पटना NEET छात्रा मौत केस,CBI ने मामा से की पूछताछ:पीड़ित पक्ष के वकील बोले-दोषियों से क्यों नहीं करते सवाल-जवाब, अधिकारी बदले; लेकिन लीपापोती जारी
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की संदिग्ध हालत में मौत की गुत्थी अभी तक सुलझी नहीं है। मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। POCSO कोर्ट की फटकार के बाद एजेंसी ने केस के जांच अधिकारी (IO) को बदल दिया है। इसी क्रम में शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे CBI ने छात्रा के मामा को पूछताछ के लिए बुलाया। पटना स्थित सीबीआई कार्यालय में उनसे पूछताछ की गई। बताया गया है कि नए जांच अधिकारी डीएसपी विभा कुमारी ने ही मामा को पूछताछ के लिए बुलाया है। वही, प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक डॉक्टर सतीश को सीबीआई कार्यालय बुलाया गया, जहां करीब आधे घंटे तक डॉ सतीश से पूछताछ की गई है। सीबीआई ने 12 फरवरी को यह मामला अपने हाथ में लिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। इस बीच पीड़ित पक्ष के वकील एसके पांडेय ने POCSO कोर्ट में शिकायत और मुआवजे के लिए आवेदन दाखिल किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित है। मामा से लगभग 1 घंटे में 25 सवाल किए सीबीआई के जांच अधिकारी ने छात्रा के मामा से लगभग 1 घंटे में 25 सवाल किए। मामा ने बताया कि, ‘CBI भी मामले की लीपापोती कर रही है। जांच अधिकारी बदले जा रहे, लेकिन किसी भी तथ्यों की जांच सही दिशा में नहीं की जा रही।’ केवल पीड़ित परिवार से पूछताछ, दोषियों से क्यों नहीं- वकील पीड़ित पक्ष के वकील एसके पांडे ने बताया कि, मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की जा रही है। जांच के नाम पर पीड़ित परिवार को परेशान किया जा रहा है, उन्हें टॉर्चर किया जा रहा है। पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है कि मान लीजिए यह आत्महत्या है।' उनका कहना है कि, 'इंसाफ और सत्य की लड़ाई अब आर पार लड़ी जाएगी। बेटियों के समक्ष लड़ी जाएगी। एसके पांडे ने बताया कि, 'सीबीआई के जांच अधिकारी भले ही चेंज हो गए हों, लेकिन जांच के नाम पर लीपापोती की जा रही है। नए जांच अधिकारी से उम्मीद है कि वह सही तथ्यों और सही दिशा में कम करें।' CBI टीम का परिजनों ने किया विरोध CBI से इस मामले की IO बनने के बाद डीएसपी विभा कुमारी अपनी टीम के साथ छात्रा के घर जहानाबाद पहुंची थीं। वहां परिजनों और ग्रामीणों ने सीबीआई टीम का विरोध किया। उनका कहना था कि सीबीआई तीन-चार बार पूछताछ कर चुकी है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। पूछताछ के दौरान छात्रा की मां की तबीयत बिगड़ जाती है और वे बेहोश हो जाती हैं। लगातार बदलते हालात और धीमी जांच प्रक्रिया से इस हाई-प्रोफाइल मामले में सीबीआई की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। परिजन न्याय की मांग पर अड़े हैं और आगामी सुनवाई से उम्मीदें लगाए बैठे हैं। पॉक्सो का केस दर्ज नहीं करने पर फटकार सीबीआई के वकील ने जब केस टेकओवर कर पटना में दर्ज किया, तो प्राथमिकी में पॉक्सो एक्ट नहीं जोड़ा गया, बल्कि हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया गया। इसी कारण पॉक्सो कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाई। जेल में बंद मनीष कुमार रंजन को सीबीआई ने रिमांड पर लेकर पूछताछ नहीं की। उसके मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की भी ठीक से जांच नहीं की गई। यह भी स्पष्ट नहीं किया जा सका कि घटना के दिन 5 जनवरी को वह कहां था और किन लोगों से संपर्क में था। परिजनों का कोर्ट में बयान भी अब तक दर्ज नहीं कराया गया है। इसके साथ ही हॉस्टल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किए गए।
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