जलजमाव से राहत मिलेगी:नए ड्रेनेज से जुड़ेंगे 2290 नाले, सिटी से फुलवारी-दानापुर तक 183 किमी में कैचमेंट का हो रहा निर्माण
बरसात के दौरान पटना आैर इसके आसपास के इलाके में जलजमाव से निजात के लिए ड्रेनेज नेटवर्क का मास्टर प्लान बनाया गया है। पटना के साथ ही पटना सिटी, दानापुर और फुलवारीशरीफ में 183 किमी के दायरे में नए ड्रेनेज का निर्माण हो रहा है। इस प्रोजेक्ट को नौ हिस्सों में बांटकर निर्माण हो रहा है। बुडको की देखरेख में काम हो रहा है। हालांकि, यह प्रोजेक्ट लेट हो गया है। लेकिन, इस साल मानसून से पहले इसका फायदा शहर को मिलने लगेगा। बुडको के मुताबिक, नौ में से पांच का काम अंतिम चरण में है और कई जगह नगर निगम के नालों से इसे जोड़ा भी जा रहा है। इससे बारिश होने पर जलनिकासी तेजी से होगी। यदि मानसून से पहले सभी नौ कैचमेंट तैयार हो जाते हैं, तो पटना सिटी से लेकर फुलवारीशरीफ और दानापुर इलाके तक जलजमाव की समस्या दूर होगी। इस ड्रेनेज से 2290 छोटे-बड़े नालों को जोड़ना है। देरी की वजह : कहीं जमीन नहीं तो अगले 40 साल तक जलजमाव से मुक्त रखने के लिए ड्रेनेज सिस्टम का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इस पर 956.59 करोड़ की राशि खर्च हो रही है। साल 2019 में जलजमाव से बाढ़ जैसे हालात पैदा होने के बाद इस प्लान को तैयार किया गया। वर्ष 2022 में ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ, लेकिन जगह-जगह जमीन की दिक्कत आैर यूटिलिटी शिफ्टिंग के चलते देरी हो गई। अब जाकर यह प्रोजेक्ट जमीन पर दिखने लगी है। 4 कैचमेंट में अभी एनओसी नहीं मिला कैचमेंट 2, 3, 5, 7 और 8 का काम मार्च तक पूरा हो जाएगा। कैचमेंट 1, 4, 6 और 9 में संबंधित विभागों से एनओसी मिलनी बाकी है। कहीं वन विभाग तो कहीं राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से बचे भाग को पूरा करने के लिए एनओसी लेना है। शहर का हो रहा विस्तार, इसलिए आसपास को भी किया शामिल पहले 160 किमी में नया ड्रेनेज बनाने की योजना बनी थी। चूंकि दानापुर, खगौल और फुलवारीशरीफ में शहर का विस्तार हो रहा है, इसलिए इन इलाकों को भी शामिल कर लिया गया। इसी तरह बाइपास के बड़े इलाके को भी शामिल किया गया है। ऐसे में ड्रेनेज का विस्तार 183 किमी में हो गया है। जरूरी क्यों...हर साल मानसून में जलनिकासी पर 5 करोड़ खर्च पटना नगर निगम, दानापुर नगर परिषद और फुलवारी नगर परिषद में प्रत्येक साल जलजमाव होता है। सालों पुराने ड्रेनेज नेटवर्क से जलनिकासी में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। तेज बारिश होने पर वर्तमान ड्रेनज चैनल से पानी निकालने में काफी दिक्कत होती है। मानसून के दौरान जलनिकासी पर करीब 5 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं।
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