आज सुबह के 50 मुख्य समाचार जो इस तरीके से हैं कहां पर क्या हो रहे हैं आज राजस्थान में आग क्यों लगी थी लिए जानते हैं

भक्ति, श्रद्धा व उल्लास के साथ महावीर व्यायामशाला, देवघर में शिव भक्तों ने की पूजा, शिवमय हुआ अखाड़ा परिसर देवघर। स्थानीय एम0 आर0 टी0 चौक स्थित महावीर व्यायामशाला के शिव मंदिर मे महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। भक्ति, श्रद्धा, उल्लास और उत्साह के साथ श्रद्धालुओं

Feb 17, 2026 - 07:31
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आज सुबह के 50 मुख्य समाचार जो इस तरीके से हैं कहां पर क्या हो रहे हैं आज राजस्थान में आग क्यों लगी थी लिए जानते हैं

*राजस्थान के भिवाड़ी में केमिकल फैक्ट्री में जोरदार धमाका, भीषण आग में कई मजदूर जिंदा जले*

_राजस्थान के भिवाड़ी में एक केमिकल फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में कई मजदूर जिंदा जल गए, जबकि कुछ अभी भी अंदर फंसे हुए बताए जा रहे हैं।_

Ok 👌 भक्ति, श्रद्धा व उल्लास के साथ महावीर व्यायामशाला, देवघर में शिव भक्तों ने की पूजा, शिवमय हुआ अखाड़ा परिसर 

देवघर।

स्थानीय एम0 आर0 टी0 चौक स्थित महावीर व्यायामशाला के शिव मंदिर मे महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। भक्ति, श्रद्धा, उल्लास और उत्साह के साथ श्रद्धालुओं ने बाबा भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की। भक्तों की भीड़ से पूरा अरवाडा परिसर शिवमय हो गया। मौके पर, राष्ट्रीय हिंदू परिषद‌ ,,(भारत) के जिला अध्यक्ष श्री प्रभाष गुप्ता ने कहा कि महाशिवरात्रि, जो भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूरी होती है। और महाशिवरात्रि का व्रत रखने से पापों का नाश होता है। साथ ही, मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस हेतू महाशिवरात्रि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति भाव व्यक्त करने का पावन व विशेष अवसर है।

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TRN LIVE: *राजस्थान के भिवाड़ी में केमिकल फैक्ट्री में जोरदार धमाका, भीषण आग में कई मजदूर जिंदा जले*

_राजस्थान के भिवाड़ी में एक केमिकल फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में कई मजदूर जिंदा जल गए, जबकि कुछ अभी भी अंदर फंसे हुए बताए जा रहे हैं।_

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*1* दुनिया का सबसे बड़ा AI इवेंट दिल्ली में शुरू, 300 से ज्यादा कंपनियां दिखाएंगी एडवांस गैजेट्स; खेती, पढ़ाई और सेहत पर फोकस रहेगा

*2* एआई इम्पैक्ट समिट आज से शुरू हुआ। पीएम मोदी ने वैश्विक प्रतिनिधियों का स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत एआई का 'महाकुंभ' आयोजित कर रहा है, जहां पांच दिवसीय एआई इम्पैक्ट समिट में दुनिया भर के नेता, स्टार्टअप, नवोन्मेषक और शोधकर्ता एकत्र हुए हैं

*3* शुभारंभ से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई इंडिया इम्पैक्ट समिट में आए वैश्विक प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की शक्ति, मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम और अत्याधुनिक शोध के कारण भारत आज एआई परिवर्तन की अग्रिम पंक्ति में खड़ा है

*4* भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा दे रहा है। न्यूजीलैंड के विज्ञान मंत्री शेन रेटी ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे व्यापार, तकनीक और एआई जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा और द्विपक्षीय संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे।

*5* असम में चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, भूपेन बोरा ने छोड़ी पार्टी, भूपेन बोरा ने कुछ ही घंटों में वापस लिया इस्तीफा, हाईकमान की दखल के बाद बदला फैसला

*6* भाजपा के दरवाजे खुले, सुरक्षित सीट से लड़ाएंगे चुनाव'; भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद सीएम सरमा का ऑफर

*7* हिमंता शूटिंग वीडियो मामला, सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार, कहा- चुनाव से पहले कोर्ट का दरवाजा खटखटाना ट्रेंड बन गया है, इसे प्लेग्राउंड मत बनाइए

*8* चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के 7 अधिकारी सस्पेंड किए, SIR में लापरवाही-पावर के गलत उपयोग के आरोप; EC बोला- वोटर लिस्ट का काम संवेदनशील

*9* मैं नेहरू और राजीववादी हूं, पर राहुलवादी नहीं; मणिशंकर अय्यर हो गए फायर, किसी को नहीं छोड़ा

*10* कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को आड़े हाथों लेते हुए मणिशंकर अय्यर ने उनको कठपुतली करार दिया है। इसी के साथ कहा कि वो कोई प्रवक्ता नहीं हैं। पूरा सियासी विवाद केरल सीएम की तारीफ के बाद शुरू हुआ। मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि पिनरई विजयन फिर से केरल के मुख्यमंत्री बनेंगे

*11* उनसे नहीं हमारा संबंध... मणिशंकर अय्यर के बयान से कांग्रेस ने किया किनारा; टूट पड़े दो-दो नेता

*12* राजस्थान की केमिकल फैक्ट्री में धमाका, 8 लोग जिंदा जले, अवैध रूप से बन रहे थे पटाखे, पॉलीथीन में इकट्‌ठे किए गए बॉडी पाट्‌र्स

*13* बांग्लादेश में हिंदू नेता को मंत्री बना सकते हैं रहमान, 30 साल पहले भी मिनिस्टर रहे थे गोयेश्वर; इस बार 2 हिन्दुओं ने जीता चुनाव

*14* थोक महंगाई 10 महीने में सबसे ज्यादा, जनवरी में बढ़कर 1.81% पर पहुंची, खाने-पीने की चीजें महंगी हुईं

*15* सेंसेक्स 650 अंक बढ़कर 83,277 पर बंद, निफ्टी 212 अंक चढ़कर 25,683 पर पहुंचा, एनर्जी और बैंकिंग शेयर्स में खरीदारी

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TRN LIVE: तैयारी पूरी है .. बस एक बार इनके बराबर (80करोड़) हो जाएं ...फिर..!!!

 हिंदुओं तुम हम दो हमारे दो करते रहना, तुम सेक्युलरिज्म की दवा चाटते रहना, तुम भाईचारा निभाते रहना और वो अपनी तैयारी में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं बस कुछ समय और फिर जो होगा उसकी कल्पना भी नहीं कर पाओगे..देख लो मौलाना साफ साफ अपनी ये अपने लोगों को मंशा को बता रहा है

इतना साफ शब्दों में।मौलाना एक कहा भी यदि कोई हिंदू ना समझ पाए तो उसकी बुद्धिमता को क्या ही कहें। पाकिस्तान, बांग्लादेश , कश्मीर, बंगाल ये सब तो ट्रेलर मात्र माने जा सकते है अब इनकी तैयारी पूरी फिल्म बनाने की है... अब भी समय है जाग जाओ और समस्या का हर संभव समाधान खोजों तथा उसपर काम करो..

TRN LIVE: बॉलीवुड की अंग्रेजी पढ़ी लिखी रंडिया भारत की लड़कियों की रोल मॉडल थी तो इनके जैसा ही इन्हें मानने वाली लड़कियों का चरित्र है और उनकी लड़कियों का भी परिणाम ,ओयो में पकड़ा जाना, बारह तेरह वर्ष की आयु में बॉयफ़्रेंड बना बाईकों पे घूमना अपने माता पिता से झूठ बोलकर आशिकों से मिलना घर छोड़कर भाग जाना लव जिहाद का शिकार होना ईसाई मिशनरी का शिकार होना ये सब आंखों के सामने है कैसे छोटे छोटे लड़के लड़किया स्कूल से कॉलेज यूनिवर्सिटियों में पढ़ने लायक होते होते दस दस बीस बीस तीस तीस कोई लड़का लड़की तो अर्धशतक शतक या इससे ज्यादा लड़के लड़कियों के साथ सेक्स कर चुके होते है और खुलकर शोशल मीडिया में अपने अवैध चरित्रहीन सम्बन्धों का बखान करते फिरते है वीडियो बना बना कर जिसे दलाल और हिजड़ा मीडिया दिखाता है चंद चवन्नियां के चक्कर में सरकार आंखे चूतड़ों में दे लेती है हिंदुओं से धर्म के नाम पर वोट लेकर फर्जी धर्मगुरु मादरचोद पैसा कमाते है केवल ये सब आपको शोशल मीडिया में दिख जाएगा जो आपके फोन में है फिर हिंदू समाज रांड रोना रोता है हमारे बच्चों के विवाह नहीं हो रहे है हो भी रहे है तो कुटुंब के कुटुंब बर्बाद हो रहे है पति पत्नी को मार रहा है पत्नी पति को आशिक के चक्कर में मार कर नीले ड्रम में पैक कर देती है बॉलीवुड की रंडिया इसके लिए जिम्मेदार है देखो और सुनो और आज की लड़के लड़कियों की परिस्थिति का आंकलन स्वयं हो जाएगा हिंदुओं तुम्हारे साथ क्या हो रहा है उसे देखो भारतीय मान्यताओं के आधार पर और अपनी धरती की अपनी संतति की रक्षा करों विदेशी विचारधाराओं से नहीं तो पाकिस्तान बांग्लादेश अफगानिस्तान कश्मीर केरल बंगाल आदि आदि स्थानों से भगा दिए गए हो भारत से खत्म हो जाओगे सम्पूर्ण भारत वर्ष पर गजवा ए हिंद और जोशुआ प्रोजेक्ट अपना झंडा फहराएगा क्योंकि नपुंसक हो चुके हो तुम लोग एक एक दो दो ही बच्चे है लड़का मर गया लड़की विदेशी विचारधाराओं के कारण भाग गई लो हो गया वंश खत्म बाकी बहुत सारों को तो एक भी नहीं है कुटुंब से वो किसी को गोद नहीं लेना चाहते बाकी अनाथाश्रम तो बहुत दूर की बात है।

TRN LIVE: *सुपारी: एक गुणी औषधि

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जो लोग पान खाते हैं या पूजा-पाठ के लिए पान को प्रयोग में लाते हैं, वे सुपारी (Betel nut in Hindi) के बारे में भी जरूर जानते होंगे। पान के साथ-साथ सुपारी का प्रयोग गुटखा-तंबाकू आदि के लिए भी किया जाता है। सच यह है कि अधिकांश लोग सुपारी को केवल इन्हीं चीजों के उपयोग के लिए जानते होंगे, लेकिन असलियत सिर्फ इतना नहीं है।

 आयुर्वेदिक किताबों के अनुसार, सुपारी एक गुणी औषधि है। आप सुपारी के फायदे भिन्न-भिन्न रोगों की रोकथाम या इलाज में ले सकते हैं। शायद आप भी सुपारी खाने के फायदे के बारे में नहीं जानते होंगे।

पतंजलि में अनुसार, सुपारी एक जड़ी-बूटी है, जिसके इस्तेमाल से रोगों को ठीक करने में मदद मिलती है। सुपारी के इस्तेमाल से कई बीमारियों को इलाज भी किया जा सकता है। आइए सुपारी के फायदे के बारे में जानते हैं।

सुपारी खाने से कई फ़ायदे होते हैं. सुपारी में कई औषधीय गुण होते हैं. सुपारी खाने से पाचन तंत्र मज़बूत होता है और शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं. सुपारी खाने के कुछ फ़ायदे ये रहे: 

सुपारी में एंथेल्मिंटिक गुण होते हैं, जिससे दांतों में कैविटी नहीं होती. 

सुपारी खाने से पाचन तंत्र मज़बूत होता है और कब्ज़ से राहत मिलती है. 

सुपारी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण दांतों की सड़न रोकते हैं. 

सुपारी खाने से तंत्रिका तंत्र तेज़ होता है, जिससे डिप्रेशन से बचाव होता है. 

सुपारी में मौजूद पॉलीफ़ेनॉल इम्यूनोमॉड्यूलेटरी और एंटी-एलर्जी प्रभाव रखते हैं, जिससे डायरिया से बचाव होता है. 

सुपारी खाने से मतली की समस्या में राहत मिलती है. 

सुपारी में मौजूद सैफ़्रोल यूरिन की समस्या को दूर करता है. 

सुपारी खाने से एनीमिया जैसी बीमारी से निजात मिलती है. 

सुपारी खाने से आंखों की लालिमा में आराम मिलता है।

पेट में कीड़े होने पर 10-30 मिली सुपारी के फल का काढ़ा बना लें। इसका सेवन करने से पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं।

इसी तरह, 5 मिली सुपारी के फल का रस पीने से भी पेट की बीमारी ठीक होती है। पेट की गंदगी मल द्वारा बाहर निकल जाती है।

दांत दर्द कर रहा हो, तो बराबर-बराबर मात्रा में सुपारी, खदिर, पिप्पली, तथा मरिच का भस्म बना लें। इसे दांतों पर मलें। इससे दांतों का दर्द, मसूड़ों का दर्द, और जीभ के दर्द से राहत (supari benefits) मिलती है।

सुपारी के चूर्ण को दांतों पर मलने से भी दांतों के विकारों ठीक होते हैं।।।।।.....

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   *🪷🪷।। शुभ वंदन ।।🪷🪷*

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।

सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।

मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

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TRN LIVE: *अरंडी के पत्तों के बागवानी में फायदे.....*

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अरंडी का पौधा प्राचीन समय से औषधीय और कृषि महत्व के लिए प्रसिद्ध है। इसके पत्तों को बागवानी में “मिट्टी का सोना” कहा जाता है, क्योंकि इनमें मौजूद पोषक तत्व बंजर मिट्टी को भी उपजाऊ बना देते हैं। यह पौधा न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है, बल्कि पौधों की वृद्धि, स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है।

1️⃣ जैविक खाद का स्रोत :

अरंडी के पत्ते गलने पर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व छोड़ते हैं। इन्हें सुखाकर मिट्टी में मिलाने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं और मिट्टी उपजाऊ बनती है।

2️⃣ कीट एवं रोग नियंत्रण :

इन पत्तों में पाए जाने वाले ricin और alkaloids तत्व दीमक, सफेद मक्खी और रस चूसने वाले कीटों को दूर रखते हैं। पत्तों का घोल प्राकृतिक कीटनाशक का काम करता है।

3️⃣ मल्चिंग में उपयोग :

पत्तों को पौधों के चारों ओर बिछाने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है, खरपतवार कम उगते हैं और पानी की बचत होती है।

4️⃣ कम्पोस्ट में तेजी :

अरंडी के पत्ते जल्दी गलते हैं और कम्पोस्ट बनने की प्रक्रिया को तेज करते हैं, जिससे मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है।

5️⃣ मिट्टी की सेहत सुधारना :

सड़ी हुई पत्तियाँ मिट्टी को भुरभुरी और जैविक तत्वों से भरपूर बनाती हैं, जिससे मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है।

6️⃣ जैविक टॉनिक और ग्रोथ बूस्टर :

पत्तों का घोल पौधों की जड़ों को मजबूत बनाता है, पत्तियों में क्लोरोफिल बढ़ाता है और पौधों को ज्यादा हरा-भरा करता है।

7️⃣ सूक्ष्म पोषक तत्वों का स्रोत :

इसके पत्तों के विघटन से मिट्टी में मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन जैसे तत्व मिलते हैं, जो पत्तेदार पौधों के लिए बहुत फायदेमंद हैं।

8️⃣ जैविक रिपेलेंट :

अरंडी के पत्तों की गंध और लेटेक्स कीटों, चूहों और घोंघों को दूर रखते हैं। मिट्टी में मिलाने से जड़ों को रोग प्रतिरोधक शक्ति मिलती है।

9️⃣ अन्य खादों के साथ उपयोग :

नीम की खली, गोबर या वर्मी कम्पोस्ट के साथ मिलाने से इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है।

🔟 बीज उपचार :

पारंपरिक खेती में अरंडी के पत्तों के रस का उपयोग बीजों को फफूंद और कीटों से बचाने के लिए किया जाता है, जिससे अंकुरण बेहतर होता है।

️ प्रयोग के तरीके.....

■ पत्तों को सुखाकर चूर्ण बनाकर मिट्टी में मिलाएँ।

■ 1 किलो पत्ते 5 लीटर पानी में 24 घंटे भिगोकर छानें और छिड़काव करें।

■ कम्पोस्ट या मल्चिंग में मिलाएँ।

अरंडी के पत्तों का उपयोग केवल पौधों को पोषण देने के लिए ही नहीं, बल्कि मिट्टी की दीर्घकालिक सेहत और बागवानी में जैविक संतुलन बनाए रखने के लिए भी बेहद उपयोगी है। 

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   *🪷🪷।। शुभ वंदन ।।🪷🪷*

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।

सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।

मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

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TRN LIVE: *प्रार्थना कब सफल होगी---*

*प्रार्थना का सच्चा उत्तर पाने का सबसे प्रथम मार्ग आत्म-विश्वास है। कर्त्तव्यपरायण द्वारा ही सच्ची प्रार्थना होनी संभव है। ईश्वर नामक सर्वव्यापी सत्ता में प्रवेश करने का द्वार आत्मा में होकर है। वही इस खाई का पुल है। अविश्वासी और आत्मघाती लोग निश्चय ही विपत्ति में पड़े रहते हैं और सही मार्ग की तलाश करते फिरते हैं।* 

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TRN LIVE: `💐*वृन्दावन की चींटियाँ:जब एक भक्त ने 'धर्म' से बड़ा 'प्रेम' चुना💐*

यह एक सच्ची घटना है, जो एक गौड़ीय मठ के परम वैष्णव भक्त के जीवन से जुड़ी है। वे शरीर से साधारण दिखते थे, किन्तु उनका हृदय "नवनीत" (मक्खन) से भी अधिक कोमल था।

एक बार वे श्रीधाम वृन्दावन दर्शन के लिए पधारे। कई दिनों तक गौड़ीय मठ में रुककर उन्होंने ठाकुर जी की निस्वार्थ सेवा की। तपती धूप की परवाह किए बिना, नंगे पाँव पूरे वृन्दावन की परिक्रमा की। उनके लिए ब्रज की रज (धूल) ही सबसे बड़ा चंदन थी।

जब घर (पटना) लौटने का समय आया, तो मन भारी हो गया। ब्रज से विदाई लेना एक भक्त के लिए मृत्यु-तुल्य कष्ट होता है। मन को समझाते हुए उन्होंने सोचा, "ठाकुर जी का कुछ प्रसाद साथ ले चलता हूँ, इसी बहाने ब्रज का स्वाद कुछ दिन और साथ रहेगा।"

उन्होंने बाजार से रामदाने के लड्डू खरीदे। उन्हें बाँके बिहारी और राधा-रमण जी सहित प्रमुख मंदिरों में भोग लगवाया और प्रसादी रूप में डिब्बे को संभालकर रख लिया। अगली सुबह भारी मन से उन्होंने ट्रेन पकड़ी।

ट्रेन अपनी गति से चल रही थी। वृन्दावन से निकलकर ट्रेन जब मुगलसराय स्टेशन पहुँची, तो शाम घिर आई थी। भक्त जी को पटना जाना था, जहाँ पहुँचने में अभी 3-4 घंटे और लगने थे। पेट में भूख की अग्नि जलने लगी थी।

उन्होंने सोचा, "मुगलसराय में ट्रेन आधे घंटे रुकती है। क्यों न हाथ-मुँह धोकर, अपनी संध्या-आह्निक (जाप) पूरी कर लूँ और फिर थोड़ा प्रसाद पा लूँ?"

हाथ-पैर धोकर वे अपनी सीट पर बैठे और बड़े चाव से लड्डुओं का डिब्बा खोला।

डिब्बा खुलते ही वे ठिठक गए। उन्होंने देखा कि लड्डुओं पर लाल चींटियों का एक झुंड लगा हुआ था।

सामान्य मनुष्य होता तो शायद चींटियों को झाड़ देता और लड्डू खा लेता, या फिर गुस्से में डिब्बा फेंक देता। भक्त जी ने भी पहले सहज भाव से चींटियाँ हटाकर एक-दो लड्डू खा लिए। बचे हुए लड्डू यह सोचकर रख दिए कि आगे किसी को बाँट दूँगा।

किंतु, तभी उनके हृदय में एक विचार कौंधा जिसने उनकी आत्मा को झकझोर दिया।

लड्डू का स्वाद तो कब का गायब हो चुका था, अब तो मन में केवल उन नन्ही चींटियों की चिंता थी। वे सोचने लगे:

> "ये चींटियाँ साधारण नहीं हैं... ये तो मेरे साथ वृन्दावन से आई हैं। ये ब्रज की चींटियाँ हैं! आह! कितनी भाग्यशाली हैं ये, जिनका जन्म उस पावन भूमि पर हुआ जहाँ देवता भी धूल बनने को तरसते हैं।"

फिर एक भयानक ग्लानि ने उन्हें घेर लिया:

> "ये बेचारी अनजाने में मिठास के लोभ में डिब्बे में चढ़ गईं, और मैं पापी इन्हें सैकड़ों मील दूर यहाँ मुगलसराय ले आया! अब ये वापस कैसे जाएंगी? इनका तो पूरा परिवार, इनका घर, इनका सब कुछ वृन्दावन में छूट गया। क्या इन्हें दोबारा ब्रज की धूल मिलेगी? या ये इसी अनजान शहर में तड़प-तड़प कर मर जाएंगी?"

उनकी आँखों से आँसू बहने लगे। उन्हें लगा जैसे उन्होंने किसी को उसके घर से बेघर कर दिया हो।

आत्मा ने चीत्कार किया—"नहीं! मैं इन्हें ब्रज से वंचित करने का पाप अपने सिर नहीं ले सकता।"

भूख, प्यास, थकान और घर जाने की सारी योजनाएं एक पल में धरी की धरी रह गईं। उस वैष्णव ने तुरंत अपना सामान उठाया। पटना जाने वाली ट्रेन छोड़ दी और वापस वृन्दावन जाने वाली पहली ट्रेन पकड़ ली।

पूरी यात्रा में वे उस मिठाई के डिब्बे को अपनी गोद में ऐसे सहेज कर बैठे रहे जैसे उसमें कोई बहुमूल्य हीरा हो। वे मन ही मन ठाकुर जी से क्षमा मांगते रहे।

अगले दिन जब वे वापस वृन्दावन पहुँचे, तो सीधे उसी मिठाई की दुकान पर गए जहाँ से लड्डू खरीदे थे। उन्होंने वह डिब्बा धीरे से दुकान के पास जमीन पर रखा और चींटियों को बाहर निकलने का मार्ग दे दिया।

फिर उन्होंने हाथ जोड़कर, भीगी पलकों से उन नन्ही जीवों से कहा:

> "मुझे क्षमा कर देना। मेरे भाग्य में अभी ब्रज में निरंतर वास करना नहीं लिखा, मुझे तो वापस संसार में जाना पड़ेगा। किन्तु मैं कौन होता हूँ तुम्हें तुम्हारे घर (ब्रज) से दूर करने वाला? तुम यहीं रहो, जहाँ श्री कृष्ण की लीलाएँ रची बसी हैं।"

 

दुकानदार यह सब देख रहा था। उसे लगा शायद मिठाई खराब निकल गई है। वह दौड़ा-दौड़ा आया और बोला, "महाराज जी! क्षमा करें, यदि चींटियाँ लग गई हैं तो आप डिब्बा बदल लीजिये, मैं आपको ताजी मिठाई दे देता हूँ।"

वैष्णव ने आँसू पोंछते हुए उत्तर दिया:

> "नहीं भैया! मिठाई में कोई दोष नहीं था। दोष तो मेरी असावधानी में था। मुझसे एक महापाप होते-होते रह गया। मैं इन ब्रजवासियों (चींटियों) का निर्वासन कैसे देख सकता था? बस, इन्हें इनके घर छोड़ने आया था।"

दुकानदार सन्न रह गया। आज तक उसने मिठाई बदलने वाले ग्राहक देखे थे, पैसे वापस मांगने वाले देखे थे, पर चींटियों को घर छोड़ने के लिए सैकड़ों किलोमीटर वापस आने वाला ऐसा पागल प्रेमी नहीं देखा था।

दुकानदार का हृदय पिघल गया। वह रोते हुए उस वैष्णव के चरणों में गिर पड़ा। उधर भक्त की आँखों से प्रेम के आँसू बह रहे थे, और इधर दुकानदार के आँखों से श्रद्धा के।

यह कथा हमें सिखाती है कि धर्म केवल तिलक लगाने या घंटी बजाने में नहीं है। धर्म उस करुणा में है जो एक नन्ही चींटी में भी उसी परमात्मा को देखता है। वृन्दावन केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, वह एक 'भाव' है।

> बात भाव की है जी,

> बात उस निर्मल मन की है,

> बात ब्रज की है,

> बात मेरे श्री राधा-रमण की है।

*जय श्री कृष्ण*🙏🙏

TRN LIVE: : अश्वमेध का अद्भुत रहस्य: हरि-हर का दिव्य संग्राम*

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बात उन दिनों कि है जब श्रीराम का अश्वमेघ यज्ञ चल रहा था। श्रीराम के अनुज शत्रुघ्न के नेतृत्व में असंख्य वीरों की सेना उन सारे प्रदेशों को विजित करती जा रही थी जहाँ भी यज्ञ का अश्व जा रहा था। इस क्रम में कई राजाओं के द्वारा यज्ञ का घोड़ा पकड़ा गया लेकिन अयोध्या की सेना के आगे उन्हें झुकना पड़ा। शत्रुघ्न के आलावा सेना में हनुमान, सुग्रीव और भारत पुत्र पुष्कल सहित कई महारथी उपस्थित थे जिन्हें जीतना देवताओं के लिए भी संभव नहीं था। उसपर श्रीराम का प्रताप ऐसा था कि कोई भी राजा उनके ध्वज तले राज्य करना अपना सौभाग्य मानता था। इसी कारण उस सेना को अधिक प्रयास भी नहीं करना पड़ रहा था।

कई जगह भ्रमण करने के बाद यज्ञ का घोडा देवपुर पहुंचा जहाँ राजा वीरमणि का राज्य था। राजा वीरमणि अति धर्मनिष्ठ तथा श्रीराम एवं महादेव के अनन्य भक्त थे। उनके दो पुत्र रुक्मांगद और शुभंगद वीरों में श्रेष्ठ थे। राजा वीरमणि के भाई वीरसिंह भी एक अतिरथी थे। राजा वीरमणि ने भगवान रूद्र की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया था और महादेव ने उन्हें उनकी और उनके पूरे राज्य की रक्षा का वरदान दिया था। महादेव के द्वारा रक्षित होने के कारण कोई भी उनके राज्य पर आक्रमण करने का साहस नहीं करता था।

जब यज्ञ का अश्व उनके राज्य में पहुंचा तो राजा वीरमणि के पुत्र रुक्मांगद ने उसे बंदी बना लिया। जब रुक्मांगद ने ये सूचना अपने पिता को दी तो वो बड़े चिंतित हुए और अपने पुत्र से कहा - "वत्स! अनजाने में तुमने श्रीराम के यज्ञ का घोडा पकड़ लिया है। श्रीराम हमारे मित्र हैं और उनसे शत्रुता करने का कोई औचित्य नहीं है इसलिए तुम यज्ञ का घोडा वापस लौटा आओ।"

इसपर रुक्मांगद ने कहा कि "हे पिताश्री, मैंने तो उन्हें युद्ध के चुनौती भी दे दी है अतः अब उन्हें बिना युद्ध के अश्व लौटना हमारा और उनका दोनों का अपमान होगा। अब तो हमें युद्ध के लिए सज्जित रहना चाहिए।" अपने पुत्र की धर्मसंगत बात सुनकर वीरमणि ने उसे सेना सुसज्जित करने की आज्ञा दे दी। राजा वीरमणि अपने भाई वीरसिंह और अपने दोनों पुत्र रुक्मांगद और शुभांगद के साथ विशाल सेना ले कर युद्ध क्षेत्र में आ गए।

इधर जब शत्रुघ्न को सूचना मिली की उनके यज्ञ का घोडा बंदी बना लिया गया है तो वो बहुत क्रोधित हुए एवं अपनी पूरी सेना के साथ युद्ध के लिए युध्क्षेत्र में आ गए। उन्होंने पूछा की उनकी सेना से कौन अश्व को छुड़ाएगा? तब भरत-पुत्र पुष्कल ने कहा कि "तातश्री! आप चिंता न करें। आपके आशीर्वाद और तात श्रीराम के प्रताप से मैं आज ही इन सभी योधाओं को मार कर अश्व को मुक्त करता हूँ।" इसके बात शत्रुघ्न की सेना के अन्य महारथियों ने भी अश्व को छुड़ाने के लिए युद्ध की बात की।

उनकी बात सुनकर हनुमान ने कहा कि - "शत्रुघ्न! मुझे आपकी और वत्स पुष्कल की वीरता पर कोई संदेह नहीं किन्तु राजा वीरमणि के राज्य पर आक्रमण करना स्वयं इंद्रदेव के लिए भी कठिन है क्योंकि ये नगरी महादेव द्वारा रक्षित है। अतः उचित यही होगा कि हमें श्रीराम को इस विषय में सूचना भेजनी चाहिए। राजा वीरमणि श्रीराम का बहुत आदर करते हैं इसलिये वे उनकी बात नहीं टाल पाएंगे और युद्ध की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।" ये सुनकर शत्रुघ्न बोले "हे महाबली! आपको युद्ध से विरत होने को इच्छुक जान मैं आश्चर्य में पड़ गया हूँ। हम जैसे सेवकों के रहते यदि भैया को युध्भूमि में आना पड़े, ये हमारे लिए अत्यंत लज्जा की बात है। हम क्षत्रिय हैं और अब इस युद्ध से पीछे नहीं हट सकते।"

युद्धस्थल में उन्होंने एक बार फिर वीरमणि को अश्व लौटने को कहा किन्तु उनके मना करने पर अंततः भयानक युद्ध छिड़ गया। पुष्कल सीधा जाकर राजा वीरमणि से भिड गया। दोनों अतुलनीय वीर थे, वे दोनों तरह तरह के अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग करते हुए युद्ध करने लगे। हनुमान राजा वीरमणि के भाई महापराक्रमी वीरसिंह से युद्ध करने लगे। रुक्मांगद और शुभांगद ने शत्रुघ्न पर धावा बोल दिया। पुष्कल और वीरमणि में बड़ा घमासान युद्ध हुआ।

पुष्कल ने वीरमणि पर आठ नाराच बाणों से वार किया जिसे राजा वीरमणि सह नहीं पाए और मुर्छित होकर अपने रथ पर गिर पड़े। वीरसिंह ने हनुमान पर कई अस्त्रों का प्रयोग किया पर उससे पवनपुत्र का क्या बिगड़ता? उन्होंने ने एक विशाल पेड़ उखाड़ कर वीरसिंह पर वार किया। इससे उनका रथ नष्ट हो गया और वीरसिंह रक्त-वमन करते हुए मूर्छित हो गए। उधर शत्रुघ्न और राजा वीरमणि के पुत्रों में असाधारण युद्ध चल रहा था किन्तु रुक्मांगद और शुभांगद शत्रुघ्न के बल का पार ना पा सके और उनसे परास्त हुए। उनकी विजय देख कर श्रीराम की की सेना के सभी वीर सिंहनाद करने लगे।

जब राजा वीरमणि की मूर्छा दूर हुई तो उन्होंने देखा की उनकी सेना की पराजय निश्चित है। ये देख कर उन्होंने भगवान रूद्र से सहायता की प्रार्थना की। महादेव ने अपने भक्त को मुसीबत में जान कर वीरभद्र के नेतृत्व में नंदी, भृंगी सहित सारे गणों को वहाँ भेज दिया। महाकाल के सारे अनुचर उनकी जयजयकार करते हुए अयोध्या की सेना पर टूट पड़े।

जब उन्होंने भयानक मुख वाले रुद्रावतार वीरभद्र, नंदी, भृंगी सहित महादेव की सेना को देखा तो भय से कांप उठे। शत्रुघ्न ने कहा - "जिस वीरभद्र ने बात ही बात में दक्ष प्रजापति की मस्तक काट डाला था, जिसे स्वयं नारायण भी परास्त ना कर पाए, उसे युद्ध में कैसे हराया जा सकता है?" ये सुनकर पुष्कल ने कहा - "हे तातश्री! आप दुखी ना हों। मैं अभी इस वीरभद्र का मस्तक काट कर सेना को अभय प्रदान करता हूँ।" ये कहते हुए पुष्कल सीधे वीरभद्र से जा भिड़े।

जब हनुमान ने ये देखा तो उन्होंने शत्रुघ्न से कहा - "ये तो अनर्थ हो गया। वीर मद में पुष्कल वीरभद्र से युद्ध कर रहे हैं। उनका युद्धकौशल तो वीरभद्र के लिए केवल एक खेल है।" ये सुनकर शत्रुघ्न निराश होकर बोले - "हे महावीर! पुष्कल को भ्राता भरत ने मेरे भरोसे युद्ध भूमि में भेजा था। अगर उसे कुछ हो गया तो मैं उन्हें क्या उत्तर दूँगा? हे पवनपुत्र! अब जैसे भी हो पुष्कल को वीरभद्र से बचाओ।"

ये सुनकर हनुमान अविलम्ब पुष्कल की सहायता के लिए वीरभद्र की ओर बढे। उधर पुष्कल ने अपने सारे दिव्यास्त्रों का प्रयोग वीरभद्र पर कर दिया लेकिन वीरभद्र ने उन्हें हँसते हुए काट दिया। उन्होंने पुष्कल से कहा - "हे बालक! अभी तुम्हारी आयु मृत्यु को प्राप्त होने की नहीं हुई है इसलिए युद्धक्षेत्र से हट जाओ।" किन्तु पुष्कल ने उनकी बात ना सुनते हुए उनपर शक्ति से प्रहार किया जो सीधे वीरभद्र के मर्मस्थान पर जाकर लगा। इसके बाद वीरभद्र ने क्रोध में अपने नखों से पुष्कल का का मस्तक काटडाला।

हनुमान के वहाँ पहुँचने से पहले ही पुष्कल वीरगति को प्राप्त हो गए। जब हनुमान ने ये देखा तो क्रोधित होते हुए कहा - "हे वीरभद्र! जिस प्रकार तुमने पुष्कल का वध किया है अब उसी प्रकार अपना भी अंत निश्चित समझो।" ये कहकर हनुमान ने वीरभद्र पर धावा बोल दिया। दोनों रुद्रावतार थे, दोनों अपराजेय थे और जब दोनों महावीर एक दूसरे से टकराये तो ऐसा लगा जैसे प्रलय आ जाएगा। वीरभद्र ने हनुमान पर कई अस्त्रों से एक साथ प्रहार किया जिससे हनुमान का पूरा शरीर रक्तरंजित हो गया। किन्तु उसकी चिंता ना करते हुए हनुमान ने अपनी भीषण गदा, मुष्टि एवं नखों के प्रहार से वीरभद्र का वक्ष विदीर्ण कर दिया। उधर नंदी, भृंगी आदि गणों ने शत्रुघ्न पर भयानक आक्रमण कर दिया और पुष्कल के वध में संतप्त शत्रुघ्न को पाश में बाँध लिया।

अब अपनी सेना को विपत्ति में देख सबने एक स्वर में श्रीराम को पुकारा। अपने भक्तों की पुकार सुन कर श्रीराम तत्काल ही लक्ष्मण, भरत सहित चतुरंगिणी सेना के साथ युद्धक्षेत्र में आ गए। उन्हें देख कर जैसे पूरी सेना में प्राण का संचार हो गया। श्रीराम ने सर्वप्रथम शत्रुघ्न को मुक्त करवाया। भरत ने जब देखा कि वीरभद्र ने पुष्कल का वध कर दिया है तो वे शोक से मूर्छित हो गए। चेतना आपने पर उन्होंने क्रोध में भरकर वीरभद्र पर विभिन्न प्रकार के दिव्यास्त्रों से प्रहार किया। उधर श्रीराम ने शिवगणों को महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य एवं स्वयं महादेव द्वारा प्रदान किये दिव्यास्त्रों से विदीर्ण करना आरम्भ किया। लक्ष्मण ने अपने दिव्यास्त्रों द्वारा नंदी और भृंगी को संतप्त कर दिया।

श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जैसे वीरों से शिवगण पार ना पा सके। तब सबने महादेव का आह्वान किया। तब महारुद्र स्वयं रणक्षेत्र में उपस्थित हुए। अपने आराध्य को आया देख श्रीराम ने अपने शस्त्रों को त्याग उनकी अभ्यर्थना की। हरि और हर का संयोग देखने के लिए समस्त देवता ब्रह्मदेव सहित आकाश में स्थित हो गए। श्रीराम ने महादेव की स्तुति करते हुए कहा - "हे प्रभु! आपके ही प्रताप से मैंने महापराक्रमी रावण का वध किया। आप स्वयं ज्योतिर्लिंग के रूप में रामेश्वरम पधारे। हमारा जो भी बल है वो भी आपके आशीर्वाद के कारण है और ये अश्वमेघ यज्ञ भी मैंने आपकी ही इच्छा से किया है। अतः मुझपर कृपा करें और इस युद्ध का अंत करें।"

ये सुन कर भगवान शंकर बोले - "हे श्रीराम! आप बल और तेज में स्वयं श्रीहरि के समान हैं। जो मैं हूँ वही आप हैं। किन्तु मैंने अपने भक्त वीरमणि को उसकी रक्षा का वरदान दिया है इसलिए मैं इस युद्ध से पीछे नहीं हट सकता। अतः संकोच छोड़ कर आप मुझसे युद्ध करें। श्रीराम ने इसे महाकाल की आज्ञा मानी और युद्ध करना आरम्भ किया।

श्रीराम ने अपने सारे दिव्यास्त्रों का प्रयोग महाकाल पर कर दिया पर उन्हें कोई हानि ना पहुँचा सके। इस बीच हनुमान ने अपने अतुल बल का प्रदर्शन करते हुए महादेव को नंदी समेत अपनी पूंछ में लपेट लिया। इससे महादेव का तो कुछ ना बिगड़ा किन्तु नंदी को अपार कष्ट हुआ। ठीक उसी समय श्रीराम ने महादेव पर सम्मोहनास्त्र चलाया जिससे महादेव को निद्रा आने लगी और वे जम्हाई लेने लगे। फिर चेत होते ही महादेव ने हँसते हुए नंदी को हनुमान के पूछ से मुक्त कराया और कहा - "पुत्र! तुम निश्चय ही मेरे ही अंश हो अन्यथा वीरभद्र को रोकना और नंदी को अपने पाश में जकड लेना किसी अन्य योद्धा के लिए संभव नहीं है।"

तब श्रीराम ने अपना प्रसिद्ध "कोदंड" धनुष उठाया और भगवान शंकर से तुमुल युद्ध करने लगे। उन्होंने महादेव पर ब्रह्मास्त्र चलाया किन्तु ब्रह्मा और शिव में क्या भेद? वो महास्त्र महादेव को हानि ना पहुँचा सका। अंत में श्रीराम ने पाशुपतास्त्र का संधान किया और महादेव से बोले - "हे प्रभु! ये महान अस्त्र स्वयं आपसे ही मुझे प्राप्त हुआ है और आपके वरदान अनुसार इससे कोई परास्त हुए बिना नहीं रह सकता। अतः इस अस्त्र का प्रयोग मैं आप पर ही करता हूँ। अब अपने वरदान की रक्षा स्वयं आप ही करें। ये कहते हुए श्रीराम ने वो महान दिव्यास्त्र भगवान शिव पर ही चला दिया। वो अस्त्र सीधा महादेव के हृदयस्थल में समा गया। श्रीराम के इस अद्भुत युद्ध कौशल से भगवान शंकर संतुष्ट हो गए।

उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक श्रीराम से कहा - "हे पुरुषोत्तम! आपने और आपकी सेना ने इस युद्ध में महान पराक्रम दिखाया है जिससे मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ। अतः आपकी जो भी इच्छा हो आप मुझसे माँग लीजिये।" इसपर श्रीराम ने कहा - "प्रभु! कृपा कर इस युद्ध को अब समाप्त करें। साथ ही इस युद्ध में पुष्कल सहित जो योद्धा वीरगति को प्राप्त हो गए है, उन्हें कृपया जीवन दान दें।" तब महादेव ने दोनों ओर के सारे योद्धाओं को जीवित कर दिया। उसके बाद उनकी आज्ञा से राजा वीरमणि ने यज्ञ का घोडा श्रीराम को लौटा दिया और अपना राज्य रुक्मांगद को सौंप कर वे भी श्रीराम की सेना के साथ दिग्विजय की यात्रा को चल दिए।

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*Tarot Daddu – Dr. Darshan Bangia* 7503033565 कहते हैं: "हर कहानी सिर्फ शब्दों का मेल नहीं होती, बल्कि कई गहरी अनुभव और आत्मिक सीख से भरी होती है। 👇🏻👇🏻

------*शुभ वंदन।*

[TRN LIVE: पिता द्वारा पुत्र को सीख*

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पिता और पुत्र साथ-साथ टहलने निकले,वे दूर खेतों की तरफ निकल आये, तभी पुत्र ने देखा कि रास्ते में, पुराने हो चुके एक जोड़ी जूते उतरे पड़े हैं, जो ...संभवतः पास के खेत में काम कर रहे गरीब मजदूर के थे।

पुत्र को मजाक सूझा. उसने पिता से कहा ~ क्यों न आज की शाम को थोड़ी शरारत से यादगार बनायें,आखिर ... मस्ती ही तो आनन्द का सही स्रोत है. पिता ने असमंजस से बेटे की ओर देखा।

पुत्र बोला ~ हम ये जूते कहीं छुपा कर झाड़ियों के पीछे छुप जाएं.जब वो मजदूर इन्हें यहाँ नहीं पाकर घबराएगा तो बड़ा मजा आएगा.उसकी तलब देखने लायक होगी, और इसका आनन्द मैं जीवन भर याद रखूंगा।

पिता, पुत्र की बात को सुन गम्भीर हुये और बोले ~ बेटा ! किसी गरीब और कमजोर के साथ उसकी जरूरत की वस्तु के साथ इस तरह का भद्दा मजाक कभी न करना. जिन चीजों की तुम्हारी नजरों में कोई कीमत नहीं,वो उस गरीब के लिये बेशकीमती हैं. तुम्हें ये शाम यादगार ही बनानी है, तो आओ .. आज हम इन जूतों में कुछ सिक्के डाल दें और छुप कर देखें कि ... इसका मजदूर पर क्या प्रभाव पड़ता है.पिता ने ऐसा ही किया और दोनों पास की ऊँची झाड़ियों में छुप गए।

मजदूर जल्द ही अपना काम ख़त्म कर जूतों की जगह पर आ गया. उसने जैसे ही एक पैर जूते में डाले उसे किसी कठोर चीज का आभास हुआ, उसने जल्दी से जूते हाथ में लिए और देखा कि ...अन्दर कुछ सिक्के पड़े थे।

उसे बड़ा आश्चर्य हुआ और वो सिक्के हाथ में लेकर बड़े गौर से उन्हें देखने लगा.फिर वह इधर-उधर देखने लगा कि उसका मददगार शख्स कौन है ? दूर-दूर तक कोई नज़र नहीं आया, तो उसने सिक्के अपनी जेब में डाल लिए. अब उसने दूसरा जूता उठाया, उसमें भी सिक्के पड़े थे,मजदूर भाव विभोर हो गया।

वो घुटनो के बल जमीन पर बैठ ...आसमान की तरफ देख फूट-फूट कर रोने लगा।

वह हाथ जोड़ बोला हे भगवान् ! आज आप ही किसी रूप में यहाँ आये थे, समय पर प्राप्त इस सहायता के लिए आपका और आपके माध्यम से जिसने भी ये मदद दी,उसका लाख-लाख धन्यवाद।

आपकी सहायता और दयालुता के कारण आज मेरी बीमार पत्नी को दवा और भूखे बच्चों को रोटी मिल सकेगी.तुम बहुत दयालु हो प्रभु ! आपका कोटि-कोटि धन्यवाद।

मजदूर की बातें सुन ... बेटे की आँखें भर आयीं।

पिता ने पुत्र को सीने से लगाते हुयेे कहा ~क्या तुम्हारी मजाक मजे वाली बात से जो आनन्द तुम्हें जीवन भर याद रहता उसकी तुलना में इस गरीब के आँसू और दिए हुये आशीर्वाद तुम्हें जीवन पर्यंत जो आनन्द देंगे वो उससे कम है, क्या ?

    बेटे ने कहा पिताजी .. आज आपसे मुझे जो सीखने को मिला है, उसके आनंद को मैं अपने अंदर तक अनुभव कर रहा हूँ. अंदर में एक अजीब सा सुकून है।

आज के प्राप्त सुख और आनन्द को मैं जीवन भर नहीं भूलूँगा. आज मैं उन शब्दों का मतलब समझ गया जिन्हें मैं पहले कभी नहीं समझ पाया था.आज तक मैं मजा और मस्ती-मजाक को ही वास्तविक आनन्द समझता था, पर आज मैं समझ गया हूँ कि *लेने की अपेक्षा देना कहीं अधिक आनंददायी है।*

आइए हम भी इस कहानी के माध्यम से *स्वयं तथा अपने बच्चों को ऐसी शिक्षा दें ,कि कभी भी किसी भी परिस्थिति में किसी का मजाक ना उड़ाएं। अगर आनंद लेना ही है तो परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप में किसी की सहायता करके लें। वह आनंद आपको तथा जिस की सहायता की उसको जिंदगी भर नहीं भूलेगा, तथा आपको परोक्ष रूप में आशीर्वाद देगा वह अलग है*

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*Tarot Daddu – Dr. Darshan Bangia* TRN कहते हैं: "हर कहानी सिर्फ शब्दों का मेल नहीं होती, बल्कि कई गहरी अनुभव और आत्मिक सीख से भरी होती है। 👇🏻👇🏻

1️⃣ सच्चा आनंद देने में है, लेने में नहीं

क्षणिक मज़ाक कुछ पल की हँसी दे सकता है, लेकिन किसी की मदद करने से जो आशीर्वाद और संतोष मिलता है, वह जीवन भर साथ रहता है। देने का सुख स्थायी होता है।

2️⃣ संवेदनशीलता ही असली संस्कार है

जो वस्तु हमें साधारण लगती है, वही किसी और की सबसे बड़ी आवश्यकता हो सकती है। बच्चों के मन में यह भाव डालना ज़रूरी है कि हर व्यक्ति की परिस्थिति अलग होती है — इसलिए व्यवहार में करुणा होनी चाहिए।

3️⃣ मज़ाक और अपमान में फर्क समझना जरूरी है

मनोरंजन तब तक ठीक है जब तक किसी की गरिमा आहत न हो। किसी गरीब या कमजोर की मजबूरी को हास्य बनाना चरित्र की कमी दर्शाता है।

4️⃣ छोटी सहायता भी बड़ा बदलाव ला सकती है

कुछ सिक्कों की कीमत कम हो सकती है, लेकिन सही समय पर मिली सहायता किसी के जीवन में आशा जगा सकती है। मदद का आकार नहीं, उसका भाव महत्वपूर्ण होता है।

5️⃣ बच्चों को व्यवहार से शिक्षा दें

उपदेश से अधिक प्रभाव उदाहरण का होता है। पिता ने समझाया नहीं, करके दिखाया — और वही सीख बेटे के हृदय में उतर गई। संस्कार शब्दों से नहीं, कर्म से बनते हैं।

---*शुभ वंदन

TRN LIVE: . 🕉️ शिवरात्रि व्रत कथा🕉️

प्राचीन काल में, किसी जंगल में एक गुरुद्रुह नाम का एक शिकारी रहता था जो जंगली जानवरों का शिकार करता तथा अपने परिवार का भरण-पोषण किया करता था। 

          एक बार शिव-रात्रि के दिन जब वह शिकार के लिए निकला, पर संयोगवश पूरे दिन खोजने के बाद भी उसे कोई शिकार न मिला। उसके बच्चों, पत्नी एवं माता-पिता को भूखा रहना पड़ेगा इस बात से वह चिंतित हो गया।

          सूर्यास्त होने पर वह एक जलाशय के समीप गया, और वहाँ एक घाट के किनारे एक पेड़ पर थोड़ा सा जल पीने के लिए लेकर, चढ़ गया। उसे पूरी उम्मीद थी कि कोई न कोई जानवर अपनी प्यास बुझाने के लिए यहाँ जरूर आयेगा। 

          वह पेड़ ‘बेल-पत्र’ का था और उसी पेड़ के नीचे शिवलिंग भी था जो सूखे बेलपत्रों से ढके होने के कारण दिखाई नहीं दे रहा था।

          रात का पहला प्रहर बीतने से पहले एक हिरणी वहाँ पर पानी पीने के लिए आई। उसे देखते ही शिकारी ने अपने धनुष पर बाण साधा। 

          ऐसा करने में, उसके हाथ के धक्के से कुछ पत्ते एवं जल की कुछ बूँदे नीचे बने शिवलिंग पर गिरीं और अनजाने में ही शिकारी की 

#पहलेप्रहर की पूजा हो गयी। 

          हिरणी ने जब पत्तों की खड़खड़ाहट सुनी, तो घबरा कर ऊपर की ओर देखा, और भयभीत हो कर, शिकारी से, काँपते हुए स्वर में बोली–मुझे मत मारो।’ 

          शिकारी ने कहा–‘‘वह और उसका परिवार भूखा है इसलिए वह उसे नहीं छोड़ सकता।’ 

          हिरणी ने वादा किया कि वह अपने बच्चों को अपने स्वामी को सौंप कर लौट आयेगी। तब वह उसका शिकार कर ले। 

 शिकारी को उसकी बात का विश्वास नहीं हो रहा था। 

          उसने फिर से शिकारी को यह कहते हुए अपनी बात का भरोसा करवाया कि जैसे #सत्य पर ही #धरती टिकी है; समुद्र मर्यादा में रहता है और झरनों से जल-धाराएँ गिरा करती हैं वैसे ही वह भी सत्य बोल रही है। क्रूर होने के बावजूद भी, शिकारी को उस पर दया आ गयी और उसने ‘जल्दी लौटना’ कहकर, उस हिरनी को जाने दिया।

          थोड़ी ही देर बाद एक और हिरनी वहाँ पानी पीने आई, शिकारी सावधान हो गया, तीर साधने लगा और ऐसा करते हुए, उसके हाथ के धक्के से फिर पहले की ही तरह थोडा जल और कुछ बेलपत्र नीचे शिवलिंग पर जा गिरे और अनायास ही शिकारी की #दूसरेप्रहर की पूजा भी हो गयी। 

          इस हिरनी ने भी भयभीत हो कर, शिकारी से जीवनदान की याचना की लेकिन उसके अस्वीकार कर देने पर, हिरनी ने उसे लौट आने का वचन, यह कहते हुए दिया कि उसे ज्ञात है कि जो वचन दे कर पलट जाता है, उसका अपने जीवन में संचित पुण्य नष्ट हो जाया करता है। उस शिकारी ने पहले की तरह, इस हिरनी के वचन का भी भरोसा कर उसे जाने दिया।

          अब तो वह इसी चिन्ता से व्याकुल हो रहा था कि उनमें से शायद ही कोई हिरनी लौट के आये और अब उसके परिवार का क्या होगा। 

          इतने में ही उसने जल की ओर आते हुए एक हिरण को देखा, उसे देखकर शिकारी बड़ा प्रसन्न हुआ। अब फिर धनुष पर बाण चढाने से उसकी तीसरे प्रहर की पूजा भी स्वतः ही सम्पन्न हो गयी लेकिन पत्तों के गिरने की आवाज से वह हिरन सावधान हो गया। 

          उसने शिकारी को देखा और पूछा–‘तुम क्या करना चाहते हो ?’ 

          शिकारी बोला–‘अपने कुटुम्ब को भोजन देने के लिए तुम्हारा वध करूँगा।’ 

          वह मृग प्रसन्न हो कर कहने लगा–‘मैं धन्य हूँ कि मेरा यह शरीर किसी के काम आएगा, परोपकार से मेरा जीवन सफल हो जायेगा पर कृपया कर अभी मुझे जाने दो ताकि मैं अपने बच्चों को उनकी माता के हाथ में सौंप कर और उन सबको धीरज बँधा कर यहाँ लौट आऊँ।’ 

          #शिकारी का हृदय, उसके पापपुंज नष्ट हो जाने से अब तक शुद्ध हो गया था इसलिए वह विनय पूर्वक बोला–‘जो-जो यहाँ आये, सभी बातें बनाकर चले गये और अभी तक नहीं लौटे, यदि तुम भी झूठ बोलकर चले जाओगे, तो मेरे परिजनों का क्या होगा ?’ 

          अब #हिरन ने यह कहते हुए उसे अपने #सत्य बोलने का भरोसा दिलवाया कि यदि वह लौटकर न आये; तो उसे वह पाप लगे जो उसे लगा करता है जो सामर्थ्य रहते हुए भी दूसरे का उपकार नहीं करता। शिकारी ने उसे भी यह कहकर जाने दिया कि ‘शीघ्र लौट आना।’

          #रात्रि का अन्तिम प्रहर शुरू होते ही उस शिकारी के हर्ष की सीमा न थी क्योंकि उसने उन सब हिरन-हिरनियों को अपने बच्चों सहित एकसाथ आते देख लिया था। 

          उन्हें देखते ही उसने अपने धनुष पर बाण रखा और पहले की ही तरह उसकी #चौथेप्रहर की भी शिव-पूजा सम्पन्न हो गयी। 

          अब उस शिकारी के शिव कृपा से सभी पाप भस्म हो गये इसलिए वह सोचने लगा–‘ओह, ये पशु धन्य हैं जो ज्ञानहीन हो कर भी अपने शरीर से परोपकार करना चाहते हैं लेकिन धिक्कार है मेरे जीवन को कि मैं अनेक प्रकार के कुकृत्यों से अपने परिवार का पालन करता रहा।’

          अब उसने अपना #बाण रोक लिया तथा मृगों से कहा की वे सब धन्य है तथा उन्हें वापिस जाने दिया। उसके ऐसा करने पर भगवान् शंकर ने प्रसन्न हो कर तत्काल उसे अपने दिव्य स्वरूप का दर्शन करवाया तथा उसे सुख-समृद्धि का वरदान देकर ‘#गुह’ नाम प्रदान किया।

          शिवजी जटाओं में गंगाजी को धारण करने वाले, सिर पर चन्द्रमा को सजाने वाले, मस्तक पर त्रिपुण्ड तथा तीसरे नेत्र वाले, कण्ठ में कालपाश (नागराज) तथा रुद्राक्ष-माला से सुशोभित, हाथ में डमरू और त्रिशूल है। 

          भक्तगण बड़ी श्रद्धा से जिन्हें शिवशंकर, शंकर, भोलेनाथ, महादेव, भगवान् आशुतोष, उमापति, गौरीशंकर, सोमेश्वर, महाकाल, ओंकारेश्वर, वैद्यनाथ, नीलकण्ठ, त्रिपुरारि, सदाशिव तथा अन्य सहस्त्रों नामों से सम्बोधित कर उनकी पूजा-अर्चना किया करते हैं। 

          ऐसे भगवान् शिव एवं शिवा हम सबके चिन्तन को सदा-सदैव सकारात्मक बनायें एवं सबकी मनोकामनाएँ पूरी करें।

                         

        ॥ॐ नमः शिवाय्॥

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TRN LIVE: *"अंतिम घड़ी में किसी को कोई ओ. टी. पी. (मौका) नहीं मिलता... यदि मिल भी जाए तो, वह व्यक्ति पूरी ज़िंदगी के गलत कर्मों को तुरन्त कैसे खत्म कर सकता है!? और अंतिम घड़ियों में कितना आनंद ले सकता है"!*

*जिस व्यक्ति के जीवन का आधार प्रशंसा, बल और पैसा ही बन गया हो, उसके अंदर से करुणा, न्याय और सत्य जैसे गुण पूर्णतः गायब हो जाते हैं, इसीलिए तो...*

*कहते हैं कि हो सकता है कुछ चीजें आपको अभी अत्यधिक लुभावनी लगती हो, लेकिन...*

*ध्यान रहे कि वही चीजें भविष्य में कष्टदायक सिद्ध हो सकती हैं, इसलिए, आपको ऐसी चीजों से सतर्क रहते हुए एहतियात बरतनी चाहिए |||*

 *हरे कृष्ण*🙏🙏

[TRN LIVE: *Honey Benefits - शहद: कफ का सबसे बड़ा शामक, पर सिर्फ कफ तक सीमित नहीं -*

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Honey Benefits - शहद: कफ का सबसे बड़ा शामक, पर सिर्फ कफ तक सीमित नहीं - वात-पित्त-कफ का शमन करता है शहद - जब भी आयुर्वेद में वात-पित्त-कफ की बात होती है तो तीन बेसिक चीजें लगभग हर आचार्य बताते हैं –

वात के लिए तेल,

पित्त के लिए घी,

और कफ के लिए शहद।

तेल और घी पर बहुत चर्चा हो चुकी है, लेकिन शहद को लोग अक्सर सिर्फ “मीठी चीज” समझकर छोड़ देते हैं। जबकि आयुर्वेद में मधु यानी शहद को बहुत गहराई से समझाया गया है। यह सिर्फ खांसी की दवा नहीं है, बल्कि पूरे शरीर पर काम करने वाली एक खास औषधि है।

इस पोस्ट में हम शहद को आयुर्वेद की नजर से समझेंगे – उसका स्वभाव क्या है, शरीर में क्या काम करता है, किन रोगों में उपयोगी है और कैसे लेना चाहिए।

शहद गर्म है या ठंडा?

