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❗️आज सुबह, दक्षिणी लेबनान के हाउमिन अल-तहता गांव पर हुए इजरायली हवाई हमले में एक पूरा परिवार मारा गया: एक पिता, माता और उनके दो बच्चे।
विपिन राठौर मीरापुर मुज़फ्फरनगर) भगवान बाला जी को जन्मोत्सव पर 56 भोग का प्रसाद लगाया
बाला जी मंदिर में भक्तों ने विशेष पूजा अर्चना कर बाबा के भजनों का गुनगान कर प्रसाद लगाया
-मीरापुर में भगवान भोलेनाथ के 11वें अवतार भगवान बाला जी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।बाला जी मंदिर में भगवान बाला जी को 56 भोग का प्रसाद लगाया गया।इस दौरान सनातनियों ने भगवान बाला जी की विशेष पूजा अर्चना की और बाला जी के भजनों पर जमकर नृत्य करते हुए भक्ति का आनन्द लिया।
कस्बें की मुकल्लमपुरा रोड़ स्थित बाला जी धाम में भगवान बाला जी के जन्मोत्सव पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो गयी थी। सर्वप्रथम मंदिर में भगवान बाला जी का विशेष श्रृंगार किया गया और इसके बाद भगवान श्री बाला जी महाराज को 56 प्रकार की मिठाइयों,फलों, ड्राईफ्रूट समेत अन्य व्यंजनों का 56 भोग प्रसाद लगाया गया।इस दौरान मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गयी तथा भगवान बाला जी के भजनों पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया।और भजनों के माध्यम से भगवान बाला जी को जन्मोत्सव की बधाई दी तथा उनका गुणगान किया। इस दौरान बाला जी शोभायात्रा समिति के सदस्यों की ओर से रूहअफजा ,खीर,फल,गुलदाना आदि का प्रसाद वितरित किया गया।इस दौरान मुख्य रूप से मंदिर के पुजारी राजपाल सुकरालिया,शशिकांत रस्तौगी,सुशील शर्मा,सुनील दत्त शर्मा,प्रेस क्लब मीरापुर अध्यक्ष प.राहुल शर्मा,वरिष्ठ भाजपा नेता अभिषेक गर्ग,अमित डागा, मोहित गर्ग,अतुल अग्रवाल, राघव संगल, मोनू संगल, सुनील भारती ,मनीष अग्रवाल,प्रवीण सुकरालिया,विनोद सुकरालिया,गौरी कुमार,दीपक प्रजापति,नमन शारदा,छोटू अग्रवाल ,वरुण गोयल,लक्ष्य डागा, मोहित डागा,बलराम गिरी,प्रभात शर्मा,आचार्य प.मनोज वाजपेई आदि मौजूद रहें।बाला जी शोभायात्रा समिति के सदस्य शशिकांत रस्तौगी ने बताया कि कल शुक्रवार को भगवान बाला जी की विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी।
मीरापुर में बाला जी मंदिर में भगवान बाला जी को लगा 56 भोग प्रसाद व मौजुद श्रद्धालु
Tejraftarnews.in: *_🔴गूगल, एपल और टेस्ला पर हमले की चेतावनी... ईरान बोला- इन 18 कंपनियों को बनाएंगे निशाना_*
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_पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अमेरिका को चेतावनी दी है। आईआरजीसी ने 1 अप्रैल से माइक्रोसॉफ्ट, एपल, गूगल, इंटेल और बोइंग सहित 18 अमेरिकी कंपनियों पर हमले की धमकी दी है।_
Tejraftarnews.in देश राज्यों से बड़ी खबरें*
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*1* ट्रम्प बोले- ईरान पर जीत हासिल की, उनकी सेना हमारे कंट्रोल में, समझौता नहीं किया तो पाषाण युग में पहुंचा देंगे
*2* 'हमारे भारतीय दोस्त सुरक्षित, उन्हें नहीं रोकेंगे'; होर्मुज संकट पर ईरान ने कर दिया बड़ा एलान
*3* 'दुश्मनों के लिए होर्मुज युद्ध के बाद भी नहीं खोलेंगे', ट्रंप की धमकी के बीच ईरान का बड़ा फैसला
*4* ममता बनर्जी के गढ़ में अमित शाह की हुंकार; बोले- दीदी की विदाई तय, 15 दिन बंगाल में ही रहूंगा
*5* लोकसभा में आज CAPF बिल पेश होगा, राज्यसभा से पास, डिपुटेशन के नियम तय होंगे; दावा- अप्रैल के तीसरे हफ्ते फिर बुलाया जा सकता सत्र
*6* राघव चड्ढा को झटका: AAP ने डिप्टी लीडर पद से हटाया, राज्यसभा में बोलने पर भी पाबंदी की मांग की
*7* लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि अगर आगामी आम चुनाव में कांग्रेस सत्ता में आती है, तो सीएपीएफ विधेयक 2026 को रद्द कर दिया जाएगा। राहुल गांधी ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक से मुलाकात का जिक्र किया
*8* पश्चिम एशिया संकट पर नितिन गडकरी का बड़ा बयान, कहा- देश में ईंधन और गैस की कोई कमी नहीं
*9* गडकरी ने कहा आज देश में गैस या ईंधन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ मुश्किलें जरूर हैं, लेकिन सरकार की बेहतर नीतियों की वजह से आम जनता को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। सरकार लगातार हालात पर नजर रखे हुए है ताकि आपूर्ति बनी रहे
*10* पश्चिम बंगाल में 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर बंधक, सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा- हमें पता है उपद्रवी कौन; वोटर लिस्ट से नाम कटने पर लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन
*11* मालदा में बवाल पर BJP आक्रामक: सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद ममता सरकार को घेरा, अराजकता फैलाने का लगाया आरोप
*12* गौतम अडाणी ने परिवार के साथ रामलला के दर्शन किए, 30 मिनट मंदिर में रहे; बोले- यह भावुक क्षण; गुरुकुल के छात्रों से मिले
*13* युद्ध के साये में सोने-चांदी की चमक हुई फीकी, सोना 3200 रुपये टूटा; चांदी ₹15,,900 लुढ़की, कच्चा तेल 10% चढ़ा
*14* सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से 1773 अंक चढ़कर बंद, हरे निशान पर बंद,73,320 पर पहुंचा; आईटी और रियल्टी शेयर्स में सबसे ज्यादा खरीदारी।
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Tejraftarnews.in: *WB: NEWS👇*
1.*SIR को लेकर मालदा के बांधापुकुर में थाने पर हमला, पत्थरबाजी में पुलिस की गाड़ी के चालक का सिर फटा.*
2.*कूचबिहार में नामांकन को लेकर महकमा शासक दफ्तर के सामने TMC-BJP में व्यापक संघर्ष.*
3.*मालदा की सभा से ममता की हुंकार, यहां की घटना से बंगाल का सिर नीचे हुआ, इसके लिए कांग्रेस दोषी, हमारे हाथ में नहीं है कानून व्यवस्था, EC ने सारे अधिकारी बदल दिए, शांतिपूर्ण तरीके से प्रतिवाद-प्रदर्शन की अपील भी की.*
4.*SC की कानून व्यवस्था को आज की टिप्पणी पर BJP का सवाल, क्या ममता बनर्जी CM पद से इस्तीफा देंगी?, जजों को बंधक बनाए जाने पर मां-माटी- मानुष सरकार के मौन पर ली चुटकी.*
5.*TMC की तुष्टिकरण की राजनीति के कारण हुई मालदा के कालियाचक की घटना: BJP.*
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Tejraftarnews.in: बहोरीबंद जनपद में 9 से 14 वर्ष की किसी किशोरी बालिकाओं एचपीवी टीकाकरण के संबंध में अनुविभागीय अधिकारी की अध्यक्षता पर संपन्न हुई बैठक।
संबंधित अधिकारियों को दिए निर्देश।
कटनी मध्यप्रदेश।
उदय समाचार। अनिल चौधरी जिला ब्यूरो।
कटनी बहोरीबंद मध्यप्रदेश। किशोरी बालिकाओ को गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) से बचाने के लिए प्रदेश व्यापी एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान की तैयारियों को लेकर बहोरीबंद जनपद सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक की अध्यक्षता अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने की।
बैठक के मुख्य बिंदु:
लक्ष्य समूह: बैठक में बताया गया कि इस अभियान के तहत 9 से 14 वर्ष की आयु की किशोरी बालिकाओं को एचपीवी का टीका लगाया जाएगा। यह टीका भविष्य में होने वाले जानलेवा कैंसर से सुरक्षा प्रदान करेगा।
विभागों का समन्वय: एसडीएम ने शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र बालिका टीकाकरण से वंचित न रहे।
जागरूकता पर जोर: अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे स्कूलों और आंगनबाडी केंद्रों के माध्यम से अभिभावकों को इस टीके के महत्व के बारे में जागरूक करें और फैली हुई भ्रांतियों को दूर करें।
कार्ययोजना: स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण सत्रों के आयोजन और माइक्रो-प्लानिंग की जानकारी साझा की। शुरुआती चरण में स्कूलों में शिविर लगाकर बालिकाओं को कवर किया जाएगा।
अधिकारियों का संदेश:
अनुविभागीय अधिकारी ने जोर देकर कहा कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है, जिसे समय पर टीकाकरण के माध्यम से रोका जा सकता है। उन्होंने सभी पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।
महत्वपूर्ण जानकारी: एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रमाणित किया गया है। यह बालिकाओं के स्वस्थ भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है।
बैठक में बीएमओ, बीआरसी, परियोजना अधिकारी (महिला बाल विकास) आंगनवाड़ी सुपरवाइजर सहित समस्त विद्यालय के प्राचार्य पर्यवेक्षकों की उपस्थिति रही।
Tejraftarnews.in: मेरठ में AIMIM नेता हाजी शौकत अली के “एनकाउंटर का बदला एनकाउंटर” वाले बयान के बाद विवाद बढ़ा और कार्रवाई की खबरों से माहौल गरमा गया। इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि भड़काऊ बयानबाजी कितनी जल्दी हालात बिगाड़ सकती है।
अब बात करें उत्तर प्रदेश की व्यवस्था की, तो यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में साफ संदेश है कि कानून से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। चाहे कोई कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो, अगर वह समाज में तनाव फैलाने की कोशिश करेगा तो उस पर कार्रवाई तय है।
योगी सरकार ने यह साबित किया है कि कानून व्यवस्था के मामले में कोई समझौता नहीं होगा। यही वजह है कि आज अपराधियों में डर और आम लोगों में भरोसा नजर आता है।
साफ है, बाबा जी के उत्तर प्रदेश में न तो कानून से छेड़छाड़ चलेगी और न ही आग लगाने वाली बयानबाजी। यही मजबूत और सख्त शासन की असली पहचान है।
Tejraftarnews.in: साभार...
अल्लाह के हुक्म से #आखरत की बेताबी और 1400 वर्षों से जारी जंग के बीच एक मासूम का वीडियो जारी करने का क्या मकसद?
सवाल है,आखरत आपको चाहिए?बाकी आस्थाओं के मानव समाज का अस्तित्व खत्म कर देना आपका मजहबी फर्ज? इस्राइल में घुस कर नरसंहार की शुरुआत आप करो?"डेथ टू अमेरिका" "डेथ टू इस्राइल", "डेथ टू हिन्दू" का नारा आप बुलन्द करो?फिर ऐसे वीडियो जारी कर किससे #हमदर्दी मांग रहे हो?यदि अपने #हम_मजहब से हमदर्दी चाहिए तो वो तमाम #इस्लामिक_मुल्क अमेरिका और इस्राइल के साथ क्यों खड़े हैं?
बताया जा रहा है,यह वायरल वीडियो #गाज़ा का है,जहां एक बच्चा पानी के दो भारी कैन खींच रहा है।क्योंकि पीने के पानी की भारी किल्लत है,सारा इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह है।
...क्या यह वही कायराना रणनीति है,जब अपनी जान पर बन आए तो #औरतों_बच्चो_बुजुर्गों को सामने कर दो?
मुझे ऐसी वीडियो से कोई हमदर्दी नहीं है।यदि स्वयं के #परिवार की इतनी चिंता है तो गैरों के #परिवारों का भी ख्याल रखो।
#गाजा
#फिलस्तीन
अवधेश प्रताप सिंह कानपुर उत्तर प्रदेश,9451221253
Tejraftarnews.in: बेंगलुरु से वाराणसी जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E 185 में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक यात्री ने बीच उड़ान में ही विमान का दरवाज़ा खोलने की कोशिश कर दी। आरोपी की पहचान मोहम्मद अदनान के रूप में हुई है, जो शनिवार रात इस फ्लाइट में सवार हुआ था।
उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद मोहम्मद अदनान ने अचानक विमान का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की, लेकिन सतर्क केबिन क्रू ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए उसे रोक लिया और सीट पर बैठा दिया। हालांकि मामला यहीं नहीं रुका—वाराणसी में लैंडिंग के बाद उसने एक बार फिर दरवाज़े के पास जाने की कोशिश की, जिससे क्रू और यात्रियों में चिंता बढ़ गई।
लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट, वाराणसी पर उतरते ही इंडिगो की शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। पूछताछ में अदनान ने बताया कि वह पहली बार फ्लाइट में सफर कर रहा था और घबराहट की वजह से ऐसा कर बैठा। उसने यह भी कहा कि उसपर भूत का साया है। फिलहाल मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है और एविएशन सेफ्टी नियमों के तहत सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
[02/04, 1:46 pm] +91 99828 24731: हमारे पूर्वज महाराणा प्रताप जी, छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति संभाजी महाराज, गुरुगोबिंद सिंह जी, गुरुतेग बहादुर जी, पृथिवी राज चौहान जी, चार साहेबजादे इन सबने गोल टोपी ना पहन कर मृत्यु को चुना और आज के नेता चंद वोट पाने के लिए टोपी पहनते हैं इफ्तार करते हैं नमाज़ करते हैं अजान करते हैं ! हमे इस विकट समस्या पर चिंतन करना होगा
*Vijay Hindustani*
Tejraftarnews.in: *चमार कोई नीची जाति नहीँ, बल्कि सनातन धर्म के रक्षक हैं जिन्होंने मुगलोँ का जुल्म सहा मगर धर्म नही त्यागा*
आप जानकार हैरान हो सकते हैं कि भारत में जिस जाति को चमार बोला जाता है वो असल में चंवरवंश की क्षत्रिय जाति है। इतना ही नहीं बल्कि महाभारत के अनुशासन पर्व में भी इस वंश का उल्लेख है। हिन्दू वर्ण व्यवस्था को क्रूर और भेद भाव बनाने वाले हिन्दू नहीं, बल्कि विदेशी आक्रमणकारी थे!
जब भारत पर तुर्कियों का राज था, उस सदी में इस वंश का शासन भारत के पश्चिमी भाग में था, उस समय उनके प्रतापी राजा थे चंवर सेन। इस राज परिवार के वैवाहिक सम्बन्ध बप्पा रावल के वंश के साथ थे। राणा सांगा और उनकी पत्नी झाली रानी ने संत रैदासजी जो कि चंवरवंश के थे, उनको मेवाड़ का राजगुरु बनाया था। वे चित्तोड़ के किले में बाकायदा प्रार्थना करते थे। इस तरह आज के समाज में जिन्हें चमार बुलाया जाता है, उनका इतिहास में कहीं भी उल्लेख नहीं है।
चमार शब्द का उपयोग पहली बार सिकंदर लोदी ने किया था।
ये वो समय था जब हिन्दू संत रविदास का चमत्कार बढ़ने लगा था अत: मुगल शासन घबरा गया। सिकंदर लोदी ने सदना कसाई को संत रविदास को मुसलमान बनाने के लिए भेजा। वह जानता था कि यदि संत रविदास इस्लाम स्वीकार लेते हैं तो भारत में बहुत बड़ी संख्या में हिन्दू इस्लाम स्वीकार कर लेंगे।
लेकिन उसकी सोच धरी की धरी रह गई, स्वयं सदना कसाई शास्त्रार्थ में पराजित हो कोई उत्तर न दे सके और संत रविदास की भक्ति से प्रभावित होकर उनका भक्त यानी वैष्णव (हिन्दू) हो गए। उनका नाम सदना कसाई से रामदास हो गया। दोनों संत मिलकर हिन्दू धर्म के प्रचार में लग गए। जिसके फलस्वरूप सिकंदर लोदी ने क्रोधित होकर इनके अनुयायियों को अपमानित करने के लिए पहली बार “चमार” शब्द का उपयोग किया था।
उन्होंने संत रविदास को कारावास में डाल दिया। उनसे कारावास में खाल खिचवाने, खाल-चमड़ा पीटने, जूती बनाने इत्यादि काम जबरदस्ती कराया गया। उन्हें मुसलमान बनाने के लिए बहुत शारीरिक कष्ट दिए गए लेकिन उन्होंने कहा:-
“वेद धर्म सबसे बड़ा, अनुपम सच्चा ज्ञान, फिर मै क्यों छोडू इसे, पढ़ लू झूठ कुरान। वेद धर्म छोडू नहीं, कोसिस करो हज़ार, तिल तिल काटो चाहि, गोदो अंग कटार।”
यातनायें सहने के पश्चात् भी वे अपने वैदिक धर्म पर अडिग रहे और अपने अनुयायियों को विधर्मी होने से बचा लिया। ऐसे थे हमारे महान संत रविदास जिन्होंने धर्म, देश रक्षार्थ सारा जीवन लगा दिया। शीघ्र ही चंवरवंश के वीरों ने दिल्ली को घेर लिया और सिकन्दर लोदी को संत को छोड़ना ही पड़ा।
संत रविदास की मृत्यु चैत्र शुक्ल चतुर्दशी विक्रम संवत १५८४ रविवार के दिन चित्तौड़ में हुई। वे आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी स्मृति आज भी हमें उनके आदर्शो पर चलने हेतु प्रेरित करती है, आज भी उनका जीवन समाज के लिए प्रासंगिक है।
हमें यह ध्यान रखना होगा की आज के छह सौ वर्ष पहले चमार जाति थी ही नहीं। इतने ज़ुल्म सहने के बाद भी इस वंश के हिन्दुओं ने धर्म और राष्ट्र हित को नहीं त्यागा, गलती हमारे भारतीय समाज में है। आज भारतीय अपने से ज्यादा भरोसा वामपंथियों और अंग्रेजों के लेखन पर करते हैं, उनके कहे झूठ के चलते बस आपस में ही लड़ते रहते हैं। हिन्दू समाज को ऐसे सलीमशाही जूतियाँ चाटने वाले इतिहासकारों और इनके द्वारा फैलाए गये वैमनस्य से अवगत होकर ऊपर उठाना चाहिए l
सत्य तो यह है कि आज हिन्दू समाज अगर कायम है, तो उसमें बहुत बड़ा बलिदान इस वंश के वीरों का है। जिन्होंने नीचे काम करना स्वीकार किया, पर इस्लाम नहीं अपनाया। उस समय या तो आप इस्लाम को अपना सकते थे, या मौत को गले लगा सकते थे या अपने जनपद/प्रदेश से भाग सकते थे, या फिर आप वो काम करने को हामी भर सकते थे जो अन्य लोग नहीं करना चाहते थे।
चंवर वंश के इन वीरों ने पद्दलित होना स्वीकार किया, धर्म बचाने हेतु सुवर पालना स्वीकार किया, लेकिन मुसलमान धर्म स्वीकार नहीं किये।
नोट:- हिन्दू समाज में छुआ छूत, भेद भाव, ऊँच नीच का भाव था ही नहीं, ये सब कुरीतियाँ विदेशी आक्रांता, अंग्रेज कालीन और भाड़े के वामपंथी व् हिन्दू विरोधी इतिहासकारों की देन है।
"राष्ट्रहित सर्वोपरि" 💪💪
जय श्री राम 🙏
हर हर महादेव 🔱🙏🚩
Tejraftarnews.in: *🚩 हनुमान चालीसा की महिमा*
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हनुमान जी और हनुमानचालीसा दोनो का भारतीय संस्कृति में अवर्णीय आस्था है। हनुमान जी का नाम आते ही हमारे अंदर एक अद्भुद शक्ति का संचार होने लगता है।
हनुमान चालीसा दुनिया की सबसे सरल और शक्तिशाली स्तुति है। ये सम्पूर्ण रूप से बहुत प्रभावशाली मानी गई है। इसकी हर चौपाई अलग अलग रूप से शक्तिशाली है। जीवन की हर समस्या का समाधान हनुमान चालीसा द्वारा किया जा सकता है। हनुमान चालीसा का पाठ सिद्ध कर लेने से साधक चमत्कारी हो जाता है।
हनुमान चालीसा पढ़ने के नियम
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हनुमान चालीसा का पूरा पाठ करने में लगभग 10 मिनट लगते हैं ! यह लेख थोड़ा लम्बा है, कृपया निश्चिंत हो कर ही इसे पढ़ें !
हनुमान जी और इनके आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी के चित्र की स्थापना करे।
इसके बाद उनके समक्ष जल से भरा पात्र रखें।
पहले भगवान् राम फिर हनुमान जी का ध्यान करें।
इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें।
कम से कम एक बार से लेकर सौ बार तक हनुमान चालीसा का पाठ किया जा सकता है।
पाठ के बाद जल को प्रसाद की तरह ग्रहण करें।
हमेशा यह प्रयास करें कि हनुमान चालीसा के पाठ का समय रोज एक ही हो।
विशेष दशाओं मे यात्रा और सोते समय भी चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
हनुमान चालीसा पाठ के लाभ
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1. बुरी आत्माओं को भगाए:👉 हनुमान जी अत्यंत बलशाली थे और वह किसी से नहीं डरते थे। हनुमान जी को भगवान माना जाता है और वे हर बुरी आत्माओं का नाश कर के लोगों को उससे मुक्ती दिलाते हैं। जिन लोगों को रात मे डर लगता है या फिर डरावने विचार मन में आते रहते हैं, उन्हें रोज हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिये।
2. साढे़ साती का प्रभाव कम करे:👉 हनुमान चालीसा पढ़ कर आप शनि देव को खुश कर सकते हैं और साढे साती का प्रभाव कम करने में सफल हो सकते हैं। कहानी के मुताबिक हनुमान जी ने शनी देव की जान की रक्षा की थी, और फिर शनि देव ने खुश हो कर यह बोला था कि वह आज के बाद से किसी भी हनुमान भक्त का कोई नुकसान नहीं करेगें।
3. पाप से मुक्ती दिलाए:👉 हम कभी ना कभी जान बूझ कर या फिर अनजाने में ही गल्तियां कर बैठते हैं। लेकिन आप उसकी माफी हनुमान चालीसा पढ़ कर मांग सकते हैं। रात के समय हनुमान चालीसा को 8 बार पढ़ने से आप सभी प्रकार के पाप से मुक्त हो सकते हैं।
4. बाधा हटाए:👉 जो भी इंसान हनुमान चालीसा को रात में पढे़गा उसे हनुमान जी स्वंय आ कर सुरक्षा प्रदान करेगें। बचपन से ही हमें सिखाया गया है कि अगर कभी भी मन अशांत लगे या फिर किसी चीज से डर लगे तो, हनुमान चालीसा पढ़ो। ऐसा करने से मन शांत होता है और डर भी नहीं लगता। हिंदू धर्म में हनुमान चालीसा का बड़ा ही महत्व है। हनुमान चालीसा पढ़ने से शनि ग्रह और साढे़ साती का प्रभाव कम होता है। हनुमान जी राम जी के परम भक्त हुए हैं। प्रत्येक व्यक्ति के अंदर हनुमान जी जैसी सेवा-भक्ति विद्यमान है। हनुमान-चालीसा एक ऐसी कृति है, जो हनुमान जी के माध्यम से व्यक्ति को उसके अंदर विद्यमान गुणों का बोध कराती है। इसके पाठ और मनन करने से बल बुद्धि जागृत होती है। हनुमान-चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति खुद अपनी शक्ति, भक्ति और कर्तव्यों का आंकलन कर सकता है।
जानिए हनुमान चालीसा की किस चौपाई से क्या चमत्कार होते हैं !
