कोई देश कैसे बनता है संयुक्त राष्ट्र का स्थायी सदस्य, जानें भारत की राह में कितने रोड़े?
दुनिया की सबसे ताकतवर मेज पर एक कुर्सी खाली नहीं है, लेकिन उस पर बैठने की चाह रखने वालों की कतार लंबी है. भारत भी वर्षों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट का दावेदार है. हाल ही में चीन की ओर से भारत की दावेदारी को समझने और सम्मान करने की बात ने नई चर्चा छेड़ दी है कि क्या यह सच में बदलता हुआ रुख है या सिर्फ कूटनीतिक बयान? और आखिर कोई देश यूएन का स्थायी सदस्य बनता कैसे है?
स्थायी सदस्य बनने का असली नियम क्या है?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस समय 15 सदस्य हैं. इनमें 5 देश स्थायी सदस्य हैं — अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन. इन्हें P5 कहा जाता है और इनके पास वीटो पावर है, यानी ये किसी भी बड़े प्रस्ताव को अकेले रोक सकते हैं. अगर किसी नए देश को स्थायी सदस्य बनाना हो तो संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन करना पड़ता है.
चार्टर के अनुच्छेद 108 के अनुसार, इसके लिए महासभा के कम से कम दो-तिहाई सदस्य देशों का समर्थन जरूरी है. इतना ही नहीं, मौजूदा पांचों स्थायी सदस्यों को भी इस संशोधन को मंजूरी देनी होती है. यानी अगर P5 में से एक भी देश विरोध कर दे, तो मामला रुक सकता है. यह प्रक्रिया सिर्फ वोटिंग भर नहीं है, बल्कि लंबी कूटनीतिक बातचीत और वैश्विक सहमति का मामला है.
चीन का बदला हुआ बयान क्यों अहम?
हाल में चीन के कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा झाओक्सू ने कहा कि चीन भारत की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की आकांक्षा को समझता और सम्मान करता है. यह बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि पहले चीन अक्सर भारत की दावेदारी पर खुलकर समर्थन नहीं देता था. हालांकि सम्मान और समर्थन में फर्क होता है. अब तक चीन ने औपचारिक रूप से भारत की स्थायी सदस्यता के लिए स्पष्ट हां नहीं कही है. इसलिए यह देखना होगा कि आगे चीन का रुख व्यवहार में कितना बदलता है.
भारत की दावेदारी कितनी मजबूत?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, 1.4 अरब से ज्यादा आबादी वाला देश है और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भी है. भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भी लंबे समय से बड़ी भूमिका निभाता रहा है. यही वजह है कि अमेरिका, फ्रांस और रूस जैसे देश खुले तौर पर भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन कर चुके हैं. ब्रिटेन भी कई बार समर्थन जता चुका है.
भारत जर्मनी, जापान और ब्राजील के साथ G4 समूह का हिस्सा है. यह समूह सुरक्षा परिषद में सुधार और नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने की मांग करता है.
राह में सबसे बड़े रोड़े क्या?
सबसे बड़ा रोड़ा वीटो पावर है. जब तक मौजूदा पांचों स्थायी सदस्य सहमत नहीं होंगे, तब तक चार्टर में बदलाव संभव नहीं है. चीन के साथ भारत के रिश्तों में सीमा विवाद और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे भी असर डालते हैं. इसके अलावा यूनाइटेड फॉर कंसेंसस नाम का एक समूह है, जिसमें पाकिस्तान, इटली, अर्जेंटीना और मैक्सिको जैसे देश शामिल हैं. यह समूह स्थायी सीटें बढ़ाने के बजाय अस्थायी सीटों की संख्या बढ़ाने की वकालत करता है. पाकिस्तान खुलकर भारत की स्थायी सदस्यता का विरोध करता रहा है.
एक और चुनौती यह है कि अगर नए देश स्थायी सदस्य बनते हैं, तो क्या उन्हें भी वीटो मिलेगा? इस सवाल पर अभी तक वैश्विक सहमति नहीं बन पाई है.
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