आज सुबह के 100 मुख्य सामाचार कब्ज़ा करने वाली इज़राइली सेनाओं का ज़िक्र करते हुए, वह लिखती हैं : “इज़राइल की सेना की ताक़त
Jitendra Kumar: *श्रावण अष्टमी मेले आज से, 24 घंटे खुला रहेगा चिंतपूर्णी मंदिर
*प्रकाशनार्थ*
*क्या सरकार को पेलेट गन से लोगों को अपंग बनाने का अधिकार है?*
*(आलेख : मुरलीधरन, अंग्रेजी से अनुवाद : संजय पराते)*
इतिहास में हर दौर में सरकारों ने सज़ा देने और राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए लोगों को अपंग बनाने का तरीका अपनाया है। दुनिया भर में मध्यकालीन कानूनी प्रणालियों में चोरी और बगावत से लेकर व्यभिचार और देशद्रोह जैसे अपराधों के लिए आँखें फोड़ने, हाथ-पैर या नाक-कान काटने और शरीर को बदसूरत बनाने जैसी सज़ाएँ दी जाती थीं। ऐसी सज़ाएँ सबके सामने और बड़े पैमाने पर दी जाती थीं। इनका मकसद सिर्फ़ दर्द पहुँचाना नहीं, बल्कि शरीर पर ऐसा स्थायी निशान छोड़ना होता था, जो संप्रभु सत्ता की निशानी के तौर पर हमेशा दिखाई दे। आँखें खो देने वाला विरोधी दोबारा शासन नहीं कर सकता था ; कटा हुआ हाथ या बिगड़ा हुआ चेहरा शासक की ताकत का जीवन भर सबूत बना रहता था।
मिशेल फूको ने अपनी किताब 'डिसीप्लिन एंड पनिश' (अनुशासन और सजा) में तर्क दिया है कि आधुनिक राज्य के उदय ने इन तौर-तरीकों को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि संप्रभु सत्ता का स्थान धीरे-धीरे अनुशासनात्मक ताकत ने ले लिया है। मुख्य रूप से शरीर को कठोर दंड देने के बजाय आधुनिक राज्य निगरानी, संस्थाओं, नियमों और अनुशासन को मन में बैठाने के ज़रिए शासन करने लगे हैं। ऐसा लगता है कि उदारवादी संवैधानिक व्यवस्था ने अतीत की क्रूर शारीरिक सज़ाओं से एक निर्णायक दूरी बना ली है।
*अपंग बनाने का अधिकार*
फिर भी, जैसा कि जसबीर के. पुआर अपनी किताब 'द राइट टू मेम' (अपंग बनाने का अधिकार) में बताती हैं, राज्य की ताकत को प्रदर्शित करने के एक तरीके के रूप में लोगों को अपंग बनाने का चलन खत्म नहीं हुआ है ; बल्कि, इसने नए रूप ले लिए हैं। आधुनिक राज्य शायद ही कभी अदालती आदेश से लोगों के शरीर को अंग-भंग करने की सज़ा देते हैं। इसके बजाय, अक्सर सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या "कम जानलेवा" बल के नाम पर पुलिसिंग, कब्ज़े और युद्ध के ज़रिए लोगों को स्थायी रूप से घायल किया जाता है। इसका मकसद अब सज़ा का सार्वजनिक तमाशा दिखाना नहीं, बल्कि शरीर को इस तरह कमज़ोर करना है, जो ज़िंदा तो रहते हैं, लेकिन ज़िंदगी भर राज्य की हिंसा के नतीजों को झेलते रहते हैं। जैसा कि पुआर कहती हैं, आधुनिक राज्य तेज़ी से न केवल "मारने का अधिकार" बल्कि "अपंग बनाने का अधिकार" भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
कब्ज़ा करने वाली इज़राइली सेनाओं का ज़िक्र करते हुए, वह लिखती हैं : “इज़राइल की सेना की ताक़त — जो दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में से एक है — इतिहास, भू-राजनीति और भूगोल से जुड़ी उस धारणा पर टिकी है कि उसका अस्तित्व हमेशा कमज़ोर और अनिश्चित रहा है। ‘मारने के अधिकार’ के साथ-साथ, मैंने बस्तियाँ बसाकर राज करने की इज़राइल की रणनीति में एक और सोच देखी है — वह है फ़िलिस्तीनी आबादी को चोट पहुँचाना और उन्हें हमेशा कमज़ोर बनाए रखना, ताकि उन पर नियंत्रण रखा जा सके, भले ही वे ज़िंदा रहें। इज़राइली रक्षा बलों ने दशकों से यह दिखाया है कि वे जान लेने के बजाय अक्सर लोगों को अपंग बनाने के इरादे से गोली चलाते हैं…।”
7 अक्टूबर 2023 की घटना और गाज़ा में इज़राइल द्वारा किए जा रहे नरसंहार से काफी पहले, 2017 में, पुआर ने तर्क दिया था : “जान से मारने के बजाय अपंग बनाने के इरादे से गोली चलाना, जान लेने की नीयत से गोली चलाने की प्रवृत्ति को देखते हुए, एक मामूली राहत लग सकती है... लेकिन जान लेने के अधिकार और अपंग बनाने के अधिकार के बीच का यह उतार-चढ़ाव कोई बेतरतीब या मनमाना काम नहीं है... ये दोनों ही किसी आबादी को जान-बूझकर कमज़ोर करने का हिस्सा हैं — चाहे वह जान लेने के संप्रभु अधिकार के ज़रिए हो या उसके साथ जुड़े गुप्त अधिकार, यानी अपंग बनाने के अधिकार के ज़रिए — और ये सुरक्षा के नस्लवादी जैव-राजनैतिक तर्क के अहम तत्व हैं।” आज गाज़ा में दुनिया में सबसे ज़्यादा ऐसे बच्चे हैं, जिनके अंग काटे गए हैं।
पुआर का विश्लेषण फ़िलिस्तीन से आगे तक जाता है। यह हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि क्या आधुनिक राज्य शासन और नियंत्रण के तरीके के तौर पर, न केवल घातक बल का, बल्कि जान-बूझकर स्थायी चोट पहुँचाने का भी तेज़ी से सहारा ले रहे हैं।
*राज्य की सत्ता के साधन के तौर पर विकलांगता*
इसलिए, राज्य की सत्ता के साधन के तौर पर विकलांगता का इस्तेमाल न तो नया है और न ही किसी एक देश तक सीमित है। साम्राज्यवादी युद्धों ने कई पीढ़ियों को विकलांगता के साथ जीने के लिए मजबूर किया है।
वियतनाम युद्ध के दौरान इस्तेमाल किया गया एजेंट ऑरेंज पीढ़ियों तक जन्मजात विकृतियों और विकलांगताओं का कारण बना, जबकि वियतनाम, कंबोडिया, लाओस, अफगानिस्तान और अंगोला में बारूदी सुरंगों ने युद्ध समाप्त होने के लंबे समय बाद भी लाखों नागरिकों को अंग विच्छेदन और आजीवन विकलांगता का शिकार बना दिया। इन और अन्य अनुभवों के परिणामस्वरूप अंततः जो अंतर्राष्ट्रीय प्रयास हुए, उनका सार एंटी-पर्सनल माइन बैन कन्वेंशन के रूप में सामने आया। यह कन्वेंशन इस बात को मान्यता देता है कि ऐसे हथियार, जिनका संभावित परिणाम बड़े पैमाने पर विकलांगता पैदा करना है, मानवीय सिद्धांतों के साथ मौलिक रूप से असंगत हैं। यह एक अलग बात है कि भारत सहित कई प्रमुख देशों ने अभी तक इस कन्वेंशन पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं या इसकी पुष्टि नहीं की है।
बहरहाल, जो बात आज सबसे ज़्यादा चिंताजनक है, वह है पुलिसिंग और सुरक्षा के ऐसे तौर-तरीकों का सामने आना, जिनमें हमेशा के लिए अपंग हो जाना सिर्फ़ अनजाने में हुआ नुकसान नहीं, बल्कि राज्य की कार्रवाई का एक स्वीकार्य और कभी-कभी साफ़ तौर पर जान-बूझकर किया गया नतीजा होता है। 'ग्रेट मार्च ऑफ़ रिटर्न इन गाज़ा' के दौरान, इज़राइली बलों की गोलीबारी में हज़ारों प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं, उनका अंग-भंग हुआ, और वे हमेशा के लिए अपंग हो गए ; यही सिलसिला वहाँ हाल ही में हुए नरसंहार के दौरान भी जारी रहा।
*अपंग बनाना : एक स्वीकार्य सज़ा*
भारत में, कश्मीर में पेलेट-फायरिंग शॉटगन के इस्तेमाल से हज़ारों लोग अंधे हो गए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के "ऑपरेशन लंगड़ा" ने संदिग्धों के पैरों में गोली मारने को आम बात बना दिया है, जिसके कारण हज़ारों लोग अपंग हो गए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार, 2017 से अब तक 14,973 मुठभेड़ हुए हैं, जिनमें 238 कथित अपराधी मारे गए और 9,467 के पैरों में गोली लगी हैं।
हालांकि ये संदर्भ राजनीतिक और कानूनी तौर पर अलग-अलग हैं, लेकिन इनमें एक चिंताजनक समानता दिखती है : विकलांग बनाने की सज़ा को, डराने-धमकाने और सामाजिक नियंत्रण के एक स्वीकार्य तरीके के तौर पर ज़्यादा देखा जाने लगा है। अफ़सोस की बात है कि न्यायपालिका के कुछ हिस्सों में भी इसे स्वीकार किया जाता है। हाल ही में, कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस आर. नटराज ने कथित तौर पर कहा है कि लोगों से कानून का पालन करवाने का एकमात्र तरीका हाथ या पैर काटना हो सकता है।
*अपंग बनाने वाले हथियारों का इस्तेमाल*
इसी संदर्भ में 20 जुलाई की घटनाएं बहुत महत्वपूर्ण हो जाती हैं। ये हमें एक ऐसे सवाल पर सोचने के लिए मजबूर करती हैं, जो सार्वजनिक बहस से गायब हैं, भारत में पेलेट गन के इस्तेमाल के बावजूद। जब सरकार ऐसे हथियारों का इस्तेमाल करती है, जिनसे स्थायी रूप से अपंग होने की आशंका हो, तो इसका क्या मतलब है?
नेशनल प्लेटफ़ॉर्म फ़ॉर द राइट्स ऑफ़ द डिसेबल्ड (विकलांगों के अधिकारों के लिए राष्ट्रीय मंच - एनपीआरडी) ने 447 से ज़्यादा विकलांगता अधिकार संगठनों, कार्यकर्ताओं, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अकादमिक लोगों के समर्थन वाले एक बयान में, पैलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक बैटन के इस्तेमाल की साफ़ तौर पर निंदा की है। उनका यह कदम इसलिए अहम है, क्योंकि यह बहस को ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग और नागरिक आज़ादी के दायरे से आगे ले जाकर विकलांग लोगों के अधिकारों के मुद्दे को सामने लाता है।
भारत का 'विकलांग लोगों का अधिकार अधिनियम, 2016' और 'विकलांग लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (यूएनसीआरपीडी)' — जिसका भारत एक सदस्य देश है — विकलांगता को अधिकार, समानता और सम्मान के सवाल के रूप में मान्यता देने के नज़रिए से देखते हैं। ये कानून सरकारों से अपेक्षा करते हैं कि वे विकलांगता रोकने के साथ-साथ बाधाओं को दूर करें, भेदभाव से लड़ें और विकलांगों की पूरी भागीदारी को बढ़ावा दें।
*राज्य : विकलांगता पैदा करने वाला एक सक्रिय कारक*
पैलेट गन का इस्तेमाल इन वादों के मूल में मौजूद एक गहरे विरोधाभास को उजागर करता है। उन बाधाओं को दूर करने के बजाय, जो लोगों को विकलांग बनाते हैं, राज्य खुद विकलांगता पैदा करने वाला एक सक्रिय कारक बन जाता है।
छर्रों से होने वाला हर अंधापन, क्षतिग्रस्त रेटिना, चेहरे पर अपूरणीय चोट या तंत्रिका संबंधी क्षति -- भीड़ नियंत्रण का मात्र एक दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम नहीं है, बल्कि यह उस हथियार के इस्तेमाल का अनुमानित परिणाम है, जिसके प्रभावों का दस्तावेजीकरण एक दशक से अधिक समय से किया जा रहा है। आकस्मिक चोटों के विपरीत, ये क्षतियाँ उस हथियार के सचेत उपयोग के परिणामस्वरूप होती हैं, जिसके बारे में यह ज्ञात है कि इससे स्थायी विकलांगता पैदा होने का काफी जोखिम है।
सरकारी नीतियों में टीकाकरण, कार्यस्थल पर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और जन-स्वास्थ्य के ज़रिए ऐसी विकलांगता को रोकने की कोशिश की गई है, जिसे टाला जा सकता है। पेलेट गन इसके ठीक विपरित सिद्धांत पर काम करती हैं। इसमें सरकार जान-बूझकर ऐसे हथियार का इस्तेमाल करती है, जिसकी मुख्य विशेषता ही ऐसी चोट पहुँचाना है, जिससे होने वाली विकलांगता को ठीक नहीं किया जा सकता।
इसलिए, अब सवाल यह नहीं है कि दिल्ली में किसी खास दिन ज़रूरत से ज़्यादा बल का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। सवाल यह है कि क्या समानता, सम्मान और सबको साथ लेकर चलने की प्रतिबद्धता वाले संवैधानिक लोकतंत्र में पुलिसिंग के ऐसे तरीकों को जायज़ माना जा सकता है, जिनसे विकलांगता पैदा होने की आशंका हो।
*एक संवैधानिक विरोधाभास*
संविधान के नजरिए से देखने पर यह विरोधाभास और भी गहरा हो जाता है। अनुच्छेद 21 न केवल जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, बल्कि सम्मान के साथ जीने के अधिकार की भी गारंटी देता है। अनुच्छेद 14 और 19 कानून के समक्ष समानता और भाषण, अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं। ये गारंटियाँ निलंबित नहीं हैं, क्योंकि नागरिक इसका विरोध करेंगे। जबकि राज्य के पास सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है, संवैधानिक शासन की मांग है कि बल का कोई भी उपयोग वैधता, आवश्यकता और आनुपातिकता के परीक्षणों को पूरा करे।
बल का इस्तेमाल हमेशा कम से कम नुकसान पहुँचाने वाले तरीके से ही किया जाना चाहिए। ऐसे हथियार, जिनसे हमेशा के लिए अंधापन या जीवन भर की विकलांगता होने की आशंका हो, वे इस संवैधानिक ढांचे के हिसाब से सही नहीं बैठते।
यह विरोधाभास घरेलू कानून से भी आगे तक फैला हुआ है। यूएनसीआरपीडी का अनुमोदन करके, भारत ने विकलांग व्यक्तियों के लिए सम्मान, समानता और समावेशन को बढ़ावा देने का कार्य किया है। विकलांग व्यक्तियों का अधिकार अधिनियम, 2016 इन प्रतिबद्धताओं का प्रतीक है। फिर भी ये वादे खोखले हैं, यदि वही राज्य ऐसे हथियारों को बरकरार रखता है और तैनात करता है, जिसका अनुमानित परिणाम नई विकलांगताओं का निर्माण होता है। यह महज़ एक नीतिगत असंगति नहीं है। यह एक संवैधानिक विरोधाभास है।
*वे सबक, जो हम सीखना नहीं चाहते*
भारत में पैलेट-फायरिंग शॉटगन का इस्तेमाल कश्मीर घाटी में 2010 के विरोध-प्रदर्शनों के बाद शुरू हुआ। इन्हें असली गोलियों के "गैर-घातक" विकल्प के तौर पर पेश किया गया था और भीड़ को काबू करने का एक ज़्यादा मानवीय तरीका बताया गया था। इसके बेहद बुरे नतीजों और इन पर रोक लगाने की मांगों के बावजूद, इनका बार-बार इस्तेमाल किया गया।
जल्द ही, घाटी भर के अस्पतालों में आंखों की गंभीर चोटों के सैकड़ों मामले दर्ज किए गए। श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञों ने आंखों के गोले फटने, रेटिना के अलग होने, दृष्टि तंत्रिका को नुकसान पहुंचने और कॉर्निया के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने जैसे मामले दर्ज किए ; ऐसी चोटें आधुनिक नेत्र चिकित्सा के दौर में शायद ही कभी देखी गई हों। कई पीड़ितों की बार-बार सर्जरी करनी पड़ी। जनवरी 2018 में, तत्कालीन जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राज्य विधानसभा में बताया कि 8 जुलाई 2016 से 27 फरवरी 2017 के बीच कश्मीर में पैलेट गन से 6,221 लोग घायल हुए थे। इनमें से 728 लोगों को आंखों में चोटें आईं और 54 लोग पैलेट की चोट के कारण किसी न किसी तरह की दृष्टि संबंधी अक्षमता का शिकार हुए।
पैलेट गन से लगी चोटों के हर आँकड़े के पीछे एक ऐसी ज़िंदगी छिपी है, जो हमेशा के लिए बदल गई। जुलाई 2016 में, शोपियां की रहने वाली चौदह साल की इंशा मुश्ताक अपने घर की खिड़की से बाहर हो रहे विरोध-प्रदर्शन को देख रही थी। पैलेट की बौछार ने खिड़की का शीशा तोड़ दिया और उसकी दोनों आँखों में जा लगी, जिससे वह हमेशा के लिए अंधी हो गई। डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली होनहार छात्रा इंशा को अचानक स्कूल छोड़ना पड़ा, ब्रेल और लगातार मदद के ज़रिए रोज़मर्रा के काम फिर से सीखने पड़े, और एक ऐसे भविष्य को अपनाना पड़ा, जिसे उसने कभी नहीं चुना था। दस साल के लंबे इंतज़ार के बाद, इंशा मुश्ताक को हाल ही में 41.16 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया गया है।
*पैलेट किसी में फ़र्क नहीं करते*
आम गोली के उलट, पैलेट कारतूस से धातु के सैकड़ों छोटे टुकड़े निकलते हैं, जो एक बड़े इलाके में बेतरतीब ढंग से फैल जाते हैं। एक बार फायर होने के बाद, न तो गोली चलाने वाला और न ही कमांडिंग ऑफिसर यह तय कर सकता है कि कौन सा पैलेट किस व्यक्ति को या उसके शरीर के किस हिस्से पर लगेगा। यह हथियार प्रदर्शनकारी और राहगीर, वयस्क और बच्चे, या कंधे और आंख के बीच कोई फ़र्क नहीं कर सकता। मुश्ताक भी उन्हीं में से एक थी।
अठारह महीने की हिबा निसार की कहानी अलग है। 23 नवंबर 2018 को वह कश्मीर के शोपियां ज़िले के कापरान में अपने घर के अंदर थी। 'न्यूज़क्लिक' की एक रिपोर्ट के अनुसार, "बच्ची अपनी माँ की गोद में थी, तभी सड़क पर प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए छोड़े गए आँसू गैस के गोले का धुआँ उनके घर में भर गया, जिससे घर के अंदर रहना मुश्किल हो गया। उसकी 32 वर्षीय माँ मारसाला ने बच्ची को बाहर ले जाने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही उन्होंने दरवाज़ा खोला, एक सैनिक ने उनकी तरफ़ छर्रे (पेलेट्स) चलाए, जिससे हिबा की दाईं आँख में चोट लग गई। छर्रा उसकी आँख को भेदकर अंदर गहराई तक चला गया और आँख के उन हिस्सों को नुकसान पहुँचा, जो देखने के लिए ज़रूरी होते हैं।" बाद में उसकी माँ ने कहा कि काश छर्रे उन्हें लगे होते ; उन्हें यह सोचकर दुख हो रहा था कि उनकी बेटी ज़िंदगी भर विकलांगता के साथ कैसे जिएगी।
दिल्ली में हुई कार्रवाई के दौरान छर्रे लगने से घायल हुए पांच लोगों में शामिल साहिल लोचब की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है। उन्होंने कहा, "मुझे इंसाफ चाहिए। जिसने भी मेरे साथ ऐसा किया है, उसे सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है।" नूतन टोप्पो, जिनके दाहिने कान पर छर्रो से चोट लगी थी, को सुनने में दिक्कत हो रही है।
ये घटनाएं इस झूठ को बेनकाब करती हैं कि पेलेट गन भीड़ को काबू करने वाले "गैर-प्राणघातक" या "सुरक्षित" हथियार हैं। ये सिर्फ़ भीड़ को तितर-बितर नहीं करतीं ; बल्कि लोगों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल देती हैं — अक्सर उन लोगों की, जो न तो किसी विरोध-प्रदर्शन में शामिल होते हैं और न ही कोई खतरा पैदा करते हैं।

*उन्होंने मेरा भविष्य क्यों बर्बाद किया?*
इसके नतीजे सिर्फ़ शारीरिक नुकसान तक ही सीमित नहीं रहे। दानिश रजब, जिनके चेहरे और सिर में लगभग सौ छर्रे (पेलेट्स) धंसने के कारण एक आँख चली गई और दूसरी आँख की रोशनी भी बहुत कम रह गई, वह सामाजिक जीवन से दूर हो गया ; उसकी पढ़ाई और कैरियर अचानक खत्म हो गई। एक और पीड़ित युवा, फ़ेल फ़िरदौसी ने न सिर्फ़ अपनी आँखों की रोशनी खोने की बात की, बल्कि अपना भविष्य भी खोने का ज़िक्र किया और दर्द भरे लहजे में पूछा, "उन्होंने मेरा करियर और मेरा भविष्य क्यों बर्बाद कर दिया?"