ज्यादातर लोग तुरंत बोल देंगे – शहद तो गर्म होता है।

लेकिन आयुर्वेद कहता है – शहद शीतल है।

भावप्रकाश निघंटु में सबसे पहले शब्द आता है – “मधु शीतलम्”। यानी शहद का स्वभाव ठंडा है।

अब यहां कन्फ्यूजन क्यों होता है? क्योंकि शहद कफ कम करता है, और लोग मान लेते हैं कि जो कफ कम करे वो गर्म होगा। लेकिन शहद की खासियत ये है कि उसका प्रभाव कफहर है, पर स्वभाव शीतल है।

शहद के मुख्य गुण

आयुर्वेद शहद को कई शब्दों में समझाता है:

लघु – हल्का, जल्दी पचने वाला

रुक्ष – शरीर में जमा चिकनाई और कफ को कम करने वाला

ग्राही – ढीलापन या अत्यधिक स्राव को रोकने वाला

लेखन – जमा हुआ मेद और कफ को खुरचने वाला

सूक्ष्म – शरीर के बहुत सूक्ष्म स्तर तक पहुंचने की क्षमता

योगवाही – साथ ली गई औषधि को गहराई तक पहुंचाने वाला

यानी शहद सिर्फ मीठा नहीं है, बल्कि शरीर के चैनल्स को साफ करने और संतुलन बनाने का काम करता है।

आंखों के लिए शहद

आयुर्वेद में शहद को “चक्षुष्य” कहा गया है – यानी आंखों के लिए हितकारी।

त्रिफला, घी और शहद का संयोजन आंखों के लिए क्लासिक माना जाता है। कई नेत्र रोगों में शहद को औषधि के रूप में दिया जाता है – कभी आंतरिक सेवन में, कभी बाहरी प्रयोग में।

गले और आवाज के लिए

शहद “स्वर्य” है – आवाज को साफ और मधुर बनाता है।

जो लोग ज्यादा बोलते हैं – टीचर, स्पीकर, गायक, एंकर – उनके लिए शहद बहुत उपयोगी है।

गले में कफ जमा हो, आवाज बैठती हो, बार-बार खराश हो – तो शहद लाभ देता है।

घाव भरने की शक्ति

आयुर्वेद में शहद को “व्रण शोधन” और “व्रण रोपण” कहा गया है।

मतलब –

घाव को साफ भी करता है

और भरता भी है

पुराने समय में युद्ध के घावों में शहद लगाया जाता था। आधुनिक research में भी पाया गया है कि शहद में मजबूत एंटीसेप्टिक और हीलिंग गुण होते हैं।

बाहरी घाव हो या अंदरूनी अल्सर – शहद दोनों में उपयोगी है।

त्वचा और रंग पर प्रभाव

शहद त्वचा को मुलायम बनाता है।

रंग निखारने में मदद करता है।

स्किन डिसऑर्डर जैसे एक्जिमा, खुजली, दाद, सोरायसिस आदि में उपयोगी है।

शहद का बाहरी लेप और आंतरिक सेवन – दोनों तरीके से फायदा मिलता है।

मोटापा और ब्लॉकेज में

शहद का एक बड़ा गुण है “लेखन” – यानी जमा हुआ मेद कम करना।

फैटी लीवर, मोटापा, ब्लॉकेज जैसी स्थितियों में शहद को उपयोगी बताया गया है।

यह शरीर के स्रोतों को साफ करने में मदद करता है।

लेकिन ध्यान रहे – शहद को कभी गर्म करके नहीं लेना है।

गुनगुने नहीं, बल्कि गर्म करके ठंडे किए हुए पानी में लेना चाहिए।

डायबिटीज में शहद?

यह सबसे बड़ा सवाल है।

शहद मीठा है, लेकिन आयुर्वेद में प्रमेह (डायबिटीज) की कई अवस्थाओं में शहद का उपयोग बताया गया है, खासकर शुरुआती स्टेज में।

लेकिन यहां शर्त है – शुद्ध शहद और सीमित मात्रा।

खांसी, दमा और हिचकी

शहद कास (खांसी), श्वास (दमा) और हिक्का (हिचकी) – इन तीनों में उपयोगी है।

सूखी खांसी हो या कफ वाली खांसी – दोनों में शहद अच्छा काम करता है।

सीने में जमा कफ को बाहर निकालने में मदद करता है।

दस्त और कब्ज – दोनों में कैसे?

यहां शहद का ग्राही और लेखन गुण काम करता है।

दस्त में – ढीलापन रोकता है।

कब्ज में – जमा मल को निकालने में सहायक होता है।

इसलिए शहद को संतुलनकारी माना गया है।

कितनी मात्रा लें?

आयुर्वेद साफ कहता है – शहद अल्प मात्रा में लें।

आधे से एक चम्मच एक बार में काफी है।

दिन में दो से तीन चम्मच से ज्यादा नहीं।

अधिक मात्रा में लिया गया शहद पच न पाए तो गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।

कैसे लें?

सीधे एक चम्मच

औषधि के साथ मिलाकर

ठंडे या गर्म करके ठंडे किए पानी में

लेकिन कभी भी शहद को गर्म नहीं करना है।

गर्म पानी में डालकर नहीं पीना है।

धूप से आकर तुरंत नहीं लेना है।

गर्म भोजन के साथ नहीं लेना है।

आयुर्वेद में गर्म शहद को विष के समान कहा गया है।

पुराना शहद ज्यादा गुणकारी

आयुर्वेद में पांच चीजें ऐसी बताई गई हैं जो पुरानी होने पर ज्यादा गुणकारी होती हैं।

शहद उनमें से एक है।

पुराना शहद मेदहर और कफहर प्रभाव में ज्यादा ताकतवर होता है।

Conclusion

शहद सिर्फ खांसी की दवा नहीं है।

यह –

कफ शामक है

घाव भरता है

मोटापा कम करता है

स्किन सुधारता है

गले को ठीक करता है

आंखों के लिए उपयोगी है

और औषधियों को गहराई तक पहुंचाता है

लेकिन शर्त सिर्फ एक है –

सही मात्रा

सही तरीके से

और सही कंडीशन में

तभी शहद औषधि है।

वरना वही शहद समस्या भी बन सकता है।

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ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

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TRN LIVE: *नागरमोथा, जिसे अंग्रेज़ी में Nut Grass और आयुर्वेद में "मुस्ता" भी कहा जाता है*

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नागरमोथा, जिसे अंग्रेज़ी में Nut Grass और आयुर्वेद में "मुस्ता" भी कहा जाता है, एक अत्यंत गुणकारी औषधीय पौधा है। यह पौधा अक्सर खेतों, बगीचों और खाली ज़मीन पर खरपतवार की तरह उग जाता है, इसलिए लोग इसे बेकार समझकर निकाल देते हैं, जबकि इसकी जड़ों में औषधीय गुणों का खज़ाना छिपा होता है। आयुर्वेद में नागरमोथा का उपयोग हजारों वर्षों से किया जा रहा है। इसकी जड़ें पाचन तंत्र को मजबूत करने, गैस, अपच और दस्त जैसी समस्याओं में बहुत लाभकारी मानी जाती हैं। 

✅️ नागरमोथा के अद्भुत औषधीय फायदे जानिए —

1️⃣ पाचन तंत्र के लिए वरदान :-

पाचन के लिए नागरमोथा अत्यंत लाभकारी है। इसमें भूख बढ़ाने और पाचन सुधारने वाले गुण पाए जाते हैं। यह मंदाग्नि यानी कम भूख लगने की समस्या को दूर करता है, दस्त और पेट की मरोड़ में राहत देता है और पेट के हानिकारक कीड़ों को खत्म करने में मदद करता है। पाचन समस्याओं में इसे शहद या गुनगुने पानी के साथ लेना सबसे सरल और असरदार तरीका है।

2️⃣ वजन घटाने में सहायक :-

वजन नियंत्रण में भी नागरमोथा उपयोगी है। इसमें एंटी-ओबेसिटी गुण होते हैं जो शरीर में जमा हुए अतिरिक्त फैट को कम करने में मदद करते हैं।

3️⃣ महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं में मदद :-

महिलाओं के स्वास्थ्य में भी इसका विशेष महत्व है। मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द को कम करने में यह सहायक है और अनियमित पीरियड्स को संतुलित करने में मदद करता है।

4️⃣ त्वचा और सौंदर्य के लिए लाभकारी :-

त्वचा और सौंदर्य के लिए भी नागरमोथा काफी लाभकारी है। इसकी खुशबू और एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा को साफ और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। मुँहासे और दाग-धब्बे कम करने के लिए इसका लेप लगाया जा सकता है, जबकि खुजली और त्वचा संक्रमण होने पर इसके काढ़े से प्रभावित हिस्से को धोना लाभकारी होता है।

5️⃣ बुखार कम करने में सहायक :-

इसके अलावा, नागरमोथा बुखार को कम करने में भी प्रभावी माना जाता है। पुराने या बार-बार आने वाले बुखार में इसका काढ़ा शरीर के तापमान को सामान्य करने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

✅️ नागरमोथा का कौन सा भाग इस्तेमाल किया जाता है?

नागरमोथा में औषधीय गुण मुख्य रूप से इसकी जड़ और उससे बनने वाले छोटे गांठ वाले ट्यूबर (tubers) में पाए जाते हैं। इसे आयुर्वेद में सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है।

■ जड़ और ट्यूबर :- सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला भाग है। इन्हें सुखाकर या ताजा रूप में चूर्ण, काढ़ा, तेल या लेप बनाने में उपयोग किया जाता है।

■ पत्तियां और तना :- इनका औषधीय उपयोग कम होता है और मुख्यतः जड़ की तुलना में विशेष असर नहीं होता है।

✅️ नागरमोथा का उपयोग कैसे करें —

1) चूर्ण :- 1–3 ग्राम चूर्ण को शहद या गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है।

2) काढ़ा :- 10–20 ml दिन में दो बार सेवन कर सकते है।

3) लेप :- त्वचा रोगों के लिए पानी के साथ पेस्ट बनाकर प्रभावित हिस्से पर लगा सकते है।

⚠️ सावधानियाँ —

किसी भी जड़ी-बूटी का नियमित सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है, खासकर यदि आप गर्भवती हैं या किसी विशेष दवा का सेवन कर रहे हैं।

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TRN LIVE: *क्या भिंडी स्वास्थ्य के लिए अच्छी है?*

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भिंडी, जिसे भिंडी के नाम से भी जाना जाता है, एक लोकप्रिय सब्जी है जिसका उपयोग अक्सर दुनिया भर में स्टू, करी और सूप में किया जाता है। यह एक अविश्वसनीय रूप से स्वस्थ भोजन है, जो आवश्यक विटामिन और खनिजों से भरपूर है। वास्तव में, इसे इसके कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है, जैसे हृदय रोग और मधुमेह के जोखिम को कम करना, पाचन में सहायता करना, दृष्टि में सुधार करना और त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ावा देना।

भिंडी की उच्च फाइबर सामग्री इसकी सबसे बड़ी खूबियों में से एक है, केवल एक कप पकी हुई भिंडी लगभग 7 ग्राम फाइबर प्रदान करती है। यह आपके पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है, साथ ही आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी मदद करता है। यह विटामिन सी, विटामिन के, कैल्शियम और आयरन का भी अच्छा स्रोत है, जो इसके पोषण मूल्य को बढ़ाता है।

भिंडी के अद्भुत स्वास्थ्य लाभों का लाभ उठाने का एक तरीका यह है कि इसे अन्य सब्जियों, जड़ी-बूटियों और मसालों के साथ पकाकर स्वादिष्ट और पौष्टिक करी बनाई जाए। भिंडी पकवान में एक अनूठी बनावट और स्वाद जोड़ती है, जबकि सब्जियों और जड़ी-बूटियों में मौजूद पोषक तत्व आपके आहार में विविधता लाने में मदद करते हैं।

भिंडी को कच्चा भी खाया जा सकता है, या तो इसे सलाद में मिलाया जा सकता है या नाश्ते के रूप में खाया जा सकता है। हल्का स्वाद इसका आनंद लेना आसान बनाता है, जबकि उच्च फाइबर सामग्री आपको लंबे समय तक तृप्त रखने में मदद करती है। इसे कच्चा खाने से यह भी सुनिश्चित होता है कि आपको इसमें मौजूद सभी विटामिन और खनिज मिलते हैं, जिससे यह एक अविश्वसनीय रूप से पौष्टिक नाश्ता बन जाता है।

कुल मिलाकर, भिंडी कई स्वास्थ्य लाभों के साथ एक अविश्वसनीय रूप से स्वस्थ भोजन है। इसमें मौजूद फाइबर आपके पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है, जबकि इसमें मौजूद विटामिन और खनिज इसे विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के लिए एक बढ़िया विकल्प बनाते हैं। और यदि आप नाश्ते के लिए कुछ ढूंढ रहे हैं, तो कुरकुरी भिंडी पैकेज्ड, प्रसंस्कृत स्नैक्स का एक बढ़िया विकल्प है। तो, अगली बार जब आप किराने की दुकान पर हों, तो कुछ भिंडी लेना सुनिश्चित करें और इसके सभी अद्भुत स्वास्थ्य लाभों का आनंद लें!

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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।

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TRN LIVE: *बड़े काम का तिमूर, औषधीय तत्व के साथ-साथ इसकी लकड़ी का भी धार्मिक महत्व है।*

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1​.पायरिया से दिलाए छुटकारा

2​.ब्लड प्रेशर करे कंट्रोल

3​.मुंह की बदबू करे दूर

4​.एंटीसेप्टिक का काम करती है पहाड़ी नीम

5​.पेट से जुडी बीमारियों को करे इलाज

उत्तराखण्ड के पहाड़ी इलाकों में बहुतायत से पाया जाने वाला तिमूर वास्तव में बहुपयोगी है। अलग-अलग जगहों पर इसके नाम के साथ थोड़ा फेरबदल जरूर है मगर है यह बहुत काम की चीज। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो यह रूटेसी परिवार से है, इसका वैज्ञानिक नाम जेंथेजाइलम अरमेटम हैं। कुमाऊं में इसे तिमुर, गढ़वाल में …

उत्तराखण्ड के पहाड़ी इलाकों में बहुतायत से पाया जाने वाला तिमूर वास्तव में बहुपयोगी है। अलग-अलग जगहों पर इसके नाम के साथ थोड़ा फेरबदल जरूर है मगर है यह बहुत काम की चीज। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो यह रूटेसी परिवार से है, इसका वैज्ञानिक नाम जेंथेजाइलम अरमेटम हैं। कुमाऊं में इसे तिमुर, गढ़वाल में टिमरू, संस्कृत में तुम्वरु, तेजोवटी, जापानी में किनोमे, नेपाली में टिमूर यूनानी में कबाबए खंडा, हिंदी में तेजबल, नेपाली धनिया आदि नामों से जाना जाता है।

तिमूर समुद्र तल से तकरीबन 8.10 मीटर ऊंचाई पर पाया जाता है। इसके पेड़ का प्रत्येक हिस्सा औषधीय गुणों से युक्त है। तना, लकड़ी, छाल, फूल, पत्ती से लेकर बीज तक हर चीज औषधी के काम में लायी जाती है।

उत्तराखंड के पहाड़ में कांटेदार टिमरू अधिकतर जगहों पर पाया जाने वाला पेड़ है। यह दवाईयों के साथ कई अन्य मामलों में भी इसका इस्तेमाल होता है। बदरीनाथ तथा केदारनाथ में इसकी टहनी को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। उत्तराखंड के सभी जिलों में टिमरू अधिकांश मात्रा में पाया जाता है। इसकी प्रमुख रूप से पांच प्रजातियां उत्तराखंड में पाई जाती हैंए जिसका वानस्पतिक नाम जैन्थोजायलम एलेटम है।

दांतों के लिए यह काफी फायदेमंद है इसका प्रयोग दंत मंजन, दंत लोशन व बुखार की दवा के रूप में काम में लाया जाता है। इसका फल पेट के कीड़े मारने व हेयर लोशन के काम में भी लाया जाता है। कई दवाइयों में इसके पेड़ का प्रयोग किया जाता है। इसके मुलायम टहनियों को दातुन की तरह इस्तेमाल करने से चमक आती है।

यह मसूड़ों की बीमारी के लिए भी रामबाण का काम करता है। उत्तराखंड के गांव में आज भी कई लोग इसकी टहनियों से ही दंतमंजन करते हैं। टिमरू औषधीय गुणों से युक्त तो है ही, साथ ही इसका धार्मिक व घरेलू महत्व भी है। हिन्दुओं प्रसिद्ध धाम बदरीनाथ तथा केदारनाथ में प्रसाद के तौर पर चढ़ाया जाता है। यही नहीं गांव में लोंगो की बुरी नजर से बचने के लिए इसके तने को काटकर अपने घरों में भी रखते हैं। गांव में लोग इसके पत्ते को गेहूं के बर्तन में डालते हैं, क्योंकि इससे गेहूं में कीट नहीं लगते।

इसके बीज मुंह को तरोताजा रखने के अलावा पेट की बीमारियों के लिए भी फायदेमंद हैं। इसकी लकड़ी हाई ब्लड प्रेशर में बहुत कारगर है, इसकी कांटेदार लकड़ी को साफ करके हथेली में रखकर दबाया जाए तो ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। तिमूर के बीज अपने बेहतरीन स्वाद और खुशबू की वजह से मसाले के तौर पर भी इस्तेमाल किये जाते हैं। हमारे यहां तिमूर से सिर्फ चटनी बनायी जाती है लेकिन यह चाइनीज, थाई और कोरियन व्यंजन में बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला मसाला है

शेजवान पेप्पर चाइनीज पेप्पर के नाम से जाना जाने वाला यह मसाला चीन के शेजवान प्रान्त की विश्वविख्यात शेजवान डिशेज का जरूरी मसाला है। मिर्च की लाल काली प्रजातियों से अलग इसका स्वाद अलग ही स्वाद और गंध लिए होता है। इसका ख़ास तरह का खट्टा मिंट फ्लेवर जुबान को हलकी झनझनाहट के साथ अलग ही जायका देता है। चीन के अलावा, थाईलेंड, नेपाल, भूटान और तिब्बत में भी तिमूर का इस्तेमाल मसाले और दवा के रूप में किया जाता है।

इन देशों में कई व्यंजनों को शेजवान सॉस के साथ परोसा भी जाता है। तिमूर की लकड़ी का अध्यात्मिक महत्त्व भी है। इसकी लकड़ी को शुभ माना जाता है। जनेऊ के बाद बटुक जब भिक्षा मांगने जाता है तो उसके हाथ में तिमूर का डंडा दिया जाता है। तिमूर की लकड़ी को मंदिरों, देव थानों और धामों में प्रसाद के रूप में भी चढ़ाया जाता है।

इन 5 बीमारियों का काल है पहाड़ी नीम (तिमूर), इस तरह लेने पर होता है जादुई असर

तिमूर या पहाड़ी नीम औषधीय गुणों से भरपूर है। यह पहाड़ पर पाया जाने वाला पौधा है जो हाई बीपी से लेकर कई छोड़ी-बड़ी बीमार‍ियों को दूर करने के काम आता है।

पाइरिया से छुटकारा

इस पहाड़ी नीम की छाल का प्रयोग पायरिया को दूर करने के लिये किया जाता है। इसके लिये इसकी लकड़ी को दातुन कि तरह चबाते हैं। पहाड़ों में जब कई साल पहले मंजन आदि नहीं हुआ करता था तब वहां के लोग इसका प्रयोग दांत साफ करने में करते थे।

ब्लड प्रेशर करे कंटोल

तिमूर के बीजों में पोटैशियम की मात्रा भरपूर्ण होती है इसलिए इन्‍हें खाने से बढ़ा हुआ बीपी कंट्रोल रहता है। बता दें कि तिमूर की टहनियां भी कांटेदार होती हैं। इसकी टहनी के कांटों को एक्यूपंक्चर के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है, जिससे बढ़ा हुआ ब्‍लड प्रेशर तुरंत घट जाता है।

मुंह की बदबू करे दूर

तिमूर के बीज मुंह में डाल कर चबाने से पिपरमिंट जैसा स्‍वाद आता है। इससे मुंह की गंदी बदबू दूर होती है। रोज रात को खाना खाने के बाद अगर इनके बीजो को चबाया जाए तो मसूड़े भी मजबूत होते हैं।

​एंटीसेप्टिक का काम करती है पहाड़ी नीम

इस पेड़ के पत्‍तों में एक खास तत्‍व पाया जाता है जो कि एंटीसेप्टिक का काम करता है। शरीर पर कहीं चोट लगने या फिर छिल जाने पर इसकी पत्‍तियों का लेप लगाने से छोट जल्‍द ठीक हो जाती है। यहां तक कि उस चोट का निशान भी नहीं पड़ता।

​पेट से जुडी बीमारियों को करे इलाज

इस पेड़ के बीजों का प्रयोग मसालों के रूप में किया जाता है। इससे पेट और पाचन से जुड़ी तमाम बीमारियां दूर होती हैं। यदि आपको कब्‍ज या दस्‍त की समस्‍या भी है तो तिमूर के बीज लाभ पहुंचाएंगे।

​मसालों की तरह करें इस्‍तेमाल

पहाड़ी लोग खाने बनाने के लिये तिमूर के बीजों का इस्‍तेमाल मसाले के रूप में करते हैं। यही नहीं इसकी चटनी भी बनाई जाती है जो खाने में बेहद स्‍वादिष्‍ट लगती है।

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   *🪷🪷।। शुभ वंदन ।।🪷🪷*ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।

सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।

मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

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TRN LIVE0: 🔹बीमारी क्या खबर देती हैं ?🔹

🔹जो भी बिमारी आती है वह खबर देती है कि तुम खान-पान में संयम करो। पेट बाहर है तो हफ्ते में एकाध उपवास करो अथवा १५ दिन में एकादशी का व्रत रखो। कुछ नही खाओ, केवल नीबूं पानी अथवा गुनगुना पानी पियो। लड़्घनं परमौषधम ।.....अर्धरोगहरि निद्रा सर्वरोगहरि क्षुधा। उपवास और आराम बीमारियों को खा जायेगा। व्यक्ति दवाई से इतना जल्दी ठीक नहीं होता जितना उपवास से ठीक होता हैं।

🔹उपवास में कमजोरी लगे तो १५ से २५ ग्राम किशमिश धो के खा लो, बस हो गया। सारी बीमारी निकल जाती हैं। द्राक्ष, किशमिश लोग ऐसे ही खा लेते हैं। इन पर जंतुनाशक दवा डालते हैं, जो कि जहरी, हानिकारक होती हैं। इन्हें ३-४ बार अच्छी तरह धोकर ही खाना चाहिए। कभी गोमूत्र (या गोमूत्र अर्क) की कुछ बूँदे पानी में डाल के उससे भी धो सकते हैं।

🔹प्राणायाम करो, सूर्यनारायण को अर्ध्य दो और नाभि पर सूर्यनारायण का ध्यान करो। इससे आरोग्य प्राप्त होता हैं।

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🚨🚨    जय श्री राम

    🚩  हिन्दू राष्ट्र भारत 🚩

TRN LIVE: 🌺 पंचम मन्वंतर (रैवत मन्वंतर) – 🌺

हिंदू धर्म के अनुसार सृष्टि का संचालन एक दिव्य समय-चक्र के अंतर्गत होता है, जिसे मन्वंतर कहा जाता है। एक कल्प में कुल 14 मन्वंतर होते हैं और प्रत्येक मन्वंतर में एक मनु, देवगण और सप्तर्षि धर्म की स्थापना और सृष्टि-व्यवस्था का संचालन करते हैं 📜

📿 पंचम मन्वंतर को रैवत मन्वंतर कहा जाता है।

👑 पंचम मन्वंतर के मनु – रैवत मनु

🔱 पंचम मन्वंतर के अधिपति रैवत मनु थे।

📖 विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत महापुराण में उन्हें धर्मनिष्ठ, न्यायप्रिय और प्रजावत्सल शासक बताया गया है।

🌿 उन्होंने मानव समाज को

✅ धर्म

✅ नीति

✅ मर्यादा

के आधार पर संगठित किया और सामाजिक संतुलन बनाए रखा।

👨‍👩‍👦 रैवत मनु के माता–पिता

📜 पुराणों में संकेत मिलता है कि —

👑 पिता : राजा प्रियव्रत 

👸 माता : रानी संज्ञा 

✨ दोनों ही वैदिक परंपराओं का पालन करने वाले, धर्मपरायण और सद्गुणी बताए गए हैं। इन्हीं संस्कारों का प्रभाव रैवत मनु के जीवन और शासन में स्पष्ट दिखाई देता है।

🌳 रैवत मनु के पूर्वज (Ancestors)

📌 शास्त्रीय परंपरा के अनुसार रैवत मनु की वंश-परंपरा स्वायंभुव मनु से जुड़ी मानी जाती है।

वंश परंपरा —

🕉️ ब्रह्मा

➡️ स्वायंभुव मनु

➡️ मनु परंपरा की निरंतर श्रृंखला

➡️ रैवत मनु (पंचम मनु)

✨ यह दर्शाता है कि रैवत मनु को अपने पूर्वजों से धर्म, शासन और सामाजिक व्यवस्था का दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ था।

🛕 रैवत मनु के प्रमुख कार्य

✨ धर्म और अधर्म के बीच संतुलन बनाए रखना

✨ सामाजिक नियमों और आचार-संहिता की स्थापना

✨ यज्ञ, तप और वैदिक परंपराओं का संरक्षण

✨ ऋषियों और ब्राह्मणों का सम्मान

✨ प्रजा की रक्षा और न्यायपूर्ण शासन

🕉️ उनके काल में समाज में शांति और धार्मिक चेतना बनी रही।

🌟 पंचम मन्वंतर के देवता और सप्तर्षि

🔱 इस मन्वंतर के देवगण विभू कहलाए।

🧘‍♂️ सप्तर्षि थे —

हिरण्यरोमा, वेदशिरा, ऊर्ध्वबाहु, वेदबाहु, सुधामा, परजनी और महामुनि

📖 इन ऋषियों ने तप, ज्ञान और वेदिक शिक्षाओं द्वारा धर्म का विस्तार किया।

🌿 रैवत मनु के वंशज (Descendants / बंसावली)

📌 धर्मग्रंथों में रैवत मनु के वंशजों के नाम विस्तार से नहीं मिलते, किंतु यह स्पष्ट उल्लेख है कि —

👨‍👩‍👧‍👦 उनके पुत्रों और वंशजों ने

➡️ पृथ्वी के विभिन्न क्षेत्रों में

➡️ धर्मपरायण राजवंशों की स्थापना की।

✨ इन वंशों ने न्याय, मर्यादा और वैदिक संस्कृति को आगे बढ़ाया।

📖 हिंदू धर्मग्रंथों से शास्त्रीय संदर्भ 

🔱 विष्णु पुराण

📜 तृतीय अंश, अध्याय 1–2

➡️ 14 मन्वंतर, रैवत मन्वंतर और रैवत मनु का वर्णन

🌸 श्रीमद्भागवत महापुराण

📜 स्कंध 8, अध्याय 13

➡️ मन्वंतर व्यवस्था, मनु, देवता और सप्तर्षि का विवरण

🐟 मत्स्य पुराण

📜 अध्याय 9–10

➡️ मनुओं की क्रमबद्ध सूची और सृष्टि-चक्र

🌬️ वायु पुराण

📜 पूर्वभाग, अध्याय 57–58

➡️ मनु वंश परंपरा और पूर्वजों का संकेत

🌌 ब्रह्मांड पुराण

📜 अध्याय 1–3

➡️ ब्रह्मांडीय समय-चक्र और मन्वंतर दर्शन

✨ 

🕉️ पंचम मन्वंतर (रैवत मन्वंतर) यह दर्शाता है कि —

👉 सृष्टि एक सुनियोजित दिव्य व्यवस्था से चलती है

👉 मनु केवल शासक नहीं, बल्कि मानवता के मार्गदर्शक होते हैं

👉 धर्म पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रवाहित होता है

TRN LIVE: लीजिए पेश है एक और सच्चाई।

जवाहरलाल नेहरू अभिनेत्री नरगिस के मामा थे। नरगिस की नानी दिलीपा, मंगल पाण्डेय के ननिहाल के राजेन्द्र पाण्डेय की बेटी थीं।

उनकी शादी 1880 में बलिया में हुई थी लेकिन शादी के एक हफ़्ते के अंदर ही उनके पति गुज़र गए थे।

दिलीपा की उम्र उस वक़्त सिर्फ़ 13 साल थी। उस ज़माने में विधवाओं की ज़िंदगी बेहद तक़लीफ़ों भरी होती थी।

ज़िंदगी से निराश होकर दिलीपा एक रोज़ आत्महत्या के इरादे से गंगा की तरफ़ चल पड़ीं, लेकिन रात में रास्ता भटककर मियांजान नाम के एक सारंगीवादक के झोंपड़े में पहुँच गयीं जो तवायफ़ों के कोठों पर सारंगी बजाता था...

मियांजान के परिवार में उसकी बीवी और एक बेटी मलिका थे... वो मलिका को भी तवायफ़ बनाना चाहता था...

दिलीपा को मियांजान ने अपने घर में शरण दी...

और फिर मलिका के साथ साथ दिलीपा भी धीरे धीरे तवायफ़ों वाले तमाम तौर तरीक़े सीख गयीं...

और एक रोज़ चिलबिला की मशहूर तवायफ़ रोशनजान के कोठे पर बैठ गयीं...

रोशनजान के कोठे पर उस ज़माने के नामी वक़ील मोतीलाल नेहरू का आना जाना रहता था...

जिनकी पत्नी पहले बच्चे के जन्म के समय गुज़र गयी थी...

दिलीपा के सम्बन्ध मोतीलाल नेहरू से बन गए...

इस बात का पता चलते ही मोतीलाल के घरवालों ने उनकी दूसरी शादी लाहौर की स्वरूप रानी से करा दी जिनकी उम्र उस वक़्त 15 साल थी...

इसके बावजूद मोतीलाल ने दिलीपा के साथ सम्बन्ध बनाए रखे...

इधर दिलीपा का एक बेटा हुआ जिसका नाम मंज़ूर अली रखा गया...

उधर कुछ ही दिनों बाद 14 नवम्बर 1889 को स्वरूपरानी ने जवाहरलाल नेहरू को जन्म दिया...

साल 1900 में स्वरूप रानी ने विजयलक्ष्मी पंडित को जन्म दिया...

और 1901 में दिलीपा से "जद्दनबाई" पैदा हुईं...

"अभिनेत्री नरगिस" इन्हीं जद्दनबाई की बेटी थीं...

मंज़ूर अली आगे चलकर मंज़ूर अली सोख़्त के नाम से बहुत बड़े मज़दूर नेता बने...

और साल 1924 में उन्होंने यह कहकर देशभर में सनसनी फैला दी कि...

मैं मोतीलाल नेहरू का बेटा और जवाहरलाल नेहरू का बड़ा भाई हूँ...

उधर एक रोज़ लखनऊ नवाब के बुलावे पर जद्दनबाई मुजरा करने लखनऊ गयीं... तो दिलीपा भी उनके साथ थी...

जवाहरलाल नेहरू काँग्रेस के किसी काम से उन दिनों लखनऊ में थे...

उन्हें पता चला तो वो उन दोनों से मिलने चले आए...

दिलीपा जवाहरलाल नेहरू से लिपट गयीं.और रो रोकर मोतीलाल नेहरू का हालचाल पूछने लगीं...

मुजरा ख़त्म हुआ तो जद्दनबाई ने जवाहरलाल नेहरू को राखी बाँधी...

साल 1931 में मोतीलाल नेहरू ग़ुज़रे तो दिलीपा ने अपनी चूड़ियाँ तोड़ डालीं...

और उसके बाद से वो विधवा की तरह रहने लगीं...

गुजरात के वरिष्ठ लेखक रजनीकुमार पंड्या जी की क़िताब ‘आप की परछाईयां’ से साभार 💯 #mahabharat #lovesong #romance #stories #love #NitishKumar #science #viralphoto #reelschallenge #viralvideoシ #Neharuchacha

TRN LIVE: याद कीजिए शाहीन बाग आंदोलन में बुर्केवालियों ने प्रदर्शन के दौरान अपनी जिहादी मानसिकता छुपाने हेतु किस धूर्तता से डॉ आंबेडकर की तस्वीर को ढाल बनाया था

  अब जब एक बुरकेवाली #Malegaon की मेयर बनी है तो उसने पहला काम किया डॉ आंबेडकर की तस्वीर को हटा कर अपने असल हीरो टीपू सुल्तान को टाँग दिया

 यही अल तकैया है

 गौर करने वाली बात है कि शाहीन बाग में लहालोट होनेवाला रवीश कुमार , बंदरिया की तरह संविधान की किताब को सीने से चिपकाए घूमने वाला पप्पू गांधी ,,दलितों का मसीहा बनने की जुगत में जुटा रावण,, टूंटी चोर ,आरफा खाला गैंग सब खामोश हैं ,

महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर राजनीति करने वाली शिवसेना भी शवसेना बनी निष्प्राण पड़ी है

-मनोज कुरील

Recall how the burqa-clad women in the Shaheen Bagh protest cunningly used Dr. Ambedkar's picture as a shield to conceal their jihadist mentality. Now that a burqa-clad woman has become the mayor of #Malegaon, the first thing she did was remove Dr. Ambedkar's picture and hang that of her real hero, Tipu Sultan. This is Al-Taqiyya. It's worth noting that Ravish Kumar, who was in a frenzy at Shaheen Bagh, Pappu Gandhi, who roamed around clutching the Constitution like a monkey, Ravana, who is trying to become the messiah of Dalits, the Toonti Chor, and the Aarfa Khala gang, are all silent.

The Shiv Sena, which used to do politics in the name of Chhatrapati Shivaji Maharaj in Maharashtra, has also become lifeless like the Shiv Sena.

- Manoj Kuril

TRN LIVE: देश के लगभग हर हाईवे का यही हाल है, ट्रक तो छोड़िए अब तो कार वालों तक से अवैध वसूली का प्रयास होता है, कही RTO तो कहीं पुलिस, सारे कागज पूरे होने पर भी गाड़ी खड़ी करवा लेते हैं, जब तक पैसा ना दो तब तक कोई सुनवाई नहीं, फिर GST और Eway Bill का क्या औचित्य?

जब कोई आवाज उठाए तो उसे ही दोषी बता दो, की तुम पैसे मांग रहे थे, पैसे मागे तो FIR क्यों नहीं करवाई ब्लैकलिंग की? रिश्वतखोरों के हौसले इतने बुलंद है कि कुछ किलोमीटर आगे इनके गुंडे भी खड़े रहते हैं, एक फोन पर आगे वो आपको रोक लेंगे और ठीक कर देंगे, भ्रष्टाचार चरम पर है

ये है मोदी का सबका साथ 

और सिर्फ देशद्रोही, हिन्दूद्रोही, भ्रष्टाचारयो, आतंकवादीयो के आकाओं का विकाश...

This is the situation on almost every highway in the country. Forget trucks, now even car owners face attempts to extort money from them. Sometimes it's the RTO, sometimes the police, who stop their vehicles even if they have all the documents. Unless you pay, there's no hearing. So what's the point of GST and the E-way Bill?

When someone raises their voice, blame them, saying, "You were demanding money. Why didn't you file an FIR for blackmailing if you demanded money?" The bribe-takers' courage is so high that their goons are stationed a few kilometers ahead. With a single phone call, they'll stop you and fine you. Corruption is rampant.

TRN LIVE: CDS अनिल चौहान ने आज जवाहर लाल नेहरू की पोल खोल दी...😳

कैसे नेहरू ने अपने दोस्त चीन को खुश करने के लिए तिब्बत तोहफ़े में दे दिया। सुनिए.. "नेहरू चीन के साथ अच्छे रिश्ते चाहते थे, इसलिए उन्होंने तिब्बत चीन को दे दिया" और नेहरू ने सीमा विवाद को सुलझा माना, पंचशील समझौता दाव भारी पड़ गया। वो भूल जिसने सीमा पर टकराव बढ़ाया। चौहान ने खोला 72 सालों का राज 😳 

राहुल गांधी और उसके चमचें संसद में चाइना-चाइना चिल्लाते हैं अब राहुल गांधी को आगे आकर बोलना चाहिए कि कैसे नेहरू की गलतियों से देश बर्बाद हुआ। और सामरिक दृष्टि से उसका खामियाजा हम आज तक भुगत रहे हैं।

TRN LIVE: 11/2/2026 *को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में जिहादी आलम मियां ने अपने घर में विस्फोटक जमा कर रखे थे। अचानक, एक ज़ोरदार धमाका हुआ... पूरा घर उड़ गया..*.

घर के मालिक आलम मियां और उनकी पत्नी बेगम मुनी खातून की मौत हो गई... 5 बच्चे घायल हो गए, जिनमें से 2 की हालत गंभीर है...

