पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटी:दाम नहीं बढ़ेंगे; कच्चा तेल महंगा होने से कंपनियों को ₹30 प्रति लीटर तक घाटा हो रहा था
सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती कर दी है। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर ₹3 रुपए, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई है। एक्साइज ड्यूटी घटाकर पेट्रोल-डीजल के दामों को स्थिर रखा गया है। यूएस-इजराइल के साथ ईरान की जंग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इससे तेल कंपनियों को 30 रुपए प्रति लीटर तक घाटा हो रहा था। घाटा कवर करने के लिए तेल कंपनियां दाम बढ़ा सकती थीं। कटौती का असर 9 सवालों के जवाब से समझें… सवाल 1: सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कितनी कटौती की है? जवाब: केंद्र सरकार की ओर से एक लीटर पेट्रोल पर कुल 21.90 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी। स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्टूटी घटने के बाद अब यह 11.90 रुपए रह गई है। इसी तरह, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 17.8 रुपए से घटकर 7.8 रुपए पर आ गई है। एक लीटर पेट्रोल पर सेंट्रल टैक्स का ब्रेकअप एक लीटर डीजल पर सेंट्रल टैक्स का ब्रेकअप सवाल 2: क्या कल से पेट्रोल-डीजल के दाम ₹10 कम हो जाएंगे? जवाब: नहीं, इसकी संभावना कम है। भले ही सरकार ने टैक्स कम किया है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के रिटेल रेट सीधे सरकार तय नहीं करती। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियां कच्चे तेल की कीमत और अपने मुनाफे के आधार पर रेट तय करती हैं। कंपनियां इस छूट का इस्तेमाल अपने पिछले घाटे की भरपाई के लिए करेंगी। सवाल 3: तेल कंपनियां दाम क्यों नहीं घटाना चाहतीं? जवाब: पेट्रोलिमय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक तेल कंपनियां फिलहाल पेट्रोल पर 24 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपए का घाटा सह रही हैं। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण ये कंपनियां महंगा क्रूड खरीद रही हैं, लेकिन उन्होंने दाम नहीं बढ़ाए है। कंपनियां अब इस टैक्स कटौती का इस्तेमाल मार्जिन को स्थिर रखने में करेंगी। सवाल 4: तेल कंपनियों के मुनाफे का गणित क्या है? जवाब: तेल कंपनियों के मुनाफे का गणित काफी पेचीदा होता है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की विनिमय दर और सरकार के टैक्स ढांचे पर निर्भर करता है। इन कंपनियों के मुनाफे को समझने के लिए ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन देखा जाता है। यह वह राशि है जो तेल कंपनियां सारा खर्च (कच्चा तेल + रिफाइनिंग) निकालने के बाद बचाती हैं। यह कंपनी का नेट प्रॉफिट नहीं है। इस मार्जिन में से कंपनी को विज्ञापन, ट्रांसपोर्टेशन, सैलरी, मेंटेनेस जैसे खर्चे निकालने पड़ते हैं। इसके बाद जो बचता है वो मुनाफा होता है। क्रूड के बढ़ने से नुकसान में बदल सकता है कंपनियों का मुनाफा क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार जब कच्चे तेल की कीमत 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी तो वित्त वर्ष 2026 में तेल कंपनियों को एक लीटर पेट्रोल पर करीब 8 रुपए का मार्जिन मिलने की उम्मीद थी। अन्य खर्चे निकालने के बाद ₹3 की बचत हो सकती थी। क्रूड के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से कंपनी का मुनाफा अब नुकसान में बदल सकता है। आम तौर पर एक थंब रूल है। कच्चा तेल 1 डॉलर महंगा होता है, तो पेट्रोल/डीजल की लागत लगभग 50 से 60 पैसे प्रति लीटर बढ़ जाती है। इंडियन ऑयल को पहले 6 महीने में ₹13,299 करोड़ का मुनाफा हुआ था इंडियन ऑयल को H1 25-26 यानी, अप्रैल 2025 से सितंबर 2025 के बीच ₹13,299 करोड़ का मुनाफा हुआ था। पिछले साल (H1 24-25) कंपनी का मुनाफा सिर्फ ₹2,823 करोड़ था। यानी मुनाफा लगभग 370% बढ़ गया था। मार्जिन बढ़ने की वजह से ये मुनाफा हुआ था। सवाल 5: प्राइवेट कंपनियां क्या रुख अपना रही हैं? जवाब: देश में दो बड़े प्राइवेट प्लेयर है। रिलायंस और नायरा। सरकार के इस फैसले से ठीक एक दिन पहले ही नायरा एनर्जी ने पेट्रोल ₹5 प्रति लीटर और डीजल ₹3 महंगा कर दिया था। अब भोपाल में इस कंपनी का पेट्रोल 111.72 रुपए और डीजल 94.88 रुपए पर पहुंच गया है। हालांकि रिलायंस ने दाम नहीं बढ़ाए हैं। आने वाले दिनों में ये भी दाम बढ़ा सकती है। सवाल 6: क्या भविष्य में दाम और बढ़ सकते हैं? जवाब: यह पूरी तरह से ग्लोबल मार्केट पर निर्भर है। ब्रेंट क्रूड फिलहाल 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहा है। अगर वेस्ट एशिया में तनाव और बढ़ता है और सप्लाई चेन बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। ऐसी स्थिति में कंपनियां दाम बढ़ा सकती है। सवाल 7: इस कटौती से सरकार को क्या नुकसान होगा? जवाब: एक्साइज ड्यूटी कम करने से केंद्र सरकार के राजस्व में कमी आएगी। पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आए 'शॉक' का पूरा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर न पड़े और उन्हें महंगाई से बचाया जा सके। सवाल 8: क्या राज्य सरकारें भी अब वैट (VAT) कम करेंगी? जवाब: आमतौर पर केंद्र द्वारा ड्यूटी घटाने के बाद राज्यों पर भी वैट कम करने का दबाव बढ़ता है। अगर राज्य सरकारें अपने हिस्से का टैक्स (VAT) कम करती हैं, तभी उपभोक्ताओं को पंप पर ₹2 से ₹5 तक की वास्तविक राहत मिल सकती है। सवाल 9: कच्चा तेल बढ़ने पर दाम बढ़ते हैं, लेकिन सस्ता होने पर घटते नहीं? जवाब: यह बात काफी हद तक सही है और इसके पीछे 'अंडर-रिकवरी' का गणित काम करता है। असल में, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल अचानक महंगा होता है, तो सरकार के दबावसे कंपनियां तुरंत कीमतें नहीं बढ़ातीं और घाटा सहती हैं। बाद में जब कच्चा तेल सस्ता होता है, तो कंपनियां दाम घटाने के बजाय उस पुराने घाटे की भरपाई करती हैं। इसके अलावा, अक्सर कच्चे तेल की कीमतें गिरने पर केंद्र सरकार अपनी एक्साइज ड्यूटी या राज्य सरकारें अपना वैट बढ़ा देती हैं, जिससे गिरावट का फायदा ग्राहकों तक पहुंचने के बजाय सरकारी खजाने में चला जाता है। साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी और पुराने महंगे स्टॉक की लागत भी कंपनियों को कीमतें कम करने से रोकती है। वित्त मंत्री बोलीं- एक्साइज ड्यूटी कटौती राहत देने वाला कदम केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों से उपभोक्ताओं को बचाना है। सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद आम जनता पर इसका बोझ न पड़े। नॉलेज बॉक्स: इनडायरेक्ट टैक्स है एक्साइज ड्यूटी यह एक तरह का इनडायरेक्ट टैक्स है, जो देश के भीतर मैन्युफैक्चर होने वाले सामान पर लगाया जाता है। पेट्रोल-डीजल के मामले में, जब कच्चा तेल रिफाइनरी से साफ होकर बाहर निकलता है, तब केंद्र सरकार उस पर प्रति लीटर के हिसाब से फिक्स्ड एक्साइज ड्यूटी वसूलती है। चूंकि एक्साइज ड्यूटी फिक्स होती है, इसलिए सरकार इसमें कटौती करके आम जनता को राहत दे सकती है या इसे बढ़ाकर अपना रेवेन्यू बढ़ाती है। मौजूदा कटौती से सरकार का राजस्व कम होगा, लेकिन तेल कंपनियों को घाटा कम करने में मदद मिलेगी। ---------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… नायरा ने पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 महंगा किया:भोपाल में एक लीटर पेट्रोल ₹112 और डीजल ₹95 का हुआ, कच्चा तेल महंगा होना वजह ईरान जंग के बीच नायरा एनर्जी का पेट्रोल ₹5 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 महंगा हो गया है। अब भोपाल में पेट्रोल की कीमत 111.72 रुपए और डीजल 94.88 रुपए पर पहुंच गया है। नायरा एनर्जी की ओर से की गई यह बढ़ोतरी अलग-अलग राज्यों में वहां के लोकल टैक्स और वैट के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। कुछ राज्यों में पेट्रोल की कीमतों में ₹5.30 प्रति लीटर तक का इजाफा देखा गया है। नायरा के देशभर में करीब 7 हजार पेट्रोल पंप है। पूरी खबर पढ़ें…
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