होर्मुज स्ट्रेट से एक दिन में सिर्फ 15 जहाज निकलने दे रहा ईरान, दुनिया के देशों में कैसे होगा इनका बंटवारा?
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अब होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कड़ा नियंत्रण दिख रहा है. दुनिया के सबसे अहम तेल रूट पर रोजाना सिर्फ 15 जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा रही है. इससे बड़ा सवाल उठ रहा है कि इन जहाजों का बंटवारा किन देशों के बीच होगा और किसे प्राथमिकता मिलेगी. यह फैसला सिर्फ शिपिंग नहीं, बल्कि ग्लोबल इकॉनमी और तेल बाजार को भी सीधे प्रभावित कर सकता है, आइए जानें.
होर्मुज से गुजरेंगे सिर्फ 15 जहाज
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना सिर्फ 15 जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है. यह सीमा अस्थायी युद्धविराम के दौरान लागू की गई है. सामान्य हालात में जहां 100 से 140 तक जहाज गुजरते थे, वहां अब यह संख्या 90% तक घट चुकी है. इससे साफ है कि समुद्री ट्रैफिक पर सख्त नियंत्रण लागू है. यह फैसला 28 फरवरी के बाद शुरू हुए संघर्ष के कारण लिया गया है. ईरान पर हुए हमलों के बाद से यह रास्ता लगभग बंद हो गया था. अब सीमित आवाजाही की अनुमति दी गई है, लेकिन यह पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में है और पहले जैसी खुली आवाजाही नहीं है.
कौन तय करेगा किस देश को मिलेगा मौका?
इन 15 जहाजों में किसे गुजरने दिया जाएगा, इसका फैसला इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स तय करेंगे. यही एजेंसी पूरे रूट की निगरानी कर रही है. इस रास्ते से निकलने से पहले जहाजों को अनुमति लेनी होगी और तय प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी होगा. बिना मंजूरी के गुजरने की कोशिश करने पर सैन्य कार्रवाई तक हो सकती है.
किन देशों को मिल सकती है प्राथमिकता?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्राथमिकता उन देशों को दी जा सकती है जो ईरान के साथ तालमेल रखते हैं या उस पर लगे प्रतिबंधों का समर्थन नहीं करते हैं. वहीं अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों या उनके सहयोगियों को इस रूट से गुजरने में ज्यादा मुश्किलें आ सकती हैं.
होर्मुज पर देना होगा टोल
खबर है कि ईरान इन जहाजों से टोल भी वसूल सकता है. अनुमान है कि हर बैरल पर करीब 1 डॉलर का शुल्क लिया जा सकता है. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में मांगा जा सकता है, जिससे पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बचा जा सके. होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को तय रूट पर ही चलना होगा. यह रूट इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा तय किया गया है, ताकि बारूदी सुरंगों और खतरे वाले इलाकों से बचा जा सके. नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
ग्लोबल सप्लाई पर इसका क्या होगा असर?
होर्मुज दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है. यहां से करीब 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है. ऐसे में जब रोज सिर्फ 15 जहाज ही निकलेंगे, तो सप्लाई पर दबाव बढ़ना तय है. इसका असर तेल की कीमतों और कई देशों की ऊर्जा जरूरतों पर दिख सकता है. मौजूदा हालात में यह साफ नहीं है कि आवाजाही कब सामान्य होगी. युद्धविराम के बावजूद तनाव बना हुआ है, इसलिए यह व्यवस्था फिलहाल जारी रह सकती है. यानी दुनिया को अभी सीमित सप्लाई और महंगे तेल के दौर के लिए तैयार रहना होगा.
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