BrahMos Vs Taimur Missile: तैमूर क्रूज मिसाइल बनाम ब्रह्मोस! भारत के आगे पाकिस्तान का दावा कितना मजबूत? जानें कौन ताकतवर

Feb 9, 2026 - 17:32
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BrahMos Vs Taimur Missile: तैमूर क्रूज मिसाइल बनाम ब्रह्मोस! भारत के आगे पाकिस्तान का दावा कितना मजबूत? जानें कौन ताकतवर

पाकिस्तान पहली बार वर्ल्ड डिफेंस शो 2026 में अपनी तैमूर एयर-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने जा रहा है. पाकिस्तानी सेना हाल ही में इस मिसाइल के सफल परीक्षण का दावा कर चुकी है. इसके बाद पाकिस्तान के कई रक्षा विशेषज्ञों ने तैमूर की तुलना भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल से करनी शुरू कर दी है. पाकिस्तान इसे अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने वाला एक अहम हथियार बता रहा है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने तैमूर मिसाइल को देश की रणनीतिक परिपक्वता और तकनीकी नवाचार का प्रतीक बताया है. उनका कहना है कि यह मिसाइल पाकिस्तान की पारंपरिक सैन्य क्षमता को नई मजबूती देती है.

पाकिस्तान एयरफोर्स ने 3 जनवरी 2026 को तैमूर एयर लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल के सफल परीक्षण की घोषणा की थी. उस समय एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू ने कहा था कि यह उपलब्धि पाकिस्तान की पारंपरिक प्रतिरोधक क्षमता और ऑपरेशनल लचीलापन बढ़ाती है, जिससे देश की समग्र रक्षा स्थिति मजबूत होती है. पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR के मुताबिक, यह मिसाइल डसॉल्ट मिराज IIIE लड़ाकू विमान से लॉन्च की गई थी. टेस्ट के दौरान मिसाइल ने अपना पूरा ऑपरेशनल प्रोफाइल सफलतापूर्वक पूरा किया और 600 किलोमीटर तक स्ट्राइक क्षमता का दावा किया गया.

तैमूर क्रूज मिसाइल की रेंज और तकनीकी दावा

पाकिस्तान का कहना है कि तैमूर मिसाइल की अधिकतम मारक क्षमता 600 किलोमीटर तक है. हालांकि, मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम यानी MTCR के तहत इसके निर्यात संस्करण की रेंज 280 किलोमीटर तक सीमित रखी गई है. पाकिस्तान इसे लंबी दूरी की पारंपरिक स्टैंडऑफ स्ट्राइक मिसाइल के तौर पर पेश कर रहा है. बिना भारत का नाम लिए पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि यह मिसाइल दक्षिण एशिया में परमाणु तनाव की सीमा पार किए बिना प्रतिरोध को मजबूत करने में मदद करेगी. वर्ल्ड डिफेंस शो 2026 में इसे दिखाकर पाकिस्तान अपने डिफेंस एक्सपोर्ट को बढ़ाने की कोशिश भी कर रहा है.

ब्रह्मोस बनाम तैमूर: स्पीड और इंजन का फर्क

तकनीक और क्षमता की बात करें तो तैमूर मिसाइल भारत की ब्रह्मोस के मुकाबले काफी पीछे नजर आती है. ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी रफ्तार 2.8 से 3 मैक के बीच होती है. वहीं तैमूर एक सबसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी स्पीड 0.8 से 0.9 मैक बताई जाती है. इंजन के मामले में भी बड़ा अंतर है. ब्रह्मोस में रूस की एडवांस रैमजेट तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे अत्यधिक तेज और घातक बनाती है. इसके विपरीत, तैमूर में टर्बोजेट या टर्बोफैन इंजन लगाया गया है, जो तकनीकी रूप से कम शक्तिशाली माना जाता है.

मारक क्षमता और इंटरसेप्शन में कौन आगे

ब्रह्मोस की मारक क्षमता बेहद ज्यादा मानी जाती है. इसकी तेज गति और भारी वजन के कारण यह बिना वारहेड के भी लक्ष्य से टकराने पर भारी तबाही मचा सकती है. मौजूदा समय में दुनिया का कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम इसे पूरी तरह इंटरसेप्ट करने में सक्षम नहीं माना जाता. तैमूर क्रूज मिसाइल जमीन के काफी करीब उड़ान भरती है, जिससे इसे पकड़ना आसान नहीं होता. हालांकि, एडवांस रडार सिस्टम इसे ट्रैक कर सकते हैं और ट्रैक होने के बाद इसे गिराना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है. इसकी विस्फोटक क्षमता को साधारण श्रेणी का बताया जा रहा है.

रेंज को लेकर पाकिस्तान के दावे पर सवाल

पाकिस्तानी सेना भले ही तैमूर की रेंज 600 किलोमीटर बता रही हो, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी दूरी तक लगातार गति बनाए रखना और उसी रफ्तार में सटीक निशाना साधना तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण है. मिसाइल उस दूरी तक पहुंच सकती है, लेकिन उसकी प्रभावशीलता पर सवाल बने रहते हैं. इसके मुकाबले ब्रह्मोस की मौजूदा रेंज 290 किलोमीटर से अधिक हो चुकी है, जबकि ब्रह्मोस 2.0 की रेंज करीब 800 किलोमीटर तक बताई जा रही है.

तैमूर मिसाइल से भारत को कितना खतरा

तैमूर मिसाइल पाकिस्तान के लिए एक अहम उपलब्धि जरूर है और युद्ध की स्थिति में इसका सीमित असर देखने को मिल सकता है. कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइल होने के कारण इसे इंटरसेप्ट करना आसान नहीं होता, लेकिन इसकी सबसोनिक स्पीड भारत को प्रतिक्रिया का पर्याप्त समय देती है. पाकिस्तान ने तैमूर को खासतौर पर एंटी-शिप भूमिका के लिए तैयार किया है. इसका मकसद भारतीय युद्धपोतों, एयरक्राफ्ट कैरियर और एयर डिफेंस सिस्टम जैसे S-400 को निशाना बनाना बताया जा रहा है. यह मिसाइल हल्की है, इसलिए इसे JF-17 जैसे हल्के लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जा सकता है.

ब्रह्मोस NG और भारत की बढ़ती बढ़त

भारत फिलहाल ब्रह्मोस NG यानी नेक्स्ट जेनरेशन पर काम कर रहा है, जो हल्की होगी और ज्यादा विमानों से लॉन्च की जा सकेगी. अभी भारतीय वायुसेना Su-30MKI से ब्रह्मोस का इस्तेमाल करती है, क्योंकि यह एक भारी मिसाइल है. इसके अलावा भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों ही ब्रह्मोस को अपने शस्त्रागार में शामिल कर चुकी हैं. कुल मिलाकर, तकनीक, गति और तबाही की क्षमता के मामले में ब्रह्मोस, तैमूर से काफी आगे है. फिर भी, युद्ध के हालात में भारत को तैमूर मिसाइल को हल्के में नहीं लेना होगा और अपने एयर डिफेंस नेटवर्क की क्षमता को इस खतरे के हिसाब से लगातार परखते रहना होगा.

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला