कुछ ऐसी हरकत हुए हैं जो वाइट शर्ट पहन के डॉक्टरों का यह हरकत कर रहे हैं आप देख सकते हैं इस न्यूज़ के जरिए

चमचे बोल रहे हैं हमें सोना खरीदने की जरूरत ही नहीं. . एक बार हमारे राहुल खान पीएम बन जाएं फिर आलू से सोना बना लेंगे. . .

May 16, 2026 - 18:51
Updated: 15 hours ago
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कुछ ऐसी हरकत हुए हैं जो वाइट शर्ट पहन के डॉक्टरों का यह हरकत कर रहे हैं आप देख सकते हैं इस न्यूज़ के जरिए
आंध्र प्रदेश आंध्र प्रदेश जीतू दिया

Tejraftarnews.in: जिहादी आदमी 1: "हम इंडिया में बहुत मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। हमें एक अलग देश दे दो।"

जिहादी आदमी 2: "अगर आप बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को निकाल देंगे, तो वे कहाँ जाएँगे? एक ऐसी जगह बनाओ जहाँ दोनों रह सकें। हर किसी को इंडिया का एक टुकड़ा मिलना चाहिए। अगर आप बांग्लादेशियों को बांग्लादेश और रोहिंग्याओं को बर्मा निकाल देंगे, तो कोई भाईचारा नहीं रहेगा।"

देखो वे कितने चालाक हैं। वे मुस्लिम देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश से मुस्लिम रिफ्यूजी को बसाने के लिए नहीं कहते। वे चाहते हैं कि हिंदू इंडिया मुस्लिम रिफ्यूजी को स्वीकार करे और उन्हें हर बार इंडिया से अलग ज़मीन दे। यह गज़वा-ए-हिंद है।

Tejraftarnews.in."

జిహాదీ వ్యక్తి 2: "మీరు బంగ్లాదేశీయులను, రోహింగ్యాలను బహిష్కరిస్తే, వాళ్ళు ఎక్కడికి వెళ్తారు? ఇద్దరూ నివసించడానికి ఒక చోటు కల్పించండి. భారతదేశంలో ప్రతి ఒక్కరికీ ఒక భాగం దక్కాలి. మీరు బంగ్లాదేశీయులను బంగ్లాదేశ్‌కు, రోహింగ్యాలను బర్మాకు బహిష్కరిస్తే, ఇకపై భాయిచారా ఉండదు."

jitendra Kumar *सफेद कोट के पीछे का काला सच : निजी अस्पतालों के 'हेल्थकेयर स्कैम' और आयुष्मान की लूट*

2 मिनट समय निकालकर #Thread अंत तक अवश्य पढ़े।🧵👇

🔏 लेखक : पंकज सनातनी

आज के दौर में चिकित्सा को 'भगवान का रूप' माना जाता है, लेकिन दुर्भाग्यवश, आधुनिकता की चकाचौंध और बड़े-बड़े कई निजी अस्पताल सेवा के संकल्प को भूलकर केवल मुनाफे की मशीन बन चुके हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पूरे खेल का शिकार गरीब, मध्यम वर्ग और अनपढ़ लोग सबसे अधिक बन रहे हैं।

आज स्थिति यह है कि मरीज बीमारी से कम और अस्पताल के बिल से ज्यादा डरने लगा है। भारत में निजी अस्पतालों का विस्तार तेजी से हुआ है, लेकिन उसके साथ पारदर्शिता और जवाबदेही उतनी मजबूत नहीं हो पाई। कई मामलों में देखा गया है कि अस्पताल मरीज की वास्तविक जरूरत से अधिक टेस्ट, दवाइयां, इंजेक्शन, ICU, ऑपरेशन या भर्ती दिखाकर लाखों रुपये का बिल बना देते हैं। सामान्य बुखार को "गंभीर संक्रमण", सामान्य डिलीवरी को "इमरजेंसी ऑपरेशन" और छोटी बीमारी को "बड़ी सर्जरी" बताकर लोगों को भयभीत किया जाता है।

सफेद कोट पहनकर समाज का खून चूसने वाले इन संस्थानों के खिलाफ आवाज उठाना आज समय की सबसे बड़ी मांग है। अतः आज हम जमीनी हकीकत के आधार पर इस पूरे काले तंत्र का बारीकी से विश्लेषण करेंगे कि कैसे सेवा के नाम पर आम आदमी का शोषण किया जा रहा है। आयुष्मान कार्ड से लेकर अनावश्यक सर्जरी तक, हर कदम पर मुनाफे का जो खेल रचा गया है, उसे समझना हर नागरिक के लिए अनिवार्य है। चलिए प्रारम्भ करते हैं —

*⏩ Break . .*

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*(1) आयुष्मान कार्ड : गरीबों की उम्मीद पर कालाबाजारी का प्रहार*

सरकार ने 'आयुष्मान भारत योजना' गरीबों के इलाज के लिए शुरू की गई थी ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मुफ्त सम्मानजनक इलाज मिल सके। लेकिन कई जगह इस योजना को भी भ्रष्टाचार का माध्यम बना दिया गया। अनेक रिपोर्टों और शिकायतों में सामने आया कि कुछ निजी अस्पताल मरीजों को वास्तविक खर्च से कई गुना अधिक बिल दिखाकर सरकार से पैसा वसूलते हैं। यदि किसी मरीज के इलाज में वास्तव में 1 लाख रुपये खर्च हुए, तो फर्जी पैकेज, अतिरिक्त दवाइयां, नकली जांच और बढ़ा-चढ़ाकर बनाई गई रिपोर्टों के जरिए 2 से 2.5 लाख रुपये तक का क्लेम दिखा दिया जाता है।

सबसे खतरनाक बात यह है कि गरीब मरीज को कई बार पता भी नहीं चलता कि उसके नाम पर कितना पैसा निकाला गया। कुछ अस्पताल तो ऐसे मामलों में मरीजों को बिना जरूरत भर्ती कर लेते हैं ताकि आयुष्मान कार्ड का पूरा पैकेज इस्तेमाल किया जा सके। कहीं नकली ऑपरेशन दिखाए जाते हैं, कहीं मरीज को ICU में अनावश्यक रूप से रखा जाता है, तो कहीं दवाइयों और जांचों का बिल कई गुना बढ़ाकर लगाया जाता है।

*(2) 'प्रेग्नेंसी स्कैम' : मातृत्व के नाम पर डर का व्यापार*

निजी अस्पतालों में होने वाला सबसे आम घोटाला 'डिलीवरी स्कैम' है।

आज कई निजी अस्पतालों में सामान्य डिलीवरी को जानबूझकर "रिस्क" बताकर सी-सेक्शन ऑपरेशन में बदला जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी कई देशों में अनावश्यक सी-सेक्शन को लेकर चिंता जताई है। भारत में भी निजी अस्पतालों में सी-सेक्शन की दर सरकारी अस्पतालों की तुलना में कई गुना अधिक पाई गई है। कई परिवारों का आरोप होता है कि डॉक्टर अंतिम समय में डर पैदा करते हैं— "बच्चे की जान खतरे में है", "ऑक्सीजन कम हो रही है", "तुरंत ऑपरेशन करना पड़ेगा" और फिर 20-30 हजार के इलाज को 1-2 लाख तक पहुंचा दिया जाता है। डरे हुए परिवार के पास उस समय निर्णय लेने का समय भी नहीं होता।

*(3) हेल्थ इंश्योरेंस : मरीज की जेब पर दोहरी मार*

जैसे ही अस्पताल के स्टाफ को पता चलता है कि मरीज के पास 'हेल्थ इंश्योरेंस' है, बिलिंग का तरीका पूरी तरह बदल जाता है।

