गोपालगंज में इंटरनेशनल भोजपुरी कन्वेंशन, नगर परिक्रमा निकाली गई:भाषा की गरिमा बचाने और समृद्धि के लिए सामूहिक संकल्प
गोपालगंज में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी अधिवेशन का समापन 'नगर परिक्रमा' के साथ हुआ। इस दौरान पारंपरिक वेशभूषा में भोजपुरी से जुड़े सदस्यों ने शहर के विभिन्न मार्गों का भ्रमण किया। अधिवेशन में भोजपुरी भाषा की गरिमा बचाने और इसकी समृद्धि के लिए लोगों से अपील की गई, साथ ही अपनी जड़ों की ओर लौटने का सामूहिक संकल्प लिया गया। यह नगर परिक्रमा शहर के वीएम फील्ड से शुरू हुई, जिसमें कहार, बैंड बाजा, बैलगाड़ी और घोड़े शामिल थे। हजारों की संख्या में महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में हाथों में तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर भोजपुरी की गरिमा बचाने की अपील लिखी थी। रंगीन जुलूस का नेतृत्व जय हिंद शाह ने किया। मुख्य उद्देश्य भोजपुरी भाषा की गरिमा को बचाना जुलूस पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेडियम से निकलकर भगत सिंह चौक, मौनिया चौक, पोस्ट ऑफिस चौक, घोष मोड़ और नगर थाना मार्ग से होते हुए पुनः वीएम फील्ड पहुंचा, जहां यह एक सभा में परिवर्तित हो गया। इस परिक्रमा का मुख्य उद्देश्य भोजपुरी भाषा की गरिमा को बचाना और इसे लुप्त होने या विकृत होने से रोकना था। परिक्रमा में शामिल साहित्यकारों, कलाकारों और युवाओं के हाथों में "भोजपुरी हमार पहचान ह" और "अपनी भाषा, अपनी आन" जैसे नारे लिखी तख्तियां थीं, जो समाज को जागरूक कर रही थीं। पारंपरिक परिधानों में सजे लोगों ने आधुनिकता की दौड़ में अपनी मौलिकता न खोने का संदेश दिया। भोजपुरी केवल मनोरंजन का साधन नहीं इस दौरान बार-बार यह संदेश दिया गया कि भोजपुरी केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि संस्कारों की संवाहिका है। नगर परिक्रमा के माध्यम से स्थानीय निवासियों और सरकार से यह पुरजोर अपील की गई कि भोजपुरी को वह संवैधानिक मान-सम्मान मिले, जिसकी वह हकदार है। अधिवक्ताओं और विद्वानों ने जोर दिया कि जब तक हम अपनी मातृभाषा को घर और व्यवहार में सम्मान नहीं देंगे, तब तक इसकी गरिमा सुरक्षित नहीं रह सकती।अपनी मिठास और व्यापकता के लिए जानी जाने वाली यह भाषा अब अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करने की राह पर है।
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