समंदर का किंग कौन? वो 14 देश... जिनके पास तबाही लाने की ताकत, लिस्ट में भारत कहां
रक्षा के क्षेत्र में अमेरिका अपनी बादशाहत दिखाने की कोशिश करता है, जो सिर्फ हवा में नहीं दिखती. जब बात नौसेना की ताकत की आती है, तो दुनिया में अमेरिका सबसे ज्यादा ताकतवर देश बनकर उभरता है. हाल के दिनों में अमेरिका ने अपना सबसे मजबूत एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) कई दिनों से अरब सागर में तैनात किया है. इसी बीच, दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे एडवांस एयरक्राफ्ट कैरियर माना जाने वाला दूसरा USS गेराल्ड आर. फोर्ड (CVN-78) को मिडिल ईस्ट भेजने की तैयारी की जा रही है.
अगर अमेरिका की बात कर रहे हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि दुनिया में कितने देशों के पास एयरक्राफ्ट कैरियर हैं और अमेरिका की तुलना में उनके पास कितने हैं. यह भी जानना जरूरी है कि इस लिस्ट में भारत कहां है. ये एयरक्राफ्ट कैरियर देशों को समुद्र पर ताकत देते हैं, जो हजारों क्रू मेंबर्स और दर्जनों फाइटर जेट और सपोर्ट एयरक्राफ्ट से लैस होते हैं. ये जहाज न सिर्फ युद्ध में, बल्कि पावर प्रोजेक्शन, सी कंट्रोल, डिटरेंस, क्राइसिस रिस्पॉन्स और मानवीय सहायता में भी अहम भूमिका निभाते हैं. 2026 में कुल 14 देशों के पास एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जिनमें से कुछ पारंपरिक विमानवाहक हैं, कुछ न्यूक्लियर पावर्ड, कुछ शॉर्ट टेकऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी (STOBAR) टाइप, कुछ कैटापल्ट असिस्टेड टेकऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी (कैटोबार) और कुछ लैंडिंग हेलीकॉप्टर डॉक (LHD) जो हेलीकॉप्टर या शॉर्ट टेकऑफ वर्टिकल लैंडिंग (STOVL) एयरक्राफ्ट ले जाते हैं.
1. युनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका (11 कैरियर)
अमेरिकी नौसेना के कैरियर एविएशन कैपेबिलिटी में कोई मुकाबला नहीं है. निमित्ज-क्लास और फोर्ड-क्लास न्यूक्लियर पावर्ड सुपरकैरियर, साथ में वास्प, तारावा और अमेरिका-क्लास एम्फीबियस असॉल्ट शिप्स और कुछ अन्य एम्फीबियस जहाज हैं, जो अमेरिका को एफ/ए-18ई/एफ, ईए-18जी, ई-2डी, एफ-35बी, एफ-35सी जैसे फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर लॉन्च करने में मदद करते हैं. इससे अमेरिका को बेजोड़ सॉर्टी जनरेशन, ग्लोबल पावर प्रोजेक्शन, सी कंट्रोल और डिटरेंस मिलता है. अमेरिका इनका इस्तेमाल लगातार कैंपेन, फर्स्ट-नाइट स्ट्राइक्स, आईएसआर/सी2 ऑर्केस्ट्रेशन और क्राइसिस रिस्पॉन्स के लिए करता है. ये कैरियर दुनिया में सबसे एडवांस्ड हैं, जो हजारों किलोमीटर दूर तक ऑपरेट कर सकते हैं और न्यूक्लियर पावर से लंबे समय तक चलते हैं. अमेरिका का कुल डेक स्पेस बाकी दुनिया से दोगुना से ज्यादा है, जो इसे समुद्री बादशाह बनाता है.
2. चीन (3 कैरियर)
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) फिलहाल तीन एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेट करता है, जिनके नाम हैं लियाओनिंग, शैंडॉन्ग और फुजियान. चीन ने हाल ही में फुजियान के एडवांस वर्जन का टेस्ट किया है, जिसमें मैग्नेटिक लॉन्चिंग सिस्टम है. ये कैरियर पारंपरिक पावर वाले हैं, लेकिन फुजियान में एडवांस्ड कैटापल्ट टेक्नोलॉजी है जो तेजी से विमान लॉन्च करने में मदद करती है. चीन तेजी से अपना कैरियर बेड़ा बढ़ा रहा है और ये जहाज जे-15 फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और अन्य एयरक्राफ्ट ले जाते हैं. इनका इस्तेमाल साउथ चाइना सी में क्षेत्रीय नियंत्रण, पावर प्रोजेक्शन और इंडो-पैसिफिक में चाइनीज इंटरेस्ट्स की रक्षा के लिए होता है.
3. यूनाइटेड किंगडम (2 कैरियर)
यूके क्वीन एलिजाबेथ-क्लास कैरियर ऑपरेट करता है, जिसमें दो जहाज हैं: HMS क्वीन एलिजाबेथ और HMS प्रिंस ऑफ वेल्स. दोनों कैरियर पारंपरिक पावर वाले हैं और स्की-जंप रैंप से लैस हैं. दोनों एफ-35बी लाइटनिंग II एसटीओवीएल-टाइप फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर ले जा सकते हैं. यूके अपनी कैरियर कैपेबिलिटी का इस्तेमाल कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स, कोएलिशन ऑपरेशंस और डिटरेंस पैट्रोल्स के लिए करता है. ये जहाज नाटो ऑपरेशंस में अहम भूमिका निभाते हैं और ग्लोबल प्रेजेंस के लिए इस्तेमाल होते हैं, जैसे मिडिल ईस्ट या इंडो-पैसिफिक में.
4. भारत (2 कैरियर)
भारत INS विक्रमादित्य और विक्रांत STOBAR कैरियर ऑपरेट करता है, जो एमआईजी-29के/केयूबी, हेलीकॉप्टर और भविष्य में एक स्वदेशी प्लेटफॉर्म लॉन्च करने में सक्षम हैं. इससे भारत को हिंद महासागर में प्रेजेंस मेनटेन करने, मैरीटाइम कंट्रोल, फ्लीट डिफेंस और लिमिटेड स्ट्राइक की क्षमता मिलती है. भारत अपने कैरियर का इस्तेमाल डिटरेंस पैट्रोल्स, एक्सरसाइज और रीजनल कंटिंजेंसीज के लिए करता है. INS विक्रमादित्य रूस से खरीदा गया और मॉडिफाइड कियेव-क्लास है, जबकि INS विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी कैरियर है, जो कोचिन शिपयार्ड में बना है. दोनों एमआईजी-29के फाइटर जेट ले जाते हैं और हेलीकॉप्टर जैसे कामोव-31. भारत का रैंक दुनिया में तीसरा या चौथा माना जाता है, लेकिन 2 कैरियर के साथ यह इंडो-पैसिफिक में मजबूत स्थिति रखता है. भविष्य में भारत और कैरियर बनाने की योजना बना रहा है.
5. इटली (1 कैरियर + 1 एलएचडी)
इटली के पास एक कैरियर कावोर और एक एलएचडी ट्रिएस्टे है. दोनों एफ-35बी लाइटनिंग II फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर लॉन्च कर सकते हैं, जो फ्लेक्सिबल एक्सपीडिशनरी एयर पावर और नाटो इंटरऑपरेबिलिटी देते हैं. इटली इन दो जहाजों का इस्तेमाल क्राइसिस रिस्पॉन्स और कोएलिशन ऑपरेशंस के लिए करता है. कावोर एक लाइट कैरियर है जो एसटीओवीएल ऑपरेशंस के लिए डिजाइन है, जबकि ट्रिएस्टे एक बड़ा एम्फीबियस असॉल्ट शिप है जो फाइटर जेट भी हैंडल कर सकता है. ये जहाज मेडिटरेनियन और अटलांटिक में इटली की नौसेना को मजबूती देते हैं.
