14 अप्रैल 2026 का मुख्य समाचार जो इस तरीके से है हर जगह पर इस हिसाब से डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है हम बताते हैं
भीम जयंती की तैयारी बहुत जोर-जोर से है अलग-अलग शहरों में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की मूर्तियों पर किस हिसाब से सजावटी है लिए हम आपको बताते हैं
Tejraftarnews.in: *इस्लाम कोई धर्म नही बल्कि वहशी , जिहादी लुटेरो का एक गिरोह है।*
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*इस्लाम का अपना कुछ भी नही संपूर्ण इस्लाम अन्य से कब्जाया हुआ है।*
*पहले मुस्लीमो ने यहुदीयो से छीना*
*फीर हिँदुओ से छीनना प्रारम्भ कीया और आज भी छीन रहे है।*
*इस्लाम की सच्चाई जानने के लिए पुरा लेख पढे*
*हिंदुओ को वसुधैव कुटुम्बकम की भावना छोडकर यहुदीयो की भाषा मे मुस्लीमो को जवाब देना पडेगा।*
*क्यो की जैसे के साथ तैसा यह हमारे ईश्वर भी कहते व करते थे।*
बेंजामिन नेतन्याहू के UN मे दिये भाषण का अंश-
75 साल पहले हमें मरने के लिए यहां लाया गया था। हमारे पास ना कोई देश था, ना कोई सेना थी। सात देशों ने हमारे विरुद्ध जंग छेड़ दी। हम सिर्फ 65,000 थे। हमें बचाने के लिए कोई नहीं था। हम पर हमले होते रहे, होते रहे।
लेबनान, सीरिया, ईराक़, जॉर्डन, मिस्र, लीबिया, सऊदी अरब जैसे कई देशों ने हमारे ऊपर कोई दया नहीं दिखाई। सभी लोग हमें मारना चाहते थे किंतु हम बच गये।
संयुक्त राष्ट्र ने हमें धरती दी, वह धरती जो 65 प्रतिशत रेगिस्तान थी। हमने उसको भी अपने खून से सींचा। हमने उसे ही अपना देश माना क्योंकि हमारे लिए वही सब कुछ था।
हम कुछ नहीं भूले, हम फिरऔन से बच गए। हम यूनान से बच गए। हम रोमन से बच गए। हम स्पेन से बच गए। हम हिटलर से बच गए। हम अरब देशों से बच गए। हम सद्दाम से बच गए। हम गद्दाफी से बच गए।
हम हमास से भी बचेंगे, हम हिजबुल्ला से भी बचेंगे और हम ईरान से भी बचेंगे।
हमारे जेरूसलम पर अब तक 52 बार आक्रमण किया गया, 23 बार घेरा गया, 39 बार तोड़ा गया, तीन बार बर्बाद किया गया, 44 बार कब्जा किया गया लेकिन हम अपने जेरूसलम को कभी नहीं भूले। वह हमारे हृदय में है, वह हमारे मस्तिष्क में है और जब तक हम रहेंगे, जेरूसलम हमारी आत्मा में रहेगा।
संसार ये याद रखें कि जिन्होंने हमें बर्बाद करना चाहा वह आज स्वयं नहीं है। मिस्र, लेबनान, बेबीलोन, यूनान, सिकंदर, रोमन सब खत्म हो गए हैं।
हम फिर भी बचे रहे।
हमें वे (इस्लामी) खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने हमारे रस्म रिवाज को कब्जाया। उन्होंने हमारे उपदेशों को कब्जाया। उन्होंने हमारी परंपरा को कब्जाया। उन्होंने हमारे पैगंबर को कब्जाया। कुछ समय पश्चात अब्राहम इब्राहिम कर दिए गए, सोलोमन सुलेमान हो गए, डेविड दाऊद बना दिए गए, मोजेज मूसा कर दिए गए...
फिर एक दिन... उन्होंने कहा तुम्हारा पैगंबर (मुहम्मद) आ गया है। हमने इसे कभी स्वीकार नहीं किया। करते भी कैसे, उनके आने का समय नहीं आया था। उन्होंने कहा, स्वीकारो! कबूल लो! हमने नहीं कबूला। फिर हमें मारा गया। हमारे शहरों को कब्जाया गया, हमारे शहर यसरब को मदीना बना दिया गया। हम कत्ल हुए, भगा दिए गए...
मक्का के काबा में हम 2 लाख थे, मार दिए गए। हमें दुश्मन बता कर कत्ल किया गया, फिर सीरिया में, ओमान में यही हुआ। हम तीन लाख थे, मार दिए गए। ईराक़ में हम 2 लाख थे, तुर्की में चार लाख, हमें मारा जाता रहा, मारा जाता रहा। वे हमें मार रहे हैं, मारते जा रहे हैं। हमारे शहर, धन, दौलत, घर, पशु, मान-सम्मान सब कुछ कब्जाए जाते रहे फिर भी हम बचे रहे।
1300 सालों में करोड़ों यहूदियों को मारा गया फिर भी हम बचे रहे।
75 साल पहले वे हम पर थूकते थे, जलील करते थे, मारते थे। हमारी नियति यही थी किंतु हम स्वयं पर, अपने नेतृत्व पर, अपने विश्वास पर टिके रहे रहे।
आज हमारे पास एक अपना देश है। एक स्वयं की सेना है, एक छोटी अर्थव्यवस्था है। इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, फेसबुक, जैसी कई संस्थायें हमने इस दौर में बनाईं। आज हमारे चिकित्सक दवा बन रहे हैं, लेखक किताबें लिख रहे हैं, ये सबके लिए हैं , यह मानवता के कल्याण के लिए है।
हमने रेगिस्तान को हरियाली में बदला। हमारे फल, दवाएं, उपकरण, उपग्रह सभी के लिए है।
हम किसी के दुश्मन नहीं है, हमने किसी को खत्म करने की कसमें नहीं खाईं। हमें किसी को बर्बाद भी नहीं करना, हम साजिशें भी नहीं करते।
हम जीना चाहते हैं, सिर्फ सम्मान से, अपने देश में, अपनी जमीन पर, अपने घर में।
पिछले हजार सालों से हमें मिटाया गया, खदेड़ा गया, कब्जाया जाता रहा, हम मिटे नहीं, हारे नहीं और न आगे कभी हारेंगे। हम जीतेंगे, हम जीत कर रहेंगे, हम 3000 सालों से यरुशलम में ही थे। आज हम अपने पहले देश इजराइल में हैं। यह हमारा ही था, हमारा ही है और हमारा ही रहेगा, येरूसलम हमसे है और हम येरूसलम से हैं।
इस तरह हमेशा स्मरण रखना कि मानसरोवर, काबुल, कंधार, पेशावर ,लाहौर, कराची , ढाका ,चटगांव सब हमारा है....!!
साभार🚩💪
Tejraftarnews.in: *🕉️🟢 ॐ गं 🟢🕉️*
*🌞पञ्चाङ्ग 14 _ अप्रैल _ 2026 🌞*
⛅ *दिन _ मंगलवार*
⛅ *विक्रम संवत _ 2083 रौद्र*
⛅ *शाक संवत _ 1948*
⛅ *सूर्यायन _ उत्तरायण*
⛅ *ऋतु _ बसंत*
⛅ *मास _ वैशाख*
🌑 *पक्ष _ कृष्ण*
⛅ *तिथि _ द्वादशी रात्रि 12:12 तक तत्पश्चात त्रयोदशी*
🌟 *नक्षत्र _ शतभिषा दोपहर 04:05 तक तत्पश्चात पूर्वाभाद्रपद*
⛅ *योग _ शुक्ल दोपहर 03:39 तक तत्पश्चात ब्रह्मा*
⛅ *करण _ कौलव 12:46 तक तत्पश्चात तैतिल*
🌒 *राहुकाल _ दोप. 03:32 से शाम 05:07:14 तक*
🌜 *चंद्र राशि _ कुम्भ*
🌞 *सूर्य राशि _ मेष*
🌞 *सूर्योदय _ 06:09*
🌒 *सूर्यास्त _ 06:43*
💫 *दिशाशूल _ उत्तर दिशा में*
🦜 *व्रत_पर्व_विवरण _ मेष संक्रांति पुण्यकाल,पंचक, त्रिपुष्कर योग*
🧭 *पं.तपेश_अवस्थी*📱#9549999840
1️⃣ *मंगलवार🔺के #शुभाशुभ_मुहूर्त*
राहुकाल दोप. 03:32 - 05:07
यम गण्ड 09:11 - 10:46
गुलिक काल 12:21 - 13:56
*अभिजित 11:59 -12:50*
दूर मुहूर्त 16:37 - 16:39
दूर मुहूर्त 26:50 -28:28
2️⃣🌞 *#दिन_का_चौघड़िया*
रोग 06:09 - 07:35 अशुभ
उद्वेग 07:35 - 09:10 अशुभ
*चर 09:10 - 10:45 शुभ*
*लाभ 10:45 - 12:20 शुभ*
*अमृत 12:20 - 01:55 शुभ*
काल 01:55 - 03:31 अशुभ
*शुभ 03:31 - 05:06 शुभ*
रोग 05:06 - 06:41 अशुभ
3️⃣🌒 *रात_का_चौघड़िया*
काल 06:41 - 08:06 अशुभ
*लाभ 08:06 - 09:30 शुभ*
उद्वेग 09:30 - 10:55 अशुभ
*शुभ 10:55 - 12:20 शुभ*
*अमृत 12:20 - 01:44 शुभ*
*चर 01:44 - 03:09 शुभ*
रोग 03:09 - 04:34 अशुभ
काल 04:34 - 06:07 अशुभ
4️⃣🌞 *दिन_का_होरा*
मंगल 06:09 - 07:09
सूर्य 07:09 - 08:09
शुक्र 08:09 - 09:09
बुध 09:09 - 10:09
चन्द्र 10:09 - 11:09
शनि 11:09 - 12:09
गुरु 12:09 - 13:09
मंगल 13:09 - 14:09
सूर्य 14:09 - 15:09
शुक्र 15:09 - 16:09
बुध 16:09 - 17:09
चन्द्र 17:09 - 18:09
5️⃣🌒 *रात_का_होरा*
शनि 18:09 -- 19:09
गुरु 19:09 - 20:09
मंगल 20:09 - 21:09
सूर्य 21:09 - 22:09
शुक्र 22:09 - 23:09
बुध 23:09 - 24:09
चन्द्र 24:09 - 01:09
शनि 01:09 - 02:09
गुरु 02:09 - 03:09
मंगल 03:09 - 04:09
सूर्य 04:09 - 05:09
शुक्र 05:09 - 06:07
🕉️ *#माँ_पीताम्बरा_ज्योतिष_केंद्र*🕉️
*#ज्योतिष_CUSTOMIZED_VAIDIK #वास्तु(नक़्शे)_PDF_KUNDLI_वैदिक_कर्मकांड*
🔻 *पं.#तपेश_अवस्थी*🔻
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*🌞पञ्चाङ्ग 14 _ अप्रैल _ 2026 🌞*
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🌒 *सूर्यास्त _ 06:43*
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*लाभ 10:45 - 12:20 शुभ*
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काल 01:55 - 03:31 अशुभ
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मंगल 06:09 - 07:09
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गुरु 12:09 - 13:09
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*📱#train: "हमें अपनी कुलदेवी का कोई आइडिया नहीं है, हम कैसे पता लगाएं?" - यदि आपका भी यही सवाल है, तो यह लेख आपके लिए ही है!
महानगरों की भागदौड़ में यह एक बहुत आम समस्या बन गई है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, जब कोई परिवार अपने कुल देवताओं को भूल जाता है, तो उस कुल का सुरक्षा चक्र टूट जाता है। इसके परिणामस्वरूप जीवन में अचानक बड़े संकट आना, विवाह में अड़चनें, वंश वृद्धि (संतान प्राप्ति) में बाधाएं और घर में बिना कारण की कलह जैसी समस्याएं जन्म लेने लगती हैं।
यदि आप भी अपनी जड़ों से पूरी तरह कट गए हैं और इस उलझन में हैं, तो निराश न हों। सनातन धर्म और ज्योतिष में अपनी 'अज्ञात' कुलदेवी तक पहुँचने के ये अचूक मार्ग बताए गए हैं:
💡 सबसे आसान और अचूक तरीका: मुंडन संस्कार
किसी भी अन्य उपाय से पहले, अपने परिवार के किसी भी सदस्य (चाहे दूर के रिश्तेदार हों) से केवल इतना पूछें कि आपके परिवार में बच्चों का 'पहला मुंडन' (बाल उतारने की रस्म) पीढ़ियों से किस मंदिर या स्थान पर होता आया है? सनातन धर्म में जन्म के बाल हमेशा कुलदेवी या कुलदेवता को ही समर्पित किए जाते हैं। जहाँ आपके परिवार के मुंडन होते हैं, वही आपका वास्तविक दरबार है!
यदि इससे भी बात न बने, तो इन 4 प्रामाणिक मार्गों का अनुसरण करें:
1️⃣ गोत्र और मूल निवास (Ancestral Roots):
भारत में कुलदेवी का सीधा संबंध हमारे 'गोत्र' और 'मूल गाँव' से होता है। अपने परदादाओं के मूल गाँव या ज़िले का पता लगाएं। वहाँ जाकर उसी जाति और गोत्र के अन्य परिवारों से पूछने पर आपकी कुलदेवी का नाम बहुत आसानी से मिल जाएगा, क्योंकि एक गोत्र और क्षेत्र के लोगों की कुलदेवी आमतौर पर एक ही होती हैं।
2️⃣ तीर्थ पुरोहितों की वंशावली (The Divine Record):
यह सबसे प्राचीन तरीका है। हरिद्वार, काशी, प्रयागराज, पुष्कर या त्र्यंबकेश्वर जैसे सिद्ध तीर्थ स्थानों पर हमारे 'तीर्थ पुरोहित' (पंडे) पीढ़ियों का रिकॉर्ड (बही-खाता) रखते हैं। जब आप उन्हें अपना गोत्र और मूल निवास बताते हैं, तो वे अपनी बही खोलकर न सिर्फ आपकी पूरी वंशावली बता देते हैं, बल्कि आपकी कुलदेवी का नाम और उनका मुख्य मंदिर भी स्पष्ट कर देते हैं।
3️⃣ जन्म कुण्डली का 'नवम भाव' (Astrological Code):
आपकी कुण्डली भी आपके पूर्वजों का दर्पण है। कुण्डली का 'नवम भाव' (9th House) धर्म और पूर्वजों का भाव होता है। नवम भाव में बैठे ग्रह या नवमेश की स्थिति से कुलदेवता का पता लगाया जा सकता है।
यदि नवम या पंचम भाव पर चंद्रमा या शुक्र का गहरा प्रभाव है, तो कुल की मुख्य पूजनीय कोई 'देवी' (स्त्री तत्व) हैं।
यदि मंगल या सूर्य का प्रभाव है, तो कुलदेवता (पुरुष तत्व जैसे भैरव जी या सूर्य रूप) की प्रधानता होती है। (इसके सटीक विश्लेषण के लिए आप अपनी कुण्डली दिखा सकते हैं)।
4️⃣ श्रद्धा और संकल्प का मार्ग (Spiritual Surrender):
यदि गोत्र, गाँव या कुण्डली से भी कोई रास्ता न मिले, तो 'संकल्प' ही अंतिम मार्ग है। किसी भी शुभ दिन स्नान के बाद एक पानी वाला नारियल, लाल चुनरी और पान-सुपारी लेकर अपने घर के मंदिर में संकल्प लें:
"हे अज्ञात कुलदेवी माँ! अज्ञानतावश या समय के प्रभाव से हम आपको भूल गए हैं। हम आपका नाम नहीं जानते, लेकिन आप हमारे कुल की अधिष्ठात्री हैं। कृपया हमारा मार्गदर्शन करें और हमें अपने श्री चरणों तक बुला लें।"
सच्चे मन से की गई इस पुकार के बाद, माता अक्सर परिवार के किसी शुद्ध मन वाले सदस्य को स्वप्न में कोई संकेत (जैसे किसी विशेष मंदिर का दृश्य या मूर्ति) अवश्य देती हैं।
📌 तात्कालिक उपाय (Immediate Solution):
जब तक आपको अपनी कुलदेवी का नाम या स्थान पता न चले, तब तक घर के पूजा स्थान पर एक 'सुपारी' पर लाल कलावा लपेटकर उसे ही 'अज्ञात कुलदेवी' मानकर स्थापित कर लें। प्रतिदिन वहाँ एक दीपक जलाएं और क्षमा प्रार्थना करें।
जो अपनी जड़ें ढूंढता है, उसे रास्ता अंततः मिल ही जाता है। अपनी जड़ों से जुड़ें, क्योंकि पेड़ चाहे कितना भी विशाल क्यों न हो जाए, उसका जीवन उसकी जड़ों में ही बसता है। माता रानी आपके कुल की सदैव रक्षा करें।
#डॉ0_विजय_शंकर_मिश्र:।।
Tejraftarnews.in: । पूर्ण ज्ञानी की ही शरण लें ।
दृष्टान्त - एक गृहस्थ अपने ग्रामके मार्गपर चला जा रहा था कि बीचमें ही उसे एक नदी मिल गयी। उस गृहस्थने नदीके किनारे रहनेवाले लोगोंसे नदीको पार करनेका उपाय पूछा। तब वहाँ के एक बलवान किन्तु नेत्रहीन पुरुषने तुरन्त ही कहा - भाई! मेरे कन्धेपर चढ़ जाओ तो मैं तुम्हें उस पार पहुँचा सकता हूँ। यह सुनकर राहगीर सोचने लगा कि यह तो स्वयं ही नेत्रहीन है। जब इसे नदी-तट कुछ भी दिखायी नहीं देता, तब यह मुझे कैसे उस पार पहुँचा देगा। इसलिये ऐसे मनुष्य पर भरोसा करके अपनी हत्या स्वयं ही क्यों की जाय? इसलिये उसने कहा - भाई! मैं तेरे साथ उस पार नहीं चलूँगा।
उसी स्थानपर एक लँगड़ा पुरुष भी बैठा था। उसने कहा कहा - तुम किसी के साथ क्यों जाओ? नदी में कहाँ, कितना जल है, यह मैं भले प्रकार जानता हूँ। तुम मेरे कहे अनुसार जाओगे तो शीघ्र ही पार उतर जाओगे। देखो तुम इतने पग सीधे चलकर दाँयी ओर मुड़कर चलना तो शीघ्र ही किनारा आ जायगा, यह सुनकर राहगीर ने सोचा कि यह तो स्वयं ही लंगड़ा है, यह नदी में कैसे गया होगा? इसे क्या पता कि कहाँ कितना जल है। यदि मैं इसके कहे अनुसार जाकर किसी विपत्ति में फँस गया तो यह लंगड़ा मुझे कैसे बचा सकेगा?
तभी एक स्वस्थ मनुष्य वहाँ आ गया। वह चलने, देखने, तैरने आदि में पूर्ण समर्थ था तथा कहाँ कितना जल है, यह भी वह भले प्रकार जानता था। उसने राहगीर से कहा - भाई तुम मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें अभी उस पार पहुँचा दूँगा। यह सुनकर पथिक उसके साथ जाकर शीघ्र ही नदी को पार करके अपने ग्राम पहुंचा।
उक्त दृष्टान्तके अनुसार राहगीर ही वह मुमुक्षु है, जो जन्म-मरण रूप बहाव वाली संसार रूप नदीसे मोक्ष रूप पार जानेका इच्छुक है। नदीके किनारे बैठा हुआ नेत्रहीन उस श्रोत्रियके समान है जो वेद-शास्त्रके अतिरिक्त कुछ नहीं जानता। जो शास्त्र रूपी दृढ़ पावोंके होते हुए भी ब्रह्मरूप इस पारको देखनेमें अशक्त है। इसलिये केवल श्रोत्रिय गुरु के उपदेश से स्वरूप ज्ञान संभव नहीं है। नदीके तट पर बैठा हुआ लंगड़ा पुरुष उस ब्रह्मनिष्ठके समान है, जिसके पास ब्रह्मको देखने में समर्थ ज्ञान रूप नेत्र तो हैं, किन्तु वेद वाक्य रूपी प्रमाणोंका अभाव होनेसे उपदेश रूपी पांव नहीं हैं। क्योंकि उसके उपदेशमें सत्यता होते हुए भी वह मुमुक्षुओंमें विश्वास उत्पन्न नहीं कर सकता। उस अवस्थामें नेत्र-पाँव वाला स्वस्थ मनुष्य श्रोत्रिय और ब्रह्मनिष्ठ रूप होनेसे जिज्ञासु रूप राहगीरको सहज ही पार लगानेमें समर्थ है। इसलिये जिसमें दोनों विशेषताएँ हों, उसी की शरण ग्रहण करना उचित है।
अथर्ववेद के मुण्डकोपनिषद में जिज्ञासुओं को समिधा आदि लेकर ज्ञान प्राप्ति के लिये श्रोत्रिय और ब्रह्मनिष्ठ दोनों विशेषणों वाले सद्गुरु के निकट विनीत-भावसे जानेके विषयमें कहा है। वैसे ही गीताके चौथे अध्यायमें कहा गया है -
तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः।।३४।।
अर्थात् - सद्गुरु की शरणमें जाकर उन्हें साष्टांग प्रणाम कर बन्ध क्या है? मोक्ष क्या है? विद्या क्या है? ब्रह्म क्या है? उसको एकात्मा का ज्ञान कैसे हो? इत्यादि प्रश्नोंको करे और सद्गुरु को सेवा द्वारा प्रसन्न करता हुआ उनके पास रहकर परम मोक्षके साधन और ब्रह्मका ज्ञान प्राप्त करनेका इच्छुक हो, तब तत्त्वदर्शी सद्गुरु तेरे प्रति ज्ञानोपदेश करेंगे।
श्रीमद्भागवत में भी इसी प्रकार योगेश्वर प्रबुद्ध ने जनक को उपदेश करते हुए कहा था -
तस्मादगुरुं प्रपद्यन्ते जिज्ञासुः श्रेयमुत्तमम्।
शब्दे परे च निष्णातं ब्रह्मव्युपशयं मःश्रयम्।।
अर्थात् - इहलोक-परलोक के सभी भोग कर्मसे उत्पन्न होनेके कारण अनित्य एवं कष्टप्रद हैं। इसलिये श्रेष्ठ मोक्षको जानने में तत्पर मुमुक्षु वेदार्थ के यथार्थ ज्ञाता श्रोत्रिय और अपरोक्ष अनुभव से रपब्रह्मविद् शान्तरूप ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु की शरणको प्राप्त करे।
– डॉ0 विजय शंकर मिश्र:।।
Tejraftarnews.in: कैलाश-मानसरोवर
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(भू-लोक पर साक्षात शिवलोक)
कैलाश पर्वत देवादिदेव महादेव का पवित्र निवास स्थान है, जो कि समस्त सृष्टि के रचियता हैं । इसका वर्णन करने वाला भी उन्हीं की रचना का ही एक अंश है । इसलिए यह वर्णन जितना भी करो अपर्याप्त है।
2. कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र पृथ्वी का एक अत्यन्त संवेदनशील क्षेत्र है । इस क्षेत्र में ऐसी अदभुत शक्ति है कि जब दशर्नार्थी वहां पहुंचता है तो वह अदृश्य शक्ति वहां पर उसको प्रभावित करती है, क्योकि उस मनुष्य के अन्दर जो आत्मा विराजमान है, उसके मूल अंश परमात्मा का वह पवित्र निवास स्थल है। यहां की भूमि पवित्र और वायुमण्डल पवित्रतम है जो कि सर्वथा भिन्न है तथा जो एकाएक (अपने-आप) में मनुष्य को समाहित करने की शक्ति रखती है। यहां की वनस्पति दिव्य औषधियों से भी हुई है । यह सब देवाधिदेव महादेव के वहां विराजमान होने की ओर इशारा करती है। कैलाश के चारों ओर जो पहाड़ और पर्वत ऋंखलाएं हैं ये उन्हीं (शिवजी) के गण और सेवक जैसे प्रतीत होते है। (या यूं कहो कि गणों ने पर्वत का रूप धारण किया है।) दूर उॅंची-उॅंची हिमालय की चोटियां ऐसे प्रतीत होती है जैसो कि वे देवाधिदेव महादेव की उपासना में लीन है।
3. यहां की प्राकृतिक संरचनाएं हर पल परिवर्तित होकर मानव को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। सूक्ष्म शरीर में देवी-देवता, ऋषि-मुनि इस पवित्र स्थल में विचरण करते रहते हैं, जो कि इस स्थल की पवित्रता, शुद्धता को बनाए रखने में सहायक हैं।
4. कैलाश की तलहटी में दो विशालकाय झीलें (मानसरोवर एवं राक्षसताल) स्थित हैं। जो कि यह आवाज देतीं है कि ब्रहम्मानस के दो हिस्से हैं जो कि अच्छाई एवं बुराई कव प्रतीक हैं। कहते है कि एक बार ब्रहमाजी के पुत्रों ने अपने पिता की आज्ञानुसार भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए तप आरम्भ किया। उस समय इस क्षेत्र की भौगोलिक संरचना ऐसी थी कि यहां पर जल की कमी थी, इस कारण से वह शिव-पूजा के निर्मित शिवलिंग पर जल चढ़ाने में असमर्थ थे। इसके निवारण के लिए उन्होंने परमपिता ब्रहमाजी से प्रार्थना की तब ब्रहमाजी ने अपने मन से इस सरोवन की रचना की इसलिए इसका नाम मानसरोवर पड़ा अर्थात ऐसा सरोवन जिसकी रचना मन से की गई है मानसरोवर । मानसरोवर का पवित्र जल अमृत सदृष्य है और इसमें रहने वाले जीव स्वंय शिव स्वरूप है । मानसरोवर के चारों और बहुत सी पवित्र गुफाएं है जो दर्शनार्थियों को विश्राम देने के लिए काफी सहायक हैं । मानों प्रभु ने स्वंय अपने भक्तों के आराम की व्यवस्था की हो। मानसरोवर के दूसरे छोर से देखा जाए तो ऐसा प्रतीत होता है कि कैलाश बिल्कुल उन्ही के किनारे में समाधिस्थ है और जब मानस शान्त होता है तो कैलाश जीम का प्रतिबिम्ब मानस में दिखलाई देता है। समय के साथ-साथ मानसरोवर के रंग रूप में परिवर्तन होता रहता है जो कि आते-जाते विचारों का घोतक है।
5. समीप ही स्थित राक्षसताल झील में यह अनुभव नहीं होता है क्योंकि इसे अशुद्धता का प्रतीक माना जाता है। हर पल इसका रंग गाढा नीला रहता है इसमें कोई जीव नहीं रहता है, जो एक उग्र तीक्ष्ण मानसिक प्रवृति का आभास कराता है। मानसरोवर और राक्षसताल के बीच में स्थित गुरला मानधाता एक चमकता हुआ उॅंचा पर्वत हैं जो कि अपने आप में एक सम्मान के साथ दोनों झीलों के किनारे में स्थित है। इससे यह प्रतीत होता है कि विवेक अच्छाई और बुराई का निर्णय करने वाला है।
6. कैलाश मानसरोवर क्षेत्र में चारों दिशाओं में चार नदियों का उदगम स्थल है जो संसार की चार दिशाओं से होकर समुद्र में जा मिलती है। दूर से देखने पर कैलाश विशाल मैदान में एक ज्योतिर्मय बिन्दु की तरह प्रतीत होता है ऐसा लगता है कि विषालकाय महाशून्य में एक ज्योति की उत्पति हुई है और जिससे सृष्टि की रचना होने वाली है।
7. इस पवित्र क्षेत्र से जैसे-जैसे वापिस नीचे आते है तो हिमालय से बहता सारा पानी, घने जंगल ऐसे प्रतीत होने हैं कि जैसे सृष्टि की रचना का आरम्भ हो गया है और नीचे मैदानों में आने पर ऐसा प्रतीत होता है कि यह सारा संसार उन्हीं की एक विशाल रचना है। यूं आभास होता है कि भगवान शंकर दूर कैलाश पर बैठ अपनी रचाई सृष्टि का अवलोकन कर रहे है।
8. देवाधिदेव महादेव परबृहमा हैं। यही कैलाश उनका निवास स्थान है इसलिए सारे देवी-देवताओं, अप्सराओं, किन्नर, यक्ष आदि का यहां आवागमन होता रहा है। इसमें कोई सन्देह नहीं है कि इस स्थान में एक अद्भुभुत शक्ति है जो सबको अपनी ओर आकृर्षित करती है। जो दर्शनार्थी परमात्मा के जितना समीप होता है वह इस क्षेत्र से उतना ही प्रभावित होता है। इस क्षेत्र में पहुंचकर कोई तप नहीं कर सकता है क्योंकि जिसको पाने के लिए वह तपस्या करते है वह उन्हीं के पावन चरणों में पहुंच गया है क्योंकि वहां पहुंचना ही एक तपस्या है, जो अपने आपको तपस्या की ओर ले जाने को बाध्य करना है। इससे यह प्रतीत होता है कि तपस्या की नहीं जाती है वह स्वयं हो जाती है।
9. दर्शनार्थी चाहे कितना भी नास्तिक हो वह कैलाश से वापिस आने के बाद अपने आप को पूर्णतः परिवर्तित महसूस करता है । यह इस पवित्र भूमि का एक चमत्कार है मानों भगवान् शिव ने अपनी पवित्रता से जीव का माया रूपी मैल हटा दिया है । कैलाश से थोड़ा दूर स्थित भस्मासुर पर्वत (तीर्थपुरी) यह संकेत करता है कि बुराई जितनी भी शक्तिशाली हो उसका एक समय में अन्त निश्चित है ।
10. कैलाश की जो पवित्रता और चेतना है वह वहां के कण-कण में व्याप्त है। इसलिए हर कण शिव स्वरूप् है, जो भी प्राणी इस स्थान में पहुंच जाता है । वह भी शिव स्वरूप् हो जाता है, लेकिन अपने अहं के कारण वह इसे महसूस नहीं कर पाता है और प्रभु से दूर हो जाता है । प्रत्येक मनुष्य में, उस रचनाकार की दी हुई, एक ऐसी शक्ति विघमान होती है जो कि अपने आप में एक बदलाव ला सके । कैलाश में जब दर्शनार्थी पहुंचता है तो यह पवित्र क्षेत्र इस परिवर्तन लाने में और सहायक सिद्ध होता है । यहां के पशु-पक्षियों में भी एक अलग तरह की समझ (ज्ञान) है, ऐसे प्रतीत होता है कि ये पशुपक्षी ना होकर पवित्र आत्माएं रूप बदलकर पशु रूप में विचरण कर रही है । मनुष्य इस क्षेत्र में पहुंचकर यदि अपने मान से इस स्थान की चेतना को अनुभव करने का प्रयास करें तो उसको निश्चित ही शिवलोक की प्राप्ति होने में देर नहीं लगेगी । क्योंकि वह स्वयं परमात्मा के (स्थान) चरणों में खड़ा है । आत्मा और परमात्मा में कोई दूरी नहीं है । उसका विवेक, मन, अहंकार, विचार परमात्मा से दूर करता है । मनुष्य अपने संस्कारों को बोरी बिस्तर की तरह जकड़े रहा है और इसे छोड़ना भी नहीं चाहता है । यहां प्रकृति हर क्षण में अपना रूप् बदलते हुए इस क्षेत्र की शोभा में चार चांद लगाती है । इस क्षेत्र में ना जाने कितने ऋषि मुनियों ने आकर तप किया और उस परमपिता परमात्मा में समाहित हो गये और उसका कोई अन्त नहीं है । उसकी समाज में कोई प्रतिष्ठा भी नहीं है क्योंकि उसका मूल उदेश्य परमात्मा में लीन होने का है।
11. कैलाश मानसरोवर क्षेत्र कल्पवृक्ष जैसा ही है, लेकिन यह कल्पवृक्ष सर्वथा भिन्न है। यहां जो आप मांगे वह नहीं मिलेगा वरन् आपको जो चाहिए (परमात्मा के दृश्टिकोण से) वह मिलेगा। दर्शनार्थी बहुत इच्छा-कामना लेकर पहुंचता है लेकिन अधिकांश की इच्छा-पूर्ति नहीं होती है परन्तु जो मनुष्य श्रद्धाभाव से यहां पहुंचता है वह अपने आप में अलग अनुभूति प्राप्त करता है जिसकी उसे उम्मीद ही नहीं थी। दर्शनार्थी जब कुछ मांगने की कोशिश करता है तो वह अपने सांसारिक जीवन की इच्छा पूर्ति करने के लिए ही मांगता है लेकिन जो मिलता है वह उसे शिव (परमात्मा) के चरणों में बहुत आगे तक पहुंचाने में सहायक होता है। दर्शनार्थी जब कैलाश मानसरोवर क्षेत्र में पहुंचता है तो यहां पर जो एक शक्तिशाली चेतना विधमान है वह उसे अनुभव नहीं कर पाता है क्योंकि वह अपने आपको बहुत परेशान महसूस करता है। एक तो वह संसार से बहुत दूर आ गया है जिस कारण वह बहुत भयभीत होता है विचलित होता है, दूसरे ठंड और आक्सीजन की कमी से बहुत परेशानी महसूस करता है। तीसरा खाने-पीने, रहने और बोलने-चालने की असुविधा के कारण हर समय परेशान रहता है जिसके कारण उसका मन बहुत विचलित रहता है और वह इस क्षेत्र के प्रभाव को नहीं जान पाता है। लेकिन उसका (शिव-कृपा का) प्रभाव जीव पर स्वतः ही होता रहता है वह जीव धुल जाता है और जब वह वापस आता है तो अपने आपको धुला (निर्मल) हुआ महसूस करता है। यही देवाधिदेव महादेव की कैलाश भूमि (शिवकृपा) का चमत्कार है।
12. आदमी शुद्ध विचार, शान्त मन लेकर अगर इस क्षेत्र में कुछ दिन रहे तो अपने आप को परमात्मा से कभी भी दूर महसूस नहीं करेगा। लेकिन मनुष्य के संस्कार इतनी आसानी से उसक पीछा नहीं छोडते हैं इसलिए इस स्थान पर पहुंच कर जीवन और ज्यादा विचलित हो जाता है जैसे एक तेज बहाव वाली नदी की मछली को एक शांत तालाब में छोड़ दिया हो।
13. कैलाश् यात्रा करने से पहले कैलाश् की तलहटी में तथा हिमालय की तलहटी में विराजमान देवी-देवताओं के मन्दिर में जाकर प्रार्थना करनी आवश्यक है ताकि उनकी यात्रा सफल हो। कैलाश यात्रा में एक बात का ध्यान रखना जरूरी होता है कि जहां तक संभव हो प्रतिदिन स्नान करें और पानी एवं अन्य तरल पदार्थ ज्यादा मात्रा में ग्रहण करें।
14. दर्शनार्थी जब तकलाकोट (तिब्बत) से मानस पहुंचते हैं तो सर्वप्रथम मानसरोवर की परिक्रमा करनी चाहिए। मानसरोवर की परिक्रमा लगभग 107 कि.मी. की है तथा इसे तीन दिन में पूरा करने की परंपरा है। आजकल तो यह परिक्रमा बस, ट्रक या जीप द्धारा कुछ घंटो में भी की जा सकती है। मानसरोवर के पश्चिम में च्यू गोम्पा से प्रारम्भ करके पूर्व में होरचू से दक्षिण में ठुगु गोम्पा होते हुए वापिस च्यू गोम्पा पर परिक्रमा पूर्ण होती है। होरचू से ठुगु गोम्पा की दूरी लगभग 50 किमी है और ठुगु से च्यू गोम्पा लगभग 69 किमी है। वहां स्नान, पूजन, परिक्रमा के बाद ही कैलाश की परिक्रमा करनी चाहिए।
15. दर्शनार्थी को मानसरोवर का पवित्र जल अपने साथ अवश्य लाना चाहिए। मानसरोवर के दक्षिण में गुरला मान्धाता पर्वत की तलहटी से कैलाश के दर्शन पूजा, स्नान आदि का बहुत महत्व है। मानसरोवर के इस तरफ से कैलाश जीम की बड़ी मनोहर छवि के दर्शन भी होते हैं और उनका प्रतिबिम्ब मानसरोवर में दिखलाई पड़ता है।
16. मानसरोवर में बहुत-सी छोटी-बड़ी नदियां आकर मिलती हैं लेकिन इसका जल मृत्यु लोक में नही जाता है क्योंकि यह अत्यन्त पवित्र झील है। यह आश्चर्य का विषय है कि इतनी बड़ी नदियों का इसमें कैसे समावेश हो जाता है। मानसरोवर की गहराई लगभग 600 फीट है, लम्बाई व चैड़ाई लगभग 22 किमी है। इसकी गोलाई लगभग 107 किमी है। मानसरोवर के पूर्व और पश्चिम में दो गर्म पानी के स्रोत हैं ऐसे स्रोत मानसरोवर के मध्य में भी हो सकते हैं। जिसके कारण अन्य झीलों और नदियों की तुलना में इसका जल अपेक्षाकृत गर्म है। इस झील में बहुत से जीव, राजहंस आदि विचरण करते हैं तथा किनारे में बहुत से जंगली जानवर विचरण करते हैं। इसमें स्नान करने के बाद दर्शनार्थी स्वयं को बहुत अल्का (पवित्र) महसूस करते हैं। ऐसा महसूस होता है कि न जाने कितने ही जन्मों के पाप उतर (धुल) गये हैं। इसके जल में एक अलग-सा पोषक तत्व है जो तन और मन दोनों को अपने आप में तृप्ति देने की क्षमता रखता है। आध्यात्मिक दृष्टि से और वैज्ञानिक दृष्टि से मानसरोवर का वर्णन करना सम्भव से परे है । मानसरोवर के किनारे के पहाड़-पर्वत, खनिज व रत्नों से भरपूर हैं ऐसे मानो कि कुबेर का खजाना यहां पर है।
17. कैलाश पर्वत मानसरोवर झील से पश्चिम दिशा में लगभग 40 किमी. दूर है। कैलाश पर्वत की दक्षिण दिशा में डारचन नामक स्थान है, यहां से परिक्रमा का आरम्भी और अन्त होता है। परिक्रमा कुल 52 किमी की है। परिक्रमा का मार्ग दक्षिण दिशा में डारचन से शुरू होकर पश्चिम दिशा में यमद्धार (तारबोचे), उत्तर में डेरापुक, पूर्व में डोलमा पास और दक्षिण में जुथुलपुक से होते हुए डारचन में समाप्त होती है। यह परिक्रमा साधारणतया 6 दिन में की जाती है। परन्तु शिव-कृपा से इसे 2 दिन में या एक दिन में भी पूर्ण कर सकते है।
18. परिक्रमा आरम्भ करने के बाद सर्वप्रथम यमद्धार (तारबोचे) नामक स्थान आता है जोकि डारचन से लगभग 10 किमी दूर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है । यात्रा के दौरान इस द्धार से गुजरना अनिवार्य है । कहते है इस यमद्धार से गुजरने के बाद मनुष्य की असमय और अस्वभाविक मृत्यु नहीं होती। तिब्बती भाषा में इस स्थल को तारबोचे कहते हैं। 12 साल के बाद यहीं पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम होता है। यहां से कैलाश जीम के भव्य दर्शन होते हैं मानो भोलेनाथ एक उच्च सिंहासन पर विराजमान हैं। यहां से थोड़ा सा आगे चलने पर बायीं और गोम्पा है।
19. यमद्धार से 11-12 किमी चलने के बाद डेरापुक पहुंचते हैं। परिक्रमा मार्ग के दायें हाथ की तरफ कैलाशजी हैं और बायें हाथ की तरफ अन्य पर्वत हैं बीच में एक गलियारा सा है और यही परिक्रमा का मार्ग है। मार्ग में साथ-साथ नदी बहती है जिसमें आस-पास की चोटियों से और कैलाश से उतरता हुआ पवित्र जल आकर मिलता है। यह अमृत तुल्य है। यूं प्रतीत होता है मानों भोलेनाथ का अभिषेक करने के बाद यह पवित्र जल नदी में आ मिला है। यह सारा रास्ता लगभग समतल है। थोड़े बहुत उॅंचे-नीचे टीले मार्ग में आते हैं। डेरापुक पर पहले दिन का रात्रि विश्राम करते है।
20. डेरापुक कैलाश के उत्तर दिशा में स्थित है यहां से कैलाश जी के सबसे सुन्दर, भव्य और अत्यन्त नजदीक से दर्शन होते हैं। यहां से लगभग 2 धण्टे की दूरी तय करके कैलाशजी के चरणों में पहुंचा जा सकता है। परन्तु इसके लिए प्रभु की अनुमति तथा कृपा अत्यन्त आवश्यक है।
21. दूसरे दिन डेरापुक से चलने के बाद शिव स्थल होते हुए डोलमा पास पर पहुंचते है। यह पवित्र स्थल समुद्र तल से लगभग 19,500 फीट उॅंचा है तथा परिक्रमा मार्ग का सबसे उॅंचा स्थान है। यहां पर ऑक्सीजन की कमी होती है तथा थोड़ा-सा चलते ही सांस फूलती है। यहां पर ठंड भी अत्याधिक होती है। हवा का वेग भी अधिक होता है। डेरापुक से डोलमा पास लगभग 5 किमी दूर है परिक्रमा मार्ग में यह चढाई, आक्सीजन की कमी के कारण, थोड़ी सी कठिन लगती है। परन्तु शिव भोले को पुकारने पर उनके गण आकर इस चढाई को बड़ी आसानी से पूरा करवा देते हैं। परिक्रमा मार्ग में डोलमा पास पर ही पूजा करने की परंपरा है। यहां पर एक उॅंची शिला है और यहीं पर पूजा करने की परम्परा है। तिब्बती भाषा में इस स्थान को डोलमा कहते हैं और हिन्दू धर्म में इस पवित्र स्थान को मां तारा देवी की स्थान कहते हैं। यह पवित्र स्थल शक्ति पीठ है (तारा देवी शक्ति पीठ) यहीं से कैलाश जी के पूर्व मुख के दर्शन होते हैं। सीधे हाथ की तरफ कैलाश जी के पूर्व मुख के दर्शन और बांये हाथ की तरफ पवित्र तारा मां की शक्ति पीठ। ऐसा पवित्र मेल शायद ही कहीं हो। यहां आकर मन को बड़ी शान्ति मिलती है। डोलमा पास से थोड़ा आगे बढ़ने पर दाहिने हाथ पर कैलाश जी की तलहटी में पवित्र गौरी कुण्ड है। अगर मां की अनुमति मिले तो इस कुण्ड में स्नान अवश्य करना चाहिए ओर इस पवित्र कुण्ड का जल अपने साथ अवश्य लाना चाहिए। डोलमा पास से आगे बढ़ने पर लगभग 7 किमी की उतराई है। रास्ते में ग्लेशियर हैं अतः यहां पर थोड़ी सावधानी से चलते रहना चाहिए। यहां से आगे का मार्ग समतल है। नरम मुलायम घास और पास बहती नदी। डोलमा पास पार करने के बाद वापिस डारचन पहुंचने तक कैलाश जी के दर्शन नहीं होते क्योंकि हमारे दाहिने हाथ की तरफ उॅंचे पहाड़ और उनके पीछे कैलाश महाराज विराजमान हैं।
22. लगभग 15 किमी दूर जुथुलपुक नाम स्थान आता है। यहां पर दूसरे दिन का रात्रि विश्राम करते है।
23. तीसरे दिन जुथुलपुक (जोंगजेरबु) से वापिस डारचन पहुंचते हैं यह दूरी लगभग 11 किमी है पूरा रास्ता समतल है और थोड़ी-थोड़ी ढलान है।
24. कैलाश परिक्रमा एक नदी के किनारे से प्रारम्भ होती है और दूसरी नदी के किनारे पर समाप्त होती है। यह नदियां कैलाश और आसपास के पर्वतों से आती हैं और राक्षसताल में जाकर मिलती हैं। कैलाश की आकृति पंचाकोण आकृति है जोकि पंचानन अर्थात् शिवजी के पांच मुखों का प्रतीक है। ये 5 मुख इस सृष्टि के आधारभूत पंचतत्वों, पृथ्वी, जल, वायु, आकाश, अग्नि के प्रतीक हैं। इन्ही के संयोग से इस शरीर के रचना होती है जोकि परमात्मा के अंश के कारण जीवंत हो उठता है। मृत्यु के बाद ये पंच तत्व वापिस उन्ही मे समाहित हो जाते हैं - आत्मा परमात्मा में लीन हो जाती है।
25. कैलाश परिक्रमा के मार्ग में हर कोण से कैलाश की ओर नजदीक जा सकते हैं लेकिन काफी धैर्य और हिम्मत रखनी पड़ती है। मार्ग दुर्गम है और कठिनाइयों से पूर्ण है। दक्षिण दिशा से कैलाश की ओर जाने के लिए डारचन से नदी के किनारे जाने का रास्ता है। डरचन में जो नदी है वह कैलाश पर्वत से ही आ रही है । कुछ दूर चलने के बाद कैलाश जीम के भव्य दर्शन होते हैं। कैलाश पर्वत के सामने नन्दी पर्वत तथा बायीं ओर अष्टापद पर्वत है। यहां एक अलग तरह से द्रान के आनन्द की अनुभूति होती है।
26. कैलाश परिक्रमा के बाद नन्दी परिक्रमा भी कर सकते हैं। नन्दी परिक्रम में कैलाश और नन्दी जीम के बीच में से होकर जाना पड़ता है। जिससे कैलाश स्पर्श का सौभाग्य प्राप्त होता है। नन्दी जीम के सामने बायीं तरफ अष्टापद पर्वत है जोकि जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव जी का निर्वाण स्थल है। कैलाश पर कोई मंन्दिर नहीं है लेकिन पूरा पर्वत अपने आप में एक मन्दिर जैसा ही है। इसके अन्दर बहुत बड़ी-बड़ी गुफाएं हैं जिसमें बहुत से ऋषि-मुनि वहां तपस्या कर चुके हैं।
27. भीतरी (इनर) परिक्रमा कैलाश के सबसे नजदीक से होती है। जिसमें कई पहाड़ियां छूट जाती है और सिर्फ कैलाश से जुड़ी हुई पहाड़ियों के साथ-साथ परिक्रमा होती है। डारचन से अष्टापद के किनारे से होते हुए डेरापुक पहुंचते हैं। डेरापुक से खण्डेसांगलुम होते हुए जुथुलपुक पहुंचते हैं। भीतरी परिक्रमा में गौरी कुण्ड और डोलमा के दर्शन नहीं होते है जोकि केवल बाहरी परिक्रमा में होते हैं। भीतरी परिक्रमा में कैलाश से आने वाली नदी को ही पार करके जा सकते हैं, दूसरी किसी नदी को पार करके जाना उचित नहीं है।
28. कैलाश में बहुत सालों से बौद्ध धर्मावलंबियों का निवास है इसलिए बौद्ध धर्मावलम्बी इस स्थान के हर पहाड़, हर स्थान के बारे में अलग- अलग कहानी कहते हैं। हिन्दू धर्मावलम्बी अधिक दिन तक वहां नहीं रह पाते हैं इसलिए उन्हें अधिक जानकारी नहीं है, अतः बौद्ध धर्मावलम्बियों के कथनों को ही मानना पड़ता है। कैलाश को हिन्दू, बौद्ध और बोम्बो धर्म के सर्वोच्च तीर्थ के रूप में मानते हैं और मूल शक्ति का निवास स्थान मानते हैं।
29. आजकल कैलाश-मानसरोवर जाने की काफी सुविधा हो गई है। पैदल सड़क और हवाई मार्ग जैसा सामर्थ्य (प्रभु-कृपा) हो उसी साधन से कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर जाया जा सकता है।
30. कैलाश मानसरोवर तिब्बत में स्थित है और तिब्बत पर चीन सरकार का आधिपत्य है। इसलिए कैलाश मानसरोवर जाने के लिए चीन सरकार से वीजा लेना पड़ता है, इसके लिए पासपोर्ट होना अत्यन्त आवश्यक है। इसके अतिरिक्त हिन्दू धर्म के पवित्रतम तीर्थ होने के कारण चीन सरकार भारतीय तथा नेपाली श्रद्धालुओं को लोकल परमिट भी जारी करती है। जिसका प्रयोग प्रायः पैदल जाने वाले साधु-संत तथा अन्य लोग करते हैं लेकिन इसकी सरकारी कागजी कार्यवाही बहुत जटिल और कष्टप्रद है।
31. कैलाश मानसरोवर जाने के लिए बहुत से मार्ग है। भारतवासियों के लिए भारत सरकार का विदेश मंत्रालय, कुमाऊँ मंडल विकास निगम के सहयोग से इस यात्रा का आयोजन करती है। हर साल जनवरी-फरवरी में विदेश मंत्रालय द्धारा मुख्य समाचार पत्रों तथा दूरदर्शन के माध्यम् से आवेदन आमंत्रित किये जाते है इसके बाद मंत्रालय द्धारा ड्रा निकाला जाता है और भाग्यशाली यात्रियों के 16 जत्थे (बैच) बनाये जाते हैं। प्रत्येक जत्थे में 60 यात्रियों को अनुमति प्रदान की जाती है। वीजा़ आदि की व्यवस्था मंत्रालय द्धारा की जाती है। इसके साथ ही कुमाऊं मंडल विकास निगम बाकी सारा कार्य सभांलती है। दिल्ली से लेकर पुलेख पास और वापिस दिल्ली तक भोजन, रहने और यातायात आदि की व्यवस्था कुमाऊं मंडल विकास निगम करती है। प्रत्येक पड़ाव पर निगम के अपने विश्रामालय हैं । जिसमें समुचित प्रबन्ध होते हैं।
पहला दिनः- शारीरिक जांच के लिए दिल्ली में मंत्रालय द्धारा निर्धारित अस्पताल में निर्धारित टेस्ट करवाए जाते हैं। जैसेः-
1. RDT, LTC, DLC, HB.
2. Urine-(a) Re-Albumin Sugar(b) Microscopic.
3. Stool –Re.
4. Blood-sugar,Rasting-PP Urea-Creatinine, Seru Bilurubin, Blood Group.
5. Chest X-ray.
6. Tread Mill Test.
यात्रा पर जाने के इच्छुक भक्तों को यह सब परीक्षण करवाकर सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनका शरीर पूर्णतया स्वस्थ है, ताकि दिल्ली में आने के बाद परीक्षणों में कोई कमी होने से उन्हें कठिनाई न हो। परीक्षणों में कमी होने पर आईटीबीपी. द्धारा यात्रा करने की अनुमति नहीं मिलती है। इसके साथ ही प्रत्येक दर्शनार्थी को अपने रक्तचाप (ब्लड प्रेषर) का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि अधिक ऊॅचाई वाले क्षेत्रों में जाने पर रक्तचाप थोड़ा बढ जाता है।
दूसरा दिन:-
विदेश मंत्रालय (साउथ ब्लाक) में अधिकारीगण यात्रा के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं और वीजा आदि की औपचारिकता पूरी की जाती है।
तीसरा दिनः-
आईटीबीपी. के बेस अस्पताल (खानपुर-दिल्ली, बत्रा अस्पताल के सामने) में दर्शनार्थी की शारीरिक जांच की जाती है और परीक्षणों (टेस्ट रिपोर्टो) की भी जांच पड़ताल की जाती है। इन सब का मुख्य उद्देश्य यात्री को आने वाली तकलीफों से बचाना क्योंकी अधिक ऊॅचाई (हाई एटीच्यूट) वाले क्षेत्रों में उच्च रक्तचाप, शुगर आदि से बड़ी तकलीफें होती हैं।
चौथा दिनः-
दर्शनार्थी बैब जाकर डालर खरीदते हैं । तिब्बत जाकर डॉलर को फिर युआन (चीनी करंसी) में बदला जाता है।
पॅाचवां दिनः-
यात्रा का शुभारंभ होता है और यात्री कुमाऊं मंडल विकास निगम की बसों के द्धारा मुरादाबाद, रामपुर, हल्द्धानी, काठगोदाम होते हुए अल्मोड़ा पहुंचते है । दिल्ली से अल्मोड़ा की दूरी लगभग 370 किमी है।
छठा दिन:-
यात्री अल्मोड़ा से पिथौरागढ़ होते हुए बागेश्वर पहुंचते हैं। बागेश्वर एक प्राचीन तीर्थ है। यह गोमती और सरयू नदी के संगम पर बसा छोटा सा शहर है। यहां पर भगवान शंकर ने बाघ का रूप् धारण कर विचरण किया था इस लिए इस शहर का नाम बागेश्वर पड़ा। संगम के किनारे पर सन 1602 में बना बाघनाथ का प्राचीन मंदिर है। यहां से आगे चलकर चकौरी होते हुए धारचूला पहुंचते हैं। यह दूरी लगभग 270 किमी की है। धारचूला इस यात्रा का बेस कैम्प है । धारचूला काली गंगा के किनारे घाटी में बसा छोटा सा शहर है तथा नदी के उस पार नेपाल है।
सातवां दिन:-
धारचूला से बस द्धारा तवाघट (19 किमी) या मंगती पहुंचा जाता है और यहां से पैदल यात्रा प्रारम्भ होती है। तवाघाट से थाणीधार, पांगू होते हुए लगभग 20 किमी की दूरी तय कर यात्री सिरखा (समुद्रतल से ऊचाई 8,450 फीट) पहुंचते हैं। पांगू गांव से सिरखा गांव तक पहुंचने के लिए एक अन्य रास्ता भी है जो नारायण आश्रम होकर पहुंचता है इसके लिए 03 किमी अधिक चलना पड़ता है।
आठवां दिनः-
आज की मंजिल गाला (समुद्रतल से ऊंचाई 8,050 फीट) है। गाला-सिरखा से 16 किमी की दूरी पर स्थित है। यह सारा रास्ता पहाड़ी बनस्पतियों तथा पेड़ों से भरपूर है। रास्तें में 10,050 फीट उॅचा रंगलिंग पास पड़ता है। चढ़ाई उतराई के बाद सिमोलखा गांव होते हुए गाला कैंप पहुंचते हैं।
नौवां दिनः-
आज की मंजिल बुद्धि है। गाला से बुद्धि की दूरी 18 किमी है गाला से चलते ही 4,444 सीढ़ियां उतरकर लखनपुर आता है और यहां से नदी पार करके मालपा, लामारी होते हुए बुद्धि पहुंचते हैं। यह पूरा रास्ता काली नदी के किनारे है। लखनपुर से लेकर मालपा तक रास्ता संकरा है अतः दर्शनार्थी को यहां सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए।
दसवां दिनः-
आज का पड़ाव गूंजी है। यह आईटीबीपी. का अन्तिम बेस कैंप है। बुद्धि से गूंजी (समुद्रतल से ऊचाई 10,624 फीट) की-छिया लेक, गर्बयांग होते हुए दूरी लगभग 22 किमी है। यहां पर आईटीबीपी. के डाक्टर दोबारा रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) की जांच करते हैं और रक्तचाप अधिक होने या अन्य शारीरिक कमी होने पर यहां से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिलती है।
ग्याहरवां दिनः-
इस दिन यात्री गुंजी से कालापानी (समुद्रतल से ऊचाई 11,880 फीट) पहुंचता है। यह दूरी लगभग 10 किमी है तथा यहां भगवान शिव और मां काली का मंन्दिर है। जिसकी देखभाल आईटीबीपी. के जवान करते हैं। काली नदी का उदगम इसी स्थल से होता है।
बारहवां दिनः-
बारहवें दिन की मंजिल नाबीढांग है। यहां भारतीय क्षेत्र में आईटीबीपी. की अन्तिम चौकी है। समुद्रतल से इस स्थान की उॅचाई 14,220 फीट है यह दूरी लगभग 09 किमी है। इसी स्थान से ही पश्चिम दिशा में ओम पर्वत के दर्शन होते है।
तेरहवां दिन:-
आज की मंजिल तकलाकोट (तिब्बत) है। इस दिन की यात्रा सुबह 3.30 बजे प्रारम्भ होती है। लगभग 08 किमी की कठिन चढ़ाई करके लगभग 06 बजे तक लिपूलेख पास 16,730 फीट पर पहुंचते हैं यहीं से दर्रा (पास) पार करके तिब्बत में प्रवेश करते हैं। लगभग 05 किमी की उतराई (पैदल या घोड़े द्धारा) के बाद, लगभग 02 घंटे की बस यात्रा करके तकलाकोट पहुंचते हैं। तकलाकोट में पहुंचने के बाद चीनी अधिकारियों द्धारा वीजा और कस्टम आदि की औपचारिकताएं पुरंग गैस्ट हाउस में ही पूरी की जाती हैं।
चैदहवां दिनः-
यह दिन तकलाकोट में विश्राम का दिन है तथा इसी दिन डालर के बदले में युआन लिए जाते हैं।
पन्द्रहवां दिनः-
आज का दिन बड़ा ही शुभ है क्योंकि तकलाकोट से लगभग 100 किमी की दूर तय करने के बाद पवित्र मानसरोवर और कैलाश के प्रथम दर्शन होते हैं तथा रात्रि विश्राम मानसरोवर के पश्चिम तट पर च्यू गोम्पा के पास स्थित गैस्ट हाउस में होता है।
सोलहवां दिनः-
मान परिक्रमा के लिए बस द्धारा च्यू गोम्पा से बरघा होते हुए सर्वप्रथम पूर्व दिशा में हरिचू (हरि), हरिचू से पश्चिम दिशा में डुगू गोम्पा पहुंचते हैं। यहां से कैलाश का पूर्ण प्रतिबिम्ब मानसरोवर में दिखलाई देता है। स्नान आदि के पश्चात दर्शनार्थी परिक्रमा पूर्ण करते हुए वापिस च्यू गोम्पा पर स्थित गेस्ट हाउस में पहुंचते हैं। पवित्र मानस का जल डुग से लेना ज्यादा उचित है।
सत्रहवां दिनः-
यह दिन हवन पूजा एवं मनन आदि के लिए निर्धारित है।
अठारहवां दिन:-
मानसरोवर से बस द्धारा लगभग 40 किमी दूर कैलाश परिक्रमा के आधार-शिविर पर पहुंचते हैं। अगर समय मिले तो डारचन से अष्टापद अवश्य जाना चाहिए, यहां से कैलाश के दक्षिण मुख के भव्य दर्शन होते हैं तथा यहीं से नन्दी परिक्रमा का मार्ग है।
उन्नीसवां दिनः-
आज कैलाश परिक्रमा (शिव परिवार की परिक्रमा) का शुभारम्भ है। ट्रक या बस द्धारा लगभग 10 किमी दूर यमद्धार पहुंच कर वहां से पैदल यात्रा प्रारम्भ होती है और लगभग 11 किमी की दूरी पैदल या याक द्धारा तय करके रात्रि विश्राम डेरापुक पर करते हैं।
बीसवां दिनः-
डेरापुक से चलकर शिवस्थल होते हुए डोलमा पास पर पूजा करके और गौरी कुण्ड के दर्शनों के पश्चात लगभग 24 किमी दूर जोंगजरेबू (जुथुलपुक) पर रात्रि विश्राम करते हैं।
इक्कीसवां दिनः-
जोंगजरेबू से लगभग 11 किमी पैदल चलकर शिव-कृपा से डारचन पर परिक्रमा सम्पन्न। समय मिलने पर अष्टपद के पुनः दर्शन।
बाईसवां दिनः-
डारचन से चलकर मानसरोवर पर शिव-कृपा के लिए धन्यवाद करते हुए वापिस तकलाकोट।
तेइसवां दिनः-
तकलाकोट से खोचरनाथ (राम दरबार को समर्पित बौद्ध गोम्पा) दर्शन एवं वापिस तकलाकोट आकर रात्रि विश्राम पुरंग गेस्ट हाउस।
चैाबीसवां दिनः-
तकलाकोट से गूंजी।
पच्चीसवां दिनः-
गूंजी से बुद्धि।
छब्बीसवां दिनः-
बुद्धि से गाला।
सताईसवां दिन:-
गाला से सिरखा।
अटठाईसवां दिन:-
सिरखा से धारचूला।
उन्नतीसवां दिन:-
धारचूला से अल्मोड़ा।
तीसवां दिनः-
अल्मोड़ा से दिल्ली।
32. कैलाश-मानसरोवर जाने के लिए अन्य मार्ग काठमाण्डू से है। इस यात्रा के लिए नेपाल तथा भारत में स्थित ऐजेन्टों की मदद आवश्यक है। यह यात्रा लगभग 18 दिन में पूर्ण होती है। इसमें ग्रुप वीज़ा तथा अन्य सारी व्यवस्थायें एजेन्ट करते हैं। इस मार्ग में शारीरिक जांच की कोई औपचारिकता नहीं है। परन्तु अपनी सुविधा के लिए प्रत्येक यात्री को अपनी शारीरिक जांच अवश्य करा लेनी चाहिए क्योंकि भारत और तिब्बत के मौसम में बहुत भिन्नता है। तिब्बत का मौसम शुष्क और ठण्डा है। कैलाश मानसरोवर क्षेत्र समुद्रतल से लगभग 150000 फीट से लेकर 19500 फीट पर स्थित है इस लिए तन और मन दोनों की तन्दुरूस्ती अन्यन्त आवश्यक है।
33. सर्वप्रथम यात्री काठमांडू पहुंचते हैं। यहां पर 02 दिन (पशुपतिनाथ के दर्शन तथा काठमांडू भ्रमण) के बाद तीसरे दिन सुबह बस द्धारा लगभग 113 किमी दूर नेपाल तिब्बत सीमा कोदारी पर पहुंचते हें। यहां पर कागजी कार्यवाही करने के बाद तिब्बत में प्रवेश करते हैं और फिर लैण्डक्रूज़र जीप से जंगमू होते हुए नयालाम पहुंचते हैं। यहां पर मौसम के अनुरूप शरीर को ढालने के लिए एक दिन का विश्राम करते हैं। पांचवे दिन लैण्डक्रूज़र से लगभग 270 किमी का कठिन सफर करके सागा, छठे दिन फिर लगभग 260 किमी का कठिन सफर तय करके प्रयांग और सातवें दिन फिर लगभग 270 किमी का कठिन सफर तय करके पवित्र मानसरोवर के किनारे पूर्व दिशा में होरचू पहुंचते हैं। आठवें दिन मानसजी की परिक्रमा लैण्डक्रूजर द्धारा सम्पन्न की जाती है। नवें दिन हवन, पूजा तथा मनन आदि सम्पन्न करके दोपहर बाद लगभग 40 किमी दूर कैलाश परिक्रमा के आधार शिविर डारचन पर रात्रि विश्राम। दसवें दिन कैलाश परिक्रमा करते हुए डेरापुक पर रात्रि विश्राम। ग्याहरवें दिन डेरापुक से शिव स्थल, डोलमा पास होते हुए जुथुलपुक पर रात्रि विश्राम।
डॉ0 विजय शंकर मिश्र:।
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Tejraftarnews.in: कुलदेवी/देवता की पूजा क्यों करना चाहीये ...?
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हिन्दू पारिवारिक आराध्य व्यवस्था में कुल देवता/कुलदेवी का स्थान सदैव से रहा है ,,प्रत्येक हिन्दू परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज हैं जिनसे उनके गोत्र का पता चलता है ,बाद में कर्मानुसार इनका विभाजन वर्णों में हो गया विभिन्न कर्म करने के लिए ,जो बाद में उनकी विशिष्टता बन गया और जाती कहा जाने लगा ,,पूर्व के हमारे कुलों अर्थात पूर्वजों के खानदान के वरिष्ठों ने अपने लिए उपयुक्त कुल देवता अथवा कुलदेवी का चुनाव कर उन्हें पूजित करना शुरू किया था ,ताकि एक आध्यात्मिक और पारलौकिक शक्ति कुलों की रक्षा करती रहे जिससे उनकी नकारात्मक शक्तियों/उर्जाओं और वायव्य बाधाओं से रक्षा होती रहे तथा वे निर्विघ्न अपने कर्म पथ पर अग्रसर रह उन्नति करते रहे |
समय क्रम में परिवारों के एक दुसरे स्थानों पर स्थानांतरित होने ,धर्म परिवर्तन करने ,आक्रान्ताओं के भय से विस्थापित होने ,जानकार व्यक्ति के असमय मृत होने ,संस्कारों के क्षय होने ,विजातीयता पनपने ,इनके पीछे के कारण को न समझ पाने आदि के कारण बहुत से परिवार अपने कुल देवता /देवी को भूल गए अथवा उन्हें मालूम ही नहीं रहा की उनके कुल देवता /देवी कौन हैं या किस प्रकार उनकी पूजा की जाती है ,इनमे पीढ़ियों से शहरों में रहने वाले परिवार अधिक हैं ,कुछ स्वयंभू आधुनिक मानने वाले और हर बात में वैज्ञानिकता खोजने वालों ने भी अपने ज्ञान के गर्व में अथवा अपनी वर्त्तमान अच्छी स्थिति के गर्व में इन्हें छोड़ दिया या इनपर ध्यान नहीं दिया |
कुल देवता /देवी की पूजा छोड़ने के बाद कुछ वर्षों तक तो कोई ख़ास अंतर नहीं समझ में आता ,किन्तु उसके बाद जब सुरक्षा चक्र हटता है तो परिवार में दुर्घटनाओं ,नकारात्मक ऊर्जा ,वायव्य बाधाओं का बेरोक-टोक प्रवेश शुरू हो जाता है ,उन्नति रुकने लगती है ,पीढ़िया अपेक्षित उन्नति नहीं कर पाती ,संस्कारों का क्षय ,नैतिक पतन ,कलह, उपद्रव ,अशांति शुरू हो जाती हैं ,व्यक्ति कारण खोजने का प्रयास करता है कारण जल्दी नहीं पता चलता क्योकि व्यक्ति की ग्रह स्थितियों से इनका बहुत मतलब नहीं होता है ,अतः ज्योतिष आदि से इन्हें पकड़ना मुश्किल होता है ,भाग्य कुछ कहता है और व्यक्ति के साथ कुछ और घटता है ,
कुल देवता या देवी हमारे वह सुरक्षा आवरण हैं जो किसी भी बाहरी बाधा ,नकारात्मक ऊर्जा के परिवार में अथवा व्यक्ति पर प्रवेश से पहले सर्वप्रथम उससे संघर्ष करते हैं और उसे रोकते हैं ,यह पारिवारिक संस्कारों और नैतिक आचरण के प्रति भी समय समय पर सचेत करते रहते हैं ,यही किसी भी ईष्ट को दी जाने वाली पूजा को ईष्ट तक पहुचाते हैं ,,यदि इन्हें पूजा नहीं मिल रही होती है तो यह नाराज भी हो सकते हैं और निर्लिप्त भी हो सकते हैं ,,ऐसे में आप किसी भी ईष्ट की आराधना करे वह उस ईष्ट तक नहीं पहुँचता ,क्योकि सेतु कार्य करना बंद कर देता है ,,बाहरी बाधाये ,अभिचार आदि ,नकारात्मक ऊर्जा बिना बाधा व्यक्ति तक पहुचने लगती है ,,कभी कभी व्यक्ति या परिवारों द्वारा दी जा रही ईष्ट की पूजा कोई अन्य बाहरी वायव्य शक्ति लेने लगती है ,अर्थात पूजा न ईष्ट तक जाती है न उसका लाभ मिलता है ,,ऐसा कुलदेवता की निर्लिप्तता अथवा उनके कम शशक्त होने से होता है ,,
कुलदेवता या देवी सम्बंधित व्यक्ति के पारिवारिक संस्कारों के प्रति संवेदनशील होते हैं और पूजा पद्धति ,उलटफेर ,विधर्मीय क्रियाओं अथवा पूजाओं से रुष्ट हो सकते हैं ,सामान्यतया इनकी पूजा वर्ष में एक बार अथवा दो बार निश्चित समय पर होती है ,यह परिवार के अनुसार भिन्न समय होता है और भिन्न विशिष्ट पद्धति होती है ,,शादी-विवाह-संतानोत्पत्ति आदि होने पर इन्हें विशिष्ट पूजाएँ भी दी जाती हैं ,,,यदि यह सब बंद हो जाए तो या तो यह नाराज होते हैं या कोई मतलब न रख मूकदर्शक हो जाते हैं और परिवार बिना किसी सुरक्षा आवरण के पारलौकिक शक्तियों के लिए खुल जाता है ,परिवार में विभिन्न तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं ,,अतः प्रत्येक व्यक्ति और परिवार को अपने कुल देवता या देवी को जानना चाहिए तथा यथायोग्य उन्हें पूजा प्रदान करनी चाहिए, जिससे परिवार की सुरक्षा -उन्नति होती रहे।
कैसे जाने कौन हैं आपके कुलदेवता /देवी
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आज के समय में बहुतायत में पाया जा रहा है की लोगों को अपने कुलदेवता/देवी का पता ही नहीं है वर्षों से कुलदेवता/देवी को पूजा नहीं मिल रही है। घर-परिवार का सुरक्षात्मक आवरण समाप्त हो जाने से अनेकानेक समस्याएं अनायास घेर रही हैं नकारात्मक उर्जाओं की आवाजाही बेरिक टोक हो रही है। वर्षों से स्थान परिवर्तन के कारण पता ही नहीं है की हमारे कुलदेवता/देवी कौन है कैसे उनकी पूजा होती है कब उनकी पूजा होती है आदि आदि। इस हेतु एक प्रभावी प्रयोग है जिससे यह जाना जा सकता है की आपके कुलदेवता कौन है। यह एक साधारण किन्तु प्रभावी प्रयोग है जिससे आप अपने कुलदेवता अथवा देवी को जान सकते हैं।
प्रयोग को मंगलवार से शुरू करें और ११ मंगलवार तक करते रहें। मंगलवार को सुबह स्नान आदि से स्वच्छ पवित्र हो अपने देवी देवता की पूजा करें फिर एक साबुत सुपारी लेकर उसे अपना कुलदेवता/देवी मानकर स्नान आदि करवाकर ,उस पर मौली लपेटकर किसी पात्र में स्थापित करें इसके बाद आप अपनी भाषा में उनसे अनुरोध करें की "हे कुल देवता में आपको जानना चाहता हूँ ,मेरे परिवार से आपका विस्मरण हो गया है ,हमारी गलतियों को क्षमा करते हुए हमें अपनी जानकारी दें ,इस हेतु में आपका यहाँ आह्वान करता हूँ ,आप यहाँ स्थान ग्रहण करें और मेरी पूजा ग्रहण करते हुए अपने बारे में हमें बताएं इसके बाद उस सुपारी का पंचोपचार पूजन करें। अब रोज रात को उस सुपारी से प्रार्थना करें की हे कुल्द्वता/देवी में आपको जानना चाहता हूँ ,कृपा कर स्वप्न में मार्गदर्शन दीजिये फिर सुपारी को तकिये के नीचे रखकर सो जाइए सुबह उठाकर पुनः उसे पूजा स्थान पर स्थापित कर पंचोपचार पूजन करें। यह क्रम प्रथम मंगलवार से ११ मंगलवार तक जारी रखें हर मंगलवार को व्रत रखें इस अवधि के दौरान शुद्धता का विशेष ध्यान रखें ,यहाँ तक की बिस्तर और सोने का स्थान तक शुद्ध और पवित्र रखें ब्रह्मचर्य का पालन करें और मांस-मदिरा से पूर्ण परहेज रखें। इस प्रयोग की अवधि के अन्दर आपको स्वप्न में आपके कुलदेवता/देवी की जानकारी मिल जायेगी। अगर खुद न समझ सकें तो योग्य जानकार से स्वप्न विश्लेषण करवाकर जान सकते हैं। इस तरह वर्षों से भूली हुई कुलदेवता की समस्या हल हो जाएगी और पूजा देने पर आपके परिवार की बहुत सी समस्याएं समाप्त हो जायेंगी।
डॉ0 विजय शंकर मिश्र:।
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Tejraftarnews.in: भगवान शिव के अवतार ऋषि दुर्वासा
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भारत के पौराणिक इतिहास में अनेक ऐसे ऋषियों, मुनियों का जिक्र है, जिनके पास अलौकिक शक्तियां थीं। वह अपनी इसी शक्ति के कारण चाहे तो श्राप देकर सामने वाले को भस्म कर सकते थे या फिर वरदान के द्वारा किसी का जीवन खुशियों से भर देते थे। यह सब उन्हें क्रोधित करने व प्रसन्न करने से जुड़ा था।
ऐसे ही एक महर्षि थे दुर्वासा ऋषि, जो अपने क्रोध के लिए जाने जाते थे। ऋषि दुर्वासा को शिव का अवतार कहा जाता था लेकिन जहां भोले शंकर को प्रसन्न करना बेहद आसान माना जाता है वहीं ऋषि दुर्वासा को प्रसन्न करना शायद सबसे मुश्किल काम था। उनका ज्ञान एवं तपोबल था। वे एक सिद्ध योगी हैं। उन्हें क्रोध और श्राप देने के कारण जाना जाता है।
इनके पिता महर्षि अत्रि और माता सती अनुसूइया जी थीं। महर्षि अत्रि जी ब्रह्मा के मानस पुत्र थे और उनकी पत्नी अनुसूया जी पतिव्रता थीं, जिस कारण उनके पातिव्रत धर्म की परीक्षा लेने हेतु देवी सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती ने भगवन ब्रह्मा, विष्णु और महेश को उनके सतीत्व की परीक्षा लेने आग्रह किया।
माता सती अनुसूइया ने अपने तपोबल से उन्हें शिशुओं के रूप में बदल दिया। माता सरस्वती, माँ लक्ष्मी और माँ पार्वती के अनुरोध पर सती अनुसूया ने उन्हें मुक्त कर दिया। त्रिदेव ने उन्हें अपने समान पुत्रों की प्राप्ति का वरदान दिया। भगवान् ब्रह्मा जी चंद्रमा के रूप में, भगवान् विष्णु दत्तात्रेय जी के रूप में और भगवान् शिव जी दुर्वासा के रूप में अपने-अपने अंश से माता सटी अनुसूया के पुत्र के रूप में प्रकट हुए।
पूर्वकाल में महर्षि अत्रि ने संतान की प्राप्ति के लिए भगवान् ब्रह्मा से प्रार्थना की तो उन्होंने ऋषि अत्री को अपनी पत्नी सती अनुसूइया सहित ऋक्षकुल पर्वत पर पुत्र कामना के लिए कठोर तपस्या करने का आदेश दिया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर त्रिदेव ने प्रकट होकर वरदान दिया कि त्रिदेव उनके पुत्र रूप में जन्म लेंगे।
दुर्वासा ऋषि ने अपनी साधना एवं तपस्या द्वारा अनेक सिद्धियों को प्राप्त किया और अष्टांग योग का अवलम्बन कर अनेक महत्वपुर्ण उपलब्धियां प्राप्त कीं। ऋषि दुर्वासा जीवन-भर भक्तों की परीक्षा लेते रहे अपने महा ज्ञानी स्वरूप होने तथा सभी सिद्धियों के बावजूद भी ऋषि दुर्वासा अपने क्रोध को नियंत्रित नहीं कर पाते थे। उन्हें कभी-कभी अकारण ही भयंकर क्रोध भी आ जाता था और अपने क्रोधवश वे किसी को भी श्राप दे देते थे। उनके श्राप के कारण शकुन्तला को अनेक कष्ट झेलने पड़े।
एक बार कुंती के अतिथ्य सत्कार से प्रसन्न होकर उन्होंने उसे एक मंत्र प्रदान करते हैं जिसके द्वारा वह किसी भी देवता का आहवान कर सकती थी। इसी वरदान स्वरुप कुंती ने सूर्यदेव का आवाहन किया जिससे परिणाम स्वरूप कुँवारेपन में ही उन्हें कर्ण की प्राप्ति हुई। बाद में पाण्डु के शापग्रस्त होने पर उन्होंने और माद्री ने युधिष्टर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव की प्राप्ति की।
दुर्वासा ऋषि ने भगवान् श्री कृष्ण की परीक्षा लेने के लिए उन्हें अपनी जूठी खीर को शरीर पर मलने को कहा। भगवान् श्री कृष्ण ने ऐसा ही किया। ऋषि दुर्वासा ने प्रसन्न होकर भगवान् श्री कृष्ण को वरदान दिया कि सृष्टि का जितना प्रेम अन्न में होगा उतना ही उनमें भी होगा।
ऋषि दुर्वासा महाराज अम्बरीष के राजभवन में पधारे। उस दिन राजा अंबरीष निर्जला एकादशी उपरांत द्वादशी व्रत पालन में थे। पूजा पाठ करने के पश्चात राजा ने ऋषि दुर्वासा को प्रसाद ग्रहण करने का निवेदन किया ताकि वे अपना व्रत पूर्ण कर सकें। परंतु ऋषि दुर्वासा यमुना स्नान करके ही कुछ ग्रहण करने की बात कहकर चले गए। इधर पारण का समय समाप्त हो रहा हो रहा था; अतः ब्राह्मणों के परामर्श के अनुसार राजा ने प्रसाद के रूप में चरणामृत ग्रहण कर लिया।
ऋषि दुर्वासा ने यह जान कर राजा अम्बरीश को भस्म करने के लिए अपनी जटा से क्रत्या नामक राक्षसी को उत्पन्न किया। राजा ने बिना विचलित हुए भगवान विष्णु का स्मरण किया। सुदर्शन चक्र राजा अंबरीष करते थे।
कृत्या जैसे ही राजा पर झपटी उसे सुदर्शन चक्र ने नष्ट कर दिया और अब दुर्वासा ऋषि आगे आगे और सुदर्शन चक्र उनके पीछे पीछे। दुर्वासा जी को अपना पिंड छुड़ाना भारी पड़ गया। तीनों लोकों में भागने के बाद वे भगवान् शिव की शरण में गए तो भगवान् शिव ने अपने असमर्थता प्रकट की और भगवान् विष्णु की शरण में जाने को कहा।
भगवान् विष्णु ने उन्हें राजा अम्बरीश से क्षमा मांगने को कहा। ऋषि दुर्वासा राजा अम्बरीश की शरण में गए और अपने आचरण के लिए क्षमा माँगी। महर्षि दुर्वासा की यह दशा देखकर राजा अम्बरीश ने सुदर्शन चक्र की स्तुति कर उन्हें लौट जाने का आग्रह किया।
दुर्योधन ने ऋषि दुर्वासा के आगमन पर उनकी बहुत आवभगत की जिससे वे खुश हो गए। उन्हें प्रसन्न कर दुर्योधन ने उन्हें युधिष्टर का आथित्य स्वीकार करने को कहा और ऐसे वक्त जाने का आग्रह किया जब वे भोजन कर चुकें। ऐसा ही हुआ। द्रौपदी ने सूर्यदेव द्वारा दी गई दिव्य बटलोई को माँज दिया था। ऋषि अपने शिष्यों सहित स्नान ध्यान को तत्पर हुए तो द्रौपदी ने भगवान् श्री कृष्ण का स्मरण किया।
भगवान् श्री कृष्ण प्रकट हो गए। द्रौपदी ने अपनी समस्या बताई तो उन्होंने बटलोई को माँगा और उसे अन्दर से देखा तो एक साग का पत्ता उन्हें लगा हुआ मिल गया और उन्होंने उसे ही खा लिया। उनके साग के पत्ते को खाते ही दुर्वासा ऋषि और उनके शिष्यों की भूख खत्म हो गई और वे सब युधिष्टर के श्राप के भय से वहाँ लौट कर ही नहीं आये।गुरु नानक देव दुर्वासा ऋषि के अंश रूप में पैदा हुए थे।
डॉ0 विजय शंकर मिश्र:।
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Tejraftarnews.in: ।। शिव- सती की कथा।।
दक्ष प्रजापति की कई पुत्रियां थी। सभी पुत्रियां गुणवती थीं। पर दक्ष के मन में संतोष नहीं था। वे चाहते थे उनके घर में एक ऐसी पुत्री का जन्म हो, जो शक्ति-संपन्न हो। सर्व-विजयिनी हो। दक्ष एक ऐसी पुत्री के लिए तप करने लगे। तप करते-करते अधिक दिन बीत गए, तो भगवती आद्या ने प्रकट होकर कहा, 'मैं तुम्हारे तप से प्रसन्न हूं। मैं स्वय पुत्री रूप में तुम्हारे यहाँ जन्म धारण करूंगी। मेरा नाम होगा सती। मैं सती के रूप में जन्म लेकर अपनी लीलाओं का विस्तार करूंगी।' फलतः भगवती आद्या ने सती रूप में दक्ष के यहाँ जन्म लिया। सती दक्ष की सभी पुत्रियों में अलौकिक थीं। उन्होंने बाल्यकाल में ही कई ऐसे अलौकिक कृत्य कर दिखाए थे, जिन्हें देखकर स्वयं दक्ष को भी विस्मय की लहरों में डूब जाना पड़ा।
जब सती विवाह योग्य हुई, तो दक्ष को उनके लिए वर की चिंता हुई। उन्होंने ब्रह्मा जी से परामर्श किया। ब्रह्मा जी ने कहा, 'सती आद्या का अवतार हैं। आद्या आदिशक्ति और शिव आदि पुरुष हैं। अतः सती के विवाह के लिए शिव ही योग्य और उचित वर हैं।' दक्ष ने ब्रह्मा जी की बात मानकर सती का विवाह भगवान शिव के साथ कर दिया। सती कैलाश में जाकर भगवान शिव के साथ रहने लगीं। यद्यपि भगवान शिव के दक्ष के जामाता थे, किंतु एक ऐसी घटना घटी जिसके कारण दक्ष के हृदय में भगवान शिव के प्रति बैर और विरोध पैदा हो गया। घटना इस प्रकार थी-
एक बार ब्रह्मा ने धर्म के निरूपण के लिए एक सभा का आयोजन किया था। सभी बड़े-बड़े देवता सभा में एकत्र थे। भगवान शिव भी एक ओर बैठे थे। सभा मण्डल में दक्ष का आगमन हुआ। दक्ष के आगमन पर सभी देवता उठकर खड़े हो गए, पर भगवान शिव खड़े नहीं हुए। उन्होंने दक्ष को प्रणाम भी नहीं किया। फलतः दक्ष ने अपमान का अनुभव किया। केवल यही नहीं, उनके हृदय में भगवान शिव के प्रति ईर्ष्या की आग जल उठी। वे उनसे बदला लेने के लिए समय और अवसर की प्रतीक्षा करने लगे। भगवान शिव को किसी के मान और किसी के अपमान से क्या मतलब? वे तो समदर्शी हैं। उन्हें तो चारों ओर अमृत दिखाई पड़ता है। जहां अमृत होता है, वहां कडुवाहट और कसैलेपन का क्या काम?
भगवान शिव कैलाश में दिन-रात राम-राम कहा करते थे। सती के मन में जिज्ञासा उत्पन्न हो उठी। उन्होंने अवसर पाकर भगवान शिव से प्रश्न किया, 'आप राम-राम क्यों कहते हैं? राम कौन हैं?' भगवान शिव ने उत्तर दिया, 'राम आदि पुरुष हैं, स्वयंभू हैं, मेरे आराध्य हैं। सगुण भी हैं, निर्गुण भी हैं।' किंतु सती के कंठ के नीचे बात उतरी नहीं। वे सोचने लगीं, अयोध्या के नृपति दशरथ के पुत्र राम आदि पुरुष के अवतार कैसे हो सकते हैं? वे तो आजकल अपनी पत्नी सीता के वियोग में दंडक वन में उन्मत्तों की भांति विचरण कर रहे हैं। वृक्ष और लताओं से उनका पता पूछते फिर रहे हैं। यदि वे आदि पुरुष के अवतार होते, तो क्या इस प्रकार आचरण करते? सती के मन में राम की परीक्षा लेने का विचार उत्पन्न हुआ। सीता का रूप धारण करके दंडक वन में जा पहुंची और राम के सामने प्रकट हुईं। भगवान राम ने सती को सीता के रूप में देखकर कहा, 'माता, आप एकाकी यहाँ वन में कहां घूम रही हैं? बाबा विश्वनाथ कहां हैं?' राम का प्रश्न सुनकर सती से कुछ उत्तर देते न बना। वे अदृश्य हो गई और मन ही मन पश्चाताप करने लगीं कि उन्होंने व्यर्थ ही राम पर संदेह किया। राम सचमुच आदि पुरुष के अवतार हैं। सती जब लौटकर कैलाश गईं, तो भगवान शिव ने उन्हें आते देख कहा, 'सती, तुमने सीता के रूप में राम की परीक्षा लेकर अच्छा नहीं किया। सीता मेरी आराध्या हैं। अब तुम मेरी अर्धांगिनी कैसे रह सकती हो! इस जन्म में हम और तुम पति और पत्नी के रूप में नहीं मिल सकते।' शिव जी का कथन सुनकर सती अत्यधिक दुखी हुईं, पर अब क्या हो सकता था। शिव जी के मुख से निकली हुई बात असत्य कैसे हो सकती थी? शिव जी समाधिस्थ हो गए। सती दुख और पश्चाताप की लहरों में डूबने उतारने लगीं।
उन्हीं दिनों सती के पिता कनखल में बहुत बड़ा यज्ञ कर रहे थे। उन्होंने यज्ञ में सभी देवताओं और मुनियों को आमन्त्रित किया था, किंतु शिव जी को आमन्त्रित नहीं किया था, क्योंकि उनके मन में शिव जी के प्रति ईर्ष्या थी। सती को जब यह ज्ञात हुआ कि उसके पिता ने बहुत बड़े यज्ञ की रचना की है, तो उनका मन यज्ञ के समारोह में सम्मिलित होने के लिए बैचैन हो उठा। शिव जी समाधिस्थ थे। अतः वे शिव जी से अनुमति लिए बिना ही वीरभद्र के साथ अपने पिता के घर चली गईं।
कहीं-कहीं सती के पितृगृह जाने की घटना का वर्णन एक दूसरे रूप में इस प्रकार मिलता है— एक बार सती और शिव कैलाश पर्वत पर बैठे हुए परस्पर वार्तालाप कर रहे थे। उसी समय आकाश मार्ग से कई विमान कनखल कि ओर जाते हुए दिखाई पड़े। सती ने उन विमानों को दिखकर भगवान शिव से पूछा, 'प्रभो, ये सभी विमान किसके है और कहां जा रहे हैं?'
भगवान शकंर ने उत्तर दिया, 'आपके पिता ने यज्ञ की रचना की है। देवता और देवांगनाएं इन विमानों में बैठकर उसी यज्ञ में सम्मिलित होने के लिए जा रहे हैं।'
सती ने दूसरा प्रश्न किया, 'क्या मेरे पिता ने आपको यज्ञ में सम्मिलित होने के लिए नहीं बुलाया?'
भगवान शंकर ने उत्तर दिया, 'आपके पिता मुझसे बैर रखते हैं, फिर वे मुझे क्यों बुलाने लगे?'
सती मन ही मन सोचने लगीं, फिर बोलीं, 'यज्ञ के अवसर पर अवश्य मेरी बहनें आएंगी। उनसे मिले हुए बहुत दिन हो गए। यदि आपकी अनुमति हो, तो मैं भी अपने पिता के घर जाना चाहती हूं। यज्ञ में सम्मिलित हो लूंगी और बहनों से भी मिलने का सुअवसर मिलेगा।'
भगवान शिव ने उत्तर दिया, 'इस समय वहां जाना उचित नहीं होगा। आपके पिता मुझसे जलते हैं, हो सकता है वे आपका भी अपमान करें। बिना बुलाए किसी के घर जाना उचित नहीं होता।'
भगवान शिव ने उत्तर दिया,'हां, विवाहिता लड़की को बिना बुलाए पिता के घर नहीं जाना चाहिए, क्योंकि विवाह हो जाने पर लड़की अपने पति की हो जाती है। पिता के घर से उसका संबंध टूट जाता है।' किंतु सती पीहर जाने के लिए हठ करती रहीं। अपनी बात बार-बात दोहराती रहीं। उनकी इच्छा देखकर भगवान शिव ने पीहर जाने की अनुमति दे दी। उनके साथ अपना एक गण भी कर दिया, उस गण का नाम वीरभद्र था।
सती वीरभद्र के साथ अपने पिता के घर गईं, किंतु उनसे किसी ने भी प्रेमपूर्वक वार्तालाप नहीं किया। दक्ष ने उन्हें देखकर कहा,'तुम क्या यहाँ मेरा अपमान कराने आई हो? अपनी बहनों को तो देखो, वे किस प्रकार भांति-भांति के अलंकारों और सुंदर वस्त्रों से सुसज्जित हैं। तुम्हारे शरीर पर मात्र बाघंबर है। तुम्हारा पति श्मशानवासी और भूतों का नायक है। वह तुम्हें बाघंबर छोड़कर और पहना ही क्या सकता है।' दक्ष के कथन से सती के हृदय में पश्चाताप का सागर उमड़ पड़ा। वे सोचने लगीं, ‘उन्होंने यहाँ आकर अच्छा नहीं किया। भगवान ठीक ही कह रहे थे, बिना बुलाए पिता के घर भी नहीं जाना चाहिए। पर अब क्या हो सकता है? अब तो आ ही गई हूं।'
पिता के कटु और अपमानजनक शब्द सुनकर भी सती मौन रहीं। वे उस यज्ञमंडल में गईं जहां सभी देवता और ॠषि-मुनि बैठे थे तथा यज्ञकुण्ड में धू-धू करती जलती हुई अग्नि में आहुतियां डाली जा रही थीं। सती ने यज्ञमंडप में सभी देवताओं के तो भाग देखे, किंतु भगवान शिव का भाग नहीं देखा। वे भगवान शिव का भाग न देखकर अपने पिता से बोलीं, 'पितृश्रेष्ठ! यज्ञ में तो सबके भाग दिखाई पड़ रहे हैं, किंतु कैलाशपति का भाग नहीं है। आपने उनका भाग क्यों नहीं दिया?' दक्ष ने गर्व से उत्तर दिया, 'मै तुम्हारे पति कैलाश को देवता नहीं समझता। वह तो भूतों का स्वामी, नग्न रहने वाला और हड्डियों की माला धारण करने वाला है। वह देवताओं की पंक्ति में बैठने योग्य नहीं हैं। उसे कौन भाग देगा।
सती के नेत्र लाल हो उठे। उनकी भौंहे कुटिल हो गईं। उनका मुखमंडल प्रलय के सूर्य की भांति तेजोद्दीप्त हो उठा। उन्होंने पीड़ा से तिलमिलाते हुए कहा, 'ओह! मैं इन शब्दों को कैसे सुन रहीं हूं, मुझे धिक्कार है। देवताओ, तुम्हें भी धिक्कार है! तुम भी उन कैलाशपति के लिए इन शब्दों को कैसे सुन रहे हो, जो मंगल के प्रतीक हैं और जो क्षण मात्र में संपूर्ण सृष्टि को नष्ट करने की शक्ति रखते हैं। वे मेरे स्वामी हैं। नारी के लिए उसका पति ही स्वर्ग होता है। जो नारी अपने पति के लिए अपमानजनक शब्दों को सुनती है, उसे नरक में जाना पड़ता है।
पृथ्वी सुनो, आकाश सुनो और देवताओं, तुम भी सुनो! मेरे पिता ने मेरे स्वामी का अपमान किया है। मैं अब एक क्षण भी जीवित रहना नहीं चाहती।' सती अपने कथन को समाप्त करती हुई यज्ञ के कुण्ड में कूद पड़ी। जलती हुई आहुतियों के साथ उनका शरीर भी जलने लगा। यज्ञमंडप में खलबली पैदा हो गई, हाहाकार मच गया। देवता उठकर खड़े हो गए। वीरभद्र क्रोध से कांप उटे। वे उछ्ल-उछलकर यज्ञ का विध्वंस करने लगे।
यज्ञमंडप में भगदड़ मच गई। देवता और ॠषि-मुनि भाग खड़े हुए। वीरभद्र ने देखते ही देखते दक्ष का मस्तक काटकर फेंक देया। समाचार भगवान शिव के कानों में भी पड़ा। वे प्रचंड आंधी की भांति कनखल जा पहुंचे। सती के जले हुए शरीर को देखकर भगवान शिव ने अपने आपको भूल गए। सती के प्रेम और उनकी भक्ति ने शंकर के मन को व्याकुल कर दिया। उन शंकर के मन को व्याकुल कर दिया, जिन्होंने काम पर भी विजय प्राप्त की थी और जो सारी सृष्टि को नष्ट करने की क्षमता रखते थे। वे सती के प्रेम में खो गए, बेसुध हो गए।
भगवान शिव ने उन्मत की भांति सती के जले हुए शरीर को कंधे पर रख लिया। वे सभी दिशाओं में भ्रमण करने लगे। शिव और सती के इस अलौकिक प्रेम को देखकर पृथ्वी रुक गई, हवा रूक गई, जल का प्रवाह ठहर गया और रुक गईं देवताओं की सांसे। सृष्टि व्याकुल हो उठी, सृष्टि के प्राणी पुकारने लगे- पाहिमाम! पाहिमाम!
भयानक संकट उपस्थित देखकर सृष्टि के पालक भगवान विष्णु आगे बढ़े। वे भगवान शिव की बेसुधी में अपने चक्र से सती के एक-एक अंग को काट-काट कर गिराने लगे। धरती पर इक्यावन स्थानों में सती के अंग कट-कटकर गिरे। जब सती के सारे अंग कट कर गिर गए, तो भगवान शिव पुनः अपने आप में आए। जब वे अपने आप में आए, तो पुनः सृष्टि के सारे कार्य चलने लगे।
धरती पर जिन इक्यावन स्थानों में सती के अंग कट-कटकर गिरे थे, वे ही स्थान आज शक्ति के पीठ स्थान माने जाते हैं। आज भी उन स्थानों में सती का पूजन होता हैं, उपासना होती है। धन्य था शिव और सती का प्रेम। शिव और सती के प्रेम ने उन्हें अमर बना दिया है, वंदनीय बना दिया है।
– डॉ0 विजय शंकर मिश्र:।।
Tejraftarnews.in: #गीर्ट_वाइल्डर्स आपने नाम नहीं सूना होगा।
मगर ये निदरलैंड के बड़े नेता हैं..
वहाँ के सांसद हैं।
कल इन्होने बड़ी ही महत्वपूर्ण बात वहाँ की संसद में बोली।
उन्होंने कहा "अगर इज़राइल गिर गया, तो एथेंस, पेरिस और एम्स्टर्डम अगले होंगे। पश्चिम में हमारी माएं रात में शांति से सो सकती हैं, क्योंकि इज़राइली सैनिकों की माएं जागती रहती हैं, सोचती हैं कि उनका बच्चा युद्ध से जीवित वापस आएगा या नहीं।"
सच है ये और सिर्फ यूरोप का नहीं... भारत के हिन्दुओं का भी सच यही है।
जिस दिन इजराइल ढह गया।
अगला नम्बर उ@ म्माह से लड़ने का आपका है।
उनका पहला निशाना हिंदुस्तान होगा।
और उनके 20 करोड़ भाई उनके साथ होंगे।
तो इजराइल के लिए प्रार्थना और आवाज तुम्हारी जरुरत है...
इजराइल से भी ज्यादा!!
Tejraftarnews.in: मुझे नहीं पता यह क्या है,
मुझे यह भी नहीं पता कि इसका वास्तविक अर्थ क्या है,
और न ही मुझे यह ज्ञात है कि इसका किसी हिंदू लड़की पर क्या प्रभाव पड़ता है।
किन्तु इसमें अवश्य कुछ ऐसी बात है,
जो एक लड़की को अपने ही सगे भाई पर बलात्कार का आरोप लगा देती है।
निश्चित ही इसमें कुछ ऐसा होगा,
जो एक लड़की को अपने पिता की प्रतिष्ठा को सार्वजनिक मंच पर आघात पहुँचाने के लिए उकसाता है।
और अवश्य ही इसमें कोई कारण होगा,
जिसके चलते एक लड़की अपनी ही माँ पर थूक कर उनके सामने निकाहनामा फेंक देती है, की अब मैं ऐशा हु आपकी अमृता नहीं।
तथा समस्त रिश्तेदारों के समक्ष यह घोषणा कर देती है कि अब उसका उनसे कोई संबंध नहीं है।
अब कोई जानकार ही बता सकता है कि यह वास्तव में क्या है।
यदि ऐसा आपके घर-परिवार में दिखाई दे, तो सावधान हो जाना चाहिए।
वैसे ये एक #लव_जिहाद में पीड़ित हिंदू लड़की के मोबाईल के कवर में मिला था इसे नष्ट करने के बाद वो नियंत्रण में है परिवार के साथ सुरक्षित है। और उसने ये बात स्वीकारा कि वो उस मुस्लिम लड़के के साथ दरगाह जाती थी और वहां उसे कुछ पिलाया जाता था फिर उसे कुछ भी होश नहीं होता था। और उसके कमर में एक धागा भी बंधवाया था जिससे उसे नजर न लगे।
Tejraftarnews.in: . *जय श्री राम*
*सोमवार, 13 अप्रैल 2026 के मुख्य समाचार*
🔶संगीत जगत से दुखद खबर : दिग्गज गायिका आशा भोसले का निधन, भारतीय संगीत को दुनियाभर में दिलाई नई पहचान
🔶ट्रंप का फरमान या तेहरान की अकड़, PAK में 21 घंटे चली US-ईरान मैराथन बातचीत हुई फेल
🔶इस्लामाबाद वार्ता के बाद ट्रंप का बड़ा ऐलान: होरमुज में शुरू करेगा नाकेबंदी, US Navy को दी खुली छूट
🔶युगांडा आर्मी चीफ का तुर्की को अल्टीमेटमः अपनी “सबसे खूबसूरत महिला” से मेरी शादी करवाओ, 1 अरब डॉलर भी दो वर्ना सभी कूटनीतिक संबंध खत्म
🔶'डील होने की वाली थी, लेकिन', ईरान ने बताया आखिरी मौके पर पलटा अमेरिका
🔶कर्नाटक कांग्रेस के 30 विधायक दिल्ली पहुंचे:कैबिनेट में फेरबदल की मांग; पहली बार जीते 38 MLA ने भी 5 मंत्री पद मांगे
🔶अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से, 57 दिन चलेगी:28 अगस्त को खत्म होगी; 15 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू होंगे
🔶प.बंगाल में SIR- सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई:वोटर लिस्ट से 91 लाख नाम कटे थे; 23 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग
🔶US द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करने के ऐलान के बाद तेल की कीमतों में उछाल
🔶शिवराज सिंह चौहान बनाएंगे बिहार की सरकार... भाजपा से सौंपी केंद्रीय मंत्री को बड़ी जिम्मेदारी
🔶बिहार में अब 'रिवर्स मोड' में होगा विभागों का बंटवारा! CM भाजपा का तय, लेकिन गृह विभाग पर सस्पेंस बरकरार
🔶'बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं...', जेडी वेंस ने कहा कि ईरान अमेरिकी शर्तों पर सहमत नहीं हुआ
🔶लैंड फॉर जॉब केस में लालू यादव की ओर से SC में दायर अपील पर आज सुनवाई
🔶होर्मुज आम जहाजों के लिए खुला हुआ है- ईरानी सेना का बड़ा दावा
🔶केंद्र महिला आरक्षण को विपक्ष के ख़िलाफ़ ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल करना चाहती है: एमके स्टालिन
🔶खाप पंचायतें संवैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं: राजस्थान हाईकोर्ट
🔶दिल्ली में पेट्रोल वाहनों पर लग सकता है ब्रेक! EV Policy 2026-30 का ड्राफ्ट तैयार, बड़ा बदलाव तय
🔶नारी शक्ति वंदन अधिनियम: बीजेपी का 'प्लान-72' तैयार, विपक्ष के कड़े सवालों के बीच पास होगा यह ऐतिहासिक बिल?
🔶महिला विधेयक पर मोदी का सभी दलों को पत्र,कहा दल को परे रखकर एकस्वर में पारित करें विधेयक
🔶राजस्थान-MP-UP समेत 16 राज्यों में आज से बढ़ेगी गर्मी:मनाली में बर्फबारी, पारा माइनस 7 डिग्री पहुंचा; जम्मू में बवंडर उठा
🔷पाटीदार, कोहली और साल्ट के तूफान में उड़ी मुंबई, आरसीबी ने 18 रन से हराया
🔷IPL 2026 : गिल और बटलर के अर्धशतक, गुजरात टाइटंस ने लखनऊ सुपर जाइंट्स को हराया
*आप का दिन शुभ और मंगलमय हो सुप्रभात....!*
जय हो🙏 *🌎WELCOME🪷TO✍️*
*Tejraftarnews.in: *सुबह की देश राज्यों से बड़ी खबरें*
*14- अप्रैल - सोमवार*
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*1* 'ईरान में अब सब खत्म कर देंगे', इस्लामाबाद वार्ता विफल होने पर ट्रंप की खुली धमकी,वार्ता नाकाम होते ही फिर युद्ध छिड़ने के आसार, ईरान पर हमले का दौर शुरू कर सकते हैं ट्रंप
*2* नारी शक्ति वंदन सम्मेलन आज, पीएम मोदी करेंगे शिरकत, विकसित भारत 2047 का देंगे संदेश
*3* मोदी बोले- TMC ने मदरसों के लिए ₹6000 करोड़ दिए, अब 15 साल का हिसाब देना होगा, सिलीगुड़ी की जनसभा उनकी नींद उड़ा देगी
*4* भारत में ईंधन की किल्लत नहीं': सरकार का बड़ा दावा- पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद भरे हैं भंडार
*5* चीन को भारत की दो टूक: अरुणाचल के कुछ स्थानों का नाम बदलने के दावे को किया खारिज, बताया भ्रामक और निराधार
*6* आशा भोसले का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार आज, मुंबई के शिवाजी पार्क में शाम 4 बजे दी जाएगी मुखाग्नि; मल्टी-ऑर्गन फेल्योर से कल निधन हुआ
*7* कांग्रेस बोली-सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती, जयराम रमेश ने कहा- महिला आरक्षण में बदलाव से देश को गुमराह किया जा रहा
*8* महिलाओं को संसद में 33% आरक्षण देने वाले कानून पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। यह याचिका कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि इसे जनगणना और परिसीमन से न जोड़ा जाए और तुरंत लागू किया जाए
*9* पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को फ्रीज करने के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगा। कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले पर नई याचिका के साथ लंबित याचिकाओं पर भी विचार करने पर सहमति जताई। चुनाव आयोग ने पहले चरण के मतदान वाली विधानसभा सीटों के लिए नौ अप्रैल को मतदाता सूची को अंतिम रूप देते हुए फ्रीज कर दिया था
*10* नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया है। उन्होंने भाजपा की नीतियों को विभाजनकारी बताते हुए चुनाव आयोग पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है। बंगाल चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले यह बदलाव राज्य की राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
*11* कर्नाटक कांग्रेस के 30 विधायक दिल्ली पहुंचे, कैबिनेट में फेरबदल की मांग; पहली बार जीते 38 MLA ने भी 5 मंत्री पद मांगे
*12* उमा भारती के लिए चेन पुलिंग कर पंजाब मेल रोकी, झांसी में 5 मिनट खड़ी रही; रेलवे बोला- ट्रेन समय पर थी, पूर्व CM ने कहा- पहले छूटी
*13* हापुड़ में भीषण सड़क हादसा: बारातियों से भरी बस और ट्रक की टक्कर में 6 की मौत, कई घायल
*14* गुजरात ने लगातार दूसरा IPL मैच जीता, लखनऊ को 7 विकेट से हराया, गिल-बटलर की फिफ्टी; प्रसिद्ध कृष्णा को 4 विकेट
*15* मुंबई लगातार तीसरा IPL मैच हारी, बेंगलुरु ने 18 रन से हराया; सॉल्ट, कोहली और पाटीदार की फिफ्टी
*16* आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद और राजस्थान रॉयल्स के बीच मैच खेला जाएगा। यह मैच शाम के 7:30 से हैदराबाद में शुरू होगा।
*17* ईरान-अमेरिका वार्ता बेनतीजा रहने से दबाव में बाजार, इस हफ्ते विदेशी निवेशकों की एक्टिविटी, ग्लोबल मार्केट की चाल पर भी रहेगी नजर
*18* ईरान-अमेरिका सीजफायर में पुतिन की एंट्री, रूस के राष्ट्रपति बोले- मध्यस्थता के लिए तैयार
*19* जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में बर्फबारी, MP-UP, राजस्थान में तापमान 40°C के करीब; गुजरात-आंध्र प्रदेश में हीटवेव का अलर्ट
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Tejraftarnews.in: 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
*आज का राशिफल*
*अप्रैल 2026 , सोमवार*
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज आपका दिन बहुत ही अच्छा रहने वाला है। लंबे समय से चल रही रुकावटें खत्म हो जायेंगी। महिलाएं रसोई घर में काम करते हुए थोड़ी सावधानी जरूर बरतें। आप में सफलता और उच्च पद पाने की इच्छा बनेगी। आपकी कोशिश अपनी छाप छोड़ जाएगी। इस राशि के जो लोग एक्टिंग के क्षेत्र से जुड़े हैं उन्हें कोई बड़ा ऑफर मिल सकता है। धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। व्यस्त रहने से थकान होगी। स्वास्थ्य सुधार सम्भव है।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी , वु , वे, वो)
आज आपकी किस्मत आपके साथ रहेगी। आप घर में ताजा फूल की तरह अपने स्वाभाव में ताजगी बनायें रखें। ऑफिस में जो काम आपने किया है, उसका श्रेय किसी और को न ले जाने दें। अधिकारी आपको किसी जरूरी काम से यात्रा पर भेजने की योजना बना सकते हैं। आप कुछ ऐसे कार्यों को करने के लिये तैयार रहेंगे, जिन्हें करके आप ख़ुद के बारे में अच्छा महसूस करेंगे। यात्रा आपको थकान और तनाव देगी- लेकिन आर्थिक तौर पर फायदेमंद साबित होगी। घर से कलेश दूर होंगे।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज आपका दिन ठीक बहुत ही बढ़िया रहने वाला है। किसी कार्य में पड़ोसियों का सहयोग मिलेगा। समाजिक तौर पर आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। किसी समाजिक संगठन से जुड़ने के लिये भी दिन बहुत अच्छा रहेगा। सफलता में आ रही सभी दिक्कतें दूर होंगी। आप नए विचारों से परिपूर्ण रहेंगे और आप जिन कामों को करने के लिए चुनेंगे, वे आपको उम्मीद से ज़्यादा फायदा देंगे। परिवार के सभी सदस्यों में प्रेम बढ़ेगा। लवमेट एक-दूसरों की भावनाओं को समझने की कोशिश करें तो रिश्तों में मधुरता आयेगी।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज आपका भविष्य की योजनायें बनाने के लिये दिन बहुत अच्छा रहेगा। इस राशि के जो लोग मार्केटिंग के क्षेत्र से जुड़े हैं उन्हें काफी धनलाभ होने वाला है। आपके जीवन में आ रहे सभी कष्टों का निवारण होगा। कार्यक्षेत्र में आपके सामने कुछ ऐसी परिस्थितियां सामने आयेंगी, जिससे आप थोड़ा परेशान हो सकते हैं, लेकिन समय रहते सब ठीक हो जायेगा। कामकाजी महिलाओं के लिये दिन तरक्की दिलाने वाला रहेगा, आपको सैलरी में बढ़ोत्तरी भी मिल सकती है।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज आपका दिन मिली-जुली प्रतिक्रिया देने वाला है। कुछ नए मौके भी मिलेंगे जो आपको आर्थिक लाभ कराएंगे। पिछले किये गये प्रयासों का फल मिलने वाला है। आपकी भूमिका नेतृत्वकारी भी हो सकती है। किसी भी समस्या पर घबराने की बजाय अपनों की सलाह लें। पुरानी चिंताओं को भूलकर आगे की ओर बढ़ने की सोचें। जीवनसाथी से चल रही अनबन दूर हो जायेगी और रिश्तों में मधुरता आएगी। माता की सेहत अच्छी रहेगी। छात्रों का पढ़ाई में मन लगेगा। रोजगार के अवसर मिलेंगे।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज आपका दिन महत्वपूर्ण रहने वाला है। कोर्ट कचहरी में चल रहे मुकदमों का हल निकलेगा। किसी बड़े वकील की सहायता भी आपको मिल सकती है। कुंवारी कन्याओं के विवाह की तलाश कर रहे लोगों की तलाश पूरी हो सकती है। कन्या के लिये आपको सुयोग्य वर मिल सकता है। आपका आकर्षक स्वाभाव दूसरों का ध्यान आपकी ओर खीचेगा। अगर आप कोई नयी जमीन खरीदना चाह रहे हैं तो दिन बहुत ही अच्छा है स्वास्थ्य आज ठीक रहेगा। आपको खूब तरक्की मिलेगी।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज आपको कामकाज में सावधानी बरतने की जरूरत हैं। छोटे स्तर पर शुरु किये गया बिजनेस आपके लिये लाभकारी रहेगा। आपने जो लक्ष्य निर्धारित कर रखें है, उनके काफी करीब पहुंच जायेंगे। विरोधी आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे, लेकिन दोस्तो का सहयोग आपके साथ रहेगा। जरूरी कामों को दूसरों के भरोसे न छोड़े। इस राशि के छात्रों को काफी मेहनत करनी पड़ेगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। घरवालों से किसी विषय पर सलाह ले सकते हैं। ऑफिस में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज आपका मन आध्यात्म में अधिक लगा रहेगा। कोई नया काम शुरू करने का विचार आपके मन में आ सकता है। आप मांगलिक कार्यक्रमों की तैयारी में व्यस्त रहेंगे। किसी दोस्त से अचानक मुलाकात आपके भविष्य लिए फायदेमंद हो सकती है। अपने चारों ओर होने वाली गतिविधियों का ध्यान रखें, क्योंकि आपके काम का श्रेय कोई दूसरा ले सकता है। लवमेट के लिये भी दिन खुशियां लेकर आयेगा। आप मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे। दाम्पत्य जीवन में खुशहाली आएगी।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज आपका दिन ऊर्जा से भरपूर रहेगा । आपको वाणी पर संयम रखना होगा। इस राशि के जो लोग डॉक्टर हैं वो नयी क्लीनिक की ओपनिंग कर सकते हैं। इसमें सहयोगियों का पूरा-पूरा साथ आपको मिलेगा। बिजनेस में आपको सकारात्मक परिणाम मिलने वाला है। आपकी कोशिशें अपनी छाप छोड़ी जाएंगी। जिसका आपको फायदा जरूर मिलेगा। इससे आर्थिक स्थिति काफी मजबूत बनेगी। इस राशि के छात्र किसी एकान्त जगह पर जाकर पढ़ाई करें, पढ़ाई में मन लगेगा।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज आपका दिन खुशियां लेकर आया है। जो लोग राजनीति के क्षेत्र से जुड़े हैं उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जो लोग विदेश में उच्च शिक्षा के लिये जाने की सोच रहें हैं उन्हें किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला मिल सकता है। मानसिक रूप से प्रसन्नता बनी रहेगी। प्रतिस्पर्धियों पर विजय प्राप्त होगी। यात्रा और निवेश लाभ देने वाले हैं। अपने भाई-बहनों के साथ किसी अच्छी जगह जाने का प्लान कर सकते है आपको रुपये पैसे के लेन-देन में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज आपका दिन बहुत ही अच्छा रहने वाला हैं। साइंस और रिसर्च की फिल्ड से जुड़े लोगो को कोई नया प्रोजेक्ट मिल सकता है। पुराने कामों का निपटारा करने के लिये दिन अच्छा रहेगा। लोग आपकी मदत के लिये भी तैयार रहेंगे। बड़ों का दिया हुआ सुझाव आपके बहुत काम आयेगा। लोगों का आपके उपर भरोसा बढ़ेगा। बिजनेस मामलों में आप सही ढंग से अपनी बात रख पायेंगे। नयी सहभागिता होने की उम्मीद है। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज आपका दिन शानदार रहने वाला है। किसी सरकारी अधिकारी का सहयोग आपको मिलेगा। जीवनसाथी के साथ चल रहा पुराना तनाव दूर हो जायेगा। पार्टनर के साथ रोमांटिक डिनर कर सकते हैं। रचनात्मक शौक आपको सुकून का एहसास कराएंगे। आपकी रचनाओं की लोग तारीफ करेंगे। व्यर्थ की बातों पर तनाव लेने की जरूरत नहीं है। इससे आपको मानसिक तौर पर दिक्कतों पर सामना करना पड़ सकता है। सरकारी ऑफिसों में फंसा हुआ काम आसानी से हो जायेगा।
🔅 *_कृपया ध्यान दें👉_*
यद्यपि शुद्ध राशिफल की पूरी कोशिश रही है फिर भी इन राशिफलों में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ अन्तर हो सकता है। ऐसी स्थिति में आप किसी ज्योतिषी से अवश्य सम्पर्क करें। किसी भी भिन्नता के लिए हम उत्तरदायी नहीं हैं।
🌷आपका दिन मंगलमय हो।🌷
🙏धन्यवाद।🙏
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Tejraftarnews.in: 1️⃣3️⃣💎0️⃣4️⃣💎2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣
*🔥 आज की प्रेरणा प्रसंग 🔥*
*🌹 "दो कप और एक सवाल" 🌹*
बाइक को उसके घर के बाहर साइड में लगा कर वो घर के कैंची गेट को खोल कर अंदर घुसा,
ये क्या?
घर के मुख्य दरवाजे पर ताला लटका रहा था, उसने मोबाइल निकाल कर टाइम देखा, अब तक तो मित्रा को घर आ जाना चाहिए था, वो तो तय समय पर ही पहुंचा था। वही खड़े खड़े उसने मित्रा को फोन लगाया, उसके हैलो बोलने से पहले ही उधर से उतावली सी मित्रा की आवाज आई -"अरे..मैं आफिस से निकल ही रही थी, कि बॉस ने बुला लिया, कल की मीटिंग के पॉइंट्स डिसकस करने लगे... अभी फ्री हुई हूँ, निकल रही हूं... तुम ऐसा करो, इधर गुलाब के गमले के नीचे चाबी है, तुम चल कर अंदर बैठो , मैं 10 मिनट में पहुंच रही हूं"
"ओके ओके.. ईजी ईजी... आराम से आओ, मैं अंदर बैठता हूँ"- उसने कहा और फोन काट दिया।
गमले के नीचे से उसने चाबी बरामद की, दरवाजा खोल कर वो बाहर वाले कमरे में आया, पंखा ऑन किया.. और सोफे का एक कोना पकड़ कर उस पर बैठा ही था कि सेंटर टेबल पर नजर पड़ी।
एक प्लेट में दो बिस्कुट पड़े हुए थे.. दो चाय के खाली कप, इस तरह से पड़े थे कि चाय पीने वाले दो व्यक्ति आमने सामने बैठे होंगे।
मित्रा तो अकेली रहती है, अभी इस शहर में उसकी किसी से ज्यादा वाकफियत नही है... तो कौन सुबह सुबह आया होगा, जिस के साथ चाय पी गई?
बेफजूल सा शक उसके जेहन में कूदने लगा, उसने इस ख्याल को दिमाग से रुख़सत करने का यत्न किया...लेकिन ...!
"अरे..कोई भी हो सकता है, कोई आस- पड़ोस से महिला आई होगी, यहाँ ऑफिस जाने से पहले उसकी कोई कुलीग इधर आ गई होगी.." वो खुद को समझाने की कोशिश करने लगा ...
उसने मोबाइल में खुद को खपाने की कोशिश की, लेकिन बार बार उसकी नजर दो कपो पर जा कर अटक रही थी... कौन होगा दूसरा।
स्त्री के चरित्र को कोई नही जान सकता था, ये कही पढा हुआ वाक्य बार बार उसको याद आने लगा। 10 मिनट उसे बड़े भारी लग रहे थे। तभी बाहर स्कूटरी रुकने की आवाज आई, फिर कैंची गेट खड़का। चंद क्षणों में मित्रा ने कमरे में कदम रखा, वो हांफ रही थी, लगता है भागती हुई सी आई है, जून की भयंकर गर्मी ने रास्ते मे उसे बेहाल कर दिया था। उसने धम्म से खुद को सोफे पर पटका और एसी की तरफ देखा-"अरे यार, एसी क्यों नही चलाया?.."
वो उठा उसने एसी ऑन किया, मित्रा को देख कर जो सुकून, खुशी , आनन्द उसके चेहरे पर हमेशा आ जाता था, आज वो गायब था। ये बात तुरंत ही मित्रा ने नोट कर ली।
'क्या हुआ? कुछ अपसेट लग रहे हो"-मित्रा ने पूछा.
"नही,ऐसी कोई बात नही", उसने खुद को संभालते हुए कहा।
"रहने दो इस छुपाने की कोशिश को, इतना तो अब समझ आने लगे हो कि पता चल जाता है तुम्हारे मूड का...चलो, जल्दी से बताओ क्या बात है",-मित्रा ने थोड़ा शोख होते हुए कहा।
"कुछ नही ,छोड़ो...,पानी लाऊं तुम्हारे लिये? या चाय ही बना लाऊं?"।
"पांच मिनट दो मुझे, जरा सांस ले लूं, फिर मैं ही चाय बनाकर लाती हूँ, मेरे हाथ की चाय पीने ही तो आये हो तुम"-मित्रा चंचलता से बोली।
उसकी तरफ से इस चंचलता का कोई रिएक्शन ना देख कर मित्रा जरा सी विचलित हो गई, उठकर उसके पास आई ,उसके पास बैठते हुई बोली "क्या चल रहा तुम्हारे मन मे?"
अब उस से रहा नही गया, उसने टेबल पर पड़े हुए दो कपो की तरफ इशारा करते हुए कहा-"कौन आया था सुबह ?"
मित्रा को झटका सा लगा, उसने बौखलाते हुए,उसकी तरफ हैरानी से देखा, झटके से खड़ी हुई, उसने कुछ पल के लिए उसे ऐसे देखा, जैसे यकीन न हो रहा हो — फिर धीरे से मुस्कराई।
"अच्छा किया जो पूछ लिया... पर सुनो ज़रा ध्यान से।"
वो अब सेंटर टेबल की ओर बढ़ी।
"ये जो दो कप देख रहे हो, इनमें से एक तुम्हारे लिए ही था।" उसने कप उठाया, और हल्के से थपथपाते हुए बोली —"कल रात जब बात हो रही थी न फोन पर... और आज शाम की मुलाकात तय हुई थी,तो उसके बाद मैं तुम्हारे बारे सोच रही थी, इसी बेध्यानी में चाय बनाने किचन में चली गई, और चाय दो कप बन गई... मैं दो कप डाल कर ले आई और तुम्हे यहाँ हाजिर नाजिर मान कर दोनों कप पी गई, रात देर तक नींद नही आई फिर, सुबह लेट उठी ,बहुत लेट..नाश्ता भी नही बना पाई, सेब खाकर ही जाना पड़ा और घर भी यूँ अस्त व्यस्त पड़ा रहा, ये कप भी...!
वो कुछ बोल नहीं पाया।
मित्रा अब उसके करीब आ चुकी थी। उसका हाथ अपने हाथों में लेकर, आँखों मे आंखे डालते हुए बोली- "शक बहुत सस्ता होता है, और रिश्ता बड़ा कीमती, शक की रेखा इतनी बारीक होती है कि अगर वक्त रहते मिटा न दी जाए, तो दरार बन जाती है। शुक्र है तुमने पूछ लिया, अगर मन मे रखे रखते तो नासूर बन जाता"
उसने मुस्कराकर उसकी उंगलियाँ थाम लीं —
"अब चलो, तुम्हारे लिए नए कप में चाय बनाऊं?"
मित्रा की आँखों में अब संकोच नहीं, सुकून था।
और वो भी सारी दुविधाओं से निकल आया था।
टेबल पर कप अब भी रखे थे — मगर अब वे अपराधी नहीं थे, बल्कि गवाह थे उनके रिश्ते की मजबूती के।और दोनों की आँखों में अब एक नया विश्वास का स्वाद उतर आया था...
शायद चाय से भी ज़्यादा गर्म।
*👉शिक्षा*
हमेशा पहले सच्चाई को जानें, फिर धारणा बनाएं। बोलने में नहीं, छुपाने में रिश्ते मरते हैं।अक्सर हम छोटी-छोटी बातों को बड़ा बना लेते हैं। लेकिन यदि दिल साफ़ हो और इरादे नेक हों, तो हर छोटी बात सुलझाई जा सकती है।
*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।
Tejraftarnews.in: *आज 12 अप्रैल 2026, रविवार की मुख्य सुर्खियां इस प्रकार हैं:*
राष्ट्रीय/राजनीतिक खबरें
ईरान-अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, लेकिन 21 घंटे की मैराथन बातचीत के बाद भी कोई समझौता नहीं हो सका। JD Vance ने कहा कि डील नहीं हुई। ईरान ने सख्त रुख अपनाया है। लेबनान में इजरायल के हमलों में मौतें हुई हैं।
नेशनल हेराल्ड मामले में ED ने कांग्रेस से जुड़ी संपत्तियों पर नोटिस जारी किए और ₹661-700 करोड़ की अचल संपत्तियां जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की (दिल्ली, मुंबई, लखनऊ में प्राइम प्रॉपर्टी शामिल)।
वक्फ एक्ट के विरोध में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और त्रिपुरा में हिंसा, कई मौतें और पुलिसकर्मी घायल। ममता बनर्जी ने एक्ट का विरोध किया।
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति को राज्य विधेयकों पर फैसला लेने के लिए 3 महीने की डेडलाइन दी।
क्रिकेट/IPL 2026
CSK ने दिल्ली कैपिटल्स को हराकर पहली जीत दर्ज की। संजू सैमसन ने शतक लगाया और राजनीकांत स्टाइल में सेलिब्रेट किया।
पंजाब किंग्स ने सनराइजर्स हैदराबाद को 220+ रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए हराया।
बिहार के कटिहार में बस-पिकअप टक्कर में 10-13 लोगों की मौत, कई घ
Tejraftarnews.in: ब्रेकिंग
सिद्धार्थनगर
ग्राम पंचायत बहेरिया में भीषण आग का कहर, कई घर जलकर राख !
आग में उजड़े आशियाने, मदद को तरसे लोग !
फायर ब्रिगेड की लापरवाही पर फूटा गुस्सा !
भीषण आग ने कई घर को चंद मिनटों में किया राख !
हालात इतने भयावह रहे कि लोगों ने बार,बार फायर ब्रिगेड को किया कॉल !
लेकिन राहत समय पर नहीं पहुंची। मजबूर ग्रामीणों ने खुद आग बुझाने में जुटे रहे।
घटना के बाद पीड़ित परिवारों का रो ,रो कर बुरा हाल !
ग्राम प्रधान दिलीप पाण्डेय का बयान छह घर जले और एक गाय भी आग की चपेट में जख्मी, !
फायर ब्रिगेड को फोन करने पर बताया कि चौखड़ा में आग बुझा रहे !
ग्रामीण यहां से निकलने देंगे तभी आ सकते हैं !
Tejraftarnews.in: 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़: सिद्धार्थनगर में 'विधान केसरी' की खबर का बड़ा असर, सुधरा बिजली तंत्र!
👉 बड़ी कामयाबी: सिद्धार्थनगर के मढ़नी-ढेकहरी और जमधरा-संसरी मार्ग पर महीनों से लंबित बिजली पोल की समस्या का समाधान हो गया है।
👉 7 महीने का इंतजार खत्म:मढ़नी-ढेकहरी मार्ग के खुरहुरिया मोड़ पर 7 माह से गिरा हुआ पोल आखिरकार विभाग ने खड़ा कर दिया।
👉 खत्म हुआ मौत का साया:सड़क किनारे लटकते नंगे तारों से राहगीरों और मवेशियों पर मंडरा रहा करंट का खतरा अब टल गया है।
👉 खबर का धमाका: जमधरा-संसरी मार्ग पर झुके हुए पोल को 'विधान केसरी' में खबर छपने के बाद सीधा किया गया।
👉 एक्शन में विभाग: विद्युत विभाग की टीम भारी मशीनरी और ड्रिलिंग ट्रैक्टर के साथ मौके पर पहुँची और युद्धस्तर पर कार्य किया।
👉 मजबूत हुआ आधार:पोल को सीधा करने के साथ-साथ कंक्रीट और मिट्टी से बेस को मजबूत किया गया ताकि भविष्य में पोल न झुके।
👉 आपूर्ति बहाल: गिरे खंभों के कारण बार-बार होने वाली ट्रिपिंग और बिजली कटौती से अब ग्रामीणों को मुक्ति मिल गई है।
👉 ग्रामीणों ने जताया आभार: स्थानीय निवासियों ने विभाग की इस त्वरित कार्यवाही और मीडिया की निष्पक्ष पत्रकारिता की सराहना की।
👉 लापरवाही पर लगाम: ग्रामीणों ने चेतावनी दी थी कि यदि समाधान नहीं हुआ तो प्रदर्शन करेंगे, जिससे पहले ही विभाग हरकत में आया।
👉 सुरक्षित हुआ सफर:अब रात के अंधेरे में भी इन मुख्य मार्गों पर आवागमन पूरी तरह सुरक्षित और सुगम हो गया है।
इंतजार खान शोहरतगढ सिद्धार्थनगर
Tejraftarnews.in: ब्रेकिंग न्यूज
सिद्धार्थनगर, यूपी
डुमरियागंज क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत बहेरिया में भीषण आग का कहर, कई घर जलकर राख !
आग में उजड़े आशियाने, मदद को तरसे लोग !
फायर ब्रिगेड की लापरवाही पर फूटा गुस्सा !
भीषण आग ने कई घर को चंद मिनटों में किया राख !
हालात इतने भयावह रहे कि लोगों ने बार,बार फायर ब्रिगेड को किया कॉल !
लेकिन राहत समय पर नहीं पहुंची। मजबूर ग्रामीणों ने खुद आग बुझाने में जुटे रहे।
घटना के बाद पीड़ित परिवारों का रो ,रो कर बुरा हाल !
ग्राम प्रधान दिलीप पाण्डेय का बयान छह घर जले और एक गाय भी आग की चपेट में जख्मी, !
फायर ब्रिगेड को फोन करने पर बताया कि चौखड़ा में आग बुझा रहे !
ग्रामीण यहां से निकलने देंगे तभी आ सकते हैं !
संवाददाता,
बजरंगी प्रसाद चौधरी
Tejraftarnews.in: *शाम की देश राज्यों से बड़ी खबरें...*
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*नहीं रहीं दिग्गज गायिका आशा भोसले; 92 वर्ष की आयु में दुनिया को कहा अलविदा, कल अस्पताल में हुई थीं भर्ती।*
*1* नहीं रहीं सुरों की मल्लिका: आशा भोसले का निधन, देशभर में शोक; पीएम मोदी से लेकर कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
*2* आशा भोसले ने 20 भाषाओं में गाए थे 11000 से ज्यादा गाने, गिनीज बुक में दर्ज है नाम
*3* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने की जरूरत पर जोर दिया है। संसद के विशेष सत्र से पहले उन्होंने सभी दलों से एकजुट होकर विधेयक पारित करने की अपील की।
*4* सभी सांसद 16 से 18 अप्रैल तक संसद में रहें'; महिला आरक्षण पर चर्चा से पहले भाजपा ने जारी किया व्हिप
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*5* परिसीमन पर चर्चा के लिए 29 अप्रैल के बाद बुलाई जाए सर्वदलीय बैठक, खरगे की पीएम मोदी से मांग
*6* 'संविधान खत्म करने की हो रही कोशिश', राहुल गांधी ने भापजा-संघ पर साधा निशाना, राहुल गांधी ने कहा कि ये लोग देश में सबको बराबरी का हक नहीं देना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के लोग अंबेडकर की मूर्ति के सामने हाथ जोड़कर सिर्फ दिखावा करते हैं, जबकि उनका असली मकसद संविधान को नुकसान पहुंचाना है
*7* बंगाल के सिलीगुड़ी में PM मोदी की सभा, 3.6 करोड़ लोग पहले चरण में वोट डालेंगे; तमिलनाडु में राहुल का रोड शो
*8* देश में करीब ढाई करोड़ यूट्यूब चैनल्स, सिर्फ 30 लाख ही प्रोफेशनल, कई गलत सलाह या कॉपी-पेस्ट वाला कंटेंट फैला रहे
*9* 'मैं खुद को नहीं बचा पाई', वसुंधरा राजे के बयान पर राजस्थान में सियासी घमासान; अखिलेश-गहलोत ने ली चुटकी
*10* बंगाल चुनाव से पहले रेल मंत्रालय का बड़ा कदम, मुंबई से हावड़ा के लिए चलाई जाएगी दो अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें
*11* कर्नाटक कांग्रेस में गहराया संकट, CM सिद्धारमैया के करीबियों पर एक्शन की तैयारी में आलाकमान
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*12* SIR के बाद 12 राज्यों से हटाए गए 5.2 करोड़ नाम, UP में जुड़े 92 लाख नए मतदाता
*13* अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से, 57 दिन चलेगी, 28 अगस्त को खत्म होगी; 15 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू होंगे
*14* ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच घिसटा युवक, दो टुकड़े हुए, रतलाम में चलती गाड़ी में चढ़ रहा था, बैग से मिले चार लाख रुपए
*15* ईरान-अमेरिका की 21 घंटे चली बातचीत बेनतीजा, अमेरिकी उपराष्ट्रपति बोले- उन्हें बेस्ट ऑफर दिया; ईरान बोला- ट्रम्प की शर्तें ज्यादा सख्त
*16* राजस्थान-MP-UP समेत 16 राज्यों में आज से बढ़ेगी गर्मी, मनाली में बर्फबारी, पारा माइनस 7 डिग्री पहुंचा; जम्मू में बवंडर उठा
*17* IPL में आज LSG vs GT, लखनऊ ने पिछले तीन मुकाबलों में गुजरात को हराया, इकाना में 3 में से 2 मैच जीते
*18* IPL में आज बेंगलुरु vs मुंबई, डिफेंडिंग चैंपियन RCB ने 2, MI ने 1 मैच जीता; दोनों राजस्थान को नहीं हरा सके
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Tejraftarnews.in: *🌿 हर समस्या के लिए सही विटामिन 🌿*
*Vitamins for Every Symptom*
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1️⃣ Fatigue – Vitamin B12
थकान – विटामिन B12
2️⃣ Weak immunity – Vitamin C
कमजोर इम्युनिटी – विटामिन C
3️⃣ Hair fall – Biotin (Vitamin B7)
बाल झड़ना – बायोटिन (विटामिन B7)
4️⃣ Dry skin – Vitamin E
रूखी त्वचा – विटामिन E
5️⃣ Frequent colds – Vitamin C & D
बार-बार सर्दी-जुकाम – विटामिन C और D
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6️⃣ Muscle cramps – Magnesium + Vitamin D
मांसपेशियों में ऐंठन – मैग्नीशियम + विटामिन D
7️⃣ Poor night vision – Vitamin A
रात में कम दिखाई देना – विटामिन A
8️⃣ Slow wound healing – Vitamin C + Zinc
घाव देर से भरना – विटामिन C + जिंक
9️⃣ Mood swings / Anxiety – Vitamin B6 + Magnesium
मूड स्विंग / चिंता – विटामिन B6 + मैग्नीशियम
🔟 Joint pain – Vitamin D + K2
जोड़ों का दर्द – विटामिन D + K2
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1️⃣1️⃣ Pale skin / Dizziness – Iron + Vitamin B12
पीली त्वचा / चक्कर – आयरन + विटामिन B12
1️⃣2️⃣ Brittle nails – Biotin + Iron
कमजोर नाखून – बायोटिन + आयरन
1️⃣3️⃣ Poor memory / Brain fog – Omega-3 + B-complex
याददाश्त कमजोर – ओमेगा-3 + बी-कॉम्प्लेक्स
1️⃣4️⃣ Constipation – Fiber + Magnesium
कब्ज – फाइबर + मैग्नीशियम
1️⃣5️⃣ Numbness / Tingling – Vitamin B1 + B12
झनझनाहट / सुन्नपन – विटामिन B1 + B12
1️⃣6️⃣ Mouth ulcers – Vitamin B2, B3, B12
मुंह के छाले – विटामिन B2, B3, B12
1️⃣7️⃣ Bone weakness – Calcium + Vitamin D3 + K2
हड्डियों की कमजोरी – कैल्शियम + विटामिन D3 + K2
1️⃣8️⃣ Hormonal issues (Women) – Vitamin B6, E, D
हार्मोनल समस्याएं (महिलाएं) – विटामिन B6, E, D
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⚠️ ध्यान दें:
सिर्फ सप्लीमेंट पर निर्भर न रहें।
संतुलित आहार + सही जीवनशैली ही असली इलाज है।
कोई भी सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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Tejraftarnews.in: ब्रेकिंग न्यूज
सिद्धार्थनगर
आखिर स्वास्थ्य विभाग किसके दबाव में नहीं कर रहा कार्यवाही।
स्वास्थ्य विभाग के उपर खड़े हो रहे सवालिया निशान।
जनपद के सनई चौराहे पर संचालित आशिर्वाद अस्पताल पर गंभीर आरोप।
पीड़ित ने शिकायत कर की उच्च स्तरीय जांच की मांग।
पीड़ित के अनुसार मरीजों के जीवन के साथ खेल रहे आशीर्वाद अस्पताल के अप्रशिक्षित डाक्टर।
नामचीन डाक्टरों के नाम पर रजिस्ट्रेशन करा खुद करते हैं इलाज।
सरकारी डाक्टरों का नाम गिनवाकर मरीजों को फंसाते हैं जाल में,और शुरू होता है शोषण का दौर।
पीड़ित के अनुसार उसका परिवार भी हो चुका है इनके जालसाजी का शिकार।
Tejraftarnews.in: *आज 13 अप्रैल 2026 की प्रमुख सुर्खियां इस प्रकार हैं:*
अंतरराष्ट्रीय/विश्व समाचार (मुख्य फोकस)
अमेरिका-ईरान तनाव: अमेरिका-ईरान शांति वार्ता बेनतीजा रहने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी (blockade) का ऐलान किया है। आज से लागू होने की खबरें आ रही हैं। ईरान ने इसे 'बेतुका' बताया है। तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत में LPG और तेल आयात पर असर की चर्चा हो रही है।
ईरान में अमेरिकी जासूसों की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां शुरू हो गई हैं। पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिशें जारी हैं।
भारत की प्रमुख खबरें
आशा भोसले का निधन: प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया। पूरे देश में शोक की लहर, कई सेलिब्रिटी और राजनीतिक नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
अमरनाथ यात्रा: जम्मू-कश्मीर के LG मनोज सिन्हा ने बताया कि इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी।
महिला आरक्षण बिल: सुप्रीम कोर्ट में महिला आरक्षण कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुनवाई हो सकती है। संसद में चर्चा जारी।
बिहार राजनीति: भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान को बिहार वि
Tejraftarnews.in: *सूत्रों से बड़ी खबर*
ग्राम पंचायत नयकापार के भ्रष्टाचार की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हरकत में बीडीओ चन्द्रभान उपाध्याय
बीडीओ ने ग्राम प्रधान , सचिव और तकनीकी सहायक को रातों-रात पिच रोड से राम निहाल के घर तक इंटरलाकिंग कार्य को पूर्ण करने का दिया निर्देश
बीडीओ के निर्देश पर ग्राम प्रधान उर्मिला सिंह रातों-रात इंटरलाकिंग कार्य को पूरा कराने में जुटी
सूत्रों की माने तो इंटरलाकिंग कार्य के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट करने के लिए रातों-रात ग्राम प्रधान ने लगाया 50 बाहरी मजदूर
50 बाहरी मजदूरों से ग्राम पंचायत नयकापार में रातों-रात ग्राम प्रधान उर्मिला सिंह द्वारा कराया जा रहा कार्य बना चर्चा का विषय
बड़ा सवाल यह है कि सचिव , जेई व मनरेगा एपीओ क्यों ग्राम पंचायत नयकापार के भ्रष्टाचार को लेकर साधे हुए हैं चुप्पी
पूरा मामला ब्लाक कप्तानगंज के ग्राम पंचायत नयकापार के भ्रष्टाचार का ।
रिपोर्ट- राहुल पटेल
नव्य संदेश प्रवाह
मो0 9795273885
Tejraftarnews.in: ब्रेकिंग न्यूज - सूत्र
सिद्धार्थनगर
जिले मे सीएचसी अधीक्षकों की तैनाती मे हो रहा है बड़ा खेला।।
नियमो को दरकिनार करके सीएमओ ऑफिस से नियुक्त किये गये है सीएचसी अधीक्षक।।
शासनादेश के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों मे लेवल 3 के अधिकारी को ही कर सकते है सीएचसी अधीक्षक पद पर नियुक्त।।
जनपद मे शासनादेश की धज्जियाँ उड़ाकर आधा दर्जन से अधिक सीएचसी मे लेवल 1 के अधिकारियों को बनाया गया है सीएचसी अधीक्षक।।
KSB NEWS NETWORK
Tejraftarnews.in: Breaking
Siddharthnagar
*गैस गोदाम चोरी का बड़ा खुलासा, एक शातिर चोर गिरफ्तार......*
06 गैस सिलेंडर व हेक्सा ब्लेड बरामद, पुलिस की बड़ी सफलता......
थाना इटवा पुलिस व एंटी थेफ्ट टीम की संयुक्त कार्रवाई......
ताला तोड़कर गैस गोदाम से की गई थी लाखों की चोरी......
सगराजोत गांव से आरोपी शिवम मिश्रा गिरफ्तार.......
निशानदेही पर छिपाए गए 04 अतिरिक्त सिलेंडर भी बरामद.......
प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार मिश्र के नेतृत्व में कार्रवाई........
एसएसपी के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान में मिली सफलता......
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को भेजा गया न्यायालय ......
*अश्वनी कुमार मिश्रा*
सिद्धार्थनगर
Tejraftarnews.in: *अमरीका-ईरान वार्ता बेनतीजा, 21 घंटे की बातचीत के बाद भी नहीं हुआ समझौता, एक-दूसरे पर आरोप*
*इस्लामाबाद में दोनों पक्षों में 21 घंटे की बातचीत के बाद भी नहीं हुआ समझौता, एक-दूसरे पर आरोप*
पाकिस्तान में अमरीका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही है। दोनों देशों के बीच करीब 21 घंटे तक बातचीत चली। *अमरीकी पक्ष ने वार्ता असफल रहने का कारण बताते हुए कहा कि उसने ईरान के सामने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव रखा, जबकि ईरान ने कहा कि अमरीका की अत्यधिक मांगों के कारण समझौता नहीं हो सका। अमरीका का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर कर रहे थे*। ईरान के प्रतिनिधिमंडल में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबफ एवं विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित कुल 71 लोग शामिल थे। वार्ता समाप्त होने के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने देश लौट गए। जेडी वेंस ने वार्ता के बाद मीडिया से कहा कि हम पिछले 21 घंटे से बात कर रहे हैं। हमने कई अहम मुद्दों पर बात की। बुरी खबर यह है कि हमारे बीच समझौता नहीं हो सका। मुझे लगता है कि यह हमसे ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। राष्ट्रपति ने हमसे कहा था कि आपको यहां नेक नीयत से आना होगा और किसी समझौते तक पहुंचने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना होगा। हमने वैसा ही किया, लेकिन दुर्भाग्य से हम कोई भी प्रगति नहीं कर पाए। श्री वेंस ने कहा कि 21 घंटे चली बातचीत के बाद भी ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता नहीं जताई। हमें पूरी तरह भरोसा चाहिए कि ईरान न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही ऐसी तैयारी करेगा, जिससे वह जल्दी हथियार बना सके। श्री वेंस ने कहा कि बातचीत के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लगातार बात की। उन्होंने अन्य शीर्ष अधिकारियों से भी बात की, जिनमें विदेश मंत्री मार्को रूबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और अमरीकी केंद्रीय कमान के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर शामिल हैं। दूसरी ओर, ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी ने कहा कि अमरीका की अत्यधिक मांगों के कारण शांति वार्ता असफल रही।
अमरीका जो युद्ध में हासिल नहीं कर पाया, वह बातचीत की टेबल पर हासिल करना चाहता था। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने कहा कि इस दौर की बातचीत में दूसरा पक्ष (अमरीका) ईरानी प्रतिनिधियों का भरोसा जीतने में नाकाम रहा। दोनों पक्ष कुछ मुद्दों पर सहमत हो गए, लेकिन ‘दो-तीन अहम मामलों पर सहमति नहीं बन पाई और आखिरकार बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच पाई। उन्होंने दोनों देशों के बीच बातचीत के इस नए दौर को पिछले एक साल में हुई सबसे लंबी बातचीत बताया। इसी बीच, श्री बाकाई ने कहा कि बातचीत में कुछ नए मुद्दे भी शामिल थे, जैसे कि होर्मु•ा जलडमरूमध्य। उन्होंने इस बात पर भी •ाोर दिया कि कोई भी वार्ता, कम से कम ईरान के साथ, केवल आपकी शर्तों के आधार पर सफल नहीं होगी। अमरीका को यह सीखना होगा कि आप ईरान पर शर्तें थोप नहीं सकते। सीखने में अभी भी बहुत देर नहीं हुई है। कूटनीति कभी खत्म नहीं होती, क्योंकि यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने का एक •ारिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी हालात में कूटनीतिक तंत्र को ईरानी राष्ट्र के अधिकारों और हितों को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कूटनीति उन लोगों के साथ खड़ी है, जो अपनी मातृभूमि की रक्षा कर रहे हैं और हर तरह के बलिदान के लिए तैयार हैं। प्रवक्ता ने बातचीत की मे•ाबानी करने के लिए पाकिस्तान सरकार और वहां के लोगों का भी शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि ईरान, पाकिस्तान और इस क्षेत्र के अन्य मित्र देशों के बीच संपर्क जारी रहेगा।
*ट्रंप बोले, होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की नाकाबंदी करेगा अमरीका*
तेहरान। ईरान से वार्ता असफल होने के बाद अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि अमरीकी नेवी अब होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की नाकाबंदी करेगी। जो भी जहाज इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करेगा, उसे रोका जाएगा और जांच की जाएगी। खास तौर पर उन जहाजों पर नजर रखी जाएगी, जिन्होंने ईरान को टोल दिया है। जो जहाज ईरान को गैरकानूनी टोल देंगे, उन्हें सुरक्षित रास्ता नहीं दिया जाएगा। इससे ईरान की आर्थिक ताकत कम की जाएगी। अमरीका किसी भी स्थिति के लिए तैयार है।
Tejraftarnews.in: *हिमाचल इस बार चुनाव मैदान में होंगी 55 फीसदी महिलाएं, आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद बदले सियासी समीकरण*
*पंचायत चुनाव लडऩे के इच्छुक सोशल मीडिया से दर्ज करवा रहे मौजूदगी*
महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के कारण कुल मिलाकर 55 फीसदी सीटें रिजर्व हो गई हैं, *जबकि पुरुषों और ओपन कैटेगरी के लिए लगभग 45 फीसदी सीटें ही बची हैं। इससे संभावित उम्मीदवारों के चुनाव लडऩे के समीकरण बिगड़ गए हैं*। ऐसे में प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं में इस बार 50 से 55 फीसदी सीटों पर महिलाएं चुनाव मैदान में होंगी। राज्य में चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद तक की सीटों के लिए तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है। कौन सी सीट महिला, अनुसूचित जाति, ओबीसी या अनारक्षित वर्ग के लिए आरक्षित रहेगी, अब इस पर संशय नहीं रहा। भले ही चुनाव की तारीखों का औपचारिक ऐलान अभी बाकी हो, लेकिन मैदान में उतरने के इच्छुक दावेदार सोशल मीडिया के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराने लगे हैं।
*दादा-दादी का अवैध कब्जा, तो पोता बाहर*
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 122 के तहत उम्मीदवारों की योग्यता ही नहीं, उनके परिवार से जुड़ी स्थिति भी सीधे तौर पर चुनाव लडऩे के अधिकार को प्रभावित करती है। इस नियम के तहत यदि किसी उम्मीदवार के परिवार के सदस्य जैसे दादा-दादी, माता-पिता के नाम पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा दर्ज है, तो उसका असर अगली पीढ़ी पर भी पड़ता है। ऐसे मामलों में पोता, बेटा या अविवाहित पुत्री तक को पंचायत चुनाव लडऩे से अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
*नियम के अनुसार बहू लड़ सकेगी चुनाव*
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 122 के तहत यदि किसी परिवार में अवैध कब्जा पिता के नाम पर है और वह संबंधित शर्तों के तहत अयोग्यता की श्रेणी में आता है, तो ऐसी स्थिति में उसका पुत्र और अविवाहित पुत्री चुनाव लडऩे के पात्र नहीं माने जाते। हालांकि अधिनियम की धारा 122 में बहू को इस अयोग्यता के दायरे में शामिल करने का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। यही कारण है कि कानूनी व्याख्या के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में बहू पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
Tejraftarnews.in: *हिमाचल 15 अप्रैल को तोहफे की आस, हिमाचल दिवस पर मुख्यमंत्री सुक्खू की घोषणाओं का इंतजार*
*हिमाचल दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री सुक्खू की घोषणाओं पर अब कर्मचारी और पेंशनरों की नजर है। *15 अप्रैल को रिकांगपिओ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू लंबित पेंशन एरियर भुगतान को लेकर बड़ा ऐलान कर सकते हैं।* राज्य सरकार पहले ही इस साल के बजट में कई महत्त्वपूर्ण घोषणाएं कर चुकी है। अब सभी को इनके लागू होने का इंतजार है। सबसे बड़ी उम्मीद वर्ष 2016 से पहले के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को है। सरकार ने साफ किया है कि उनका पूरा बकाया पेंशन एरियर वित्त वर्ष 2026-27 में दिया जाएगा। ऐसे में हिमाचल दिवस पर इसकी शुरुआत या पहली किस्त जारी होने की संभावना जताई जा रही है।
इसी तरह सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी हिमाचल दिवस पर राहत मिलने की उम्मीद है। इन कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट का बकाया भी लंबे समय से लंबित है। इस पर सरकार ने अपने बजट में 300 करोड़ खर्च करने की बात कही है। ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनरों को आस है कि हिमाचल दिवस पर इसको लेकर मुख्यमंत्री घोषणा करेंगे।
*सीएम सुक्खू ने सुविधा देने का किया था ऐलान*
सीएम ने बजट में स्टडी लीव पर जाने वाले कर्मचारियों को 100 प्रतिशत वेतन देने की भी घोषणा की है और पहले स्टडी लीव ले चुके कर्मचारियों को भी बकाया देने की बात कही है। दैनिक वेतन को बढ़ाकर 450 रुपए प्रतिदिन कर दिया गया है, जबकि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन 13,750 रुपए तय किया गया है। इसकी अधिसूचना अभी तक श्रम विभाग ने नहीं की है। उम्मीद है कि हिमाचल दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री दैनिक वेतन को बढ़ाने की घोषणा भी इस मौके पर करेंगे।
Tejraftarnews.in: *हिमाचल के डिपुओं में चना-मलका दाल हुई सस्ती, जानिए अब कितना हुआ रेट*
सस्ते राशन के डिपुओं में बिकने वाली माह दाल 11 रुपए महंगी हो गई है, जबकि दाल चना सात रुपए और मलका दाल एक रुपए तक सस्ती हुई है। *हालांकि सरसों के तेल मेंं कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। बता दें कि सस्ते राशन के डिपुओं में माह दाल के दाम 11 रुपए तक बढ़ गए हैं। एपीएल राशनकार्ड धारकों को माह दाल 94 रुपए में मिलेगी,* जबकि बीते माह यही दाल 83 रुपए में बिक रही थी। वहीं, एनएफएसए राशनकार्ड धारकों को माह दाल 89 रुपए में पड़ेगी, जबकि इसका पुराना रेट 78 रुपए प्रति किलो था। यही नहीं, एपीएल राशनकार्ड धारकों की मलका दाल एक रुपए महंगी हुई है और एनएफएसए की मलका दाल एक रुपए सस्ती हुई है। एनएफएसए की मलका दाल 72 रुपए में मिलेगी, जबकि पुराना रेट 71 रुपए था और एनएफएसए को मलका दाल 66 रुपए में पड़ेगी। जबकि पिछला रेट 67 रुपए था। इसके अलावा दाल चना सात रुपए तक सस्ती हुई है।
एपीएल को 66 रुपए में और एनएफएसए को 61 रुपए में मिलेगी, जबकि पुराना रेट एपीएल का 73 रुपए और एनएफएसए का 68 रुपए था। सरसों तेल में किसी तरह की बढ़ौतरी नहीं हुई है। एपीएल और एनएफएसए को सरसों तेल इस माह भी 153 रुपए में मिलेगा। वहीं, जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक हमीरपुर शिवराम राही का कहना है कि डिपुओं में जहां माह दाल के रेट में बढ़ोतरी हुई है। वहीं, दाल चना सात रुपए और मलका दाल एक रुपए तक सस्ती भी हुई है।
Tejraftarnews.in: *19 वर्षीय युवती की हत्या: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की घटना, बीच सड़क पर गला काटकर उतारा मौत के घाट*
*हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी में एक कॉलेज छात्रा की बीच सड़क में गला काटकर हत्या कर दी गई है। छात्रा सोमवार सुबह कॉलेज जा रही थी। युवती की हत्या क्यों की गई, इस बात का पता आरोपियों को पकड़ने के बाद ही लग सकेगा।*
सरकाघाट उपमंडल के गोपालपुर में *सोमवार सुबह कॉलेज जा रही एक 19 वर्षीय युवती की गला काटकर हत्या कर दी गई है।* हत्या के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। क्षेत्र में इस बात को लेकर चर्चा है कि इस हत्याकांड को दो बाइक सवार युवकों ने अंजाम दिया है।
*हत्या क्यों की?*
घटना की सूचना मिलते ही सरकाघाट पुलिस थाना की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। युवती की हत्या क्यों की गई, इस बात का पता आरोपियों को पकड़ने के बाद ही लग सकेगा।
*पूरे इलाके में दहशत*
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने टीमें भेज दी हैं। आस पास के क्षेत्रों की सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल देखने को मिल रहा है। एसपी मंडी विनोद कुमार ने बताया कि पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही है। जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।
*आरोपियों की धरपकड़ के बजाय पुलिस स्थानीय लोगों और परिजनों को मौके पर रोकती रही- जयराम ठाकुर*
घटना पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकाघाट में बिटिया के साथ जो हुआ वह सोचकर ही मन विचलित हो रहा है। दिन दहाड़े इस तरह की घटना की देवभूमि में कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस घटना न केवल पूरे प्रदेश को शर्मसार किया है, बल्कि हर उस परिवार को डरा दिया है जिनकी बेटियां शिक्षा के लिए घर से बाहर निकलती हैं। जिस प्रदेश को हम सुरक्षित मानते थे, वहां अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो गए? हैरानी की बात यह है कि आरोपियों की धरपकड़ के बजाय पुलिस स्थानीय लोगों और परिजनों को मौके पर रोकती रही। सरकार मूकदर्शन बनी हुई है। कानून व्यवस्था का बुरा हाल है।इस घटना में शामिल लोगों के उनके इस जघन्य अपराध की ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए जो भविष्य में उदाहरण बने। ईश्वर से प्रार्थना है कि बिटिया की आत्मा को शांति दें और परिजनों को यह असह्य दुःख सहन करने की शक्ति दें।
Tejraftarnews.in: *चुवाड़ी-चंबा सुरंग का निर्माण अक्टूबर 2026 तक शुरू होगा*
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में चुवाड़ी-चंबा सुरंग को बनाने के लिए अनेक सार्थक कदम उठाए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर करोड़ों रुपये खर्च कर इसकी फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करवाई है। *_पठानिया ने बताया कि लगभग 14 किलोमीटर लंबी इस सुरंग के निर्माण पर लगभग 2600 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे तथा इसे पीपीपी आधार पर बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि चुवाड़ी-चंबा सुरंग का निर्माण कार्य अक्टूबर 2026 तक आरंभ कर दिया जाएगा।*
Tejraftarnews.in: *चंबा में विधानसभा अध्यक्ष ने किया नगर परिषद चंबा के दो भवनों का शिलान्यास,*
*अतिरिक्त कार्यालय भवन तथा अतिथि गृह एवं आवासीय परिसर भवन पर खर्च होंगे करीब दो करोड़ रुपए,*
*2600 करोड रुपए की अनुमानित लागत से बनने वाली चंबा- चुवाड़ी सुरंग का कार्य अक्टूबर-2026 तक आरंभ होगा- कुलदीप सिंह पठानियां*
चंबा 13 अप्रैल 2026,
नगर परिषद चंबा के अतिरिक्त कार्यालय भवन तथा अतिथि गृह एवं आवासीय परिसर भवन का विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने आज विधिवत शिलान्यास किया। लगभग दो करोड़ रुपए रुपए की लागत से बनने वाले इन भवनों के बनने से न केवल नगर परिषद चंबा के अधिकारियों व कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्यालय स्थान व आवासीय सुविधा मिलेगी बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों व यात्रियों के लिए अतिथि गृह की सुविधा भी प्राप्त होगी।
इस अवसर पर नगर परिषद परिसर चंबा में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ऐतिहासिक महत्व की दृष्टि से चंबा एक सुप्रसिद्ध स्थल है तथा यहां की कला व लोक संस्कृति देश-विदेश में विख्यात है उन्होंने कहा कि चंबा को विकास की दृष्टि से आगे ले जाने के लिए प्रदेश सरकार निरंतर प्रयासरत है तथा इस दिशा में अभी बहुत कुछ किया जाना अभी शेष है। जिला चंबा में धार्मिक साहसिक तथा स्वास्थ्य संबंधी पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं है जिन्हें विकसित करने के लिए अनेक सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि लगभग 56000 वर्ग किलोमीटर में फैला जिला चंबा भौगोलिक दृष्टि से पिछड़ा होने के कारण यहां अन्य जिलों की तुलना में धन की अधिक आवश्यकता है। *इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों से जिला को जोड़ने के लिए सुरंग निर्माण का होना अत्यंत आवश्यक है जिससे न केवल सड़क मार्ग की दूरी कम होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी यह महत्वपूर्ण है। कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में चुवाड़ी-चंबा सुरंग को बनाने के लिए अनेक सार्थक कदम उठाए गए जिसके परिणाम स्वरूप प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर करोड़ों रुपए खर्च कर इसकी फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करवाई। उन्होंने कहा कि लगभग 14 किलोमीटर लंबी इस सुरंग के निर्माण पर लगभग 2600 करोड रुपए खर्च किए जाएंगे तथा इसे पीपीपी आधार पर बनाया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि चुवाड़ी - चंबा सुरंग का निर्माण कार्य अक्टूबर 2026 तक आरंभ कर दिया जाएगा।*
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को लगभग 40 वर्षों तक पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय डॉ यशवंत सिंह परमार व स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने नेतृत्व प्रदान किया है तथा उनके कार्य काल में हिमाचल प्रदेश ने सड़क शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में विकास के उच्च आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने राज्य के आम व्यक्ति की तकलीफ व आवश्यकताओं को समझते हुए राज्य के अनाथ बच्चों को चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट का दर्जा देते हुए मुख्यमंत्री सुख आश्रय जैसी योजनाएं आरंभ की हैं जिसके तहत ऐसे बच्चों की प्रत्येक आवश्यकता के लिए राज्य सरकार अभिभावक के रूप में कार्य कर रही। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जल विद्युत परियोजनाओं से राज्य का हिस्सा बाजिव अनुपात में न मिलने के कारण प्रदेश को आर्थिक चुनौतियों के सामना करना पड़ रहा है जिसके लिए प्रदेश सरकार भरसक प्रयास कर रही है।
इससे पूर्व नगर परिषद चंबा की वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी राखी कौशल ने विधानसभा अध्यक्ष का स्वागत करते हुए उन्हें नगर परिषद चंबा द्वारा विभिन्न वार्डों में किए जा रहे विकास कार्यों बारे विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में नगर परिषद चंबा तथा प्रेस क्लब चंबा द्वारा विधानसभा अध्यक्ष व अन्य गण मान्य व्यक्तियों को विधिवत सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर प्रेस क्लब चंबा के प्रधान विनोद कुमार, वरिष्ठ कांग्रेस नेता व नगर परिषद चंबा के पूर्व अध्यक्ष जगदीश हांडा, तथा स्थानीय विधायक नीरज नायर ने भी उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।
प्रेस क्लब के अध्यक्ष विनोद कुमार ने अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां, स्थानीय विधायक नीरज नैयर तथा उपायुक्त चंबा मुकेश रेपसवाल का प्रेस क्लब चंबा के लिए दो कमरे देने के लिए विशेष आभार व्यक्त किया। विनोद कुमार ने प्रेस क्लब चंबा को दिए गए दो कमरों की मुरम्मत के लिए विधानसभा अध्यक्ष से 5 लाख की धनराशि की मांग रखी जिसके लिए विधानसभा अध्यक्ष ने उपायुक्त चंबा को आवश्यकता के अनुसार धन राशि उपलब्ध करवा कर संबंधित कार्य करवाने के निर्देश दिए। वरिष्ठ कांग्रेस नेता व नगर परिषद चंबा के पूर्व अध्यक्ष जगदीश हांडा ने अपने संबोधन में नगर परिषद क्षेत्र चंबा में उनके द्वारा किए गए कार्यों तथा इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया द्वारा दिए गए सहयोग पर विस्तृत प्रकाश डाला।
विधानसभा क्षेत्र चंबा के विधायक नीरज नैयर ने अपने संबोधन में प्रदेश सरकार द्वारा गत 3 वर्षों के दौरान नगर परिषद क्षेत्र चंबा के अलावा चंबा विधानसभा क्षेत्र के अन्य इलाकों में किए जा रहे विकास कार्यों बारे विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्थानीय जनता का आह्वान किया कि वे सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सहयोग करें। ताकि सरकारी योजनाओं व कार्यक्रमों का ज्यादा से ज्यादा लाभ आम जनता तक सुनिश्चित किया जा सके। नीरज नैयर ने बताया कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय चंबा के भवन निर्माण के प्रथम फेस के लिए 175 करोड रुपए जारी किए जबकि दूसरे फेस के लिए भी 194 करोड रुपए स्वीकृत किए हैं उन्होंने बताया कि चंबा से संबंधित लगभग 50 करोड रुपए की विभिन्न विकास कार्यों की डीपीआर एडीबी को स्वीकृति हेतु भेजी गई हैं जिनकी स्वीकृति के पश्चात धरातल पर इनके सार्थक परिणाम देखने को मिलेंगे। उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय में 36 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले लघु सचिवालय भवन के डिजाइन में संशोधन किया गया है जिसकी स्वीकृति लगभग दो सप्ताह के भीतर अपेक्षित है। इसके अलावा पुराना बस अड्डा में बनने वाले बहु मंजिला पार्किंग भवन तथा पुलिस ग्राउंड के समीप निर्माणाधीन इंडोर स्टेडियम का कार्य प्रगति पर है। नीरज नैयर ने बताया कि सरकार द्वारा शहर की पुरानी हाइड्रेंट प्रणाली को कार्यशील करने के लिए 7.5 करोड रुपए तथा साहू में सिंचाई कूहल की लिए 5 करोड रुपए स्वीकृत किए हैं।
इस अवसर पर विधायक चंबा नीरज नैय्यर व उनकी धर्मपत्नी भारती नैयर, एपीएमसी के अध्यक्ष ललित ठाकुर, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुरजीत भरमौरी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता व नगर परिषद चंबा के पूर्व अध्यक्ष जगदीश हांडा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुदर्शन ठाकुर, उपायुक्त मुकेश रेपसवाल, पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी, अतिरिक्त उपायुक्त अमित मैहरा, वन मंडल अधिकारी कृतज्ञ कुमार, अधीक्षण अभियंता जल शक्ति राजेश मोंगरा, लोक निर्माण जीत सिंह ठाकुर, विद्युत् बोर्ड राजीव ठाकुर, वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद राखी कौशल कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
Tejraftarnews.in: *विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने नगर परिषद द्वारा शुरू की गई ई-कार्ट सेवा का किया विधिवत शुभारंभ*
*पर्यावरण संरक्षण एवं जनसुविधा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पहल :विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया*
*चम्बा, 13 अप्रैल*
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने आज नगर परिषद द्वारा शुरू की गई ई-कार्ट सेवा का विधिवत शुभारंभ किया। ई-कार्ट सेवा को मिलेनियम गेट से हरी झंडी दिखाने के पश्चात विधानसभा अध्यक्ष ने मीडिया प्रतिनिधियों से वार्तालाप करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं जनसुविधा की दृष्टि से यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम है।
उन्होंने कहा कि ई-कार्ट सेवा न केवल शहर में प्रदूषण को कम करने में सहायक होगी, बल्कि स्वच्छ एवं हरित वातावरण के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। यह पहल पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रभावी कदम है।
उन्होंने कहा कि इस सेवा से स्थानीय स्तर पर लोगों को आवागमन की बेहतर और सुलभ सुविधा उपलब्ध होगी। विशेष रूप से वे लोग जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं, बुजुर्ग हैं या जिन्हें दैनिक आवागमन में कठिनाई होती है, उन्हें इस सेवा का सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया की ई-कार्ट व्हीकल मेडिकल कॉलेज से भरमौर चौक तक चलेगा जिसका किराया मात्र 10 रुपए निर्धारित किया गया है।
उन्होंने नगर परिषद एवं जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के जनहितकारी प्रयास वास्तव में विकास को नई दिशा प्रदान करते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश सरकार पिछले तीन वर्षों से बेरोजगार युवाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में ई-व्हीकल योजना के माध्यम से युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। विभिन्न विभागों के माध्यम से युवाओं को लगभग 50 प्रतिशत सब्सिडी पर ई-व्हीकल उपलब्ध करवाए गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन हुआ है और युवाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में इस योजना का और अधिक विस्तार किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को लाभ मिल सके और प्रदेश में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले।
इस अवसर पर सदर विधायक नीरज नैय्यर, विधायक की धर्म पत्नी भारती नैय्यर, अध्यक्ष ज़िला कृषि उपज एवं विपणन समिति ललित ठाकुर, अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी सुरजीत भरमौरी, उपायुक्त मुकेश रेपसवाल, पुलिस अधीक्षक विजय सिंह सकलानी व वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी राखी कौशल सहित विभिन्न विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
Tejraftarnews.in: *चुराह उपमंडल के बघेईगढ-चांजू मार्ग पर सड़क बहाली के दौरान एक बड़ा पत्थर जेसीबी मशीन पर आ गिरा, जिससे कारण ऑपरेटर मामूली रूप से घायल हो गया। घटना के बाद फिलहाल काम रोक दिया गया है।*
Tejraftarnews.in: *हिमाचल दिवस: किन्नौर की महिलाओं को 1500-1500 रुपये दे सकते हैं मुख्यमंत्री, कर्मचारियों को भी राहत की उम्मीद*
*मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू 15 अप्रैल को जिला किन्नौर की पात्र महिलाओं को 1500-1500 रुपये दे सकते हैं। वहीं कर्मचारियों को भी राहत की उम्मीद है।*
हिमाचल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू *15 अप्रैल को जिला किन्नौर की पात्र महिलाओं को 1500-1500 रुपये दे सकते हैं। महिलाओं के लिए प्रदेश सरकार की ओर से इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत 1500-1500 रुपये दिए जाने की शुरुआत तीन साल पहले की थी। वर्ष 2023 में लाहौल-स्पीति जिला के काजा में महिलाओं को योजना के तहत 1500 रुपये देकर आर्थिक तौर पर सशक्त बनाने की पहल हुई थी। 2024 में चुनाव आचार संहिता के चलते राज्यपाल की अध्यक्षता में शिमला में समारोह हुआ था। वर्ष 2025 में पांगी घाटी में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री ने महिलाओं को 1500-1500 रुपये के चेक भेंट किए थे। ऐसे में संभावित है कि किन्नौर में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय हिमाचल दिवस समारोह में मुख्यमंत्री जिला की महिलाओं को 1500-1500 की धनराशि के चेक भेंट करेंगे। उधर, सोमवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सचिवालय में आवश्यक फाइलें निपटाईं। हिमाचल दिवस से पहले मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव संजय गुप्ता सहित उच्च अधिकारियों के साथ भी बैठक की। सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में हिमाचल दिवस समारोह के दौरान होने वाली घोषणाओंं को लेकर चर्चा हुई। पर्यटन को जिला किन्नौर में बढ़ावा देने के लिए किन योजनाओं को अमलीजामा पहनाया जा सकता है, इसको लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ मंथन किया। मुख्यमंत्री मंगलवार दोपहर बाद शिमला से किन्नौर के लिए रवाना होंगे।
*हिमाचल दिवस पर कर्मचारियों को राहत की उम्मीद*
15 अप्रैल को हिमाचल दिवस के मौके पर प्रदेश के कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ ने सरकार से लंबे समय से लंबित 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) और नए वेतनमान के एरियर को जारी करने की मांग की है। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेश ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के निर्माण और विकास में कर्मचारियों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि कर्मचारियों की लंबित मांगों को शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि पहले हिमाचल दिवस के अवसर पर कर्मचारियों के लिए बड़ी घोषणाएं की जाती थीं, जिससे कर्मचारी वर्ग में उत्साह का माहौल रहता था, लेकिन पिछले सात-आठ वर्षों से इस परंपरा में कमी आई है। महासंघ के अनुसार वर्तमान में कर्मचारी वर्ग आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। 13 प्रतिशत डीए और वेतनमान एरियर का भुगतान लंबित रहने से कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार हिमाचल दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में सरकार कर्मचारियों के हित में फैसला लेते हुए डीए और एरियर जारी करने की घोषणा करेगी। महासंघ ने कहा कि यदि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो इससे लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों को राहत मिलेगी और प्रदेश के विकास को भी गति मिलेगी।
Tejraftarnews.in: चंबा में हिमाचल दिवस समारोह की अध्यक्षता करेंगे मंत्री राजेश धर्माणी
डलहौजी, बनीखेत और चंबा में विभिन्न कार्यक्रमों में लेंगे भाग
चम्बा :- 13 अप्रैल
चंबा में आयोजित होने वाले जिला स्तरीय हिमाचल दिवस समारोह की अध्यक्षता टीसीपी, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यवसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी करेंगे। उनका संशोधित प्रवास कार्यक्रम जारी कर दिया गया है।
प्रवक्ता के अनुसार, मंत्री 14 अप्रैल को दोपहर 12:30 बजे डलहौजी पहुंचेंगे और बैसाखी के पावन अवसर पर गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेकेंगे। इसके बाद वे बनीखेत में राजीव गांधी राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान का दौरा करेंगे। साथ ही लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह बनीखेत में विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। रात्रि विश्राम सर्किट हाउस चंबा में रहेगा।
15 अप्रैल को सुबह 11:00 बजे मंत्री चंबा के ऐतिहासिक चौगान में आयोजित जिला स्तरीय हिमाचल दिवस समारोह की अध्यक्षता करेंगे। इसके उपरांत वे उपायुक्त कार्यालय चंबा में विभिन्न विभागों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे तथा राजकीय सहस्त्राब्दी बहुत तकनीकी संस्थान का निरीक्षण भी करेंगे।
16 अप्रैल को मंत्री डलहौजी से धर्मशाला के लिए प्रस्थान करेंगे।
Tejraftarnews.in: *पंचायत चुनाव के लिए 32 हजार बूथों पर होगी वोटिंग, 45 हजार कर्मचारी संभालेंगे जिम्मेदारी*
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। प्रशासन ने पूरे प्रदेश में करीब 32 हजार मतदान केंद्र स्थापित करने का खाका तैयार कर लिया है, जहां मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। हर मतदान केंद्र पर चार कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी, जबकि सुरक्षा के लिहाज से दो सुरक्षा गार्ड भी मौजूद रहेंगे। चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। वर्तमान में पुनर्गठन से बाहर हुई पंचायतों में वोटर लिस्ट का काम चल रहा है, जो 26 अप्रैल तक पूरा होगा। इसके साथ ही चुनाव शेड्यूल भी जारी हो सकता है। प्रदेश में करीब 30 हजार पोलिंग पार्टियां गठित की जा रही हैं
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 15 हजार पुलिस जवान तैनात किए जाएंगे। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों की भी व्यवस्था की गई है। चुनाव ड्यूटी के लिए कुल 45 हजार कर्मचारियों को लगाया जाएगा, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मतदान केंद्रों पर सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। प्रशासन ने सभी जिलों के उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और एसडीएम को समय रहते चुनावी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 24 अप्रैल तक मतदाता सूची को अंतिम रूप देने को कहा गया है। 20 अप्रैल के बाद कभी भी चुनाव आचार संहिता लागू हो सकती है। जानकारी के अनुसार प्रदेश में पंचायत चुनाव 20 मई के बाद तीन चरणों में करवाए जाएगे
[13tej : *तेज रफ्तार का कहर, सीमेंट मिक्सर ट्रक ने ईको कार को मारी टक्कर, 11 लोगों की मौत*
मुंबई। महाराष्ट्र के कल्याण में भीषण सड़क हादसा पेश आया है। यहां सोमवार को कल्याण-अहिल्यानगर हाईवे पर एक सीमेंट मिक्सर ट्रक ने इको कार को टक्कर मार दी। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार पूरी तरह से चकनाचूर हो गई और अंदर बैठी सवारियों को संभलने तक का मौका भी नहीं मिला। हादसा हाईवे पर बने एक पुल के पास पेश आया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर आगामी कार्रवाई शुरू की
ट्रक की टक्कर से कार की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि अंदर फंसे शवों को निकालने के लिए कार को कटर से काटना पड़ा। इस दर्दनाक हादसे में 11 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कुछ अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को नजदीकी निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। हादसे के कारण हाईवे पर लंबा जाम लग गया। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि तेज रफ्तार वाहन पर से नियंत्रण खो देना ही इस दुर्घटना का कारण हो सकता है।
Tejraftarnews.in: *इस्लाम कोई धर्म नही बल्कि वहशी , जिहादी लुटेरो का एक गिरोह है।*
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*इस्लाम का अपना कुछ भी नही संपूर्ण इस्लाम अन्य से कब्जाया हुआ है।*
*पहले मुस्लीमो ने यहुदीयो से छीना*
*फीर हिँदुओ से छीनना प्रारम्भ कीया और आज भी छीन रहे है।*
*इस्लाम की सच्चाई जानने के लिए पुरा लेख पढे*
*हिंदुओ को वसुधैव कुटुम्बकम की भावना छोडकर यहुदीयो की भाषा मे मुस्लीमो को जवाब देना पडेगा।*
*क्यो की जैसे के साथ तैसा यह हमारे ईश्वर भी कहते व करते थे।*
बेंजामिन नेतन्याहू के UN मे दिये भाषण का अंश-
75 साल पहले हमें मरने के लिए यहां लाया गया था। हमारे पास ना कोई देश था, ना कोई सेना थी। सात देशों ने हमारे विरुद्ध जंग छेड़ दी। हम सिर्फ 65,000 थे। हमें बचाने के लिए कोई नहीं था। हम पर हमले होते रहे, होते रहे।
लेबनान, सीरिया, ईराक़, जॉर्डन, मिस्र, लीबिया, सऊदी अरब जैसे कई देशों ने हमारे ऊपर कोई दया नहीं दिखाई। सभी लोग हमें मारना चाहते थे किंतु हम बच गये।
संयुक्त राष्ट्र ने हमें धरती दी, वह धरती जो 65 प्रतिशत रेगिस्तान थी। हमने उसको भी अपने खून से सींचा। हमने उसे ही अपना देश माना क्योंकि हमारे लिए वही सब कुछ था।
हम कुछ नहीं भूले, हम फिरऔन से बच गए। हम यूनान से बच गए। हम रोमन से बच गए। हम स्पेन से बच गए। हम हिटलर से बच गए। हम अरब देशों से बच गए। हम सद्दाम से बच गए। हम गद्दाफी से बच गए।
हम हमास से भी बचेंगे, हम हिजबुल्ला से भी बचेंगे और हम ईरान से भी बचेंगे।
हमारे जेरूसलम पर अब तक 52 बार आक्रमण किया गया, 23 बार घेरा गया, 39 बार तोड़ा गया, तीन बार बर्बाद किया गया, 44 बार कब्जा किया गया लेकिन हम अपने जेरूसलम को कभी नहीं भूले। वह हमारे हृदय में है, वह हमारे मस्तिष्क में है और जब तक हम रहेंगे, जेरूसलम हमारी आत्मा में रहेगा।
संसार ये याद रखें कि जिन्होंने हमें बर्बाद करना चाहा वह आज स्वयं नहीं है। मिस्र, लेबनान, बेबीलोन, यूनान, सिकंदर, रोमन सब खत्म हो गए हैं।
हम फिर भी बचे रहे।
हमें वे (इस्लामी) खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने हमारे रस्म रिवाज को कब्जाया। उन्होंने हमारे उपदेशों को कब्जाया। उन्होंने हमारी परंपरा को कब्जाया। उन्होंने हमारे पैगंबर को कब्जाया। कुछ समय पश्चात अब्राहम इब्राहिम कर दिए गए, सोलोमन सुलेमान हो गए, डेविड दाऊद बना दिए गए, मोजेज मूसा कर दिए गए...
फिर एक दिन... उन्होंने कहा तुम्हारा पैगंबर (मुहम्मद) आ गया है। हमने इसे कभी स्वीकार नहीं किया। करते भी कैसे, उनके आने का समय नहीं आया था। उन्होंने कहा, स्वीकारो! कबूल लो! हमने नहीं कबूला। फिर हमें मारा गया। हमारे शहरों को कब्जाया गया, हमारे शहर यसरब को मदीना बना दिया गया। हम कत्ल हुए, भगा दिए गए...
मक्का के काबा में हम 2 लाख थे, मार दिए गए। हमें दुश्मन बता कर कत्ल किया गया, फिर सीरिया में, ओमान में यही हुआ। हम तीन लाख थे, मार दिए गए। ईराक़ में हम 2 लाख थे, तुर्की में चार लाख, हमें मारा जाता रहा, मारा जाता रहा। वे हमें मार रहे हैं, मारते जा रहे हैं। हमारे शहर, धन, दौलत, घर, पशु, मान-सम्मान सब कुछ कब्जाए जाते रहे फिर भी हम बचे रहे।
1300 सालों में करोड़ों यहूदियों को मारा गया फिर भी हम बचे रहे।
75 साल पहले वे हम पर थूकते थे, जलील करते थे, मारते थे। हमारी नियति यही थी किंतु हम स्वयं पर, अपने नेतृत्व पर, अपने विश्वास पर टिके रहे रहे।
आज हमारे पास एक अपना देश है। एक स्वयं की सेना है, एक छोटी अर्थव्यवस्था है। इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, फेसबुक, जैसी कई संस्थायें हमने इस दौर में बनाईं। आज हमारे चिकित्सक दवा बन रहे हैं, लेखक किताबें लिख रहे हैं, ये सबके लिए हैं , यह मानवता के कल्याण के लिए है।
हमने रेगिस्तान को हरियाली में बदला। हमारे फल, दवाएं, उपकरण, उपग्रह सभी के लिए है।
हम किसी के दुश्मन नहीं है, हमने किसी को खत्म करने की कसमें नहीं खाईं। हमें किसी को बर्बाद भी नहीं करना, हम साजिशें भी नहीं करते।
हम जीना चाहते हैं, सिर्फ सम्मान से, अपने देश में, अपनी जमीन पर, अपने घर में।
पिछले हजार सालों से हमें मिटाया गया, खदेड़ा गया, कब्जाया जाता रहा, हम मिटे नहीं, हारे नहीं और न आगे कभी हारेंगे। हम जीतेंगे, हम जीत कर रहेंगे, हम 3000 सालों से यरुशलम में ही थे। आज हम अपने पहले देश इजराइल में हैं। यह हमारा ही था, हमारा ही है और हमारा ही रहेगा, येरूसलम हमसे है और हम येरूसलम से हैं।
इस तरह हमेशा स्मरण रखना कि मानसरोवर, काबुल, कंधार, पेशावर ,लाहौर, कराची , ढाका ,चटगांव सब हमारा है....!!
साभार🚩💪
Tejraftarnews.in: *ईरान अमेरिका शांति वार्ता के बाद के प्रणाम*
*अब्दुल में अब्बा ढूंढने वाले चमचों की जमात सदमे में*
*ईरान के खिलाफ अमेरिका ने सीजफायर का ऐलान क्या किया, पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में दोनों के बीच शांति वार्ता होने पर हिंदुस्तान में रह रहे पाकिस्तान के वफादार अब्दुल में अब्बा ढूंढने वाले दो कोड़ी की औकात के दो कोड़ी के डाइपर पाजेब पहनकर मुजरा करते हुए पाकिस्तान के अब्बू को चौधरी बताने वाले जिंदा हैं क्या अब पोस्ट ही नहीं कर रहे है जिंदा हो तो जिंदा हो पोस्ट तो करो🫡*
➡️*अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के लिए नोबेल पुरस्कार की मांग के समर्थन में पाकिस्तान के वफादार दो कोड़ी की औकात के दो कोड़ी के चवन्नी छाप देशद्रोही मानसिक रोगी मुगलों के गुलाम अब्दुल में अब्बा ढूंढने वाले चमचों की जमात भी पोस्ट कर रही थी पाकिस्तान वाले अब्बू ने सीज फायर करवा दिया अब क्या हुआ अब तो बिना डाइपर अब पैड पहनकर मुजरा कर सकते हो 💃💃*😂😂
Tejraftarnews.in: *✍️ #तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और मशहूर फ़िल्म स्टार #जयललिता ने जिंदा रहते हुए कभी दिवाली नहीं मनाई,आप जानते हैं क्यों,*
*1790 नरक चतुर्दशी,यह मध्यरात्रि है, जिहादी आतंकवादी टीपू सुल्तान के पास अपने सबसे वफादार और क्रूर साथियों की एक सेना थी, जो मेलुकोट के श्री चेलुवरया स्वामी के मंदिर में प्रवेश करती है।*
*वहीं नरक चतुर्दशी के अवसर पर आयोजित भगवान झांकी में लगभग 1000 श्रद्धालु शामिल हुए। रात की पूजा के बाद सभी श्रद्धालु आराम करने की तैयारी कर रहे थे।*
*उसी समय जिहादी टीपू ने आकर मंदिर के सभी द्वार बंद कर दिए और 1000 भक्तों में से 800 लोगों को बंद कर दिया उसने अपनी सेना के बल पर, नरसंहार किया और उनको जमीन पर गिरा दिया उसने बच्चों को भी नहीं बख्शा। उसने अपने जनाना के लिए शेष 200 सुंदर महिलाओं* *को गिरफ्तार कर लिया।*
*अगली सुबह दीपावली पद्य का दिन था। वह मेलुकोट मंदिर को तोड़ देता है और उसकी विशाल संपत्ति को लूट लेता है।*
*लूट को ले जाने के लिए 26 हाथियों और 180 घोड़ों की जरूरत थी। भले ही इसे इतने लंबे समय तक ले जाने में 3 दिन लगे।*
*यही कारण है कि आज भी मेलुकोटे के कई परिवार (मांड्याम अयंगर कहलाते हैं) उस अंधेरी दिवाली की भयानक घटनाओं के कारण इस त्योहार को नहीं मना रहे हैं।*
*जयललिता भी इसी समुदाय की थीं इसलिए उन्होंने भी कभी दिवाली का त्योहार नहीं मनाया। क्या उनके पूर्वज (मेलकोट अयंगर) 800 नरसंहारों में शामिल नहीं थे? वह कैसे भूल सकती थीं,,,,???*
*लेकिन आजादी के बाद .....इतिहास की किताबों में आतंकवादी टीपू सुल्तान को एक सुंदर, गंभीर, शांत और बहादुर व्यक्ति के रूप में दर्शाया गया है परन्तु लंदन के पुस्तकालय में मौजूद टीपू की वास्तविक छवि बहुत अलग है।*
*टीपू सुल्तान का इतिहास इस बात का एक अच्छा उदाहरण है कि कैसे कां* *ग्रेस और कुम्मी ने भारत के इतिहास को विकृत किया है*
*रूप में दानव कहे जाने वाले इस सुल्तान ने न केवल मेलुकोट मंदिर बल्कि दक्षिण भारत के लगभग 25 मंदिरों की संपत्ति भी लूट ली थी।*
*जिहादी टीपू हमेशा बड़े-बड़े त्योहारों पर नरसंहार और धन की लूट में लिप्त रहता था क्योंकि वह अच्छी तरह जानता था कि उन दिनों भक्त बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं और उन सभी के पास अधिक धन और प्रसाद के रूप में चांदी और सोना होता था। उन दिनों मंदिर में ही सारा धन और अनाज इकट्ठा करने की प्रथा थी।*
*अब उनकी हिंदुओं की अन्य हत्याओं के बारे में:*
*1. कित्तूर चेन्नम्मा के राज्य में 1.40,000 हिंदू जिन्होंने धर्मांतरण से इनकार कर दिया था, बेचारे मारे गए*
*2. 10,000 ब्राह्मण जिन्होंने धर्मांतरण से इनकार कर दिया, उनका केरल राज्य में जबरन 'खतना' किया गया।*
*3. हिंदू महिलाओं का अपनी इच्छानुसार उपयोग करना और फिर उन्हें अपने सैनिकों को पुरस्कार के रूप में देना*
*4. 20 साल के लड़कों को हिजड़ा बनाया गया था*
*5. कोडागु के हिंदुओं का माराना यज्ञ*
*6. कोडागु में हिंदू महिलाओं के स्त"नों को काट कर क्षत-विक्षत कर दिया गया।*
*हिंदुओ पर इतने अत्या*चार हुए कि लिखा नहीं जा सकता।*
*अगर ये सब जिहादी टीपू का घमंड था,तो टीपू के अब्बू हैदर अली को तिरुपति कल्याण वेंकटेश्वर की विशाल संपत्ति को लूटने का श्रेय दिया जाता है।*
*इस मामले में कोई किसी से कम नहीं है।*
*आतंक"वादी टीपू का इतिहास उन संगठनों का एक बड़ा उदाहरण है जो हिंदुओं के खिलाफ हमारे देश के इतिहास को चित्रित करते रहे हैं।*
*टीवी सीरियलों में टीपू को एक महान देशभक्त और कुशल प्रशासक के रूप में चित्रित करने वाले धर्मनिरपेक्षतावादी, उसकी छवि एक जननायक बनाने में लगे थे लेकिन किसी ने उनके विरुद्ध आवाज नही उठाई क्योंकि सरकार उनकी ही बैठी थी।*
*आप देखिएगा .... कि जिहादी टीपू की मशहूर तलवार पर उर्दू में क्या लिखा है:*
*"मुस्लिम नायक जिसने काफिरों का कत्ले;आम किया"।।।* *दुखद .....किसी चुस्लिम ने उसे गलत नही माना। 😏😩*
Tejraftarnews.in: 🤷🏻♂️“कांग्रेस का "अमेरिका के आगे सरेंडर" स्कैंडल – मणि शंकर अय्यर का खुलासा!”
मणि शंकर अय्यर, जो 20 महीने तक मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रहे, अब खुलकर बता रहे हैं कि सोनिया-राहुल-मनमोहन की🇮🇳 सरकार अमेरिका के सामने कैसे लेट जाती थी।
जैसे कोई डरपोक स्कूल का लड़का बड़े भाई के आगे घुटने टेक दे!
*पहला धमाका: शांति पाइपलाइन (IPI) का कत्ल!कांग्रेस ने इसे "शांति पाइपलाइन" का नाम देकर खूब प्रचार किया था*।
ईरान से गैस और क्रूड की विशाल पाइपलाइन पाकिस्तान होते हुए राजस्थान तक आनी थी।
पाकिस्तान को रॉयल्टी में गैस का हिस्सा, सब कुछ फाइनल हो चुका था।
खुद मनमोहन सिंह पाकिस्तान जाकर दस्तखत करने वाले थे।
मणि शंकर अय्यर टेंडर निकालने के लिए मनमोहन सिंह के पास गए।
🤷🏻♂️ तब प्रधानमंत्री ने ठंडे स्वर में कहा:
"रहने दो यार... अमेरिका के तीन मंत्रियों के फोन आ गए हैं।
वो इस प्रोजेक्ट से खुश नहीं हैं। कह रहे हैं – रद्द कर दो!"बस!
एक फोन कॉल और भारत की ऊर्जा सुरक्षा का सपना चकनाचूर।
करोड़ों डॉलर की मेहनत, क्षेत्रीय शांति का मौका, सब अमेरिका की एक झिड़की में खत्म।
सोचिए, हमारी सरकार कितनी कमजोर और डरपोक थी कि अमेरिका के इशारे पर अपना राष्ट्रीय हित कुर्बान कर दिया!🤷🏻♀️
दूसरा धमाका: म्यांमार की गैस – *GAIL ने खोजा, चीन को दे दिया*!म्यांमार के समुद्र तट पर गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया (GAIL) ने अपनी मेहनत और करोड़ों डॉलर खर्च करके गैस की खोज की।
प्रस्ताव था – पाइपलाइन बिछाकर वो गैस म्यांमार-बांग्लादेश होते हुए पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक लाई जाए।
भारत को सस्ती गैस, हल्दिया पेट्रोकेमिकल हब बनेगा, ऊर्जा क्रांति हो जाएगी!लेकिन... कांग्रेस सरकार डर गई।
राजनीतिक दबाव, विदेश नीति की "सावधानी" (यानी घुटने टेकना) और शायद अमेरिका-चीन के खेल में फंसकर, उन्होंने ये प्रोजेक्ट चीन को थमा दिया।
GAIL की खोजी हुई गैस, भारत की मेहनत का नतीजा – चीन के पाइपलाइन में चला गया!
चीन आज उस गैस से फायदा उठा रहा है, जबकि भारत ऊर्जा संकट से जूझ रहा था।
ये है यूपीए का "राष्ट्रीय हित" – खुद की कंपनी खोजे, खर्च करे,
और आखिर में चीन को गिफ्ट!
निष्कर्ष –
*अगर कोई कांग्रेसी आज भी "नरेंद्र सरेंडर" जैसा शब्द इस्तेमाल करे, तो भाई... उसका चुनाव निशान उसके गाल पर छाप दो*!
क्योंकि असली सरेंडर तो उनके राज में हुआ था –
अमेरिका के फोन पर पाइपलाइन रद्द,
अपनी खोजी गैस चीन को सौंप दी।
राष्ट्रहित को विदेशी दबाव के आगे झुका दिया।
ये नहीं है सिर्फ दो प्रोजेक्ट की कहानी... ये है कमजोर नेतृत्व, डरपोक नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ की सनसनीखेज गाथा!🤷🏻♂️🪷🤷🏻♀️
*अब बताओ, कौन सा "सरेंडर" ज्यादा खतरनाक था*?
Tejraftarnews.in: *🖐🏽कांग्रेस का इतिहास कुछ ऐसा है* मुश्किल आई नहीं कि “Surrender मोड ON” हो गया 😏
*🔥2008 में चीन के एक खास विभाग से डील का दावा .. सरकार से नहीं, सीधे पार्टी से! 🤔*
रिकॉर्ड भी नहीं मिला… बस समझौता हो गया!
*🔥और उसके बाद क्या हुआ? बाजार में चीनी सामान की बाढ़ 📦*
अब ये संयोग है या रणनीति… ये जनता समझदार है 😉
जब बात आती है
सेना पर सवाल ❓
चीन पर चुप्पी 🤐
*🔥वाह! क्या “कूटनीति” है… या फिर वही पुराना Surrender मॉडल? 🇮🇳*
Tejraftarnews.in: भारतीय जनता पार्टी गांव/वार्ड चलो अभियान के निमित्त आज सम्भल के विधान सभा गुन्नौर में गवां रजपुरा मण्डल में संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी की प्रतिमा पर सफाई कार्य व दीपक प्रज्वलित किया।
मुख्य रूप से भाजपा मण्डल अध्यक्ष उमेश चन्द्र शर्मा, प्यारेलाल जाटव जी मण्डल कोषाध्यक्ष, रिंकू गौतम जी, मनवीर गौतम, छत्रपाल गौतम जी, आशाराम गौतम जी, अंतराम गौतम जी, करनपाल गौतम जी, चुन्नीलाल गौतम जी, लाखन गौतम जी, मोहनलाल गौतम जी, ओमीलाल गौतम जी, भीकम गौतम जी, प्रवेश गौतम जी, रवि गौतम जी, अरविन्द गौतम जी, अनिल गौतम जी, अनेकपाल गौतम जी, कपिल गौतम जी, धर्मसिंह गौतम जी उपस्थित रहे।
#ganvchaloabhiyaan #गांव_चलो_अभियान #सेवा_सुरक्षा_सुशासन #समृद्ध_यूपी_सशक्त_भारत Narendra Modi MYogiAdityanath Dharampal Singh BJP Uttar Pradesh Bhupendra Singh J.P.Nadda Amit Shah Bharatiya Janata Party
भारत माता की जय।।
बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव
अम्बेडकर जी अमर रहे
उमेश चन्द्र शर्मा भाजपा
मण्डल अध्यक्ष
tejraftarnews.in . *जय श्री राम*
*मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 के मुख्य समाचार*
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