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TRNDKB : ऐतिहासिक बाबा देवघाट महादेवन धाम में बृजेश गिरी द्वारा जबरिया करा रहे अवैध निर्माण को पुलिस ने रुकवाया
प्रतापगढ़। मुख्यालय से महज 11 किमी दूर लखनऊ वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित मोहनगंज बाजार से ठीक उत्तर एक किमी सई नदी तट पर स्थित बाबा देवघाट महादेवन धाम पर तथाकथित भूमाफिया के शै पर कतिपय व्यक्तिगत ट्रस्ट का हवाला देकर जबरिया अवैध निर्माण गुरुवार को शुरू किया गया। जिसको बाबा देवघाट महादेवन धाम सेवा संस्थान पंजीकृत के महंत पुजारी बाबा रामानंद गिरी एवं पुजारी राम आसरे गिरी महाराज की शिकायत पर चौकी प्रभारी मोहनगंज रोहित सिंह के द्वारा स्थलीय जानकारी देने के क्रम में थानाध्यक्ष पुष्पराज सिंह ने मंदिर प्रांगण में किसी भी तरह का अवैध निर्माण कार्य को करने से रोक दिया गया है। मंदिर के महंत पुजारी बाबा रामानन्द गिरी ने बताया कि हमारी 2007 में पंजीकृत संस्था बाबा बालेश्वर नाथ अवध धाम सेवा संस्थान से जुड़े पुजारी गण मंदिर की देखरेख, पूजा पाठ, सुबह शाम आरती इत्यादि का कार्य करते थे। मंदिर भूमिधरी में होने के नाते अपने हिस्से के अनुक्रम में मंदिर की पूजा आरती होती रही है। इसी संस्थान के जरिए मंदिर का विकास कार्य भी किया जाता रहा है। ऐतिहासिक मंदिर पर कब्जाने की मंशा को लेकर गैर भूमिधर बाहरी भूमाफियाओं ने गुपचुप तरीके से पंजीकृत संस्था के नाम से मिलता जुलता नाम तीन माह पहले पंजीयन करा लिया था। जो सोसायटी से नोटिस एवं अन्य कार्य हेतु सोसाइटी विवादित कराकर पूजा पाठ करने में पुलिस प्रशासन द्वारा हस्तक्षेप किया जाने लगा। इधर कुछ महीनों से व्यक्तिगत लोगों को ट्रस्ट में लेकर बृजेश गिरी ने बाबा बालुकेश्वर नाथ भरत धाम चेरिटेबल ट्रस्ट के नाम से सब रजिस्ट्रार सदर प्रतापगढ़ के समक्ष पंजीकृत कराने के बाद पुलिस एवं प्रशासन की शै पर जबरिया खुद पूजा पाठ करने लगे है। जब भी अन्य गोसाई समुदाय के लोग प्रशासन को अपनी भूमिधरी एवं पंजीकृत संस्था का जिक्र अधिकारी से करते तभी विपक्षी बृजेश गिरी संस्था विवादित होने का हवाला देकर पुलिस प्रशासन के दम पर लोगों की जुबान बंद करा देते रहे। इधर जनवरी 2026 में सहायक रजिस्ट्रार ने आपत्ति लगे हुए नाम को परिवर्तित करते हुए ऐतिहासिक धाम का प्राचीन नाम बाबा देवघाट महादेवन धाम सेवा संस्थान के नाम से आवश्यक प्रपत्र प्रस्तुत किया गया जिस पर सब रजिस्ट्रार ने पंजीकृत संस्था बाबा बालेश्वर नाथ अवध धाम सेवा संस्थान का नाम परिवर्तित कर बाबा देवघाट महादेवन धाम सेवा संस्थान के नाम से पंजीयन प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। प्रमाण पत्र जारी होने की स्थिति में संस्थान के महंत पुजारी रामानंद गिरी ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक के साथ अन्य अधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर जबरिया अवैध निर्माण, पूजा पाठ, आरती आदि को लेकर तथाकथित ट्रस्ट को हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। शिकायत की जानकारी होने पर मंदिर पर जबरिया कब्जे को लेकर पूर्व में भक्तों के द्वारा बनी मंदिर सीढ़ियों पर पूरे मंदिर प्रांगण में बाबा बालुकेश्वर नाथ भरत धाम चेरिटेबल ट्रस्ट का बोर्ड लगाने की मंशा को लेकर अवैध निर्माण चंद रोज पहले शुरू कराया गया। गुरुवार को दूसरी मुख्य सीढ़ी पर दूसरा गेट बनाने के लिए भी अवैध निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। जिस पर शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन ने बृजेश गिरी एवं अन्य को किसी भी तरह का अवैध निर्माण कार्य को किए जाने से रोक दिया गया है। प्रकरण उच्च प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा निस्तारण के बाद ही किसी भी तरह का निर्माण कार्य किया जा सकेगा। साथ ही पुलिस द्वारा नवीन किसी भी बोर्ड एवं शिलापट्ट को भी लगाए जाने से मना किया गया है।
TRN LIVE : *अधिवक्ता श्री संदीप कुमार तिवारी "राजन" की अदम पैरवी से जिला जज प्रतापगढ़ की कोर्ट ने जमानत की मंजूर*
*प्रतापगढ़ के बहुचर्चित गैर इरादतन हत्या का मामला।*
*पट्टी कोतवाली के अंतर्गत चरैया गांव के तीन लोगों को पुलिस ने भेजा था जेल*
*उक्त मामले में क्राइम ब्रांच प्रतापगढ़ द्वारा की जा रही है विवेचना*
अवध की दुनिया समाचार पत्र
TRN LIVE
*क्या हमने 1947 के इतिहास से कुछ सीखा है ?*
2 मिनट समय निकालकर #Thread अंत तक अवश्य पढ़े।🧵👇
🔏 लेखक : पंकज सनातनी
वर्ष 1941 की जनगणना के आंकड़ों से साफ है कि अविभाजित भारत की कुल जनसंख्या 56 करोड़ थी, जिसमें मुसलमानों की संख्या 7 करोड़ 44 लाख थी— यानी सिर्फ 13%। लेकिन जब 1947 में विभाजन हुआ, तो मुस्लिम लीग की जिद, मोहम्मद अली जिन्ना, सोहराब वर्दी और लियाकत अली जैसे नेताओं के 'डायरेक्ट एक्शन डे' के ऐलान पर भड़की हिंसा और गुंडई ने देश को खून से लथपथ कर दिया। और ऊपर से कांग्रेस के हिंदू नेताओं— खासकर गांधी और नेहरू की मूर्खता, कायरता और आरामपसंदगी ने इस विभाजन को चुपचाप स्वीकार कर लिया।
नतीजा ? पाकिस्तान (जिसमें तब पूर्वी पाकिस्तान भी शामिल था, जो बाद में बांग्लादेश बना) को 10.29 लाख वर्ग किलोमीटर का विशाल क्षेत्र मिला, जबकि भारत के पास सिर्फ 32.87 लाख वर्ग किलोमीटर बचा— यानी अविभाजित भारत के कुल भूभाग का 25% से ज्यादा हिस्सा 13% मुसलमानों को सौंप दिया गया।
सोचिए, यह कितना बड़ा धोखा था! 13% आबादी को 25% जमीन देकर भारत माता का टुकड़ा कर दिया गया। और सबसे बड़ा विश्वासघात ? उन 7 करोड़ 44 लाख मुसलमानों में से लगभग आधे यानी 3 करोड़ 54 लाख मुसलमान भारत में ही रुक गए, जबकि 97% मुसलमानों ने वोटिंग से मजहब के नाम पर अलग राष्ट्र मांगा था। मतलब, पाकिस्तान जाने वाले मुसलमान सिर्फ 8% थे, लेकिन उन्होंने 25% जमीन हड़प ली! बाकी 5% यहां रहकर कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार की मदद से पुनः अपनी साजिशें बुनने लगे— जनसंख्या जिहाद, वोट बैंक जिहाद, लव जिहाद, थूक जिहाद, मूत्र जिहाद आदि बनाने और हिंदू बाहुल्य भारत को अंदर से खोखला करने की।
यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा और दर्दनाक जनसंख्या स्थानांतरण था, जहां लाखों हिंदू-सिख मारे गए, महिलाओं पर अत्याचार, संपत्ति लूटी गई। फिर भी, भारत ने सेकुलरिज्म चुना और करोड़ों मुसलमानों की हिंसा और जिद को रोकने की बजाय कांग्रेस ने उन्हें पनपने दिया एवं समस्त नागरिक अधिकार दिए।
*इतिहास का यह अध्याय आज भी कई सवाल छोड़ता है —*
- क्या विभाजन टाला जा सकता था ?
- क्या उस समय के राजनीतिक निर्णयों में दूरदर्शिता की कमी थी ?
- क्या उस दौर की वास्तविकताओं को आज की पीढ़ी सही रूप में जानती है ?
सबसे बड़ी समस्या यह है कि भारत में बहुत कम लोग 1947 के इतिहास को गहराई से पढ़ते हैं। अधिकतर लोग या तो आधा-अधूरा इतिहास जानते हैं या फिर राजनीतिक Narratives के आधार पर अपनी राय बना लेते हैं। उपरोक्त सभी वाक्य इतिहास के पन्नों में दर्ज है— 70-80 साल पुराना, लेकिन हिंदू आज भी सोए हुए हैं। झूठा इतिहास पढ़ाकर हमें अंधा रखा गया है, ताकि हम गांधी-नेहरू की गद्दारी न देखें। नेहरू-गांधी परिवार ने देश को काटा, मुसलमानों को बसाया और हिंदुओं को कमजोर बनाए रखा।
याद करो कसाब को ओन कैमरा हिंदुओं को टारगेट कर मारता था, पहलगाम में सिंदूर और पुरुषों के जननांग चेक कर हिंदुओं का कत्लेआम! लेकिन हम आंखें बंद कर लेते हैं।
अब काफी हो गया! हिंदूओं जागो! अपने इतिहास से सीखो, संगठित हो, जागरूक बनो। इन दोगले नेताओं (सर्वदलीय), फिल्मकारों और मुस्लिम वोटबैंक की राजनीति को उखाड़ फेंको। राष्ट्र और सनातन धर्म की रक्षा करो, क्योंकि भारत माता की रक्षा करना प्रत्येक हिंदू का फर्ज है। अब गुस्सा नहीं, क्रांति लाओ।
किसी भी राष्ट्र के लिए इतिहास से सीखना अत्यंत आवश्यक होता है। यदि समाज अपने अतीत की घटनाओं को समझता है तो वह भविष्य में अधिक सतर्क और संगठित बन सकता है।
*निष्कर्ष :* 1947 का विभाजन सिर्फ़ जमीन और संख्या नहीं, यह हमारी चेतना की परीक्षा थी। 13% आबादी के लिए 25% भूभाग दिया गया और भारत में मुसलमानों की मौजूदगी ने हमेशा सतर्क रहने की सीख दी। अब समय है जागने का, संगठित होने का, अपनी शक्ति और धर्म की रक्षा करने का। जागो हिंदू! सोचो, समझो, एकजुट हो, भारत माता की रक्षा हमारा धर्म, हमारी शान और हमारी जिम्मेदारी है।
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भारत माता की जय 🇮🇳
TRNDKB
TRNDKB : मुग़ल शहंशाह औरंगज़ेब की परदादी राजा भारमल की बेटी हिन्दू क्षत्रिय थीं , प्रचंड धार्मिक थीं, इलाहाबाद में संगम के किनारे स्थित अकबर के किले में तो वह अक्षय वट और उससे लगा हुआ मंदिर आज भी मौजूद है जहां औरंगज़ेब की क्षत्रिय परदादी पूजा अर्चना करती थीं। वहीं से गंगाजल लेकर सूर्य को अर्ध चढ़ाती थीं।
औरंगज़ेब की सगी दादी क्षत्रिय "मानवती बाई जी लाल" थीं जो जोधपुर के शासक राजा उदयसिंह की पुत्री थीं और उन्हें 'जगत गोसाई' की उपाधि मिली हुई थीं।
कहने का अर्थ यह है कि औरंगज़ेब की परदादी क्षत्रिय हिंदू, सगी दादी क्षत्रिय हिंदू, औरंगज़ेब की दो पत्नियां नवाब बाई और उदयपुरी हिन्दू, औरंगज़ेब के प्रमुख सेनापति राजा जयसिंह क्षत्रिय हिंदू, औरंगज़ेब के प्रमुख रणनीतिकार राजा जसवंत सिंह क्षत्रिय हिंदू , औरंगज़ेब के प्रमुख सिपाहसलार उदयभान राठौड़ क्षत्रिय हिंदू और पंडित कृष्ण भास्कर कुलकर्णी हिन्दू, औरंगज़ेब के दरबार में आधे से अधिक महत्वपूर्ण पदों पर मौजूद दरबारी हिंदू और औरंगज़ेब के सभी मुख़बिर गंगा दत्त कौल उर्फ़ गंगू पंडित , पंडित सुच्चानंद और पंडित चैतो दास ब्राह्मण हिंदू और गाली खाएं आज के दूसरे लोग
और फिर तुर्रा यह कि औरंगज़ेब हिंदुओं से नफ़रत करता था....
