महाराष्ट्र की राजनीति के धुरंधर बनकर उभरे फडणवीस

Jan 30, 2026 - 14:41
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महाराष्ट्र की राजनीति के धुरंधर बनकर उभरे फडणवीस

महाराष्ट्र की महानगरपालिकाओं में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अभूतपूर्व जीत ने एक बार फिर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की विकास की राजनीति और उनके राजनीतिक चातुर्य का डंका बजा दिया है. वह एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति के धुरंधर बनकर उभरे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा को मिली जीत केवल सत्ता परिवर्तन का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक-राजनीतिक संरचना में आए एक गहरे बदलाव का संकेत भी है. 

बीजेपी केवल सहयोगी दल नहीं, राजनीति की धुरी 

2026 के नगर निकाय चुनावों के परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा अब महाराष्ट्र में केवल एक सहयोगी दल नहीं, बल्कि राजनीति की धुरी बन चुकी है. दशकों से महाराष्ट्र की राजनीति, विशेष रूप से मुंबई और ठाणे जैसे शहरी केंद्रों में  'भूमिपुत्र' और 'मराठी अस्मिता' जैसे भावनात्मक मुद्दों पर केंद्रित रही है. 

सीएम फडणवीस की बातों पर ज्यादा भरोसा

भाजपा ने इस पारंपरिक विमर्श को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सर्वसमावेशी विकास' और 'हिंदुत्व' के मिश्रण से ध्वस्त कर दिया है. मुख्यमंत्री फडणवीस महानगरपालिका चुनावों के दौरान अपने भाषणों का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अपने कार्यकाल में हुए विकास कार्यों को गिनाने एवं भविष्य में होनेवाले कार्यों की जानकारी देने में खर्च करते थे. बीएमसी जैसे प्रमुख शहरी निकायों में भाजपा की जीत यह दर्शाती है कि शहरी और मध्यमवर्गीय मतदाताओं ने भावनात्मक या क्षेत्रीय मुद्दों के बजाय मुख्यमंत्री द्वारा कही गई बातों पर ज्यादा भरोसा किया है. 

भाजपा का एक प्रमुख चुनावी नारा 'ट्रिपल इंजन सरकार'

अब मतदाता बेहतर बुनियादी ढांचे, कुशल सार्वजनिक सेवाओं, पारदर्शी प्रशासन और वैश्विक मानकों वाली नागरिक सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान देते दिखाई दे रहे हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा का एक प्रमुख चुनावी नारा 'ट्रिपल इंजन सरकार' (केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय में एक ही दल/गठबंधन) रहा है. इस अवधारणा के पीछे तर्क यह है कि तीनों स्तरों पर सत्ता में एक ही दल होने से विकास परियोजनाओं के निष्पादन में समन्वय बढ़ेगा और प्रशासनिक दक्षता में सुधार होगा.

राज्य की अधिकांश महानगरपालिकाओं पर भाजपा या भाजपानीत महायुति के नियंत्रण का सीधा अर्थ होगा,  राज्य के कुल बजटीय संसाधनों के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर नियंत्रण. महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं का संयुक्त बजट कई छोटे भारतीय राज्यों को मिलाकर उनके कुल बजट से अधिक होता है. 

वोट बैंक और अधिक मजबूत होगा

भाजपा अब इन विशाल संसाधनों का उपयोग अपनी प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास एजेंडे को सीधे जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए कर सकती है. इस सीधे हस्तक्षेप से न केवल परियोजनाओं का त्वरित क्रियान्वयन संभव होगा, बल्कि भाजपा का स्थानीय स्तर पर सीधा संपर्क बढ़ेगा और उसका वोट बैंक और अधिक मजबूत होगा.

सीएम फडणवीस का 'माइक्रो मैनेजमेंट' 

हालिया चुनावी सफलताओं का श्रेय महाराष्ट्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस की रणनीतिक कुशलता और सूक्ष्म-प्रबंधन (माइक्रो मैनेजमेंट) को जाता है. उन्होंने न केवल अपनी पार्टी के लिए जीत सुनिश्चित की, बल्कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ  गठबंधन को भी सफलतापूर्वक संभाला. 

देवेंद्र फडणवीस की साख बढ़ी

इन सफलताओं ने भाजपा के भीतर देवेंद्र फडणवीस की स्थिति को निर्विवाद रूप से मजबूत किया है. उनकी रणनीतिक क्षमता और नेतृत्व कौशल ने केंद्रीय नेतृत्व के सामने उनकी साख को और बढ़ाया है. यह परिणाम इस बात का भी संकेत है कि भविष्य में, भाजपा राज्य में किसी भी गठबंधन का नेतृत्व एक प्रमुख या 'बड़े भाई' की भूमिका में ही करेगी. 

महाराष्ट्र की आधी आबादी तक भाजपा की सीधी पहुंच

सीएम फडणवीस का नेतृत्व भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति साबित हुआ है, और उनकी बढ़ती राजनीतिक ताकत महाराष्ट्र में पार्टी के भविष्य को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. फडणवीस के नेतृत्व में महानगरपालिकाओं में जीत का मतलब है महाराष्ट्र की लगभग आधी आबादी तक भाजपा की सीधी पहुंच. 

बीजेपी ने मजबूत की अपनी पैठ

भाजपा ने शहरी युवाओं, पेशेवर वर्गों और प्रवासियों के बीच अपनी पैठ मजबूत की है. महानगर निगमों के माध्यम से लागू किए जाने वाले प्रमुख विकास कार्य, जैसे कि मेट्रो रेल परियोजनाएं, तटीय सड़कें, स्मार्ट सिटी पहल और अन्य शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, भाजपा को एक 'विकास-समर्थक' और आधुनिक पार्टी के रूप में स्थापित करती हैं. इस शहरी केंद्रित विकास के नैरेटिव का लाभ भाजपा को ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी मिल सकता है, क्योंकि शहरी विकास अक्सर आसपास के क्षेत्रों को भी प्रभावित करता है.

2029 के विधानसभा चुनावों का 'प्रवेश द्वार'

भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान पिछली सरकारों और नगर निकायों में व्याप्त कथित ‘कमीशन राज’ और भ्रष्टाचार को एक प्रमुख मुद्दा बनाया. मुख्यमंत्री फडणवीस ने मतदाताओं को यह आश्वासन दिया कि भाजपा के नेतृत्व में एक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त शासन प्रदान किया जाएगा.  अब ज्यादातर  नगर निकायों में सत्ता प्राप्त करने के बाद भाजपा पर यह सिद्ध करने की जिम्मेदारी है कि वह वास्तव में पारदर्शिता और जवाबदेही ला सकती है. यदि भाजपा शहरी शासन में महत्वपूर्ण सुधार लाने और नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने में सफल रहती है, तो यह उसके लिए 2029 के विधानसभा चुनावों का 'प्रवेश द्वार' साबित हो सकता है.

सामाजिक आधार का सफलतापूर्वक विस्तार

पिछले कुछ वर्षों में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा ने अपने सामाजिक आधार का सफलतापूर्वक विस्तार किया है. पार्टी ने अब अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और मराठा समुदायों में भी अपनी पैठ मजबूत की है, जो महाराष्ट्र में महत्वपूर्ण मतदाता समूह हैं. नगर निगम चुनावों में, भाजपा ने विभिन्न जातियों और समुदायों के उम्मीदवारों को टिकट वितरण में प्रतिनिधित्व दिया. इस 'सोशल इंजीनियरिंग' रणनीति से स्थानीय स्तर पर नए नेतृत्व का उदय हो रहा है, जो अपने समुदायों में पार्टी के लिए समर्थन जुटा सकते हैं. 

पारंपरिक 'पावर सेंटर्स' को चुनौती दी

यह विस्तार भाजपा को भविष्य में अन्य दलों के पारंपरिक जातीय वोट बैंकों में सेंध लगाने में मदद करेगा. वास्तव में महाराष्ट्र की महानगरपालिकाओं में भाजपा का वर्तमान प्रभुत्व केवल एक चुनावी जीत से कहीं अधिक है. इसने राज्य की राजनीति में एक मौलिक राजनीतिक पुनर्गठन का रास्ता खोल दिया है. इसने महाराष्ट्र की राजनीति के पारंपरिक 'पावर सेंटर्स' को चुनौती दी है और एक नई राजनीतिक गतिशीलता स्थापित की है. भविष्य में  इसका सबसे बड़ा प्रभाव यह होगा कि राज्य की राजनीति 'गठबंधन की मजबूरी' और खंडित जनादेश के युग से निकलकर 'एकदलीय प्रभुत्व' या एक प्रमुख गठबंधन के वर्चस्व की ओर बढ़ सकती है. 

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.] 

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