आज सुबह का मुख्य समाचार पत्र ✉ और हिमाचल प्रदेश आईपीएस कैडर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान पर खोला मोर्चा... जताया कड़ा ऐतराज...

यूपी: लखनऊ में बसपा सुप्रीमो मायावती की प्रेस कॉन्फ़्रेंस उस वक्त अचानक बाधित हो गई जब कार्यक्रम स्थल की लाइट से धुआँ निकलने लगा। धुआँ दिखते ही मौके पर अफ़रा-तफ़री मच गई और सुरक्षा कारणों से प्रेस कॉन्फ़्रेंस तुरंत समाप्त करनी पड़ी। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। तकनीकी खराबी की जाँच की जा रही है। #Lucknow #Mayawati #BSP #PressConference #BreakingNews 7 hours ago

Jan 16, 2026 - 09:39
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आज सुबह का मुख्य समाचार पत्र ✉ और हिमाचल प्रदेश आईपीएस कैडर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान पर खोला मोर्चा... जताया कड़ा ऐतराज...

TRN LIVETRNDKB: 🚩‼️ओ३म्‼️🚩

🕉️🙏नमस्ते जी

दिनांक - १६ जनवरी २०२६ ईस्वी

दिन - - शुक्रवार 

    🌘 तिथि -- त्रयोदशी ( २२:२१ तक तत्पश्चात चतुर्दशी )

 🪐 नक्षत्र - - मूल ( पूरी रात्री )

 पक्ष - - कृष्ण 

मास - - माघ 

ऋतु - - शिशिर 

सूर्य - - उत्तरायण )

 🌞 सूर्योदय - - प्रातः ७:१५ पर दिल्ली में 

🌞 सूर्यास्त - - सायं १७:४७ पर 

🌘 चन्द्रोदय -- ३०:१२ तक पर 

🌘 चन्द्रास्त - - १५:२५ पर 

 सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२६

कलयुगाब्द - - ५१२६

विक्रम संवत् - -२०८२

शक संवत् - - १९४७

दयानंदाब्द - - २०१

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 🚩‼️ ओ३म् ‼️🚩 

🔥 अंहिसा परमोधर्मः धर्म हिंसा तदैव चः !

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  धर्म की रक्षा के लिए हिंसा करना अहिंसा से भी श्रेष्ठ है कायर-जो अपनी रक्षा नहीं करता,दुष्टों को अपनी सामर्थय अनुसार दण्ड नहीं देता वह कायर है | हिंसा-अन्यायपूर्वक व्यवहार करना व दुष्टों का साथ देना हिंसा है | अहिंसा-जो अपनी और सज्जनों की रक्षा करता हो | दुष्टों को दण्ड देना भी अहिंसा है |अहिंसा का सही अर्थ है -सज्जनों की रक्षा करो और दुष्टों का संहार करो |

      अहिंसा परमो धर्म, अर्थात अहिंसा ही परमधर्म है और धर्म का पालन मनुष्य मात्र के लिए अनिवार्य है, लेकिन अज्ञानता और मूर्खता या कहें कि कुछ पठित और महान लोग भीअहिंसा का स्वरूप समझने में भूल कर गये।अहिंसा के मार्ग में जो हिंसक लोग हैं, उनकों हटाना, मिटाना और समूल नष्ट कर देना ही अहिंसा है।यह वेद,रामायण, गीता, मनुस्मृति आदि का आदेश है ।जंहा ताकत होती है, वंहा व्यवस्था, न्याय, शान्ति का राज्य होता है।शान्ति की जननी क्रांति है ।

     शत्रुओं के सामने आत्म समर्पण करना अहिंसा नही है, कायरता है,नपुसंकता है, बुजदिली है ।अहिंसा को समझना है तो रामायण,गीता,महाभारत, मनुस्मृति, वेद और ईश्वर के संदेश पढ़ो और समझो । आज फिर से शान्ति की स्थापना के लिए क्रांति की आवश्यकता है ।

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🕉️🚩आज कावेद मंत्र 🕉️🚩

🌷ओ३म् अन्देवाहु: सम्भवादन्यदाहुरसम्भवात्।इति शुश्रुम धीराणामं ये नस्तद्विचचक्षिरे।।( यजुर्वेद ४०|१० )

💐भावार्थ है मनुष्यों! जैसे विद्वान लोग कार्य- वस्तु और कारण-वस्तु से आगे कहे जाने वाले भिन्न-भिन्न उपकार ग्रहण करते तथा अन्यों को भी ग्रहण करवाते हैं, उन कार्य और कारण के गुणों को जानकर अन्यों को समझतें है , इसी प्रकार तुम भी निश्चय करों। 

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 🔥विश्व के एकमात्र वैदिक पञ्चाङ्ग के अनुसार👇

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 🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ 🕉🚩🙏

(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त) 🔮🚨💧🚨 🔮

ओ३म् तत्सत् श्री ब्रह्मणो दिवसे द्वितीये प्रहरार्धे श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वते मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे

कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- षड्विंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२६ ) सृष्ट्यब्दे】【 द्वयशीत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०८२) वैक्रमाब्दे 】 【 एकाधिकद्विशतीतमे ( २०१) दयानन्दाब्दे, काल -संवत्सरे, रवि- उत्तरायणे , शिशिर -ऋतौ, माघ - मासे, कृष्ण - पक्षे , त्रयोदश्यां

 तिथौ, मूल - नक्षत्रे, शुक्रवासरे

 , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे, आर्यावर्तान्तर गते, भारतवर्षे भरतखंडे...प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ, आत्मकल्याणार्थ,रोग,शोक,निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे

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TRN LIVE: माघ माहात्म्य अध्याय - 12

          यमदूत कहने लगा कि जो कोई प्रसंगवश भी एकादशी के व्रत को करता है वह दुखों को प्राप्त नहीं होता। मास की दोनों एकादशी भगवान पद्मनाभ के दिन हैं। जब तक मनुष्य इन दिनों में व्रत नहीं करता उसके शरीर में पाप बने रहते हैं। हजारों अश्वमेघ, सैकड़ो वाजपेयी यज्ञ, एकादशी व्रत की सोलहवीं कला के बराबर भी नही हैं। एकादशी के दिन व्रत करने से ग्यारह इंद्रियों से किए सब पाप नष्ट हो जाते हैं। गङ्गा, गया, काशी, पुष्कर, कुरुक्षेत्र, यमुना, चन्द्रभागा कोई भी एकादशी के तुल्य नहीं है। इस दिन व्रत करके मनुष्य अनायास ही वैकुंठ लोक को प्राप्त करता है। एकादशी को व्रत और रात्रि जागरण करने से माता-पिता और स्त्री के कुल की दस-दस पीढ़ियाँ उद्धार पाती हैं और वह पीताम्बरधरी होकर भगवान के निकट रहते हैं।

          बाल, युवा और वृद्ध सब तथा पापी भी व्रत करने से नर्क में नहीं जाते। यमदूत कहता है कि हे वैश्य! मैं सूक्ष्म में तुमसे नरक से बचने का धर्म कहता हूँ। मन, कर्म और वचन से प्राणिमात्र का द्रोह न करना, इंद्रियों को वश में रखना, दान देना, भगवान की सेवा करना, नियमपूर्वक वर्णाश्रम धर्म का पालन करना, इन कर्मों के करने से मनुष्य नरक से बचा रहता है। स्वर्ग प्राप्त करने की इच्छा से मनुष्य गरीब भी हो तो भी जूता, छतरी, अन्न, धन, जल कुछ न कुछ दान देता रहे। दान देने वाला मनुष्य कभी यम की यातना को नही भोगता तथा दीर्घायु और धनी होता है। बहुत कहने से ही क्या अधर्म से ही मनुष्य बुरी गति को प्राप्त होता है। मनुष्य सदैव धर्म के कार्यों से ही स्वर्ग प्राप्त कर सकता है इसलिए बाल्यावस्था से ही धर्म के कार्यों का अभ्यास करना चाहिए।

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                   "जय जय श्री राधे"

TRN LIVE: राशिफल 16 जनवरी, 2026

मेष राशि : किसी के बहकावे में आकर बना काम बिगाड़ लेंगे। राजनीति से जुड़े लोगों के लिए समय संघर्ष पूर्ण है। धन का दुरुपयोग न करें। जीवनसाथी का साथ आगे बढऩे में मदद करेगा। यात्रा हो सकती है। मौद्रिक लाभ का संकेत है और आप आय का एक अतिरिक्त स्रोत भी स्थापित कर सकते हैं।

वृष राशि : व्यवसाय में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ेगा। विरोधी आप को नीचा दिखाने का हरसंभव प्रयास करेंगे। जो लोग कभी आप को अपना आदर्श मानते थे, वे ही आज आप के किये कार्यों में खामी निकालेंगे। आप परिवार और दोस्तों के साथ छुट्टियां मनाने जा सकते हैं।

मिथुन राशि : नौकरीपेशा जातकों को कुछ अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा सकती है। आप अपना काम करते हुए आत्मविश्वास से भरे रहेंगे। समय अनुकूल है, जितना पैसा कमा सकते हैं कमा लो। आजीविका के साधनों में कमी आएगी। भूमि संबंधित किये निवेश से लाभ होगा। बुजुर्गों के स्वास्थ्य की चिंता सताएगी। यात्रा आनंदप्रद रहेगी।

कर्क राशि : समय के साथ हो रहे बदलाव के कारण तनाव बढ़ेगा। कई महत्वपूर्ण कार्य रुकने के कारण परेशानी बढ़ सकती है। परिवार में हो रही अनदेखी से नाराज रहेंगे। संतान का साथ मन को उत्साहित करेगा। अनुत्पादक गतिविधियों पर समय व्यतीत करने से बचें अन्यथा कुछ अन्य काम आधे-अधूरे रह जाएंगे।

सिंह राशि : जिन लोगों से आपने वादा किया था वह निभाने का वक्त आ गया है। पारिवारिक कार्यक्रमों में बड़ा खर्च होगा। अपने वर्चस्व को कायम रखने के लिए फिजूल खर्च होगा। कान से संबंधित पीड़ा संभव है। प्रॉपर्टी या वाहन में भी निवेश संभव है। प्रतिद्वंद्वी गतिविधि बढ़ेगी।

कन्या राशि : राजनीति में आने का मन हो रहा है। जो भी करें विचार और गहन चिंतन के बाद निर्णय लें। पारिवारिक जनों से मनमुटाव होगा। मांगलिक कार्यों पर धन खर्च होगा। वाहन मशीनरी का प्रयोग सतर्कता से करें। परिवार में कोई उत्सव आदि हो सकता है। आपकी कुछ महत्वाकांक्षाएं पूरी हो सकती हैं।

तुला राशि : विद्यार्थियों के लिए बेहतर समय है। यदि किसी बड़ी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं, तो सफलता की संभावना बहुत अधिक है। समय रहते जरूरी कार्य पूरे करें। अपनी जिम्मेदारी निभाने में सफल होंगे। आकस्मिक धन प्राप्ति हो सकती है। पेट संबंधित रोग से ग्रस्त रहेंगे। कोयला कपड़ा कागज और कारखानों के स्वामियों के लिए समय उपयुक्त है।

वृश्चिक राशि : जीवनसाथी के साथ सुखद यात्रा का योग भी बन रहा है। अपनी क्षमता को पहचाने और कार्य करें आप कर सकते हैं, फिर भी रुके हुए है। आत्मविश्वास की कमी के कारण कोई भी कार्य या फैसला लेने में पीछे रहेंगे। संतान सुख संभव है। कहीं फंसा हुआ धन मिलने के योग बनेंगे।यात्रा निरस्त होगी। आकस्मिक धन प्राप्ति हो सकती है। पेट संबंधित रोग से ग्रस्त रहेंगे।

धनु राशि : यदि बहुत लंबे समय से संतान सुख से वंचित हैं, तो इससे बेहतर समय अभी और जल्दी नहीं आने वाला, जिसमें आप संतान प्राप्ति के लिए प्रयास कर सकते हैं। आप क्यों दूसरे के मामलों में दखल देते हैं। अपने अधिकारियों से विवाद करना आपके लिए नुकसानदायक होगा। कारोबार में अनचाही अड़चनों से मन खिन्न रहेगा। लौह व्यवसायियों के लिए समय मध्यम है।

मकर राशि : धन के मामले में समय सामान्य है, आप नए कार्यों का प्रारम्भ कर सकते हैं। सोचे कार्य समय पर होंगे। कार्यस्थल पर अनुकूल वातावरण मिलेगा। अधिकारी आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित करेंगे। निजी कार्य में दूसरों को प्रवेश न दें। विदेश जाने के योग हैं। अध्ययन में रुचि कम ही रहेगी। आप अपने घर के निर्माण के लिए अत्यधिक धन खर्च कर सकते हैं।

कुम्भ राशि : यात्रा में थोड़ी सावधानी बरतें। धन तथा कीमती सामानों को सुरक्षित रखें। आकस्मिक आये कार्यों की अधिकता से व्यस्त रहेंगे। संतों का सान्निध्य प्राप्त होगा। मकान की मरम्मत पर धन लगेगा। विवाह योग्य जातकों के लिए समय उपयुक्त है। पारिवारिक रीति रिवाजों को करने के लिए धन लगेगा। आत्मविश्वास की कमी के कारण कोई भी कार्य या फैसला लेने में पीछे रहेंगे।

मीन राशि : न्यायालय संबंधित मामले अभी थोड़ा लम्बा चल सकते हैं। मनमर्जी न करें। हालात को समझें फिर फैसले करें। संतान के व्यवहार पारिवारिक माहौल बिगड़ सकता है। नए काम के मिलने से उत्साहित रहेंगे। अध्ययन में आ रही परेशानी दूर होगी। पारिवारिक संबंधों में सुधार होगा। कारोबार में अनचाही अड़चनों से मन खिन्न रहेगा।

🕉️ सदाशिव 🕉️

TRN LIVE: ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥

श्रीमद्भागवतमहापुराण

दशम स्कन्ध (पूर्वार्ध) – तैंतीसवाँ अध्याय..(पोस्ट०९)

महारास

साधनाके दो भेद हैं—१—मर्यादापूर्ण वैध साधना और २—मर्यादारहित अवैध प्रेमसाधना। दोनोंके ही अपने-अपने स्वतन्त्र नियम हैं। वैध साधनामें जैसे नियमोंके बन्धनका, सनातन पद्धतिका, कर्तव्योंका और विविध पालनीय कर्मोंका त्याग साधनासे भ्रष्ट करनेवाला और महान् हानिकर है,

वैसे ही अवैध प्रेमसाधनामें इनका पालन कलङ्करूप होता है। यह बात नहीं कि इन सब आत्मोन्नतिके साधनोंको वह अवैध प्रेमसाधनाका साधक जान-बूझकर छोड़ देता है। बात यह है कि वह स्तर ही ऐसा है, जहाँ इनकी आवश्यकता नहीं है। ये वहाँ अपने-आप वैसे ही छूट जाते हैं, जैसे नदीके पार पहुँच जानेपर स्वाभाविक ही नौकाकी सवारी छूट जाती है। जमीनपर न तो नौका पर बैठकर चलनेका प्रश्र उठता है और न ऐसा चाहने या करनेवाला बुद्धिमान् ही माना जाता है। ये सब साधन वहींतक रहते हैं, जहाँतक सारी वृत्तियाँ सहज स्वेच्छासे सदा-सर्वदा एकमात्र भगवान् की ओर दौडऩे नहीं लग जातीं। इसीलिये भगवान् ने गीतामें एक जगह तो अर्जुनसे कहा है—

न मे पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किंचन।

नानवाप्तमवाप्तव्यं वर्त एव च कर्मणि ।।

यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रित:।

मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्या: पार्थ सर्वश: ।।

उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम्।

सङ्करस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमा: प्रजा: ।।

सक्ता: कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत।

कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसंग्रहम् ।।

...............(३। २२—२५)

‘अर्जुन ! यद्यपि तीनों लोकोंमें मुझे कुछ भी करना नहीं है, और न मुझे किसी वस्तुको प्राप्त ही करना है, जो मुझे न प्राप्त है; तो भी मैं कर्म करता ही हूँ। यदि मैं सावधान होकर कर्म न करूँ तो अर्जुन ! मेरी देखा-देखी लोग कर्मोंको छोड़ बैठें और यों मेरे कर्म न करनेसे ये सारे लोक भ्रष्ट हो जायँ तथा मैं इन्हें वर्णसङ्कर बनानेवाला और सारी प्रजाका नाश करनेवाला बनूँ। इसलिये मेरे इस आदर्श के अनुसार अनासक्त ज्ञानी पुरुषको भी लोकसंग्रहके लिये वैसे ही कर्म करना चाहिये, जैसे कर्म में आसक्त अज्ञानी लोग करते हैं।’

यहाँ भगवान् आदर्श लोकसंग्रही महापुरुषके रूपमें बोलते हैं, लोकनायक बनकर सर्वसाधारणको शिक्षा देते हैं। इसलिये स्वयं अपना उदाहरण देकर लोगोंको कर्ममें प्रवृत्त करना चाहते हैं। ये ही भगवान् उसी गीतामें जहाँ अन्तरङ्गता की बात कहते हैं, वहाँ स्पष्ट कहते हैं—

सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।

.......(१८। ६६)

‘सारे धर्मोंका त्याग करके तू केवल एक मेरी शरणमें आ जा।’

यह बात सबके लिये नहीं है। इसीसे भगवान् १८। ६४ में इसे सबसे बढक़र छिपी हुई गुप्त बात (सर्वगुह्यतम) कहकर इसके बादके ही श्लोकमें कहते हैं—

इदं ते नातपस्काय नाभक्ताय कदाचन ।।

न चाशुश्रूषवे वाच्यं न च मां योऽभ्यसूयति ।।

.............(१८। ६७)

‘भैया अर्जुन ! इस सर्वगुह्यतम बातको जो इन्द्रिय-विजयी तपस्वी न हो,

मेरा भक्त न हो, सुनना न चाहता हो और मुझमें दोष लगाता हो, उसे न कहना।’

शेष आगामी पोस्ट में --

गीताप्रेस,गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीमद्भागवतमहापुराण

(विशिष्टसंस्करण) पुस्तककोड 1535 से

TRN LIVE: .. *जय श्री राम*

*शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 के मुख्य समाचार*

🔶Srinagar: ईरान ने खोला हवाई क्षेत्र, आज आएगी पहली निकासी उड़ान; फंसे भारतीय छात्रों को लाने की प्रक्रिया तेज

🔶ECI: गोवा, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में एसआईआर की समय-सीमा बढ़ी, चुनाव आयोग ने की घोषणा

🔶‘हमारे सैनिक निस्वार्थ सेवा के प्रतीक’: सेना दिवस पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश

🔶आर्मी-डे पर पहली बार जयपुर में सेना ने दिखाया शौर्य: शहीद जवान की मां मेडल लेते बेहोश हुईं, राजनाथ सिंह बोले- ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ

🔶रांची ED ऑफिस में जांच करने पहुंची झारखंड पुलिस: अधिकारियों पर पूछताछ के नाम पर मारपीट का आरोप; सेंट्रल फोर्स के जवान बुलाए गए

🔶इंदौर में राहुल गांधी की मीटिंग को नहीं मिली मंजूरी: अब सिर्फ बॉम्बे हॉस्पिटल और भागीरथपुरा जाएंगे, दूषित पानी से अब तक 24 मौतें

🔶रूस-यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप ने फोड़ा बम, बोले- पुतिन डील को तैयार, लेकिन जेलेंस्की नहीं दिखा रहे उत्साह

🔶ईडी की याचिका पर ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, कहा- जांच में हस्तक्षेप गंभीर मुद्दा

🔶कनाडा पुलिस का दावा- बिश्नोई गैंग भारत सरकार की ओर से काम कर रहा है: रिपोर्ट

🔶नाटो के कुछ देशों ने सैन्य अभ्यास के लिए अपने सैनिकों को ग्रीनलैंड भेजा है. रूस ने इसपर चिंता जताई है.

🔶अरब सागर से घुसपैठ की ताक में थे पाक‍िस्‍तानी, भारत के वीरों ने दबोच ली गर्दन

🔶"हिंदुओं की गर्दनें काटने से मिलेगी आजादी"... लश्कर आतंकी Abu Musa का खौफनाक ऐलान, दी जिहाद की खुली धमकी!

🔶'इजरायल ना जाएं', भारतीय नागरिकों के लिए दूतावास ने जारी की एजवाइजरी

🔶सीमा पर फिर दिखा संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन, एक हफ्ते में तीसरी घटना

🔶भारतीय लोकतंत्र एक विशाल वृक्ष, विविधता इसकी सबसे बड़ी ताकत : मोदी

🔶यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष लेयेन गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे

🔶Iran Unrest: 'ट्रंप की चेतावनी पर ईरान ने रोकीं 800 लोगों की फांसी', व्हाइट हाउस बोला- हालात पर रखें हैं नजर

🔶BMC Election 2026 Exit Poll: आठ एग्जिट पोल में BJP+ सबसे आगे, ठाकरे बंधुओं और कांग्रेस का कैसा रहेगा प्रदर्शन?

🔶Delhi High Court: पॉक्सो कानून का मकसद है यौन शोषण रोकना, सहमति से बने रोमांटिक रिश्तों को अपराध बनाना नहीं

🔶श्रीनगर में पारा -5.2°, डल झील जमी: राजस्थान में -3 डिग्री, हरियाणा में शून्य के करीब तापमान; उत्तराखंड के दो जिलों में स्कूल बंद

🔷अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत की जीत से शुरुआत: अमेरिका को 6 विकेट से हराया, हेनिल पटेल को 5 विकेट; वैभव 2 रन बना सके

           *आपका दिन शुभ और मंगलमय हो सुप्रभात...!!*

                          जय हो🙏

TRN  LIVE 

TRN LIVE: *गुरुवार जनवरी 2026 के मुख्य समाचार*

🔶रूस-ईरान समेत 75 देशों के लोगों की US में नो एंट्री, ट्रंप ने दिया एक और झटका।

🔶​'तमिल संस्कृति केवल तमिलनाडु की नहीं, बल्कि पूरे भारत की संस्कृति है': प्रधानमंत्री मोदी

🔶ईरान में हालात बेकाबू, भारतीय विदेश मंत्रालय ने जारी किया 'रेड अलर्ट'; कहा तुरंत लौटें स्वदेश

🔶सिद्धारमैया बोले- कर्नाटक CM पद पर हर दिन भ्रम:राहुल गांधी स्थिति साफ करें; डिप्टी सीएम शिवकुमार ने लिखा- प्रार्थना नाकाम नहीं होती

🔶चुप्पी खतरों को कम नहीं करती, US हमले की आशंका के बीच भारत से बोला ईरान

🔶मच गई लूट! लॉन्च होते ही छा गई ये SUV, पहले दिन ही 94,000 लोगों ने की बुकिंग

🔶ब्रिटेन का एलन मस्क को झटका: सरकार ने AI पर कसा शिकंजा, कहा-Grok और X को मानना ही होगा कानून

🔶अब इजराइल का ईरानी प्रदर्शनकारियों को खुला समर्थन- UN में कहा- “ आप अकेले नहीं...हम साथ ”

🔶केंद्र सरकार ने बर्बाद की देश की अर्थव्यवस्था : एशिया में सबसे ज्यादा गिरा रुपया, कांग्रेस ने कहा- रिकार्ड गिरावट बनी हमारी साख का सवाल 

🔶​बालिग लड़की की शादी में भी उसकी सहमति जरूरी, उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा- दबाव में शादी कराना स्वस्थ समाज के अनुकूल नहीं 

🔶​थाईलैंड में ट्रेन की निर्माण कार्य में लगी क्रेन से टक्कर : हादसे में 22 लोगों की मौत, मलबे में फंसे यात्रियों को निकाला बाहर 

🔶दूर हुई नाराजगी? तेजप्रताप के भोज में पहुंचे लालू यादव, तेजस्वी रहे नदारद

🔶'MVA या उद्धव की जरूरत कभी नहीं पड़ेगी": फडणवीस ने भविष्य में गठबंधन की संभावना से किया इनकार

🔶​Iran Protest: 'ईरान में हत्याएं रुक रही हैं, फांसी पर भी लगी रोक', अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा दावा

🔶​उत्तर भारत की महिलाओं के बारे में डीएमके सांसद के बयान पर विवाद, बीजेपी ने कहा- डीएनए में है अलगाववाद

🔶​महाराष्ट्र: BMC सहित 29 महानगरपालिका के लिए सुबह 7:30 बजे से वोटिंग, मैदान में 15931 कैंडिडेट।

🔶​'इस बार गोली नहीं चूकेगी', ईरान के सरकारी चैनल से डोनाल्ड ट्रंप को सीधी धमकी।

🔶सावधान... बिना किसी लिंक पर क्लिक किए हैक हो सकता है आपका एंड्रॉयड फोन, चेतावनी जारी।

🔶आई-पैक पर ईडी रेड केस में कलकत्ता हाईकोर्ट में तृणमूल की याचिका डिस्पोज, भाजपा ने ममता बनर्जी पर बोला हमला।

🔶Rajasthan Accident Video: सीकर में ट्रक और कार में भीषण टक्कर, 6 की मौत, 3 घायल।

🔷Ind vs NZ 2nd ODI: केएल राहुल का सैकड़ा काम न आया, न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, सीरीज में बढ़ा रोमांच।

           *आप का दिन शुभ और मंगलमय हो सुप्रभात....!*

                     *जय हो🙏*

TRN LIVE: ब्रेकिंग न्यूज़ 

नगर पालिका बांसी के पटेल नगर मोहल्ले में लगा गंदगी का अम्बार 

नगर पालिका आफिस में बड़े बड़े अच्छरो मे लिखा है शिकायत के लिए 1533 पर काल करे परन्तु काल करने के बाद भी नहीं होता निस्तारण।। 

लाखों रुपये के स्वच्छता के नाम पर अवैध धन निकासी कर बन्दर बांट करने में माहिर बताये जाते हैं बड़े बाबू। 

वही बताया जाता है कि नगर पालिका बांसी में एक बाबू पूरे नगर पालिका पर पड़ रहा है भारी। 

चर्चा है कि रांग को राईट व राईट को रांग करने मे महारथ हासिल है है नगर पालिका के एक बाबू का।

सत्येन्द्र उपाध्याय पत्रकार

TRN LIVE 

TRN LIVE: *🔰 भारत के पड़ोसी राष्ट्र और सीमा रेखाएँ (Border Lines) 🔰*

*प्रश्न: भारत और पाकिस्तान की सीमा किस रेखा से निर्धारित होती है?*

*उत्तर: रेडक्लिफ लाइन*

*प्रश्न: भारत–चीन सीमा को किस नाम से जाना जाता है?*

*उत्तर: मैकमोहन रेखा*

*प्रश्न: मैकमोहन रेखा का निर्धारण कब हुआ था?*

*उत्तर: वर्ष 1914 में, शिमला समझौते के अंतर्गत*

*प्रश्न: भारत की सबसे लंबी स्थलीय सीमा किस देश के साथ है?*

*उत्तर: बांग्लादेश*

*प्रश्न: भारत और अफगानिस्तान के बीच किस रेखा को सीमा माना जाता है?*

*उत्तर: डूरंड रेखा (जो वर्तमान में पाकिस्तान के क्षेत्र से होकर गुजरती है)*

*प्रश्न: भारत–नेपाल सीमा की कुल लंबाई कितनी है?*

*उत्तर: लगभग 1,751 किलोमीटर*

*प्रश्न: किन भारतीय राज्यों की सीमा चीन से मिलती है?*

*उत्तर: जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश*

*प्रश्न: भारत और म्यांमार के बीच सीमा की लंबाई कितनी है?*

*उत्तर: लगभग 1,643 किलोमीटर*

*प्रश्न: भारत–भूटान सीमा की कुल लंबाई कितनी है?*

*उत्तर: करीब 699 किलोमीटर*

*प्रश्न: भारत और श्रीलंका के बीच कौन-सा जलमार्ग स्थित है?*

*उत्तर: पाल्क जलडमरूमध्य*

*प्रश्न: भारत और पाकिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा कितनी लंबी है?*

*उत्तर: लगभग 3,323 किलोमीटर*

*प्रश्न: भारत की कुल समुद्री सीमा कितनी है?*

*उत्तर: लगभग 7,516.6 किलोमीटर*

*प्रश्न: भारत के उत्तरी भाग में कौन-कौन से पड़ोसी देश हैं?*

*उत्तर: चीन, नेपाल और भूटान*

TRN LIVE: *प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई)*

"एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के लिए, हमें अपने खाद्य उद्योग को मजबूत बनाना होगा।" - नरेंद्र मोदी

*आत्मनिर्भर भारत के अन्तर्गत योजना की पात्रता:*

✨ निजी सूक्ष्म उद्यमियों के लिए

✨ भारतीय नागरिक जिसकी उम्र 18 वर्ष से अधिक हो

✨ नया उद्योग स्थापित करने हेतु एवं पूर्व से स्थापित सूक्ष्म खाद्य यूनिटों के उन्नयन हेतु सहायता

✨ एक परिवार से एक व्यक्ति को ही लाभ प्राप्त होगा

✨ प्रोप्रायटर संस्था / पार्टनरशीप संस्था पात्र होगी

*योजना के तहत अनुदान प्राप्त करने वाली यूनिटें:*

🍞 आटा चक्की

🌶 मसाला नमकीन

🍲 आटा मील

🥣 दाल मील

🌿 मिर्च, धनिया मील

🥒 अदरक, सोंठ, प्याज पेस्ट

🍟 चिप्स प्लांट

🥠 पापड़ उद्योग

🍝 पास्ता निर्माण

💡 लहसुन पेस्ट

🌮 कुरकुरे

🍲 टेस्टी पोहा मील

🍜 अचार उद्योग

💛 हल्दी आलू साबुदान उद्योग

🍰 बेकरी बडी उद्योग

🥛 गुड़, तेल मील, गजक

🐮 मिल्क प्लांट

🧀 पनीर उद्योग

🥖 घी उद्योग

🌼 सोयाबीन का पनीर

🐓 मुर्गी दाना

🐮 पशु दाना आदि प्रसंस्करण इकाईयों

*35% सब्सिडी योजना:*

✨ 35% सब्सिडी पर उपकरण खरीदने की सुविधा

✨ अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी

✨ विशेष प्रोत्साहन महिला उद्यमियों के लिए

*आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज:*

📝 आधार कार्ड

📝 पेन कार्ड

📝 मशीनों का कोटेशन 

📝 बैंक पास बुक की छाया प्रति

📝 बिजली का बिल

📸 प्रस्तावित यूनिट के स्थान का फोटो

संपर्क सूत्र 9302653802

"आपके सपनों को साकार करने के लिए, हम आपके साथ हैं।"🙏🏻💐

TRN LIVE: *📅 14 जनवरी 2026 | करेंट अफेयर्स (One Liners)*

*➊ आईआईटी कानपुर ने भारत का पहला पैरों से संचालित मोबाइल मैनिपुलेटर “स्कॉर्प” विकसित किया है।*

*➋ न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे मेघालय उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनी हैं।*

*➌ टीवी सीरीज़ में बेस्ट सपोर्टिंग मेल एक्टर का गोल्डन ग्लोब जीतने वाले सबसे युवा कलाकार ओवेन कूपर हैं।*

*➍ विश्व के सबसे बड़े एआई फिल्म पुरस्कार से जुबैर जलासी को सम्मानित किया गया है।*

*➎ हॉकी जगत से जुड़े दिग्गज खिलाड़ी दविंदर सिंह गरचा का 74 वर्ष की उम्र में निधन हुआ।*

*➏ भारतीय सेना ने महाराष्ट्र में “सांझा शक्ति” नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित किया।*

*➐ अरालम को केरल का पहला तितली अभयारण्य घोषित किया गया है।*

*➑ वर्ष 2025 का संयुक्त राष्ट्र महासचिव पुरस्कार भारतीय अधिकारी स्वाति शांता कुमार को मिला है।*

*➒ पांचवीं ट्राई-सर्विसेज़ वेटरन्स डे परेड का आयोजन मुंबई में हुआ।*

*➓ विराट कोहली क्रिकेट इतिहास में सर्वाधिक रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज़ बन गए हैं।*

TRN LIVE: *🔰 स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े प्रसिद्ध उपनाम (Unique Re-Write) 🔰*

*प्रश्न: भगत सिंह का प्रचलित उपनाम क्या था?*

*उत्तर: शहीद-ए-आज़म*

*प्रश्न: बाल गंगाधर तिलक को किस नाम से पुकारा जाता था?*

*उत्तर: लोकमान्य*

*प्रश्न: चंद्रशेखर आज़ाद ने स्वयं कौन-सा नाम अपनाया था?*

*उत्तर: आज़ाद*

*प्रश्न: लाला लाजपत राय का लोकप्रिय उपनाम क्या था?*

*उत्तर: पंजाब केसरी*

*प्रश्न: रानी लक्ष्मीबाई को किस नाम से जाना जाता है?*

*उत्तर: झाँसी की रानी*

*प्रश्न: सरोजिनी नायडू को कौन-सा उपनाम दिया गया?*

*उत्तर: नाइटिंगेल ऑफ इंडिया*

*प्रश्न: महात्मा गांधी किस नाम से प्रसिद्ध थे?*

*उत्तर: बापू*

*प्रश्न: अरोरा सिंह को किस नाम से जाना जाता था?*

*उत्तर: क्रांतिकारी अरोरा*

*प्रश्न: राजगुरु का पूरा नाम क्या था?*

*उत्तर: शिवराम हरि राजगुरु*

*प्रश्न: बटुकेश्वर दत्त ने किसके साथ जेल यात्रा की?*

*उत्तर: भगत सिंह*

*प्रश्न: खुदीराम बोस किस आयु में शहीद हुए?*

*उत्तर: 18 वर्ष*

*प्रश्न: सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित सेना का नाम क्या था?*

*उत्तर: आज़ाद हिंद फ़ौज*

*प्रश्न: विनायक दामोदर सावरकर किस नाम से प्रसिद्ध हुए?*

*उत्तर: वीर सावरकर*

*प्रश्न: मदनलाल धींगरा ने किस ब्रिटिश अधिकारी पर गोली चलाई थी?*

उत्तर: कर्ज़न वायली

TRN LIVE TRNDKB JITENDRA 

TRN LIVE: *चंबा-साहो मार्ग पर बड़ा हादसा गहरी खाई में गिरी कार, दो लोगों की मौके पर मौत*

पहाड़ों की घुमावदार सड़कों पर आधी रात का सन्नाटा दो जिंदगियों के लिए काल बन गया। चंबा-साहो मार्ग पर एक भीषण सड़क हादसे में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा इतना जबरदस्त था कि रात के अंधेरे में किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई और सुबह जब सूरज की पहली किरण के साथ एक बस उस मार्ग से गुजरी, तब जाकर इस बर्बादी का मंजर दुनिया के सामने आया।

सुबह हुआ खौफनाक मंजर का खुलासा

यह हादसा बुधवार देर रात का माना जा रहा है। दुर्घटना की जानकारी गुरुवार सुबह तब मिली जब चंबा की ओर आ रही एक निजी बस के यात्रियों की नजर सड़क से नीचे नाले में गिरी एक क्षतिग्रस्त कार पर पड़ी। कार की हालत देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता था कि टक्कर कितनी जोरदार रही होगी। यात्रियों के शोर मचाने पर स्थानीय ग्रामीण मौके पर जुटे और तुरंत पुलिस को इस बारे में सूचित किया।

मौके पर जुटी भारी भीड़, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू

हादसे की खबर आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई, जिसके बाद घटनास्थल पर लोगों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। स्थानीय लोगों ने अपनी ओर से राहत कार्य शुरू किया, लेकिन खाई गहरी होने के कारण काफी मशक्कत करनी पड़ी। सूचना मिलते ही सदर थाना चंबा की टीम भी मौके के लिए रवाना हो गई ताकि शवों को निकाला जा सके और जांच प्रक्रिया शुरू की जा सके।

TRN LIVE: *जिंदा जल गए 6 लोग, मृतकों में 3 मासूम भी शामिल, सिरमौर के नौहराधार में भीषण अग्रिकांड*

नौहराधार तहसील के घंडूरी पटवार वृत्त के अंतर्गत आने वाले ग्राम तलांगना में बीती रात हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे सिरमौर को झकझोर कर रख दिया है। मोहन सिंह पुत्र रामदयाल के रिहायशी मकान में रात करीब अढ़ाई बजे लगी भीषण आग में एक ही परिवार के छह लोगों की जिंदा जलने से दर्दनाक मृत्यु हो गइद्र्य। घटना के समय मकान में कुल आठ लोग मौजूद थे, जिसमे इंद्रा देवी पत्नी मोहन सिंह भी मौजूद थी। इंद्रा देवी को जैसे ही आग लगने का अंदेशा हुआ तुरंत बाहर निकली व गांव में आवाजें लगाई, ज़ब तक गांव के लोग पहुंचते तब तक आग काफी फैल चुकी थी, जिनमें से गांव की मदद से केवल एक व्यक्ति को ही सुरक्षित बाहर निकाला जा सका

मिली जानकारी के अनुसार आग लगने की यह घटना उस समय हुई जब घर में मौजूद सभी लोग गहरी नींद में थे। मृतकों की पहचान नरेश (पुत्र दुर्गा सिंह, निवासी टपरोली, राजगढ़), उनकी पत्नी तृप्ता, कविता (पत्नी लोकेन्द्र, निवासी खुमड़ा, चौपाल), और उनके तीन मासूम बच्चे सारिका, कृतिका व कृतिक के रूप में हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सभी लोग मायके में मोहन सिंह के घर मेहमान बनकर आए थे। आग इतनी भयावह थी कि मृतकों के शवों की पहचान कर पाना भी अत्यंत कठिन हो गया है। इस हादसे में केवल लोकेन्द्र (42), निवासी खुमड़ा, तहसील चौपाल को हीं ग्रामीणों द्वारा 42 निवासी कुंबरा तहसील चौपाल को ही ग्रामीणों द्वारा सुरक्षित बाहर निकाला जा सका जिनकी हालत गंभीर होने के कारण उन्हें उपचार हेतु सोलन अस्पताल में ले जाया गया है पटवारी द्वारा तैयार की गई प्रारंभिक रिपोर्ट में इस भारी जनहानि की पुष्टि की है

TRN LIVE: *पंजाब में पकड़ी 200 करोड़ की हेरोइन अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, 40 किलो चिट्टे के साथ 4 गिरफ्तार*

पंजाब के अमृतसर में नशे की बड़ी खेप पकड़ी है। 40 किलो हेरोइन (चिट्टे) के साथ चार तस्करों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल और काउंटर इंटेलिजेंस अमृतसर ने की है। 

नशा मुक्त बनाने के अभियान के तहत स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल और काउंटर इंटेलिजेंस अमृतसर ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नशा तस्करी नेटवर्क से जुड़ी बड़ी खेप बरामद की है। पुलिस ने इस ऑपरेशन के दौरान 40 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन जब्त की है।

TRN LIVE: ....आज सुप्रीम कोर्ट मे राहुल बाबा की वोट चोरी वाले एजेंडे की हवा निकल गई....बिहार चुनाव पर दाखिल एक PIL पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत जी ने कहा....

...............अगर कोई व्यक्ति सिर्फ मुफ्त की पब्लिसिटी लेने के लिए फालतू की याचिकाएं दाखिल करता है...तो कोर्ट को भी ये देखना पड़ेगा कि वो जुर्माना भरने की हैसियत रखता है या नहीं....

......और इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपने 5 साल के ITR (इन्कम टैक्स रिटर्न) के रिकॉर्ड को कोर्ट मे जमा करने के आदेश दे दिए.....ताकि याचिकाकर्ता की औकात के हिसा से जुर्माना लगाया जा सके...

... .साल की शुरुआत बढ़िया हुई है...😁😁

TRN LIVE: [साबू स्टीफन बनाम भारत संघ]

बिहार चुनावों पर जनहित याचिका

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत: यदि आप तुच्छ याचिकाएँ दायर करने की कला में निपुण हैं, तो हमें यह भी पता होना चाहिए कि सजा मिलने पर आपको कितना भुगतान करना पड़ सकता है। यह सब सिर्फ प्रचार पाने के लिए किया जा रहा है।

आदेश: हम याचिकाकर्ता को पिछले 5 वर्षों के अपने आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने का निर्देश देते हैं।

बहुत कम ऐसे मौके आते है जब देश का CJI पर भरोसा बढ़ता है।🔥🔥

TRN LIVE: भोपाल के राजीव गांधी कॉलेज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

जैसा की वीडियो में दिख रहा है कॉलेज के छात्रो से स्कॉलरशिप के नाम पर ₹5000 की रिश्वत मांगने को लेकर छात्र विरोध कर रहे हैं लेकिन संचालक #कांग्रेस✋ नेता साजिद अली के द्वारा कार्यवाही ना कर उल्टा छात्रों के साथ धक्का मुक्की की गई वीडियो बनाने पर मोबाइल छुड़ाया गया और धमकी दी गई और कहा गया जाओ जहां शिकायत करना कर दो।

TRN LIVE: एक तरफ सरहद पर ऑपरेशन सिंदूर जारी है. वहीं जम्मू कश्मीर में भी एक बड़ा ऑपरेशन शुरु हुआ है. अब जम्मू कश्मीर के मस्जिदों की प्रोफाइलिंग की जा रही है.

यानी जम्मू कश्मीर पुलिस ने मस्जिदों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने का अभियान शुरू किया है.

जम्मू कश्मीर में मस्जिदों की जांच के इस ऑपरेशन का असली मकसद क्या है. मस्जिदों की प्रोफाइलिंग की जरूरत क्यों हैं, चलिए आपको बताते हैं.आपको ये भी पता चलेगा कि कश्मीर की मस्जिदों का वो काला इतिहास क्या है, जिसकी वजह से वो बार बार सवालों के घेरे में आती हैं.

क्यों हो रही प्रोफाइलिंग?

सबसे पहले आपको ये जानना चाहिए कि जम्मू कश्मीर पुलिस का ये ऑपरेशन है क्या? पुलिस ने घाटी की सभी मस्जिदों के बारे में विस्तृत जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक बड़ा निगरानी अभियान शुरू किया है. हर एक मस्जिद और उससे जुड़े लोगों की जानकारी मांगी जा रही है. मस्जिद के इमाम, मुअज्जिन यानी अजान करने वाले व्यक्ति, खतीब यानी नमाज पढ़ने वाले व्यक्ति और मैनेजमेंट कमिटी के सदस्यों की पर्सनल जानकारी शामिल है. पुलिस ने मस्जिद कमेटियों को चार पन्ने का एक फॉर्म भरने को कहा है जिसमें मस्जिदों और मदरसों की डिटेल्स मांगी गई है.

इस फॉर्म में क्या क्या सवाल पूछे गए हैं ये भी आपको जानना चाहिए.

मस्जिद का पंथ क्या है- बरेलवी, हनफी, देवबंदी या अहले-हदीस इसके बारे में पूछा गया है.

मस्जिद की क्षमता कितनी है, कितने फ्लोर हैं.

मस्जिद को बनाने में लागत कितनी आई थी.

मस्जिद को फंड कहां से मिलता है.

हर महीने का खर्च क्या है.

मस्जिद कमेटी से जुड़े लोगों की बैंक अकाउंट डिटेल्स

मस्जिद से जुड़े लोगों के आधार कार्ड, वोटर आईडी, PAN कार्ड, पासपोर्ट

मस्जिद से जुड़े लोगों की ट्रैवल हिस्ट्री, बैंक अकाउंट डीटेल, ATM/क्रेडिट कार्ड

मोबाइल IMEI, सोशल मीडिया हैंडल्स, फैमिली डिटेल्स और फाइनेंशियल स्टेटस के बारे में भी पूछा गया है.

फॉर्म में ये भी पूछा गया है कि क्या परिवार में किसी व्यक्ति का टेरर एक्टिविटी लिंक तो नहीं है.

ये सवाल क्यों पूछे जा रहे हैं, अब वह समझ लीजिए. 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला के सामने जो बम धमाका हुआ, उसके तार जम्मू कश्मीर के नौगाम की एक मस्जिद से जुड़े. इसी मस्जिद के इमाम को व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का मास्टरमाइंड बताया गया. इस खुलासे के बाद एक बार फिर घाटी की मस्जिदें सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आईं. इसी खुलासे के बाद मस्जिदों की प्रोफाइलिंग की जा रही है, ताकि ये इबादत की इस पाक जगह को कट्टरपंथियों और आतंकियों से दूर रखा जा सके. आप ये भी कह सकते हैं, इस समय कश्मीर की उन मस्जिदों को पवित्र करने का ऑपरेशन चल रहा है, जहां आतंकवाद का साया है। और देश विरोधी कट्टरपंथ की घुसपैठ.

राजनीतिक और धार्मिक विवाद में बदला मुद्दा

ये मुद्दा देश की सुरक्षा से जुड़ा है. संवेदनशील है. लेकिन इसे भी धार्मिक चश्मे से देखा जाने लगा. मस्जिदों की प्रोफाइलिंग का मुद्दा राजनीतिक और धार्मिक विवाद में बदल गया. विरोधी कह रहे हैं कि ये मुसलमानों को टारगेट करने का तरीका है. ये गोपनीयता और धार्मिक आजादी का उल्लंघन है. सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे के जरिये कैसे घाटी में डर और अविश्वास पैदा करने की कोशिश की जा रही है, आपको वो जानना चाहिए.

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ये सवाल कर रही हैं कि मंदिरों और गुरुद्वारा की प्रोफाइलिंग क्यों नहीं की जा रही है. मस्जिदों में ही फॉर्म क्यों बांटे जा रहे हैं. एक सवाल महबूबा मुफ्ती से भी हम करना चाहते हैं.. कि क्या आपने कभी भी घाटी के किसी भी मंदिर या गुरुद्वारे का कोई आतंकी कनेक्शन देखा है. घाटी के मंदिर और गुरुद्वारे आतंक के शिकार रहे हैं. आतंक के पनाहगाह कभी नहीं रहे हैं.

जो लोग घाटी के मस्जिदों की प्रोफाइलिंग का विरोध कर रहे हैं, आज उन्हें कश्मीर के मस्जिदों का वो काला इतिहास एक बार फिर हम याद दिला देते हैं.

1990 के दशक में कश्मीर घाटी में इस्लामिक मिलिटेंट्स मस्जिदों से ही कश्मीरी पंडितों को धमकियां दिया करते थे. मस्जिदों के लाउडस्पीकर से नारे लगाए जाते थे- रलाइव, सलाइव या गलाइव.. यानी इस्लाम कबूल करो, छोड़ो या मर जाओ.

प्रोफाइलिंग का विरोध करने वाले लोगों को बडगाम का चरार-ए-शरीफ याद होना चाहिए जहां मई 1995 में मस्त गुल समेत हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने शरण ली थी, बचकर भागने के लिए आतंकियों ने चरार ए शरीफ को ही आग लगा दी थी.

जून 2020 में पंपोर में आतंकवादियों ने मस्जिद की आड़ लेकर सुरक्षाबलों पर हमला किया था, तत्कालीन IGP विजय कुमार ने इसकी पुष्टि की थी.

इतिहास के पन्ने पलटने पर ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, जब कश्मीर की मस्जिदें कट्टरपंथ और आतंकवाद का गढ़ बन गई थीं. एक वक्त ऐसा भी था जब कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं चरम पर थीं.

TRN LIVE: *मित्रो, इंदिरा गांधी ने, इमरजेंसी लगाकर, भारत के पूरे विपक्ष को, फर्जी केस लगाकर, कई गंभीर धाराओं में, जेल में डाल दिया था..!*

*लोकनायक जयप्रकाश नारायण को, लेड मिला हुआ पानी पिला दिया था, जिससे उनके लीवर ख़राब हो गए, और उनकी मौत हो गई..!*

*जार्ज फर्नांडीज को फंसाने के लिए, उन पर डायनामाइट से भारत में ब्लास्ट करने के आरोप लगाया गया, जिसे बड़ोदरा डायनामाइट केस कहते हैं..!*

*उन्हें सिर्फ हथकड़ी नहीं लगाई गई, बल्कि पूरा शरीर, 80 किलो की बेड़ियों से, जकड़ दिया गया था..!*

*एक तस्वीर बहुत मशहूर हुई थी..!*

*कैदी वाहन से उतरते हुए, उन्होंने हाथ उठाकर, इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाया था..!*

*दहशत इतनी थी, कि कोई भी वकील, जार्ज फर्नांडीज का केस नहीं लड़ना चाहता था..!*

*ऐसे में एक 23 साल कि युवा लड़की, उनका केस लड़ी, और बाइज्जत बरी कराया था..!*

*वह 23 साल की लडकी, सुषमा स्वराज थी..!*

*बाद में भाजपा नेता बनी,* 

*ओर विदेश मंत्री भी बनी..!*

*इंदिरा गांधी के इतने अत्याचार के बावजूद भी, किसी विपक्षी ने ये नारा नहीं दिया..!*

*कि..!*

*"इंदिरा तेरी क़ब्र खुदेगी"*

*"इंदिरा तू, ताबूत में जाएगी"* 

*"मर जा इंदिरा"*

*उस वक्त अटल बिहारी वाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी, मुलायम सिंह यादव, जार्ज फर्नांडीज, लालू प्रसाद यादव, जेल में थे..!*

*राजनीतिक स्तर की गरीमा बनाए रखा..!* 

*राजनीतिक दुश्मनी को, व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं बनाया..!*

*इंदिरा के मरने की कामना, नहीं की गई..!*

*कभी अपने मंच पर, घटिया नारे नहीं लगने दिये..!*

*लेकिन आज दस सालों से, सत्ता से दूर, "गांधी परिवार" इस कदर तड़प रहा है..!*

*जैसे, बिना पानी के मछली तड़पती हैं..!*

*ये सत्ता के लिए इतने पागल हो गए हैं कि..!*

*"मोदी तेरी क़ब्र खुदेगी"* 

*"मोदी तू, ताबूत में जाएगा"*

*"मर जा मोदी"*

*के नारे, लगवा रहे हैं..!*

*जनता समझदार हो चुकी है..!*

*सब समझ रही हैं..!*

*कांग्रेस, राहुल गांधी, तथा विपक्ष, जो देश में गृह युद्ध भड़का कर, दंगे करवाना चाहती है..!*

*इन सत्ता के भूखे लोगों को, चुनाव में जवाब जरूर देगी, और दे भी रही है..!*

*राष्ट्रहित सर्वोपरि..*

*भारत माता की जय..*

*वंदे मातरम - जय हिंद..*

🪷 🇮🇳 🙏 🇮🇳 🪷

TRN LIVE: अंबेडकरजी ने तो पहले ही निशाचरों से आगाह किया था...🧐

लेकिन आज उनकी ही राह पर चलने का दंभ भरने वाले "जय मीम" के नारे लगा रहे हैं, भाईचारे कि बीन बजा रहे हैं और रोज लुटते पिटते और कटते जा रहे हैं...😳

भांग खा रखी है क्या...???🤕 कांग्रेस के साथ-साथ नेहरू और गांधी ने कभी भी अंबेडकर का सम्मान नहीं किया हमेशा उनका अपमान किया नेहरू इतना नफरत करता था कि उसे गद्दार ने अंबेडकर जी को मुंबई से चुनाव में हरवा दिया था फिर भी कुछ दलित अभी भी कांग्रेस समर्थक हैं

TRN LIVE: ‌‌   *༺🔱 卐 🔱༻*

                  *श्री हरिहरौ*

               *विजयतेतराम*

                  *सुप्रभातम*

            *आज का पञ्चाङ्ग*

   *_शुक्रवार, १६ जनवरी २०२६_*

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सूर्योदय: 🌄 ०७:२१

सूर्यास्त: 🌅 ०५:५२

चन्द्रोदय: 🌝 ३०:१२

चन्द्रास्त: 🌜१५:२५

अयन 🌘 उत्तरायणे

 (दक्षिण गोले)

ऋतु: 🏔️ शिशिर

शक सम्वत:👉१९४७(विश्वावसु)

विक्रम सम्वत:👉२०८२(सिद्धार्थी

मास 👉 माघ

पक्ष 👉 कृष्ण

तिथि 👉 त्रयोदशी (२२:२१

 से चतुर्दशी)

नक्षत्र 👉 मूल (पूर्ण रात्रि)

योग 👉 ध्रुव (२१:०६ से

 व्याघात)

प्रथम करण👉गर(०९:२१ तक)

द्वितीय करण 👉 वणिज

 (२२:२१ तक)

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॥ गोचर ग्रहा: ॥ 

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सूर्य 🌟 मकर 

चंद्र 🌟 धनु 

मंगल🌟मकर(अस्त,पश्चिम,मार्गी)

बुध🌟धनु (अस्त , पूर्व, मार्गी )

गुरु🌟मिथुन (उदित, पूर्व, वक्री)

शुक्र 🌟 मकर 

(अस्त, पश्चिम, मार्गी)

शनि 🌟 मीन (उदय, पूर्व, मार्गी)

राहु 🌟 कुम्भ 

केतु 🌟 सिंह

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शुभाशुभ मुहूर्त विचार

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अभिजित मुहूर्त 👉 १२:१० से १२:५२

अमृत काल 👉 २५:०९ से २६:५५

विजय मुहूर्त 👉 १४:१६ से १४:५८

गोधूलि मुहूर्त 👉 १७:४४ से १८:११

सायाह्न सन्ध्या 👉 १७:४७ से १९:०८

निशिता मुहूर्त 👉 २४:०४ से २४:५८+

राहुकाल 👉 ११:१२ से १२:३१

राहुवास 👉 दक्षिण-पूर्व

यमगण्ड 👉 १५:०९ से १६:२८

दुर्मुहूर्त 👉 ०९:२१ से १०:०३

होमाहुति 👉 केतु

दिशा शूल 👉 पश्चिम

अग्निवास 👉 पृथ्वी

भद्रावास 👉 पाताल (२२:२१ से)

चन्द्रवास 👉 पूर्व

शिववास 👉 भोजन में (२२:२१ से श्मशान में)

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☄चौघड़िया विचार☄

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॥ दिन का चौघड़िया ॥ 

१ - चर २ - लाभ

३ - अमृत ४ - काल

५ - शुभ ६ - रोग

७ - उद्वेग ८ - चर

॥रात्रि का चौघड़िया॥ 

१ - रोग २ - काल

३ - लाभ ४ - उद्वेग

५ - शुभ ६ - अमृत

७ - चर ८ - रोग

नोट👉 दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 

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शुभ यात्रा दिशा

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उत्तर-पूर्व (दहीलस्सी अथवा राई का सेवन कर यात्रा करें)

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तिथि विशेष

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प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, मेरू त्रयोदशी (जैन), आदित्यनाथ पुण्य दिवस (जैन) आदि।

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आज जन्मे शिशुओं का नामकरण 

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आज ३०:०४ तक जन्मे शिशुओ का नाम मूल नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (ये, यो, भ, भी) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।

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उदय-लग्न मुहूर्त

मकर - ३१:१२ से ०८:५४

कुम्भ - ०८:५४ से १०:२१

मीन - १०:२१ से ११:४६

मेष - ११:४६ से १३:२२

वृषभ - १३:२२ से १५:१७

मिथुन - १५:१७ से १७:३२

कर्क - १७:३२ से १९:५२

सिंह - १९:५२ से २२:१०

कन्या - २२:१० से २४:२६+

तुला - २४:२६+ से २६:४५+

वृश्चिक - २६:४५+ से २९:०४+

धनु - २९:०४+ से ३१:०८+

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पञ्चक रहित मुहूर्त

शुभ मुहूर्त - ०७:१५ से ०८:५४

मृत्यु पञ्चक - ०८:५४ से १०:२१

अग्नि पञ्चक - १०:२१ से ११:४६

शुभ मुहूर्त - ११:४६ से १३:२२

मृत्यु पञ्चक - १३:२२ से १५:१७

अग्नि पञ्चक - १५:१७ से १७:३२

शुभ मुहूर्त - १७:३२ से १९:५२

रज पञ्चक - १९:५२ से २२:१०

शुभ मुहूर्त - २२:१० से २२:२१

चोर पञ्चक - २२:२१ से २४:२६+

शुभ मुहूर्त - २४:२६+ से २६:४५+

रोग पञ्चक - २६:४५+ से २९:०४+

शुभ मुहूर्त - २९:०४+ से ३१:०८+

मृत्यु पञ्चक - ३१:०८+ से ३१:१५+

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आज का राशिफल

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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)

आज के दिन भी मध्यान तक सेहत संबंधित समस्या लगी रहेगी स्वभाव में चिड़चिड़ाहट और जिद रहने से जो भी संपर्क में आएगा उसे परेशानी होगी। आप किसी को कुछ भी कहे लेकिन किसी की सुनेंगे बिल्कुल नही। मध्यान बाद स्वभाव में कुछ स्थिरता आएगी काम धंधे को लेकर गंभीर होंगे आय के अवसर भी मिलेंगे परन्तु आज जितनी भी आय होगी आने से पहले जाने का रास्ता बना लेगी। संध्या के समय थकान रहने पर भी मन मौज शौक एवं अन्य अनर्गल कार्यो में भटकेगा धार्मिक क्षेत्र की यात्रा भी हो सकती है लेकिन पर्यटन मात्र ही। पैतृक संपर्क से जहां लाभ खोज रहे है वहां माता के सहयोग से ही लाभ हो सकता है व्यवहारिक रहें वरना कामना पूर्ति नही हो पाएगी। विपरीत लिंगीय वर्ग से अच्छी पटेगी।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)

आज के दिन पूर्वार्ध से ही सेहत संबंधित समस्या खड़ी होगी सर पर कार्य का भार होने पर भी शारीरिक रूप से तैयार नही रहेंगे फिर भी जबरदस्ती करने पर मध्यान के समय समस्या गहरायेगी लेकिन सेहत की आज अनदेखी ही करेंगे। कार्य क्षेत्र पर भाग्य का साथ मिलेगा व्यवसाय में गती रहने से थोड़े ही समय मे अधिक लाभ कमा लेंगे विरोधी वर्ग बाधा पहुचाने का हर सम्भव प्रयास करेंगे लेकिन आज सफल नही हो पाएंगे। धन की आमद एक साथ कई मार्ग से होगी। जोखिम वाले कार्य शेयर सट्टे आदि से जल्द लाभ हो सकता हैं फिर भी ज्यादा लालच में ना पढ़ें। परिवार में शांति रहेगी परिजन मोटा खर्च करने की योजना बनाएंगे। संध्या बाद का समय थकान के बाद भी आनंददायक रहेगा।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)

आज का दिन विजय दिलाने वाला है योजनाबद्ध होकर कार्य करे तो आज विचारे कार्यो में अवश्य सफलता मिल सकती है। दिन के आरंभ और अंत के समय अनैतिक कार्यो में मन भटकेगा इससे बचने का प्रयास करें अन्यथा इसी में फंस कर रह जाओगे। नौकरी पेशाओ को कार्य क्षेत्र पर आज सहकर्मियो से ही प्रतिस्पर्धा रहने के कारण बड़ी असमंजस की स्थिति से गुजरना पड़ेगा फिर भी अन्य लोगो की तुलना में आपका कार्य बेहतर रहने से प्रसंशा के हकदार बनेंगे। व्यवसायी वर्ग को भी उतार चढ़ाव देखने के बाद ही प्रयासों में सफलता मिलेगीधन की आमद अवश्य होगी लेकिन कही न कही खर्च भी हो जाएगी। आँख में जलन अथवा शारीरिक शिथिलता रहेगी।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)

आज का दिन आपके भविष्य का निर्धारण करेगा दिन के आरंभ में आलस्य के कारण किसी आवश्यक कार्य मे विलंब होगा निरस्त भी हो सकता है इसके बाद ही स्वभाव में गंभीरता आएगी। ध्यान रखें आज की मेहनत तुरंत लाभ नही देगी लेकिन आने वाले कल धन लाभ आशा से अधिक हो सकता है। आज आपके अधिकांश कार्य अंतिम चरण पर पहुचकर किसी कमी के कारण आगे के लिये टलेंगे। धन की आमद के लिये किसी के सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी लेकिन पूर्व में किये गलत व्यवहार के कारण सहयोग मिलने में परेशानी आएगी। सरकारी अथवा अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य संध्या से पहले करले कल धन को छोड़ अन्य कोई कार्य सफल नही होगा। आज मानसिकता खर्च करने वाली रहेगी इससे परिजन और स्वयं प्रसन्न ही रहेंगे।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)

आज के दिन आप अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कुछ अधिक ही करेंगे हर कार्य मे अतिरिक्त दिमाग चलाएंगे जहां केवल व्यवहारिकता से काम निकल सकता है वहां भी अपनी श्रेष्ठता का परिचय देने से नाहाई चूकेंगे अन्य लोगो को आपका स्वभाव सनकी जैसा लगेगा लेकिन बोलेंगे नही। कार्य क्षेत्र पर आज लाभ कमाने के अवसर मिलते रहेंगे लेकिन सफलता सब मे नही मिल पाएगी धन लाभ मेहनत और चतुराई के बल पर आशाजनक हो जाएगा। कार्य क्षेत्र पर सहकर्मियो को शक की दृष्टि से देखेंगे जिससे कहासुनी तो नही पर मतभेद जरूर रहेंगे। मित्र परिजनों के आगे भी अक्लमंदी दिखाने पर आपकी हसी हो सकती है। पिता से व्यवसाय को लेकर विचार में भिन्नता रहेगी। आज का कुछ हिस्सा दवाओं पर खर्च होगा।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)

आज का दिन अशुभ फलदायी रहेगा आज आपको अपनी वाणी और व्यवहार दोनो पर संयम रखने की जरूरत है अथवा के दिनों से जमी दोस्ती अथवा स्नेह व्यवहार टूट भी सकती हैं। दिन के आरंभ से किसी कार्य मे असफल होने पर क्रोध आएगा परिज भी इच्छा के विपरीत कार्य कर आग में घी का काम करेंगे। दोपहर तक मानसिक रूप से विक्षिप्त जैसे व्यवहार करेंगे इसके बाद व्यावसाय से लाभ मिलने पर क्रोध को भूल जाएंगे। लेकिन कार्य क्षेत्र पर छोटे मोटे धन को लेकर भी झगड़ा करने पर आमदा होंगे। विवेकी व्यवहार रखे अन्यथा व्यवसाय में बदनामी होने पर लंबे समय तक परेशानी देखनी पड़ेगी। संध्या बाद दिन भर की खीज घर पर उतारने पर मुश्किल से शांत हुआ वातावरण फिर खराब होगा। चोटादि का भय है।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)

आज का दिन बीते कल की तुलना में उदासीन रहेगा दिन के आरम्भ से ही कार्यो में लापरवाही बरतेंगे दिनचर्या भी आज धीमी गति से चलेगी। धन संबंधित मामले दिमाग मे बैठे रहने पर भी आज परिस्थिति ज्यादा लाभदायक नही रहने के कारण मन को संतोष देना पड़ेगा। कार्य क्षेत्र पर व्यवसाय सामान्य रहेगा फिर भी धन की आवक में कमी आएगी। उधारी के व्यवहारों को लेकर मन मे चिंता रहेगी सामर्थ्य होने पर भी चुकाने में आनाकानी करेंगे जिससे छवि खराब हो सकती है। घर का वातावरण खुशनुमा रहेगा परिजन भविष्य की योजनाओ पर विचार करेंगे लेकिन एकराय ना होने से योजना बनते बनते ढीली पड़ेंगी। पिता से भी आंतरिक मतभेद होंगे पर प्रदर्शन नही करेंगे। आलस्य को छोड़ सेहत ठीक रहेगी।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)

आज आपका स्वभाव दो तरफा रहेगा स्वयं को बाहर से संतोषि प्रदर्शित करेंगे लेकिन अंदर से उथल पुथल लगी रहेगी। कार्य व्यवसाय को लेकर आज दूरदर्शी सोच लाभ नही करेगी तो हानि होने से भी बचाएगी। व्यावसायिक लेन देन को लेकर ज्यादा माथा पच्ची में नही पड़ेंगे लेकिन किसी के दबाव में आकर जल्दबाजी दिखाएंगे फिर भी कुछ ना कुछ लाभ ही मिलेगा। धन की आमद आज सीमित साधनों से पर आवश्यकता अनुसार हो जाएगी। माता अथवा संतानों से किसी विषय को लेकर तीखी बहस हो सकती है इसमें विजय आपकी ही होगी लेकिन परिजनों का दिल दुखाने पर ही। बाहर की यात्रा के प्रसंग बनेंगे परन्तु इसे टालने के प्रयास करेंगे। महिलाओ का रहस्यमयी व्यवहार घर मे संदेह पैदा करेगा सेहत अकस्मात बिगड़ने अथवा चोट-मोच का भय है।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)

आज के दिन आपका स्वभाव अत्यंत रहस्यमय रहेगा अन्य लोगो के मन का भेद तुरंत ले लेंगे लेकिन अपने मन की बात किसी से नही बाटेंगे। कार्य क्षेत्र पर आज दौड़ धूप भी अधिक करनी पड़ेगी फिर भी आरम्भ में कार्यो में विफल होने पर गुस्सा आएगा पराक्रम में कमी आएगी लेकिन पूर्व संचित पुण्य से कुछ न कुछ लाभ कमा ही लेंगे। नौकरी वाले जातक आज मन कही अन्य जगह भटकने के कारण जबरदस्ती कार्य करेंगे अधिकारी वर्ग से सतर्क रहें गरमा गरमी हो सकती है। संध्या का समय दिन की अपेक्षा बेहतर रहेगा सामाजिक क्षेत्र से सम्मान के साथ धन भी मिलेगा लेकिन खर्च भी करना पड़ेगा। आय व्यय में संतुलन बना लेंगे लेकिन बचत नही कर पाएंगे। संध्या बाद शरीर मे शिथिलता बनेगीं।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)

आज के दिन आपको प्रतिकूल परिस्थितियो का सामना करना पड़ेगा मध्यान तक किसी विशेष कार्य से भागदौड़ करनी पड़ेगी लेकिन इसका परिणाम निराशाजनक रहने से आगे काम करने का उत्साह नही रहेगा। धन को लेकर आज भी असमंजस की स्थिति में रहेंगे लोग एक बार कोई वस्तु अथवा धन लेकर वापस करने में आनाकानी करेंगे इस वजह से आपका काम बीच मे रुकेगा साथ ही किसी के ताने भी सुनने को मिलेगें। कार्य व्यवसाय से जोड़ तोड़ कर लाभ तो होगा परन्तु आकस्मिक हानि सारे लाभ पर पानी फेर देगी। कार्य क्षेत्र से संबंधित मामले में माता अथवा किसी स्त्री वर्ग के सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी लेकिन इनका जिद्दी स्वभाव रहने से काम निकालने में खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। जोड़ो में दर्द और कब्जी की शिकायत रह सकती है।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)

आज के दिन भी आपको अनुकूल वातावरण मिलने से मन के अनुसार कार्य कर सकेंगे दिन के आरम्भ में किसी कार्य को करने की जल्दी में गलती कर पछतायेंगे पर मध्यान बाद का समय आपकी आशाओं पर खरा उतरेगा। काम धंदे में अन्य प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ लाभ के नए मार्ग बनाएंगे पूर्व में की मेहनत के कारण इसके हकदार भी आपही रहेंगे। धन की आमद आज थोड़ी मात्रा में लेकिन कई साधनों से होगी। आर्थिक स्थिति भी बेहतर बनने से सुखोपभोग की मानसिकता बढ़ेगी घर के बुजुर्गों से घर के बजट को लेकर विचारों में भिन्नता रहेगी। केवल पिता को छोड़ अन्य सभी परिजनों को लुभाने में सफल रहेंगे लेकिन अंत मे आवश्यकता पिता की ही पड़ेगी। ठंड से बचे सेहत खराब हो सकती है।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)

आज का दिन हर प्रकार से शुभ रहेगा कार्य व्यवसाय से में बुद्धि विद्या और संतान का सहयोग मिलने से कई दिनों से टल रही योजना को आगे बढ़ाएंगे। कार्य विस्तार और उन्नति होने से मन प्रसन्न रहेगा। आज आपका स्वभाव भी अन्य दिनों की तुलना में शांत रहेगा मध्यान के बाद धन को लेकर किसी पर गरम हो सकते है फिर भी स्थिति आज आपके पकड़ में ही रहेगी। व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा के कारण नए शत्रु बनेंगे सन्तान भी आज शत्रु वृद्धि का कारण बन सकती है पर इन बातों का आपकी दिनचर्या पर कोई प्रभाव नही पड़ेगा। धन की आमद आवश्यकता से अधिक ही होगी। घर का वातावरण कुछ समय को छोड़ सामान्य रहेगा। पर्यटन की योजना बनेगी उत्तम वाहन भोजन सुख मिलेगा। आरोग्य में थोड़ी नरमी अनुभव करेंगे।

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TRN LIVE: ‌‌   *༺🔱 ༂ 🔱༻*

               *|| जय श्री राधे ||*

   *🌺 महर्षि पाराशर पंचांग 🌺*

          *🙏अथ पंचांगम् 🙏*

*दिनांक :𝀈*

*_16/01/2026, शुक्रवार_*

त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष,

माघ

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(समाप्ति काल) 

तिथि-------त्रयोदशी 22:21:01 तक

पक्ष----------------------------कृष्ण

नक्षत्र----------------मूल 32:11:15

योग------------------ध्रुव 21:05:23

करण-----------------गर 09:21:07

करण-------------वणिज 22:21:01

वार-------------------------शुक्रवार

माह----------------------------माघ

चन्द्र राशि-----------------------धनु

सूर्य राशि----------------------मकर

रितु--------------------------शिशिर

आयन---------------------उत्तरायण

संवत्सर--------------------विश्वावसु

संवत्सर (उत्तर--------------सिद्धार्थी

विक्रम संवत------------------2082

गुजराती संवत----------------2082

शक संवत--------------------1947

कलि संवत-------------------5126

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वृंदावन

सूर्योदय-----------------07:12:15

सूर्यास्त--------------------17:45:50

दिन काल----------------- 10:33:35 

रात्री काल----------------- 13:26:16

चंद्रास्त-------------------- 15:26:20 

चंद्रोदय------------------- 30:06:49

लग्न---- मकर 1°42' , 271°42'

सूर्य नक्षत्र---------------- उत्तराषाढा 

चन्द्र नक्षत्र---------------------- मूल

नक्षत्र पाया--------------------- ताम्र

*💮दिशा शूल ज्ञान----------पश्चिम*

परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l

इस मंत्र का उच्चारण करें-:

*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*

*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*

*🚩💮 शुभा$शुभ मुहूर्त💮🚩*

राहू काल 11:10-12:29 अशुभ

यम घंटा 15:07- 16:27 अशुभ

गुली काल 08:31 -09:51 अशुभ

अभिजित 12:08- 12:50 शुभ

दूर मुहूर्त 09:19- 10:01 अशुभ

दूर मुहूर्त 12:50 - 13:32 अशुभ

वर्ज्यम 30:26-32:11 अशुभ

प्रदोष 17:46 -20:30 शुभ

🚩गंड मूल 07:12 -32:11 अशुभ

*🚩💮 पद, चरण 💮🚩*

ये---- मूल 12:24:51

यो---- मूल 19:01:40

भा---- मूल 25:37:10

*🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩*

        ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद

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सूर्य= मकर 01°16 , उoषाo 2 भो

चन्द्र= धनु 00°30 , मूल 1 ये 

बुध = धनु 28°52 ' उ oषाo 1 भे

शु क्र= मकर 03°05, उoफाo 3 जा 

मंगल= मकर 00°3 ' उoषाo 1 भो

गुरु= मिथुन 25°33 पुनर्वसु, 2 को 

शनि=मीन 03°13 ' पूo भा o , 4 दी 

राहू=(व) कुम्भ 17°14 शतभिषा, 4 सू

केतु= (व) सिंह 17°14 पूoफाo 2 टा

=======================

💮चोघडिया, दिन

चर 07:12 -08:31 शुभ

लाभ 08:31-09:51 शुभ

अमृत 09:51- 11:10 शुभ

काल 11:10 -12:29 अशुभ

शुभ 12:29- 13:48 शुभ

रोग 13:48 -15:07 अशुभ

उद्वेग 15:07 -16:27 अशुभ

चर 16:27-17:4श शुभ

🚩चोघडिया, रात

रोग 17:46 -19:27 अशुभ

काल 19:27 -21:07 अशुभ

लाभ 21:07 -22:48 शुभ

उद्वेग 22:48 - 24:29 अशुभ

शुभ 24:29-26:10 शुभ

अमृत 26:10-27:51 शुभ

चर 27:51-29:31 शुभ

रोग 29:31- 31:12 अशुभ

 

          *नोट :-* दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 

*चर-* 

* चर में वाहन, मशीन आदि कार्य करें।

*उद्वेग-* 

* उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें।

*शुभ-* 

* शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें

*लाभ-*

* लाभ में व्यापार करें

 *रोग-*

* रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें।

*काल-*

* में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है। 

*अमृत-* 

* में सभी शुभ कार्य करें।

 

💮होरा, दिन

शुक्र 07:12- 08:05

बुध 08:05- 08:58

चन्द्र 08:58- 09:51

शनि 09:51- 10:43

बृहस्पति 10:43- 11:36

मंगल 11:36 -12:29

सूर्य 12:29- 13:22

शुक्र 13:22- 14:15

बुध 14:15- 15:07

चन्द्र 15:07 - 16:00

शनि 16:00-16:53

बृहस्पति 16:53 -17:46

🚩होरा, रात

मंगल 17:46 -18:53

सूर्य 18:53 -20:00

शुक्र 20:00- 21:07

बुध 21:07 -22:15

चन्द्र 22:15 -23:22

शनि 23:22- 24:29

बृहस्पति 24:29-25:36

मंगल 25:36-26:43

सूर्य 26:43-27:51

शुक्र 27:51-28:58

बुध 28:58-30:05

चन्द्र 30:05-31:12

*🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩* 

मकर > 07:06 से 08:46 तक

कुम्भ > 08:46 से 10:26 तक

मीन > 10:26 से 11:50 तक

मेष > 11:50 से 13:26 तक     

वृषभ > 13:26 से 15:24 तक

मिथुन > 15:24 से 17:50 तक

कर्क > 17:50 से 20:00 तक

सिंह > 20:00 से 22:10 तक

कन्या > 22:10 से 00:36 तक

तुला > 00:36 से 02:38 तक

वृश्चिक > 02:38 से 04:58 तक

धनु > 05:04 से 07:06 तक

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*🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार*

       (लगभग-वास्तविक समय के समीप) 

दिल्ली +10मिनट--------- जोधपुर -6 मिनट

जयपुर +5 मिनट------ अहमदाबाद-8 मिनट

कोटा +5 मिनट------------ मुंबई-7 मिनट

लखनऊ +25 मिनट--------बीकानेर-5 मिनट

कोलकाता +54-----जैसलमेर -15 मिनट

*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*

*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*

*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*

*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*

*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*

*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*

 15 + 13 + 6 + 1 = 35 ÷ 4 = 3 शेष

 पृथ्वी लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

*🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान🚩*

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

केतु ग्रह मुखहुति

*💮 शिव वास एवं फल -:*

  28 + 28 + 5 = 61 ÷ 7 = 5 शेष

ज्ञानवेलायां = कष्ट कारक

*🚩भद्रा वास एवं फल -:*

*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*

*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*

रात्रि 22:21 से प्रारम्भ 

पाताल लोक = धनलाभ कारक 

*🚩💮 विशेष जानकारी 💮🚩*

  *प्रदोष व्रत (शिव पूजन)

*🚩💮 शुभ विचार 💮🚩*

राज्ञधर्मणि धर्मिष्ठाः पापे पापाः समे समाः ।

राजानमनुवर्तन्ते यथा राजा तथा प्रजाः ।।

।।चाoनीo।।

    यदि राजा पुण्यात्मा है तो प्रजा भी वैसी ही होती है. यदि राजा पापी है तो प्रजा भी पापी. यदि वह सामान्य है तो प्रजा सामान्य. प्रजा के सामने राजा का उद्हारण होता है. और वो उसका अनुसरण करती है.

*🚩💮 सुभाषितानि 💮🚩*

गीता -: ज्ञानकर्मसन्यासयोग अo-4

काङ्‍क्षन्तः कर्मणां सिद्धिं यजन्त इह देवताः।

 क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा॥

इस मनुष्य लोक में कर्मों के फल को चाहने वाले लोग देवताओं का पूजन किया करते हैं क्योंकि उनको कर्मों से उत्पन्न होने वाली सिद्धि शीघ्र मिल जाती है

 ॥12॥

*🚩💮 दैनिक राशिफल 💮🚩*

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।

नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।

विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।

जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष

कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। जीवनसाथी से सामंजस्य बैठाएं। भूमि व भवन की खरीद-फरो्ख्‍त की योजना बनेगी। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। निवेश शुभ रहेगा। लंबी यात्रा का मन बनेगा। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। मित्रों के साथ अच्छा समय बीतेगा। भय रहेगा। चोट व रोग से बचें।

🐂वृष

प्रभावशाली व्यक्तियों का सहयोग व मार्गदर्शन प्राप्त होगा। आय में वृद्धि होगी। रुके कार्यों में गति आएगी। किसी मांगलिक कार्य में भाग लेने का मौका मिलेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। शारीरिक कष्ट संभव है। शत्रु पस्त होंगे। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है।

👫मिथुन

वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें। क्रोध व उत्तेजना से बाधा उत्पन्न होगी। नियंत्रण रखें। अपेक्षित कार्यों में विलंब होगा। चिंता तथा तनाव रहेंगे। दूसरों के काम में दखल न दें। व्यवसाय ठीक चलेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। काम में मन नहीं लगेगा। विवाद से बचें।

🦀कर्क

पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बन सकता है। मनपसंद भोजन का आनंद प्राप्त होगा। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। पठन-पाठन व लेखन आदि में मन लगेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। मस्तिष्क पीड़ा हो सकती है। यात्रा मनोरंजक रहेगी। राजभय है। जल्दबाजी न करें। वाणी में संयम रखें।

🐅सिंह

देव-दर्शन का कार्यक्रम बनेगा। अध्यात्म में रुचि रहेगी। वरिष्ठजनों का सहयोग प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। व्यवसाय से मनोनुकूल लाभ होगा। प्रभावशालीव व्यक्तियों से परिचय बढ़ेगा। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। निवेश शुभ रहेगा। परिवार के साथ समय अच्छा गुजरेगा।

🙍‍♀️कन्या

किसी अपरिचित की बातों में न आएं। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। व्यवस्था में अधिक प्रयास करना पड़ेंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। किसी झगड़े में न पड़ें। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय बनी रहेगी। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। कुसंगति से हानि होगी। लेन-देन में जल्दबाजी न करें।

⚖️तुला

भागदौड़ रहेगी। किसी व्यक्ति के व्यवहार से दिल को ठेस पहुंच सकती है। बनते काम बिगड़ सकते हैं, धैर्य रखें। प्रयास अधिक करना पड़ेंगे। आय में निश्चितता रहेगी। बुद्धि का प्रयोग करें। किसी के उकसावे में न आएं। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। दु:खद समाचार मिल सकता है।

🦂वृश्चिक

घर में अतिथियों का आगमन होगा। व्यय होगा। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। प्रसन्नता रहेगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। आत्मविश्वास बना रहेगा। नौकरी व व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देंगे। कोई अनहोनी होने की आशंका रहेगी। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा।

🏹धनु

सामाजिक कार्य करने का अवसर प्राप्त होगा। मान-सम्मान मिलेगा। निवेश शुभ रहेगा। यात्रा की योजना बनेगी। नौकरी में कार्य की प्रशंसा होगी। आय में वृद्धि होगी। मातहतों का सहयोग मिलेगा। घर-बाहर प्रसन्नता बनी रहेगी। किसी बड़ी समस्या से सामना हो सकता है। प्रयास सफल रहेंगे।

🐊मकर

प्रतिद्वंद्विता में वृद्धि होगी। पारिवारिक चिंता बनी रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक लाभ बढ़ेगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। नए कार्य प्रारंभ करने की योजना बनेगी। मित्रों के साथ अच्छा समय बीतेगा। विरोध करने का अवसर दूसरों को न दें। प्रसन्नता बनी रहेगी।

🍯कुंभ

यात्रा मनोरंजक रहेगी। सभी ओर से सफलता प्राप्त होगी। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। नवीन वस्त्राभूषण पर व्यय होगा। व्यस्तता के चलते थकान महसूस होगी। विवेक से कार्य करें। लाभार्जन सहज होगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें।

🐟मीन

यात्रा मनोरंजक रहेगी। नई योजना बनेगी। व्यवसाय में वृद्धि के लिए सभी ओर से सहयोग प्राप्त होगा। नौकरी में मातहतों का सहयोग प्राप्त होगा। धन प्र‍ाप्ति सुगम होगी। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। चोट व दुर्घटना से बचें। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें।

  

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

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TRN LIVE: : " जब हनुमान ने सभा के बीच अपना हृदय चीर दिया*

 *भक्ति का वह क्षण, जिसने अयोध्या को रुला दिया "*

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अयोध्या की एक सभा उस क्षण इतिहास बन गई, जब भक्ति ने शब्दों से नहीं, हृदय से उत्तर दिया। देवी सीता द्वारा अर्पित हार से उठा एक साधारण-सा प्रश्न, पवनपुत्र हनुमान की भक्ति के माध्यम से परम सत्य में बदल गया। वह दृश्य केवल एक पौराणिक प्रसंग नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि जहाँ प्रेम निष्काम हो और सेवा निरहंकार, वहीं सच्ची भक्ति निवास करती है।

अयोध्या की वह रात सामान्य नहीं थी।

रात गहरी थी। अयोध्या में दीपक बुझ चुके थे, पर राजमहल के प्रांगण में एक दीप अभी भी टिमटिमा रहा था। वह दीपक न तेल से जल रहा था, न बाती से, वह किसी और ही अग्नि से प्रज्वलित था – भक्ति की अग्नि से। उस दीप के सामने वानर रूप में बैठा था – पवनपुत्र हनुमान।

श्रीराम के अयोध्या लौटे कई वर्ष हो चुके थे। राज्य में समृद्धि थी, शांति थी, पर हनुमान के हृदय में एक गहरा कंपन था। सेवा करने का अवसर मानो कम हो गया था; न लंका थी, न सेतु था, न कोई युद्ध, न कोई संकट। अब सब ठीक था – बस यही बात हनुमान जी को बेचैन कर रही थी।

उन्होंने अकेले में कहा –

“प्रभु… जब तक आप वन-वन भटक रहे थे, तब तक मेरा हर श्वास सेवा में था। अब जब सब कुछ सुन्दर है, तो मेरी साँसें खाली क्यों लग रही हैं?”

उस रात वे राजमहल के पिछवाड़े वाले बाग़ में जाकर एक कोने में बैठ गए। चाँदनी उनके कंधों पर गिर रही थी, पर उनके भीतर अंधेरा घना था।

राम नाम के बदले इनाम

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कुछ ही दिन बाद अयोध्या में एक भव्य यज्ञ का आयोजन हुआ। राज्य के कोने-कोने से ऋषि, मुनि, देवदूत, साधु–संत आए। सबके लिए वस्त्र, आभूषण, रत्न और धन की व्यवस्था की गई। जो भी यज्ञ में सेवा करता, उसे राम स्वयं पुरस्कृत करते।

यज्ञ के अंतिम दिन श्रीराम ने घोषणा की –

“जो भी इस यज्ञ में सेवा और भक्ति से जुड़ा है, उसे आज सम्मान दिया जाएगा।”

सभा में उल्लास फैल गया। सबने मन ही मन सोचा, “आज कुछ न कुछ तो मिलेगा।” वहाँ हनुमान भी थे, पर उनकी आँखें बस राम के चरणों पर टिकी थीं, किसी उपहार पर नहीं।

पहले लक्ष्मण को सम्मान मिला, फिर भरत, शत्रुघ्न, फिर कई योद्धा, मंत्री, ऋषि। सबको रत्न, हार, वस्त्र, भूमि–दान मिलते गए। अंत में सीता माता उठीं। उनके हाथ में चमकता हुआ, बहुमूल्य हीरों का एक हार था।

माता सीता ने प्रेम से कहा –

“यह हार मैं उस पर अर्पित करती हूँ, जिसकी भक्ति और सेवा मेरे राम के लिए सर्वश्रेष्ठ हो।”

सभामंडप में खामोशी छा गई। सबकी नज़रें हनुमान की ओर घूमने लगी। कई मन में बोले – “निश्चय ही यह हार हनुमान को मिलेगा।”

सीता जी हँसकर हनुमान की ओर बढ़ीं और वह चमकता हार उनके हाथों में रख दिया।

टूटे हुए हीरे और टूटी हुई दुनिया

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हनुमान जी ने हार को हाथ में लिया, कुछ क्षण उसे निहारा, फिर एक–एक कर मोतियों और हीरों को तोड़ने लगे। वे हाथ से रत्न निकालकर दाँतों से चबा–चबाकर फेंकते जा रहे थे, और आँखों में तपता हुआ आँसू भर आया था।

सभा में हलचल मच गई।

एक योद्धा क्रोध से बोला –

“हनुमान जी! यह क्या कर रहे हैं? इतना कीमती हार… आप उसे नष्ट कर रहे हैं!”

दूसरा बोला –

“देवी सीता का प्रसाद है यह… और आप इसे चबा–चबा कर फेंक रहे हैं? क्या आपको इसका मूल्य नहीं पता?”

माता सीता ने भी आश्चर्य से पूछा –

“हनुमान, तुम यह क्या कर रहे हो? यह रत्न तुम्हें सम्मान के रूप में दिया गया था।”

हनुमान का हृदय काँप रहा था, पर स्वर में अटूट विनम्रता थी। उन्होंने टूटे हुए रत्नों को देखते हुए धीमे से कहा –

“माते, मैं तो बस यह देखने की कोशिश कर रहा था कि इनमें मेरा प्रभु राम और आप विराजमान हैं या नहीं। जहाँ मेरे राम नहीं, वहाँ यह चमक मेरे लिए धूल से अधिक क्या है?”

सभा स्तब्ध रह गई।

एक मंत्री ने तंज से कहा –

“तो हनुमान जी, क्या आपके अंदर भी श्रीराम बसे हैं? या आपका शरीर भी बस मांस–हड्डियों से बना है?”

सवाल व्यंग्य था, पर हनुमान ने उसे प्रश्न समझकर उत्तर देने का निश्चय किया।

हृदय-विदारक सत्य

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हनुमान जी कुछ क्षण मौन रहे। फिर धीरे से मुस्कुराए। उनकी आँखों में पानी था, पर चेहरा दीपक की लौ जैसा शांत था।

उन्होंने कहा –

“यदि मेरे भीतर राम नहीं, तो मेरा अस्तित्व ही व्यर्थ है। यदि मेरे रक्त–कण–कण में राम न हों, तो यह देह बोझ है।”

फिर उन्होंने अपने दोनों हाथ सीने पर रखे और बोले –

“आप सब स्वयं देख लें, यदि यह भी असत्य हो।”

इतना कहकर हनुमान ने अपने नखों से अपना वक्ष विदीर्ण कर दिया।

सभा से एक सिहरन उठी।

रक्त बहने लगा, पर वह रक्त नहीं, जैसे लाल प्रकाश की धारा थी। खुले हुए सीने के भीतर सभी ने एक दिव्य दृश्य देखा – वहाँ माँ सीता, राम, लखन त्रिभंग मुद्रा में बैठे हैं; हनुमान का हृदय उनका मंदिर था, उनकी धड़कनें रामनाम का जप थीं, उनके रक्त की हर बूँद से “राम… राम…” की अनाहत ध्वनि निकल रही थी।

सीता जी के होंठ काँप गए। राम की आँखों में अश्रु छलक पड़े। लक्ष्मण की मुट्ठियाँ भीग गईं। जो लोग हनुमान को लेकर संदेह कर रहे थे, वे ज़मीन पर गिर पड़े; चेहरे पर लज्जा थी, हृदय में दर्द।

राम के आँसू और हनुमान की मुस्कान

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श्रीराम स्वयं आसन से उठकर दौड़े। उन्होंने हनुमान को बाँहों में थाम लिया, जैसे माँ अपने बच्चे को आँचल में छिपा लेती है।

“बस हनुमान! और नहीं…”

राम के अश्रु हनुमान के रक्त पर गिर रहे थे। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि हवा भी भारी हो गई, दीपक की लौ भी स्थिर हो गयी।

राम ने काँपते स्वर में कहा –

“तूने मेरे लिए अपना हृदय चीर दिया… बताओ, अब मैं और क्या करूँ कि तेरे प्रेम का ऋण चुक सके?”

हनुमान ने हल्की मुस्कान के साथ कहा –

“प्रभु, ऋण और लेन–देन तो संसार के हैं। मेरा प्रेम तो आपका प्रतिबिंब है। आप हैं, इसलिए मैं हूँ। आप निवृत्त हो जाएँ, तो मेरा अस्तित्व भी मिट जाए।”

राम ने सीता की ओर देखा। सीता ने अपने आँचल से सिंदूर की एक लकीर ली और हनुमान के सीने पर लगा दी, जैसे घाव पर वरदान रख दिया हो।

सीता ने कहा –

“हनुमान, तुम्हारे इस हृदय-मंदिर से बड़ा कोई देवालय नहीं। आज से तुम्हारा शरीर भी उस सिंदूर की तरह है जो मेरे राम की आयु और कीर्ति को बढ़ाएगा।”

हनुमान जी ने आँखें मूँद लीं। उनके सीने का घाव जैसे सिंदूर और अश्रु के मिलन से भरता जा रहा था। धीरे–धीरे वह विदीर्ण वक्ष पुनः जुड़ गया, पर जो दृश्य सबने देखा, वह जीवन भर के लिए उनकी आत्मा पर लिख दिया गया।

मौन की वह रात

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उस रात राजमहल में कोई सो नहीं सका। जो भी आँखें बंद करता, उसे हनुमान का रक्तरंजित पर शांत चेहरा याद आ जाता – वह चेहरा जिसमें दर्द नहीं, केवल समर्पण था।

श्रीराम रात्रि में एकांत कक्ष में गए। वहाँ उन्होंने अकेले खड़े होकर कहा –

“हे प्रभु, यदि इस सृष्टि में भक्ति का कोई पूर्ण रूप है, तो वह हनुमान है। जब तक काल है, तब तक यह वानर मेरे नाम का प्रहरी रहेगा।”

कहते हैं, उसी क्षण आकाश में एक सूक्ष्म घोषणा हुई –

“हनुमान चिरंजीवी होंगे, जब तक रामनाम है, तब तक यह भी रहेगा।”

आज की रूह को झकझोरने वाला प्रश्न

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सालों बीत गए, युग बदले, राजधानियाँ बदलीं, राजसत्ताएँ गिरीं, पर यह कथा हवा में तैरती रही। जो भी सच्चे भाव से इसे सुनता, उसकी आँखें नम हो जातीं।

आज, जब कोई मंदिर के कोने में बैठकर “जय श्रीराम, जय हनुमान” कहता है, तो यह कथा उसके हृदय के द्वार पर दस्तक देती है –

“तू कितनी बार बाहर के रत्नों में भगवान को ढूँढता है? कभी भीतर के हृदय को भी तोड़कर देखा है कि उसमें किसका नाम बसता है?”

सत्य यही है कि हनुमान ने अपना हृदय सिर्फ एक बार नहीं चीर दिया, वे हर बार चीर देते हैं, जब भी कोई भक्त अपने अंदर झाँककर यह प्रश्न पूछता है –

“क्या मेरे भीतर भी राम बसते हैं, या मैं सिर्फ रत्नों को थामे फिर रहा हूँ?”

जब यह सवाल भीतर उठता है, तो रूह काँपती है, आँखें भर आती हैं, और कहीं दूर से एक मृदु स्वर सुनाई देता है –

“जहाँ प्रेम निःस्वार्थ हो, सेवा निरहंकार हो, और साँस–साँस में रामनाम की ध्वनि हो, वहीं सत्य हनुमान हैं।”

 जय बजरंगबली जय श्रीराम

कमेंट में लिखें — आपके जीवन में हनुमान जी का कौन सा चमत्कार हुआ?

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*Tarot Daddu – Dr. Darshan Bangia* 7503033565 कहते हैं: "हर कहानी सिर्फ शब्दों का मेल नहीं होती, बल्कि कई गहरी अनुभव और आत्मिक सीख से भरी होती है। 👇🏻👇🏻

-----*शुभ वंदन।*

TRN LIVE: *बांसुरी और मोरपंख का रहस्य---*

अंधेरे और प्रकाश के संगम में खड़ी वह अद्भुत छवि मानो समय से परे थी—जहाँ एक ओर मोर का दिव्य आकार चमक रहा था, वहीं उसके ठीक नीचे खड़े थे नटखट, मुरलीधर, मोहक मुस्कान वाले श्रीकृष्ण। उनके हाथों में थमी बांसुरी से जैसे ब्रह्मांड की पहली धुन जन्म ले रही हो।

वृंदावन की उस शाम आकाश कुछ अलग ही सुनहरा था। सूर्यास्त की किरणें मोरपंख को ऐसे छू रही थीं, जैसे कोई चित्रकार अपनी कूची को अंतिम स्पर्श दे रहा हो। हवा में मंद सुगंध थी—कदंब के फूलों की, ताज़ी मिट्टी की, और कुछ ऐसे भावों की जिन्हें शब्दों में नहीं बाँधा जा सकता।

उस समय वृंदावन के एक छोटे से कोने में, राधा अपने घर के आँगन में बैठी थी। मन में पता नहीं कैसी हलचल थी, जैसे कोई बुलावा उसे भीतर ही भीतर खींच रहा हो। वह जानती थी—यह वही बुलावा है जिसे केवल एक ही पहचान सकता है—कान्हा की बांसुरी का, उनके प्रेम का, उनके स्नेह का।

उधर, कृष्ण अकेले खड़े थे, पर अकेले कहाँ? उनके आसपास हवा उतरती, बहती, फिर कान्हा के चारों ओर नाचने लगती। पेड़-पौधे झूमते, जैसे उनकी धुन पर कदम मिला रहे हों। और सबसे ऊपर, उस ऊँचाई पर जहाँ अंधेरा और प्रकाश एक-दूसरे को गले लगाते हैं, वहाँ आकार ले रहा था एक विशाल मोर—कृष्ण का सखा, उनका साथी, उनका प्रतीक।

मोर धीरे-धीरे अपने पंख फैलाता, तो उस फैलाव से प्रकाश की लहरें फूटतीं। ऐसा लगता था मानो यह मोर असल जीव नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण की आत्मा का विस्तार हो। वह पंख सिर्फ पंख नहीं थे—वे थे सौंदर्य, कर्तव्य, प्रेम, करुणा और आनंद की झलक।

कृष्ण ने बांसुरी को होंठों तक ले जाकर एक मधुर धुन छेड़ी। धुन जैसे ही हवा में घुली, पूरा वातावरण स्थिर हो गया। नदी की लहरें धीमी हो गईं, पत्तों की सरसराहट जैसे रुक गई, और पक्षियों की चहचहाहट एक क्षण के लिए शांत हो गई। यह वही धुन थी जो राधा के हृदय में सबसे पहले उतरी।

राधा उठीं, और बिना सोचे कदम उसी दिशा में बढ़ चले जहाँ से धुन आ रही थी। उनके पाँव खुद रास्ता ढूंढते गए, मानो धरती भी कृष्ण के प्रेम में बिछ गई हो। रास्ते भर मोरों ने उनके स्वागत में पंख फैलाए। कुछ ने उनके चारों तरफ घूमकर नृत्य किया, और कुछ उस दिव्य धुन को सुनकर अपने सुर में बोलने लगे।

जब राधा वहाँ पहुँची जहाँ कृष्ण खड़े थे, उन्होंने देखा—उनका श्याम सुंदर बांसुरी बजा रहा था, और पीछे प्रकाश से बना वह विशाल मोर मानो उन्हें आशीर्वाद दे रहा था। राधा कुछ पल वहीं खड़ी रहीं। उनकी साँसें तेज़ थीं, पर दिल शांत। Krishna ने बांसुरी हटाकर उनकी ओर देखा। वह मुस्कान—जिसे देखकर पेड़ कलियाँ दे देते थे—राधा के लिए ही खिली थी।

कृष्ण बोले,

“राधे, इस मोरपंख में क्या देखती हो?”

