यूपी बजट पर अलग-अलग राय:छात्र संगठनों ने उठाए रोजगार-भत्ता और पेपर लीक के मुद्दे ,किसानों ने बताया विकास की ओर बढ़ता कदम
प्रदेश सरकार के हालिया बजट को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने रोजगार, शिक्षा और कृषि से जुड़े मुद्दों पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं किसान नेताओं और उद्योग जगत ने बजट को संतुलित और विकास को गति देने वाला बताया है। समाजवादी छात्र सभा के राष्ट्रीय महासचिव बाबर चौहान खरदौनी ने बजट पर असंतोष जताते हुए कहा कि युवाओं को रोजगार मिलने तक निश्चित मासिक भत्ते की उम्मीद थी, लेकिन बजट में बेरोजगारी भत्ते को लेकर कोई प्रावधान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं से छात्र लगातार परेशान हैं और सख्त कानून व त्वरित निवारण प्रणाली की मांग कर रहे थे, लेकिन बजट में इसके लिए कोई ठोस वित्तीय खाका नजर नहीं आया। आउटसोर्सिंग और संविदा पर कार्यरत युवाओं के लिए न्यूनतम मानदेय तय करने की मांग भी अधूरी रही। बाबर चौहान ने कृषि उपकरणों से जीएसटी हटाने और सिंचाई के लिए पूरी तरह मुफ्त बिजली देने के वादे पर भी स्पष्टता न होने की बात कही। उन्होंने सवाल उठाया की , “हर साल बड़े ऐलान होते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सन्नाटा क्यों है? जनता इंतजार में है, जवाब कौन देगा?” वहीं किसान नेता रवि भारत चिकारा ने प्रदेश सरकार के बजट को किसानों, युवाओं, व्यापारियों और नौकरीपेशा वर्ग के लिए सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट विभिन्न वर्गों के हितों का ध्यान रखते हुए प्रदेश के विकास को नई दिशा देगा। परतापुर इंडस्ट्रियल एस्टेट मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष निपुण जैन ने ₹9,12,696 करोड़ के ऐतिहासिक बजट का स्वागत करते हुए इसे औद्योगिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र को तकनीकी उन्नयन, निर्यात संवर्धन और वित्तीय मजबूती के सकारात्मक संकेत मिले हैं। औद्योगिक अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास और क्षेत्रीय उत्पादों को बढ़ावा देने वाली योजनाएं लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए विस्तार के अवसर लेकर आएंगी। “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” जैसी पहलों को मजबूती मिलना पारंपरिक उद्योगों के लिए उत्साहजनक बताया गया। हालांकि, उन्होंने कच्चे माल पर कर राहत, सस्ती कार्यशील पूंजी और लंबित भुगतानों पर और ठोस प्रावधान की अपेक्षा जताई। आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व मेरठ जिलाध्यक्ष अंकुश चौधरी ने बजट को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कृषि और सिंचाई के लिए ₹21,340 करोड़ का प्रावधान किसानों की उपेक्षा दर्शाता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब बजट ₹8.33 से ₹9 लाख करोड़ के बीच है, तो प्रदेश के कर्ज बोझ पर स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही। चौधरी ने आरोप लगाया कि बुनियादी ढांचे के नाम पर इवेंट मैनेजमेंट किया जा रहा है, जबकि महंगाई और कानून व्यवस्था से जनता परेशान है। उन्होंने कहा, “यह बजट जनहित का नहीं, बल्कि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाला है।”
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