जलालगढ़-किशनगंज लाइन की डीपीआर रेलवे बोर्ड को भेजी गई
जलालगढ़-किशनगंज रेल लाइन कटिहार से किशनगंज जाने का सबसे कम दूरी वाला रेल मार्ग होगा। साथ ही इस रेल लाइन के चालू हो जाने से पूर्णिया प्रमंडल मुख्यालय सीधे किशनगंज से जुड़ जाएगा। साथ ही एनजेपी से आने वाली ट्रेनें पूर्णिया होकर कटिहार निकल सकेंगी। वहीं बाढ़ से प्रभावित रहने वाले जलालगढ़, अमौर और बैसा जैसे प्रखंड सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे, जिससे स्थानीय कृषि उत्पादों को बड़े शहरों के बाजार मिलेंगे। वहीं सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील चिकन नेक इलाके के लिए यह एक मजबूत वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगा। 1928 के बाद से पूर्णिया में नहीं बिछी है रेल लाइन 15 सितंबर 1928 के उसके बाद से जिले में कोई लाइन नहीं बिछाई गई है। अगर यह परियोजना पूरी होती है, तो यह करीब एक सदी बाद पूर्णिया के रेल मानचित्र पर बड़ी उपलब्धि होगी। परियोजना में तेजी लाने के लिए पूर्णिया टाइम्स सोशल ग्रुप ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से गुहार लगाई है। भास्कर न्यूज|पूर्णिया| किशनगंज 17 साल से ठंडे बस्ते में बंद जलालगढ़-किशनगंज नई रेल लाइन परियोजना पर रेलवे बोर्ड अब तेजी से काम कर रहा है। परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट( डीपीआर) नए सिरे से तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेज दी गई है। अब केवल अंतिम मंजूरी और फंड आवंटन का इंतजार है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस 51.632 किमी लंबी नई रेल लाइन के निर्माण पर 1852.32 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। यह खुलासा सामाजिक संगठन पूर्णिया टाइम्स सोशल ग्रुप के आरटीआई से हुआ है। पूर्णिया टाइम्स सोशल ग्रुप के संरक्षक और कसबा निवासी राजेन्द्र प्रसाद मोदी ने बताया कि उन्होंने आरटीआई के माध्यम से जलालगढ़-किशनगंज नई रेल लाइन परियोजना की प्रगति पर जवाब मांगा था आरटीआई के जवाब में रेलवे के द्वारा उक्त जानकारी दी गई है। जलालगढ़-किशनगंज रेल लाइन परियोजना का शिलान्यस 2008-09 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया था, तब इसकी अनुमानित लागत मात्र 360 करोड़ रुपये थी। नई रेल लाइन परियोजना में आठ स्टेशन क्रमश: खाताहाट, पोरा हाल्ट, तस्लीमनगर, रौटा, मझौक हॉल्ट, मझगांव, कुट्टीहाट, महीनगांव का निर्माण होना था। लेकिन उसके बाद यह ठंडे बस्ते में चला गया।
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