*वे कभी भी अच्छी ज़िंदगी नहीं जीते। उन 72 हूरो की चाहत में हमेशा जिहाद में शामिल रहते हैं। जब कोई एक्शन लेता है तो वे विक्टिम होने का रोना रोते हैं।🤨😡🙄🤬* B̺͆S̺͆D̺͆K̺͆

TRN LIVE: क्या आप चाहेंगे कि आपकी मां बहन बेटियां लव जिहाद में पड़े ❕ नहीं ना *इसलिए चर्चा करने से हिचके नहीं खुलकर लव जिहाद के बारे में चर्चा करें* 🎯 👇👇

सभी हिन्दू भाइयो बहनों से एक विनती है, परिवार में किसी भी रिश्तेदार के यहाँ जायें तो किसी बहाने लव जिहाद के बारे में घर की बेटियों को अवश्य बता दें, मिठाई ले जाने से बड़ा उपहार यही होगा आज के इस परिदृश्य में

TRN LIVE: * आखिर क्यों अचानक से हिन्दू युवाओं की हार्ट अटैक से मौत की तादात एकदम से बढ़ गई ? * 😳😡😩🫢🥵

* मोदी की COVID वैक्सीन को बदनाम करने के लिए यह एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा गया भारत में बैठे गद्दारों और म्लेच्छों के द्वारा *

* वे आपस मे मिलकर काम कर रहे है *

* आप होटलों में ढाबों पर मुस्लिमों को कभी भी खाना खाते हुए नहीं पाओगे *

1. * क्योंकि उन्हें पता है उन्ही के भाई बंदों द्वारा ढाबो पर तंदूरी परांठो के साथ सफेद मक्खन में पेट्रोलियम वैक्स भर भर कर परोसा जा रहा है ऐसा नकली सफेद मक्खन 120 Rs किलो मिल जाता है *

2. * दाल मखनी में 45-59 % क्रीम + बटर है जो अधिकतम फर्जी फैट से बनती है *

3. * मगर यहां की जनता दर्जनों सब्जियां एक तरफ व दाल मखनी अकेली एक तरफ नाश्ते लंच डिनर सब मे खाएंगे *

4. * टॉप 5 Chef पर एक सर्वे किया गया जिसमें से 4 लोग अपनी ही दाल मखनी नही पहचान पाये कारण: 45-50 % क्रीम + बटर के बाद सब एक जैसी बनती है *

5. * यहां ये भी बताता जरूरी है की ये क्रीम बटर से लदी दाल सेहत के लिए नुकसानदायक न "unsafe" फ़ूड है।*

6. * सुंदर चॉकोलेट की कोटिंग पेट्रोलियम इंडस्ट्री से निकले पैराफिन वैक्स से की जाती है ताकि वो देर तक पिंघले नही व चिकनी चमकदार दिखे *

7. * एक जैसा टेस्ट बनाये रखने के लिए वनीला आइस क्रीम फ्लेवर बादाम फ्लेवर लेमन फ्लेवर पेट्रोलियम पदार्थों से बनाये जा रहे है *

8. * सेब किन्नू आदि को ताजा रखने के लिए पेट्रोलियम रिफाइनरी से निकले ओलेस्त्रा / वैक्स यूज़ होता है * 

9. * फ्रोजन items पिज़्ज़ा बिस्कुट कॉर्न चिप्स पॉपकॉर्न में बेहद सस्ता पड़ने के कारण चिकना पेट्रोलियम पदार्थ TBHQ मिलाया जाता है *

10. * 2013 में भारत मे कुकिंग आयल व घी में मिनरल आयल ( पेट्रोलियम चिकनाई ) पकड़ी गई थी *

11. * मिनरल आयल मिलाने से आपका वनस्पति तेल से बना घी कई साल भी खराब नही होगा *

12. * आटा अंडे दूध चीनी से बने पदार्थ तेजी से खराब होते है *

13. * अब अगर कोई इनसे बनी मिठाई बन ब्रेड कूकीज केक आदि को हफ़्तों फ्रेश रखना चाहते हो तो उसमें रिफाइनरी से निकला मिनरल आयल मिला दो *

14. * ऐसी चीजे शोरूम के शीशे के पीछे एक दम झक्कास फ्रेश व चमकदार दिखेगी *

* इस देश में मिलावट के खिलाफ एक कानून Food adulteration Act 1954 में बना था जिसमें जो खाने का समान है उसके अलावा कुछ भी मिलने पर जेल होती थी *

* उसे कांग्रेस की सरकार से बदल कर 2006 में फ़ूड सेफ्टी एक्ट करवा कर मिलावट के गेट खुलवा लिये थे *

🔴

TRNLIVE: कांग्रेस एक धोखा... हम हिन्दू भूलने में माहिर हैं।

16 जून 2013 को उत्तराखंड केदारनाथ में जलप्रलय शुरू हुआ जो भीषण तबाही मचा गया था। केदारनाथ में लगभग पच्चीस हजार श्रद्धालु मर गये थे।

तीन दिन चली इस भीषण तबाही में कांग्रेस की सरकार ने केदारनाथ में फंसे श्रद्धालु भक्तों की कोई मदद नही की।

चौथे दिन जब इस भयंकर तबाही की खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बन गई तब निर्लज्ज कांग्रेस ने सहायता भेजने का एलान किया! ध्यान रहे सिर्फ एलान किया था।

18 जून को Antonio Maino सोनिया गांधी अमेरिका अपना गुप्त इलाज कराने गई हुई थी और राहुल गांधी मसाज बैंकॉक में थे। उन्हें सूचना भेजी गई तब दोनों मां बेटे 21 जून को भारत पहुंचे!

कांग्रेस ने बहुत तामझाम करके आपदा में फंसे लोगों की सहायता के लिये बिस्किट के पैकेट और पानी की बोतलों के आठ ट्रक रवाना किये।

जिन पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बड़े बड़े पोस्टर लगाकर मां बेटे ने उन्हें झंडी दिखाकर रवाना किया फोटो भी खिंचवाए गये जो अखबारों की सुर्खियां बने थे।

उन ट्रकों को न किराया दिया गया न डीजल दिया गया था।

आठ दिन भटककर उन ड्राइवरों ने वो बिस्किट बेचकर अपना किराया वसूल किया और निकल लिये।

आज तक कोई पूछने भी नही गया उस राहत सामग्री का क्या हुआ! फिर जब वहां लाशें सड़ने लगी तो महामारी का खतरा बढ़ता देख आसपास के गांवों के लोगों ने आन्दोलन किया।

वह भी पन्द्रह दिन बाद किया जब लाशों से बदबू आने लगी थी।

कई ग्रामीणों ने सामूहिक दाहसंस्कार भी किये लेकिन शव ही शव फैले देखकर लोग डर गये थे।

अब देखे हिन्दुओ की लाशों पर कैसे व्यापार हुआ।

तब कांग्रेस ने उन लाशों को निकालने के लिये एक विज्ञप्ति निकाली।

एक कम्पनी आगे आई जिसने एक लाश निकालने के 4,60,000 रुपये में टेंडर लिया था। और लगभग 16,000 लाशें तीन दिन में निकाली थी।

सरकार ने उस कम्पनी को 'सात अरब छतीस करोड़' का भुगतान तुरन्त कर दिया था।

हालांकि लाशें मिलने का सिलसिला महीनों चलता रहा, फिर कई दिन कंकाल मिलते रहे। हाँ लाशें निकालने वाली कम्पनी रॉबर्ट वाड्रा की थी जो उसने किराये के हेलीकॉप्टर लेकर रातोंरात बनाई थी।

कांग्रेस की सरकारी सहायता के नाम पर किया नाटक भी याद रखियेगा। मां बेटे के भेजे बिस्किट आज भी नही पहुंचे हैं। विश्व के इतिहास में लाशों का इतना बड़ा व्यापार सुनने को मिले तो बताइएगा।

और 7,36,00,00,000 (सात अरब छत्तीस करोड़) का घोटाला तो शायद आप भूल जाएंगे क्योंकि हम हिन्दू भूलने में माहिर हैं। जय हिंद!!

"राष्ट्रहित सर्वोपरि" 💪💪

जय श्री राम 🙏

हर हर महादेव 🔱🙏🚩

ऐसे ही और रोजक जानकारी के लिए पेज को फॉलो करे🙏

TRN LIVE: 🔴🛑🔴राहुल गांधी को एक नहीं 

अनेक डर सता रहे हैं - 

सबसे बड़ा डर उसे बहन की 

तरफ से है - 

उस डर से बचने के लिए वह 

हर नीच हरकत कर रहा है -

राहुल गांधी पर एक कहावत फिट बैठती है -”करमहीन खेती करै, बैल मरै या सूखा परै” - हर काम जोर षोर से शुरू करता है लेकिन ख़ाक हो जाता है - हाल का नरवणे की किताब का प्रकरण यही साबित करता है जो अब लाज बचाना मुश्किल हो रहा है -

कुछ दिन पहले रॉबर्ट वाड्रा ने कहा था कि “हमें बांग्लादेशी हिंदुओं से क्या लेना देना है - पहले हमें अपने देश की बात करनी चाहिए, बांग्लादेश की नहीं - उसने एक दूसरे बयान में कहा था “पूरे देश की यह मांग है कि प्रियंका गांधी आएं और नेतृत्व करें” - अब पता नहीं उसने यह “पूरे देश की मांग” कैसे समझ लिया - लगता है अपनी मांग को ही पूरे देश की मांग समझ लिया -

आजकल राहुल गांधी के करीबी बना हुआ नेता, कांग्रेस की महिला सांसदों को प्रधानमंत्री मोदी की कुर्सी का घेराव करने के लिए आगे बढ़ाता हुआ और कभी मोदी की बोटी बोटी काटने की धमकी देने वाले इमरान मसूद ने कहा था कि “ प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री बनाओ, फिर देखो वो इंदिरा की तरह कैसे जवाब देगी, वो इंदिरा गांधी की पोती है, उसमें पीएम बनने के सारे गुण हैं” -

लगता है प्रियंका वाड्रा अपने मन की बात अपने पति और अन्य चाटुकारों से आगे कर रही है लेकिन वैसे सब राहुल के साथ दिखाई दे रहे हैं - यह अंदर ही अंदर एक ज्वालामुखी धधकता दिखाई दे रहा है राहुल गांधी को और इस वजह से वह ऐसी वो हरकत कर रहा है जिससे वह Limelight में दिखाई देता रहे चाहे उसके काम मूर्खता भरे ही क्यों न हों - वह ऐसा सब प्रियंका वाड्रा को पीछे धकेलने के लिए कर रहा है और उसे जता रहा है कि उसके होते हुए प्रियंका कांग्रेस का नेतृत्व नहीं कर सकती - 

वैसे तो कांग्रेस के कई नेता राहुल गांधी की कार्यशैली को धता बता कर पार्टी से अलग होते रहे हैं लेकिन फिर भी उसे कुछ परवाह नहीं है - वह अपने साथ पार्टी की 5 पनौतियां साथ लेकर चल रहा है और वो हैं के सी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा और रणदीप सुरजेवाला - इनके अलावा अमेरिका में बैठा है सैम पित्रोदा - राहुल को लगता है ये सब मिलकर उसको बचाते रहेंगे जबकि कांग्रेस में राहुल और प्रियंका के बीच एक War of Supremacy चल रही है - प्रियंका अनिश्चित समय के लिए राहुल के पीछे पीछे नहीं चलना चाहती और यही डर अंदर ही अंदर राहुल को सता रहा है -

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने कांग्रेस छोड़ दी और कुछ दिन पहले उन्होंने एक बयान में कहा था “राहुल गांधी एक डरपोक नेता हैं - फिर उन्होंने डरपोक के लिए कहा एक Insecure नेता हैं - उन्होंने कहा -” राहुल गांधी जैसा insecure politician मेरी नज़र में आज तक नहीं हुआ -हर मजबूत कांग्रेसी से उसे डर लगता है-

उसकी सोच है कि मोदी जी से जब लोग नाराज़ होंगे, तो वो मेरी तरफ आएंगे क्योंकि देश में अन्य नेता सब एक एक राज्य के नेता हैं - 

राहुल गांधी को कोई नेता उनके खिलाफ बोलता हुआ पसंद नहीं है - वो खुद लोकसभा में आरोप लगाता है कि उसे बोलने नहीं दिया जाता जबकि वह हर अनाप शनाप बात बोलता है लेकिन अपनी पार्टी में किसी को बोलने की इज़ाज़त नहीं देता - कांग्रेस में कोई लोकतंत्र नहीं चाहिए राहुल गांधी को और शायद इसलिए ही प्रियंका वाड्रा खुल कर सामने नहीं आ रही लेकिन राहुल गांधी यह अच्छी तरह जानता है कि मौका मिलते ही प्रियंका उसका पत्ता साफ़ कर सकती है -

कोई बड़ी बात नहीं कांग्रेस के भीतर ही राहुल गांधी को संसद में उत्पात करने के लिए उकसाया जा रहा हो जिससे उससे छुटकारा मिल सके और प्रियंका को स्थापित किया जा सके - अगर उसके खिलाफ निशिकांत दुबे का Sabstantive Motion पास हो गया तो उसकी लुटिया डूबी ही डूबी - 

(सुभाष चन्द्र)

“मैं वंशज श्री राम का)

15/02/2026 

TRN LIVE: ☹️🫤😕एक तो मुझे ये गाँधी परिवार की क़ुरबानी वाली अवधारणा समझ नहीं आती।

कोई भी चुनाव हो... इनके चशमो चिराग तो यही गाते हैं कि हमारी दादी ने देश के लिए क़ुरबानी दी, हमारे पापा ने देश के लिए क़ुरबानी दी।

अरे भैया कौन सी क़ुरबानी... कौन सा बलिदान??

पंजाब में सब सही चल रहा था... अकाली दल को रोकने के लिए इंदिरा गाँधी एक विकल्प ढूंढ रही थी... फिर उन्हें भिंडरावाले मिला... उसको दिल्ली बुला कर बकायादा संजय गाँधी ने साक्षात्कार ले कर अपने काम के लिए तैयार किया।

फिर इनका प्यादा भिंडरावाले महत्वकांक्षी हो गया... ऊपर से पाकिस्तान ने भी उसके सर पर हाथ रख दिया... उसे ख़ालिस्तान का सपना दिखाया और फिर वह कांग्रेस के हाथों से निकल गया।

फिर उसे मरवाने के लिए स्वर्ण मंदिर पर चढ़ाई कर दी... सैंकड़ो सिख मारे गए... बाद में इस घटना का बदला लेने के लिए 2 सिख अंगरक्षकों ने इंदिरा गाँधी को मार दिया।

यह कोई क़ुरबानी या बलिदान नहीं था... खुद के कुकर्मो का फल था... जिन कुकर्मो के कारण 70-80 के दशक में हजारों हिन्दू मारे गए पंजाब में... और फिर 84 के दंगों के बाद हजारों सिख मारे गए... पंजाब आतंकवाद की आग में 2 दशक झुलसा रहा... जिसमें हजारों लोग मारे गए।

अपने कुकर्मो के कारण हत्या हो जाना देश के लिए क़ुरबानी नहीं होती।

रही बात राजीव गाँधी की... तो वह अपने और अपनी माँ द्वारा किये गए दुर्घटना के शिकार हुए।

वैसे तो श्रीलंका में आजादी के बाद से ही तमिल और स्थानीय आबादी सिंहली लोगों के बीच द्वन्द शुरू हो गया था... 70 के दशक में यह और भी उग्र हो गया... और फिर प्रभाकरण ने LTTE बनाया।

शीत युद्ध का जमाना था... भारत जहाँ सोवियत के खेमे में था... श्रीलंका अमेरिका के करीब था... ऐसे में इंदिरा गाँधी को लगा कि वह तमिल और सिंहली लोगों के इस मुद्दे को सुलझा कर इस क्षेत्र में बढ़त हासिल कर सकती हैं।

इसीलिए उन्होंने श्रीलंका सरकार और LTTE के बीच मध्यस्थता की... और भूटान क�

TRN LIVE: ऐसे अहिंसा के पुजारी की जरुरत हमें कभी रही ही नहीं... महात्मा गांधी एक नंबर का दोगला इंसान था और हिंदुओं से नफरत करता था वह मुसलमान से प्यार करता था अंग्रेजों का गुलाम था जैसा अंग्रेज कहते थे वैसा ही करता था एक तरफ से वह अंग्रेजों का एजेंट था नहीं तो आजादी बहुत पहले मिल जाती.... देख लो बकरी के दूध का कमाल.... 😀.. 😀😀😀

TRN LIVE: Sukhbeer Singh Dadwal✍️

भूमिका तो बनाई जा चुकी है। अब फाइनल एक्ट की तैयारी है। यह होकर रहेगा। 140 करोड़ में से दस बीस लाख लोगों को कुछ ले दे कर भड़काना की मुश्किल काम नहीं है। कुछ रुपयों पर बिकेंगे , कुछ विचारधारा पर और कुछ अंधविरोध के नाम पर। LOP का आचरण सब साफ साफ बता रहा है। अब हमें और आपको तय करना है कि हमें श्रीलंका , बांग्लादेश , नेपाल बनना है या हिंदुस्तान ही बने रहना है।

खबर पक्की है,

अगले महीने से दिल्ली की "C" कंपनी के युवराज और उसके #toolkit एक और क्रांति की कोशिश करने वाले हैं। 

एक ओर अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर पंजाब और पश्चिमी यूपी के किसानों को फिर से सड़कों पर उतारने की योजना है (योगेन्द्र यादव को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है), वहीं बिहार-उत्तर प्रदेश में जातिवादी संगठनों से संपर्क किया जा रहा है ताकि वे अपने- अपने लोगों को सड़कों पर उतार सकें। 

ये सब उत्तर प्रदेश चुनावों तक चलेगा। यानि लगभग एक साल। योगी- मोदी को उत्तर प्रदेश में ही दफ़न करने की योजना है। "... तेरी कब्र खुदेगी" महज़ एक नारा नहीं, उनका संकल्प है ।

कभी सोचा है, डोनाल्ड ट्रंप के मंत्री Peter नवारो ने कुछ महीने पहले क्यों कहा था कि भारत के पेट्रोल रिफाइनरीज पर "ब्राह्मणों" का कब्ज़ा है?" 

कभी गौर किया है कि सोशल मीडिया का एल्गोरिथम (Algorithm) बदलने लगा है? आपकी नजरों से हाल फ़िलहाल वही वीडियो और पोस्ट गुजर रहे हैं, जिससे आपको लगे कि आपकी जाति के साथ अन्याय हो रहा है। या फिर जातिवाद की भावना भड़काने वाले वीडियो और पोस्ट ज़्यादा दिख रहे हैं?