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वैसे तो हनुमान चालीसा की हर चौपाइ और दोहे चमत्कारी हैं लेकिन कुछ ऐसी चौपाइयां हैं जो बहुत जल्द असर दिखाती हैं। ये चौपाइयां सर्वाधिक प्रचलित भी हैं समय-समय में काफी लोग इनका जप करते हैं। यहां जानिए कुछ खास चौपाइयां और उनके अर्थ। साथ ही जानिए हनुमान चालीसा की किस चौपाई से क्या चमत्कार होते हैं...
रामदूत अतुलित बलधामा। अंजनिपुत्र पवनसुत नामा।।
यदि कोई व्यक्ति इस चौपाई का जप करता है तो उसे शारीरिक कमजोरियों से मुक्ति मिलती है। इस पंक्ति का अर्थ यह है कि हनुमानजी श्रीराम के दूत हैं और अतुलित बल के धाम हैं। यानि हनुमानजी परम शक्तिशाली हैं। इनकी माता का नाम अंजनी है इसी वजह से इन्हें अंजनी पुत्र कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार हनुमानजी को पवन देव का पुत्र माना जाता है इसी वजह से इन्हें पवनसुत भी कहते हैं।
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।
यदि कोई व्यक्ति हनुमान चालीसा की केवल इस पंक्ति का जप करता है तो उसे सुबुद्धि की प्राप्ति होती है। इस पंक्ति का जप करने वाले लोगों के कुविचार नष्ट होते हैं और सुविचार बनने लगते हैं। बुराई से ध्यान हटता है और अच्छाई की ओर मन लगता है। इस पंक्ति का अर्थ यही है कि बजरंगबली महावीर हैं और हनुमानजी कुमति को निवारते हैं यानि कुमति को दूर करते हैं और सुमति यानि अच्छे विचारों को बढ़ाते हैं।
बिद्यबान गुनी अति चातुर। रामकाज करीबे को आतुर।।
यदि किसी व्यक्ति को विद्या धन चाहिए तो उसे इस पंक्ति का जप करना चाहिए। इस पंक्ति के जप से हमें विद्या और चतुराई प्राप्त होती है। इसके साथ ही हमारे हृदय में श्रीराम की भक्ति भी बढ़ती है। इस चौपाई का अर्थ है कि हनुमानजी विद्यावान हैं और गुणवान हैं। हनुमानजी चतुर भी हैं। वे सदैव ही श्रीराम के काम को करने के लिए तत्पर रहते हैं। जो भी व्यक्ति इस चौपाई का जप करता है उसे हनुमानजी की ही तरह विद्या, गुण, चतुराई के साथ ही श्रीराम की भक्ति प्राप्त होती है।
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्रजी के काज संवारे।।
जब आप शत्रुओं से परेशान हो जाएं और कोई रास्ता दिखाई न दे तो हनुमान चालीसा का जप करें। यदि एकाग्रता और भक्ति के साथ हनुमान चालीसा की सिर्फ इस पंक्ति का भी जप किया जाए तो शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है। श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है। इस पंक्ति का अर्थ यह है कि श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध में हनुमानजी ने भीम रूप यानि विशाल रूप धारण करके असुरों-राक्षसों का संहार किया। श्रीराम के काम पूर्ण करने में हनुमानजी ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। जिससे श्रीराम के सभी काम संवर गए।
लाय संजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
इस पंक्ति का जप करने से भयंकर बीमारियों से भी मुक्ति मिल सकती है। यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से पीडि़त है और दवाओं का भी असर नहीं हो रहा है तो उसे भक्ति के साथ हनुमान चालीसा या इस पंक्ति का जप करना चाहिए। दवाओं का असर होना शुरू हो जाएगा, बीमारी धीरे-धीरे ठीक होने लगेगी। इस चौपाई का अर्थ यह है कि रावण के पुत्र मेघनाद ने लक्ष्मण को मुर्छित कर दिया था। तब सभी औषधियों के प्रभाव से भी लक्ष्मण की चेतना लौट नहीं रही थी। तब हनुमानजी संजीवनी औषधि लेकर आए और लक्ष्मण के प्राण बचाए। हनुमानजी के इस चमत्कार से श्रीराम अतिप्रसन्न हुए।
श्रीराम के परम भक्त हनुमानजी सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवताओं में से एक हैं। शास्त्रों के अनुसार माता सीता के वरदान के प्रभाव से बजरंग बली को अमर बताया गया है। ऐसा माना जाता है आज भी जहां रामचरित मानस या रामायण या सुंदरकांड का पाठ पूरी श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है वहां हनुमानजी अवश्य प्रकट होते हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए बड़ी संख्या श्रद्धालु हनुमान चालीसा का पाठ भी करते हैं। यदि कोई व्यक्ति पूरी हनुमान चालीसा का पाठ करने में असमर्थ रहता है तो वह अपनी मनोकामना के अनुसार केवल कुछ पंक्तियों का भी जप कर सकता है।
केवल हनुमान चालीसा ही नहीं सभी देवी-देवताओं की प्रमुख स्तुतियों में चालिस ही दोहे होते हैं? विद्वानों के अनुसार चालीसा यानि चालीस, संख्या चालीस, हमारे देवी-देवीताओं की स्तुतियों में चालीस स्तुतियां ही सम्मिलित की जाती है। जैसे श्री हनुमान चालीसा, दुर्गा चालीसा, शिव चालीसा आदि। इन स्तुतियों में चालीस दोहे ही क्यों होती है? इसका धार्मिक दृष्टिकोण है। इन चालीस स्तुतियों में संबंधित देवता के चरित्र, शक्ति, कार्य एवं महिमा का वर्णन होता है।
चालीस चौपाइयां हमारे जीवन की संपूर्णता का प्रतीक हैं, इनकी संख्या चालीस इसलिए निर्धारित की गई है क्योंकि मनुष्य जीवन 24 तत्वों से निर्मित है और संपूर्ण जीवनकाल में इसके लिए कुल 16 संस्कार निर्धारित किए गए हैं। इन दोनों का योग 40 होता है। इन 24 तत्वों में 5 ज्ञानेंद्रिय, 5 कर्मेंद्रिय, 5 महाभूत, 5 तन्मात्रा, 4 अन्त:करण शामिल है।
सोलह संस्कार इस प्रकार है।
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1. गर्भाधान संस्कार 2. पुंसवन संस्कार 3. सीमन्तोन्नयन संस्कार 4. जातकर्म संस्कार 5. नामकरण संस्कार 6. निष्क्रमण संस्कार 7. अन्नप्राशन संस्कार 8. चूड़ाकर्म संस्कार 9. विद्यारम्भ संस्कार 10. कर्णवेध संस्कार 11. यज्ञोपवीत संस्कार 12. वेदारम्भ संस्कार 13. केशान्त संस्कार 14. समावर्तन संस्कार 15. पाणिग्रहण संस्कार 16. अन्त्येष्टि संस्कार।
👉 हनुमान चालीसा के कुछ खास प्रयोग यदि किए जाएं तो खास परेशानियों का हल भी निकाला जा सकता है।
👉 विशेष लाभ पाने के लिए लाल अक्षरों में लिखी हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
👉 मुक़दमे और विवादों से छुटकारा पाने के लिए संकल्प लेकर 100 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
👉 मंगल की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए हनुमान चालीसा बांटनी चाहिए।
👉 एक पीले कागज पर लाल रंग से हनुमान चालीसा लिखें और इसे हमेशा अपने पास रखिए। आप मुश्किलों से हमेशा सुरक्षित रहेंगे।
👉 हनुमान चालीसा का पाठ सूर्य के समक्ष करने से सारे ग्रह शांत मजबूत हो जाते हैं।
अगर हनुमान चालीसा के पाठ का सबसे शक्तिशाली असर देखना चाहते हैं तो उसका पाठ सूर्य के सामने करें। हनुमान जी को हनुमान चालीसा के माध्यम से उनकी शक्तियां याद दिलायी जा सकती है।
भगवान की इन स्तुतियों में हम उनसे इन तत्वों और संस्कारों का बखान तो करते ही हैं, साथ ही चालीसा स्तुति से जीवन में हुए दोषों की क्षमायाचना भी करते हैं। इन चालीस चौपाइयों में सोलह संस्कार एवं 24 तत्वों का भी समावेश होता है। जिसकी वजह से जीवन की उत्पत्ति है।
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राजीव गांधी जी को कभी भूल कर भी मत भूलिएगा वो तो कहो
भगवान की बहुत बड़ी कृपा थी की उस दौर में सोशल मीडिया नाम की कोई चीज नहीं थी वरना राहुल गांधी जी से भी ऊंचे कलाकार थे राजीव गांधी,,,,,,,
उनके पास जो सबसे खास थी वो ये की वो नेहरू के दामाद फिरोज खान की बेगम इंदिरा जी के बेटे थे बस इसके अलावा अगर उनके पास कोई चीज थी तो वो थी चूतीयापंथी जो उनके अन्दर कूट कूट कर भरी हुई थी,,,,,,,,
अपने समय मे वो पढा़ई लिखाई मे सबसे पीछे रहने वाले छात्रों मे एक थे 5 Star Doon School मे ABCD और क ख ग याद करने के बाद उन्हे सन् 1961 में उन्हें इंजियनीरिंग पढ़ने के लिए लन्दन के ट्रिनिटी कॉलेज कैब्रिज मे भेजा गया,,,,,,,,
और वहां उनकी मुलाकात हुई एडवीज अंतोनियो अल्बिना माइनो से जिन्हें आज चमचे सोनिया माता के नाम से जानते हैं अब वो 1961 से लेकर 1965 तक वो Antonio Mayno के प्यार में पड़ कर 61,62 करते रहे और निरंतर फेल होते रहे और और जब वो निरंतर फेल होते रहे मतलब कभी पास ही नही हुए तब कालेज प्रशासन ने निर्णय लिया की ऐसे होनहार छात्र की जरूरत हमारे कालेज को नही है जिसके बाद कॉलेज प्रशासन ने उन्हे कालेज के बहर का रास्ता दिखा दिया,,,,,,,
फिर उसके बाद इनको सन् 1966 में लन्दन स्थित इम्पीरियल कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला दिलाया गया लेकिन नतीजा वहां भी शून्य ही निकला,,,,,,,,
और उसी साल फिरोज खान की बेगम इंदिरा जी भारत की प्रधानमंत्री बनी और राजीव तुरंत भारत आ गए और सन् 1966 में दिल्ली फ्लाइंग क्लब ज्वाइन किया और हवाई जहाज उड़ाना सीखने लगे,,,,,,
अब सन् 1970 में प्रधानमंत्री इंदिरा ने कुछ जुगाड़ लगवा कर इनको सरकारी एयरलाइंस एयर इंडिया में एक कमर्शियल पायलट के तौर पर नौकरी में लगवा दिया,,,,,,,
और जब सन् 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध हुआ तो भारतीय सेना वा वायु सेना को लाजिस्टिक स्पोर्ट के लिए पायलट्स की आवश्यकता थी और एयर इंडिया के कमर्शियल पायलट्स को रसद एवं हथियार एयर ड्राप करने हेतु बुलाया गया,,,,,,,,,
तो वहां के सारे के सारे पायलट्स तुरन्त युद्ध क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने के लिए आ गये केवल एक को छोड़कर और वो थे फिरोज खान के बेटे राजीव गांधी जो डर के मारे सोनिया गांधी के साथ दिल्ली में इटली के दूतावास में जाकर छिप गये थे,,,,,,,,
और सन् 1980 में संजय गांधी की मृत्यु के बाद राजीव गांधी राजनीती में आये,,,,,,,,
फिर चार साल बाद यानि 1984 में इंदिरा गांधी को उनके अंगरक्षकों ने दोपहर के करीब गोली मार दी तब राजीव गांधी ने बड़ी ही बुद्धिमानी से मां की मृत्यु पर शोक संताप में समय गवांने के बजाय उसी दिन शाम को भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर जाकर अपनी तशरीफ रख दी,,,,,,,,
और उन्होने कांग्रेसियों को पहला दिया सिखों का नरसं¥हा#र करने का कांग्रेसियों ने स्कूलों के रजिस्टरों और वोटर लिस्ट निकाल निकाल कर सिखों के घर खोजे और घरों में घुसकर हजारों सिखों को का¥टा हजारों सिख महिलाओं से दु¥ष्क¥र्म किया,,,,,,
कई ग¥र्भव¥ती महिलाओं को भी जी¥वि¥त ही ज¥ला दिया गया
सिखों को और उनके बच्चो को तथा उनकी सम्पत्तियों को फूं¥क¥ने हेतु कांग्रेस नेताओं के पे¥ट्रो¥ल पंपों से पे¥ट्रो¥ल की सप्लाई की गई सड़क चलते सिखों के गले में टा¥यर डालकर ज¥ला दिया गया,,,,,
यहाँ तक कि तत्कालीन राष्ट्रपति जैल सिंह को भी नहीं बख्शा गया और जब वो गाड़ी में थे तो उनपर भी कांग्रेसियों ने ह¥म¥ला किया और उनकी गाड़ी के कांच तोड़ दिए गए,,,,,,,
दिल्ली में कांग्रेसियों के हिं¥सा का तां¥ड¥व शुरू हुआ और जल्द ही ये पूरे देश भर मे फैल गया,,,,,
और इस प्रकार राजीव गांधी ने इंदिरा की मृ¥त्यु का बदला देश भर में हजारों निर्दोष सिखों को मौ¥त के घा¥ट उतरवाकर ले लिया,,,,,
और बाद में राजीव गांधी ने उसे “बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है” वाला ब्यान देकर उसे एकदम न्यायोचित ठहरा दिया,,
और अगले चुनाव हुए तो जनता ने राजीव द्वारा करवाये गये सिख न¥रसं¥हार को कोई विशेष महत्व नही दिया और राजीव को इंदिरा की सहानुभूति के नाम पर 411 सीटें देकर असीम शक्तियां प्रदान कर दी,,,,,,
और राजीव ने निरंकुश होकर उनका पूरी तरह से दुरुपयोग किया,,,
1985 में सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो को न्याय देकर मुस्लिम महिलाओं के लिए जो तीन तलाक से बचने और गुजारे भत्ते का जो रास्ता खोला था उसपर आतातायी राजीव ने बड़ा वाला पत्थर दे मारा,,,,,,
और अपने बहुमत का प्रयोग कर मुस्लिम तुष्टिकरण का एक नया अध्याय लिखा और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पलटकर मुस्लिम महिलाओं को पुनः गुलाम बना दिया,,,,,,,
भोपाल गैस कांड हुआ हजारों निर्दोष लोगों के ह¥त्या¥रे यूनियन कार्बाइड के मालिक वारेन एंडरसन को राजीव गांधी ने अमेरिकी सरकार से सौदेबाजी करके उसे सुरक्षित अमरीका भेज दिया,,,,,
राजीव में ना तो वैश्विक कूटनीति की समझ थी, और ना ही सैन्य शक्ति के सदुपयोग की समझ थी,,,,,,
अतः अपने सीमित विवेक क्षमता से ग्रस्त राजीव गांधी ने श्रीलंका में LTTE से लड़ने भारतीय सेना जबर्दस्ती भेज दी। और इंडियन पीस कीपिंग फोर्सेस के 1400 सिख सैनिक मरवाये और 3000 सिख सैनिक घायल करवाये,
इस तरह इसने अपनी मां की मौत का बदला सिख सेनिकों से लिया,,,,,,
हलांकि बाद में इनको थूककर चाटना पड़ा और सैनिकों को वापस बुलाना पड़ा राजीव को अपनी उस गलती के कारण श्रीलंका दौरे पर श्रीलंकाई सैनिक द्वारा इन पर हमला किया गया था,,,,,,
वो भारत के पहले एकमात्र प्रधानमंत्री बने जिन्हें विदेशी धरती पर विदेशी सैनिक द्वारा मार खाकर अपमानित होना पडा,,,,,
1989 में बोफोर्स का घोटाला खुला जिसमे पता चला की राजीव गांधी ने सोनिया के “करीबी” जिसे सोनिया अपने संग इटली से दहेज में लायी थी और जो सोनिया राजीव के घर में ही रहता था उस ओटावियो कवात्रोची के द्वारा बोफोर्स सौदे में राजीव ने जबरदस्त दलाली खायी थी,,,,,
1991 में Schweizer Illustrierte नामक स्विस मैगज़ीन ने काले धन वाले उन लोगों के नाम का खुलासा किया जिनका अवैध धन स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में जमा था,,,,,
और उन नामों मे राजीव गांधी का भी नाम था मैगज़ीन ने खुलासा किया की राजीव गांधी के 2.5 बिलियन स्विस फ्रैंक स्विट्ज़रलैंड के बैंक के एक अकाउंट में जमा हैं,,,,,,
1992 में टाइम्स ऑफ़ इंडिया और द हिन्दू ने खबरें छापीं की राजीव गांधी को सोवियत खुफिया एजेंसी KGB से निरंतर धन मिलता था रूस ने भी इस खबर की पुष्टि की थी और सफाई में कहा था कि सोवियत विचारधारा के हितों की रक्षा हेतु ये पैसे दिए जाते रहे हैं,,,,,,
1994 में येवगिनिया अल्बट्स और कैथरीन फिट्ज़पेट्रिक ने KGB प्रमुख विक्टोर चेब्रिकोव के हस्ताक्षर युक्त पत्र प्रस्तुत कर ये खुलासा किया कि राजीव के बाद राजीव के परिवार, सोनिया और राहुल को KGB की ओर से धन उपलब्ध करवाया जाता रहा और KGB गांधी परिवार से निरन्तर संपर्क में रहती थी,,,,,,,
अब यदि आप पूरा आकलन करेंगे तो पाएंगे की राजीव एक औसत से भी कम समझदार एक ऐसे व्यक्ति थे जिसने,,,,,
(1)-निर्दोष सिख मरवाये,
(2)-भोपाल गैस कांड में हजारों निर्दोषों के हत्यारे को भगाया।
(3)-मुस्लिमों महिलाओं का जीवन नर्क बनाया।
(4)-रक्षा सौदों में दलाली खायी।
(5)-KGB जैसी एजेंसी के वो खुद एजेंट थे और उससे पैसे लेते थे, (7)-कूटनीति की समझ नहीं थी।
(8)-और मूर्खतावश श्रीलंका में 1400 भारतीय सैनिकों की बलि चढ़वाई और देश का नाम कलंकित किया,,,,,,
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*9* गडकरी ने कहा आज देश में गैस या ईंधन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ मुश्किलें जरूर हैं, लेकिन सरकार की बेहतर नीतियों की वजह से आम जनता को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। सरकार लगातार हालात पर नजर रखे हुए है ताकि आपूर्ति बनी रहे
*10* पश्चिम बंगाल में 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर बंधक, सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा- हमें पता है उपद्रवी कौन; वोटर लिस्ट से नाम कटने पर लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन
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*11* मालदा में बवाल पर BJP आक्रामक: सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद ममता सरकार को घेरा, अराजकता फैलाने का लगाया आरोप
*12* गौतम अडाणी ने परिवार के साथ रामलला के दर्शन किए, 30 मिनट मंदिर में रहे; बोले- यह भावुक क्षण; गुरुकुल के छात्रों से मिले
*13* युद्ध के साये में सोने-चांदी की चमक हुई फीकी, सोना 3200 रुपये टूटा; चांदी ₹15,,900 लुढ़की, कच्चा तेल 10% चढ़ा
*14* सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से 1773 अंक चढ़कर बंद, हरे निशान पर बंद,73,320 पर पहुंचा; आईटी और रियल्टी शेयर्स में सबसे ज्यादा खरीदारी।
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Tejraftarnews.in: *🌴//०२ अप्रैल २०२६ गुरुवार //🌴*
*🥀 चैत्र शुक्लपक्ष पूर्णिमा २०८३🥀*
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*‼️ऋषि चिंतन ‼️*
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*हम देवत्व की जीत सुनिश्चित करें*
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👉 *"देवासुर संग्राम" में आमतौर से असुर पहली बाजी जीतते हैं। पर देवता जब अपनी बेखबरी और लापरवाही छोड़कर कटिबद्ध होते हैं तो अंतिम विजय उन्हीं को होती है।* पुराणों में वर्णित देवासुर संग्राम की किसी भी कथा को लें, *एक ही कथानक* मिलेगा कि *असुर बहुत ही प्रबल हैं।* वे मरते दम तक दुस्साहसपूर्ण युद्ध करते हैं पर चूंकि उनकी सत्ता मूलतः पाप और अज्ञान पर खड़ी होती है इसलिए यह दुर्बलता ही उन्हें ले बैठती है और *देवपक्ष का जैसे ही सुव्यवस्थित आक्रमण शुरू होता है वैसे ही असुर लड़खड़ा जाते हैं। देवताओं में लापरवाही की, विसंगठित होने की कमी ही उन्हें असुरों से हराती रहती है।* जब वे अपनी भूल को समझ जाते हैं और उसे छोड़ देने को तत्पर होते हैं तो उनकी विजय निश्चित हो जाती है।
👉 *देवत्व हर व्यक्ति के अंतःकरण में पर्याप्त मात्रा में मौजूद है पर वह प्रसुप्त और बिखरा पड़ा रहता है, उसे अपने स्वरूप का ज्ञान नहीं।* लंका लाँघने से पहले हनुमान को अपने ऊपर विश्वास नहीं हो रहा था, *तब जामवंत ने प्रोत्साहन देकर उन्हें छलाँग लगाने के लिए उकसाया और वे समुद्र लाँघने में पूर्णतया सफल रहे।* अर्जुन भी दोनों सेनाओं के बीच खड़ा हुआ काँप रहा था। धनुष उसके हाथों से छूटा पड़ रहा था और कुछ सूझ न पड़ता था। *कृष्ण ने उसे आवश्यक ज्ञान और प्रोत्साहन दिया तो पार्थ की भुजाएँ फड़कने लगीं। गांडीव उठाकर उसने ऐसा युद्ध किया कि कौरवों की उमड़ती सेना अस्त-व्यस्त हो गई।* अहंकारी असुर उच्छृंखलता में अभ्यस्त होने के कारण पहली बाजी जीतते हैं और प्रतीत होता है कि इनको हराना कठिन है पर *यह निश्चित है कि पाप अत्यंत दुर्बल होता है। वह घास के ढेर की तरह कितना ही बड़ा क्यों न हो, व्यवस्थित रूप से लगाई हुई एक ही छोटी-सी चिनगारी उसे नष्ट कर देने के लिए पर्याप्त होती है।* देवत्व के पीछे सत्य, धर्म, स्थायित्व है इसलिए इनके पास स्वल्प सामान होते हुए अंततः जीत उन्हीं की रहती है। असफलता तो उन्हें तभी मिलती है, जब तक वे *"असंगठित"* और *"अव्यवस्थित"* रहते हैं। ये दो दुर्गुण ही उन्हें संकटों में फँसाते हैं। *"भूल" और "बुराई" का दंड तो सभी को भोगना पड़ता है। "देवता" भी उससे कैसे बच सकते हैं ?* लापरवाही, आलस्य, प्रमाद, ढील-ढाल और उपेक्षा जहाँ कहीं होगी, वहाँ देर-सबेर में विपत्ति अवश्य आएगी। *"देवता" हो या "मनुष्य" कोई भी भूल करेगा तो दंड पावेगा।* इसी प्रकार विसंगठन, फूट, पृथकता एवं स्वार्थपरता का भाव भी मानव जाति के लिए एक अभिशाप है। *संघशक्ति का अवलंबन लिए बिना अपनी आत्मरक्षा तक कर सकने में कोई भी समर्थ नहीं हो सकता।*
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*युग निर्माण का आधार "व्यक्ति निर्माण" पृष्ठ २४* *CODE VN 84*
*🍁।।पं श्रीराम शर्मा आचार्य।।🍁*
➖➖➖➖‼️➖➖➖➖
Tejraftarnews.in: वीरता और बुद्धिमत्ता
में सर्वोपरि
*श्री हनुमानजी* अर्थात्
*वज्र-अंग-बली =बजरंगबली जी* के *जन्मोत्सव* की अनन्त शुभकामनाओं के साथ
सभी सनानतन धर्म प्रेमियो से विशेष आग्रह कि श्री हनुमानजी का महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण में जीवन अवश्य पढ़ें और कुछ प्रश्नों पर विचार कर निर्णय करें -
१. कि क्या कोई बन्दर कभी मानव भाषा आज तक बोल सका ?
२. क्या किसी बन्दर का आज तक यज्ञोपवीत(जनेऊ) संस्कार हुआ है?
३. क्या आज तक कोई बन्दर संस्कृत व्याकरण का ज्ञाता हो सका है या हो सकता है?
४.क्या कोई बन्दर कभी वेद-ज्ञान तो छोड़ो मानव सुलभ सामान्य ज्ञान भी रखता है ?
५.क्या कोई बन्दर कभी किसी मनुष्य का का विश्वसनीय परामर्शदाता हो सकता है?
६.क्या कभी कोई बन्दर किसी का संकटमोचक कभी बन सकता है ?
७. क्या कोई बन्दर राजदूत बनने की योग्यता रखता है ?
८. क्या कभी कोई बन्दर कभी ईश्वर भक्त हो सकता है ?
९. क्या कभी कोई बन्दर ब्रह्मचर्य का पालन करता है?
उक्त प्रश्नों को ध्यान से विचार कर बुद्धिमानी द्वारा विवेचना करके देखें। इनका उत्तर सदैव "नहीं" में ही मिलेगा।
इसलिए आप सभी से करबद्ध प्रार्थना है कि
महानतम् वीरता ,और सर्वश्रेष्ठ बुद्धिमत्ता ,सर्वश्रेष्ठ राजदूत कर्म और सर्वश्रेष्ठ भक्ति, अखण्ड ब्रह्मचर्य , सर्वस्व समर्पण के
एकमात्र रिकॉर्डधारी
श्री हनुमानजी को बन्दर कहना और
पूँछ लगाकर दिखाना बन्द करें।
अपने महापुरुषों का उपहास और अपमान बन्द करें।
उनकी जयन्ती पर यही बड़ा उपकार होगा।
डॉ. अमित
Tejraftarnews.in: ओ३म्
“वीर सावरकर की अण्डमान की कालापानी जेल से रिहाई की कथा”
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-डा. नवदीप कुमार एवं मनमोहन कुमार आर्य।
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वीर विनायक दामोदर सावरकर जी (1883-1966) का देश की आजादी की लड़ाई में प्रमुख योगदान है। उन्होंने देश की आजादी के लिए अंग्रेजों की जेल कालापानी और नजरबन्दी में जो यातनायें सहन की, उसके लिए उन्हें जीवित शहीद कहा जा सकता है। शायद ही किसी अन्य देशभक्त मुख्यतः अहिंसात्मक आन्दोलन के किसी नेता ने उन जैसी यातनायें सहन की हांे। वह कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैण्ड गये थे और वहां ऋषि दयानन्द जी के शिष्य व भक्त पं. श्यामजी कृष्ण वर्मा द्वारा स्थापित इण्डिया हाउस में रहे थे। उन्हें पं. श्यामजी कृष्ण वर्मा से अपनी पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति भी प्राप्त हुई थी। पढ़ाई पूरी कर लेने पर भी अंग्रेजों के प्रति वफादारी की शपथ न लेने के कारण उन्हें बैरिस्टर की उपाधि नहीं दी गई थी। इंग्लैण्ड में रहते हुए उन्होंने देश की आजादी के लिए प्रशंसनीय योगदान किया। उनकी क्रान्तिकारी गतिविधियों, मदनलाल धींगरा द्वारा लन्दन में 1 जुलाई, 1909 को कर्जन वायली की हत्या में सहयोग व कुछ अन्य आरोपों में उन्हें 13 मई, 1910 को लन्दन में गिरिफ्तार कर लिया गया था और भारत लाया जा रहा था। समुद्री मार्ग से भारत आते हुए उन्होंने समुद्री जलयान के शौचालय से समुद्र में छलांग लगा दी थी और समुद्र में तैरते हुए फ्रांस के समुद्री तट पर जा पहुंचे थे। फ्रांस में राजनीतिक शरण न मिलने के कारण उन्हें गिरिफ्तार कर लिया गया था। वहां से उन्हें भारत लाया गया। यहां उन पर अनेक मिथ्या आरोप लगाये गये और मुकदमें चलाये गये। देशभक्ति के कार्य करने के आरोप में जिसे अंग्रेज सरकार के प्रति विद्रोह की संज्ञा देते थे, उन्हें दो जन्मों के सश्रम कारावास की सजा दी गई। यह सजा 50 वर्षों की थी। सावरकर जी ने अण्डमान की सेल्युलर जेल जिसे कालापानी कहा जाता था, वहां उनसे बैलों के स्थान पर कोल्हू चलवाकर तेल निकालने का काम लिया गया। उनके थोड़ा सा भी रूकने पर उन्हें कोड़ों से पीटा जाता था जबकि हमारे अहिंसा के आन्दोलन के कुछ नेताओं को ‘ए’ श्रेणी की जेल में रखा जाता था। ऐसे कुछ नेताओं ने देश को स्वतन्त्रता मिलने के बाद लम्बे समय तक सत्ता का सुख भोगा। हमें सेल्युलर जेल को देखने का अवसर मिला है और वहां हमने लाइट एण्ड साउण्ड शो देखकर सावरकर जी ने क्या क्या सहा, उसे जानने व समझने का अवसर मिला। आजाद भारत की सरकारों ने सावरकर जी की उपेक्षा की और उनका उत्पीड़न भी हुआ। श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय उनका चित्र संसद में लगा कर उन्हें सम्मानित किया गया। सावरकर जी पर अंग्रेजों के मानस पुत्रों व विरोधी विचारधारा के लोगों ने मिथ्या आरोप लगाये। उनके अनुसार सावरकर जी के माफी मांगने पर उन्हें कालापानी की जेल से रिहा किया गया था। यह आरोप मिथ्या है। सावरकर जी के विरोधियों के आरोपों के निराकरण के लिए ही यह लेख प्रस्तुत कर रहे हैं। यह भी जान लें कि वीर सावरकर जी ने सन् 1857 की क्रान्ति का इतिहास लिखा था जिसे प्रकाशन से पूर्व ही प्रतिबन्धित कर दिया था। इस पुस्तक की पाण्डुलिपि इंग्लैण्ड से कैसे भारत पहुंच सकी और प्रकाशित हो सकी, यह आज भी एक रहस्य है। जिसने यह पुस्तक नहीं पढ़ी वह सन् 1857 की देश की आजादी के लिए देशभक्तों की कुर्बानियों व सावरकर जी की इस पुस्तक को लिखने में किये गये तप व इतिहास लेखन की योग्यता को जान नहीं सकता। आज की पीढ़ी सावकर जी जैसे महापुरुषों के प्रति कृतघ्नता का परिचय देती प्रतीत हो रही है। हम नहीं समझते कि दुर्भाग्य से यदि पूर्व की गुलामी जैसी परिस्थितियां पुनः उत्पन्न हो जायें तो इस देश के लोग सावरकर जी और क्रान्तिकारियों जैसी कुर्बानी दे सकते हैं?
सन् 1918 में प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद क्रमबद्ध और निरन्तर समग्र देश में राजनैतिक बंदियों को मुक्त कराने के लिए जो मांग रखी गयी, वह बहुत प्रभावशाली तरीके से प्रचारित की गई। जनता व उसके लोकप्रिय नेताओं तथा प्रैस ने आवेदन-पत्रों, सभाओं सम्मेलनों, कांग्रेस पार्टी ने अपने अधिवेशनों तथा काउन्सिल तक के माध्यम से अपनी मांग प्रचारित की व ब्रिटिश अधिकारियों को पहुंचाईं। नेशनल यूनियन आफ बाम्बे, श्री अनन्त राव गाडरे, सेनापति बापट, शिवराम पन्त परज्जपे आदि ने तन मन से हस्ताक्षर अभियान चलाया और भारत-सचिव मान्टेग्यू तक उस याचिका को पहुंचाया। भारत-सचिव ने याचिका अस्वीकार कर दी। सन् 1919 के अमृतसर के कांगे्रस अधिवेशन में पुरजोर तरीके से राजनैतिक बंदियों की मुक्ति की मांग का विशेष प्रस्ताव पारित किया गया। महराष्ट्र की जिला होम रूल लीग ने सावरकर बन्धुओं की मुक्ति के लिए वायसराय के पास तार भेजा। 24 दिसम्बर सन् 1919 को शाही दयालुता का फरमान जारी हुआ। परिणामस्वरूप सभी प्रान्तीय सरकारों ने राजनैतिक बंदियों की मुक्ति के लिए जेलों के दरवाजे खोल दिए। अण्डमान की पोर्ट ब्लेयर स्थिति सेल्युलर जेल जो कालापानी के नाम से विख्यात रही है, उस जेल से भी अनेकानेक राजनैतिक कैदी मुक्त कर दिए गए। वीर दामोदर सावरकर और उनके भाई को दस वर्ष की कैद पूरी कर लेने पर भी मुक्त नहीं किया गया जबकि पांच वर्ष की कैद बिता चुके कई राजनैतिक कैदी मुक्त कर दिए गए थे। वीर सावरकर की रूग्ण अवस्था अपने चरम पर थी। वह लगभग मृत्यु शय्या पर ही थे। सेल्युलर जेल के चिकित्सालय में फेफड़ों के क्षय रोग टी.बी. का उनका इलाज किया गया। दिन भर में दूध का एक घंूट ही उनकी खुराक रह गई थी।
सन् 1920 व 1921 में भी भारत के नेताओं और भारतीय पै्रस ने उनकी मुक्ति के लिए प्रभावशाली ढंग से मांग रखी। केन्द्रीय लेजिस्लेटिव असेम्बली में श्री सरदार विट्ठल भाई पटेल ने 24 फरवरी, 1920 को सावरकर बन्धुओं का सन्दर्भ लेते हुए राजनैतिक अवज्ञाकारी बन्दियों की मुक्ति के लिए प्रस्ताव रखा। श्री जी.एस. खापर्डे ने सावरकर बन्धुओं का ही मामला उठाया। बाल गंगाधर तिलक ने मि. मान्टेग्यू को सावरकर की मुक्ति हेतु जोरदार पत्र लिखा।
मई, 1920 में गांधी जी ने भी ‘यंग इण्डिया’ में लिखा कि सावरकर बन्धुओं के विरुद्ध कभी भी यह प्रमाणित नहीं हो पाया कि वे किसी हिंसात्मक कार्रवाई में शामिल थे। जब तक यह सिद्ध नहीं हो जाता कि सावरकर बन्धु मुक्ति के बाद किसी प्रकार से राज्य के लिए खतरा हैं, वायसराय दोनों बन्धुओं को मुक्त करने के लिए बाध्य हैं। भाई परमानन्द ने भी अपनी मुक्ति के बाद कर्नल वैगवुड (Colonel Wedgewood), जो कि उन दिनों ब्रिटेन की संसद में मजदूर दल के प्रसिद्ध नेता थे तथा भारत की यात्रा पर आये हुए थे, उनसे सम्पर्क किया। उन्होंने उनकी इंग्लैण्ड वापसी पर जनवरी-फरवरी, 1921 में ब्रिटिश प्रैस के माध्यम से सावरकर की अंडमान में हो रही दुर्दशा के विरुद्ध प्रचार-संघर्ष को चरम पर पहुंचा दिया। स्वामी श्रद्धानन्द जी के मित्र व प्रशंसक पादरी सी.एफ. एन्ड्रूज ने भी अनेक लेख अण्डमान की सेलुलर जेल में राजनैतिक बन्दियों की अमानवीय यातनाओं व जेल से मुक्ति के लिए लिखें। सावरकर के अण्डमान से लिखे गए पत्रों को देश की प्रैस व समाचार पत्रों ने भी प्रकाशित किया। जनता और नेताओं ने उन समाचारों को पढ़ा जिससे देशवासियों की भावनायें अपने इन बन्धक नेताओं की जेल से मुक्ति के लिए आन्दोलन के चरम बिन्दु तक पहुंच गयीं। अगस्त, 1920 में बाल गगाधर तिलक की मृत्यु ने देश को हिला कर रख दिया। अण्डमान की सेलुलर जेल के कैदियों ने भी अपने इस लोकप्रिय नेता के सम्मान व वियोग के दुःख में एक दिन का उपवास वा अनशन रखा। गांधी जी ने खिलाफल आन्दोलन के पक्ष में अपना अहिंसात्मक असहयोग आन्दोलन आरम्भ कर दिया और एक वर्ष में ‘स्वराज्य’ प्राप्त करने का निश्चय किया। सावरकर ने घोषणा की थी कि गांधी जी का यह खिलाफत आन्दोलन भविष्य में देश के लिए आफत सिद्ध होगा।
केन्द्रीय असेम्बली के शीर्ष नेताओं ने सावरकर के मामले में प्रभावशाली तरीके से रुचि लेना आरम्भ किया। श्री के.वी. रंगास्वामी अय्यंगर जो कि असेम्बली के सदस्य थे, उन्होंने मार्च, 1921 में गवर्नर-जनरल को सावरकर जी को मुक्त करने के लिए दमदार पत्र लिखा। इन सबके परिणामस्वरूप सावरकर बन्धुओं के सेल्युलर जेल से स्थानान्तरण के आदेश जारी किए गए। नवाब सर बहराम खां और मि. हयात खां ने सावरकर जी की रिहाई का पुरजोर विरोध किया। अय्यंगर ने कहा कि सावरकर की ओर से वह स्वयं शासन को विश्वास दिलाते हैं कि सावरकर की भारत में उपस्थिति से किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं होगा। सन् 1921 के प्रारम्भिक महीनों में ही सावरकर जी के गले में डला हुआ 'D' (Dangerous) श्रेणी का बिल्ला उतार दिया गया था। अन्ततः 2 मई, 1921 को सावरकर बन्धुओं को अण्डमान की सेल्युलर जेल जिसे कालापानी कहा जाता था और जो एक प्रकार से राजनीतिक कैदियों के लिए मृत्युलोक था, उससे सावरकर जी को विदाई मिली।
सावरकर जी की रिहाई का यह प्रामाणिक विवरण है। कुछ लोग द्वेष भाव से सावरकर जी पर यह मिथ्या आरोप लगाते हैं कि सावरकर जी ब्रिटिश सरकार से माफी मांगकर जेल से मुक्त हुए थे। यह विचार व आरोप असत्य व अप्रमाणिक है। कुछ राजनीतिक दलों की सावरकर जी के यश को नष्ट करने का यह कुत्सित प्रयास है। यह भी बता दें कि यह विवरण श्री धनंजय कीर के अंग्रेजी भाषा के 570 पृष्ठीय प्रामाणिक ग्रन्थ ‘वीर सावरकर’ के आधार पर दिया गया है। यह ग्रन्थ सन् 1950, 1966 और 1988 में प्रकाशित हुआ है। श्री धनंजय कीर की इस तथ्यात्मक पुस्तक की देश के अनेक प्रमुख समाचार पत्रों सहित एक जिला जज महोदय ने भी भूरि भूरि प्रशंसा की थी। इन प्रमाणों व लेख से सावरकर जी विषयक विरोधियों द्वारा फैलाई गई भ्रान्तियों का निराकरण हो जाता है। सावरकर जी कालापानी की जेल से रिहाई उन दिनों की राजनीतिक परिस्थितियों और देश के अनेक प्रमुख नेताओं के प्रयत्नों का परिणाम थी। ओ३म् शम्।
प्रस्तुतकर्ताः मनमोहन कुमार आर्य
Tejraftarnews.in: साभार...
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में 2,208 पोलिंग बूथ ऐसे पकड़े हैं जहाँ 2002 के बाद से एक भी व्यक्ति की मृत्यु दर्ज नहीं हुई!
एक भी व्यक्ति ग़ायब नहीं हुआ!
एक भी डुप्लीकेट वोटर नहीं निकला!
यानी पिछले 23 साल में इन बूथों पर कोई मरा ही नहीं और सबसे हैरानी वाली बात — ये सारे बूथ मुस्लिम बहुल इलाक़ों में हैं:
साउथ 24 परगना — 760 बूथ
मुर्शिदाबाद — 226 बूथ
मालदा — 216 बूथ
नदिया — 130 बूथ
हावड़ा,हुगली,उत्तर 24 परगना में भी सैकड़ों ऐसे बूथ हैं.
मतलब ममता दीदी के राज में मुस्लिम इलाक़ों के लोग वोटर लिस्ट में अमर हो गए हैं.
बाक़ी बंगाल में तो 5,636 बूथों पर भी सिर्फ़ 1-10 मृत वोटर ही मिले।
इतनी लंबी उम्र तो भोलेनाथ भी दें तो कम है.
अब चुनाव आयोग ने सभी ज़िलाधिकारियों से मंगलवार तक रिपोर्ट माँगी है।
TMC के अपने BLO (#बूथ_लेवल_ऑफ़िसर) भी चिल्ला रहे हैं कि फर्ज़ी एंट्री हुई है।
ये सीधा-सीधा “भूतिया वोटर” (#Ghost_Voters) का खेल लगता है।
2026 का चुनाव आने वाला है... अब समझ आया कि TMC को हर बार “#मैजिक_फ़िगर” कैसे मिल जाता है?
जय श्री राम 🚩
#अवधेशप्रतापसिंह
अवधेश प्रताप सिंह कानपुर उत्तर प्रदेश,9451221253
Really: प्रिय दुनिया, ज़रा भारत गणराज्य की हालत तो देखिए:
> एक चार साल का हिंदू बच्चा कैमरे पर कहता है कि उसके मुस्लिम पड़ोसी उसे और उसकी माँ को गालियाँ देते हैं और पीटते हैं—सिर्फ़ इसलिए कि वे उनके घर के पास रहते हैं (साँस लेते हैं) और इस्लाम अपनाने से मना कर देते हैं।
> वे उन पर थूकते हैं, गौमांस (गाय का मांस) फेंकते हैं, भद्दी-भद्दी गालियाँ देते हैं, और पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देते हैं।
> उनका आरोप है कि पुलिस लगातार उनकी हर शिकायत को नज़रअंदाज़ कर रही है।
> परिवार का आरोप है कि मुसलमानों द्वारा की जा रही प्रताड़ना के कारण, एक ब्राह्मण परिवार वह इलाका छोड़कर चला गया, और एक अन्य हिंदू व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली।
> यह सब भारत की राजधानी दिल्ली (नांगलोई इलाके) में हो रहा है।
Tejraftarnews.in: क्या आप जानते हैं कि संयुक्त राष्ट्र संघ की एक जांच टीम जिसमें 12 देश के प्रतिनिधिमंडल थे जिसमें से तीन अरब देश भी थे
उन्होंने 7 अक्टूबर को इसराइल पर जो हमास ने हमला किया था उनकी पूरी गहरी जांच करके यह रिपोर्ट में बताया कि हमास के दरिंदों ने कुल तीन जगह पर 40 से ज्यादा इसराइली और जर्मन और दूसरे देश की महिलाओं के साथ बलात्कार किया उनका यौन उत्पीड़न किया
यहां तक कि हमास के दरिंदों ने छोटी-छोटी बच्चियों का भी यौन उत्पीड़न किया जिसमें 22 महिलाओं के साथ बलात्कार की पुष्टि भी हुई
उसके बावजूद प्रियंका वाड्रा एक महिला होकर भी फिलिस्तीन का थैला लेकर घूमती हैं लेकिन उन्होंने कभी 7 अक्टूबर को हमास ने जो इजराइल में दरिंदगी किया है उसे पर एक शब्द तक नहीं बोला।
Tejraftarnews.in: दो भाई
वो दोनों सड़क पर एक दूसरे से लड़ते लड़ते जा रहे थे। तभी बड़ा भाई, बड़े होने के गुरूर के कारण तना तना, आगे आगे बिना परवाह किये तेजी से चलने लगा वो खाली हाथ था..
जबकि छोटे भाई की कमर पर एक भारी बैग टंगा था जिसे लिये लिये वह रोता चिल्लाता चल रहा था। बीच बीच में चिल्ला कर भाई को रोते हुए स्वर में पुकारता - ओ भाई.....रुक जा ना ...मुझसे चला नहीं जा रहा ....भाई।
पर बड़ा सब बातों से बेखबर मस्त हाथी की तरह चलता ही जा रहा था।
बडे़ भाई की उमर होगी कोई लगभग आठ साल की और छोटा मुश्किल से पांच साल का होगा। बहुत देर तक सड़क पर यही क्रम चलता रहा.. तभी वहां एक चौराहा आया जहां अच्छी खासी भीड़ और ट्रैफिक भी था। आड़ी तिरछी बाइक ,स्कूटर, स्कूटी, कार, टैम्पो और पैदल लोगों की आवाजाही और भीड़..
तभी बड़े वाला वहां पर रुक कर छोटे का इन्तजार करने लगा। छोटा गिरता पड़ता, रोता चिल्लाता भाई के पास पहुंचा और जोर से बैग फैंक दो चार हाथ भाई के जोर जोर से मारे। वह क्रोध , पीड़ा और भाई की उपेक्षा से छटपटा रहा था।
लेकिन बड़े भाई ने इस सब के बाद भी कोई खास प्रतिक्रिया ना दी। बस उसने पास में पड़ा हुआ बैग कन्धे पर लटकाया और भाई को पीठ पर बैठाने के लिए नीचे बैठ गया। छोटा सब गुस्सा भूल, गालों पर बहते आँसुओं को आस्तीन से पोंछ कर बडे़ भाई की कमर पर चढ गया...
बड़े भाई ने दोनों तरफ सावधानी से ट्रैफिक का जायजा ले कर सड़क पार की। सड़क पार कराने के लिए बड़े भाई ने जितनी जिम्मेदारी से छोटे को बैग समेत अपनी कमर पर लादा था, सड़क पार करके फिर से बैग समेत छोटे भाई को उतार दिया और फिर अपने उसी मस्त अन्दाज में चल पड़ा।
छोटे भाई ने जैसे तैसे लड़खड़ाते हुए पुन: बैग को उठाया और गिरता पड़ता भाई के पीछे पीछे चल दिया। पर अब वह रोया चिल्लाया नहीं था ....
क्योंकि वह अब समझ चुका था उसका बड़ा भाई उसे मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, इसलिए छोटी छोटी परेशानियों से उसे अकेले लड़ने दे रहा है लेकिन कठिन परिस्थितियों में उसकी ढाल बनकर खड़ा है...!!
जीवन में बड़ी कामयाबी पाने के लिए आत्मनिर्भर होकर अपनी ज़िम्मेदारी निभाने के लिए हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए।
Tejraftarnews.in: पिछले साल, जायद खान की मां और पूर्व अभिनेत्री जरीन खान का मुंबई स्थित उनके घर पर निधन हो गया था. इसके बाद, उनके बेटे ज़ायद खान की कुछ तस्वीरें सामने आई थीं जिनमें वह हिंदू रीति-रिवाजों के साथ अपनी मां का अंतिम संस्कार करते हुए दिखाई दिए थे.
इन तस्वीरों ने ऑनलाइन चर्चा छेड़ दी थी. अब, इस पर जायद खान ने चुप्पी तोड़ी है और बताया कि आखिर उनकी मां का हिंदू रीति-रिवाजों से दाह संस्कार क्यों किया गया था.
जायद खान ने कहा उनके घर में इंसानियत सबसे बड़ा धर्म
जूम को हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में, जायद खान अपनी मां जरीन खान की आखिरी इच्छा को याद करते हुए भावुक हो गए, उन्होंने उन सवालों का भी जवाब दिया जो उनकी मां के हिंदू रीति-रिवाजों से हुए अंतिम संस्कार को लेकर उठाए गए थे, जबकि उनकी शादी एक मुस्लिम परिवार में हुई थी और उनकी जड़ें पारसी थीं. इसे लेकर जायद खान ने कहा कि उनके घर में 'इंसानियत' (मानवता) ही सबसे बड़ा धर्म है. एक्टर ने कहा कि उनके स्टाफ अलग-अलग बैकग्राउंड से आते हैं, और उनके रहने, खाने और खर्चों का ध्यान रखने के अलावा, उनका परिवार यह भी पक्का करता है कि उनके बच्चों को वे सभी मौके मिलें जिनकी उन्हें ज़रूरत है.
ज़ायद ने कहा, "एक परिवार के तौर पर, हम धर्म को एक बहुत ही निजी चीज़ मानते हैं कि आप उसे कैसे अपनाना चाहते हैं न कि ऐसी चीज़ जिसमें कोई बेहतर हो या कोई बुरा. ये ऐसी बातें नहीं हैं जिन्हें कहना अच्छा हो. हम खुद को एक बहुत ही सेक्युलर परिवार के तौर पर देखते हैं, और हमें यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि क्यों."
जायद खान की मां का क्यों हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था अंतिम संस्कार?
उन्होंने अपनी माँ की आखिरी इच्छा का खुलासा करते हुए उस दिन को याद किया, जब वह एक 'प्यारी सी नदी' के किनारे बैठी थीं, और "उनके मन में बस ये ख्याल आया कि अगर मैं कभी चली जाऊं, तो मैं चाहती हूं कि मेरी अस्थियां इसी नदी में प्रवाहित हों. मैं आज़ाद होना चाहती हूं."
ज़ायद ने कहा, 'तुम्हारी मां की जो भी आखिरी इच्छा होगी, वो पूरी होगी. इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि दूसरे लोग क्या कहते हैं, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि वे कितने नफ़रत भरे हो सकते हैं. मैं उन्हें दोष नहीं देता, हालात ऐसे हैं, बदकिस्मती से. उन हालातों को बदलने में वक़्त लगेगा.'
Tejraftarnews.in: हर गांव,शहर,गौशाला और समाज को यदि देशी गाय को बचानी है,तो सबसे पहले अपने गांव शहर गौशाला में सांड(नन्दी) अच्छा लाकर गांव,शहर और गौशाला की गायों को (क्रोस)आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश करें,गाय को सड़कों पर क्यों छोड़ा गया इसके लिए सोचे,गाय सुबह और शाम तक लगभग पन्द्रह से बीस किलो दुध देती थी जिससे पुरे परिवार आत्मनिर्भर बन सकता था,धिरे धिरे बेकार सांड से क्रोस हुई और दो किलो दुध पर आ गई,गाय खुद अपना खर्च भी नहीं निकाल सकती है तो पारिवार कैसे पालेगी,फिर किसान व लोगों ने गाय को सड़कों पर छोड़ना शुरू किया,इसलिए कुछ अलग देखना चाहते हैं तो मोकलावास भुरीया भाकर जोधपुर गौशाला आकर देखें और गाय को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश करें,हर आदमी भामाशाह और गौशाला को सोचना होगा और अगले दस साल में गाय को वापस आत्मनिर्भर बनाना होगा,आपणे कोई करणों शब्द छोड़ना पड़ेगा,एक गाय से दुध, दही,घी,छाछ,माखन,मेवट ,गौमुत्र,खाद,बेल, मानसिक सन्तोष,मरने के बाद चम्बडा़,हड्डी,और भी सब कुछ देती हैं,फिर भी सड़कों पर निराश्रित घुम रहीं हैं सोचना होगा और आत्मनिर्भर योजना पर काम करना होगा,कचरा बनने से पहले उधोग लगाकर करोड़ों लोगों को रोजगार दे सरकार व भामाशाह केवल कोठारी जैन जोधपुर 9414131279 बापडि कहना बन्द करें,परिवार पालती है,जागरूक हो, सोचे घर में अमरीकन गाय (जानवर) क्यों आये
Tejraftarnews.in: *मेरा अब्दुल सबसे अच्छा- पार्ट -4*
*महिम दरगाह पार्ट -2* , *कन्वर्जन का अड्डा,*
**एक नाबालिक हिंदू लड़की को कैसे बनाया लव जिहाद का शिकार ,क्या है इन जिहादियों को मोड्स ऑपरेंडी किस तरह से नाबालिक बच्चियों को झाड़ फूंक कर वशीकरण करते है ,पूरे भारत में है ऐसी दरगाहे जहां हिंदू बच्चियों को वशीकरण के लिए ले जाया जाता है ,आम तौर पर यह वही स्थान होते हैं जहां आम सेकुलर हिंदू मुर्दे की कब्र पर अपना माता फोड़ने जाता है जैसे हाजी अली की दरगाह, अजमेर शरीफ, देवा शरीफ, गाजीबाबा की मजार, शहमीना शाह की मजार जैसे अनगिनत अड्डे हैं।*
*इस बच्ची की आपबीती को ध्यान से सुनिए ,आपको लगेगा कि यह कहानी कहीं सुनी हुई है,कारण 95 % लव जिहाद की शिकार भुक्तभोगी लड़कियों ने यही सब भुगता है। अगर अपनी बच्चियों को लव जिहाद से बचाना है तो ये आपबीती उनको जरूर दिखाएं।**
🙏✊💪🚩🚩
Tejraftarnews.in: *हिन्दू संवाद*
(जागो हिन्दुओं जागो..) 🚩
*अगर इस देश में धार्मिक हिंसा भड़काने के लिए कोई ज़िम्मेदार है, तो वह सुप्रीम कोर्ट और उसके जज हैं!"*
🚨कृपया पुरा लेख अवश्य पढ़े👇
भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट में एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा: "अगर इस देश में धार्मिक हिंसा भड़काने के लिए कोई ज़िम्मेदार है, तो वह सुप्रीम कोर्ट और उसके जज हैं!"
उनके इस बयान से बड़ा विवाद खड़ा हो गया और विपक्षी दलों ने उनकी तीखी आलोचना की। हालाँकि, प्रसिद्ध वैज्ञानिक, लेखक और वक्ता आनंद रंगनाथन ने दुबे का पूरा समर्थन करते हुए एक वीडियो बयान जारी किया।
रंगनाथन ने धाराप्रवाह अंग्रेजी में सुप्रीम कोर्ट से नौ तीखे सवाल पूछे।
ये सवाल बेहद अहम हैं। इनका संक्षिप्त सारांश नीचे दिया गया है:
आनंद रंगनाथन के सुप्रीम कोर्ट से नौ सवाल:
1. 'कश्मीर मुद्दे पर दोहरे मापदंड:' सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के खिलाफ विपक्षी दलों की याचिकाओं पर तुरंत विचार किया। लेकिन जब 1990 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं पर अत्याचारों—जैसे जबरन विस्थापन, घरों पर कब्ज़ा, मंदिरों का विध्वंस, हत्याएँ, बलात्कार और सामूहिक पलायन—के बारे में याचिकाएँ दायर की गईं, तो अदालत ने उन्हें यह कहते हुए खारिज कर दिया, "यह बहुत पहले हुआ था।"
क्या यह दोहरा मापदंड नहीं है?
क्या इससे हिंदुओं को गुस्सा नहीं आता?
क्या इससे धार्मिक संघर्ष नहीं होता?
2. वक्फ बोर्ड के दुरुपयोग पर चुप्पी: सुप्रीम कोर्ट अब वक्फ बोर्ड के सुधारों को लेकर चिंतित है। लेकिन पिछले 30 वर्षों में, वक्फ बोर्ड ने अवैध रूप से संपत्ति ज़ब्त की, करों की चोरी की और एक समानांतर न्यायिक प्रणाली संचालित की—फिर भी अदालत चुप रही। अगर सुधारों को इस्लाम के लिए खतरा माना जाता है, तो हिंदुओं की ज़मीन पर मस्जिदें और दरगाहें बनाना कैसे स्वीकार्य था?
वक्फ बोर्ड ने 20 लाख से ज़्यादा हिंदुओं की संपत्ति ज़ब्त कर ली। सुप्रीम कोर्ट चुप रहा। अगर यह धार्मिक पक्षपात नहीं है, तो और क्या है?
3. "मंदिरों का धन कहीं और खर्च होता है, हिंदुओं पर प्रतिबंध": हिंदू मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण है। उनकी आय का उपयोग मदरसों, हज यात्राओं, वक्फ बोर्ड, इफ्तार दावतों और ऋणों पर किया जाता है। हालाँकि, हिंदुओं की धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध हैं। हिंदुओं के अधिकारों से संबंधित याचिकाएँ अक्सर खारिज कर दी जाती हैं। अल्पसंख्यकों को हमेशा विशेष प्राथमिकता दी जाती है।
क्या यह उचित है? या यह हिंदुओं के आक्रोश को भड़काने का एक तरीका है?
4. "शिक्षा में हिंदुओं के साथ भेदभाव": शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत, हिंदू स्कूलों को अल्पसंख्यकों के लिए 25% सीटें आरक्षित करनी होती हैं। हालाँकि, मुस्लिम और ईसाई संस्थानों को इस नियम से छूट दी गई है। हज़ारों हिंदू स्कूलों को बंद करना पड़ा, और हिंदू बच्चे अब गैर-हिंदू संस्थानों में पढ़ते हैं।
क्या यह धर्मांतरण को बढ़ावा नहीं दे रहा है?
सुप्रीम कोर्ट इस एकतरफा नियम की जाँच क्यों नहीं करता?
5. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पाखंड: जब हिंदू बोलते हैं, तो उसे "घृणास्पद भाषण" कहा जाता है। जब दूसरे बोलते हैं, तो उसे "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता" कहा जाता है। नूपुर शर्मा ने हदीस का सिर्फ़ हवाला दिया और अदालत ने इसे नफ़रत भरा भाषण करार दिया। लेकिन जब स्टालिन और अन्य नेताओं ने सनातन धर्म को "बीमारी" कहा, तो अदालत चुप रही।
क्या यह न्याय है?
6. हिंदू परंपराओं पर भेदभावपूर्ण प्रतिबंध: सर्वोच्च न्यायालय ने दशहरा पर पशुबलि जैसी हिंदू प्रथाओं पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन ईद के दौरान सामूहिक हलाल पशु वध पर कोई सवाल नहीं उठाया गया। जन्माष्टमी के दौरान दही हांडी समारोहों में ऊँचाई की सीमा तय की गई। लेकिन मुहर्रम से जुड़ी हिंसा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। दिवाली के पटाखों को पर्यावरण के लिए हानिकारक बताया गया, लेकिन क्रिसमस की आतिशबाज़ी की आलोचना नहीं की गई।
क्या यह भेदभाव नहीं है?
7. पूजा स्थल अधिनियम हिंदुओं के पुनरुद्धार को रोकता है: 1991 का पूजा स्थल अधिनियम यह अनिवार्य करता है कि 15 अगस्त, 1947 से पहले मौजूद स्थानों के धार्मिक स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। यह कानून हिंदुओं को उन प्राचीन मंदिरों को पुनः प्राप्त करने से रोकता है जिन्हें मुस्लिम शासकों ने नष्ट कर दिया था या परिवर्तित कर दिया था। राम मंदिर के लिए दशकों संघर्ष करना पड़ा। कई अन्य मंदिरों पर अतिक्रमण जारी है।
क्या यह ऐतिहासिक अन्याय नहीं है?
8. केवल हिंदू परंपराओं को निशाना बनाना: सबरीमाला मामले में, न्यायालय ने हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाई। कुछ हिंदू मंदिरों में केवल पुरुषों या केवल महिलाओं के रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है। लेकिन न्यायालय ने केवल हिंदू परंपराओं पर सवाल उठाया। इस्लाम में, कुछ परिस्थितियों में महिलाएं मस्जिदों में प्रवेश नहीं कर सकतीं या कुरान नहीं पढ़ सकतीं। ईसाई धर्म में, महिलाएं पुजारी नहीं बन सकतीं।
न्यायालय ने उन धर्मों पर सवाल क्यों नहीं उठाया?
9. सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान निष्क्रियता: शाहीन बाग विरोध प्रदर्शनों और सीएए विरोधी दंगों के दौरान, सर्वोच्च न्यायालय ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक सड़कें जाम कर दीं, लेकिन न्यायालय ने उन्हें नहीं रोका।
क्या यह कानून का मखौल नहीं है?
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▬▬๑⁂❋⁂๑▬▬
🚩जय श्री राम🚩
🚩धर्मो रक्षति रक्षितः
🇮🇳हिन्दू राष्ट्र भारत
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tejraftarnews.in मूर्खों का महा गठबन्धन ---
जनक जी की सभा में जब किसी राजा से अकेले धनुष नहीं उठा तो मूर्ख राजाओं ने महा गठबन्धन करके संयुक्त रूप से धनुष में जोर लगाया !
भूप सहस दस एकहिं बारा !
लगे उठावन टरै न टारा !!
इस कुप्रयास को देख कर किसी नें पूंछा कि मानो धनुष टूट ही गया तो सीता जी तो एक हैं और आप हजारों हों , तो दूल्हा कौन बनेगा !
राजा बोले - पहले धनुष तोड़ेगे फिर हम सब आपस मे लड़ेगे मरेगे कटेगे , जो जिन्दा बचेगा वही राजा दूल्हा बनेगा !
यह है मूर्खों का गठबन्धन !!
( मात्र व्यंग भाव से पढ़े )इसका राजनीति से कोई सरोकार नहीं है
😂🤣
Tejraftarnews.in: भाइयों-बहनों! सोनाक्षी सिन्हा कभी सूटकेस में पैक नहीं होगी। न ही कभी फ्रीज में ठूंस दी जाएगी। क्यों? क्योंकि उसके मंसूबे वाले अच्छी तरह जानते हैं कि एक हिंदू अभिनेत्री कितनी हिंदू लड़कियों के लिए अफीम का काम कर सकती है। वो जहर का इंजेक्शन है, जो सीधे हिंदू समाज की नसों में घोल दिया गया है। वे ऐसा कभी नहीं करेंगे – बल्कि इसे खुलेआम घुमाएंगे, चमकाएंगे, ताकि लाखों सनातनी लड़कियां मोहित हो जाएं।
शादी न चले तो क्या? ज्यादा से ज्यादा तलाक हो जाएगा। लेकिन नुकसान तो हो चुका होगा। सोनाक्षी का धर्म बदलना भी जरूरी न था – बस यही दिखाना था कि "देखो, हम कितने सेक्युलर हैं!"। हिंदू नाम, हिंदू संस्कृति, हिंदू खान-पान सब वैसा ही रहेगा। लेकिन अंदर से? वो हिंदू कोख को मुस्लिम बीज से भरने का हथियार बनेगी। सोनाक्षी को देखकर कितनी ही हिंदू लड़कियां अपने ही कातिलों के लिए धर्मभ्रष्ट होने को तैयार हो जाएंगी। वो चमकती स्क्रीन पर मुस्कुराएगी, लग्जरी लाइफ दिखाएगी, और लाखों घरों में जहर घोलेगी।
समझिए न! लक्ष्य सिर्फ एक सोनाक्षी नहीं है। असली निशाना है हिंदू समाज की कोख। दुश्मन पैदा करने के लिए हिंदू मांओं की गोद चाहिए। नस्ल परिवर्तन यूं ही तो होता है – चुपचाप, चालाकी से। पहले प्रलोभन, फिर मोह, फिर विवाह, फिर संतान। सोनाक्षी तो बस प्रतीक है – एक चमकता आईना, जिसमें हिंदू लड़कियां खुद को देखकर ललचाएंगी। कल को ये असर समाज में दिखेगा: हिंदू नामों वाली मुस्लिम संतानें, जो अपनी ही मिट्टी को खोखला करेंगी।
जागो हिंदू समाज! ये "लव जिहाद" का नया चेहरा है – बॉलीवुड का, ग्लैमर का। सूटकेस में न डालकर, स्टेज पर चढ़ाकर जहर फैला रहे हैं। धर्म न बदले, नाम न बदले – बस कोख बदल दो। नस्ल बदल दो। हिंदू लड़कियो, आंखें खोलो! सोनाक्षी की चमक में मत खोना। ये लड़ाई सिर्फ शादी की नहीं, हिंदू अस्तित्व की है।
Tejraftarnews.in: आम आदमी पार्टी *(आप)* पार्टी के *अवध ओझा* पीएम मोदी को हटाने के लिए भारत में *गृह युद्ध* चाहते हैं।
*"देश में मार काट हो जाएगा"*
"मैं तो चाइना निकल जाऊंगा, सब सेट कर रखा है"
अब आप जान गए हैं कि *INDI Alliance* जनता में दहशत क्यों फैला रहा है।
ऐसे राष्ट्रविरोधियों को खारिज करने के लिए दिल्ली को धन्यवाद।
Tejraftarnews.in: देख लो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ बोल रहे है देश में LNG, पेट्रोल की कोई कमी नहीं है
लेकिन बार डांसर कुपुत्र राहुल गांधी देश को बार बार गुमराह कर रहा है की गैस, पेट्रोल, डीज़ल सब खत्म हो गया
कांग्रेस के चार सबसे वरिष्ठ लीडर आनंद शर्मा, मनीष तिवारी, कमलनाथ, शशि थरूर इस ईरान, अमेरिका युद्ध में पीएम मोदी की विदेश नीति की तारीफ़ कर चुके है
उधर पप्पू मेंटल राहुल गांधी और उसकी बहन पिंकी हिंदुस्तान के लोगो को गुमराह कर रही है की हिंदुस्तान बर्बाद हो गया , हिंदुस्तान अस्थिर हो गया, अर्थव्यवस्था डूब गई
Tejraftarnews.in: जिनकी नस मे धोखेबाज़ी, मक्कारी, हरामी पन
धूर्तता, क्रूरता भरी हों
ईरान के लिए 500 करोड़ जकात ( इस्लामिक चंदा ) और भारत के लिए 500 रू में सेना पर पत्थरों की बारिश.... फिर कहते हैं हमारी कौम को ग़द्दार मत कहो...
जिनके लिए आज की भारत सरकार ने कितना कुछ दिया
1990 मे इंन्ही लोगों ने कश्मीरी हिंदू , जो की
कश्मीर के मूल नागरिक थे, आज से नहीं कई युगो से
इस्लाम के आने के बाद उन पर बर्बरता से अत्त्याचार हुए,
ओर धीरे धीरे वों वहां जनसंख्या मे कम होते चले गए
लेकिन 7 - 8 प्रतिशत जो विभाजन के बाद, भारत बाले हुए
भय दिखाकर धर्मान्तरण हुआ , कश्मीर मे जो बचे हुए हुए थे ,
बो भी इंन्ही लोगों के बर्बरता पूर्ण अत्त्याचार, कश्मीरी महिलाओ के भयंकर रुदन बाली , इंन्ही इस्लामिक
नरपिचाशो के द्वारा किये अत्त्याचार से 1990 से लेकर आज तक पलायन ही करते रहे या समाप्त कर दिए गए
आज ये बही लोग हे जिनकी एक पीढ़ी पहले के लोगों ने
कश्मीर हिन्दू से
उनके घर, जमीन, बगान, नौकरी, मान सम्मान, उनकी आस्था, दौलत, गहने सब कुछ छीन लिया
आज ये बही लोग हिन्दुओ की लूटी हुई दौलत का 10 प्रतिशत हिस्सा ओर,मुर्ख पर्यटक हिन्दू ओ से कमाई कमाई का 10 वा हिस्सा जकात के रूप मे इस्लामिक रावायत ओर इस्लामिक हुक्म के तहत ईरान की मदद करने के लिए भेज रहे हे
भारत सरकार के सामने सदैब गरीवी का रोना रोने बाले आज ये लोग सोना चांदी की बस्तुए भेज रहे हे
यानी अपना मज़हवी कर्तव्य निभा रहे हे
चलो ठीक हे
गाँँगा जामुनी तहजीब को कोई नुसकान नहीं पहुंच ना चहिये
[03/04, 6:28 am] +91 98153 44311: भाजपा आई तो आप मांस अंडा नहीं खा पाएंगे ---- ममता बनर्जी
कैसे लोगो को गुमराह कर रही है ममता बानो
बताओ जहां बीजेपी की 18 - 20 राज्यों में सरकार है वहां लोग मांस अंडा नहीं खा रहे है क्या ????
असल में ममता बनर्जी अपने मुस्लिम वोटरों को आगाह कर रही मांस अंडे के बहाने की आप गाय को काट के नहीं खा सकते अगर बीजेपी की सरकार आ गई तो.... डायरेक्ट नहीं बोल सकती ना डायन इसलिए कोड वर्ड में बोल रही है
: . *जय श्री राम*
*शुक्रवार, 03 अप्रैल 2026 के मुख्य समाचार*
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*आप का दिन शुभ और मंगलमय हो सुप्रभात....!*
जय हो🙏
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