रामपुर CRPF कैंप आतंकी हमले पर इलाहाबाद HC के फैसले को यूपी सरकार ने दी चुनौती, SC करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार की उस याचिका पर बुधवार (11 फरवरी, 2026) को सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी गई है. इस फैसले में साल 2007 के रामपुर सीआरपीएफ शिविर आतंकी हमले के मामले में चार आरोपियों को मौत की सजा और एक अन्य की आजीवन कारावास की सजा निरस्त कर दी गई थी.
रामपुर स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के कैंप पर 31 दिसंबर 2007 की रात को हुए हमले में सीआरपीएफ के आठ जवान मारे गए थे और पांच घायल हो गए थे. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राज्य सरकार की याचिका पर आरोपियों को नोटिस जारी किये और मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की.
पांचों आरोपियों की ओर से अधिवक्ता एम एस खान पेश हुए. राज्य सरकार ने पिछले साल 29 अक्टूबर को हाईकोर्ट की ओर से दिए गए फैसले को चुनौती दी है. हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को खारिज कर दिया था, जिसमें इस मामले में चार लोगों को मृत्युदंड और एक अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.
हाईकोर्ट ने मोहम्मद शरीफ, सबाउद्दीन, इमरान शहजाद, मोहम्मद फारूक और जंग बहादुर खान को हत्या और अन्य गंभीर आरोपों से यह कहकर बरी कर दिया था कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ मुख्य अपराध के मामले को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा. हालांकि, कोर्ट ने जंग बहादुर खान समेत पांचों को शस्त्र अधिनियम की धारा 25 (1-ए) के तहत दोषी पाया और उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. जंग बहादुर खान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.
हाईकोर्ट ने कहा था, 'मामले का निस्तारण करने से पहले, हम निश्चित रूप से यह उल्लेख करना चाहेंगे कि यदि जांच और अभियोजन अधिक प्रशिक्षित पुलिस द्वारा किया गया होता तो इस मामले का परिणाम अलग होता.' अदालत ने कहा था कि जांच की खामियों के कारण अंततः आरोपियों को बरी कर दिया गया.
हाईकोर्ट ने कहा था, 'मोहम्मद शरीफ; सबाउद्दीन; इमरान शहजाद और मोहम्मद फारूक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 और सहपठित धारा 149 के तहत मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी और प्रत्येक दोषी पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था. इन सभी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया गया है.'
कोर्ट ने कहा, 'जंग बहादुर खान को आईपीसी की धारा 302 और सहपठित धारा 149 तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी और 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था, उसे भी बरी कर दिया गया है.' हाईकोर्ट ने पांचों दोषियों पर शस्त्र अधिनियम के तहत किए गए अपराध के लिए एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था. अभियुक्तों ने रामपुर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की ओर से एक नवंबर, 2019 और दो नवंबर, 2019 को पारित फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी.
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