याद रखें, बड़ी मुश्किल से देश की अर्थव्यवस्था ने रफ्तार पकड़ी है, बड़ी मुश्किल से यूपी संभला है, बड़ी मुश्किल से सनातन पुनर्जागरण काल आया है। 

सदियों के बाद मोदी-योगी- शाह जैसा संयोग बनता है। एक बार आपसी लड़ाई में ये सब बर्बाद हो गया, तो.. 🙏

TRN LIVE: ‌‌   *༺🔱 ༂ 🔱༻*

               *|| जय श्री राधे ||*

   *🌺 महर्षि पाराशर पंचांग 🌺*

          *🙏अथ पंचांगम् 🙏*

*दिनांक :𝀈*

*_16/02/2026, सोमवार_*

चतुर्दशी, कृष्ण पक्ष,

फाल्गुन

*∝∝∝∝∝∝∝∝∝•⊰⧱⊱•∝∝∝∝∝∝∝∝∝∝*

(समाप्ति काल)

तिथि--------चतुर्दशी 17:33:31 तक

पक्ष----------------------------कृष्ण

नक्षत्र--------------श्रवण 20:46:52

योग-------------वरियान 25:48:59

करण-------------शकुनी 17:33:31

करण------------चतुष्पद 29:35:45

वार-------------------------सोमवार

माह-------------------------फाल्गुन

चन्द्र राशि----------------------मकर

सूर्य राशि-----------------------कुम्भ

रितु---------------------------शिशिर

आयन---------------------उत्तरायण

संवत्सर--------------------विश्वावसु

संवत्सर (उत्तर--------------सिद्धार्थी

विक्रम संवत------------------2082

गुजराती संवत----------------2082

शक संवत--------------------1947

कलि संवत------------------5126

*◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸◂▸*

*⧱ राशिफल एवं पंञ्चाङ्ग ๛* 

https://whatsapp.com/channel/

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वृन्दावन

सूर्योदय------------------06:56:59 

सूर्यास्त--------------- 18:09:54

दिन काल------------- 11:12:54 

रात्री काल------------- 12:46:15

चंद्रास्त---------------- 17:08:41 

चंद्रोदय--------------- 30:46:59

लग्न ---- कुम्भ 3°9' , 303°9'

सूर्य नक्षत्र------------------ धनिष्ठा 

चन्द्र नक्षत्र------------------ श्रवण

नक्षत्र पाया-------------------- ताम्र

*💮दिशा शूल ज्ञान-------------पूर्व*

परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l

इस मंत्र का उच्चारण करें-:

*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*

*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*

*🚩💮शुभा$शुभ मुहूर्त💮🚩*

राहू काल 08:21 - 09:45 अशुभ

यम घंटा 11:09 - 12:33 अशुभ

गुली काल 13:58 - 15:22 अशुभ 

अभिजित 12:11 - 12:56 शुभ

दूर मुहूर्त 12:56 - 13:41 अशुभ

दूर मुहूर्त 15:10 - 15:55 अशुभ

वर्ज्यम 24:54* - 26:32* अशुभ

प्रदोष 18:10 - 20:46 शुभ

*🚩💮 पद, चरण 💮🚩*

 खू---- श्रवण 08:21:07

खे---- श्रवण 14:34:59

खो---- श्रवण 20:46:52

गा---- धनिष्ठा 26:56:47

*🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩*

        ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद

=======================

सूर्य= कुम्भ 03°16 , धनिष्ठा 3 गु

चन्द्र= मकर 15°30 , श्रवण 2 खू

बुध = कुम्भ 20°52 ' पूo भाo 1 से 

शु क्र= कुम्भ 12°05, शतभिषा 2 सा

मंगल= मकर 24°03 ' धनिष्ठा 1 गा

गुरु= मिथुन 21°33 पुनर्वसु, 1 के 

शनि=मीन 06°13 ' उoभा o , 1 दू

राहू=(व) कुम्भ 15°34 शतभिषा, 3 सी 

केतु= (व) सिंह 15°34 पूoफाo 1 मो

=======================

💮चोघडिया, दिन

अमृत 06:57 - 08:21 शुभ

काल 08:21 09:45 अशुभ

शुभ 09:45-11:09 शुभ

रोग 11:09 12:33 अशुभ

उद्वेग 12:33 - 13:58 अशुभ

चर 13:58 - 15:22 शुभ

लाभ 15:22 16:46 शुभ

अमृत 16:46 18:10 शुभ

🚩चोघडिया, दिन

अमृत 06:57 - 08:21 शुभ

काल 08:21 09:45 अशुभ

शुभ 09:45-11:09 शुभ

रोग 11:09 12:33 अशुभ

उद्वेग 12:33 - 13:58 अशुभ

चर 13:58 - 15:22 शुभ

लाभ 15:22 16:46 शुभ

अमृत 16:46 18:10 शुभ

 

          *नोट :-* दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 

*चर-* 

* चर में वाहन, मशीन आदि कार्य करें।

*उद्वेग-* 

* उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें।

*शुभ-* 

* शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें

*लाभ-*

* लाभ में व्यापार करें

 *रोग-*

* रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें।

*काल-*

* में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है। 

*अमृत-* 

* में सभी शुभ कार्य करें।

 

💮होरा, दिन

चन्द्र 06:57 -07:53

शनि 07:53 -08:49

 बृहस्पति08:49 09:45

मंगल09:45 -10:41

सूर्य 10:41 -11:37

शुक्र 11:37- 12:33

बुध 12:33 -13:30

चन्द्र 13:30 -14:26

शनि 14:26 -15:22

बृहस्पति 15:22 -16:18

मंगल 16:18 -17:14

सूर्य 17:14 -18:10

🚩होरा, रात

शुक्र 18:10 -19:14

 बुध 19:14 -20:18

चन्द्र 20:18 -21:21

शनि 21:21 -22:25

बृहस्पति 22:25 -23:29

मंगल 23:29 -24:33

सूर्य 24:33-25:37

शुक्र 25:37-26:41

बुध 26:41-27:45

चन्द्र 27:45-28:48

शनि 28:48-29:52

बृहस्पति 29:52-30:56

*🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩* 

मकर > 04:46 से 06:42 तक

कुम्भ > 06:42 से 08:22 तक

मीन > 08:22 से 09:46 तक

मेष > 09:46 से 11:22 तक     

वृषभ > 11:22 से 13:20 तक

मिथुन > 13:20 से 16:46 तक

कर्क > 16:46 से 17:57 तक

सिंह > 17:56 से 20:02 तक

कन्या > 20:02 से 22:22 तक

तुला > 22:262 से 00:44 तक

वृश्चिक > 00:44 से 02:48 तक

धनु > 02:48 से 04:44 तक

=======================

*🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार*

       (लगभग-वास्तविक समय के समीप) 

दिल्ली +10मिनट--------- जोधपुर -6 मिनट

जयपुर +5 मिनट------ अहमदाबाद-8 मिनट

कोटा +5 मिनट------------ मुंबई-7 मिनट

लखनऊ +25 मिनट--------बीकानेर-5 मिनट

कोलकाता +54-----जैसलमेर -15 मिनट

 

*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*

*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*

*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*

*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*

*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*

*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*

 15 + 14 + 2 + 1 = 32 ÷ 4 = 0 शेष

 पृथ्वी लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

*🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान🚩*

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

केतु ग्रह मुखहुति

*💮 शिव वास एवं फल -:*

  29 + 29 + 5 = 63 ÷ 7 = 10 शेष

शामशनवास = मृत्यु कारक

*🚩भद्रा वास एवं फल -:*

*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*

*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*

*🚩💮 विशेष जानकारी 💮🚩*

 *सर्वार्थ सिद्धि योग 20:47 तक 

*🚩💮 शुभ विचार 💮🚩*

त्यज दुर्जनसंसर्ग भज साधुसमागमम् ।

कुरु पुण्यमहोरात्रं स्मर नित्यमनित्यतः ।।

।।चाoनीo।।

   कुसंग का त्याग करे और संत जानो से मेलजोल बढाए. दिन और रात गुणों का संपादन करे. उसपर हमेशा चिंतन करे जो शाश्वत है और जो अनित्य है उसे भूल जाए.

*🚩💮 सुभाषितानि 💮🚩*

गीता -: ज्ञानकर्मसन्यासयोग अo-4

अज्ञश्चश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति।

 नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः॥

विवेकहीन और श्रद्धारहित संशययुक्त मनुष्य परमार्थ से अवश्य भ्रष्ट हो जाता है। ऐसे संशययुक्त मनुष्य के लिए न यह लोक है, न परलोक है और न सुख ही है

 ॥40॥

*🚩💮 दैनिक राशिफल 💮🚩*

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।

नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।

विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।

जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष

राजमान प्राप्त होगा। नए अनुबंध होंगे। नई योजना बनेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रसन्नता रहेगी। कार्य में व्यय की अधिकता रहेगी। दांपत्य जीवन में भावनात्मक समस्याएँ रह सकती हैं। व्यापार में नए अनुबंध आज नहीं करें।

🐂वृष

धनार्जन होगा। संतान के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। परिवार के सहयोग से दिन उत्साहपूर्ण व्यतीत होगा। योजनानुसार कार्य करने से लाभ की संभावना है। आर्थिक सुदृढ़ता रहेगी। बेचैनी रहेगी। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। कोर्ट व कचहरी में अनुकूलता रहेगी।

👫मिथुन

व्यापार-व्यवसाय सामान्य रहेगा। दूरदर्शिता एवं बुद्धि चातुर्य से कठिनाइयां दूर होंगी। राज्य तथा व्यवसाय में सफलता मिलने के योग हैं। पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। पुराना रोग उभर सकता है। चोट व दुर्घटना से बचें। वस्तुएं संभालकर रखें। बाकी सामान्य रहेगा।

🦀कर्क

पूजा-पाठ में मन लगेगा। कोर्ट व कचहरी के काम निबटेंगे। लाभ के अवसर मिलेंगे। प्रसन्नता रहेगी। कुछ मानसिक अंतर्द्वंद्व पैदा होंगे। पारिवारिक उलझनों के कारण मानसिक कष्ट रहेगा। धैर्य एवं संयम रखकर काम करना होगा। यात्रा आज न करें।

🐅सिंह

व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। कानूनी मामले सुधरेंगे। धन का प्रबंध करने में कठिनाई आ सकती है। आहार की अनियमितता से बचें। व्यापार, नौकरी में उन्नति होगी। लेन-देन में सावधानी रखें। बकाया वसूली के प्रयास सफल रखें।

🙍‍♀️कन्या

रोजगार मिलेगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। नौकरी में अधिकार बढ़ेंगे। व्यावसायिक समस्या का हल निकलेगा। नई योजना में लाभ की संभावना है। घर में मांगलिक आयोजन हो सकते हैं। जीवनसाथी से संबंध घनिष्ठ होंगे।

⚖️तुला

ऐश्वर्य पर व्यय होगा। स्वास्थ्‍य कमजोर रहेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। राजकीय कार्य में परिवर्तन के योग बनेंगे। आलस्य का परित्याग करें। आपके कामों की लोग प्रशंसा करेंगे। व्यापार लाभप्रद रहेगा। नई कार्ययोजना के योग प्रबल हैं।

🦂वृश्चिक

यात्रा सफल रहेगी। प्रयास सफल रहेंगे। वाणी पर नियंत्रण रखें। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। लाभ होगा। व्यापार-व्यवसाय में उन्नति के योग हैं। वाणी पर संयम आवश्यक है। जीवनसाथी से मदद मिलेगी। सामाजिक यश-सम्मान बढ़ेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

🏹धनु

भागदौड़ रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। अधूरे कामों में गति आएगी। व्यावसायिक गोपनीयता भंग न करें। गीत-संगीत में रुचि बढ़ेगी। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। पुराना रोग उभर सकता है। शोक समाचार मिल सकता है।

🐊मकर

पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रसन्नता रहेगी। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। पारिवारिक उन्नति होगी। सुखद यात्रा के योग बनेंगे। स्वविवेक से कार्य करना लाभप्रद रहेगा।

🍯कुंभ

पुराने मित्र व संबंधियों से मुलाकात होगी। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। मान बढ़ेगा। स्वजनों से मेल-मिलाप होगा। नौकरी में ऐच्छिक पदोन्नति की संभावना है। किसी की आलोचना न करें। खानपान का ध्यान रखें। आर्थिक संपन्नता बढ़ेगी।

🐟मीन

भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। बेरोजगारी दूर होगी। लाभ होगा। मान-प्रतिष्ठा में कमी आएगी। कामकाज में बाधाएँ आ सकती हैं। कर्मचारियों पर व्यर्थ संदेह न करें। आर्थिक तंगी रहेगी। शत्रु सक्रिय रहेंगे। स्वास्थ्य कमजोर होगा।

  

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

🌺🌺🌺🙏🙏🌺🌺🌺

TRN LIVE: यह वो वेश्यापुत्री गुरकीरत है, 

लेफ्ट विंग संगठन भगत सिंह छात्र एकता मंच की प्रेसिडेंट हैं। इसने कल रुचि तिवारी पर हमला करने और उन्हें छूने वाली वह पहली महिला थीं।

रुचि ने बाद में कहा कि गुरकीरत के शरीर से आने वाली गन्दी बदबू ने उन्हें छूने से ज़्यादा मानसिक रूप से डरा दिया है।🤮

रुचि तिवारी का मोलेस्ट करने वाले वामपंथी ,उग्रवादी थे....

रुचि तिवारी के साथ जो डफली गैंग ने किया वो पूरा देश देख रहा है 

पोस्टरों में लिखे नारे बताते हैं कि ये केवल ब्राह्मण के खिलाफ नारे नहीं है ...

अर्बन नक्सल की तमाम हिन्दुत्व के खिलाफ लड़ाई है 

आज रुचि तिवारी है कल आप की बहिन हो सकती है

रुचि केवल ब्राह्मण की बेटी नहीं वो समस्त हिन्दुत्व की बेटी है 

और यह भीड़ वही आतंकवादी अर्बन नक्सल की है 

दिल्ली विश्वविद्यालय में कल हुए UGC प्रोटेस्ट जिसमें रुचि तिवारी पर हमला किया गया 

उस प्रोटेस्ट को कराने वाला जितेंद्र मीना और लक्ष्मण यादव था 

इस दोनों पर NSA के तहत कार्रवाई होनी चाहिए 

बाद में 

“लेफ्ट विंग की कब्र खुदेगी JNU की धरती पर” जैसे नारे खुलकर लगाए गए। यह देखना सुखद था..

वहीं ढफली गैंग वाले सलवार पहन कर भागते दिखे

TRN LIVE: 🙏🌹 *नमस्ते जी* 🌹🙏     

💐🔥🌹 *आचार्य भूदेव शास्त्री* 🌹🔥💐

🪷*हिन्दी संकल्प पाठ* 🪷

हे परमात्मन् आपको नमन! आपकी कृपा . मैं आज एक यज्ञ कर्म को तत्पर हूँ, आज एक ब्रह्म दिवस के दूसरे प्रहर कि जिसमें वैवस्वत मन्वन्तर वर्तमान है,अट्ठाईसवीं चतुर्युगी का कलियुग वर्तमान है। सृष्टि सम्वत एक अरब छियाननवे करोड़ आठ लाख तिरेपन हजार एक सौ छब्बीसवां है,कलियुगाब्द 5127, विक्रम सम्वत् दो हजार बियासी है,दयानन्दाब्द 2O2 वां है,सिद्धार्थ -संवत् है सूर्य उत्तर अयन में वर्तमान है ,कि *शिशिर ऋतु मास फाल्गुन कृष्ण पक्ष- तिथि- चतुर्दशी ,नक्षत्र श्रवण है, आज सोम वार 16 फरवरी 2026* को भरतखण्ड के आर्यावर्त देश के अंतर्गत, ..प्रदेश के ....जनपद...के ..ग्राम/शहर...में स्थित (निज घर में,या आर्यसमाज मंदिर में मैं ...अमुक गोत्र में उत्पन्न, पितामह श्री ....(नाम लें ).के सुपुत्र श्री .(पिता का नाम लें)उनका पुत्र मैं ...आज सुख ,शान्ति ,समृद्धि के लिए तथा आत्मकल्याण के लिए प्रातः वेला में यज्ञ का संकल्प लेता हूँ!(ऋत्विक वरण)- जिसके निर्देशक /ब्रह्मा के रूप में आप आचार्य..... श्री का वरण करता हूँ,

        🔥 *संस्कृत संकल्प पाठ:*🔥                 

*ओं तत्सद्।श्री ब्रह्मणो दिवसे द्वितीये प्रहरार्धे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे , एकोवृन्दः षण्णवतिकोटि: अष्टलक्षाणि त्रिपञ्चाशत्सहस्राणि षड्विंन्शत्युत्तरशततमे सृष्टिसंवत्सरे, पञ्चसहस्त्राणि सप्तविंशत्युत्तरशततमे कलियुगे, द्वयशीति द्विसहस्रतमे वैक्रमाब्दे ,, शाके १९४५ दयानन्दाब्दे (द्वयाधिकद्वि शततमे ) 202, सिद्धार्थ -संवत्सरे रवि उत्तरायणे, शिशिर ऋतौ, फाल्गुन मासे, कृष्ण पक्षे, चतुर्दशी तिथौ श्रवण नक्षत्रे, सोम वासरे तदनुसारम् आङ्गलाब्द दिनाङ्क 16 फरवरी 2026*। जम्बूद्वीपे, भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर् गते ......... प्रदेशे ,........ जनपदे.. .. नगरे...... गोत्रोत्पन्नः .... श्रीमान्.(पितामह) .... (पिता..). पुत्रस्य... अहम् .' (स्वयं का नाम)..... अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शान्ति समृद्धि हितार्थ आत्मकल्याणार्थम् ,रोग -शोक निवारणार्थम् सर्वेषां कृते मङ्गलमयं भूयात्!🙏

*पुरोहित - आचार्य TRN LIVE: भारत ने एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उल्लेख को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि जो संदर्भ इन फाइलों में मोदी के नाम से सामने आया है, वह सिर्फ एक ईमेल संदेश का हिस्सा है और “एक नचनिया अपराधी द्वारा की गई बेतुकी कल्पनाओं” से ज्यादा कुछ नहीं है, जिसे सर्वोच्च अवमानना के साथ खारिज किया जाना चाहिए।

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए इन दस्तावेजों में कुछ टिप्पणियाँ और ईमेल शामिल हैं, जिनमें दुनिया भर के कई शक्तिशाली लोगों के नाम हैं, लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि किसी का नाम होने का मतलब उनके खिलाफ किसी आपराधिक आरोप या गलत कृत्य का होना ही हो।

भारत सरकार ने विशेष रूप से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का नाम केवल उनकी 2017 में आधिकारिक यात्रा से जुड़ी संदर्भों के बाहर कहीं नहीं है, और बाकी सभी दावों को खारिज किया गया है। इस प्रकार के दावे बिना किसी स्थापित तथ्यों के फैलाए जा रहे हैं और उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।

राजनीतिक स्तर पर इस विषय पर बहस भी हुई है, लेकिन सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री के नाम का कोई विश्वसनीय या आपराधिक संदर्भ इन फाइलों में नहीं है, और इसे अफवाह के रूप में देखा जाना चाहिए। #fblyfestyle

TRN LIVE: दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तर परिसर में, जहाँ शिक्षा का मंदिर होना चाहिए था, वहाँ घृणा की आग भड़क उठी। यूजीसी के जाति-संबंधी नियमों के समर्थन में हजारों की भीड़ एकत्र हुई थी। बीच में खड़ी थीं रुचि तिवारी—एक यूट्यूबर एवं पत्रकार, जो मात्र सत्य को कैमरे में कैद करने आई थीं।

जब भीड़ को उनके पूर्ण नाम का पता चला—रुचि तिवारी—तब तालिबानी सोच वाले नीले कबूतर और नीली क़बूतरिया जाति का विष उगलने लगी। "यह ब्राह्मण है, इसे पकड़ो! मारो इसे यह ब्राह्मण है! "—ऐसे नारे गूँज उठे। सैकड़ों हाथ उन पर टूट पड़े। कुछ ने उनके बाल खींचे, कुछ ने गला घोंटने का प्रयास किया, कुछ ने वस्त्र फाड़ने की कोशिश की। आस-पास की दर्जनों नीली क़बूतरिया अकेली ब्राह्मण लड़की को घेरकर लिंच कर रही थी और कह रही थी —"आज..... तेरा परेड निकालेंगे!" सैकड़ो नीले कबूतर एक अकेली लड़की को घेरकर चिल्ला रहे थे—"इसे सबक सिखाओ!" भीड़ ने उन्हें घेर लिया और, बेहोश होने तक पीटा। यह मात्र हमला नहीं था—यह लिंच का उद्देश्य था, जाति के नाम पर हत्या का प्रयास था।

पर रुचि तिवारी झुकी नहीं। तालिबानी सोच वाली इस हिंसक नीले कबूतरों और कबूतरियो कि भीड़ के सामने वे डटी रहीं। डर से थर-थर काँपने के बजाय उन्होंने साहस से मुकाबला किया। उनकी आँखों में वही ज्वाला थी जो झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की आँखों में जलती थी—जब अंग्रेजों की सेना ने उन्हें घेरा था, तब भी वे नहीं डरी थीं। रुचि ने भी उसी प्रकार निर्भीक होकर कहा—"मैं पत्रकार हूँ, सत्य दिखाने आई हूँ।" और अंतिम सांस तक दिखाउंगी।

रुचि त्रिपाठी बेहोश हुईं, पर उनका मन नहीं टूटा। उन्होंने कहा—"यह हत्या का प्रयास था।

यह मात्र एक घटना नहीं—यह उस भारत की पुकार है जहाँ नारी को जाति के नाम पर नहीं, अपितु उसके साहस के लिए सम्मान मिले। वे झाँसी की रानी की उत्तराधिकारी हैं—जो अकेली होकर भी हजारो की भीड़ के सामने सरेंडर नही की बल्कि अंतिम समय तक दुश्मन से लोहा लेती हैं।

ऐसी ब्राह्मण बेटियाँ ब्राह्मण समाज की शक्ति हैं। ऐसी ब्राह्मण बेटियाँ डरती नहीं गीदड़ों की भीड़ से नही डरती।

रुचि तिवारी अकेली नही उसके साथ पूरा ब्राह्मण समाज है क्रिया की प्रतिक्रिया संभालना मुश्किल हो जाएगा तालिबानियों को। 

विजय मिले या वीरगति, सब महादेव के नाम। ब्राह्मण की 1 लड़की भी हजारो गीदड़ों की भीड़ पर भारी है जिस दिन हमारे पुरुष निकल लिए फिर एक महीने के अंदर शांति स्थापित हो जाएगी। 

#Justice_For_रूचि_तिवारी

TRN LIVE: पाकिस्तानी पार्लियामेंट में हिंदू रिप्रेजेंटेटिव की चीख देखिए...

जब कोई धर्म नहीं होता तो ऐसा ही होता है...

हमें ऐसा समय आने को रोकने के लिए BJP के साथ होना होगा...

🇮🇳

अब जागो...

✊🏼 🚩

सेक्युलर जिहादियों को इस वीडियो को बहुत ध्यानपूर्वक देखना चाहिए का किस प्रकार पाकिस्तान की संसद में एक हिंदू सांसद हिंदुओं की रक्षा की भीख मांग रहा है ,बार-बार हाथ जोड़ रहा है, अपनी बच्चियों के साथ हिंदू बच्चियों के साथ जो अत्याचार हो रहा है उसके रोकने की मांग कर रहा है कल्पना कीजिए भारत का अल्पसंख्यक को सुविधा प्राप्त और पाकिस्तान का अल्पसंख्यक अपनी रक्षा के लिए गिड़गिड़ा रहा है l यह बहुत बड़ी सीख सनातन हिंदू समाज के लिए है, गंभीरतापूर्वक इस पर सोचना चाहिए और निवेदन है 120 करोड़ सनातन हिंदू भाई बहनों के पास इसको पोस्ट करने का कष्ट करें और एक शक्तिशाली सनातन हिंदू संगठन की रचना करें, बस यही निवेदन है...

हर हर महादेव

TRN LIVE: UGC पर दिल्ली में मचे बबाल के बीच वरिष्ठ पत्रकार शुभंकर मिश्रा की एक टिप्पणी चर्चा में है।

 रुचि तिवारी के वायरल वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा कि कुछ मंत्री कह रहे थे कि UGC के नए नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा, लेकिन हालात तो नियम लागू होने से पहले ही साफ़ दिखने लगे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि जिन्हें मिलकर नकल माफिया और पेपर लीक जैसी समस्याओं के खिलाफ लड़ना था, वे आज जात-पात में बँटते नजर आ रहे हैं।

उनके अनुसार असली लड़ाई सिस्टम से होनी चाहिए थी, लेकिन समाज आपसी टकराव में उलझ गया है।

शुभंकर मिश्रा ने लिखा कि एक फैसले ने ऐसी दरार पैदा कर दी है, जिसे भरने में शायद दशकों लग जाएँ।

#UGCRules

#DelhiUniversity

TRN LIVE: .. *जय श्री राम*

*सोमवार, 16 फरवरी 2026 के मुख्य समाचार*

🔶रुबियो बोलेः भारत नहीं खरीदेगा रूसी तेल, जयशंकर ने दिया करारा जवाब-‘हम बाहरी दबाव में फैसले नहीं लेते’

🔶Breaking: भारत में मोस्ट वांटेड आतंकी की पाकिस्तान में सरेआम हत्या, पाक आर्मी-पुलिस और ISI सब खामोश !

🔶1 मई से होगी जनगणना की शुरुआत, नागरिकों से पूछे जाएंगे ये 33 सवाल, 10 लाख घरों होगी मैपिंग

🔶जर्मनी में ईरान सरकार के खिलाफ ऐतिहासिक प्रदर्शन ! लाखों लोग उतरे सड़कों पर, बोले-सत्ता से हटाओ खामनेई

🔶'प्रतिबंध हटाओ, हम करेंगे परमाणु समझौता', ईरान ने दिया ऑफर, गेंद US के पाले मे

🔶19 फरवरी को 'बोर्ड ऑफ पीस' की बैठक, गाजा के लिए 5 अरब डॉलर से ज्यादा का वादा: US राष्ट्रपति ट्रंप

🔶राहुल बोले- ट्रेड डील में किसानों के साथ धोखा हो रहा: पीएम मोदी से 5 सवाल किए; शाह बोले- राहुल झूठ फैला रहे

🔶बागेश्वर धाम में 305 बेटियों का विवाह: नेपाल से आए जोड़े ने भी लिए 7 फेरे; रामभद्राचार्य बोले- अगली बार धीरेंद्र शास्त्री की शादी में आऊंगा

🔶राजनाथ बोले- भारतीय सेना भगवान शंकर से प्रेरणा लेती है: लोगों की मदद भी करती है और जरूरत पर ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाई भी

🔶कन्याकुमारी-मछुआरों के बच्चों ने 48 गांव प्लास्टिक फ्री किए: टूरिस्टों के लिए 6 तट खोले, यहां मछलियां पकड़ते थे, अब रोज 300 पर्यटक आ रहे

🔶22 अप्रैल को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट: महाशिवरात्रि पर उखीमठ में तिथि घोषित, 2025 के मुकाबले 10 दिन पहले शुरू होगी यात्रा

🔶अब 'ओये' नहीं, आम लोगों को ‘सर या मैडम' कहिए; पजाब पुलिस के लिए जारी हुआ फरमान?

🔶पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर अटकलें, अस्पताल में कराया जाएगा भर्ती, वसीम अकरम और वक़ार यूनिस ने भी उठाई आवाज

🔶आरबीआई ने मणप्पुरम फाइनेंस में बैन कैपिटल के संयुक्त नियंत्रण को मंजूरी दी, विकास योजनाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होगी साबित

🔶'हमें हर समय तैयार रहना होगा…' पाकिस्तान से खतरे को लेकर बोले पीएम मोदी

🔶योगी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस, 17 फरवरी को विधान भवन का करेगी घेराव

🔶'पिनाराई विजयन फिर बनेंगे केरल के सीएम', कांग्रेस की चुनावी तैयारियों के बीच मणिशंकर अय्यर का बयान; पार्टी ने झाड़ा पल्ला

🔶इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो: पीएम मोदी करेंगे आज उद्घाटन, 30 से अधिक देशों के 300 से ज्यादा मेहमान करेंगे शिरकत

🔶'हिम्मत है तो आ जाएं…' शाह का राहुल गांधी को खुला चैलेंज! कहा- जगह आप तय कर लो

🔶भारतीय बाजार में SMK का नया NOVA फुल-फेस हेलमेट लॉन्च, राइडर्स को मिलेगा हाई-लेवल सेफ्टी पैकेज

🔷ईशान का तूफान और बुमराह का कहर: भारत ने पाकिस्तान को 61 रनों से रौंदकर सुपर-8 में मारी एंट्री

🔷IND vs PAK Analysis: शीर्ष क्रम फेल, मिडिल ऑर्डर बेहाल, दबाव में ढहा पाकिस्तान; भारतीय गेंदबाजों का रहा दबदबा

           *आपका दिन शुभ और मंगलमय हो सुप्रभात..!!*

                          जय हो🙏

TRN LIVE: यूजीसी! यूजीसी! यूजीसी! यूजीसी!

अब तक मैंने यूजीसी नियमों पर कुछ नहीं लिखा, लेकिन बार बार मुझे कई साथियों का अनुरोध मिलता रहा तो trolls की #trolling का भी सामना करता रहा!

मैं खामोश रहा...सिर्फ यह देखने के लिये कि राष्ट्रवादियों की कृपा से पहचान बनाने वाले अजीत भारती, SSandeep Deo जैसे करोड़पति बने कितने तथाकथित राष्ट्रवादी नंगे होते हैं, उनकी दलाली की कलई खुलती हैं जो अभी भी मुखौटा लगाकर राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व को बेच रहे हैं। 

  वस्तुतः ऐसे सभी भांड मोटा माल लेकर पाला बदल चुके हैं और अब इनका एजेंडा हिन्दू एकता नहीं बल्कि जातियों में विभक्त कर कांग्रेसी विचारधारा पुनर्जीवित करना है।

मुझे किसी को औचित्य समझाने की जरूरत नहीं, लेकिन भ्रम दूर होने चाहिए और स्पष्टता स्थापित होनी ही चाहिये। 

तो जानिये मेरे विचार!

क्या मैं UGC नियमों का समर्थन करता हूँ?— बिल्कुल नहीं!

मैं इन्हें कैसे पाता हूँ?— मूर्खतापूर्ण, अन्यायपूर्ण, असमान, अनुचित!

क्या मैंने इनके खिलाफ असंतोष व्यक्त किया है?—हाँ लेकिन सोशल मीडिया पर नहीं, वहां जहाँ 'महत्वपूर्ण' है।

क्या धर्मेंद्र प्रधान को हटाना चाहिए?—बिल्कुल हाँ! और मुझे लगता भी है कि यही होगा।

क्या सामान्य वर्ग को मोदी सरकार पर गुस्सा निकालने का अधिकार है?—बिल्कुल है! जब हमने उन्हें चुना तो सवाल भी हम ही उठायेंगे। 

क्या सामान्य वर्ग की आवाज सुनी जाएगी?— क्यूँ नहीं, बिल्कुल!

कब?—जब मोदी सरकार नए नियम बनाएगी।

क्या UGC नियम वापस लिए जाएंगे?— नहीं!

क्यों?—क्योंकि UGC नियम 2026 पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया है और मामला अब सब ज्यूडिस है। साथ ही UGC खुद स्थायी रूप से भंग होने की कगार पर है। नए नियम भी अस्थायी होंगे जब तक नयी एपेक्स बॉडी गठित न हो जाये।

फिर मैं उन लोगों का विरोध क्यों कर रहा हूँ जो UGC नियमों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं?— मैं उन किसी का विरोध नहीं कर रहा जो मोदी सरकार से UGC नियमों पर नाराज हैं।

तो मैं किसका विरोध कर रहा हूँ?—केवल उन्हीं का जिनका एजेंडा मोदी समर्थकों को मोदी-योगी के खिलाफ भड़काना है। केवल वही जो मोदी के लिए अपमानजनक (गटर छाप) भाषा इस्तेमाल कर रहे हैं। 

केवल वही जो भावुक मासूम लोगों को भड़का रहे हैं जबकि UGC नियम सुप्रीम कोर्ट के जरिए पहले ही 'निष्क्रिय' हो चुके हैं।

केवल वही जो आपको यह नहीं बता रहे कि मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में UGC नियमों के खिलाफ याचिका पर एक भी आपत्ति नहीं उठाई, वर्ना कोर्ट इतनी आसानी से stay ना लगाती। जिसका मतलब है कि मोदी खुद इन मूर्खतापूर्ण नियमों से असहमत थे।

यह सब कुछ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को देखने थे न कि #PMO को.....

मैं उनका भी विरोध कर रहा हूं जो व्यक्तिगत vendetta से, या जो पैसों का लेन-देन कर भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं — और सही तथ्य नहीं बता रहे।

तो समाधान क्या है?— सिर्फ धैर्य रखिए और मोदी सरकार को नए नियम बनाने दें।

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यही मोदी सरकार 11 वर्षों से अथक परिश्रम कर रही है।

 राष्ट्रीय सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, मुद्रास्फीति, रोजगार, अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भरता, हिंदुत्व, इंफ्रा....सभी खंबे मजबूती से टिके हैं।

निश्चित रूप से इन उपलब्धियों को उस भाषा का शिकार नहीं होना चाहिए जो कुछ लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। हाँ, UGC नियम सरकार की गलती है और उसकी निंदा होनी ही चाहिए। 

लेकिन मोदी सरकार कभी अपनी गलतियों को सुधारने से नहीं हिचकिचाई। निश्चिंत रहिए इस बार भी सुधार लेगी। 

हम सभी ने पीएम Narendra Modi के नेतृत्व पर राष्ट्र निर्माण के लिए अपार विश्वास दिखाया है और उन्होंने कभी निराश नहीं किया। 

नोटबंदी, जीएसटी रोलआउट...सभी ने असुविधा दी। लेकिन उन्होंने जो वचन दिया उसे निभाया।

 तो इस बार भी धैर्य क्यों न रखें?

मैं आश्वस्त हूँ कि मोदी सामान्य वर्ग की शिकायतों का समाधान निकालेंगे, वो भी बिना सामाजिक सद्भाव को ठेस पहुँचाए। तो....प्रतीक्षा करें। 

हम मोदी जी के लिए इतना तो कर ही सकते हैं, न?

बाकी...आपकी मर्जी! यह लोकतंत्र है! समय के साथ भारत Fragile-5 से विश्व की 4वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। 

हमारी एक चूक से, भारत निश्चित रूप से फिर Fragile-5 में लौट सकता है और देश को फिर एक और मोदी का इंतजार करना होगा। 

 पर ध्यान रहे कि 'ऐसा' मोदी फिर कभी नहीं आएगा।

 लेकिन हाँ.... ऊपर बताये गये नामों और उन जैसे लोग आपको अपने व्यक्तिगत असंतोष या धनोपार्जन के एजेंडे के कारण भड़का रहे हैं, वे आगे भी पाला बदल बदल कर पैसे कमाते रहेंगे। आखिर यह लोकतंत्र ही तो है!

लेकिन उन्हें पहचानना, समझना और लोगों को समझाना आपको ही करना है, क्यूंकि यह राष्ट्र आपका ही है।

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TRN LIVE: कम्युनिस्ट शुरू से हिन्दू धर्म को चूरन बताते थे… यह चूरन शब्द आये तो समझ आ जता है यह कम्युनिस्टों ने दिया था। वही शब्द यदि कम्युनिस्ट बुद्धिजीवी आज सोशल मीडिया में सवर्णों को बोलने लगा दें तो बहुत कुछ समझ आ जाता है।

जब भी कोई राजपूत हिंदुत्व को चूरन बताता है तो वो खुद से ही मान रहा है के “धर्म की लड़ाई हमने लड़ी या धर्म की हमने रक्षा की” ऐसी वाली बातें मनगढ़ंत थीं, हमने तो केवल राजगद्दी के लिए ही लड़ाई लड़ी थी।

कम्युनिस्टों से सीखकर कोई ब्राह्मण यह कहे कि हिंदुत्व एक चूरन है तो… वह खुद ही मान गया है कि वो हिन्दू धर्म का ठेकेदार नहीं या धर्म को लीड करना उसका दायित्व नहीं है, वह बस मंदिर के प्रबंधन हाथ में रखना चाहता है।

अब ऐसा तो हरगिज नहीं चलेगा बाबू… के हिंदुत्व के ठेकेदार भी हम बनें और हिंदुत्व को चूरन भी हम ही बोलकर दायित्व से भाग जाएं। आखिर हिन्दुत्व का चूरन दिया किसने था पहले? और आज आपके लिए हिंदुत्व चूरन है तो फिर सामान्य वर्ग के अन्य समाज, पिछड़ा, दलित, आदिवासी समाज आज से अपने आपको ऋणमुक्त और स्वतंत्र समझे… किसी ने आपके धर्म की रक्षा नहीं की थी और कोई भी आपके धर्म का ठेकेदार नहीं है। आप अपना धर्म, देवस्थान स्वतंत्र होके चलाओ।

हिंदुत्व अगर चूरन है तो इसका मतलब महाराणा प्रताप, बाजीराव पेशवा, छत्रपति शिवाजी क्या हमें चूरन बांट रहे थे? हद हो गई… हिन्दुत्व को चूरन भी बताना है और इन चूरन बांटने वालों को अपना महापुरुष भी बताना है? …यदि राष्ट्रवाद आपके लिए चूरन है तो फिर चाणक्य, सम्राट मिहिर भोज, सम्राट विक्रमादित्य पर अपना क्लेम क्यों करते फिर रहे हो? ये तीनों महापुरुष तो राष्ट्रवादी चूरन का प्रतिबिंब हैं, वही चूरन जो आपके कहने अनुसार विष है!

विडंबना देखिए कम्युनिस्ट इनके ही हाथों से इनका इतिहास मिटवा रहे हैं… कम्युनिस्टों के इशारों पर यह हिंदुत्व को चूरन बता रहे हैं,, दूसरे समाज इनके इतिहास और इनकी ठेकदारी को चूरन समझकर किनारा कर लेगा।

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला