Sri Lanka Debt: श्रीलंका को भारत ज्यादा कर्ज दे चुका है या चीन, आंकड़ों में जानें किसका पलड़ा भारी?
Sri Lanka Debt: श्रीलंका का कर्ज संकट बार-बार पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है. चीन ने भी श्रीलंका को कर्ज में दबा रखा है और भारत ने भी इस देश को काफी लोन दिया है. वहीं लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर भारत या चीन में से किस देश ने श्रीलंका को सबसे ज्यादा लोन दिया है. आइए जानते हैं कि कुल कर्ज के मामले में किसका पलड़ा भारी है.
श्रीलंका का दो तरफा कर्ज
रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रीलंका के कुल दो तरफा कर्ज में चीन का लगभग 52% हिस्सा है. इससे वह इस कैटेगरी में देश का सबसे बड़ा क्रेडिटर बन गया है.श्रीलंका पर चीन का लगभग 4.7 बिलियन डॉलर का सीधा दो तरफ कर्ज बकाया है. हालांकि जब चाइना डेवलपमेंट बैंक जैसे संस्थानों से लिए गए लोन और दूसरे कमर्शियल कर्जों को शामिल किया जाता है तो कुल चीनी कर्ज 7 बिलियन डॉलर से 8 बिलियन डॉलर के बीच बढ़ने का अनुमान है. यह फंडिंग ज्यादातर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए उठाई गई है. इसमें हंबनटोटा पोर्ट और कोलंबो पोर्ट सिटी शामिल हैं.
भारत का लोन एक्स्पोजर
इसकी तुलना में श्रीलंका के बाइलेटरल कर्ज में भारत का हिस्सा काफी कम है. भारत का हिस्सा कुल कर्ज का लगभग 10% से 12% है. रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका पर भारत का बकाया कर्ज लगभग 1.74 बिलियन डालर होने का अनुमान है. भारत की फाइनेंशियल मदद ज्यादातर रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट के रूप में आई है. यह फंड रेलवे, एनर्जी, हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे सेक्टर की ओर लगाए गए हैं.
वैसे तो कुल कर्ज एक्स्पोजर के मामले में चीन सबसे आगे है लेकिन भारत ने श्रीलंका के 2022 के आर्थिक संकट के दौरान एक बड़ी भूमिका निभाई थी. फाइनेंशियल गिरावट के पीक पर भारत ने लगभग 4 मिलियन डॉलर की इमरजेंसी मदद की थी.
कमर्शियल लोन और कंसेशनल क्रेडिट
एक बड़ा अंतर लोन देने के तरीके में है. श्रीलंका को चीन की ज्यादातर फंडिंग कमर्शियल रेट पर हुई है. इसमें अक्सर ज्यादा इंटरेस्ट कॉस्ट और सख्त रीपेमेंट शर्त होती है. दूसरी तरफ भारत के लोन मॉडल में आमतौर पर कंसेशनल लोन शामिल है. इसका मतलब है कम इंटरेस्ट रेट और लंबी रीपेमेंट टाइमलाइन.
किसका पलड़ा भारी
अगर नंबरों की बात करें तो श्रीलंका के सबसे बड़े बाइलेटर के तौर पर चीन का पलड़ा साफ तौर पर भारी है. वहीं अगर इमरजेंसी मदद और कंसेशनल सपोर्ट की बात करें तो भारत ने खास तौर पर संकट के समय में काफी असर दिखाया है.
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