TRN LIVE : *संपत्ति का ब्योरा न भर पाने से कर्मचारियों के वेतन रोके जाने पर आक्रोश :परिषद*
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*लखनऊ।* राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उ प्र के महामंत्री अतुल मिश्रा ने मुख्यमंत्री को एवं मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि कतिपय अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति का ब्योरा न भर पाने के कारण उनका विगत माह का वेतन रोक दिया गया है जो न्यायोचित नहीं है ।
मिश्रा ने कहा कि कतिपय कर्मचारियों को कम्प्यूटर का ज्ञान न होने के कारण वे अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा नहीं भर पाये। ये वे कर्मचारी है जो कि या तो फील्ड/रूरल में सर्विस कर रहे है और आज भी की पैड वाला फोन का इस्तेमाल कर रहे है। जिसके कारण वे भरने में असमर्थ रहे ।
उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा कर्मचारियों की सुविधा के लिये दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जिसका लाभ कार्ड बनवाकर प्राप्त कर सकते हैैं, परन्तु आज भी अधिकांश कर्मचारियों का कैशलेस कार्ड नहीं बन पाया है और वे इससे वांछित है।
चूकी साधन व जानकारी का अभाव है । ऐसी परिस्थिति में वेतन रोकने जैसा कृत मानवीय दृष्टिकोण से कदापि उचित नही है । आज के परिवेश में यदि कर्मचारी का वेतन कुछ दिन विलम्ब होता है तो उसको और उसके परिवार को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
ऐसी परिस्थिति में वेतन रोक देने से कर्मचारी व उसका परिवार भुखमरी की कगार पर है। बोर्ड सहित समस्त कक्षाओ की परीक्षाएं चल रही है इनके बच्चों को उसमें भी समस्यायें आ रही है साथ ही होली जैसे पर्व पर वेतन न मिलना एक तरह से सरकार के द्वारा शोषण की श्रेणी में आता है।
कई जनपदों से पदाधिकारियों द्वारा यह भी संज्ञान में लाया गया है कि वर्तमान में कई दिनों से पोर्टल भी बन्द चल रहा है। जिसके कारण जो प्रयास कर भी रहे है तो उनका भी हो नहीं रहा।
मिश्रा ने बताया कि परिषद द्वारा कैशलेस इलाज की सुविधा कर्मचारियों को प्राप्त हो, इसके लिए मुख्य सचिव स्तर पर हुई बैठकों में सुझााव दिया गया था कि प्रत्येक जनपदीय कार्यालयों में कैम्प लगाकर उनका कार्ड बनवाया जाये, परन्तु सहमति व्याप्त होने के बावजूद भी यह संभव नहीं हो पाया।
अतएव मानव संपदा पोर्टल पर जिन कर्मचारियों का ब्योरा उपलब्ध नहीं है, उनका ब्योरा पोर्टल पर अपलोड करने हेतु सरकार को उचित व्यवस्था करनी चाहिए। उसके उपरान्त ही यदि कोई कर्मचारी ब्योरा उपलब्ध नहीं कराता है तो उसको चेतावनी देने के उपरान्त ही वेतन रोका जाये।
परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से अनुरोध किया है कि उपरोक्त प्रकरण पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुये व होली जैसे महापर्व को दृष्टिगत रखते हुये होली के पूर्व वेतन भुगतान करने हेतु निर्देषित करने की कृपा करे। जिससे सरकार के इस निर्णय का दंष कर्मचारियों के परिवार को सामाजिक रूप से न झेलना पड़े।
TRN LIVE : * *विशेष सूचना* *मूवी का विरोध करें, विरोध करें, विरोध करें*।
* भाइयों *यादव जी की लवस्टोरी मूवी के विरोध में समस्त भारत का यादव समाज है अपने अपने जिले पर अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा ने, तथा यादव समाज के सभी संगठनों व अन्य समाज के संगठनों ने भी इस मूवी के रिलीज होने पर रोक लगाने हेतु विरोध किया , विरोध इतने बड़े स्तर पर किया गया कि अगर इस मूवी पर रोक नहीं लगी तो दुवारा महाभारत फिर से होगा,देश में एक जाति और धर्म को लेकर मूवी केवल यादव समाज को नीचा दिखाने, बदनाम करने,उसके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने व लव जिहाद से जोड़कर उसकी छवि खराब करने के उद्देश्य से सोची समझी साजिश के तहत बनाई गई है यह संविधान विरोधी है इस पर रोक लगाई जाए। देश की सबसे बड़ी अदालत सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में कानून व संविधान के तहत मूवी पर रोक/स्टे लगाने हेतु याचिका दायर की थी उन सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं के समूह की एक भी न सुनते हुए मा. सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया है।यह देश के लिए शर्म की बात है देश का संविधान किसी जाति, धर्म के सम्मान को ठेस पहुंचाने,उसे बदनाम करने की इजाजत नहीं देता है।इस तरह पक्षपात करने,किसी की बात न सुनने से देश में अराजकता का माहोल बनाना कहां तक उचित है , समाजिक संगठनों ने अधिवक्ताओं ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय को विरोध की भयानक स्थिति से अवगत कराया गया था। फिर भी मा.उच्चतम् न्यायालय ने मूवी पर रोक /स्टे नहीं लगाया है।ऐसा प्रतीत होता है किसी दबाव में यह निर्णय लिया गया है देश के माहौल खराब होने की भी चिंता मा.न्यायालय ने नहीं की है आखिर उचित न्याय के लिए कहां जाना होगा। अब तो यादव समाज, दलित समाज, पिछड़ा वर्ग , अल्पसंख्यक वर्ग तथा समाज के सभी जाति व वर्ग से अनुरोध है कि वेटियां सभी समाज की एक जैसी होती हैं इसीलिए सभी समाज के लोग "यादव जी की लवस्टोरी," का बायकौट करें, बहिष्कार करें । किसी भी समाज का आदमी इसे नहीं देखेने जायेगा , क्योंकि सभी समाज की बेटियों की इज्जत एक जैसी होती है इस तरह से सभी समाज के द्वारा बहिष्कार जरूर, जरूर, जरूर किया जाय ।तो मूवी स्वयं ही फेल (फ्लाप) हो जायेगी। तो कोई भी फिल्म निर्माता, निर्देशक ऐसी किसी भी जाति व धर्म पर फिल्म नहीं बनायेगा। मेरा समाज के समस्त लोगों से विशेष रूप से युवाओं से विनम्र निवेदन है कि गली-गली, घर-घर, गांव -गाव ,शहर-शहर जाकर इस मूवी को नहीं देखने अनुरोध करें,और समाज में भेद-भाव फैलाने का जो गलत कार्य किया है उसका सभी विरोध करें। धन्यवाद, *
* सादर--- के.पी.सिंह यादव
* प्रदेश उपाध्यक्ष -अखिल भारत वर्षीय यादव महासभा उ.प्र.
