आज सुबह का मुख्य समाचार 20 फरवरी 2026 100 मुख्य समाचार आपको मैं बताने जा रहा हूं जो तेज रफ्तार न्यूज़ के जरिए भारत की हर खबरों को आप पढ़ सकते हैं और देख सकते हैं

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Feb 20, 2026 - 07:15
Feb 20, 2026 - 07:38
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आज सुबह का मुख्य समाचार 20 फरवरी 2026 100 मुख्य समाचार आपको मैं बताने जा रहा हूं जो तेज रफ्तार न्यूज़ के जरिए भारत की हर खबरों को आप पढ़ सकते हैं और देख सकते हैं

*आयु० नंदिनी एवं चि० राजहंस परिणय सूत्र में बंधे 

देवघर। स्थानीय श्री कृष्णा पुरी निवासी श्री महेंद्रनारायण सिंह की सुपुत्री आयु० नंदिनी संग चि० राजहंस के धूमधाम से होटल ग्रीन एकर में आयोजित शुभ विवाहोपलक्ष्य पर राष्ट्रीय हिंदू परिषद (भारत) के जिला अध्यक्ष श्री प्रभाष गुप्ता ने नवदंपत्ति को उनके उज्जवल भविष्य एवं सुखमय दांपत्य जीवन की ढेंर सारी बधाइयां एवं शुभकामनाएं दी है। इस अवसर पर उन्होंने कहा, कि नवदंपत्ति जीवन की पगडंडी पर तालमेल से आगें बढ़े। साथ ही, जीवन के उतार-चढ़ाव के सहयात्री और सुख-दु:ख के सहभागी बने ,और खुशहाल व सुखमय गृहस्थ जीवन व्यतीत करें, ऐसी कामना है। इस अवसर पर स्वदेशी जागरण मंच के श्री जीवेश सिंह एवं अन्य ने आगत अतिथियों का स्वागत किया।मौके पर अनेकों गणमान्य लोग, समाजसेवी, नगर-वासी, सगे-संबंधी, मित्र-शुभचिंतक एवं नाते-रिश्तेदार भारी संख्या में मौजूद थे।

: 🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩

🌤️ *दिनांक - 20 फरवरी 2026*

🌤️ *दिन - शुक्रवार*

🌤️ *विक्रम संवत - 2082*

🌤️ *शक संवत - 1947*

🌤️ *अयन - उत्तरायण* 

🌤️ *ऋतु - वसंत ऋतु* 

🌤️ *मास - फाल्गुन*

🌤️ *पक्ष - शुक्ल* 

🌤️ *तिथि - तृतीया दोपहर 02:38 तक तत्पश्चात चतुर्थी* 

🌤️ *नक्षत्र - उत्तरभाद्रपद रात्रि 08:07 तक तत्पश्चात रेवती*

🌤️ *योग - साध्य शाम 06:23 तक तत्पश्चात शुभ*

🌤️*राहुकाल - सुबह 11:26 से दोपहर 12:53 तक* 

🌤️ *सूर्योदय - 07:07*

🌤️ *सूर्यास्त - 06:37*

👉 *दिशाशूल - दक्षिण दिशा में*

🚩 *व्रत पर्व विवरण -*

💥 *विशेष - तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

             🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩

🌷 *पति-पत्नी के झगड़े या अनबन* 🌷

➡️ *पति-पत्नी में झगड़े होते हों, तलाक को नौबत आ जाए अथवा पति-पत्नी में मन नहीं बनता है तो पति अपने सिर के नीचे सिन्दूर रख के सो जाए और पत्नी अपने सिर के नीचे कपूर रख के सो जाए । सुबह उठे तो कपूर की आरती कर डालें और पति सिन्दूर घर में फ़ेंक दें, तो पति-पत्नी का स्वभाव अच्छा हो जायेगा ।*

🙏🏻 *सुरेशानंदजी - Dombivali 17th May 2010*

                      🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩

🌷 *रोजी – रोटी की चिंता नहीं करनी पड़ेगी* 🌷

 👉🏻 *जीवन को यदि तेजस्वी, सफल और उन्नत बनाना हो तो मनुष्य को त्रिकाल संध्या जरुर करनी चाहिए | हमारी आंतरिक अवस्था ऊँची करने में संध्या के समय आध्यात्मिकता का आश्रय बड़ी मदद करता है | इस समय की हुई भगवद-आराधना विशेष लाभ करती है | व्यक्ति का चित्त शीघ्र निर्दोष एवं पवित्र हो जाता है | ईश्वर- प्रसाद पचाने का सामर्थ्य आ जाता है |*

👉🏻 *नित्य नियम से त्रिकाल संध्या करनेवाले के जीवन में किसीके सामने हाथ फैलाने का दिन नहीं आता | रोजी-रोटी की चिंता नहीं करनी पडती |*

🙏🏻 *ऋषिप्रसाद – फरवरी 2021*

                   🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩

🌷 *गर्मी में पीपल का मुर्रब्बा* 🌷

🍃 *किसी को गर्मी खूब लगती हो तो पीपल के कोमल-कोमल पत्ते टुकड़े-टुकड़े करके उबाल कर उनका मुर्रब्बा बना लें। इससे ताकत भी बहुत आएगी ।*

🙏🏻 *पूज्य बापूजी - Tehri 21st April 2010*

📖 *सनातन पंचांग संपादक ~ अंजनी निलेश ठक्कर*

📒 *सनातन पंचांग प्रकाशित स्थल ~ सुरत शहर (गुजरात)*

        🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩

🙏🌷🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏

TRN LIVE: 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️

*⚜️ आज का राशिफल ⚜️*

*दिनांक : 20 फरवरी 2026*

🐐🐂💏💮🐅👩

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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)

आज का दिन आपकी सोच के एकदम विपरीत रहेगा सोचेंगे कुछ होगा उसका उल्टा ही। मानसिक रूप से भी अंदर ही अंदर से जले भुने रहेंगे आवश्यकता होने पर भी अहम के कारण किसी की सहायता अथवा सलाह लेना पसंद नही करेंगे। लाभ की संभावनाए बनेगी अवश्य लेकिन आर्थिक हानि के डर से जोखिम नही लेंगे फलस्वरूप खर्च निकालने के लिये भी अन्य लोगो का मुह ताकना पड़ेगा। शत्रुओ पर पकड़ बनी रहेगी आपके आगे कोई सर नही उठायेगा फिर भी इसे अनदेखा न करें आपके संपर्क को लोभ देकर अपने पक्ष में कर सकते है सतर्क रहें वरना बाद में पछताना पड़ेगा। सेहत और गृहस्थ दोनो में उतार चढ़ाव लगे रहेंगे।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)

आज के दिन आप जिस भी कार्य को करने का मन बनायेगे उसी में भ्रम की स्थित रहेगी कार्य आरंभ होने के बाद भी कोई ना कोई टांग अढायेगा लेकिन जिस भी कार्य को करें एकाग्र होकर लगे रहे विजय अवश्य मिलेगी। कार्य व्यवसाय की मध्यान तक धीमी रहेगी धन लाभ को लेकर चिंतित रहेंगे मध्यान बाद अकस्मात लाभ के सौदे मिलने से धन की आमद निश्चित होगी लेकिन तुरंत नही होगा जबरदस्ती भी ना करें अन्यथा हाथ आया भी निकल सकता है। गृहस्थ का वातावरण ठीक ठाक ही रहेगा लेकिन घरेलू सुख सुविधा संघर्ष के बाद ही जुटा पाएंगे। शत्रु पक्ष अथवा प्रतिस्पर्धियों के प्रति ढुलमुल रवैया आगे हानि का कारण बन सकता है इसका ध्यान रहे। पिता की सेहत को लेकर चिंतित रह सकते है।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)

आज का दिन आपके लिये सफलता दयाक तो रहेगा लेकिन आज आप अपनी ही किसी गलती से परेशानी को न्योता देंगे। दिन के आरंभ में जिस भी कार्य की रूप रेखा बनाएंगे मध्यान बाद तक ले देकर उसे पूरा कर ही लेंगे। व्यवसाय में जटिल समस्याए किसी वरिष्ठ व्यक्ति के परामर्श से सुलझेंगी। धन की आमद निश्चित होगी इसमे थोड़ा विलंब होने पर निराश ना हो। माता अथवा चल संपत्ति संबंधित सुखों में कमी देखने को मिलेगी। शत्रु पक्ष से कहासुनी भी हो सकती है मामला गंभीर होने की जगह तुरंत शांत भी हो जाएगा। परिवार में भाई बहनों को छोड़ अन्य सभी से विचार मेल नही खाएंगे। सेहत लगभग सामान्य ही रहेगी।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)

आज आप पूर्व में कई गई अपनी ही किसी गलती को लेकर शर्मिंदा होंगे। व्यवहारिकता की कमी और अहम की भावना आपसी संबंधों में खटास लाएगी। घर को छोड़ अन्य सभी जगह सम्मान में कमी का अनुभव करेंगे। आज किसी से भी बात करते समय हद पार ना करें अन्यथा लोगो मे आपके प्रति गलत धारणा बनेगी। कार्य व्यवसाय से लाभ की उम्मीद जागेगी लेकिन अंत समय मे निराशा में बदल जाएगी। लोग आपसे केवल अपना काम निकालने के लिये ही व्यवहार रखेंगे। खर्चो पर भी नियंत्रण रखें भावुकता में आवश्यकता से अधिक खर्च करेंगे बाद में आर्थिक संतुलन बिगड़ेगा। पति-पत्नी में थोड़ी बहुत कहासुनी के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी। जोड़ो में दुर्बलता महसूस करेंगे।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)

आज के दिन आरम्भ से ही सेहत में उतार चढ़ाव लगा रहेगा इस वजह से दिनचर्या भी अस्त व्यस्त रहेगी। आप आज जहां भी जाएंगे या उठ बैठ करेंगे वही आलस्य प्रमाद फैलाएंगे। कार्य व्यवसाय को लेकर गंभीर तो रहेंगे लेकिन आर्थिक कमी के चलते विचार सिरे नही चढ़ पाएंगे। नौकरी पेशा जातक सब सुविधा मिलने पर भी प्रतिष्ठा की चाह ने अथवा अन्य किसी न किसी कारण से परेशान ही रहेंगे। व्यवसायी वर्ग को धन लाभ जुगाड़ करने पर अवश्य होगा लेकिन धन को रोक नही पाएंगे अनर्गल कार्यो में खर्च हो जाएगा। परिवार में किसी पुराने आपसी विवाद अथवा शत्रु पक्ष के कारण बेचैनी का वातावरण रहेगा। कल दे परिस्थिति बदलने लगेगी महत्त्वपूर्ण निर्णय आज ना लें।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)

आज के दिन आपको अपने अधिकांश कार्यो में विजय मिलेगी। सोच विचार कर ही किसी कार्य को करेंगे। आज धन लाभ प्रयास करने पर अवश्य होगा। सरकारी कार्यो में जोड़ तोड़ करके सफलता पा लेंगे। कार्य क्षेत्र पर आज आपका दबदबा रहेगा विरोधी आपके आगे आने की हिम्मत नही करेंगे। सहकर्मियों से बीच मे मतभेद होंगे निराकरण भी तुरंत हो जाएगा। घरेलू सुख भी आज उत्तम रहेगा। सुख सुविधा जुटाने पर खर्च करेंगे। लेकिन बाहर के खान-पान में संयम रखें बदहजमी गैस आदि की परेशानी हो सकती है। घर के बुजुर्ग से शुभ समाचार मिलेंगे।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)

आज का दिन आशानुकूल रहेगा धन का खर्च विशेष रहेगा फिर भी सुख सुविधाओं में कुछ ना कुछ वृद्धि ही होगी। काम धन्धा आज ज्यादा बेहतर तो नही चलेगा फिर भी दैनिक खर्च आसानी से निकल जाएंगे। कार्य क्षेत्र पर नौकरी वालो के लिये कोई नई मुसीबत बढ़ने से मानसिक तनाव में रहेंगे। घर के सदस्यों का व्यवहार स्वार्थ सिद्धि से भरा रहेगा इच्छा पूर्ति करते रहने तक ही मीठा व्यवहार करेंगे माता अथवा पति-पत्नी में व्यवहारिकता की कमी रहेगी छोटी सी बात को प्रतिष्ठा से जोड़ने पर कलह होने की संभावना है। सरकारी कार्यो में आकस्मिक लाभ होने की संभावना है। व्यसन दुराचरण से बचे मान हानि हो सकती है। सेहत संबंधित शिकायत खान पान में संयम ना रखने पर ही होगी।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)

आज का दिन आर्थिक दृष्टिकोण से निराश करने वाला रहेगा धन की आमद बुद्धि बल का प्रयोग करने पर ही होगी लेकिन क्रोध पर नियंत्रण ना रहने के कारण स्वयं ही अपना नुकसान कर लेंगे। बुद्धि विवेक आज प्रखर रहेगा लेकिन फिर भी धन संबंधित कार्यो में निराशा ही मिलेगी। घर के सदस्यों को छोड़ अन्य सभी लोग अपनी समस्याओं को लेकर आएंगे। अति आत्मविश्वास की भावना आज हानि करा सकती है इसका भी ध्यान रखें खास कर कर्क एवं कुम्भ राशि के लोगो से बच कर रहे अपने कार्य निकालने के लिये आपको परेशानी में डाल सकते है। जोड़ो में दर्द अथवा पेट संबंधित शिकायत हो सकती है।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)

आज का दिन आपको मौन रहकर बिताने की सलाह है। किसी को भी बिना मांगे सलाह भूल कर भी ना दें अन्यथा लेने के देने पड़ सकते है। घर का माहौल छोटी सी बात पर उग्र होगा खास कर पति-पत्नी के बीच झगड़ा होने के प्रबल योग है संतान अथवा अन्य अनैतिक कार्य इसका कारण बनेंगे। कार्य क्षेत्र पर जिस कार्य से लाभ की उम्मीद लगाएंगे उसी में हानि होगिनिस्के विपरीत जहां से कोई उम्मीद नही रहेगी वहां से खर्च चलाना पड़ेगा। संताने मनमानी करेंगी नजर बनाए रखें सार्वजनिक क्षेत्र पर सम्मान हानि भी हो सकती है। धन लाभ किसी न किसी रूप में अवश्य होगा लेकिन झंझटो के बाद ही। रक्त पित्त संबंधित शिकायत हो सकती है।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)

आज के दिन अनिर्णय की स्थित किसी भी कार्य को समय पर होने से रोकेगी। मेहनत करने के पक्ष में आज बिल्कुल नही रहेंगे इसके विपरीत महात्त्वकांक्षाये सामर्थ्य से अधिक रहेंगी। आलस्य प्रमाद में कार्यो को आगे के लिये टालेंगे बाद में सर पर आने पर जो भी निर्णय लेंगे अधिकांश तह जल्दबाजी में ही होंगे जिससे कोई न कोई भूल होगी। काम धंधा सामान्य रहने पर भी अपनी ही गलतियों के कारण जिस लाभ के अधिकारी है उससे वंचित रह जाएंगे। अविवाहितों को योग्य साथी मिलेगा लेकिन यहाँ भी असमंजस की स्थित के कारण बात बिगड़ ना जाये इसके लिये आज निर्णय ना ले तो ही बेहतर रहेगा। धन हाथ मे नही रुकेगा। सेहत के ऊपर खर्च होगा।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)

आज के दिन आपका मन इधर उधर की बातों में अधिक रहेगा। एक काम करते हुए भी दिमाग अन्य जगह रहने पर कुछ त्रुटि होने की संभावना है। कार्य व्यवसाय से जितनी आशा लगाकर रहेगें उतना लाभ नही मिल पायेगा। धन की आमद होते होते किसी स्वजन परिचित की गलती से आगे के लिये टलेगी। नौकरी पेशा लोग सहकर्मियों के ऊपर अधिक निर्भर रहेंगे जाना बूझ कर अपना काम अन्य के ऊपर सरकाएँगे। भाई बंधुओ से आपसी तालमेल की कमी रहेगी आपके विचारों के उलट कार्य करने पर बहस भी हो सकती है लेकिन संतान सहयोगी बनने पर राहत मिलेगी। आरोग्य में कमी अनुभव करेंगे।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)

आज आपका व्यक्तित्त्व निखरा हुआ रहेगा लेकिन स्वभाव में जिद और अकड़ रहने के कारण कोई भी आपसे अपने मन की बात बोलने से कतरायेगा। दिन के आरंभ में आलस्य रहेगा फिर भी मन ही मन नौकरी व्यवसाय संबंधित तिकडम लगी रहेगी। कार्य व्यवसाय में पुरानी योजनाओ से धन लाभ होगा लेकिन भाग्य पक्ष कमजोर होने के कारण कुछ ना कुछ कमी अनुभव करेंगे आज नए कार्य अनुबंध भी मिलने की सम्भवना है। धन धार्मिक अथवा परोपकार के कार्यो पर खर्च होगा। घर परिवार में वातावरण असामान्य रहेगा पत्नी की उम्मीदों का हनन करना महंगा पड़ सकता है। माता से भी संबंध में चंचलता आएगी। मूत्राशय संबंधित समस्या रहेगी।

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[TRN LIVE: 2️⃣0️⃣❗0️⃣2️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣

*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*

            *!! दया की महिमा !!*

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एक बहेलिया था। चिड़ियों को जाल में या गोंद लगे बड़े भारी बाँस में फँसा लेना और उन्हें बेच डालना ही उसका काम था। चिड़ियों को बेचकर उसे जो पैसे मिलते थे, उसी से उसका काम चलता था।

एक दिन वह बहेलिया अपनी चद्दर एक पेड़ के नीचे रखकर अपना बड़ा भारी बाँस लिये किसी चिड़िया के पेड़ पर आकर बैठने की राह देखता बैठा था। इतने में एक टिटिहरी चिल्लाती दौड़ी आयी और बहेलिये की चद्दर में छिप गयी।

टिटिहरी ऐसी चिड़िया नहीं होती कि उसे कोई पालने के लिये खरीदे। बहेलिया उठा और उसने सोचा कि अपनी चद्दर में से टिटिहरी भगा देना चाहिये। इसी समय वहाँ ऊपर उड़ता एक बाज दिखायी पड़ा। बहेलिया समझ गया कि यह बाज टिटहरी को पकड़ कर खा जाने के लिये झपटा होगा, इसी से टिटिहरी डरकर मेरी चद्दर में छिपी है। बहेलिये के मन में टिटिहरी पर दया आ गयी। उसने ढेले मारकर बाज को वहाँ से भगा दिया। बाज के चले जानेपर टिटिहरी चद्दर से निकलकर चली गयी।

कुछ दिनों पीछे बहेलिया बीमार हुआ और मर गया। यमराज के दूत उसे पकड़कर यमपुरी ले गये। यमपुरी में कहीं आग जल रही थी, कहीं चूल्हे पर बड़े भारी कड़ाही में तेल उबल रहा था। पापी लोग आग में भूने जाते थे, तेल में उबाले जाते थे। यमराज के दूत पापियों को कहीं कोड़ों से पिटते थे, कहीं कुल्हाड़ी से काटते थे। और भी भयानक कष्ट पापियों को वहाँ दिया जाता था। बहेलिये के वहाँ जाते ही, वहाँ सैकड़ों, हजारों चिड़ियाँ आ गयीं और वे कहने लगीं– ‘इसने हमें बिना अपराध के फँसाया और बेचा है। हम इसकी आँखें फोड़ देंगी और इसका मांस नोच-नोचकर खाएँगी।’

बेचारा बहेलिया डर के मारे थर-थर काँपने लगा। उसी समय वहाँ एक टिटिहरी आयी। उसने हाथ जोड़कर यमराज से कहा– ‘महाराज! इसने बाज से मेरे प्राण बचाये हैं। इसको आप क्षमा करें।’

यमराज बोले– ‘यह बड़ा पापी है। सब चिड़ियाँ इसे नोचेंगी और फिर इसे जलाया जायगा और कुल्हाड़ों से काटा जायगा। लेकिन यह छोटी टिटिहरी इसको बचाने आयी है। इसने एक बार इस चिड़िया पर दया की है। इसलिये इसको अभी संसार में लौटा दो और इसे एक वर्ष जीने दो।’

यमराज के दूत बहेलिये के जीव को लौटा लाये। बहेलिये के घरके लोग उसकी देह को श्मशान ले गये थे और चितापर रखनेवाले थे। वे लोग रो रहे थे। इतने में बहेलिया जी गया। वह बोलने और हिलने लगा। उसके घर के लोग बहुत प्रसन्न हुए और उसके साथ घर लौट आये।

बहेलिये को यमराज की बात याद थी।उसने चिड़िया पकड़ना छोड़ दिया। अपने भाइयों से भी चिड़िया पकड़ने का काम उसने छुड़ा दिया। वह मजदूरी करने लगा। सबेरे और शाम को वह रोज चिड़ियों को थोड़े दाने डालता था। बहुत-सी चिड़ियाँ उसके दाने खा जाया करती थीं। अब रोज वह भगवान् की प्रार्थना करता था और भगवान् का नाम जपता था। इससे बहेलिये के सब पाप कट गये। एक वर्ष बाद जब वह मरा, तब उसे लेने देवताओं का विमान आया और वह स्वर्ग चला गया।

*शिक्षा:-*

मित्रों, तुम्हें भी किसी भी जीवन को कष्ट नहीं देना चाहिये। सभी जीवों पर दया करनी चाहिये। जो जीवों पर दया करता है, उस पर भगवान् प्रसन्न होते हैं।

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*

*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*

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Try: *📜 20 फरवरी 📜*

*🌐 विश्व सामाजिक न्याय दिवस 🌐*

चाहें आप किसी भी जाति, धर्म, लिंग, गरीब हो या अमीर हो न्याय सभी के लिए एक बराबर होना चाहिए, ये एक अधिकार है जो अपने प्रति सभी को एक नजर से देखता है। सामाजिक न्याय के प्रति दुनिया के सभी लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिवर्ष 20 फरवरी को सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाता है। 

विश्व सामाजिक न्याय दिवस को मनाने के पीछे का मुख्य उद्देश्य किसी भी प्रकार के भेदभाव को खत्म करके अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सभी को साथ लाकर एक एकीकृत समाज का निर्माण करना है। इस दिवस के माध्मय से स्कूलों, कॉलेजों के साथ-साथ कार्यालयों और अन्य स्थानों के लोगों में सामाजिक न्याय को लेकर जागरूकता पैदा करना है, जिसके लिए कई प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। 

>> 20 फरवरी को क्यों मनाया जाता है विश्व सामाजिक न्याय दिवस <<

अमेरिका में श्वेत-अश्वेत का भेदभाव खत्म करने के लिए सबसे पहले आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1950 से 60 के बीच की गई थी। यहां से आप समझ पाएंगे कि विश्व के हर देश में रहने वाले लोगों ने एक समय पर किसी न किसी प्रकार से भेदभाव सहा है, जिसे खत्म करने के लिए और लोगों में सामाजिक न्याय को लेकर जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए ये दिवस महत्वपूर्ण है। लेकिन इस दिवस की शुरुआत कैसे हुई और किस प्रकार ये अस्तित्व में आया ये सभी के लिए जानना आवश्यक है। तो आपको बता दें कि वर्ष 1995 में डेनमार्क में स्थित कोपेनहेगन में सर्वप्रथम सामाजिक विकास के लिए एक सम्मेलन का आयोजन किया गया था। जो बाद में कोपेनहेगन घोषणा और कार्य योजना के रूप में सामने लाया गया। इस सम्मेलन में 100 से अधिक राजनीतिक नेता शामिल हुए थे, जिन्होंने गरीबी उन्मूलन, रोजगार प्रदान करने और सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाज को बनाने का एक संकल्प लिया। 2005 में कोपेनहेगन घोषणा और कार्य योजना की समीक्षा की गई।

इसके दो साल बाद ही यानी की वर्ष 2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सामाजिक न्याय की भावना और आवश्यकता को समझा और 26 नवंबर 2007 को आधिकारिक घोषणा की और कहा कि महासभा के 60वें सत्र से शुरू होकर 20 फरवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाएगा। 10 जून 2008 को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा निष्पक्ष वैश्वीकरण के लिए सामाजिक न्याय पर आईएलओ की घोषणा को अपनाया और उसके बाद 20 फरवरी 2009 को पहला विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया गया और आज तक लगातार मनाया जा रहा है।

>> विश्व सामाजिक न्याय दिवस का उद्देश्य <<

विश्व सामाजिक न्याय दिवस को मानाने का उद्देश्य सतत विकास की प्राप्ती करना है, रोजगार के अच्छे अवसरों को बढ़ावा देना है, रोजगार में लिंग भेदभाव की स्थिति को कम करना है, गरीबी उन्मूलन, सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा, लैंगिक समानता प्रदान करना और सामाजिक भलाई के लिए कार्य कर सभी को न्याय दिलवाना है। न्याय सभी के लिए समान होना चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार की भेदभाव की स्थिति न हो इस बात की भी खास ख्याल रखा जाता है।

भारत में कई हर रंग, धर्म और जाति के व्यक्ति रहते हैं, लेकिन भारतीय संविधान के माध्यम से सभी को समान अधिकार प्राप्त है और संविधान की प्रस्तावना के अनुसार भारत के सभी नागरिकों के लिये राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक न्याय के साथ स्वतंत्रता के सभी रूप शामिल हैं। ताकि भारत को एक आदर्श समाज के रूप में व्यक्त किया जा सकें और सभी लोगों यहां शांतिपूर्ण ढंग से रह सकें।

>> विश्व सामाजिक न्याय दिवस 2026 का थीम <<

प्रत्येक वर्ष, संयुक्त राष्ट्र सामाजिक न्याय से संबंधित प्रमुख मुद्दों और प्राथमिकताओं को उजागर करने के लिए एक थीम का चयन करता है। विश्व सामाजिक न्याय दिवस 2026 की थीम है- “सामाजिक विकास और सामाजिक न्याय के प्रति नवीकृत प्रतिबद्धता" इस विषय के तहत सामाजिक न्याय का विश्व दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष का आयोजन सामाजिक विकास के लिए द्वितीय विश्व शिखर सम्मेलन और दोहा राजनीतिक घोषणा को अपनाने के बाद एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रहा है।

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TRN LIVE: .. *जय श्री राम*

*शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 के मुख्य समाचार*

🔶दिल्ली-कर्नाटक समेत 22 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की घोषणा: EC बोला- अप्रैल से प्रक्रिया शुरू होगी; अभी 12 राज्यों में वोटर्स वेरिफिकेशन जारी

 🔶Punjab का दौरा करेंगे राहुल गांधी, किसानों के समर्थन में बड़ी रैली का आयोजन

🔶छत्तीसगढ़ में BJP सरकार का बड़ा फैसला: मुस्लिम कर्मचारियों को ऑफिस से 1 घंटा पहले छुट्टी 

🔶ईरान के पास सिर्फ 10 दिन का समय, ट्रंप बोले- 'सौदा नहीं हुआ तो बहुत बुरा होगा'

🔶DRDO का ड्रोग पैराशूट टेस्ट सफल, मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी को मिली मजबूती

🔶PM मोदी को कहा 200% टैरिफ लगा दूंगा; ट्रंप ने फिर अलापा युद्ध रुकवाने का राग

🔶गाजा पीस बोर्ड में बिना एजेंडा पहुंचे शहबाज शरीफ, पाकिस्तान की हुई बेइज्जती

🔶मोहन भागवत जिस वंदे भारत से मेरठ पहुंचे, उस पर पथराव: खिड़की का शीशा टूटा, स्टेशन पर सिक्योरिटी के बीच उतरे; GRP की जांच जारी

🔶शशि थरूर बोले-बड़े इवेंट्स में गड़बडियां हो सकती हैं: दिल्ली में चल रहे AI समिट की तारीफ की; राहुल ने इसे PR तमाशा बताया था

🔶सुप्रीम कोर्ट बोला-फ्री खाना मिलेगा तो लोग काम क्यों करेंगे: मुफ्त बिजली-पानी देने से काम करने की आदत ही खत्म हो जाएगी; सरकारें रोजगार दें

🔶'राफेल से आपके देश का ही फायदा...', भारत-फ्रांस डील पर मैक्रों का विपक्ष को जवाब!

🔶पीएम मोदी ने दुनिया को दिया 'MANAV' विजन, एआई के लिए तय किए 5 सूत्र, बताया भविष्य का रोडमैप

🔶कानपुर में फर्जी डिग्री सिंडिकेट का भंडाफोड़, 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों के नाम पर चल रहा था 'खेल'

🔶Iran: ईरान ने रूस के साथ किया युद्ध अभ्यास, पश्चिम एशिया के करीब पहुंचा अमेरिका का विमानवाहक पोत; तनाव बढ़ा

🔶AI Summit: उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां बोलीं- भारत बन सकता है एआई का पावरहाउस, तकनीक में बड़े निवेश की जरूरत

🔶US: 'पराग्वे के राष्ट्रपति युवा व आकर्षक, लेकिन मुझे महिलाएं पसंद', शांति बोर्ड की बैठक में ट्रंप का अजीब बयान

🔶Punjab: 31 साल से चल रहा था फरार! खालिस्तान कमांडो फोर्स का मोस्ट वांटेड आतंकी गिरफ्तार

🔶सिरोही को 535 करोड़ की बड़ी सौगात, आबूरोड से सांचौर तक बनेगा फोरलेन हाइवे!

🔶गोरखपुर में 339 करोड़ से बनेगा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, सीएम योगी ने MoU किया साइन

🔶महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवाजी महाराज की जयंती पर उनकी विरासत को किया याद

🔷अफगानिस्तान ने बड़ी जीत के साथ लिया टी20 वर्ल्ड कप से अलविदा, कनाडा को 82 रन से हराया

🔷T20 World Cup : जिम्बाब्वे की दूसरी बड़ी जीत, ऑस्ट्रेलिया के बाद अब श्रीलंका को हराया

           *आपका दिन शुभ और मंगलमय हो सुप्रभात..!!*

                          जय हो🙏

TRN LIVE: *📜 20 फरवरी 📜*

*🌹 स्वतंत्रता सेनानी 'शरत चन्द्र बोस' // पुण्यतिथि 🌹*

जन्म : 06 सितम्बर 1889

मृत्यु : 20 फरवरी 1950

शरत चन्द्र बोस बैरिस्टर और भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे। ये जानकी नाथ बोस के बेटे और सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई थे। शरत चन्द्र बोस काँग्रेस कार्यकारी समिति के सदस्य थे तथा बंगाल विधान सभा में काँग्रेस संसदीय पार्टी के नेता थे।

>> जन्म एवं परिचय <<

शरत चन्द्र बोस का जन्म 6 सितम्बर, 1889 में कलकत्ता में हुआ। उनके पिता जानकी नाथ बोस उड़ीसा में कटक के एक प्रमुख अधिवक्ता थे। शरत चन्द्र बोस सुभाष चन्द्र बोस के बड़े भाई थे दोनों भाई एक-दूसरे के प्रति अत्यन्त समर्पित थे।

>> शिक्षा <<

शरत चन्द्र की शिक्षा-दीक्षा कटक तथा कलकत्ता में सम्पन्न हुई। उन्होंने इंग्लैण्ड से कानून में शिक्षा प्राप्त की तथा घर वापिस लौट कर उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट से अपनी वकालत शुरू कर दी। शरत की वकालत दिन पर दिन फलने-फूलने लगी।

>> राजनैतिक जीवन <<

शरत चंद्र ने सी.आर. दास के निर्देशन में अपने कैरियर की शुरुआत की तथा कलकत्ता निगम के कार्यों में वर्षों तक चर्चित रहे। अहिंसा में विश्वास रखने के बावजूद शरत चंद्र का क्रांतिकारियों के प्रति सहानुभूति का दृष्टिकोण था। वे काँग्रेस कार्यकारी समिति के सदस्य थे तथा बंगाल विधान सभा में काँग्रेस संसदीय पार्टी के नेता थे। वे अगस्त 1946 में केंद्र की अंतरिम सरकार में शामिल हुए। शरत ने बंगाल विभाजन का विरोध किया था। वे बंगाल को भारत और पाकिस्तान का अलग एक स्वाधीन राज्य बनाना चाहते थे। किंतु वे इसमें असफल रहे।

>> मृत्यु <<

शरत चन्द्र बोस जी का निधन 20 फरवरी, 1950 को हो गया।

TRN  LIVE 

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TRN LIVE: *सुबह की देश राज्यों से बड़ी खबरें..*

          *20 - फरवरी - शुक्रवार*

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*1* वैश्विक सीईओ के साथ पीएम मोदी का मंथन, एआई सहयोग और निवेश के अवसरों पर रहा जोर

*2* इमैनुएल मैक्रों बोले- राफेल डील से भारत मजबूत हो रहा, लोग कैसे कर सकते हैं आलोचना

*3* उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां बोलीं- भारत बन सकता है एआई का पावरहाउस, तकनीक में बड़े निवेश की जरूरत

*4* रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को विशाखापत्तनम में बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन 2026 का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा है कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन की स्वतंत्रता पर आधारित एक समतामूलक समुद्री व्यवस्था स्थापित करना चाहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर काम करना होगा

*5* उन्होंने कहा, 'पारंपरिक खतरों के साथ-साथ उभरती चुनौतियां भी मौजूद हैं। समुद्री डकैती, समुद्री आतंकवाद, अवैध मछली पकड़ना, तस्करी, साइबर जोखिम और महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान जैसी समस्याएं गंभीर हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं, जिससे मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों की मांग भी बढ़ी है।'

*6* राहुल गांधी को गोली मारने की धमकी, कांग्रेस ने करणी सेना के कार्यकर्ता का वीडियो शेयर किया; आरोपी कोटा से पकड़ाया

*7* कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान पर नाराजगी जताई है, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। पायलट ने इस बयान को गलत बताते हुए रिजिजू से माफी की मांग की है।

*8* भागवत जिस वंदे भारत से मेरठ पहुंचे, उस पर पथराव, खिड़की का शीशा टूटा, स्टेशन पर सिक्योरिटी के बीच उतरे; GRP की जांच जारी

*9* दिल्ली-कर्नाटक समेत 22 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की घोषणा, EC बोला- अप्रैल से प्रक्रिया शुरू होगी; अभी 12 राज्यों में वोटर्स वेरिफिकेशन जारी

*10* 22 फरवरी को सिंगापुर और जापान की यात्रा पर जाएंगे सीएम योगी, 600 kmph रफ्तार वाली मैग्लेव ट्रेन में करेंगे सफर

*11* भिवंडी में मेयर-डिप्टी मेयर को लेकर सियासत: एक साथ आए कांग्रेस-NCP और बागी भाजपा पार्षद; बने नए समीकरण

*12* बाज नहीं आ रहे बड़बोले ट्रंप; फिर अलापा युद्ध रुकवाने वाला राग,ट्रम्प बोले- मैंने भारत-PAK को 200% टैरिफ की चेतावनी दी, तब लड़ाई रोकने के लिए माने, संघर्ष में 11 फाइटर जेट्स गिरे थे

*13* 'अगर डील नहीं हुई तो...', ईरान को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की खुली चेतावनी, 10 दिन का दिया अल्टीमेटम, अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, ट्रंप बोले - 10 दिन में तय होगा समझौता या एक्शन

*14* ईरान ने गुरुवार को रूस के साथ वार्षिक सैन्य युद्ध अभ्यास किया। यह युद्ध अभ्यास ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिकी विमानवाहक  पोत पश्चिम एशिया के करीब पहुंच रहा है। अमेरिका और ईरान दोनों ने संकेत दिए हैं कि अगर तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता विफल हुई, तो वे युद्ध के लिए तैयार हैं

*15* जिम्बाब्वे ने लगातार दूसरे वर्ल्ड चैंपियन को हराया, ऑस्ट्रेलिया के बाद श्रीलंका को 6 विकेट से मात दी, 26 फरवरी को भारत से मुकाबला

*16* सुपर-8 के मैचों का पूरा शेड्यूल, 21 फरवरी से शुरुआत, 3 डबल हेडर होंगे, भारत 22 फरवरी को साउथ अफ्रीका से खेलेगा

*17* राजस्थान में कोहरा, तापमान 10 डिग्री लुढ़का, MP में 25 जिलों में बारिश, हरियाणा में ओले गिरे; उत्तराखंड के केदारनाथ में बर्फबारी

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TRN LIVE: 🪔🪔🪔 ⚜🕉⚜ 🪔🪔🪔

    *🙏ॐ श्रीगणेशाय नम:🙏*

       *🙏शुभप्रभातम् जी🙏*

*इतिहास की 20 फरवरी 2025 तक की मुख्य घटनाओं सहित पञ्चांग - मुख्यांश...*

     *📝आज दिनांक 👉*

     *📜 20 फरवरी 2026*

                 *शुक्रवार*

 *🏚नई दिल्ली अनुसार🏚*

*🇮🇳शक सम्वत-* 1947

*🇮🇳विक्रम सम्वत-* 2082

*🇮🇳मास-* फाल्गुन 

*🌓पक्ष-* शुक्लपक्ष

*🗒तिथि-* तृतीया - 14:40 तक

*🗒पश्चात्-* चतुर्थी 

*🌠नक्षत्र-* उत्तरभाद्रपद - 20:08 तक

*🌠पश्चात्-* रेवती 

*💫करण-* गर - 14:40 तक

*💫पश्चात्-* वणिज 

*✨योग-* साध्य - 18:22 तक

*✨पश्चात्-* शुभ

*🌅सूर्योदय-* 06:55

*🌄सूर्यास्त-* 18:14

*🌙चन्द्रोदय-* 08:24

*🌛चन्द्रराशि-* मीन - दिनरात

*🌞सूर्यायण -* उत्तरायण

*💡अभिजित-* 12:12 से 12:57

*🤖राहुकाल-* 11:10 से 12:35

*🎑ऋतु-* वसन्त 

*⏳दिशाशूल-* पश्चिम 

*✍विशेष👉*

_*🔅आज शुक्रवार को 👉🏻 फाल्गुन सुदी तृतीया 14:40 तक पश्चात् चतुर्थी शुरू , सर्वार्थसिद्धियोग/ कार्यसिद्धियोग / अमृतसिद्धियोग 20:08 से सूर्योदय तक , सर्वदोषनाशक रवियोग 20:08 से , राजयोग 14:39 तक , विघ्नकारक भद्रा 25:50 से , मूल संज्ञक नक्षत्र 20:08 से , पंचक जारी , शक फाल्गुन मासारंभ , भगवान श्री अरहनाथ गर्भ कल्याणक (जैन , फाल्गुन शुक्ल तृतीया) , पं. लेखराम वीर तृतीया / जयन्ती , राव श्री बीरेन्द्र सिंह जयन्ती , श्री नेदुरुमल्ली जनार्दन रेड्डी जयन्ती , श्री शरतचंद्र बोस स्मृति दिवस , अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस , मिजोरम स्थापना दिवस व विश्व सामाजिक न्याय दिवस।*_

_*🔅कल शनिवार को 👉🏻 फाल्गुन सुदी चतुर्थी 13:03 तक पश्चात् पंचमी शुरू , वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत।*_

*🎯आज की वाणी👉*

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*गुणदोषसमाहारे*

    *गुणान् गृह्णन्ति साधवः।*                                     

*क्षीरवारिसमाहारे*

    *हंसः क्षीरमिवाखिलम्।।* 

*भावार्थ👉*

          _जैसे दूध और जल से हंस पूरा दूध निकाल लेता है उसी प्रकार सज्जन पुरुष गुण एवं दोष में से गुण को ग्रहण कर लेते हैं एवं दोषों को छोड़ देते हैं।_

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*20 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ👉*

1547 - एडवर्ड षष्ठम् का इंग्लैंड के शासक के पद पर वैस्टमिनिस्टर ऐबे में राज्याभिषेक हुआ।

1677 – फ़्रांस ने हेटी में स्पेन की सेना को पराजित किया और इस क्षेत्र पर फ़्रांसीसी साम्राज्यवाद आरंभ हुआ।

1798 - लुई एलेक्जेंडर बर्थियर ने पोप पायस षष्ठम को पदच्युत किया।

1811 – ऑस्ट्रिया को दिवालिया घोषित किया गया।

1833 - मिस्र के साथ युद्ध में तुर्की की मदद के लिए रूसी जहाज़ बास्फ़ोरस की खाड़ी में पहुँचे।

1835 - कलकत्ता मेडिकल कॉलेज आधिकारिक तौर पर खुला।

1846 - अंग्रेजों ने लाहौर पर कब्जा किया।

1847 - राॅयल कलकत्ता टर्फ क्लब की स्थापना। 

1868 - 'अमृत बाज़ार पत्रिका' का बांग्ला में साप्ताहिक रूप में प्रकाशन शुरू हुआ।

1872 - न्यूयार्क शहर में 'मेट्रोपोलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट्स' खुला।

1873 - कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी ने सैन फ़्रांसिस्को में अपने पहले मेडिकल कॉलेज की शुरुआत की।

1928 – ब्रिटेन ने जार्डन के साथ होने वाले समझौते के अनुसार इस देश की अधीनता को औपचारिकता दी।

1933 - एडॉल्फ़ हिटलर ने चुनावों में नाज़ी पार्टी को सहयोग देने के लिए गुप्त तौर पर जर्मन उद्योगपतियों से मुलाकात की।

1935 - कैरोलाइन मिकेल्सन अंटार्कटिक पहुँचने वाली पहली महिला बनीं।

1940 - इंग्लैंड में दक्षिण अफ़्रीका में नए निवेशों पर लगी पाबंदियाँ उठा लेने की घोषणा की।

1942 - द्वितीय विश्वयुद्ध में जापानी सैनिकों ने डच ईस्ट इंडीज में बाली पर हमला कर दिया।

1947 – ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लेमेंट अट्टली ने घोषणा की कि ब्रिटेन जून 1948 तक भारत को छोड़ देगा।

1962 - जान एच ग्लेन अमेरिका के प्रथम अंतरिक्ष यात्री बने।

1965 - नासा द्वारा प्रक्षेपित रेंजर आठ चांद पर उतरा, फोटाे और ज़रूरी डेटा भेजे।

1968 - मुंबई के के.ई.एम. अस्पताल के डाक्टर पी.के. सेन ने हृदय प्रत्यारोपण का पहला आपरेशन किया।

1975 - मार्गरेट थैचर ब्रिटिश कंजर्वेटिव पार्टी की नेता निर्वाचित हुई।

1976 - मुंबई हाई में कच्चे तेल का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन शुरू हुआ।

1982 - कन्हार नदी जल पर उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में समझौता।

1983 – उत्तर पूर्वी राज्य असम में होने वाली विधानसभा चुनाव से पहले व्यापक पैमाने पर हिंसा भड़कने से 600 लोगों की मौत हुई।

1986 - सोवियत संघ द्वारा 'सेल्युत-7' की अपेक्षा अधिक विकसित अंतरिक्ष स्टेशन 'मीर' (शान्ति) का प्रक्षेपण।

1987 - मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश का क्रमश: 23वाँ एवं 24वाँ राज्य के रूप में उद्घाटन।

1988 - रियो डी जेनेरो में बाढ़ से 65 लोग मारे गये और एक अस्पताल के 100 से अधिक लोग लापता हुए।

1989 - आईआरए द्वारा किये गए एक घमाके में टर्नहिल में ब्रिटिश सेना की एक बैरक घ्वस्त।

1999 - भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान की ऐतिहासिक बस यात्रा की।

1999 - दूरदर्शन पर खेल चैनल शुरू हुआ।

2000 - भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी ने ब्रिटेन छोड़कर न्यूयार्क में बसने का निश्चय किया।

2001 - लिथुवानिया के राष्ट्रपति एडमकस भारत पहुँचे, दोनों देशों में तीन समझौते।

2002 - काहिरा (मिस्र) में चलती ट्रेन में आग लगने से 373 मरे।

2003 - ईरान में विमान दुर्घटना में 302 लोग मारे गये।

2007 - यूरोपीय संघ कार्बन डाई आक्साइड के उत्सर्जन को 2010 तक 20 प्रतिशत कम करने को सहमत।

2008 - रक्षा सौदे में ऑफ़सेट नीति को मंज़ूरी मिली। 

2008 - भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई में चार सरकारी बैंको ने प्राथमिकी ॠण दरों में 0.25.-0.50% तक कटौती की।

2008 - अमेरिका में राष्ट्रपति पद के दावेदार बराम ओबामा ने अपनी नौवीं जीत दर्ज की।

2009- भ्रष्टाचार के आरोप में कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायधीश सौमित्र सेन के ख़िलाफ़ महाभियोग चला।

2015 - स्विट्जरलैंड के राफ्ज शहर में दो ट्रेनों की टक्कर में 49 लोगों की मौत।

2019 - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और सऊदी अरब के युवराज मोहम्‍मद बिन सलमान ने आपसी रिश्‍तों को प्रगाढ़ बनाने पर चर्चा की - सऊदी अरब भारत में एक खरब डॉलर निवश करेगा।

2019 - सरकारी सुरक्षा के दायरे में रहकर आतंकियों की भाषा बोलने वाले हुर्रियत के कट्टरपंथी गुट के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी समेत 18 हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा जम्मू--कश्मीर प्रशासन ने वापस ले ली तथा राज्य के 155 राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं की सुरक्षा भी घटा दी।

2020 - जर्मनी में एक संदिग्ध स्वदेशी चरमपंथी ने हिसू शहर के शीशा बार और कैफे में नौ लोगों की गोली मारकर हत्या की।

2020 - अमरीकी वैज्ञानिकों ने नोवेल कोरोना वायरस का पहला थ्री-डी आण्‍विक स्‍केल मानचित्र तैयार किया।

2021 - भारत और मालदीव ने मछली-प्रसंस्‍करण, लोक प्रसारण, सतत शहरी विकास, सड़क अवसंरचना और आवास सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग के समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए।

2021 - भारत और चीन के बीच कोर कमाण्‍डर स्‍तर की 10वें दौर की वार्ता में सेना को पीछे हटाने के मुद्दे पर चर्चा हुई।

2021 - श्री जो बाइडेन ने अमरीकी राष्‍ट्रपति पद की शपथ लेने के कुछ ही घंटे के बाद पैरिस समझौते में दोबारा शामिल होने की प्रक्रिया से जुड़े कार्यकारी आदेश पर हस्‍ताक्षर किए।

2022 - राजस्थान में कोटा में नयापुरा पुलिया से कार के चंबल नदी में गिर जाने से दूल्हे सहित 9 बारातियों की मौत हुई।

2022 - विज्ञान सर्वत्र पूज्यते नामक सप्ताह भर चलने वाला स्मरणोत्सव (22 फरवरी से 28 फरवरी तक) शुरु हुआ।

2023 - तुर्की में 6.4 तीव्रता के भूकंप से 3 की मौत व 200 से ज्यादा घायल हुए।

2023 - जम्मू-कश्मीर के कटरा में 3.4 तीव्रता आया भूकंप आया।

2023 - उत्तर कोरिया ने 48 घंटों में बैलिस्टिक मिसाइल का दूसरा परीक्षण किया।

2023 - भारतीय थल सेना और उज्‍बेकिस्‍तान की थल सेना के बीच द्विवार्षिक प्रशिक्षण अ‍भ्‍यास आरंभ हुआ।

2023 - संजय कुमार मिश्र ने झारखंड के 14वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।

2023 - लेफ्टिनेंट जनरल एमवी सुचेंद्र कुमार को भारतीय सेना का नया उप-प्रमुख नियुक्त किया गया।

2024 - श्री मोदी ने जम्मू में AIIMS-IIM का उद्घाटन किया।

2024 - महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को शिक्षा और नौकरियों में 10% आरक्षण का विधेयक विधानमंडल के दोनों सदनों में पारित हुआ।

2024 - बहुप्रतीक्षित इंडस-एक्स सम्मेलन नई दिल्ली मे शुरू हुआ।

2025 - राजधानी दिल्ली के नए मुख्यमंत्री के तौर पर रेखा गुप्ता ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण की।

*20 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति👉*

1909 - अजय घोष - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता थे।

1921 - राव बीरेन्द्र सिंह - एक भारतीय राजनेता थे और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ।

1932 – के. वी. सुबन्ना- प्रसिद्ध कन्नड़ नाटककार।

1932 - भबेन्द्र नाथ सैकिया - भारतीय उपन्यासकार, लघु कथा लेखक तथा फ़िल्म निर्देशक थे।

1935 - नेदुरुमल्ली जनार्दन रेड्डी - भारतीय राजनीतिज्ञ व आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री।

1936 - जरनैल सिंह - फ़ुटबॉल के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक ।

1945 - अनु कपूर, भारतीय अभिनेता।

1946 - पंकज बिष्ट - हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित पत्रकार, कहानीकार, उपन्यासकार व समालोचक ।

1947 - जयन्त कुमार मलैया - 'भारतीय जनता पार्टी' के नेता, मध्य प्रदेश।

1955 - रघुवेंद्र तंवर - भारतीय साहित्यकार ।

1973 - प्रियांशु चटर्जी - एक भारतीय मॉडल और अभिनेता है। 

1976 - रोहन गावास्कर, क्रिकेटर।

1988 – जिया ख़ान, भारतीय अभिनेत्री।

*20 फ़रवरी को हुए निधन👉*

1934 - स्वामी शिवानन्द - रामकृष्ण मिशन के दूसरे संघाध्यक्ष थे।

1950 – नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई और राष्ट्रवादी नेता शरत चंद्र बोस का निधन हुआ।

1972 - शिवनारायण श्रीवास्तव - हिन्दी साहित्य के अध्ययनशील एवं मननशील रचनाकार।

1985 - भवानी प्रसाद मिश्र - हिन्दी के प्रसिद्ध कवि तथा गांधीवादी विचारक।

2001 - भाकपा के वरिष्ठ नेता इन्द्रजीत गुप्त का निधन।

2014 - पार्वती कृष्णन - एक भारतीय राजनीतिज्ञा थीं।

2014 - रघु कुमार (या रेघु कुमार) एक भारतीय संगीत रचयिता थे।

2022 - पश्चिम बंगाल कैबिनेट मंत्री साधन पांडे (71) का लंबी बीमारी से निधन हुआ।

2023 - गुजरात के पूर्व राज्यपाल ओपी कोहली (87) का निधन हुआ।

2024 - फेमस टीवी एक्टर ऋतुराज सिंह (उम्र 59) का निधन हुआ।

2025 - फिनलैंड के ओपेरा संगीतकार, ऑर्गन वादक, प्रसारक व शिक्षक इल्का कुसिस्टो (91) का निधन हुआ।

 

*20 फ़रवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव👉*

🌟 भगवान श्री अरहनाथ गर्भ कल्याणक (जैन , फाल्गुन शुक्ल तृतीया)।

🌟 पं. लेखराम वीर तृतीया / जयन्ती।

🌟 राव श्री बीरेन्द्र सिंह जयन्ती।

🌟 श्री नेदुरुमल्ली जनार्दन रेड्डी जयन्ती।

🌟 श्री शरतचंद्र बोस स्मृति दिवस।

🌟 अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस।

🌟 मिजोरम स्थापना दिवस।

🌟 विश्व सामाजिक न्याय दिवस।

*कृपया ध्यान दें जी👉*

    *यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना, तिथि या अन्य त्रुटि के लिए मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है।*

🌻आपका दिन *_मंगलमय_* हो जी ।🌻

⚜⚜ 🌴 💎 🌴⚜⚜[

*तन औ' मन को निर्मल कर दो,आओ आज समर्पण कर दो..*

*साँसों को अब मिल जाने दो,मन - भावों को खिल जाने दो..*

*सागर से गहरे भावों में,अपने मन का तर्पण कर दो..*

*अधर नहीं जो कुछ कह पाए,व्यथा बहुत ही सहते आए..*

*तोड़ो आज लाज के बंधन,बस तुम खुद का अर्पण कर दो..*

*प्रणय गीत निशदिन तुम गाओ,जीवन का कुछ तो सुख पाओ..*

*मन के नयन से मिला कर,अपने मन को अपने दर्पण कर दो..!!*

  *श्री..राधेराधे..*

 *श्री कृष्णा..कृष्णा..!*

  *शुभ प्रभात....!*🙏🌹

TRN LIVE: *🕉️श्रीमद्भगवद्गीता*

अब भगवान् दैवी और आसुरी —दोनों प्रकारकी सम्पत्तियोंका फल बताते हैं।

*दैवी सम्पद्विमोक्षाय निबन्धायासुरी मता।*

*मा शुच: सम्पदं दैवीमभिजातोऽसि पाण्डव॥१६।५॥*

*दैवी सम्पत्ति मुक्तिके लिये (और) आसुरी सम्पत्ति बन्धनके लिये मानी गयी है। हे पाण्डव ! तुम दैवी सम्पत्तिको प्राप्त हुए हो, इसलिये तुम शोक (चिन्ता) मत करो।*

जीवके एक ओर भगवान् हैं और एक ओर संसार है। जब वह भगवान् की ओर चलता है, तब उसमें दैवी-सम्पत्ति आती है और जब वह संसारकी ओर चलता है, तब उसमें आसुरी-सम्पत्ति आती है। दैवी-सम्पत्तिमें आस्तिक भाव रहता है और आसुरी-सम्पत्तिमें नास्तिक भाव रहता है। यद्यपि मुक्तिके सभी साधन (कर्मयोग, ज्ञानयोग, ध्यानयोग आदि) दैवी-सम्पत्तिके अन्तर्गत आ जाते हैं—‘दैवी-सम्पद्विमोक्षाय‘, तथापि दैवी-सम्पत्तिमें मुख्यता भक्तिकी ही है। इसीलिये भगवान् ने भक्तिके प्रकरणमें कहा है—

‘हे पृथानन्दन ! दैवी प्रकृतिके आश्रित अनन्यमनवाले महात्मालोग मुझे सम्पूर्ण प्राणियोंका आदि और अविनाशी समझकर मेरा भजन करते हैं।‘ (गीता ९। १३)

आगे भी भगवान् ने कहा है—‘मामप्राप्यैव कौन्तेय—‘ (१६।२०)। भक्तिके अन्तर्गत मुक्तिके सभी साधन आ जाते हैं। जिनको अपने प्राणोंसे प्यार होता है, वे प्राणपोषणपरायण मनुष्य आसुरी-सम्पत्तिवाले होते हैं। परन्तु जो भगवान् को अपने प्राणोंसे भी बढ़कर प्यारा मानते हैं, वे दैवी-सम्पत्तिवाले होते हैं।

*स्त्रोत - साधक संजीवनी*, श्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज द्वारा रचित

*जय श्रीकृष्ण*

TRN LIVE: *🕉️विषयोंमें आसक्ति*

*याद रखो—* जबतक तुम्हारा मन, तुम्हारी बुद्धि भगवान् का चिन्तन नहीं करते, जबतक तुम्हारा चित्त निरन्तर भगवच्चिन्तनमें ही नहीं लग जाता, तबतक बाहरी साधनोंसे कुछ नहीं हो सकता।

तुम्हारा जीवन यदि भगवान् के अखण्ड स्मरण-सुधा-रसको चखे बिना ही चला जायगा तो इससे बड़ी और कोई हानि नहीं हो सकती। जीवनका प्रत्येक क्षण भगवान् के मधुर मङ्गलमय चिन्तनमें ही लगे, तभी जीवनकी सार्थकता और जीवनका परम लाभ है।

*- परम पूज्य "भाईजी” श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार*

TRN LIVE: 🙏*🕉️॥ श्रीहरि: ॥*🙏

*⚜️ जीव जब तक मुक्त नहीं हो जाता, तब तक चौरासी लाख योनियों में भटकता रहता है, नये-नये शरीर धारण करता रहता है और छोड़ता रहता है। जीवात्मा किसी भी शरीर के साथ एक नहीं होता, तभी तो एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर में जाता है। शरीर सभी क्षणभंगुर है, एक क्षण भी एक रस नहीं रहते और स्वयं (जीवात्मा) महासर्ग में भी उत्पन्न नहीं होता और महा प्रलय में भी व्यथित (नाश) नहीं होता है।*

*शरीर का और स्वयं (जीवात्मा)-का स्वभाव स्वाभाविक ही अलग- अलग है, शरीर-संसार निरन्तर परिवर्तनशील है और शरीरी में कभी कोई परिवर्तन हुआ नहीं, होगा नहीं, होना संभव ही नहीं है।*

*⚜️ 'शरीर मैं हूँ, शरीर मेरा है और शरीर मेरे लिए है'— ये तीनों बातें झूठी है। शरीर की एकता संसार के साथ है और जीवात्मा की एकता परमात्मा के साथ है, शरीर अपने किसी काम नहीं आता, शरीर का त्याग ही हमारे काम आता है।*

 *शरीर के रहते अपने को शरीर से अलग अनुभव करना ही हमारे काम आता है। शरीर के मर जाने पर, इसको जला देने पर भी जीवात्मा का शरीर के साथ संबंध वैसे-का-वैसा बना रहता है।*

*ज्ञान मार्ग में मैं शरीर से अलग हूँ, यह आवश्यक है और भक्ति मार्ग में मैं भगवान् का हूँ, यह आवश्यक है।*

 

*⚜️ भगवान् कहते हैं— 'ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः। मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति॥' (गीता-15/7)— 'इस संसार में जीव बना हुआ आत्मा मेरा ही सनातन अंश है; परन्तु वह प्रकृति में स्थित मन और पाँचों इन्द्रियों को अपनी मान लेता है।'*

*जीवात्मा में प्रकृति का अंश बिल्कुल भी नहीं है, लेकिन सुखासक्ति के कारण जीवात्मा शरीर-संसार के साथ संबंध मान लेता है।*

*किसी भी योग मार्ग का साधक क्यों न हो, शरीर-शरीरी के विवेक को धारण करना ही पड़ेगा, इस विवेक के बिना किसी भी योग मार्ग का अनुष्ठान संभव नहीं है; इस विवेक शक्ति के कारण ही मनुष्य शरीर की महत्ता है।*

*⚜️ शरीर के साथ संबंध मान कर शरीर के संबंध का त्याग करना इतना बढ़िया नहीं है, शरीर के साथ स्वयं का संबंध कभी था नहीं, हुआ नहीं, होगा नहीं, हो सकता ही नहीं— ऐसे वास्तविकता को स्वीकार करना श्रेष्ठ है।*

 *तीनों योग मार्गों के सार को पहले ही ग्रहण कर लेने पर बहुत जल्दी कल्याण हो जाता है। मैं केवल और केवल भगवान् का हूँ, भगवान् के सिवाय त्रिलोकीमें केश जितनी चीज भी अपनी नहीं है।*

🌷🌷🌷🌷🌷

[: * 🕉️श्री कृष्ण को पुकारिए तो सही......

:- बडे़ छलिया है कन्हैया; बिना प्रेम से पुकारे कभी पास नहीं आते......

कृष्ण के पास होते हुए भी युधिष्ठिर , दुर्योधन और द्रौपदी तीनों ही उनका लाभ लेने से चूक गए । दुर्योधन को तो कृष्ण ने दो बार कुछ लेने का अवसर दिया , परंतु धन शक्ति और अभिमान के चलते वे लाभ लेने से चूक गए । युधिष्ठिर सबसे बड़े होते हुए भी कृष्ण का लाभ न ले पाए । उल्टे कृष्ण से कह दिया कि वे द्यूत क्रीड़ा में भाग न लें और कक्ष से बाहर ही रहें । 

जब दुशासन रजस्वला द्रौपदी को केश पकड़कर द्यूत क्रीड़ा भवन में घसीटकर ले जा रहा था , जब भरी सभा में उन्हें निर्वस्त्र कराने का आदेश दे रहा था तब भी उन्होंने कृष्ण को याद नहीं किया । याद तब किया जब उनकी साड़ी खींची जाने लगी । बस कृष्ण आ गए , लाज बच गई ।

कृष्ण आते हैं , उन्हें याद करना पड़ता है । युधिष्ठिर जब एक के बाद एक सब कुछ हारे जा रहे थे , तब भी उन्होंने कृष्ण को याद नहीं किया । करते तो कृष्ण पासे पलट देते । दुर्योधन चतुर था । वह पासे फेंकने में कमजोर था । उसने पहले ही घोषणा कर दी कि उसकी ओर से चतुर मामा शकुनि पासे फेंकेंगे । युधिष्ठिर को तब भी कृष्ण की याद नहीं आई । अन्यथा वे भी कृष्ण से पासे खिलवाते तो द्यूत क्रीड़ा का इतिहास दूसरा होता । युधिष्ठिर चूक गए और कृष्ण के साथ होते हुए भी सब हार गए । 

कृष्ण की याद जिसे समय पर आई , वह अर्जुन था । युद्ध के बीच चारों तरफ अपनों को देखकर जब वह हताश हुआ , तब कृष्ण उसके साथ ही थे । उसने गांडीव रख दिया और खुद का समर्पण कृष्ण के सम्मुख कर दिया । फिर क्या था । माधव ने लंबी पराजय का इतिहास ही बदल दिया । सच है , मुरली बजैया को समय पर याद करना पड़ता है । उन्हें याद करने वालों में विदुर भी थे और भीष्म भी । धृतराष्ट्र पुत्र मोह में चूक गए और तमाम कौरव भी । परिणाम देखिए , कुंती के पांचों जीवित रहे , गांधारी का कुल नष्ट हो गया । कृष्ण विमुख होकर न कृपाचार्य रहे और न द्रोण ।

कृष्ण साथ न हो तो भी कोई बात नहीं । उन्हें आदत है , वे पुकार पर चले आते हैं । महाभारत काल में कृष्ण साक्षात थे , परंतु उस समय के लोग चूक गए । सुदामा साथी थे , वे भी चूक गए । पर सुदामा की पत्नी न चूकी , किस्मत बदल गई । रामावतार में रावण जानते थे कि राम के आने का उद्देश्य क्या है । कृष्णावतार में कंस अभागे थे , सगा भांजा कौन है , जान ही न पाए । 

* कृष्ण को जानना और पहचानना जरूरी है । जिन खोजा तिन पाईयां गहरे पानी पैठ । कोई कृष्ण नहीं हो सकता , केवल कृष्ण को जान सकता है । कृष्ण आज भी हमारे आसपास हैं । उन पर भरोसा हो तो उन्हें पाना संभव है । कितनी अबलाएं आधुनिक असुरों का ग्रास बन रही हैं । क्या करें , कान्हा को कोई पुकारती ही नहीं । अपने पास पाएंगी , जरा पुकारिए तो सही ? याद रहे , बड़े छलिया हैं कन्हैया , बिना पुकारे नहीं आते । !! * जय श्री कृष्णा !! 🙏*

TRN LIVE: 🕉️बर्हापीडं नटवर वपुः कर्णयोः कर्णिकारं,

          बिभ्रद् वासः कनककपिशं वैजयन्तीं च मालाम्।

रन्ध्रान् वेणोरधरसुधया पूरयन् गोपवृन्दै,

          र्वृन्दारण्यं स्वपदरमणं प्राविशद् गीतकीर्तिः।।

भगवान श्री कृष्ण ने अपने सिर पर मयूर का पिछ धारण कर रखा है श्रेष्ठ नट के समान उनका सुंदर वेश है कान में कनेर का पुष्प शरीर में पीतांबर और गले में एक वनमाला शोभायमान हो रही है अपने चरण कमलों से वृंदावन को पवित्र करते हुए भगवान श्री कृष्ण ग्वाल बालों के साथ वन में प्रवेश कर रहे हैं ग्वाल - बाल भगवान के कीर्ति का गान कर रहे हैं।

श्रीकृष्ण ग्वालबालों के साथ वृन्दावन में प्रवेश कर रहे हैं, उन्होंने मस्तक पर मोर - पंख धारण किया हुआ है, कानों पर पीले - पीले कनेर के पुष्प, शरीर पर सुन्दर मनोहारी पीताम्बर शोभायमान हो रहा है तथा गले में सुन्दर सुगन्धित पुष्पों की वैजयन्ती माला धारण किये हैं। रंगमंच पर अभिनय करने वाले नटों से भी सुन्दर और मोहक वेष धारण किये हैं श्यामसुन्दर बांसुरी को अपने अधरों पर रख कर उसमें अधरामृत फूंंक रहे हैं, ग्वाल बाल उनके पीछे - पीछे लोकपावन करने वाली कीर्ति का गायन करते हुए चल रहे हैं, और वृन्दावन आज श्यामसुन्दर के चरणों के कारण वैकुण्ठ से भी अधिक सुन्दर और पावन हो गया है।

 भगवान के स्वभाव का वर्णन

अहो बकीं यं स्तनकाल कूटं,

            जिघांसयापाययदप्य साध्वी।

लेभे गतिं धात्र्युचितां ततोन्यं,

            कं वा दयालुं शरणं व्रजेम्।।

 अहो बक दैत्य की बहन पूतना श्री कृष्ण को मारने की इच्छा से अपने स्तनों में कालकूट जहर लगा कर आई थी परंतु भगवान की करुणा कृपा तो देखो उसे भी माता की गति प्रदान कर दी ऐसे श्री कृष्ण को छोड़ कर हम किसकी शरण ग्रहण करें।

पूतना पिछले जन्म में राजा बलि की पुत्री रत्नमाला थी, एक दिन राजा बलि के यहां भगवान वामन की सुंदर और मनमोहक छवि देखकर रत्नमाला के मन में ममत्व जाग उठा, भगवान वामन को देखकर वह मन ही मन सोचने लगी कि मेरा भी ऐसा ही पुत्र हो ताकि वह उसे हृदय से लगाकर दुग्धपान कराती बहुत दुलार करती, भगवान ने उसकी मन की इच्छा को जान लिया और तथास्तु कहा,लेकिन इसके बाद भगवान ने राजा बलि का अहंकार दूर करने के लिए तीन पग में भूमि नाप दी, राजा समझ गए और अपनी गलती का उन्हे अहसास हो गया।

राजा ने वामनदेव से क्षमा मांगी, इस घटना को रत्नमाला दूर से देख रही थीं, रत्नमाला को प्रतीत हुआ कि उसके पिता का घोर अपमान हुआ है, इससे वह बुरी तरह से क्रोधित हो उठी, उसने मन ही मन भगवान को बुरा कहना आरंभ कर दिया उसने कहा कि अगर ऐसा मेरा पुत्र होता तो मैं इसे विष दे देती, भगवान ने उसके इस भाव को भी जानकर तथास्तु कह दिया, अगले जन्म में पूतना राक्षसी के रूप में जन्म लिया, पूतना कंस की सबसे विश्वासपात्र दासी थी, कंस ने अष्टमी की तिथि के दिन जन्म लेने वाले सभी बच्चों को मारने का आदेश दिया, पूतना गोकुल पहुंचकर सुंदर स्त्री का भेष धारण किया और भगवान कृष्ण को दुग्धपान कराने लगी, भगवान ने उसे पहचान लिया और उसका वध कर दिया।

 इस प्रकार से भगवान के हाथों पूतना को वध हुआ और जन्म मरण के बंधन से मुक्त कर दिया,वहीं पूतना की दुग्ध और विष पिलाने की इच्छा को भी पूर्ण किया।

TRN LIVE: 🕉️🌹

श्रीचण्डिका स्तोत्रम‌् ।।

घोरचण्डी महाचंण्डी चामुंडी चंण्डमुंण्डविखंण्डनी। 

चतुर्वक्त्रा महावीर्या महादेवविभूषिता।।१।।

रक्तदन्ता वरारोहा महिषासुरमर्दिनि।                     

तारिणी जननी दुर्गा चंण्डीका चंण्डविक्रमा।।२।।

महाकाली जगतद्धात्री चण्डी च यामलोदभवा। 

शमशानवासिनी देवी घोरचंण्डी भयानका।।३।।

शिवा घोरा ऱूद्रचंण्डी महेशा गणभूषिता। 

जान्हवी परमा कृष्णा महात्रिपुरसुंदरी।।४।।

श्रीविद्या परमाविद्या चण्डिका वैरिमर्दिनी। 

दुर्गा दुर्गशिवाघोरा चंण्डहस्ता प्रचंण्डिका।।५।।

माहेशी स्थिरादेवी भैरवी चंण्डविक्रमा।  

प्रमथैर्भूषिता कृष्णा चामुण्डामुण्ड मर्दिनी।।६।।

रणखण्डा चन्द्रघण्टा रणेरामवरप्रदा। 

मारणी भद्रकाली च शिवा घोर भयानका।।७।।

शिवप्रिया महामाया नन्दगोपगृहोदभवा।

मगंला जन्नीचण्डी महाक्रुद्धा भयंकरी।।८।।

विमला भैरवी निंद्रा जातिरूपा मनोहरा।

तृष्णा निद्रा क्षुधा माया शक्तिमार्यामनोहरा।।९।।

तस्यै देव्यै नमस्तस्यै सर्वरूपणे संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमोनमः।।१०।।

भवानी च भवानी च भवानी चोच्यते बुधै। 

भकारस्तु भकारस्तु भकारः केवल शिव।।११।।

महाचण्डी शिवा घोरा महाभीमा भयानका।

कांचनी कमला विधा महारोगविमर्दिनी।।१२।।

गुह्यचण्डी घोरचण्डी चण्डी त्रैलोक्यदुर्लभा।

देवानां दुर्लभा चण्डी रूद्रयामलसंमता।।१३।।

अप्रकाश्या महादेवी प्रिया रावणमर्दिनी।

मत्यस्यप्रिया मांसरता मत्स्यमांस बलिप्रिया।।१४।।

मदमत्ता महानित्या भूतप्रमथसंगता। 

महाभागा महारामा धान्यदा धनरत्नदा।।१५।।

वस्त्रादा मणिराज्यादि सदाविषय वर्धिनी।

मुक्तिदा सर्वदा चण्डी महाविपद नाशिनी।।१६।।

रूद्रध्येया रूद्ररूपा रूद्राणी रूद्रवल्लभा। 

रूद्रशक्ति रूद्ररूपा रूद्रमुख समविन्वता।।१७।।

शिवचण्डी महाचण्डी शिवप्रेत गणान्विता।

भैरवी परमाविधा महाविधा च षोडशी।।१८।।

सुंदरी परमपूज्या महात्रिपुरसुंदरी । 

गुह्यकाली भद्रकाली महाकाल विमर्दिनी।।१९।।

कृष्णा तृष्णास्वरूपा सा जगन्मोहनकारणी। 

अतिमन्त्रा महालज्जा सर्वमंगलदायनी।।२०।।

घोरतंत्री भीमरूपा भीमा देवी मनोहरा। 

मंगला बगला सिद्धिदायिनी सर्वदाशिवा।।२१।।

स्मृतिरूपा कीर्तिरूपा योर्गीद्रैरपि सविता।

भयानका महादेवी भयदुःख विनाशिनी।।२२।।

चण्डिका शक्तिहस्ता च कुमारी सर्वकामदा।

वाराही च वराहास्या इन्द्राणी शक्रपूजिता।।२३।।

माहेश्वरी महेशस्य महेशगणभूषिता।

चामुण्डा नारसिंही च नृसिंहशत्रु विमर्दिनी।।२४।।

सर्वशत्रुप्रशमनी सर्वारोग्यप्रदायिनी। 

इति सत्यं महादेवि सत्यं सत्यं वदाम्यहम्।।२५।।

    ।। इति श्री चण्डिका स्तोत्रं समाप्तम्।।

TRN LIVE: *✨🕉️ जब माँ यशोदा ने कान्हा के मुख में देखा अपना ही प्रतिबिंब... और समा गया पूरा ब्रह्माण्ड! 🌌*

व्रज के नंदभवन में एक दिन ऐसी लीला घटी, जिसने देवताओं को भी विस्मित कर दिया। धूल में सने बालकृष्ण पर बलदाऊ ने शिकायत की— "मैया! कान्हा ने फिर मिट्टी खाई है।"

मैया यशोदा का हृदय धक से रह गया। वे दौड़ीं और कान्हा को पकड़ लिया। नन्हे कान्हा के मुख पर भोलेपन की मुस्कान थी, पर कोनों में मिट्टी के कण गवाही दे रहे थे।

माँ ने डाँटते हुए कहा, "सच बता, तूने मिट्टी खाई है? अगर नहीं खाई, तो मुँह खोलकर दिखा!"

कान्हा ने क्षणभर माँ की ओर देखा, मानो उनकी ममता की गहराई नाप रहे हों, और फिर धीरे से अपना छोटा सा मुख खोल दिया।

👁️ वह विराट दर्शन... जो किसी ने नहीं देखा था!

उसी क्षण, यशोदा मैया की आँखें फटी की फटी रह गईं। उस नन्हे से मुख में उन्हें मिट्टी नहीं दिखी, उन्हें दिखा— अनंत ब्रह्माण्ड!

🌌 नीलवर्ण आकाश, सूर्य, चंद्र, असंख्य तारे।

⛰️ पर्वत, नदियाँ, समुद्र और दसों दिशाएँ।

⏳ भूत, भविष्य और वर्तमान का कालचक्र।

🙏 ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सारे देवगण उसी मुख में विराजमान थे।

और तभी मैया ने वह देखा, जिससे उनका रोम-रोम काँप उठा...

उस विराट ब्रह्माण्ड के भीतर, उन्होंने स्वयं को भी देखा!

उन्होंने देखा कि वही यशोदा वहाँ खड़ी हैं, और उसी क्षण अपने लल्ला कान्हा को डाँट रही हैं कि "तूने मिट्टी खाई है या नहीं?"

उन्हें बोध हुआ कि जो वे देख रही हैं, वह भी उसी ब्रह्माण्ड का हिस्सा है और वे स्वयं भी उसी अनंत सत्य के भीतर स्थित हैं। समय थम गया। भय, विस्मय और श्रद्धा से मैया की आँखों से अश्रुधारा बह निकली।

❤️ ममता की जीत, ज्ञान की हार

बलदाऊ पास खड़े थे, पर योगमाया के कारण वे यह सब नहीं देख पाए। तभी बालकृष्ण ने अपनी यह अलौकिक लीला समेट ली। उन्होंने मुख बंद किया और फिर वही नटखट बालक बनकर मुस्कराए—

"मैया, देख लिया? मैंने कहा था ना, मैंने मिट्टी नहीं खाई!"

उनका स्वर इतना सरल और बालसुलभ था कि यशोदा जी का सारा ब्रह्मज्ञान क्षणभर में पिघलकर ममता में बदल गया। भगवान की माया ने फिर आवरण डाल दिया। वे भूल गईं कि उन्होंने ब्रह्माण्ड देखा था। उन्हें तो बस अपना डरा हुआ 'लल्ला' दिखा।

उन्होंने झट से कान्हा को गले लगा लिया और चूमते हुए बोलीं— "मेरा लल्ला, तू तो डर ही गया होगा।"

🌸 सार:

उस दिन भगवान ने सिद्ध कर दिया कि वे ज्ञानियों के ज्ञान से नहीं, बल्कि एक माँ की निश्छल ममता के आँचल से बंधना पसंद करते हैं। यशोदा जी ने ब्रह्माण्ड देखा, पर चुना एक माँ बनकर रहना।

।। जय श्री कृष्ण ।। ।। जय मैया यशोदा ।।

TRN LIVE: -: 🕉️आप मिटे, तो सत्य मिले :-

बाहर की खोज अंततः भीतर की विलीनता में बदल जाती

है। बाहर खोज करना एक इच्छा है; कुछ पाने की, कुछ

जोड़ने की - जबकि भीतर की विलीनता कोई प्रयास नहीं,

एक घटना है।

जब तक खोज बाहर रहती है, तब तक एक 'खोजने वाला'

बना रहता है; शास्त्रों, गुरुओं और रहस्यों में सत्य ढूँढा जाता है,

जो वास्तव में ज्ञात का ही विस्तार है।

सूचनाओं और अनुभवों की बढ़ोतरी, दूरी तय करने की यात्रा ।

लेकिन जब यह खोज थककर भीतर मुड़ती है, तब चेतना अपने

ही केंद्र की ओर लौटने लगती है।

यहाँ खोज 'करने' से 'होने' में बदल जाती है और धीरे-धीरे

वही खोजने वाला विलीन हो जाता है। तब यह बोध होता है

कि जिसे ढूँढा जा रहा था, वह कोई वस्तु नहीं, बल्कि वही

'स्वयं' था जो खोज कर रहा था।

'मैं' के मिटते ही पाने की दौड़ समाप्त हो जाती है, खोने का

भय भी साथ ही चला जाता है। न कुछ ज्ञात बचता है, न

अज्ञात जो है, वही शेष रहता है। यही सत्य है, यही पूर्ण

विश्राम |

TRN LIVE: ।।🕉️ श्री सीताराम श्री राधेश्याम ।।

संतवाणी

पूज्य श्रीभाईजी महाराज

(साधन पथ से)

प्रसिद्धि

साधनामें एक बड़ा भारी विघ्न ‘साधककी प्रसिद्धि’ है। जब लोग जान जाते हैं कि अमुक मनुष्य साधन करता है, तब उसके प्रति स्वाभाविक ही कुछ लोगोंकी श्रद्धा हो जाती है। जिनकी श्रद्धा होती है, वे समय-समयपर मन, वाणी, शरीरसे उसका आदर करने लगते हैं। जिन्हें आदर, मान आदि प्रिय नहीं होते, ऐसे मनुष्य संसारमें सदासे ही बहुत थोड़े हैं। साधक भी मनुष्य है, उसे भी आदर, मान, प्रतिष्ठा आदि प्रिय प्रतीत होते हैं। अतएव ज्यों-ज्यों उसे इनकी प्राप्ति होती है, त्यों-ही-त्यों उसकी लालसा अधिक लोगोंसे अधिक-से-अधिक सम्मान प्राप्त करनेकी होने लगती है। इससे परिणाममें उसका ईश्वर-सम्बन्धी साधन सम्मान–प्रतिष्ठा आदि प्राप्त करनेके साधनरूपमें बदल जाता है। जिस कार्य, जैसी बोलचाल, जैसे आचरण और जिस तरहकी कार्यवाहियोंसे सम्मान मिलता हो; बस, उन्हींको करना उसके जीवनका लक्ष्य बन जाता है। इससे ज्यों-ज्यों उसका परमार्थ-साधन घटता और छूटता है, त्यों-ही-त्यों उसका तेज, निःस्पृहता, उदासीन-भाव, उसकी सरलता, ईश्वरीय श्रद्धा और परमार्थ-साधना नष्ट होती जाती है। उसके हृदयमें लोगोंको रिझाकर उन्हें प्रसन्न करनेके उद्देश्यसे चापलूसी, कामना, पक्षपात, कपट, अश्रद्धा और परमार्थविमुख कार्योंमें प्रवृत्ति आदि गिरानेवाले भावसमूह उत्पन्न हो जाते हैं, जिनसे वह और भी हतप्रभ होकर अपने प्रशंसकोंसे दब जाता है, वे प्रशंसक भी फिर पहले-जैसे सच्चे सरल श्रद्धालु नहीं रहते, उनके आदर-मान देनेमें भी कपट भर जाता है। शेषमें दोनों ही परमार्थसे सर्वथा गिरकर पाप-पंकोंमें फँस जाते हैं। शुभ कर्म और सदाचरण करनेवालोंके विरोधी तामसी प्रकृतिके मनुष्य भी संसारमें सदैव रहते ही हैं। उनका द्वेष तो पहलेसे रहता ही है, ऐसे समयमें साधक और उसकी मण्डलीको सब प्रकार हीन पुरुषार्थ देखकर उन्हें विशेष मौका मिल जाता है। वे उन्हें छल-बल-कौशलसे और भी गिरानेकी चेष्टा करते हैं, जिससे परस्पर वैर ठन जाता है। दोनों ओरकी शक्तियाँ एक-दूसरेके छिद्रान्वेषण और उनपर मिथ्या दोषारोपण कर उन्हें नीचा दिखाने और गिरानेमें ही खर्च होने लगती हैं, जिससे जीवन कष्ट और अशान्तिमय बन जाता है। साधकका सत्यमुखी हृदय इस समय तमसाच्छादित होकर क्रोध, मोह और दम्भसे भर जाता है। इन सब दोषोंपर विचारकर जहाँतक बने साधक प्रसिद्ध होनेकी चेष्टा कदापि न करे। अपने साधनको यथासम्भव खूब छिपावे, उपदेशक या आचार्यका पद कभी भूलकर भी ग्रहण न करे, जगतके लोग उसमें अपनेसे कोई विशेषता न समझें, इसीमें उसका भला है। मतलब यह कि भजन–साधनको यथासम्भव साधक न तो प्रकट करे, न दिखावे ही। वह लोगोंसे अपनेको श्रेष्ठ भी न समझे; क्योंकि इससे भी अपनेमें अभिमान और दूसरोंके प्रति घृणा उत्पन्न होनेका स्थान रहता है। जो साधक अपने साधनकी स्थितिसे अपनेको ऊँचा समझता या लोगोंमें प्रकट करता है, वह तो गिरता ही है; परन्तु वह जितना है, उतना भी प्रकट करनेमें उपयुक्त प्रकारसे गिरनेका ही भय रहता है। साधककी भलाई इसीमें है कि वह जितना है, दुनिया उसको सदा उससे कम ही जाने। बाहरसे नीचे रहकर अन्दरसे ऊँचा उठते जाना ही साधकके लिये कल्याणप्रद है।

पृष्ठ संख्या २९ – ३१

TRN LIVE: *🌺🕉️नारायण नारायण🌺*

🍁मेरा संगी दो जना , ऐक वैशनव ऐक राम

वे दाता है मुक्ति के, वे सुमिरावै नाम।

मेरे दो साथी हैं एक वैष्णव और एक राम। राम मुक्ति दाता हैं और वैष्णव नाम का सुमिरण कराने वाले हैं। विष्णु के भक्तों को वैष्णव कहते हैं।

🌱हरिजन केवल होत है, जाको हरि का संग

बिपति पड़ै बिसरै नहीं, छाड़ै चैगुन रंग।

हरिजन उसे कहते ह्रैं जो भक्ति एंव सुमिरण द्वारा सर्वदा प्रभु के संग रहते है। विपत्ति एंव दुर्दशा के समय वे ईश्वर को नहीं भूलते हैं वल्कि उनपर प्रभु प्रेम का रंग चार गुणा बढ़ जाता है।

🍃कबहुुक मन गगनहि चढ़ै, कबहु गिरै पाताल

कबहु मन अनमुनै लगै, कबहु जाबै चाल।

कभी तो मन मगन में बिहार करता है। और कभी पाताल लोक में गिर जाता है। कभी मन ईश्वर के गहन चिंतन में रहता है और कभी संसारिक बिषयों में भटकता रहता है।यह मन अत्यंत चंचल है।

🌺चंचल मन निशचल करै, फिर फिर नाम लगाय

तन मन दोउ बसि करै, ताको कछु नहि जाय।

इस चंचल मन को स्थिर करें। इसे निरंतर प्रभु के नाम में लगावें। अपने शरीर और मन को वश में करें आप का कुछ भी नाश नहीं होगा।

🌿मथुरा, काशी, द्वारिका, हरिद्वार, जगन्नाथ

साधु संगति हरि भजन बिन कछु ना आबैय हाथ।

मथुरा ,काशी ,द्वारिका, हरिद्वार, जगन्नाथ सब व्यर्थ हैं। बिना साधु की संगति और प्रभु के भजन के कुछ भी प्राप्त नहीं होने वाला है।

🌷जो कोई करै सो स्वार्थी, अरस परस गुन देत

बिन किये करै सो सूरमा, परमारथ के हेत।

जो अपने हेतु किये गये के बदले में कुछ करता है वह स्वार्थी है। जो किसी के किये गये उपकार के बिना किसी का उपकार करता है। वह व्स्तुतः परमार्थ के लिये करता है।

🥀परमारथ हरि रुप है, करो सदा मन लाये

पर उपकारी जीव जो, सबसे मिलते धाये।

परमार्थ दूसरों की सहायता करना ईश्वर का हीं स्वरुप है।इसे सदा मनोयोग पूर्वक करना चाहिये।जो दूसरों का उपकार मदद करता है-प्रभु उससे दौड़कर गले मिलते है।

🌹सूरा को तो सिर नहीं, दाता को धन नाहि

पतिव्रता को तन नहीं, जीव बसै पिव माहि।

वीर पुरुष अपने सिर का मोह नहीं करता है। दानवीर उदारता के कारण धन का मोह नहीं करता। पतिव्रता स्त्री अपने शरीर का ध्यान नहीं रखती है। इन सभी का मन सर्वदा प्रभु में बसता है।

🌻ऐक घड़ी आधो घड़ी , आधो हुं सो आध

कबीर संगति साधु की, कटै कोटि अपराध।

एक क्षण,आध क्षण, आधे का भी आधा क्षण के लिये यदि साधु संतों की संगति की जाये तो हमारे करोड़ों अपराध पाप नाश हो जाते है।

🎋चिन्ता चित्त विशारिये फिरि बुझिये नहीं आन

इंद्री पसारा मेटिये,सहज मिलिये भगवान।

मन में चिंताओं को भूल जाईये और दूसरों से भी उनकी चिंताओं को मत पूछिये। अपने बिषय इन्द्रियों को फैलने से नियंत्रण करें। आप सहज हीं प्रभु को पा लेगें।

🍀जहां बाज बासा करै, पंछी रहै ना और

जा घट प्रेम परगट भया, नाहि करम को थौर।

जहाॅं बाज पक्षी रहते है वहाॅं कोई अन्य पक्षी नहीं रह पाता है। जिस शरीर में परमात्मा का प्रेम प्रगट हो जाये वहाॅं पाप एंव दुष्कर्म के लिये कोई जगह नहीं है।

🥀तन की भूख सहज अहै तीन पाव की सेर

मन की भूख अनन्त है, निगलै मेरु सुमेरु।

शरीर का भूख अत्यंत साधारण है-यह तीन पाव या एक किलो से मिट सकता हैं। पर मन का भूख अनन्त होता है जो सुमेरु पर्वत को भी निगल सकता है।🥀

🌸 बोल हरि बोल हरि हरि बोल, केशव माधव गोविंद बोल!

नाम प्रभु का है शुभकारी पाप कटेंगे क्षण में भारी🌸

TRN LIVE: 🕉️भगवान् श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा को बहुत सारी सम्पत्ति दी और सुदामा अब और अधिक भक्ति करने लगे। वे अब हर समय परमात्मा के ध्यान में ही निमग्न रहता।

एक दिन सुदामा ने मन में सोचा, हर तरफ माया की बातें हो रही हैं पर माया मुझे क्यों नहीं दिखायी देती है। 

यह माया पता नहीं कैसी होगी ? उन्होंने भगवान् श्रीकृष्ण से कहा—‘मुझे अपनी माया दिखाइए।

भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा, तुम मुझे भूल जाओ तो तुम्हें माया दिखाई देगी। ईश्वर ज्ञान और माया अज्ञान का प्रतीक है। जो परमात्मा के ध्यान में तल्लीन रहता है, उसे माया कैसे दिखाई देगी ?

भगवान् श्रीकृष्ण ने सुदामा को अपने मायाजाल में मोहित करने की ठानी। 

श्रीकृष्ण और सुदामा गोमती नदी में स्नान करने गए। संध्योपासना का समय हो रहा था इसलिए जल्दी-जल्दी स्नान करने में सुदामा श्रीकृष्ण को भूल गए। 

भगवान् श्रीकृष्ण ने अपनी माया दिखाई। जैसे ही सुदामा ने नदी में डुबकी लगाई कि गोमती नदी में बाढ़ आ गई और सुदामा बाढ़ के प्रवाह में खिंचते हुए चले गए। 

पानी में डूबते-तैरते हुए वे एक घाट के पास पहुंचे और घाट पर चढ़ गए। उसी समय एक हाथी ने आकर उनके गले में हार पहना दिया। उस गांव के राजा की मृत्यु हो गयी थी और वहां ऐसा रिवाज था कि हाथी जिसके गले में हार पहना देता, उसे राजा बना दिया जाता था। 

सुदामा को राजा बना दिया गया और राजकुमारी से उनका विवाह हो गया। भगवान् की माया से मोहित हुए सुदामा सब कुछ भूल गए। पुरानी किसी चीज की उन्हें स्मृति नहीं रही। उनकी कई संतानें हुईं।

एक बार उनकी पत्नी रानी की मृत्यु हो गयी इससे दु:खी होकर सुदामा रोने लगे। नगर के संभ्रान्त लोगों ने कहा, आप रोइये मत, रानी जहां गईं हैं, वहां आपको भी पहुंचा देंगे। उस नगर में ऐसा रिवाज था कि स्त्री की मृत्यु होने पर पुरुष को भी उसके साथ चिता में चढ़ा दिया जाता था। 

लोग सुदामा को श्मशान ले गए। यह सब देखकर सुदामा घबरा गए और भय और घबराहट में प्रभु का स्मरण करने लगे।

दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करें न कोय। 

जो सुख में सुमिरन करै तो दु:ख काहे को होय ।। (कबीर)

भगवान् का स्मरण करने ही उनके नेत्रों पर चढ़ा माया (अज्ञान) का परदा हट गया और उनको याद आया कि मैं तो सुदामा ब्राह्मण हूँ। मुझे संध्या करनी चाहिए। 

संध्योपासना के लिए जैसे ही उन्होंने नदी में डुबकी लगायी वे गोमती नदी में उसी स्थान पर पहुंच गए। 

श्रीकृष्ण स्नान करके पीताम्बर धारण भी नहीं कर पाये थे कि सुदामा रोते-रोते उनके पास आ पहुंचे।

श्रीकृष्ण ने पूछा, मित्र रोते क्यों हो ?

सुदामा कहने लगे, ये मेरी पत्नी, मेरा राज्य, सब कहां चला गया ? यह सब क्या है ?

भगवान् श्रीकृष्ण ने सुदामा को समझाते हुए कहा, मित्र ! यह सब मेरी माया है। मेरे बिना जो कुछ भी दिखाई देता है, वह मेरी माया है। माया का आवरण चारों ओर फैला हुआ है। माया स्वयं नाचती है और मनुष्य को अपने वश में करके नचाती है। 

इसीलिए संतों ने माया को ‘नर्तकी’ कहा है। इस नर्तकी माया के जाल से बचना है तो ‘नर्तकी’ का उल्टा कर दो। जो शब्द बनेगा वह है ‘कीर्तन’ अर्थात् जो भगवान् का कीर्तन व नाम-स्मरण करता है, उसे माया रुलाती नहीं है।

राधे राधे 👏🏻

TRN LIVE: ।। 🕉️श्री सीताराम श्री राधेश्याम ।।

संतवाणी

पूज्य श्रीभाईजी महाराज

(साधन पथ से)

कुतर्क

साधनामें एक विघ्न है तर्कबुद्धिका विशेष बढ़ जाना। जहाँ बात-बातमें तर्क होता है, वहाँ साधनामें श्रद्धा स्थिर नहीं रहती। श्रद्धाका अभाव स्वाभाविक ही साधनको शिथिल कर देता है। यद्यपि इस दम्भ, कपट–पाखण्ड और बाहरी चमक–दमकके युगमें भण्ड, नरकवृधारी व्याध–गुरुओं, भक्तों और साधु कहलानेवालोंके झूठोंसे बचनेके लिये तर्कबुद्धिकी बड़ी आवश्यकता है; परंतु जब तर्क बढ़कर मनुष्यके हृदयको अत्यन्त संदेहशील बना देता है, तब उसके लिये किसी भी साधनामें मन लगाकर प्रवृत्त रहना अत्यन्त कठिन हो जाता है। इसीलिये भगवानने कहा है— ‘संशयात्मा विनश्यति’। सत्यकी खोजके लिये तर्क करना उचित है; पर हठ और अभिमानसे कुतर्कका आश्रय लेना सर्वथा अनुचित है। जो साधक शास्त्र और सद्गुरुके वचनोंमें विश्वास नहीं करता, वह सत्यका अन्वेषण कर उसकी प्राप्ति कभी नहीं कर सकता। इसलिये कुतर्कसे सदा बचना चाहिये।

पृष्ठ संख्या ३१

TRN LIVE: 🕉️सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत।

कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसङ्ग्रहम् ।।

[ श्रीमद्भगवद्गीता: यथार्थ गीता ३/२५ ]

-: भावार्थ :-

हे भारत ! कर्म में आसक्त हुए अज्ञानीजन जैसे कर्म करते हैं, वैसे

ही अनासक्त हुआ विद्वान्, पूर्णज्ञाता भी लोक- हृदय में प्रेरणा और

कल्याण-संग्रह चाहता हुआ कर्म करे।

यज्ञ की विधि जानते और करते हुए भी हम अज्ञानी हैं। ज्ञान का

अर्थ है प्रत्यक्ष जानकारी । जब तक लेशमात्र भी हम अलग हैं,

आराध्य अलग है तब तक अज्ञान विद्यमान है। जब तक अज्ञान है,

तब तक कर्म में आसक्ति रहती है।

-: व्याख्या :-

अज्ञानी लोग फल की आसक्ति से प्रेरित होकर कर्म करते हैं,

जबकि विद्वान पुरुष आसक्ति रहित होकर वही कर्म लोककल्याण

के लिए करता है। बाहरी रूप से दोनों के कर्म समान दिखते हैं, पर

भीतर की स्थिति भिन्न होती है।

जब तक साधक और आराध्य में भेद बना रहता है, तब तक ज्ञान

प्रत्यक्ष नहीं होता और अज्ञान के कारण कर्म में आसक्ति बनी रहती

है। पूर्ण ज्ञान में यह भेद मिट जाता है।

TRN LIVE: *🕉️करहु मोहे राधा ज्यू को दास।*

*अधम जानि मम हाथ न छाड़ो धरहु कमल पद पास।।*

*कान्ह कदम किंकर मैं माता कदम रूख धरि छांव।*

*देहु जुगल पद पंकज आश्रय गोकुलपति को गांव।।*

*वृन्दा दल की सुरभि पावनी कुंज करील कटीलो।*

*नैनन बासै सुघड़ सांवरो सुषमा छैल छबीलो।।*

*नील कमल सी कोमल पद छवि राधिका अंक सजाये।*

*कंचन कर द्वय कमल फलक सों चरन कमल पलुटाये।*

*नयन नील नीरज नन्दनन्दन निरखि सुभग छवि गोरी।*

*उमगि हरसि रोमांकुर स्फुर चित मति भयी विभोरी।।*

*लला लली लोचन लचि लाभैं प्रीति सुधारस झारी।*

*अटकि रही दृग श्याम दामिनी दृग बृजधाम कुंवारी।।*

*श्याम किसोरी चन्द्र चन्द्रिका मम उर करैं प्रकास।*

*करहु मोहे राधा ज्यू को दास।।*

*जय जय श्री राधा रानी, श्री हरि ॐ*

TRN LIVE: ‘🕉️ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने 

प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः’ 

--- :: x :: ---

{जीवन्मुक्ति के रहस्य}

{स्वामी रामसुखदासजी महाराज}

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* सुषुप्तिमें अहंकार नहीं रहता, पर हम रहते हैं | सुषुप्तिमें अहंकारके बिना जैसी स्थिति है, वैसी स्थिति जाग्रत् में हो जाय तो स्वरूपका अनुभव हो जायगा!

* एकदेशीयपना अहंकारसे दीखता है | सत्ता एकदेशीय नहीं है | एकदेशीयपनेको छोड़ दे | केवल सत्ता है | उस सत्तामें अहम् नहीं है |

* ‘हूँ’ नहीं है, ‘है’ है | उस ‘हूँ’ को ‘है’ में देखकर चुप हो जायँ | ‘है’ ही अपना स्वरूप है | ‘है’ में अहंकार नहीं है | अहंकार होनेसे क्रिया होती है | क्रिया होनेसे शक्ति क्षीण होती है |

* सम्पूर्ण जीवोंकी सत्ता जिस सत्तासे है, उस सत्तामें मैं-मेरा-तेरा नहीं है | वही सत्ता हमारा स्वरूप है!

        

नारायण! नारायण! नारायण! नारायण!

::xxx :: xxx :: xxx : :  

{गीता प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक ‘जीवन्मुक्ति के रहस्य’ से क्रमांक -८}

TRN LIVE: -: 🕉️गीता उपदेश :-

नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन ।

न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयः ।।

[ अध्याय ३, श्लोक १८]

1. जिसने आत्मा को पा लिया, उसके लिये कर्म करने से

कोई अतिरिक्त लाभ नहीं रहता ।

2. ऐसे पुरुष को कर्म छोड़ने से भी कोई हानि नहीं होती ।

3. क्योंकि वह पहले ही पूर्ण है, उसे कुछ पाना शेष नहीं

रहता ।

4. उसका किसी भी प्राणी से कोई स्वार्थ-सम्बन्ध नहीं

रहता ।

5. जहाँ अहं और अपेक्षा नहीं, वहाँ कर्म - बन्धन भी नहीं ।

6. विकार जिन पर अंकित होते थे, वह चित्त ही समाप्त हो

चुका होता है।

7. इसलिए आत्मस्थित पुरुष कर्म और अकर्म, दोनों से परे हो

जाता है।

TRN LIVE: ॥🕉️ ॐ श्रीपरमात्मने नम:॥

गीता

स्वयमेवात्मनाऽत्मानं वेत्थ त्वं पुरुषोत्तम।

भूतभावन भूतेश देवदेव जगत्पते।।१५।। वक्तुमर्हस्यशेषेण दिव्या ह्यात्मविभूतयः।

याभिर्विभूतिभिर्लोकानिमांस्त्वं व्याप्य तिष्ठसि।।१६।।

हे भूतभावन ! हे भूतेश ! हे देवदेव ! हे जगत्पते ! हे पुरुषोत्तम ! आप स्वयं ही अपनेआप से अपने आपको जानते हैं। जिन विभूतियों से आप इन सम्पूर्ण लोकों को व्याप्त करके स्थित हैं, उन सभी अपनी दिव्य विभूतियों का सम्पूर्णता से वर्णन करने में आप ही समर्थ हैं।

व्याख्या—

आप स्वयं ही स्वयंके ज्ञाता हैं-ऐसा कहनेका तात्पर्य है कि जाननेवाले भी आप हैं, जाननेमें आनेवाले भी आप ही हैं अर्थात्‌ सब कुछ आप ही हैं । जब आपके सिवाय और कोई है ही नहीं तो फिर कौन किसको जाने ? और क्या जाने ?

अर्जुन भगवान्‌ से कहते हैं कि आप स्वयं ही अपने-आपको जानते हैं, इसलिये अपनी सम्पूर्ण विभूतियोंका वर्णन आप ही कर सकते हैं, दूसरा कोई नहीं । अतः आप अपनी विलक्षण विभूतियोंको विस्तारपूर्वक सम्पूर्णतासे कहिये, जिससे मेरी आपमें अविचल भक्ति हो जाय ।

ॐ तत्सत् !

गीताप्रेस,गोरखपुर द्वारा प्रकाशित पुस्तक “गीता प्रबोधनी” (कोड १५६२) से

TRN LIVE: मोदी को गाली देना, 

मोदी सरकार के खिलाफ फर्जी नैरेटिव बनाना, 

आधारहीन तथ्यहीन आलोचना करना,

समर्थकों को मोदी/भाजपा के खिलाफ भड़काना,

आजकल निष्पक्षता का नया पैरामीटर माना जाने लगा है.

यदि आप ऐसा नहीं करते तो कुछ चु _ यो की नजरों में आप "आईटी सेल" हैं!

तो भाई लोग... मैं निष्पक्ष नहीं हूं... कोई भी निष्पक्ष नहीं होता... सब किसी न किसी पक्ष में होते हैं... निष्पक्षता केवल ढोंग है... मैं राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व के पक्ष में हूं... मैं अपने राष्ट्र और अपने समाज के वास्तविक शुभचिंतकों को पहचानता हूं... उन्होंने मेरे राष्ट्र मेरे धर्म के लिए जो किया है उसके लिए मैं मोदी/योगी/भाजपा का सदैव कृतज्ञ रहूंगा... 🫰

TRN LIVE: "जब तक मैं जीवित हूं, मैं किसी भी कीमत पर भारतीय संविधान द्वारा अनिवार्य अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित आरक्षण को मुसलमानों को वितरित नहीं होने दूंगा।"~ पीएम मोदी"

ChatGPT & Gemini जैसे AI के युग मे भी अगर आप विपक्ष के फर्जी narrative में फंस रहे हैं और मोदी सरकार को गाली देकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं तो विश्वास कीजिए आत्मघाती मूर्ख हैं आप...

मोदी/बीजेपी सरकार ने मुसलमानों को OBC लिस्ट में नहीं जोड़ा है. ये कुकर्म मुस्लिमलीगी माओवादी कॉंग्रेस बहुत पहले ही कर चुकी... 

मोदी/भाजपा को गाली देने वाला धूर्त है, देश और हिन्दू समाज का असली दुश्मन है... इतने वर्षों में अगर आप अपने शुभचिंतक और दुश्मन को नहीं पहचान पाए तो यकीन कीजिए आपका विनाश काल चल रहा है, और इसे कोई नहीं रोक सकता... क्योंकि... 

"जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है"

TRN LIVE: - नरेंद्र मोदी गद्दार है

- नरेंद्र मोदी तेली है

- ये तेली चाय बेचने लायक है

- इस तेली की औकात चाय बेचने की है, PM बनने की नहीं

UGC विरोध के नाम पर देश के प्रधानमंत्री को इस तरह जातिसूचक गालियां देकर अपमानित किया जा रहा है

UGC विरोध का झंडा उठाए कुछ बड़े हैंडल्स लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के लिए अपमान से भी अपमानजनक और जातिसूचक गालियों का प्रयोग कर रहे हैं

जब आप देश के प्रधानमंत्री को तेली कहकर खुलेआम अपमानित करने वाले शब्द लिख सकते हो, इसके बाद भी आपको लगता है कि UGC या SC/ST एक्ट नहीं होना चाहिए ?

जिस प्रधानमंत्री ने 

- आपके पूर्वजों के 5 सदी पुराने श्रीराम मंदिर के सपने को साकार किया

- अपना पूरा जीवन राष्ट्रधर्म को समर्पित कर दिया

- अपने परिवार की जगह भारतवर्ष के लोगों को अपना परिवार बना लिया

- गरीबों को शौचालय दिए, घर दिए

- बैंक खाते और ATM दिए

- रेहड़ी वालों को UPI दिया

- आयुष्मान और मुद्रा लोन दिया

- SHG से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया, 3 करोड़ लखपति दीदी बनाईं

- देशभर में दर्जनों IIT, IIM, AIIMS खोले, सरकारी मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज में सीटें दोगुनी की

- गांव से लेकर शहरों तक सड़कों का जाल बिछवाया, 18-24 घंटे बिजली सुनिश्चित की

- नए एयरपोर्ट बनवाये, दर्जनों शहरों में मेट्रो चलाई

- नॉर्थ-ईस्ट जैसे पिछड़े राज्यों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा, पूर्वोत्तर के कई राज्यों में पहली बार ट्रेन पहुंची

- हिंद की सेना को आधुनिक व आत्मनिर्भर बनाया

इस सबके बीच कभी छद्म सेक्यूलर बनने का ढोंग नहीं किया बल्कि गर्व से ख़ुद को सनातनी संस्कृति को आत्मसात करते हुए हिंदुत्व को सर्वोपरि रखा

 *कभी छेद वाली टोपी पहनने का ढोंग नहीं किया बल्कि गर्व से माथे पर त्रिपुंड लगाकर हर हर महादेव, जय भवानी और जय श्रीराम का उद्घोष किया* 🚩🙏

ऐसे प्रधानमंत्री को UGC के स्टे हो चुके नियम के नाम पर गालियां दे रहे हो, कब्रें खोदने की बात कर रहे हो तो ये मान लीजिए कि आप स्वतंत्र नहीं बल्कि गुलाम देश में रहने के अधिकारी हैं

आपको सरकार के किसी नियम या योजना से समस्या है तो विरोध करिए, ये आपका अधिकार है लेकिन विरोध में मर्यादा मत त्यागिए, जातिगत वैमनस्यता की टिप्पणियां मत करिए

 *मोदी जैसा प्रधानमंत्री बहुत मुश्किलों से मिला है जो किसी भी हाल में भारत को विकसित बनाने में जुटा है, एक ऐसा विकसित भारत जिसकी काया तो नूतन होगी लेकिन आत्मा पुरातन होगी* 🙏

 *ऐसे प्रधानमंत्री का साथ नहीं दे सकते तो मत दो लेकिन गालियां मत दीजिए प्लीज* 🙏

 *मेरा पीएम मेरा अभिमान* ।।।💪

TRN LIVE: आप 2027 मे योगीजी को और 2029 मे मोदीजी को वोट नही देंगे। 

मत दीजिये। 

मैं और मेरे जैसे करोड़ों अंधभक्त तो देंगे। 

कारण

मेरी उम्र 55 वर्ष की है। 

विभिन्न सरकारों का राज देखा। 

पर देश का विकास, हिंदुओं की सुरक्षा और उन्नति जितना इस सरकार मे देखा, उसका लेशमातृ भी पिछली सरकारों मे नही देखा। 

कमियां है, बहुत सी expectation है जो पूरी नही हुई, समय लगेगा उन्हे पूरा होने मे। 

पर पूर्ण विश्वास है की पूरी होंगी। 

जब हम छोटे थे तो पिताजी बहुत सी इच्छाए पूरी नही कर पाते थे। कई बार बेमतलब एकाध कंटाप भी पड़ जाता था, पर कभी घर वालों को पूरे मोहल्ले मे घूम घूम कर गाली नही देते थे। 

कुछ मित्र ऐसा ही कर रहे है। 

कभी सोचियेगा की कांग्रेस, सपा, aimim, तृणमूल , आप इत्यादि की सरकार आ गयी तो क्या होगा, आप सोशल मीडिया पर आलोचना भी नही कर पाएंगे। 

खैर आपकी इच्छा, जो मन हो करे।

TRN LIVE: *अगर मसल एक दवा होती, तो डॉक्टर सबसे पहले यही लिखते*

❤️

मांसपेशियों की वैज्ञानिक ताकत: मेटाबॉलिज़्म से दिमाग तक

मांसपेशियाँ सिर्फ शरीर को सुडौल दिखाने के लिए नहीं होतीं। वे हमारे जीवित रहने, सही मेटाबॉलिज़्म बनाए रखने और लंबी, स्वस्थ उम्र के लिए बेहद ज़रूरी हैं। मांसपेशियाँ हमारे शरीर के सबसे बड़े एंडोक्राइन और मेटाबॉलिक अंगों में से एक हैं। आसान शब्दों में कहें तो ये सिर्फ ताकत नहीं देतीं, बल्कि पूरे शरीर के कामकाज को नियंत्रित करने में भाग लेती हैं।

भोजन करने के बाद शरीर में जो ग्लूकोज़ बढ़ता है, उसका लगभग 70–80% हिस्सा मांसपेशियाँ ही अपने अंदर लेती हैं। अगर मांसपेशियाँ कम हों या सक्रिय न हों, तो खून में शुगर ज्यादा समय तक बनी रहती है, इंसुलिन की ज़रूरत बढ़ती है और धीरे-धीरे इंसुलिन रेज़िस्टेंस विकसित होने लगता है। यही कारण है कि कम मांसपेशी द्रव्यमान टाइप-2 डायबिटीज़ का जोखिम बढ़ाता है, चाहे व्यक्ति का वजन कुछ भी हो।

जब मांसपेशियाँ काम करती हैं या सिकुड़ती हैं, तो वे कोशिकाओं के अंदर GLUT-4 नामक सिस्टम को सक्रिय करती हैं, जिससे ग्लूकोज़ बिना अतिरिक्त इंसुलिन के अंदर प्रवेश कर पाता है। इसलिए कई लोगों में वजन कम होने से पहले ही फास्टिंग शुगर और HbA1c में सुधार दिखने लगता है।

सक्रिय मांसपेशियाँ मायोकाइन्स नाम के सिग्नलिंग प्रोटीन छोड़ती हैं, जो हार्मोन की तरह काम करते हैं। ये लिवर, फैट टिश्यू, अग्न्याशय, रक्त वाहिकाओं और यहाँ तक कि दिमाग से भी संवाद करते हैं। यह स्थापित मानव शरीर विज्ञान है कि मांसपेशियाँ पूरे शरीर को संदेश भेजती हैं।

सूजन (इन्फ्लेमेशन) के मामले में भी मांसपेशियों की भूमिका खास है। उदाहरण के लिए IL-6 यदि फैट टिश्यू से निकलता है तो वह सूजन बढ़ा सकता है, लेकिन वही IL-6 जब सक्रिय मांसपेशियों से निकलता है तो वह सूजन कम करने का काम करता है। नियमित शारीरिक गतिविधि TNF-α और अन्य पुरानी सूजन वाली प्रक्रियाओं को दबाती है। यही वजह है कि व्यायाम से hs-CRP, दिल की बीमारियों का खतरा और रक्त वाहिकाओं की सूजन कम होती है।

मांसपेशियाँ वसा ऊतक (फैट) को भी निर्देश देती हैं कि उसे कैसे काम करना है। सक्रिय मांसपेशियाँ फैट बर्निंग बढ़ाती हैं, लिवर, मांसपेशियों और अग्न्याशय में जमा गलत जगह की चर्बी को कम करती हैं और शरीर में लिपिड के उपयोग को बेहतर बनाती हैं। इसलिए जब मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं, तब फैट लॉस ज्यादा प्रभावी होता है।

30 साल की उम्र के बाद यदि व्यक्ति सक्रिय न रहे, तो हर दशक में लगभग 3–8% मांसपेशियाँ कम हो सकती हैं। इसके साथ-साथ इंसुलिन रेज़िस्टेंस, वजन बढ़ना, कमजोरी, नाजुकता और मृत्यु का जोखिम भी बढ़ता है। इसलिए मांसपेशियों को बचाकर रखना सिर्फ ताकत बनाए रखना नहीं, बल्कि जैविक उम्र बढ़ने की रफ्तार को धीमा करना है।

मांसपेशियाँ दिमाग से भी जुड़ी हैं। उनसे निकलने वाले मायोकाइन्स ब्लड-ब्रेन बैरियर को पार कर मूड, सोचने-समझने की क्षमता, तनाव और नींद पर असर डालते हैं। यही कारण है कि व्यायाम डिप्रेशन और दिमागी स्वास्थ्य में सुधार करता है, भले ही वजन में ज्यादा बदलाव न हो।

अक्सर मोटापा सिर्फ चर्बी की समस्या नहीं, बल्कि मांसपेशियों की गुणवत्ता और सक्रियता की भी समस्या होता है। एक ही वजन के दो लोगों की मेटाबॉलिक सेहत बहुत अलग हो सकती है, और इसका मुख्य अंतर उनकी मांसपेशियों में होता है। फैट ऊर्जा जमा करता है, जबकि मांसपेशियाँ मेटाबॉलिज़्म को नियंत्रित करती हैं।

इसीलिए मांसपेशियों को बेहतर बनाना एक तरह की चिकित्सा है। इससे डायबिटीज़ का खतरा घटता है, इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधरती है, सूजन कम होती है, दिल सुरक्षित रहता है, उम्र बढ़ने पर आत्मनिर्भरता बनी रहती है और दवाओं पर निर्भरता घट सकती है। अगर मांसपेशियाँ कोई दवा होतीं, तो वे पहली पंक्ति का इलाज मानी जातीं।

अच्छी बात यह है कि इस सिस्टम को चालू करने के लिए बहुत कठिन वर्कआउट या महंगे सप्लीमेंट की ज़रूरत नहीं। रोज़ चलना, हफ्ते में 2–4 बार रेज़िस्टेंस ट्रेनिंग, बॉडी-वेट एक्सरसाइज़ और धीमी, नियंत्रित गतिविधियाँ ही काफी हैं। असल दवा है – मांसपेशियों का नियमित रूप से सक्रिय होना।

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# अब एक बेहद महत्वपूर्ण जोड़ – प्रोटीन की भूमिका

मांसपेशियाँ सिर्फ व्यायाम से नहीं बनतीं।

उन्हें **निर्माण सामग्री (building material)** चाहिए — और वह है **प्रोटीन**।

जब आप रेज़िस्टेंस ट्रेनिंग करते हैं,

तो मांसपेशियों में सूक्ष्म टूट-फूट (micro damage) होती है।

प्रोटीन उस टूटे हुए ऊतक को repair करके

उसे पहले से मजबूत बनाता है।

### वैज्ञानिक रूप से:

* पर्याप्त प्रोटीन → Muscle Protein Synthesis सक्रिय

* कम प्रोटीन → मांसपेशी टूटती है, बनती नहीं

* उम्र बढ़ने पर → शरीर को और अधिक गुणवत्ता वाला प्रोटीन चाहिए

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## कितनी मात्रा ज़रूरी?

सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के लिए:

👉 1.0 – 1.2 ग्राम प्रति किलो वजन

(Active व्यक्ति में 1.2 – 1.5 ग्राम)

उदाहरण:

70 किलो व्यक्ति → 70–90 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन

अक्सर भारतीय भोजन में यह मात्रा पूरी नहीं होती।

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# यहीं Structured Nutrition की आवश्यकता आती है

आज:

* भोजन की गुणवत्ता कम हो रही है

* प्रोटीन intake कम है

* समय पर भोजन नहीं होता

ऐसे में balanced nutrition system,

जो दवा नहीं बल्कि भोजन का structured रूप हो,

मांसपेशियों के निर्माण में सहायक हो सकता है।

उदाहरण के तौर पर:

✔ High-quality protein blend

✔ Balanced meal replacement

✔ Micronutrient support

जब सही exercise + पर्याप्त प्रोटीन + नियमितता जुड़ते हैं,

तभी muscle quality बेहतर होती है।

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# मसल बनाने का 3-स्तंभ नियम

1️⃣ Resistance training (2–4 बार सप्ताह में)

2️⃣ पर्याप्त protein intake

3️⃣ पर्याप्त recovery और नींद

इन तीनों के बिना मांसपेशी विकास अधूरा रहेगा।

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# अंतिम संदेश

अगर आप:

✔ Fat loss चाहते हैं

✔ Diabetes risk कम करना चाहते हैं

✔ Healthy ageing चाहते हैं

✔ Brain health सुधारना चाहते हैं

तो शुरुआत scale से नहीं,

**मांसपेशियों से करें।**

और मांसपेशियाँ सिर्फ जिम से नहीं,

**सही पोषण + सही प्रोटीन + नियमित सक्रियता** से बनती हैं।

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यदि आप अपने शरीर के अनुसार

structured protein plan जानना चाहते हैं,

तो व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए संपर्क कर सकते हैं:

**Dr Darshan Bangia**

🥇 Naturopathic Physician | Nutrition & Wellness Coach

📱 7503033565

👉 लक्ष्य है — शरीर को सक्षम बनाना,

दवाओं पर निर्भर बनाना नहीं।

🪷 _ 🪷 _ 🪷 _ 🕉️ _ 🪷 _ 🪷 _ 🪷

   *🪷🪷।। शुभ वंदन ।।🪷🪷*

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।

सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।

मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

🌸♾️🌸♾️🌸♾️🌸♾️🌸♾️🌸

TRN LIVE: *उकड़ू बैठने के फायदे*

❤️

उकडू बैठना तो अब हम भूल ही गए हैं लेकिन इसके फायदे बहुत हैं अगर दो मिनट बैठ सको तो। अंग्रेजी में इसको डीप स्क्वाट यानी पूरी तरह बैठना कहते हैं।– रोज़ 2 मिनट का आसान अभ्यास अगर आप करेंगे तो इसके बड़े फायदे आपको होंगे। 

डीप स्क्वाट यानी पैरों को कंधे की चौड़ाई पर रखकर पूरी तरह नीचे बैठना, जैसे पुराने समय में लोग आराम करने या काम करने के लिए बैठते थे। यह हमारे शरीर की बहुत प्राकृतिक मुद्रा है। गांवों में आज भी लोग इस तरह बैठकर भोजन भी कर लेते हैं लेकिन लेकिन शहरों में आजकल लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने, टखनों की जकड़न और कूल्हों की कमजोरी की वजह से बहुत से लोग इस पोज़िशन को खो चुके हैं।

अगर आप रोज़ सिर्फ 2 मिनट डीप स्क्वाट में बैठने का अभ्यास करें, तो शरीर को कई तरह से फायदा मिल सकता है।

सबसे पहले, इससे टखनों की मूवमेंट बेहतर होती है। टखना जितना अच्छा मुड़ेगा, चलने, उठाने-बैठने और वजन उठाने के समय घुटनों और कमर पर उतना कम दबाव पड़ेगा।

यह कूल्हों को खोलता है। कूल्हे लचीले होंगे तो कमर को बेवजह ज्यादा मुड़ना नहीं पड़ेगा, जिससे दर्द की संभावना कम हो सकती है। सही तरीके और सांस के नियंत्रण के साथ करने पर यह निचली कमर को राहत देता है और रीढ़ की हड्डी की पोज़िशन सुधारने में मदद करता है।

इससे पैरों के तलवों की छोटी मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। इससे पैर मजबूत होते हैं और आर्च (पैर का घुमाव) बेहतर बनता है। उकडू बेठने से आप पेल्विस यानी कूल्हे के नीचे वाले हिस्से को कंट्रोल करना सीखते हैं। शरीर ढीला छोड़ने के बजाय आप उसे संभालना सीखते हैं।

उकडू बैठना सिर्फ खिंचाव नहीं है। इसमें शरीर नीचे की स्थिति में खुद को संभालता भी है, इसलिए एक साथ लचीलापन और मजबूती दोनों बढ़ती है। इस पोज़िशन में सांस लेना डायाफ्राम को बेहतर काम करना सिखाता है। इससे शरीर में प्रेशर कंट्रोल और स्टेबिलिटी सुधरती है।

जब आप शरीर को आखिरी सीमा तक सुरक्षित तरीके से ले जाकर वहां समय बिताते हैं, तो शरीर मजबूत और सहनशील बनता है। इसका असर आपके बाकी कामों पर भी दिखता है – जैसे स्क्वाट, डेडलिफ्ट या रोज़मर्रा में झुककर सामान उठाना।

कैसे शुरू करें?

अगर पूरा नीचे बैठना मुश्किल लगे, तो किसी दरवाज़े के फ्रेम को पकड़ लें या एड़ी के नीचे कुछ ऊंचा रख लें। धीरे-धीरे नाक से सांस लें, छाती को ऊपर रखें और रीढ़ को लंबा बनाए रखें। रोज़ थोड़ा अभ्यास करेंगे तो यह पोज़िशन आसान, आरामदायक और ताकत देने वाली बन जाएगी।

🪷 _ 🪷 _ 🪷 _ 🕉️ _ 🪷 _ 🪷 _ 🪷

  *🪷🪷।। शुभ वंदन ।।🪷🪷*

*WhatsApp:.* https://chat.whatsapLॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।

सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।

मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

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TRN LIVE: पितर थान: पूरी जानकारी, नियम और वैज्ञानिक दृष्टि

🌿 पितर थान क्या है?

पितर थान का अर्थ है - घर में उन पूर्वजों (पितरों) के लिए एक निर्धारित स्थान, जिन्होंने शरीर त्याग दिया है लेकिन उनकी आत्मा को पूर्ण मुक्ति (सद्गति) नहीं मिली है। ये उत-पितर या कारण शरीर धारी पितर कहलाते हैं।

🔬 पितरों के प्रकार और उनकी स्थिति

1. सद्गति प्राप्त पितर

· जिन्होंने पुण्य कर्म किए और योग्य उत्तराधिकारियों ने विधिवत श्राद्ध-तर्पण किया

· वे सीधे पितृलोक चले जाते हैं

· इनके लिए थान बनाने की आवश्यकता नहीं

2. उत-पितर (कारण शरीर धारी)

ये वे पितर हैं जो निम्न कारणों से पृथ्वी पर ही रुके रहते हैं:

· अकाल मृत्यु (दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या, बाल मृत्यु)

· अधूरी इच्छाएँ (मृत्यु के समय कोई तीव्र इच्छा/लालसा शेष)

· असंतुष्ट वंशज (परिवार में कोई उनका स्मरण तक नहीं करता)

· अधूरे संस्कार (विधिवत अंत्येष्टि/श्राद्ध न होना)

3. उत-पितरों की उपस्थिति का समय

· अमावस्या की रात्रि

· पितृपक्ष के 16 दिन

· विशेष तिथियाँ (मृत्यु तिथि, संक्रांति, ग्रहण)

ये पितर मुख्यतः घर के मुख्य द्वार या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में उपस्थित रहते हैं।

⚠️ थान बनाने से पहले अनिवार्य शर्तें

✅ पुष्टि आवश्यक है

किसी अनुभवी ज्योतिषी, तांत्रिक या सिद्ध व्यक्ति से निम्न बातों की पुष्टि कराएँ:

1. क्या यह सचमुच आपके कुल के पितर हैं?

2. कहीं कोई प्रेत या भटकती आत्मा तो भेष नहीं बदले?

3. क्या वे सचमुच स्थान लेना चाहते हैं?

4. क्या उनकी सद्गति के प्रयास हो चुके?

🕉️ पहले सद्गति का प्रयास

थान बनाने से पहले पितरों की सद्गति के लिए ये प्रयास करें:

· गया में पिंडदान

· विधिवत श्राद्ध-तर्पण

· गोदान, अन्नदान

· पवित्र नदियों में अस्थि विसर्जन

· तुलसी दास, गरुड़ पुराण श्रवण

⚡ जब थान बनाना आवश्यक हो

यदि पुष्टि हो जाए कि:

· पितर स्वयं स्थान माँग रहे हैं (स्वप्न या संकेत से)

· वे गति नहीं लेना चाहते (परिवार के मोहवश)

· वे परिवार की रक्षा करना चाहते हैं

· उनकी उपस्थिति से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है

🏠 पितर थान बनाने की सही विधि

📍 स्थान चयन

1. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) - सर्वोत्तम

2. तुलसी के पास - यदि घर में तुलसी का पौधा हो

3. खेत या भूमि पर - यदि ग्रामीण क्षेत्र हो

4. घर के मुख्य द्वार के पास - यदि उपरोक्त संभव न हो

5. पूजा घर में पृथक स्थान - न्यूनतम विकल्प

🔨 स्थापना प्रक्रिया

1. तिथि चयन: मासिक श्राद्ध तिथि, अमावस्या या पितृपक्ष

2. संकल्प: गंगाजल से शुद्धिकरण और संकल्प

3. स्थापना: किसी अनुभवी तांत्रिक/पंडित से करवाएँ

4. तुलसी पौधा: अनिवार्य रूप से तुलसी लगाएँ

5. जल स्रोत: पास में जल रखने की व्यवस्था

🪔 थान का स्वरूप

· स्वच्छ चबूतरा या लाल वस्त्र बिछा स्थान

· पीपल या तुलसी की जड़

· श्वेत पत्थर या चाँदी का प्रतीक चिह्न

· दीपक स्थान

· जल पात्र

· नैवेद्य रखने की थाली

🕯️ दैनिक पूजन नियम

🌅 सुबह के नियम

1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण

2. सबसे पहले थान पर जल चढ़ाएँ

3. तुलसी दल से जल अर्पित करें

4. कच्चा दूध चढ़ाएँ (उबला नहीं)

5. गाय के गोबर से लीपा स्थान श्रेष्ठ

🌇 शाम के नियम

1. दीपक जलाएँ (सरसों/तिल का तेल)

2. धूप दिखाएँ (लोबान, गुग्गुल)

3. नैवेद्य में से कुछ अर्पित करें

🍚 नैवेद्य के प्रकार

· गेहूँ की रोटी (सेंक कर)

· खीर (दूध-चावल)

· पूड़ी (तेल में तली)

· मीठा भात

· अनिवार्य: सभी भोग में तुलसी दल अनिवार्य

💧 जल अर्पण विधि

· ताँबे के पात्र में जल

· काले तिल मिलाएँ

· जौ मिलाएँ

· तुलसी दल डालें

· दक्षिण दिशा की ओर मुँह कर अर्पित

🚫 वर्जित कार्य और नियम

❌ सख्त वर्जनाएँ

1. मांस-मदिरा-मछली का सेवन इस स्थान के पास तो दूर, घर में भी न करें

2. तंत्र-मंत्र क्रिया - कोई काला जादू/अभिचार क्रिया न करवाएँ

3. अशुद्ध स्थान - थान के पास जूते-चप्पल, गंदगी न रखें

4. बहुओं का घाट न लगाएँ - उन्हें पितर पूजन में अनिवार्य न करें (स्वेच्छा से करें तो श्रेष्ठ)

5. रात्रि में नैवेद्य न रखें छोड़कर

⚠️ सावधानियाँ

· नियमित पूजन न कर सकें तो थान न बनाएँ

· एक बार स्थापित किया तो प्रतिदिन धूप-दीप अनिवार्य

· यात्रा पर जाएँ तो किसी योग्य को जिम्मेदारी दें

· मासिक अमावस्या और पितृपक्ष में विशेष पूजन

🌟 लाभ और परिणाम

✅ सकारात्मक प्रभाव

1. परिवार की रक्षा - पितर कुल की रक्षा करते हैं

2. संतान सुख - वंश वृद्धि में सहायक

3. आर्थिक समृद्धि - धन-धान्य में वृद्धि

4. रोग निवारण - असाध्य रोगों से मुक्ति

5. ग्रह शांति - कुंडली के पितृ दोष शांत

6. पुण्य प्राप्ति - पितरों का आशीर्वाद

⚡ यदि नियम टूटें तो

· अकस्मात रोग

· संतान को कष्ट

· धन हानि

· मानसिक अशांति

· स्वप्न में पितरों का क्रोधित दिखना

📋 आधुनिक जीवन में व्यावहारिक सुझाव

🏙️ शहरी जीवन में विकल्प

1. यदि नियमित पूजन संभव न हो, तो थान न बनाएँ

2. बाहरी सेवा - किसी मंदिर या गौशाला में पितरों के नाम दान

3. वृक्षारोपण - पीपल, तुलसी, बरगद लगवाएँ

4. पक्षियों को दाना - पितर तृप्त होते हैं

5. गाय को हरा चारा - नियमित डलवाएँ

📅 न्यूनतम अनिवार्य नियम

· पितृपक्ष के 16 दिन अवश्य पूजन

· मासिक अमावस्या पर श्राद्ध

· मृत्यु तिथि पर भोज/दान

🔍 पहचान: कब आवश्यक है पितर थान?

यदि ये लक्षण हों:

· पीढ़ी दर पीढ़ी कन्या संतान ही हो रही

· संतान का जीवित न रहना

· अकस्मात धन हानि

· घर में अशांति बनी रहना

· कोई रोग वंशानुगत रूप से चलना

· स्वप्न में पूर्वजों का क्रोधित या भूखे-प्यासे दिखना

· अमावस्या/पितृपक्ष में बुरे सपने

⚕️ वैज्ञानिक दृष्टि

पितर थान के पीछे मनोवैज्ञानिक और ऊर्जात्मक कारण:

· पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का भाव

· परिवार में अनुशासन और नियमितता

· सकारात्मक ऊर्जा का संचार

· मानसिक संतोष और सुरक्षा का भाव

· पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही परंपरा से जुड़ाव

📝 महत्वपूर्ण सूत्र

नियम विवरण

स्थान ईशान कोण या तुलसी पास

पूजन दैनिक सुबह-शाम धूप-दीप

नैवेद्य कच्चा दूध, रोटी, खीर

वर्जित मांस-मदिरा, तंत्र क्रिया

पुष्टि जानकार से पहले कराएँ

सद्गति पहले प्रयास करें

नियमितता न कर सकें तो न बनाएँ

आधुनिक विकल्प दान, वृक्षारोपण, गाय सेवा

🕊️ अंतिम संदेश

पितर थान केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक है। यदि आपके पितर सचमुच आपकी रक्षा करना चाहते हैं और आप उन्हें नियमित स्मरण कर सकते हैं, तो यह परिवार के लिए वरदान साबित हो सकता है।

लेकिन यदि नियम न निभा सकें, तो बेहतर है कि सद्गति के प्रयास करें और उन्हें मुक्ति दिलाएँ। सच्ची श्रद्धा तो यही है कि उनकी आत्मा को शांति मिले, न कि वे सदियों पृथ्वी पर बंधे रहें।

🌺 ॐ पितृभ्यः नमः 🙏

नोट: यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित है। कोई भी धार्मिक अनुष्ठान करने से पहले किसी योग्य गुरु या जानकार व्यक्ति से मार्गदर्शन अवश्य लें।

TRN LIVE: *यही जीवन की सच्चाई है*

*मनुष्य का सच्चा धन उसका धैर्य है, और उसकी सबसे बड़ी शक्ति उसका विश्वास।*

*जो विपत्ति में भी मुस्कुराना सीख लेता है, वही जीवन के रहस्यों को जान लेता है।*

*दीपक की तरह स्वयं जलो, पर किसी के मार्ग को अंधकारमय मत होने दो।"*

 *हरे कृष्ण*🙏🙏

TRN LIVE: *💐💐कृष्ण प्रेम💐💐*

जूनागढ़ की सुबहें बड़ी सादी होती थीं—

धूल भरी गलियाँ, नीला आसमान, और मंदिरों से उठती घंटियों की लहर…

पर उसी साधारण दुनिया में एक असाधारण लड़का जन्मा था—

नरसी।

लोगों की नजर में वो भोलापन था।

पर भीतर एक ऐसी अग्नि, जो केवल कृष्ण का नाम सुनते ही भड़क उठती थी।

नरसी का मन न खेतों में लगता, न व्यापार में।

वह घंटों बैठकर गाता—

“कृष्ण… कृष्ण…”

जैसे दुनिया नहीं, बस एक ही नाम उसका जीवन हो।

घरवाले परेशान—

“लड़का हाथ से निकल जाएगा!”

पर नरसी मुस्कुराता, मानो कह रहा हो—

“मैं तो पहले ही निकल चुका हूँ… कृष्ण के रास्ते पर।”

एक दिन दहलीज़ पर खड़ी भौजाई बोली—

“तू भगवान—भगवान करता रहता है…

इतनी भक्ति है तो उन्हें सामने बुला क्यों नहीं लेता?”

बस…

वो ताना किसी तीर की तरह हृदय में उतर गया।

और इसी एक वाक्य ने नरसी का रास्ता मोड़ दिया।

रात के सन्नाटे में, नरसी अकेले निकल पड़े—

जूनागढ़ से बाहर, एक पुराने शिवालय के पास।

पीपल की छाया में बैठकर आँखें बंद कर लीं।

फिर मंत्र…

फिर जप…

फिर ध्यान…

इतना गहरा कि हवा भी स्थिर हो गई।

और तभी—⚡ प्रकाश की लहरें… हवा में सुगंध… और सामने प्रकट हुए स्वयं भगवान शिव।

नरसी की आँखें नम हो गईं—

“प्रभू… एक ही निवेदन है…

मुझे मेरे कृष्ण के दर्शन करा दो।”

शिव मुस्कुराए।

क्षणभर में दुनिया गायब…

और नरसी ने खुद को पाया—

गोलोक में।

जहाँ तक नज़र जाए—

कानों में बाँसुरी की मधुर धुन,

चारों तरफ़ प्रकाश, और बीच में—

श्रीकृष्ण।

नरसी का रोम-रोम बोल उठा—

“ये… ये तो वही हैं…”

कान्हा की मुस्कान…

उनकी चाल…

उनकी आँखों का मृदु कमाल…

सब कुछ इतना सजीव कि समय रुक गया।

रास में खोए हुए नरसी ने मशाल उठाई—

हाथ जल गया।

पर कृष्ण ने बस उंगलियों से छू दिया

और घाव ऐसे मिटा, जैसे कभी हुआ ही न हो।

नरसी समझ गए—

भक्ति कष्ट नहीं देती… भक्ति पास बुलाती है।

घर लौटते ही समाज ने बोला—

“पिता का श्राद्ध कराओ। भंडारा दो।”

पर घर खाली… रसोई खाली… जेब खाली।

सिर्फ एक चीज़ भरी थी—

 विश्वास।

और उसी विश्वास ने चमत्कार कर दिया—

रसोई में इतनी रौनक…

मानो कोई अदृश्य रसोइया काम कर रहा हो।

बस घी की कमी रह गई।

नरसी बाज़ार निकले—

पर रास्ते में कीर्तन शुरू हो गया।

घी भूल गए… खुद को भूल गए…

बस कृष्ण का नाम गूंजता रहा।

रात होते-होते घर पर चिंता बढ़ गई।

और तभी…

खट… खट… खट…

दरवाज़ा खुला।

एक साधारण-सा आदमी घी का घड़ा रखकर चला गया।

वह नरसी नहीं थे।

वह कृष्ण थे।

पत्नी ने कहा—

“घी तो आपने भेज दिया था… भंडारा पूरा हो गया।”

नरसी की आँखें भर आईं—

उन्होंने पूरी सच्चाई बताई।

पत्नी की आँखें भीग गईं—

“आज… प्रभु हमारे घर आए?”

दोनों की आँखों में भक्ति की दीपक जल उठे।

कई लोग नरसी की भक्ति से जलते थे।

उन्होंने यात्रियों को उकसाया—

“द्वारका जाकर एक सेठ सांवल शाह से हुंडी लिखवा लाना।”

नरसी ने उसी नाम से कागज लिख दिया।

पर द्वारका में कोई सांवल शाह था ही नहीं।

लोग बोले—

“अब पैसा तो नरसी देगा!”

नरसी फिर भी शांत—

घर में भंडारा करवाया—

और अंत में बचीं सिर्फ चार रोटियाँ।

तभी आए एक वृद्ध साधु।

पत्नी ने वह बची हुई रोटियाँ भी श्रद्धा से परोस दीं।

उधर द्वारका में—

अचानक एक तेजस्वी सेठ प्रकट हुआ—

हुंडी चुकाकर, धन सहित।

लोग दंग।

नरसी मुस्कुराए—

“कान्हा फिर आ गए… इस बार सेठ बनकर।”

यह वह घटना है जिसे सुनते ही रूह कांप उठती है।

नानी बाई… नरसी की बेटी…

ससुराल वालों ने मायरे में इतनी भारी माँग लिखकर भेजी

कि सात जन्मों की संपत्ति भी काम न आए।

नरसी टूट गए—

पर भक्ति नहीं टूटी।

रात में क्रंदन… निराशा…

और तभी कान्हा की आवाज—

“नरसी… चिंता मत करो।

मैं कल आऊँगा।”

अगले दिन सूरज भी शायद ठहरकर देखने लगा—

जूनागढ़ की गलियों में धूल नहीं—

सोना चमक रहा था।

सैकड़ों ऊँट…

घोड़ों की पंक्तियाँ…

भरपूर सामान से लदी गाड़ियाँ…

और सबसे आगे—

एक भव्य सेठ।

ससुराल वालों ने पूछा—

“कौन हैं आप?”

वह बोले—

“नरसी का सेवक।”

और वह सेठ?

कौन था?

✨ कृष्ण स्वयं।

नरसी की कहानी कभी खत्म नहीं होती।

क्योंकि भक्ति खत्म नहीं होती।

जब-जब कोई “कृष्ण” नाम लेता है

कहीं-न-कहीं नरसी का सुर गूंज उठता है।

दुनिया कह सकती है—

“भक्ति से क्या मिलता है?”

पर नरसी की कथा जवाब देती है—

“प्रेम सच्चा हो तो भगवान भी दरवाज़े पर दस्तक देते हैं।”

और नरसी ने यही सिखाया—

“समर्पण करो…

बाकी सब कृष्ण सम्भाल लेंगे।”

*जय श्री कृष्ण*🙏🙏

TRN LIVE: द्रोणाचार्य ने मुझे सिखाया नहीं क्योंकि मैं क्षत्रिय पुत्र नहीं था।*

---❤️

         परशुराम जी ने मुझे सिखाया तो सही परंतु श्राप दे दिया कि जिस वक्त मुझे उस विद्या की सर्वाधिक आवश्यकता होगी, मुझे उसका विस्मरण होगा, क्योंकि उन्हें ज्ञात हो गया की मैं क्षत्रिय हूं।

केवल संयोगवश एक गाय को मेरा बाण लगा और उसके स्वामी ने मुझे श्राप दिया जबकि मेरा कोई दोष नहीं था।

द्रौपदी स्वयंवर में मेरा अपमान किया गया।

माता कुंती ने मुझे आखिर में मेरा जन्म रहस्य बताया भी तो अपने अन्य बेटों को बचाने के लिए।

जो भी मुझे प्राप्त हुआ है,दुर्योधन से ही हुआ है।

*तो, अगर मैं उसकी तरफ से लड़ूँ तो मैं गलत कहाँ हूँ ?

कृष्ण ने उत्तर दिया:

*कर्ण, मेरा जन्म कारागार में हुआ।

*जन्म से पहले ही मृत्यु मेरी प्रतीक्षा में घात लगाए थी।

*जिस रात मेरा जन्म हुआ, उसी रात मातापिता से दूर किया गया।

          *तुम्हारा बचपन खड्ग, रथ, घोड़े, धनुष्य और बाण के बीच उनकी ध्वनि सुनते बीता। मुझे ग्वाले की गौशाला मिली, गोबर मिला और खड़ा होकर चल भी पाया उसके पहले ही कई प्राणघातक हमले झेलने पड़े।*

        *कोई सेना नहीं, कोई शिक्षा नहीं। लोगों से ताने ही मिले कि उनकी समस्याओं का कारण मैं हूँ। तुम्हारे गुरु जब तुम्हारे शौर्य की तारीफ कर रहे थे, मुझे उस उम्र में कोई शिक्षा भी नहीं मिली थी। जब मैं सोलह वर्षों का हुआ तब कहीं जाकर ऋषि सांदीपन के गुरुकुल पहुंचा।

*तुम अपनी पसंद की कन्या से विवाह कर सके।

*जिस कन्या से मैंने प्रेम किया वो मुझे नहीं मिली और उनसे विवाह करने पड़े जिन्हें मेरी चाहत थी या जिनको मैंने राक्षसों से बचाया था।

*मेरे पूरे समाज को यमुना के किनारे से हटाकर एक दूर समुद्र के किनारे बसाना पड़ा, उन्हें जरासंध से बचाने के लिए। रण से पलायन के कारण मुझे भीरु भी कहा गया।

अगर दुर्योधन युद्ध जीतता है तो तुम्हें बहुत श्रेय मिलेगा।

*धर्मराज अगर जीतता है तो मुझे क्या मिलेगा?

*मुझे केवल युद्ध और युद्ध से निर्माण हुई समस्याओं के लिए दोष दिया जाएगा।

*एक बात का स्मरण रहे कर्ण -

*हर किसी को जिंदगी चुनौतियाँ देती है, जिंदगी किसी के भी साथ न्याय नहीं करती। दुर्योधन ने अन्याय का सामना किया है तो युधिष्ठिर ने भी अन्याय भुगता है।

*लेकिन सत्य धर्म क्या है यह तुम जानते हो।

*कोई बात नहीं अगर कितना ही अपमान हो, जो हमारा अधिकार है वो हमें ना मिल पाए...महत्व इस बात का है कि तुम उस समय उस संकट का सामना कैसे करते हो।

*रोना धोना बंद करो कर्ण,जिंदगी न्याय नहीं करती इसका मतलब यह नहीं होता कि तुम्हें अधर्म के पथ पर चलने की अनुमति है।

          कर्ण के प्रश्न का उत्तर देते हुए, श्रीकृष्ण ने उसे यह समझाया कि उसके प्राणों के दोष केवल उसके स्वयं के कर्मों में नहीं थे, बल्कि उसके अन्यों द्वारा किए गए कर्मों में भी थे। कर्ण के द्वारा किए गए कुछ कर्मों में अवैधता थी, जैसे उसके भ्राता भीष्म और द्रोण के पक्ष में थे जब धर्मयुद्ध हुआ था। उसके अधर्मपूर्ण कर्मों का परिणाम उसे भी झेलना पड़ता था। श्रीकृष्ण ने कर्ण को धर्म के मार्ग पर चलने की सलाह दी और उसे अपने धर्म का पालन करने के लिए प्रेरित किया।

           श्रीकृष्ण के इस उत्तर से व्याख्यान करते हुए कहा जा सकता है कि श्रीकृष्ण ने कर्ण को उसके अज्ञान के कारण उसके किए गए अधर्म के लिए दोषी ठहराया। श्रीकृष्ण का मत था कि कर्ण को धर्म का अनुसरण करना चाहिए था, लेकिन उसने अपने मित्रों और उसके अज्ञान की प्रेरणा में धर्म के विपरीत कार्य किए। इससे कर्ण ने स्वयं को धर्म के विरोध में पाया, और इस अज्ञान ने उसे उसकी सहायक शक्तियों का सही उपयोग न करने पर मजबूर किया।

श्रीकृष्ण ने कर्ण से कहा था, "कर्ण, तुम्हारा एक दोष था और वह था तुम्हारा अज्ञान। तुम्हें पता था कि कौरवों का धर्म और सत्य धर्म का अनुसरण करना था, फिर भी तुम्हारे मानवता की बजाय धर्म के बाद करने के बजाय अधर्म को चुना। तुम्हारा यह अज्ञान तुम्हें कौरवों की साथी के रूप में बनने के लिए मजबूर किया।"

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*Tarot Daddu – Dr. Darshan Bangia* 7503033565 कहते हैं: "हर कहानी सिर्फ शब्दों का मेल नहीं होती, बल्कि कई गहरी अनुभव और आत्मिक सीख से भरी होती है। 👇🏻👇🏻

1️⃣ जीवन अन्यायपूर्ण हो सकता है, पर हमारा चुनाव हमारा होता है

हर किसी के जीवन में कठिनाइयाँ, अपमान और अभाव आते हैं। लेकिन परिस्थितियाँ हमें अधर्म चुनने का अधिकार नहीं देतीं। असली परीक्षा यह है कि हम दर्द में भी सही मार्ग चुनते हैं या नहीं।

2️⃣ अज्ञान सबसे बड़ा शत्रु है

कर्ण के जीवन में सबसे बड़ी कमी शक्ति की नहीं, बल्कि स्पष्टता की थी। जब हम जानते हुए भी सत्य से दूर जाते हैं, तो वही अज्ञान हमें पतन की ओर ले जाता है।

3️⃣ कृतज्ञता और धर्म में संतुलन आवश्यक है

दुर्योधन ने कर्ण को सम्मान दिया, यह उसका उपकार था। पर उपकार के बदले अधर्म का साथ देना धर्म नहीं कहलाता। रिश्ते और कर्तव्य दोनों का निर्णय विवेक से करना चाहिए।

4️⃣ अपमान हमें परिभाषित नहीं करता

द्रौपदी स्वयंवर का अपमान, गुरु का तिरस्कार, समाज की अवहेलना—इन सबके बावजूद कर्ण महान योद्धा था। अपमान हमें गिराता नहीं, बल्कि भीतर की आग को दिशा देने का अवसर देता है।

5️⃣ धर्म कठिन है, पर अंततः वही विजय देता है

श्रीकृष्ण ने स्पष्ट कहा—जीवन न्याय नहीं करता, पर धर्म ही अंतिम सत्य है। अधर्म से क्षणिक सम्मान मिल सकता है, पर स्थायी यश केवल धर्म से ही प्राप्त होता है।

----*शुभ वंदन।*

TRN LIVE: निस्वार्थ भाव: एक बच्चे की पुकार*

❤️

एक बच्चा रोज अपने दादा जी को सायंकालीन पूजा करते देखता था। बच्चा भी उनकी इस पूजा को देखकर अंदर से स्वयं इस अनुष्ठान को पूर्ण करने की इच्छा रखता था, किन्तु दादा जी की उपस्थिति उसे अवसर नही देती थी।

एक दिन दादा जी को शाम को आने में विलंब हुआ, इस अवसर का लाभ लेते हुए बच्चे ने समय पर पूजा प्रारम्भ कर दी।

जब दादा जी आये, तो दीवार के पीछे से बच्चे की पूजा देख रहे थे।

बच्चा बहुत सारी अगरबत्ती एवं अन्य सभी सामग्री का अनुष्ठान में यथाविधि प्रयोग करता है और फिर अपनी प्रार्थना में कहता है,

भगवान जी प्रणाम।

आप मेरे दादा जी को स्वस्थ रखना और दादी के घुटनो के दर्द को ठीक कर देना 

क्योकि दादा-दादी को कुछ हो गया, तो मुझे चॉकलेट कौन देगा।

फिर आगे कहता है, भगवान जी मेरे सभी दोस्तों को अच्छा रखना, वरना मेरे साथ कौन खेलेगा।

फिर मेरे पापा और मम्मी को ठीक रखना, घर के कुत्ते को भी ठीक रखना, क्योकि उसे कुछ हो गया, तो घर को चोरों से कौन बचाएगा।

(लेकिन भगवान यदि आप बुरा न मानो तो एक बात कहू, सबका ध्यान रखना, लेकिन उससे पहले आप अपना ध्यान रखना, क्योकि आपको कुछ हो गया, तो हम सबका क्या होगा)

इस सहज प्रार्थना को सुनकर दादा की आंखों में भी आंसू आ गए, क्योकि ऐसी प्रार्थना उन्होंने न कभी की थी और न सुनी थी।

      

*बड़े अक्सर भगवान को "देने वाला" (Giver) मानते हैं और उनसे मांगते रहते हैं। लेकिन उस बच्चे ने अपनी मासूमियत में भगवान का ही ख्याल रखने की बात कह दी। यह "निस्वार्थ प्रेम" की पराकाष्ठा है।​ सच्ची प्रार्थना शब्दों की सजावट में नहीं, बल्कि मन की पवित्रता में होती है। भगवान को छप्पन भोग से ज्यादा निश्छल प्रेम प्रिय होता है*

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*Tarot Daddu – Dr. Darshan Bangia* 7503033565 कहते हैं: "हर कहानी सिर्फ शब्दों का मेल नहीं होती, बल्कि कई गहरी अनुभव और आत्मिक सीख से भरी होती है। 👇🏻👇🏻

1️⃣ निस्वार्थ प्रेम की शक्ति

बच्चे ने भगवान से कुछ माँगा नहीं, बल्कि उनका ही ध्यान रखने को कहा।

सच्चा प्रेम वही है जिसमें अपेक्षा नहीं, केवल अपनापन और चिंता होती है।

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2️⃣ मासूमियत में ही सच्ची भक्ति है

बच्चे की प्रार्थना में न कोई दिखावा था, न कोई लंबा विधान।

ईश्वर को जटिल शब्द नहीं, सरल और सच्चा हृदय प्रिय होता है।

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3️⃣ प्रार्थना का अर्थ – केवल माँगना नहीं

अक्सर हम ईश्वर को केवल ‘देने वाला’ मानते हैं।

लेकिन प्रार्थना का वास्तविक अर्थ है जुड़ाव, संवाद और कृतज्ञता।

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4️⃣ परिवार और संबंधों का महत्व

बच्चे की हर प्रार्थना अपने लोगों के लिए थी।

यह सिखाता है कि सच्ची समृद्धि रिश्तों की सुरक्षा और सुख में है, न कि वस्तुओं में।

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5️⃣ भगवान भाव के भूखे हैं, भोग के नहीं

दादा जी ने विधि से पूजा की, पर बच्चे ने हृदय से।

ईश्वर के लिए छप्पन भोग से अधिक मूल्यवान एक सच्ची भावना है।

------*शुभ वंदन।*

TRN LIVE: : तरक्की के पीछे छुपा अदृश्य हाथ*

❤️

एक बहुत अमीर आदमी ने रोड के किनारे एक भिखारी से पूछा.. "तुम भीख क्यूँ मांग रहे हो जबकि तुम तन्दुरुस्त हो...??"

भिखारी ने जवाब दिया... "मेरे पास महीनों से कोई काम नहीं है...

अगर आप मुझे कोई नौकरी दें तो मैं अभी से भीख मांगना छोड़ दूँ"

अमीर मुस्कुराया और कहा.. "मैं तुम्हें कोई नौकरी तो नहीं दे सकता ..

लेकिन मेरे पास इससे भी अच्छा कुछ है... 

क्यूँ नहीं तुम मेरे बिज़नस पार्टनर बन जाओ..."

भिखारी को उसके कहे पर यकीन नहीं हुआ... 

"ये आप क्या कह रहे हैं क्या ऐसा मुमकिन है...?"

"हाँ मेरे पास एक चावल का प्लांट है.. तुम चावल बाज़ार में सप्लाई करो और जो भी मुनाफ़ा होगा उसे हम महीने के अंत में आपस में बाँट लेंगे.."

भिखारी के आँखों से ख़ुशी के आंसू निकल पड़े... 

" आप मेरे लिए जन्नत के फ़रिश्ते बन कर आये हैं मैं किस कदर आपका शुक्रिया अदा करूँ.."

फिर अचानक वो चुप हुआ और कहा.. "हम मुनाफे को कैसे बांटेंगे..?

क्या मैं 20% और आप 80% लेंगे ..या मैं 10% और आप 90% लेंगे..

जो भी हो ...मैं तैयार हूँ और बहुत खुश हूँ..."

अमीर आदमी ने बड़े प्यार से उसके सर पर हाथ रखा ..

"मुझे मुनाफे का केवल 10% चाहिए बाकी 90% तुम्हारा ..ताकि तुम तरक्की कर सको.."

भिखारी अपने घुटने के बल गिर पड़ा.. और रोते हुए बोला... 

"आप जैसा कहेंगे मैं वैसा ही करूंगा... मैं आपका बहुत शुक्रगुजार हूँ ...।

और अगले दिन से भिखारी ने काम शुरू कर दिया ..उम्दा चावल और 

बाज़ार से सस्ते... और दिन रात की मेहनत से..बहुत जल्द ही उसकी बिक्री 

काफी बढ़ गई... रोज ब रोज तरक्की होने लगी....

और फिर वो दिन भी आया जब मुनाफा बांटना था.

और वो 10% भी अब उसे बहुत ज्यादा लग रहा था... उतना उस भिखारी ने कभी सोचा भी नहीं था... अचानक एक शैतानी ख्याल उसके दिमाग में आया...

"दिन रात मेहनत मैंने की है...और उस अमीर आदमी ने कोई भी काम नहीं किया.. सिवाय मुझे अवसर देने की..मैं उसे ये 10% क्यूँ दूँ ...वो इसका 

हकदार बिलकुल भी नहीं है..।

और फिर वो अमीर आदमी अपने नियत समय पर मुनाफे में 

अपना हिस्सा 10% वसूलने आया और भिखारी ने जवाब दिया

" अभी कुछ हिसाब बाक़ी है, मुझे यहाँ नुकसान हुआ है, लोगों से कर्ज की अदायगी बाक़ी है, ऐसे शक्लें बनाकर उस अमीर आदमी को हिस्सा देने को टालने लगा."

अमीर आदमी ने कहा के "मुझे पता है तुम्हे कितना मुनाफा हुआ है फिर कयुं तुम मेरा हिस्सा देनेसे टाल रहे हो ?"

उस भिखारी ने तुरंत जवाब दिया "तुम इस मुनाफे के हकदार नहीं हो ..क्योंकि सारी मेहनत मैंने की है..."

अब सोचिये...

अगर वो अमीर हम होते और भिखारी से ऐसा जवाब सुनते ..

तो ...हम क्या करते ?

ठीक इसी तरह.........

भगवान ने हमें जिंदगी दी..हाथ- पैर..आँख-कान.. दिमाग दिया..

समझबूझ दी...बोलने को जुबान दी...जज्बात दिए..."

हमें याद रखना चाहिए कि दिन के 24 घंटों में 10% भगवान का हक है....

हमें इसे राज़ी ख़ुशी भगवान के नाम सिमरन में अदा करना चाहिए.

अपनी कमाई से 10% निकाल कर अछे कामो मे लगाना चाहिए और...भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहिए जिसने हमें जिंदगी दी सुख दिए ....

कृपया ज्यादा से ज्यादा शेयर करें जिससे समस्त सज्जनों को संसार की सत्यता का बोध होता रहे।

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*Tarot Daddu – Dr. Darshan Bangia* 7503033565 कहते हैं: "हर कहानी सिर्फ शब्दों का मेल नहीं होती, बल्कि कई गहरी अनुभव और आत्मिक सीख से भरी होती है। 👇🏻👇🏻

------*शुभ वंदन।*

TRN LIVE: 🔹ॐ कार मंत्र में १९ शक्तियाँ हैं🔹

🔸रक्षण शक्ति : ॐ सहित मंत्र का जप करते हैं तो वह हमारे जप तथा पुण्य की रक्षा करता है। किसी नामदान के लिए हुए साधक पर यदि कोई आपदा आनेवाली है, कोई दुर्घटना घटने वाली है तो मंत्र भगवान उस आपदा को शूली में से काँटा कर देते हैं। साधक का बचाव कर देते हैं। ऐसा बचाव तो एक नहीं, मेरे हजारों साधकों के जीवन में चमत्कारिक ढंग से महसूस होता हैं।

🔸गति शक्ति : जिस योग में, ज्ञान में, ध्यान में आप फिसल गये थे, उदासीन हो गये थे, किंकर्तव्यविमूढ़ हो गये थे उसमें मंत्रदीक्षा लेने के बाद गति आने लगती है। मंत्रदीक्षा के बाद आपके अंदर गति शक्ति कार्य में आपको मदद करने लगती हैं।

🔸कांति शक्ति : मंत्रजाप से जापक के कुकर्मों के संस्कार नष्ट होने लगते हैं और उसका चित्त उज्जवल होने लगता हैं। उसकी आभा उज्जवल होने लगती है, उसकी मति-गति उज्जवल होने लगती है और उसके व्यवहार में उज्जवलता आने लगती हैं।

इसका मतलब ऐसा नहीं है कि आज मंत्र लिया और कल सब छूमंतर हो जायेगा... धीरे-धीरे होगा। एक दिन में कोई स्नातक नहीं होता,  एक दिन में कोई एम.ए. नहीं पढ़ लेता, ऐसे ही एक दिन में सब छूमंतर नहीं हो जाता। मंत्र लेकर ज्यों-ज्यों आप श्रद्धा से, एकाग्रता से और पवित्रता से जप करते जायेंगे त्यों-त्यों विशेष लाभ होता जायेगा। 

🔸प्रीति शक्ति : ज्यों-ज्यों आप मंत्र जपते जायेंगे त्यों-त्यों मंत्र के देवता के प्रति, मंत्र के ऋषि, मंत्र के सामर्थ्य के प्रति आपकी प्रीति बढ़ती जायेगी। 

🔸तृप्ति शक्ति : ज्यों-ज्यों आप मंत्र जपते जायेंगे त्यों-त्यों आपकी अंतरात्मा में तृप्ति बढ़ती जायेगी, संतोष बढ़ता जायेगा। 

जिनको गुरुमंत्र सिद्ध हो गया है उनकी वाणी में सामर्थ्य आ जाता हैं। नेता भाषण करता है त लोग इतने तृप्त नहीं होते, किंतु जिनका गुरुमंत्र सिद्ध हो गया है ऐसे महापुरुष बोलते हैं तो लोग बड़े तृप्त हो जाते हैं और महापुरुष के शिष्य बन जाते हैं।

🔸अवगम शक्ति : मंत्रजाप से दूसरों के मनोभावों को जानने की शक्ति विकसित हो जाती है। दूसरे के मनोभावों को आप अंतर्यामी बनकर जान सकते हो। 

🔸प्रवेश अवति शक्ति : अर्थात् सबके अंतरतम की चेतना के साथ एकाकार होने की शक्ति। अंतःकरण के सर्व भावों को तथा पूर्वजीवन के भावों को और भविष्य की यात्रा के भावों को जानने की शक्ति कई योगियों में होती हैं। वे कभी-कभार मौज में आ जायें तो बता सकते हैं कि आपकी यह गति थी, आप यहाँ थे, फलाने जन्म में ऐसे थे, अभी ऐसे हैं। जैसे दीर्घतपा के पुत्र पावन को माता-पिता की मृत्यु पर उनके लिए शोक करते देखकर उसके बड़े भाई पुण्यक ने उसे उसके पूर्वजन्मों के बारे में बताया था। यह कथा योगवाशिष्ठ महारामायण में आती हैं।

🔸श्रवण शक्ति : मंत्रजाप के प्रभाव से जापक सूक्ष्मतम, गुप्ततम शब्दों का श्रोता बन जाता हैं। जैसे, शुकदेवजी महाराज ने जब परीक्षित के लिए सत्संग शुरु किया तो देवता आये। शुकदेवजी ने उन देवताओं से बात की। माँ आनंदमयी का भी देवलोक के साथ सीधा सम्बन्ध था। और भी कई संतो का होता है। दूर देश से भक्त पुकारता है कि गुरुजी ! मेरी रक्षा करो... तो गुरुदेव तक उसकी पुकार पहुँच जाती है !

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TRN LIVE: 🔹गृहस्थ-जीवनोपयोगी बातें🔹

🔹महाभारत में आता है :

१] जो धर्म एवं कल्याण-मार्ग में तत्पर हैं और मोक्ष के विषय में जिनका निरंतर अनुराग है वे विवेकी हैं।

२] जो अपने घर पर आ जाय उसे आत्मीयताभरी दृष्टी से देखें, उठकर उसके लिए आसन दें, मन से उसके प्रति उत्तम भाव रखें, मधुर वचन बोले। यह गृहस्थियों का सनातन धर्म है। अतिथि को आते देख उठकर उसकी अगवानी और यथोचित रीति से आदर-सत्कार करें। 

३] प्यासे को पानी, भूखे को भोजन, थके-माँदे को बैठने के लिए आसन और रोग आदि से पीड़ित मनुष्य के लिए सोने हेतु शय्या देनी चाहिए। 

४] गृहस्थ के भोजन में देवता, पितर, मनुष्य एवं समस्त प्राणियों का हिस्सा रखा जाता हैं।

५] नित्य प्रात: एवं सायंकाल कुत्तों और कौओं के लिए पृथ्वी पर अन्न डाल दें। 

६] निकम्मे पशुओं की भी हिंसा न करें और जिस वस्तु को विधिपूर्वक देवता आदि के लिए अर्पित न करें, उसे स्वयं भी न खायें। 

७] यज्ञ, अध्ययन, दान, तप, सत्य, क्षमा, मन और इन्द्रियों का संयम तथा लोभ का परित्याग – ये धर्म के ८ मार्ग हैं।

🔸पूर्णतया संकल्पों को एक ध्येय में लगा देने से, इद्रियों को भली प्रकार वश में कर लेने से, अहिंसा आदि व्रतों का अच्छी प्रकार पालन करने से, भली प्रकार सदगुरु की सेवा करने से, कर्मों को भलीभाँति भगवतसमर्पण करने से और चित्त का भली प्रकार निरोध करने से मनुष्य परम कल्याण को प्राप्त होता हैं।

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🚨  जय श्री राम

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TRN LIVE: 🔹गुरुवार विशेष 🔹

🔸हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोड़ा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के दिल में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती हैं।

🔸गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति के प्रतीक आम के पेड़ की निम्न प्रकार से पूजा करें :

🔸एक लोटा जल लेकर उसमें चने की दाल, गुड़, कुमकुम, हल्दी व चावल डालकर निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए आम के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं 

  

ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः।

फिर उपरोक्त मंत्र बोलते हुए आम के वृक्ष की पांच परिक्रमा करें और गुरुभक्ति, गुरुप्रीति बढ़े ऐसी प्रार्थना करें। थोड़ा सा गुड़ या बेसन की मिठाई चींटियों को डाल दें। ( लोक कल्याण सेतु , अंक - ११६ )

🔸गुरुवार को बाल कटवाने से लक्ष्मी और मान की हानि होती हैं।

🔸गुरुवार के दिन तेल मालिश हानि करती हैं। यदि निषिद्ध दिनों में मालिश करनी ही है तो ऋषियों ने उसकी भी व्यवस्था दी हैं। तेल में दूर्वा डाल के मालिश करें तो वह दोष चला जायेगा। 

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TRN LIVE: ठाकुर जी पागलों के घर क्यों बनाते हैं?*

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ठाकुर जी के पागल

एक बार नामदेव जी अपनी कुटिया के बाहर सोये हुए थे तभी अचानक उनकी कुटिया में आग लग गयी।

 

नामदेव जी ने सोचा आज तो ठाकुर जी अग्नि के रूप में आये हैं तो उन्होंने जो भी सामान बाहर रखा हुआ था वो भी आग में ही डाल दिया।

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तब लोगों ने देखा और जैसे तैसे आग बुझा दी और चले गये।

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ठाकुर जी ने सोचा इसने तो मुझे सब कुछ अर्पण कर दिया है ठाकुर जी ने उनके लिए बहुत ही सुन्दर कुटिया बना दी।

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सुबह लोगों ने देखा कि वहाँ तो बहुत सुंदर कुटिया बनी हुई है !

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उन्होंने नामदेव जी को कहा रात को तो आपकी कुटिया में आग लग गयी थी फिर ये इतनी सुंदर कुटिया कैसे बन गयी? हमे भी इसका तरीका बता दीजिए।

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नामदेव जी ने कहा सबसे पहले तो अपनी कुटिया में आग लगाओ फिर जो भी सामान बचा हो वो भी उसमे डाल दो।

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लोगो ने उन्हें ऊपर से नीचे तक देखा और कहा अजीब पागल है।

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नामदेव जी ने कहा.. वो ठाकुर तो पागलों के ही घर बनाता है।

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*Tarot Daddu – Dr. Darshan Bangia* 7503033565 कहते हैं: "हर कहानी सिर्फ शब्दों का मेल नहीं होती, बल्कि कई गहरी अनुभव और आत्मिक सीख से भरी होती है। 👇🏻👇🏻

🌿 1️⃣ समर्पण का साहस ही चमत्कार का द्वार है

नामदेव जी ने आग को आपदा नहीं, ईश्वर की इच्छा माना। जब हम परिस्थितियों से लड़ना छोड़कर उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, तब भीतर का भय समाप्त होता है। कई बार समस्या ही उस परिवर्तन का प्रारम्भ होती है जिसकी हमें आवश्यकता होती है।

🔥 2️⃣ जो जलता है, वही शुद्ध भी होता है

कभी-कभी जीवन की “आग” हमारे अहंकार, आसक्ति और पुराने बोझ को जलाने आती है। हम जिस हानि को अंत समझते हैं, वही नई शुरुआत का बीज बनती है। हर संकट भीतर की सफाई भी कर रहा होता है।

🕊 3️⃣ आस्था तर्क से ऊपर होती है

दुनिया को नामदेव पागल लगे, पर उनका विश्वास अडिग था। जब मन डगमगाता नहीं, तब परिस्थितियाँ भी स्थिर हो जाती हैं। समस्या का समाधान पहले विश्वास में जन्म लेता है, बाद में वास्तविकता में।

🌸 4️⃣ त्याग से ही प्राप्ति का मार्ग खुलता है

जिसने सब अर्पण कर दिया, उसे सब कुछ नया मिला। जीवन में भी जब हम पकड़ छोड़ते हैं, तभी नई संभावनाएँ प्रवेश करती हैं। जितना हम “मेरा” छोड़ते हैं, उतना “ईश्वर का” मिलता है।

🌈 5️⃣ ईश्वर संकट में नहीं, दृष्टिकोण में मिलते हैं

आग सबके लिए विनाश थी, पर भक्त के लिए वरदान बन गई। आज की हर समस्या भी वैसी ही है—दृष्टि बदलते ही अर्थ बदल जाता है।

कभी-कभी समाधान बाहर नहीं, हमारे देखने के तरीके में छुपा होता है।

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यही कारण है—

ठाकुर जी पागलों के घर बनाते हैं… क्योंकि वे पागल ही बिना शर्त भरोसा करते हैं।

---*शुभ वंदन।

[TRN LIVE: 🚩 आज का पञ्चाङ्ग 🚩

🌥️ 🚩युगाब्द-५१२७

🌥️ 🚩विक्रम संवत-२०८२

⛅ 🚩तिथि - तृतीया दोपहर ०२:३८ तक तत्पश्चात् चतुर्थी

👇 

⛅ दिनांक - २० फरवरी २०२६

⛅ दिन - शुक्रवार

⛅ अयन - उत्तरायण

⛅ ऋतु - वसंत

⛅ मास - फाल्गुन

⛅ पक्ष - शुक्ल

⛅ नक्षत्र - उत्तर भाद्रपद रात्रि ०८:०७ तक तत्पश्चात् रेवती

⛅ योग - साध्य शाम ०६:२३ तक तत्पश्चात्  शुभ

⛅ राहुकाल - सुबह ११:१५ से दोपहर १२:४१ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)

⛅ सूर्योदय - ०६:५६

⛅ सूर्यास्त - ०६:२६ (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)

⛅ दिशा शूल - पश्चिम दिशा में

⛅ ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः ०५:१६ से प्रातः ०६:०६ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)

⛅ अभिजीत मुहूर्त - दोपहर १२:१८ से दोपहर ०१:०४ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)

⛅ निशिता मुहूर्त - रात्रि १२:१५ फरवरी २१ से रात्रि ०१:०५ फरवरी २१ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)

🌥️ व्रत पर्व विवरण - अमृतसिद्धि योग, सर्वार्थसिद्धि योग (रात्रि ०८:०७ से प्रातः ०६:५५ फरवरी २१ तक)

🌥️ विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: २७.२९-३४)

🔹अंतःकरण के दोष व उनकी निवृत्ति🔹

🔸(१) चंचलता : सत्य अथवा स्थिर तत्त्व से योग न होने के कारण मन में चंचलतारूपी दोष है, इसीसे अंदर दुर्बलता रहा करती हैं।

🔸जगत के देहादिक असत् पदार्थों एवं विषय-सुखों से वैराग्य दृढ होने पर जब अभ्यास के द्वारा एक सत्य आधार में मन स्थिर होता है, तभी इस दोष की निवृत्ति होती हैं।

🔸(२) मलिनता : चित्त में असत् संबंध के कारण असत् चिंतन होते रहने से मलिनतारूपी दोष है, इसीसे खिन्नता रहा करती हैं।

🔸मन के स्थिर होने पर एक ‘सत् पदार्थ के चिंतन में जब चित्त तल्लीन होता है तभी यह दोष दूर होता हैं।

🔸(३) अज्ञान : बुद्धि में आत्मज्ञानी संतपुरुष का संग (सत्संग) न मिलने के कारण अज्ञानरूपी दोष है, इसीसे मनुष्य में मूढता रहा करती हैं।

🔸मन तथा चित्त के स्थिर और शुद्ध होने पर ही मानव-बुद्धि स्वस्थ एवं शांत होकर संत, सद्गुरुदेव से, सुसंग से सद्ज्ञान-प्रकाशपूर्ण होती है। इसीसे अज्ञानरूपी दोष का नाश होता हैं।

🔸(४) ममता : अहं में देहादिक पदार्थों के प्रति ममतारूपी दोष हैं। इसीके कारण आसक्ति एवं जड़ता रहा करती हैं।

🔸सद्ज्ञान-प्रकाश में ही अहं का मिथ्या पदार्थों के प्रति अहमन्यता (अहंता-इदंता) रूपी दोष सत्स्वरूपाभिमान में परिणत हो जाता है, इसीसे जड़तारूपी दोष की निवृत्ति होती हैं।

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: 🔹अंतःकरण के दोष व उनकी निवृत्ति🔹

🔸(१) चंचलता : सत्य अथवा स्थिर तत्त्व से योग न होने के कारण मन में चंचलतारूपी दोष है, इसीसे अंदर दुर्बलता रहा करती हैं।

🔸जगत के देहादिक असत् पदार्थों एवं विषय-सुखों से वैराग्य दृढ होने पर जब अभ्यास के द्वारा एक सत्य आधार में मन स्थिर होता है, तभी इस दोष की निवृत्ति होती हैं।

🔸(२) मलिनता : चित्त में असत् संबंध के कारण असत् चिंतन होते रहने से मलिनतारूपी दोष है, इसीसे खिन्नता रहा करती हैं।

🔸मन के स्थिर होने पर एक ‘सत् पदार्थ के चिंतन में जब चित्त तल्लीन होता है तभी यह दोष दूर होता हैं।

🔸(३) अज्ञान : बुद्धि में आत्मज्ञानी संतपुरुष का संग (सत्संग) न मिलने के कारण अज्ञानरूपी दोष है, इसीसे मनुष्य में मूढता रहा करती हैं।

🔸मन तथा चित्त के स्थिर और शुद्ध होने पर ही मानव-बुद्धि स्वस्थ एवं शांत होकर संत, सद्गुरुदेव से, सुसंग से सद्ज्ञान-प्रकाशपूर्ण होती है। इसीसे अज्ञानरूपी दोष का नाश होता हैं।

🔸(४) ममता : अहं में देहादिक पदार्थों के प्रति ममतारूपी दोष हैं। इसीके कारण आसक्ति एवं जड़ता रहा करती हैं।

🔸सद्ज्ञान-प्रकाश में ही अहं का मिथ्या पदार्थों के प्रति अहमन्यता (अहंता-इदंता) रूपी दोष सत्स्वरूपाभिमान में परिणत हो जाता है, इसीसे जड़तारूपी दोष की निवृत्ति होती हैं।

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TRN LIVE: मुगलो के अत्याचार आपने सुने होंगे लेकिन 1788 मे मुगलो के साथ कुछ ऐसा हुआ था कि किसी की भी आत्मा काँप उठे।

ये वो दौर था जब मुग़ल नाम के बादशाह थे और सत्ता मराठाओ के विशेषकर ग्वालियर के सिंधिया परिवार के हाथ मे थी। दरसल दिल्ली, आगरा और अजमेर व्यापारिक केंद्र थे, आगरा और अजमेर पर सिंधिया का अधिकार हो चुका था। लेकिन दिल्ली को लेकर जाटो का दावा अधिक शक्तिशाली था।

मराठा और जाट दो हिन्दू ताकतें आपस मे लड़ना भी नहीं चाहती थी और लड़ती भी तो अपार नुकसान करा लेती, दिल्ली पर भी सिंधिया ने कब्जा कर लिया था। लेकिन दिल्ली से मुगलो को हटा देते तो भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र जाटो के पास चला जाता।

ऐसे मे मराठाओ ने नीति बदली और मुगलो को हटाने की बजाय राजनीतिक गुलाम बना लिया। दिल्ली मे कहने को मुग़ल बादशाह था मगर उसके सारे अधिकार पुणे मे पेशवा को चले गए थे। पेशवा माधवराव ने 1771 मे अपने सेनापति और ग्वालियर के महाराज महादजी सिंधिया को दिल्ली की जागीर सौप दी।

1788 मे शाह आलम तृतीय था, तब लाल किले पर उसके एक पुराने दुश्मन गुलाम कादिर ने हमला किया। बादशाह के पास कोई फ़ौज नहीं थी, खजाना ग्वालियर के किले मे रखा जाता था, बादशाह ने किसी जमाने मे गुलाम कादिर को नपुंसक बनवाया था और उसे नृत्य करने को बाध्य किया था।

गुलाम कादिर ने लाल किला 3 महीने अपनी गिरफ्त मे रखा और मुग़ल स्त्रियों के साथ बर्बरता की। कुल 21 शाही सदस्य मारे गए, एक बेगम तो दिल का दौर पड़ने से मर गयी थी। शहजादियो को निर्वस्त्र होने को बाध्य किया गया, शाह आलम को अंधा कर दिया गया, हद तो तब हो गयी ज़ब शहजादियो को घसीटकर लाया जा रहा था तो उनमे से दो ने किसी तरह बचकर दीवार पार की और यमुना मे कूदकर अपनी जान दे दी।

ज़ब तीन महीने बीत गए और महादजी सिंधिया की तरफ से कोई मदद नहीं आयी तो पुणे मे पेशवा को किसी तरह खबर भेजी गयी और आख़िरकार महादजी सिंधिया ने लाल किले पर हमला किया। गुलाम कादिर भाग खड़ा हुआ, मरियम उज जमानी नाम की एक पूर्व बेगम गुलाम कादिर को ये सब करने के पैसे दे रही थी।

ज़ब सिंधिया के सामने लायी गयी तो भी उसने नजरे नहीं गिराई और गर्व से क्रेडिट लिया। गुलाम कादिर वृंदावन की तरफ भागा और एक ब्राह्मण के घर मे शरण ली, लेकिन ब्राह्मण ने उसे पहचान कर मराठाओ को खबर दे दी। कालांतर मे गुलाम कादिर के शरीर के टुकड़े कर दिये गए और मथुरा मे सिर कलम किया गया।

लेकिन उन तीन महीने मानवता शर्मसार होती रही, गुलाम कादिर ने परिवार के किसी सदस्य पर रहम नहीं दिखाया चाहे उसकी आयु कुछ भी हो। सभी को आपत्तिजनक स्थिति मे नृत्य करना पड़ा चाहे राजकुमार हो, बेगम हो या दास दासी हो।

यहाँ महादजी सिंधिया को लेकर भी प्रश्न उठते है, महादजी सिंधिया को भारत का नेपोलियन कह सकते है उन्होंने अंग्रेजो को पराजित किया, पानीपत का नुकसान खत्म किया। खुद लॉर्ड वेलेजली ने कहा था कि यदि महादजी सिंधिया ना होते तो भारत का रास्ता साफ होता।

लेकिन 1788 के इस किस्से के समय सिंधिया दिल्ली के वास्तविक राजा थे, ग्वालियर से दिल्ली 3 महीने दूर तो नहीं था चाहते तो ये सब रोक सकते थे। आलोचक कहते है कि गुलाम कादिर ने व्यापार मे बाधा नहीं डाली इसलिए सिंधिया को फर्क नहीं पड़ा या फिर सिंधिया के लिए मुग़ल सिर्फ रबड़ स्टाम्प थे।

इसके विपरीत समर्थक कहते है कि तब सिंधिया राजपूताने मे युद्ध लड़ रहे थे या फिर सिंधिया के लिए लाल किला एक किला ना होकर किसी परिवार का आवास मात्र था और उनके लिए इस घटना का राजनीतिक महत्व नहीं था।

आलोचनाओ या दलिलो के बीच निजी आंकलन भी लेते चलिए, वो 1788 का दौर था ज़ब लश्कर का खर्च बहुत होता था, दिल्ली मराठा साम्राज्य का शहर था जिसे सिंधिया मुग़ल राजमुद्रा से चलाते थे, ऐसे मे मुग़ल बादशाह और उसका परिवार उनके लिए एक साधारण नागरिक से ऊपर कुछ नहीं रहे होंगे।

तीसरा और सबसे जरूरी 1788 के समय महादजी फ्रांसीसियो के साथ मिलकर अंग्रेजो के विरुद्ध सेना को अपग्रेड कर रहे थे। इसके अलावा मराठाओ का दुश्मन उस समय तक टीपू सुल्तान हो चुका था, गुलाम कादिर उनके लिए महज एक शहरी बदमाश भर था।

अपराध का दंड गुलाम कादिर को वैसे भी मिला जो कि शास्त्र उन्नत है, कर्म कभी पीछा नहीं छोड़ते, औरंगजेब की करनी का फल उसके वंशज आज भी भुगत रहे है। 

खैर ये मुग़ल इतिहास का वो पन्ना है जो कभी पढ़ाया नहीं गया, हाल ही मे महादजी सिंधिया की पुण्यतिथि निकली। सरकार ने नई शिक्षा नीति मे उनका पाठ्यक्रम जोड़ने पर सहमति दी है। आशा है उसमे ये अध्याय भी जोड़ा जायेगा। 

✍️परख सक्सेना✍️

TRN LIVE: काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम काली दुर्गे राधे श्याम गौरी शंकर सीता राम

TRN LIVE: महात्मा गाँधी के राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले का निधन 19 फरवरी 1915 को हुआ था.

गोपाल कृष्ण गोखले भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी, विचारक एवं सुधारक थे। महादेव गोविंद रानाडे के शिष्य गोपाल कृष्ण गोखले को वित्तीय मामलों की अद्वितीय समझ और उस पर अधिकारपूर्वक बहस करने की क्षमता से उन्हें भारत का 'ग्लेडस्टोन' कहा जाता है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सबसे प्रसिद्ध नरमपंथी थे। चरित्र निर्माण की आवश्यकता से पूर्णत: सहमत होकर उन्होंने 1905 में सर्वेन्ट्स ऑफ इंडिया सोसायटी की स्थापना की ताकि नौजवानों को सार्वजनिक जीवन के लिए प्रशिक्षित किया जा सके। उनका मानना था कि वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा भारत की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। स्व-सरकार व्यक्ति की औसत चारित्रिक दृढ़ता और व्यक्तियों की क्षमता पर निर्भर करती है। महात्मा गांधी उन्हें अपना राजनीतिक गुरु मानते थे।

TRN LIVE: अगर मोदी का समर्थन ना करूँ तो किसका करूँ ?? "

जब UGC के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे लग गया तो भी विरोध क्यों जारी है ?

वो भी तब जब मोदी सरकार ने SC में UGC पर स्टे का विरोध नहीं किया बल्कि SG तुषार मेहता ख़ुद स्टे के पक्ष में थे. ये पहली बार था जब केंद्र सरकार ने कोर्ट ने स्टे का विरोध नहीं किया था

अब UGC का विरोध भाजपा सरकार का विरोध बन गया है, फिर मोदी विरोध बना, भागवत विरोध बना और अब संघ विरोध बन गया है

UGC पर स्टे के बाद PM मोदी को गालियां दी जा रही हैं, उनकी सरकार को उखाड़ फेंकने की बात की जा रही है, RSS और श्रद्धेय मोहन भागवत जी को अपमानित करने वाली टिप्पणियां की जा रही है

दरअसल UGC विरोधी बड़े सोशल मीडिया हैंडल्स वामपंथी एजेंडे को हवा दे रहे हैं जिसका उद्देश्य PM मोदी की छवि धूमिल करना है. और सोशल मीडिया पर ऐसे बड़े हैंडल्स को भगवान मानने वाले छोटे हैंडल्स इनका शिकार हो रहे हैं और इनकी हां में हां में हां मिला रहे हैं

अंध विरोध का आलम ये है कि PM मोदी के 2014 के क्लिप काटकर ज़ुबैर के अंदाज़ में अग़लत कांटेक्स्ट के साथ वायरल किए जा रहे हैं. PM के ऐसे बयान ग़लत कांटेक्स्ट के साथ वायरल हो रहे हैं जो उन्होंने कांग्रेस के मुस्लिम तुष्टिकरण के विरोध में दिए थे

UGC का विरोध अब UGC का विरोध नहीं रहा है बल्कि यह मोदी हटाओ में तब्दील हो गया है क्योंको तमाम बड़े हैंडल्स को इसका मोटा पैसा मिला है और छोटे हैंडल इंडे इन्फ्लूएंस हो रहे हैं

आख़िर आप मोदी को हटाकर किसका रास्ता साफ़ कर रहे हो ? ये मत कहना कि आप कांग्रेस का INDI गठबंधन का साथ नहीं दे रहे हो

आप बहुत महीन तरीके से मोदी को हटाकर राहुल गांधी को देश की सत्ता सौंपना चाहते हो, जो राहुल गांधी एक्सरे मशीन लेकर बैठे हैं, जिससे सवर्णों की एक तरह से छटनी होनी है

आप सीधे सीधे उन अखिलेश यादव के लिए बैटिंग कर रहे हो जिनके PDA में सवर्ण हैं ही नहीं

अगर मोदी सवर्ण विरोधी है तो सवर्णों का हितैषी कौन है ? कौन सा दल है जो सवर्णों के लिए आवाज उठा रहा है ? इतनी सी बात समझ नहीं आ रही आपको ?

आप कह सकते हो कि UP में अलंकार अग्निहोत्री सवर्णों की पार्टी बना रहा है, उसका साथ दोगे. सीरियसली ?

इतना मूर्ख समझते हो देश को ? अलंकार अग्निहोत्री सपा का एसेट है जो सपा के माताप्रसाद पांडेय के साथ मिलकर योगी हटाओ की योजना पर काम कर रहा है ? सवर्णों का वोट अलंकार को मिलेगा तो फ़ायदा किसका होगा ? सपा का ही होगा न ?

अगर मोदी-योगी, भाजपा-RSS से समस्या है और तुम हिम्मतवाले हो तो आप खुलकर मैदान में और करो यलगार ? डबल ढोलकी बनकर क्यों बज रहे हो ?

प्रिय सवर्णों, पागलपन मत करो, जो लोग आपको मोदी हटाओ के एजेंडे का हिस्सा बना रहे हैं, उनको इन्हें इसके लिए माल मिल रहा है, ये धंधा है इन लोगों का

इनका धंधा तो चलता रहेगा लेकिन अगर इनका शिकार होकर आपने मोदी को खो दिया, UP में योगी को खो दिया तो ये मानकर कि आप सिर्फ अपने साथ नहीं बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों और भारत देश की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रहे हो

ध्यान रहे, UGC क़ानून पर स्टे लग चुका है. ये क़ानून पुराने प्रारूप में कभी लागू नहीं होगा.

अतः पागलपन बंद करो और अपने काम पर ध्यान दो क्योंकि UP को योगी की और देश को मोदी की अभी आवश्यकता है वरना सियासी गिद्ध तो इसके इंतज़ार में हैं कि कब मोदी-योगी जाएं और वो सत्ता में आकर देश को लूट सकें

TRN LIVE: यह अजगर खान है कल बेंगलुरु में क्या हुआ उसे जानकर आपको कांग्रेस से नफरत हो जाएगी आप सच में पड़ जाएंगे की क्या कांग्रेस इस कदर मुस्लिम तुष्टिकरण कर सकती है

बेंगलुरु में ये व्यक्ति अजगर खान अपने तीन साथियों के साथ बाकायदा ऑटो रिक्शा लेकर एक घर में चोरी करने के लिए घुसा था 

लेकिन घर वाले जाग गए और अजगर खान की तबियत से धुलाई कर दी 

पूरी सोसाइटी ने अजगर खान की कुटाई कर दिया

फिर अधमरा अजगर खान अपने घर पहुँचा,

उसे देखने के लिए कई लोग आने लगे तभी इलाके के मौलाना भी आए

 तब मौलाना ने उसको सलाह दिया कि कर्नाटक में अपनी सरकार है।

 आप उनके खिलाफ केस कर दो, फिर चोर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि चोरी करने के दौरान लोगों ने उसकी पिटाई की थी, इसलिए उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। संपीगहल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी कि BNS की धारा 118 (1) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 

सोचिए जब किसी राज्य में कांग्रेस सत्ता में जाती है तब क्या होता है 

और वैसे भी मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानो का है

TRN LIVE: भारत का पहला कानूनी तलाक मामला रुक्माबाई राउत (Rukhmabai Raut) का था, जो 1885-1887 के दौरान सामने आया। 

रुक्माबाई का विवाह मात्र 11 वर्ष की आयु में दादाजी भिकाजी (19 वर्ष) से हो गया था। हालाँकि, वे अपने सौतेले पिता, डॉ. सखाराम अर्जुन के संरक्षण में रहकर अपनी शिक्षा पूरी करती रहीं। जब भिकाजी ने उन्हें अपने साथ रहने के लिए मजबूर किया, तो रुक्माबाई ने इनकार कर दिया, जिससे भारतीय कानूनी इतिहास की सबसे बड़ी बहस शुरू हुई।

​दांपत्य अधिकारों की बहाली: भिकाजी ने 'Restitution of Conjugal Rights' (दांपत्य अधिकारों की बहाली) के तहत मुकदमा दायर किया।

​न्यायमूर्ति रॉबर्ट हिल पिनहे का फैसला: शुरुआत में, जस्टिस पिनहे ने रुक्माबाई के पक्ष में फैसला सुनाया कि एक हिंदू महिला को उसकी सहमति के बिना वैवाहिक संबंध के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

​विरोध और जेल की सजा: इस फैसले का कट्टरपंथियों ने कड़ा विरोध किया। अंततः, 1887 में कोर्ट ने आदेश दिया कि उन्हें या तो पति के साथ रहना होगा या 6 महीने की जेल भुगतनी होगी। रुक्माबाई ने साहस के साथ जेल जाना स्वीकार किया, लेकिन एक ऐसे रिश्ते में रहना नहीं जो उनकी मर्जी के खिलाफ था।

1887 में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि रुक्माबाई को या तो अपने पति के साथ रहना होगा या छह महीने की जेल काटनी होगी, लेकिन उन्होंने जेल को चुना।

TRN LIVE: 40 लाख एकड़ ज़मीन

565 रजवाड़े

43 किले

18700 दुर्ग

यह सब कुछ राजपूतों ने देश के लिए समर्पित कर दिया।

*और कांग्रेस की मेहरबानी से मालिक बन गया मुस्लिम वक्फ बोर्ड।*

कितनी भयंकर साज़िश है यह!

● पाकिस्तान का निर्माण हुआ... कांग्रेस के शासन में..!

● बांग्लादेश बना... कांग्रेस के शासन में..!

● धारा 370 लागू हुई... कांग्रेस के शासन में..!

● अल्पसंख्यक बिल आया... कांग्रेस के शासन में..!

● मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की रचना... कांग्रेस के शासन में..!

● अल्पसंख्यक मंत्रालय बना... कांग्रेस के शासन में..!

● अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय की स्थापना... कांग्रेस के शासन में..!

"कांग्रेस" ने यह सब कुछ केवल मुसलमानों के लिए किया – वह भी तब, जब देश का विभाजन धार्मिक आधार पर हुआ था।

तो क्या कांग्रेस ने पहले से ही "गजवा-ए-हिंद" के लिए तैयारी की थी?

कांग्रेस ने हिन्दुओं को सिर्फ आरक्षण देकर आपस में लड़वाया, ताकि हिन्दू समाज कभी एकजुट न हो और गजवा-ए-हिंद की साजिश को न समझ पाए।

*पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने अपनी आत्मकथा "मेरा जीवनचरित्र" के पृष्ठ संख्या 456 पर लिखा है:*

"मुझे समझ नहीं आता कि नेहरू को 'हिंदुत्व' से इतनी नफरत क्यों थी?"

*सरदार पटेल ने नेहरू को चेतावनी दी थी कि अगर तुम "हिंदू कोड बिल" लाओगे, तो मैं इस्तीफा दे दूँगा और इस बिल के खिलाफ हिंदुओं को लेकर आंदोलन करूँगा।*

पटेल की धमकी के चलते नेहरू डर गए। लेकिन सरदार पटेल की मृत्यु के बाद संसद में यह बिल पारित कर दिया गया।

इस विधेयक पर चर्चा के दौरान *आचार्य जे. बी. कृपलानी ने कहा था:*

*"नेहरू, तुम साम्यवादी और मुस्लिम पक्षपाती हो।"*

उन्होंने कहा: "अगर तुम सच में हिंदू होते, तो 'हिंदू कोड बिल' की बजाय 'समान नागरिक संहिता' लाते जो सभी धर्मों के लिए होती।"

कभी-कभी तो लगता है कि ऐसी पोस्ट करनी ही नहीं चाहिए… लेकिन फिर लगता है कि कोई न कोई हिंदू तो पढ़ेगा, देश के हित में।

*बीबीसी के प्रसिद्ध पत्रकार मार्क टुली ने कहा है:*

*"मोदीजी इस देश के उस ज़हरीले पेड़ को जड़ से उखाड़ रहे हैं, जो वर्षों से ज़हरीले कीड़ों से संक्रमित था।"*

इसके लिए उन्हें लगातार लड़ना होगा।

*मोदी जी ने देश में छुपे हुए सभी ज़हरीले साँपों के बिलों में सही दवा डाली है, इसलिए ये साँप छटपटा रहे हैं –*

लेफ्टिस्ट, जिहादी, नक्सली, मिशनरी, वामपंथी – इन सबको कांग्रेस ने छुपाकर रखा था भारत को बर्बाद करने के लिए।

*मोदीजी सत्ता में आए और उन्होंने देश को जागरूक किया, सजग किया और इन ज़हरीले साँपों को उजागर किया।*

अगर ऐसा न हुआ होता, तो आने वाले समय में ये ज़हरीले साँप भारत माँ की पवित्र भूमि को पूरी तरह निगल जाते।

हमारी आने वाली पीढ़ियों के पास कुछ भी नहीं बचता, सिवाय रोने और पलायन करने के।

मोदीजी को बहुत संघर्ष करना पड़ेगा और वो लड़ेंगे।

लेकिन इस देश के लोगों को – *खासतौर पर हिंदुओं को – मोदी जी के साथ मज़बूती से खड़ा रहना पड़ेगा।*

क्योंकि मोदी जी ये युद्ध अपने लिए नहीं, बल्कि हम देशवासियों के बच्चों, आने वाली पीढ़ियों और भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए लड़ रहे हैं।

कृपया इस संदेश को जनहित में आगे बढ़ाएँ और अन्य देशवासियों और हिंदुओं को भी जागरूक करें।

अगर आप हिंदू हैं – तो 5 लोगों को जागरूक करें।

अगर आपको भारतीय होने पर गर्व है – तो भारत के हितचिंतक बनकर इसे साझा करें।

*भारत माता की जय।*

*जय हिन्द।*

*जय हिंदुत्व।*

*जय श्री राम।*

TRN LIVE: समीक्षा की समीक्षा - भ्रमित हिन्दुओं का भयावह भविष्य 

इस लेख को पढ़ने की पहली शर्त यही है कि आप अपने आवरण को उतार कर अलग रखें और केवल एक व्यक्ति होकर सोचें , एक हिंदू होकर अपने भविष्य का चिंतन करें ।

 -----------------------------------------------

हाल के ही चार बयानों पर चर्चा करते हैं ।

1. भारत में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू ही है ।

2. भारत में चार तरह के हिन्दू हैं । कुछ गर्व से कहते हैं हम हिन्दू हैं , कुछ कहते हैं" गर्व की क्या बात ", कुछ धीरे से कहते हैं 'हम हिन्दू हैं ', कुछ भूल गए हैं कि वो हिन्दू हैं ।

3. भारत आने वाले तीस वर्ष में हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा 

4. भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की कोई आवश्यकता नहीं क्योंकि ये हिन्दू राष्ट्र ही है ।

यह चारों बयान अपने आप में कितने भ्रमित करने वाले हैं या और स्पष्ट तरीके से कहूं कि इन बयानों को देने वाला व्यक्ति स्वयं भ्रमित है ।

यदि भारत में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है तो फिर आपको एकांत में चिंतन करने की आवश्यकता है क्योंकि आपके लिए तो मार्गदर्शक मण्डल वाला ऑप्शन भी नहीं है ।

जब 1920 के दशक में खिलाफत मुहिम और असहयोग आंदोलन आरम्भ हुआ और मुस्लिम दंगे शुरू हुए तब पूज्य हेडगेवार जी ने हिंदू समाज की दुर्दशा को देखा और इसके कारणों को समझा, कारण तब भी लगभग वही थे जो आज हैं ..जैसे

कांग्रेस का मुस्लिम चरमपंथ को समर्थन, गांधी की हिन्दू मुस्लिम एकता के धोखे के पीछे हिन्दुओं के हितों की अनदेखी 

हिन्दुओं में संगठन की कमी, आत्मविश्वास की कमी, बल और अनुशासन की कमी । 

जब हिंदू समाज कमजोर पड़ रहा था और कांग्रेस हिंदू मुस्लिम एकता के धोखे के पीछे हिंदुओं का ही नाश करने पर तत्पर थी तब पूज्य हेडगेवार जी ने संकल्प लिया कि वह एक ऐसा संगठन बनाएंगे जो हिंदुओं को संगठित करेगा, हिंदुओं को अनुशासित रखेगा, हिंदुओं में आत्मविश्वास जगाएगा और हिंदुओं को बलिष्ठ बनाएगा, बलवान बनाएगा ताकि हिन्दू अपनी रक्षा स्वयं कर सकें ।

                                     तो प्रश्न है कि हिंदू किन से अपनी रक्षा कर सकें तो इसका उत्तर है उन्हीं से जिन्हें आज मोहन भागवत स्वयं हिंदू बता रहे हैं ।

कोई भी संगठन जब बनता है तो उसके लक्ष्य निश्चित किए जाते हैं, उसके उद्देश्य निश्चित किए जाते हैं तो यह तो हो सकता है कि कार्य करने के तरीकों में बदलाव हो, लक्ष्य तक पहुंचने के रास्ते के चुनाव में कई लोग हों, तो हो सकता है कि रास्ते अलग-अलग हो किंतु रास्तों के बदले जाने से लोगों के बदल जाने से, समूह के मुखिया के बदले जाने से कभी भी लक्ष्य नहीं बदलता, और जिस दिन आपने अपना निश्चित किया हुआ लक्ष्य बदल दिया तो आप वह रहे ही नहीं और जब आप वह रहे ही नहीं तो आपको वह सम्मान भी नहीं मिलना चाहिए जो तब मिल रहा था जब आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पित थे ।

भारत में चार तरह के हिंदू नहीं है भारत में केवल एक तरीके का हिंदू है जो कहता है कि गर्व से कहो हम हिंदू हैं और वह सिर्फ कहता ही नहीं है वह कहता तब है जब वह इसको मानता है और जब वह यह बात कहता है तो उसकी धमनियों का रक्त संकल्पित होता है कि इस राष्ट्र की रक्षा करने के लिए यदि उसे अपने प्राणों की आहुति भी देनी होगी तो भी वह एक क्षण के लिए चिंतन नहीं करेगा, बाकी के तीन तरह के हिंदू केवल उस हिंदू की टांग खींचने की चेष्टा में लगे हैं, उसको अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचने देना चाहते, उसकी राह में बाधा उत्पन्न करने के लिए हैं ।

यदि भारत में सभी हिंदू हैं तो फिर आप घर वापसी किनकी करवाना चाहते हैं फिर आपका लव जिहाद की बात करना तो केवल दोगलापन ही कहा जाएगा ।

यदि भारत में सब हिंदू ही हैं तो मैं आपके इस कथन से पूरी तरह सहमत हूं कि भारत अगले 30 वर्षों में हिंदू राष्ट्र बन जाएगा जानते हैं क्यों क्योंकि यही बात तो मुस्लिम कह रहे हैं कि अगले 30 वर्षों में गजवा ए हिंद हो जाएगा और जब आप सबको ही हिंदू मान रहे हैं तो फिर चाहे यह मुस्लिम राष्ट्र बने या सनातनी राष्ट्र आपके लिए तो हिंदू राष्ट्र ही रहेगा ।

मेरी कविताओं में जो एक मुख्य बिंदु होता है या मैं जो कहूं कि जो मेरी कविताओं का उद्देश्य,उसका लक्ष्य, उसकी आत्मा होती है वह यह होता है कि आपको अपने लक्ष्य प्राप्ति में या अपने लक्ष्य के प्रति या अपने लक्ष्य को लेकर कभी भी भ्रमित नहीं होना चाहिए । जैसे कि :

वीर की तो आयु होती मात्र कुछ क्षण 

पार्थ अब गांडीव से टंकार कर लो 

द्वंद्व में जीते नहीं जाते कभी रण 

हो भ्रमित तो हार को स्वीकार कर लो

तो लक्ष्य क्या है गुरु गोलवलकर जी ने कहा था कि हमें अपने राष्ट्र को तीन राक्षसों से बचाना है मेरे विचार से संघ का हर स्वयंसेवक जानता ही होगा कि वह तीनों कौन हैं ।

भीष्म पितामह बलवान थे पर वह सम्मानित नहीं रहे क्योंकि वह अपने धर्म को भूल गए ।

द्रोणाचार्य बुद्धिमान थे गुरु थे किंतु वह सम्मानित नहीं हो सके क्योंकि वह अपने धर्म को भूल गए ।

कृपाचार्य श्रेष्ठ थे विद्वान थे किंतु वह सम्मान प्राप्त नहीं कर सके क्योंकि वह अपने धर्म को भूल गए ।

कर्ण बलवान था किंतु है सम्मानित नहीं हो पाया क्योंकि वह अपने धर्म को भूल गया ।

और जानते हैं सबका धर्म क्या था ?

सबका धर्म केवल एक ही था धर्म की रक्षा करना ।

सदा ध्यान रखिए ...

जहां धर्म तहां कृष्ण है और जहां कृष्णा तहां जीत ।

हां तो अब प्रश्न ये है कि हमें क्या करना चाहिए ...

उत्तर है कि इस राष्ट्र की रक्षा, इस राष्ट्र को सम्मान, इस राष्ट्र की ख्याति और इस राष्ट्र का भविष्य केवल वह पहले तरह का हिंदू ही सुनिश्चित करेगा जो गर्व से कहता है कि मैं हिंदू हूं । वह राष्ट्र की रक्षा करने के साथ-साथ धर्म की रक्षा करने के साथ-साथ उन बाकी तीन प्रकार के बचे हुए हिंदुओं का बोझ भी ढोएगा तो आप अपने दिल पर हाथ रखकर पहले तो यह चिंतन कीजिए कि आप किस तरह की हिंदू है यदि आप पहले तरह के हिंदू नहीं है जो गर्व से कहता है कि मैं हिंदू हूं तो आपको पहली तरह का हिंदू बनने का प्रयास करना चाहिए ।

आपको प्रयास करना चाहिए कि आप उस हिंदू के साथ खड़े रहें जो गर्व से स्वयं को हिंदू कह रहा है आप प्रयास कीजिए कि आपके पास जो भी क्षमता है आप उस हिंदू को लिए समर्पित करें जो गर्व से कह रहा है कि वह हिंदू है क्योंकि वह पहले तरह का हिंदू ही भविष्य में आपको बचाएगा और आपके बच्चों का भविष्य सुरक्षित करेगा ।

पूज्य हेडगेवार जी और गुरु गोलवलकर जी जैसा हिंदू चाहते थे वैसा हिंदू बनिए ।

वह चाहते थे कि हिंदू संगठित रहे, हिन्दू आत्मविश्वास से भरा हो, हिंदू बलवान बने, हिंदू भ्रमित न रहे और हिंदू अनुशासित रहे तो जिस हिंदू में इतने सारे गुण होंगे वह स्वयं पर गर्व करेगा ही और वह बिना झिझक के बोलेगा "गर्व से कहो हम हिंदू हैं"

और अंतिम बात भ्रमित मत रहिए । संगठित रहिए । सक्षम रहिए । समर्थ रहिए 

©राष्ट्रपुत्री समीक्षा सिंह । उत्तर प्रदेश 

आधार आपका अधिकार है भूलिए मत

TRN LIVE: Gems of BJP : कोई बताएगा की ये भगवान राम, भगवान कृष्ण की धरती से बुद्ध की धरती कब हो गयी? ये नीली जैकेट अभी चुनाव में भगवान राम और कृष्ण का नाम जपने वाली है वोटो के लिए, बस देखते जाइये, मैंने अपने मोहल्ले के गिरगिटों को यह पोस्ट दिखाई, उन सबको हार्ट अटैक आ गया, उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करवाया है, ICU में हैं बेचारे

TRN LIVE: जय भीम ~ जय मीम पर मजहबी अधिकारी का तड़का

 मामला जोधपुर का बताया जा रहा है जहां एक दलित बेटी के साथ एक जेहादी ने लव जेहाद का खेल खेला अपनी हवस की प्यास बुझाई और फिर पैसे गहने लेकर फरार हो गया इसपर भी तड़का इस बात का के अब जांच में एक मुस्लिम पुलिस अधिकारी बाधा डाल रहा है ऐसा कहा जा रहा है। अब भाई जिनके लिए मजहब फर्स्ट उनके लिए तो जेहादी को बचाना ही जरूरी हैं।

दलित भाइयों अब भी समय है जाग जाओ.. और जय भीम जय मीम जैसे पॉलिटिकल एजेंडे के शिकार होकर अपनी बहन बेटियों की जिंदगी बर्बाद मत करो। इन जेहादियों के लिए तुम चाहे दलित हो या सवर्ण तुम केवल काफिर हो और काफिर के साथ इन्हें क्या करना है वो सब जानते हैं

TRN LIVE: 🛑

समीक्षा की समीक्षा - भ्रमित हिन्दुओं का भयावह भविष्य 

इस लेख को पढ़ने की पहली शर्त यही है कि आप अपने आवरण को उतार कर अलग रखें और केवल एक व्यक्ति होकर सोचें , एक हिंदू होकर अपने भविष्य का चिंतन करें ।

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हाल के ही चार बयानों पर चर्चा करते हैं ।

1. भारत में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू ही है ।

2. भारत में चार तरह के हिन्दू हैं । कुछ गर्व से कहते हैं हम हिन्दू हैं , कुछ कहते हैं" गर्व की क्या बात ", कुछ धीरे से कहते हैं 'हम हिन्दू हैं ', कुछ भूल गए हैं कि वो हिन्दू हैं ।

3. भारत आने वाले तीस वर्ष में हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा 

4. भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की कोई आवश्यकता नहीं क्योंकि ये हिन्दू राष्ट्र ही है ।

यह चारों बयान अपने आप में कितने भ्रमित करने वाले हैं या और स्पष्ट तरीके से कहूं कि इन बयानों को देने वाला व्यक्ति स्वयं भ्रमित है ।

यदि भारत में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है तो फिर आपको एकांत में चिंतन करने की आवश्यकता है क्योंकि आपके लिए तो मार्गदर्शक मण्डल वाला ऑप्शन भी नहीं है ।

जब 1920 के दशक में खिलाफत मुहिम और असहयोग आंदोलन आरम्भ हुआ और मुस्लिम दंगे शुरू हुए तब पूज्य हेडगेवार जी ने हिंदू समाज की दुर्दशा को देखा और इसके कारणों को समझा, कारण तब भी लगभग वही थे जो आज हैं ..जैसे

कांग्रेस का मुस्लिम चरमपंथ को समर्थन, गांधी की हिन्दू मुस्लिम एकता के धोखे के पीछे हिन्दुओं के हितों की अनदेखी 

हिन्दुओं में संगठन की कमी, आत्मविश्वास की कमी, बल और अनुशासन की कमी । 

जब हिंदू समाज कमजोर पड़ रहा था और कांग्रेस हिंदू मुस्लिम एकता के धोखे के पीछे हिंदुओं का ही नाश करने पर तत्पर थी तब पूज्य हेडगेवार जी ने संकल्प लिया कि वह एक ऐसा संगठन बनाएंगे जो हिंदुओं को संगठित करेगा, हिंदुओं को अनुशासित रखेगा, हिंदुओं में आत्मविश्वास जगाएगा और हिंदुओं को बलिष्ठ बनाएगा, बलवान बनाएगा ताकि हिन्दू अपनी रक्षा स्वयं कर सकें ।

                                     तो प्रश्न है कि हिंदू किन से अपनी रक्षा कर सकें तो इसका उत्तर है उन्हीं से जिन्हें आज मोहन भागवत स्वयं हिंदू बता रहे हैं ।

कोई भी संगठन जब बनता है तो उसके लक्ष्य निश्चित किए जाते हैं, उसके उद्देश्य निश्चित किए जाते हैं तो यह तो हो सकता है कि कार्य करने के तरीकों में बदलाव हो, लक्ष्य तक पहुंचने के रास्ते के चुनाव में कई लोग हों, तो हो सकता है कि रास्ते अलग-अलग हो किंतु रास्तों के बदले जाने से लोगों के बदल जाने से, समूह के मुखिया के बदले जाने से कभी भी लक्ष्य नहीं बदलता, और जिस दिन आपने अपना निश्चित किया हुआ लक्ष्य बदल दिया तो आप वह रहे ही नहीं और जब आप वह रहे ही नहीं तो आपको वह सम्मान भी नहीं मिलना चाहिए जो तब मिल रहा था जब आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पित थे ।

भारत में चार तरह के हिंदू नहीं है भारत में केवल एक तरीके का हिंदू है जो कहता है कि गर्व से कहो हम हिंदू हैं और वह सिर्फ कहता ही नहीं है वह कहता तब है जब वह इसको मानता है और जब वह यह बात कहता है तो उसकी धमनियों का रक्त संकल्पित होता है कि इस राष्ट्र की रक्षा करने के लिए यदि उसे अपने प्राणों की आहुति भी देनी होगी तो भी वह एक क्षण के लिए चिंतन नहीं करेगा, बाकी के तीन तरह के हिंदू केवल उस हिंदू की टांग खींचने की चेष्टा में लगे हैं, उसको अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचने देना चाहते, उसकी राह में बाधा उत्पन्न करने के लिए हैं ।

यदि भारत में सभी हिंदू हैं तो फिर आप घर वापसी किनकी करवाना चाहते हैं फिर आपका लव जिहाद की बात करना तो केवल दोगलापन ही कहा जाएगा ।

यदि भारत में सब हिंदू ही हैं तो मैं आपके इस कथन से पूरी तरह सहमत हूं कि भारत अगले 30 वर्षों में हिंदू राष्ट्र बन जाएगा जानते हैं क्यों क्योंकि यही बात तो मुस्लिम कह रहे हैं कि अगले 30 वर्षों में गजवा ए हिंद हो जाएगा और जब आप सबको ही हिंदू मान रहे हैं तो फिर चाहे यह मुस्लिम राष्ट्र बने या सनातनी राष्ट्र आपके लिए तो हिंदू राष्ट्र ही रहेगा ।

मेरी कविताओं में जो एक मुख्य बिंदु होता है या मैं जो कहूं कि जो मेरी कविताओं का उद्देश्य,उसका लक्ष्य, उसकी आत्मा होती है वह यह होता है कि आपको अपने लक्ष्य प्राप्ति में या अपने लक्ष्य के प्रति या अपने लक्ष्य को लेकर कभी भी भ्रमित नहीं होना चाहिए । जैसे कि :

वीर की तो आयु होती मात्र कुछ क्षण 

पार्थ अब गांडीव से टंकार कर लो 

द्वंद्व में जीते नहीं जाते कभी रण 

हो भ्रमित तो हार को स्वीकार कर लो

तो लक्ष्य क्या है गुरु गोलवलकर जी ने कहा था कि हमें अपने राष्ट्र को तीन राक्षसों से बचाना है मेरे विचार से संघ का हर स्वयंसेवक जानता ही होगा कि वह तीनों कौन हैं ।

भीष्म पितामह बलवान थे पर वह सम्मानित नहीं रहे क्योंकि वह अपने धर्म को भूल गए ।

द्रोणाचार्य बुद्धिमान थे गुरु थे किंतु वह सम्मानित नहीं हो सके क्योंकि वह अपने धर्म को भूल गए ।

कृपाचार्य श्रेष्ठ थे विद्वान थे किंतु वह सम्मान प्राप्त नहीं कर सके क्योंकि वह अपने धर्म को भूल गए ।

कर्ण बलवान था किंतु है सम्मानित नहीं हो पाया क्योंकि वह अपने धर्म को भूल गया ।

और जानते हैं सबका धर्म क्या था ?

सबका धर्म केवल एक ही था धर्म की रक्षा करना ।

सदा ध्यान रखिए ...

जहां धर्म तहां कृष्ण है और जहां कृष्णा तहां जीत ।

हां तो अब प्रश्न ये है कि हमें क्या करना चाहिए ...

उत्तर है कि इस राष्ट्र की रक्षा, इस राष्ट्र को सम्मान, इस राष्ट्र की ख्याति और इस राष्ट्र का भविष्य केवल वह पहले तरह का हिंदू ही सुनिश्चित करेगा जो गर्व से कहता है कि मैं हिंदू हूं । वह राष्ट्र की रक्षा करने के साथ-साथ धर्म की रक्षा करने के साथ-साथ उन बाकी तीन प्रकार के बचे हुए हिंदुओं का बोझ भी ढोएगा तो आप अपने दिल पर हाथ रखकर पहले तो यह चिंतन कीजिए कि आप किस तरह की हिंदू है यदि आप पहले तरह के हिंदू नहीं है जो गर्व से कहता है कि मैं हिंदू हूं तो आपको पहली तरह का हिंदू बनने का प्रयास करना चाहिए ।

आपको प्रयास करना चाहिए कि आप उस हिंदू के साथ खड़े रहें जो गर्व से स्वयं को हिंदू कह रहा है आप प्रयास कीजिए कि आपके पास जो भी क्षमता है आप उस हिंदू को लिए समर्पित करें जो गर्व से कह रहा है कि वह हिंदू है क्योंकि वह पहले तरह का हिंदू ही भविष्य में आपको बचाएगा और आपके बच्चों का भविष्य सुरक्षित करेगा ।

पूज्य हेडगेवार जी और गुरु गोलवलकर जी जैसा हिंदू चाहते थे वैसा हिंदू बनिए ।

वह चाहते थे कि हिंदू संगठित रहे, हिन्दू आत्मविश्वास से भरा हो, हिंदू बलवान बने, हिंदू भ्रमित न रहे और हिंदू अनुशासित रहे तो जिस हिंदू में इतने सारे गुण होंगे वह स्वयं पर गर्व करेगा ही और वह बिना झिझक के बोलेगा "गर्व से कहो हम हिंदू हैं"

और अंतिम बात भ्रमित मत रहिए । संगठित रहिए । सक्षम रहिए । समर्थ रहिए 

©️राष्ट्रपुत्री समीक्षा सिंह । उत्तर प्रदेश 

आधार आपका अधिकार है भूलिए मत

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TRN LIVE: 🛑

भारत के विनाश की दास्तान खोजने के लिए एक मामूली विषय देता हूं। विनाश टुकड़ों में कैसे होता है?

मिर्च के बाजार में #गुंटूर का भारत में रुतबा हासिल करने से पहले पूरे पूर्वोत्तर, बंगाल में बिहार के #पटनिया_मिर्च का दबदबा था। मात्र चार दशक में बिहार का पटनिया मिर्च उजड़ गया। गुंटूर लहलहा उठा।

■ क्या #बिहारी_आत्मगौरव से लबरेज कोई मित्र इस राज को खोलेगा? आपका उत्तर बताएगा, #राजनीति की कितनी समझ है आपको? Narendra Modi की समीक्षा योग्य हैं या नहीं?

To explore the story of India's destruction, I'll offer a simple topic. How does destruction happen in fragments?

Before Guntur achieved its status in the chili market in India, Bihar's Pataniya chili peppers dominated the entire Northeast and Bengal. In just four decades, Bihar's Pataniya chili peppers were devastated, while Guntur flourished.

■ Will any friend, brimming with #Bihari_self-respect, reveal this secret? Your answer will reveal your understanding of #politics. Is Narendra Modi worthy of review or not?

TRN LIVE: सात सुर: संगीत के 7 प्राणी

भारतीय शास्त्रीय संगीत में सात मूल स्वर होते हैं — सा, रे, ग, म, प, ध, नी। इन्हें सप्तक भी कहा जाता है। इन सात स्वरों से ही संपूर्ण संगीत की रचना होती है। प्राचीन ग्रंथों में इन स्वरों की उत्पत्ति को प्रकृति और प्राणियों की ध्वनियों से जोड़ा गया है।

1. षड्ज (सा – मोर)  

सा स्वर को षड्ज कहा जाता है। मान्यता है कि इसकी ध्वनि मोर की आवाज़ से प्रेरित है। यह संगीत का आधार स्वर है और बाकी सभी स्वर इसी से उत्पन्न माने जाते हैं।

2. ऋषभ (रे – बैल)  

रे स्वर को ऋषभ कहते हैं। इसकी तुलना बैल की गूँजती हुई आवाज़ से की जाती है। यह स्वर स्थिरता और गहराई प्रदान करता है।

3. गांधार (ग – बकरा)  

गांधार स्वर को बकरे की ध्वनि से जोड़ा जाता है। यह स्वर मधुरता और भाव को प्रकट करता है।

4. मध्यम (म – बगुला)  

मध्यम स्वर को बगुले की शांत ध्वनि से संबंधित माना जाता है। यह स्वर संतुलन और शांति का प्रतीक है।

5. पंचम (प – कोयल)  

पंचम स्वर को कोयल की मधुर कूक से जोड़ा जाता है। यह स्वर संगीत में मधुरता और आकर्षण लाता है।

6. धैवत (ध – घोड़ा)  

धैवत स्वर को घोड़े की ऊर्जावान ध्वनि से प्रेरित माना जाता है। यह शक्ति और गति का प्रतीक है।

7. निषाद (नी – हाथी)  

निषाद स्वर को हाथी की गंभीर और गूंजती ध्वनि से जोड़ा जाता है। यह स्वर पूर्णता का संकेत देता है।

ये सातों स्वर मिलकर भारतीय संगीत की आत्मा बनाते हैं। शास्त्रीय गायन, वादन और रागों की रचना इन्हीं स्वरों पर आधारित है। प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सप्तक से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इनका ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

#bpsc #uppsc #ssccgl #upsssc #railway #generalknowledge #indianculture #classicalmusic #gkstudy #competitiveexams

TRN LIVE: *सुबह की देश राज्यों से बड़ी खबरें*

          *20- फरवरी - शुक्रवार*

                      👇

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*1* वैश्विक सीईओ के साथ पीएम मोदी का मंथन, एआई सहयोग और निवेश के अवसरों पर रहा जोर

*2* इमैनुएल मैक्रों बोले- राफेल डील से भारत मजबूत हो रहा, लोग कैसे कर सकते हैं आलोचना

*3* उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां बोलीं- भारत बन सकता है एआई का पावरहाउस, तकनीक में बड़े निवेश की जरूरत

*4* रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को विशाखापत्तनम में बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन 2026 का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा है कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन की स्वतंत्रता पर आधारित एक समतामूलक समुद्री व्यवस्था स्थापित करना चाहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर काम करना होगा

*5* उन्होंने कहा, 'पारंपरिक खतरों के साथ-साथ उभरती चुनौतियां भी मौजूद हैं। समुद्री डकैती, समुद्री आतंकवाद, अवैध मछली पकड़ना, तस्करी, साइबर जोखिम और महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान जैसी समस्याएं गंभीर हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं, जिससे मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों की मांग भी बढ़ी है।'

*6* राहुल गांधी को गोली मारने की धमकी, कांग्रेस ने करणी सेना के कार्यकर्ता का वीडियो शेयर किया; आरोपी कोटा से पकड़ाया

*7* कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान पर नाराजगी जताई है, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। पायलट ने इस बयान को गलत बताते हुए रिजिजू से माफी की मांग की है।

*8* भागवत जिस वंदे भारत से मेरठ पहुंचे, उस पर पथराव, खिड़की का शीशा टूटा, स्टेशन पर सिक्योरिटी के बीच उतरे; GRP की जांच जारी

*9* दिल्ली-कर्नाटक समेत 22 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की घोषणा, EC बोला- अप्रैल से प्रक्रिया शुरू होगी; अभी 12 राज्यों में वोटर्स वेरिफिकेशन जारी

*10* 22 फरवरी को सिंगापुर और जापान की यात्रा पर जाएंगे सीएम योगी, 600 kmph रफ्तार वाली मैग्लेव ट्रेन में करेंगे सफर

*11* भिवंडी में मेयर-डिप्टी मेयर को लेकर सियासत: एक साथ आए कांग्रेस-NCP और बागी भाजपा पार्षद; बने नए समीकरण

*12* बाज नहीं आ रहे बड़बोले ट्रंप; फिर अलापा युद्ध रुकवाने वाला राग,ट्रम्प बोले- मैंने भारत-PAK को 200% टैरिफ की चेतावनी दी, तब लड़ाई रोकने के लिए माने, संघर्ष में 11 फाइटर जेट्स गिरे थे

*13* 'अगर डील नहीं हुई तो...', ईरान को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की खुली चेतावनी, 10 दिन का दिया अल्टीमेटम, अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, ट्रंप बोले - 10 दिन में तय होगा समझौता या एक्शन

*14* ईरान ने गुरुवार को रूस के साथ वार्षिक सैन्य युद्ध अभ्यास किया। यह युद्ध अभ्यास ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिकी विमानवाहक  पोत पश्चिम एशिया के करीब पहुंच रहा है। अमेरिका और ईरान दोनों ने संकेत दिए हैं कि अगर तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता विफल हुई, तो वे युद्ध के लिए तैयार हैं

*15* जिम्बाब्वे ने लगातार दूसरे वर्ल्ड चैंपियन को हराया, ऑस्ट्रेलिया के बाद श्रीलंका को 6 विकेट से मात दी, 26 फरवरी को भारत से मुकाबला

*16* सुपर-8 के मैचों का पूरा शेड्यूल, 21 फरवरी से शुरुआत, 3 डबल हेडर होंगे, भारत 22 फरवरी को साउथ अफ्रीका से खेलेगा

*17* राजस्थान में कोहरा, तापमान 10 डिग्री लुढ़का, MP में 25 जिलों में बारिश, हरियाणा में ओले गिरे; उत्तराखंड के केदारनाथ में बर्फबारी

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TRN LIVE: . *जय श्री राम*

*शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 के मुख्य समाचार*

🔶दिल्ली-कर्नाटक समेत 22 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की घोषणा:EC बोला- अप्रैल से प्रक्रिया शुरू होगी; अभी 12 राज्यों में वोटर्स वेरिफिकेशन जारी

 🔶Punjab का दौरा करेंगे राहुल गांधी, किसानों के समर्थन में बड़ी रैली का आयोजन

🔶छत्तीसगढ़ में BJP सरकार का बड़ा फैसला: मुस्लिम कर्मचारियों को ऑफिस से 1 घंटा पहले छुट्टी 

🔶ईरान के पास सिर्फ 10 दिन का समय, ट्रंप बोले- 'सौदा नहीं हुआ तो बहुत बुरा होगा'

🔶DRDO का ड्रोग पैराशूट टेस्ट सफल, मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी को मिली मजबूती

🔶PM मोदी को कहा 200% टैरिफ लगा दूंगा; ट्रंप ने फिर अलापा युद्ध रुकवाने का राग

🔶गाजा पीस बोर्ड में बिना एजेंडा पहुंचे शहबाज शरीफ, पाकिस्तान की हुई बेइज्जती

🔶मोहन भागवत जिस वंदे भारत से मेरठ पहुंचे, उस पर पथराव:खिड़की का शीशा टूटा, स्टेशन पर सिक्योरिटी के बीच उतरे; GRP की जांच जारी

🔶शशि थरूर बोले-बड़े इवेंट्स में गड़बडियां हो सकती हैं:दिल्ली में चल रहे AI समिट की तारीफ की; राहुल ने इसे PR तमाशा बताया था

🔶सुप्रीम कोर्ट बोला-फ्री खाना मिलेगा तो लोग काम क्यों करेंगे:मुफ्त बिजली-पानी देने से काम करने की आदत ही खत्म हो जाएगी; सरकारें रोजगार दें

🔶'राफेल से आपके देश का ही फायदा...', भारत-फ्रांस डील पर मैक्रों का विपक्ष को जवाब!

🔶पीएम मोदी ने दुनिया को दिया 'MANAV' विजन, एआई के लिए तय किए 5 सूत्र, बताया भविष्य का रोडमैप

🔶कानपुर में फर्जी डिग्री सिंडिकेट का भंडाफोड़, 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों के नाम पर चल रहा था 'खेल'

🔶Iran: ईरान ने रूस के साथ किया युद्ध अभ्यास, पश्चिम एशिया के करीब पहुंचा अमेरिका का विमानवाहक पोत; तनाव बढ़ा

🔶AI Summit: उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां बोलीं- भारत बन सकता है एआई का पावरहाउस, तकनीक में बड़े निवेश की जरूरत

🔶US: 'पराग्वे के राष्ट्रपति युवा व आकर्षक, लेकिन मुझे महिलाएं पसंद', शांति बोर्ड की बैठक में ट्रंप का अजीब बयान

🔶Punjab: 31 साल से चल रहा था फरार! खालिस्तान कमांडो फोर्स का मोस्ट वांटेड आतंकी गिरफ्तार

🔶सिरोही को 535 करोड़ की बड़ी सौगात, आबूरोड से सांचौर तक बनेगा फोरलेन हाइवे!

🔶गोरखपुर में 339 करोड़ से बनेगा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, सीएम योगी ने MoU किया साइन

🔶महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवाजी महाराज की जयंती पर उनकी विरासत को किया याद

🔷अफगानिस्तान ने बड़ी जीत के साथ लिया टी20 वर्ल्ड कप से अलविदा, कनाडा को 82 रन से हराया

🔷T20 World Cup : जिम्बाब्वे की दूसरी बड़ी जीत, ऑस्ट्रेलिया के बाद अब श्रीलंका को हराया

           *आप का दिन शुभ और मंगलमय हो सुप्रभाqत....!*

                          जय हो🙏

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला