दूर-दूर तक बदबू और नरक से बदतर हालात, जहां पानी की जगह तैरता है कचरे का पहाड़

Feb 16, 2026 - 09:07
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दूर-दूर तक बदबू और नरक से बदतर हालात, जहां पानी की जगह तैरता है कचरे का पहाड़

पहाड़ों के बीच बहती एक खूबसूरत नदी… जहां कभी यहां सैलानी राफ्टिंग के लिए आते थे, पानी इतना साफ कि तल तक दिख जाए, लेकिन आज उसी नदी में दूर-दूर तक सिर्फ प्लास्टिक की बोतलें, टायर, लकड़ी और सड़ा हुआ कचरा तैरता नजर आता है. बदबू ऐसी कि सांस लेना मुश्किल हो जाए. यूरोप के बीचों-बीच बहने वाली यह नदी अब पर्यावरण संकट की जीती-जागती तस्वीर बन चुकी है. 

साफ पानी से कचरे के पहाड़ तक

बोस्निया-हर्जेगोविना के शहर वाइसग्रैड से गुजरने वाली ड्रिना नदी, जो कभी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जानी जाती थी, आज भारी प्रदूषण की मार झेल रही है. यह नदी बोस्निया, सर्बिया और मॉन्टेनेग्रो से होकर बहती है. स्थानीय लोगों और पर्यटकों द्वारा सालों से लापरवाही से फेंका गया कचरा अब इस नदी में जमा होता जा रहा है. हालत ये हैं कि कई जगहों पर पानी की सतह कचरे से ढकी दिखाई देती है. 

बारिश और सर्दी में बढ़ती मुसीबत

ड्रिना नदी का जलस्तर सर्दियों और बारिश के मौसम में काफी बढ़ जाता है. कई बार नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगती है और बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं. ऐसे समय में आसपास के इलाकों से बहकर आने वाला प्लास्टिक, लकड़ी, घरेलू कचरा और अन्य मलबा नदी में इकट्ठा हो जाता है. बताया जाता है कि कुछ इलाकों में करीब 10 हजार क्यूबिक मीटर तक कचरा जमा हो चुका है. यह मात्रा किसी छोटे मैदान को भरने के बराबर है. 

कचरा रोकने के लिए बैरियर

ड्रिना नदी पर बने एक बोस्नियन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट की टीम ने कचरे को आगे बहने से रोकने के लिए विशेष बैरियर लगाया है. इस बैरियर का मकसद यह है कि नदी में बहता कचरा पावर प्लांट तक न पहुंचे और मशीनों को नुकसान न पहुंचाए. हालांकि यह अस्थायी समाधान है. बैरियर पर कचरा जमा तो हो जाता है, लेकिन उसे हटाने और सही तरीके से निपटाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था अब भी नहीं है.

विकास की कमी और कचरा प्रबंधन की चुनौती

1990 के दशक में यूगोस्लाविया के टूटने के बाद बने देशों में बोस्निया-हर्जेगोविना आर्थिक और विकास के मामले में कई यूरोपीय देशों से पीछे रह गया. यहां कचरा प्रबंधन के लिए पर्याप्त ट्रीटमेंट प्लांट और आधुनिक सिस्टम की कमी है. कई इलाकों में लोग घरेलू कचरे को प्लास्टिक बैग में भरकर खुले में या पेड़ों पर लटका देते हैं. मौसम खराब होने या जानवरों द्वारा छेड़छाड़ के कारण ये थैलियां फट जाती हैं और कचरा सीधे नदी में गिर जाता है.

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर

नदी में जमा प्लास्टिक और अन्य कचरा न सिर्फ पानी को प्रदूषित करता है, बल्कि जलीय जीवन पर भी बुरा असर डालता है. मछलियों और अन्य जीवों के लिए यह कचरा जानलेवा साबित हो सकता है. इसके अलावा, सड़े हुए कचरे से निकलने वाली बदबू और जहरीले तत्व आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं.

कभी पर्यटन की पहचान थी ड्रिना

एक समय था जब ड्रिना नदी एडवेंचर स्पोर्ट्स और राफ्टिंग के लिए मशहूर थी. साफ पानी और खूबसूरत घाटियां इसे खास बनाती थीं. आज वही नदी पर्यावरणीय लापरवाही का प्रतीक बन गई है. सफाई अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन हर साल बारिश और बाढ़ के साथ नया कचरा फिर जमा हो जाता है. जब तक ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था नहीं बनेगी, तब तक यह समस्या यूं ही बढ़ती रहेगी.

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला