्या आपने कभी नोटिस किया है कि जैसे ही आप किसी मीटिंग रूम या भीड़-भाड़ वाली जगह पर जाते हैं, तब आपका दिमाग बिना सोचे-समझे एक कुर्सी चुन लेता है. यह चुनाव पूरी तरह से अचानक नहीं होता, बल्कि आपकी सोच, व्यवहार और व्यक्तित्व से जुड़ा होता है. आप किस सीट पर बैठना पसंद करते हैं, कोने में, बीच में या लीडर के पास यह आपकी पर्सनेलिटी के कई पहलुओं को उजागर कर सकता है. दरअसल सीट चुनना सिर्फ आराम के लिए नहीं होता, बल्कि यह इस बात का भी संकेत होता है कि आप लोगों के बीच खुद को कैसे प्रस्तुत करते हैं. इसी कॉन्सेप्ट पर आधारित यह पर्सनैलिटी टेस्ट बताता है कि मीटिंग में आपकी पसंदीदा सीट आपके स्वभाव के बारे में क्या बताती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि मीटिंग में आपकी सीट आपकी पर्सनालिटी कैसे बताती है और बैठने का तरीका आपके कई राज कैसे खोल देता है.

को-पायलट

अगर आप ऐसी सीट चुनते हैं, जो लीडर या केंद्र के पास हो तो यह दर्शाती है कि आप जिम्मेदारी लेने से पीछे नहीं हटते. आप टीम में एक्टिव रहना पसंद करते हैं और चीजों को सही दिशा में आगे बढ़ाने में भरोसा रखते हैं. ऐसे लोग सिस्टम को समझते हैं और सहयोगी भूमिका में मजबूत होती है.

बफर जोन

जो लोग थोड़ी दूरी पर बैठना पसंद करते हैं, वह माहौल को समझकर आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं. यह लोग सीधे स्पॉटलाइट में आने से बचते हैं, लेकिन हर चीज पर नजर रखते हैं. इनकी खासियत होती है संतुलन बनाए रखना और सही समय पर अपनी बात रखना.

कैलकुलेटेड थिंकर

कुछ लोग ऐसी जगह पर बैठते हैं, जहां वे ज्यादा ध्यान खींचे बिना पूरे माहौल को समझ सके. ऐसे लोग जल्दबाजी में बोलने के बजाय पहले हर पहलू पर सोचते हैं. जब यह अपनी राय देते हैं तो अक्सर वह बाकी लोगों से अलग और अहम होती है.
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इंटरनल ऑडिटर

ऐसी सीट चुनने वाले लोग हर बात को परखने की आदत रखते हैं. यह सिर्फ हां में हां मिलाने के बजाय हर निर्णय के पीछे की वजह समझना चाहते हैं. इनका नजरिया तार्किक होता है और यह गलतियों को जल्दी पकड़ लेते हैं.

द डायरेक्ट चैलेंजर

जो लोग मीटिंग में सीधे सामने बैठते हैं, वे आमतौर पर कॉन्फिडेंट और स्पष्ट बोलने वाले होते हैं. यह अपनी बात खुलकर रखते हैं और बहस से नहीं डरते हैं. ऐसे लोग चुनौती पूर्ण परिस्थितियों में भी पीछे नहीं हटते हैं.

द वॉलफ्लावर डिटेक्टिव

अगर आप मीटिंग में किनारे की सीट चुनते हैं, तो आप शांत रहकर लोगों को समझने वाले हो सकते हैं. आप कम बोलते हैं, लेकिन हर छोटी बड़ी चीज को नोटिस करते हैं. सही समय आने पर आपकी बात अहम साबित होती है.

स्ट्रेटेजिक पार्टिसिपेंट

कुछ लोग मीटिंग में हर बात पर रिएक्शन नहीं देते हैं. बल्कि सही मौके का इंतजार करते हैं. यह लोग अपनी उर्जा बचाकर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर ही बोलते हैं, जिससे उनकी बात ज्यादा प्रभावी होती है.

द सोशल ग्लू

ऐसी सीट सुनने वाले लोग ग्रुप में पॉजिटिव उर्जा बनाए रखते हैं. यह दूसरों को सहज महसूस कराने में माहिर होते हैं और औपचारिक माहौल को भी हल्का बना देते हैं.

द लॉयल प्रो

जो लोग लीडर के पास बैठना पसंद करते हैं. वह अक्सर सीखने और मार्गदर्शन लेने में आत्मविश्वास रखते हैं. यह लोग टीम में अपनी जगह मजबूत करने के लिए लीडर के साथ तालमेल बनाकर चलते हैं.
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:06:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>चैत्र नवरात्रि में ज्वाला देवी मंदिर में चढ़ा 99 लाख से अधिक चढ़ावा, दर्ज हुआ नया रिकॉर्ड !</title>
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<description><![CDATA[ कांगड़ा, चैत्र नवरात्रों के दौरान ज्वाला जी मंदिर में इस बार आस्था का जनसैलाब उमड़ा और चढ़ावे में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई. मंदिर प्रशासन के अनुसार इस बार कुल 99 लाख 77 हजार 209 रुपए का नकद चढ़ावा श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 10 लाख रुपए अधिक है.
नवरात्रों के दौरान करीब 3 लाख 50 हजार श्रद्धालुओं ने मां ज्वाला के दर्शन किए. भारी भीड़ के बावजूद पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न करवाया गया. नवरात्रों के दौरान मंदिर में विदेशी श्रद्धालुओं की भी भागीदारी देखने को मिली. चढ़ावे के रूप में विदेशी मुद्रा भी प्राप्त हुई, जिसमें-
कनाडा: 135 डॉलर, इंग्लैंड: 75 पाउंड, अमेरिका: 6 डॉलर और यूएई: 45 दिरहम है.
सीमित संसाधनों में भी बेहतर प्रबंधन की हो रही तारीफ&amp;nbsp;
मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल ने जानकारी देते हुए बताया कि, सीमित संसाधनों के बावजूद श्रद्धालुओं को सुविधाजनक दर्शन करवाए गए. उन्होंने कहा कि मां ज्वाला जी के आशीर्वाद से पूरे नवरात्रों के दौरान कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई और आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ. उन्होंने इस सफलता के लिए सभी विभागों के सहयोग को अहम बताया और सभी का आभार व्यक्त किया.
अनुभव का मिला लाभ
मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल इससे पहले चिंतपूर्णी मंदिर में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. वहां के अनुभव को उन्होंने ज्वाला जी मंदिर में लागू किया, जिसका असर व्यवस्थाओं में साफ दिखाई दिया. इसका परिणाम रहा कि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद दर्शन व्यवस्था सुचारू रही और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा.
श्रद्धालुओं को मिली विशेष सुविधाएं
नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई व्यवस्थाएं की गईं. इनमें निशुल्क लंगर, धर्मार्थ औषधालय, निशुल्क शौचालय, स्नानागार जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं, जिससे बाहर से आए श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली.
प्रशासन ने जताया आभार
मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल ने मंदिर न्यास के सदस्यों, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सहयोगी विभागों का विशेष रूप से धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से ही यह सफल आयोजन संभव हो पाया.
पुजारी कपिल शर्मा बोले देश विदेश से श्रद्धालुओं ने टेका माथा&amp;nbsp;
मंदिर के पुजारी कपिल शर्मा ने कहा कि चैत्र नवरात्रों के दौरान मां ज्वाला जी के दरबार में अपार आस्था देखने को मिली. देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की. उन्होंने कहा कि इस बार भक्तों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और सभी ने भक्तिभाव से चढ़ावा अर्पित किया. मां के आशीर्वाद से पूरे नवरात्र शांतिपूर्वक संपन्न हुए और हर भक्त अपनी मनोकामना लेकर यहां से संतुष्ट होकर लौटा.
मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल बोले बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रयास जारी रहेगा. मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित दर्शन करवाना रही. उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया गया, जिससे लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई.
उन्होंने कहा कि सभी विभागों के समन्वय और टीमवर्क के चलते यह आयोजन सफल रहा. भविष्य में भी श्रद्धालुओं को और बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रयास जारी रहेंगे.
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:10:08 +0530</pubDate>
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<title>Som Pradosh Vrat 2026 Paran Time: 30 या 31 मार्च कब करें सोम प्रदोष व्रत का पारण, इन बातों का रखें ध्यान</title>
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<description><![CDATA[ Som Pradosh Vrat 2026 Paran Time: सोमवार, 30 मार्च 2026 को मार्च महीने और चैत्र महीने का अंतिम प्रदोष व्रत है. इस दिन शिव भक्तों ने सोम प्रदोष व्रत रखा है. भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस व्रत को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
मान्यता है कि, प्रदोष व्रत के दिन व्रत रखकर शिवजी की पूजा करने से भक्तों को जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है. लेकिन कोई भी व्रत तभी सफल और संपन्न माना जाता है, जब पूजा-पाठ के साथ ही व्रत का पारण भी विधिपूर्वक किया जाए.
प्रदोष व्रत के नियम
एकादशी की तरह की प्रदोष व्रत के नियम भी एक दिन पहले से ही शुरू हो जाता है. प्रदोष व्रत से एक दिन पूर्व भक्तों को सुबह स्नानादि के बाद पूजा करनी चाहिए. इसके बाद पूरे दिन सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और लहसुन-प्याज का त्याग करना चाहिए. इसके बाद प्रदोष काल के दिन भी सुबह उठकर स्नान करें और दैनिक पूजा-पाठ कर व्रत का संकल्प लें. प्रदोष काल की पूजा सूर्योदय के बाद प्रदोष काल में करने की मान्यता है. प्रदोष व्रत में प्रदोष काल की पूजा से पहले भक्तों को निराहार रहना चाहिए. पूजा के बाद कई लोग फलाहार ग्रहण करते हैं. लेकिन इसके बावजूद अगले दिन व्रत का पारण करना जरूरी होता है. पारण की विधि के बाद ही प्रदोष व्रत पूर्ण होता है.
31 मार्च को सोम प्रदोष व्रत का पारण
सोम प्रदोष व्रत 30 मार्च को है और अगले दिन यानी मंगलवार 31 मार्च को सोम प्रदोष व्रत का पारण किया जाएगा. हालांकि प्रदोष व्रत में पूजा के बाद भी कई लोग पारण कर लेते हैं. ऐसे में आप 30 मार्च को प्रदोष काल की पूजा के बाद फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं.&amp;nbsp;
आमतौर पर पारण सूर्योदय के बाद ही करना शुभ होता है. सोम प्रदोष व्रत का पारण 31 मार्च, सुबह 6 बजकर 55 मिनट के बाद किया जाएगा. व्रत रखने वाले भक्त इस समय के बाद अपना व्रत खोल सकते हैं.
पारण में इन बातों का रखें ध्यान
सोम प्रदोष व्रत का पारण या व्रत खोलते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे कि व्रत का पूरा फल प्राप्त हो सके. व्रत पारण के समय भोग या फल आदि से ही अपना व्रत खोलें. पारण से पहले भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें और ब्राह्मणों के लिए दान-दक्षिणा निकालें. इसके बाद ही स्वयं भोजन करें. पारण वाले दिन भी लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए.
मान्यता है कि विधि-विधान से सोम प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इसलिए पारण के समय नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है.
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:10:08 +0530</pubDate>
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<title>Hot Honey Egg Recipe: हॉट हनी एग ट्राई किया क्या? इंटरनेट पर ट्रेंड कर रही रेसिपी, इससे कितना मिलेगा न्यूट्रिशन</title>
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<description><![CDATA[ Hot Honey Egg Recipe:&amp;nbsp;अगर आप भी अंडा खाने के शौकीन हैं तो आप इसे अलग-अलग तरीके से बनाकर जरूर खाते होंगे. अंडे की कोई भी डिश बनाएं, हर बार इसका स्वाद बढ़कर ही आता है. चाहे सामान्य उबला हुआ अंडा हो, अंडा भुर्जी हो, अंडा रोल हो या फिर अंडा ऑमलेट सभी स्वाद में लाजवाब लगते हैं. आजकल सोशल मीडिया पर एक नई रेसिपी वायरल हो रही है, जिसे देखकर लगता है इसे तो जरूर आजमाना चाहिए. कुछ मीठा, चीज के साथ मसाले का मेल सुनने में लाजवाब लगता है ना? तो सोचिए, आखिर इसे बनाने का मन कैसे न करे.
हॉट हनी एग बनाने की आसान विधि
सबसे पहले एक पैन लें, उस पर थोड़ा शहद डालें, फिर थोड़ा मोजरेला चीज डालें, उसके बाद उसपर 2 अंडे डाल दें, ऊपर से थोड़ी बारीक कटी हुई हरी मिर्च डालें ( मिर्च का तेल भी डाल सकते हैं), जिससे इसका स्वाद काफी हद तक बढ़ जाता है, मिर्च का इस्तेमाल अपने स्वाद अनुसार ही करें. अब इसे धीमी आंच पर अच्छे से पकाएं, पक जाने पर इसे बीच में से फोल्ड करके प्लेट में सर्व करें. इसके स्वाद की बात करें तो जब इसे खाया जाएगा तो पहले ही निवाले में आपको शहद की मिठास मिलेगी, जिसके बाद आपको मसाले और मिर्च का तीखापन महसूस होगा. यही तो इस डिश की असली पहचान है, उसके बाद अंडे का स्वाद मानो लाजवाब लगता है.
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कितना मिलता है पोषण?&amp;nbsp;
अब जब बात अंडे की हुई है तो भला पोषण की बात कैसे न हो. हमने इसमें 2 अंडे, लगभग 1 चम्मच शहद और थोड़ा चीज डाला है, जो कुल मिलाकर लगभग 380 से 400 कैलोरी देगा. इसमें मौजूद अंडे और चीज में मिलाकर लगभग 20 ग्राम से ज्यादा प्रोटीन होगा, जो कुल मिलाकर एक बेहतरीन डाइट मील हो सकता है.
फैट और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा
इसमें फैट की मात्रा भी काफी अधिक है, लगभग 30 ग्राम, जो इसमें मौजूद चीज से मिलेगी. जबकि इसमें कार्बोहाइड्रेट काफी कम है, जो सिर्फ शहद से मिलेगा. कुल मिलाकर यह एक ऐसा डाइट मील है जो आपको वजन बढ़ाने में भी काफी मदद कर सकता है. अगर आप वजन घटा रहे हैं तो इसे कम से कम खाएं, क्योंकि इसमें मौजूद पोषण जल्दी वजन बढ़ा सकता है और स्वाद की तो बात ही अलग है - इसका मीठा और तीखा स्वाद खाने के बाद ही समझ आता है, इसे बताकर समझाया नहीं जा सकता.
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:10:08 +0530</pubDate>
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<title>Happy Mahavir Jayanti 2026 Wishes: महावीर जयंती के 10 शुभकामना मैसेज, अपनों को भेजें महावीर स्वामी के कोट्स</title>
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<description><![CDATA[ Happy Mahavir Jayanti 2026 Wishes: जैन धर्म में अंतिम तीर्थंकर स्वामी महावीर जी की जयंती 31 मार्च 2026 को मनाई जाएगी. महावीर स्वामी ने अपने पूरे जीवन में मानवता को सत्य, अहिंसा और आत्मसंयम का संदेश दिया.&amp;nbsp;&amp;nbsp; राजघराने में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने 30 वर्ष की आयु में सांसारिक सुखों का त्याग कर तपस्या और आध्यात्मिक मार्ग को अपनाया. लगभग 12 वर्षों की कठोर साधना के बाद उन्हें सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति हुई. महावीर जयंती के मौके पर जैन धर्म के अनुयायनी उनके विचारों को अपनाकर आध्यात्म की राह पर चलने और जियो और जीने दो की प्रेरणा अपनाने का संकल्प लेते हैं.
महावीर स्वामी का जीवन और उनके विचार हमें सिखाते हैं कि सच्चा सुख बाहरी चीजों में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और सदाचार में छिपा होता है. महावीर जयंती के शुभ अवसर पर आप भी लोगों को ये प्रेरणादायक संदेश भेजकर महावीर जयंती की शुभकामनाएं भेज सकते हैं.
महावीर स्वामी, भगवान वर्धमानदें आपको ज्ञान का वरदानमहावीर जयंती की शुभकामनाएं
क्रोध को जीतें शांति सेदुष्ट को साधुता से जीत लेंकृपण को दान से जीतेंऔर असत्य को सत्य से जीत लेंमहावीर जयंती की शुभकामनाएं
सत्य-अहिंसा धर्म हमाराहमने भगवान महावीर जैसा नायक पायाजैन हमारी पहचान हैमहावीर जयंती की शुभकामनाएं
महावीर जिनका नाम है;पालीताना जिनका धाम है;अहिंसा जिनका नारा है;ऐसे त्रिशला नंदन को लाख प्रणाम हमारा है.महावीर जयंती की शुभकामनाएं
महावीर स्वामी की भावना आपके दिलों में&amp;nbsp;बनी रहे और आपकी आत्मा को भीतर से रोशन करे.महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!
सिद्धों का सार, आचार्यों का साथसाधुओं का साथ, अहिंसा का प्रचारयही है भगवान महावीर का सार ।हैप्पी महावीर जयंती
भगवान महावीर के दिखाए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलेंऔर अपने अंदर की अज्ञानता का नाश करें.महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!
जोय सत्य जानने में मदद करता है, जो मनको नियंत्रित करता हैजो हमारी आत्मा को शुद्ध करता हैवही ज्ञान है.
Mahavir Jayanti 2026: राजकुमार वर्धमान कैसे बनें भगवान महावीर, जानें दिलचस्प कहानी

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:10:08 +0530</pubDate>
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<title>वाराणसी के संकटमोचन मंदीर में मुस्लिम कलाकार करेंगे परफॉर्म, शास्त्रीय संगीत से करेंगे स्तुति</title>
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<description><![CDATA[ Varanasi Sankat Mochan Music Festival: वैसे तो संगीत जगत के लिए बनारस घराना का नाम ही काशी को पूरे विश्व में परिचित कराने के लिए पर्याप्त है, लेकिन इस प्राचीन शहर में अनेक ऐसे भी आयोजन होते हैं जो आज के भागम भाग व्यस्त दिनचर्या में भी उसी उत्साह के साथ सुने और देखे जाते हैं.
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इस वर्ष भी वाराणसी के प्राचीन धर्मस्थल में से एक श्री संकट मोचन मंदिर में संगीत समारोह का आयोजन किया जाएगा जिसमें देश के दिग्गज कलाकार हनुमान जी के दरबार में अपनी प्रस्तुति से उनके चरणों में श्रद्धा भाव समर्पित करेंगे. यह प्रतिष्ठित आयोजन अपनी सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक माहौल के लिए देश-विदेश में विशेष पहचान रखता है.
&amp;nbsp;
वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में 6 दिवसीय संगीत समारोह का आयोजन
&amp;nbsp;
संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विशंभरनाथ मिश्रा ने एबीपी न्यूज़ को जानकारी देते हुए बताया कि - हनुमान जयंती के बाद 6 अप्रैल से 11 अप्रैल तक 6 दिवसीय संगीत समारोह का आयोजन संकट मोचन मंदिर में किया जाएगा. इस अवधि में 2 दिन को छोड़कर सभी दिन आठ आठ कार्यक्रम परंपरागत और सांस्कृतिक संगीत के निर्धारित किए गए हैं . कुल 47 कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी. 21 आर्टिस्ट ऐसे हैं जो पहली बार अपनी विधा की प्रस्तुति देंगे, 11 पद्म अवार्ड&amp;nbsp; प्राप्त कर चुके कलाकार इसमें अपने कार्यक्रम को प्रस्तुत करेंगे. इस बार हम लोग नए कलाकार को अधिक अवसर प्रदान कर रहे हैं .&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
मुस्लिम कलाकार भी पहुंचेंगे हनुमान जी के दरबार
&amp;nbsp;
महंत ने जानकारी देते हुए बताया कि संगीत और कला को किसी भी धर्म जाति से बाँधा नहीं जा सकता. इस बार करीब आधा दर्जन ऐसे मुस्लिम कलाकार होंगे जो संकट मोचन संगीत समारोह में प्रस्तुति देंगे. इसके अलावा हिंदू पंजाबी सभी वर्ग के लोग इसमें शामिल होंगे. इस आयोजन को संकट मोचन मंदिर परिसर में ही आयोजित किया जाएगा.&amp;nbsp;
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April 2026 Vrat Tyohar: अप्रैल में अक्षय तृतीया, गंगा सप्तमी, हनुमान जंयती समेत कई प्रमुख व्रत-त्योहार की लिस्ट देखें



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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:10:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों की हार्ट हेल्थ के लिए कितनी खतरनाक? चौंका देगी यह स्टडी</title>
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<description><![CDATA[ आज के डिजिटल दौर में बच्चों की लाइफस्टाइल तेजी से बदल रही है. डिजिटल दौर में बच्चे होमवर्क से ब्रेक के दौरान, सोने से पहले, ऑनलाइन क्लास, गेमिंग और स्ट्रीमिंग के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं. जिससे बच्चों का स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अब एक नई स्टडी में चेतावनी दी है कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम सिर्फ आंखों या दिमाग पर ही नहीं बल्कि दिल की सेहत पर भी असर डाल सकता है. स्टडी के अनुसार खाली समय में स्क्रीन पर बिताया गया हर एक्स्ट्रा घंटा चाहे वह सोशल मीडिया स्क्रोल करना हो, &amp;nbsp;वेब सीरीज देखना हो या गेम खेलना हो बच्चों में हार्ट से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ा रहा है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में हार्ट हेल्थ का खतरा कैसे बढ़ा रहा है और स्टडी में क्या सामने आया है?
क्या कहती है स्टडी?&amp;nbsp;
जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में पब्लिश रिसर्च के अनुसार बच्चों और किशोर में हर एक्स्ट्रा घंटे का स्क्रीन टाइम उनके कार्डियो मेटाबोलिक खतरे यानी दिल और मेटाबॉलिज्म से जुड़े खतरे को बढ़ा सकता है. इस रिसर्च में 1000 से ज्यादा बच्चों और युवाओं को शामिल किया गया था. वहीं रिसर्च में पाया गया है कि 6 से 10 साल के बच्चों में हर एक्स्ट्रा घंटे स्क्रीन टाइम से खतरा बढ़ता है. वहीं किशोर में यह असर और ज्यादा देखा गया है. इसके अलावा ज्यादा स्क्रीन टाइम का सीधा &amp;nbsp;संबंध नींद की कमी से भी जुड़ा पाया गया है.&amp;nbsp;
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नींद से जुड़ा बड़ा कनेक्शन&amp;nbsp;
स्टडी में यह भी सामने आया है कि कम नींद लेने वाले बच्चों में यह खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद प्रभावित होती है, जिससे शरीर के मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है. रिसर्च के अनुसार स्क्रीन टाइम और हार्ड डिस्क के बीच 12 प्रतिशत संबंध नींद की कमी के जरिए बनता है. यानी अगर बच्चों की नींद बेहतर होती है तो कुछ हद तक खतरा कम किया जा सकता है. वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना, बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी को कम कर देता है. इससे वजन बढ़ने का खतरा, ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल प्रभावित हो सकते हैं और शरीर में फैट और कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है. यह सभी फैक्टर आगे चलकर दिल की बीमारियों का कारण बन सकते हैं.&amp;nbsp;
भारत में क्यों बढ़ रही चिंता?
भारत में भी बच्चों में स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ा है, खासकर ऑनलाइन पढ़ाई और स्मार्टफोन के इस्तेमाल के बाद में यह टाइम ज्यादा हो गया है. ऐसे में यह स्टडी भारतीय परिवारों के लिए भी बहुत जरूरी मानी जा रही है. क्योंकि यहां भी बच्चों की नींद और एक्टिविटी पर असर देखा गया है. हालांकि इसे लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों की लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव करके इस खतरे को कम किया जा सकता है. जैसे रोजाना स्क्रीन टाइम सीमित रखना, सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाना, बच्चों को खेलकूद और फिजिकल एक्टिविटी के लिए प्रोत्साहित करना और घर में कुछ समय और जगह को नो स्क्रीन बनाना बनाने जैसी चीजों से पेरेंट्स बदलाव कर सकते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:47:14 +0530</pubDate>
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<title>Heatwave And Nervous System: आपके नर्वस सिस्टम के लिए क्यों खतरनाक हैं आने वाली गर्मियां, जानें किन बीमारियों का खतरा?</title>
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<description><![CDATA[ How Extreme Heat Affects The Nervous System: भारतीय गर्मियों में बाहर निकलते ही फर्क साफ महसूस होने लगता है. यह सिर्फ गर्मी नहीं होती, बल्कि एक तरह का भारीपन होता है, जो शरीर के साथ-साथ दिमाग पर भी असर डालता है. धीरे-धीरे थकान बढ़ती है, ध्यान भटकने लगता है और कई बार स्थिति इससे भी ज्यादा गंभीर हो जाती है. हम अक्सर डिहाइड्रेशन, सनबर्न या थकावट की बात करते हैं, लेकिन असल में गर्मी का सीधा असर दिमाग पर भी पड़ता है. तेज गर्मी में सिरदर्द, चक्कर आना, कन्फ्यूजन और ध्यान लगाने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखने लगते हैं.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
TOI Health से बातचीत में चेन्नई के कावेरी हॉस्पिटल की सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. शुभा सुब्रमणियन बताती हैं कि गर्मियों में ज्यादा गर्मी और उमस के कारण शरीर में पानी और सोडियम की कमी हो जाती है, जिससे दौरे तक पड़ सकते हैं. ज्यादा पसीना आने से सोडियम लेवल गिर जाता है और यह स्थिति और खतरनाक हो जाती है. कई मामलों में हीट स्ट्रोक भी हो सकता है, जिससे बेहोशी और सीजर का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में खासकर जिन लोगों को पहले से दौरे की समस्या है, उन्हें खुद को हाइड्रेट रखना चाहिए और हल्के, ढीले व हल्के रंग के कपड़े पहनने चाहिए.
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किन लोगों को होता है असर?
बच्चे, बुजुर्ग और जिन लोगों को पहले से न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हैं, वे ज्यादा जोखिम में रहते हैं. इसके अलावा, जो लोग लंबे समय तक बाहर काम करते हैं, जैसे डिलीवरी वर्कर्स, ट्रैफिक पुलिस या रेहड़ी-पटरी वाले, उनके लिए यह समस्या रोज की बन जाती है. वहीं, घर के अंदर भी हमेशा सुरक्षित माहौल नहीं होता. खराब वेंटिलेशन, बिजली कटौती या कूलिंग की कमी से स्थिति और बिगड़ सकती है, जिससे दिमाग का संतुलन प्रभावित होता है.
किन बीमारियों का बढ़ता है खतरा?
डॉ. शुभा सुब्रमणियन के मुताबिक, गर्मी का असर कई ऐसी बीमारियों पर भी पड़ता है, जिनके बारे में हम ज्यादा बात नहीं करते. जैसे बच्चों में ड्रावेट सिंड्रोम जैसी एपिलेप्सी की स्थिति गर्मी में और खराब हो सकती है. इसके अलावा, अत्यधिक गर्मी से याददाश्त कमजोर होना, ब्रेन फॉग और सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ सकता है. मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसे रोगों में लक्षण बढ़ सकते हैं, जबकि डिहाइड्रेशन के कारण स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है.
पार्किंसन और अल्जाइमर के मरीजों के लिए भी गर्मी खतरनाक हो सकती है, क्योंकि उनके शरीर की तापमान कंट्रोल करने की क्षमता कमजोर होती है. वहीं, माइग्रेन से पीड़ित लोगों में धूप में निकलना सिरदर्द को ट्रिगर कर सकता है. गर्मी थकान को भी बढ़ाती है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी और मुश्किल हो जाती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:47:13 +0530</pubDate>
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<title>एसी में ज्यादा देर रहने से क्यों भारी हो जाता है सिर, जान लीजिए कारण?</title>
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<description><![CDATA[ आज के आधुनिक युग में गर्मी से राहत पाने के लिए एयर कंडीशनर (एसी) का उपयोग आम बात हो गई है. घर-ऑफिस और मॉल से लेकर गाड़ियों तक एसी का इस्तेमाल किया जाता है. अगर आप भी गर्मी से बचने के लिए अपना ज्यादातर समय एसी में गुजार रहे हैं तो आपको सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि इसके कई साइड इफेक्ट्स हैं. यह आपको बीमार कर सकती है. हेल्थ वेबसाइट्स के मुताबिक, अगर आप अपना ज्यादा वक्त AC में बिता रहे हैं तो सिक बिल्डिंग सिंड्रोम बढ़ने का खतरा रहता है.
AC बना सकता है बीमार
एसी की ठंडी हवा राहत देने का काम करती है, लेकिन कई बार ये परेशानी का कारण बन जाती है, जिसकी वजह से सिरदर्द, गला बैठना, सर्दी-खांसी और त्वचा का सूखना जैसे लक्षण एयर कंडीशनर में बैठने के बाद अक्सर देखने को मिलते हैं. लगातार शुष्क ठंडी हवा में रहने से सांस लेने में तकलीफ, साइनस में परेशानी और मस्तिष्क में ऑक्सीजन के प्रवाह में बदलाव के कारण भारीपन महसूस होता है. एसी (AC) में ज्यादा देर रहने से सिर भारी होने या दर्द होना एक आम बात है. आइए जानते हैं ऐसा क्यों होता है?&amp;nbsp;
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एसी में रहने से सिर भारी होने के मुख्य कारण

डिहाइड्रेशन: एसी कमरे की नमी सोख लेता है, जिससे हवा बहुत शुष्क हो जाती है. यह शुष्क हवा शरीर से नमी को खींच लेती है, जिससे पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन हो जाता है और सिरदर्द होता है.
खून की नलियों का सिकुड़ना: खून की नलियों का सिकुड़ना, जिसको Vasoconstriction भी बोला जाता है. शरीर बहुत ठंडी हवा के संपर्क में आने पर खुद को गर्म रखने के लिए Blood vessels को सिकोड़ने लगता है, जिससे सिर और मस्तिष्क में तनाव बढ़ता है और सिर दर्द जैसी परेशानी होती है.&amp;nbsp;
साइनस की समस्या: ठंडी और सूखी हवा नाक और गले के म्यूकस मेंब्रेन को सुखा देती है, जिससे साइनस में सूजन या भारीपन हो सकता है. इस कारण से भी सिर दर्द जैसी परेशानी होती है.&amp;nbsp;
ऑक्सीजन का स्तर और ताजगी में कमी: इसके कारण कम तापमान और बंद कमरे में रहने से मांसपेशियों में अकड़न और थकान हो जाती है, जिससे सिर भारी महसूस होने लगता है.&amp;nbsp;

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इससे बचाव के उपाय
एसी का तापमान बहुत कम न रखें. इसका तापमान 24-26&amp;deg;C के आसपास रखें. साथ ही, एसी में रहने के दौरान भी समय-समय पर पानी पीते रहना बहुत जरूरी है. इसके अलावा लगातार कई घंटों तक एसी में न बैठें. बीच-बीच में बाहर निकलते रहें और एसी का एयर फिल्टर नियमित रूप से साफ करते रहना भी जरूरी है.
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:47:13 +0530</pubDate>
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<title>Best Time To Get Pregnant: पीरियड शुरू होने के कितने दिन बाद प्रेग्नेंसी के सबसे ज्यादा चांस, न्यू कपल्स के लिए जरूरी बात</title>
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<description><![CDATA[ How Many Days After Period Can You Get Pregnant: अगर आप प्रेग्नेंसी प्लान कर रहे हैं, तो सबसे पहले अपने मेंस्ट्रुअल साइकिल को समझना बहुत जरूरी है. आमतौर पर एक महिला का साइकिल करीब 28 दिनों का होता है, लेकिन यह 21 से 35 दिनों के बीच भी हो सकता है. हर साइकिल चार मुख्य चरणों में बंटा होता है और इन्हीं के आधार पर यह तय होता है कि प्रेग्नेंसी के चांसेस कब सबसे ज्यादा होते हैं. चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.&amp;nbsp;
पीरियड्स को समझना सबसे जरूरी
cloudninecare की रिपोर्ट के अनुसार, साइकिल की शुरुआत पीरियड्स से होती है, जो लगभग 4 से 5 दिन तक चलते हैं. इस दौरान शरीर में हार्मोन का स्तर कम रहता है. &amp;nbsp;इसके बाद फॉलिक्युलर फेज आता है, जिसमें शरीर अगली ओव्यूलेशन के लिए तैयार होने लगता है. इस समय ओवरी में एग्स विकसित होते हैं और एस्ट्रोजन बढ़ने लगता है, जिससे गर्भाशय की परत मोटी होने लगती है. साइकिल का सबसे अहम समय ओव्यूलेशन होता है, जो आमतौर पर 28 दिन के साइकिल में 14वें दिन के आसपास होता है.
&amp;nbsp;इसी दौरान ओवरी से एक मैच्योर एग रिलीज होता है, जो लगभग 12 से 24 घंटे तक ही जीवित रहता है. इसके बाद ल्यूटल फेज आता है, जिसमें प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ता है और शरीर प्रेग्नेंसी के लिए तैयार होता है. अगर इस समय फर्टिलाइजेशन नहीं होता, तो हार्मोन गिरने लगते हैं और फिर से पीरियड्स शुरू हो जाते हैं.
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सबसे ज्यादा चांस कब?
अब बात आती है फर्टाइल डेज की, यानी वो दिन जब प्रेग्नेंसी के चांसेस सबसे ज्यादा होते हैं. ओव्यूलेशन इस पूरे प्रोसेस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन सिर्फ उसी दिन ही नहीं, उससे पहले के कुछ दिन भी उतने ही अहम होते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि स्पर्म महिला के शरीर में 5 दिनों तक जीवित रह सकता है. इसलिए ओव्यूलेशन से करीब 5 से 6 दिन पहले से लेकर ओव्यूलेशन के दिन तक का समय फर्टाइल विंडो माना जाता है. अगर आपका साइकिल 28 दिन का है, तो आमतौर पर 9वें दिन से 14वें दिन के बीच प्रेग्नेंसी के चांसेस सबसे ज्यादा होते हैं. हालांकि, हर महिला का साइकिल अलग होता है, इसलिए अपने शरीर के पैटर्न को समझना जरूरी है.
शरीर भी देता है संकेत
सिर्फ कैलेंडर देखना ही काफी नहीं होता, शरीर खुद भी संकेत देता है कि ओव्यूलेशन का समय नजदीक है. इस दौरान सर्वाइकल म्यूकस में बदलाव आता है, जो ज्यादा चिकना, पारदर्शी और खिंचाव वाला हो जाता है, बिल्कुल अंडे की सफेदी जैसा. कुछ महिलाओं को निचले पेट में हल्का दर्द भी महसूस होता है, जिसे मिडलशमर्ज कहा जाता है. व्यूलेशन के बाद बेसल बॉडी टेम्परेचर में हल्की बढ़ोतरी भी देखी जा सकती है. &amp;nbsp;इसके अलावा इस समय सेक्स ड्राइव भी बढ़ सकती है, जो शरीर का एक प्राकृतिक संकेत है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:47:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>Chaiti Chhath 2026 Sandhya Arghya Time: चैती छठ पर आज दिया जाएगा संध्या अर्घ्य, जानें शहर अनुसार समय</title>
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<description><![CDATA[ Chaiti Chhath 2026 Sandhya Arghya Time: छठ महापर्व हिंदू धर्म का सबसे कठिन व्रत माना जाता है. इसमें व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं. सूर्य देव और छठी मईया की उपासना से जुड़ा लोग आस्था का महापर्व छठ पूजा साल में दो बार मनाया जाता है. चैत्र महीने में चैती छठ और कार्तिक महीने में कार्तिकी छठ के रूप में इसे मनाया जाता है.
इस साल 22 मार्च 2026 को नहाय खाय के साथ चैती छठ पूजा की शुरुआत हुई है. चार दिवसीय चैती छठ का आज यानी 24 मार्च को तीसरा दिन है. आज व्रत रखकर व्रतधारी डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे. छठ ऐसा एकमात्र पर्व है, जब डूबते हुए सूर्य को भी अर्घ्य देकर पूजा की जाती है. आज व्रती महिलाएं और पुरुष निर्जला व्रत रखकर कमर तक पानी में डूबकर सूर्य देव को अर्घ्य देंगे और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतान के लंबी उम्र की कामना करेंगे.
संध्या अर्घ्य में क्या होता है
छठ पर्व के तीसरे दिन यानी आज 24 मार्च 2026 को संध्या के समय व्रती नदी, तालाब, सरोवर या घाट पहुंचकर कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देंगे. इस दौरान बांस की सूप में ठेकुआ, फल, गन्ना, नारियल, कसार, केला समेत अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है. घाटों पर छठी मैया के गीतों और भक्ति के माहौल के बीच डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है. आज कई लोग घर के आंगन या छत पर पानी के डब आदि में भी अर्घ्य देने की व्यवस्था करने लगे हैं.
संध्या अर्घ्य पर मुख्य रूप से सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य देने की परंपरा है. पंचांग के मुताबिक आज सूर्यास्त का समय शाम 06:34 रहेगा. इस समय के आसपास सूर्य को अर्घ्य दिया जा सकता है. हालांकि अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त का समय थोड़ा अंतर भी होता है, इसलिए जान लें अपने शहर अनुसार अर्घ्य का समय.



शहर अनुसार संध्या अर्घ्य का समय (city wise sunset time)






शहर का नाम (City Name)
सूर्यास्त का समय (Sunset Time)


&amp;nbsp;पटना (Patna)
शाम 06 बजकर 02 मिनट


रांची (Ranchi)
शाम 06 बजकर 01 मिनट


गोरखपुर (Gorakhpur)
शाम 06 बजकर 10 मिनट


दिल्ली (Delhi)
शाम 06 बजकर 35 मिनट


प्रयागराज (Prayagraj)
शाम 06 बजकर 15 मिनट


जमशेदपुर (Jamshedpur)
शाम 05 बजकर 56 मिनट


बोकारो (Bokaro)
शाम 05 बजकर 58 मिनट


गया (Gaya)
शाम 06 बजकर 34 मिनट


भागलपुर (Bhagalpur)
शाम 05 बजकर 55 मिनट


मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur)
शाम 06 बजकर 01 मिनट


वाराणसी (Varanasi)
शाम 06 बजकर 11 मिनट


लखनऊ (Lucknow)
शाम 06 बजकर 19 मिनट


मऊ (Mau)
शाम 06 बजकर 09 मिनट


देवघर (Deoghar)
शाम 05 बजकर 56 मिनट


नोएडा (Noida)
शाम 06 बजकर 34 मिनट


छपरा (Chapra)
शाम 06 बजकर 04 मिनट


कोलकाता (Kolkata)
शाम 05 बजकर 49 मिनट


भोपाल (Bhopal)
शाम 06 बजकर 33 मिनट


मुंबई (Mumbai)
शाम 06 बजकर 51 मिनट


पुणे (Pune)
शाम 06 बजकर 46 मिनट


बेगूसराय (Begusarai)
शाम 05 बजकर 58 मिनट



संघ्या अर्घ्य देने के बाद छठ महापर्व का समापन चौथे दिन यानी चैत्र शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा. इसके बाद पारण किया जाएगा.
ये भी पढ़ें: Chaiti Chhath Vrat Katha in Hindi: चैती छठ पर्व क्यों मनाते हैं, नहीं जानते तो पढ़ें ये कथाDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:47:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>Blood In Urine: पेशाब में आ रहा है खून तो हो सकता है कैंसर, तुरंत करा लें ये टेस्ट</title>
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<description><![CDATA[ What Causes Blood In Urine And Is It Cancer: अगर पेशाब में खून दिखाई दे, तो यह किसी को भी घबरा सकता है. कई बार लोग इसे छोटी-मोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर जब यह अपने आप ठीक हो जाए. लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसा करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि पेशाब में खून आना किसी गंभीर बीमारी, यहां तक कि कैंसर का संकेत भी हो सकता है. इसलिए इसे हल्के में लेने के बजाय तुरंत जांच कराना जरूरी है.
क्यों आता है यूरिन में खून
मेडिकल भाषा में इसे हेमैच्यूरिया कहा जाता है, जब किडनी, यूरिनरी ट्रैक्ट या ब्लैडर से रेड ब्लड सेल्स &amp;nbsp;पेशाब में आ जाती हैं. यह दो तरह का होता है, एक जिसमें खून साफ दिखाई देता है और दूसरा जो सिर्फ टेस्ट के जरिए पता चलता है. सबसे बड़ी चिंता तब होती है जब बिना किसी दर्द के पेशाब में खून दिखे. अक्सर इसे लोग यूरिन इन्फेक्शन समझकर दवा ले लेते हैं, लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि अगर यह सिर्फ खून है और दर्द या जलन जैसे लक्षण नहीं हैं, तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है.
नॉर्मल बीमारियां भी हो सकती हैं
हालांकि, हर बार यह कैंसर ही हो ऐसा जरूरी नहीं है. इसके पीछे कई सामान्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे किडनी स्टोन, यूरिन इन्फेक्शन, प्रोस्टेट का बढ़ना या किडनी से जुड़ी समस्याएं. लेकिन अगर खून बार-बार दिखे या बिना दर्द के आए, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है.
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कब होता है कैंसर की शुरुआत
कैंसर के बारे में जानकारी देने वाली संस्था Cancercenter के अनुसार, पेशाब में खून आना ब्लैडर कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है. कई मामलों में यह सबसे पहला लक्षण होता है, जिसमें यूरिन का रंग गुलाबी, नारंगी या गहरा लाल हो सकता है. किडनी कैंसर में भी ऐसा हो सकता है, इसके साथ ही पीठ के एक तरफ दर्द, वजन कम होना और कमजोरी जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं. प्रोस्टेट कैंसर के एडवांस स्टेज में भी यूरिन में खून आ सकता है. खासकर जो लोग स्मोकिंग करते हैं, उनमें यह खतरा और ज्यादा होता है, इसलिए उन्हें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.&amp;nbsp;
टेस्ट कराने की जरूरत
ऐसे में सबसे जरूरी है सही समय पर जांच कराना. डॉक्टर आमतौर पर यूरिन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन या सिस्टोस्कोपी जैसी जांच की सलाह देते हैं, ताकि असली कारण का पता चल सके. एक्सपर्ट का साफ कहना है कि अगर बिना दर्द के पेशाब में खून दिखे, तो तुरंत यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए. इसे नजरअंदाज करना आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकता है. सही समय पर जांच और इलाज से गंभीर बीमारियों को शुरुआती दौर में ही पकड़ा जा सकता है और इलाज आसान हो जाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:47:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>Chhathi Maiya Story: मां दुर्गा के छठे अवतार कात्यायनी और छठी मैया का क्या है नाता, जानें रहस्य</title>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:47:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>Kitchen Sink Drain: जाम हो गई है किचन की सिंक, इस तरीके से झट से बाहर निकल जाएगा कचरा</title>
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<description><![CDATA[ How To Unclog A Kitchen Sink Naturally: किचन की सफाई करते समय हम अक्सर कैबिनेट पोंछते हैं, फ्रिज साफ करते हैं और सिंक भी धो लेते हैं, लेकिन एक अहम जगह नजरअंदाज हो जाती है सिंक का ड्रेन. यही वह जगह है जहां गंदगी, चिकनाई और बैक्टीरिया सबसे ज्यादा जमा होते हैं. क्लीनिंग एक्सपर्ट जिल कोच ने बताया कि किचन सिंक का ड्रेन कई बार टॉयलेट से भी ज्यादा गंदा हो सकता है, क्योंकि यहां रोजाना खाने के कण जाते हैं और इससे E.Coli और Salmonella जैसे बैक्टीरिया पनप सकते हैं. इसलिए इसे साफ रखना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
कैसे करें सिंक की सफाई?
ड्रेन को साफ करने के लिए महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं होती. आप घर में मौजूद बेकिंग सोडा और विनेगर से भी इसे साफ कर सकते हैं, लेकिन एक जरूरी बात ध्यान रखें कि इन दोनों को एक साथ इस्तेमाल न करें. &amp;nbsp;जिल कोच के अनुसार, लोग अक्सर इन्हें मिलाकर इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ऐसा करने से इनका असर खत्म हो जाता है. भले ही इसमें झाग बनता दिखे, लेकिन असल में सफाई ठीक से नहीं होती.&amp;nbsp;
क्या है सही तरीका?
सही तरीका यह है कि पहले ड्रेन में आधा से एक कप तक बेकिंग सोडा डालें. चाहें तो इसके ऊपर थोड़ा सा डिश सोप भी डाल सकते हैं. इसे करीब 5 मिनट तक ऐसे ही रहने दें, ताकि यह गंदगी को ढीला कर सके. इसके बाद गर्म पानी डालकर इसे फ्लश कर दें. फिर एक कप विनेगर डालें. यह प्रक्रिया ड्रेन को साफ करने के साथ-साथ बदबू भी दूर करती है.
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दूसरा तरीका
अगर यह तरीका काम न करे और ड्रेन फिर भी जाम हो, तो एंजाइम क्लीनर का इस्तेमाल किया जा सकता है. ये क्लीनर ऐसे बैक्टीरिया पर आधारित होते हैं, जो खाने के कणों को तोड़कर जाम हटाने में मदद करते हैं. इसे डालने के बाद थोड़ी देर इंतजार करना जरूरी होता है, क्योंकि यह धीरे-धीरे काम करता है. जल्दबाजी में तुरंत पानी डालने से इसका असर कम हो सकता है. इसके बाद में गर्म पानी से ड्रेन साफ कर सकते हैं और बदबू हटाने के लिए फिर से थोड़ा बेकिंग सोडा और डिश सोप इस्तेमाल किया जा सकता है.
हालांकि, विनेगर का ज्यादा इस्तेमाल खासकर कॉपर या पीतल के पाइप पर समय के साथ असर डाल सकता है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना बेहतर है. महीने में एक बार इस तरीके से सफाई करना काफी होता है, इससे न सिर्फ ड्रेन साफ रहता है बल्कि बदबू और जाम होने की समस्या भी नहीं होती.
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:47:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>Sperm Survival After Death: पुरुष की मौत के बाद कितने घंटे तक जिंदा रहता है स्पर्म, क्या उससे भी मां बन सकती है महिला?</title>
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<description><![CDATA[ How Long Does Sperm Survive After Death: क्या किसी पुरुष की मौत के बाद भी उसका स्पर्म जिंदा रह सकता है? और क्या उससे महिला मां बन सकती है? यह सवाल जितना चौंकाने वाला है, उतना ही मुश्किल भी है. मेडिकल साइंस के अनुसार, मौत के बाद कुछ समय तक स्पर्म को शरीर से निकालकर इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसके पीछे कई मेडिकल, कानूनी और नैतिक पहलू जुड़े होते हैं.&amp;nbsp;
क्या निकाला जा सकता है स्पर्म?
IVF Australia की रिपोर्ट के अनुसार, दरअसल, इस प्रक्रिया को पोस्टह्यूमस स्पर्म रिट्रीवल कहा जाता है, जिसमें पुरुष की मौत के बाद उसके शरीर से स्पर्म निकाला जाता है, ताकि उसकी पार्टनर भविष्य में प्रेग्नेंसी के लिए उसका इस्तेमाल कर सके. आज की आधुनिक प्रजनन तकनीकों की मदद से यह संभव हो पाया है, लेकिन हर मामले में यह आसान नहीं होता.&amp;nbsp;
कितनी देर तक जीवित रहता है स्पर्म?
सबसे अहम सवाल यही है कि मौत के बाद स्पर्म कितने समय तक जीवित रहता है. एक्सपर्ट के अनुसार, आमतौर पर 24 घंटे के भीतर स्पर्म को निकालना सबसे सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसी समय तक उसके जीवित रहने की संभावना ज्यादा होती है, हालांकि, कुछ मामलों में 36 घंटे तक भी स्पर्म मिलने की संभावना रहती है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, उसकी क्वालिटी और जीवित रहने की संभावना तेजी से घटती जाती है.
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यही वजह है कि इस प्रक्रिया में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है. कई बार परिवार को कोर्ट की अनुमति लेनी पड़ती है, और इस दौरान हर गुजरता घंटा सफलता की संभावना को कम कर देता है. मेडिकल तौर पर स्पर्म निकालना संभव हो सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल करने की अनुमति मिलना हमेशा तय नहीं होता. कानूनी स्थिति भी इस मामले को और जटिल बना देती है. कई देशों में, जैसे ऑस्ट्रेलिया, इस विषय पर स्पष्ट कानून नहीं हैं. अगर पुरुष ने पहले से लिखित रूप में अपनी इच्छा जाहिर नहीं की है, तो यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि उसकी मौत के बाद स्पर्म का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक स्टडी, जो ऑस्ट्रेलियन एंड न्यूज़ीलैंड जर्नल ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी में प्रकाशित हुई, उसमें IVF क्लीनिक्स के विशेषज्ञों से राय ली गई, ज्यादातर डॉक्टर इस प्रक्रिया के पक्ष में दिखे, लेकिन उन्होंने माना कि स्पष्ट कानून न होने के कारण फैसले लेना मुश्किल हो जाता है. एक्सपर्ट का मानना है कि जैसे लोग ऑर्गन डोनेशन पर पहले से चर्चा करते हैं, वैसे ही कपल्स को इस विषय पर भी बात करनी चाहिए. पुरुषों को यह तय करना चाहिए कि क्या वे अपनी मौत के बाद पिता बनना चाहेंगे, क्योंकि ऐसे बच्चे की परवरिश वह खुद नहीं कर पाएंगे.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:47:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>Admin</dc:creator>
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<title>Hanuman Jayanti 2026 Date: हनुमान जयंती 1 या 2 अप्रैल किस दिन ? दो दिन रहेगी पूर्णिमा, जानें सही तारीख, मुहूर्त</title>
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<description><![CDATA[ Hanuman Janmotsav 2026 Date: चैत्र पूर्णिमा का दिन बजरंगबली के भक्तों के लिए बहुत खास है, क्योंकि यह दिन हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है हनुमान जी को बल, बुद्धि, विद्या और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है. उनकी भक्ति से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और व्यक्ति को साहस और सफलता प्राप्त होती है. इस साल हनुमान जयंती 1 या 2 अप्रैल कब मनाई जाएगी इसको लेकर कंफ्यूजन यहां दूर करें.
हनुमान जयंती 1 या 2 अप्रैल कब ?
चैत्र पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल 2026 को सुबह 7.06 मिनट पर शुरू होंगे और अगले दिन 2 अप्रैल 2026 को सुबह 7.41 पर समाप्त होंगे. हनुमान जन्मोत्सव 2 अप्रैल 2026 को है
धर्मशास्त्र के अनुसार जब पूर्णिमा तिथि सूर्योदय में हो तो उस दिन पूर्णिमा व्रत किया जाता है. हनुमान जन्मोत्सव पूर्णिमा व्रत के दिन मनाते हैं. ऐसे में इस बार 2 अप्रैल को सूर्योदय पूर्णिमा तिथि रहेगी इसलिए व्रत, स्नान दान और हनुमान जन्मोत्सव इस दिन मनाया जाएगा.&amp;nbsp;
भक्ति, शक्ति और सेवा का महापर्व
हनुमान जी श्रीराम की परम भक्त हैं. कहते हैं उन्हें प्रसन्न करना है तो निस्वार्थ भाव से हनुमान जन्मोत्सव पर लोगों की सेवा करो. ये महापर्व भक्ति, शक्ति और सेवा का प्रतीक है. मान्यता है हनुमान जयंती पर व्रत करने और बजरंग बली की पूजा करने से दुश्मनों पर जीत मिलती है इसके साथ ही हर मनोकामना भी पूरी होती है.
हनुमान जी को प्रसन्न करने का मंत्र
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं, अनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं, रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
अर्थ - मैं उन भगवान हनुमान जी को नमस्कार करता हूं
जो अतुलित बल के धाम हैं, जिनका शरीर स्वर्ण पर्वत के समान तेजस्वी और दिव्य है, जो श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण के लिए अग्नि समान शत्रुओं का नाश करने वाले हैं, जो ज्ञानियों में श्रेष्ठ हैं.

जो सभी गुणों के भंडार हैं,
जो वानरों के स्वामी (राजा) हैं,
जो भगवान श्रीराम के अत्यंत प्रिय भक्त हैं,
और जो पवन देव (वायु) के पुत्र हैं
ऐसे श्री हनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूं

हनुमान जन्मोत्सव पर पूजा के लाभ

इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं.
दान देने से शनि दोष और ग्रह बाधाओं से मुक्ति मिलती है
भंडारा कराने से भय, रोग और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है.
रामायण पाठ करने से साहस, आत्मविश्वास और ऊर्जा में वृद्धि होती है. भगवान राम की कृपा भी प्राप्त होती है.

हनुमान जन्मोत्सव कैसे मनाएं

हनुमान जयंती का व्रत रखने वालों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान श्रीराम, माता सीता व हनुमानजी का स्मरण करें.
इसके बाद नहाकर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करें और विधिपूर्वक पूजा करें.
हनुमान जी को शुद्ध जल से स्नान करवाएं। फिर सिंदूर और चांदी का वर्क चढ़ाएं।
हनुमान जी को अबीर, गुलाल, चंदन और चावल चढ़ाएं.
इसके बाद सुगंधित फूल और फूलों की माला चढ़ाएं, एवं नारियल चढ़ाएं.
फिर केवड़ा या अन्य सुगंधित इत्र लगाएं.
इस तरह श्रद्धापूर्वक जो भी चढ़ाना चाहते हैं वो हनुमान जी को चढ़ाएं.
इसके बाद हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें. नहीं कर पाएं तो श्रीराम नाम का ही जप करें.
आखिरी में हनुमान जी को नैवेद्य लगाकर आरती करें और प्रसाद बांट दें.
इस दिन दान दें, भंडारा करा सकते है, सुंदरकांड का पाठ भी करें.

हनुमान जन्मोत्सव पर क्या करें, क्या नहीं

इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें.
व्रत रखें और सात्विक भोजन करें.
मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें.
क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचें.
हनुमान जी के सामने नम्रता और श्रद्धा बनाए रखें.
गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें.
बंदरों को गुड़-चना खिलाएं.
किसी का अपमान या विवाद न करें.

Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी 2026 में कब ? नोट करें डेट, पितृ दोष से मुक्ति पाने का श्रेष्ठ दिन
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:47:12 +0530</pubDate>
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<title>वजन घटाने की दवाएं होंगी सस्ती, केवल इतने रुपये में मिलेगा इंजेक्शन</title>
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<description><![CDATA[ वजन घटाने की महंगी दवाओं से परेशान लोगों के लिए अब राहत की खबर सामने आई है. आने वाले दिनों में ये दवाएं काफी सस्ती हो सकती हैं. वजह है एक बड़ा बदलाव एक मशहूर दवा के पेटेंट खत्म होने जा रहे हैं, जिसके बाद कई कंपनियां उसी दवा के सस्ते विकल्प बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं.अब तक जो दवाएं आम लोगों की पहुंच से बाहर थीं, वे जल्द ही ज्यादा लोगों के लिए आसान हो सकती हैं. खास बात यह है कि कुछ कंपनियां इस दवा का इंजेक्शन करीब 1290 रुपये महीने की शुरुआती कीमत पर लाने की योजना बना रही हैं.
दरअसल, वजन घटाने में इस्तेमाल होने वाली एक खास दवा का पेटेंट 20 मार्च 2026 को खत्म हो रहा है. जैसे ही पेटेंट खत्म होगा, दूसरी कंपनियों को भी वही दवा बनाने की अनुमति मिल जाएगी.अब तक इस दवा को सिर्फ एक ही बड़ी कंपनी बनाती थी, इसलिए इसकी कीमत काफी ज्यादा थी. लेकिन अब जब कई कंपनियां एक साथ बाजार में उतरेंगी, तो कीमतों में गिरावट आना तय माना जा रहा है.
कितनी कम हो सकती है कीमत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ कंपनियां इस दवा को 1290 रुपये महीने की शुरुआती कीमत पर लॉन्च कर सकती हैं. वहीं दूसरी कंपनियां इसे 3000 से 5000 रुपये के बीच में ला सकती हैं. तुलना करें तो अभी यही दवा करीब 10 हजार रुपये या उससे ज्यादा में मिलती है. यानी आने वाले समय में इसकी कीमत काफी कम हो सकती है, जिससे ज्यादा लोगों को इसका फायदा मिल सकेगा.
बाजार में बढ़ेगी टक्कर
बताया जा रहा है कि कम से कम 10 से 12 बड़ी दवा कंपनियां इस दवा के सस्ते विकल्प लॉन्च करने की तैयारी में हैं. इतना ही नहीं, कुल मिलाकर 40 से ज्यादा कंपनियां इस क्षेत्र में उतर सकती हैं.इसका मतलब साफ है कि बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी. कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कीमत कम करने के साथ-साथ अलग-अलग तरह के विकल्प भी पेश करेंगी.
अलग-अलग तरीके से मिलेगी दवाकंपनियां सिर्फ दवा ही नहीं, बल्कि उसे देने के तरीके में भी बदलाव ला रही हैं. कुछ कंपनियां पहले से भरे हुए इंजेक्शन देंगी, तो कुछ नई तरह के पेन या छोटे डिवाइस लाने की तैयारी कर रही हैं. इससे मरीजों को दवा लेना आसान होगा और वे अपनी सुविधा के हिसाब से विकल्प चुन सकेंगे. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:26 +0530</pubDate>
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<title>दिल्ली की लेट मॉर्निंग...मुंबई की नींद गायब, जानिए भारतीय शहरों की स्लीप स्टोरी, कौन कितना सोता है?</title>
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<description><![CDATA[ दिल्ली की लेट मॉर्निंग...मुंबई की नींद गायब, जानिए भारतीय शहरों की स्लीप स्टोरी, कौन कितना सोता है? ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:25 +0530</pubDate>
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<title>Gangaur Vrat Katha in Hindi: गणगौर पूजा पर आज विवाहित महिलाएं जरूर पढ़ें ये पौराणिक व्रत कथा</title>
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<description><![CDATA[ Gangaur Vrat Katha in Hindi: तीज, करवा चौथ, वट सावित्री की तरह की हिंदू धर्म में गणगौर पर्व मनाया जाता है, जिसे गणगौर तीज के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है. गणगौर पर्व के दिन व्रत रखकर महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. वहीं सुहागिन स्त्रियों के अलावा कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं.
गणगौर पर्व आज 21 मार्च को (Gangaur 2026 Date)
गणगौर पर्व पंचांग के मुताबिक हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस साल यह पर्व शनिवार, 21 मार्च 2026 को पड़ रहा है. 21 मार्च को तड़के 02.31AM तृतीया तिथि की शुरुआत होगी और इसी 21 मार्च को ही रात 11.57 पर तृतीया तिथि समाप्त हो जाएगी. इसलिए 21 मार्च को गणगौर पर्व मनाया जाएगा और पूजा-पाठ किए जाएंगे.
गणगौर पर्व वैसे तो देशभर के कई हिस्सों में मनाया जाता है. लेकिन विशेषरूप से राजस्थान में इस पर्व का उत्साह देखने को मिलता है. यह पर्व शिवजी और माता पार्वती से सुखी दांपत्य जीवन का प्रतीक है. इस दिन व्रत रखकर पूजा के दौरान महिलाओं को गणगौर पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. इससे व्रत का पूर्ण फल मिलता है.
गणगौर पर्व की कहानी (Gangaur Puja Pauranik Kahani)
कथा के अनुसार, एक बार शिव-पार्वती नारद मुनि के साथ चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिति पर पृथ्वी भ्रमण के लिए निकले थे. जब ग्राम वासियों को इसका पता चला कि शिव-पार्वती उनके गांव आ रहे हैं तो गांव की महिलाएं उनकी सेवा के लिए पहुंच गई. उन निर्धन महिलाओं के पास जो जल फूल और फल थे उन्हीं को लेकर वे शिव-पार्वती के पास पहुंचे.
भगवान शिव और माता पार्वती निर्धन महिलाओं की सच्ची श्राद्ध, सेवा भाव और भक्ति से काफी प्रसन्न व आनंदित हुए. माता पार्वती महिलाओं के पूजा भाव से प्रसन्न होकर उनपर सुहाग रस छिड़क दिया और कहा कि तुम सभी का सुहाग अटल रहे.
जब निर्धन महिलाएं पूजा कर वापिस लौट गई तो उसी गांव की धनी महिलाओं की टोली पूजा के लिए पहुंची. उनके हाथों विभिन्न प्रकार के फल और पकवान थे. भगवान शिव ने पार्वती से कहा, हे देवी! तुमने तो सारा सुहाग रस निर्धन महिलाओं को छिड़क दिया अब इन्हें क्या दोगी? देवी पार्वती बोली, उन निर्धन महिलाओं को मैंने ऊपरी सुहाग रस दिया है और इन धनी महिलाओं को मैं अपने समान सौभाग्य का आशीर्वाद दूंगी. देवी पार्वती ने अपनी एक उंगली को काटकर उससे निकले रक्त को सभी धनी महिलाओं के ऊपर छिड़क दिया. कथा के अनुसार, जिसके ऊपर जैसा रक्त गिरता गया उसे उतना सुहाग मिलता गया. इस तरह से चैत्र शुक्ल की तृतीया तिथि के गौरी तीज पर देवी पार्वती ने निर्धन और धनी सभी सुहागिन स्त्रियों को सुहाग का आशीर्वाद दिया.
सुहागिन स्त्रियों को सुहाग का वरदान बांटने के बाद देवी पार्वती नदी स्नान के लिए चली गईं. स्नान के बाद उन्होंने बालू के ढेर से शिवलिंग तैयार किया और उसकी पूजा-अर्चना की और शिवलिंग की प्रदक्षिणा भी की. तभी शिवलिंग से भगवान शिव प्रकट हुए और देवी पार्वती से कहा, आज चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन जो भी सुहागन महिलाएं शिव-गौरी पूजा करेगी, उसे अटल सुहाग प्राप्त होगा.पूजा के बाद पार्वती वापिस उस स्थान पर आ गई, जहां पर शिवजी विराजमान थे. जब शिवजी ने पूछा कि, पूजा में ज्यादा समय लग गय. तब पार्वती ने कहा कि, उन्हें नदी तट पर भाई और भावज मिल गए थे, जिसे उन्होंने दूध भात खिलाया. लेकिन शिवजी समझ गए कि, पार्वती उन्हें बहला रही है. तब शिवजी जी ने भी कहा कि, वह भी देवी पार्वती के भाई भावज से मिलेंगे और दूध भात खाएंगे. तब शिवजी, देवी पार्वती और नारदजी तीनों नदी के तट की ओर निकल पड़े. देवी पार्वती ने मन ही मन भगवान शिव से प्रार्थना की, हे भोलेनाथ मेरी बात का लाज रख लेना.नदी तट पर पहुंचते ही शिवजी को वहां एक महल दिखा, जिसमें देवी पार्वती के भाई और भावज थे. शिव और पार्वती भी कुछ देर तक उस भवन में रहे. इसके बाद देवी पार्वती ने शिव से वापिस कैलाश चलने को कहा, लेकिन शिवजी नहीं माने. तब देवी पार्वती अकेले ही कैलाश के लिए निकल पड़ी. तब आखिरकार शिव को भी पार्वती के साथ जाना पड़ा. शिवजी ने कहा कि, उनकी माला भवन में रह गई और उन्होंने नारदजी को माला लेने के लिए भेज दिया. जब नारदजी माला लेने पहुंचे तो नदी तट पर ना ही कोई भवन था और न देवी पार्वती के भाई भावज. लेकिन एक पेड़ था, जहां उन्हें शिव की माला मिला. नारदजी माला लेकर आए और शिवजी से बोले, हे प्रभु! यह कैसी माया है. इस पर शिव पार्वती मुस्कुराए और बोले कि यह सब तो देवी पार्वती की माया थी. देवी पार्वती ने कहा कि यह मेरी नहीं भोलेनाथ की माया थी.
ये भी पढ़ें: Gangaur Puja 2026: गणगौर पर्व की अनोखी रस्म, जहां पत्नियों के हाथ से मार खाते हैं पति!Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:25 +0530</pubDate>
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<title>Ayodhya Ram Mandir: श्रीराम मंदिर के शिखर पर बदला गया ध्वज, सैन्य तकनीक और परंपरा का अद्भुत मेल</title>
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<description><![CDATA[ रामनगरी में नववर्ष का शंखनाद: हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर रामनगरी अयोध्या से आस्था और राष्ट्र के गौरव को समाहित करने वाली एक भव्य खबर सामने आई है. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ध्वज परिवर्तन का अनुष्ठान संपन्न हुआ. यह आयोजन केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के पुनरुत्थान और आध्यात्मिक ऊर्जा के नवीनीकरण का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है.
ध्वज की प्रतीक और आध्यात्मिक महत्ता
मंदिर प्रशासन के अनुसार, शिखर पर फहराया गया यह नवीन ध्वज भारतीय गौरव और रघुकुल की मर्यादाओं का संगम है. इस ध्वज पर तीन विशेष चिह्न अंकित हैं, जो इसके महत्व को कई गुना बढ़ा देते हैं:

सूर्यदेव: भगवान श्रीराम के &#039;सूर्यवंशी&#039; होने का प्रमाण और तेज का प्रतीक.
कोविदार वृक्ष: रघुकुल की परंपरा, वंश गौरव और मर्यादा को प्रदर्शित करता है.
&#039;ऊं&#039; का चिह्न: ब्रह्मांड की मूल ध्वनि और सनातन धर्म की शक्ति एवं चेतना का प्रतिनिधित्व.

इतिहास और परंपरा का संगम
अयोध्या में ध्वज परिवर्तन की यह परंपरा अब एक व्यवस्थित रूप ले चुकी है. मंदिर व्यवस्था से जुड़े गोपाल नागरकट्टे और गोपाल राव ने जानकारी दी कि अब से हर साल चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर मंदिर के शिखर का ध्वज बदला जाएगा.
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने उस ऐतिहासिक क्षण को भी याद किया, जब 25 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं मंदिर के शिखर पर ध्वज स्थापित किया था. वह क्षण मंदिर निर्माण की पूर्णता और राष्ट्र के सांस्कृतिक गौरव का संदेश था. वर्तमान में किया गया यह ध्वज परिवर्तन उसी गौरवशाली यात्रा का निरंतरता है.
सैन्य तकनीक और आधुनिकता का बेजोड़ नमूना
इस ध्वज की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बनावट और मजबूती है. यह कोई साधारण वस्त्र नहीं है, इसे आयुध पैराशूट कारखाना (Ordnance Parachute Factory) में विशेष सैन्य तकनीक से तैयार किया गया है.

मजबूती: इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह भीषण गर्मी, तेज वर्षा और तूफानी हवाओं के बीच भी अपनी चमक और मजबूती बनाए रखे.
तकनीक: इसमें वही तकनीकी मानक अपनाए गए हैं जो उच्च सुरक्षा वाली सैन्य सामग्रियों में उपयोग किए जाते हैं, ताकि मंदिर की दिव्यता के साथ-साथ ध्वज की अखंडता भी सुरक्षित रहे.

भक्तिमय वातावरण और जन-उत्साह
चैत्र प्रतिपदा (हिंदू नववर्ष) के दिन जब नवीन ध्वज मंदिर के शिखर पर लहराया, तो पूरी अयोध्या &#039;जय श्रीराम&#039; के उद्घोष से गूंज उठी. भक्तों के लिए यह दृश्य आत्मिक शांति और विजय का प्रतीक था. मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे शुभ संकेत मानते हुए नववर्ष का स्वागत किया.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:25 +0530</pubDate>
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<title>सारा तेंदुलकर की ग्लोइंग स्किन का क्या है राज, कर दिया सीक्रेट रिवील</title>
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आज के समय में स्किन केयर इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है. के ब्यूटी ट्रेंड और सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर के चलते लोग ग्लास स्किन पाने के लिए अलग-अलग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगे हैं. लंबे चौड़े 8 से 15 स्टेप्स का स्किन केयर रूटीन अब आम होता जा रहा है. लेकिन इस बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस ट्रेंड से हटकर सादगी और समझदारी से अपनी स्किन का ख्याल रख रहे हैं. उन्हीं लोगों में से एक सारा तेंदुलकर भी एक है. दरअसल हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सारा तेंदुलकर ने अपने स्किन केयर रूटीन और ग्लोइंग स्किन के पीछे का सीक्रेट शेयर किया है. उन्होंने बताया कि उनकी स्किन सेंसिटिव और एक्ने प्रोन है, इसलिए वह किसी भी प्रोडक्ट का इस्तेमाल सोच- समझ कर करती है. ये भी पढ़ें-सोशल मीडिया पर छाया कैस्टर ऑयल बेली पैच ट्रेंड, जानिए क्या सच में देता है फायदा?
सिंपल रूटीन पर भरोसा करती है सारा सारा का कहना है कि वह ज्यादातर प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने की बजाय बेसिक स्किन केयर पर ध्यान देती है. वह जेंटल क्लींजर, हल्के मॉइश्चराइजर और ऐसे इंग्रेडिएंट्स चुनती है जो स्किन को नुकसान पहुंचाए बिना उसे बैलेंस रखें. वह अपनी स्किन को हाइड्रेट रखना और सूरज की किरणों से बचाने पर खास ध्यान देती है . सुबह के समय वह ऐसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करती है जो स्किन को प्रोटेक्ट करें, जबकि रात में सोने से पहले मेकअप हटाकर स्किन को साफ रखना उनके रूटीन का अहम हिस्सा है. सारा का मानना है कि पहले उन्हें लगता था कि ज्यादा प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से जल्दी रिजल्ट मिलेगा, लेकिन समय के साथ उन्होंने समझा कि स्किन बैरियर को समझना और उसे सुरक्षित रखना ज्यादा जरूरी है. उनके अनुसार बार-बार नए प्रॉडक्ट्स ट्राई करने की बजाय एक सिंपल और कंसिस्टेंट रूटीन ज्यादा असरदार होता है. PCOS ने सिखाया स्किन की देखभालसारा तेंदुलकर ने यह भी बताया कि उन्हें पीसीओएस की समस्या रही है. जिसकी वजह से उन्हें एक्ने और ऑयली स्किन जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा. इस एक्सपीरियंस ने उन्हें यह समझाया कि स्किन हेल्थ का सीधा संबंध अंदरुनी सेहत से होता है. सारा अपनी डाइट को लेकर भी काफी सतर्क रहती है. वह प्रोसेस्ड, ऑयली और ज्यादा शुगर वाले खाने से दूरी बनाकर रखती है. इसके अलावा स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, अच्छी नींद और हाइड्रेशन को अपनी स्किन के लिए बहुत जरूरी मानती है. उनका मानना है कि सही खानपान और &amp;nbsp;पानी की पर्याप्त मात्रा स्किन पर साफ नजर आती है. इसके अलावा सारा बताती है कि जल्दी रिजल्ट पाने के चक्कर में ट्रेंड्स के पीछे भागने की बजाय डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. वह साइंस बेस्ड और क्लीनिकल टेस्टेड प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देती है, खासकर अपनी सेंसेटिव स्किन के लिए.
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:24 +0530</pubDate>
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<title>Gangaur Puja 2026: गणगौर पर्व पर पूजा के लिए आज 4 शुभ मुहूर्त, नोट कर लें समय</title>
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<title>दुनिया की सबसे बोरिंग डाइट से तेजी से घटेगा वजन, जानें क्यों है ये इतनी असरदार</title>
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<description><![CDATA[ आजकल सोशल मीडिया पर एक ऐसी डाइट तेजी से वायरल हो रही है जिसे लोग दुनिया की सबसे बोरिंग डाइट कह रहे हैं. हालांकि, मजेदार बात यह है कि जितनी यह बोरिंग है, उतनी ही तेजी से वजन घटाने के लिए मशहूर भी हो रही है. आमतौर पर लोग नई-नई डाइट शुरू करते हैं और कुछ ही दिनों में छोड़ देते हैं, क्योंकि या तो वह बहुत मुश्किल होती हैं या खाने में मजा नहीं आता है, लेकिन यह डाइट बिल्कुल अलग बहुत सिंपल, सीमित और बिना किसी झंझट वाली है. &amp;nbsp;इस डाइट का नाम CPB डाइट है, जिसमें सिर्फ कुछ ही चीजें जैसे चिकन, आलू और ब्रोकली खाई जाती है. सुनने में यह बहुत साधारण लगता है, लेकिन इसके रिजल्ट लोगों को हैरान कर रहे हैं.&amp;nbsp;
क्या है CPB डाइट?
CPB डाइट का पूरा मतलब Chicken (चिकन), Potato (आलू) और Broccoli (ब्रोकली) है. यह डाइट बहुत ही आसान नियमों पर आधारित है. जैसे प्रोटीन के लिए चिकन (या शाकाहारियों के लिए टोफू), कार्बोहाइड्रेट के लिए आलू, सब्जियों में ब्रोकली और गाजर. हर मील में सिर्फ 1 चम्मच ऑलिव ऑयल, पीने के लिए सिर्फ पानी, ब्लैक कॉफी या चाय. इसमें जंक फूड, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक या प्रोसेस्ड फूड पूरी तरह बंद होते हैं.&amp;nbsp;
यह डाइट इतनी तेजी से काम क्यों करती है?
इस डाइट की खास बात है कि इसमें हाई प्रोटीन और हाई फाइबर होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है. जब पेट भरा लगता है तो आप कम खाते हैं और बिना ज्यादा कोशिश के वजन कम होने लगता है. इसके अलावा आलू पेट भरने में बहुत मदद करता है. ब्रोकली और गाजर कम कैलोरी में ज्यादा मात्रा देते हैं. चिकन शरीर को ताकत देता है. सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको कैलोरी गिनने की जरूरत नहीं पड़ती है.&amp;nbsp;
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लोगों को क्या फायदे महसूस हो रहे हैं?
जो लोग इस डाइट को फॉलो कर रहे हैं, उनका कहना है कि उनका वजन तेजी से कम हुआ, खाने की बार-बार इच्छा (food cravings) कम हो गई, दिमाग ज्यादा शांत और फोकस्ड महसूस हुआ, एनर्जी लेवल बेहतर हुआ. कुछ लोगों ने तो एक महीने में 5 से 10 किलो तक वजन कम होने का दावा किया है.
30 दिन का आसान प्लान
इस डाइट को ज्यादा टिकाऊ बनाने के लिए लोग इसे 30 दिन के प्लान में करते हैं. जिसमें पहला हफ्तासिर्फ बेसिक CPB फूड, दूसरा हफ्ता कुछ नए फूड जोड़ना जैसे पालक या लो-फैट मीट और तीसरा हफ्ता फल और ड्राई फ्रूट्स शामिल करना है. इससे डाइट थोड़ी आसान और लंबे समय तक करने लायक बन जाती है. हालांकि यह डाइट असरदार है, लेकिन इसमें कुछ कमियां भी हो सकती हैं. जैसे एक ही तरह का खाना खाने से बोरियत, पोषण की कमी, पाचन से जुड़ी समस्याएं जैसे कब्ज और बहुत तेजी से वजन घटने से कमजोरी हो सकती है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:23 +0530</pubDate>
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<title>राजगढ़ मंदिर में धमकियों से डरा पुजारी, भगवान जगन्नाथ की मूर्तियों को लेकर रातों&#45;रात हुआ फरार! जानिए पूरी कहानी?</title>
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मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने सिर्फ एक मंदिर ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की धार्मिक भावनाओं को झकझोर दिया है. यहां भगवान जगन्नाथ मंदिर अचानक सूना हो गया न आरती, न घंटियां, न दर्शन.
वजह बनी धमकियां, डर और लाचारी, जिसके चलते मंदिर के पुजारी रातों-रात भगवान की प्रतिमाएं अपने साथ लेकर शहर छोड़ गए.

