भारत की इकोनॉमी में गिरावट, 6वें नंबर पर आया:वजह- डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट, ब्रिटेन 5वें नंबर पर पहुंचा

Apr 17, 2026 - 16:20
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भारत की इकोनॉमी में गिरावट, 6वें नंबर पर आया:वजह- डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट, ब्रिटेन 5वें नंबर पर पहुंचा
भारत की इकोनॉमी दुनिया की रैंकिंग में 5वें नंबर से गिरकर 6वें नंबर पर आ गई है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के अनुसार अब ब्रिटेन (UK) एक बार फिर भारत से आगे निकल गया है। भारत की GDP में ये गिरावट डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से आई है। इस साल की शुरुआत में डॉलर के मुकाबले रुपया 89.91 पर था जो अब 93.38 रुपए पर आ गया है। भारत की GDP 2025 (FY26) में 3.92 ट्रिलियन डॉलर और 2026 (FY27) में 4.15 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है। वहीं, ब्रिटेन की GDP 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर और 2026 में 4.26 ट्रिलियन डॉलर रहने की उम्मीद है। रैंकिंग में गिरावट की 2 मुख्य वजहें भारत की ग्लोबल रैंकिंग में इस बदलाव के पीछे 2 बड़े कारण माने जा रहे हैं… 2027 में बनेगा चौथी बड़ी इकोनॉमी, जापान को छोड़ेंगे पीछे यह गिरावट केवल अस्थायी साबित हो सकती है। IMF का अनुमान है कि भारत 2027 (FY28) तक एक लंबी छलांग लगाएगा और जापान-ब्रिटेन दोनों को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा। नॉलेज पार्ट GDP क्या होती है? GDP का पूरा नाम ग्रोस डॉमेस्टिक प्रोडक्शन है, जिसे हिंदी में कुल घरेलू उत्पाद कहते हैं। सरल भाषा में: GDP = एक देश में एक साल में कुल कितना सामान और सेवाएं बनाई गईं (उनकी कीमत के हिसाब से)। ये सब मिलाकर एक साल में जितनी 'कुल वैल्यू' बनी, वही देश की GDP है। GDP बढ़ने के फायदे GDP घटने के नुकसान बेस ईयर क्या होता है? बेस ईयर वो साल होता है जिसकी कीमतों को आधार (बेस) माना जाता है। यानी, उसी साल की चीजों की औसत कीमत को 100 का मान देते हैं। फिर, दूसरे सालों की कीमतों की तुलना इसी बेस ईयर से की जाती है। इससे पता चलता है कि महंगाई कितनी बढ़ी या घटी है। उदाहरण: मान लीजिए 2020 बेस ईयर है। उस साल एक किलो टमाटर ₹50 का था। अब 2025 में वो ₹80 का हो गया। तो महंगाई = (80 - 50) / 50 × 100 = 60% बढ़ी। यही फॉर्मूला CPI में यूज होता है, लेकिन ये पूरे बाजार की चीजों पर लागू होता है।

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