राधा ने पंख की ओर देखा।

“मैं सौंदर्य देखती हूँ, प्रेम देखती हूँ, और तुम्हारे हृदय का विस्तार देखती हूँ।”

कृष्ण मुस्कुराए।

“और मैं इस पंख में तुम्हारा प्रतिबिंब देखता हूँ, राधे। जैसे यह पंख मेरी पहचान है, वैसे ही तुम मेरे अस्तित्व का आधार हो।”

मोर के पंखों का प्रकाश और गहरा हुआ। ऐसा लगने लगा कि वह मोर धीरे-धीरे जीवित हो उठा है। उसने अपने लंबे पंखों से धरती को छुआ, फिर धीरे-धीरे अपने आकार को कृष्ण की पीछे की आभा में समा दिया। यह दृश्य इतना अलौकिक था कि राधा की आँखें भर आईं।

कृष्ण ने उनका हाथ थाम लिया।

“यह मोर तुम्हारे और मेरे प्रेम का प्रहरी है, राधे। यह सिर्फ सौंदर्य का प्रतीक नहीं—यह हमारी आत्माओं का संगम है।”

दोनों एक-दूसरे के पास खड़े रहे। बांसुरी शांत थी, पर धुन अभी भी हवा में गूँज रही थी। मोर की आभा अब कृष्ण के पीछे एक दिव्य तेज़ बन चुकी थी। ऐसा तेज़, जिससे पता चल रहा था कि प्रेम केवल भाव नहीं—बल्कि एक ऊर्जा है, जो हर जीव, हर पेड़, हर अणु में व्याप्त है।

वह शाम वृंदावन की सबसे शांत, सुंदर, और दिव्य शाम बन गई। सूर्यास्त की अंतिम किरणें मोरपंख पर ठहर गईं, और कृष्ण ने धीरे से बांसुरी उठाकर फिर एक नई धुन बजाई—जो प्रेम, भक्ति और अनंतता की धुन थी।

और तब से, जहाँ-जहाँ मोरपंख चमकता है, वहाँ-वहाँ कृष्ण और राधा का प्रेम अपनी मधुर कहानी सुनाता है।

*जय श्री कृष्ण*🙏🙏

TRN LIVE: युयुत्सु

युयुत्सु महाभारत का एक महत्वपूर्ण पात्र है। महाभारत के युद्ध के अंत में बचे हुए १८ योद्धाओं में से एक वो भी था। दुर्योधन एवं अन्य कौरवों की भांति युयुत्सु भी धृतराष्ट्र पुत्र था किन्तु उसकी माता गांधारी नहीं थी। ऐसा वर्णित है कि महारानी गांधारी की एक वैश्य दासी थी जिसका नाम सौवाली (सुग्धा) था। वो गांधारी की सिर्फ दासी ही नहीं अपितु अभिन्न सखी भी थी जो गांधारी के विवाह के पश्चात उसके साथ गांधार से हस्तिनापुर आयी थी और मृत्युपर्यन्त उसके साथ ही रही।

जब गांधारी गर्भवती थी और धृतराष्ट्र की सेवा करने में असमर्थ थी तब सुग्धा ही धृतराष्ट्र की सेवा के लिए नियुक्त की गयी थी। धृतराष्ट्र सौवाली की सुंदरता पर मुग्ध हो गए और उनके संयोग से एक पुत्र हुआ जो देखने से ही अत्यंत बलवान लगता था और इसी कारण उसका नाम युयुत्सु (योद्धा) रखा गया। वो दुर्योधन से छोटा और दुःशासन से बड़ा था। कई जगह ये भी कहा गया था कि वो दुर्योधन से भी बड़ा था किन्तु महाराज का पुत्र होने के बाद भी उसे कभी भी कौरवों में वो स्थान नहीं मिला जिसका वो हक़दार था।

महात्मा विदुर की ही भांति उसने भी जीवन भर राजपुत्र होकर भी दासीपुत्र होने का दंश झेला। हालाँकि उन्ही की भांति उसका महत्त्व भी हस्तिनापुर में बहुत था और अन्य सभासदों के लिए वो भी राजपुत्र ही था। पर जब भी कौरवों की गिनती होती है तो धृतराष्ट्र और गांधारी के १०० पुत्रों का वर्णन मिलता है। बहुत कम जगह ही युयुत्सु को १०१वें कौरव के रूप में गिना जाता है। युयुत्सु के अतिरिक्त उसे धार्तराष्ट्र (धृतराष्ट्र का पुत्र होने के कारण), कौरव्य (कुरुवंश में जन्म लेने के कारण) और वैश्यपुत्र (वैश्य स्त्री की संतान होने के कारण) भी कहा जाता है। महाभारत के युद्ध के बाद वही एकलौता कौरव जीवित था और उसी ने धृतराष्ट्र और गांधारी की मृत्यु के बाद उन्हें मुखाग्नि दी थी।

शकुनि जिस प्रकार अपने अन्य भांजों से प्रेम करता था उतना उसने युयुत्सु से कभी नहीं किया। इसका युयुत्सु को लाभ ही हुआ और वो कभी भी शकुनि के प्रभाव में नहीं रहा। अपने अन्य भाइयों से उलट उसका मन सदैव धर्म की ओर ही झुका था। यही कारण था कि वो दुर्योधन के किसी भी पाप में भागीदार नहीं रहा। ऐसा भी कहा जाता है कि बचपन में उसने ही युधिष्ठिर को ये सूचना दी थी कि दुर्योधन ने भीम के भोजन में विष मिला दिया है। द्यूतभवन में भी उसने विकर्ण के साथ चीरहरण का पुरजोर विरोध किया था किन्तु दोनों की बातें किसी ने नहीं सुनी। हस्तिनापुर में उसके कर्तव्य बहुत अधिक थे किन्तु अधिकार बहुत कम।

वो एक उत्कृष्ट योद्धा था और उसकी गिनती भी श्रेष्ठ रथियों में की जाती है। जब महाभारत का युद्ध ठन गया तो ना चाहते हुए भी उसे कौरवों के पक्ष से ही युद्ध लड़ना पड़ा। लेकिन युद्ध आरम्भ होने से ठीक पहले युधिष्ठिर ने ये घोषणा की कि जिसे भी लगता है कि धर्म पांडवों के पक्ष में है वो इधर आ जाएँ। ये सुनकर युयुत्सु ठीक युद्ध से पहले कौरवों का पक्ष छोड़ कर पांडवों के पक्ष में चला गया। ये देख कर दुर्योधन को बड़ा क्रोध आया और अगर वो चाहता तो युयुत्सु का वध भी कर सकता था किन्तु युयुत्सु जैसा भी था उसका भाई था इसीलिए उसने उसका वध नहीं किया। 

पांडवों के पक्ष में मिलकर भी युयुत्सु ने कभी भी कौरव सेना का कोई भेद पांडवों को नहीं बताया किन्तु फिर भी पांडवों के शिविर में उसका सदा सम्मान किया गया। युधिष्ठिर ये जानते थे कि इस युद्ध में धृतराष्ट्र के सभी पुत्रों का नाश हो जाएगा इसीलिए उन्होंने युयुत्सु को कभी भी सीधे युद्ध में भाग लेने नहीं दिया। उन्होंने युयुत्सु को पांडव सेना के लिए अस्त्र और रसद आपूर्ति करने की कठिन जिम्मेदारी सौंपी जिसे उसने बखूबी निभाया। उसने अपने कुशल प्रबंधन से कभी भी पांडवों की ७ अक्षौहिणी सेना के लिए शस्त्र और भोजन की कमी नहीं होने दी। हालाँकि महाभारत में उसके और शकुनि पुत्र उलूक के युद्ध का भी वर्णन मिलता है जहाँ उसे उलूक द्वारा अति आहत कर देने के कारण युद्धक्षेत्र से पीछे हटना पड़ा था।

महाभारत युद्ध के पश्चात जब कौरवों की पत्नियां और अन्य स्त्रियां विलाप कर रही थी और भीम के भय से राजमहल में सभी भय से त्रस्त थे तब युयुत्सु ने युधिष्ठिर और श्रीकृष्ण की आज्ञा लेकर स्वयं हस्तिनापुर राजमहल में प्रवेश किया और सभी राजकन्याओं को सांत्वना दी। फिर वे महात्मा विदुर से मिले और फिर उनकी आज्ञा से कई दिनों तक धृतराष्ट्र एवं गांधारी के साथ रहे जिससे उन्हें बड़ी सांत्वना मिली। 

उन दोनों की मृत्यु के पश्चात युयुत्सु ने ही पुत्रधर्म निभाते हुए उनका अंतिम संस्कार किया। जब युधिठिर हस्तिनापुर के सम्राट बनें तो उन्होंने युयुत्सु को अपना मंत्री बनाया। ३६ वर्ष राज करने के बाद जब युधिष्ठिर अन्य पांडवों एवं द्रौपदी के साथ स्वर्गारोहण को चले तो उन्होंने अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित को हस्तिनापुर का सम्राट घोषित किया और युयुत्सु को ही उसका संरक्षक बनाया।

TRN LIVE: *भगवान शिव के "35" रहस्य!!!*

          भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ आदि कहा जाता है।

*🔱1. आदिनाथ शिव : -* सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें 'आदिदेव' भी कहा जाता है। 'आदि' का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम 'आदिश' भी है।

*🔱2. शिव के अस्त्र-शस्त्र : -* शिव का धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु और सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है। उक्त सभी का उन्होंने ही निर्माण किया था।

*🔱3. भगवान शिव का नाग : -* शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है। वासुकि के बड़े भाई का नाम शेषनाग है।

*🔱4. शिव की अर्द्धांगिनी : -* शिव की पहली पत्नी सती ने ही अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया और वही उमा, उर्मि, काली कही गई हैं।

*🔱5. शिव के पुत्र : -* शिव के प्रमुख 6 पुत्र हैं- गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, अयप्पा और भूमा। सभी के जन्म की कथा रोचक है।

*🔱6. शिव के शिष्य : -* शिव के 7 शिष्य हैं जिन्हें प्रारंभिक सप्तऋषि माना गया है। इन ऋषियों ने ही शिव के ज्ञान को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया जिसके चलते भिन्न-भिन्न धर्म और संस्कृतियों की उत्पत्ति हुई। शिव ने ही गुरु और शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। शिव के शिष्य हैं- बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज इसके अलावा 8वें गौरशिरस मुनि भी थे।

*🔱7. शिव के गण : -* शिव के गणों में भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, जय और विजय प्रमुख हैं। इसके अलावा, पिशाच, दैत्य और नाग-नागिन, पशुओं को भी शिव का गण माना जाता है। 

*🔱8. शिव पंचायत : -* भगवान सूर्य, गणपति, देवी, रुद्र और विष्णु ये शिव पंचायत कहलाते हैं।

*🔱9. शिव के द्वारपाल : -* नंदी, स्कंद, रिटी, वृषभ, भृंगी, गणेश, उमा-महेश्वर और महाकाल।

*🔱10. शिव पार्षद : -* जिस तरह जय और विजय विष्णु के पार्षद हैं उसी तरह बाण, रावण, चंड, नंदी, भृंगी आदि शिव के पार्षद हैं।

*🔱11. सभी धर्मों का केंद्र शिव : -* शिव की वेशभूषा ऐसी है कि प्रत्येक धर्म के लोग उनमें अपने प्रतीक ढूंढ सकते हैं। मुशरिक, यजीदी, साबिईन, सुबी, इब्राहीमी धर्मों में शिव के होने की छाप स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। शिव के शिष्यों से एक ऐसी परंपरा की शुरुआत हुई, जो आगे चलकर शैव, सिद्ध, नाथ, दिगंबर और सूफी संप्रदाय में वि‍भक्त हो गई।

*🔱12. बौद्ध साहित्य के मर्मज्ञ अंतरराष्ट्रीय : -* ख्यातिप्राप्त विद्वान प्रोफेसर उपासक का मानना है कि शंकर ने ही बुद्ध के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने पालि ग्रंथों में वर्णित 27 बुद्धों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें बुद्ध के 3 नाम अतिप्राचीन हैं- तणंकर, शणंकर और मेघंकर।

*🔱13. देवता और असुर दोनों के प्रिय शिव : -* भगवान शिव को देवों के साथ असुर, दानव, राक्षस, पिशाच, गंधर्व, यक्ष आदि सभी पूजते हैं। वे रावण को भी वरदान देते हैं और राम को भी। उन्होंने भस्मासुर, शुक्राचार्य आदि कई असुरों को वरदान दिया था। शिव, सभी आदिवासी, वनवासी जाति, वर्ण, धर्म और समाज के सर्वोच्च देवता हैं।

*🔱14. शिव चिह्न : -* वनवासी से लेकर सभी साधारण व्‍यक्ति जिस चिह्न की पूजा कर सकें, उस पत्‍थर के ढेले, बटिया को शिव का चिह्न माना जाता है। इसके अलावा रुद्राक्ष और त्रिशूल को भी शिव का चिह्न माना गया है। कुछ लोग डमरू और अर्द्ध चन्द्र को भी शिव का चिह्न मानते हैं, हालांकि ज्यादातर लोग शिवलिंग अर्थात शिव की ज्योति का पूजन करते हैं।

*🔱15. शिव की गुफा : -* शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए एक पहाड़ी में अपने त्रिशूल से एक गुफा बनाई और वे फिर उसी गुफा में छिप गए। वह गुफा जम्मू से 150 किलोमीटर दूर त्रिकूटा की पहाड़ियों पर है। दूसरी ओर भगवान शिव ने जहां पार्वती को अमृत ज्ञान दिया था वह गुफा 'अमरनाथ गुफा' के नाम से प्रसिद्ध है।

*🔱16. शिव के पैरों के निशान : -* श्रीपद- श्रीलंका में रतन द्वीप पहाड़ की चोटी पर स्थित श्रीपद नामक मंदिर में शिव के पैरों के निशान हैं। ये पदचिह्न 5 फुट 7 इंच लंबे और 2 फुट 6 इंच चौड़े हैं। इस स्थान को सिवानोलीपदम कहते हैं। कुछ लोग इसे आदम पीक कहते हैं।

रुद्र पद- तमिलनाडु के नागपट्टीनम जिले के थिरुवेंगडू क्षेत्र में श्रीस्वेदारण्येश्‍वर का मंदिर में शिव के पदचिह्न हैं जिसे 'रुद्र पदम' कहा जाता है। इसके अलावा थिरुवन्नामलाई में भी एक स्थान पर शिव के पदचिह्न हैं।

तेजपुर- असम के तेजपुर में ब्रह्मपुत्र नदी के पास स्थित रुद्रपद मंदिर में शिव के दाएं पैर का निशान है।

जागेश्वर- उत्तराखंड के अल्मोड़ा से 36 किलोमीटर दूर जागेश्वर मंदिर की पहाड़ी से लगभग साढ़े 4 किलोमीटर दूर जंगल में भीम के पास शिव के पदचिह्न हैं। पांडवों को दर्शन देने से बचने के लिए उन्होंने अपना एक पैर यहां और दूसरा कैलाश में रखा था।

रांची- झारखंड के रांची रेलवे स्टेशन से 7 किलोमीटर की दूरी पर 'रांची हिल' पर शिवजी के पैरों के निशान हैं। इस स्थान को 'पहाड़ी बाबा मंदिर' कहा जाता है।

*🔱17. शिव के अवतार : -* वीरभद्र, पिप्पलाद, नंदी, भैरव, महेश, अश्वत्थामा, शरभावतार, गृहपति, दुर्वासा, हनुमान, वृषभ, यतिनाथ, कृष्णदर्शन, अवधूत, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, किरात, सुनटनर्तक, ब्रह्मचारी, यक्ष, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, द्विज, नतेश्वर आदि हुए हैं। वेदों में रुद्रों का जिक्र है। रुद्र 11 बताए जाते हैं- कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, आपिर्बुध्य, शंभू, चण्ड तथा भव।

*🔱18. शिव का विरोधाभासिक परिवार : -* शिवपुत्र कार्तिकेय का वाहन मयूर है, जबकि शिव के गले में वासुकि नाग है। स्वभाव से मयूर और नाग आपस में दुश्मन हैं। इधर गणपति का वाहन चूहा है, जबकि सांप मूषकभक्षी जीव है। पार्वती का वाहन शेर है, लेकिन शिवजी का वाहन तो नंदी बैल है। इस विरोधाभास या वैचारिक भिन्नता के बावजूद परिवार में एकता है।

*🔱19.* ति‍ब्बत स्थित कैलाश पर्वत पर उनका निवास है। जहां पर शिव विराजमान हैं उस पर्वत के ठीक नीचे पाताल लोक है जो भगवान विष्णु का स्थान है। शिव के आसन के ऊपर वायुमंडल के पार क्रमश: स्वर्ग लोक और फिर ब्रह्माजी का स्थान है।

*🔱20.शिव भक्त : -* ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवी-देवताओं सहित भगवान राम और कृष्ण भी शिव भक्त है। हरिवंश पुराण के अनुसार, कैलास पर्वत पर कृष्ण ने शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। भगवान राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की थी।

*🔱21.शिव ध्यान : -* शिव की भक्ति हेतु शिव का ध्यान-पूजन किया जाता है। शिवलिंग को बिल्वपत्र चढ़ाकर शिवलिंग के समीप मंत्र जाप या ध्यान करने से मोक्ष का मार्ग पुष्ट होता है।

*🔱22.शिव मंत्र : -* दो ही शिव के मंत्र हैं पहला- ॐ नम: शिवाय। दूसरा महामृत्युंजय मंत्र- ॐ ह्रौं जू सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जू ह्रौं ॐ ॥ है।

*🔱23.शिव व्रत और त्योहार : -* सोमवार, प्रदोष और श्रावण मास में शिव व्रत रखे जाते हैं। शिवरात्रि और महाशिवरात्रि शिव का प्रमुख पर्व त्योहार है।

*🔱24. शिव प्रचारक : -* भगवान शंकर की परंपरा को उनके शिष्यों बृहस्पति, विशालाक्ष (शिव), शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज, अगस्त्य मुनि, गौरशिरस मुनि, नंदी, कार्तिकेय, भैरवनाथ आदि ने आगे बढ़ाया। इसके अलावा वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, बाण, रावण, जय और विजय ने भी शैवपंथ का प्रचार किया। इस परंपरा में सबसे बड़ा नाम आदिगुरु भगवान दत्तात्रेय का आता है। दत्तात्रेय के बाद आदि शंकराचार्य, मत्स्येन्द्रनाथ और गुरु गुरुगोरखनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

*🔱25.शिव महिमा : -* शिव ने कालकूट नामक विष पिया था जो अमृत मंथन के दौरान निकला था। शिव ने भस्मासुर जैसे कई असुरों को वरदान दिया था। शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। शिव ने गणेश और राजा दक्ष के सिर को जोड़ दिया था। ब्रह्मा द्वारा छल किए जाने पर शिव ने ब्रह्मा का पांचवां सिर काट दिया था।

*🔱26.शैव परम्परा : -* दसनामी, शाक्त, सिद्ध, दिगंबर, नाथ, लिंगायत, तमिल शैव, कालमुख शैव, कश्मीरी शैव, वीरशैव, नाग, लकुलीश, पाशुपत, कापालिक, कालदमन और महेश्वर सभी शैव परंपरा से हैं। चंद्रवंशी, सूर्यवंशी, अग्निवंशी और नागवंशी भी शिव की परंपरा से ही माने जाते हैं। भारत की असुर, रक्ष और आदिवासी जाति के आराध्य देव शिव ही हैं। शैव धर्म भारत के आदिवासियों का धर्म है।

*🔱27.शिव के प्रमुख नाम : -* शिव के वैसे तो अनेक नाम हैं जिनमें 108 नामों का उल्लेख पुराणों में मिलता है लेकिन यहां प्रचलित नाम जानें- महेश, नीलकंठ, महादेव, महाकाल, शंकर, पशुपतिनाथ, गंगाधर, नटराज, त्रिनेत्र, भोलेनाथ, आदिदेव, आदिनाथ, त्रियंबक, त्रिलोकेश, जटाशंकर, जगदीश, प्रलयंकर, विश्वनाथ, विश्वेश्वर, हर, शिवशंभु, भूतनाथ और रुद्र।

*🔱28.अमरनाथ के अमृत वचन : -* शिव ने अपनी अर्धांगिनी पार्वती को मोक्ष हेतु अमरनाथ की गुफा में जो ज्ञान दिया उस ज्ञान की आज अनेकानेक शाखाएं हो चली हैं। वह ज्ञानयोग और तंत्र के मूल सूत्रों में शामिल है। 'विज्ञान भैरव तंत्र' एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें भगवान शिव द्वारा पार्वती को बताए गए 112 ध्यान सूत्रों का संकलन है।

*🔱29.शिव ग्रंथ : -* वेद और उपनिषद सहित विज्ञान भैरव तंत्र, शिव पुराण और शिव संहिता में शिव की संपूर्ण शिक्षा और दीक्षा समाई हुई है। तंत्र के अनेक ग्रंथों में उनकी शिक्षा का विस्तार हुआ है।

*🔱30.शिवलिंग : -* वायु पुराण के अनुसार प्रलयकाल में समस्त सृष्टि जिसमें लीन हो जाती है और पुन: सृष्टिकाल में जिससे प्रकट होती है, उसे लिंग कहते हैं। इस प्रकार विश्व की संपूर्ण ऊर्जा ही लिंग की प्रतीक है। वस्तुत: यह संपूर्ण सृष्टि बिंदु-नाद स्वरूप है। बिंदु शक्ति है और नाद शिव। बिंदु अर्थात ऊर्जा और नाद अर्थात ध्वनि। यही दो संपूर्ण ब्रह्मांड का आधार है। इसी कारण प्रतीक स्वरूप शिवलिंग की पूजा-अर्चना है।

*🔱31.बारह ज्योतिर्लिंग : -* सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ॐकारेश्वर, वैद्यनाथ, भीमशंकर, रामेश्वर, नागेश्वर, विश्वनाथजी, त्र्यम्बकेश्वर, केदारनाथ, घृष्णेश्वर। ज्योतिर्लिंग उत्पत्ति के संबंध में अनेकों मान्यताएं प्रचलित है। ज्योतिर्लिंग यानी 'व्यापक ब्रह्मात्मलिंग' जिसका अर्थ है 'व्यापक प्रकाश'। जो शिवलिंग के बारह खंड हैं। शिवपुराण के अनुसार ब्रह्म, माया, जीव, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को ज्योतिर्लिंग या ज्योति पिंड कहा गया है।

 दूसरी मान्यता अनुसार शिव पुराण के अनुसार प्राचीनकाल में आकाश से ज्‍योति पिंड पृथ्‍वी पर गिरे और उनसे थोड़ी देर के लिए प्रकाश फैल गया। इस तरह के अनेकों उल्का पिंड आकाश से धरती पर गिरे थे। भारत में गिरे अनेकों पिंडों में से प्रमुख बारह पिंड को ही ज्‍योतिर्लिंग में शामिल किया गया।