स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी भी अब कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। मरीज वर्षों तक प्रीमियम भरता है, लेकिन जब इलाज की जरूरत पड़ती है तो या तो क्लेम रिजेक्ट कर दिया जाता है या अस्पताल और बीमा कंपनी के बीच ऐसा खेल चलता है जिसमें सबसे अधिक नुकसान मरीज का होता है। कई अस्पताल इंश्योरेंस देखकर इलाज का खर्च बढ़ा देते हैं। जिस इलाज का सामान्य खर्च 50 हजार होता है, वही इंश्योरेंस होने पर 1.5 लाख का पैकेज बन जाता है। मरीज सोचता है कि "बीमा कंपनी दे रही है", लेकिन इसका सीधा नुकसान मरीज को उसके 'नो क्लेम बोनस' और 'सम इंश्योर्ड' लिमिट कम होने के रूप में उठाना पड़ता है।

*(4) दवाओं और जांचों का एकाधिकार (Monopoly)*

डॉक्टरों और अस्पतालों का एक बड़ा मुनाफा फार्मा कंपनियों और लैब के साथ जुड़ा होता है।

दवाइयों का खेल भी कम खतरनाक नहीं है। कई अस्पताल अपने ही मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने का दबाव बनाते हैं। बाहर मिलने वाली 200 रुपये की दवा अस्पताल के अंदर 800 या 1000 रुपये में बेची जाती है। डॉक्टरों और दवा कंपनियों के बीच कमीशन का खेल कोई नई बात नहीं रह गई। कई बार मरीज को ऐसी महंगी ब्रांडेड दवाइयां लिख दी जाती हैं जिनकी सस्ती और समान प्रभाव वाली जेनेरिक दवाएं आसानी से उपलब्ध होती हैं। लेकिन मरीज को विकल्प बताया ही नहीं जाता।

डायग्नोस्टिक टेस्ट यानी जांचों में भी भारी कमाई की जाती है। मामूली बीमारी में MRI, CT Scan, थायरॉइड प्रोफाइल, विटामिन टेस्ट, हार्मोन टेस्ट और दर्जनों जांचें लिख दी जाती हैं। मरीज डर के कारण सब करवाता है। कई डॉक्टरों और लैब्स के बीच कमीशन आधारित संबंधों की शिकायतें वर्षों से सामने आती रही हैं। जितनी अधिक जांचें, उतना अधिक कमीशन।

*(5) ICU और वेंटिलेटर का दुरुपयोग —*

कई परिवारों ने आरोप लगाया कि मरीज की हालत सामान्य होने के बावजूद ICU में रखा गया ताकि प्रतिदिन भारी बिल वसूला जा सके। कई बार मृत मरीज को भी घंटों मशीनों पर रखा जाता है ताकि बिल बढ़ सके। एक बार मरीज ICU में गया, तो परिजनों का उससे संपर्क कट जाता है और बिलों की बाढ़ आ जाती है। वेंटिलेटर, मॉनिटरिंग और नर्सिंग चार्ज के नाम पर ऐसे खर्चे जोड़े जाते हैं जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं होता। यह केवल आर्थिक भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी पतन है।

हालांकि यह भी सच है कि सभी निजी अस्पताल भ्रष्ट नहीं हैं। देश में हजारों डॉक्टर और अस्पताल ऐसे भी हैं जो ईमानदारी से सेवा कर रहे हैं और लाखों लोगों की जान भी बचा रहे हैं। लेकिन कुछ संस्थानों की लालचपूर्ण गतिविधियों ने आज पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। समस्या तब और बढ़ जाती है जब गरीब और आम आदमी के पास जानकारी, कानूनी सहायता और विकल्पों की कमी होती है।

*📜 निष्कर्ष :— जागरूक बनें, लुटेरों से बचें।*

यह स्थिति केवल चिंताजनक ही नहीं, बल्कि समाज की नैतिक जड़ों पर प्रहार है। सेवा के नाम पर चल रही इस कालाबाजारी को रोकने के लिए हमारी जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।

सरकार को चाहिए कि निजी अस्पतालों के बिलिंग सिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। आयुष्मान भारत योजना के तहत हर क्लेम की स्वतंत्र जांच हो। फर्जी बिल, अनावश्यक ऑपरेशन और गलत क्लेम करने वाले अस्पतालों के लाइसेंस तुरंत निलंबित किए जाएं। साथ ही मरीजों को भी जागरूक होना होगा। किसी बड़े इलाज से पहले दूसरी राय (Second Opinion) अवश्य लें, दवाइयों की कीमत जांचें, बिल की पूरी जानकारी मांगें और डर के वातावरण में तुरंत निर्णय लेने से बचें।

स्वास्थ्य सेवा किसी भी सभ्य समाज की आत्मा होती है। यदि अस्पताल ही भय, लूट और भ्रष्टाचार का केंद्र बन जाएं, तो गरीब आदमी इलाज नहीं बल्कि आर्थिक विनाश की ओर धकेला जाता है। सवाल केवल पैसों का नहीं, बल्कि विश्वास का है। जिस दिन जनता का भरोसा अस्पतालों से उठ जाएगा, उस दिन समाज का सबसे संवेदनशील तंत्र टूटने लगेगा। इसलिए समय रहते इस पर कठोर नियंत्रण और व्यापक सुधार अत्यंत आवश्यक हैं।

*📢 सावधानी के कुछ सूत्र:*

- हमेशा अस्पताल से एक-एक चीज का विवरण (Itemized Bill) मांगें।

- किसी भी बड़ी सर्जरी या सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह मिलने पर दूसरे डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

- यदि आयुष्मान कार्ड या अन्य किसी माध्यम से आपसे अवैध वसूली या धोखाधड़ी की जा रही है, तो तुरंत 'कंज्यूमर फोरम' या जिला चिकित्सा अधिकारी (CMO) के पास लिखित शिकायत दर्ज कराएं।

- दवाइयों की कीमत बाहर की मेडिकल दुकानों से भी जांचें।

- इलाज के दौरान हर जांच और प्रक्रिया का कारण समझने का अधिकार मरीज को है।

सफेद कोट पहनकर समाज का खून चूसने वाले इन संस्थानों के खिलाफ आवाज उठाना आज समस्त देशवासियों की सबसे बड़ी मांग है।

ऐसे ही जागरूकता भरे लेख नियमित पढ़ने के लिए इन दोनों नंबरों 👉 +918423630629 / + को अपने फोन में सेव करना ना भूलें, साथ ही अपना (नाम, जिला, राज्य) लिखकर WhatsApp अवश्य करें। ध्यान रहे, नंबर सेव होगा तभी आप तक मेरे संदेश पहुंचेंगे अन्यथा नहीं।

✍️ साभार

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Tejraftarnews.in: 📢 एक वर्ष सोना न ख़रीदने को कहा गया तो लोग मंदिरों के सोने की सूची सोशियल मिडीया में घुमाने लगे। और कहने लगे कि सरकार को उसे अधिग्रहीत कर लेना चाहिए। 

परन्तु उनसे न तो *स्वर्ण मंदिर* के स्वर्ण का नाम लेते बना, न *अलीगढ़* की *जामा मस्जिद* का जिसे *गोल्डन मॉस्क* कहा जाता है, न *Namdroling Monastery (Golden Temple), Bylakuppe, Coorg* का, न ही *बोधगया* के *महाबोधि मंदिर* का और न *Velankanni Basilica* या Kerala के कुछ cathedrals में crowns/ornaments का। 

और यह तो हिन्दू धर्म का खुलापन है कि उसका स्वर्ण लोगों को पता है पर दूसरे मज़हबों के बारे में पूछने पर कह देते हैं कि *quantified public data* नहीं है। मैंने पूछा कि है नहीं या उनकी पारदर्शिता नहीं है, तो खिसिया गये। 

और मैंने पूछा कि वैटिकन को प्रत्येक diocese से कितनी राशि जाती है? उन्होंने कहा कि उन्हें पता नहीं। इनकी कोई Centralized Audit Report public नहीं होती। 

