BMC का गेम: मेयर किसका? शिवसेना करेगी फैसला, एकनाथ शिंदे की इन मांगों ने BJP को किया परेशान!

Jan 20, 2026 - 16:16
 0  0
BMC का गेम: मेयर किसका? शिवसेना करेगी फैसला, एकनाथ शिंदे की इन मांगों ने BJP को किया परेशान!

महाराष्ट्र में 29 महानगर पालिकाओं के चुनाव के बाद बृहन्मुंबई महागनर पालिका के नतीजों से राजनीति नए मोड़ ले रही है. महानगर पालिका की सत्ता भले ही संख्याबल के आधार पर किसी एक पार्टी को स्पष्ट रूप से न मिली हो, लेकिन मेयर की कुर्सी तक पहुंचने की चाबी फिलहाल शिवसेना चीफ और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के हाथ में है. मौजूदा राजनीतिक हालात में शिंदे गुट की भूमिका ‘किंगमेकर’ के तौर पर उभरकर सामने आई है. 

227 सदस्यीय बृहन्मुंबई महानगर पालिका में बहुमत के लिए 114 पार्षदों का समर्थन जरूरी है. चुनाव परिणामों के अनुसार बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन वह बहुमत से 25 सीट दूर है. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 29 सीटें हैं, जबकि उद्धव ठाकरे गुट को 65 सीटें मिली हैं.  कांग्रेस को 24, AIMIM को 8 और MNS को 6 सीटें हासिल हुई हैं.

इस गणित में बीजेपी और शिंदे शिवसेना साथ आते हैं तो उनके पास कुल 118 पार्षद हो जाते हैं, जो बहुमत के आंकड़े को पार करता है. यही वजह है कि मेयर के चुनाव में शिंदे गुट की सहमति निर्णायक मानी जा रही है.

BMC Elections: जीत अलायंस की पार्षदों को होटल भेजने की नौबत क्यों?

इसी राजनीतिक अहमियत के बीच एकनाथ शिंदे ने अपने सभी 29 पार्षदों को मुंबई के बांद्रा इलाके के एक फाइव स्टार होटल में शिफ्ट कर दिया है. पार्टी को आशंका है कि पार्षदों की तोड़-फोड़ यानी हॉर्स ट्रेडिंग की कोशिशें हो सकती हैं. हालांकि, शिंदे गुट की ओर से इसे आधिकारिक तौर पर तीन दिवसीय वर्कशॉप बताया गया है.

पार्टी नेताओं के अनुसार, इस वर्कशॉप में पार्षदों को बीएमसी के कामकाज, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और विकास योजनाओं की जानकारी दी जा रही है. शिंदे गुट के नेता राहुल शेवाले का कहना है कि यह बैठक आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की रणनीति और बालासाहेब ठाकरे के जन्म शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की तैयारी के सिलसिले में आयोजित की गई है.

शिवसेना की इन मांगों से बीजेपी परेशान?

इन सबके बीच सियासी हलकों में यह सवाल भी उठ रहे हैं कि जब भारतीय जनता पार्टी और शिंदे सेना ने साथ मिल कर चुनाव लड़ा तो आखिर अब ऐसा क्या हुआ कि पार्षदों को होटल भेजने की नौबत आई.

सूत्रों की मानें तो मेयर चुनाव से पहले शिंदे सेना ने गठबंधन के सामने अपनी प्रमुख मांगें भी रखी हैं. सूत्रों के मुताबिक, शिंदे गुट चाहता है कि पांच साल के मेयर कार्यकाल को ढाई-ढाई साल में बांटा जाए, जिसमें पहले ढाई साल उनका मेयर हो.

इसके अलावा, बीएमसी की सबसे ताकतवर मानी जाने वाली स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष पद पर भी उनकी नजर है. समितियों के गठन में शिंदे सेना 2:1 के अनुपात में हिस्सेदारी की मांग कर रही है.

BMC पर क्या बोले सीएम देवेंद्र फडणवीस?

इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि किसी भी तरह की हॉर्स ट्रेडिंग नहीं होगी. उन्होंने स्पष्ट किया है कि मेयर को लेकर अंतिम फैसला बीजेपी और शिंदे शिवसेना मिलकर करेंगे और मुंबई के प्रशासन को स्थिरता दी जाएगी. वहीं, शिवसेना यूबीटी के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने हालिया स्थिति पर टिप्पणी करते हुए बीजेपी की राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं.

कुल मिलाकर, बीएमसी में सत्ता संतुलन ऐसा है कि बिना शिंदे गुट के समर्थन के मेयर का चयन संभव नहीं दिखता. पार्षदों की बाड़ेबंदी, सत्ता साझेदारी की शर्तें और पदों को लेकर बातचीत ने साफ कर दिया है कि मुंबई की सत्ता का अगला फैसला काफी हद तक एकनाथ शिंदे की रणनीति और सहमति पर निर्भर है.

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला