बिहार में 350 KM/H की स्पीड से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन:4 घंटे में पटना से दिल्ली; पहला स्टॉपेज वाराणसी, 40 फीट की ऊंचाई पर बनेगा स्टेशन
बिहार में 350 km/h की रफ्तार से बुलेट ट्रेन चलेगी। इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर होली बाद काम शुरू हो जाएगा। केंद्रीय बजट 2026-27 में इसकी घोषणा की गई है। दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच दो बुलेट ट्रेन सेवाएं चलेंगी। इससे पटना से दिल्ली जाने के लिए वाया वाराणसी टिकट लेना होगा। यात्रा करीब 4 घंटे में पूरी होगी। दोनों ट्रेन सेवाओं के समय इस तरह सेट किए जाएंगे कि पटना से कोई यात्री दिल्ली जाना चाहे तो वाराणसी में उतकर दूरी ट्रेन में आराम से सवार हो सके। मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़ें, वाराणसी से सिलीगुड़ी वाया पटना बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर क्या हो रहा है? यह ट्रेन सेवा कितनी खास होगी। पटना और कटिहार में रुकेगी बुलेट ट्रेन रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, ‘वाराणसी से सिलीगुड़ी वाया पटना बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी। इसके बन जाने से पटना से सिलीगुड़ी की दूरी मात्र 2 घंटे 5 मिनट में तय की जा सकेगी। पटना से वाराणसी की यात्रा करीब 50 मिनट में पूरी होगी। वाराणसी से सिलीगुड़ी जाने में 2 घंटे 55 मिनट लगेंगे। ’ रेल मंत्री ने बताया, 'हाई स्पीड कॉरिडोर की कनेक्टिविटी दिल्ली से हो जाएगी। वाराणसी सिलीगुड़ी के साथ दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड कॉरिडोर पर भी काम चल रहा है। इसके बनने के बाद ये पूरी तरह से एक इकोनॉमिक कॉरिडोर हो जाएगा। इसके बाद सिलीगुड़ी से आगे भी इसका विस्तार किया जाएगा।’ रेलवे सूत्रों की मानें तो बिहार में पटना और कटिहार में 40 फीट ऊंचाई पर स्टेशन बनाया जाएगा। वाराणसी या सिलीगुड़ी से चलने के बाद बुलेट ट्रेन पटना और कटिहार में रुकेगी। सिर्फ 4 घंटे में पटना से पहुंच जाएंगे दिल्ली पटना से दिल्ली की दूरी करीब 1000 km है। तेजस और राजधानी जैसी ट्रेनों को यह दूरी तय करने में 12 घंटे से अधिक लगते हैं। बुलेट ट्रेन से यह सफर सिर्फ 4 घंटे में हो सकेगा। इसके लिए यात्री को पटना टू दिल्ली वाया वाराणसी टिकट लेना होगा। यात्री पटना से वाराणसी जाने वाली बुलेट ट्रेन में सवार होंगे। करीब 50 मिनट में वाराणसी पहुंचेंगे। इसके बाद दिल्ली जाने वाली बुलेट ट्रेन में सवार होंगे। रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सिलीगुड़ी से चलकर वाराणसी पहुंचने वाली बुलेट ट्रेन और वाराणसी से चलकर दिल्ली जाने वाली ट्रेन की टाइमिंग ऐसी रखी जाएगी कि यात्री एक ट्रेन से उतरकर दूसरे में सवार हो सकें। फ्लाइट से पटना से दिल्ली जाने में 1 घंटा 40 मिनट लगते हैं। एयरपोर्ट पर जाने, विमान में सवार होने और लैंडिंग के बाद एयरपोर्ट से निकलने वाले समय को जोड़ें तो इस यात्रा में भी करीब चार घंटे लग जाते हैं। मार्च से पहले बनेगी कमेटी, हवाई सर्वे करेगी भास्कर ने रेलवे बोर्ड के एक सीनियर अधिकारी से बात कर इस पूरे प्रोजेक्ट को समझने की कोशिश की। इसका रूट क्या होगा। कितने स्टेशन होंगे। कब तक प्रोजेक्ट पूरा होगा। उन्होंने बताया, ‘इस महीने के आखिर तक एक कमेटी बनेगी। कमेटी वाराणसी से सिलीगुड़ी तक हवाई सर्वे करेगी। इसके बाद रूट से लेकर ठहराव तक की डिटेल जानकारी दी जाएगी।’ उन्होंने कहा, ‘इतना तय है कि ट्रेन पटना में ठहरेगी। वाराणसी वाया पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर, आरा होते हुए पटना पहुंचेगी। यहां से कटिहार होते हुए सिलीगुड़ी जाएगी। संभव है कि कटिहार में भी एक स्टॉपेज होगा। हालांकि, कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि ट्रेन का स्टॉपेज कितने किलोमीटर पर होगा।’ हवाई सर्वे में जमीन की ऊंचाई से जंगल तक देखा जाएगा रेलवे के अधिकारी ने भास्कर को बताया, 'हवाई सर्वे में कई चीजों का अध्ययन किया जाएगा। इसमें जमीन की ऊंचाई और ढलान, नदी, जंगल, आबादी, सड़क व रेल क्रॉसिंग, पुल, फ्लाइ ओवर, अंडरपास आदि के लिए सही जगह देखा जाएगा। इसके आधार पर भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण क्लियरेंस संबंधी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।’ मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन से अधिक सीटें होंगी भारत में पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलेगी। इससे अधिक सीट की क्षमता वाली बुलेट ट्रेन वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच चलेगी। अभी तक मुंबई-अहमदाबाद के बीच 731 सीटों वाली बुलेट ट्रेन चलाने की योजना है। जबकि, वाराणसी से पटना के रास्ते सिलीगुड़ी जाने वाली बुलेट ट्रेन में 750 यात्री सफर कर पाएंगे। बुलेट ट्रेन में भूकंप के लिए वॉर्निंग सिस्टम बुलेट ट्रेन में पहली बार अर्थक्वेक वार्निंग सिस्टम लगाया जा रहा है। यह सिस्टम जापानी तकनीक पर बेस्ड है। भूकंप आने पर यह सिस्टम तुरंत बिजली सप्लाई बंद कर देगा। बिजली बंद होते ही इमरजेंसी ब्रेक लगेंगे और ट्रेन वहीं रुक जाएगी। बुलेट ट्रेन के फायदे यात्रा समय में भारी कमी: बुलेट ट्रेन की रफ्तार 300 से 350 किमी होगी। इससे व्यवसाय, शिक्षा और पर्यटन के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाने में कम समय लगेगा। पर्यावरण अनुकूल परिवहन: यह बिजली से चलती है, जिससे डीजल या पेट्रोल की तुलना में कार्बन उत्सर्जन बहुत कम होता है। वायु प्रदूषण कम होता है। आर्थिक विकास और रोजगार सृजन: हाई-स्पीड कॉरिडोर के निर्माण से हजारों लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेंगे। रेलवे, स्टेशनों, लॉजिस्टिक्स और आसपास के क्षेत्रों में व्यवसाय बढ़ेगा। सुरक्षित और आरामदायक यात्रा: बुलेट ट्रेन में सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक, ब्रेकिंग सिस्टम और फायर-सेफ्टी के इंतजाम हैं। इसके साथ ही आरामदायक सीटें, एसी कोच और न्यूनतम शोर यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाते हैं। क्षेत्रीय और शहरी कनेक्टिविटी मजबूत: अलग-अलग राज्यों और शहरों को जोड़कर व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलता है। ग्रामीण और छोटे शहर भी बड़े शहरों से जुड़ते हैं, जिससे विकास का फैलाव होता है। कैसी है जापान की शिंकानसेन ट्रेन? जिसे हम बुलेट ट्रेन कहते हैं उसका असली नाम शिंकांसेन (मतलब- नई मुख्य रेल लाइन) ट्रेन है। पहली बुलेट ट्रेन जापान के टोक्यो और ओसाका के बीच 1964 में शुरू हुई थी। जापान में इसकी अधिकतम गति 320 किमी/घंटा है। रोज करीब 10 लाख लोग इन ट्रेनों में सवार होते हैं। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट) के लिए जापान भारत को दो शिंकानसेन ट्रेन E5 और E3 मुफ्त में देगा। इनकी डिलीवरी 2026 में हो सकती है। जापान इस समय बुलेट ट्रेन के E10 मॉडल पर काम चल रहा है। यह E3 और E5 की तुलना में काफी तेज और माडर्न होगा। जापान टाइम्स के मुताबिक E10 को दोनों देशों यानी भारत और जापान में एक साथ ट्रैक पर उतारने पर मंथन चल रहा है। हालांकि E10 को तैयार होने में वक्त लगेगा, ऐसे में भारत में E3 और E5 से काम चलाया जाएगा। इन दोनों ट्रेनों से मिले डेटा के आधार पर E10 को अपग्रेड करने में भी मदद मिलेगी। इन ट्रेनों में ज्यादा सामान रखने की जगह और कठोर मौसम में ढलने लायक बनाया जा रहा है।
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