और जब सम्पत्ति पर ही बात आ गई है तो भूमि भी gold में परिवर्तित हो सकती है, न। *सरकार* के बाद *भारत* का सबसे बड़ा गैर-सरकारी भूस्वामी तो *चर्च* को बताया जाता है और *वक़्फ़* भूमियों के किस्सों का अंत ही नहीं। 

इसलिए ऐसे सज्जनों से मेरा कहना है कि अपनी औकात में रहें। बर्र के छत्ते में हाथ न डालें। 🌏

Tejraftarnews.in: एक बार अवश्य पढ़ें... 🙏😔😞

रोने वालों को तो रोने का बहाना ही चाहिये... 

1.आज वे पैदल जाते मज़दूरों पर रो रहे हैं।

2. कल को जिन के विवाह स्थगित होंगे उन पर रोयेंगे।

3. सरकार के कोरोना रोकने के प्रयासों (लॉक डाउन) पर।

4. यदि फैल गया तो लोगों की लाशों पर।

5. यदि लोग न मरे तो अर्थव्यवस्था पर।

6.अर्थव्यवस्था को सम्भाल लिया तो सेंसेक्स के गिरने पर।

7. सेंसेक्स उठ गया तो जी डी पी पर।

8. GDP ग्रोथ सही आ गयी तो उस के कैलकुलेशन मेथड पर।

9. उस से सन्तुष्ट कर दिया तो रुपये की गिरती क़ीमत पर।

10. रुपया चढ़ गया तो महंगाई पर।

11. महंगाई घट गयी तो किसानों की दुर्दशा पर।

12. किसानों को सीधा लाभ दे दिया तो उसके बहुत कम होने पर।

13. सेना को हथियार मिले तो ग़रीब की थाली पर।

14. ग़रीबों को फ़ोकस में लिया तो सेना के घट रहे बजट पर।

15. कंधार में प्लेन हाइजेक हुआ तो सिसकते परिवारों पर।

16. आतंकवादी छोड़ दिये तो उनके छोड़े जाने पर।

17. आंतकी हमला हुआ तो हमले पर।

18. हमला होने से पहले ही आतंकवादी पकड़ लिये गये तो पकड़े गए 'निर्दोष' लोगों पर।

19. सब्जी मँहगी हुई तो गृहणियों के बजट पर।

20. सब्ज़ी सस्ती हुई तो किसानों की दुर्दशा पर।

21. प्याज़ 100 रुपया हुआ तो थाली के ज़ायके पर।

22. प्याज़ 8 रुपये रह गया तो नासिक के किसानों पर।

23. अरहर 150 रु हो गयी तो महंगाई पर और 65 रु रह गई तो फिर किसानों पर।

24. पाकिस्तान से बदला ले लिया तो सैनिकों की जान ख़तरे में डालने पर।

25. बदला न लिया तो देश की सुरक्षा से समझौते पर।

26. GST लग गया तो व्यापारियों पर, GST न लगे तो कर सुधारों पर।

21. रोमियो स्कॉयड बना तो लड़कों के पिटने पर।

22. स्कॉयड ठंडा हो जाये तो लड़कियों के छिड़ने पर।

23. नक्सली जवानों को मार दें तो जवानों पर।

24. पुलिस नक्सलियों को पकड़ ले तो विरोध की स्वतन्त्रता के हनन पर।

25. जामिया में पुलिस एक्शन ले तो एक्शन पर

26. JNU में एक्शन न ले तो एक्शन न लेने पर।

27.उनकी ग्रह दशा ही रोने वाली रही है और उन्हें मलाई चाटने को नहीं मिल रही है। उनका जन्म ही रोने के लिये हुआ है और उनके कर्म ही रोने वाले हैं। उनसे बहस मत कीजिये...! #वन्देमातरम् 🚩 🙏 

                             

जय हिन्द नमो नमो 🙏🚩*..

Jitendra Kumar जय श्री राम*

*शनिवार, 16 मई 2026 के मुख्य समाचार*

🔶चीन को रिझाने चले ट्रंप को रूस की सलाह, शांति चाहते हो तो Pak नहीं भारत चुनो

🔶MP हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना: अयोध्या केस को फैसले का आधार बनाया; मुस्लिमों को नमाज की इजाजत देने का आदेश खारिज

🔶पेट्रोल-डीजल कीमतों में वृद्धि, कांग्रेस बोली- चुनाव खत्म, वसूली शुरू: राहुल ने कहा- ₹3 का झटका आया, बाकी वसूली किस्तों में; अखिलेश बोले- साइकिल ही विकल्प

🔶NEET पेपर लीक का मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी गिरफ्तार, छात्रों से वसूले लाखों रुपये

🔶भारत-UAE रिश्तों को मिली नई मजबूती: पीएम मोदी और अल नाहयान की बैठक, LPG सप्लाई समेत कई MoU पर साइन

🔶UAE के बाद नीदरलैंड पहुंचे PM मोदी, प्रवासी भारतीयों ने किया जोरदार स्वागत

🔶रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, पहली बार डॉलर के मुकाबले गिरकर 96.07 पर पहुंचा

🔶सुप्रीम कोर्ट बोला- दो एयरलाइन का किराया अलग-अलग क्यों:एक एयरलाइन ₹8000 चार्ज करती है, दूसरी ₹18000; सरकार से कहा- लोगों को थोड़ी राहत दें

🔶एम्स्टर्डम में पीएम मोदी, नीदरलैंड के राजा और प्रधानमंत्री से करेंगे मुलाकात; ऊर्जा और प्रौद्योगिकी पर होगी चर्चा

🔶वाशिंगटन में हुई सफल बातचीत: इस्राइल-लेबनान के बीच 45 दिन तक बढ़ा युद्धविराम

🔶'पसंदीदा शहर चुनने का मौका, 15 मिनट अतिरिक्त समय...', NEET परीक्षा को लेकर धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा एलान, अब 21 जून को होगा एग्जाम

🔶'अगले साल से कंप्यूटर बेस्ड होगा NEET एग्जाम', शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बोले- अब गड़बड़ी नहीं होगी

🔶पेट्रोल-डीजल के बाद गैस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी, CNG दो रुपये हुई महंगी; आम जनता की जेब पर महंगाई की दोहरी मार

🔶मानसून के फिर से जल्दी आने की उम्मीद, 26 मई के आसपास केरल में देगा दस्तक : मौसम विभाग

🔶ईरान होर्मुज का रक्षक, सभी के लिए खुला, केवल उन देशों के लिए बंद जो ईरान के साथ युद्ध में: अराघची

🔶'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री के आह्वान को राजस्थान चैंबर का पूर्ण समर्थन, 'आत्मनिर्भर भारत' को मजबूती देगा प्रदेश का व्यापार जगत

🔶फर्जी लोग काला कोट पहनकर घूम रहे हैं, CBI कुछ करे; CJI सूर्यकांत को आया गुस्सा

🔶भीलवाड़ा में भीषण सड़क हादसा: ड्यूटी पर तैनात दो पुलिसकर्मियों समेत 3 की मौत

🔶भास्कर अपडेट्स:नासिक TCS केस 5 आरोपियों की बेल याचिका खारीज

🔶दिल्ली में 2027 से सिर्फ ई-ऑटो का रजिस्ट्रेशन, वायु प्रदूषण को लेकर CAQM का बड़ा फैसला 

🔷'बार-बार खुद को साबित नहीं करूंगा': 2027 विश्वकप पर कोहली की दो टूक; किससे बोले- या भरोसा रखो, या साफ मना करो?

🔷IPL 2026: CSK को करारा झटका, मार्श के तूफान में बिखरी टीम; 7 विकेट से हराया, प्लेऑफ समीकरण बिगड़े

       *आपका दिन शुभ और मंगलमय हो सुप्रभात..!!*

                             जय हो🙏

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