6. जापान (2 कैरियर कन्वर्जन में)
जापान फिलहाल दो इजुमो-क्लास जहाजों इजुमो और कागा को शॉर्ट टेकऑफ और वर्टिकल लैंडिंग ऑपरेशंस के लिए कन्वर्ट कर रहा है. फिलहाल कैरियर हेलीकॉप्टर लॉन्च करने में सक्षम हैं, लेकिन कन्वर्जन के बाद वे एफ-35बी शॉर्ट टेकऑफ/वर्टिकल लैंडिंग (एसटीओवीएल) एयरक्राफ्ट भी लॉन्च कर सकेंगे. जापान अपनी एयरक्राफ्ट कैरियर कैपेबिलिटी का इस्तेमाल होमलैंड डिफेंस रीइनफोर्समेंट, आइलैंड चेन सपोर्ट और यूएस और अन्य इंडो-पैसिफिक पार्टनर्स के साथ एलायंस इंटरऑपरेबिलिटी के लिए करता है. ये जहाज जापान की पैसिफिक डिफेंस स्ट्रैटजी का हिस्सा हैं.
7. साउथ कोरिया (1 जहाज)
साउत कोरिया के पास डॉकडो-क्लास एम्फीबियस असॉल्ट शिप है जो हेलीकॉप्टर-सेंट्रिक है. हालांकि, भविष्य में एफ-35बी या अन्य एसटीओवीएल-टाइप फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट शामिल करने की योजना है. फिलहाल डॉकडो केवल हेलीकॉप्टर तक सीमित है. डॉकडो एम्फीबियस ऑपरेशंस, ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ (HADR) और मैरीटाइम लिफ्ट को सक्षम बनाता है. यह जहाज कोरियन पेनिनसुला की रक्षा और रीजनल स्टेबिलिटी के लिए इस्तेमाल होता है.
8. स्पेन (1 कैरियर)
स्पेन के पास एक एयरक्राफ्ट कैरियर है जिसका नाम जुआन कार्लोस I एलएचडी है. यह एवी-8एन हैरियर II फाइटर एयरक्राफ्ट और विभिन्न हेलीकॉप्टर से लैस है. इससे मैड्रिड को एसटीओवीएल स्ट्राइक, फ्लीट सपोर्ट और ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी के ऑप्शंस मिलते हैं. स्पेन जुआन कार्लोस का इस्तेमाल मेडिटरेनियन सी और अटलांटिक ओशन में ऑपरेशंस के लिए करता है. यह जहाज स्पेनिश नेवी की एक्सपीडिशनरी फोर्स का मुख्य हिस्सा है.
9. थाईलैंड (1 कैरियर)
थाईलैंड के पास केवल एक कैरियर है जिसका नाम चक्री नारुबेट है. थाईलैंड का छोटा एयरक्राफ्ट कैरियर चक्री नारुबेट है. पहले यह हैरियर एयरक्राफ्ट लॉन्च करता था, लेकिन अब रॉयल थाई नेवी ने उस एयरक्राफ्ट को रिटायर कर दिया है, इसलिए अब यह केवल हेलीकॉप्टर लॉन्च करता है. इसका इस्तेमाल रियल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट से ज्यादा डिजास्टर मैनेजमेंट और एरिया सिग्नलिंग के लिए होता है. यह जहाज थाईलैंड की साउथ ईस्ट एशियन प्रेजेंस को मजबूत करता है.
10. तुर्किये (1 कैरियर)
तुर्किये के पास भी सिर्फ एक कैरियर है जिसका नाम टीसीजी अनाडोलू एम्फीबियस असॉल्ट शिप है. तुर्किये का टीसीजी अनाडोलू हेलीकॉप्टर एविएशन और कैरियर-ओरिएंटेड ड्रोन्स से लैस है, लेकिन मैन्ड फिक्स्ड-विंग प्लेटफॉर्म्स नहीं हैं. इससे तुर्किये को ब्लैक सी और मेडिटरेनियन दोनों में सी-बेस्ड आईएसआर (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रेकॉनिसांस) और स्ट्राइक के साथ एक्सपेरिमेंट करने की क्षमता मिलती है. तुर्किये का अपने पश्चिमी पड़ोसी और नाटो सहयोगी ग्रीस के साथ लंबे समय से भू-राजनीतिक दुश्मनी है. हालांकि, रियल वॉरफेयर की बजाय फिलहाल अनाडोलू का इस्तेमाल टेस्टिंग के लिए होता है.
11. रूस (1 कैरियर)
रूस के पास केवल एक कैरियर है जिसका नाम एडमिरल कुजनेत्सोव है. यह रूस का एकमात्र एयरक्राफ्ट कैरियर है, जो अक्सर 2017 से रिफिट में होने के लिए आलोचना का शिकार होता है. यह निश्चित नहीं है कि यह कैरियर कभी फिर से तैरेगा क्योंकि इसकी समस्याएं बहुत बड़ी हैं. यह कैरियर 1985 में लॉन्च हुआ था और 1991 में औपचारिक रूप से रूसी नेवी में शामिल किया गया. यह काउंटलेस मैकेनिकल और टेक्निकल प्रॉब्लम्स, फ्रीक्वेंट ब्रेकडाउन्स और क्लीनिंग डिफिकल्टीज के लिए कुख्यात रहा है. आखिरी बार जब यह ऑपरेशन में था, तब एडमिरल कुजनेत्सोव ने एसयू-33 और एमआईजी-29के फाइटर्स लॉन्च किए थे. यह STOBAR टाइप है और रूसी नेवी की ग्लोबल प्रेजेंस को सपोर्ट करता था.
12. फ्रांस (1 कैरियर)
फ्रांस के पास भी एक कैरियर है जिसका नाम चार्ल्स डी गॉल है, जो 2001 में कमीशंड हुआ. यह कैटोबार-इक्विप्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है जो राफेल एम, ई-2सी हॉकी और हेलीकॉप्टर लॉन्च करने में सक्षम है. इससे ट्रू ब्लू-वॉटर स्ट्राइक, न्यूक्लियर डिटरेंस सिग्नलिंग और इंडिपेंडेंट एक्सपीडिशनरी एयर पावर मिलता है. खास बात यह है कि फ्रांस अमेरिका के अलावा एकमात्र नौसेना ताकत है जिसके पास न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है. यह जहाज फ्रेंच नेवी की ग्लोबल ऑपरेशंस में सेंट्रल है.
13. मिस्र (2 कैरियर)
मिस्र के पास दो मिस्ट्रल-क्लास एलएचडी हैं जिन्हें कैरियर के रूप में गिना जाता है, नाम गमाल अब्देल नासर और अनवर अल सदात. मिस्ट्रल के साथ मिस्र केवल अटैक, यूटिलिटी या एंटी-सबमरीन वॉरफेयर मिशन-बिल्ट हेलीकॉप्टर लॉन्च करता है. इससे एम्फीबियस ऑपरेशंस, रीजनल प्रेजेंस और एचएडीआर सक्षम होता है. ये जहाज मिस्र को मेडिटरेनियन और रेड सी में मजबूती देते हैं.
14. ऑस्ट्रेलिया (2 कैरियर)
ऑस्ट्रेलिया के पास 2 कैरियर हैं, दोनों कैनबरा-क्लास एलएचडी हैं. इनके नाम HMAS कैनबरा और HMAS एडिलेड है. कैनबरा-क्लास केवल एमएच-60आर जैसे हेलीकॉप्टर और कभी-कभी चिनूक लॉन्च करता है. इससे एम्फीबियस असॉल्ट, एचएडीआर, कमांड-एंड-कंट्रोल और लिमिटेड सी कंट्रोल सपोर्ट मिलता है. ऑस्ट्रेलिया इस कैपेबिलिटी का इस्तेमाल रीजनल क्राइसिस में एविएशन लिफ्ट और आईएसआर, डिजास्टर रिलीफ, कोएलिशन एम्फीबियस ऑपरेशंस के लिए करता है, न कि स्ट्राइक के लिए. ये जहाज इंडो-पैसिफिक में ऑस्ट्रेलियाई इंटरेस्ट्स की रक्षा करते हैं.
ये कैरियर न सिर्फ युद्ध की ताकत बढ़ाते हैं, बल्कि डिप्लोमेसी, आपदा राहत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भी मदद करते हैं. 2026 में कुल मिलाकर दुनिया में लगभग 25-30 ऐसे जहाज हैं, लेकिन अमेरिका अकेला ही बाकी दुनिया से ज्यादा ताकतवर है.
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