मेरठ में 26 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित:ग्राम प्रधानों को सिल्वर-ब्रोंज गांधी प्रतिमा से सम्मान ,पोषण पोटली वितरण और 100 दिवसीय सघन अभियान की शुरुआत
विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर विकास भवन में आयोजित कार्यक्रम में जनपद की 26 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया। इस दौरान टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की गई। कार्यक्रम में उन ग्राम प्रधानों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने गांव को टीबी मुक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई। लगातार दो वर्षों से गांव को टीबी मुक्त बनाए रखने वाले 13 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को सिल्वर गांधी प्रतिमा, जबकि पहली बार यह उपलब्धि हासिल करने वाले 13 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को ब्रोंज गांधी प्रतिमा प्रदान की गई। कार्यक्रम की शुरुआत जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह, सीडीओ नूपुर गोयल, सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया और जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. विपुल कुमार को पौधा भेंट कर सम्मानित करने के साथ हुई। इसके बाद सभी 26 ग्राम पंचायतों को सम्मानित किया गया। इन ग्राम पंचायतों को किया गया टीबी मुक्त घोषित:
- रोहटा ब्लॉक के जंगेठी और ईदरीशपुर
- मवाना ब्लॉक के बना, बहजादका, देदूपुर, खालीदपुर, कुण्डा, भगवानपुर, गडीना और नगला कातर
- रजपुरा ब्लॉक के दत्तावली और आलमपुर
- हस्तिनापुर ब्लॉक के गजरौला
- सरधना ब्लॉक के फरीदपुर, दशरथपुर, अटेरना और नगला ऑडर
- सरूरपुर ब्लॉक के दुर्वेशपुर, रिटौली, काकेपुर, रतनगढी, रिठाली और भाव नंगला
- तथा दौराला ब्लॉक के इकत्यारपुर, चरला और खिरवा शामिल हैं। जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनपद में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान जागरूकता, साफ-सफाई और समय पर जांच के जरिए टीबी उन्मूलन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गांव-गांव में अवेयरनेस ड्राइव चलाई जाएगी और पोषण किट वितरण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। टीबी मरीजों की पहचान के लिए अब हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीन की सुविधा शुरू की गई है, जो गांव-गांव जाकर उच्च जोखिम वाली आबादी की जांच कर रही है। 24 मार्च से 100 दिवसीय सघन टीबी अभियान भी शुरू किया गया है, जिसके तहत जनपद की 20% उच्च जोखिम वाली आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। इस अभियान में कुपोषित व्यक्ति, टीबी मरीजों के संपर्क में रहने वाले लोग, पूर्व टीबी रोगी, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग, मधुमेह मरीज, धूम्रपान व शराब सेवन करने वाले, एचआईवी संक्रमित तथा मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों की विशेष जांच की जाएगी। कार्यक्रम के अंत में सभी ने भारत को टीबी मुक्त बनाने की शपथ ली।
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