15 अप्रैल 2026 का 100 मुख्य समाचार जो इस तरीके से हैमौसम हो सर्द बारिश का या भरी रहे कितनी तपिश ! खुशियाँ और आनंद लेने वाले को कोई रोक नहीं सकती बंदिश!☺️

इस वीडियो से शिक्षा लेने की यह आवश्यकता है कि हिंदू जो 30 साल के बाद शादी करने लगे उनमें कुछ के तो तलाक हो जाते हैं और कुछ केवल 1 बच्चा पैदा करते हैं l हिन्दू अपने आप ही अल्पसंख्यक हो जाएगा l फिर सोचो कैसी जिंदगी जीओगे l

Apr 15, 2026 - 06:54
 0  1
15 अप्रैल 2026 का 100 मुख्य समाचार जो इस तरीके से हैमौसम हो सर्द बारिश का या भरी रहे कितनी तपिश ! खुशियाँ और आनंद लेने वाले को कोई रोक नहीं सकती बंदिश!☺️

TRNLIVE TRNDKB JITENDRA KUMAR JEETUDR : शहीद आश्रम रोड में हुआ विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन

देवघर। हिन्दू जागरण की दिशा को नई चेतना, नई ऊर्जा एवं गति प्रदान करने हेतू स्थानीय शहीद आश्रम रोड स्थित शिव बस्ती में सनातन संस्कृति, सनातन धर्म एवं सामाजिक एकता व समरसता हेतू विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। आयोजन का शुभारंभ भारत माता की तस्वीर पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इस अवसर पर भारी संख्या में महिलाएँ, पुरुष, युवा एवं समाजसेवी व प्रबुद्ध लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में सनातन धर्म को मजबूत करने ,हिन्दू‌ओं को जागरूक करने हेतू वकताओ ने अपने अपने महत्त्वपूर्ण विचार रखें। मौके पर, जामताड़ा-नारायणपुर से आयें सनातन अभियान के झारखंडी बाबा ने नैतिकता व धर्म को हिन्दू समाज की मजबूती का आधार बताया। उन्होंने हिन्दू‌ओं के नाम के आगे सनातनी लगाने का आहवान किया। साथ ही, उन्होंने गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की बात कही। मौनी बाबा आश्रम की महंत साध्वी मांडवी अनुचारी ने नारी शक्ति एवं नारीयो की भूमिका को अहम् व महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर संघ के प्रांत कार्यवाहक संजय कुमार ने कहा कि धर्म समाज को जोड़ने और सही मार्ग पर ले जाने का माध्यम है। इसके लिए हमें स्व पर विशेष जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि संघ की अनेकों अनुषंगी इकाईया हर क्षेत्रो मे हिन्दुओ के उत्थान के लिए कार्य कर रही है।हर हिंदूओ को जागरूक होने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र भक्ति वंदना के साथ किया गया।

The: मीरा पैलेस में 15 वाँ" "श्याम महोत्सव" धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

देवघर। स्थानीय जलसार रोड स्थित होटल मीरा पैलेस के भव्य प्रशाल में 15 वा". श्री श्याम महोत्सव बड़े ही धूमधाम एवं पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर "हारे का सहारा" श्री श्याम बाबा का पुष्पों व फूलों से भव्य आकर्षक श्रृंगार किया गया। आयोजक सुरेश केसरी के सौजन्य से पूरोहित द्वारा पूरे विधि विधान के साथ श्री श्याम बाबा की विधिवत पूजा की गई। मौके पर, कोलकत्ता से आयें जाने-माने मशहूर गायक श्री विकास झा एवं सिंगर विक्की शर्मा द्वारा एक से बढ़कर एक भजनों की अनुपम रोचक प्रस्तुति की गई। भजनों की भक्तिमय प्रस्तुति से आगन्तुक व भक्तगण भक्ति की गंगा में डूबे रहें। इस अवसर पर महिला, पुरुष- बच्चें सहित श्याम भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। मौके पर अन्तर्राष्ट्रीय वैश्य संगठन के जिला अध्यक्ष श्री प्रभाष गुप्ता ने कहा कि मान्यता है कि खाटु श्याम बाबा वास्तव में महाभारत काल के बहुत ही वीर, महान धनुर्धर व महान योद्धा बर्बरीक हैं। वे गदाधारी भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। उनकी माता अहिलवती ने उन्हें संस्कार दिए थे ,कि हमेशा उस पक्ष की ओर से लड़ना जो हार रहा हो। इसी कारण बाबा श्याम प्रभु को "हारे का सहारा" कहा जाता है।

Tejraftarnews.in 

: *🚩 𓆩⚡ हनुमंत सदा सहाय ⚡𓆪 🚩*

```हरि अनंत हरि कथा अनंता।

कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥

रामचंद्र के चरित सुहाए।

कलप कोटि लगि जाहिं न गाए॥``` 🙏

*✨ हिंदी भावार्थ ✨*

```भगवान हरि (श्रीराम) अनंत हैं, उनका कोई अंत नहीं है,

और उनकी कथा भी अनंत है।

सभी संतजन उनकी कथा को अनेक प्रकार से कहते और सुनते हैं।

श्रीराम के सुंदर चरित्र इतने महान हैं कि करोड़ों कल्प बीत जाएं,

फिर भी उनका पूर्ण वर्णन नहीं किया जा सकता।```

*🚩 𝄟ꕥ❥︎ जय जय बजरंगबली ❥︎ꕥ𝄟 🚩*

     ~- 𓂃°°𓆩🚩⃝⚡⃝💪⃝🛕𓆪°°𓂃 -~

: *卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*

*🌞 दिनांक - 15 अप्रैल 2026*

*⛅दिन - बुधवार*

*⛅विक्रम संवत् - 2083*

*⛅अयन - उत्तरायण*

*⛅ऋतु - वसंत*

*⛅मास - वैशाख* 

*⛅पक्ष - कृष्ण*

*⛅तिथि - त्रयोदशी रात्रि 10:31 तक तत्पश्चात् चतुर्दशी*

*⛅नक्षत्र - पूर्व भाद्रपद दोपहर 03:22 तक तत्पश्चात् उत्तर भाद्रपद*

*⛅योग - ब्रह्म दोपहर 01:25 तक तत्पश्चात् इन्द्र*

*⛅राहुकाल - दोपहर 12:27 से दोपहर 02:02 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* 

*⛅सूर्योदय - 06:06*

*⛅सूर्यास्त - 06:48 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*

*⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में*

*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:36 से प्रातः 05:21 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*

*⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं*

*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:04 से मध्यरात्रि 12:49 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* 

*🌥️व्रत पर्व विवरण - मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत*

*🌥️विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

       

*🌱गर्मियों में विशेष उपयोगी-पुदीना🌱*

*🔹पुदीना गर्मियों में विशेष उपयोगी एक सुगंधित औषध है यह रुचिकर, पचने में हलका, तीक्ष्ण, ह्रदय-उत्तेजक, विकृत कफ को बाहर लानेवाला, गर्भाशय-संकोचक , चित्त को प्रसन्न करनेवाला हैं ।*

*🔹पुदीने के सेवन से भूख खुलकर लगती है और वायु का शमन होता हैं । यह पेट के विकारों में विशेष लाभकारी है । श्वास, मुत्राल्पता तथा त्वचा के रोगों में भी यह उपयुक्त है ।*

*🔹औषधि प्रयोग🔹* 

*१] पेट के रोग : अपच, अजीर्ण, अरुचि, मंदाग्नि, अफरा, पेचिश, पेट में मरोड़, अतिसार, उलटियाँ, खट्टी डकारें आदि में पुदीने के रस में जीरे का चूर्ण व आधे नींबू का रस मिलाकर पीने से लाभ होता है ।*

*२] मासिक धर्म : पुदीने को उबालकर पीने से मासिक धर्म की पीड़ा तथा अल्प मासिक स्राव में लाभ होता है । अधिक मासिक स्त्राव में यह प्रयोग न करें ।*

*३] गर्मियों में : गर्मी के कारण व्याकुलता बढ़ने पर एक गिलास ठंडे पानी में पुदीने का रस तथा मिश्री मिलाकर पीने से शीतलता आती है ।*

*४] पाचक चटनी : ताजा पुदीना, काली मिर्च, अदरक, सेंधा नमक, काली द्राक्ष और जीरा – इन सबकी चटनी बनाकर उसमें नींबू का रस निचोड़ कर खाने ने रूचि उत्पन्न होती है, वायु दूर होकर पाचनशक्ति तेज होती है । पेट के अन्य रोगों में भी लाभकारी है ।*

*५] उलटी-दस्त, हैजा : पुदीने के रस में नींबू का रस, अदरक का रस एवं शहद मिलाकर पिलाने से लाभ होता है ।*

*६] सिरदर्द : पुदीना पीसकर ललाट पर लेप करें तथा पुदीने का शरबत पिएं ।*

*७] ज्वर आदि : गर्मी में जुकाम, खाँसी व ज्वर होने पर पुदीना उबाल के पीने से लाभ होता है ।*

*८] नकसीर : नाक में पुदीने के रस की ३ बूँद डालने से रक्तस्त्राव बंद हो जाता है ।*

*९] मूत्र-अवरोध : पुदीने के पत्ते और मिश्री पीसकर १ गिलास ठंडे पानी में मिलाकर पिएं ।*

*१०] गर्मी की फुंसियाँ : समान मात्रा में सूखा पुदीना एंव मिश्री पीसकर रख लें । रोज प्रात: आधा गिलास पानी में ४ चम्मच मिलाकर पिएं ।*

*११] हिचकी : पुदीने या नींबू के रस-सेवन से राहत मिलती है ।*

*🔹विशेषः पुदीने का ताजा रस लेने की मात्रा है 5 से 20 ग्राम । पत्तों का चूर्ण लेने की मात्रा 3 से 6 ग्राम । काढ़ा लेने की मात्रा 20 से 40 ग्राम । अर्क लेने की मात्रा 20 से 40 ग्राम । बीज का तेल लेने की मात्रा आधी बूँद से 3 बूँद ।*

*🌞🚩🚩 " ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩🌞

: 1️⃣5️⃣💎0️⃣4️⃣💎2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣

       *🔥 आज की प्रेरणा प्रसंग 🔥*

    *🌹 माँ के प्रेम की पराकाष्ठा 🌹*

गाँव के सरकारी स्कूल में संस्कृत की क्लास चल रही थी। गुरूजी दिवाली की छुट्टियों का कार्य बता रहे थे। तभी शायद किसी शरारती विद्यार्थी के पटाखे से स्कूल के स्टोर रूम में पड़ी दरी और कपड़ो में आग लग गयी। देखते ही देखते आग ने भीषण रूप धारण कर लिया। वहां पड़ा सारा फर्निचर भी स्वाहा हो गया। सभी विद्यार्थी पास के घरो से, हेडपम्पों से जो बर्तन हाथ में आया उसी में पानी भर भर कर आग बुझाने लगे।आग शांत होने के काफी देर बाद स्टोर रूम में घुसे तो सभी विद्यार्थियों की दृष्टि स्टोर रूम की बालकनी (छज्जे) पर जल कर कोयला बने पक्षी की ओर गयी।पक्षी की मुद्रा देख कर स्पष्ट था कि पक्षी ने उड़ कर अपनी जान बचाने का प्रयास तक नही किया था और वह स्वेच्छा से आग में भस्म हो गया था।

सभी को बहुत आश्चर्य हुआ।

एक विद्यार्थी ने उस जल कर कोयला बने पक्षी को धकेला तो उसके नीचे से तीन नवजात चूजे दिखाई दिए, जो सकुशल थे और चहक रहे थे। उन्हें आग से बचाने के लिए पक्षी ने अपने पंखों के नीचे छिपा लिया और अपनी जान देकर अपने चूजों को बचा लिया था। एक विद्यार्थी ने संस्कृत वाले गुरूजी से प्रश्न किया - गुरूजी, इस पक्षी को अपने बच्चो से कितना मोह था, कि इसने अपनी जान तक दे दी ?

गुरूजी ने तनिक विचार कर कहा - नहीं, यह मोह नहीं है अपितु माँ के प्रेम की पराकाष्ठा है, मोह करने वाला ऐसी विकट स्थिति में अपनी जान बचाता और भाग जाता। प्रेम और मोह में जमीन आसामान का फर्क है।

मोह में स्वार्थ निहित होता है और प्रेम में त्याग होता है। भगवान ने माँ को प्रेम की मूर्ति बनाया है और इस दुनिया में माँ के प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं है। माँ के उपकारो से हम कभी भी उपकृत नहीं हो सकते। इसलिए दोस्तों मां के आँखों में कभी आंसू मत आने देना!!

*सदैव प्रसन्न रहिये।*

*जो प्राप्त है, वो पर्याप्त है।।*

: 1️⃣5️⃣❗0️⃣4️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣

*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*

              *!! राजा और मंत्री !!*

°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

एक राजा जिसका बहुत बडा राज्य था। कोई कमी नहीं थी जो भी हुक्म करते वही हो जाता था। लेकिन राजा में एक आदत थी कि वह जो भी कोई थोड़ी सी गलती करता उसे तुरंत दस बडे खुंखार कुत्तों के सामने डालकर उसे कुत्तों से नुचवाता। राजा बडे गुस्से वाला था।

राजा की इस आदत से सभी परेशान थे। राजा का मंत्री भी राजा की इस आदत की आलोचना करता था। एक दिन उसी मंत्री से कोई गलती हो गयी। राजा को गलती का पता चला तो राजा ने तुरंत हुक्म दिया कि जाओ मंत्री को कुत्तों के सामने ले जाओ।

मंत्री ने राजा से गलती मानी, माफी मांगी लेकिन राजा ने कुछ नहीं सुना और कहा कि जो कह दिया सो कह दिया और सिपाहियों से कहा ले जाओ कुत्तों के बाडे में। मंत्री ने कहा ठीक है राजा जी लेकिन मेरी आखिरी इच्छा तो मान लो। राजा ने कहा ठीक है बताओ अपनी आखिरी इच्छा। मंत्री ने कहा मुझे दस दिन की महौलत दे दीजिए बस। राजा ने कहा ठीक है दस दिन की महौलत दे देते हैं।

लेकिन ग्यारहवें दिन सजा जरूर मिलेगी। मंत्री दस दिन तक राजा के पास नहीं आया। और ग्यारहवें दिन राजा के सामने पेश हो गया। राजा ने मंत्री को देखा और सिपाहियों से कहा जो सजा रखी थी मंत्री के लिए उसे पूरी की जाए। सिपाही मंत्री को कुत्तों के बाडे में लेकर गये, कुत्तों को भी खोल दिया गया। लेकिन कुत्ते मंत्री पर प्रहार करने के बजाय मंत्री से प्यार से पेश आ रहे थे।

यह देखकर राजा चौंक गया कि जिन कुत्तों को प्रहार करने के लिए ट्रेन किया गया है वे इतने प्यार से पेश आ रहे हैं। राजा ने मंत्री से कहा कि ये चमत्कार कैसे हो गया! इन कुत्तों को क्या हो गया है। मंत्री ने जवाब दिया कि इन दस दिनों में मैंने इन कुत्तों की बहुत सेवा की है। इन्हें खाना खिलाया, नहलाया अब ये कुत्ते जान चुके हैं कि मैं इनके लिए कुछ अच्छा करता हूँ ना कि बुरा। ये मुझ पर प्रहार नहीं करेंगे। मैंने आपकी इतने दिनों से सेवा की है, फिर भी आप मेरी एक गलती को माफ नहीं कर सके। आपसे ज्यादा अच्छे तो ये कुत्ते हैं जो अच्छा और बुरे को पहचानते हैं। राजा यह सब देखकर बड़ा शर्मिन्दा हुआ।

*शिक्षा:-*

हमें हमेशा सोच समझ कर फैसले लेने चाहिए। किसी की एक गलती को लेकर ही उसे जिन्दगी भर के लिए सजा नहीं देनी चाहिये बल्कि उसे माफ करने की हिम्मत रखनी चाहिए..!!

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*

*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

: 🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺

*🚩🌺श्रेष्ठ व्यक्तित्व का आधार: सनातन जीवन दर्शन*

*🚩🌺’सदैव प्रथम स्थान पर रहें_ मुस्कराने में... प्रशंसा करने में.... सहयोग करने में... क्षमा करने में..." और, अपनी गलती मान लेने में ॥*

🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺

*🚩🌺यह पंक्तियां वास्तव में एक उच्च कोटि के व्यक्तित्व की पहचान हैं। सनातन धर्म के ग्रंथों में इन पांच गुणों—मुस्कुराहट, प्रशंसा, सहयोग, क्षमा और आत्म-स्वीकृति—को केवल नैतिक मूल्य नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार और व्यक्तित्व विकास का आधार माना गया है।*

*🚩🌺सनातन संस्कृति में 'व्यक्तित्व विकास' का अर्थ केवल बाहरी आकर्षण नहीं, बल्कि 'चित्त शुद्धि' है। जब हमारा अंतःकरण शुद्ध होता है, तो वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।*

*🚩🌺1. मुस्कराने में प्रथम-- सकारात्मकता का प्रतीक*

*🚩🌺जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी प्रसन्न रहना एक आध्यात्मिक शक्ति है। भगवान श्रीकृष्ण का पूरा जीवन इसका प्रमाण है। कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में, जहाँ मृत्यु सामने खड़ी थी, वहां भी श्रीकृष्ण 'प्रसन्नवदन' (मुस्कुराते हुए) थे।*

*🚩🌺गीता (2.65) में कहा गया है: "प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते।"*

*अर्थात, चित्त के प्रसन्न होने पर संपूर्ण दुखों का अभाव हो जाता है। एक मुस्कुराता हुआ चेहरा न केवल स्वयं की ऊर्जा बचाता है, बल्कि दूसरों के तनाव को भी कम करता है।*

 🚩🌺*2. प्रशंसा करने में प्रथम: ईर्ष्या का त्याग*

*🚩🌺दूसरों के गुणों को पहचानना और उनकी मुक्त कंठ से प्रशंसा करना एक विशाल हृदय का लक्षण है। हम अक्सर दूसरों की कमियां खोजने में प्रथम रहते हैं, लेकिन धर्म हमें 'गुणग्राही' बनना सिखाता है।*

*🚩🌺हनुमान जी जब लंका से लौटे, तो भगवान राम ने उनके कार्यों की हृदय से प्रशंसा की। श्रीमद्भागवत के अनुसार, दूसरों के गुणों में दोष न ढूंढना (अनसूया) ही वास्तविक विद्वता है। प्रशंसा करने से व्यक्ति के भीतर का अहंकार कम होता है और वह दूसरों के साथ जुड़ाव महसूस करता है।*

*🚩🌺3. सहयोग करने में प्रथम: सेवा परमो धर्मः*

*🚩🌺सनातन धर्म 'परहित' (दूसरों का भला) को सबसे ऊपर रखता है।*

*गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं: "परहित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई॥"*

*अर्थात, दूसरों की सहायता करने के समान कोई धर्म नहीं है। चाहे वह गिलहरी का रामसेतु निर्माण में सहयोग हो या रंतिदेव का अपना भोजन भूखे को दे देना, हमारे ग्रंथ सिखाते हैं कि समाज के प्रति हमारा उत्तरदायित्व ही हमारे व्यक्तित्व को 'महापुरुष' की श्रेणी में लाता है।*

*🚩🌺4. क्षमा करने में प्रथम: वीरों का आभूषण*

*🚩🌺क्षमा को सनातन परंपरा में शक्ति का लक्षण माना गया है। महाभारत के वन पर्व में कहा गया है:*

*🌹🚩"क्षमा खड्गं करे यस्य दुर्जनः किं करिष्यति?"*

*🌹🌺जिसके हाथ में क्षमा रूपी तलवार है, दुर्जन उसका क्या बिगाड़ सकता है? भगवान राम ने विभीषण को, जो शत्रु का भाई था, न केवल क्षमा किया बल्कि गले लगाया। क्षमा करने वाला व्यक्ति मानसिक बोझ से मुक्त रहता है, जिससे उसकी निर्णय क्षमता और एकाग्रता बढ़ती है।*

*🌹🌺5. गलती मानने में प्रथम: सत्य और विनम्रता*

*🌹🌺अपनी भूल स्वीकार करना 'अहंकार' के विनाश की पहली सीढ़ी है। धर्मग्रंथों में 'पश्चाताप' को सबसे बड़ा प्रायश्चित माना गया है। जब राजा परीक्षित से भूल हुई, तो उन्होंने उसे छिपाया नहीं, बल्कि स्वीकार किया और सात दिनों तक गंगा तट पर कथा श्रवण कर आत्म-कल्याण का मार्ग चुना।*

*🌹🌺मनुस्मृति के अनुसार, अपनी गलती स्वीकार करने से पाप का प्रभाव समाप्त हो जाता है और बुद्धि निर्मल होती है। जो व्यक्ति अपनी गलती मान लेता है, वह सीखने के लिए तैयार रहता है, और यही निरंतर विकास की कुंजी है।*

*🌹🌺उपरोक्त पांचों गुण व्यक्ति को 'अहं' से 'वयं' (मैं से हम) की ओर ले जाते हैं। जो व्यक्ति इन क्षेत्रों में प्रथम रहने का प्रयास करता है, उसका व्यक्तित्व हिमालय की भांति अडिग और गंगा की भांति पवित्र हो जाता है। यह केवल व्यवहार नहीं, बल्कि एक साधना है जो हमें एक बेहतर मनुष्य और अंततः एक उन्नत समाज की ओर ले जाती है।*

*🚩🌺आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में, जहाँ लोग 'जीतने' की होड़ में हैं, आप इन गुणों के साथ 'हृदय जीतने' में प्रथम रहें।*

🚩🌺🚩🌺🚩🌺🚩🌺🚩🌺

: जीवन के प्रति बुरा रुख एक पंचर हुए पहिये के समान है। अगर आप इसे नहीं बदलते हैं तो आप जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ सकेंगे।

*आज से हम* अपने जीवन के रुख को बदलें और आगे बढ़े...हमेशा सही कार्य करना, चाहे कोई हमें देख रहा हो या नहीं - इसको कहा जाता है ईमानदारी आज से हम हमेशा ईमानदारी बनाये रखें...                                        

क्या यह बहुत अच्छा नहीं है कि हर दिन एक नई शुरुआत है। स्लेट साफ़ है और आप अपने वादे लिखने के लिए तैयार हैं। ये आपके इरादे हैं, खुद के प्रति आपकी प्रतिबद्धताएं हैं। आप जो भी शब्द कहते हैं, यदि आप उन्हें जोश के साथ जोर से कहते हैं तो वे आपके मन और आत्मा में गूंजते प्रतीत होते हैं। ऐसा करके आप खुद को रोजाना सिखाते हैं कि आप कैसे जीना चाहते हैं।

Tejraftarnews.in 

: *होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही फिर ठप, अमरीका की नाकाबंदी का तुरंत असर, कई जहाज वापस लौटे* 

अमरीका के होर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी लागू करने का तुरंत असर हुआ है और इस समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही एक बार फिर लगभग ठप हो गई है। समुद्री खुफिया फर्म लॉयड्स लिस्ट के मुताबिक, नाकाबंदी की घोषणा के बाद ट्रैफिक तुरंत रुक गया और कई जहाजों ने रास्ता बदल लिया या वापस लौट गए हैं। अमरीकी सेंट्रल कमांड ने सोमवार शाम साढ़े सात बजे से ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर नाकाबंदी (ब्लॉकेड) लागू कर दिया। इसके तहत ईरान के बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर नजर रखी जाएगी और उन्हें रोका जा सकता है। अमरीका की नाकेबंदी के तहत ईरान के सभी प्रमुख बंदरगाह निशाने पर होंगे। इसमें फारस की खाड़ी के साथ ओमान सागर में स्थित बंदरगाह भी शामिल हैं। अमरीकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, नाकेबंदी ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी। ईरान को टोल देने वाले जहाजों को भी रास्ते में रोक लिया जाएगा। हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले वे जहाज जो ईरान के अलावा अन्य देशों के बंदरगाहों के बीच सफर कर रहे हैं, उन्हें आने-जाने की इजाजत दी जाएगी। उधर, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि नाकाबंदी का मकसद ईरान की तेल बिक्री रोकना है।

इस बीच वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में हुई वार्ता के विफल होने के बाद अमरीका ईरान पर दोबारा सैन्य हमले करने पर भी विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि सभी विकल्प खुले हैं और हालात के हिसाब से आगे का फैसला लिया जाएगा। इसी बीच ईरान ने अमरीका को चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट और उसके बंदरगाहों को निशाना बनाया गया, तो फारस की खाड़ी और ओमान सागर में कोई भी पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गाड्र्स ने कहा कि क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। सुरक्षा सबके लिए नहीं होगी, तो किसी के लिए भी नहीं होगी। ईरान ने फिर दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह उसके कंट्रोल में है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को रियाल में टोल देना जरूरी होगा। उधर, ब्रिटेन ने अमरीका की ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी में शामिल होने से इनकार कर दिया है। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने अमरीका के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इस कदम से दुनिया के बाजारों पर बुरा असर पड़ेगा। उधर, ट्रंप की होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी की धमकी के बाद चीन ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है

भारतीय जहाजों को होर्मुज पार करने में मिलेगी मदद

तेहरान। ईरान ने कहा है कि वह भारत के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने में मदद करेगा। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने बताया कि ईरान और भारत के बीच इस मुद्दे पर अच्छी बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा तनाव के बावजूद ईरान चाहता है कि भारत के जहाज बिना किसी दिक्कत के इस रास्ते से गुजर सकें, इसलिए ईरान, नई दिल्ली की मदद करने के लिए तैयार है।

सात साल बाद भारत पहुंचा ईरानी कच्चा तेल

अमरीका और ईरान के बीच जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चल रही तनातनी के बीच ईरान से भारत के लिए बड़ी राहत आई है। करीब सात साल के बाद ईरान का कच्चा तेल फिर से भारत पहुंचा है। शिप ट्रैकिंग डाटा के अनुसार दो बड़े सुपरटैंकर भारत के पूर्वी और पश्चिमी तट पर पहुंचे हैं, जो ईरानी कच्चा तेल लेकर आए हैं। ‘फेलिसिटी’ और ‘जया’ नामक इन जहाजों में करीब 40 लाख बैरल कच्चा तेल है।

: *आज शौंगटौंग कड़छम की रिपोर्ट लेंगे सीएम सुक्खू, इंजीनियर्स से करेंगे चर्चा, बैराज का भी लेंगे जायजा* 

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल दिवस राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए मंगलवार को जनजातीय जिला किन्नौर जा रहे हैं। मंगलवार को किन्नौर पहुंचते ही सबसे पहले शौंगटौंग कड़छम की रिपोर्ट लेंगे। इस प्रोजेक्ट की कुल तीन यूनिट हैं। इनमें से एक यूनिट को इसी साल दिसंबर या जनवरी में चलाने का लक्ष्य है। कुल 450 मेगावाट के इस प्रोजेक्ट से हर साल हिमाचल को बिजली बेचने से 1000 करोड़ का राजस्व आएगा। यही कारण है कि पहले से ही लेट हो चुके इस प्रोजेक्ट को मुख्यमंत्री जल्द शुरू करवाना चाहते हैं। वह मंगलवार को इस प्रोजेक्ट के इंजीनियरों से चर्चा करेंगे और फिर बैराज साइट का जायजा भी लेंगे। ऊर्जा निगम के अधिकारी मुख्यमंत्री को प्रेजेंटेशन भी देंगे। मुख्यमंत्री मंगलवार को 11.30 बजे अनाडेल से हेलिकॉप्टर से कड़छम हैलिपेड पर 12.15 बजे पहुंचेगे। उसके बाद कड़छम से शौंगटौंग कड़छम 2.15 बजे तक पहुंचेगे। यहां मुख्यमंत्री कड़छम प्रोजेक्ट के इंजीनियरों और कर्मचारियों से मिलेंगे। उसके बाद शौंगटौंग कड़छम पावर हाउस साइट पर 2.45 बजे पहुंचेंगे।

यहां से निकलकर 2.55 पर मुख्यमंत्री शोंगटोंग कड़छम के पोवारी जाएंगे। यहां पर मुख्यमंत्री निर्माण कार्य का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद 3.25 बजे शौंगटौंग से रिकांगपिओ रेस्ट हाउस जाएंगे, जहां मुख्यमंत्री 3.55 बजे पहुंचेगे। यहां पर मुख्यमंत्री स्थानीय लोगों के साथ भी मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री सुक्खू के लिए यहां चाय नाश्ते का भी प्रबंध किया गया है। उसके बाद 4.35 पर निकलेंगे, उसके बाद कल्पा राजीव गांधी खेल परिसर 4.50 बजे पहुंचेंगे। यहां पर मुख्यमंत्री सुक्खू राजीव गांधी खेल परिसर में निर्माणाधीन कार्य और पॉलीटेक्रिककालेज भवन कल्पा का निरीक्षण भी करने वाले हंै। इसके बाद 5.20 बजे राजीव गांधी खेल परिसर से निकलकर 5.30 बजे सर्किट हाउस कल्पा पहुंचेंगे और रात को यहीं रुकेंगे।

आकाशवाणी और दूरदर्शन से मुख्यमंत्री का संदेश

हिमाचल दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेशवासियों के नाम संदेश देंगे, जिसे आकाशवाणी शिमला से 14 अप्रैल, 2026 को शाम आठ बजे प्रसारित किया जाएगा। यह संदेश एफएम शिमला, एफएम हमीरपुर, एफएम धर्मशाला और आकाशवाणी शिमला के सभी रिले केंद्रों से एक साथ प्रसारित किया जाएगा। दूरदर्शन केंद्र, शिमला से हिमाचल दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री का संदेश 14 अप्रैल, 2026 को शाम 7:30 बजे प्रसारित किया जाएगा।

: *नोएडा में तोडफ़ोड़, 150 से ज्यादा गाडिय़ां तोड़ीं, Salary बढ़ाने की मांग कर रहे कर्मचारियों का हिंसक प्रदर्शन* 

सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर नौ अप्रैल से आंदोलन कर रहे नोएडा की फैक्टरियों के सैकड़ों कर्मचारी अपनी सुनवाई न होने पर सोमवार को सडक़ों पर उतर आए और हिंसक प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने अलग-अलग इलाकों में 50 से ज्यादा फैक्टरियों में पथराव, तोडफ़ोड़ की। 150 से ज्यादा गाडिय़ों में तोडफ़ोड़ और करीब 50 से ज्यादा फूंक दीं। सबसे पहले फेज-2 इलाके में हालात खराब हुए। सैकड़ों कर्मचारी हाथ में डंडे-लाठी लेकर सडक़ों पर उतर आए। फेज-2 के बाद धीरे-धीरे प्रदर्शन नोएडा के करीब 10 इंडस्ट्रियल इलाकों और आसपास के जिलों में फैल गया। कर्मचारियों ने नोएडा सेक्टर-57 में 30 से ज्यादा फैक्टरियों और दफ्तरों में तोडफ़ोड़ की। सेक्टर- 40 और 60 में कंपनियों का घेराव किया। सेक्टर 85 में डिक्सन कंपनी का गेट तोड़ दिया। सेक्टर 1, 15, 62 और डीएनडी फ्लाइओवर के पास सडक़ जाम कर दी।

पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो उन्हें दौड़ा लिया। उनकी गाड़ी पलट दी। हालात बिगड़े तो कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने उन पर पथराव कर दिया। फिर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, वे रुकेंगे नहीं। हालात को काबू करने के लिए कुछ इलाकों में आरएफ और पीएसी उतार दी गई। डीजीपी राजीव कृष्ण और एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अमिताभ यश कंट्रोल रूम से स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। डीजीपी ने कहा है कि अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुजफ्फरनगर में एक कार्यक्रम के दौरान श्रमिकों से अशांति पैदा करने वालों से सावधान रहने की अपील की। इसके अलावा योगी सरकार ने जांच के लिए हाईलेवल कमेटी बनाई है।

: *Jalori Tunnel : डीपीआर की आपत्तियां दूर, अब केंद्र की हां का इंतजार, टनल बनने से आसान होगी पहाड़ की राह* 

जलोड़ी टनल निर्माण को 1775 करोड़ की है डीपीआर, टनल बनने से आसान होगी पहाड़ की राह

हिमाचल की बहुचर्चित जलोड़ी टनल की डीपीआर मंजूरी की राह साफ हो गई है। प्रदेश ने डीपीआर पर लगाई गई सभी आपत्तियों को दूर कर दिया है, जिसके बाद अब केंद्र से इसकी मंजूरी मिलने का इंतजार हो रहा है। 1775 करोड़ की यह डीपीआर है। उम्मीद है कि इसी वर्ष केंद्र सरकार इसको लेकर अपनी हरी झंडी प्रदान कर देगी। जानकारी के अनुसार जलोड़ी टनल निर्माण को लेकर केंद्र को भेजी गई डीपीआर में जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया ने कुछ आपत्तियां लगाई थीं। जीओआई ने प्रदेश को इन ऑब्जर्वेशन को दूर करने को कहा था। इस पर लोक निर्माण विभाग के एनएच विंग ने तत्परता के साथ कार्रवाई करते हुए डीपीआर में लगाई गई आपत्तियों को दूर कर दिया और इस बावत केंद्र को फाइल प्रेषित कर दी है, जिसके बाद अब डीपीआर को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीदें भी बंध गई हैं। करीब 1775 करोड़ की यह डीपीआर है और अब गेंद पूरी तरह से केंद्र के पाले में है।

प्रदेश के आनी उपमंडल के भरगोल से बंजार उपमंडल के सोझा तक बनने वाली इस टनल की लंबाई 4.2 किलोमीटर बताई गई है। आनी की ओर से टनल के मुहाने तक दो किलोमीटर और बंजार से 5.5 किलोमीटर अप्रोच रोड भी बनाया जाना है। जलोड़ी जोत टनल बन जाने के बाद आनी से कुल्लू की दूरी भी आठ किलोमीटर कम हो जाएगी। वहीं, टनल बनने के बाद बंजार-लुहरी-सैंज सडक़ मार्ग पर साल भर गाडिय़ों की आवाजाही होगी। इससे लोगों के समय के साथ-साथ पैसों की भी बचत होगी। इस टनल के बनने से वाया बंजार होते हुए शिमला से मनाली की दूरी भी करीब 40 से 50 किलोमीटर कम हो जाएगी।

किसान-बागबानों को लाभ

चार किलोमीटर से अधिक लंबी प्रस्तावित इस टनल के निर्माण से कुल्लू और शिमला के बीच यात्रा को पूरी तरह बदल देगी। इस टनल के निर्माण से सेब उत्पादक, किसान और छोटे व्या.२पारी सीधे लाभान्वित होंगे। वहीं, भूस्खलन और खराब मौसम के दौरान वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग मिलेगा। अब सबकी नजरें केंद्र की मंजूरी पर टिकी हैं। बता दें कि इस टनल निर्माण को लेकर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी मामला समय-समय पर केंद्र के समक्ष उठाते रहे हैं।

: *HP Weather : हिमाचल में तीन दिन बारिश-बर्फबारी, 16 से बदलेगा मौसम का मिजाज, किसानों की बढ़ी टेंशन* 

Himachal Weather

16 अप्रैल से बदलेगा मौसम का मिजाज; तूफान भी चलेगा, किसानों की बढ़ी टेंशन

हिमाचल प्रदेश में मौसम के बदले तेवर आगामी दिनों में फिर से देखने को मिलेंगे। राज्य में अगले दो दिन मौसम साफ रहने के बाद 16 अप्रैल से फिर बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार 15 अप्रैल तक प्रदेश में मौसम सामान्यत: शुष्क रहेगा, लेकिन इसके बाद एक ताजा व पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से 16 से 19 अप्रैल के बीच कई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इस दौरान उच्च पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी होने के आसार हैं। खासकर 18 और 19 अप्रैल को कुछ स्थानों पर आंधी और आसमानी बिजली के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। इसे लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। 16 अप्रैल से पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बादल बढ़ेंगे और कई स्थानों पर हल्की वर्षा की गतिविधियां शुरू हो सकती हैं।

कहा, कितना तापमान

शिमला 21.2, सुंदरनगर 29.3, भुंतर 28.5 कल्पा 18.4, धर्मशाला 26.0, सोलन 27.5, कांगड़ा 29.7 व ताबो 15.9 डिग्री सेल्सियस हो गया।

अप्रैल महीने में 140 प्रतिशत से ज्यादा बारिश दर्ज

अप्रैल महीने में अब तक प्रदेश में सामान्य से करीब 140 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलों तथा फलदार पौधों विशेष रूप से सेब को नुकसान भी हुआ है। वहीं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हालिया बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट का असर बना हुआ है।

न्यूनतम तापमान

केलांग – 0.8, ताबो 1.0, कुकुमसेरी 2.1, कल्पा 2.8, मनाली 5.7, कुफरी व सेओबाग 6.4, धर्मशाला 7.8, भुंतर 9.2, सोलन 9.5, शिमला 10.0, पालमपुर 10.5, चंबा 10.8, बरठीं 10.9, सुंदरनगर 11.8, नाहन 12.1, जुब्बड़हट्टी 12.2, कांगड़ा 12.4, मंडी 12.9, बिलासपुर 13.5, ऊना 13.8, देहरा गोपीपुर 17.0 और पांवटा साहिब 18.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

: *पीएमओ पहुंची कांगड़ा ट्रेन की आवाज, दीपक भारद्वाज के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचा प्रतिनिधिमंडल* 

रेलवे परामर्श समिति के मेंबर दीपक भारद्वाज के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान और जीवनरेखा मानी जाने वाली कांगड़ा घाटी रेल लाइन के अस्तित्व को बचाने के लिए ‘कांगड़ा घाटी रेल संघर्ष समिति’ देश की राजधानी पहुंच गई है। समिति के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय, पीएमओ और रेल मंत्री कार्यालय पहुंचकर क्षेत्र की मांगों और चिंताओं से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया। यह मांग पत्र रेलवे परामर्श कमेटी, उत्तर रेलवे के सदस्य और संघर्ष समिति के सदस्य दीपक भारद्वाज द्वारा दिया गया।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने रेल मंत्रालय से ज्ञापन की आधिकारिक रिसीविंग भी प्राप्त की। दीपक भारद्वाज ने बताया कि कांगड़ा रेल केवल परिवहन का एक माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि रेलवे परामर्श कमेटी का सदस्य बनने के बाद से ही कांगड़ा रेल और जर्जर हालत में पड़े चक्की पुल का मुद्दा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है। श्री भारद्वाज ने बताया कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने लोकसभा में भी इस संबंध में प्रश्न लगवाने के लिए विभिन्न सांसदों से व्यक्तिगत रूप से भेंट कर निवेदन किया है।

जनसमर्थन से संघर्ष को शक्ति

समिति ने स्पष्ट किया कि जमीन स्तर पर चलाए गए जागरूकता अभियान के कारण आज यह मुद्दा एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। दीपक भारद्वाज के अनुसार संघर्ष समिति ने आने वाली पीढिय़ों को यह संदेश दिया है कि अपनी धरोहर की रक्षा के लिए संगठित होकर लडऩा जरूरी है।

सकारात्मक निर्णय की उम्मीद

व्यस्तता के चलते रेल मंत्री से प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के बाद समिति काफी उत्साहित है। समिति को पूर्ण विश्वास है कि केंद्र सरकार कांगड़ा घाटी रेल लाइन के सुदृढ़ीकरण और विकास के लिए शीघ्र ही ठोस निर्णय लेगी।

: *राज्यपाल कविंद्र गुप्ता से मिले सीएम, बताया शिष्टाचार भेंट, कैबिनेट विस्तार को लेकर भी अटकलें* 

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को लोक भवन जाकर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को पारंपरिक हिमाचली टोपी, शॉल तथा स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर राज्य के विकास एवं जनकल्याण से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। हालांकि मुख्यमंत्री का अचानक दिल्ली से लौटने के बाद राज्यपाल के पास जाना राजनीतिक क्षेत्र में सामान्य नहीं होता और इससे मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें चल पड़ती हैं। वर्तमान सरकार का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो गया है और शेष दो साल बचे हैं।

इसलिए मंत्रिमंडल में खाली पड़ी एक सीट को भरने के लिए चर्चाएं तेज हो जाती हैं। सीएम कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के लिए दिल्ली गये थे। फिर वहीं से ऊना और कुल्लू होते हुए शिमला लौटे हैं। शिमला लौटने के बाद उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात की। मंगलवार को सीएम हिमाचल दिवस समारोह के लिए शिमला से किन्नौर जा रहे हैं।

: *Mandi : सिया हत्याकांड के विरोध में सरकाघाट में चक्का जाम, आरोपी को फांसी की सजा देने की उठाई मांग* 

लोगों ने जाहू हाई-वे पर मौहीं के पास रोकी गाडिय़ां

पुलिस-प्रशासन के आश्वासन पर खोला ट्रैफिक

सिया हत्याकांड के विरोध में सरकाघाट में लोगों का गुस्सा सडक़ों पर फूट पड़ा। सरकाघाट-जाहू सुपर हाई-वे पर मौहीं के पास सैकड़ों लोगों गाडिय़ां रोक मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गई और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। देर रात तक यह प्रर्दशन चलता रहा। प्रर्दशन के माध्यम से आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर तुरंत पुलिस की क्यूआरटी टीम और डीएसपी पहुंच गए। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए लोग न्याय की मांग पर अड़े रहे। लोगों का कहना था कि ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और प्रशासन समय रहते सख्त कदम नहीं उठा रहा, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं और युवाओं ने कहा कि सिया को इनसाफ मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

कई स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अगर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती, तो शायद यह दर्दनाक घटना टल सकती थी। व्यापारियों और राहगीरों को भी जाम के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब तीन घंटे तक चले इस चक्का जाम के बाद पुलिस और प्रशासन के आश्वासन पर लोगों ने धीरे-धीरे रास्ता खोला। डीएसपी ने भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इलाके में स्थिति मनावपूर्ण, आज भी प्रदर्शन

फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, जबकि पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। मंगलवार को सरकाघाट में कई पार्टियां और संगठन प्रदर्शन करेंगे। एसएफआई, माकपा और अन्य पार्टियां प्रर्दशन करेंगी। सिया हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है और अब हर किसी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है

: *हिमाचल दिवस समारोह को रिकांगपिओ तैयार, बतौर चीफ गेस्ट मौजूद रहेंगे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू* 

किन्नौर में पहली बार हो रहा आयोजन, बतौर चीफ गेस्ट मौजूद रहेंगे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू

जनजातीय जिला किन्नौर इस वर्ष 78वें राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस समारोह का गवाह बनने जा रहा है। किन्नौर को पहली बार राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस समारोह की मेजबानी का अवसर मिला है, जिससे स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। जिला मुख्यालय रिकांगपिओ में आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। सोमवार को राज्य स्तरीय परेड की रिहर्सल की गई, जिसका निरीक्षण उपायुक्त किन्नौर डा. अमित कुमार शर्मा और पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने किया। इस दौरान आयोजन स्थल और व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया गया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

उपायुक्त डा. अमित कुमार शर्मा ने बताया कि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के साथ विस्तृत चर्चा के बाद रिकांगपिओ के मिनी स्टेडियम को मुख्य आयोजन स्थल के रूप में चयनित किया गया है। 15 अप्रैल को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। समारोह का मुख्य आकर्षण राज्य स्तरीय परेड होगी, जिसमें विभिन्न सुरक्षा बलों की टुकडिय़ां हिस्सा लेंगी। इसके साथ ही हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक भी प्रस्तुत की जाएगी। प्रदेश के तीन से चार अन्य जिलों के सांस्कृतिक दल किन्नौर के स्थानीय कलाकारों के साथ मंच साझा करेंगे। वहीं, विभिन्न सरकारी विभाग अपनी योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित करेंगे।

: *Bihar New CM : बिहार में नए सीएम का ऐलान आज, कल बनेगी नई सरकार* 

दो बजे जदयू, तीन बजे भाजपा और चार बजे एनडीए विधायक दल की होगी बैठक

बिहार के नए मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे पटना के लोकभवन में शपथ लेंगे। पार्टी दफ्तार से लेकर राजभवन तक इसकी तैयारी चल रही है। सोमवार को केवल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास पर महत्त्वपूर्ण बैठकें हुईं। यहां पर नेताओं के बीच नए मंत्रिमंडल पर बाचतीत हुई। सूत्रों के अनुसार मंगलवार को दो बजे जदयू, तीन बजे भाजपा और चार बजे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी और इसके बाद नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा होगी।

सूत्रों की मानें तो केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी भी पटना आ सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार शाम को पटना आएंगे। वह लोक भवन में रुकेंगे। पीएम 15 अप्रैल को नई सरकार के शपथ ग्रहण में शामिल होंगे।

: *नहीं करने देंगे चार शादियां, बंगाल में शाह की हुंकार, बीजेपी की सरकार बनते ही राज्य में लागू करेंगे यूसीसी* 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बर्धमान की रैली में कहा कि बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने पर यहां यूसीसी लागू करेंगे और कुछ लोगों को चार शादियां नहीं करने देंगे। इसके साथ ही उन्होंने पांडेश्वर के भाजपा के उम्मीदवार जितेंद्र तिवारी का परिचय कराते हुए कहा कि पिछले चुनाव में जितेंद्र तिवारी बहुत कम वोटों से पिछड़ गए थे। इस बार आप इन्हें विजयी बनाकर भेजो, हम तिवारी को बड़ा आदमी बनाएंगे। शाह ने कहा कि कुछ लोगों को चार शादियों की छूट है। किसी को चार शादी की छूट होनी चाहिए क्या? पांच मई को भाजपा सरकार बना दो, हम यूसीसी लगाएंगे और उन लोगों को चार शादियां नहीं करने देंगे।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी अपने चेले-चपाटों के दम कर बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने का सपना देख रही हैं। पांच मई को बीजेपी आएगी और किसी हालत में बंगाल में बाबरी मस्जिद नहीं बनेगी। अमित शाह ने कहा कि ममता की सरकार को निकालने का मतलब है, घुसपैठ मुक्त सरकार बनाना। बंगाल से घुसपैठियों को बाहर निकालना है। उन्होंने सवाल किया कि क्या दीदी या भाइपो (भतीजा) उन्हें निकाल सकते हैं? केवल भाजपा निकाल सकती है। उन्होंने कहा कि ममता दीदी 600 एकड़ जमीन बीएसएफ को नहीं देती है, ताकि बाड़ लगाने का काम पूरा नहीं हो।

: *इस अदालत से इनसाफ की उम्मीद नहीं, अरविंद केजरीवाल ने जज स्वर्ण कांता शर्मा पर लगाए बड़े आरोप* 

दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी बात पूरी कर दी है। उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से मांग की है कि वह इस केस को सुनना बंद करें, क्योंकि उनके मन में केजरीवाल के खिलाफ पहले से राय बन चुकी है। केजरीवाल ने एक नहीं, बल्कि कई बड़े कारण गिनाए हैं। केजरीवाल ने कहा कि जस्टिस शर्मा ने अधिवक्ता परिषद के कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। यह एक ऐसा संगठन है, जो एक खास विचारधारा से जुड़ा है। केजरीवाल ने कहा कि आप उस विचारधारा का खुलकर विरोध करती है, इसलिए उनके मन में यह डर है कि अगर जज उस विचारधारा की समर्थक हैं और मैं उसका विरोधी हूं तो क्या मुझे इनसाफ मिलेगा?

केजरीवाल ने एक टीवी कार्यक्रम का हवाला दिया, जिसमें गृह मंत्री ने कथित तौर पर कहा था कि जब हाई कोर्ट का फैसला आएगा, तो केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ेगा। केजरीवाल ने कहा कि फैसला आने से पहले ही गृह मंत्री को यह कैसे पता चल गया कि फैसला उनके खिलाफ जाएगा? यह बात संदेह पैदा करती है। केजरीवाल ने कहा कि पांच मामलों में देखा गया कि ईडी और सीबीआई ने जो भी मांगा, इस अदालत ने लगभग हर बार वही माना। सिर्फ एक मामले में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सीबीआई मुझे जल्दी से जल्दी दोषी साबित करने की कोशिश में है और यह अदालत सीबीआई की हर बात का समर्थन करती रही है।

: *IPL 2026 : सीएसके जीत के जोश से लबरेज, केकेआर को अभी भी तलाश* 

आज चेन्नई में शाम 7:30 बजे से टकराएंगे गायकवाड़-रहाणे

पिछले मैच में जीत से उत्साहित चेन्नई सुपर किंग्स की टीम मंगलवार को चेन्नई में होने वाले आईपीएल के मैच में अब तक एक भी मैच न जीतने वाली कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम के खिलाफ दबदबा बनाने की कोशिश करेगी। सीएसके ने दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ खेल के हर विभाग में अच्छा प्रदर्शन करके सत्र की अपनी पहली जीत दर्ज की। उसकी इस जीत के नायक संजू सैमसन रहे, जिन्होंने 56 गेंद पर नाबाद 115 रन की पारी खेली। इसके बाद उसके गेंदबाजों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। डेवाल्ड ब्रेविस के फिट होकर वापसी करने से सीएसके को अपने गेंदबाजी संयोजन में बदलाव करने की छूट मिली, जिससे वह दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 212 रन का बचाव करने में सफल रही। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज गुरजपनीत सिंह ने अपने आईपीएल पदार्पण पर प्रभावित किया। जेमी ओवरटन ने भी शानदार प्रदर्शन किया और लगातार अच्छी गेंदबाजी करते हुए चार विकेट लिए।

सत्र का अपना पहला मैच खेल रहे बाएं हाथ के स्पिनर अकील हुसैन ने पावरप्ले में सीएसके के गेंदबाजी आक्रमण को एक और आयाम प्रदान किया। अब सीएसके संघर्ष कर रही केकेआर के खिलाफ एक बड़ी पारी खेलकर लय हासिल करने की कोशिश करेंगे। टूर्नामेंट की शुरुआत में यह घोषणा की गई थी कि महेंद्र सिंह धोनी पिंडली में खिंचाव के कारण कुछ हफ्तों के लिए बाहर रहेंगे। पिछले मैच में गायकवाड़ ने संकेत दिया था कि यह स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज जल्द वापसी करेगा। दूसरी ओर केकेआर जीत के लिए बेताब है। कैमरन ग्रीन ने पिछले मैच में केकेआर के लिए गेंदबाजी की। यह ऑलराउंडर चेपॉक में शानदार प्रदर्शन करके अपनी मोटी कीमत को सही साबित करने की कोशिश करेगा। रहाणे ने बल्लेबाजी में अच्छा प्रदर्शन किया है, जबकि अंगकृष रघुवंशी ने भी प्रभाव छोड़ा है।

[: *पंचरुखी की आशवी धीमान को बड़ा सम्मान* 

 ‘लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ की ओर से मिला ‘Certificate of Appreciation’

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिलाके पालमपुर उपमंडल के अंतर्गत पंचरुखी क्षेत्र की बाल कलाकार आशवी धीमान ने एक बार फिर प्रदेश का नाम रोशन किया है। आशवी को यूनाइटेड किंगडम की प्रतिष्ठित संस्था ‘लंदन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉड्र्स’ की ओर से ‘Certificate of Appreciation’ प्रदान किया गया है। यह सम्मान आशवी को नन्ही टीवी कलाकार, मॉडल और हिमाचली संस्कृति की प्रचारक के रूप में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है।

खास बात यह है कि इस सम्मान के साथ ही आशवी का नाम ‘लंदन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉड्र्स’ में भी दर्ज हो गया है, जो उनके लिए बेहद गर्व का पल है। कम उम्र में ही बड़ी उपलब्धियां हासिल कर चुकी आशवी धीमान अब तक कुल 170 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात है। स्थानीय लोगों और क्षेत्रवासियों में इस उपलब्धि को लेकर खुशी की लहर है। आश्वी की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर लगन और मेहनत सच्ची होए तो छोटी उम्र भी बड़े सपनों को साकार करने से नहीं रोक सकती।

[: *पीएमओ पहुंची कांगड़ा ट्रेन की आवाज, दीपक भारद्वाज के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचा प्रतिनिधिमंडल* 

रेलवे परामर्श समिति के मेंबर दीपक भारद्वाज के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान और जीवनरेखा मानी जाने वाली कांगड़ा घाटी रेल लाइन के अस्तित्व को बचाने के लिए ‘कांगड़ा घाटी रेल संघर्ष समिति’ देश की राजधानी पहुंच गई है। समिति के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय, पीएमओ और रेल मंत्री कार्यालय पहुंचकर क्षेत्र की मांगों और चिंताओं से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया। यह मांग पत्र रेलवे परामर्श कमेटी, उत्तर रेलवे के सदस्य और संघर्ष समिति के सदस्य दीपक भारद्वाज द्वारा दिया गया।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने रेल मंत्रालय से ज्ञापन की आधिकारिक रिसीविंग भी प्राप्त की। दीपक भारद्वाज ने बताया कि कांगड़ा रेल केवल परिवहन का एक माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि रेलवे परामर्श कमेटी का सदस्य बनने के बाद से ही कांगड़ा रेल और जर्जर हालत में पड़े चक्की पुल का मुद्दा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है। श्री भारद्वाज ने बताया कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने लोकसभा में भी इस संबंध में प्रश्न लगवाने के लिए विभिन्न सांसदों से व्यक्तिगत रूप से भेंट कर निवेदन किया है।

जनसमर्थन से संघर्ष को शक्ति

समिति ने स्पष्ट किया कि जमीन स्तर पर चलाए गए जागरूकता अभियान के कारण आज यह मुद्दा एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। दीपक भारद्वाज के अनुसार संघर्ष समिति ने आने वाली पीढिय़ों को यह संदेश दिया है कि अपनी धरोहर की रक्षा के लिए संगठित होकर लडऩा जरूरी है।

सकारात्मक निर्णय की उम्मीद

व्यस्तता के चलते रेल मंत्री से प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के बाद समिति काफी उत्साहित है। समिति को पूर्ण विश्वास है कि केंद्र सरकार कांगड़ा घाटी रेल लाइन के सुदृढ़ीकरण और विकास के लिए शीघ्र ही ठोस निर्णय लेगी।

: *अक्तूबर में शुरू होगा चंबा-चुवाड़ी सुरंग का काम, विधानसभा अध्यक्ष बोले, 2600 करोड़ से बनेगी 14 KM टनल* 

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि चंबा-चुवाड़ी सुरंग का निर्माण कार्य इस वर्ष अक्तूबर माह तक आरंभ कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लगभग 14 किलोमीटर लंबी इस सुरंग के निर्माण पर लगभग 2600 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। यह सुरंग चुवाड़ी से आरंभ होकर चंबा शहर के सुल्तानपुर में निकलेगी। इस सुरंग का निर्माण पीपीपी मोड आधार पर होगा। इस सुरंग के निर्माण से चंबा जिला की शेष विश्व से दूरी कम होने के साथ ही पर्यटन कारोबार को पंख लगेंगे। कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि वर्तमान सरकार ने चुवाड़ी-चंबा सुरंग के लिए सार्थक पहल करते हुए अपने स्तर करोड़ों रुपए खर्च कर इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करवाई।

उन्होंने बताया कि सुरंग निर्माण की पर्यावरण मंत्रालय व एफआरए की औपचारिकताओं को निपटाया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जिला चंबा भौगोलिक दृष्टि से पिछड़ा होने के कारण यहां अन्य जिलों की तुलना में धन की अधिक आवश्यकता है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों से जिला को जोडऩे के लिए सुरंग निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल सडक़ मार्ग की दूरी कम होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी यह महत्त्वपूर्ण है।

: *नशे में हैवान बना युवक, बेरहमी से ली युवती की जान, कालेज जा रही छात्रा पर दराट से किए वार, दिनदहाड़े वारदात से क्षेत्र में दहशत* 

मंडी के गोपालपुर में कालेज जा रही छात्रा पर दराट से किए वार, दिनदहाड़े वारदात से क्षेत्र में दहशत

नशे ने एक इनसान को इतना हैवान बना दिया कि उसने बेरहमी से एक युवती की हत्या कर डाली। हत्या भी ऐसे की, जिसमें सिर धड़ से अलग कर दिया और बाजू तक काटा डाला। यह दिल दहला देने वाली घटना मंडी के गोपालपुर में सोमवार सुबह करीब नौ बजे घटित हुई। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया, लेकिन ग्रामीणों और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से उसे जल्द ही पकड़ लिया गया। सिया की चीख सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जहां का दृश्य बेहद भयावह था। युवती का गला कटा हुआ था और बाजू भी गंभीर रूप से जख्मी थी। चारों ओर खून फैला हुआ था, जिसे देखकर लोग सकते में आ गए। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही डीएसपी और एसएचओ पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटना स्थल को फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित किया गया। पुलिस ने टीमें गठित कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी।

आरोपी को सीसीटीवी फु टेज के माध्यम से पकड़ा गया। हत्या का समय और आरोपित के उस जगह से गुजरने का समय मैच करता था। उसी आधार पर पुलिस स्थानीय युवकों के साथ आरोपित विकास पटियाल के पीछे लग गई। पुलिस ने आरोपी को करीब तीन घंटे बाद गिरफ्तार कर लिया। वह इसी क्षेत्र के एक गांव का निवासी है।

पकड़े जाने पर दो युवकों पर भी किया हमला

आरोपी ने पकड़ में आने के दौरान दराट से हमला कर दो युवकों को भी घायल कर दिया। इन युवकों के हाथ में चोटें आई हैं। पकड़े जाने पर गुस्साए लोगों ने मौके पर ही उसकी पिटाई कर दी, जिसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

गेहंू के खेतों में छिपा था आरोपी

ग्रामीणों और पुलिस की एक टीम ने आरोपी को जंगल और गेहूं के खेतों में छिपा हुआ ढूंढ निकाला। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कई टीमें गठित कीं और आरोपी की तलाश शुरू कर दी थी। ग्रामीणों ने भी पुलिस का साथ दिया।

साथ रखता था दराट या चाकू

गोपालपुर पंचायत के पूर्व उपप्रधान प्रमोद के अनुसार, आरोपी अक्सर अपने साथ चाकू या दराट रखता था और उसे कई बार श्मशानघाट या सुनसान जगहों पर नशा करते देखा गया था। लोगों का यह भी कहना है कि उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं लगता था। उन्होंने ने इस बारे पुलिस को भी सूचित किया था।

नशा मुक्ति केंद्र में रह चुका है आरोपी

एसपी मंडी विनाद कुमार का कहना है कि पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। 103 की धारा में केस दर्ज किया गया है। डीएसपी सरकाघाट संजीव गौतम ने बताया कि आरोपित व्यक्ति नशे का आदी है और नशा मुक्ति कें्रद में भी रह चुका है।

सरकाघाट में छात्रा की निर्मम हत्या पर महिला आयोग गुस्सा

शिमला। सरकाघाट में 19 वर्षीय छात्रा की दराट से गला काटकर की गई निर्मम हत्या के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना पर हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी ने गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। विद्या नेगी ने इस घटना को बेहद निंदनीय, दुखदायक और शर्मनाक बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज के लिए कलंक हैं।

उन्होंने बताया कि आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया है और इस संबंध में एसपी मंडी से बातचीत की गई है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर हिरासत में ले लिया है। उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

: *दक्षिण अफ्रीका में हमीरपुर के युवक की मौत, विदेश में स्वीमिंग पूल में तैरता मिला महारल के अमन का शव* 

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला के उपमंडल बड़सर के तहत आने वाली पंचायत महारल में उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब क्षेत्र के 26 वर्षीय युवक अमन कुमार की दक्षिण अफ्रीका में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। माता-पिता के इकलौते बेटे अमन का शव एक स्विमिंग पूल में बरामद हुआ है, जिसने इस पूरी घटना को रहस्यों के घेरे में खड़ा कर दिया है। पिछले साल दीपावली के बाद अपने सुनहरे भविष्य के सपने संजोकर और परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने की उम्मीद लेकर अमन विदेश गया था, जहां वह एक होटल में कार्यरत था। पिता उधम सिंह ने भारी आर्थिक तंगी के बावजूद मेहनत-मजदूरी और शादियों में बैंड बजाकर पाई-पाई जोड़ी ताकि अपने बेटे को होटल मैनेजमेंट का कोर्स करवा सकें। उनकी मेहनत रंग भी लाई थी और अमन घर की गरीबी दूर करने के लिए सात समंदर पार गया था।

दो बहनों की शादी के बाद अमन ही घर का एकमात्र सहारा था। करीब तीन महीने पहले ही उसने केरल की एक युवती से कोर्ट मैरिज की थी और परिवार बड़ी बेसब्री से उसके घर लौटने का इंतजार कर रहा था। घर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शादी के जश्न की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन जिस आंगन में सेहरा सजने वाला थाए वहां अब मातम का सन्नाटा पसरा है। अमन के परिजनों सहित समस्त ग्रामीणों ने केंद्र व प्रदेश सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग की है। शव को भारत पहुंचने में 15 से 20 दिन का समय लग सकता है।

: *हरियाणा के युवकों से पकड़ी सवा चार किलो चरस, सरकाघाट के पुंघ में नाके के दौरान कार सवारों से नशा बरामद* 

जिला मंडी में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत डीएसपी सुुंदरनगर भारत भूषण की अगवाई में पुलिस थाना सुुंदरनगर की टीम ने वर्ष 2026 की चरस की सबसे बड़ी खेप को पकडऩे में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन क्षेत्र में पुलिस द्वारा की गई नाकाबंदी के दौरान उप निरीक्षक दौलत राम कटारिया के नेतृत्व में मुख्य आरक्षी हंसराज आरक्षी सतीश और कुलदीप की टीम ने एक हरियाणा संदिग्ध कार को जांच के लिए रोका। तलाशी लेने पर कार से चार किलो 32 ग्राम चरस बरामद की गई।

कार में सवार दो युवकों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों की पहचान विन्नी 32 वर्ष निवासी घुमारन वाली गली, आर्य समाज चौक पटियाला और निखिल 23 वर्ष निवासी नौगजा पीर हीरा कॉलोनी, बहादुरगढ़ पटियाला पंजाब के रूप में हुई है। डीएसपी सुंदरनगर भारत भूषण ने बताया कि युवकों को गिरफ्तार करते हुए मामला दर्ज कर लिया है।

: *पंचायत चुनावों से पहले शिमला में कांग्रेस का मंथन* 

himachal congress

प्रदेश कांग्रेस कमेटी का जनरल हाउस 16 को, रजनी पाटिल समेत सीएम सुक्खू भी रहेंगे मौजूद

प्रदेश में पंचायती राज चुनावों से ठीक पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपनी आमसभा तय कर दी है। पीसीसी के गठन के बाद यह पहली आमसभा होगी। इसमें कांग्रेस की प्रदेश मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल और सह प्रभारी समेत मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अलावा तमाम पार्टी नेता अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएंगे। आमसभा में पंचायती राज चुनाव, संगठन समेत अन्य पहलुओं पर मंथन होगा और पार्टी अपनी आगामी रणनीति भी तैयार करेगी। पीसीसी के संगठन महामंत्री विनोद जिंदा ने आमसभा को लेकर सोमवार को तैयारियों का जायजा लिया और वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार-विमर्श भी किया है। माना जा रहा है कि आमसभा में चुनावों को लेकर संगठन पार्टी प्रभारी, सीएम और प्रदेश के अन्य बड़े नेताओं की मौजूदगी में गहन मंथन कर अपनी रणनीति तैयार करेगा। वहीं ंप्रदेश में संगठन को और मजबूत करने तथा कांग्रेस संगठन सृजन अभियान की सोच को धरातल पर उतारने के निर्देश भी पदाधिकारियों को इस दौरान दिए जाएंगे।

उधर, पीसीसी के संगठन महामंत्री विनोद जिंदा ने आमसभा की तैयारियों का सोमवार को जायजा लिया है। साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार विमर्श कर आमसभा के आयोजन को भी अंतिम रूप दे दिया है। संगठन महामंत्री विनोद जिंदा ने बताया कि 16 अप्रैल को होने वाली आमसभा दो सत्रों में होगी। जिसमें मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, प्रदेश मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल, सह प्रभारी चेतन चौहान व विदित चौधरी विशेष रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएंगे।

पहली बार हो रही बैठक

पीसीसी के गठन की प्रकिय्रा पूरी होने के बाद अब पार्टी की पहला जरनल हाउस 16 अप्रैल को बुलायाा गया है। प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार की अध्यक्षता में यह आमसभा होगी। अहम है कि प्रदेश में आगामी दिनों में पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय नगर निकायों के चुनाव भी होने जा रहे है। लिहाजा इन चुनावों से ठीक पहले आमसभा बुलाई गई है।

संगठन संग प्रदेश की सियासत पर होगी चर्चा

आमसभा में प्रदेश मंत्रिमंडल के सभी सदस्य, कार्यकारणीसदस्य, सभी जिला अध्यक्ष के साथ अग्रणी संगठनों के प्रदेश प्रमुखों को बुलाया गया है। दो सत्रों में होने वाली इस आमसभा में पहले संगठन से जुड़े मसलों पर आपसी विचार विमर्श होगा। दूसरे सत्र में पीएसी के सभी सदस्यों के साथ प्रदेश के राजनैतिक मसलों पर गहन चर्चा होगी। बैठक में प्रदेश में कांग्रेस की भावी राजनीति, संगठन की सक्रियता पर विचार करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे।

: *होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही फिर ठप, अमरीका की नाकाबंदी का तुरंत असर, कई जहाज वापस लौटे* 

अमरीका के होर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी लागू करने का तुरंत असर हुआ है और इस समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही एक बार फिर लगभग ठप हो गई है। समुद्री खुफिया फर्म लॉयड्स लिस्ट के मुताबिक, नाकाबंदी की घोषणा के बाद ट्रैफिक तुरंत रुक गया और कई जहाजों ने रास्ता बदल लिया या वापस लौट गए हैं। अमरीकी सेंट्रल कमांड ने सोमवार शाम साढ़े सात बजे से ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर नाकाबंदी (ब्लॉकेड) लागू कर दिया। इसके तहत ईरान के बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर नजर रखी जाएगी और उन्हें रोका जा सकता है। अमरीका की नाकेबंदी के तहत ईरान के सभी प्रमुख बंदरगाह निशाने पर होंगे। इसमें फारस की खाड़ी के साथ ओमान सागर में स्थित बंदरगाह भी शामिल हैं। अमरीकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, नाकेबंदी ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी। ईरान को टोल देने वाले जहाजों को भी रास्ते में रोक लिया जाएगा। हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले वे जहाज जो ईरान के अलावा अन्य देशों के बंदरगाहों के बीच सफर कर रहे हैं, उन्हें आने-जाने की इजाजत दी जाएगी। उधर, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि नाकाबंदी का मकसद ईरान की तेल बिक्री रोकना है।

इस बीच वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में हुई वार्ता के विफल होने के बाद अमरीका ईरान पर दोबारा सैन्य हमले करने पर भी विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि सभी विकल्प खुले हैं और हालात के हिसाब से आगे का फैसला लिया जाएगा। इसी बीच ईरान ने अमरीका को चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट और उसके बंदरगाहों को निशाना बनाया गया, तो फारस की खाड़ी और ओमान सागर में कोई भी पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गाड्र्स ने कहा कि क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। सुरक्षा सबके लिए नहीं होगी, तो किसी के लिए भी नहीं होगी। ईरान ने फिर दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह उसके कंट्रोल में है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को रियाल में टोल देना जरूरी होगा। उधर, ब्रिटेन ने अमरीका की ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी में शामिल होने से इनकार कर दिया है। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने अमरीका के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इस कदम से दुनिया के बाजारों पर बुरा असर पड़ेगा। उधर, ट्रंप की होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी की धमकी के बाद चीन ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है

भारतीय जहाजों को होर्मुज पार करने में मिलेगी मदद

तेहरान। ईरान ने कहा है कि वह भारत के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने में मदद करेगा। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने बताया कि ईरान और भारत के बीच इस मुद्दे पर अच्छी बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा तनाव के बावजूद ईरान चाहता है कि भारत के जहाज बिना किसी दिक्कत के इस रास्ते से गुजर सकें, इसलिए ईरान, नई दिल्ली की मदद करने के लिए तैयार है।

सात साल बाद भारत पहुंचा ईरानी कच्चा तेल

अमरीका और ईरान के बीच जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चल रही तनातनी के बीच ईरान से भारत के लिए बड़ी राहत आई है। करीब सात साल के बाद ईरान का कच्चा तेल फिर से भारत पहुंचा है। शिप ट्रैकिंग डाटा के अनुसार दो बड़े सुपरटैंकर भारत के पूर्वी और पश्चिमी तट पर पहुंचे हैं, जो ईरानी कच्चा तेल लेकर आए हैं। ‘फेलिसिटी’ और ‘जया’ नामक इन जहाजों में करीब 40 लाख बैरल कच्चा तेल है।

: *आज शौंगटौंग कड़छम की रिपोर्ट लेंगे सीएम सुक्खू, इंजीनियर्स से करेंगे चर्चा, बैराज का भी लेंगे जायजा* 

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल दिवस राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए मंगलवार को जनजातीय जिला किन्नौर जा रहे हैं। मंगलवार को किन्नौर पहुंचते ही सबसे पहले शौंगटौंग कड़छम की रिपोर्ट लेंगे। इस प्रोजेक्ट की कुल तीन यूनिट हैं। इनमें से एक यूनिट को इसी साल दिसंबर या जनवरी में चलाने का लक्ष्य है। कुल 450 मेगावाट के इस प्रोजेक्ट से हर साल हिमाचल को बिजली बेचने से 1000 करोड़ का राजस्व आएगा। यही कारण है कि पहले से ही लेट हो चुके इस प्रोजेक्ट को मुख्यमंत्री जल्द शुरू करवाना चाहते हैं। वह मंगलवार को इस प्रोजेक्ट के इंजीनियरों से चर्चा करेंगे और फिर बैराज साइट का जायजा भी लेंगे। ऊर्जा निगम के अधिकारी मुख्यमंत्री को प्रेजेंटेशन भी देंगे। मुख्यमंत्री मंगलवार को 11.30 बजे अनाडेल से हेलिकॉप्टर से कड़छम हैलिपेड पर 12.15 बजे पहुंचेगे। उसके बाद कड़छम से शौंगटौंग कड़छम 2.15 बजे तक पहुंचेगे। यहां मुख्यमंत्री कड़छम प्रोजेक्ट के इंजीनियरों और कर्मचारियों से मिलेंगे। उसके बाद शौंगटौंग कड़छम पावर हाउस साइट पर 2.45 बजे पहुंचेंगे।

यहां से निकलकर 2.55 पर मुख्यमंत्री शोंगटोंग कड़छम के पोवारी जाएंगे। यहां पर मुख्यमंत्री निर्माण कार्य का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद 3.25 बजे शौंगटौंग से रिकांगपिओ रेस्ट हाउस जाएंगे, जहां मुख्यमंत्री 3.55 बजे पहुंचेगे। यहां पर मुख्यमंत्री स्थानीय लोगों के साथ भी मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री सुक्खू के लिए यहां चाय नाश्ते का भी प्रबंध किया गया है। उसके बाद 4.35 पर निकलेंगे, उसके बाद कल्पा राजीव गांधी खेल परिसर 4.50 बजे पहुंचेंगे। यहां पर मुख्यमंत्री सुक्खू राजीव गांधी खेल परिसर में निर्माणाधीन कार्य और पॉलीटेक्रिककालेज भवन कल्पा का निरीक्षण भी करने वाले हंै। इसके बाद 5.20 बजे राजीव गांधी खेल परिसर से निकलकर 5.30 बजे सर्किट हाउस कल्पा पहुंचेंगे और रात को यहीं रुकेंगे।

आकाशवाणी और दूरदर्शन से मुख्यमंत्री का संदेश

हिमाचल दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेशवासियों के नाम संदेश देंगे, जिसे आकाशवाणी शिमला से 14 अप्रैल, 2026 को शाम आठ बजे प्रसारित किया जाएगा। यह संदेश एफएम शिमला, एफएम हमीरपुर, एफएम धर्मशाला और आकाशवाणी शिमला के सभी रिले केंद्रों से एक साथ प्रसारित किया जाएगा। दूरदर्शन केंद्र, शिमला से हिमाचल दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री का संदेश 14 अप्रैल, 2026 को शाम 7:30 बजे प्रसारित किया जाएगा।

: *नोएडा में तोडफ़ोड़, 150 से ज्यादा गाडिय़ां तोड़ीं, Salary बढ़ाने की मांग कर रहे कर्मचारियों का हिंसक प्रदर्शन* 

सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर नौ अप्रैल से आंदोलन कर रहे नोएडा की फैक्टरियों के सैकड़ों कर्मचारी अपनी सुनवाई न होने पर सोमवार को सडक़ों पर उतर आए और हिंसक प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने अलग-अलग इलाकों में 50 से ज्यादा फैक्टरियों में पथराव, तोडफ़ोड़ की। 150 से ज्यादा गाडिय़ों में तोडफ़ोड़ और करीब 50 से ज्यादा फूंक दीं। सबसे पहले फेज-2 इलाके में हालात खराब हुए। सैकड़ों कर्मचारी हाथ में डंडे-लाठी लेकर सडक़ों पर उतर आए। फेज-2 के बाद धीरे-धीरे प्रदर्शन नोएडा के करीब 10 इंडस्ट्रियल इलाकों और आसपास के जिलों में फैल गया। कर्मचारियों ने नोएडा सेक्टर-57 में 30 से ज्यादा फैक्टरियों और दफ्तरों में तोडफ़ोड़ की। सेक्टर- 40 और 60 में कंपनियों का घेराव किया। सेक्टर 85 में डिक्सन कंपनी का गेट तोड़ दिया। सेक्टर 1, 15, 62 और डीएनडी फ्लाइओवर के पास सडक़ जाम कर दी।

पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो उन्हें दौड़ा लिया। उनकी गाड़ी पलट दी। हालात बिगड़े तो कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने उन पर पथराव कर दिया। फिर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, वे रुकेंगे नहीं। हालात को काबू करने के लिए कुछ इलाकों में आरएफ और पीएसी उतार दी गई। डीजीपी राजीव कृष्ण और एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अमिताभ यश कंट्रोल रूम से स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। डीजीपी ने कहा है कि अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुजफ्फरनगर में एक कार्यक्रम के दौरान श्रमिकों से अशांति पैदा करने वालों से सावधान रहने की अपील की। इसके अलावा योगी सरकार ने जांच के लिए हाईलेवल कमेटी बनाई है।

: *Jalori Tunnel : डीपीआर की आपत्तियां दूर, अब केंद्र की हां का इंतजार, टनल बनने से आसान होगी पहाड़ की राह* 

जलोड़ी टनल निर्माण को 1775 करोड़ की है डीपीआर, टनल बनने से आसान होगी पहाड़ की राह

हिमाचल की बहुचर्चित जलोड़ी टनल की डीपीआर मंजूरी की राह साफ हो गई है। प्रदेश ने डीपीआर पर लगाई गई सभी आपत्तियों को दूर कर दिया है, जिसके बाद अब केंद्र से इसकी मंजूरी मिलने का इंतजार हो रहा है। 1775 करोड़ की यह डीपीआर है। उम्मीद है कि इसी वर्ष केंद्र सरकार इसको लेकर अपनी हरी झंडी प्रदान कर देगी। जानकारी के अनुसार जलोड़ी टनल निर्माण को लेकर केंद्र को भेजी गई डीपीआर में जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया ने कुछ आपत्तियां लगाई थीं। जीओआई ने प्रदेश को इन ऑब्जर्वेशन को दूर करने को कहा था। इस पर लोक निर्माण विभाग के एनएच विंग ने तत्परता के साथ कार्रवाई करते हुए डीपीआर में लगाई गई आपत्तियों को दूर कर दिया और इस बावत केंद्र को फाइल प्रेषित कर दी है, जिसके बाद अब डीपीआर को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीदें भी बंध गई हैं। करीब 1775 करोड़ की यह डीपीआर है और अब गेंद पूरी तरह से केंद्र के पाले में है।

प्रदेश के आनी उपमंडल के भरगोल से बंजार उपमंडल के सोझा तक बनने वाली इस टनल की लंबाई 4.2 किलोमीटर बताई गई है। आनी की ओर से टनल के मुहाने तक दो किलोमीटर और बंजार से 5.5 किलोमीटर अप्रोच रोड भी बनाया जाना है। जलोड़ी जोत टनल बन जाने के बाद आनी से कुल्लू की दूरी भी आठ किलोमीटर कम हो जाएगी। वहीं, टनल बनने के बाद बंजार-लुहरी-सैंज सडक़ मार्ग पर साल भर गाडिय़ों की आवाजाही होगी। इससे लोगों के समय के साथ-साथ पैसों की भी बचत होगी। इस टनल के बनने से वाया बंजार होते हुए शिमला से मनाली की दूरी भी करीब 40 से 50 किलोमीटर कम हो जाएगी।

किसान-बागबानों को लाभ

चार किलोमीटर से अधिक लंबी प्रस्तावित इस टनल के निर्माण से कुल्लू और शिमला के बीच यात्रा को पूरी तरह बदल देगी। इस टनल के निर्माण से सेब उत्पादक, किसान और छोटे व्या.२पारी सीधे लाभान्वित होंगे। वहीं, भूस्खलन और खराब मौसम के दौरान वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग मिलेगा। अब सबकी नजरें केंद्र की मंजूरी पर टिकी हैं। बता दें कि इस टनल निर्माण को लेकर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी मामला समय-समय पर केंद्र के समक्ष उठाते रहे हैं।

: *HP Weather : हिमाचल में तीन दिन बारिश-बर्फबारी, 16 से बदलेगा मौसम का मिजाज, किसानों की बढ़ी टेंशन* 

Himachal Weather

16 अप्रैल से बदलेगा मौसम का मिजाज; तूफान भी चलेगा, किसानों की बढ़ी टेंशन

हिमाचल प्रदेश में मौसम के बदले तेवर आगामी दिनों में फिर से देखने को मिलेंगे। राज्य में अगले दो दिन मौसम साफ रहने के बाद 16 अप्रैल से फिर बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार 15 अप्रैल तक प्रदेश में मौसम सामान्यत: शुष्क रहेगा, लेकिन इसके बाद एक ताजा व पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से 16 से 19 अप्रैल के बीच कई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इस दौरान उच्च पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी होने के आसार हैं। खासकर 18 और 19 अप्रैल को कुछ स्थानों पर आंधी और आसमानी बिजली के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। इसे लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। 16 अप्रैल से पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बादल बढ़ेंगे और कई स्थानों पर हल्की वर्षा की गतिविधियां शुरू हो सकती हैं।

कहा, कितना तापमान

शिमला 21.2, सुंदरनगर 29.3, भुंतर 28.5 कल्पा 18.4, धर्मशाला 26.0, सोलन 27.5, कांगड़ा 29.7 व ताबो 15.9 डिग्री सेल्सियस हो गया।

अप्रैल महीने में 140 प्रतिशत से ज्यादा बारिश दर्ज

अप्रैल महीने में अब तक प्रदेश में सामान्य से करीब 140 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलों तथा फलदार पौधों विशेष रूप से सेब को नुकसान भी हुआ है। वहीं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हालिया बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट का असर बना हुआ है।

न्यूनतम तापमान

केलांग – 0.8, ताबो 1.0, कुकुमसेरी 2.1, कल्पा 2.8, मनाली 5.7, कुफरी व सेओबाग 6.4, धर्मशाला 7.8, भुंतर 9.2, सोलन 9.5, शिमला 10.0, पालमपुर 10.5, चंबा 10.8, बरठीं 10.9, सुंदरनगर 11.8, नाहन 12.1, जुब्बड़हट्टी 12.2, कांगड़ा 12.4, मंडी 12.9, बिलासपुर 13.5, ऊना 13.8, देहरा गोपीपुर 17.0 और पांवटा साहिब 18.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

