Largest Oil Well In India: भारत में सबसे बड़ा तेल का कुआं कहां है, यहां हर दिन कितना तेल निकलता है?

Mar 21, 2026 - 14:33
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Largest Oil Well In India: भारत में सबसे बड़ा तेल का कुआं कहां है, यहां हर दिन कितना तेल निकलता है?

Largest Oil Well In India: खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में पैदा हुई रुकावटों ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है. ईरान और अन्य देशों के बीच जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर आसमान छू रही हैं. वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अब हर भारतीय की नजर देश के घरेलू तेल उत्पादन पर टिकी है. भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, लेकिन अरब सागर की लहरों के बीच स्थित 'मुंबई हाई' भारत की ऊर्जा सुरक्षा का सबसे मजबूत किला बना हुआ है. 

भारत का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र

भारत का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण तेल क्षेत्र 'मुंबई हाई' (जिसे पहले बॉम्बे हाई कहा जाता था) है. यह कोई जमीन पर स्थित कुआं नहीं है, बल्कि मुंबई के तट से अरब सागर में लगभग 160 किलोमीटर दूर समुद्र के बीचों-बीच स्थित एक विशाल ऑफशोर (अपतटीय) तेल क्षेत्र है. यहां समुद्र की गहराई में प्लेटफॉर्म बनाकर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का उत्पादन किया जाता है. अपनी विशाल क्षमता और रणनीतिक महत्व के कारण यह क्षेत्र भारत के कुल घरेलू तेल उत्पादन में लगभग 35 प्रतिशत से अधिक का अकेले योगदान देता है, जो इसे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाता है.

रूसी विशेषज्ञों की मदद और खोज का इतिहास

मुंबई हाई की खोज की कहानी काफी दिलचस्प है. इसकी खोज फरवरी 1974 में भारतीय और रूसी विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम ने की थी. उस समय भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आत्मनिर्भर होने की दिशा में कदम बढ़ा रहा था. खोज के ठीक दो साल बाद, 21 मई 1976 को यहां से तेल का व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया गया. शुरुआत में यहां से प्रतिदिन मात्र 3,500 बैरल तेल निकाला जाता था, लेकिन तकनीक और बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ मात्र तीन साल के भीतर ही यह आंकड़ा 80,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था.

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हर दिन कितना तेल उगल रहा है मुंबई हाई?

मौजूदा समय में मुंबई हाई भारत के घरेलू तेल उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है. आंकड़ों के अनुसार, यहां से प्रतिदिन लगभग 1,34,000 से 1,50,000 बैरल कच्चा तेल निकाला जा रहा है. इसका संचालन सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ओएनजीसी (ONGC) द्वारा किया जाता है. समुद्र के बीच से इस तेल को मुख्य भूमि तक पहुंचाने के लिए 1978 में एक विशाल उप-समुद्री (Sub-sea) पाइपलाइन बिछाई गई थी, जो तेल को सीधे मुंबई की रिफाइनरियों तक ले जाती है. पाइपलाइन बिछने से पहले तक कच्चे तेल को बड़े टैंकरों के जरिए तट तक लाया जाता था.

राजस्थान और असम के अन्य प्रमुख तेल क्षेत्र

यूं तो मुंबई हाई सबसे बड़ा ऑफशोर (समुद्र तटीय) क्षेत्र है, लेकिन भारत के पास जमीन पर भी तेल के विशाल भंडार मौजूद हैं. राजस्थान का बाड़मेर बेसिन भारत का सबसे बड़ा तटवर्ती तेल क्षेत्र है, जहां से भारी मात्रा में तेल निकाला जाता है. वहीं, अगर इतिहास की बात करें तो असम का डिगबोई भारत का ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे पुराना तेल क्षेत्र है, जिसकी स्थापना 1889 में हुई थी. ये सभी क्षेत्र मिलकर भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, हालांकि मांग के मुकाबले घरेलू उत्पादन अब भी काफी कम है.

आधुनिक तकनीक और भविष्य की चुनौतियां

जैसे-जैसे समय बीत रहा है, पुराने कुओं से तेल निकालना कठिन और खर्चीला होता जा रहा है. मुंबई हाई भी दशकों पुराना क्षेत्र है, इसलिए यहां उत्पादन के स्तर को बनाए रखने के लिए अब नई और उन्नत तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है. ओएनजीसी अब बीपी (BP) जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ भागीदारी कर रही है ताकि गहरे समुद्र में ड्रिलिंग की आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा सके. सरकार का लक्ष्य है कि घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आयात पर निर्भरता को कम किया जाए, खासकर तब जब खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात बने हुए हों.

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