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सुबह खुला मंदिर, लेकिन नहीं थे भगवान
शुक्रवार सुबह जब श्रद्धालु रोज की तरह पूजा के लिए मंदिर पहुंचे, तो गर्भगृह खाली देखकर स्तब्ध रह गए. भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की प्रतिमाएं वहां नहीं थीं.
यह दृश्य इतना भावुक कर देने वाला था कि मंदिर से जुड़े डॉक्टर एस. प्रसाद वहीं बैठकर फूट-फूट कर रो पड़े. श्रद्धालुओं के लिए यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि आस्था के टूटने जैसा था.
&amp;nbsp;CCTV में कैद हुआ पूरा घटनाक्रम
मंदिर में लगे CCTV फुटेज में पूरी घटना साफ दिखाई दी. देर रात पुजारी विष्णु दास मंदिर में प्रवेश करते हैं. विधिवत पूजा और प्रणाम करते हैं.&amp;nbsp; इसके बाद मंदिर की लाइट और कैमरे बंद कर देते हैं,&amp;nbsp; फिर प्रतिमाओं को सुरक्षित तरीके से अपने साथ लेकर निकल जाते हैं.
यह कोई चोरी नहीं थी, बल्कि एक मजबूर पुजारी का फैसला था, जो हालात से हार चुका था.
&amp;ldquo;मैं मजबूर हूं&amp;hellip;&amp;rdquo; - पुजारी का वीडियो आया सामने
घटना के बाद पुजारी विष्णु दास ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने साफ कहा कि वे अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि मजबूरी में जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें लगातार गालियां दी जा रही थीं, धमकाया जा रहा था और यहां तक कि मारपीट भी की गई.
सबसे गंभीर बात उन्होंने पुलिस में शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन वहां भी सहयोग नहीं मिला.
मंदिर बना था आस्था का केंद्र
यह मंदिर साल 2021 में रामनवमी के दिन स्थापित हुआ था. भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की प्रतिमाएं विशेष रूप से पुरी से लाई गई थीं और विधि-विधान से स्थापित की गई थीं.
धीरे-धीरे यह स्थान स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र बन गया जहां रोज आरती, भजन-कीर्तन और हर साल रथ यात्रा का आयोजन होता था.
पांच साल की सेवा, एक रात में सब खत्म
पुजारी विष्णु दास पिछले करीब पांच वर्षों से यहां सेवा कर रहे थे. वे मंदिर परिसर में ही रहते थे और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान की सेवा में लगे रहते थे. लेकिन लगातार बढ़ते दबाव और डर ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया.
विवाद की जड़: असामाजिक तत्वों का जमावड़ा
मंदिर के आसपास कुछ लोग गांजा पीने और नशा करने के लिए इकट्ठा होते थे. आरोप है कि ये लोग मंदिर की जमीन पर कब्जा करना चाहते थे और इसी वजह से पुजारी को हटाने के लिए लगातार धमकियां दे रहे थे.
एक वीडियो में भी देखा गया कि एक व्यक्ति खुलेआम पुजारी से कह रहा है कि, &amp;ldquo;हम यहां गांजा बेचेंगे, जो करना है कर लो&amp;hellip;&amp;rdquo; यह सिर्फ बदसलूकी नहीं, बल्कि धार्मिक स्थल को निशाना बनाने की खुली चुनौती थी.
प्रशासन पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो यह स्थिति नहीं बनती. पुजारी की शिकायत के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिसका नतीजा यह हुआ कि मंदिर ही खाली हो गया.
आस्था बनाम डर: बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक मंदिर या एक पुजारी की नहीं है. यह सवाल उठाती है कि, क्या धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित है?
क्या एक पुजारी को अपनी जान और भगवान की सुरक्षा के लिए भागना पड़ेगा?
अब सबकी नजर एक सवाल पर
फिलहाल मंदिर सूना है, श्रद्धालु मायूस हैं और पूरे इलाके में एक ही सवाल गूंज रहा है. क्या भगवान फिर लौटेंगे? क्या पुजारी को सुरक्षित माहौल मिलेगा? क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:23 +0530</pubDate>
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<title>नवरात्रि के व्रत में भरपूर एनर्जी चाहिए तो शाम को खाएं ये डिश, दिनभर रहेंगे तरोजाता</title>
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<description><![CDATA[ नवरात्रि के 9 दिनों के उपवास में ऊर्जा की कमी महसूस होना बिल्कुल आम है. इस दौरान सही आहार और तरल पदार्थ लेना बहुत जरूरी है, ताकि ऊर्जा बनी रहे और शरीर स्वस्थ रहे. व्रत के दौरान शरीर को हेल्दी और एनर्जेटिक बनाए रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक खाली पेट रहने से कमजोरी, थकान और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है. खासतौर पर शाम के समय तक चेहरा बिल्कुल लटक जाता है और थकान महसूस होने लगती है. ऐसे में जरूरी है कि कुछ ऐसा खाया और पिया जाए, जो इंस्टेंट एनर्जी दे और जिसे व्रत में खाया भी जा सके. आइए जानते हैं इंस्टेंट एनर्जी वाले डिश, जिन्हें आप व्रत में भी खा सकती हैं.&amp;nbsp;
साबूदाना खिचड़ी
साबूदाना खिचड़ी एक ऊर्जावान और पौष्टिक नाश्ता है, जो व्रत में तुरंत एनर्जी (कार्बोहाइड्रेट्स) देता है और आसानी से पच भी जाता है. इसके अलावा यह हड्डियों को भी मजबूत बनाता है. इसमें पोटैशियम होता है जो व्रत के दौरान ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है. साथ ही इसमें मूंगफली और आलू मिलाकर इसकी पौष्टिकता बढ़ाई भी जा सकती है.
यह भी पढ़ेंः चैत्र नवरात्रि 2026 व्रत में कौन सी सब्जियां खा सकते हैं और किनसे बचने की जरूरत है? देखें पूरी लिस्ट?
घी में भुने मखाने&amp;nbsp;
व्रत के दौरान काफी लोगों को गैस की दिक्कत हो जाती है. इस बीच घी में भुने मखाने खाने से ऊर्जा निलती है और पाचन में भी फायदा होता है. इसे हड्डियों की मजबूती के लिए भी सबसे बेहतरीन माना जाता है. यह यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होते हैं, जो लंबे समय तक भूख नहीं लगने देते और वजन भी कंट्रोल रखता हैं.
शकरकंद चाट
व्रत (fast) के दौरान शकरकंद चाट एक पौष्टिक, तुरंत ऊर्जा देने वाला नाश्ता है. यह हाई फाइबर, विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो उपवास में कमजोरी दूर कर पेट को लंबे समय तक भरा रखती है.
कुट्टू या सिंघाड़े के आटा का चीला
कुट्टू या सिंघाड़े का चीला व्रत के लिए एक पौष्टिक और झटपट बनने वाला नाश्ता है. इससे फाइबर और प्रोटीन अधिक मात्रा में होते है, जो लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखता है और पेट भरा रहता है. साथ ही यह पचाने में आसान है. इसके अलावा कुट्टू शरीर को गर्मी देता है, जबकि सिंघाड़ा ठंडक प्रदान करता है.&amp;nbsp;
फल और दही की रायता
व्रत के दौरान फल और दही की रायता खाना पाचन को दुरुस्त रखता है, साथ ही पेट को ठंडा करता है और तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है. यह प्रोबायोटिक्स का बेहतरीन स्रोत है, जो कब्ज और सूजन कम करता है. इसमें मौजूद प्रोटीन और कैल्शियम हड्डियों व मांसपेशियों को स्वस्थ रखते हैं, जिससे कमजोरी नहीं होती और दिनभर तरोताजा रखता है. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में पढ़ें माता के 18 मंत्र, दुर्गासप्तशती पाठ करने के समान मिलता है फल
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:22 +0530</pubDate>
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<title>कर्म फलदाता शनि देव से जुड़े वो तथ्य, जो जीवन की दिशा तय करते हैं! जानिए शनिवार के उपाय?</title>
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<description><![CDATA[ Shani Dev: वैदिक ज्योतिष में शनि को कर्मफल और न्याय का देवता कहा जाता है. इनके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, परिश्रम और सच्चाई आती है. शनि की चाल भले ही धीमी होती है, लेकिन इनका असर गहरा और लंबे समय तक रहता है.
अगर शनि का प्रभाव अनुकूल हों तो व्यक्ति ऊंचाई तक पहुंचता है, लेकिन प्रतिकूल होने पर मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए शनि से जुड़े तथ्यों को समझना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
शनि की विशेषताएं (Nature &amp;amp; Traits)
सभी नवग्रहों में शनि को अचूक, कारीगर और क्रूर ग्रह माना जाता है. यह व्यक्ति को व्यावहारिक बनाने के साथ उनके जीवन में कठोर सच्चाई से रूबरू कराते हैं.
इनकी ऊर्जा से व्यक्ति मेहनती और जिम्मेदार बनता है. शनि स्वभाव से गंभीर, प्रशासक और कभी-कभी सख्त होता है.
शनि की शक्ति और प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र में शनि की शक्ति को रहस्यमयी माना जाता है. यह ग्रह अदृश्य ऊर्जा, तंत्र-मंत्र और गूढ़ विद्या से भी जुड़ा हुआ है. ऐसा माना जाता है कि, शनि व्यक्ति को छिपी हुई सच्चाइयों का समझने की क्षमता प्रदान करता है.

शनि से जुड़े प्रतीक (Symbols)

पशु- भैंस या बैल
पेड़- बबूल, खजूर का पेड़
अनाज- उड़ाद की दाल, सरसों
रंग- काला

ये तमाम चीजें शनि की ऊर्जा से संबंधित है और उपायों में इनका खास महत्व होता है.&amp;nbsp;
शनि का समय और स्वभाव
शनि का प्रभाव रात्र में अधिक माना जाता है. यह ग्रह शांत लेकिन गहराई से प्रभाव डालने वाला होता है. इनके प्रभाव से व्यक्ति में धैर्य और सहनशीलता विकसित होती है.&amp;nbsp;
कुंडली में शनि की स्थिति
यदि शनि ग्रह कुंडली में अकेले हो और किसी और ग्रह की नजर न हो, तो&amp;nbsp; 2, 3, 7, 12 &amp;nbsp;शुभ घर माने जाते हैं, वहीं 1, 4, 5, 6 अशुभ घर माने जाते हैं.&amp;nbsp;
इसके अलावा पक्का घर 10वां भाव, श्रेष्ठ घर 1, 3, 7, 12 और कमजोर घर 1, 4, 5, 6 है.&amp;nbsp;
शनि के मित्र और शत्रु ग्रह
मित्र ग्रह: बुध, शुक्र, राहुशत्रु ग्रह: सूर्य, चंद्र, मंगल
यह संबंध शनि के असर को और मजबूत या कमजोर बना सकता है.
करियर और व्यवसाय पर प्रभाव
शनि का जुड़ाव परिश्रम और तकनीकी कार्यों से होता है.
कार्य क्षेत्र: डॉक्टर, तेल और लोहे का व्यापार
पेशा: लोहार, मैकेनिक, बढ़ई
ऐसे पेशे में शनि मजबूत होने पर व्यक्ति को सफलता मिलती है.
शनि का स्वास्थ्य पर प्रभाव
शनि का प्रतिकूल प्रभाव खांसी, पेट में दर्द और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों का कारण बन सकता है. इसलिए जीवनशैली में अनुशासन का होना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
शनि के खास उपाय (Simple Remedies)
शनिवार का दिन खासतौर से शनिदेव को समर्पित होता है. इस दिन किए गए उपाय जल्दी प्रभाव दिखाते हैं.&amp;nbsp;

सरसों का तेल दान करें
उड़द की दाल का दान करें
पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं
जरूरतमंदों को खाना खिलाएं.

शनि से जुड़ा सबसे बड़ा उपाय क्या है?
अगर तुम आलसी हो, कामचोरी करते हो या जिम्मेदारी से भागते हो, तो कोई उपाय काम नहीं करेगा. शनि का असली उपाय है मेहनत, ईमानदारी और अनुशासन में रहना है.
जो व्यक्ति अपने कर्म सुधार लेता है, उसके लिए शनि का आशीर्वाद सबसे बड़ा वरदान बन जाता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:32:22 +0530</pubDate>
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<title>नारियल पानी पीने के कितने फायदे और क्या&#45;क्या होते हैं और उसके उपयोग करने के फायदे</title>
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<description><![CDATA[ नारियल पानी पीने की बहुत सारी उपयोग और कहानी और बहुत सारे फायदे नारियल पानी एक ऐसा पानी होता है जिससे बहुत सारी बीमारियां खत्म हो जाती है ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Dec 2025 12:59:07 +0530</pubDate>
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<title>आज सुबह के मुख्य जानकारी हार्ड और अन्य ऑपरेशन का जीवन स्तर पर पहुंच</title>
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<pubDate>Sun, 09 Nov 2025 10:24:28 +0530</pubDate>
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<title>Banke_Bihari_Mandir_के_तोष_खाने_का_दरवाजा_खुला,_54_साल_बाद_जांच_करनेगई_टीम_भी_हैरान।_Mathura_।_</title>
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<description><![CDATA[ अमिताभ_बच्चन_से_बदसलूकी_करने_वाले_बच्चे_को_होगी_जेल!_Overconfidence_Boy_In_KBC_!_KBC_Badtameez_Bach ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Oct 2025 01:09:23 +0530</pubDate>
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<title>आज का मुख्य समाचार पत्रों को कार्य करने के लिए एक बड़ी चुनौती है*लखनऊ&#45;*  *69000 शिक्षक अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, डिप्टी CM केशव के आवास जा रहे थे अभ्यर्थी*  पुलिस ने अभ्यर्थियों को आवास से पहले रोका, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने से किया प्रदर्शन  कल मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव किया था, सुप्रीम कोर्ट में सरकार पक्ष नहीं रख रही&#45; अभ्यर्थी  सुप्रीम कोर्ट में हमारी मजबूत पैरवी हो, पुलिस अभ्यर्थियों को बस में लेकर ईको गार्डन गई</title>
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<title>Jammu_Kashmir_Rain_Landslide__Rajouri_में_सैलाब_में_फंसे_बच्चे,_Army_ने_बचाई_जान,_डरा_देगा_Video. TRNDKB JITENDRA KUMAR JEETUDR JEETUDEHATI JD SERIES TRN LIVE</title>
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