आईजीआईएमएस में मोबाइल के बिना इलाज नहीं, ग्रामीणों-बुजुर्गों को दिक्कत

Apr 11, 2026 - 08:59
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आईजीआईएमएस में मोबाइल के बिना इलाज नहीं, ग्रामीणों-बुजुर्गों को दिक्कत
आईजीआईएमएस में इलाज की नई व्यवस्था मरीजों के लिए राहत के बजाय मुसीबत बन गई है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और ओपीडी बुकिंग अनिवार्य होने के बाद ऑफलाइन पर्ची सिस्टम खत्म हो गया है। ऐसे में यदि किसी मरीज के पास मोबाइल नहीं है, तो उसे बिना इलाज ही लौटना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन ने भीड़ कम करने के लिए ई-हॉस्पिटल सिस्टम लागू किया था, लेकिन अब यह तकनीक ही ग्रामीण और बुजुर्ग मरीजों के लिए दीवार बन गई है। सर्वर डाउन होना और बार-बार ओटीपी फेल होना स्थिति को और गंभीर बना रहा है। सुबह 5 बजे से लाइन में लगने वाले मरीज 10 बजे तक ओटीपी और टोकन के लिए ही जूझ रहे हैं। केस स्टडी: सिस्टम के आगे बेबस बुजुर्ग सावित्री देवी, सीतामढ़ी: शरीर में सूजन के कारण रेफर होकर आईं। पति के पास साधारण फोन है। ओटीपी नहीं आने के कारण घंटों परेशान रहीं। महेश यादव, नालंदा: हेल्प डेस्क ने मोबाइल नंबर मांगा। मोबाइल नहीं होने से रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया और उन्हें बिना इलाज लौटना पड़ा। प्रमुख बाधाएं: तकनीक की मार, मरीज बेहाल ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले हजारों मरीजों के पास स्मार्टफोन नहीं है। ओटीपी के लिए मोबाइल नंबर जरूरी होने से रजिस्ट्रेशन संभव नहीं हो पाता। जो बुजुर्ग मरीज अकेले आते हैं, वे डिजिटल प्रक्रिया समझ नहीं पाते। डिजिटल सहायता के लिए स्टाफ तैनात है, पर मरीजों के मुकाबले संख्या बेहद कम है। अधीक्षक बोले: स्मार्टफोन अनिवार्य नहीं, एक चालू मोबाइल हो अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि पूछताछ काउंटर पर कर्मियों को तैनात किया गया है, जो मरीजों को रजिस्ट्रेशन में मदद करते हैं। मरीज के पास एक साधारण मोबाइल होना भी आवश्यक है, क्योंकि रजिस्ट्रेशन के लिए उसी नंबर पर ओटीपी आता है।

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला