Iran US War: इज़राइल राजदूत ने बताया 3-पॉइंट प्लान, ईरान पर हमला इसी के तहत
भारत में इज़राइल के राजदूत रूवेन अजार ने अमेरिका-इज़राइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है कि ईरान के खिलाफ ऑपरेशन के लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य पूरी तरह तय है और इसे लेकर “नो शिफ्टिंग ऑफ द गोलपोस्ट्स” की नीति अपनाई गई है. अजार ने युद्ध के मौजूदा मिशन को तीन मुख्य बिंदुओं में स्पष्ट किया.
युद्ध के तीन लक्ष्य तय, उसी दिशा में काम
इज़राइली राजदूत ने कहा, “हमने शुरुआत में ही स्पष्ट कर दिया था कि हमारे तीन लक्ष्य हैं, परमाणु खतरे को न्यूट्रल करना, बैलिस्टिक मिसाइल खतरे को खत्म करना और दमनकारी ताकतों की क्षमता कम करके ईरानी जनता को भविष्य अपनाने का अवसर देना.”
उन्होंने जोर देकर कहा कि सैन्य अभियान इन्हीं लक्ष्यों के अनुरूप चल रहा है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. “हम ठीक वही कर रहे हैं. हमारे उद्देश्यों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है.” अजार के अनुसार, इस युद्ध का अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि संघर्ष समाप्त होने के बाद ईरान का शासन दोबारा ऐसे सैन्य कार्यक्रम खड़े न कर सके.
ईरान की जवाबी कार्रवाई “अपेक्षित”
हालिया घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए अजार ने कहा कि ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया चौंकाने वाली नहीं है. उनके मुताबिक, जून में हुई पिछली कार्रवाई के बाद इज़राइल ने ईरान की आक्रामक क्षमता को काफी हद तक कम कर दिया था. उन्होंने कहा, “हमें आश्चर्य नहीं हुआ. हमें पता था कि ईरान के पास यह क्षमता है. लेकिन जून में हमारे प्रयासों के बाद उनकी क्षमता कम हुई है और इस बार इज़राइल को होने वाला नुकसान पहले से काफी कम है.”
कई देशों पर हमले को बताया गैर-जिम्मेदाराना
राजदूत ने ईरान द्वारा क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाने को संघर्ष को बढ़ाने वाला कदम बताया. “उन्होंने 12 देशों पर हमला करके तनाव को बढ़ाया है. यह पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना कदम है.”
अजार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह इस संघर्ष में ईरान को मुख्य आक्रामक पक्ष के रूप में देखे. “दबाव उन पर है और रहेगा, क्योंकि आक्रामक वही हैं.”
वैश्विक रणनीति और क्षेत्रीय असर
इज़राइली दूत का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है और कई देशों में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान संघर्ष के राजनीतिक और कूटनीतिक आयामों को भी प्रभावित करते हैं. रूवेन अजार के अनुसार, अमेरिका-इज़राइल गठबंधन का फोकस स्पष्ट है — ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना. उनका कहना है कि इस रणनीति में कोई बदलाव नहीं होगा, चाहे संघर्ष कितना भी लंबा क्यों न चले.
यह बयान संकेत देता है कि आने वाले समय में मध्य-पूर्व का भू-राजनीतिक समीकरण और अधिक जटिल हो सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने लक्ष्यों पर अडिग नजर आ रहे हैं.
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