Delimitation Bill 2026: 'मैं चाहता हूं, बंगाल भी कश्मीर बने', आगा सैयद रुहुल्लाह ऐसा क्या बोले? सीट से खड़े हो गए अमित शाह
लोकसभा में परिसीमन बिल 2026 पर चर्चा के दौरान जम्मू-कश्मीर से सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने केंद्र सरकार पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि इस बिल से देश में संतुलन बिगड़ सकता है और छोटे राज्यों, खासकर जम्मू-कश्मीर जैसे इलाकों की आवाज कमजोर हो सकती है.
मेहदी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें डर है कि इस परिसीमन के बाद कुछ बड़े राज्य ही पूरे देश के फैसले लेने लगेंगे. उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे बड़े राज्यों के पास 400 से ज्यादा सीटें हो जाएंगी कि वे अकेले ही छोटे राज्यों पर फैसले थोप सकते हैं. उन्होंने कहा कि इससे संसद में बराबरी का संतुलन खत्म हो जाएगा और छोटे राज्यों की राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी.
हम लाचार हैं- सैयद रुहुल्ला मेहदी
सैयद रुहुल्ला मेहदी ने कहा कि हम लाचार हैं. हमने जो 2019 में देखा इस डीलिमिटेशन के बाद वो प्रोपोर्शन और ज्यादा खराब होगा. उसकी लाठी जो है, वो साउथ पे भी बरसेगी. बंगाल पे भी बरसेगी, नॉर्थ ईस्ट पे भी बरसेगी और मैं खुश हूं ये सारा साउथ कश्मीर बने. ये बंगाल कश्मीर बने. ये नॉर्थ ईस्ट कश्मीर बने और इनको पता चले कि कश्मीर के साथ कैसी ज्यादतियां की गईं. उनकी इन बातों पर गृह मंत्री अमित शाह ने आपत्ति जताई और सदन में दोनों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली. अमित शाह ने बोला ये क्या बोल रहे हो.
आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी का आरोप
मेहदी ने यह भी आरोप लगाया कि परिसीमन के नाम पर जेरीमेंडरिंग की जा सकती है, यानी चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं इस तरह बदली जा सकती हैं, जिससे कुछ खास वर्ग या पार्टियों को फायदा मिले. मेहदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले भी ऐसा अनुभव हो चुका है, जहां आबादी के अनुपात को इस तरह बदला गया कि एक समुदाय का प्रभाव कम हो गया. मेहदी ने कहा कि इससे अल्पसंख्यकों की राजनीतिक ताकत घट सकती है और उनके वोट की कीमत भी कम हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि 1947 में जब जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा बना था, तब कुछ अधिकार और सुरक्षा की बातें तय की गई थीं, लेकिन धीरे-धीरे वे खत्म होती जा रही हैं.
धारा 370 हटाए जाने का जिक्र
मेहदी ने 2019 में धारा 370 हटाए जाने का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय भी जम्मू-कश्मीर की सहमति नहीं ली गई थी. उनका कहना था कि संसद ही एक ऐसा मंच है जहां जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन अगर संसद में ही उनका प्रतिनिधित्व कमजोर हो जाएगा तो उनकी आवाज कौन सुनेगा. मेहदी ने यह भी कहा कि पहले से ही संसद में सीटों का संतुलन उत्तर भारत की ओर ज्यादा झुका हुआ है और अगर नया परिसीमन हुआ तो यह असंतुलन और बढ़ जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि इसका असर सिर्फ कश्मीर ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत, बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों पर भी पड़ेगा.
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