: *पीएमओ पहुंची कांगड़ा ट्रेन की आवाज, दीपक भारद्वाज के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचा प्रतिनिधिमंडल* 

रेलवे परामर्श समिति के मेंबर दीपक भारद्वाज के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान और जीवनरेखा मानी जाने वाली कांगड़ा घाटी रेल लाइन के अस्तित्व को बचाने के लिए ‘कांगड़ा घाटी रेल संघर्ष समिति’ देश की राजधानी पहुंच गई है। समिति के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय, पीएमओ और रेल मंत्री कार्यालय पहुंचकर क्षेत्र की मांगों और चिंताओं से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया। यह मांग पत्र रेलवे परामर्श कमेटी, उत्तर रेलवे के सदस्य और संघर्ष समिति के सदस्य दीपक भारद्वाज द्वारा दिया गया।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने रेल मंत्रालय से ज्ञापन की आधिकारिक रिसीविंग भी प्राप्त की। दीपक भारद्वाज ने बताया कि कांगड़ा रेल केवल परिवहन का एक माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि रेलवे परामर्श कमेटी का सदस्य बनने के बाद से ही कांगड़ा रेल और जर्जर हालत में पड़े चक्की पुल का मुद्दा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है। श्री भारद्वाज ने बताया कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने लोकसभा में भी इस संबंध में प्रश्न लगवाने के लिए विभिन्न सांसदों से व्यक्तिगत रूप से भेंट कर निवेदन किया है।

जनसमर्थन से संघर्ष को शक्ति

समिति ने स्पष्ट किया कि जमीन स्तर पर चलाए गए जागरूकता अभियान के कारण आज यह मुद्दा एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। दीपक भारद्वाज के अनुसार संघर्ष समिति ने आने वाली पीढिय़ों को यह संदेश दिया है कि अपनी धरोहर की रक्षा के लिए संगठित होकर लडऩा जरूरी है।

सकारात्मक निर्णय की उम्मीद

व्यस्तता के चलते रेल मंत्री से प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के बाद समिति काफी उत्साहित है। समिति को पूर्ण विश्वास है कि केंद्र सरकार कांगड़ा घाटी रेल लाइन के सुदृढ़ीकरण और विकास के लिए शीघ्र ही ठोस निर्णय लेगी।

[: *राज्यपाल कविंद्र गुप्ता से मिले सीएम, बताया शिष्टाचार भेंट, कैबिनेट विस्तार को लेकर भी अटकलें* 

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को लोक भवन जाकर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को पारंपरिक हिमाचली टोपी, शॉल तथा स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर राज्य के विकास एवं जनकल्याण से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। हालांकि मुख्यमंत्री का अचानक दिल्ली से लौटने के बाद राज्यपाल के पास जाना राजनीतिक क्षेत्र में सामान्य नहीं होता और इससे मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें चल पड़ती हैं। वर्तमान सरकार का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो गया है और शेष दो साल बचे हैं।

इसलिए मंत्रिमंडल में खाली पड़ी एक सीट को भरने के लिए चर्चाएं तेज हो जाती हैं। सीएम कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के लिए दिल्ली गये थे। फिर वहीं से ऊना और कुल्लू होते हुए शिमला लौटे हैं। शिमला लौटने के बाद उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात की। मंगलवार को सीएम हिमाचल दिवस समारोह के लिए शिमला से किन्नौर जा रहे हैं।

: *Mandi : सिया हत्याकांड के विरोध में सरकाघाट में चक्का जाम, आरोपी को फांसी की सजा देने की उठाई मांग* 

लोगों ने जाहू हाई-वे पर मौहीं के पास रोकी गाडिय़ां

पुलिस-प्रशासन के आश्वासन पर खोला ट्रैफिक

सिया हत्याकांड के विरोध में सरकाघाट में लोगों का गुस्सा सडक़ों पर फूट पड़ा। सरकाघाट-जाहू सुपर हाई-वे पर मौहीं के पास सैकड़ों लोगों गाडिय़ां रोक मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गई और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। देर रात तक यह प्रर्दशन चलता रहा। प्रर्दशन के माध्यम से आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर तुरंत पुलिस की क्यूआरटी टीम और डीएसपी पहुंच गए। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए लोग न्याय की मांग पर अड़े रहे। लोगों का कहना था कि ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और प्रशासन समय रहते सख्त कदम नहीं उठा रहा, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं और युवाओं ने कहा कि सिया को इनसाफ मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

कई स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अगर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती, तो शायद यह दर्दनाक घटना टल सकती थी। व्यापारियों और राहगीरों को भी जाम के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब तीन घंटे तक चले इस चक्का जाम के बाद पुलिस और प्रशासन के आश्वासन पर लोगों ने धीरे-धीरे रास्ता खोला। डीएसपी ने भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इलाके में स्थिति मनावपूर्ण, आज भी प्रदर्शन

फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, जबकि पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। मंगलवार को सरकाघाट में कई पार्टियां और संगठन प्रदर्शन करेंगे। एसएफआई, माकपा और अन्य पार्टियां प्रर्दशन करेंगी। सिया हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है और अब हर किसी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है

: *हिमाचल दिवस समारोह को रिकांगपिओ तैयार, बतौर चीफ गेस्ट मौजूद रहेंगे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू* 

किन्नौर में पहली बार हो रहा आयोजन, बतौर चीफ गेस्ट मौजूद रहेंगे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू

जनजातीय जिला किन्नौर इस वर्ष 78वें राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस समारोह का गवाह बनने जा रहा है। किन्नौर को पहली बार राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस समारोह की मेजबानी का अवसर मिला है, जिससे स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। जिला मुख्यालय रिकांगपिओ में आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। सोमवार को राज्य स्तरीय परेड की रिहर्सल की गई, जिसका निरीक्षण उपायुक्त किन्नौर डा. अमित कुमार शर्मा और पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने किया। इस दौरान आयोजन स्थल और व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया गया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

उपायुक्त डा. अमित कुमार शर्मा ने बताया कि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के साथ विस्तृत चर्चा के बाद रिकांगपिओ के मिनी स्टेडियम को मुख्य आयोजन स्थल के रूप में चयनित किया गया है। 15 अप्रैल को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। समारोह का मुख्य आकर्षण राज्य स्तरीय परेड होगी, जिसमें विभिन्न सुरक्षा बलों की टुकडिय़ां हिस्सा लेंगी। इसके साथ ही हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक भी प्रस्तुत की जाएगी। प्रदेश के तीन से चार अन्य जिलों के सांस्कृतिक दल किन्नौर के स्थानीय कलाकारों के साथ मंच साझा करेंगे। वहीं, विभिन्न सरकारी विभाग अपनी योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित करेंगे।

: *Bihar New CM : बिहार में नए सीएम का ऐलान आज, कल बनेगी नई सरकार* 

दो बजे जदयू, तीन बजे भाजपा और चार बजे एनडीए विधायक दल की होगी बैठक

बिहार के नए मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे पटना के लोकभवन में शपथ लेंगे। पार्टी दफ्तार से लेकर राजभवन तक इसकी तैयारी चल रही है। सोमवार को केवल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास पर महत्त्वपूर्ण बैठकें हुईं। यहां पर नेताओं के बीच नए मंत्रिमंडल पर बाचतीत हुई। सूत्रों के अनुसार मंगलवार को दो बजे जदयू, तीन बजे भाजपा और चार बजे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी और इसके बाद नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा होगी।

सूत्रों की मानें तो केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी भी पटना आ सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार शाम को पटना आएंगे। वह लोक भवन में रुकेंगे। पीएम 15 अप्रैल को नई सरकार के शपथ ग्रहण में शामिल होंगे।

: *नहीं करने देंगे चार शादियां, बंगाल में शाह की हुंकार, बीजेपी की सरकार बनते ही राज्य में लागू करेंगे यूसीसी* 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बर्धमान की रैली में कहा कि बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने पर यहां यूसीसी लागू करेंगे और कुछ लोगों को चार शादियां नहीं करने देंगे। इसके साथ ही उन्होंने पांडेश्वर के भाजपा के उम्मीदवार जितेंद्र तिवारी का परिचय कराते हुए कहा कि पिछले चुनाव में जितेंद्र तिवारी बहुत कम वोटों से पिछड़ गए थे। इस बार आप इन्हें विजयी बनाकर भेजो, हम तिवारी को बड़ा आदमी बनाएंगे। शाह ने कहा कि कुछ लोगों को चार शादियों की छूट है। किसी को चार शादी की छूट होनी चाहिए क्या? पांच मई को भाजपा सरकार बना दो, हम यूसीसी लगाएंगे और उन लोगों को चार शादियां नहीं करने देंगे।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी अपने चेले-चपाटों के दम कर बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने का सपना देख रही हैं। पांच मई को बीजेपी आएगी और किसी हालत में बंगाल में बाबरी मस्जिद नहीं बनेगी। अमित शाह ने कहा कि ममता की सरकार को निकालने का मतलब है, घुसपैठ मुक्त सरकार बनाना। बंगाल से घुसपैठियों को बाहर निकालना है। उन्होंने सवाल किया कि क्या दीदी या भाइपो (भतीजा) उन्हें निकाल सकते हैं? केवल भाजपा निकाल सकती है। उन्होंने कहा कि ममता दीदी 600 एकड़ जमीन बीएसएफ को नहीं देती है, ताकि बाड़ लगाने का काम पूरा नहीं हो।

: *इस अदालत से इनसाफ की उम्मीद नहीं, अरविंद केजरीवाल ने जज स्वर्ण कांता शर्मा पर लगाए बड़े आरोप* 

दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी बात पूरी कर दी है। उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से मांग की है कि वह इस केस को सुनना बंद करें, क्योंकि उनके मन में केजरीवाल के खिलाफ पहले से राय बन चुकी है। केजरीवाल ने एक नहीं, बल्कि कई बड़े कारण गिनाए हैं। केजरीवाल ने कहा कि जस्टिस शर्मा ने अधिवक्ता परिषद के कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। यह एक ऐसा संगठन है, जो एक खास विचारधारा से जुड़ा है। केजरीवाल ने कहा कि आप उस विचारधारा का खुलकर विरोध करती है, इसलिए उनके मन में यह डर है कि अगर जज उस विचारधारा की समर्थक हैं और मैं उसका विरोधी हूं तो क्या मुझे इनसाफ मिलेगा?

केजरीवाल ने एक टीवी कार्यक्रम का हवाला दिया, जिसमें गृह मंत्री ने कथित तौर पर कहा था कि जब हाई कोर्ट का फैसला आएगा, तो केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ेगा। केजरीवाल ने कहा कि फैसला आने से पहले ही गृह मंत्री को यह कैसे पता चल गया कि फैसला उनके खिलाफ जाएगा? यह बात संदेह पैदा करती है। केजरीवाल ने कहा कि पांच मामलों में देखा गया कि ईडी और सीबीआई ने जो भी मांगा, इस अदालत ने लगभग हर बार वही माना। सिर्फ एक मामले में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सीबीआई मुझे जल्दी से जल्दी दोषी साबित करने की कोशिश में है और यह अदालत सीबीआई की हर बात का समर्थन करती रही है।

: *IPL 2026 : सीएसके जीत के जोश से लबरेज, केकेआर को अभी भी तलाश* 

आज चेन्नई में शाम 7:30 बजे से टकराएंगे गायकवाड़-रहाणे

पिछले मैच में जीत से उत्साहित चेन्नई सुपर किंग्स की टीम मंगलवार को चेन्नई में होने वाले आईपीएल के मैच में अब तक एक भी मैच न जीतने वाली कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम के खिलाफ दबदबा बनाने की कोशिश करेगी। सीएसके ने दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ खेल के हर विभाग में अच्छा प्रदर्शन करके सत्र की अपनी पहली जीत दर्ज की। उसकी इस जीत के नायक संजू सैमसन रहे, जिन्होंने 56 गेंद पर नाबाद 115 रन की पारी खेली। इसके बाद उसके गेंदबाजों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। डेवाल्ड ब्रेविस के फिट होकर वापसी करने से सीएसके को अपने गेंदबाजी संयोजन में बदलाव करने की छूट मिली, जिससे वह दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 212 रन का बचाव करने में सफल रही। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज गुरजपनीत सिंह ने अपने आईपीएल पदार्पण पर प्रभावित किया। जेमी ओवरटन ने भी शानदार प्रदर्शन किया और लगातार अच्छी गेंदबाजी करते हुए चार विकेट लिए।

सत्र का अपना पहला मैच खेल रहे बाएं हाथ के स्पिनर अकील हुसैन ने पावरप्ले में सीएसके के गेंदबाजी आक्रमण को एक और आयाम प्रदान किया। अब सीएसके संघर्ष कर रही केकेआर के खिलाफ एक बड़ी पारी खेलकर लय हासिल करने की कोशिश करेंगे। टूर्नामेंट की शुरुआत में यह घोषणा की गई थी कि महेंद्र सिंह धोनी पिंडली में खिंचाव के कारण कुछ हफ्तों के लिए बाहर रहेंगे। पिछले मैच में गायकवाड़ ने संकेत दिया था कि यह स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज जल्द वापसी करेगा। दूसरी ओर केकेआर जीत के लिए बेताब है। कैमरन ग्रीन ने पिछले मैच में केकेआर के लिए गेंदबाजी की। यह ऑलराउंडर चेपॉक में शानदार प्रदर्शन करके अपनी मोटी कीमत को सही साबित करने की कोशिश करेगा। रहाणे ने बल्लेबाजी में अच्छा प्रदर्शन किया है, जबकि अंगकृष रघुवंशी ने भी प्रभाव छोड़ा है।

: *पंचरुखी की आशवी धीमान को बड़ा सम्मान* 

 ‘लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ की ओर से मिला ‘Certificate of Appreciation’

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिलाके पालमपुर उपमंडल के अंतर्गत पंचरुखी क्षेत्र की बाल कलाकार आशवी धीमान ने एक बार फिर प्रदेश का नाम रोशन किया है। आशवी को यूनाइटेड किंगडम की प्रतिष्ठित संस्था ‘लंदन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉड्र्स’ की ओर से ‘Certificate of Appreciation’ प्रदान किया गया है। यह सम्मान आशवी को नन्ही टीवी कलाकार, मॉडल और हिमाचली संस्कृति की प्रचारक के रूप में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है।

खास बात यह है कि इस सम्मान के साथ ही आशवी का नाम ‘लंदन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉड्र्स’ में भी दर्ज हो गया है, जो उनके लिए बेहद गर्व का पल है। कम उम्र में ही बड़ी उपलब्धियां हासिल कर चुकी आशवी धीमान अब तक कुल 170 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात है। स्थानीय लोगों और क्षेत्रवासियों में इस उपलब्धि को लेकर खुशी की लहर है। आश्वी की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर लगन और मेहनत सच्ची होए तो छोटी उम्र भी बड़े सपनों को साकार करने से नहीं रोक सकती।

: *पीएमओ पहुंची कांगड़ा ट्रेन की आवाज, दीपक भारद्वाज के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचा प्रतिनिधिमंडल* 

रेलवे परामर्श समिति के मेंबर दीपक भारद्वाज के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान और जीवनरेखा मानी जाने वाली कांगड़ा घाटी रेल लाइन के अस्तित्व को बचाने के लिए ‘कांगड़ा घाटी रेल संघर्ष समिति’ देश की राजधानी पहुंच गई है। समिति के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय, पीएमओ और रेल मंत्री कार्यालय पहुंचकर क्षेत्र की मांगों और चिंताओं से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया। यह मांग पत्र रेलवे परामर्श कमेटी, उत्तर रेलवे के सदस्य और संघर्ष समिति के सदस्य दीपक भारद्वाज द्वारा दिया गया।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने रेल मंत्रालय से ज्ञापन की आधिकारिक रिसीविंग भी प्राप्त की। दीपक भारद्वाज ने बताया कि कांगड़ा रेल केवल परिवहन का एक माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि रेलवे परामर्श कमेटी का सदस्य बनने के बाद से ही कांगड़ा रेल और जर्जर हालत में पड़े चक्की पुल का मुद्दा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है। श्री भारद्वाज ने बताया कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने लोकसभा में भी इस संबंध में प्रश्न लगवाने के लिए विभिन्न सांसदों से व्यक्तिगत रूप से भेंट कर निवेदन किया है।

जनसमर्थन से संघर्ष को शक्ति

समिति ने स्पष्ट किया कि जमीन स्तर पर चलाए गए जागरूकता अभियान के कारण आज यह मुद्दा एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। दीपक भारद्वाज के अनुसार संघर्ष समिति ने आने वाली पीढिय़ों को यह संदेश दिया है कि अपनी धरोहर की रक्षा के लिए संगठित होकर लडऩा जरूरी है।

सकारात्मक निर्णय की उम्मीद

व्यस्तता के चलते रेल मंत्री से प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के बाद समिति काफी उत्साहित है। समिति को पूर्ण विश्वास है कि केंद्र सरकार कांगड़ा घाटी रेल लाइन के सुदृढ़ीकरण और विकास के लिए शीघ्र ही ठोस निर्णय लेगी।

: *अक्तूबर में शुरू होगा चंबा-चुवाड़ी सुरंग का काम, विधानसभा अध्यक्ष बोले, 2600 करोड़ से बनेगी 14 KM टनल* 

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि चंबा-चुवाड़ी सुरंग का निर्माण कार्य इस वर्ष अक्तूबर माह तक आरंभ कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लगभग 14 किलोमीटर लंबी इस सुरंग के निर्माण पर लगभग 2600 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। यह सुरंग चुवाड़ी से आरंभ होकर चंबा शहर के सुल्तानपुर में निकलेगी। इस सुरंग का निर्माण पीपीपी मोड आधार पर होगा। इस सुरंग के निर्माण से चंबा जिला की शेष विश्व से दूरी कम होने के साथ ही पर्यटन कारोबार को पंख लगेंगे। कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि वर्तमान सरकार ने चुवाड़ी-चंबा सुरंग के लिए सार्थक पहल करते हुए अपने स्तर करोड़ों रुपए खर्च कर इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करवाई।

उन्होंने बताया कि सुरंग निर्माण की पर्यावरण मंत्रालय व एफआरए की औपचारिकताओं को निपटाया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जिला चंबा भौगोलिक दृष्टि से पिछड़ा होने के कारण यहां अन्य जिलों की तुलना में धन की अधिक आवश्यकता है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों से जिला को जोडऩे के लिए सुरंग निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल सडक़ मार्ग की दूरी कम होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी यह महत्त्वपूर्ण है।

: *नशे में हैवान बना युवक, बेरहमी से ली युवती की जान, कालेज जा रही छात्रा पर दराट से किए वार, दिनदहाड़े वारदात से क्षेत्र में दहशत* 

मंडी के गोपालपुर में कालेज जा रही छात्रा पर दराट से किए वार, दिनदहाड़े वारदात से क्षेत्र में दहशत

नशे ने एक इनसान को इतना हैवान बना दिया कि उसने बेरहमी से एक युवती की हत्या कर डाली। हत्या भी ऐसे की, जिसमें सिर धड़ से अलग कर दिया और बाजू तक काटा डाला। यह दिल दहला देने वाली घटना मंडी के गोपालपुर में सोमवार सुबह करीब नौ बजे घटित हुई। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया, लेकिन ग्रामीणों और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से उसे जल्द ही पकड़ लिया गया। सिया की चीख सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जहां का दृश्य बेहद भयावह था। युवती का गला कटा हुआ था और बाजू भी गंभीर रूप से जख्मी थी। चारों ओर खून फैला हुआ था, जिसे देखकर लोग सकते में आ गए। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही डीएसपी और एसएचओ पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटना स्थल को फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित किया गया। पुलिस ने टीमें गठित कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी।

आरोपी को सीसीटीवी फु टेज के माध्यम से पकड़ा गया। हत्या का समय और आरोपित के उस जगह से गुजरने का समय मैच करता था। उसी आधार पर पुलिस स्थानीय युवकों के साथ आरोपित विकास पटियाल के पीछे लग गई। पुलिस ने आरोपी को करीब तीन घंटे बाद गिरफ्तार कर लिया। वह इसी क्षेत्र के एक गांव का निवासी है।

पकड़े जाने पर दो युवकों पर भी किया हमला

आरोपी ने पकड़ में आने के दौरान दराट से हमला कर दो युवकों को भी घायल कर दिया। इन युवकों के हाथ में चोटें आई हैं। पकड़े जाने पर गुस्साए लोगों ने मौके पर ही उसकी पिटाई कर दी, जिसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

गेहंू के खेतों में छिपा था आरोपी

ग्रामीणों और पुलिस की एक टीम ने आरोपी को जंगल और गेहूं के खेतों में छिपा हुआ ढूंढ निकाला। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कई टीमें गठित कीं और आरोपी की तलाश शुरू कर दी थी। ग्रामीणों ने भी पुलिस का साथ दिया।

साथ रखता था दराट या चाकू

गोपालपुर पंचायत के पूर्व उपप्रधान प्रमोद के अनुसार, आरोपी अक्सर अपने साथ चाकू या दराट रखता था और उसे कई बार श्मशानघाट या सुनसान जगहों पर नशा करते देखा गया था। लोगों का यह भी कहना है कि उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं लगता था। उन्होंने ने इस बारे पुलिस को भी सूचित किया था।

नशा मुक्ति केंद्र में रह चुका है आरोपी

एसपी मंडी विनाद कुमार का कहना है कि पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। 103 की धारा में केस दर्ज किया गया है। डीएसपी सरकाघाट संजीव गौतम ने बताया कि आरोपित व्यक्ति नशे का आदी है और नशा मुक्ति कें्रद में भी रह चुका है।

सरकाघाट में छात्रा की निर्मम हत्या पर महिला आयोग गुस्सा

शिमला। सरकाघाट में 19 वर्षीय छात्रा की दराट से गला काटकर की गई निर्मम हत्या के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना पर हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी ने गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। विद्या नेगी ने इस घटना को बेहद निंदनीय, दुखदायक और शर्मनाक बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज के लिए कलंक हैं।

उन्होंने बताया कि आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया है और इस संबंध में एसपी मंडी से बातचीत की गई है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर हिरासत में ले लिया है। उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

: *दक्षिण अफ्रीका में हमीरपुर के युवक की मौत, विदेश में स्वीमिंग पूल में तैरता मिला महारल के अमन का शव* 

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला के उपमंडल बड़सर के तहत आने वाली पंचायत महारल में उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब क्षेत्र के 26 वर्षीय युवक अमन कुमार की दक्षिण अफ्रीका में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। माता-पिता के इकलौते बेटे अमन का शव एक स्विमिंग पूल में बरामद हुआ है, जिसने इस पूरी घटना को रहस्यों के घेरे में खड़ा कर दिया है। पिछले साल दीपावली के बाद अपने सुनहरे भविष्य के सपने संजोकर और परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने की उम्मीद लेकर अमन विदेश गया था, जहां वह एक होटल में कार्यरत था। पिता उधम सिंह ने भारी आर्थिक तंगी के बावजूद मेहनत-मजदूरी और शादियों में बैंड बजाकर पाई-पाई जोड़ी ताकि अपने बेटे को होटल मैनेजमेंट का कोर्स करवा सकें। उनकी मेहनत रंग भी लाई थी और अमन घर की गरीबी दूर करने के लिए सात समंदर पार गया था।

दो बहनों की शादी के बाद अमन ही घर का एकमात्र सहारा था। करीब तीन महीने पहले ही उसने केरल की एक युवती से कोर्ट मैरिज की थी और परिवार बड़ी बेसब्री से उसके घर लौटने का इंतजार कर रहा था। घर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शादी के जश्न की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन जिस आंगन में सेहरा सजने वाला थाए वहां अब मातम का सन्नाटा पसरा है। अमन के परिजनों सहित समस्त ग्रामीणों ने केंद्र व प्रदेश सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग की है। शव को भारत पहुंचने में 15 से 20 दिन का समय लग सकता है।

: *हरियाणा के युवकों से पकड़ी सवा चार किलो चरस, सरकाघाट के पुंघ में नाके के दौरान कार सवारों से नशा बरामद* 

जिला मंडी में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत डीएसपी सुुंदरनगर भारत भूषण की अगवाई में पुलिस थाना सुुंदरनगर की टीम ने वर्ष 2026 की चरस की सबसे बड़ी खेप को पकडऩे में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन क्षेत्र में पुलिस द्वारा की गई नाकाबंदी के दौरान उप निरीक्षक दौलत राम कटारिया के नेतृत्व में मुख्य आरक्षी हंसराज आरक्षी सतीश और कुलदीप की टीम ने एक हरियाणा संदिग्ध कार को जांच के लिए रोका। तलाशी लेने पर कार से चार किलो 32 ग्राम चरस बरामद की गई।

कार में सवार दो युवकों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों की पहचान विन्नी 32 वर्ष निवासी घुमारन वाली गली, आर्य समाज चौक पटियाला और निखिल 23 वर्ष निवासी नौगजा पीर हीरा कॉलोनी, बहादुरगढ़ पटियाला पंजाब के रूप में हुई है। डीएसपी सुंदरनगर भारत भूषण ने बताया कि युवकों को गिरफ्तार करते हुए मामला दर्ज कर लिया है।

: *पंचायत चुनावों से पहले शिमला में कांग्रेस का मंथन* 

himachal congress

प्रदेश कांग्रेस कमेटी का जनरल हाउस 16 को, रजनी पाटिल समेत सीएम सुक्खू भी रहेंगे मौजूद

प्रदेश में पंचायती राज चुनावों से ठीक पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपनी आमसभा तय कर दी है। पीसीसी के गठन के बाद यह पहली आमसभा होगी। इसमें कांग्रेस की प्रदेश मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल और सह प्रभारी समेत मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अलावा तमाम पार्टी नेता अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएंगे। आमसभा में पंचायती राज चुनाव, संगठन समेत अन्य पहलुओं पर मंथन होगा और पार्टी अपनी आगामी रणनीति भी तैयार करेगी। पीसीसी के संगठन महामंत्री विनोद जिंदा ने आमसभा को लेकर सोमवार को तैयारियों का जायजा लिया और वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार-विमर्श भी किया है। माना जा रहा है कि आमसभा में चुनावों को लेकर संगठन पार्टी प्रभारी, सीएम और प्रदेश के अन्य बड़े नेताओं की मौजूदगी में गहन मंथन कर अपनी रणनीति तैयार करेगा। वहीं ंप्रदेश में संगठन को और मजबूत करने तथा कांग्रेस संगठन सृजन अभियान की सोच को धरातल पर उतारने के निर्देश भी पदाधिकारियों को इस दौरान दिए जाएंगे।

उधर, पीसीसी के संगठन महामंत्री विनोद जिंदा ने आमसभा की तैयारियों का सोमवार को जायजा लिया है। साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार विमर्श कर आमसभा के आयोजन को भी अंतिम रूप दे दिया है। संगठन महामंत्री विनोद जिंदा ने बताया कि 16 अप्रैल को होने वाली आमसभा दो सत्रों में होगी। जिसमें मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, प्रदेश मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल, सह प्रभारी चेतन चौहान व विदित चौधरी विशेष रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएंगे।

पहली बार हो रही बैठक

पीसीसी के गठन की प्रकिय्रा पूरी होने के बाद अब पार्टी की पहला जरनल हाउस 16 अप्रैल को बुलायाा गया है। प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार की अध्यक्षता में यह आमसभा होगी। अहम है कि प्रदेश में आगामी दिनों में पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय नगर निकायों के चुनाव भी होने जा रहे है। लिहाजा इन चुनावों से ठीक पहले आमसभा बुलाई गई है।

संगठन संग प्रदेश की सियासत पर होगी चर्चा

आमसभा में प्रदेश मंत्रिमंडल के सभी सदस्य, कार्यकारणीसदस्य, सभी जिला अध्यक्ष के साथ अग्रणी संगठनों के प्रदेश प्रमुखों को बुलाया गया है। दो सत्रों में होने वाली इस आमसभा में पहले संगठन से जुड़े मसलों पर आपसी विचार विमर्श होगा। दूसरे सत्र में पीएसी के सभी सदस्यों के साथ प्रदेश के राजनैतिक मसलों पर गहन चर्चा होगी। बैठक में प्रदेश में कांग्रेस की भावी राजनीति, संगठन की सक्रियता पर विचार करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे।

: *चंबा में वन विभाग की टीम पर हमला, अवैध लकड़ी जब्त करने पर हुआ पथराव; सरकारी गाड़ी क्षतिग्रस्त*

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में वन माफिया के हौसले बुलंद हैं। ताजा मामले में मसरूंड रेंज के तहत कलहेल-बाजली मार्ग पर अवैध लकड़ी पकड़ने गई वन विभाग की टीम पर हमला किया गया है। रविवार रात हुए इस पथराव में विभागीय वाहन को काफी नुकसान पहुंचा है, हालांकि वन विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए देवदार की खेप को जब्त कर एक आरोपी को दबोच लिया है।

*12 देवदार के स्लीपर बरामद*

जानकारी के मुताबिक, वन परिक्षेत्र अधिकारी मसरूंड राजेश पठानिया के नेतृत्व में टीम ने गश्त के दौरान 12 देवदार के स्लीपर बरामद किए, जिन्हें तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भारतीय वन अधिनियम के तहत लकड़ी को कब्जे में ले लिया। जब्ती की कार्रवाई के बाद जब वन विभाग के कर्मचारी लकड़ी को वाहन में लोड कर रहे थे, तभी पहाड़ी की ऊंचाई से अज्ञात हमलावरों ने टीम पर पथराव किया। इस पथराव में ब्लॉक अधिकारी की कार, जिसे वन रक्षक चला रहे थे, बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हालांकि कोई भी पत्थर किसी कर्मचारी को सीधे नहीं लगा।

*पुलिस सुरक्षा में सुरक्षित निकली टीम*

हमले की गंभीरता को देखते हुए वन अधिकारियों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। स्थानीय पुलिस बल के मौके पर पहुंचने के बाद ही वन विभाग की टीम लकड़ी सहित सुरक्षित बाहर निकल पाई। रात के अंधेरे का फायदा उठाकर अन्य हमलावर भागने में सफल रहे। वन परिक्षेत्र अधिकारी राजेश पठानिया ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा, "वन माफिया ने टीम पर दबाव बनाने और डराने के लिए यह कायराना हमला किया है। हमने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और हमले की शिकायत दर्ज करवा दी है। दोषियों की पहचान की जा रही है और उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे हमलों से विभाग का मनोबल नहीं गिरेगा, बल्कि भविष्य में गश्त और कड़ी की जाएगी।" पुलिस ने मामला दर्ज कर फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है और क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

: *सरकाघाट मर्डर आंखों में आंसू और चीखो पुकार, सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में सिया का अंतिम संस्कार*

सरकाघाट के गोपालपुर क्षेत्र के तहत नैण गांव मर्डर केस में मंगलवार को मृतका 19 वर्षीय सिया गुलेरिया का पैतृक गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान हर आंख नम थी। आंखों में आंसू और हृदय में पीड़ा लिए सैकड़ों लोगों ने गांव की बेटी को अंतिम विदाई दी।

सुबह से ही सिया गुलेरिया के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण, स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और विभिन्न संगठनों के सदस्य अंतिम संस्कार में शामिल हुए और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। हर किसी की आंखें नम थीं और लोगों में घटना को लेकर गहरा आक्रोश भी देखने को मिला। सिया के अंतिम संस्कार में विधायक दिलीप सिंह, एसडीएम राजेंद्र गौतम, डीएसपी संजीव गौतम, राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड के सदस्य एवं माकपा नेता भूपेंद्र सिंह, पूर्व जिला पार्षद मुनीश शर्मा, नागेंद्र गुलेरिया, तहसीलदार रमेश भारद्वाज, अधिवक्ता सुरेश शर्मा, दिनेश काकू सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

बस रूट बंद न होता, तो सिया की जान न जाती

सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र के गोपालपुर के साथ लगते गांव नैण-ठाणा में पिछले कल एक कॉलेज पढऩे वाली छात्रा की निर्मम हत्या शायद न होती, यदि इस गांव के लिए दिन में तीन बार जाने वाली बसें नियमित चलती। यह बात माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि मंडल को स्थानीय लोगों ने बताई, जिसमें पार्टी सचिव भूपेंद्र सिंह भी शामिल थे, जिन्होंने मीडिया को बताया कि इस गांव के लिए जो तीन बसें चलती थीं, वे पिछले एक महीने से बंद हैं और बस का गांव में न जाना सिया गुलेरिया की हत्या का कारण बन गया।

: *फिर मिलेंगे अमरीका-ईरान, इस्लामाबाद या जेनेवा में हो सकती है शांति समझौते को लेकर बैठक* 

अमरीका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर इस हफ्ते फिर बैठक हो सकती है। इसके लिए इस्लामाबाद और जेनेवा संभावित जगह मानी जा रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमरीका के अधिकारी आपस में दूसरी बैठक को लेकर बात कर रहे हैं। यह बैठक 21 अप्रैल से पहले हो सकती है। न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमरीका के साथ इस्लामाबाद वार्ता में यूरेनियम संवर्धन को अस्थायी रूप से पांच साल के लिए रोकने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद बने रहने के कारण कोई समझौता नहीं हो सका। ईरान ने संवर्धन गतिविधियों को सीमित अवधि के लिए रोकने का प्रस्ताव दिया, जो अमेरिका की लंबे समय (करीब 20 वर्ष) तक रोक की मांग से कम था। ईरान पहले भी इसी तरह का प्रस्ताव जिनेवा वार्ता के दौरान दे चुका था और इस्लामाबाद वार्ता में इसे फिर सामने रखा गया। व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि अगले दौर की वार्ता पर विचार किया जा रहा है, हालांकि इसकी रूपरेखा अभी तय नहीं हुई है। इसी बीच अमरीकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के साथ समझौते को लेकर अब गेंद तेहरान के पाले में है। अमरीका ने अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं और अब आगे बढऩा ईरान पर निर्भर है।

वेंस के मुताबिक इस्लामाबाद में हुई वार्ता में कुछ प्रगति हुई, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका। अमरीका ने परमाणु हथियार नहीं बनाने को लेकर अपनी शर्तें साफ रखी हैं। उन्होंने कहा कि अगर ईरान इन शर्तों को मानता है, तो अमेरिका उसे सामान्य देश की तरह ट्रीट करने को तैयार है। ईरान ने कहा है कि अमरीका और इजरायल के हमलों से उसे करीब 270 अरब डॉलर (25 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ है। ईरान ने साफ किया है कि वह शांति के लिए तैयार है, लेकिन उसकी कुछ शर्तें हैं। ईरान चाहता है कि उसे यूरेनियम एनरिचमेंट का अधिकार मिले, उस पर लगे सभी प्रतिबंध हटाए जाएं और युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई की जाए। इसी बीच ईरानी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि अगर अमरीका अपनी दबाव वाली नीति छोड़ता है और ईरानी जनता के अधिकारों का सम्मान करता है, तो समझौते का रास्ता निकल सकता है। की बात कही है, जिससे तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

जिनपिंग बोले, दुनिया ताकतवरों के हिसाब से नहीं चल सकती

चीन ने ईरान के बंदरगाहों पर अमरीका की कथित नाकेबंदी को ‘खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना’ बताया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया को ‘जंगल के कानून’ (ताकतवर जो चाहे, वे करें) वाली हालत में नहीं जाने देना चाहिए। नियमों को सब पर बराबर लागू किया जाना चाहिए, न कि अपनी सुविधा के हिसाब से। इसी के साथ चीन के राष्ट्रपति ने मिडल ईस्ट में शांति के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव दिया है। इसमें देशों के बीच शांतिपूर्ण तरीके से साथ रहने के सिद्धांत को बनाए रखना, हर देश की संप्रभुता का सम्मान करना, विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाकर चलना शामिल है।

: *Himachal Day : पेंशनरों को एरियर या महिलाओं को 1500, हिमाचल दिवस पर CM की घोषणाओं का इंतजार* 

किन्नौर जिला के रिकांगपिओ से बुधवार सुबह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश की जनता के लिए नई घोषणा कर सकते हैं। राज्य के 78वें हिमाचल दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए तैयारियां पूरी हो गई हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू यहां से क्या नई घोषणाएं करेंगे, इस पर सबकी नजर रहेगी। जनजातीय जिला में राज्य स्तरीय आयोजन को लेकर उत्साह का माहौल है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सामने ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और भव्य परेड का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री परेड का निरीक्षण करने के साथ ही प्रदेशवासियों को संबोधित भी करेंगे।

उन्होंने अपने बजट भाषण में पेंशनरों के लंबित एरियर को इसी साल चुकाने और ग्रेच्युटी तथा लीव इनकैशमेंट के भुगतान की घोषणा की हुई है। समारोह में इस बारे में कोई घोषणा हो सकती है। इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मानित निधि का लाभ जनजातीय जिला की पात्र महिलाओं को दिया जा सकता है।

कार्यक्रम में दिखेगी पहाड़ी संस्कृति की झलक

समारोह में प्रदेश की विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें सिविल सेवा अवार्ड, प्रेरणा स्रोत सम्मान, हिमाचल गौरव पुरस्कार और जिला स्तरीय पुरस्कार शामिल हैं। इसके अलावा पात्र लाभार्थियों को योजनाओं के तहत एफआरए पट्टे और श्रम कल्याण विभाग की ओर से सहायता राशि के चेक भी वितरित किए जाएंगे।

सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेंगे, जिनमें जिला कांगड़ा, सिरमौर और किन्नौर के कलाकारों द्वारा लोक नृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही पुलिस विभाग और अन्य संस्थाओं की ओर से भी विशेष प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

: *1867 में नगर परिषद, 2016 में मिला नगर निगम का दर्जा, पीएम मोदी ने 2015 में देखा स्मार्ट सिटी का सपना* 

आजादी के बाद हिमाचल में पहली नगर निगम बनी थी धर्मशाला, पीएम मोदी ने 2015 में देखा स्मार्ट सिटी का सपना

देश की आजादी के बाद हिमाचल प्रदेश के पहले नगर निगम का दर्जा नगर परिषद धर्मशाला को ही प्रदान किया गया था। धर्मशाला में 1853 में कैंट छावनी क्षेत्र की शुरुआत करने के बाद वर्ष 1867 में नगर परिषद धर्मशाला की नींव रखी गई थी। इसके बाद वर्ष 2016 में पहली बार नगर निगम धर्मशाला के रूप में राज्य की दूसरी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन बनने का गौरव हासिल किया था। इसी बीच 2016 में ही एमसी धर्मशाला को पहाड़ी राज्य की पहली स्मार्ट सिटी के रूप में भी चयन किया गया। अब तक एमसी धर्मशाला के 2016 व 2021 में दो बार चुनाव हो चुके हैं, अब अप्रैल 2026 में चुनाव होना प्रस्तावित हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 जून 2015 में भारत में स्मार्ट सिटी बनाने का सपना देखा था और इसी के चलते नेशनल स्मार्ट सिटी मिशन लांच किया था, लेकिन जिन 125 शहरों में पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के पहले शहर धर्मशाला को स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चुना गया था, वह धर्मशाला शहर आज से 115 वर्ष पूर्व ही एक अति विकसित स्मार्ट सिटी बन चुका था।

स्मार्ट धर्मशाला में 115 वर्ष पहले पेयजल योजना बनाकर पहली पाईप-लाईन से शहर में 24 घंटे नल में पानी की सप्लाई आती थी, वहीं अब आत्याधुनिक स्मार्ट सिटी धर्मशाला में पांच वर्षों के बाद भी 24 घंटे पानी की सप्लाई लोगों तक पहुंचाए जाने की योजनाएं ही बन रही हैं। इसके अलावा देश भर में धर्मशाला में सबसे पहले बिजली संग स्वास्थ्य का भी उचित व्यवस्था की गई थी। इतना ही नहीं आज एक स्मार्ट रोड़ बनाए जाने को एक वर्ष से अधिक का समय बित गया है, लेकिन उसकी नालियां ही नहीं भरी जा रही, लेकिन लगभग एक सौ वर्ष से पहले धर्मशाला में 11 स्मार्ट रोड़ सहित लिंक मार्गों का भी जाल बिछा हुआ था, जिसमें पैदल व घुड़सवारी वाले मार्ग भी शामिल थे। वहीं पहाड़ी राज्य हिमाचल की 2016 में चयनित पहली स्मार्ट सिटी पांच वर्षों से अब भी स्मार्ट होने से कोसों दूर है।

स्मार्ट शहर के रूप में हुआ था विकसित

1853 में कैंट छावनी क्षेत्र की शुरूआत करने के बाद वर्ष 1867 में नगर परिषद धर्मशाला की नींव रखी गई। इसमें शहर को विभिन्न अलग-अलग सेक्टरों में बांटा गया था, जिसमें विभागीय कार्यालय को लिए अलग स्थान था, अधिकारियों के निवास स्थान को अलग, स्वास्थ्य व शिक्षा के लिए अलग व सैन्य बल के लिए अलग-अलग से स्थान निर्धारित किए गए थे। उक्त सभी सैक्टरों को जोडऩे के लिए 11 स्मार्ट रोड बनाए गए थे, इसके साथ ही पैदल व घुड़सवारी योग्य सडक़ मार्ग भी विशेष रूप से तैयार किए गए थे। हालांकि इसके बाद लगातार सरकारों-प्रशासन व विभागीय लापरवाही के कारण बसे बसाए स्मार्ट शहर को उजाडऩे की तरफ ही धकेला गया।

चुनावी मुद्दा

हालांकि पीएम मोदी के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत ही धर्मशाला का भी स्मार्ट सिटी के रूप में चयन किया गया है, जिसमें आगामी 18 वर्षों में 186 हज़ार करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रोपोजल है, जबकि वर्तमान में 2106 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रोपोजल है, जो कि सही अर्थों में धरातल पर नहीं उतर पाया है। उक्त मुद्दे ही इस बार एमसी चुनाव में अहम होने वाले हैं।

: *महिलाओं को हर महीने दो हजार, सिलेंडर फ्री, तमिलनाडु में भाजपा का घोषणापत्र जारी, इन्हें आर्थिक मदद देने का वादा* 

तमिलनाडु में भाजपा का घोषणापत्र जारी, जल्लीकट्टू बैल पालने वालों को आर्थिक मदद देने का वादा

पश्चिम बंगाल के बाद अब तमिलनाडु में भाजपा ने अपने घोषणापत्र जारी किया है। मैनिफेस्टो में महिलाओं के लिए 2,000 रुपए और हर साल तीन फ्री एलपीजी सिलेंडर का वादा किया है। घोषणापत्र जारी करने के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि तमिलनाडु दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है और हर भारतीय को इस पर बहुत गर्व है। आज इस सांस्कृतिक राजधानी को अपराध की राजधानी में बदल दिया गया है। अब पूरे राज्य में डीएमके और भ्रष्टाचार, अपराध के खिलाफ गुस्सा है। इस चुनाव में आप देखेंगे, हम देखेंगे कि लोग इस नापाक गठबंधन का पर्दाफाश करेंगे। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में घर की महिला मुखिया को हर महीने 2,000 रुपए, सालाना तीन फ्री एलपीजी सिलेंडर और टैक्स बढ़ोतरी और बढ़ते रहने के खर्च को कम करने के लिए हर घर को एक बार में 10,000 रुपए देने का वादा किया है।

मैनिफेस्टो में योग्य महिलाओं को ई-स्कूटर खरीदने के लिए 25,000 रुपए की सबसिडी, जल्लीकट्टू बैल पालने वालों को 2,000 रुपए महीने की मदद और हिस्सा लेने वालों की मौत होने पर 10 लाख रुपए की मदद का भी प्रस्ताव है। इस मौके पर बोलते हुए जेपी नड्डा कहा कि जब मैं तमिलनाडु की बात करता हूं, तो मैं हमेशा कहता हूं कि यह दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक का जन्मस्थान है। हर भारतीय को इस पर बहुत गर्व है। आज, यह कल्चरल कैपिटल क्राइम कैपिटल में बदल गया है। यह डीएमके ही है जिसने तमिलनाडु को हर मोर्चे पर फेल कर दिया। इस चुनाव में, आप देखेंगे, हम देखेंगे, कि लोग इस नापाक डीएमके को एक्सपोज करेंगे। यह एक फैमिली पार्टी है जहां स्टालिन टॉप पर हैं, उदयनिधि वारिस हैं, कनिमोजी पार्टनर हैं, और सबरीसन मैनेजर हैं। यह पार्टी ऐसे ही काम कर रही है। डीएमके ने महिलाओं के साथ धोखा किया है। उन्होंने युवाओं के साथ धोखा किया है। उन्होंने किसानों के साथ धोखा किया है।

पहली बार घर खरीदने वालों को भी मिलेगी छूट

पार्टी ने पहली बार घर खरीदने वाली महिलाओं के लिए तीन फीसदी स्टांप ड्यूटी में छूट, 10,000 रुपए की एक बार की घरेलू मदद स्कीम और घरेलू सामान के लिए 8,000 रुपए के कूपन समेत लगातार मदद के उपायों की भी घोषणा की है। इसमें स्थानीय लोगों के लिए बड़े मंदिरों में रोजाना दो घंटे के दर्शन स्लॉट और थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर रोशनी करने समेत कार्तिगई दीपम की रस्मों को जारी रखने का भी प्रस्ताव है।

: *दो साल में बनेगा कल्पा में नया स्टेडियम, CM बोले, इतनी ऊंचाई पर बनने वाला देश में होगा पहला स्टेडियम* 

हिमाचल दिवस कार्यक्रम को लेकर दो दिवसीय दौरे पर जिला किन्नौर के कल्पा पहुंचे प्रदेश मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को राजीव गांधी खेल परिसर कल्पा में होने वाले निर्माण कार्य का जायजा लिया। इस मौके पर प्रदेश बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी उनके साथ मौजूद रहे। वहीं जिला के उपायुक्त सहित अन्य आलाधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान प्रदेश मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कहा कि पहला राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल किन्नौर में जल्दी ही खुलने वाला है। उन्होंने कहा कि किन्नौर में चार सीबीएसई स्कूल खुल चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में इतनी ऊंचाई पर बनने वाला यह पहला स्टेडियम होगा। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया की तर्ज पर हम स्टेडियम को बनाएंगे। इसके लिए जो भी एस्टीमेट बजट आएगा उस बजट के आधार पर इसको पैसा उपलब्ध करवाया जाएगा। सीएम ने कहा कि 2 साल में स्टेडियम का निर्माण कार्य पूरा करने की प्रयास किए जाएंगे।

सीएम ने कहा कि इस खेल स्टेडियम के बनने से किनौर के युवाओं को तो लाभ मिलेगा।

साथ ही स्टेडियम में राज्य स्तरीय खेल प्रतिभाएं भी शुरू होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किनौर के युवा भी यहाँ होने वाले खेलों का आनंद ले। इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इतनी ऊंचाई पर खेल स्टेडियम बनाने के लिए जो भी पैसा लगेगा, उसका प्रबंध किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के आग्रह पर वह 15 अप्रैल हिमाचल दिवस को लेकर किन्नौर आये हैं और यहां चल रहे निर्माण कार्यों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था परिवर्तन है जहां जनता की सोच युवाओं की सोच को मंत्री और सरकार सोचती है। उसके अनुसार पैसा उपलब्ध करवाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों में तो हिमाचल दिवस पहले होते रहे हैं। 3 वर्ष हिमाचल सरकार को बने हुए हो गए हैं। सरकार ने सबसे पहले जनजातीय क्षेत्र स्पीति में पहला हिमाचल दिवस मनाया। उसके बाद दूसरा हिमाचल दिवस सरकार ने पांगी में मनाया।

जगत सिंह नेगी के आग्रह पर रिकांगपिओ में कार्यक्रम

सीएम ने कहा कि जगत सिंह नेगी 77 साल में पहली बार मंत्री बने हैं। उन्होंने मांग की थी कि इस बार हिमाचल दिवस उनके गृह क्षेत्र में मनाया जाए और सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं, पावर प्रोजेक्ट का कार्य भी देखें। इस दौरे से क्षेत्र में जो भी विकासात्मक कार्य हो रहे हैं, उनको देखने का भी मौका मिला है। इस दृष्टिकोण से हिमाचल दिवस रिकांगपिओ मनाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि किन्नौर जिले के 9000 फुट की हाइट पर कल्पा में बनने जा रहे खेल स्टेडियम में एथलेटिक्स, टेबल टेनिस, बास्केटबॉल, बैडमिंटन जैसी खेल सुविधाएं किन्नर के युवाओं को उपलब्ध होगी।

: *कांग्रेस बनाएगी मिशन 2027 का रोडमैप, कांगड़ा में जुटेंगे हिमाचल-पंजाब-जम्मू कश्मीर के जिलाध्यक्ष* 

हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से निर्णायक जिला कांगड़ा से कांग्रेस अपनी भविष्य की राजनीति का नया अध्याय लिखने जा रही है। विधानसभा चुनाव 2027 को लक्ष्य बनाकर पार्टी ने मिशन 2027 का ब्लूप्रिंट तैयार करने के लिए कांगड़ा को अपना मुख्य केंद्र चुना है। आगामी 21 से 30 अप्रैल तक चलने वाले एक विशेष प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कांग्रेस हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के संगठन को धार देगी। इस प्रशिक्षण शिविर की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी सहित कई राष्ट्रीय स्तर की हस्तियां शिरकत करेंगी। जानकारी के अनुसार, शिविर के दूसरे चरण यानी 25 अप्रैल के बाद राहुल गांधी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में जोश भरने के लिए विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कांगड़ा में हो रहे इस आयोजन की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार स्वयं तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि कांगड़ा ही वह भूमि है जहां से पूरे प्रदेश की राजनीति का रुख तय होता है।

कांग्रेस के जिला अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने इस आयोजन की पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी अब एक सुविचारित योजना के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि यह 10 दिन केवल प्रशिक्षण के नहीं, बल्कि संगठन के भविष्य की नींव रखने के होंगे।

: *सिया के कातिल ने कबूला अपना जुर्म, छात्रा को देखते ही खोया आपा, पूछताछ में नहीं बताया वारदात का कारण* 

गोपालपुर में 19 साल की सिया गुलेरिया की गर्दन सिरफिरे ने सनक में ही काट दी है। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में तो यही साफ हो पाया है कि कालेज जाती सिया को जैसे ही आरोपी विकास ने देखा तो आपा खो दिया और तैश में आकर हाथ में लिए दराट से वार कर दिया। सिया जब घायल होकर जमीन पर गिरी तो आरोपी घबरा कर घटनास्थल से भाग गया। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपी की जुबान खुलवाने के लिए हर हथकंडा पहली ही रात को अजमा लिया है। सिरफिरा वारदात से पहले और बाद की हर बात हू-ब-हू बता रहा है, लेकिन क्राइम सीन पर बात करते समय सिर्फ इतना ही कह रहा है कि लडक़ी को क्यों मारा नहीं जानता है?

लडक़ी और उसके परिवार से किसी पुरानी रंजिश को लेकर पूछे गए सवालों पर भी आरोपी यही कह रहा है कि ऐसा कुछ भी नहीं है। कालेज जाती सिया दिखी तो फिर उस पर दराट से वार कर दिया और भाग गया। लडक़ी पर कितने प्रहार किए इसका भी कोई हवाला नहीं दे रहा है। पुलिस के समक्ष आरोपी विकास यह भी कबूल कर रहा है कि मैंने ही मारा है। आरोपी के इस जवाब से पुलिस भी दवाब में है और हत्याकांड का सच जानने के लिए नए तौर तरीके रिमांड के दौरान अजमाने की तैयारी में है।

सिया के परिजनों से मिले एसपी विनोद कुमार

मंडी एसपी विनोद कुमार ने मंगलवार को नैण गांव में सिया के परिजनों से मुलाकात की है। इस दौरान एसपी ने परिजनों को आश्वासन दिया है कि हत्याकांड की हर परत खोली जाएगी और पीडि़त परिवार के साथ पूरा प्रशासन खड़ा है।

परिजनों ने किसी पर भी नहीं जताया शक

नशेड़ी के दराट से मौत की आगोश में सोई सिया के परिजनों ने फिलहाल किसी पर कोई शक जाहिर नहीं किया है और न ही हत्याकांड की जांच पर कोई सवाल खड़ा किया है। गमगीन परिजन सदमे में हैं।

मोटिव तो पता लगाएंगे

सरकाघाट के नैण गांव में हुए हत्याकांड पर मंडी एसपी विनोद कुमार ने कहा कि सिया की हत्या का उद्देश्य क्या है इसके लिए हर पहलू से जांच की जा रही है। आरोपी कुछ बता नहीं रहा है। रिमांड के दौरान सच्चाई पता लगाया जाएगा।

: *Baddi News : बद्दी में मौत के घाट उतारा प्रवासी, सिर पर वार कर खेत में फेंका खून से लथपथ शव* 

बद्दी के बिलांवाली लबाना में एक प्रवासी युवक के सिर पर वार कर निर्मम हत्या करने का मामला सामने आया है। खून से लथपथ शव मंगलवार सुबह खेत में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई, पुलिस ने मामले में दो संदिग्धों की पहचान कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। मंगलवार सुबह स्थानीय लोगों ने शव खेत में पड़ा देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। मामले में पुलिस थाना बद्दी में शैलव कुमार द्वारा शिकायत दर्ज करवाई गई है। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह मंगलवार सुबह ड्यूटी से लौट रहा था, तभी उसने खेत में लोगों की भीड़ देखी। पास जाकर देखा, तो ओमकार चौधरी का शव जमीन पर पड़ा था, जिसके सिर पर गंभीर चोटें थीं और आसपास खून फैला हुआ था।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सोमवार रात ओमकार चौधरी दो अन्य साथियों के साथ उसी स्थान के पास बैठा हुआ था, जहां उनके बीच कहासुनी और गाली-गलौज हुई थी। आशंका जताई जा रही है कि इसी विवाद के चलते मारपीट कर उसकी हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान ओमकार चौधरी पुत्र दिलावर सिंह निवासी गांव छितावर कीरतपुर उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों की शिनाख्त कर ली है। गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी बद्दी विनोद धीमान ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

: *अच्छी कमाई, पर्यटन विकास निगम को रास न आई, होटल लेक व्यू को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी पर सवाल* 

हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के विभिन्न जिलों में संचालित होटलों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी चल रही है। इसमें बिलासपुर शहर में स्थित होटल लेक व्यू कैफे भी शुमार है। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि इस वित्त वर्ष 1.60 करोड़ रुपए का कारोबार दर्ज होने के बावजूद इसे निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस बार होटल का कारोबार 37 लाख 79644 रुपए बढ़ा है और 19 लाख एक हजार रुपए का नेट प्रोफिट दर्ज किया गया है।

कैमरा और एक्सेसरीज

अब सवाल यह उठता है कि नेट प्रोफिट में होने पर भी इसे निजी हाथों में देने का क्या औचित्य? प्रदेश में एचपीटीडीसी के जिन आठ होटलों को निजी हाथों में देने की तैयारी है उनमें बिलासपुर शहर में स्थित होटल लेक व्यू भी शामिल है, जो बीते कुछ समय तक कारोबार में गिरावट के बाद भी मैनेजर तुलसीराम ठाकुर की दिन रात की कड़ी मेहनत और नई-नई प्लानिंग क्रियान्वित करने के चलते अब नेट प्रॉफिट में पहुंच गया है। पिछले दिनों सदर विधायक त्रिलोक जम्वाल ने भी इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की है और निगम प्रबंधन से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। यदि निजी हाथों में सौंपना ही है तो स्वारघाट स्थित हिल टॉप होटल को सौंपा जा सकता है क्योंकि फोरलेन से कट होने के बाद इस होटल के कारोबार में भारी कमी आई है।

2022 से 2026 तक का सफर

वर्ष कारोबार नेट प्रोफिट

2022-23 2,23,51,719 रुपए 35 लाख शुद्ध लाभ

2023-24 1,36,70226 रुपए एक लाख घाटा

2024-25 1,22,50577 रुपए 4 लाख घाटा

2025-26 1,60,30,271 रुपए 19 लाख शुद्ध लाभ

इस बार 37 लाख बढ़ा कारोबार

सूचना के तहत इस बार होटल लेक व्यू बिलासपुर का कारोबार 1.60 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है जबकि पिछले साल की तुलना में कारोबार में 37 लाख 79694 रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

: *MSP की लड़ाई फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंची, CJI बोले, मामला जनहित से जुड़ा, सरकार से मांगा जवाब* 

फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को लेकर जारी संघर्ष एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और जवाब मांगा है। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि यह मामला न केवल किसानों के हितों से जुड़ा हुआ है, बल्कि देश की कृषि नीति, बाजार संरचना और आर्थिक संतुलन पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। याचिका में मांग की गई है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी दे। जब तक एमएसपी को कानून का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा।

वर्तमान व्यवस्था में सरकार कुछ फसलों के लिए एमएसपी घोषित करती है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है कि हर व्यापारी या निजी खरीददार उसी कीमत पर खरीददारी करे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि यह दोहरी मार है, क्योंकि एमएसपी कॉस्ट प्राइस से कम दिया जाता है, जबकि यह कॉस्ट प्राइस और उसके 50 प्रतिशत का योग होना चाहिए। याचिका के पक्ष में अपनी दलील रखते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार का जनता को फ्री राशन देना ठीक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसानों पर ऐसा असर पड़े कि उन्हें अपनी फसल का उचित दाम न मिले और वे सुसाइड कर लें। उन्होंने अदालत को बताया कि देश में हर साल 10 हजार से ज़्यादा किसान सुसाइड करते हैं।

: *पेट्रोल-डीजल के दामों में लगने वाली है आग, बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव के बाद बढ़ सकते हैं रेट* 

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से देश में पेट्रोल 18 रुपए और डीजल 35 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं। इससे कंपनियों को नुकसान हो रहा है। ऐसे में पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद कंपनियां दाम बढ़ा सकती हैं। कच्चा तेल महंगा होने से कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर 18 रुपए और डीजल पर 35 रुपए का घाटा हो रहा है। पिछले महीने के पीक पर देश की तीनों बड़ी तेल कंपनियां हर दिन करीब 2,400 करोड़ का नुकसान झेल रही थीं। एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए की कटौती के बाद यह घाटा घटकर 1,600 करोड़ रह गया है।

ज़्यादा जानें

ब्रेकिंग न्यूज़ अलर्ट

पारंपरिक हिमाचली कपड़े

स्थानीय खबरें

हर 10 डालर के उछाल से नुकसान करीब छह रुपए प्रति लीटर बढ़ जाता है। सरकारी राजस्व में तेल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी का योगदान लगातार कम हो रहा है। वित्त वर्ष 2017 में यह 22 फीसदी था, जो अब घटकर सिर्फ आठ फीसदी रह गया है। अगर सरकार पूरी एक्साइज ड्यूटी हटा भी दे, तो भी मौजूदा कीमतों पर तेल कंपनियों का घाटा पूरी तरह खत्म नहीं होगा।

अमरीका सहित कई देशों ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम

अमरीका में पेट्रोल की औसत कीमतें अगस्त 2022 के बाद पहली बार चार डालर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई हैं। वहीं पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका सहित कई पड़ोसी देशों ने भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा किया है। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से 45 फीसदी मिडल ईस्ट और 35 फीसदी रूस से आता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें न केवल तेल कंपनियों, बल्कि देश के चालू खाता घाटे के लिए भी खतरा हैं। अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही में यह घाटा बढक़र 20 अरब डालर तक पहुंच सकता है।

: *IPL 2026 : आज आरसीबी और लखनऊ के बीच होगी कांटे की टक्कर* 

 इंडियन प्रीमियर लीग का एक्शन और भी ज्यादा रोमांचक हो गया है, क्योंकि अब बैटल आरसीबी और लखनऊ के बीच होने वाली है। चिन्नास्वामी स्टेडियम में वैसे तो सारे ही मुकाबले कांटे की टक्कर के होते हैं, लेकिन इस बार बंगलुरु का पलड़ा लखनऊ पर थोड़ा भारी होता दिखाई दे रहा है, लेकिन इस मुकाबले की भी अब तक हुए बाकी के मुकाबलों की तरह ब्लॉकबस्टर होने की पूरी संभावना है। आपको बता दें कि आरसीबी के खिलाड़ी ज़बरदस्त फॉर्म में हैं और एलएससी अपनी लय ढूंढने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक हुए मुकाबलों को देखें, तो ये कहना गलत नहीं होगा कि बंगलुरू का बोलबाला थोड़ा ज्यादा है, क्योंकि आईपीएल के इस सीजन में जहां बंगलुरु ने चार में से तीन मैच जीते हैं, तो वहीं लखनऊ चार में से सिर्फ दो ही मैच अपने नाम कर पाई है।

एम चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच छोटी बाउंड्री के साथ एक जानी-मानी बैटिंग पैराडाइज़ है। यहां बॉलिंग के मुकाबले बैटिंग करना आसान रहता है, खासकर उन बल्लेबाज़ों के लिए जो लाइन में आकर हिट कर सकते हैं। पेस बनाम स्पिन की बात करें तो, पिछले पांच मैचों में तेज़ गेंदबाज़ों ने यहां 43 विकेट लिए हैं, जबकि स्पिनरों को सिर्फ 15 विकेट मिले हैं

: *10th-12th result: जानिए कब आएगा दसवीं-जमा दो का रिजल्ट* 

Post Code-962 Result :

इसी महीने बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों को समय पर घोषित करने की दिशा में अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। बोर्ड अध्यक्ष डा. राजेश शर्मा ने घोषणा की है कि उत्तर पुस्तिकाओं के जांच कार्य को गति देने के लिए 16 अप्रैल 2026 से द्वितीय चरण का स्पॉट इवैल्यूएशन विधिवत रूप से आरंभ किया जा रहा है। बोर्ड का लक्ष्य इस पूरी प्रक्रिया को न केवल पारदर्शी बनाना है, बल्कि एक निश्चित समय-सीमा के भीतर संपन्न करना भी है। मूल्यांकन प्रक्रिया की गंभीरता को देखते हुए डा. शर्मा ने सभी संबंधित शिक्षकों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि चयनित शिक्षकों को निर्धारित मूल्यांकन केंद्रों पर अपनी उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करनी होगी।

गुणवत्ता, गोपनीयता और पारदर्शिता पर फोकस

डा. शर्मा ने साझा किया कि इस बार तीन मुख्य स्तंभों गुणवत्ता, गोपनीयता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बोर्ड का प्रयास है कि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच इस तरह से हो कि छात्रों को उनकी मेहनत का सटीक फल मिले और मूल्यांकन में त्रुटि की कोई संभावना न रहे। समयबद्ध तरीके से मूल्यांकन पूरा होने से छात्रों को आगामी उच्च शिक्षा के सत्र के लिए समय पर परिणाम मिल सकेंगे।

फ्री एजुकेशन का एंटे्रंस एग्जाम तीन मई को

शिमला। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए डा. विजय मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल धर्मपुर, मंडी में कक्षा नौवीं में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। यह परीक्षा साईं इटरनल फाउंडेशन के तत्त्वावधान में हिमालयन सेंटर फॉर ह्यूमन रिसोर्स डिवेलपमेंट, धर्मपुर, जिला मंडी द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आयोजित की जाएगी। प्रवेश परीक्षा रविवार तीन मई को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा के लिए वहीं विद्यार्थी पात्र होंगे, जिन्होंने कक्षा आठवीं उत्तीर्ण कर ली है। सीमित सीटों पर लडक़े और लड़कियों का चयन योग्यता के आधार पर किया जाएगा।

साथ ही निम्न आय वर्ग और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों जैसे समाज के वंचित वर्गों के छात्रों को कुछ प्राथमिकता दी जाएगी। चयनित छात्रों को पूरी तरह से मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाएगी, जिसमें छात्रावास की सुविधा, वर्दी, किताबें, भोजन की व्यवस्था आदि शामिल हैं। परीक्षा केंद्रों में किसी भी प्रकार के बदलाव (मौसम की स्थिति या पहुंच संबंधी समस्याओं के कारण) की जानकारी के लिए साई इटरनल फाउंडेशन के फेसबुक पेज पर उपलब्ध करवाई जाएगी।

19 अप्रैल तक करें आवेदन

हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर की प्रवेश परीक्षा के लिए अभ्यर्थी 19 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अभी तक प्रवेश परीक्षा के लिए 5206 से अधिक अभ्यर्थियों के आवेदन आ चुके हैं। तकनीकी विवि के अधिष्ठाता शैक्षणिक डा. राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि इस बार कॉमन एंट्रेंस टेस्ट नौ व 10 मई को आयोजित किया जाएगा, इसके आवेदन करने की प्रक्रिया लगातार जारी है। प्रवेश परीक्षा फॉर्म भरने और उपरोक्त विषयों में प्रवेश के लिए पात्रता सहित अन्य जानकारी तकनीकी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

: *SSB में 1060 पदों पर बंपर भर्ती, कांस्टेबल के 827-हैड कांस्टेबल के 233 पदों के लिए इस डेट तक करें आवेदन* 

रक्षा क्षेत्र में अपना करियर बनाने और देश सेवा करने का जज्बा रखने वाले युवाओं के लिए एक शानदार अवसर सामने आया है। गृह मंत्रालय के अधीन सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने कांस्टेबल के विभिन्न पदों पर भर्ती निकाली है। इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 1060 रिक्त पदों को भरा जाएगा। इस भर्ती के अंतर्गत कांस्टेबल के 827 पद और हैड कांस्टेबल के 233 पद शामिल हैं। आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी और योग्य उम्मीदवार एसएसबी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना फॉर्म भर सकेंगे। योग्य उम्मीदवार 20 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं।

शैक्षणिक योग्यता: अधिकांश पदों के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं (मैट्रिक) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। कांस्टेबल (ड्राइवर) पद के लिए उम्मीदवार के पास वैध ‘हेवी व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस’ होना चाहिए। तकनीकी पदों (जैसे बढ़ई, लोहार आदि) के लिए संबंधित ट्रेड में आईटीआई सर्टिफिकेट या कार्य अनुभव की आवश्यकता हो सकती है।

आयुसीमा: न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 27 वर्ष निर्धारित की गई है (पदों के अनुसार इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है)। सरकारी नियमों के अनुसार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को ऊपरी आयुसीमा में विशेष छूट प्रदान की जाएगी।

आवेदन शुल्क: सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए शुल्क 100 रुपए है, जबकि एससी, एसटी, पूर्व सैनिकों और महिला उम्मीदवारों के लिए आवेदन पूरी तरह से नि:शुल्क रखा गया है।

ऐसे होगा चयन

एसएसबी कांस्टेबल बनने के लिए उम्मीदवारों को चार मुख्य चरणों से गुजरना होगा…

शारीरिक मानक परीक्षण (पीएसटी) और शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी): इसमें दौड़, लंबाई और सीने की माप शामिल होगी।

लिखित परीक्षा: शारीरिक परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को कम्प्यूटर आधारित या ओएमआर आधारित लिखित परीक्षा देनी होगी।

डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: ट्रेड से संबंधित पदों के लिए उम्मीदवारों के कौशल की जांच की जाएगी।

चिकित्सा परीक्षण: अंतिम रूप से चयनित होने के लिए उम्मीदवार का शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होना अनिवार्य है।

: *हिमाचल में भू-स्खलन से पहले अलर्ट होंगे लोग, एनआईटी के स्टूडेंट्स ने बनाया लैंड स्लाइड अलर्ट सिस्टम* 

हिमाचल समेत देश के अन्य पहाड़ी राज्यों में पिछले कुछ वर्षों से बरसात के मौसम में लैंडस्लाइड जैसी घटनाओं के कारण हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए एनआईटी हमीरपुर के स्टूडेंट्स ने ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया है, जो ऐसी घटनाओं की जानकारी पहले ही दे देगा। यानि रिहायशी इलाकों की पहाडिय़ों में कहां और किस वजह से भू-स्खलन हो सकता है इसकी जानकारी पहले ही पता लगाई जा सकती है। दरअसल एनआईटी हमीरपुर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर सेकेंड ईयर के छात्र-छात्राओं ने ‘लैंड स्लाइड अलर्ट सिस्टम’ का एक प्रोजेक्ट तैयार किया है जिसे पिछले दिनों संस्थान के निंबस कार्यक्रम में प्रदर्शित किया गया। प्रोजेक्ट तैयार करने वाले स्टूडेंट्स के अनुसार बरसात के मौसम में पहाड़ी राज्यों में लैंड स्लाइड की घटनाएं अधिक होती है। कई बार पूरे के पूरे गांव इसकी चपेट में आ जाते हैं जिससे जानमाल का नुकसान होता है तो कई बार छोटी सडक़ों से लेकर बड़े हाई-वे और पुल ढहने से करोड़ों की संपदा पल में बह जाती है जिससे प्रदेश पर आर्थिक बोझ भी पड़ता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम टिकट

लैंड स्लाइड का कारण कई बार जमीन के अंदर पानी की काफी अधिकतता तो कई बार भूमि के अंदर ईयर गैप हो जाने से वहां की मिट्टी कमजोर पड़ जाती है जो लैंड स्लाइड की वजह बनती है। ‘लैंड स्लाइड अलर्ट सिस्टम’ ऐसा प्रोजेक्ट होगा जिसमें इलेक्ट्रोन के ग्रिड जमीन के अंदर ऐसे पहाड़ी क्षेत्रों में लगाए जाएंगे जहां भू-स्खलन की घटनाओं की ज्यादा संभावना रहती है या फिर बार-बार भू-स्खलन हो रहा हो। ये ग्रिड जमीन के अंदर होने वाली हर एक्टिविटी की रिपोर्ट देंगे जिससे पहले ही पता लग सकेगा कि यह क्षेत्र डेंजर जोन बनने वाला है। ऐसे में वहां पहले ही एहतियात बरती जा सकती है। ग्रिड जितना पुराना होगा उतनी ही उसकी एकुरेसी परफेक्ट होती जाएगी।

अभी सेटेलाइड से करते हैं मेजर

इलेक्ट्रिक इंजीनियर विंग के स्टूडेंट्स के अनुसार अभी मौजूदा समय में सेटेलाइट के माध्यम से ऐसी घटनाओं को मेजर करने का प्रयास किया जाता है जो कि न तो इफेक्टिव है न ही बहुत अधिक एकुरेट। वो प्रोपर रिकॉर्ड नहीं कर पाता जिससे अवेयरनेस नहीं हो पाती। लेकिन ‘लैंड स्लाइड अलर्ट सिस्टम’ पूरी परफेक्शन के साथ काम करेगा।

पांच जिले अधिक संवेदनशील

कुल्लू-मंडी, कांगड़ा, चंबा और शिमला ऐसे जिले हैं, जो लैंडस्लाइड के लिहाज से काफी संवेदनशील हैं। हर साल बरसात में यहां लैंड स्लाइड की घटनाएं होती हैं, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ जानी नुकसान भी होता है। घर, गोशालाएं ध्वस्त होते हैं।

: *भरमौर में दिखा दुर्लभ हिमालयन तहर, कुगती वन्य जीव अभ्यारण्य के धरोल क्षेत्र में जंगली जानवर कैमरे में कैद* 

जिला चंबा के जनजातीय क्षेत्र भरमौर के कुगती वन्य जीव अभयारण्य के धरोल क्षेत्र में दुर्लभ हिमालयन ताहर (नर) की मौजूदगी दर्ज की गई है। हाल ही में इस वन्यजीव को पहाडिय़ों की ऊंची चट्टानों पर विचरण करते हुए देखा गया है, जो कि इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का एक सुखद संकेत है। दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों की श्रेणी में आने वाला हिमालयन ताहर मुख्य रूप से ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों के दुर्गम इलाकों में पाया जाता है और इसकी उपस्थिति वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की सफलता को दर्शाती है। इस महत्त्वपूर्ण साइटिंग पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डीएफओ वन्य प्राणी चंबा डा. कुलदीप जम्बाल ने स्थानीय जनता और पर्यटकों के लिए एक विशेष जागरूकता संदेश जारी किया है। हिमालयन तहर हमारे प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का एक अनमोल हिस्सा है और इसका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने लोगों से अपील की है कि यदि वे इन वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखते हैं, तो उनके करीब जाने या उन्हें किसी भी प्रकार से परेशान करने का प्रयास न करें। उन्होंने विशेष रूप से आग्रह किया कि वन्यजीवों के साथ छेड़छाड़ करना या इनके आवास में दखल देना न केवल उनके लिए असुरक्षित है बल्कि कानूनी रूप से भी दंडनीय अपराध है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि स्थानीय समुदाय हमेशा से वन्यजीवों के संरक्षक रहे हैं। इसलिए उन्हें शिकार जैसी अवैध गतिविधियों के खिलाफ सतर्क रहना चाहिए लोग वन्यजीव नियमों का पालन कर प्रशासन का सहयोग करें।

: *Accident : सडक़ पर पलटा श्रद्धालुओं से भरा ट्राला, ब्रेक फेल होने से हादसा; दस घायल, तीन की हालत नाजुक* 

जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्र के तहत पंचायत रिडी कुठेड़ा के गांव कुठेड़ा में मंगलवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया। श्रद्धालुओं से भरा पिकअप ट्राला अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में करीब 25 श्रद्धालुओं में से दस घायल हो गए, जिनमें तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि सभी श्रद्धालु पंजाब के दसूहा क्षेत्र से पक्काटियाला पपलोथर में माथा टेककर वापस लौट रहे थे। शाम करीब पांच बजे पेट्रोल पंप के पास मोड़ पर पहुंचते ही ट्राले के ब्रेक फेल हो गए और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका।

देखते ही देखते ट्राला सडक़ पर पलट गया और मौके पर चीख-पुकार मच गई। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग, पेट्रोल पंप कर्मचारी और अग्निशमन विभाग राहत कार्य में जुट गए। सूचना मिलते ही थाना संसारपुर टैरस के प्रभारी संजय शर्मा अपनी टीम सहित मौके पर पहुंचे और घायलों को तुरंत बाहर निकालकर अस्पताल भिजवाया। सभी घायलों को बीबीएमबी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

घायलों की सूची

घायलों की पहचान सरनप्रीत पुत्री मोहन सिंह निवासी गांव डाला जालंधर$, मुस्कान पुत्री अजमेर निवासी गांव रतन चक होशियारपुर$$,नीरू पत्नी संतोष सिंह निवासी फतन चक होशियारपुर, जस्मिन कौर पुत्री संतोष सिंह होशियारपुर, बेअंत सिंह पुत्र रूखा सिंह, अमरमीत कौर पत्नी गुरमुख सिंह, गुरमीत कौर पत्नी मच्छन सिंह, सतपाल सिंह पुत्र हरदेव, गुरप्रीत कौर पत्नी सतपाल सिंह, जसकीरत कौर पुत्री कुलविंदर व मनवीर सिंह पुत्र अजमेर सिंह सभी निवासी होशियारपुर के रूप में हुई है।

: *जिला परिषद-बीडीसी पर कांग्रेस का फोकस, चुनाव में प्रत्याशी चयन को प्रदेश स्तर पर होगा समिति का गठन* 

पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर कांग्रेस का जिला परिषद और पंचायत समिति पर विशेष तौर पर फोकस रहेगा। यही वजह है कि पार्टी ने इसके लिए प्रत्याशी चयन को लेकर पार्टी समर्थित लोगों को ही समर्थन करने का आह्वान किया है। वहीं मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाने के लिए बूथ स्तर पर पार्टी ने कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपने का भी निर्णय लिया है। इसके अलावा प्रत्याशी चयन के लिए राज्य स्तर पर भी समिति का गठन करने की बात प्रदेशाध्यक्ष ने कही है। जिला स्तर पर अध्यक्षों ने जिला परिषद और बीडीसी के लिए समितियों के गठन की दिशा में भी कदम आगे बढ़ा दिया है। कांग्रेस ने राज्य स्तर पर भी पंचायत चुनावों को लेकर एक समिति का गठन करने का निर्णय लिया है।

यह समिति पंचायती राज के साथ नगर निकाय चुनावों में प्रत्याशियों को लेकर निगाह रखेगी। कांग्रेस ने जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनावों में प्रत्याशियों के चयन को लेकर विशेष तौर पर निगाह रखने के निर्देश जिला अध्यक्षों को दिए हैं, ताकि पार्टी समर्थित प्रत्याशी को चुनाव में उतारा जा सकें और बाद में जिला परिषद व पंचायत समिति अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पदों के लिए होने वाली चुनावी प्रक्रिया में आसानी से पार्टी समर्थित की ताजपोशी हो सकें।

कल होगी आमसभा

कांग्रेस पंचायत प्रधान समेत अन्य पदों के लिए कार्यकर्ताओं से पार्टी विचारधारा से जुड़े उम्मीदवार का समर्थन करने का आह्वान कर चुके हैं। उधर, पंचायत व नगर निकाय चुनावों से ठीक पहले और पीसीसी के गठन के बाद कांग्रेस की पहली आमसभा 16 अप्रैल को होने जा रही है। माना जा रहा है कि इस आमसभा में पार्टी के जिला अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों के साथ पंचायत व नगर निकाय चुनावों पर मंथन होगा।

: *केएनएच बंद नहीं होगा, सिर्फ गायनी को IGMC भेजा, CM बोले, रोबोटिक सर्जरी का लाभ देने को लिया फैसला* 

सीएम बोले, रोबोटिक सर्जरी का लाभ देने को लिया फैसला

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि कमला नेहरू अस्पताल को नहीं बदला जा रहा है। मातृ एवं शिशु अस्पताल को वहीं रखा जा रहा है। यह अस्पताल 100 साल पुराना है। वहां पर 270 बेड बना दिए गए हैं और हम नई बिल्डिंग बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसलिए गायनी वार्ड को शिफ्ट किया जा रहा है, क्योंकि महिलाओं के लिए हमने आईजीएमसी में हाईटेक सुविधाएं दी है। केएनएच में उन्हें रोबोटिक सर्जरी का लाभ नहीं मिल सकता। इसलिए आईजीएमसी में यह सर्जरी करवाने के लिए वार्ड को शिफ्ट किया जा रहा है। गायनी में इस सर्जरी का इस्तेमाल ज्यादा होगा, इसलिए उस एक वार्ड को ही हम शिफ्ट कर रहे हैं। इसमें राजनीतिक रोटियां नहीं सेंकनी चाहिए।

सीएम ने कहा कि केएनएच में अल्ट्रासाउंड की 15 साल पुरानी मशीन है। इसलिए महिला गायनी के चैकअप के लिए आईजीएमसी भी जा सकती है। उन्हेांने कहा कि यहां लेटेस्ट मशीनें हैं। प्रदेश की हर महिला को बेस्ट इलाज मिले, इसलिए हम कमला नेहरू अस्पताल से गायनी वार्ड को आईजीएमसी में बदल रहे हैं।

Tejraftarnews.in 

: अंधेरे का साम्राज्य अब आपके अंदर तक घुस चुका है। आपकी इच्छाशक्ति पर कब्जा हो चुका है, और यह कब्जा डोपामाइन नामक रसायन के माध्यम से हो रहा है। यह कोई साधारण आनंद का अणु नहीं है। यह खोज का, प्रत्याशा का, और कभी न खत्म होने वाली भूख का अणु है। हर बार जब आप फोन उठाते हैं, जब स्क्रॉल करते हैं, जब एक नया नोटिफिकेशन की घंटी बजती है, तो आपका मस्तिष्क एक तीव्र तनाव उत्पन्न करता है। यह तनाव आपको आगे बढ़ने के लिए मजबूर करता है। लेकिन यह आगे बढ़ना कभी खत्म नहीं होता। आप लगातार खोज में लगे रहते हैं—अगली रील, अगला लाइक, अगला कमेंट, अगला वीडियो। और जब आप इस लूप में फंस जाते हैं, तो वास्तविक जीवन की कोई भी चीज आपको संतुष्ट नहीं कर पाती। आप मैट्रिक्स के लिए एकदम परफेक्ट गुलाम बन जाते हैं—एक ऐसा जीव जो बिना सोचे-समझे उपभोग करता रहता है, और कभी सवाल नहीं करता कि असल में क्या हो रहा है।

आपका मस्तिष्क एक सटीक तराजू की तरह काम करता है, जो संतुलन बनाए रखने के लिए हमेशा तैयार रहता है। लेकिन आजकल यह तराजू बार-बार तोड़ा जा रहा है। जब भी कोई कृत्रिम उत्तेजना—चाहे वह पोर्न हो, गेम हो, सोशल मीडिया की अनंत फीड हो—आपके दिमाग में घुसती है, तो तराजू तेजी से खुशी की तरफ झुक जाता है। मस्तिष्क इसे खतरा मानता है। इसलिए वह खुद को बचाने के लिए रिसेप्टर्स की संवेदनशीलता कम कर देता है। डाउनरेगुलेशन। यह शब्द जितना सरल लगता है, उतना ही खतरनाक है। जब रिसेप्टर्स सुस्त हो जाते हैं, तो डोपामाइन का स्तर अचानक गिर जाता है। और तब शुरू होता है असली नरक—क्रैश। अचानक चिंता की लहरें, ऊब जो हड्डियों तक चुभती है, जीवन में कोई उद्देश्य न होने का भयानक खालीपन। आप बिस्तर पर लेटे रहते हैं, लेकिन नींद नहीं आती। दिल धड़कता है, लेकिन हर धड़कन में एक सवाल गूंजता है—“क्या यह सब कुछ है?”

सुख और खुशी के बीच का फर्क अब जानबूझकर मिटा दिया गया है। आम लोगों को लगता है दोनों एक ही हैं। लेकिन जैविक रूप से ये एक-दूसरे के दुश्मन हैं। डोपामाइन आपको हमेशा भविष्य की ओर खींचता है—अगली चीज, बेहतर चीज, और कुछ और। यह अभाव और निर्भरता पैदा करता है। वहीं सेरोटोनिन आपको वर्तमान में लाता है, जो आपको आंतरिक शांति और लचीलापन देता है। लेकिन यह प्रणाली डोपामाइन को ही बढ़ावा देती है। क्योंकि एक अतृप्त, हमेशा भूखा, हमेशा प्रतिस्पर्धी व्यक्ति ही सबसे अच्छा उपभोक्ता और सबसे आसान नियंत्रित नागरिक बनता है। वे नहीं चाहते कि आप संतुष्ट हों। वे चाहते हैं कि आप हमेशा दौड़ते रहें।

यह पूरा तंत्र कैसीनो से चुराया गया है। कैसीनो में अगर हर बार आपको जीत मिले, तो आप जल्दी ऊब जाएंगे। इसलिए वे अनिश्चितता का खेल खेलते हैं—कभी जीत, कभी हार, लेकिन उम्मीद हमेशा बनाए रखना। सोशल मीडिया, रील्स, नोटिफिकेशन—सब उसी कैसीनो मनोविज्ञान पर चल रहे हैं। आप कभी नहीं जान पाते कि अगला स्क्रॉल क्या लाएगा। यह अनिश्चितता आपको सतर्क रखती है, लेकिन सतर्कता नहीं, बल्कि गुलामी में बदल जाती है। आपकी स्वतंत्र इच्छा अब एक अनुकूलित प्रतिवर्त बन चुकी है। उंगली स्क्रॉल करती है, भले ही दिमाग रो रहा हो।

अतिउत्तेजना के कारण आपके न्यूरॉन्स खुद को बचाने के लिए रिसेप्टर्स बंद कर रहे हैं। नतीजा? अब आपको साधारण चीजों में आनंद नहीं आता। एक किताब पढ़ने में, प्रकृति में घूमने में, किसी से गहरी बात करने में। सब सूखा और बेजान लगता है। यह जैविक बहरापन है। आपकी आत्मा धीरे-धीरे बहरी हो रही है। सूक्ष्म सुंदरताएं, उच्च आध्यात्मिक अनुभव, शांति की वो हल्की लहरें—सब अब आपके लिए असंभव हो चुकी हैं। आप केवल तेज, चकाचौंध वाले उत्तेजनाओं के लिए जीते हैं। और धीरे-धीरे आपकी चेतना का स्तर गिरता जा रहा है।

ध्यान अब लगभग असंभव हो गया है। गहन एकाग्रता की जरूरत होती है चेतना को समझने के लिए। लेकिन डोपामाइन का जाल छोटी-छोटी वीडियो, रील्स, नोटिफिकेशन के जरिए आपकी एकाग्रता को टुकड़े-टुकड़े कर रहा है। बिना लक्ष्य वाली पीढ़ी वास्तविकता पर सवाल नहीं उठा सकती। कोई गहरा सत्य, कोई लंबा विचार, कोई मानसिक परिपक्वता अब उनके बस की बात नहीं। वे सिर्फ स्क्रॉल करते हैं, लाइक करते हैं, और भूल जाते हैं।

इच्छाशक्ति प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स में रहती है। यह वही हिस्सा है जो पशुवत आवेगों को काबू में रखता है। लेकिन जब चारों तरफ सस्ता डोपामाइन भरा होता है, तो लिम्बिक सिस्टम हावी हो जाता है। कॉर्टेक्स कमजोर पड़ता है। नतीजा? एक ऐसा समाज जिसे आसानी से उकसाया जा सकता है, जिसे तात्कालिक इच्छाओं का गुलाम बनाया जा सकता है, और जो “नहीं” कहने की क्षमता पूरी तरह खो चुका है। मैट्रिक्स जो भी थोपे, उसे बिना विरोध के स्वीकार कर लिया जाता है।

डोपामाइन की अधिकता आपकी चेतना को निचले चक्रों में कैद कर रखती है—अस्तित्व, भय, अहंकार और कामुकता के चक्रों में। ऊर्जा ऊपर नहीं उठ पाती। हृदय चक्र सूखा पड़ता है। आज्ञा चक्र अंधा हो जाता है। कुंडलिनी नीचे दबी रहती है। आपका तंत्रिका तंत्र इतना शोरगुल भरा होता है कि कोई भी उच्च आवृत्ति, कोई भी आध्यात्मिक स्पंदन आपको छू नहीं पाता। आप हमेशा भागते रहते हैं—भविष्य की ओर, अगली चीज की ओर। वर्तमान क्षण में कभी नहीं पहुंच पाते, जहां असली स्पष्टता और मुक्ति होती है।

कल्पना कीजिए उस रात को। आप बिस्तर पर लेटे हैं। कमरा अंधेरा है। फोन दूर रखा है। स्क्रीन बंद है। लेकिन आपकी उंगलियां अनजाने में हिल रही हैं। जैसे कोई अदृश्य तार उन्हें खींच रहा हो। दिमाग चीख रहा है—“बस एक बार और चेक कर लो।” नींद नहीं आ रही। सीने में भारीपन। सिर में दर्द। पेट में मरोड़। यह डोपामाइन का भूत है, जो अब आपके खून में घुल चुका है। अगर आप विरोध करते हैं, तो सजा शुरू हो जाती है। यह क्रैश नहीं, बल्कि सजा है—अपनी चेतना बेचने की सजा।

यह अपहरण सिर्फ आपका नहीं है। यह पूरे समाज का सामूहिक नरक है। गर्भ में पल रहे बच्चे भी इससे बच नहीं पा रहे। मां का फोन बजता है, नोटिफिकेशन की आवाज गूंजती है, और गर्भ में शिशु डोपामाइन की लहरों से कांप उठता है। जन्म के बाद स्क्रीन उसके चेहरे पर चिपक जाती है। दो साल का बच्चा, जिसकी आंखें अभी दुनिया को पहली बार देख रही हैं, रील्स की चकाचौंध में खो जाता है। उसके न्यूरॉन्स पहले ही डाउनरेगुलेट हो चुके हैं। वह कभी पेड़ की छांव में नहीं खेलेगा। कभी मिट्टी में हाथ गंदे नहीं करेगा। उसकी कल्पनाशक्ति मर चुकी है। वह बड़ा होकर सिर्फ एक स्क्रॉलिंग मशीन बनेगा—लाइक्स के पीछे भागने वाली, प्यार और दोस्ती का मतलब कभी न समझने वाली।

स्कूल जाते बच्चे टीचर की बात नहीं सुन पाते क्योंकि उनका दिमाग पहले ही पोर्न, गेम्स और रील्स के जाल में फंस चुका है। एकाग्रता? वह शब्द उनके शब्दकोश में नहीं बचा। युवा पीढ़ी पहले ही मृत है। कॉलेज के लड़के-लड़कियां रात भर स्क्रॉल करते हैं। उनकी आंखें सूजी हुई, चेहरा उदास। वे सेक्स करते हैं, लेकिन वह सेक्स नहीं, डोपामाइन का क्रूर खेल है। पोर्न ने उनके दिमाग को इतना बिगाड़ दिया है कि असली स्पर्श की खुशी महसूस ही नहीं होती। हर छुअन के साथ हजार वीडियो दिमाग में चलने लगते हैं—तुलना, प्रदर्शन का डर, असफलता का भय। ऑर्गेज्म सिर्फ एक क्षणिक स्पाइक है, उसके बाद गहरा खालीपन। रिलेशनशिप टूटते जाते हैं क्योंकि कोई संतोष नहीं। डोपामाइन हमेशा कहता है—“अगला बेहतर होगा।”

 शादीशुदा जोड़े बिस्तर पर अलग-अलग फोन थामे सोते हैं। बातचीत सिर्फ “क्या खाना है” या “बच्चे को स्क्रीन दे दो” तक सीमित है। प्रेम मर चुका है। सेरोटोनिन की जगह डोपामाइन ने कब्जा कर लिया है। वे एक-दूसरे को नहीं देखते, बस तुलना करते हैं—इंस्टाग्राम पर दूसरे जोड़ों से। ईर्ष्या, क्रोध, तनाव—सब डोपामाइन का जहर है। बुजुर्ग भी बच नहीं पाए। रिटायरमेंट के बाद जब आराम करना चाहिए था, वे फेसबुक पर लाइक्स मांगते हैं। अस्पताल में लेटे-लेटे भी नोटिफिकेशन चेक करते हैं। मौत के समय भी उनका आखिरी विचार “अगला क्या?” होता है।

यह वैश्विक षड्यंत्र है। टेक कंपनियां—मेटा, गूगल, टिकटॉक—जानबूझकर आपके मस्तिष्क को कैद कर रही हैं। उनके एल्गोरिदम लैब में न्यूरोसाइंटिस्ट डोपामाइन के ग्राफ देखकर डिजाइन करते हैं। हर स्वाइप एक प्रयोग है। वे जानते हैं कि ७० प्रतिशत यूजर्स ३० मिनट से ज्यादा रुकेंगे। वे आपका डेटा बेचते हैं, लेकिन असल में आपकी आत्मा बेच रहे हैं। सरकारें चुप हैं क्योंकि यह आबादी को नियंत्रित रखने का सबसे सस्ता तरीका है। विद्रोह नहीं होगा। जब लोग स्क्रॉल कर रहे होंगे, तो सड़क पर नहीं उतरेंगे।

2030-2040 का भारत कल्पना कीजिए। हर घर में VR हेडसेट अनिवार्य। बच्चे स्कूल नहीं जाते। वर्चुअल क्लास में गेमिफाइड डोपामाइन बूस्ट के साथ “पढ़ाई” होती है। असली ज्ञान निषिद्ध। लोग काम नहीं करते, सिर्फ क्रिएटर बनकर लाइक्स कमाते हैं। भोजन ड्रोन से आता है, केमिकल्स से भरा जो डोपामाइन को और उछालता है। सेक्स वर्चुअल, AI पार्टनर के साथ। मौत भी वर्चुअल रियलिटी में “अंतिम अनुभव”। चेतना पूरी तरह कैद। कोई ध्यान नहीं, कोई जागरण नहीं। सिर्फ अनंत लूप—स्क्रॉल, लाइक, क्रैश, फिर स्क्रॉल।

शारीरिक नुकसान भयानक हैं। पार्किंसंस जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। युवाओं में डिप्रेशन महामारी है। आत्महत्या रोज बढ़ रही है। नींद नहीं आती। भूख नहीं लगती। इम्यून सिस्टम नष्ट। कैंसर बढ़ रहा है। हृदय अनियमित। प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स सिकुड़ रहा है। इच्छाशक्ति का केंद्र नष्ट हो रहा है। आप सोचते हैं कि आप चुन रहे हैं, लेकिन आपका मस्तिष्क अब सिर्फ एक पशु है—तात्कालिक सुख मांगने वाला।

आध्यात्मिक स्तर पर यह पूर्ण सर्वनाश है। कुंडलिनी नीचे फंसी है। हृदय चक्र सूखा। आज्ञा चक्र अंधा। ध्यान बैठते हैं तो दस सेकंड बाद स्क्रॉल की याद आती है। मन शांत नहीं होता, चीखता है। “प्रकाश की दृष्टि से सर्वनाश” का मतलब अब साफ है—यह प्रकाश नहीं, अंधेरा है जो आपको दिखाता है कि आप कभी स्वतंत्र नहीं थे।

डोपामाइन उपवास नरक का पहला चरण है। पहले तीन दिन आप चीखेंगे। पसीना, कंपकंपी, क्रोध। चौथे दिन गहरा डिप्रेशन। सातवें दिन भय। असली दुनिया दिखेगी—उदासी, अकेलापन, खालीपन। लेकिन यहीं से पुनर्जन्म शुरू होता है। रिसेप्टर्स जागते हैं। एक फूल की खुशबू आपको रुला देगी। लेकिन कितने लोग इसे झेल पाएंगे? ९९ प्रतिशत टूट जाएंगे और वापस स्क्रीन पर लौट आएंगे।

समाज पागल हो चुका है। सड़क पर लोग सिर झुकाए फोन में खोए चल रहे हैं। ट्रेन में कोई बात नहीं करता। परिवार में चुप्पी। दोस्ती सिर्फ ऑनलाइन। प्रेम लाइक्स पर आधारित। सभ्यता का अंत हो चुका है। हम डोपामाइन के जीवित लाश बन चुके हैं।

लेकिन अगर आप लड़ते हैं? अगर हर दिन ध्यान करते हैं, प्रकृति में घूमते हैं, किताबें पढ़ते हैं, असली लोगों से बात करते हैं? तो धीरे-धीरे चमत्कार होता है। आपकी आंखें चमकती हैं। हंसी असली होती है। नींद गहरी। सपने साफ। चेतना ऊपर उठती है। आप महसूस करते हैं कि आप इंसान हैं, न कि खिलौना।

यह लड़ाई रोज की है। हर पल सतर्क रहना पड़ता है। एक गलती और आप फिर जाल में। अंधेरा साम्राज्य रोज फैल रहा है। लेकिन आप अभी भी जाग सकते हैं। अपनी चेतना बचाओ। अपनी इच्छाशक्ति चुराने मत दो। क्योंकि अगर नहीं, तो आने वाली पीढ़ियां सिर्फ स्क्रॉल करती हुई लाशें होंगी—कभी जी न पाने वाली, कभी प्रेम न जानने वाली, कभी मुक्त न होने वाली।

डोपामाइन सिर्फ रसायन नहीं। वह शैतान है। वह आपकी आत्मा का चोर है। वह मानवता का अंत है। अब चुनाव आपके हाथ में है—गुलाम बनो या स्वामी बनो। समय कम है। हर सेकंड आपका मस्तिष्क और गहराई में डूब रहा है।

जागो। अब। वरना यह अंधेरा आपको हमेशा के लिए निगल लेगा।

: साभार....

#डॉ_आंबेडकर और #संस्कृत 

डॉ आंबेडकर मानना था कि संस्कृत पूरे देश को भाषाई एकता के सूत्र में बांध सकने वाली इकलौती भाषा हो सकती है।उन्होंने इसे देश की #आधिकारिक_भाषा बनाने का सुझाव दिया था।संविधान सभा में भीमराव आंबेडकर ने राष्ट्रीय भाषा के रूप में संस्कृत का समर्थन किया था,वे इस बात से आशंकित थे कि आजाद हिंदुस्तान कहीं भाषाई झगड़े की भेंट न चढ़ जाए।देश में भाषा को लेकर कोई विवाद न हो,इसलिए जरूरी है कि #राजभाषा के रूप में ऐसी भाषा का चुनाव हो जिसका सभी भाषाभाषी बराबर आदर करते हो।आंबेडकर जानते थे कि यह संभावना सभी भारतीय भाषाओं की जननी संस्कृत में ही हो सकती है।उन्हें भरोसा था कि संस्कृत के नाम पर देश में कहीं कोई विवाद नहीं होगा।इसीलिए सारी भारतीय भाषाओं में से किसी एक को राजभाषा बनाने पर बहस जब पूरी हो गई तो आंबेडकर ने संस्कृत को राजभाषा के रूप में रखने का प्रस्ताव रखा।

11 सितंबर 1949 के ‘#नेशनल_हेराल्ड’ में एक खबर छपी, ‘#संस्कृत_के_साथ_आंबेडकर।’इस समाचार के अनुसार भारत के कानून मंत्री डॉ. भीमराव आंबेडकर उन लोगों में शामिल थे,जो संस्कृत को भारतीय संघ की आधिकारिक भाषा बनाने की पैरवी कर रहे थे।आंबेडकर से इस संबंध में सवाल पूछने पर उन्होंने पीटीआईl के संवाददाता से कहा,‘क्यों?संस्कृत में क्या दोष है?’आंबेडकर ने कहा कि विधान परिषद राजभाषा पर विचार करते समय इस संशोधन पर भी विचार करेगा।संस्कृत के पक्ष में राजभाषा संशोधन पर हस्ताक्षर करने वालों में आंबेडकर के अलावा पंडित लक्ष्मीकांत मैत्र (बंगाल),पंडित टीटी कृष्णमाचारी (मद्रास) समेत अन्य पंद्रह लोग थे।इनके नाम हैं – जीएस गुहा (त्रिपुरा-मणिपुर),सीएम पुंछ (काशी),वी रमैया (पुडुकोट्टाह),वीआई मुनिस्वामी पिल्लै (मद्रास),कल्लूर सुब्बराव (मद्रास),वीसी केशव राव (मद्रास),डी गोविंददास (मद्रास),पी सुब्बाराव (मद्रास),वी सुब्रमण्यम (मद्रास),दुर्गा बाई (मद्रास) और दाक्षायणी वेलायुधन (मद्रास)।

आंबेडकर ने इन सदस्यों के साथ जो प्रस्ताव जवाहरलाल नेहरू की सरकार को सौंपा था,उसमें तीन बिंदु थे।पहला था भारतीय संघ की भाषा संस्कृत बनाना।दूसरा प्रस्ताव बना कि आजादी के शुरुआती पंद्रह सालों तक अंग्रेजी आधिकारिक भाषा के रूप में प्रयोग में भले आती रहे,पर संस्कृत इसके सामानांतर राजभाषा के रूप में काम में ली जाए।पंद्रह साल बाद संस्कृत को संघ की आधिकारिक भाषा बना दिया जाए। संसद अंग्रेजी को सिर्फ पंद्रह साल तक काम में लेने का कानून बना दे,यह प्रस्ताव का तीसरा बिंदु था।आंबेडकर का यह सुझाव उस प्रस्ताव के संशोधन के लिए था,जिसमें राष्ट्रभाषा व्यवस्था परिषद अपने तीन प्रस्ताव अगस्त,1949 में सरकार को दे चुकी थी।परिषद ने अपने प्रस्तावों में यह निश्चय किया था कि अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी निश्चित रीति से प्रतिष्ठित की जाए,जिसमें दस साल से अधिक समय न लगे।भारतीय संघ के विभिन्न प्रांत अपनी प्रादेशिक भाषाओं का प्रयोग करने में स्वतंत्र होंगे।पर इन प्रांतों की शिक्षण पद्धति में दो भारतीय भाषाओं का शिक्षण आवश्यक होगा। परिषद् का यह भी निश्चय है कि आदर्श वाक्यों,उपाधियों आदि तथा शोभा के स्थानों में भारतीय संघ संस्कृत का प्रयोग करे।

आंबेडकर का एक और निष्कर्ष एक लंबे अध्ययन का परिणाम था कि आर्य भारत में कहीं बाहर से नहीं आए। आर्य और द्रविड़,दोनों भारत के मूल वंशज हैं।महर्षि अरविंद,स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती का भी मानना यही था।आंबेडकर इन भ्रांतियों को तोड़ना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने यह आवश्यक माना कि भारत के लोग अनिवार्य रूप से संस्कृत लिखें-पढ़ें।जब लोग संस्कृत समझेंगे तो कई विद्रूपताएं टूटेंगी।आश्चर्य है कि आंबेडकर का यह सपना आज भी पूरा होने की प्रतीक्षा में है।

: *आर्य भट्ट ने शून्य की खोज की तो*

*रामायण में रावण के दस सर की गणना कैसे की गयी* ❓

रावण के दस सिर कैसे हो सकते हैं, 

जबकि शून्य की खोज आर्यभट्ट ने की ?

कुछ लोग हिन्दू धर्म व "रामायण" महाभारत "गीता" को काल्पनिक दिखाने के लिए यह प्रश्न करते है कि जब आर्यभट्ट ने लगभग 6 वी शताब्दी मे (शून्य/जीरो) की खोज की तो आर्यभट्ट की खोज से लगभग 5000 हजार वर्ष पहले रामायण मे रावण के 10 सिर की गिनती कैसे की गई !!!

और महाभारत मे कौरवो की 100 की संख्या की गिनती कैसे की गई !!

जबकि उस समय लोग (जीरो) को जानते ही नही थे !!

तो लोगो ने गिनती को कैसे गिना !!!!

अब मै इस प्रश्न का उत्तर दे रहा हु !!

कृपया इसे पूरा ध्यान से पढे!

आर्यभट्ट से पहले संसार 0(शुन्य) को नही जानता था !!

आर्यभट्ट ने ही (शुन्य / जीरो) की खोज की, यह एक सत्य है !!

लेकिन आर्यभट्ट ने "0( जीरो )"" की खोज *अंको मे* की थी, *शब्दों* में खोज नहीं की थी, उससे पहले 0 (अंक को) शब्दो मे शुन्य कहा जाता था !!!

उस समय मे भी हिन्दू धर्म ग्रंथो मे जैसे शिव पुराण,स्कन्द पुराण आदि मे आकाश को *शुन्य* कहा गया है !!

यहाँ पे "शुन्य" का मतलव अनंत से होता है !!

लेकिन *रामायण व महाभारत* काल मे गिनती अंको मे न होकर शब्दो मे होता था,और वह भी *संस्कृत* मे !!

उस समय *1,2,3,4,5,6,7,8, 9,10* अंक के स्थान पे *शब्दो* का प्रयोग होता था वह भी *संस्कृत* के शव्दो का प्रयोग होता था !!!

जैसे !

1 = प्रथम

2 = द्वितीय

3 = तृतीय"

4 = चतुर्थ

5 = पंचम""

6 = षष्टं"

7 = सप्तम""

8 = अष्टम""

9 = नवंम""

10 = दशम !!

*दशम = दस*

यानी" दशम मे *दस* तो आ गया,लेकिन अंक का

0 (जीरो/शुन्य ) नही आया,‍‍रावण को दशानन कहा जाता है !!

*दशानन मतलव दश+आनन =दश सिर वाला*

अब देखो

रावण के दस सिर की गिनती तो हो गई !!

लेकिन अंको का 0 (जीरो) नही आया !!

इसी प्रकार महाभारत काल मे *संस्कृत* शब्द मे *कौरवो* की सौ की संख्या को *शत-शतम* ""बताया गया !!

*शत्* एक संस्कृत का "शब्द है,

जिसका हिन्दी मे अर्थ सौ (100) होता है !!

सौ(100) "को संस्कृत मे शत् कहते है !!

*शत = सौ*

इस प्रकार महाभारत काल मे कौरवो की संख्या गिनने मे सौ हो गई !!

लेकिन इस गिनती मे भी *अंक का 00(डबल जीरो)* नही आया,और गिनती भी पूरी हो गई !!!

महाभारत धर्मग्रंथ में कौरव की संख्या शत बताया गया है!

रोमन मे भी

1-2-3-4-5-6-7-8-9-10 की

जगह पे (¡)''(¡¡)"""(¡¡¡)""

पाँच को V कहा जाता है !!

दस को x कहा जाता है !!

रोमन मे x को दस कहा जाता है !!

X= दस

इस रोमन x मे अंक का (जीरो/0) नही आया !!

और हम" दश पढ "भी लिए

और" गिनती पूरी हो गई!!

इस प्रकार रोमन word मे "कही 0 (जीरो) "नही आता है!!

और आप भी" रोमन मे""एक से लेकर "सौ की गिनती "पढ लिख सकते है !!

आपको 0 या 00 लिखने की जरूरत भी नही पड़ती है !!

पहले के जमाने मे गिनती को *शब्दो मे* लिखा जाता था !!

उस समय अंको का ज्ञान नही था !!

जैसे गीता,रामायण मे 1"2"3"4"5"6 या बाकी पाठो (lesson ) को इस प्रकार पढा जाता है !!

जैसे

(प्रथम अध्याय, द्वितीय अध्याय, पंचम अध्याय,दशम अध्याय... आदि !!)

इनके"" दशम अध्याय ' मतलब

दशवा पाठ (10 lesson) "" होता है !!

दशम अध्याय= दसवा पाठ

इसमे *दश* शब्द तो आ गया !!

लेकिन इस दश मे *अंको का 0* (जीरो)" का प्रयोग नही हुआ !!

बिना 0 आए पाठो (lesson) की गिनती दश हो गई !!

(हिन्दू बिरोधी और नास्तिक लोग सिर्फ अपने गलत कुतर्क द्वारा

‍ हिन्दू धर्म व हिन्दू धर्मग्रंथो को काल्पनिक साबित करना चाहते है !!)

जिससे हिन्दूओ के मन मे हिन्दू धर्म के प्रति नफरत भरकर और हिन्दू धर्म को काल्पनिक साबित करके,हिन्दू समाज को अन्य धर्मों में परिवर्तित किया जाए !!!

लेकिन आज का हिन्दू समाज अपने धार्मिक शिक्षा को ग्रहण ना करने के कारण इन लोगो के झुठ को सही मान बैठता है !!!

यह हमारे धर्म व संस्कृत के लिए हानि कारक है !!

अपनी सभ्यता पहचाने,गर्व करे की हम भारतीय है।

🕉 जय श्री राम 🚩

🕉 जय श्री कृष्ण 🚩

🕉 भारत माता कि जय 🚩🇮🇳

: *राष्ट्रपति ट्रंप ने PM मोदी को लगाया फोन, ईरान और होर्मुज पर 40 मिनट तक हुई चर्चा*

* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच 40 मिनट तक फोन पर बात हुई है.

* प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच ये वार्ता तब हुई है जब ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से ब्लॉक करने का ऐलान किया है.

* पीएम मोदी ने कहा कि इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया गया.

* भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बातचीत के बारे में बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी से कहा कि वे यह बताना चाहते हैं कि अमेरिका भारत से प्यार करता है. 

*भारत, चीन और रूस से बोला ईरान, अमेरिका के खिलाफ अपने प्रभाव का इस्तेमाल करें तीनों प्रमुख शक्तियां*

* ईरान ने उम्मीद जताई है कि अगर भारत, रूस और चीन जैसी महाशक्तियों ने अमेरिका और इजरायल को समझाने की पहल की तो दुनिया को युद्ध के संकट से बचाया जा सकता है।

*पाकिस्तान में जब अमेरिका-ईरान कर रहे थे बात, तभी नेतन्याहू के एक फोन कॉल ने फेल कर दी शांति वार्ता*

* ईरान ने दावा किया है कि इजरायली पीएम नेतन्याहू के अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को किए गए फोन कॉल ने पाकिस्तान में चल रही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को बाधित कर दिया।

*‘इजराइल सिर्फ भारत की सुनेगा’, ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी कर्नल का बड़ा बयान, पाक की मध्यस्थता का उड़ाया मजाक*

* ईरान युद्ध के बीच अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी ने पाकिस्तान का खुलकर मजाक उड़ाया है।

* मैकग्रेगर ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है।

* पाकिस्तान आंतरिक मुश्किलों का सामना कर रहा है। उसकी आर्थिक स्थिति भी डावाडोल हो चुकी है।

*कर्नल ने कहा- प्रधानमंत्री मोदी एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनका पूरी दुनिया में बहुत सम्मान और भरोसा है। वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जो मॉस्को में (रूसी राष्ट्रपति) व्लादिमीर पुतिन के साथ भी पूरी तरह सहज रहते हैं। वह तेहरान के नेतृत्व से भी आराम से बात कर लेते हैं। हाल ही में वह इजराइल गए थे और इजराइली भी उनके साथ सहज महसूस करते हैं। हम भी भारत के साथ सहज महसूस करते हैं।*

*कर्नल ने कहा- मैं प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह करूंगा कि वे अपने सलाहकारों से बात करें और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन करें। मुझे लगता है कि अगर भारत हिंद महासागर और उसके आस-पास के इलाकों में अपना प्रभाव और ज्यादा बढ़ाए, तो यह हमारे लिए बेहतर होगा।*

: नाशिक कॉर्पोरेट जिहाद मामले में और भी चौंकाने वाले खुलासे 😲😲

TCS BPO नाशिक में कुल ~300 कर्मचारी थे। इनमें से ~40 मुस्लिम थे।

उनका अलग व्हाट्सएप ग्रुप था, जिसमें तय होता था कि अगली हिंदू लड़की को किस तरीके से टारगेट करना है।

एक लड़की पर तो 3 लड़कों ने मिलकर प्लान बनाया — इमेजिका पिकनिक पर ले गए, गीले कपड़ों में फोटो खींचे, करीब आए, जबरन शारीरिक संबंध बनाए और फिर ब्लैकमेल करके लगातार यौन शोषण + धर्मांतरण का दबाव डाला।

टॉप IT कंपनियों को अब स्वयं ऑडिट करना चाहिए — POSH Act की सारी गाइडलाइंस फॉलो कर महिलाओं को सुरक्षित वातावरण दे रहे हैं या नहीं?

सरकार को भी इन कंपनियों का तुरंत ऑडिट करवाना चाहिए।

7 अंडरकवर लेडी कॉप्स को सैल्यूट 🙏 और देवाभाऊ को धन्यवाद जिन्होंने ऑपरेशन को ग्रीन सिग्नल दिया।

लेकिन हमारी बेटियों को बचाने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है 👍

अब वो लिबरल (कहाँ हैं?
जो लव जिहाद को “फेक” बताते थे और 

#TheKeralaStory2 को प्रोपगैंडा फिल्म कहते थे?

सच सामने आ चुका है… अब चुप्पी क्यों?

#NashikCorporateJihad #SaveOurDaughters #POSHAct #TCSNashik

: साभार...

मोहल्ले वालों के लिए हंसमुख सीधी साधी छोटीमोटी जरूरतों में भी लोगों की मददगार हैदराबाद की #साइद_बेगम...

लेकिन इन मोहतरमा की असली हकीकत तब सामने आयी जब पुलिस ने उनके दरवाज़े पर दस्तक दी और इन्हे उठाकर ले गई...

लोगों को अंदाजा भी नही था की जिसे वो एक आम औरत समझ रहे थे वो एक ऐसे खतरनाक नेटवर्क का हिस्सा है की जिसके तार #ISIS,#AQIS और पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स तक जा रहे हैं...

आंध्र प्रदेश पुलिस की जांच में जिस आ¥तं¥की संगठन का नाम सामने आया वो था #अल_मलिक_इस्लामिक_यूथ मतलब कोई मामूली कट्टरपंथी मंडली नहीं,बल्कि एक ऐसा मॉड्यूल बताया जा रहा है जो देश के भीतर जहर फैलाने की तैयारी में था....

सबसे बड़ी बात तो यह है की इस पूरे नेटवर्क की एक अलग महिला शाखा बनाने की योजना थी मतलब ख़वातीन दस्ता...

और एजेंसियों के अनुसार,इसकी कमान सईदा बेगम को सौंपी जानी थी....

यानी अब खेल सिर्फ पर्दे के पीछे बैठकर भड़काने का नहीं रहा...योजना इससे कहीं आगे की थी..

 इस महिला विंग का मकसद युवा लड़कियों और महिलाओं को हथियार चलाने,स्नाइप राइफल इस्तेमाल करने और विस्फोटक तैयार करने की ट्रेनिंग देना था,ताकि जरूरत पड़ने पर ये स्लीपर सेल्स को ऑपरेशन में मदद कर सकें...

सोचिए एक साधारण सी दिखने वाली,शांत स्वभाव की महिला और आरोप इतने भयावह की सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाएं...

अब तक इस मामले में कई राज्यों से 12 संदिग्ध गिरफ्तार किए जा चुके हैं...

असली सवाल यह है कि क्या भारत में आतंक की रणनीति बदल चुकी है...

आतंकी संगठन अब महिला विंग पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं...

जैश हो,लश्कर हो या ISIS से प्रेरित मॉड्यूल — इन सबको अब समझ आ गया है कि एक कट्टरपंथी महिला कई बार पुरुष से ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है...

क्योंकि उनपर शक भी कम होता है वह सिस्टम की नज़रों से देर तक बची रह सकती है...

और एक बार अगर वह विचारधारा के प्रति पूरी तरह समर्पित हो जाए,तो फिर उसका इस्तेमाल भर्ती,लॉजिस्टिक्स,कवर और ऑपरेशन हर स्तर पर किया जा सकता है...

दिल्ली विस्फोट केस में महिला डॉक्टर की गिरफ्तारी ने भी यही संकेत दिया था कि अब आतंक का चेहरा बदल रहा है...

चेहरे मासूम होंगे बोलचाल सामान्य होगी जिंदगी बाहर से साधारण दिखेगी लेकिन भीतर एक जहरीला एजेंडा पल रहा होगा और यही है नया खतरा यही नया पैटर्न है और यही वो सच्चाई है जिसे अभी भी बहुत लोग हल्के में ले रहे हैं...

आतंकवाद अब सिर्फ जंगलों,सीमाओं या छिपे हुए ठिकानों से नहीं आएगा वह मोहल्लों से निकलेगा,घरों से निकलेगा,और शायद उन चेहरों के पीछे से निकलेगा जिन पर लोग सबसे कम शक करते हैं इस बात को याद रखिएगा...

किसी फिरदौस के पीछे एक ख़लीमा भी छिपी हो सकती है...

Nation first 🇮🇳

Awadhesh Pratap Singh कानपुर उत्तर प्रदेश,9451221253

: असली धुरंधर सात जाँबाज पुलिसवालियाँ हैं जिन्होंने पाकिस्तान बन चुके TCS के नाशिक ऑफिस में घुसपैठ कर दी...वो भी नौकरी का जामा पहनकर! 

कॉर्पोरेट जिहाद का पूरा खेल उघाड़ने के लिए ये बहादुर महिलाएँ कई दिनों तक अंदर घुसी रहीं। 

खुद को जूनियर एम्प्लॉयी बनाकर सबूत इकट्ठा किए, हर गंदगी को अपनी आँखों से देखा-परखा। 

कल्पना कीजिए... मैनेजर लेवल के शैतान लड़कियों का रेप तक कर चुके थे, झूठे वादों में फँसाकर यौन शोषण का बाजार चला रहे थे।

 एक हिंदू लड़के को जबरन नमाज़ पढ़ाई जा रही थी, बीफ खिलाया जा रहा था, धर्म बदलने के लिए धमकियाँ दी जा रही थीं।

 ये कोई साधारण हरासमेंट नहीं, बल्कि लव जिहाद + कॉर्पोरेट जिहाद का खूंखार नेटवर्क था — 

TCS के BPO डिपार्टमेंट को मुरीदके टाइप का अड्डा बना दिया गया था!

 सात पुलिसवालियों ने अपनी जान पर खेलकर अंदर घुसकर सबूत जुटाए, तभी जाकर ये भयानक साजिश सामने आई।

 6 टीम लीडर गिरफ्तार, 9 FIR दर्ज, रेप, सेक्शुअल असॉल्ट, रिलीजियस कोऑर्शन के गंभीर आरोप...

 HR मैनेजर पर भी केस

अब SIT जांच में है, शक है कि पीड़ितों की संख्या 50 तक हो सकती है।

 ये सात महिलाएँ असली हीरोइन हैं! 

जो मैनेजर रेप तक करने की हिम्मत रखते थे, उनके बीच बैठकर सबूत जुटाना...

 कितना खतरनाक रिस्क था, सोचिए! 

कल को इनकी बहादुरी पर अगर कोई फिल्म बनी, तो कुछ लोग चिल्लाएंगे — "प्रोपेगैंडा फिल्म है!"  

लेकिन हकीकत ये है कि धुरंधर असल जिंदगी में ये सात पुलिसवालियाँ ही हैं, 

जिन्होंने टाटा की मशहूर कंपनी TCS में छिपे जहर को बेनकाब कर दिया। भारत की बेटियाँ सलामती से काम करें, यही तो असली सुरक्षा है!

: *छुट्टियों की खुशी के बीच उठता एक ऐसा सवाल, जो हर हिन्दू परिवार को झकझोर देगा— ट्रिप प्लान करने से पहले यह जरूर पढ़ें।*

`#BoycottJihadiAgenda`

2 मिनट समय निकालकर #Thread अंत तक अवश्य पढ़े।🧵👇

🔏 लेखक : पंकज सनातनी

मित्रों, गर्मियों का मौसम प्रारम्भ हो चुका है और स्कूलों में बच्चों की छुट्टियाँ लगने वाली हैं! पूरा हिन्दू समाज उत्साह से भर गया है। परिवार प्लानिंग में जुट गए हैं कि कहाँ घूमें, कौन सी जगह देखें, हिमाचल जाएँ, उत्तराखंड जाएँ या कोई खूबसूरत हिल स्टेशन चुनें। बच्चे खुशी से उछल रहे हैं, माँ-बाप बजट बना रहे हैं, ट्रिप की तैयारियाँ जोरों पर हैं। ये वो समय है जब हर हिन्दू परिवार अपनी छुट्टियों को यादगार बनाने के लिए ट्रैवल एजेंसियों और टैक्सी सर्विस की तरफ 'यात्रा प्रबंधन' करता है।

लेकिन इसी खुशी और उत्साह के बीच एक सवाल धीरे-धीरे रातों की नींद उड़ा देता है— "ड्राइवर कौन होगा…?"

ये कोई फिल्मी डायलॉग नहीं है, ये मेरी 'पंकज सनातनी' की हाल की सच्ची घटना है।

मैंने पड़ोस की टूरिस्ट एंड ट्रैवल टैक्सी सर्विस वाले को फोन किया कि मुझे चार दिन बाद एक 7 सीटर गाड़ी (𝐈𝐧𝐧𝐨𝐯𝐚 𝐂𝐫𝐲𝐬𝐭𝐚) चाहिए, परिवार के सदस्यों को तीन दिन के लिए बाहर जाना है। रेट तय होने पर मैंने उसे कहा कि ड्राइवर कौन सा आएगा। सरदार जी ने बोला कि 1-2 दिन में बता देंगे।

मैंने थोड़ी देर बाद फिर सरदार जी को फोन किया और कहा कि क्योंकि परिवार जाना है, ड्राइवर वो भेजना जिसके साथ परिवार सुरक्षित महसूस करे। सरदार जी ने कहा कि आप चिंता न करो।

अगले दिन उनका फोन नहीं आया। उससे अगले दिन मैंने सरदार जी को फिर फोन किया कि ड्राइवर का नाम बता दो, मैंने कहा कि मुझे उसका नाम चाहिए जो मेरे परिवार के साथ तीन दिन रहेगा।

मैं किसी भी ऐसे व्यक्ति को अपने परिवार के साथ नहीं भेज सकता, जिससे मेरे परिवार की सुरक्षा को खतरा हो।

सरदार जी समझ गए, उन्होंने कहा कि थोड़ी देर में नाम बता दूँगा। फिर शाम को मैंने फिर से फोन किया तो उन्होंने कहा कि "मुन्ना" आएगा।

मैंने सरदार जी को कहा कि ड्राइवर का मोबाइल नंबर भेज दो। उन्होंने "मुन्ना" का नंबर भेज दिया। मैं "मुन्ना" नाम सुनकर आशंकित हो उठा, मुझे "मुन्ना" नाम को लेकर शंका हो रही थी।

मैंने "मुन्ना" का नंबर सेव किया तो उसकी व्हाट्सएप प्रोफाइल पर "राधा-कृष्ण" की डीपी थी और कॉल किया तो "आपकी कृपा से मेरा हर काम हो रहा है" की कॉलर ट्यून लगी हुई थी। उसने फोन उठाया तो वो ड्राइव कर रहा था, मैंने उसे कहा कि आपकी गाड़ी से मेरा परिवार शनिवार को हिमाचल जा रहा है, तो उसने कहा कि हाँ जी ठीक है। तब मैंने उससे पूछा कि आपका नाम क्या है, तो उसने बोला "मुन्ना", तब मैंने कहा कि आपका पूरा नाम क्या है तो उसने कहा कि "मुन्ना लाल"। तब मैंने कहा कि अपना आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस मेरे को व्हाट्सएप कर दे, उसने कहा कि ड्राइव कर रहा हूँ, शाम को भेज दूँगा।

*⏩ Break . .*

*अगर आप ने अभी तक हमारे WhatsApp Channel को फॉलो नहीं किया है तो नीचे लिंक पर क्लिक कर जल्द से जल्द Follow कर लें। 👇*

*🪀 व्हाट्सएप चैनल :*

https://whatsapp.com/channel/0029VaFauM9AojYxD3fWPY1W

*®️ Read Continuously . .*

मैं देर रात्रि तक इंतजार करता रहा मगर उसने अपने "कागज" व्हाट्सएप नहीं किए।

मैंने अगले दिन टैक्सी सर्विस वाले सरदार जी को फोन किया तो उन्होंने कहा कि अब "मुन्ना" नहीं आएगा, दूसरा ड्राइवर आएगा "सुरिंदर"। मैंने सरदार जी को कहा कि उसके आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस व्हाट्सएप पर भेज दो। सरदार जी ने एक घंटे बाद सुरिंदर के "कागज" व्हाट्सएप कर दिए।

मैंने सरदार जी को फोन करके कहा कि आगे से जब भी मैं गाड़ी बुक करूँ तो मेरे पास कभी किसी मुन्ना, पप्पू, राजू, बिट्टू, नन्हे, कालू, बिल्लू, छोटू, चिंटू, पिंटू, मिंटू, मोंटू आदि को नहीं भेजना।

उन्होंने धीरे से कहा, मैं आपकी बात समझ गया हूँ, आप निश्चिंत रहें, आपके पास सुरिंदर, गुरविंदर, महेश, संजय, पांडेय, शुक्ला आदि में से कोई आया करेगा।

ये एक छोटा सा प्रयास है, करके देखिए। ट्रेवल एजेंसियों, टैक्सी सर्विस, व्यापारियों, दुकानदारों, शोरूम, रेस्टोरेंट, ढाबे वालों, ड्राई क्लीनिंग, इंटीरियर, कारपेंटर, वर्कशॉप, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, सर्विस सेंटर, कुरियर कंपनियों, पैकेजिंग कंपनियों, फूड कंपनियों आदि सब पर दबाव बनेगा और बनवाना पड़ेगा।

दोस्तों, आजकल एक नई चाल चल रही है। मु&लमान लोग हिन्दू नाम रखकर अपना व्यवसाय चला रहे हैं ताकि हिन्दू सदैव भ्रमित रहे और उन्हें लगे कि यह तो हिन्दू है। "मुन्ना लाल" जैसा नाम सुनकर हम सोचते हैं कि शायद यह हमारे अपना है, लेकिन असलियत सामने आने पर दिल में डर और धोखे का एहसास होता है। नाम बदलकर, राधा-कृष्ण की डीपी लगाकर, हिन्दू कॉलर ट्यून लगाकर वे हमारी सादगी और विश्वास का फायदा उठा रहे हैं।

इसके साथ ही एक और कड़वी सच्चाई यह है कि हम हिन्दू जब इन सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं तो हमारा पैसा सीधे-सीधे उनके पास जाता है। और वे उसी कमाई से हर महीने जकात इकठ्ठा करते हैं और जकात फाउंडेशन को कमाई का 10वां हिस्सा डोनेट करते हैं, जिसका इस्तेमाल भारत में जिहाद फैलाने, मुस्लिम अपराधियों को जेल से रिहा कराने, हिन्दू बेटियों को लव-जिहाद और धर्मांतरण में फंसाने तथा ऐसे अनेक जिहादी गतिविधियों को चलाने के लिए किया जाता है। अर्थात हमारा ही कमाया हुआ धन हमारे खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है, और मुर्ख हिंदू अभी भी भाई+चारा निभाने में लगे हुए हैं।

ये नामों का खेल सिर्फ एक घटना नहीं है, ये हमारे समाज में गहरे बैठे पूर्वाग्रह, धोखे और वित्तीय जिहाद की चुभन है। गर्मी की छुट्टियों में जब लाखों हिन्दू परिवार ट्रिप पर निकलेंगे, तब यह खतरा और भी बढ़ जाएगा।

ये चिंता सिर्फ मेरी नहीं, लाखों परिवारों की है जो इन गर्मी की छुट्टियों में अपने बच्चों को, अपनी माँ-बहनों को किसी अजनबी के साथ भेजने वाले हैं और मन में यही सवाल दौड़ता रहता है कि ये व्यक्ति सुरक्षित है या नहीं…? नाम बदलने से क्या होगा…? सोच बदलनी होगी। लेकिन जब तक सोच नहीं बदलेगी, तब तक हमें अपनी आवाज उठानी होगी।

अगर हर वह माँ-बाप, हर वह परिवार, जो गर्मी की छुट्टियों में ट्रिप प्लान कर रहा है, आज से यही छोटा-सा कदम उठाए— सवाल पूछे, पूरा नाम मांगे, आधार और ड्राइविंग लाइसेंस मांगे और जहां शंका हो, वहां साफ मना कर दे तो देखिए कितना बड़ा बदलाव आ सकता है। दबाव बनेगा। व्यापारी सोचेंगे, सर्विस प्रोवाइडर बदलाव करेंगे और धीरे-धीरे वो नाम भी जो आज संदेह का कारण बनते हैं, उन्हें भी मजबूर होना पड़ेगा कि वे खुद को साबित करें, सम्मान कमाएं।

ये कोई किसी के खिलाफ नहीं, ये उस सोच के खिलाफ है जो नाम को देखकर इंसान को छोटा समझ लेती है या नाम बदलकर दूसरों को भ्रमित करने की कोशिश करती है। ये पूर्वाग्रह और धोखे के खिलाफ एक छोटा-सा विद्रोह है।

आज अगर हम चुप रहे तो कल हमारी अगली पीढ़ी भी इसी डर, भ्रम और वित्तीय जिहाद के साथ बढ़ेगी। लेकिन अगर हम आज से शुरू करें, अपनी चिंता को आवाज दें, तो शायद एक दिन आएगा जब नाम सिर्फ नाम होगा, पहचान सिर्फ इंसानियत और सच्चाई की होगी और सुरक्षा की चिंता नामों से ऊपर उठकर चरित्र और विश्वास पर टिकेगी।

दोस्तों, गर्मी की इन छुट्टियों को हम सिर्फ घूमने का मौका न समझें, बल्कि जागरूकता और सतर्कता का मौका भी बनाएं। कल्पना कीजिए उस समाज की, जहाँ हर परिवार बिना किसी नाम की छाया या छल के, बिना किसी पूर्वाग्रह या धोखे के बोझ के, पूरी शांति और भरोसे के साथ यात्रा कर सके। जहाँ हर ड्राइवर, हर सर्विस प्रोवाइडर अपनी मेहनत, अपनी ईमानदारी और अपने व्यवहार से पहचाना जाए, न कि किसी बनावटी नाम से। जहाँ हमारा बच्चा, हमारी बहन, हमारी माँ किसी भी गाड़ी में बैठकर यह सोचकर न डरे कि "नाम क्या है" या "ये असली है या बनावटी"।

ये बदलाव असंभव नहीं है। ये तब संभव होगा जब हममें से हर एक अपनी जिम्मेदारी समझेगा। जब हम अपनी चिंता को सिर्फ मन में नहीं रखेंगे, बल्कि उसे शब्दों में, व्यवहार में और फैसलों में बदल देंगे। जब हम हर बार सवाल पूछेंगे, जब हम सही नाम और सही कागज मांगेंगे, जब हम जहां जरूरी हो वहां "नहीं" कहने का साहस दिखाएंगे।

आपकी एक आवाज, आपका एक छोटा सा "नहीं", हजारों ऐसे प्रयासों को नया रास्ता दिखा सकता है। यह न सिर्फ उनकी सोच को बदलेगा, बल्कि पूरे समाज को यह एहसास दिलाएगा कि सम्मान और सुरक्षा किसी नाम की देन नहीं, बल्कि इंसानियत, सच्चाई और विश्वास की देन होती है।

*📝 निष्कर्ष :—* ये मेरा छोटा-सा प्रयास है, लेकिन अगर आप भी इसे अपनाएं, तो ये छोटा प्रयास हजारों परिवारों की सुरक्षा और समाज की सोच को बदल सकता है।

इसलिए आज से ही अपनी आवाज उठाइए। अपने परिवार की चिंता को दबाव में बदलिए। क्योंकि बदलाव बड़े आंदोलनों से नहीं, इन छोटे-छोटे लेकिन दृढ़ "नहीं" से शुरू होता है।

कृपया इस संदेश को आगे बढ़ाइए, दोस्तों तक पहुंचाइए। गर्मी की छुट्टियों से पहले-पहले एक छोटी सी शुरुआत, एक बड़ी सोच का बीज बन सकती है।

 को अपने फोन में सेव करना ना भूलें, साथ ही अपना (नाम, जिला, राज्य) लिखकर WhatsApp अवश्य करें। ध्यान रहे, नंबर सेव होगा तभी आप तक मेरे संदेश पहुंचेंगे अन्यथा नहीं। धन्यवाद! 🙏

✍️ साभार

  *|| Share || Share || Share ||*

: #यौन_अपराध_इस्लाम_की_देन...... 

#बलात्कार_का_आरंभ 👇👇

*मुझे पता है 90 % बिना पढ़े ही निकल लेंगे.. 😢* 👇

आखिर भारत जैसे देवियों को पूजने वाले देश में बलात्कार की गन्दी मानसिकता कहाँ से आयी ?? 

आखिर क्या बात है कि जब प्राचीन भारत के रामायण, महाभारत आदि लगभग सभी हिन्दू-ग्रंथ के उल्लेखों में अनेकों लड़ाईयाँ लड़ी और जीती गयीं, परन्तु विजेता सेना द्वारा किसी भी स्त्री का बलात्कार होने का जिक्र नहीं है। 

तब आखिर ऐसा क्या हो गया ?? कि आज के आधुनिक भारत में बलात्कार रोज की सामान्य बात बन कर रह गयी है ??

श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त की पर न ही उन्होंने और न उनकी सेना ने पराजित लंका की स्त्रियों को हाथ लगाया ।

महाभारत में पांडवों की जीत हुयी लाखों की संख्या में योद्धा मारे गए। पर किसी भी पांडव सैनिक ने किसी भी कौरव सेना की विधवा स्त्रियों को हाथ तक न लगाया ।

अब आते हैं ईसापूर्व इतिहास में~

220-175 ईसापूर्व में यूनान के शासक "डेमेट्रियस प्रथम" ने भारत पर आक्रमण किया। 183 ईसापूर्व के लगभग उसने पंजाब को जीतकर साकल को अपनी राजधानी बनाया और पंजाब सहित सिन्ध पर भी राज किया। लेकिन उसके पूरे समयकाल में बलात्कार का कोई जिक्र नहीं।

इसके बाद "युक्रेटीदस" भी भारत की ओर बढ़ा और कुछ भागों को जीतकर उसने "तक्षशिला" को अपनी राजधानी बनाया। बलात्कार का कोई जिक्र नहीं।

"डेमेट्रियस" के वंश के मीनेंडर (ईपू 160-120) ने नौवें बौद्ध शासक "वृहद्रथ" को पराजित कर सिन्धु के पार पंजाब और स्वात घाटी से लेकर मथुरा तक राज किया परन्तु उसके शासनकाल में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं मिलता।

"सिकंदर" ने भारत पर लगभग 326-327 ई .पू आक्रमण किया जिसमें हजारों सैनिक मारे गए । इसमें युद्ध जीतने के बाद भी राजा "पुरु" की बहादुरी से प्रभावित होकर सिकंदर ने जीता हुआ राज्य पुरु को वापस दे दिया और "बेबिलोन" वापस चला गया ।

विजेता होने के बाद भी "यूनानियों" (यवनों) की सेनाओं ने किसी भी भारतीय महिला के साथ बलात्कार नहीं किया और न ही "धर्म परिवर्तन" करवाया ।

इसके बाद "शकों" ने भारत पर आक्रमण किया (जिन्होंने ई.78 से शक संवत शुरू किया था)। "सिन्ध" नदी के तट पर स्थित "मीननगर" को उन्होंने अपनी राजधानी बनाकर गुजरात क्षेत्र के सौराष्ट्र , अवंतिका, उज्जयिनी,गंधार,सिन्ध,मथुरा समेत महाराष्ट्र के बहुत बड़े भू भाग पर 130 ईस्वी से 188 ईस्वी तक शासन किया। परन्तु इनके राज्य में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं।

इसके बाद तिब्बत के "युइशि" (यूची) कबीले की लड़ाकू प्रजाति "कुषाणों" ने "काबुल" और "कंधार" पर अपना अधिकार कायम कर लिया। जिसमें "कनिष्क प्रथम" (127-140ई.) नाम का सबसे शक्तिशाली सम्राट हुआ।जिसका राज्य "कश्मीर से उत्तरी सिन्ध" तथा "पेशावर से सारनाथ" के आगे तक फैला था। कुषाणों ने भी भारत पर लम्बे समय तक विभिन्न क्षेत्रों में शासन किया। परन्तु इतिहास में कहीं नहीं लिखा कि इन्होंने भारतीय स्त्रियों का बलात्कार किया हो ।

इसके बाद "अफगानिस्तान" से होते हुए भारत तक आये "हूणों" ने 520 AD के समयकाल में भारत पर अधिसंख्य बड़े आक्रमण किए और यहाँ पर राज भी किया। ये क्रूर तो थे परन्तु बलात्कारी होने का कलंक इन पर भी नहीं लगा।

इन सबके अलावा भारतीय इतिहास के हजारों साल के इतिहास में और भी कई आक्रमणकारी आये जिन्होंने भारत में बहुत मार काट मचाई जैसे "नेपालवंशी" "शक्य" आदि। पर बलात्कार शब्द भारत में तब तक शायद ही किसी को पता था।

अब आते हैं मध्यकालीन भारत में~

जहाँ से शुरू होता है इस्लामी आक्रमण~

और यहीं से शुरू होता है भारत में बलात्कार का प्रचलन ।

सबसे पहले 711 ईस्वी में "मुहम्मद बिन कासिम" ने सिंध पर हमला करके राजा "दाहिर" को हराने के बाद उसकी दोनों "बेटियों" को "यौनदासियों" के रूप में "खलीफा" को तोहफा भेज दिया। 

तब शायद भारत की स्त्रियों का पहली बार बलात्कार जैसे कुकर्म से सामना हुआ जिसमें "हारे हुए राजा की बेटियों" और "साधारण भारतीय स्त्रियों" का "जीती हुयी इस्लामी सेना" द्वारा बुरी तरह से बलात्कार और अपहरण किया गया ।

फिर आया 1001 इस्वी में "गजनवी"। इसके बारे में ये कहा जाता है कि इसने "इस्लाम को फ़ैलाने" के उद्देश्य से ही आक्रमण किया था। 

"सोमनाथ के मंदिर" को तोड़ने के बाद इसकी सेना ने हजारों "काफिर औरतों" का बलात्कार किया फिर उनको अफगानिस्तान ले जाकर "बाजारों में बोलियाँ" लगाकर "जानवरों" की तरह "बेच" दिया ।

फिर "गौरी" ने 1192 में "पृथ्वीराज चौहान" को हराने के बाद भारत में "इस्लाम का प्रकाश" फैलाने के लिए "हजारों काफिरों" को मौत के घाट उतर दिया और उसकी "फौज" ने "अनगिनत हिन्दू स्त्रियों" के साथ बलात्कार कर उनका "धर्म-परिवर्तन" करवाया।

ये विदेशी मुस्लिम अपने साथ औरतों को लेकर नहीं आए थे।

मुहम्मद बिन कासिम से लेकर सुबुक्तगीन, बख्तियार खिलजी, जूना खाँ उर्फ अलाउद्दीन खिलजी, फिरोजशाह, तैमूरलंग, आरामशाह, इल्तुतमिश, रुकुनुद्दीन फिरोजशाह, मुइजुद्दीन बहरामशाह, अलाउद्दीन मसूद, नसीरुद्दीन महमूद, गयासुद्दीन बलबन, जलालुद्दीन खिलजी, शिहाबुद्दीन उमर खिलजी, कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी, नसरत शाह तुगलक, महमूद तुगलक, खिज्र खां, मुबारक शाह, मुहम्मद शाह, अलाउद्दीन आलम शाह, बहलोल लोदी, सिकंदर शाह लोदी, बाबर, नूरुद्दीन सलीम जहांगीर, 

अपने हरम में "8000 रखैलें रखने वाला शाहजहाँ"।

 इसके आगे अपने ही दरबारियों और कमजोर मुसलमानों की औरतों से अय्याशी करने के लिए "मीना बाजार" लगवाने वाला "जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर"।

मुहीउद्दीन मुहम्मद से लेकर औरंगजेब तक बलात्कारियों की ये सूची बहुत लम्बी है। जिनकी फौजों ने हारे हुए राज्य की लाखों "काफिर महिलाओं" "(माल-ए-गनीमत)" का बेरहमी से बलात्कार किया और "जेहाद के इनाम" के तौर पर कभी वस्तुओं की तरह "सिपहसालारों" में बांटा तो कभी बाजारों में "जानवरों की तरह उनकी कीमत लगायी" गई। 

ये असहाय और बेबस महिलाएं "हरमों" से लेकर "वेश्यालयों" तक में पहुँची। इनकी संतानें भी हुईं पर वो अपने मूलधर्म में कभी वापस नहीं पहुँच पायीं।

एकबार फिर से बता दूँ कि मुस्लिम "आक्रमणकारी" अपने साथ "औरतों" को लेकर नहीं आए थे।

वास्तव में मध्यकालीन भारत में मुगलों द्वारा "पराजित काफिर स्त्रियों का बलात्कार" करना एक आम बात थी क्योंकि वो इसे "अपनी जीत" या "जिहाद का इनाम" (माल-ए-गनीमत) मानते थे। 

केवल यही नहीं इन सुल्तानों द्वारा किये अत्याचारों और असंख्य बलात्कारों के बारे में आज के किसी इतिहासकार ने नहीं लिखा। 

बल्कि खुद इन्हीं सुल्तानों के साथ रहने वाले लेखकों ने बड़े ही शान से अपनी कलम चलायीं और बड़े घमण्ड से अपने मालिकों द्वारा काफिरों को सबक सिखाने का विस्तृत वर्णन किया।

गूगल के कुछ लिंक्स पर क्लिक करके हिन्दुओं और हिन्दू महिलाओं पर हुए "दिल दहला" देने वाले अत्याचारों के बारे में विस्तार से जान पाएँगे। वो भी पूरे सबूतों के साथ।

इनके सैकड़ों वर्षों के खूनी शासनकाल में भारत की हिन्दू जनता अपनी महिलाओं का सम्मान बचाने के लिए देश के एक कोने से दूसरे कोने तक भागती और बसती रहीं। 

इन मुस्लिम बलात्कारियों से सम्मान-रक्षा के लिए हजारों की संख्या में हिन्दू महिलाओं ने स्वयं को जौहर की ज्वाला में जलाकर भस्म कर लिया। 

ठीक इसी काल में कभी स्वच्छंद विचरण करने वाली भारतवर्ष की हिन्दू महिलाओं को भी मुस्लिम सैनिकों की दृष्टि से बचाने के लिए पर्दा-प्रथा की शुरूआत हुई।

महिलाओं पर अत्याचार और बलात्कार का इतना घिनौना स्वरूप तो 17वीं शताब्दी के प्रारंभ से लेकर 1947 तक अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में भी नहीं दिखीं। अंग्रेजों ने भारत को बहुत लूटा परन्तु बलात्कारियों में वे नहीं गिने जाते। 

1946 में मुहम्मद अली जिन्ना के डायरेक्टर एक्शन प्लान, 1947 विभाजन के दंगों से लेकर 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम तक तो लाखों काफिर महिलाओं का बलात्कार हुआ या फिर उनका अपहरण हो गया। फिर वो कभी नहीं मिलीं।

इस दौरान स्थिती ऐसी हो गयी थी कि "पाकिस्तान समर्थित मुस्लिम बहुल इलाकों" से "बलात्कार" किये बिना एक भी "काफिर स्त्री" वहां से वापस नहीं आ सकती थी।

जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आ भी गयीं वो अपनी जांच करवाने से डरती थी।

जब डॉक्टर पूछते क्यों तब ज्यादातर महिलाओं का एक ही जवाब होता था कि "हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं ये हमें भी पता नहीं"।

विभाजन के समय पाकिस्तान के कई स्थानों में सड़कों पर काफिर स्त्रियों की "नग्न यात्राएं (धिंड) "निकाली गयीं, "बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ लगायी गयीं" 

और 10 लाख से ज्यादा की संख्या में उनको दासियों की तरह खरीदा बेचा गया।

20 लाख से ज्यादा महिलाओं को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया। (देखें फिल्म "पिंजर" और पढ़ें पूरा सच्चा इतिहास गूगल पर)।

इस विभाजन के दौर में हिन्दुओं को मारने वाले सबके सब विदेशी नहीं थे। इन्हें मारने वाले स्थानीय मुस्लिम भी थे। 

वे समूहों में कत्ल से पहले हिन्दुओं के अंग-भंग करना, आंखें निकालना, नाखुन खींचना, बाल नोचना, जिंदा जलाना, चमड़ी खींचना खासकर महिलाओं का बलात्कार करने के बाद उनके "स्तनों को काटकर" तड़पा-तड़पा कर मारना आम बात थी।

अंत में कश्मीर की बात~

~19 जनवरी 1990~

सारे कश्मीरी पंडितों के घर के दरवाजों पर नोट लगा दिया जिसमें लिखा था~ "या तो मुस्लिम बन जाओ या मरने के लिए तैयार हो जाओ या फिर कश्मीर छोड़कर भाग जाओ लेकिन अपनी औरतों को यहीं छोड़कर "। 

लखनऊ में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पण्डित संजय बहादुर उस मंजर को याद करते हुए आज भी सिहर जाते हैं। 

वह कहते हैं कि "मस्जिदों के लाउडस्पीकर" लगातार तीन दिन तक यही आवाज दे रहे थे कि यहां क्या चलेगा, "निजाम-ए-मुस्तफा", 'आजादी का मतलब क्या "ला इलाहा इलल्लाह", 'कश्मीर में अगर रहना है, "अल्लाह-ओ-अकबर" कहना है।

और 'असि गच्ची पाकिस्तान, बताओ "रोअस ते बतानेव सान" जिसका मतलब था कि हमें यहां अपना पाकिस्तान बनाना है, कश्मीरी पंडितों के बिना मगर कश्मीरी पंडित महिलाओं के साथ।

सदियों का भाईचारा कुछ ही समय में समाप्त हो गया जहाँ पंडितों से ही तालीम हासिल किए लोग उनकी ही महिलाओं की अस्मत लूटने को तैयार हो गए थे।

सारे कश्मीर की मस्जिदों में एक टेप चलाया गया। जिसमें मुस्लिमों को कहा गया की वो हिन्दुओं को कश्मीर से निकाल बाहर करें। उसके बाद कश्मीरी मुस्लिम सड़कों पर उतर आये। 

उन्होंने कश्मीरी पंडितों के घरों को जला दिया, कश्मीर पंडित महिलाओ का बलात्कार करके, फिर उनकी हत्या करके उनके "नग्न शरीर को पेड़ पर लटका दिया गया"। 

कुछ महिलाओं को बलात्कार कर जिन्दा जला दिया गया और बाकियों को लोहे के गरम सलाखों से मार दिया गया। 

कश्मीरी पंडित नर्स जो श्रीनगर के सौर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में काम करती थी, का सामूहिक बलात्कार किया गया और मार मार कर उसकी हत्या कर दी गयी।

बच्चों को उनकी माँओं के सामने स्टील के तार से गला घोंटकर मार दिया गया।

कश्मीरी काफिर महिलाएँ पहाड़ों की गहरी घाटियों और भागने का रास्ता न मिलने पर ऊंचे मकानों की छतों से कूद कूद कर जान देने लगी।

लेखक राहुल पंडिता उस समय 14 वर्ष के थे। बाहर माहौल ख़राब था। मस्जिदों से उनके ख़िलाफ़ नारे लग रहे थे। पीढ़ियों से उनके भाईचारे से रह रहे पड़ोसी ही कह रहे थे, 'मुसलमान बनकर आज़ादी की लड़ाई में शामिल हो या वादी छोड़कर भागो'।

राहुल पंडिता के परिवार ने तीन महीने इस उम्मीद में काटे कि शायद माहौल सुधर जाए। राहुल आगे कहते हैं, "कुछ लड़के जिनके साथ हम बचपन से क्रिकेट खेला करते थे वही हमारे घर के बाहर पंडितों के ख़ाली घरों को आपस में बांटने की बातें कर रहे थे और हमारी लड़कियों के बारे में गंदी बातें कह रहे थे। ये बातें मेरे ज़हन में अब भी ताज़ा हैं।

1989 में कश्मीर में जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लामी संगठन का नारा था- 'हम सब एक, तुम भागो या मरो'। 

घाटी में कई कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में सामूहिक बलात्कार और लड़कियों के अपहरण किए गए। हालात और बदतर हो गए थे।

कुल मिलाकर हजारों की संख्या में काफिर महिलाओं का बलात्कार किया गया।

आज आप जिस तरह दाँत निकालकर धरती के जन्नत कश्मीर घूमकर मजे लेने जाते हैं और वहाँ के लोगों को रोजगार देने जाते हैं। उसी कश्मीर की हसीन वादियों में आज भी सैकड़ों कश्मीरी हिन्दू बेटियों की बेबस कराहें गूंजती हैं, जिन्हें केवल काफिर होने की सजा मिली। 

घर, बाजार, हाट, मैदान से लेकर उन खूबसूरत वादियों में न जाने कितनी जुल्मों की दास्तानें दफन हैं जो आज तक अनकही हैं। घाटी के खाली, जले मकान यह चीख-चीख के बताते हैं कि रातों-रात दुनिया जल जाने का मतलब कोई हमसे पूछे। झेलम का बहता हुआ पानी उन रातों की वहशियत के गवाह हैं जिसने कभी न खत्म होने वाले दाग इंसानियत के दिल पर दिए।

लखनऊ में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पंडित रविन्द्र कोत्रू के चेहरे पर अविश्वास की सैकड़ों लकीरें पीड़ा की शक्ल में उभरती हुईं बयान करती हैं कि यदि आतंक के उन दिनों में घाटी की मुस्लिम आबादी ने उनका साथ दिया होता जब उन्हें वहां से खदेड़ा जा रहा था, उनके साथ कत्लेआम हो रहा था तो किसी भी आतंकवादी में ये हिम्मत नहीं होती कि वह किसी कश्मीरी पंडित को चोट पहुंचाने की सोच पाता लेकिन तब उन्होंने हमारा साथ देने के बजाय कट्टरपंथियों के सामने घुटने टेक दिए थे या उनके ही लश्कर में शामिल हो गए थे।

अभी हाल में ही आपलोगों ने टीवी पर "अबू बकर अल बगदादी" के जेहादियों को काफिर "यजीदी महिलाओं" को रस्सियों से बाँधकर कौड़ियों के भाव बेचते देखा होगा।

पाकिस्तान में खुलेआम हिन्दू लड़कियों का अपहरण कर सार्वजनिक रूप से मौलवियों की टीम द्वारा धर्मपरिवर्तन कर निकाह कराते देखा होगा। 

बांग्लादेश से भारत भागकर आये हिन्दुओं के मुँह से महिलाओं के बलात्कार की हजारों मार्मिक घटनाएँ सुनी होंगी। 

यहाँ तक कि म्यांमार में भी एक काफिर बौद्ध महिला के बलात्कार और हत्या के बाद शुरू हुई हिंसा के भीषण दौर को देखा होगा।

केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनियाँ में इस सोच ने मोरक्को से ले कर हिन्दुस्तान तक सभी देशों पर आक्रमण कर वहाँ के निवासियों को धर्मान्तरित किया, संपत्तियों को लूटा तथा इन देशों में पहले से फल फूल रही हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता का विनाश कर दिया। 

परन्तु पूरी दुनियाँ में इसकी सबसे ज्यादा सजा महिलाओं को ही भुगतनी पड़ी...

बलात्कार के रूप में ।

👉 आज सैकड़ों साल की गुलामी के बाद समय बीतने के साथ धीरे-धीरे ये बलात्कार करने की मानसिक बीमारी भारत के पुरुषों में भी फैलने लगी।

जिस देश में कभी नारी जाति शासन करती थीं, सार्वजनिक रूप से शास्त्रार्थ करती थीं, स्वयंवर द्वारा स्वयं अपना वर चुनती थीं, जिन्हें भारत में देवियों के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता था आज उसी देश में छोटी-छोटी बच्चियों तक का बलात्कार होने लगा और आज इस मानसिक रोग का ये भयानक रूप देखने को मिल रहा है ।

सनातन संस्कृति और विज्ञान 🚩🚩

: साभार....

#सोशल_मीडिया जिस चीज़ को ठीक करने आया था,आज वही सबसे बड़ी problem बन गई है,और वो है #connections।

करीब 20 साल पहले जब Facebook आया था,तब उसका मकसद था कि आप दूर बैठे दोस्तों और रिश्तेदारों से जुड़े रहो।लेकिन आज हालत उल्टी हो गई है,एक ही कमरे में बैठे पांच लोग भी एक-दूसरे से disconnected हैं,सब अपने-अपने phone में reels scroll कर रहे होते हैं या कुछ देख और कर रहे होते हैं।Couples भी अब “me-time” के नाम पर साथ बैठकर बात करने की बजाय अलग-अलग reels देख रहे होते हैं।

अगर तुम इसे थोड़ा गहराई से समझो,तो बात सिर्फ दुनिया से disconnect होने की नहीं है,तुम खुद से भी disconnect हो चुके हो।तुम्हारा #attention इतना टूट चुका है कि तुम किसी भी चीज़ में पूरी तरह डूब ही नहीं पाते और जब attention नहीं जाता,तो #emotions भी feel नहीं होते।

एक छोटा सा realistic example देखो,पहले हम 2–3 घंटे बैठकर movie देखते थे और उसमें emotional connect बन जाता था,आज वही हम 10 मिनट में ही phone उठा लेते हैं।दूसरा example,अगर तुम किसी exam,office work या personal goal पर काम करने बैठते हो,तो 15–20 मिनट बाद ही mind बहाने ढूंढने लगता है और तुम automatically इंस्टाग्रामखोल लेते हो या सोशल मीडिया पर कुछ और देखने या करने लगते हो,ये habit बन चुकी है।

मैं साफ बोल रहा हूँ,अगर तुम्हारा screen time 4–5 घंटे से ज्यादा है,तो तुम 5 मिनट भी खुद के साथ शांति से नहीं बैठ सकते।जैसे ही तुम कोशिश करोगे,तुम्हें बेचैनी,anxiety या boredom महसूस होगा।तुम तुरंत phone उठाकर कुछ न कुछ scroll करने लगोगे।

सबसे बड़ा नुकसान ये है कि तुम्हारा focus खत्म हो चुका है।तुम 20 मिनट भी लगातार किसी काम में नहीं दे पा रहे, क्योंकि दिमाग instant dopamine का आदी हो चुका है। और इसी वजह से तुम्हारे goals धीरे-धीरे दूर होते जाते हैं,और तुम्हें समझ भी नहीं आता कि गलती कहाँ हो रही है।

अब solution क्या है

सबसे पहले,Instagram से random information लेना बंद करो,और हर चीज़ के लिए ChatGPT या internet पर plan ढूंढना भी बंद करो।क्योंकि information आज unlimited है,और ये किसी का unfair advantage नहीं है।

आज के समय में अगर कोई चीज़ तुम्हें आगे ले जा सकती है,तो वो है तुम्हारा focus

FOCUS का मतलब है,Follow One Course Until Success

एक ही चीज़ पकड़ो और उस पर टिके रहो,चाहे वो तुम्हारी health हो,कोई skill हो,content creation हो या business,बार-बार direction मत बदलो।

सीधी बात है,आज जीत उसी की होगी जो distractions को control कर पाएगा और लंबे समय तक एक ही चीज़ पर focus बनाए रखेगा।

विचार अवश्य करिएगा राम राम रहेगी आप सभी को!

अवधेश प्रताप सिंह कानपुर उत्तर प्रदेश,9451221253

: #kolkata #WestBengal 

देश को अपनी जागीर और PM कि कुर्सी को अपनी बपौती समझने कि गलत फहमी में जी रहा गांधी परिवार का नफरती Rahul Gandhi नैतिकता और मर्यादा कि सारी सीमाएं लांघ चुका हे, हताशा और निराशा के अंधेरे में भटक रहे इस नफरती को जल्द मनोचिकित्सक की आवश्यकता हे Sonia Gandhi Priyanka Gandhi Vadra से मेरा आग्रह हे कि सत्ता का लोभ छोड़ो और इसका इलाज कराओ नहीं तो कुछ समय बाद ये अपने कपडे खुद फाड़कर बाल नाचते अर्धनग्न दिल्ली की सड़कों पर दौड़ता भागता नजर आएगा ....

विदेशी #सोनिया_गांधी खुद अटलजी को अपमानित कर चुकी तो अपने बेटे को छोटे बड़े का सम्मान और पद कि मर्यादा केसे सिखाती...

इस वीडियो को बड़ी बेशर्मी के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने पोस्ट किया हे

: 👉👉 मोदी जी - भारत में बाल तस्करी और शोषण की प्रभावी रोकथाम में कौन सी चुनौतियाँ बाधा डालती हैं?

इस्लामिक घुसपैठिये ईसाई मिशनरीज अर्बन नक्सल फिल्म इंडस्ट्री NGO द्वारा भारत में बच्चों को असुरक्षित बनाते हैं, जिससे तस्करों के लिए बच्चों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होती है।

सस्ते श्रम, घरेलू गुलामी, भीख माँगने और व्यावसायिक यौन शोषण की माँग तस्करी के बाज़ारों को बनाए रखती है इनमे अनेको फ़िल्मी NGO मिशनरीज अवैध तरीके से रहनेवाले घुसपैठिए काम करते है अनेको अस्पतालों से तस्कर बच्चे गायब करके विदेशो में बेच देते है 

त्वरित डिलीवरी ऐप्स के उदय ने अनियमित दुकानों और छँटाई केंद्रों में बाल श्रम की छिपी हुई माँग पैदा कर दी है, जहाँ बच्चे त्वरित डिलीवरी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए रात की लंबी शिफ्टों में काम करते हैं।

अदृश्य और संगठित तस्करी श्रृंखलाएँ: तस्करी नेटवर्क स्रोत, पारगमन और गंतव्य क्षेत्रों में स्तरित और खंडित संरचनाओं के माध्यम से संचालित होते हैं, जिससे पता लगाना और इसे बाधित करना अत्यंत कठिन हो जाता है।

उदाहरण के लिए, तस्कर भारत-नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाते हैं और बच्चों को कई राज्यों से होकर ले जाते हैं, जिससे किसी भी राज्य पुलिस बल के लिए पूरी तस्करी श्रृंखला का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

पीड़ितों की चुप्पी: भय, कलंक, आघात और धमकियाँ रिपोर्टिंग को दबा देती हैं, जिससे शोषण छिपा रहता है और उसका हिसाब नहीं लिया जाता। असंवेदनशील पूछताछ प्रक्रियाएं पीड़ितों को फिर से आघात पहुंचाती हैं, जिससे न्याय प्रक्रियाओं में सहयोग करने की उनकी प्रवृत्ति कम हो जाती है।

प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग: सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पारंपरिक पुलिसिंग की पहुंच से परे जाकर, यौन शोषण, भर्ती और यौन उत्पीड़न को बढ़ावा देते हैं।

उदाहरण के लिए, "वर्चुअल रिक्रूटमेंट" मॉडल में, तस्कर इंस्टाग्राम पर फर्जी "टैलेंट हंट" प्रोफाइल का उपयोग करके महत्वाकांक्षी किशोर इन्फ्लुएंसरों को मॉडलिंग अनुबंधों का लालच देते हैं और अंततः उन्हें व्यावसायिक यौन शोषण में धकेल देते हैं।

डेटा और निगरानी में कमियां: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डेटा को अपडेट करने में देरी और लापता, बचाए गए और तस्करी किए गए बच्चों के खंडित डेटाबेस प्रभावी प्रारंभिक चेतावनी, ट्रैकिंग और रोकथाम प्रयासों को सीमित करते हैं।

हिन्दू बच्चों की तस्करी और शोषण को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बच्चों की तस्करी के खिलाफ रोकथाम ही सबसे प्रभावी रणनीति है, और इसी के अनुरूप इस खतरे को रोकने के लिए कुछ खास उपायों की सिफारिश की:

स्रोत-क्षेत्र (Source-area) संबंधी सिफारिशें: उन गांवों और शहरी बस्तियों की पहचान करें जहाँ तस्करी का खतरा ज़्यादा है, और कुछ तय संकेतकों (जैसे स्कूल छोड़ देना, गरीबी, पलायन, पारिवारिक संकट) का इस्तेमाल करके जोखिम वाले बच्चों और कमज़ोर परिवारों का ब्योरा तैयार करें।

हिन्दू कल्याणकारी योजनाओं (राशन, VB-G RAM G योजना शिक्षा, स्वास्थ्य) का आपस में तालमेल सुनिश्चित करें, ताकि आर्थिक तंगी से हिन्दू परिवारों को तस्करों की तरफ धकेल न दे।

ग्राम बाल संरक्षण समितियों (VCPCs), आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूल अधिकारियों और स्थानीय पुलिस के ज़रिए पंचायत-स्तर पर निगरानी व्यवस्था को मज़बूत करें।

गांव-स्तर पर ऐसे रजिस्टर बनाए रखें जिनमें बच्चों और बाहर से आने वाले लोगों की आवाजाही का ब्योरा हो; साथ ही, 'TrackChild Portal' और 'GHAR – GO Home and Re-Unite' पोर्टल पर भी नियमित रूप से जानकारी अपडेट करते रहें, क्योंकि तस्कर अक्सर शिक्षा या रोज़गार दिलाने के बहाने ही अपना धंधा चलाते हैं।

पारगमन-क्षेत्र (Transit-area) संबंधी सिफारिशें: GRP (सरकारी रेलवे पुलिस), RPF (रेलवे सुरक्षा बल), परिवहन कर्मचारियों, कुलियों, विक्रेताओं और पुलिस को संवेदनशील बनाएं और उन्हें प्रशिक्षित करें, ताकि वे बच्चों और उनके साथ मौजूद वयस्कों की संदिग्ध गतिविधियों को पहचान सकें।

सभी पारगमन स्थलों (transit points) पर स्थानीय भाषाओं में हेल्पलाइन नंबर (1098, 112) और बच्चों के अधिकारों से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित करें।

गंतव्य-क्षेत्र (Destination-area) संबंधी सिफारिशें: प्लेसमेंट एजेंसियों, कारखानों, ईंट-भट्ठों, होटलों, मसाज पार्लरों, घरेलू काम-काज वाली जगहों और मनोरंजन स्थलों का नियमित रूप से निरीक्षण करें।

बाल श्रम, बाल विवाह और घरेलू गुलामी के मामलों में 'बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने' (zero tolerance) की नीति को सख्ती से लागू करें।

बचाए गए बच्चों के लिए JJ Act, 2015 के तहत बाल देखभाल संस्थानों, आश्रय स्थलों और पुनर्वास सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें घुसपैठिये ,NGO मिशनरीज के ऊपर नाके कसना सरकारी अथवा प्राइवेट अस्पतालों में बाल तस्करी को रोकने के लिए सख्त निगरानी, सीसीटीवी, और जन्म-मृत्यु का डिजिटल रिकॉर्ड (ई-हॉस्पिटल सिस्टम) अनिवार्य होना चाहिए। स्टाफ को सतर्कता प्रशिक्षण, सुरक्षा गार्डों की तैनाती, और संदिग्ध मामलों की तुरंत पुलिस को सूचना (हेल्पलाइन 1098 या 112) देकर शिशुओं व बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

अस्पतालों में बाल तस्करी रोकने के प्रभावी उपाय:कड़ी निगरानी और सुरक्षा:सीसीटीवी कवरेज: प्रसूति वार्ड, नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU), और बाहर निकलने के द्वारों पर हर समय सीसीटीवी की निगरानी होनी चाहिए।सुरक्षा गार्ड: नवजात वार्ड और प्रवेश/निकास द्वारों पर सख्त सुरक्षा गार्ड तैनात करें, जो बिना पास किसी को अंदर न जाने दें।डिजिटल ट्रैकिंग: नवजात शिशुओं और मां को एक समान, न हटने वाले 'सुरक्षा बैंड' पहनाए जाएं।डिजिटल और प्रशासनिक सुधार:डिजिटल रिकॉर्ड: अस्पताल में जन्म लेने वाले हर बच्चे का ऑनलाइन और रीयल-टाइम रिकॉर्ड रखें।अभिलेखों का सत्यापन: अस्पताल में काम करने वाले सभी कर्मचारियों, नर्सों और डॉक्टरों की पृष्ठभूमि की कड़ी जांच (Background Check) अनिवार्य हो।जागरूकता और प्रशिक्षण:स्टाफ प्रशिक्षण: चिकित्सा कर्मचारियों को बाल तस्करी के संकेतों को पहचानने और तुरंत कार्रवाई करने का प्रशिक्षण दें।अभिभावक जागरूकता: माता-पिता को उनके बच्चे के सुरक्षा अधिकारों के बारे में शिक्षित करें।प्रक्रियागत बदलाव:संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्टिंग: यदि किसी मरीज़ के साथ कोई व्यक्ति संदिग्ध व्यवहार कर रहा है या उसे स्वतंत्र रूप से बात नहीं करने दे रहा है, तो स्टाफ को तुरंत पुलिस (अग्निवीरो) या अस्पताल प्रशासन को सूचित करना चाहिए। अकेले साक्षात्कार: यदि तस्करी का संदेह हो, तो संदिग्ध को पीड़ित से अलग करके पूछताछ करें।

कानूनी और सामुदायिक कदम:हेल्पलाइन का उपयोग: बाल तस्करी की किसी भी जानकारी या संदेह होने पर चाइल्डलाइन 1098 या पुलिस को 112 पर कॉल करें।शिकायत दर्ज करना: यदि अस्पताल के खिलाफ शिकायत हो, तो भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) या स्थानीय पुलिस को सूचित करें।समुदाय की भागीदारी: स्थानीय स्तर पर लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करें।

निष्कर्ष

बच्चों की तस्करी, बच्चों की गरिमा और उनके मौलिक अधिकारों का एक गंभीर उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश न्याय व्यवस्था को और अधिक मज़बूत बनाते हैं; इन दिशा-निर्देशों के तहत, तस्करी का शिकार हुए बच्चों को 'पीड़ित गवाह' (injured witnesses) के तौर पर देखा जाता है, और उनके प्रति बनी-बनाई रूढ़ियों या छोटी-मोटी विसंगतियों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।

: जेहाद अचानक नहीं होता, यह बहुत धीरे- धीरे होने वाली प्रक्रिया है जिसमें पहले काफिरो (हिन्दुओ) की ताकत को परखा जाता है और उनकी ताकत के हिसाब से तैयारी की जाती है।

जेहाद के पहले हर स्तर पर हिंदुओं को मानसिक रूप से तोड़ा जाता है। जेहाद चरण दर चरण चलने वाली प्रक्रिया है।

🫵🏻पहला चरण- आपके क्षेत्र में कबाड़ी फेरीवाले आने शुरू होंगे जो आपकी आर्थिक स्थिति परखेंगे आपके घरों की महिलाओं की क्षमता परखेंगे

🫵🏻दूसरा चरण- आप के क्षेत्र में चादर फैला कर मांगने वाले लोभान छोड़ने वाले या सूफी गीत गा कर मांगने वाले आने लगेंगे ये दुआएं दे कर भीख मांगेंगे और तलाशेंगे कि कितने परेशान हिन्दू उनके जाल में फंस सकते है।

🫵🏻तीसरा चरण- वो आपके क्षेत्र में ऐसी दुकान खोलेंगे या ऐसा कार्य करेंगे जिससे महिलाओं से उनका संपर्क बढ़ सके और लव जेहाद को बढ़ाया जा सके और महिलाओं को माध्यम बनाकर उनके पिता, भाई व पति से तालमेल बनाया जा सके व उनके दिमाग को पढ़ा जा सके।

🫵🏻चौथा चरण- आपके क्षेत्र में रोड पर कब्जा करके दुकान खोलेंगे और कम कीमत में काम करेंगे, जिससे हिन्दुओ को छोड़ कर आप उनके पास काम करवाने जाने लगें, उनकी दुकानों पर आवारा लड़को का जमावड़ा होने लगेगा।

🫵🏻पाचवां चरण- हिन्दुओ की दुकानों व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर कम वेतन में नौकरी करना शुरू करेंगे।

🫵🏻छठा चरण- ये आपके क्षेत्र में हलाल के मांस की दुकान खोलेंगे।

🫵🏻सातवां चरण- हिन्दू बहुल क्षेत्र में महंगे दामों पर मकान खरीदेंगे या किराया पर लेंगे।

🫵🏻आठवां चरण- हिन्दू लड़को से दोस्ती करेंगे, जिससे वो हिन्दू लड़कियों से परिचय कर सकें और किसी न किसी बहाने आपके घर आ जा सकें।

🫵🏻नौवां चरण- आपके क्षेत्र में मज़ार बनाएंगे और उसके चमत्कारों का प्रचार करेंगे जिससे मूर्ख हिन्दू वहां जाना शुरू करें।

🫵🏻दसवां चरण- अब जिहाद का असर दिखने के लिए तैयार है अब वो इस्लामिक धार्मिक आयोजन करेंगे और इस तरह से करेंगे कि हिन्दुओ को उससे समस्या हो।

🫵🏻ग्यारहवां चरण- आपके धार्मिक आयोजनों का विरोध करने लगेंगे।

🫵🏻बारहवां चरण- वो हर तरह से अपना अधिकार जताएंगे और सदैव मौके की तलाश में होंगे कि कब हिंदुओं को अपमानित करते हुए इन पर हमला किया जाए।

अब आप स्वयं इन लक्षणों को पहचाने और यह तय करें कि, आप जिहाद के किस चरण में हैं।

इसलिए इस पोस्ट को शेयर करते हुए खुद भी जागिए और पूरे हिंदू समाज को एक सूत्र में बांधते हुए जगाने का कार्य कीजिए

जय जय श्री राम👏

: एक पहाड़ी डाक्टर ऐसा भी 

जो है तो न्यूरो सर्जन पर जीत दिल लेता है

- लगभग 17000 स्पाइन और ब्रेन सर्जरी कर चुके हैं डा. महेश कुड़ियाल

थराली आपदा की कवरेज करने गये हमारे डीडी न्यूज संवाददाता दिग्बीर बिष्ट का वापस लौटते समय एक्सीडेंट हा ेगया और उनके सिर में कई जगह कार का कांच घुस गया। लोकल इलाज के बाद दिग्बीर देहरादून आया तो एक बार डा. कुड़ियाल को दिखाने को कहा, मैंने फोन किया तो डा. महेश कुड़ियाल ने फौरन बुला लिया। और ऐसा पहली बार नहीं हुआ, अक्सर होता है। पत्रकारों को सबसे अधिक दिमागी परेशानी होती है। मुझ समेत अधिकांश पत्रकारों का न्यूरा संबंधी जटिलताओं का इलाज एक शख्स करता है और वह है डा. महेश कुड़ियाल। 

मूल रूप से टिहरी जिला निवासी डा. महेश कुड़ियाल न्यूरो सर्जन हैं। अपने करिएर में वह लगभग 17000 ब्रेन और स्पाइन सर्जरी कर चुके हैं। पहाड़ की माटी और थाती के लिए समर्पित डा. महेश कुड़ियाल 1996 में अमरीका के विश्व प्रसिद्ध क्लीवलैंड क्लिनिक में भी काम करने लगे थे, लेकिन उन्हें अपने पहाड़ की याद आई और वापस देहरादून लौट गये। 1990 के दशक में पूरे उत्तराखंड में वह अकेले न्यूरोसर्जन थे। डा. कुड़ियाल जितने अच्छे सर्जन हैं, उससे अच्छे इंसान भी। उनके हास्पिटल में इलाज पहले मिलता है और बिल की टेंशन बाद में। कई ग्रामीण मरीज तो पहले इलाज करा लेते हैं और फिर बिल अदायगी के नाम पर हाथ खड़े कर देते हैं। इसके बावजूद डा. कुड़ियाल के चेहरे पर शिकन नहीं उभरती। वह हंसते हुए कहते हैं कि जब मरीज के पास पैसे ही नहीं हें तो लाएगा कहां से? और ये सच है कि रोजाना कई ऐसे ही जरूरतमंद और गरीब मरीज उनसे इलाज या कंसल्टेंसी लेने पहुंच जाते हैं। 

आज के दौर में ऐसा प्राइवेट और वह भी सुपर स्पेश्लिस्ट डाक्टर मिलना बहुत मुश्किल है कि जिसका दिल ग्रामीण और गरीबों के लिए भी धड़कता हो। यही कारण है कि डा. महेश कुड़ियाल को हाल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने निर्विरोध उत्तराखंड इकाई का अध्यक्ष चुना है। डा. कुडियाल को इस अहम जिम्मेदारी के लिए बधाई।

: बंगाल की सियासत में अक्सर नाटकीय और भावनात्मक घटनाएं देखने को मिलती रही हैं, लेकिन एगरा विधानसभा क्षेत्र में जो दृश्य सामने आया, उसने हर किसी को हैरान कर दिया. कभी तृणमूल कांग्रेस के मजबूत स्तंभ रहे वरिष्ठ नेता शिशिर अधिकारी अब भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.

अपने पुत्र और भाजपा प्रत्याशी दिव्येंदु अधिकारी के समर्थन में आयोजित एक जनसभा में उन्होंने ऐसा कदम उठाया, जिसने राजनीति में एक नया संदेश दिया. मंच से संबोधित करते हुए शिशिर अधिकारी अचानक घुटनों के बल बैठ गए और जमीन पर सिर झुकाकर जनता से माफी मांगने लगे. उन्होंने स्वीकार किया कि तृणमूल में रहते हुए उनसे कई गलतियां हुईं और अब वे उसका प्रायश्चित करना चाहते हैं. जिसके बाद इस खबर ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और इसे चुनावी रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है.

तृणमूल में रहने पर पछतावा

एगरा के अलंगिरी में आयोजित इस जनसभा में शिशिर अधिकारी का भावुक अंदाज लोगों के लिए एक अभूतपूर्व अनुभव रहा. उन्होंने मंच से कहा, "मैंने TMC में रहकर पाप किया है, अब मैं प्रायश्चित कर रहा हूं." इसके बाद उन्होंने गले में कपड़ा डालकर घुटनों के बल बैठते हुए जमीन पर सिर झुकाया और जनता से क्षमा याचना की. उनके इस आत्मस्वीकृति वाले बयान ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया. यह दृश्य केवल एक राजनीतिक बयान नहीं था, बल्कि एक वरिष्ठ नेता के आत्ममंथन और पश्चाताप का प्रतीक भी माना गया. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस कदम से मतदाताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने की कोशिश की गई.

बेटे के लिए भावनात्मक अपील

इस जनसभा का मुख्य उद्देश्य भाजपा प्रत्याशी और उनके पुत्र दिव्येंदु अधिकारी के समर्थन में प्रचार करना था. शिशिर अधिकारी ने हाथ जोड़कर लोगों से अपील की कि वे उनके बेटे को भारी मतों से विजयी बनाएं. उन्होंने कहा कि दिव्येंदु क्षेत्र के विकास और जनता की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हैं. पिता की इस भावनात्मक अपील ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नया उत्साह भर दिया. अधिकारी परिवार का पूर्वी मेदिनीपुर जिले में गहरा प्रभाव रहा है, और इसी कारण यह अपील चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है. स्थानीय लोगों के बीच यह संदेश गया कि शिशिर अधिकारी अपने बेटे के राजनीतिक भविष्य और क्षेत्र के विकास को लेकर गंभीर हैं.

: ईरान ने 40 दिन से 

होर्मुज को बंद किया हुआ था,

तब कोई मीडिया चैनल चर्चा भी 

नहीं करता था -

अब ट्रंप ने नाकाबंदी कर दी 

तो सारा मीडिया दर्द से कराह 

रहा है -

जब से अमेरिका-इज़रायल का ईरान ने युद्ध शुरू हुआ, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को बंधक बना लिया था - हर देश के तेल टैंकरों को निकलने नहीं दे रहा था - पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया था - अनेक देशों में पेट्रोल और गैस के दाम बेतहाशा बढ़ गए थे - बड़े बड़े विकसित देश त्राहिमाम त्राहिमाम कर रहे थे -

लेकिन किसी मीडिया चैनल पर न ईरान की हठधर्मी का कोई जिक्र होता था और न उसकी निंदा की गई - गिने चुने देशों के ही टैंकर ईरान निकलने दे रहा था - स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज ईरान के बाप की प्रॉपर्टी नहीं था जो उस पर कब्ज़ा किया हुआ था -

दलाल पाकिस्तान में हुई अमेरिका ईरान की वार्ता विफल होने पर ट्रंप ने होर्मुज की नाकाबंदी की घोषणा कर दी और कल से शुरू भी कर दिया - सारा मीडिया ट्रंप पर पिल पड़ा - बड़े रक्षा विशेषज्ञ भी उसी कतार में खड़े हो गए जो कभी ईरान के कब्जे के खिलाफ नहीं बोले - मुझे तो ताज्जुब होता है कि मेजर जनरल (रिटायर्ड) जी डी बक्शी भी ट्रंप पर बरसते रहते हैं - वो तो जैसे ट्रंप को अपना निजी शत्रु मानकर बैठे हैं - 

क्या बक्शी जी नहीं जानते कि ईरान परमाणु हथियार इज़रायल का नामोनिशान मिटाने के लिए बनाना चाहता है जैसी वो धमकी बार बार देता है - क्या बक्शी जी भी इज़रायल का अस्तित्व मिटना देखना चाहते हैं -

अब ईरान कह रहा है कि नाकाबंदी का उल्टा असर होगा क्योंकि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के खिलाफ काम करेगा - मतलब तुम तो होर्मुज को बंद करके जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बढ़ाने का काम कर रहे थे - 

मीडिया ने कभी नहीं बताया ईरान द्वारा होर्मुज को बंद करने से क्या विपरीत परिस्थिति बन रही हैं और कितना नुकसान हो रहा है लेकिन ट्रंप द्वारा नाकाबंदी करने के बाद यह सब बताया जा रहा है जैसा कल एक चैनल ने बताया -

होर्मुज का जंग पर असर -

-होर्मुज से तेल सप्लाई - 21 मिलियन बैरल रोजाना;

-कारोबार का नुकसान - 13.15 अरब डॉलर रोजाना; और 

-प्रभावित आबादी - 3 अरब 

क्या बात है, बड़ी जल्दी आंकड़े निकाल लिए - चलिए पहले नहीं बताए तो अब बताएं कि ईरान के होर्मुज पर कब्जे के समय यह आंकड़े कितने थे -

आज चीन भी उछला है ट्रंप के खिलाफ - चीन ने कहा है -”the blockade is dangerous and irresponsible - जिनपिंग ने कहा the world must not be allowed to “revert to the law of jungle”

चीन को ईरान द्वारा होर्मुज पर कब्जे से कोई परेशानी नहीं थी, तब उसने नहीं कहा कि हम जंगल के कानून पर चल रहे हैं - वो इसलिए क्योंकि ईरान उसके तेल टैंकर नहीं रोक रहा था और अब फटी पड़ी है -

ट्रंप में कमियां हैं, उसके बहुत गलतियां की हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मीडिया ईरान के साथ खड़ा हो जाए जिसने हमास, हिजबुल्लाह और हूती जैसे आतंकी संगठन खड़े किये हुए है इज़रायल को ख़त्म करने के लिए - यूरोपीय देश ट्रंप को लगता है उसके टैरिफ की सजा देना चाहते हैं लेकिन उन्हें नहीं पता उनके देशों में ईरान और पाकिस्तान के कितने sleeper Cells संचालित हो रहे हैं और एक दिन वे उनकी चपेट में आएंगे -

इस बीच एक महत्वपूर्ण खबर आई है कि ट्रंप में प्रधानमंत्री मोदी से 40 मिनट फ़ोन पर बात की है, निश्चित रूप से मोदी ने शांति बनाने के लिए प्रयास करने को कहा होगा -

(सुभाष चन्द्र)

“मैं वंशज श्री राम का)

14/04/2026 

@followers

: 🛑TCS जिहाद 

आप सोचते है कि आपकी बाजु की टेबल पर बैठा, MIT ग्रैजूएट, सॉफ़्टवेयर एंजिनीयर, अब्दुल मस्त कुछ भी लिखता है सोशल मीडिया पर, मीटिंग में ट्रम्प मोदी इजरायल सब को गाली दे लेता है, जबकि आप के एक tweet पर HR का मेमो आ जाता है, नौकरी पर बन आती है।

नौकरी वो भी असल में कर रहा है, लेकिन आपकी कम्पनी की नहीं। आपकी कम्पनी का वेतन तो बस बोनस है उसके लिए। 

वह नौकरी कर रहा है ज़कात कमिटी की। ज़कात कमिटी ने ही उसे MIT पहुँचाया होगा।

जी, एक लव जिहादी की जीवनी पढ़ी मैंने कुछ दिन पहले। वह ईजिप्ट में पैदा हुआ। मुस्लिम ब्रधरहुड ने उसकी शिक्षा का व्यय वहन किया। फिर उसे ईसाई होने का प्रशिक्षण दिया। फिर उसे सिंगापुर की NTU में दाख़िला दिला दिया। वहाँ वह लड़कियों से ईसाई बन कर मिलता। जब लड़की गर्भवती हो जाती तो उससे कहता कि वो मुसलमान हो गया है, निकाह ईजिप्ट में होगा। लड़की मान जाती तो उसे ईजिप्ट ले जाकर डम्प कर देता। वो भोगदासी बन कर रह जाती। नहीं मानती तो एक काफ़िर लड़की जीवन भर के लिए वैसे भी बर्बाद हो जाती। फिर उसे स्वीडन में नौकरी मिल गयी। वहाँ भी उसने वही किया। फिर इंग्लैंड चला गया दूसरी कम्पनी में। वहाँ भी वही किया। कम्पनी में एक लड़की ने हंगामा किया तो H.R. ने उस लव जिहादी को मेमो दिया। शाम में HR हेड के घर पचास के आसपास जिहादी आकर बैठ गए। उसे रेसिस्ट बता कर sue करने की धमकी दी। मेमो वापिस हो गया।

अपनी स्तिथि पहचाने। अब्दुल की नक़ल न करें।

अब्दुल आपकी कंपनी में भी जिहाद करने आया है, नौकरी करने नहीं। 

(ईजिप्ट के एक लव जिहादी ने Bill Gates की बेटी को अपने जाल में फाँस लिया है। काफिर माइक्रोसॉफ़्ट खड़ी करता है पूरा जीवन खपा कर। मुयलमान क्या करता है? उसकी बेटी से लव जिहाद कर लेता है। Jihad never sleeps.)

: बिना डर के बंधुत्व नहीं टिकता। भारत में भाईचारा अमन चैन एकता सद्भाव लोकतंत्र अखंडता इत्यादि इत्यादि बनाए रखने के लिए "शांतिदूतों" में भय खौफ का होना अत्यंत ज़रूरी है, ऐसा मैं नहीं कहता, योगीजी कहते हैं और यह शत प्रतिशत सत्य, सही और सटीक मंत्र या सूत्र है लेकिन इसके लिए हिंदुओं का बहुमत और एकता में होना अनिवार्य है, शास्त्र के साथ शस्त्र संचालन भी आना चाहिए तभी स्थायी रूप से शांति व्यवस्था बनी रह सकती है। हिंदू मजबूत होगा तभी हिंदुत्व सुरक्षित रहेगा। अकेले बुलडोजर बाबा कुछ नहीं कर सकते, उनको बहुमत वाला जनसमर्थन चाहिए, बार बार चाहिए, हर बार चाहिए तभी गज़वा ए हिंद को रोका जा सकता है। जय सियाराम जय भवानी 🚩🙏🪷✨

: 🛑आप कश्मीर चले जाइए। हर मेडिकल स्टोर के अंदर बने केबिन मे एक डाॅक्टर साहब विराजमान मिलेंगें। MBBS, BDS ड्रिग्री धारी..कभी गुडगाँव मे "मेदांता द मेडिसिटी" हो आईये, बाकायदा हिजाबधारी लडकियां और दाढीयुक्त मोमिन डाॅक्टर मिलेंगें। थोडी पडताल कर लेना, सब के सब बांग्लादेश जाकर डाॅक्टरी पढे है। इसके अलावे बाकी चीन, यूक्रेन,और रशियन फेडरेशन के देशो के मेडिकल काॅलेजो से।

कशमीरियो मे तो एक परम्परा ही बन गई है, "हलाल डिग्री" लेने की, जो केवल बांग्लादेश मे मिलती है। ये हलाल डिग्री वाले डाॅक्टर इतने एक्सपर्ट डाॅक्टर है कि बगैर MCI का एग्जाम पास किये, प्रैक्टिस करते है, कशमीर है भाई, जहाँ इंडिया के नाम से ही चिढ हो, तो मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया गई तेल लेने, भारत सरकार तक चूँ ना करे। राज्य सरकार भी सबसे ज्यादा वरीयता बांग्लादेश से डिग्री लेकर लौटे दढियलो को ही देती है। एक ड्रिस्ट्रिक्ट हाॅस्पिटल के पे रोल पर पचास पचास डाॅक्टर मौजूद है।

यही हाल यूक्रेन, रोमानिया, बुल्गारिया के डिग्रीधारियो का है। कमाल तो ये है कि वहाँ मेडिकल की पढाई स्थानीय भाषा मे होती है, ना कि अंग्रेजी मे। सीधे M.D. की डिग्री मिलती है, जो यहाँ एग्जाम पास करने के बाद MBBS के समकक्ष मानी जाती है, और इसे लेने मे मात्र 07 साल लगते है। पहला साल केवल लैंग्वेज सिखाई जाती है, क्योंकि मेडिसिन की पढाई का माध्यम केवल और केवल स्थानीय भाषा है।

इन डाक्टरों ने मेडिकल काउंसिल का एग्जाम पास किया या नही किया कौन पूछने आता है इनसे ? इलाके के थानेदार को क्या पडी है, कि वो डाॅक्टर से मगजमारी करता फिरे। दस दिन ICU का बिल बनाओ और रेफर कर दो। 

जरा सोचिये, साल दर साल तीस हजार डाॅक्टर तो अकेले यूक्रेन से आ रहे है, दस बीस हजार बांग्लादेश से, उतने ही चीन, रोमानिया, बुल्गारिया, हंगरी, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, मालदोवा, उजबेकिस्तान जैसे देशो से आ रहे है। फिर हम ये भी बोलते है कि डाॅक्टर कसांई है, ऐसे लूट लिया, ऐसे काट लिया, ऐसे मेडिकल नेग्लीजेंसी के चलते मरीज मर गया। ठगी, चालाकी, बेईमानी, जोड तोड, और मक्कारी से नाममात्र के डाॅक्टर बनने वाले वही सब तरीके तो अपनायेंगें ना? काबिल होते तो यही डाॅक्टर बन लेते, एग्जाम पास कर लेते। किसी लायक नही थे, तभी तो जोड़ तोड़ कर नाकाबिल डॉक्टर बने। 

भारत देश में योग्यता की तो कोई न कद्र है, न जरूरत है। एक तो आरक्षण की मार से वैसे ही सभी विभागों में निपुण डॉक्टरों की कमी हो गई है, उस पर से ये फर्जी डिग्री धारी। 

भगवान ही मालिक है इस देश का।

: 🤷🏻‍♂️“कांग्रेस का "अमेरिका के आगे सरेंडर" स्कैंडल – मणि शंकर अय्यर का खुलासा!”

मणि शंकर अय्यर, जो 20 महीने तक मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रहे, अब खुलकर बता रहे हैं कि सोनिया-राहुल-मनमोहन की🇮🇳 सरकार अमेरिका के सामने कैसे लेट जाती थी।

 जैसे कोई डरपोक स्कूल का लड़का बड़े भाई के आगे घुटने टेक दे!

*पहला धमाका: शांति पाइपलाइन (IPI) का कत्ल!कांग्रेस ने इसे "शांति पाइपलाइन" का नाम देकर खूब प्रचार किया था*।

 ईरान से गैस और क्रूड की विशाल पाइपलाइन पाकिस्तान होते हुए राजस्थान तक आनी थी।

 पाकिस्तान को रॉयल्टी में गैस का हिस्सा, सब कुछ फाइनल हो चुका था। 

खुद मनमोहन सिंह पाकिस्तान जाकर दस्तखत करने वाले थे।

मणि शंकर अय्यर टेंडर निकालने के लिए मनमोहन सिंह के पास गए।

🤷🏻‍♂️ तब प्रधानमंत्री ने ठंडे स्वर में कहा:

"रहने दो यार... अमेरिका के तीन मंत्रियों के फोन आ गए हैं।

 वो इस प्रोजेक्ट से खुश नहीं हैं। कह रहे हैं – रद्द कर दो!"बस! 

एक फोन कॉल और भारत की ऊर्जा सुरक्षा का सपना चकनाचूर।

 करोड़ों डॉलर की मेहनत, क्षेत्रीय शांति का मौका, सब अमेरिका की एक झिड़की में खत्म।

 सोचिए, हमारी सरकार कितनी कमजोर और डरपोक थी कि अमेरिका के इशारे पर अपना राष्ट्रीय हित कुर्बान कर दिया!🤷🏻‍♀️

 दूसरा धमाका: म्यांमार की गैस – *GAIL ने खोजा, चीन को दे दिया*!म्यांमार के समुद्र तट पर गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया (GAIL) ने अपनी मेहनत और करोड़ों डॉलर खर्च करके गैस की खोज की।

 प्रस्ताव था – पाइपलाइन बिछाकर वो गैस म्यांमार-बांग्लादेश होते हुए पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक लाई जाए। 

भारत को सस्ती गैस, हल्दिया पेट्रोकेमिकल हब बनेगा, ऊर्जा क्रांति हो जाएगी!लेकिन... कांग्रेस सरकार डर गई। 

राजनीतिक दबाव, विदेश नीति की "सावधानी" (यानी घुटने टेकना) और शायद अमेरिका-चीन के खेल में फंसकर, उन्होंने ये प्रोजेक्ट चीन को थमा दिया।

GAIL की खोजी हुई गैस, भारत की मेहनत का नतीजा – चीन के पाइपलाइन में चला गया!

 चीन आज उस गैस से फायदा उठा रहा है, जबकि भारत ऊर्जा संकट से जूझ रहा था।

 ये है यूपीए का "राष्ट्रीय हित" – खुद की कंपनी खोजे, खर्च करे, 

और आखिर में चीन को गिफ्ट!

निष्कर्ष – 

*अगर कोई कांग्रेसी आज भी "नरेंद्र सरेंडर" जैसा शब्द इस्तेमाल करे, तो भाई... उसका चुनाव निशान उसके गाल पर छाप दो*! 

क्योंकि असली सरेंडर तो उनके राज में हुआ था – 

अमेरिका के फोन पर पाइपलाइन रद्द, 

अपनी खोजी गैस चीन को सौंप दी।

 राष्ट्रहित को विदेशी दबाव के आगे झुका दिया।

 ये नहीं है सिर्फ दो प्रोजेक्ट की कहानी... ये है कमजोर नेतृत्व, डरपोक नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ की सनसनीखेज गाथा!🤷🏻‍♂️🪷🤷🏻‍♀️

*अब बताओ, कौन सा "सरेंडर" ज्यादा खतरनाक था*?

🔴

: बाबा साहब की महानता के कई किस्से जनता को शायद अच्छे से पता नहीं हैं। 

यह सबको पता है कि बाबा साहब के सम्मान मे, उनकी मृत्यु पर 169 देशों ने झंडा झुकाया था(हालांकि उस समय दुनिया मे कुल 80 देश ही थे 🤪)...

 लेकिन यह कम लोगों को मालूम है कि बाबा साहब अकेले भारत के वह सूरमा थे, जो कभी चुनाव नहीं जीते लेकिन जिन्हें अंग्रेजी सरकार ने अपनी सरकार में श्रम मंत्री बनाया था।

उस समय भारत के कई क्रांतिकारियों के पास चलने-फिरने के लिए साइकिल तक नसीब नहीं थी, शरीर पर ढंग के कपड़े नहीं होते थे।

कभी-कभी 4 दिन में एक बार खाना खा पाते थे और बेहद खराब जगहों पर रहने को मजबूर थे, लेकिन बाबा साहब सूट-टाई पहनकर, कार में बैठकर अंग्रेजों से लड़ने जाते थे।

 

किस्से बहुत हैं,यदि और तारीफ करेंगे तो लोग कपोल-कल्पना समझेंगे।

ऐसे महान विचारक आर्दशों पर चलने वाले थे बाबा जी।

: ये जो घोड़े के नीचे बंधा हुआ है यही है वो ग़ाज़ी सालार मसूद।

जिसको भारत का कन्वर्ट मुसलमान अपने पीर फकीर की तरह मानता है।

और हर साल इसकी कब्र पर उर्स मेले का भी आयोजन करता है।

मेले में मूर्ख हिन्दू भी जाते हैं, इस चम्पतिये के कब्र से अच्छे स्वास्थ्य औरों सफल जीवन की दुआ मांगने।

है न विडम्बना..?

और....जो ....घोड़े के ऊपर पूरे जोश से लबरेज़ नौजवान दिखाई दे रहा है वो हैं श्रावस्ती के महाराजा सुहेलदेव जिन्होंने इस मसूद को पकड़कर पहले बेइज्जती किया नंगा कर के मुँह काला कर के घोड़े से बाँध कर घुमाया ताकि इसकी गाज़ीगिरी निकल जाये और फिर रगड़ दिया।

तब से महाराजा सुहेलदेव को भारत के कनवर्ट मुस्लमान और कॉन्ग्रेसी शिक्षा नीति एक क्रूर राजा की तरह वर्णन करती आई हैं।

महमूद गजनवी के उत्तरी भारत को 17 बार लूटने व बर्बाद करने के कुछ समय बाद उसका भांजा सलार गाजी भारत को दारूल इस्लाम बनाने के उद्देश्य से भारत पर चढ़ आया।

वह पंजाब सिंध आज के उत्तर प्रदेश को रौंदता हुआ बहराइच तक जा पंहुचा और रास्ते में उसने लाखों हिन्दुओं का कत्लेआम किया लाखों हिंदू औरतों के बलात्कार हुए हजारों मन्दिर तोड़ डाले राह में उसे एक भी ऐसा हिन्दू शूरवीर नहीं मिला जो उसका मान मर्दन कर सके।

इस्लाम की जेहाद की आंधी को रोक सके।

श्रावस्ती (बहराइच) अयोध्या के पास है।

वहाँ के राजा सुहेल देव पासी अपनी सेना के साथ सलार गाजी के हत्याकांड को रोकने के लिए जा पहुंचे।

महाराजा व हिन्दू वीरों ने सलार गाजी व उसकी दानवी सेना को मूली गाजर की तरह काट डाला सलार गाजी मारा गया।

उसकी भागती सेना के एक-एक हत्यारे को काट डाला गया।

हिंदू ह्रदय राजा सुहेल देव पासी ने अपने धर्म का पालन करते हुए सलार गाजी को इस्लाम के अनुसार कब्र में दफ़न करा दिया।

कुछ समय पश्चात् तुगलक वंश के आने पर फिरोज तुगलक ने सलार गाजी को इस्लाम का सच्चा संत सिपाही घोषित करते हुए उसकी मजार बनवा दी।

आज उसी हिन्दुओं के हत्यारे हिंदू औरतों के बलात्कारी मूर्ति भंजक को हिंदू समाज एक देवता की तरह पूजता है।

आज वहां बहराइच में उसकी मजार पर हर साल उर्स लगता है और उस हिन्दुओ के हत्यारे की मजार पर सबसे ज्यादा हिन्दू ही जाते हँ।

क्या कहा जाए ऐसे हिन्दुओ को...??

मूर्ख...?? या अज्ञानी...?

इनको सही इतिहास किसी ने बताया नहीं।

विडंबना देखिए -

जहाँ महाराज सुहेल देव जी की पूजा होनी चाहिए थी वहां पीर गाजी मियाँ की कब्र पर हिन्दू माथा पटक रहा है। सलार गाजी हिन्दुओं का गाजी बाबा हो गया है।

हिंदू वीर शिरोमणि सुहेल देव पासी सिर्फ़ पासी समाज और राजभर समाज का हीरो बनकर रह गए है।

और सलार गाजी हिन्दुओं का भगवान बनकर हिन्दू समाज का पूजनीय हो गया है।

🔴

: #याद_रखना_हिंदुओं..!

#गीर्ट_वाइल्डर्स ये निदरलैंड के बड़े नेता हैं..

वहाँ के सांसद हैं 

कल इन्होने बड़ी ही महत्वपूर्ण बात वहाँ की संसद में बोली..!

उन्होंने कहा "अगर इज़राइल गिर गया, तो एथेंस, पेरिस और एम्स्टर्डम अगले होंगे। पश्चिम में हमारी माएं रात में शांति से सो सकती हैं, क्योंकि इज़राइली सैनिकों की माएं जागती रहती हैं, सोचती हैं कि उनका बच्चा युद्ध से जीवित वापस आएगा या नहीं।"

सच है ये और सिर्फ यूरोप का नहीं... भारत के हिन्दुओं का भी सच यही है 

जिस दिन इजराइल ढह गया.

अगला नम्बर उ@ म्माह से लड़ने का आपका है 

उनका पहला निशाना हिंदुस्तान होगा 

और उनके 20 करोड़ भाई उनके साथ होंगे 

तो इजराइल के लिए प्रार्थना और आवाज तुम्हारी जरुरत है...

इजराइल से भी ज्यादा..!

@highlight

: 🛑

"क्या आप #जानते हैं कि आज आप अपनी जो '#जाति' #सरकारी #फॉर्मों में भरते हैं, वह हजारों साल पुराने किसी #वेद या #मनुस्मृति ने नहीं, बल्कि 19वीं सदी के एक #अंग्रेज अफसर की कलम ने तय की थी? कल्पना कीजिए एक ऐसे समाज की जहाँ जातियां पानी की तरह बहती थीं, लेकिन फिर सात समंदर पार से आए कुछ 'साहबों' ने उसे एक रजिस्टर में दर्ज किया और हमारे बीच नफरत की एक ऐसी दीवार खड़ी कर दी जिसे हम आज भी नहीं गिरा पाए। यह कहानी है उस 'जनगणना' (Census) की, जिसने भारत की आत्मा का 'पोस्टमॉर्टम' (Post-mortem) किया और हमें 'इंसान' से बदलकर 'आंकड़ा' (Data) बना दिया। आइए, उस कूटनीतिक साजिश के पन्ने पलटते हैं जिसने भारत के भाईचारे को 'सरकारी रैंकिंग' की आग में झोंक दिया।"

ब्रिटिश काल में जातियों का 'सरकारीकरण' (Officialization) भारतीय इतिहास की वह घटना है जिसने सदियों पुरानी सामाजिक व्यवस्था को एक राजनीतिक हथियार में बदल दिया। अंग्रेजों ने भारत पर राज करने के लिए 'विभाजन करो और शासन करो' (Divide and Rule) की नीति अपनाई, और इसमें **जनगणना (Census) उनका सबसे बड़ा औजार बनी।

इसे विस्तार से समझने के लिए इन चार प्रमुख चरणों को देखना होगा:

1. जनगणना और श्रेणियों का निर्माण (The 1871-1901 Census)

1871 में जब पहली बार बड़े स्तर पर जनगणना शुरू हुई, तो ब्रिटिश अधिकारियों (विशेषकर हर्बर्ट रिजली) ने भारतीयों को वर्गीकृत (Classify) करने की कोशिश की।

 

नया ठप्पा:अंग्रेज 'वैज्ञानिक नस्लवाद' (Scientific Racism) में विश्वास करते थे। उन्होंने नाक की बनावट और चेहरे के आधार पर जातियों को 'आर्य' और 'द्रविड़' जैसी श्रेणियों में बांटना शुरू किया।

 पहचान का संकट: पहले भारत में एक ही जाति के लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग काम करते थे, लेकिन अंग्रेजों ने उन्हें एक ही 'नाम' और 'नंबर' देकर सरकारी फाइलों में कैद कर दिया।

2. जातियों की 'रैंकिंग' और श्रेष्ठता का द्वंद्व (The Creation of Hierarchy)

1901 की जनगणना में हर्बर्ट रिजली ने जातियों की एक 'आधिकारिक सूची' (Official List) बनाई और उन्हें एक क्रम (Ranking) में रख दिया।

 सरकारी दर्जा: कौन सी जाति 'ऊंची' है और कौन सी 'नीची', यह अब समाज तय नहीं कर रहा था, बल्कि ब्रिटिश सरकार के कागज तय कर रहे थे।

 विवाद की शुरुआत: जैसे ही अंग्रेजों ने रैंकिंग घोषित की, जातियों के बीच 'होड़' मच गई। हजारों जातियों ने सरकार को पत्र लिखे कि उन्हें 'ऊंचा' दर्जा दिया जाए। समाज में जो सामंजस्य (Harmony) था, वह अब प्रतिस्पर्धा (Competition) में बदल गया।

3. 'निश्चितता' बनाम 'लचीलापन' (Rigidity vs Flexibility)

अंग्रेजों से पहले, भारत में जातियां उतनी कठोर नहीं थीं। एक व्यक्ति या समूह अपना काम बदलकर अपनी सामाजिक स्थिति बदल सकता था।

 

फ्रीजिंग इफेक्ट (Freezing Effect): अंग्रेजों ने हर व्यक्ति की जाति को उसके जन्म के साथ सरकारी रजिस्टर में 'फिक्स' (Fix) कर दिया। अब आप अपना कर्म बदलकर अपनी जाति नहीं बदल सकते थे क्योंकि कागज पर आपका ठप्पा लग चुका था।

 कानूनी आधार: नौकरियों, जमीन के अधिकारों और शिक्षा में अंग्रेजों ने जातियों के आधार पर प्राथमिकताएं तय करना शुरू किया, जिससे जाति केवल सामाजिक पहचान न रहकर 'आर्थिक लाभ'का जरिया बन गई।

4. 'क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट' और कलंक (The Criminal Tribes Act, 1871)

अंग्रेजों ने कुछ जातियों को 'जन्मजात अपराधी' (Criminal by Birth) घोषित कर दिया।

 

मानसिक प्रहार: यह वर्ण व्यवस्था के 'गुण-कर्म' सिद्धांत की हत्या थी। अंग्रेजों ने कहा कि यदि आप इस जाति में पैदा हुए हैं, तो आप अपराधी ही होंगे। इस कानून ने लाखों लोगों को समाज की मुख्यधारा से काटकर उन्हें 'अछूत' और 'अपराधी' की श्रेणी में धकेल दिया।

ब्रिटिश काल का यह 'वर्गीकरण' दरअसल समाज का 'पोस्टमॉर्टम' था। अंग्रेजों ने एक जीवित और बढ़ते हुए समाज को चीर-फाड़ कर उसे अलग-अलग डिब्बों में सजा दिया। उन्होंने जो 'रैंकिंग' शुरू की, उसने भाई को भाई के खिलाफ खड़ा कर दिया। कल तक जो व्यवस्था आपसी सहयोग (Mutual Cooperation) पर आधारित थी, वह अब 'सरकारी आरक्षण' और 'वोट बैंक' की राजनीति की नींव बन गई।

अंग्रेज तो चले गए, लेकिन वे हमारे दिमागों में वह 'रजिस्टर' छोड़ गए, जहाँ हम आज भी एक-दूसरे को इंसानियत के बजाय 'जाति' के चश्मे से देखते हैं। यह वह 'मानसिक उपनिवेशवाद' (Mental Colonialism) है जिससे हमें आज भी आजाद होना बाकी है।

अंततः, ब्रिटिश काल का यह 'वर्गीकरण (Classification) केवल कागजों पर खींची गई लकीर नहीं थी, बल्कि यह हमारे सामूहिक मानस पर किया गया एक गहरा प्रहार था। अंग्रेजों ने हमें यह यकीन दिला दिया कि हम एक-दूसरे से अलग और ऊंच-नीच के खांचों में बंटे हुए हैं। उन्होंने हमारी 'विविधता' (Diversity) को हमारी 'कमजोरी' बना दिया।

सच्चाई यह है कि 1901 के उस 'रिजली गजट' (Risley's Gazette) ने समाज के उस धागे को तोड़ दिया जो 'गुण और कर्म' के आधार पर सबको जोड़ता था। आज जब हम आरक्षण, राजनीति और जातिगत द्वेष की बात करते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि ये घाव उसी 'औपनिवेशिक मानसिकता' (Colonial Mindset) की देन हैं। अंग्रेज तो चले गए, लेकिन वे हमारे हाथ में एक ऐसा 'आईना' दे गए जिसमें हम अपनी असलियत नहीं, बल्कि उनकी दी हुई 'पहचान' देखते हैं। अब वक्त आ गया है कि हम उस 'ब्रिटिश रजिस्टर' को फाड़ फेंकें और अपनी उस मूल जड़ की ओर लौटें जहाँ मनुष्य का मूल्य उसके 'नाम' से नहीं, उसके 'काम' से तय होता था।

"अंग्रेजों ने भारत को 'नक्शे' पर नहीं बांटा था, उन्होंने भारत को 'नामों' और 'नंबरों' की कटीली तारों में उलझा दिया था।"

"अंग्रेजों ने हमारी 'मिट्टी' नहीं बांटी थी, उन्होंने हमारी 'पहचान' को किस्तों में बेच दिया था।"

अब सोचिएगा जाति वेद ने बनाई ? या मनुस्मृति ने बनाई...... ?

आज का प्रसारण यहीं समाप्त हुआ....। अगली कड़ी जल्द.

🔴

: 🛑

PART -10 ताजमहल नहीं, तेजोमहालय एक शिव मंदिर है।

🔥 ताजमहल… प्रेम की निशानी या कुछ और?

जयपुर राजघराने की दीया कुमारी का दावा, ताजमहल तो हमारा पैलेस था, जरूरत पड़ी तो सबूत भी दूंगी

राजस्थान के बड़े राजघरानों में से एक जयपुर के पूर्व राजघराने की राजकुमारी और राजस्थान उपमुख्यमंत्री भाजपा की पूर्व सांसद दीया कुमारी ने दावा किया कि ताजमहल तो उनके पुरखों की विरासत है, जिस पर तत्कालीन मुगल शासक शाहजहां ने कब्जा कर लिया था। 

महारानी दीया कुमारी ने कहा कि ताजमहल असल में हमारे पुरखों का महल था, जिस पर शाहजहां ने कब्जा कर लिया था। उन्होंने कहा कि उस समय मुगलों की सरकार थी, कोई विरोध भी नहीं कर सकता था। उस समय ऐसा कोई कानून भी नहीं था कि इस नाजायज कब्जे के खिलाफ कोई अपील की जा सके। आज भी सरकार यदि किसी की जमीन का अधिग्रहण करती है तो उसका मुआवजा देती है। 

 

पोथीखाने में मौजूद हैं सबूत : मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे ट्रस्ट में पोथीखाना है। वहां ताजमहल की जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज मौजूद हैं। आवश्यकता होने पर हम उन दस्तावेजों को कोर्ट के समक्ष भी पेश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छी बात है कि किसी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है। दीया कुमारी ने ताज के बंद हिस्से को खोलने की भी मांग की है।

यह 66 से 72 तक के पॉइंट पढ़कर आपका नजरिया बदल सकता है, कितनी गजब की मनगढ़ंत फेकलोजी की गई है…

👉 सच क्या है ये आप खुद तय करें

👉 लेकिन इतना जरूर है — ये पढ़कर आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे क्यों ताजमहल के साक्ष्यों को हमेशा से ही छिपाया जाता रहा है ? 😳

---

🚨 ताजमहल का सच या छुपी कहानी? 🚨

👇 खुद पढ़िए और फैसला कीजिए 👇

🔥 66. ताजमहल के बगीचे में पवित्र हिंदू पुष्प और वृक्ष 

ऐसा विवरण मिलता है कि ताजमहल उर्फ तेजोमहालय के बगीचे में केतकी, जाई, जुई, चम्पा, मौलश्री, हरशृंगार और बेल आदि हिन्दू महत्व के वृक्ष थे। हालांकि इनके फल, फूल तथा पत्ते हिन्दु पूजा विधि में प्रयोग किये जाते हैं। इससे भी सिद्ध होता है कि तेजोमहालय मूलत: हिन्दू मंदिर - महल था। 

यदि ताजमहल कब्रस्थान के निमित बना होता तो उसमें हिन्दू धार्मिक महत्व के पौधे नहीं होते। क्योंकि कब्रस्तान में लगे या पनपे पौधों के फल, फूल आदि का सेवन पसन्द नहीं किया जाता। और यदि वे पौधे शाहजहाँ की आज्ञा से लगवाए गए थे तो बाद में भी लगाए जाते रहे होते। ये सभी पौधे शीघ्र वहाँ से समाप्त होते गए और कुछ ही समय बाद के उद्यान में उस प्रकार के पौधों का कोई चिन्ह नहीं रहा क्योंकि शाहजहाँ ने बाद में हिन्दू मन्दिरों से सम्बन्धित सभी चिन्ह जो सम्भव थे उखड़वाए।

🔥 67. यमुना नदी के किनारे मंदिर निर्माण होता था।

हिन्दु श्मशान के समीप मृत मुमताज़ की कब्र नदी के किनारे बनाने की आवश्यकता नहीं थी। नदियों के किनारे महल या हिन्दू मन्दिर बनाने की प्रथा अति प्राचीन है जहां पानी का बहुत प्रयोग होता है । उसी के अनुसार तेजोमहालय यमुना के किनारे बना है। नदियों से खाई की तरह इमारत की सुरक्षा भी बनी रहती है।

यमुना का पवित्र जल भगवान शिव के जलाभिषेक में प्रयुक्त होता है, न कि किसी मुर्दे के ऊपर।

🔥 68.इस्लामी प्रथा में मृतक की कब्र उठाना और कब्र की पूजा आदि करना वर्जित है। मृतक को दफनाकर भूमि इस प्रकार समतल कर देना कि दफन का कोई चिन्ह ही न रहे। ऐसा मूलत: इस्लाम का आदेश है ।

विविध सुल्तान, बादशाह, बेगम, नाई, धोबी, भिस्ती, चिस्ती आदि की शानदार कब्रें और उन पर मचने वाला हल्ला-गुल्ला इस्लामी नियमों का उल्लंघन है। जिन विशाल भवनों में शेरशाह, हुमायूँ, अकबर, जहाँगीर, मुमताज, दिलरसबानु बेगम आदि दफनाई गई हैं वे सारे हड़प किये गये विशाल हिन्दू महल हैं। 

ताजमहल में तहखाने तथा ऊपर के मुख्य मंजिले होने से ऊपर-नीचे एक ही व्यक्ति के नाम दो-दो कब्रें बनी हैं। 

जहाँ एक भी कब्र वर्जित है वहाँ प्रत्येक मृत की दो-दो कब्रें

बनाना सर्वथा असम्भव हैं। 

शिव मंदिरों में दो स्तरों पर दो शिवलिंग

होते हैं। उन दोनों को दबाने के लिए भी दो स्तरों पर एक ही मृतक

की दो-दो कब्रें बनी हैं। उज्जैन के महाकालेश्वर तथा सोमनाथ के

अहल्याबाई होलकर द्वारा बनाये गये मंदिर में दो स्तरों पर दो

शिवलिंग बने हैं। तेजोमहालय उर्फ ताजमहल में भी उसी प्रकार दो स्तरों पर दो शिवलिंग थे। उन्हें छुपाने के लिए ताजमहल के दो मंजिलों में मुमताज़ के नाम की दो कब्रें बनी हैं। हो सकता है कि मुमताज़ का शव बुरहानपुर में ही हो और ताजमहल वाली कब्रों में अग्रेश्वर महादेव के दो शिवलिंग ही दबे पड़े हों ।

 

🔥 69. ताजमहल के चारों ओर के मेहराबदार प्रवेशद्वार पूर्णत: समरूप हैं।

इस प्रकार की रूपरेखा को वैदिक स्थापत्य में चतुर्मुखी कहा जाता है। जैसे ब्रह्माजी के चार मुख होते हैं।

🔥 70. ताजमहल के गुंबद की हिंदू वैशिष्ट्य में निर्मित होना।

ताजमहल के गुम्बद में आवाज प्रतिध्वनित करने का गुण है। कब्र में शान्ति और मौनता के स्थान पर इस प्रकार के गुम्बद का होना बेतुकापन है। इसके विपरीत हिन्दू मंदिरों के गुम्बदों में प्रतिध्वनित करने का गुण होना आवश्यक है क्योंकि हिन्दू-देवताओं की पूजा या आरती करते समय शंखों, घंटालों एवं मृदंगों की प्रतिध्वनित एवं वर्धित ध्वनि से तांडव के अनुकूल नादब्रह्म निर्माण होता है।

🔥71. ताजमहल के गुम्बद के शिखर पर कमल चिन्ह बना हुआ है जो हिन्दू लक्षण है । इस्लामी गुम्बद गंजा होता है। जैसे दिल्ली के चाणक्यपुरी में बने इस्लामी दूतावास के गुम्बद। उस गुम्बद के कटिभाग में जो मेखला बनाई गई है वह भी कमलपटलों की है। 

इस प्रकार गुम्बद का पद्मासन भी हिन्दू लक्षण है, क्योंकि हस्तकमल, चरण कमल, नेत्रकमल आदि वैदिक परिभाषा ही हैं ।

🔥72.ताजमहल का प्रवेश द्वार दक्षिणाभिमुख है जब कि यदि वह मूलत: कब्र होती तो उसका द्वार पश्चिम की ओर होना चाहिए था। मुमताज़ यदि सचमुच ताजमहल में दफनाई गई होती तो उसकी आत्मा वहाँ पश्चिम द्वार न होने से वहीं तड़पती रहती है क्या ?

सोचने वाली बात है 🤔

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

📢 जरूर बताए

इतिहास की सच्चाई क्या है- यह जानना जरूरी है 🔥

आप कमेंट में बताए - आप क्या मानते हो, हिंदुओं का शिवालय है या आक्रमणकारियों का ताजमहल ?

---

#TajMahalTruth #HistoryFacts #IndianHistory #HiddenHistory #RealHistory #TajMahalMystery #FactCheck #HistoryDebate #ViralPost #India

#tajmahal #shivmandir #IndianHistory #HiddenTruths #FactsVsMyths #viralindia 

#We_support_hindutava_unity 

अगले भाग-11 में हम आपको उपलब्ध करवाएंगे ताजमहल के बारे में कितना गुमराह किया गया है, 

मुर्दों का टीला कब्र कहलाती है न कि भवन और भी बहुत सारे तर्क देखिए......seemore

: 100% सत्य वचन अशोक जी..

पहला बयान 

पत्रकार अरफा खानम शेरवानी ने कहा —“अमेरिका को हराने के बाद

ईरान अब दुनिया का विश्व गुरु बन गया है” 

इसके बाद आया जवाब DD News के एडिटर अशोक श्रीवास्तव बोले —“किसी के लिए ईरान,किसी के लिए पाकिस्तान विश्वगुरु है” 

और सबसे तीखा वार…“नफरत सिर्फ भारत से है!” 

मतलब साफ है…उस सोच पर सीधा हमला

क्योंकि जब बार-बार दूसरे देशों की तारीफ हो…

और अपने देश पर सवाल उठाते हैं …

तो जनता तो पूछेगी ही ..

क्या ये सिर्फ विचार है?

या फिर एक खास नैरेटिव चल रहा है? 

क्योंकि देश के मुद्दों पर रुख ही असली पहचान बनाता है!

: 🛑पाकिस्तान सोशल मीडिया पर सारे देशो का राघव चड्ढा है, मेटा एड्स रन करके इतने दिमागो को अपनी ओर कैसे करना है इसमें उसे दुनिया के हर देश पर बढ़त है। झूठी खबर फैलानी हो या कोई प्रोपोगंडा परोसना हो पाकिस्तान उसमे चैंपियन है।

मध्यस्थता करनासtग बाते है, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का ट्वीट व्हाइट हॉउस लिखकर भेज रहा है। पाकिस्तान को खुद नहीं पता कि लेबनान शांति समझौते मे है या नहीं, प्रधानमंत्री हाँ बोल रहा है मगर इस्लामाबाद मे लेबनान का कोई व्यक्ति नहीं गया। इजरायल जो कि प्रमुख खिलाडी है वो भी समझौते मे नहीं है।

मध्यस्थता का सबसे बड़ा उदाहरण सोवियत संघ है, जिसने 1965 मे ताशकन्द समझौते के लिए बुलाया। सारी शर्ते सोवियत की रखी हुई थी, लाल बहादुर शास्त्री कोtतो वे भी ठिकाने लगा दिये गए। ये होता है प्रभुत्व और वर्चस्व, अमेरिका और ईरान मे आखिर लड़ाई क्या है?

क्या ये जमीन के टुकड़े के लिए लड़ रहे है? क्या ये किसी भौतिक वस्तु के लिए लड़ रहे है? ये सिर्फ अमेरिका के मिडिल ईस्ट मे प्रभुत्व की लड़ाई है, ईरान परमाणु बम बनायेगा या नहीं। बनाया तो अमेरिका की हार नहीं बनाया तो ईरान की हार, बस इन दो शर्तों मे इस युद्ध का आउटपुट है। 

मध्यस्थता की परिभाषा क्या है? पाकिस्तान शांति की शर्ते रखे और अमेरिका ईरान उसे माने, तब आप कह सकते है कि ये सोशल मीडिया पर जो गंध फ़ैल रही है वो सही है कि पाकिस्तान सुपर पॉवर बन गया।

लेकिन यहाँ तो ट्वीट तक अमेरिका लिखकर दे रहा है, बात एकदम सीधी है अमेरिका और ईरान दोनों को अकड़ है कि पहले हम नहीं बोलेंगे। ऐसे मे एक ब्रोकर बीच मे बैठाया गया और ब्रोकर को ही साधारण भाषा मे दलाल बोलते है।

6 अरब डॉलर के फोरेक्स रिज़र्व वाले और पिछले ही साल भारत के हाथों कूटे पाकिस्तान की इतनी हैसियत ही नहीं कि शांति वार्ता करा सके। अमेरिका और ईरान ने आपसी समझ से ये जगह चुनी, भारत ने बिल्कुल सही किया कि फटे मे पैर नहीं उलझाया। 

यदि ये भारत की कमजोर विदेश नीति थी भी तो क्या डेनमार्क, बेलजियम और स्विट्ज़रलैंड की भी कमजोर है। ये देश तो शांति समझौतो की राजधानी माने जाते है लेकिन वास्तविकता ये है कि वर्चस्व की लड़ाई मे समझौते नहीं सौदे होते है जो दलाल ही करा सकते है जीवंत राष्ट्र नहीं।

✍️परख सक्सेना

: 🛑एक कंपनी मालिक की बेटी को एक मुस्लिम लड़के से प्यार हो गया...

वह उस लड़के के प्यार में पूरी तरह पागल थी और उसने अपने माता-पिता की इच्छा के खिलाफ जाने का फैसला किया।

बेबस महसूस करते हुए, उसके माता-पिता ने एक दोस्त से सलाह मांगी।

इसके बाद, उस दोस्त का परिवार और उनका परिवार, दोनों मिलकर एक पिकनिक पर गए।

पिकनिक के दौरान, दोस्त ने यह साफ कर दिया कि वह लड़की के पक्ष में है।

उसने कहा कि सभी धर्म बराबर होते हैं और माता-पिता को इस शादी की इजाज़त दे देनी चाहिए।

नतीजतन, लड़की उस दोस्त को अपना सबसे बड़ा सहारा मानने लगी।

इस बीच, लड़के के फोन बीच-बीच में आते रहे।

दोस्त लड़की को एक तरफ ले गई, उसे मराठी में अनुवादित एक किताब दी, और कहा, "तुम एक मुस्लिम लड़के से शादी करने जा रही हो, इसलिए तुम्हें उसके कल्चर (संस्कृति) के बारे में पता होना चाहिए।"

किताब का नाम था: *Not Without My Daughter* (मराठी अनुवाद)

लड़की ने रात 11:30 बजे किताब पढ़ना शुरू किया, और कुछ ही मिनटों के अंदर, वह अपनी दोस्त के बेडरूम का दरवाज़ा खटखटा रही थी।

उसकी आँखों में आँसू भरे थे। उसने कहा, "यह बहुत डरावना है; मैं उससे शादी नहीं करूँगी।"

लेकिन, दोस्त ने अपना रुख नहीं बदला। उसने लड़की को समझाया, "भले ही धर्म ऐसा हो, लेकिन क्या तुम्हारा प्यार सच्चा है?"

"अगर हाँ, तो चलो ऐसा करते हैं: उससे कहो कि वह हिंदू धर्म अपना ले, और हम तुम्हारी शादी करवा देंगे। मैं तुम्हारे पिता को मना लूँगी।"

लड़की को यह विचार पसंद आया और उसने तुरंत लड़के को फोन करके यह सारी बात बताई।

इस पर, लड़के ने पलटकर जवाब दिया, "तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि मैं तुम्हारे जैसी 'दो-टक्के की वेश्या' के लिए अपना धर्म बदल लूँगा?"

उसके शब्द लड़की के कानों में ऐसे चुभे, मानो किसी ने उसके कानों में पिघला हुआ सीसा डाल दिया हो।

उसे—बेहद कड़वी सच्चाई के साथ—यह एहसास हुआ कि जिस लड़के से वह अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करती थी, और जिसके लिए उसने अपने माता-पिता तक की बात नहीं मानी थी, उसकी नज़रों में उसकी असली कीमत क्या थी।

इसके बाद, उसने शादी करने से साफ इनकार कर दिया। मुख्य किताबों की सूची:

The Kingdom Behind the Burqa – कारमेन बिन लादेन

From Tehran Prison – मरीना नेमत

Infidel and Nomad – अयान हिरसी अली

Blasphemy – तहमीना दुर्रानी

Not Without My Daughter – बेट्टी महमूद

Lajja – तसलीमा नसरीन

The Last Girl – नादिया मुराद

ये किताबें हर हाल में पढ़ी जानी चाहिए। खासकर, धर्मनिरपेक्ष लोगों को इन किताबों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें असलियत का पता चल सके।

ये सभी आत्मकथाएँ और सच्ची कहानियाँ हैं।

: नेपाल के नए प्रधानमंत्री का बयान दिल जीत लेने वाला है🇮🇳🙏🏻🇮🇳

उन्होंने अपनी जनसभा में कहा कि भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है, जिसके साथ नेपाल का "रोटी-बेटी" का अटूट रिश्ता है।🇮🇳🇮🇳🙏🏻🇮🇳

यह सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि सदियों पुरानी संस्कृति, परंपरा और आपसी भरोसे की सच्ची तस्वीर है।

उन्होंने यह भी साफ किया कि नेपाल को अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए भारत के साथ दोस्ती, व्यापार और सहयोग को और आगे बढ़ाना होगा।

यानी साफ है-दोस्ती भी मजबूत होगी और विकास भी तेज होगा

🇮🇳🙏🏻🇮🇳

- आज के दौर में जहां कई देश रिश्तों में दूरी बना रहे हैं, वहीं नेपाल का यह सोच एक

सकारात्मक संदेश देता है कि

पड़ोसी मजबूत होंगे तो क्षेत्र भी मजबूत होगा।

रिश्ते सिर्फ सीमा से नहीं, दिल से बनते हैं... और भारत-नेपाल का रिश्ता इसका सबसे बड़ा

उदाहरण है।

: महान गणितज्ञ एवं खगोल शास्त्री आर्यभट्ट जी की जयंती पर शत-शत नमन

आज हम उस महान विभूति को स्मरण करते हैं, जिन्होंने अपने ज्ञान और शोध से पूरे विश्व को नई दिशा दी। आर्यभट्ट जी ने गणित और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में जो अद्वितीय योगदान दिया, वह आज भी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

शून्य की अवधारणा को आगे बढ़ाने से लेकर ग्रहों की गति और पृथ्वी के घूर्णन के सिद्धांत तक, उनके विचार उस समय में भी क्रांतिकारी थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने ज्ञान से यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची प्रतिभा किसी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती।

उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि ज्ञान, परिश्रम और समर्पण से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। आज की युवा पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।

ईश्वर से प्रार्थना है कि हम सभी को उनके बताए मार्ग पर चलने की बुद्धि और शक्ति प्रदान करें।

कोटि-कोटि नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि 🙏

: 🌍 क्या कोलंबस से पहले ही भारतीयों ने खोज लिया था अमेरिका? महाभारत काल की हैरान करने वाली 'ग्लोबल कनेक्टिविटी'! ✈️

हमेशा से बताया जाता है कि अमेरिका की खोज कोलंबस ने की, लेकिन हमारे प्राचीन ग्रंथों और महाभारत की कथाओं पर नज़र डालें तो एक अलग ही तस्वीर सामने आती है। क्या वाकई प्राचीन काल में भारत पूरी दुनिया से जुड़ा हुआ था? आइए जानते हैं कुछ बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले दावे: 🤯

✨ मय दानव और माया सभ्यता (Mayan Civilization):

पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ का निर्माण करने वाले 'मय दानव' को ही कई लोग मध्य अमेरिका की प्रसिद्ध 'माया सभ्यता' का जनक मानते हैं! कहा जाता है कि उनके प्राचीन ग्रंथ 'पोपोल वूह' और हमारे वेदों में देवासुर संग्राम जैसी कई समानताएं हैं।

✨ नामों का अद्भुत संयोग: क्या आप जानते हैं कि कुछ मान्यताओं के अनुसार 'कनाडा' का नाम महर्षि कणाद के नाम पर और 'अर्जेंटीना' का नाम 'अर्जुन-स्थान' से प्रेरित माना जाता है?

✨ विमान और पनडुब्बी का ज़िक्र:

ऋग्वेद में सात पहियों वाले रथ और समुद्र के अंदर चलने वाली नौकाओं (पनडुब्बियों) का उल्लेख मिलता है। यहां तक कि पुराणों में शुकदेव जी के हवाई मार्ग से अमेरिका (पाताल लोक) से यूरोप होते हुए मिथिला आने का रोचक वर्णन भी है!

✨ ग्लोबल ट्रेड और 200 से अधिक जनपद:

महाभारत काल में अखंड भारत में 200 से अधिक जनपद थे। शक, हूण, यवन और म्लेच्छ जातियों के साथ संपर्क के अलावा रोम, मिस्र और अरब देशों के साथ प्राचीन भारतीयों के गहरे व्यापारिक संबंध थे।

📜 इतिहास या शानदार पौराणिक कल्पना?

यद्यपि आधुनिक इतिहासकार और भाषाविज्ञानी (Linguists) मानते हैं कि 'कनाडा' (इरोक्वियन शब्द 'कनाटा') और 'अर्जेंटीना' (लैटिन शब्द 'अर्जेंटम') के नामकरण के पीछे हमारे संस्कृत शब्दों का नहीं, बल्कि स्थानीय भाषाओं का प्रभाव है। इन बातों को ऐतिहासिक तथ्य के बजाय 'भाषाई संयोग' माना जाता है।

लेकिन, इन सबके बावजूद, एक बात तो तय है—हमारे पूर्वजों की भौगोलिक सोच, समुद्री व्यापार का ज्ञान और वैश्विक कल्पना इतनी विशाल थी कि वह आज भी हमें हैरत में डाल देती है! प्राचीन भारत वास्तव में एक ग्लोबल सुपरपॉवर था। 🇮🇳✨

: इस मोनालिसा का विषय गंभीर है.. ऊपर से मजाक चाहे जितना बना लो.. 

आखिर ये लड़की गयी कहाँ... सब एक बहुत बड़ी साजिश के चलते हो रहा है.. 

इसे महाकुंभ से उठाकर लोगो के बीच पहुंचाया सनोज मिश्रा ने.. इस पर लाखों पर पैसे खर्च किये, पढ़ाया, बैठना उठना, पहनने का सलीका सिखाया..

फिर उसी सनोज मिश्र पर इसने यौन शोषण के आरोप मढ़े.. फिर अचानक से किसी फरमान खान से शादी करके रातों रात मीडिया की सुर्खी बन जाती है.. 

यूपी बागपत का मूल निवासी फरमान, महाराष्ट्र मे मॉडलिंग करने वाला फरमान केरल में जाकर मोनालिसा से शादी करता है.. 

आखिर केरल क्यों.. ?? 

और उनकी शादी में बड़े बड़े लोग शामिल होते है केरल के..आखिर क्यों..?

मुझे एक वजह नजर आती है...❤ जिहाद के कोंसेप्ट को झूठा करार देने के लिए.. 

फिर कहानी मे नया मोड आता है कि मोनालिसा नाबालिग है और फरमान पर लगेगा POCSO एक्ट.. 

और अब चार दिन पहले वो लड़की भाग चुकी है.. और फरमान उसे राजस्थान में ढूंढ रहा है.. 

वो भागी है या भगाया गया है ये अब तक पता नहीं चला.. और इस लड़की का बचना बहुत जरूरी है..क्योंकि उसमें उतनी अक्ल है ही नहीं कि वो लंबे समय तक झूठ बोल सके.. 

आखिर इस षड्यंत्र का असली मकसद है क्या,ये वही बता सकती है..

🔴

: अधिक नहीं बस पांच साल पीछे चलते हैं तो पता चलेगा कि विज्ञापन जिहाद कैसे कॉर्पोरेट जिहाद में बदलता रहा और टाटा इस जिहाद की अग्रणी बन गईं।

तनिष्क (Tanishq) ज्वेलरी का यह विवादित विज्ञापन अक्टूबर 2020 में उनके 'एकत्वम' (Ekatvam) कलेक्शन के प्रचार के लिए जारी किया गया था। 

विज्ञापन की कहानी और विवाद का मुख्य कारण

कहानी: इस 45 सेकंड के विज्ञापन में एक हिंदू गर्भवती महिला की 'गोदभराई' (Baby Shower) की रस्म दिखाई गई थी, जिसे उसके मुस्लिम ससुराल वाले पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार मना रहे थे।

संवाद: विज्ञापन के अंत में बहू अपनी सास से पूछती है, "यह रस्म तो आपके घर में होती भी नहीं है, है न?" जिस पर सास जवाब देती है, "बिटिया को खुश रखने की रस्म तो हर घर में होती है न?"।

आरोप: सोशल मीडिया के एक वर्ग ने इस विज्ञापन पर 'लव जिहाद' को बढ़ावा देने और हिंदू धर्म की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया। आलोचकों का तर्क था कि विज्ञापन एकतरफा है और केवल हिंदू बहू को मुस्लिम परिवार में ही खुश दिखाया जाता है। 

विवाद का परिणाम

बहिष्कार का अभियान: ट्विटर पर #BoycottTanishq ट्रेंड करने लगा और कंपनी को भारी आलोचना का सामना करना पड़ा।

विज्ञापन वापस लिया: भारी विरोध और कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए तनिष्क ने इस विज्ञापन को हटा लिया।

कंपनी का बयान: TATA के ब्रांड तनिष्क ने आधिकारिक बयान में कहा कि विज्ञापन का उद्देश्य केवल विविधता में एकता का जश्न मनाना था, लेकिन लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचने के कारण वे इसे वापस ले रहे है ।

इस मुद्दे पर जनता की राय बंटी हुई थी; जहाँ कुछ लोगों ने इसे सामाजिक सद्भाव का प्रतीक माना, वहीं अन्य ने इसे हिंदू विरोधी बताया।

जिहाद तब से ही चल रहा था....पूरा खुल कर अब सामने आया है।

#TCS #TATA #Tanishk

🔴

: सबसे ज्यादा #अम्बेडकर जी की मूर्तियां सपा सरकार में तोड़ी गयी, 

सबसे ज्यादा दलितों का उत्पीड़न सपा सरकार में हुआ  

🔵 समाजवाद हार गया, अंबेडकरवाद जीत गया

• 🔹 अखिलेश भैया को भी मालूम है कि अब मुलायम यादव के नाम पर वोट नहीं मिलने वाला, इसलिए समाजवाद का गोबर पाथना छोड़कर अब अंबेडकरवाद का चोला ओढ़ लिया है।

• 🔹 जवानी में गलती वाले यही अखिलेश भैया कहते थे कि अंबेडकर पार्क में पत्थर की मूर्तियाँ लगी हैं, इसे शादी के लिए मैरिज हॉल में बदल दूँगा।

• 🔹 यही अखिलेश भैया #कांशीराम जी और बहुजन आंदोलन की आलोचना करते हुए कहते थे कि उत्तर प्रदेश का सारा पैसा अंबेडकर की मूर्तियों पर फूँका जा रहा है। अंबेडकर की मूर्तियों से कौन सा समाज का भला होगा ।

• 🔹 उनके पिताजी कहा करते थे कि अंबेडकर पार्क अय्याशी का अड्डा है, और आज वही लोग जय भीम बोलने को मजबूर हो गए।

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

🔻 ताज़ा मामला – ग्राउंड रियलिटी

• 🚨 गोरखपुर में एक पुलिसकर्मी अवधेश यादव डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर का पोस्ट फाड़ते हुए पकड़ा गया।

• 🚨 आजमगढ़ में विपिन यादव डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर का झंडा व पोस्टर जलाते हुए पकड़ा गया।

• ⚠️ इनके चाचा शिवपाल यादव जी मान्यवर कांशीराम पर चारित्रिक हनन जैसी टिप्पणियाँ किया करते थे।

• ⚠️ यही अखिलेश यादव जी ,आज़म खान को आगे करके डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर जी के खिलाफ अपमानजनक बयान दिलवाते थे — आज़म खान ने कहा था “डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर भूमिया था।”

• 🔎 आज वही लोग अंबेडकरवादी बनने का दावा कर रहे हैं, जबकि ग्राउंड रियलिटी अलग दिखाई देती है।

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

⚠️ #दलित और बहुजन भाइयों सावधान रहना

• 📊 तुम्हारी आबादी 20% है — तुम बड़े भाई हो।

• 📉 इनकी आबादी कमरिया २ % है — ये छोटे भाई हैं।

• 🎯 ये 20% वालों को मामू बनाकर खुद #मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं।

🔻 राजनीतिक चाल को समझिए

• ⚠️ जिस तरह मुसलमानों को मोहरा बनाकर मुख्यमंत्री बनते रहे हैं, उसी तरह दलितों को भी मुसलमान की तरह गुमराह करके #PDA के भ्रमजाल में मुख्यमंत्री बनने की कोशिश की जा रही है।

• 🧠 दलित समाज को भ्रमित करके राजनीतिक फायदा लेने की रणनीति बनाई जा रही है।

🔴 संदेश दलित भाइयों के लिए

• ✊ एकजुट रहना है और राजनीतिक चाल को पहचानना है।

• 🛑 2 फीसदी वालों को 2027 में भैंस चराने वापस भेजना है।

• 📢 अपने समाज को जागरूक करना है, गुमराह नहीं होने देना है।

• 🔵 अपने वोट की ताकत को समझकर सही फैसला लेना है।

दलित हमेशा से योद्धा रहे है इन्होंने कभी मुगलों के आगे सर नहीं झुकाया 

#AmbedkarJayanti #BSP #बहुजन_युवा_साथी #AmbedkarJayanti2026 #AmbedkarForever #AmbedkariteYouth #BhimJayanthi #AmbedkarMission

: आगरा में अंबेडकर जयंती पर रैली निकल रही थी। परशुराम चौराहा दिखा। लोगों को जोश आ गया। चौराहे पर बने जगह पर चढ़ गए। आगर पुलिस का कहना है कि कोई तोड़ फोड़ नहीं हुई।

हाँ ये सच है कि वहाँ मूर्ति नहीं है। ये भी सच है कि कोई तोड़ फोड़ भी नहीं हुखीt कि वहाँ सब कुछ यथावत है।

लेकिन जिस जगह पर ये चढ़ रहे हैं वहाँ स्पष्ट लिखा हुआ है:- “भगवान परशुराम”। स्वस्तिक का चिह्न बना हुआ है। क्या यहाँ जूता-चप्पल पहनकर चढ़ना और झंडा लहराना उचित था? बस पूछ रहे हैं! स्थानीय लोगों ने नाराजगी दर्ज करवाई है।

#Agranews #shubhamshukla #UPNews

: भीमटावादी अब शांतिदूत का स्थान ले रहे हैं।

आरक्षण हजम नहीं हो रहा है।

मध्य प्रदेश के सीधी (अमिलिया इलाके) का डरावना नज़ारा: मंगलवार को अंबेडकर जयंती का जुलूस हिंसक हो गया, जब करीब 200 लोगों की भीड़ ने, जिनमें से कई ने नीले स्कार्फ़ पहने थे और भीम आर्मी से जुड़े थे, लोकल लोगों और पुलिस पर पत्थर फेंके।

अफ़सरों समेत कम से कम 14 लोग घायल हो गए। बाद में भीड़ ने अमिलिया पुलिस स्टेशन पर धावा बोल दिया और तोड़फोड़ की। भारी पुलिस बल तैनात किया गया; हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। जांच चल रही है।

 पर ये पत्थर क्यों फेंके ।🙈

#AmbedkarJayanti

: अंबेडकर के अनुयायियों ने अब लखीमपुर खीरी में मचाया उत्पात

15 से ज्यादा पुलिस कर्मी घायल, अधिकारियों की भी गाड़िया तोड दी गई है, यह सीधा इस्लामिक जिहाद से जुडा मामला है, मुल्लो को कंट्रोल मे कर दीया गया तो यह काम नीले अंडो को सोपा गया है...! 

कड़ी से कड़ी कारवाही जरूर होगी 

#AmbedkarJayanti

: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तराखंड के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। आने वाले समय में हाईवे और एक्सप्रेसवे का विशाल नेटवर्क राज्य की तस्वीर बदलने वाला है।

🚀 गडकरी बोले — ये सिर्फ सड़कें नहीं, बल्कि विकास, रोजगार और पर्यटन को नई रफ्तार देने वाले प्रोजेक्ट हैं।

🛣️ दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे

👉 लागत: ₹12,000 करोड़

👉 लंबाई: 213 किमी, 6-लेन ग्रीनफील्ड

👉 12 किमी एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर

📊 अब तक का काम

👉 ₹1.30 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट दिए

👉 ₹25,000 करोड़ की लागत से 2461 किमी सड़कें पूरी

👉 ₹35,000 करोड़ के प्रोजेक्ट निर्माणाधीन

👉 ₹80,000 करोड़ के प्रोजेक्ट पाइपलाइन में

🔹 2026 तक पूरे होने वाले प्रोजेक्ट

•सहारनपुर–हरिद्वार 6 लेन रोड (51 किमी) – जून 2026

•पांवटा साहिब–देहरादून–बल्लूपुर 4 लेन – मई 2026

•हरिद्वार बाइपास फेज 1 – अक्टूबर 2026

•रुद्रपुर बाइपास (21 किमी) – अक्टूबर 2026

•काशीपुर बाइपास (15 किमी) – दिसंबर 2026

•जोशीमठ–मलारी रोड – दिसंबर 2026

🔹 शुरू होने वाले प्रोजेक्ट

•ऋषिकेश बाइपास – अगस्त 2026 से काम शुरू

•देहरादून बाइपास (नई एलाइनमेंट) – मई 2026 से DPR कार्य

•हरिद्वार बाइपास फेज 2 – 2026 में शुरुआत

🔹 आगे के प्रोजेक्ट

•देहरादून–आशारोड़ी एलिवेटेड रोड – अप्रैल 2027

•मलीहाबाद–जौलीग्रांट–ऋषिकेश रोड – अप्रैल 2028

📍 खास बात

👉 देहरादून बाइपास और मसूरी के लिए नया एलाइनमेंट भी प्लान

👉 हरिद्वार बाइपास फेज 2 भी जल्द शुरू

📢 इन प्रोजेक्ट्स से ट्रैफिक जाम कम होगा, यात्रा आसान होगी और पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।

#Uttarakhand #NitinGadkari #Infrastructure #Highway #Development #Expressway #IndiaGrowth

 am] +tरान से बातचीत विफल होने के बाद JD Vance पाकिt तुरंt देश विरोधी ईको सिस्टम भी अगर अब चाहे तो अपने घुंघरू उतार सकता है।

पाकिस्तान के विषगुरु बनने की खुशी में नाचते नाचते थक गया होगा।

शहबाज शरीफ ने 'शांति' के कबूतर तो ऐसे उड़ाए जैसे समझौता जेब में रखा हो!

​बेनतीजा 21 घंटे की मीटिंग के बाद जेडी वेंस तो अमेरिका लौट गए, पर पाकिस्तान के हिस्से क्या आया?

सिर्फ 'बर्तन धोने' का काम और मेहमानों की चाय का बिल!

मल्ल्ब लग गए , मने L L L

इस्लामाबाद पीस टॉक के

कोई समझौता नही , कोई अंडरस्टैंडिंग नही , न ही आगे फिर से मिलने की कोई बात

सब खा पी कर निकल लिए अपने अपने घर

पीछे बैठा मुनीर जूठे भांडे रगड़ रहा है ओर शाहबाज आटे तेल मसाले का उधारी का बिल लिए बैठा हे अपना सर पकड़े ।

जो कह रहे थे सुअरों को बड़ा विश्वगुरु बन गया और मोदी को कोई पूछ नही रहा उन पुतियो के सिवाय सब जानते थे कि यही होना है।

सुनो रे झंडुओ

जब तक मोदी इसमें नही होगा तब तक अमेरिका मिडिल ईस्ट ओर इजराइल में शांति भी नही होगी ये लिख लो

ओर मोदी इसमें कब होगा ये मोदी तय करेगा न कि कोई x पर ट्वीट ड्राफ्ट कर के तय करेगा ।

ये कांग्रेज़ का भारत नही बल्कि मोदी का नया भारत है

जहां भारत उस ऊंचाई पर खड़ा है की अब दुनिया मे भारत को इग्नोर कर न तो युध्द लड़े जा सकते है ओर न ही कोई शांति समझौता होगा ।

जिओ पॉलिटिक्स की जरा भी समझ होती तो एक सुअर की चाटुकारिता को कूटनीति बोल कर उसे बाप न बनाते ।

यही होता है जब मध्यस्थता किसी क्रेडिबल देश ने नहीं बल्कि दला/ल देश ने की होती है क्योंकि उसकी बात की कोई वैल्यू नहीं होती।

अब बताइये कि भारत का इस ड्रामे से दूर रहना सही है कि नहीं।

जब तक इजराइल का आकार न बढ़ेगा तब तक ये युध्द न रुकेगा

ये बात मोदी युध्द शुरू होने के पहले से जानता है

ओर हमे इसकी समझ है

तुम पहले भी चुकिये थे

तुम आज भी चुकिया ही हो

इधर अशांत पाकिस्तान में शांति वार्ता चली जिसके नतीजे nil/ सन्नाटा रहे उधर इजराइल लेबनान के हिजबुल्लाहों को हुरीफाई करता रहा *(PC- CA Rajiv Chandak)*

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला