दिग्गज एक्ट्रेसे नीना गुप्ता आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है. उनकी हाल ही में फिल्म वध 2 सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. इस फिल्म में नीना के साथ संजय मिश्रा मुख्य भूमिका में हैं. फिल्म में नीना की दमदार एक्टिंग की क्रिटिक्स ने जमकर तारीफ की है. बता दें, नीना गुप्ता आज भले ही सफलता के शिखर पर हों, लेकिन उनका यहां तक पहुंचना आसान नहीं था.
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान नीना ने अपने करियर के उस पुराने दिनों को याद किया, जिसे सुनकर सभी हैरान रह गए. उन्होंने बताया कि कैसे एक दौर में फिल्मी सेट पर कलाकारों अपमान किया जाता था. नीना का मानना है कि आज की फिल्म इंडस्ट्री काफी बदल चुकी है. अब वर्कप्लेस पर माहौल पहले जैसा नहीं रहा. उस समय के डायरेक्टर और सेट का माहौल अलग होता था.
डायरेक्टर ने नीना गुप्ता को दी थी मां-बहन की गालियां
नीना गुप्ता ने अपने शुरुआती दिनों का हैरान कर देने वाला किस्सा शेयर किया. उन्होंने बताया कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान निर्देशक का मूड किसी बात को लेकर खराब था और उन्होंने अपना पूरा गुस्सा नीना पर निकाल दिया. नीना ने बताया, 'निर्देशक ने मुझे सबके सामने मां-बहन की गालियां दीं. मेरी कोई गलती नहीं थी, बस उसका दिमाग किसी और बात पर खराब था.'
उस वक्त सेट पर काफी लोग मौजूद थे. नीना बुरी तरह रोने लगीं, लेकिन काम और पैसो की जरूरतों के कारण वो पलटकर जवाब नहीं दे पाईं. उन्होंने कहा, 'मैं उस वक्त मजबूर थी, मुझे पैसों की जरूरत थी. अगर मेरे पास कोई और रास्ता होता, तो मैं वो काम कभी नहीं करती.'
रोल को लेकर आज भी शर्मिंदगी महसूस करती हैं नीना
नीना गुप्ता ने यह भी स्वीकार किया कि करियर के शुरुआती संघर्ष में उन्होंने कुछ ऐसे रोल भी किए, जिन्हें लेकर वो आज भी शर्मिंदगी महसूस करती हैं. उन्होंने हंसते हुए लेकिन दर्द भरे लहजे में बताया कि एक फिल्म में वे शक्ति कपूर के गैंग की महज एक मामूली सदस्य थीं, जहां उनके पास न तो कोई डायलॉग था और न ही कोई खास सीन. वो घर आकर भगवान से प्रार्थना करती थीं कि वह फिल्म कभी सिनेमाघरों तक न पहुंचे, ताकि उनके जान-पहचान वाले उन्हें उस रोल में न देख सकें.
नीना गुप्ता ने खुलेआम मांगा काम
बता दें, नीना गुप्ता का असली कमबैक 60 की उम्र के बाद हुआ. उनकी लाइफ में टर्निंग पॉइंट तब आया जब उन्होंने हिम्मत जुटाकर इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाली और खुलेआम काम मांगा. उनकी उस ईमानदारी ने पूरी इंडस्ट्री का ध्यान खींचा और उन्हें फिल्म 'बधाई हो' मिली. इस फिल्म ने न केवल उन्हें घर-घर में मशहूर किया, बल्कि फिल्मफेयर और नेशनल अवॉर्ड्स की लाइन लगा दी. उनकी ऑटोबायोग्राफी 'सच कहूं तो' में भी उन्होंने अपनी सिंगल मदरहुड और फिल्म इंडस्ट्री की कड़वी सच्चाइयों को बड़ी बेबाकी से पेश किया है.