US Iran War: मिडिल-ईस्ट में महायुद्ध की आहट! 50 हजार US सैनिकों की तैनाती, क्या ट्रंप करने वाले हैं सर्जिकल स्ट्राइक?
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब और ज्यादा खतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है. दावा किया जा रहा है कि अमेरिका सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप मिडिल ईस्ट में ग्राउंड ऑपरेशन के लिए 50 हजार सैनिकों की तैनाती कर सकते हैं. वे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास के द्वीपों को निशाना बना सकते हैं.
अमेरिकी अखबार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने बड़ा खुलासा करते हुए जानकारी दी है की ईरान के खिलाफ ऑपरेशन करने के लिए इस समय अमेरिका के 50 हज़ार से ज़्यादा थल सैनिक और कमांडो मध्य पूर्व में पहुंच चुके हैं. ऐसे में इस बात की संभावना जतायी जा रही है कि अमेरिका खर्ग आइलैंड पर कब्ज़ा करने के लिए अपने थल सैनिक उतार सकता है.
एबीपी न्यूज़ के साथ बातचीत करते हुए रक्षा विशेषज्ञ कर्नल तेज टिक्कू (रिटायर्ड) ने कहा कि जिस तरह अमेरिका के 50 हज़ार के आसपास थल सैनिक मध्य एशिया में मौजूद हैं, ऐसे में ये इस बात का बड़ा संकेत है कि अमेरिका ईरान के खर्ग आइलैंड के अलावा स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ के आसपास स्थित लवण आइलैंड, हेंड्रोबी आइलैंड, हेंगम आइलैंड और क़िस्म पर अपने थल सैनिक उतार सकता है क्योंकि अमेरिका लगातार दावा कर रहा है कि वो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को व्यापार के लिए खुलवाना चाहता है.
ट्रंप मिडिल ईस्ट में तैनात कर सकते हैं 50 हजार सैनिक
कर्नल तेज टिक्कू (रिटायर्ड) के मुताबिक इस बात की संभावना बेहद कम है कि इन सैनिकों का प्रयोग अमेरिका इराक़ या फिर कुवैत जैसे करे, जहां उसकी सेना के कई कोर देश के भीतर मैदान पर उतरे थे, लेकिन हां 50 हज़ार सैनिकों से ना सिर्फ़ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास आइलैंड अमेरिका अपने थल सैनिक तैनात कर सकता है और साथ में अमेरिका किसी न्यूक्लियर प्लांट के पास पारा ड्रॉपिंग करके अपने सैनिकों को ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम लेने के लिए भेज सकता है जहाँ पर अमेरिकी कमांडो जैसे सील कमांडो ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम लेकर कुछ घंटों में ऑपरेशन को अंजाम देकर वापस चले जाएं.
क्या ग्राउंड ऑपरेशन में हिस्सा नहीं लेगा इजरायल
इजराइली मीडिया ने दावा किया कि ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका के ग्राउंड ऑपरेशन में इजरायल अपने थल सैनिक नहीं उतारेगा. इस दावे के बाद कयास लगाए जाने लगे हैं कि कुछ दिन पहले खबर आई थी कि इजरायली सेना में सैनिकों की कमी है ऐसे में नेतन्याहू थल सैनिक भेजने से डर गए हैं, हालांकि तेज टिक्कू इस दावे से इत्तेफाक नहीं रखते और उनके मुताबिक जब भी दो देश मिलकर युद्ध लड़ते हैं तो हर देश अपनी अलग अलग जिम्मेदारी लेता है.
ऐसे में ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल के संयुक्त युद्ध में अमेरिका ने थल सैनिक की जिम्मेदारी ली है ऐसे में डरने की बात इजराइल के खिलाफ राजनैतिक प्रोपगैंडा है, रही बात सौनिकों की कमी की तो रिज़र्व फोर्स मिलकर इजराइल के पास कुल साढ़े 4 लाख सैनिक ही हैं, ऐसे में जिस तरह से इजराइल 3.5 फ्रंट जंग लड़ता है तो उसके लिए अपने सैनिक भेजना ख़ुद की सुरक्षा पर ख़तरा डालना होगा जो हमास, हिजबुल्लाह से उसे है.
अमेरिका को नए बेस बनाने के लिए क्यों बोल रहा इजरायल
जिस तरह से दावा किया जा रहा है कि इजरायल ने अमेरिका को अपने यहां नए बेस बनाने और खाड़ी के बाकी देशों के बेस अपने यहां शिफ्ट करने के लिए कहा है, इस पर रक्षा विशेषज्ञ कर्नल तेज टिक्कू (रिटायर्ड) ने कहा, अगर इजराइल से बेस शिफ्ट करने को कहा है तो ये प्रैक्टिकली संभव नहीं है, क्योंकि अमेरिकी सेना के कई बड़े कोर अरब देशों जैसे बहरीन, कतर, सऊदी अरब में हैं, जिन्हें अमेरिका कभी शिफ्ट नहीं करेगा, हां क्योंकि इजराइल अपने देश में आयरन डोम को आने वाले 6-8 सालों में सशक्त कर रहा है, जिससे दुश्मन की एक भी मिसाइल इजराइल में टारगेट को ना लगे.
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