बांग्लादेश के होने वाले पीएम तारिक रहमान की दिलचस्प है लव लाइफ, मुश्किल वक्त में जुबैदा ने थामे रखा हाथ, जानें कौन हैं वो
बांग्लादेश की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है. सत्ता परिवर्तन और चुनावी जीत के बाद अब देश में एक नए नेतृत्व की चर्चा तेज है और इस बदलाव के केंद्र में हैं तारिक रहमान. करीब 17 साल के लंबे प्रवास के बाद उनकी स्वदेश वापसी को केवल राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण के रूप में देखा जा रहा है. इस वापसी के साथ ही उनकी पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान भी सुर्खियों में हैं, जिन्होंने हर उतार-चढ़ाव में उनका साथ निभाया.
17 साल बाद घर वापसी, भावुक पल
बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान लंबे निर्वासन के बाद ढाका लौटे तो समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल दिखा. उनके साथ उनकी पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान और बेटी जाइमा जरनाज रहमान भी थीं. यह वापसी केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि निजी तौर पर भी बेहद भावुक क्षण था. बताया जा रहा है कि ढाका पहुंचने के बाद जुबैदा अपने पिता के धनमंडी स्थित घर में ठहरीं. 2008 में कानूनी और राजनीतिक विवादों के बीच यह परिवार लंदन चला गया था. अब वर्षों बाद उनकी वापसी को बांग्लादेश की राजनीति में एक अहम अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है.
कौन हैं डॉ. जुबैदा रहमान?
डॉ. जुबैदा रहमान का जन्म 18 मई 1972 को सिलहट में हुआ. पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहीं जुबैदा ने उच्च माध्यमिक परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया और बाद में ढाका मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया. 3 फरवरी 1994 को उनकी शादी तारिक रहमान से हुई. एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई. 1995 में बीसीएस कैडर परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल कर उन्होंने सरकारी सेवा जॉइन की थी.
लंदन प्रवास और शैक्षणिक उपलब्धि
2008 में स्टडी लीव पर लंदन जाने के बाद राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव आया और उन्हें सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया. इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और लंदन के प्रतिष्ठित इम्पीरियल कॉलेज से मेडिसिन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. लंदन में बिताए गए वर्षों के दौरान उन्होंने परिवार और कानूनी चुनौतियों के बीच संतुलन बनाए रखा.
राजनीतिक परिवार से गहरा नाता
जुबैदा रहमान एक प्रभावशाली परिवार से आती हैं. उनके पिता रियर एडमिरल महबूब अली खान बांग्लादेश नौसेना के प्रमुख रह चुके थे और बाद में संचार तथा कृषि मंत्री भी बने. 1971 के मुक्ति संग्राम के कमांडर-इन-चीफ जनरल एमएजी उस्मानी उनके चाचा थे. इस बैकग्राउंड ने उन्हें बचपन से ही राष्ट्रीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से देखने का अवसर दिया.
कानूनी विवाद और सजा
2008 में भ्रष्टाचार निरोधक आयोग ने जुबैदा, उनके पति और उनकी सास के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज किया था. बाद में ढाका की एक अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा और 35 लाख टका का जुर्माना सुनाया. हालांकि, अवामी लीग सरकार के पतन के बाद उनकी सजा पर रोक लगा दी गई. तारिक रहमान पर भी मनी लॉन्ड्रिंग और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की हत्या की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगे थे, जिनके चलते वे लंबे समय तक विदेश में रहे.
राजनीति में नई पारी की शुरुआत
करीब 6,300 से अधिक दिनों के बाद जब यह परिवार स्वदेश लौटा तो इसे बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा गया. चुनावी जीत के बाद तारिक रहमान का नेतृत्व और जुबैदा रहमान की सक्रिय मौजूदगी आने वाले समय में देश की सियासत को किस दिशा में ले जाएगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं.
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