बांग्लादेश चुनाव में उतरे कृष्णा और गोबिंदा, कट्टरपंथी जमात ने भी दिया टिकट, कुल कितने हिंदू उम्मीदवार?

Feb 11, 2026 - 21:24
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बांग्लादेश चुनाव में उतरे कृष्णा और गोबिंदा, कट्टरपंथी जमात ने भी दिया टिकट, कुल कितने हिंदू उम्मीदवार?

बांग्लादेश में कल यानी 12 फरवरी 2026 को 13वीं संसद (जातीय सांसद) चुनाव होने हैं. इस चुनाव में अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर हिंदुओं की सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी बड़ा मुद्दा बन गया है. देश में हिंदुओं पर हमले और हिंसा की घटनाएं रोजाना हो रही हैं, लेकिन इस बार 80 अल्पसंख्यक उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. इनमें से दो हिंदू चेहरे काफी चर्चा में हैं कृष्णा नंदी और गोबिंदा चंद्र प्रमाणिक. ये दोनों अलग-अलग रास्ते से चुनाव मैदान में हैं और हिंदू समुदाय की आवाज को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.

अल्पसंख्यक उम्मीदवारों में 10 महिलाएं शामिल

कुल 80 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों में से 68 को 22 राजनीतिक पार्टियों ने टिकट दिया है, जबकि 12 निर्दलीय हैं. इनमें 10 महिलाएं भी शामिल हैं. बांग्लादेश कम्युनिस्ट पार्टी (CPB) ने सबसे ज्यादा 17 अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे हैं. BNP ने 6 अल्पसंख्यक उम्मीदवार दिए हैं, जैसे गयेश्वर चंद्र रॉय (ढाका-3), निताई रॉय चौधरी (मागुरा-2), कपिल कृष्ण मंडल (बागेरहाट-1), सोमनाथ दे (बागेरहाट-4), दीपेन दीवान (रंगामाटी) और सचिन प्रू (बंदरबान). लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान कृष्णा और गोबिंदा पर है.

जमात के उम्मीदवार कृष्णा नंदी कौन हैं?

कृष्णा नंदी एक हिंदू व्यवसायी हैं और 2003 से जमात-ए-इस्लामी से जुड़े हुए हैं. वे खुलना-1 सीट से जमात के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. यह सीट हिंदू बहुल इलाकों दाकोप और बतियाघाटा को कवर करती है. जमात-ए-इस्लामी एक कट्टर इस्लामी पार्टी है. इस पार्टी ने इतिहास में पहली बार किसी अल्पसंख्यक को टिकट दिया है. कृष्णा नंदी दुमुरिया उपजिला में जमात की हिंदू कमिटी के अध्यक्ष भी हैं. उन्होंने एक रैली में कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो हिंदुओं को 'अपने भाई-बहनों' जैसा व्यवहार मिलेगा. यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जमात पर अक्सर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगता रहा है. उनकी उम्मीदवारी को जमात की अल्पसंख्यक समुदाय तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति माना जा रहा है. खुलना-1 में कुल 8 अल्पसंख्यक उम्मीदवार हैं, जिसमें कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य पार्टियों के लोग भी शामिल हैं.

निर्दलीय उम्मीदवार गोबिंदा कौन हैं?

गोबिंदा चंद्र प्रमाणिक बांग्लादेश नेशनल हिंदू महाजोत के महासचिव हैं. वे गोपालगंज-3 से निर्दलीय उम्मीदवार हैं. यह सीट शेख हसीना के जन्मस्थान के करीब है, जिसमें कोटालीपाड़ा और टुंगीपाड़ा शामिल हैं. यहां कुल मतदाता करीब 3.08 लाख हैं और लगभग 80 प्रतिशत अल्पसंख्यक हैं. गोबिंदा का नामांकन पहले रिजेक्ट हो गया था, लेकिन चुनाव आयोग में अपील करने के बाद बहाल हो गया. वे हिंदू समुदाय की सुरक्षा और अधिकारों के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं. गोबिंदा ने कहा कि मतदान के दिन सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है. उनकी निर्दलीय लड़ाई हिंदू महाजोत की ताकत दिखाती है, जो हिंदू राजनीतिक संगठन है.

2026 के चुनाव बांग्लादेश के लिए खास क्यों?

यह चुनाव इसलिए खास है क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोका गया है. उसकी रजिस्ट्रेशन सस्पेंड है और गतिविधियों पर पाबंदी है. कुल 60 पार्टियां चुनाव में हैं. हिंदू समुदाय, जो देश की आबादी का 8-9 प्रतिशत है, रोजाना हिंसा का सामना कर रहा है. ऐसे में ये दो उम्मीदवार अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व की उम्मीद जगाते हैं. कृष्णा नंदी की जमात से जुड़ाव और गोबिंदा की निर्दलीय लड़ाई दोनों अलग-अलग रास्ते दिखाते हैं. एक कट्टर पार्टी से समझौता, दूसरा स्वतंत्र आवाज. वहीं, चुनाव प्रचार कल सुबह खत्म हो गया है. मतदान कल होगा और नतीजे उसी दिन आएंगे. हिंदू समुदाय में चिंता है कि हिंसा बढ़ सकती है, लेकिन ये उम्मीदवार दिखाते हैं कि अल्पसंख्यक राजनीति में सक्रिय हो रहे हैं.

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला