रुपया डॉलर के मुकाबले सबसे कमजोर:पहली बार 1 डॉलर ₹95.22 का हुआ; मोबाइल, सोना, तेल, विदेशी सामान खरीदना महंगा
ईरान जंग की वजह से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज यानी 30 मार्च को पहली बार 95 के पार पहुंच गया। कारोबार के दौरान ये 95.22 के सबसे निचले स्तर पर गिर गया। हालांकि बाद में ये थोड़ा संभला और कारोबार खत्म होने पर 94.78 पर बंद हुआ। यह पिछले बंद भाव 94.85 के मुकाबले डॉलर के सामने 7 पैसे की मामूली मजबूती है। रुपए की कमजोरी का असर आम आदमी पर भी होगा। इससे विदेशों से इम्पोर्ट होने वाले सामान जैसे मोबाइल, सोना-चांदी, कच्चा तेल खरीदना महंगा हो जाएगा। इससे महंगाई बढ़ेगी। भास्कर कार्टूनिस्ट चंद्रशेखर हाड़ा और मंसूर नकवी की नजर से… रुपए की गिरावट के असर को 10 सवाल-जवाब में समझें… सवाल 1: रुपए में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है? जवाब: इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है। खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिसके लिए डॉलर में पेमेंट करना पड़ता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हो गया। सवाल 2: रुपए में इस वित्त वर्ष में कितनी गिरावट आई है? जवाब: एक महीने में रुपया करीब 4% गिरा है। वहीं इस वित्त वर्ष में रुपया 10% से ज्यादा टूट चुका है। सवाल 3: विदेशी निवेशकों (FIIs) का इसमें क्या रोल है? जवाब: विदेशी निवेशकों ने मार्च में अब तक शेयर बाजार से करीब 1.15 लाख करोड़ रुपए निकाल लिए हैं। युद्ध और अनिश्चितता के डर से निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों के बजाय अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश कर रहे हैं। इस भारी बिकवाली ने रुपए पर दबाव बढ़ा दिया है। सवाल 4: 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के तनाव का रुपए से क्या लेना-देना है? जवाब: इस समुद्री रास्ते से दुनिया का 20% और भारत का आधा तेल गुजरता है। युद्ध के कारण सप्लाई रुकने की आशंका है। जानकारों के मुताबिक, जब तक यहां स्थिति साफ नहीं होती, रुपए में अस्थिरता बनी रहेगी। सवाल 5: क्या रिजर्व बैंक इस गिरावट को रोकने के लिए कुछ कर रहा है? जवाब: हां, RBI ने बैंकों के लिए रातभर डॉलर जमा रखने की सीमा घटाकर 100 मिलियन डॉलर फिक्स कर दी है। इसका असर यह होगा कि बैंकों को अपना एक्स्ट्रा डॉलर स्टॉक बाजार में बेचना पड़ेगा। इससे डॉलर की सप्लाई बढ़ेगी और रुपया मजबूत होगा। सवाल 6: क्या इससे देश की जीडीपी ग्रोथ पर भी असर पड़ेगा? जवाब: बिल्कुल। अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि एनर्जी की ऊंची कीमतें भारत की विकास दर को कम कर सकती हैं। एनर्जी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी महंगाई को बढ़ाएगी और भारत की ग्रोथ को नुकसान पहुंचाएगी। ब्याज दरों में कटौती करना भी मुश्किल हो जाएगा। सवाल 7: रुपया कमजोर होने से आम आदमी की जेब पर क्या असर पड़ेगा? जवाब: रुपया कमजोर होने से भारत के लिए आयात महंगा हो जाएगा। क्रूड ऑयल जैसी चीजों के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। इसके अलावा विदेश से इंपोर्ट किए जाने वाले मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान भी महंगे होंगे। विदेश में पढ़ाई महंगी हो जाएगी। सवाल 8: क्या रुपए की गिरावट से किसी को फायदा भी होता है? जवाब: जी हां, रुपया कमजोर होने से निर्यातकों को फायदा होता है। आईटी सेक्टर, फार्मा और कपड़ा उद्योग की कंपनियों को अपनी सेवाओं या उत्पादों के बदले डॉलर में भुगतान मिलता है। जब वे उन डॉलर्स को रुपए में बदलते हैं, तो उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा रुपए मिलते हैं। सवाल 9. आने वाले दिनों में रुपए की चाल कैसी रह सकती है? जवाब: मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें 110-115 डॉलर के ऊपर बनी रहेंगी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहेगी, रुपया कमजोर बना रहेगा। यदि ग्लोबल सेंटीमेंट में सुधार नहीं हुआ, तो रुपया 98 के स्तर को भी छू सकता है। सवाल 10: करेंसी की कीमत कैसे तय होती है? जवाब: किसी भी देश की करेंसी की कीमत मुख्य रूप से इंटरनेशनल मार्केट में उसकी 'डिमांड और सप्लाई' के आधार पर तय होती है। अगर भारत को विदेशों से ज्यादा सामान जैसे कच्चा तेल मंगाना है, तो भुगतान के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत होगी। डॉलर की मांग बढ़ते ही वह महंगा हो जाएगा और रुपया गिर जाएगा। इसके अलावा, देश की महंगाई दर, ब्याज दरें और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी करेंसी की वैल्यू तय करते हैं। अगर भारत में ब्याज दरें अच्छी हैं और अर्थव्यवस्था स्थिर है, तो विदेशी निवेशक यहां डॉलर लेकर आएंगे, जिससे डॉलर की सप्लाई बढ़ेगी और रुपया मजबूत होगा। सरल शब्दों में, जिस करेंसी की दुनिया में मांग ज्यादा और उपलब्धता कम होगी, उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होगी। --------------------- ये खबर भी पढ़ें… बैंक अपने पास 100-मिलियन डॉलर से ज्यादा नहीं रख सकेंगे: रुपए में लगातार गिरावट को रोकने के लिए RBI का निर्देश, इससे विदेशी सामान सस्ते होंगे RBI ने निर्देश दिया है कि बैंक अब हर दिन अपने पास 100 मिलियन डॉलर (करीब 950 करोड़ रुपए) से ज्यादा नहीं रख सकेंगे। इससे पहले बैंक हर दिन 300 से 500 मिलियन डॉलर (2,845-4,743 करोड़ रुपए) होल्ड कर रहे थे। फॉरेक्स एनालिस्ट के मुताबिक, निर्देश का असर यह होगा कि बैंक अब उनके पास मौजूद एक्स्ट्रा डॉलर को मार्केट में बेचेंगे तो इससे रुपया मजबूत होगा। जिससे विदेशी सामान खरीदना, विदेश में पढ़ना और घूमना सस्ता हो सकता है। इसके अलावा मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स भी सस्ते हो सकते हैं। RBI के यह निर्देश जारी करने के एक दिन पहले ही रुपया डॉलर के मुकाबले ₹94.59 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा है। पूरी खबर पढ़ें…
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