हाईकोर्ट ने पूछा- मस्जिद सील करने का कानूनी अधिकार है:यूपी सरकार से मांगा जवाब, सुनवाई का अवसर दिए बिना कैसे सील किया

Mar 30, 2026 - 15:12
 0  0
हाईकोर्ट ने पूछा- मस्जिद सील करने का कानूनी अधिकार है:यूपी सरकार से मांगा जवाब, सुनवाई का अवसर दिए बिना कैसे सील किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूजा स्थल, मस्जिद के मामले पर एक बार फिर यूपी सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि क्या वह बिना किसी पूर्व सूचना या संपत्ति मालिकों को सुनवाई का अवसर दिए बिना किसी पूजा स्थल और मस्जिद को सील कर सकती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 मार्च सुनवाई के बाद आदेश जारी किया। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि वह किस कानूनी अधिकार के तहत किसी पूजा स्थल को सील कर सकती है। कोर्ट ने कहा सील करने का कोई कानूनी अधिकार है?" न्यायालय ने राज्य से पूछा, "क्या बिना पूर्व सूचना जारी किए या याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बिना निर्माणाधीन पूजा स्थल को सील करने का कोई कानूनी अधिकार है?" साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या पूजा स्थल परिसर के भीतर निर्माण आदि करने के मामले में मालिकों से किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता होती है। अहसान अली की याचिका पर आदेश मामला मुजफ्फरनगर से जुड़ा है। जिले में एक मस्जिद को सील किए जाने के खिलाफ अहसान अली ने इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसी मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि वह मुजफ्फरनगर के एक गांव में स्थित एक भूखंड के वैध स्वामी हैं। उन्होंने यह भूमि प्रवीण कुमार जैन से 2019 में विधिवत पंजीकृत विक्रय विलेख के माध्यम से खरीदी थी। हाल ही में अधिकारियों ने भूमि पर निर्मित मस्जिद को सील कर दिया, क्योंकि मालिकों ने उसके चारों ओर सीमा बनाना शुरू कर दिया था। यह कार्रवाई इस आधार पर की गई कि निर्माण अवैध है और सक्षम प्राधिकारी से कोई पूर्व अनुमति प्राप्त नहीं की गई थी। वकील बोले सुनवाई का अवसर नहीं दिया याचिकाकर्ता के वकील अधिवक्ता जगदीश प्रसाद मिश्रा ने कहा कि परिसर को सील करने से पहले उन्हें कोई नोटिस या सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया था। न्यायालय ने राज्य से इस याचिका पर जवाब देने और उस कानून के बारे में बताने को कहा जिसके तहत कार्रवाई की गई थी। न्यायालय ने आदेश दिया, "राज्य द्वारा हलफनामे सहित विशिष्ट निर्देश प्राप्त किए जाएं और अगली सुनवाई की तारीख पर इस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं।" हाल ही में उच्च न्यायालय में हुए रोस्टर परिवर्तन के बाद, यह मामला 24 मार्च को न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। हालांकि, उस दिन मामले की सुनवाई नहीं हो सकी।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला