‘मिसाइलों और ड्रोन से परे हम वैश्विक घमंड से लड़ने...’, मुज्तबा खामेनेई ने ईरान को दिया ईद का बधाई संदेश

Mar 21, 2026 - 14:32
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‘मिसाइलों और ड्रोन से परे हम वैश्विक घमंड से लड़ने...’, मुज्तबा खामेनेई ने ईरान को दिया ईद का बधाई संदेश

इजरायल और अमेरिका के साथ जारी युद्ध के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मुज्तबा खामेनेई ने शुक्रवार (20 मार्च, 2026) को देशवासियों और दुनिया भर के मुसलमानों को फारसी नववर्ष (नवरोज) और ईद-उल-फितर की मुबारकबाद दी. उन्होंने कहा कि मैं पूरी दुनिया के मुसलमानों को ईद की बधाई देता हूं. 

ईद-उल-फितर के मौके पर देश के लोगों को संदेश देते हुए सुप्रीम लीडर ने कहा कि इस साल आध्यात्मिक वसंत और प्रकृति का वसंत एक साथ आए हैं, जो इन दोनों त्योहारों को और भी खास बनाता है. यह समय एकता, धैर्य और आस्था को मजबूत करने का है.

पिछले साल ईरान की जनता ने तीन लड़ाई लड़ीं: खामेनेई

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पिछले साल ईरान की जनता ने सैन्य और सुरक्षा से जुड़े तीन बड़े मुकाबलों को सामना किया, लेकिन जनता ने साहस और दृढ़ता का परिचय दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि दुश्मनों ने ईरान पर हमला कर देश में डर और निराशा फैलाने की कोशिश की, लेकिन वे अपने इरादों में जीत नहीं पाए. हम मिसाइलों और ड्रोन के हमलों से परे वैश्विक घमंड के लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.

इजरायल पर झूठे षड्यंत्र रचने का आरोप

सुप्रीम लीडर ने विश्वास जताते हुए कहा कि ईरान के लोगों के बीच एकता और मजबूत होगी और विरोध करने वालों को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि इजरायल झूठे षड्यंत्रों के जरिए ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहा है.

जंग में मारे गए लोगों के प्रति जताई संवेदना

इसके साथ ही उन्होंने तथाकथित थोपे गए दूसरे युद्ध, जनवरी के तख्तापलट, तीसरे थोपे गए युद्ध और सुरक्षा और सीमा पर शहीद हुए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा कि इन शहीदों के बलिदान को देश हमेशा याद रखेगा और उनके परिवारों के साथ पूरा देश एकजुटता के साथ खड़ा है. आखिर में उन्होंने नवरोज और ईद उल फितर के विशेष संयोग को देश के लिए एक सकारात्मक ऊर्जा और एकता का प्रतीक करार दिया.

पहली जंग के दौरान दुश्मन को भ्रम था: खामेनेई

मुज्तबा खामेनेई ने आगे कहा कि जून में हुए पहली जंग के दौरान दुश्मन को यह भ्रम था कि लोग खुद इस्लामी शासन को सत्ता से बेदखल कर देंगे, लेकिन लोगों की सतर्कता और इस्लाम के लड़ाकों की अद्वितीय बहादूरी के कारण दुश्मन में निराशा की झलक दिखाई देने लगी और आखिर में उसे मध्यस्थता और सीजफायर के जरिए खुद को बचाना पड़ा. 

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