बक्सर में डीपीएम का गाली देते ऑडियो:जांच रिपोर्ट सौंपी गई लेकिन कार्रवाई नहीं, पीड़ित कर्मचारी ही सस्पेंड, सिस्टम पर उठे सवाल
बक्सर जिले के स्वास्थ्य विभाग में तैनात डीपीएम मनीष कुमार का एक आपत्तिजनक ऑडियो वायरल हुआ है। इस ऑडियो में डीपीएम अपने अधीनस्थ कर्मचारी को कथित तौर पर गाली देते हुए सुने जा रहे हैं। इस घटना के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। वायरल ऑडियो में कर्मचारी बार-बार अपना काम पूरा होने की बात कह रहा है, लेकिन डीपीएम लगातार अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते दिख रहे हैं। इस घटना ने विभागीय माहौल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई कर्मचारियों का कहना है कि डीपीएम मनीष कुमार का यह रवैया नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से ऐसा व्यवहार किया जा रहा है। तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था
ऑडियो वायरल होने के बाद विभाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति ने मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को सौंप दी है। हालांकि, रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद अब तक डीपीएम मनीष कुमार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिस कर्मचारी के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की गई, उसी को निलंबित कर दिया गया है। विभाग के अन्य कर्मचारियों में भारी नाराजगी
कर्मचारी की पूरी बात सुने बिना और निष्पक्ष जांच के अभाव में की गई इस कार्रवाई से विभाग के अन्य कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डीपीएम मनीष कुमार का यह तरीका कर्मचारियों पर दबाव बनाने और उन्हें डराने के लिए पुराना है। उनका दावा है कि उनके पास ऐसे कई अन्य ऑडियो और वीडियो भी मौजूद हैं, जिन्हें वे उचित समय पर सार्वजनिक कर सकते हैं। जब इस पूरे मामले को लेकर डीपीएम मनीष कुमार से ऑन कैमरा सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। कार्रवाई वरीय अधिकारियों के स्तर से की जाएगी
इस मामले में एसीएमओ डॉ. बिनोद प्रताप सिंह ने पुष्टि की कि तीन सदस्यीय जांच कमिटी ने अपनी रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंप दी है और आगे की कार्रवाई वरीय अधिकारियों के स्तर से की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कार्रवाई कब तक होगी। डीपीएम मनीष पहले भी विवादों में रह चुके
मिली जानकारी के अनुसार, डीपीएम मनीष कुमार पहले भी विवादों में रह चुके हैं। वर्ष 2024 में भ्रष्टाचार के एक मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच कमिटी गठित की गई थी, जिसमें डीपीएम और तत्कालीन सिविल सर्जन दोनों को दोषी पाया गया था। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह संकेत मिलता है कि उनकी पकड़ सिस्टम में मजबूत बनी हुई है।
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