Strait Of Hormuz Tax: होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की तरह क्या हिंद महासागर में भारत भी वसूल सकता है टैक्स, समंदर में किसका चलता है कानून?
Strait Of Hormuz Tax: ईरान ने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स लगाने का फैसला किया है. इसके बाद दुनिया भर में एक बहस छिड़ गई है. जहां एक तरफ ईरान का तर्क है कि वह सुरक्षा मुहैया कराने के बदले यह शुल्क ले रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका जैसे देशों ने इस पर आपत्ति जताई है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियम का उल्लंघन बताया है. इसी बीच एक अहम सवाल खड़ा होता है कि क्या भारत भी हिंद महासागर में कुछ ऐसा ही कर सकता है? जानें क्या कहते हैं समुद्र के कानून.
समुद्रों का संविधान
समुद्र को नियंत्रित करने वाले नियम संयुक्त राष्ट्रीय समुद्री कानून संधि (UNCLOS) द्वारा तय किए जाते हैं. यह वैश्विक ढांचा इस बात को पक्का करता है कि समुद्र जहाजों की आवाजाही और व्यापार के लिए हमेशा खुले रहें. संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के तहत कोई भी देश सिर्फ अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से गुजरने भर के लिए जहाजों पर मनमाने ढंग से टैक्स नहीं लगा सकता.
निर्दोष आवाजाही का अधिकार
UNCLOS के मुताबिक किसी भी देश के जहाज दूसरे देश के क्षेत्रीय जल क्षेत्र, यानी तट से 12 नॉटिकल मील तक के दायरे से बिना कोई टैक्स दिए गुजार सकते हैं. बस शर्त यह है कि वह उस देश की सुरक्षा के लिए कोई खतरा पैदा ना करें. इसे ही निर्दोष आवाजाही का अधिकार कहा जाता है.
होर्मुज स्ट्रेट के लिए खास नियम
होर्मुज स्ट्रेट जैसे जरूरी संकरे समुद्री रास्तों में जहाजों को परागमन का अधिकार दिया जाता है. इस नियम के तहत जहाज बिना किसी रोक-टोक या फिर टैक्स के आजादी से आवाजाही कर सकते हैं.
कोई देश कब शुल्क वसूल सकता है?
इसका एक अपवाद भी है. कोई भी देश तभी शुल्क वसूल सकता है जब वह जहाजों को कोई खास सेवा मुहैया करा रहा हो. जैसे पायलट की सहायता, बंदरगाह का इस्तेमाल या फिर जहाजों के मार्गदर्शन में सहायता. लेकिन सिर्फ जल क्षेत्र से गुजरने भर के लिए कोई टैक्स नहीं लगाया जा सकता.
भारत इस तरह के टैक्स क्यों नहीं लगा सकता?
भारत हिंद महासागर में टोल टैक्स नहीं लगा सकता. ऐसा इसलिए क्योंकि इसका ज्यादातर हिस्सा खुले समुद्र के अंतर्गत आता है. इस पर किसी एक देश का नियंत्रण नहीं होता. यह जल क्षेत्र सभी देशों के लिए बिना किसी रोक-टोक के आवाजाही के लिए खुले होते हैं. ईरान के उलट भारत के पास कोई भी ऐसा संकरा समुद्री रास्ता नहीं है जिसे कंट्रोल किया जा सके.
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