इसलिए, कश्मीर में जो अंधापन देखा गया है, वह कोई इत्तेफ़ाक या दुर्घटना नहीं थी। यह बिना सोचे-समझे इस्तेमाल किए जाने वाले हथियार का पहले से ही अंदाज़ा लगाया जा सकने वाला नतीजा था। जो लोग घायल हुए, उनके लिए इसके नतीजे ऑपरेशन थिएटर तक ही सीमित नहीं रहे। हमेशा के लिए नज़र चली जाने का अक्सर मतलब था -- पढ़ाई का रुकना, नौकरी छूटना, ज़िंदगी भर पुनर्वास और मदद करने वाली तकनीक पर निर्भर रहना, मानसिक सदमा और परिवारों के लिए भारी आर्थिक तंगी। एक पल में लगी चोट ज़िंदगी भर की विकलांगता बन गई, जिससे इंसान को नई हकीकत के हिसाब से फिर से सीखना, हालात का सामना करना और खुद को ढालना पड़ा।
यही वजह है कि विकलांगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन, नागरिक स्वतंत्रता समूहों की तुलना में पैलेट गन को अलग नज़रिए से देखते हैं। उनकी चिंता सिर्फ़ मुठभेड़ के दौरान होने वाली हिंसा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसके बाद आने वाली स्थायी बाधाओं को लेकर भी है। पैलेट की वजह से अंधेपन का शिकार होने वाला हर व्यक्ति एक नए संघर्ष में शामिल हो जाता है — सुलभ शिक्षा, रोज़गार, आवाजाही और समाज में बराबरी की भागीदारी के लिए। कश्मीर में जब पहली बार इनका इस्तेमाल हुआ था, तब एनपीआरडी ने जो चेतावनियाँ दी थीं, वे आज और भी ज़्यादा प्रासंगिक हो गई हैं।
*'कम घातक' हथियारों का मिथक*
पेलेट गनों का आधिकारिक बचाव उन्हें 'कम-घातक' या 'गैर-घातक' बताने पर निर्भर है। यह शब्दावली अत्यंत भ्रामक है। कोई भी हथियार सिर्फ इसलिए मानवीय नहीं हो जाता, क्योंकि वह कम लोगों को मारता है। अंतर्राष्ट्रीय पुलिस विशेषज्ञ भी बड़ी संख्या में इस अभिव्यक्ति से बच रहे हैं, क्योंकि ऐसे हथियार मौत का कारण बन सकते हैं और हैं भी। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अंधापन, मस्तिष्क की दर्दनाक चोट, पक्षाघात और अन्य स्थायी हानियाँ पहुँचाते हैं, जो किसी व्यक्ति के जीवन की दिशा को मौलिक रूप से बदल देती हैं।
विकलांगों के अधिकारों के नज़रिए से, यह फ़र्क करना बहुत ज़रूरी है। एक संवैधानिक लोकतंत्र में पुलिस के हथियारों का मूल्यांकन सिर्फ़ इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि वे मौतें कम करते हैं या नहीं। उसे यह भी देखना होगा कि क्या उनसे ऐसी विकलांगता तो नहीं होती, जिसे टाला जा सकता था। अगर कोई हथियार अक्सर लोगों को अंधा या हमेशा के लिए विकलांग बना देता है, तो उसकी वजह से होने वाली मौतों की तुलना पारंपरिक बंदूकों से करने पर असल मुद्दा छूट जाता है।
इसलिए सवाल यह नहीं है कि क्या पेलेट गन से गोलियों की तुलना में कम लोगों की मौत होती है। सवाल यह है कि क्या सरकार को ऐसे हथियारों का इस्तेमाल करना चाहिए, जिनका नतीजा जीवन भर की विकलांगता हो सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के 'बल और हथियारों के इस्तेमाल के बुनियादी सिद्धांतों' के अनुसार, बल का प्रयोग कानूनी, ज़रूरी और अनुपात के हिसाब से होना चाहिए, इसके साथ ही इससे कम से कम चोट लगे और जान बचाई जा सके। इन्हीं सिद्धांतों को आधार बनाते हुए, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने 'कानून लागू करने में कम जानलेवा हथियारों के इस्तेमाल पर 2020 के दिशा-निर्देश' में साफ़ तौर पर कहा है : "एक ही समय में कई प्रोजेक्टाइल (गोले या छर्रे) दागना सटीक नहीं होता और आम तौर पर, इनका इस्तेमाल ज़रूरत और अनुपात के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हो सकता। मेटल पेलेट्स (धातु के छर्रे), जैसे कि शॉटगन से दागे जाने वाले छर्रे, का इस्तेमाल कभी नहीं किया जाना चाहिए।"

*लोकतांत्रिक पुलिसिंग के साथ असंगति*
अब सवाल सिर्फ़ यह नहीं है कि 20 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर ज़रूरत से ज़्यादा बल का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। सवाल यह है कि क्या समानता और समावेश के लिए प्रतिबद्ध एक संवैधानिक लोकतंत्र ऐसे हथियारों को सही ठहराना जारी रख सकता है, जिनकी मुख्य विशेषता ही लोगों को अपंग बनाने की क्षमता है।
जब भी भीड़ पर पेलेट गन चलाई जाती है, तो इससे एक और इंशा मुश्ताक या हिबा निसार जैसी स्थिति बनने का खतरा पैदा होता है — यानी एक ऐसा बच्चा, जिसकी पढ़ाई छूट जाए, या एक ऐसा युवा, जिसका भविष्य हमेशा के लिए बदल जाए। जो समाज विकलांग लोगों की गरिमा, समानता और अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है, वह ऐसा हथियार स्वीकार नहीं कर सकता, जिसका नतीजा ही विकलांगता पैदा करना हो। इसलिए, पेलेट गन पर रोक लगाने की मांग सिर्फ़ पुलिस सुधार या भीड़ को काबू करने का मामला नहीं है ; यह विकलांगों के अधिकारों के लिए ज़रूरी कदम है, संवैधानिक ज़िम्मेदारी है और मानवीय गरिमा के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता की परीक्षा भी है।
सुप्रीम कोर्ट में पेलेट गन पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान, जस्टिस सूर्यकांत ने सुझाव दिया है कि याचिकाकर्ताओं को पेलेट गन पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय, कोर्ट से इनके इस्तेमाल के लिए एक प्रोटोकॉल बनाने की मांग करने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा, "इनके कथित अत्यधिक इस्तेमाल को देखते हुए... आपकी मांग यह होनी चाहिए कि कोर्ट इनके इस्तेमाल के संबंध में एक प्रोटोकॉल तय करे।" हम यह पूछना चाहते हैं : क्या कोई ऐसा हथियार, जिसका पहले से पता और प्रमाणित नतीजा जीवन भर की विकलांगता हो, उसे केवल प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों के ज़रिए कभी स्वीकार्य बनाया जा सकता है?
जैसा कि ऊपर बताया गया है, समस्या सिर्फ़ इसके बहुत ज़्यादा या ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल की नहीं है, बल्कि खुद इस हथियार की बनावट की है। पेलेट शॉटगन से सैकड़ों छर्रे (ज़्यादातर धातु के) एक बड़े इलाके में बेतरतीब ढंग से फैलते हैं, जिससे हमेशा के लिए अपंग होने का खतरा बना रहता है ; यह खतरा इसके गलत इस्तेमाल का कोई इत्तेफ़ाकन नतीजा नहीं, बल्कि इस हथियार की अपनी खासियत है। कोई भी नियम या तरीका इस खासियत को खत्म नहीं कर सकता। अधिकारों पर आधारित नज़रिए से यह समझना ज़रूरी है कि ऐसे हथियार, जिन्हें इस तरह बनाया गया हो कि उनसे पक्के तौर पर ज़िंदगी भर की अपंगता हो सकती है, उन्हें आम नागरिकों के बीच कानून लागू करने के काम में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
*(लेखक विकलांगों के अधिकारों के लिए राष्ट्रीय मंच -- एनपीआरडी के महासचिव हैं। अनुवादक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं।
Tej raftar news: *BBMB एरियर पर खुशखबरी करीब, अब 20 को होगी सुनवाई, हिमाचल को हक मिलने के आसार*
केंद्र की ओर से पेश एजी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, मामला सुलझने के बने आसार
केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पंजाब सरकार, 1966 से भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड प्रोजेक्ट्स से जुड़े हिमाचल प्रदेश के बकाया भुगतान के मामले में केंद्र के प्रस्ताव को मानने के बहुत करीब है। बुधवार को यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बैंच के सामने सुनवाई के लिए लगा था। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि यह मामला इसलिए लिस्ट किया गया है, ताकि यह पता चल सके कि क्या पंजाब सरकार केंद्र के प्रस्ताव से सहमत है? केंद्र की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी (एजी) ने बैंच के सामने कहा कि मुझे कहना होगा कि आज हम एक ही सुर में बात कर रहे हैं। पंजाब अब सहमति के काफी करीब आ रहा है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हम कुछ छोटी-मोटी दिक्कतों को दूर करना चाहते हैं। बैंच ने कहा कि जब तक मामला सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब तक छोटी-मोटी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। वकील ने इस बात पर सहमति जताई। अटॉर्नी जनरल ने बैंच से आग्रह किया कि मामले की सुनवाई अगले हफ्ते के लिए लिस्ट की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 20 अगस्त की तारीख तय की है। इससे पहले केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि बकाया भुगतान के लिए पार्टनर राज्यों के बीच एक नए कैशलेस फॉर्मूले पर आपसी सहमति बन सकती है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि हिमाचल और हरियाणा की सरकारें केंद्र के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गई हैं, लेकिन पंजाब सरकार ने इस पर आपत्ति जताई है। 30 जुलाई को केंद्र ने बैंच को बताया था कि सरकार ने पूरी तरह से कैशलेस सेटलमेंट का सुझाव दिया है, क्योंकि अगर पार्टियां पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के अनुसार चलती हैं, तो कोई समझौता नहीं हो पाएगा। पंजाब सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि उन्हें बकाया राशि के भुगतान की दर पर आपत्ति है। इससे राज्य को लगभग 2,000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। बैंच ने कहा था कि अगर पंजाब आपसी सहमति से समझौता करने को तैयार नहीं होता है, तो कोर्ट मामले के गुण-दोष के आधार पर विचार करेगा और आदेश जारी करेगा। हालांकि अब पंजाब भी कैशलेस फॉर्मूले पर सहमत होता दिख रहा है। ऐसे में 20 अगस्त की सुनवाई में हिमाचल के लिए बड़ी खुशखबरी आ सकती है।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि राज्य 2011 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तों के आधार पर बकाया राशि पाने का हकदार है। पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के बाद कई दशकों तक संपत्तियों के बंटवारे को लेकर राज्यों के बीच विवाद नहीं सुलझ पाया। इसके बाद 1996 में हिमाचल ने सुप्रीम कोर्ट में एक मूल मुकदमा दायर किया। इसमें तर्क दिया गया कि एक उत्तराधिकारी राज्य होने के नाते बीबीएमबी प्रोजेक्ट्स में उसका 7.19 प्रतिशत हिस्सा बनता है। जब केंद्र सरकार राज्यों के बीच इस विवाद को अदालत के बाहर नहीं सुलझा पाई, तो सितंबर 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, हिमाचल का हिस्सा 7.19 प्रतिशत तय किया गया, जबकि पंजाब और हरियाणा का हिस्सा क्रमश: 51.80 प्रतिशत और 37.51 प्रतिशत तय किया गया।
JD venture: *टेंडर और बिलिंग से भुगतान तक, सब ऑनलाइन होगा, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जारी किए निर्देश*
प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत निर्माण से जुड़ी पूरी व्यवस्था होगी डिजिटल, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जारी किए निर्देश
प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत सडक़ों के निर्माण कार्यो से जुड़ी पूरी व्यवस्था डिजिटल होगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय 14 अगस्त से ओमास पोर्टल पर ई एमबी और बिलिंग प्रणाली को लागू करने जा रहा है। इसके लिए मंत्रालय की ओर से निर्देश भी जारी कर दिए है। बड़ी बात है कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद पीएमजीएसवाई के तहत होने वाले कार्यों के टेंडर से लेकर इसके भुगतान की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी। मंत्रालय ने इस व्यवस्था के लिए सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को एक नोडल अधिकारी भी तैनात करने को कहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 14 अगस्त से देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ओएमएमएएस पोर्टल पर ई-एमबी (इलेक्ट्रॉनिक मेजरमेंट बुक) और ई-बिलिंग प्रणाली लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद निर्माण कार्यों की एमबी, उसका रिकॉर्ड और ठेकेदारों के बिल एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तैयार किए जाएंगे। इस व्यवस्था में फील्ड इंजीनियर निर्माण स्थल पर किए गए कार्यों की एमबी सीधे ऑनलाइन दर्ज करेंगे।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पीएमजीएसवाई के तहत स्वीकृति के लिए भेजे जाने वाले प्रत्येक नए कार्य का बिल ऑफ क्वांटिटी (बीओक्यू) पहले ओमास पोर्टल में डिजिटल रूप से तैयार करना होगा। डीपीआर तैयार होने के बाद कार्य की मात्रा का अंतिम सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद यही बीओक्यू तकनीकी स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया, निर्माण कार्य, एमबी दर्ज करने और बिल बनाने का आधार बनेगा। एक बार बीओक्यू अंतिम रूप से तय होने के बाद उसमें बाद में बदलाव नहीं किया जाएगा। मंत्रालय ने कहा है कि पहले से चल रहे निर्माण कार्यों को भी नई प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इसके लिए 30 अगस्त तक स्वीकृत कार्यों की बची हुई मात्रा का डिजिटल बीओक्यू तैयार कर पोर्टल में अपलोड करना होगा। इसके बाद सभी कार्य ई-एमबी में दर्ज होंगे और उन्हीं के आधार पर ई-बिलिंग के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
अधिकारियों की वीडियो कॉन्फे्रंसिंग से ट्रेनिंग
नई व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए 17 अगस्त को ओमास और सी-डैक की ओर से वीडियो कॉन्फे्रंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें राज्य नोडल अधिकारी, परियोजना इकाइयों के इंजीनियर, एमबी और बिलिंग शाखा के अधिकारी भाग लेंगे। प्रशिक्षण में बीओक्यू तैयार करने, एमबी करने और इसके सत्यापन, बिल तैयार करने और तकनीकी समस्याओं के समाधान की जानकारी दी जाएगी।
सभी राज्यों को करनी होगी नोडल अधिकारी की नियुक्ति
मंत्रालय ने सभी राज्यों को ई-एमबी और ई-बिलिंग के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि ओमास पोर्टल में अपलोड किया जाने वाला बीओक्यू सही हो। साथ ही सभी पात्र कार्यों की माप नई प्रणाली में दर्ज की जाए और यदि किसी प्रकार की तकनीकी या संचालन संबंधी समस्या आए तो उसकी जानकारी समय पर एनआरआईडीए को दी जाए।
JD series: *जनगणना में लापरवाही न बरतें अधिकारी, मुख्य सचिव के निर्देश, बर्फबारी वाले क्षेत्रों में पहली से चलेगी मुहिम*
हिमाचल प्रदेश के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इन क्षेत्रों में एक सितंबर से 30 सितंबर तक जनसंख्या गणना का काम चलेगा। इससे पहले लोगों को खुद अपनी जनगणना की जानकारी दर्ज करने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए 17 से 31 अगस्त तक स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध रहेगा। वहीं, बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियों को लेकर बुधवार को शिमला में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें इन क्षेत्रों के उपायुक्त, नगर आयुक्त और प्रधान जनगणना अधिकारी सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में जनसंख्या गणना की तैयारियों, कर्मचारियों की तैनाती, प्रशिक्षण, तकनीकी व्यवस्था और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की विस्तार से समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनगणना के आंकड़ों की गुणवत्ता और सटीकता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। सम्मेलन में सचिव सामान्य प्रशासन एवं राज्य जनगणना समन्वयक, निदेशक जनगणना कार्य, हिमाच्छादित क्षेत्रों के उपायुक्त व नगर आयुक्त तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जनगणना निदेशक दीप शिखा शर्मा ने बताया कि प्रदेश में जनगणना का पहला चरण यानी मकानों की सूची और मकान गणना सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है। अब हिमाच्छादित क्षेत्रों में दूसरे चरण के तहत प्रत्येक परिवार और व्यक्ति से संबंधित जरूरी जानकारी जुटाई जाएगी।
JD venture: *जेपीसी के पास भेजा गया एफसीआरए बिल, समिति में 21 सदस्य लोकसभा और 10 राज्यसभा के होंगे*
