कपल ने पालतू कुत्ते को हैदराबाद से ऑस्ट्रेलिया ले जाने के लिए खर्च किए 15 लाख रुपए, बताया कारण
Viral Video: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन दिनों दिनों एक कुत्ते का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों का दिल छू लिया है. कहते हैं कि कुत्ते का प्यार सबसे पवित्र प्यार होता है और एक भारतीय दंपत्ति ने इसे सच साबित कर दिया. जब दिव्या और जॉन नाम के दंपति ने हैदराबाद से ऑस्ट्रेलिया जाने का फैसला किया तो उन्होंने अपने पालतू कुत्ते स्काई को पीछे छोड़ने से इनकार कर दिया. भले ही इसके लिए उन्हें लगभग 15 लाख रुपये खर्च करने पड़े.
दंपत्ति ने हार मानने या दूसरा कुत्ता गोद लेने के बजाय अपने परिवार को साथ रखने का विकल्प चुना. हाल ही में उन्होंने अपनी भावुक यात्रा 'कहानी ऑफ टेल्स' नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की.
“कुत्ते पर 15 लाख रुपये खर्च क्यों करें? कोई नया कुत्ता ले लो''
दंपति ने एक वीडियो में बताया, ''हमें भारत से ऑस्ट्रेलिया जाने का मौका मिला और हम बहुत खुश थे. लेकिन हमें पता चला कि ऑस्ट्रेलिया में भारत से सीधे कुत्ते नहीं ले जा सकते. भारत से आने वाले कुत्तों को किसी रेबीज-मुक्त देश में 6 महीने रहना पड़ता है. इसका मतलब यह हुआ कि कुत्ते को भारत से ऑस्ट्रेलिया लाने में ही लगभग 14 से 16 लाख रुपये खर्च होंगे और फिर उसे 6 महीने किसी अन्य देश में रहना पड़ेगा.”
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ऑस्ट्रेलिया में पालतू जानवरों के लिए कड़े हैं नियम
वीडियो में दंपति ने बताया कि वे हैदराबाद से ऑस्ट्रेलिया जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें ऑस्ट्रेलिया के पालतू जानवरों के नियमों के बारे में पता चला. भारत से सीधे पालतू कुत्तों के आयात पर रोक है क्योंकि भारत को रेबीज के कारण "अमान्य" देश माना जाता है. इस नियम के तहत कुत्तों को छह महीने तक रेबीज-मुक्त देश में रहना जरूरी है. यह खबर उनके लिए बहुत चौंकाने वाली थी क्योंकि इसका मतलब था लंबा इंतजार, भारी खर्च और सबसे दुखद बात, अपने प्यारे कुत्ते स्काई से महीनों तक अलग रहना.
कठिन सफर और भावनात्मक चुनौती
पहले महीने के लिए दंपति स्काई के साथ दुबई में रहे ताकि उसे वहां के माहौल में ढलने में मदद मिल सके, और फिर उसे बाकी समय के लिए एक बोर्डिंग सुविधा में छोड़ दिया गया. पूरी प्रक्रिया में लगभग 190 दिन लगे, जिसमें कागजी कार्रवाई, पशु चिकित्सा परीक्षण, टीकाकरण और संगरोध शुल्क शामिल थे.
उसके बाद उसे छोड़ना उनके जीवन के सबसे कठिन पलों में से एक था. वे हर दिन उससे संपर्क करते, अनगिनत सवाल पूछते, उसकी खबर का इंतज़ार करते और हर गुज़रते दिन को गिनते रहते. फोन कॉल और वीडियो कॉल रोज़ाना की बात हो गई थी, सिर्फ़ उसे देखने, उसकी सेहत की पुष्टि करने और खुद को यह तसल्ली देने के लिए कि उनका फैसला सही था.
छह महीने की प्रतीक्षा का सुखद अंत
दंपति ने बताया कि छह महीने उनके लिए अनंत काल की तरह लग रहे थे. लेकिन आखिरकार वह दिन आया जब स्काई ऑस्ट्रेलिया में उनके पास पहुंचा. सारा इंतजार, तनाव, डर और बलिदान एक ही क्षण में सार्थक महसूस होने लगा. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को यह सफ़र अव्यावहारिक लग सकता है, लेकिन उनके लिए कभी ऐसा नहीं था. स्काई उनके लिए सिर्फ़ एक कुत्ता नहीं, बल्कि उनका बच्चा है, और इसके लिए वे यह प्रक्रिया दोबारा भी करने को तैयार हैं.
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