दूसरों की कमियां खोजने से बेहतर है कि हम स्वयं को पहचानें। जो अपने मन को संभाल लेता है, उसके जीवन में सुख और शांति स्वयं आ जाते हैं।
सुदूर दक्षिण में किसी प्रतापी राजा का राज्य था राजा के तीन पुत्र थे, एक दिन राजा के मन में आया कि पुत्रों को कुछ ऐसी शिक्षा दी जाये कि समय आने पर वो राज-काज सम्भाल सकें
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐दो गांवों की सीख💐💐*
राजस्थान के एक छोटे से गांव भानपुर में अर्जुन नाम का युवक रहता था। वह मेहनती तो था, लेकिन उसकी एक आदत बहुत खराब थी। वह हमेशा दूसरों की चीजों पर नजर रखता था। किसके पास कितना धन है, किसके खेत बड़े हैं, किसके घर में क्या सामान है — यही बातें उसके मन में घूमती रहती थीं।
उसी समय पास के गांव रामगढ़ में मोहन नाम का युवक रहता था। मोहन साधारण जीवन जीता था, लेकिन बहुत समझदार और संतुष्ट स्वभाव का था। वह हमेशा कहता था, “मनुष्य को पहले खुद को समझना चाहिए, तभी जीवन सफल बनता है।”
एक दिन दोनों गांवों के लोगों ने पास के बड़े मेले में जाने का निश्चय किया। संयोग से अर्जुन और मोहन की मुलाकात रास्ते में हो गई। दोनों साथ-साथ यात्रा करने लगे। रास्ता लंबा था, इसलिए बातचीत भी खूब होने लगी।
अर्जुन मन ही मन सोच रहा था कि मोहन बहुत शांत रहता है, जरूर उसके पास कोई कीमती चीज होगी। उसने तय किया कि वह मौका मिलते ही उसकी पोटली की तलाशी लेगा।
रात को जब दोनों किसी पेड़ के नीचे आराम करते, अर्जुन चोरी-छिपे मोहन की गठरी टटोलता। लेकिन हर बार उसे कुछ नहीं मिलता। सात दिनों तक यात्रा चलती रही और अर्जुन रोज यही कोशिश करता रहा। वह हैरान था कि इतना शांत और निश्चिंत आदमी आखिर खाली हाथ कैसे यात्रा कर सकता है।
सातवें दिन मेला समाप्त हुआ और दोनों को अपने-अपने गांव लौटना था। विदा लेते समय अर्जुन से रहा नहीं गया। उसने मुस्कुराकर कहा,
“भाई मोहन, सच बताना। क्या तुम्हारे पास कोई कीमती चीज नहीं थी? मैंने पूरी यात्रा में कई बार तुम्हारी पोटली देखी, लेकिन कुछ नहीं मिला।”
मोहन हल्के से हंसा और बोला,
“मित्र, मेरे पास एक चांदी का सिक्कों से भरा थैला और एक बहुमूल्य हीरा था।”
अर्जुन चौंक गया।
“फिर मुझे मिला क्यों नहीं?”
मोहन ने शांत स्वर में कहा,
“क्योंकि जब भी मैं बाहर जाता था, मैं वह थैला और हीरा तुम्हारी ही पोटली में रख देता था। तुम हमेशा मेरी गठरी टटोलते रहे, लेकिन कभी अपनी पोटली नहीं देखी।”
यह सुनकर अर्जुन शर्म से सिर झुका कर खड़ा रह गया। उसे अपनी गलती समझ आ गई। वह हमेशा दूसरों में कमी और संपत्ति खोजता रहा, लेकिन कभी अपने भीतर झांकने की कोशिश नहीं की।
मोहन ने जाते-जाते कहा,
“मनुष्य की सबसे बड़ी भूल यही है कि वह दूसरों को परखने में जीवन लगा देता है और खुद को समझने का समय नहीं निकालता। जिस दिन इंसान अपनी कमियां पहचान लेता है, उसी दिन उसका जीवन बदल जाता है।”
उस दिन के बाद अर्जुन पूरी तरह बदल गया। उसने दूसरों से तुलना करना छोड़ दिया और अपने काम, अपने परिवार और अपने जीवन को बेहतर बनाने में लग गया। धीरे-धीरे वह अपने गांव का सबसे सम्मानित व्यक्ति बन गया।
*शिक्षा :*
दूसरों की कमियां खोजने से बेहतर है कि हम स्वयं को पहचानें।
जो अपने मन को संभाल लेता है, उसके जीवन में सुख और शांति स्वयं आ जाते हैं।
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
*🦚🙏‼️श्री गणेशाय नम:‼️🙏🦚*
*🌹🌺 ।। जय माता दी ।। 🌸💐*
,,*ॐ नमो वेंकटेशाय*,,
*रात्रि ■ कथा*
*!! तीन बातें !!*
सुदूर दक्षिण में किसी प्रतापी राजा का राज्य था राजा के तीन पुत्र थे, एक दिन राजा के मन में आया कि पुत्रों को कुछ ऐसी शिक्षा दी जाये कि समय आने पर वो राज-काज सम्भाल सकें
इसी विचार के साथ राजा ने सभी पुत्रों को दरबार में बुलाया और बोला, पुत्रों, हमारे राज्य में नाशपाती का कोई वृक्ष नहीं है, मैं चाहता हूँ तुम सब चार-चार महीने के अंतराल पर इस वृक्ष की तलाश में जाओ और पता लगाओ कि वो कैसा होता है ?
राजा की आज्ञा पाकर तीनों पुत्र बारी-बारी से गए और वापस लौट आये
सभी पुत्रों के लौट आने पर राजा ने पुनः सभी को दरबार में बुलाया और उस पेड़ के बारे में बताने को कहा
पहला पुत्र बोला, पिताजी वह पेड़ तो बिलकुल टेढ़ा-मेढ़ा, और सूखा हुआ था
नहीं-नहीं वो तो बिलकुल हरा-भरा था, लेकिन शायद उसमें कुछ कमी थी क्योंकि उस पर एक भी फल नहीं लगा था दूसरे पुत्र ने पहले को बीच में ही रोकते हुए कहा.
फिर तीसरा पुत्र बोला, भैया, लगता है आप भी कोई गलत पेड़ देख आये क्योंकि मैंने सचमुच नाशपाती का पेड़ देखा, वो बहुत ही शानदार था और फलों से लदा पड़ा था।
और तीनों पुत्र अपनी-अपनी बात को लेकर आपस में विवाद करने लगे।
तभी राजा अपने सिंघासन से उठे और बोले, पुत्रों, तुम्हे आपस में बहस करने की कोई आवश्यकता नहीं है, दरअसल तुम तीनो ही वृक्ष का सही वर्णन कर रहे हो मैंने जानबूझ कर तुम्हे अलग-अलग मौसम में वृक्ष खोजने भेजा था और तुमने जो देखा वो उस मौसम के अनुसार था।
मैं चाहता हूँ कि इस अनुभव के आधार पर तुम तीन बातों को गाँठ बाँध लो...
*पहली बात* किसी चीज के बारे में सही और पूर्ण जानकारी चाहिए तो तुम्हे उसे लम्बे समय तक देखना- परखना चाहिए फिर चाहे वो कोई व्यवसाय, विषय, वस्तु हो या फिर कोई व्यक्ति ही क्यों न हो।
*दूसरी बात* हर मौसम एक सा नहीं होता, जिस प्रकार वृक्ष मौसम के अनुसार सूखता, हरा-भरा या फलों से लदा रहता है उसी प्रकार ब्यवसाय तथा मनुष्य के जीवन में भी उतार चढाव आते रहते हैं, अतः अगर तुम कभी भी बुरे दौर से गुजर रहे हो तो अपनी हिम्मत और धैर्य बनाये रखो, समय अवश्य बदलता है।
*और तीसरी बात* अपनी बात को ही सही मान कर उस पर अड़े मत रहो, अपना दिमाग खोलो,और दूसरों के विचारों को भी जानो
*तात्पर्य:-*
यह संसार ज्ञान से भरा पड़ा है, चाह कर भी तुम अकेले सारा ज्ञान अर्जित नहीं कर सकते, इसलिए भ्रम की स्थिति में किसी ज्ञानी व्यक्ति से सलाह लेने में संकोच मत करो.
*`पुण्य लाभ के लिए इस पोस्ट को कृपया औरो को भी अवश्य भेजिए`*
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,, *`पंडित.संजय शास्त्री`* ,,
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*कुंडली विश्लेषण, हस्तरेखाविद*
*ASTROLOGY*
*नाम*
*जन्म तिथि*
*जन्म स्थान*
*जन्म का समय*
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*एक बार सेवा का मोका दे*
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*ज्योतिष से संबंधित एवं कुंडली, हस्तरेखा से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए संपर्क करें.*
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