एफसीआरए संशोधन विधेयक को जेपीसी के पास भेजने की सहमति बन गई है। बिल को जेपीसी के पास भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया, जो पारित हो गया। प्रस्तावित जेपीसी (ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी) में कुल 31 सदस्य होंगे, जिनमें से 21 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से होंगे। प्रस्ताव में कहा गया कि विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 को सदनों की एक संयुक्त समिति को भेजा जाए, जिसमें लोकसभा के माननीय अध्यक्ष द्वारा मनोनीत इस सदन के 21 सदस्य और राज्यसभा के माननीय सभापति द्वारा मनोनीत 10 सदस्य होंगे। समिति को विधायी प्रावधानों की गहन जांच करने का काम सौंपा गया है और समिति को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक संसद को अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
हालांकि, विपक्ष ने सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध किया। कांग्रेस सांसद वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार अल्पसंख्यकों और एनजीओ को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। हमारी मांग है कि सरकार इस बिल को वापस ले। विपक्ष के आरोपों पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के किसी भी सदस्य को इस बिल में आपत्तिजनक कुछ बिंदु लगते हैं, तो जेपीसी में मत रख सकते हैं। इसमें उन्हें पर्याप्त समय मिलेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस विधेयक से किसी भी अल्पसंख्यक वर्ग को टारगेट नहीं किया जा रहा है। पूरे देश को सुरक्षित रखने के लिए नियम बना रहे हैं।
Jitendra Kumar: *मंत्रिमंडल विस्तार से पहले अचानक दिल्ली पहुंचे सीएम सुक्खू, हाईकमान नेताओं से करेंगे मुलाकात*
21 अगस्त से विधानसभा का मानसून सत्र, डिप्टी स्पीकर का चुनाव भी होगा
डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री, प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष विनय कुमार भी दिल्ली में
शिमला से बिलासपुर दौरे पर गए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अचानक दिल्ली रवाना हो गए हैं। वह दिल्ली पहुंच गए हैं और पार्टी हाईकमान में कई नेताओं से मुलाकात करेंगे। बिलासपुर रवाना होने से पहले शिमला में मुख्यमंत्री ने कहा था कि मंत्रिमंडल विस्तार पॉलीटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक से पहले भी हो सकता है और सुंदर सिंह ठाकुर मंत्री परिषद की शपथ ले सकते हैं। उन्होंने यह संकेत भी दिए थे कि मंत्रिमंडल विस्तार के साथ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी संभव है। इधर हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त से शुरू हो रहा है, जो 3 सितंबर तक चलेगा। वर्तमान में विधानसभा के भीतर डिप्टी स्पीकर का पद खाली है। इस पद पर पहले रेणुका से कांग्रेस विधायक विनय कुमार थे।
उनको प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उन्होंने यह पद छोड़ दिया था। इस मानसून सत्र में डिप्टी स्पीकर का पद भी भरा जाएगा। मुख्यमंत्री से पहले उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी दिल्ली में ही थे और आज उन्होंने हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल से भी मुलाकात की थी। डिप्टी सीएम से पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनय कुमार भी दिल्ली रवाना हुए थे और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से चर्चा के लिए गए थे। अब मुख्यमंत्री के भी अचानक दिल्ली पहुंचने पर हिमाचल में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कई दिनों से चल रही अटकलें को और गति मिल गई है। हालांकि राज्य सरकार की ओर से जारी प्रोग्राम के अनुसार मुख्यमंत्री ने आज बिलासपुर से शिमला लौटना था। फिर 14 और 15 अगस्त को हमीरपुर जिला का दौरा था। अब वह दिल्ली से सीधा हमीरपुर भी आ सकते हैं।
Jeetu dehati: *मानसून ब्रेक खत्म, आज से खुलेंगे स्कूल, 32 दिन बाद लौटेगी रौनक, रेगुलर लगेंगी कक्षाएं*
हिमाचल प्रदेश के ग्रीष्मकालीन स्कूलों में करीब 32 दिन बाद आज फिर रौनक लौटेगी। लंबे मानसून अवकाश के चलते 12 जुलाई से बंद चल रहे स्कूलों में अब नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने के साथ ही शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन के सामने विद्यार्थियों को दोबारा पढ़ाई के माहौल में लाने, छूटा हुआ पाठ्यक्रम पूरा करने और आगामी परीक्षाओं की तैयारी करवाने की बड़ी चुनौती रहेगी। स्कूलों में पहले चरण में विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर का आकलन कर कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त सहायता देने पर जोर रहेगा। लंबे अवकाश के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई की नियमितता प्रभावित हुई है।
ऐसे में शिक्षक कक्षाओं में पहले पढ़ाए गए पाठ्यक्रम की दोहराई करवाने के साथ उन विषयों और अध्यायों पर विशेष ध्यान देंगे, जिनमें विद्यार्थियों को अधिक परेशानी आ रही है। लंबी छुट्टियों के बाद स्कूलों में कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता देने की जरूरत रहेगी। शिक्षक विद्यार्थियों के स्तर का आकलन करने के बाद विषयवार दोहराई करवाएंगे। जिन विद्यार्थियों के कुछ अध्याय छूट गए हैं, उन्हें दोबारा पढ़ाया जाएगा, ताकि वे कक्षा के बाकी विद्यार्थियों के साथ पढ़ाई में आगे बढ़ सकें। कुल्लू जिला में भी विद्यार्थियों की लंबी छुट्टियां खत्म हो गई हैं। यहां 20 जुलाई से 12 अगस्त तक करीब 26 दिन का मानसून अवकाश रहा।
एग्जाम पर फोकस
स्कूलों में अब आगामी परीक्षाओं की तैयारियां भी तेज होंगी। शिक्षकों को निर्धारित समय में पाठ्यक्रम पूरा करवाने के साथ छात्रों की नियमित पढ़ाई, दोहराई और अभ्यास पर ध्यान देना होगा। आने वाले दिनों में कक्षाओं में शैक्षणिक गतिविधियां बढऩे की उम्मीद है।
Jitendra Kumar: *पहले इथेनॉल पर जवाब दे भाजपा, पीडब्ल्यूडी मंत्री की विपक्ष को नसीहत, सेस पर सवाल न उठाएं*
हिमाचल में डीजल और पेट्रोल पर लगाए सेस पर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि देश में इन कीमतों में हुई बढ़ोतरी और जबरन इथेनॉल लागू करने पर भाजपा नेता अपनी बात रखें। लोक निर्माण मंत्री बुधवार को शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि देश में डीजल और पेट्रोल के दाम हर समय बढ़े हुए हैं। पहले भाजपा को इस पर जबाव देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की लापरवाही के कारण रूस से सस्ता कच्चा तेल नहीं मिल पा रहा है।
इस कारण बिटुमिन भी पहले की तरह कम दाम पर नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि विपक्ष प्रदेश में टारिंग न होने की बात करता है, लेकिन जिस रेट पर टेंडर दिया, उस पर बिटुमिन के बढ़े दामों के चलते ठेकेदार काम करने को तैयार नहीं है। पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि एथेनाल की वजह से गाडिय़ों के इंजन सीज़ हो रहे है। इसके लिए क्या किसी की जवाबदेही नहीं है। भाजपा को पहले इसका का जवाब देना चाहिए।
ज्यादा देर बंद न रहें रोड
विक्रमादित्य ने कहा कि मानसून सीजन में सेब बाहुल्य क्षेत्रों को लेकर विभाग को विशेष तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि सडक़ें अधिक समय तक बंद न रहें। उन्होंने कहा कि हाल ही में केंद्र से दो सडक़ों की अपग्रेडेशन के लिए राशि स्वीकृत हुई है। इसके टेंडर प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
Tej raftar news: *मणिमहेश में बचाव दलों की जिम्मेदारियां तय, यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह होगी तैनाती*
मणिमहेश यात्रा 2026 के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन एवं बचाव कार्यों को लेकर बुधवार को अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी भरमौर विकास शर्मा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल, पुलिस विभाग तथा पर्वतारोहण एवं बचाव दल के साथ वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। बैठक में यात्रा के दौरान संभावित आपदा, भू-स्खलन, पत्थर गिरने, अचानक खराब मौसम, मार्ग बंद होने तथा अन्य आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए की जा रही तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। साथ ही विभिन्न बचाव दलों की तैनाती, उनकी जिम्मेदारियों, आपसी समन्वय तथा त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था पर भी चर्चा की गई।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल एवं राज्य आपदा मोचन बल की टुकडियां हड़सर से मणिमहेश डल झील तक यात्रा मार्ग पर तैनात रहकर किसी भी आपदा या आपात स्थिति में खोज एवं बचाव कार्य, प्राथमिक सहायता तथा जरूरत पडऩे पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में सहयोग करेंगी। पर्वतारोहण एवं बचाव दल द्वारा दुर्गम एवं संवेदनशील क्षेत्रों में खोज एवं बचाव कार्य, कठिन परिस्थितियों में फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने तथा आवश्यकता पडऩे पर त्वरित रेस्क्यू आपरेशन में सहयोग प्रदान किया जाएगा। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी भरमौर विकास शर्मा ने सभी संबंधित विभागों एवं बचाव दलों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
Jitendra Kumar: *हिमाचल में हर महीने 68 लोग कर रहे सुसाइड, पारिवारिक समस्या, बीमारी, शादी संबंधित परेशानियां प्रमुख कारण*
राज्यवार जानकारी आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में आत्महत्या की घटनाओं में वर्ष 2024 के दौरान मामूली कमी दर्ज की गई है। हर वर्ष 800 से अधिक लोगों का आत्महत्या करना प्रदेश के लिए गंभीर सामाजिक चिंता का विषय बना हुआ है। वर्ष 2023 में प्रदेश में 818 आत्महत्याएं दर्ज की गई थीं, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 813 रह गई। इस तरह एक वर्ष के दौरान आत्महत्या के मामलों में पांच की कमी आई है। प्रतिशत के लिहाज से यह 0.6 फीसदी की गिरावट है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में हिमाचल में आत्महत्या के 813 मामले सामने आए। औसतन देखें तो प्रदेश में हर महीने करीब 68 आत्महत्याएं हुई। यानी लगभग हर दिन दो से अधिक लोगों ने आत्महत्या की। पारिवारिक समस्या, बीमारी और शादी संबंधित परेशानियां सुसाइड का प्रमुख कारण बन रही हैं।
पड़ोसी राज्यों के आंकड़े
प्रदेश में जहां 0.6 फीसदी की कमी दर्ज हुई, वहीं पड़ोसी राज्यों में भी अलग-अलग तस्वीर सामने आई। हरियाणा में 3,361 से 3,360 मामले हुए, यानी लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ। पंजाब में 2,298 से घटकर 2,229 मामले दर्ज हुए, जबकि राजस्थान में 5,552 से घटकर 5,530 मामले रहे।
कुछ राज्यों में उतार-चढ़ाव
छोटे राज्यों में प्रतिशत के लिहाज से काफी अधिक उतार-चढ़ाव दिखाई देता है। मणिपुर में 25 से बढक़र 42 मामले दर्ज हुए, जो करीब 68 फीसदी की वृद्धि है। इसके विपरीत नागालैंड में 36 से घटकर 11 मामले रह गए। अरुणाचल प्रदेश में 128 से घटकर 93 मामले दर्ज हुए, जबकि मेघालय में 220 से घटकर 200 मामले रहे।
राष्ट्रीय आंकड़ों में भी मामूली गिरावट
राज्यवार आंकड़ों में शामिल राज्यों को देखें तो वर्ष 2023 में कुल 1,68,884 आत्महत्याएं दर्ज हुई थीं, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या करीब 1.69 लाख रही और कुल स्तर पर मामूली बदलाव दर्ज किया गया। महाराष्ट्र में 2023 के 22,687 मामलों के मुकाबले 2024 में 22,174 मामले दर्ज हुए। कर्नाटक में 13,330 से घटकर 13,151, केरल में 10,972 से घटकर 10,865 और मध्य प्रदेश में 15,662 से घटकर 15,491 मामले रह गए। असम में 3,051 से बढक़र 3,203, बिहार में 926 से बढक़र 1,337, तमिलनाडु में 19,483 से बढक़र 19,565 और तेलंगाना में 10,580 से बढक़र 10,975 मामले दर्ज किए गए
Jitendra Kumar: *कैश कांड केस : जस्टिस यशवंत वर्मा पर तीनों आरोप साबित, महाभियोग की तैयारी*
जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड केस में संसदीय जांच समिति की रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा पर लगे तीनों आरोप सही पाए गए हैं। तीन सदस्यीय समिति ने कहा कि दिल्ली स्थित आधिकारिक आवासीय परिसर में बड़ी मात्रा में भारतीय करेंसी नोटों की मौजूदगी और उसके सोर्स या मालिकाना हक को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। रिपोर्ट में घटनास्थल पर पहुंचे पुलिस और फायर ऑफिसर की ओर से नकदी को जब्त और सुरक्षित नहीं करने को भी गंभीर चूक बताया गया है। इसके बाद समिति ने आगे कार्रवाई की सिफारिश की है। अब इसके बाद सामने आया है कि जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने को लेकर शीतकालीन सत्र में महाभियोग लाया जा सकता है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ का 1978 में दिया गया फैसला है कि जज का इस्तीफा देना ही उनका पद से हटना है, स्वीकार करने की आवश्यकता नहीं है। जस्टिस वर्मा इस साल अप्रैल में ही राष्ट्रपति को इस्तीफा भेज चुके हैं। इसके बावजूद उनका नाम इलाहाबाद हाई कोर्ट की सूची में है। ऐसे में यह बहस हो रही है कि जांच समिति की रिपोर्ट में उन्हें दोषी पाए जाने के बाद क्या उन्हें हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। यह अपनी तरह का ऐसा पहला मामला है जब जज के इस्तीफ़ा देने के बावजूद उनके खिलाफ जांच हुई और उनका नाम हाई कोर्ट के जजों की सूची में है।
Jeetu dehati: *खडग़े-नड्डा के बीच नोकझोंक, राज्यसभा में अमित शाह की उपस्थिति के मुद्दे पर तीखा संवाद*
राज्यसभा में बुधवार एक विधायी चर्चा के दौरान सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े और सदन के नेता जेपी नड्डा के बीच तीखा संवाद हुआ और कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्य शोर शराबा करते हुए सदन से बाहर चले गए। श्री खडग़े ने अमित शाह के नाम के समक्ष उल्लिखित सहकारिता क्षेत्र के विधेयक को प्रस्तुत किए जाने के समय उनकी सदन में अनुपस्थिति का मामला उठाना चाहा। इस पर श्री नड्डा ने तीखी आपत्ति जताते हुए कहा कि विपक्ष के नेता सदन को गुमराह कर रहे हैं और विपक्ष बहस से भागना चाहता है।
अपराह्न दो बजे के सत्र में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक 2026 पर सदन में चर्चा और अनुमोदन प्रस्ताव रखने के लिए सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल के खड़े होते ही कांग्रेस समेत कई अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। श्री खडग़े ने सदन में श्री शाह की लगातार अनुपस्थित पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कहा कि जिनके नाम से बिल है, किसी कारण से वह अबसेंट हैं तो वे चलेगा, लेकिन उनका रोज का धंधा हो गया है। उन्हें बुलाइए। उनके इस वक्तव्य को श्री हरिवंश ने खारिज करते हुए सदन के नेता श्री नड्डा को बोलने के लिए कहा। श्री नड्डा ने कहा कि वह सदन को गुमराह कर रहे हैं। आप सदन में बहस से भागते हैं।
Tej raftar news: *कश्मीरी पंडित डबल मर्डर केस 36 साल बाद खुला, एसआईए का शिकंजा, जम्मू समेत नौ जगह मारे छापे*
एसआईए का शिकंजा, जम्मू समेत नौ जगह मारे छापे
1990 में आतंकियों ने अपहरण के बाद मौत के घाट उतारे थे पिता-पुत्र
पेड़ से लटके मिले थे दोनों के शव
जम्मू-कश्मीर में 36 साल पुराने डबल मर्डर केस को दोबारा खोला गया है। इस मामले में घाटी में नौ जगहों पर छापामारी की गई। हालांकि, अभी तक इस दौरान हुई बरामदगी की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। बता दें कि कश्मीरी पंडित और कवि सर्वानंद कौल प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र कौल का साल 1990 में आतंकियों ने पहले अपहरण किया और बाद में बर्बर तरीके से उनकी हत्या कर दी थी। इसके बाद दोनों पिता-पुत्र के शव को एक पेड़ से लटका दिया था। इस घटना ने कश्मीरी पंडितों के बीच भय का माहौल बना दिया।
अब करीब 36 वर्षों के बाद जम्मू-कश्मीर की जांच एजेंसी (एसआईए) ने एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया है। आतंकवादियों और उनके सहयोगियों की तलाश में एसआईए की टीमों ने जम्मू-कश्मीर में कुल नौ स्थानों पर एक साथ छापामारी की। एसआईए द्वारा जम्मू-कश्मीर के तीन अलग-अलग क्षेत्रों में छापा
Tej raftar news: *टेंडर और बिलिंग से भुगतान तक, सब ऑनलाइन होगा, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जारी किए निर्देश*
प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत निर्माण से जुड़ी पूरी व्यवस्था होगी डिजिटल, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जारी किए निर्देश
प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत सडक़ों के निर्माण कार्यो से जुड़ी पूरी व्यवस्था डिजिटल होगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय 14 अगस्त से ओमास पोर्टल पर ई एमबी और बिलिंग प्रणाली को लागू करने जा रहा है। इसके लिए मंत्रालय की ओर से निर्देश भी जारी कर दिए है। बड़ी बात है कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद पीएमजीएसवाई के तहत होने वाले कार्यों के टेंडर से लेकर इसके भुगतान की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी। मंत्रालय ने इस व्यवस्था के लिए सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को एक नोडल अधिकारी भी तैनात करने को कहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 14 अगस्त से देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ओएमएमएएस पोर्टल पर ई-एमबी (इलेक्ट्रॉनिक मेजरमेंट बुक) और ई-बिलिंग प्रणाली लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद निर्माण कार्यों की एमबी, उसका रिकॉर्ड और ठेकेदारों के बिल एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तैयार किए जाएंगे। इस व्यवस्था में फील्ड इंजीनियर निर्माण स्थल पर किए गए कार्यों की एमबी सीधे ऑनलाइन दर्ज करेंगे।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पीएमजीएसवाई के तहत स्वीकृति के लिए भेजे जाने वाले प्रत्येक नए कार्य का बिल ऑफ क्वांटिटी (बीओक्यू) पहले ओमास पोर्टल में डिजिटल रूप से तैयार करना होगा। डीपीआर तैयार होने के बाद कार्य की मात्रा का अंतिम सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद यही बीओक्यू तकनीकी स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया, निर्माण कार्य, एमबी दर्ज करने और बिल बनाने का आधार बनेगा।
Jitendra Kumar: *जनगणना में लापरवाही न बरतें अधिकारी, मुख्य सचिव के निर्देश, बर्फबारी वाले क्षेत्रों में पहली से चलेगी मुहिम*
हिमाचल प्रदेश के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इन क्षेत्रों में एक सितंबर से 30 सितंबर तक जनसंख्या गणना का काम चलेगा। इससे पहले लोगों को खुद अपनी जनगणना की जानकारी दर्ज करने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए 17 से 31 अगस्त तक स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध रहेगा। वहीं, बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियों को लेकर बुधवार को शिमला में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें इन क्षेत्रों के उपायुक्त, नगर आयुक्त और प्रधान जनगणना अधिकारी सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में जनसंख्या गणना की तैयारियों, कर्मचारियों की तैनाती, प्रशिक्षण, तकनीकी व्यवस्था और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की विस्तार से समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनगणना के आंकड़ों की गुणवत्ता और सटीकता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। सम्मेलन में सचिव सामान्य प्रशासन एवं राज्य जनगणना समन्वयक, निदेशक जनगणना कार्य, हिमाच्छादित क्षेत्रों के उपायुक्त व नगर आयुक्त तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जनगणना निदेशक दीप शिखा शर्मा ने बताया कि प्रदेश में जनगणना का पहला चरण यानी मकानों की सूची और मकान गणना सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है। अब हिमाच्छादित क्षेत्रों में दूसरे चरण के तहत प्रत्येक परिवार और व्यक्ति से संबंधित जरूरी जानकारी जुटाई जाएगी।
Jitendra Kumar: *जेपीसी के पास भेजा गया एफसीआरए बिल, समिति में 21 सदस्य लोकसभा और 10 राज्यसभा के होंगे*
एफसीआरए संशोधन विधेयक को जेपीसी के पास भेजने की सहमति बन गई है। बिल को जेपीसी के पास भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया, जो पारित हो गया। प्रस्तावित जेपीसी (ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी) में कुल 31 सदस्य होंगे, जिनमें से 21 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से होंगे। प्रस्ताव में कहा गया कि विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 को सदनों की एक संयुक्त समिति को भेजा जाए, जिसमें लोकसभा के माननीय अध्यक्ष द्वारा मनोनीत इस सदन के 21 सदस्य और राज्यसभा के माननीय सभापति द्वारा मनोनीत 10 सदस्य होंगे। समिति को विधायी प्रावधानों की गहन जांच करने का काम सौंपा गया है और समिति को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक संसद को अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
हालांकि, विपक्ष ने सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध किया। कांग्रेस सांसद वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार अल्पसंख्यकों और एनजीओ को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। हमारी मांग है कि सरकार इस बिल को वापस ले। विपक्ष के आरोपों पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के किसी भी सदस्य को इस बिल में आपत्तिजनक कुछ बिंदु लगते हैं, तो जेपीसी में मत रख सकते हैं। इसमें उन्हें पर्याप्त समय मिलेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस विधेयक से किसी भी अल्पसंख्यक वर्ग को टारगेट नहीं किया जा रहा है। पूरे देश को सुरक्षित रखने के लिए नियम बना रहे हैं।
Jitendra Kumar: *मिल गई प्लास्टिक नोटों को मंजूरी, छपेंगे 2 अरब पॉलिमर नोट, जानिए कागज वाले नोट का क्या होगा*
क्या कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि जेब में या पर्स में रखा नोट बारिश में भीग गया हो या, बार-बार हाथों में घूमते-घूमते फट जाए या इतना गंदा हो जाए कि उसे संभालना भी मुश्किल लगे। फिर टेंशन ये कि ये गंदा फटा- पुराना नोट कोई लेगा भी या नहीं , लेकिन जल्द ही ऐसी परेशानियां बीते जमाने की बात हो सकती हैं, क्योंकि भारत में अब कागजी करेंसी की जगह प्लास्टिक यानी पॉलिमर नोटों की एंट्री की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार ने 10 और 20 रुपये के करीब 200 करोड़ पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में राज्यसभा में इसकी जानकारी दी। लेकिन सवाल ये है कि ये नोट आपके हाथ में कब आएंगे, इनमें ऐसा क्या खास होगा और क्या इनके आने से नकली नोटों पर भी लगाम लगेगी या नहीं… तो चलिए आज इसी पर पूरी बात करते हैं। सबसे पहले समझिए कि पॉलिमर नोटों का कॉन्सेप्ट भारत के लिए नया है, लेकिन दुनिया के कई देशों में इनका इस्तेमाल पहले से हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने जनवरी 1988 में सबसे पहले 10 डॉलर का पॉलिमर नोट जारी किया था, इसके बाद कई देशों ने इस तकनीक को अपनाया… जानकारी के मुताबिक, दुनियाभर के करीब 60 देशों में पॉलिमर नोट पूरी तरह या आंशिक रूप से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। पॉलिमर यानी प्लास्टिक नोट कागज की जगह एक खास तरह की पतली और लचीली प्लास्टिक सामग्री BOPP यानि बॉयएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन से बने करेंसी नोट होते हैं जो सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होती है।
हमारे देश में 10 और 20 रुपये के नोट सबसे ज्यादा हाथों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में बार-बार इस्तेमाल, नमी और पानी के संपर्क में आने से कागजी नोट जल्दी खराब हो जाते हैं।
Jitendra Kumar: *मानसून ब्रेक खत्म, आज से खुलेंगे स्कूल, 32 दिन बाद लौटेगी रौनक, रेगुलर लगेंगी कक्षाएं*
हिमाचल प्रदेश के ग्रीष्मकालीन स्कूलों में करीब 32 दिन बाद आज फिर रौनक लौटेगी। लंबे मानसून अवकाश के चलते 12 जुलाई से बंद चल रहे स्कूलों में अब नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने के साथ ही शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन के सामने विद्यार्थियों को दोबारा पढ़ाई के माहौल में लाने, छूटा हुआ पाठ्यक्रम पूरा करने और आगामी परीक्षाओं की तैयारी करवाने की बड़ी चुनौती रहेगी। स्कूलों में पहले चरण में विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर का आकलन कर कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त सहायता देने पर जोर रहेगा। लंबे अवकाश के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई की नियमितता प्रभावित हुई है।
ऐसे में शिक्षक कक्षाओं में पहले पढ़ाए गए पाठ्यक्रम की दोहराई करवाने के साथ उन विषयों और अध्यायों पर विशेष ध्यान देंगे, जिनमें विद्यार्थियों को अधिक परेशानी आ रही है। लंबी छुट्टियों के बाद स्कूलों में कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता देने की जरूरत रहेगी। शिक्षक विद्यार्थियों के स्तर का आकलन करने के बाद विषयवार दोहराई करवाएंगे। जिन विद्यार्थियों के कुछ अध्याय छूट गए हैं, उन्हें दोबारा पढ़ाया जाएगा, ताकि वे कक्षा के बाकी विद्यार्थियों के साथ पढ़ाई में आगे बढ़ सकें। कुल्लू जिला में भी विद्यार्थियों की लंबी छुट्टियां खत्म हो गई हैं। यहां 20 जुलाई से 12 अगस्त तक करीब 26 दिन का मानसून अवकाश रहा।
एग्जाम पर फोकस
स्कूलों में अब आगामी परीक्षाओं की तैयारियां भी तेज होंगी। शिक्षकों को निर्धारित समय में पाठ्यक्रम पूरा करवाने के साथ छात्रों की नियमित पढ़ाई, दोहराई और अभ्यास पर ध्यान देना होगा।
Jitendra Kumar: *श्रावण अष्टमी मेले आज से, 24 घंटे खुला रहेगा चिंतपूर्णी मंदिर, मैया को लगाए जाएंगे विशेष भोग*
उत्सव के लिए रंग-बिरंगे फूलों से सजने लगे मां के दरबार, मैया को लगाए जाएंगे विशेष भोग
प्रदेश के पांच शक्तिपीठों में 13 से 21 अगस्त तक श्रावण अष्टमी मेले का आयोजन किया जाएगा। श्रावण अष्टमी नवरात्र मेले के लिए मईया के मंदिर रंग-बिरंगे फूलों से सजने शुरू हो गए हैं। श्रावण अष्टमी नवरात्रों के दौरान प्रदेश के पांच शक्तिपीठों में मैया की विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। इसके अलावा मईया को विशेष व्यंजनों के भोग लगाए जाएंगे। प्रदेश के पांचों शक्तिपीठों में ब्रजेश्वरी देवी, ज्वालामुखी, नयनादेवी, चामुंडा देवी तथा छिन्नमस्तिका धाम चिंतपूर्णी में मईया के स्नान, श्रृंगार व आरती अलग-अलग समय तय किया गया है। श्रावण अष्टमी नवरात्र मेले के दौरान चिंतपूर्णी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे खुला रहेगा। साफ-सफाई के लिए रात्रि के दौरान मंदिर को केवल एक घंटे के लिए बंद किया जाएगा। दोपहर को मां के श्रृंगार व भोग इत्यादि के लिए भी मंदिर कुछ समय के लिए बंद रहेगा। चिंतपूर्णी मंदिर के बिरादरी सभा के प्रधान रविंद्र छिंदा ने बताया कि नवरात्र में मईया के दर्शनों के लिए मंदिर 24 घंटे खुला रहेगा। रात को 11 से 12 बजे तक केवल सफाई के लिए मंदिर बंद किया जाएगा। पुजारी ने बताया कि सुबह चार बजे मैयों के स्नान के बाद श्रृंगार किया जाएगा और मैया को आरती के साथ भोग लगाया जाएगा। दोपहर 12 से साढ़े 12 बजे तक मंदिर बंद रहेगा। सुबह सात से नौ बजे तक मंदिर में पुजारियों द्वारा प्रदेश सुख शांति के लिए हवन यज्ञ किया जाएगा।
वहीं नयनादेवी मंदिर नवरात्रोंं में रात 12 से दो बजे तक बंद किया जाएगा। इन दो घंटों में मैया का स्नान और श्रृंगार के बाद मैया की एक साथ चार आरतियां की जाएंगी।
Jeetu dehati: *हिमाचल में हर महीने 68 लोग कर रहे सुसाइड, पारिवारिक समस्या, बीमारी, शादी संबंधित परेशानियां प्रमुख कारण*
राज्यवार जानकारी आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में आत्महत्या की घटनाओं में वर्ष 2024 के दौरान मामूली कमी दर्ज की गई है। हर वर्ष 800 से अधिक लोगों का आत्महत्या करना प्रदेश के लिए गंभीर सामाजिक चिंता का विषय बना हुआ है। वर्ष 2023 में प्रदेश में 818 आत्महत्याएं दर्ज की गई थीं, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 813 रह गई। इस तरह एक वर्ष के दौरान आत्महत्या के मामलों में पांच की कमी आई है। प्रतिशत के लिहाज से यह 0.6 फीसदी की गिरावट है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में हिमाचल में आत्महत्या के 813 मामले सामने आए। औसतन देखें तो प्रदेश में हर महीने करीब 68 आत्महत्याएं हुई। यानी लगभग हर दिन दो से अधिक लोगों ने आत्महत्या की। पारिवारिक समस्या, बीमारी और शादी संबंधित परेशानियां सुसाइड का प्रमुख कारण बन रही हैं।
पड़ोसी राज्यों के आंकड़े
प्रदेश में जहां 0.6 फीसदी की कमी दर्ज हुई, वहीं पड़ोसी राज्यों में भी अलग-अलग तस्वीर सामने आई। हरियाणा में 3,361 से 3,360 मामले हुए, यानी लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ। पंजाब में 2,298 से घटकर 2,229 मामले दर्ज हुए, जबकि राजस्थान में 5,552 से घटकर 5,530 मामले रहे।
कुछ राज्यों में उतार-चढ़ाव
छोटे राज्यों में प्रतिशत के लिहाज से काफी अधिक उतार-चढ़ाव दिखाई देता है। मणिपुर में 25 से बढक़र 42 मामले दर्ज हुए, जो करीब 68 फीसदी की वृद्धि है। इसके विपरीत नागालैंड में 36 से घटकर 11 मामले रह गए। अरुणाचल प्रदेश में 128 से घटकर 93 मामले दर्ज हुए, जबकि मेघालय में 220 से घटकर 200 मामले रहे।
राष्ट्रीय आंकड़ों में भी मामूली गिरावट
राज्यवार आंकड़ों में शामिल राज्यों को देखें तो वर्ष 2023 में कुल 1,68,884 आत्महत्याएं दर्ज हुई थीं, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या करीब 1.69 लाख रही
Jeetu dehati: *रोजगार कार्यालय में पंजीकरण से पक्की नौकरी का अधिकार नहीं, हाईकोर्ट ने सीधी भर्ती का दावा किया खारिज*
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि रोजगार कार्यालय में केवल नाम दर्ज होने या पंजीकरण कराने मात्र से किसी भी उम्मीदवार को सरकारी नौकरी में सीधी भर्ती का पक्का अधिकार नहीं मिल जाता। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने पीईटी शिक्षक भर्ती मामले में सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखते हुए नौ अपीलाकर्ताओं की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि शिक्षा विभाग ने साल 1997 से फिजिकल एजुकेशन डिप्लोमा धारकों की कोई नियमित सीधी भर्ती नहीं की है। इसके बजाय आर एंड पी नियमों को ताक पर रखकर पीटीए और पैराटीचर नीतियों के तहत सैकड़ों नियुक्तियां कर दी गईं।
खंडपीठ ने अपने आदेश में साफ कहा कि अदालत केवल तभी आदेश जारी कर सकती है, जब नियमों के तहत किसी नागरिक का कानूनी अधिकार बनता हो। नियमों के अभाव में सीधी भर्ती का कोई पूर्ण अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि पीटीए और पैरा टीचरों के नियमितीकरण से सीधी भर्ती का कोटा इस कदर ओवरफ्लो हो चुका है कि यह अब पदोन्नति के कोटे को भी प्रभावित कर रहा है।
जमीन की देखरेख करने वाला केयरटेकर कभी नहीं बन सकता मालिक, हाई कोर्ट का फैसला
विधि
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जमीन और काश्तकारी विवाद से जुड़े एक बेहद पुराने मामले में महत्त्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संपत्ति की केवल लंबे समय तक देखरेख करने वाला केयरटेकर या नौकर, उस संपत्ति पर कभी भी मालिकाना हक या काश्तकारी अधिकार का दावा नहीं कर सकता। न्यायाधीश रोमेश वर्मा ने करीब 49 वर्षों से चल रहे इस कानूनी विवाद को समाप्त करते हुए
TRN Live: *हिमाचल में नशे से एचआईवी संक्रमण का खतरा बढ़ा, 2025-26 में 19 फीसदी मामले इंजेक्शन साझा करने से*
शिमला। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल
प्रदेश में नशे के बढ़ते चलन के साथ एचआईवी संक्रमण का खतरा भी गंभीर चिंता बनता जा रहा है। वर्ष 2025-26 में एचआईवी के 19 फीसदी मामले सूई साझा करने के कारण दर्ज हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर शिमला के होटल पीटरहॉफ में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने युवाओं से नशे और एचआईवी के खिलाफ सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। मंत्री ने कहा कि एचआईवी के खिलाफ हिमाचल देश में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। देश के सुरक्षित 15 जिलों में प्रदेश के किन्नौर, लाहुल-स्पीति और सोलन शामिल हैं, जबकि तीन अन्य जिला सक्षम श्रेणी में पहुंच चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र एड्स कार्यक्रम के 95-95-95 लक्ष्य को हासिल करने में हिमाचल देश में शीर्ष पर है।
प्रदेश में नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार उपलब्ध करवाने के लिए 17 ओपिओइड प्रतिस्थापन उपचार केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनमें 1023 मरीजों का उपचार चल रहा है। इसके अलावा 294 इंजेक्शन ड्रग उपयोगकर्ताओं को अस्पतालों के मनोरोग विभाग से जोडक़र उपचार दिया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि 1000 आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से पांच जिलों के 2440 गांवों में 2.86 लाख परिवारों को एचआईवी के प्रति जागरूक किया गया है। दो अक्तूबर, 2025 को प्रदेश की पंचायतों में एचआईवी मुक्त हिमाचल की शपथ दिलाई गई थी और अब तक करीब 25 लाख लोगों को इस अभियान से जोड़ा जा चुका है। जेलों में 11 हजार कैदियों को जागरूक किया गया, जबकि नौ हजार की एचआईवी जांच की जा चुकी है।
Tej raftar news: 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*⚜️ आज का राशिफल ⚜️*
*दिनांक : 13 अगस्त 2026*
🐐🐂💏💮🐅👩
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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आपको आज मध्यान तक धैर्य धारण करने की आवश्यकता है। मध्यान तक जोभी कार्य करेंगे उसमे धन अथवा समय बर्बाद होने की संभावना अधिक रहेगी आप भी जल्दी से जोखिम लेने के लिये तैयार नही रहेंगे लेकिन किसी के उकसावे में आकर अनुचित कदम उठा सकते है। आर्थिक कार्यो को आज टालना ही बेहतर रहेगा। मध्यान बाद से परिस्थिति में धीरे-धीरे सुधार आने लगेगा। कही से लाभ की संभावना जागेगी धन भी अकस्मात मिलने से हिम्मत बढ़ेगी लेकिन स्वभाव में चंचलता भी बढ़ने से निर्णय गलत होने की संभावना भी अधिक रहेगी। पारिवारिक वातावरण में संध्या बाद थोड़ी बहुत खटपट के बाद सुधार होगा। संतान के सहयोग एवं स्वयं के विवेक से सरकारी क्षेत्र के अधूरे कार्य आगे बढ़ेंगे। वायरल बुखार अथवा शल्य चिकित्सा के कारण धन व्यय हो सकता है।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज मध्यान तक का समय मानसिक रूप से अशांति वाला रहेगा। घर और कार्य क्षेत्र में तालमेल बैठाने में खासी परेशानी आएगी। घर का वातावरण भी उग्र रहेगा अपने मन की बात किसी से बांटने पर सहयोग मिलने की जगह मजाक बनाये जाने से मन अधिक दुखी होगा। आज आपका मन किसी अरिष्ट की आशंका से भयभीत भी रहेगा लेकिन ऐसा कुछ घटित हुआ भी तो आपको डरने की आवश्यकता नही दोपहर बाद से स्थित आपके पक्ष में बनने लगेगी आपका विरोध करने वालो को भी आपकी सहायता की आवश्यकता पड़ेगी। व्यवसायी वर्ग मोल।भाव मे समय खराब करेंगे जिसका प्रभाव आमदनी पर पड़ेगा। नौकरी करने वालो को काम।निकलने के लिये लालच दिया जाएगा परन्तु आज अनैतिक कर्म से बचे अन्यथा मान हानि निश्चित होगी। कफ अथवा खांसी से परेशानी हो सकती है।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज के दिन बीते दिन की तुलना में धैर्य कम रहेगा। जो भी कार्य करेंगे उसका परिणाम शीघ्र ना मिलने पर अधीर हो उठेंगे। जल्दबाजी में किये कार्य मे कुछ न कुछ नुक्स निकलने पर दोबारा करना पड़ेगा इसका ध्यान रहे। कार्य क्षेत्र पर भी आज धन पाने की लालसा में अनैतिक मार्ग अपना सकते है आरंभ में इससे लाभ ही होगा लेकिन अंत यहां भी निराश करेगा । सफेद वस्तु एवं सौन्दर्यप्रसाधन-साजसज्जा के कार्यो में निवेश भविष्य में लाभ दिला सकता है। व्यावसायिक एवं धार्मिक कारणों से यात्रा हो सकती है इसमे सामान का ख्याल रखे गम होने की आशंका है। अचल संपत्ति के कार्यो में धन फंसने पर आगे की योजना अधर में लटकेंगी। घरेलू वातावरण संध्या पश्चात उग्र होने की संभावना है विवेक से काम लें। चर्म रोग, अथवा जुखाम से परेशानी हो सकती है।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज दिन का अधिकांश समय समय खयाली पुलाव पकाने में व्यर्थ करेंगे। मन मे योजनाए बड़ी बड़ी बनाएंगे लेकिन इनको साकार करना सपना देखना जैसा रहेगा। धन एव सहयोग की कमी आज प्रत्येक कार्य मे बाधक बनेगी। आर्थिक विषयो में किसी अन्य के ऊपर निर्भर रहना पड़ेगा। बुद्धि विवेक के मामले में आप अन्य लोगो से अव्वल रहेंगे लेकिन व्यवहारिकता की कमी बने बनाये कार्यो को बिगाड़ सकती है। आज किसी से काम निकालने के लिये झूटी तारीफ एवं चापलूसी करनी ही पड़ेगी इसके बाद भी लाभ होने में संदेह ही रहेगा। घर मे माता अथवा किसी अन्य स्त्री वर्ग से अहम को लेकर वैचारिक मतभेद हो सकते है यहां स्वयं को छोटा मां लेने से कामनापूर्ति सहज हो जाएगा अन्यथा एक नई मुसीबत खड़ी कर लेंगे। मन मे लंबी यात्रा की योजना बनेगी पर धन की कमी के कारण टल सकती है। मानसिक भय को छोड़ सेहत लगभग ठीक ही रहेगी।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज के दिन आप मौज मस्ती के मूड में रहेंगे। मध्यान तक का समय कार्यो के प्रति लापरवाही में बीतेगा इसके बाद कोई आवश्यक कार्य पूर्ण करने में व्यस्त हो जाएंगे। आज आपका ध्यान कार्य करते समय भी मनोरंजन की तरफ भटकेगा जिससे कार्य क्षेत्र पर स्थिरता नही बन पाएगी। हंसी मजाक में सहकर्मियो एवं परिजनों को बेवजह परेशान करना आगे भारी पड़ेगा। पैतृक एवं पुराने कार्य से धन लाभ होगा लेकिन रुक नही पायेगा आज संचित धन में से भी खर्च करना पास सकता है। घर ने भाई बंधुओ से कम ही पटेगी एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप के किये तैयार रहेंगे। सार्वजनिक क्षेत्र पर आपकी छवि धनवान जैसी ही रहेगी लेकिन अंदर से इसके विपरीत अनुभव करेंगे। घर अथवा देव स्थल के धार्मिक कार्य मे मन मारकर सम्मिलित होना पड़ेगा। मौसम जनित बीमारी से सावधान रहें।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज भी आपका स्वभाव साथ वालो के लिये परेशानी खड़ी करेगा। बात बात में शक करने की आदत प्रेम संबंधों में खटास लाएगी। कार्य क्षेत्र पर आज भाग्य का साथ मिलने पर भी अधिकांश कार्य या सौदे अंत समय मे लटकेंगे अथवा कम लाभ में करने पड़ेंगे। धन की स्थिति में बीते दिन से सुधार आएगा लेकिन घरेलू एवं व्यावसायिक खर्च भी अन्य दिन से अधिक रहने के कारण बचत नही हो सकेगी। कोर्ट कचहरी के कार्य मे अतिरिक्त समय और धन का व्यय हो सकता है फिर भी परिणाम आशाजनक नही मिलने से क्रोध आएगा। अचल संपत्ति संबंधित कार्य आज ना करें बेकार की उलझन बढ़ेंगी। घरेलू वातावरण में शांति रहेगी लेकिन स्वार्थ की भावना प्रबल सहने के कारण आत्मीयता की कमी देखने को मिलेगी। सार्वजिनक क्षेत्र पर दिखावे के कारण सम्मान मिलेगा। पुराने रोग से दोबारा परेशानी हो सकती है।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपको लाभ के अवसर उपलब्ध कराएगा। कार्य व्यवसाय में लाभ कमाने के लिये सही गलत का विचार नही करेंगे किसी का टोकना अखरेगा। एक से अधिक कार्यो में भाग्य आजमाएंगे जिससे धन लाभ तो अवश्य और आवश्यकता से अधिक होगा लेकिन स्वभाव में दिखावे की प्रवृति रहने के कारण खर्च अनाप शनाप करेंगे जो आगे जाकर आर्थिक उलझनों का कारण बनेगा। कार्य क्षेत्र पर परिस्थित अनुसार स्वयं को ढाल लेंगे मीठा बोलकर काम सहजता से निकाल लेंगे। लेकिन घर परिवार में आचरण इसके विपरीत रहेगा। घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति बहस के बाद ही करेंगे। जमीन जायदाद के कार्यो से अवश्य लाभ होगा पर भागीदारी के कार्य ना करें। निकट समय के लिये यात्रा की योजना बनेगी इसके लिये धन व्यय भी करेंगे। किसी से कड़वी बात बोलने के कारण अपमानित हो सकते है। कुछ समय के लिये कमजोरी अनुभव होगी।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज के दिन आपका ध्यान उलझे घरेलू मामलों को निपटाने पर अधिक रहेगा सन्तानो के साथ घर के अन्य सदस्यों की समस्याओं का मिल बैठकर समाधन करेंगे। कार्य क्षेत्र पर आज धन और सम्मान दोनो मिलेगा लेकिन कुछ न कुछ कमी भी अनुभव होगी। काले वस्तु अथवा तेल के व्यवसाय से जुड़े लोगों को नए लाभ के अनुबन्ध मिलेंगे। नौकरी पेशाओ से आज लापरवाही में कोई गलती होने की संभावना है जिसका भुगतान लंबे समय तक किसी न किसी रूप में करना पड़ेगा। सरकारी क्षेत्र पर व्यवहारिकता बढ़ेगी लेकिन अपना कार्य निकालने की जगह अन्य के कार्यो को सुलझाने से स्वयं उलझ जाएंगे। कुछ समय के लिये कार्यो से ऊबन अनुभव होगी बाहर घूमने की योजना बनाएंगे लेकिन व्यर्थ की उलझनों के चलते टालनी पड़ेगी। सेहत आज छूट पुट बातो को छोड़ उत्तम रहेगी।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज के दिन आप धर्म कर्म के प्रति विशेष ध्यान देंगे मन मे आध्यात्मिक भाव और भय दोनो रहेंगे। दिन का आरंभिक भाग मानसिक र
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