TRNDKB : *यादव जी की लव स्टोरी* ❌
27 फरवरी को रिलीज हो रही पिचर के टाइटल के खिलाफ जिसमें लड़की यादव और लड़का मुस्लिम है और टाइटल *यादव जी की लव स्टोरी* दिया है यह सीधे तौर पे यादवों को बदनाम करने की साजिश है इसी संदर्भ में
*कल 27/02/2026*
*समय दोपहर 12 बजे*
*स्थान : बगुलामुखी मंदिर के सामने सिविक सेंटर*
एकत्रित होकर समदड़ीया मॉल के सामने पोस्टर जलाकर 🔥सांकेतिक विरोध प्रदर्शन करेंगे जिसमें आप सभी सामाजिक बंधुओ से बड़ी संख्या में उपस्थित होने का आग्रह है
*निवेदक :- समस्त यादव समाज जबलपुर*
TRNDKB : यादव जी की लव स्टोरी फिल्म के विरोध में मैं कल आ रहा हूं जग में शामिल होने क्योंकि मैं यादव हूं यादव का परिचय दूंगा
****""**********. जबलपुर के समस्त यादव समाज के भाइयों से युवा भाइयों से निवेदन है कि यादव समाज की बहन और बेटियों के सम्मान में यादव जी की लव स्टोरी फिल्म समाज को अपमानित करने के लिए बनाई गई है इसके विरोध के लिए कल जान 27 फरवरी को समय 12:00 बजे बगलामुखी मंदिर के सामने सिविक सेंटर में सभी भाइयों को एकत्रित होकर यादव होने का परिचय देना है यादव का सम्मान अगर नहीं बचेगा तो फिर किस काम के यादव चुनौती सरकार की स्वीकार करना है कल सारे काम छोड़कर हजारों की संख्या में समय निकालकर अवश्य पहुंचे यह यादव के सम्मान की बात है
जय यादव जय माधव
TRNDKB : *जाति आधारित जनगणना विरोधी भाजपा -*
*ओबीसी विरोधी भाजपा-*
*(ब्राह्मण शाही में शूद्रों की जाति जनगणना लगभग असंभव)*
बिहार सरकार जाति आधारित जनगणना करा रही है हालांकि तकनीकी कारणों से उसे जाति आधारित सर्वे का नाम दिया गया है. उप्र में सपा ने जाति आधारित जनगणना की मांग जोरदार तरीके से उठाई लेकिन भाजपा की योगी सरकार ने उस मांग को खारिज कर दिया है.
केन्द्र की मोदी सरकार पहले ही सुप्रिम कोर्ट में जाति आधारित जनगणना नहीं कराने का हलफनामा दे चुकी है.
स्वातंत्र्योत्तर काल से आज तक जाति आधारित जनगणना के विरुद्ध सतत षड्यंत्र करने वाली कांग्रेस भी अब भारी मन से जाति आधारित जनगणना की मांग कर रही है लेकिन समय आने पर वह इस मुद्दे पर अपनी ब्राह्मणी छावनी की टुकड़ी भाजपा का ही साथ देगी. अपने मुख्यमंत्रित्व काल में अपनी जाति को जनरल से ओबीसी में शामिल कराने वाले पीएम
मोदी को पिछड़े वर्ग का होने का खूब प्रचार किया जाता है लेकिन उनकी भी राष्ट्रीय जनगणना में जाति आधारित जनगणना कराने की हिम्मत नहीं है बल्कि ओबीसी नाराज न हो जाय इस भय से राष्ट्रीय जनगणना 2021 को आगे ढकेलते जा रहे हैं अब तो लग रहा है कि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद ही जनगणना होगी देश का कितना भी नुकसान हो जाय.
मंडल आयोग ने भी जाति आधारित जनगणना की सिफारिश की थी.
*ओबीसी प्रधानमंत्री देवगोडा के मंत्रिमंडल ने 2001 की राष्ट्रीय जनगणना जाति आधारित कराने का निर्णय भी लिया था, लेकिन ब्राह्मणी छावनी की कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पद से देवगोडा को हटाकर आई के गुजराल को प्रधानमंत्री बना दिया . कांग्रेस भाजपा के संयुक्त षड्यंत्र से ईवीएम लाकर वाजपेयी की लंगड़ी सरकार बनाई गई जिसने पहला निर्णय 2001 की राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी की जाति जनगणना न कराने का लिया.*
2011 की जनगणना में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ओबीसी नेताओं के दबाव में ओबीसी की जाति आधारित जनगणना कराना मंजूर करके भी नहीं कराया अलग से सामाजिक आर्थिक सर्वे (SECC) नाम से कराया जिसके आंकड़े न कांग्रेस सरकार ने सार्वजनिक किया और न ही 2014 के बाद भाजपा सरकार ने.
पूरी ब्राह्मणी छावनी आर एस एस, कांग्रेस, जनसंघ आज की भाजपा आजादी के बाद से ही ओबीसी की जाति जनगणना के विरुद्ध सतत षड्यंत्र कर रहे हैं ताकि उन्हें कहीं भी संख्यानुपात हिस्सेदारी न देनी पड़े और विधायिका ,कार्यपालिका ,न्यायपालिका, मीडिया, कार्पोरेट जगत हर जगह ओबीसी के हिस्से को ब्राह्मणों को दिया जा सके.
ब्राह्मणी छावनी अपने षड्यंत्र में कामयाब हो चुकी है 1931 की जनगणना के 52% ओबीसी भारत के किसी भी विभाग में 10 से 12% से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं मिल पाई आजादी के बाद से ही उसके हिस्से का लगभग 75 से 80% संसाधन नौकरियों और अन्य सुविधाओं का उपभोग ब्राह्मण कर रहे हैं, आर एस एस , कांग्रेस, भाजपा ओबीसी को उनका हक न देकर यथास्थिति बनाए रखना चाहते हैं जाति आधारित जनगणना से ब्राह्मणी छावनी के षड्यंत्र का भांडा फूट जायेगा और ओबीसी को भी देश के संसाधनों, नौकरियों शिक्षण संस्थानों आदि में संख्यानुपात हिस्सा देना पड़ेगा जो वे किसी भी कीमत पर देना नहीं चाहते क्योंकि उनके ग्रंथों के अनुसार ओबीसी ही असली शूद्र हैं उन्हें शिक्षा संपत्ति शस्त्र सम्मान का अधिकार ही नहीं है उनके ग्रंथों में शूद्रों (ओबीसी) की धन संपत्ति को ब्राह्मणों द्वारा राजा के साथ मिलकर छीन लेने का प्रावधान है वे आज तक उसी एजेंडे पर चल रहे हैं और उनका साथ दे रहे हैं उनके पिट्ठू, गुलाम, स्वार्थी, स्वाभिमान शून्य, ओबीसी समाज के शत्रु ओबीसी , नेता जो भाजपा कांग्रेस जैसी ब्राह्मणों की पार्टियों में रहकर ओबीसी समाज के शोषण उत्पीड़न हकमारी पर आंख बंद किए रहते हैं और अपने समाज के हक अधिकारों को लूटने में ब्राह्मणों का सहयोग करते हैं उनकी औकात ही नहीं है कि भाजपा कांग्रेस में रहकर ओबीसी की जाति आधारित जनगणना की मांग कर सकें उन्हें पता है कि वह ब्राह्मणी छावनी है यदि ओबीसी जनगणना की बात किया तो उनका गोपीनाथ मुंडे होते देर नहीं लगेगी.
*अब उपाय क्या है?*
सबसे पहले तो ओबीसी को हिन्दू बनकर ब्राह्मणों के इशारे पर मुसलमानों से लड़ना बंद करना होगा.
एससी एसटी सहित पूरे वंचित समाज को लामबंद करना होगा.
ब्राह्मणों के दिए भक्तिमार्ग को पूरी तरह त्यागकर ध्यानमार्ग अर्थात ज्ञान और विज्ञान मार्ग को अपनाना होगा, उनके वेद पुराण मनुस्मृति रामचरितमानस, महाभारत आदि ग्रंथों जिनमें हर जगह शूद्रों को नीच बनाकर अपमानित प्रताड़ित करने हक अधिकार मान सम्मान से वंचित करने के नियम कायदे लिखे हुए हैं उन्हें अपना धर्मग्रंथ मानना बंद करके उन्हें अपने दिमाग घर एव जीवन से बाहर करना होगा.
और घर घर हर कार्यक्रम में संविधान का पाठ, उसकी प्रस्तावना का पाठ करते हुए संविधान का युद्धस्तर पर प्रचार प्रसार करना होगा.
ब्राह्मणों द्वारा थोपे गए काल्पनिक आदर्शों को त्यागकर अपने वास्तविक महापुरुषों फुले साहू अंबेडकर पेरियार आदि को आदर्श के रूप में अपनाना होगा.
उनकी लिखी किताबों को घर घर में रखना पढ़ना और पढ़ाना होगा उनके जीवन संघर्ष से प्रेरणा लेकर उसे अपने जीवन में उतरना होगा.
ब्राह्मणों से जन्म से मृत्यु तक के सारे संस्कार कर्मकांड पूजा पाठ बंद करने होंगे सबकुछ अपने बुद्धि विवेक और समतावादी महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलकर करना होगा.
ब्राह्मणी त्योहारों को मनाना बंद करके अपने महापुरुषों, मातृशक्तियों की जयंतियों को त्योहार के रूप में मनाना होगा.
मंदिरों तीर्थस्थलों पर जाना बंद करके महापुरुषों के स्मृति स्थलों पर जाकर उन्हें तीर्थ स्थल के रूप में स्थापित करना होगा.
ब्राह्मणों को दान, मान, मतदान पूरी तरह से बंद तो करना ही होगा ओबीसी एससी एसटी समाज के ब्राह्मणी छावनी के गुलाम नेताओं का भी सामाजिक बहिष्कार करना होगा जाति या ओबीसी एससी एसटी के नाम पर उन आस्तीन के सांपों को कतई वोट नहीं देना है.
इसके साथ ही पूरे वंचित समाज को एकजुट होकर ब्राह्मणों के सबसे बड़े हथियार ईवीएम के खिलाफ देशव्यापी प्रखर आंदोलन करना होगा.
जाति आधारित जनगणना के लिए सतत जनजागरण करते हुए तीव्र आंदोलन लगतार करते रहना.
यदि लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा सरकार ने जाति जनगणना नहीं कराया तो हर चुनाव में भाजपा को हराना प्रत्येक ओबीसी एससी एसटी का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए.
*आर एस एस प्रमुख मोहन भागवत के नेतृत्व में ब्राह्मणी छावनी सतत ओबीसी (शूद्रों) के खिलाफ सफल षड्यंत्र चला रही है उनके षडयंत्रों को ओबीसी एससी एसटी हिन्दू बनकर नहीं बल्कि शूद्र बनकर ही असफल कर सकते हैं, क्योंकि वे ओबीसी एससी एसटी को हिन्दू कहते जरूर हैं लेकिन मानते हैं शूद्र ही इसीलिए उनके हक अधिकारों को हड़पना अपना धर्मसिद्ध, जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं.*
इसलिए भाजपा खुलेआम कहती है कि जाति आधारित जनगणना नहीं करायेगी.
जैसे वे ब्राह्मण शाही टिकाए रखने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं.
वैसे ही शूद्रों यानी एससी एसटी ओबीसी को भी भाजपा की ब्राह्मण शाही को ध्वस्त करके बहुजन शाही स्थापित करने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञा लेकर मैदान में उतरना ही होगा
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बुंदेलखंड की पावन धरती पर अमर बलिदानी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि
बुंदेलखंड की पावन एवं ऐतिहासिक धरती ओरछा धाम में सातार नदी के पवित्र तट पर अमर स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद के स्मारक पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का वातावरण देशभक्ति, एकता और समर्पण की भावना से ओत-प्रोत रहा।
इस अवसर पर रायकवार, केवट, धीवर एवं मछुआरा समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। उपस्थित जनसमूह ने देश की आज़ादी में अपने पूर्वजों के अमूल्य योगदान को याद करते हुए गर्व व्यक्त किया। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनके पूर्वजों ने तन, मन और धन से राष्ट्र की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कार्यक्रम में कश्यप निषाद संगठन भारत बुंदेलखंड के अध्यक्ष डॉ. सुभाष रायकवार तथा संगठन महामंत्री आचार्य जयशंकर कश्यप (झांसी) विशेष रूप से उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हमें अपने महापुरुषों के आदर्शों को जीवन में अपनाकर समाज में शिक्षा, एकता और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना चाहिए।
ओरछा धाम की पावन भूमि पर आयोजित यह कार्यक्रम सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक शक्ति का प्रेरणास्रोत बना। अंत में सभी उपस्थित लोगों ने वीर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए राष्ट्र की एकता, अखंडता और सम्मान की रक्षा करने का संकल्प लिया।.
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जय मां सती भंवर कंवर सा व श्री नखत सिद्ध बन्ना सा धाम नोसर मंदिर का कार्य करने हेतु इंसान अनुसार से राशि जरूर करेंबड़े दुख के साथ सुचित करना पड़ रहा है भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता का आज सुबह ग्रेटर नॉएडा मे निधन हो गया,, वो वहुत ही नेक दिल के इंसान थे,,, हम लोगो को परिवार के अगुवा की तरह लेकर चलते थे,,कई बार वो हमारी बहुत सी जरूरते पूरी भी की,,,,,, कमेंटेटर प्रेम कुमार
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