*🔱32.शिव का दर्शन : -* शिव के जीवन और दर्शन को जो लोग यथार्थ दृष्टि से देखते हैं वे सही बुद्धि वाले और यथार्थ को पकड़ने वाले शिवभक्त हैं, क्योंकि शिव का दर्शन कहता है कि यथार्थ में जियो, वर्तमान में जियो, अपनी चित्तवृत्तियों से लड़ो मत, उन्हें अजनबी बनकर देखो और कल्पना का भी यथार्थ के लिए उपयोग करो। आइंस्टीन से पूर्व शिव ने ही कहा था कि कल्पना ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

*🔱33.शिव और शंकर : -* शिव का नाम शंकर के साथ जोड़ा जाता है। लोग कहते हैं- शिव, शंकर, भोलेनाथ। इस तरह अनजाने ही कई लोग शिव और शंकर को एक ही सत्ता के दो नाम बताते हैं। असल में, दोनों की प्रतिमाएं अलग-अलग आकृति की हैं। शंकर को हमेशा तपस्वी रूप में दिखाया जाता है। कई जगह तो शंकर को शिवलिंग का ध्यान करते हुए दिखाया गया है। अत: शिव और शंकर दो अलग अलग सत्ताएं है। हालांकि शंकर को भी शिवरूप माना गया है। माना जाता है कि महेष (नंदी) और महाकाल भगवान शंकर के द्वारपाल हैं। रुद्र देवता शंकर की पंचायत के सदस्य हैं।

*🔱34. देवों के देव महादेव :* देवताओं की दैत्यों से प्रतिस्पर्धा चलती रहती थी। ऐसे में जब भी देवताओं पर घोर संकट आता था तो वे सभी देवाधिदेव महादेव के पास जाते थे। दैत्यों, राक्षसों सहित देवताओं ने भी शिव को कई बार चुनौती दी, लेकिन वे सभी परास्त होकर शिव के समक्ष झुक गए इसीलिए शिव हैं देवों के देव महादेव। वे दैत्यों, दानवों और भूतों के भी प्रिय भगवान हैं। वे राम को भी वरदान देते हैं और रावण को भी।

*🔱35. शिव हर काल में : -* भगवान शिव ने हर काल में लोगों को दर्शन दिए हैं। राम के समय भी शिव थे। महाभारत काल में भी शिव थे और विक्रमादित्य के काल में भी शिव के दर्शन होने का उल्लेख मिलता है। भविष्य पुराण अनुसार राजा हर्षवर्धन को भी भगवान शिव ने दर्शन दिए थे।

🙏🏻🙏🙏🏻🙏🏻

TRN LIVE: *|| स्रोत की शुद्धता ||*

     प्रकृति द्वारा शांति प्राप्त करने का सबको समानाधिकार दिया गया है। यदि शांति केवल धन से प्राप्त हो पाती तो वह अमीरों की जागीर बनकर रह जाती। अपने जीवन में कोई कितना ही धनवान क्यों न हो, लेकिन शांति को खरीद नहीं सकता और दुःखों को बेच नहीं सकता है। धन सुख के साधनों को तो उपलब्ध करा देता है, लेकिन शांति के साधनों को उपलब्ध नहीं करा पाता है। शांति का संबंध धन से नहीं अपितु हमारे धर्मयुक्त जीवन से है।

जिस प्रकार जल का स्रोत ही विषाक्त होने पर पात्र की शुद्धता का कोई महत्व नहीं रह जाता, वह रोगों को ही जन्म देने वाला है। ठीक ऐसे ही धन के अर्जन का स्रोत दूषित रहने पर वह भी जीवन की अशांति का कारण ही बनने वाला है। गलत मार्गों से अर्जित धन किसी मनुष्य को बाहर से समस्त सुख साधनों को उपलब्ध करवा कर भी भीतर से अतृप्त ही रखता है। यदि हमारी कमाई का मार्ग पवित्र है तो धन भले थोड़ा कम रहे, लेकिन जीवन में शांति अवश्य रहेगी।

किसी भी अवस्था में संतुष्टि मिलना ही जीवन में शांति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है,

दूसरों को तो सभी समझाते हैं किंतु अपने आपको समझना और संतुष्ट करना ही परम सत्य व सुखी जीवन का मूल मंत्र है,

अतः सदैव स्मरण रखे🙏🏻👇🏻

*जो प्राप्त है वहीं पर्याप्त है,*

नेक कर्म और प्रभु नाम स्मरण सहायक हों सभी के ।

ॐ नमो नारायण जय श्री हरि सदा सहाय

राधे राधे जय सीताराम 🙏🏻🌹

TRN LIVE: अयोध्या पति श्री राम ने राजपाट संभाल लिया था और प्रजा राम राज्य से प्रसन्न थी. एक दिन भगवान महादेव की इच्छा श्री राम से मिलने की हुई।

पार्वती जी को संग लेकर महादेव कैलाश पर्वत से अयोध्या नगरी के लिए चल पड़े. भगवान शिव और मां पार्वती को अयोध्या आया देखकर श्री सीता राम जी बहुत खुश हुए।

माता जानकी ने उनका उचित आदर सत्कार किया और स्वयं भोजन बनाने के लिए रसोई में चली गईं. भगवान शिव ने श्री राम से पूछा- हनुमान जी दिखाई नहीं पड़ रहे हैं, कहां हैं ?

श्री राम बोले- वह बगीचे में होंगे. शिव जी ने श्री राम जी से बगीचे में जाने की अनुमति मांगी और पार्वती जी के साथ बगीचे में आ गए. बगीचे की खूबसूरती देखकर उनका मन मोहित हो गया।

आम के एक घने वृक्ष के नीचे हनुमान जी दीन-दुनिया से बेखबर गहरी नींद में सोए थे और एक लय में खर्राटों से राम नाम की ध्वनि उठ रही थी. चकित होकर शिव जी और माता पार्वती एक दूसरे की ओर देखने लगे।

माता पार्वती मुस्करा उठी और वृक्ष की डालियों की ओर इशारा किया. राम नाम सुनकर पेड़ की डालियां भी झूम रही थीं. उनके बीच से भी राम नाम उच्चारित हो रहा था।

शिव जी इस राम नाम की धुन में मस्त मगन होकर खुद भी राम राम कहकर नाचने लगे. माता पार्वती जी ने भी अपने पति का अनुसरण किया. भक्ति में भरकर उनके पांव भी थिरकने लगे।

शिव जी और पार्वती जी के नृत्य से ऐसी झनकार उठी कि स्वर्गलोक के देवतागण भी आकर्षित होकर बगीचे में आ गए और राम नाम की धुन में सभी मस्त हो गए।

माता जानकी भोजन तैयार करके प्रतीक्षारत थीं परंतु संध्या घिरने तक भी अतिथि नहीं पधारे तब अपने देवर लक्ष्मण जी को बगीचे में भेजा।

लक्ष्मण जी ने तो अवतार ही लिया था श्री राम की सेवा के लिए. अतः बगीचे में आकर जब उन्होंने धरती पर स्वर्ग का नजारा देखा तो खुद भी राम नाम की धुन में झूम उठे।

महल में माता जानकी परेशान हो रही थीं कि अभी तक भोजन ग्रहण करने कोई भी क्यों नहीं आया. उन्होंने श्री राम से कहा भोजन ठंडा हो रहा है चलिए हम ही जाकर बगीचे में से सभी को बुला लाएं।

जब सीता राम जी बगीचे में गए तो वहां राम नाम की धूम मची हुई थी. हुनमान जी गहरी नींद में सोए हुए थे और उनके खर्राटों से अभी तक राम नाम निकल रहा था।

श्री सिया राम भाव विह्वल हो उठे. श्री राम जी ने हनुमान जी को नींद से जगाया और प्रेम से उनकी तरफ निहारने लगे. प्रभु को आया देख हनुमान जी शीघ्रता से उठ खड़े हुए. नृत्य का माहौल भंग हो गया।

शिव जी खुले कंठ से हनुमान जी की राम भक्ति की सराहना करने लगे. हनुमान जी सकुचाए लेकिन मन ही मन खुश हो रहे थे. श्री सीया राम जी ने भोजन करने का आग्रह भगवान शिव से किया।

सभी लोग महल में भोजन करने के लिए चल पड़े. माता जानकी भोजन परोसने लगीं. हुनमान जी को भी श्री राम जी ने पंक्ति में बैठने का आदेश दिया।

हनुमान जी बैठ तो गए परंतु आदत ऐसी थी की श्री राम के भोजन के उपरांत ही सभी भोजन करते थे।

आज श्री राम के आदेश से पहले भोजन करना पड़ रहा था. माता जानकी हनुमान जी को भोजन परोसती जा रही थी पर हनुमान का पेट ही नहीं भर रहा था. कुछ समय तक तो उन्हें भोजन परोसती रहीं फिर समझ गईं इस तरह से हनुमान जी का पेट नहीं भरने वाला।

उन्होंने तुलसी के एक पत्ते पर राम नाम लिखा और भोजन के साथ हनुमान जी को परोस दिया. तुलसी पत्र खाते ही हनुमान जी को संतुष्टि मिली और वह भोजन पूर्ण मानकर उठ खड़े हुए।

भगवान शिव शंकर ने प्रसन्न होकर हनुमान जी को आशीर्वाद दिया कि आप की राम भक्ति युगों-युगों तक याद की जाएगी और आप संकट मोचन कहलाएंगे।

TRN LIVE:     

🔱*शालिग्राम जी घर में कैसे रखें*🔱          

    🔅 बहुत से हिन्दुओं के घरों में शालिग्राम जी होते हैं। यह शिवलिंग से मिलता-जुलता एक पत्थर होता है जो कि नेपाल के मुक्तिनाथ, काली गंडकी नदी के तट पर ही पाया जाता है। 

      🔅शिवलिंग शिवजी तो शालिग्राम भगवान विष्णु का विग्रह रूप है। यह बहुत जाग्रत होते हैं। मान्यता है कि घर में भगवान शालिग्राम  जी हो, वह तीर्थ के समान माना जाता है। 

       🔅स्कंदपुराण के कार्तिक महात्म्य में शिवजी ने भी शालिग्राम की स्तुति की है।

 

🌋 शालिग्राम को घर में रखने के कई चमत्कारिक लाभ हैं। जिस घर में शालिग्राम जी का पूजन होता है । उस घर में लक्ष्मी का सदैव वास रहता है शालिग्राम पूजन करने से अगले-पिछले सभी जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। और व्यक्ति हर ओर से सुखी रहता है।, 

    🔅लेकिन उसे इन 5 नियमों का पालन करना जरूरी है अन्यथा वह बर्बाद  एवं नुकसान हो सकता है। यहां दी जा रही जानकारी मान्यता, अनुभव और विद्वानों के उपदेश पर आधारित है।

 🌷*अपने घर में रखने के ये पांच नियम*🌷

 (१) *आचरण रखें शुद्ध :-- शालिग्राम जी वैष्णव धर्म का सबसे बड़ा विग्रह है। शालिग्राम जी सात्विकता के प्रतीक हैं। उनके पूजन में आचार-विचार की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। यदि आप मांस या मदिरा का सेवन करते हैं तो यह आपके लिए घातक सिद्ध हो सकता है

  (२) *प्रतिदिन पूजा :-- कहते हैं कि कुछ समय को छोड़कर शालिग्राम जी की प्रतिदिन पूजा करना जरूरी है। 

 (३) एक ही हो शालिग्राम जी :-- *घर में सिर्फ एक ही असली शालिग्राम रखना चाहिए। कई घरों में कई शालिग्राम होते हैं जो उचित नहीं है।

 (४) *पंचामृत से स्नान :--- शालिग्राम जी को प्रतिदिन पंचामृत से स्नान कराया जाता है।

 (५)  *चंदन और तुलसी :- शालिग्राम जी पर चंदन लगाकर उसके ऊपर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है। चंदन भी असली होना चाहिए। 

         🔅जैसे चंदन की एक लकड़ी को लाकर उसे शिला पर घिसे और फिर शालिग्राम जी को चंदन लगाएं।

 

👉 *क्यों हो जाता है व्यक्ति बर्बाद :--- बहुत से विद्वान मानते हैं कि शालिग्राम जी का पत्थर ब्रह्मांडीय ऊर्जा का एक स्रोत है। 

         🔅मतलब यह कि यह एक छोटी-सी गैलेक्सी की तरह है। इसमें अपार एनर्जी होती है। इसका प्रभाव घर के आसपास तक रहता है। एनर्जी के इस स्रोत को पवित्र और सकारात्मक बनाए रखना जरूरी है,। 

         🔅लेकिन यदि आप इसे किसी भी प्रकार से दूषित करते हैं तो निश्‍चित ही आपके घर में गृहकलह और घटना-दुर्घटनाएं बढ़ जाएंगी। अच्छी-भली जिंदगी बर्बादी के रास्ते पर चली आएगी। यदि आप खुद को मांस, मदिरा, गाली-गलोच, स्त्री अपमान आदि जैसी बुराईयो से दूर नहीं रखते हैं। 

 🙏🙏 *उपरोक्त पांच नियमों का पालन नहीं करते हैं तो आपको शालिग्राम जी को भी घर में नहीं लाना चाहिए। ये अदृश्य भगवान् है। अमृत और जहर एक ही बोतल में नहीं भरे जा सकते हैं।

*🙏सनातन धर्म की जय*

    

TRN LIVE: 🔹दरिद्रा देवी कहाँ निवास करती है ?🔹

🔸समुद्र-मंथन करने पर लक्ष्मीजी की बड़ी बहन दरिद्रा देवी प्रकट हुई। वे लाल वस्त्र पहने हुए थी। उन्होंने देवताओं से पूछा : “मेरे लिए क्या आज्ञा हैं ?”

🔸तब देवताओं ने कहा : “जिनके घर में प्रतिदिन कलह होता हो उन्हीं के यहाँ हम तुम्हें रहने के लिए स्थान देते हैं। तुम अमंगल को साथ लेकर उन्हीं घरों में जा बसों। जहाँ कठोर भाषण किया जाता हो, जहाँ के रहनेवाले सदा झूठ बोलते हों तथा जो मलिन अंत:करणवाले पापी संध्या के समय सोते हों, उन्हींके घर में दुःख और दरिद्रता प्रदान करती हुई तुम नित्य निवास करो। महादेवी ! जो खोटी बुद्धिवाला मनुष्य पैर धोये बिना ही आचमन करता है, उस पापपरायण मानव की ही तुम सेवा करो अर्थात उसे दुःख-दरिद्रता प्रदान करो।” ( पुद्मपुराण, उत्तर खंड, अध्याय २३२)

(हमारा आचार-व्यवहार व रहन-सहन कैसा हो यह जानने हेतु पढ़ें आश्रम से प्रकाशित सत्साहित्य ‘मधुर व्यवहार’ व ‘क्या करें , क्या न करे ?”)

🔹शांति के साथ आर्थिक सम्पन्नता लाने हेतु🔹

🔸सोते समय सिरहाने के पास किसी सफेद कागज में थोड़ा-सा कपूर रखें और प्रात: उसे घर से बाहर जला दें। इससे घर में शांति के साथ आर्थिक सम्पन्नता आती हैं।

🔹याद न रहने के मूल कारण क्या ?🔹

१] मनोयोग का अभाव

२] रूचि का अभाव

३] एकाग्रता का अभाव

४] संयम का अभाव

नहीं तो बहुत कुछ याद रह सकता हैं। इसमें कोई जादूगरी नहीं है, कोई चमत्कार नहीं हैं। स्मृतिकेंद्र को विकसित करनेवाला मंत्र ले लिया, ज्ञानतंतुओं को शुद्ध करनेवाला ‘ॐ गं गणपतये नम: .... ॐ गं गणपतये नम: ....’ जप करके थोडा ध्यान किया तो यह स्मृतिशक्ति बढ़ाना आदि या परीक्षा में अच्छे अंक लाना – यह कोई बड़ी बात नही हैं।

➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖जय श्री राम

    🚩  हिन्दू राष्ट्र भारत 🚩

TRN LIVE: 🚩 आज का पञ्चाङ्ग 🚩

🌥️ 🚩युगाब्द-५१२७

🌥️ 🚩विक्रम संवत-२०८२

⛅ 🚩तिथि - त्रयोदशी रात्रि 10:21 तक तत्पश्चात् चतुर्दशी

👇 

⛅ दिनांक - 16 जनवरी 2026

⛅ दिन - शुक्रवार

⛅ विक्रम संवत् - 2082

⛅ अयन - दक्षिणायण

⛅ ऋतु - शिशिर

⛅ मास - माघ

⛅ पक्ष - कृष्ण

⛅ नक्षत्र - मूल पूर्ण रात्रि तक

⛅ योग - ध्रुव रात्रि 09:06 तक तत्पश्चात् व्याघात

⛅ राहुकाल - सुबह 11:15 से दोपहर 12:37 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) 

⛅ सूर्योदय - 07:10

⛅ सूर्यास्त - 06:03 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)

⛅ दिशा शूल - पश्चिम दिशा में

⛅ ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:25 से प्रातः 06:18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)

⛅ अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:15 से दोपहर 12:58 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)

⛅ निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:10 जनवरी 17 से रात्रि 01:03 जनवरी 17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)

🌥️ व्रत पर्व विवरण - प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, मेरु त्रयोदशी

🌥️ विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)

🔹वास्तुशास्त्र के अनुसार ईशान-स्थल की महत्ता🔹

🔸कमरे में पूर्व व उत्तर दिशा के बीचवाले कोने से कमरे की पूर्वी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग व उत्तरी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग लेकर जो आयताकार स्थल बनता है, वह ‘ईशान-स्थल’ कहलाता है। १२ X १८ के कमरे का ईशान-स्थल ४ X ६ का होगा। खुले भूमिखंड के विषय में भी ऐसे ही समझना चाहिए।

🔹सुख-शांतिप्रदायक ईशान-स्थल🔹

🔸सुख-शांति और कल्याण चाहनेवाले बुद्धिमानों को अपने घर, दुकान या कार्यालय में ईशान-स्थल पर अपने इष्टदेव, सदगुरु का श्रीचित्र लगा के वहाँ धूप-दीप, मंत्रोच्चार तथा साधना-ध्यान पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुख करके करना चाहिए। यह विशेष सुख-शांतिदायक हैं।

🔹सुख-समृद्धि में वृद्धि हेतु🔹

🔸भूमिखंड के ईशान कोण तथा पूर्व एवं उत्तर दिशा में खाली भाग अधिक होना चाहिए और इन भागों में अपेक्षाकृत वजन में हलके व कम ऊँचाईवाले पेड़-पौधे लगाने चाहिए। भूमिखंड के ईशान-स्थल में तुलसी, बिल्व व आँवला लगाना सुख-समृद्धिकारक हैं।

🔹ज्ञानार्जन में सहायता व सत्प्रेरणा हेतु🔹

🔸विद्यार्थियों के लिए भी ईशान कोण बड़े महत्त्व का हैं। पूर्व एवं उत्तर दिशाएँ ज्ञानवर्धक दिशाएँ तथा ईशान-स्थल ज्ञानवर्धक स्थल है। जो विद्यार्थी ईशान-स्थल पर बैठ के पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पढ़ता है, उसे ज्ञानार्जन में विशेष सहायता मिलती है। पूर्व की ओर मुख करने से विशेष लाभ होता हैं। अध्ययन-कक्ष में सदगुरु या ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों के श्रीचित्र लगाने चाहिए, इससे सत्प्रेरणा मिलती हैं।

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            जय श्री राम

    🚩  हिन्दू राष्ट्र भारत 🚩

[16/01, 2:28 am] +91 97701 15569: 🔹वास्तुशास्त्र के अनुसार ईशान-स्थल की महत्ता🔹

🔸कमरे में पूर्व व उत्तर दिशा के बीचवाले कोने से कमरे की पूर्वी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग व उत्तरी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग लेकर जो आयताकार स्थल बनता है, वह ‘ईशान-स्थल’ कहलाता है। १२ X १८ के कमरे का ईशान-स्थल ४ X ६ का होगा। खुले भूमिखंड के विषय में भी ऐसे ही समझना चाहिए।

🔹सुख-शांतिप्रदायक ईशान-स्थल🔹

🔸सुख-शांति और कल्याण चाहनेवाले बुद्धिमानों को अपने घर, दुकान या कार्यालय में ईशान-स्थल पर अपने इष्टदेव, सदगुरु का श्रीचित्र लगा के वहाँ धूप-दीप, मंत्रोच्चार तथा साधना-ध्यान पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुख करके करना चाहिए। यह विशेष सुख-शांतिदायक हैं।

🔹सुख-समृद्धि में वृद्धि हेतु🔹

🔸भूमिखंड के ईशान कोण तथा पूर्व एवं उत्तर दिशा में खाली भाग अधिक होना चाहिए और इन भागों में अपेक्षाकृत वजन में हलके व कम ऊँचाईवाले पेड़-पौधे लगाने चाहिए। भूमिखंड के ईशान-स्थल में तुलसी, बिल्व व आँवला लगाना सुख-समृद्धिकारक हैं।

🔹ज्ञानार्जन में सहायता व सत्प्रेरणा हेतु🔹

🔸विद्यार्थियों के लिए भी ईशान कोण बड़े महत्त्व का हैं। पूर्व एवं उत्तर दिशाएँ ज्ञानवर्धक दिशाएँ तथा ईशान-स्थल ज्ञानवर्धक स्थल है। जो विद्यार्थी ईशान-स्थल पर बैठ के पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पढ़ता है, उसे ज्ञानार्जन में विशेष सहायता मिलती है। पूर्व की ओर मुख करने से विशेष लाभ होता हैं। अध्ययन-कक्ष में सदगुरु या ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों के श्रीचित्र लगाने चाहिए, इससे सत्प्रेरणा मिलती हैं।

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            जय श्री राम

    🚩  हिन्दू राष्ट्र भारत 🚩

TRN LIVE: वैदिक देवताओं और संस्कृत के मिले है प्रमाण भारत से दूर मिटानी नामक सभ्यता से

यह सभी प्रमाण बुद्ध पूर्व 1500 ईसा पूर्व का है

एक शिलालेख जो कि बोगाजकोई नामक स्थान से मिला था जो 1500 ईसा पूर्व का है जिसमें एक मिटानी राजा जिसका संस्कृत नाम है दशरथ करके और एक हिट्टाइट राजा के बीच में राज्य संबंध के बारे में है जिसे वैदिक देवता जैसे मित्र, वरुण, इंद्र और नास्त्य (अश्विन कुमार) ने देखा है

अब यहां शिलालेख में वरुण को अरुण बोला गया ऐसा इसलिए क्योंकि हिट्टाइट भाषा में अरुण का अर्थ होता है सागर इसलिए वरुण जो जल के देवता है उन्हें अरुण बोला गया है।

बाकी संस्कृत के प्रमाण जैसे कई मिटानी शिलालेख है जिनमें संस्कृत नाम जिसे प्रियामेध, प्रियास्व स्पष्ट वर्णित है बाकी

किक्कुली से प्राप्त एक शिलालेख है जिसमें संस्कृत भी खूब वर्णित है जैसे अश्व यहां तक कि संस्कृत नंबरों का भी वर्णन है जैसे एक, दो करके।

Source: Deshpande, Madhav M. (1995). "Vedic Aryans, non-Vedic Aryans, and non-Aryans: Judging the linguistic evidence of the Veda". In George Erdosy (ed.). The Indo-Aryans of Ancient South Asia: Language, Material Culture and Ethnicity. Berlin, Boston: De Gruyter. pp.

journal of indo-european studies. 2010. about the mitanni aryan gods. (1-2: 26-40)

TRN LIVE: 🕉️भगवान श्रीकृष्ण द्वारा चीरहरण लीला

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मित्रों यहाँ पर चीरहरण का अभिप्राय है,माया रूपी दीवार या पर्दा का हरण,हम सभी जीवात्माओं के सामने माया का पर्दा या दीवार ढका हुआ है,जिस कारण से हम ईश्वर को इन माया के दोनों चर्म नेत्रों से नही देख पाते हैं,जैसा की हम सभी जीवात्मा भलिप्रकार से यह जानते हैं,कि किसी भी दृश्य को देखने और समझने में धरती और आसमान का अन्तर होता है,ठीक इसी प्रकार से ही भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीलायें हैं,जो दिखती कुछ और हैं,लेकिन उसके पीछे उद्देश्य होता कुछ और हैं।

इसलिए ही हमारे संतो महापुरुषो ने हमे सावधान किया है,हमे बताया है कि श्री रामजी के चरित्र का अनुसरण करो और श्री कृष्ण के लीलाओं को पावन बुद्धि से समझो।

भगवान श्री कृष्ण द्वारा जब चीरहरण लीला की गई थी,उस समय उनकी आयु मात्र साढ़े छः वर्ष की थी,

चीरहरण लीला के वर्णन से पहले उनके आगे की कुछ लीलाओं का संक्षिप्त वर्णन कर रहे है,क्योंकि चीर हरण लीला का आधार ही उनके द्वारा पूर्व में की गई लीलायें हैं,जब भगवान श्री कृष्ण मात्र छः दिन के थे,

तब उन्होंने एक विशालकाय राक्षसी पूतना का वध करके उसका उद्धार किया था,इसके पश्चात जब वे तीन माह के हुए थे तब सकटासुर नामक दैत्य का संहार करके उसका उद्धार किया था,फिर जब वो पांच माह के हुए थे तब विशाल बवण्डर के रूप में आये हुए दैत्य तृणावृत का वध करके उसका उद्धार किया था,

फिर आगे क्रमशः इसी प्रकार वकासुर,अघासुर आदि अनेक विशालकाय दैत्यों का संहार किया था,एक बार गोपियाँ भगवान श्री कृष्ण से कहतीं हैं,कि हे कृष्ण हम जान गईं हैं की आप मानव नही साक्षात श्री नारायण ही हैं,तब भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि हे गोपियो मैं तो केवल साधारण बालक ही हूँ,परन्तु तुमलोग यह बताओ कि तुम्हे ऐसा क्यों लगता है कि मैं मानव नही नारायण ही हूँ,तब गोपियाँ कहतीं हैं कि हे नन्दनन्दन तुमने केवल छः दिन की आयु में ही,अति विशालकाय राक्षसी पूतना का विषयुक्त दुग्ध का पान करके उस राक्षसी का वध करके उसका उद्धार किया था,संतो ज्ञानियों का यह कहना है कि यह कार्य ना तो कोई मनुष्य कर सकता है,और ना ही किसी भी देवता में ही ऐसा करने का सामर्थ्य है,इसी तरह आपने अनेकानेक विशालकाय भयंकर राक्षसो का वद्ध करके उनका उद्धार किया है और व्रजवासियों की रक्षा की,गोपियाँ कहतीं हैं कि हे कृष्ण तुम्हारे दोनों चरणों की तलवों में शंख चक्र गदा और पद्म के चित्रांकित है,तुम्हारे छाती में श्रीवत्स का जो चिन्ह है,वह तुम्हारे नारायण होने का प्रमाण देता है,हे नाथ हम और क्या कहें जब हम दधि माखन बनाकर भगवान श्री नारायण को भोग लगाने के लिए आवाहन करतीं हैं,तो तुम्ही दौड़े चले आते हो और भोग लगाकर चले जाते हो,तुम जिस घर का भी दधि माखन का भोग लगा जाते हो,उस घर की गाइया चार गुना अधिक दूध देने लग जाती हैं,यहाँ तक की उस घर की बाँझ बूढ़ी और बिन बियाई बछिया भी दूध देने लग जाती है,तब भगवान श्री कृष्ण मौन रहकर गोपियों की तरफ देखकर मुसकरा देते हैं,तभी से ब्रज की गोपियाँ श्री कृष्ण को पतिभाव से प्रेम करने लगतीं हैं,और भगवान श्री कृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिये माता कत्यायनी का विधिवत एक मास तक व्रत पूजन करने लगतीं हैं,अब गोपियाँ प्रतिदिन सुर्योदय से पूर्व उठकर यमुना जी में स्नान करने को जाती हैं,और यमुना तट की बलुकामयी कत्यायनी माता की पिण्डी बनाकर विधिवत पूजन अर्चन करतीं हैं,गोपियाँ जिस वस्त्र को पहकर स्नान करने जाती हैं स्नान के पश्चात पुनः उन्ही वस्त्रो को पहन लेती हैं,

अर्थात वे नग्न होकर यमुना जी में स्नान करती हैं और अज्ञानतावश जल के अधिष्ठात्र देवता वरुण देव का अपराध करती हैं,भगवन श्री कृष्ण ने गोपियों के समस्त अशुभ संस्कारों और अज्ञानताओं का हरण करने के लिए ही चीर हरण लीला की थी,भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के सारे वस्त्रो को अपने कांधे पर रखकर ऊँचे कदम्ब की डाली पर चढ़कर बैठ जाते हैं और जोर-जोर से ठहाके लगाते है,स्नान करती हुई गोपियाँ पहले तो यह देखकर सहम जातीं हैं,फिर कहने लगतीं हैं कि हे कृष्ण हमारे वस्त्र हमे वापस कर दो हम सभी ठण्ड के मारे जल में ठिठुर रहीं हैं,तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा हे गोपियों बाहर आओ और अपने-अपने वस्त्र ले जाओ,तब गोपियाँ कहतीं हैं,कि हे नाथ हम तो तुम्हारी दासियाँ हैं एक मात्र तुम्ही से प्रेम करतीं हैं हमे ना सताओ हमें हमारे वस्त्र देदो,हम निर्वस्त्र तुम्हारे सामने कैसे आ सकतीं हैं हमे लज्जा आती है,भगवान् श्री कृष्ण कहते हैं कि जब तुम निर्वस्त्र होकर जल में घुसी थीं तब तुम्हे लज्जा नही आई थी,

गोपियों ने श्री कृष्ण से कहा तब तुम यहाँ पर नही थे कृष्ण,भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे गोपियों तब भी मैं यहाँ मौजूद था,फर्क सिर्फ इतना है कि तुम सब मुझे अभी देख पा रही हो,हे गोपियों तुम तो कहती हो कि तुम सभी मुझसे प्रेम करती हो,मेरी दासियाँ हो मुझे नारायण मानती हो,तो फिर यह विचार करो कि मैं तो सर्वत्र सर्वव्यापी हूँ,तुम जिस जल में नग्न स्नान कर रही हो उस जल में भी मैं ही हूँ,मैं तो कण-कण में व्याप्त हूँ, मुझसे कुछ भी नही छिपा है यदि तुम सभी वस्त्र पहने हुए भी होतीं तो भी मेरे समक्ष नग्न ही होती,हे गोपियों तुम्हारा ज्ञान अधूरा है,मैं ब्रह्म हूँ ये बात तो तुम जानती हो परन्तु व्यवहार में मानती नही हो,

भगवान श्री कृष्ण के इस प्रकार के वचनों को सुनकर गोपियों के मन से अज्ञानता रूपी अंधकार समाप्त हुआ,अब उनके मन से स्त्री पुरुष का भेद ही समाप्त हो गया,उनकी दृष्टि दिव्य हो गई और वे सभी नग्न अवस्था में ही जल से बाहर निकलकर श्री कृष्ण के समक्ष आकर खड़ी हो गयीं,भगवान श्रीकृष्ण ने उनके वस्त्र उन्हें दे दिए,उनके वस्त्र श्रीकृष्ण के श्रीविग्रह को स्पर्श कर चुके थे ऐसे वस्त्र को धारण करते ही गोपियों के जन्म-जन्म के अशुभ संस्कार और अज्ञान नष्ट हो गया,भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि हे गोपियो तुमने यमुना जल में नग्न स्नान करके वरुण देव का अपराध किया है,इसलिए वरुण देव को प्रणाम करके क्षमा मांगो,गोपियो ने समस्त भूतों का एक मात्र स्वामी श्री कृष्ण जानकार,केवल श्रीकृष्ण को ही प्रणाम किया,

भगवान श्रीकृष्ण गोपियों पर प्रसन्न हुए और कहा हे गोपियों मैं समय आने पर तुम सभी आत्माओं को अपने परमात्मा सरूप के दिव्य दर्शन कराकर तुम्हारे साथ महारास द्वारा आलौकिक मिलन करूँगा,अब तुम पहले वाली गोपियाँ नही रही,अब तुम व्रज की दिव्य विभूतियाँ बन चुकी हो,जाओ तुम्हारा कल्याण होगा।

डॉ0 विजय शंकर मिश्र:।

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TRN LIVE: *🕉️मानना अभिमान ।*

जैसे गीता में कहा- ’ *वासुदेव: सर्वम्* ’ । 

बहुत जन्मों के अंतिम जन्म में सब कुछ वासुदेव ही है । वह महात्मा बड़ा दुर्लभ है । भगवान् हैं, और भगवान् को प्राप्त महात्मा हैं, उनका निर्णय है । वो भी (महात्मा भी) उस तत्व को प्राप्त हो जाते हैं । तो सब वासुदेव ही है । चाहे मनुष्य हो, पहाड़, नदी हो सब वासुदेव ही है । ऐसा नहीं दीखे तो भगवान् के और महात्माओं के वचनों पर श्रद्धा हो । हमारे समझ में नहीं आए तो भी है तो वासुदेव ही । हमारे समझ में नहीं आए, तो क्या चीज है ही नहीं ? नारद भक्ति सूत्र में आया है कि भगवान् का अभिमान से वैर है । अभिमान सब दोषों के अनर्थ का मूल है । भगवान् को अनर्थ नहीं सुहाता । कारण कि भगवान् सबके सुहृदय हैं । शास्त्र कहते हैं, भगवान् कहते हैं, महात्मा कहते हैं । वह सही है । मैं नहीं जानता, इसका मतलब परमात्मा नहीं है, यह नहीं है । परमात्मा तो है । भगवान् निराकार ही है । साकार नहीं हो सकता, यह अभिमान की धारणा है । मैं साकार को नहीं जानता इतना ही जानता हूं, तो यह बात तो ठीक है । पर साकार नहीं है, यह बात ठीक नहीं है । सब वासुदेव है । यह महात्माओं का अनुभव है । तो उनका आदर करना चाहिए । भगवान् और महात्माओं के संसार की धारणा नहीं है । आठ प्रकार की अपरा प्रकृति है - पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु,.... । जीवने जगत को धारण किया है । तो जगत जीव की दृष्टि में है । भगवान् और महात्माओं की धारणा में जगत है ही नहीं । जीव जगत को धारण न करे, तो जगत है ही नहीं । भगवान् कहते हैं देवताओं की उपासना करने वाले मेरी ही पूजा करते हैं । पर वह पूजा अविधि पूर्वक है, क्योंकि वह देवताओं को मेरे से अलग समझते हैं । तो सब में भगवान् को देखें ।

 जब क ख ग घ ड सीखा जाता है, अभ्यास करते हैं, ये क है, ये ख है । पर बाद में अभ्यास हो जाता है, चिट्ठी लिख देते हो । तो ये तो अभ्यास से होता है, पर वो परमात्मा तो पहले से ही हैं । जैसे गंगा जी है, तो गंगा जी कहते ही भाव बदल गया । तो गंगा जी तो पहले से ही थी, अब भी है, अगाड़ी भी रहेगी । इस वास्ते परमात्मा सब कुछ हैं । हमारी समझ में नहीं आई, इसलिए नहीं दीखता है । बन गए आप अकेले सब कुछ नाम धरा संसार । तो वास्तव में जीव ने ही जगत धारण किया है । संसार तो नहीं है और नहीं में ही जा रहा है। जैसे हमारा बचपना चला गया, तो बचपना नहीं रहा । तो जवानी कौन सी रह जाएगी ? वृद्धावस्था कौन सी रह जाएगी ? जैसे पृथ्वी साकार है और गंध है ये निराकार है । जल साकार है और परमाणु निराकार है । अग्नि भी साकार निराकार है । पर वायु और आकाश अमूर्त हैं । ऐसे परमात्मा साकार और निराकार हैं । परमात्मा के साकार और निराकार ही नहीं और भी कई रूप हैं । भगवान् को बुद्धि से पकड़ नहीं सकते । जैसे हाथ से दीवार नहीं पकड़ी जा सकती । जो बुद्धि से छोटी है, वह पकड़ में आएगी । जो बुद्धि से बड़ी है, वह बुद्धि से कैसे पकड़ में आएगी । बड़ी धारणा में (मानने में) आती है कि यह है । मीरा बाई के सामने भूखा सिंह छोड़ा । तो मीराबाई खुश हो गई कि आज तो प्रह्लाद जी के भक्त आ गए । जल से पूजा की और मीराबाई भगवान् मानती है, तो सिंह कैसे खाए ? सिंह भी परमात्मा ही तो बने हैं । ऐसे सांप भी नहीं खाता । संसार नहीं है, यह संसार की जड़ कट गई । परमात्मा ही परमात्मा हैं । बाहर भी परमात्मा है, भीतर में परमात्मा है । सिवाय परमात्मा के कुछ नहीं । परमात्मा है । परमात्मा ही हैं । गीता ने कहा और बात मान ले । मानते ही नहीं तो कैसे अनुभव होगा ? धारणा कर ले कि है परमात्मा ही । हमारी गलती से नहीं दीखता है । परमात्मा हैं ।

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TRN LIVE: ।।🕉️श्रीहरि:।।

*गंगाजी के तिरस्कार का परिणाम बुरा होता है!* 

 *श्रोता*-ऐसी बात आयी है कि *गंगाजीमें अस्थियाँ प्रवाहित करनेसे उस व्यक्तिकी मुक्ति हो जाती है, तो वास्तवमें मुक्ति हो जाती है या गति हो जाती है ?*

*स्वामीजी* - यह मरनेवालेके *भाव के* अनुसार होता है। *उसका गंगाजीमें विशेष भाव है तो मुक्ति भी हो सकती है*।

 *श्रोता- अगर मरनेवाला गंगाजीको मानता ही नहीं हो, तो?*

*स्वामीजी - गंगाजीकी बहुत महिमा है,* पर वह माननेवालोंके लिये है। *उसका जितना आदर करेंगे, उतना लाभ जरूर होगा, इसमें सन्देह नहीं है।*

 एक आदमी था। *वह गंगाजीकी निन्दा किया करता था और गंगाजीमें जानेवाले आदमियोंके लिये कहता था कि ये बेसमझ आदमी हैं, पानीमें क्या पड़ा है!* 

जब वह *मर* गया तो उसके बेटेने अपने पिताकी अस्थियोंको एक लोटेमें डालकर अच्छी तरह बन्द कर दिया और गंगाजी जानेवालेको देकर कह दिया कि यह गंगाजीमें प्रवाहित कर देना। उसने गंगाजी जाकर उस लोटेको गंगाजीमें, ब्रह्मकुण्डमें डाल दिया। *एक आदमी वहाँ स्नान करने आया तो वह लोटा उसके पैरोंमें लगा। उसने समझा कि इस लोटेमें कोई धन होगा। पर वह उस लोटेको कहाँ खोले कि दूसरा कोई देखे नहीं! वह लोटेको लेकर शौचालयमें गया। वहाँ उसने लोटेको खोला तो उसमेंअस्थियाँ मिलीं। उसने उनको वहीं शौचालयमें गिरा दिया और लोटा अपने पास रख लिया!* लोटेपर नाम खुदा हुआ था। संयोगसे वह आदमी उसी गाँवका था। मृत व्यक्तिके घरवालोंने वह लोटा देखा तो पूछा कि यह तुम कहाँसे लाये ? उसने बताया कि मेरे को तो यह गंगाजीमें मिला। इसमें जो कुछ था, उसको तो मैंने शौचालयमें डाल दिया ! यह बीती हुई घटना किसीने मेरेको सुनायी !

 तात्पर्य है कि *जो जिस वस्तुकी निन्दा, तिरस्कार करता है, वह उस वस्तुसे लाभ नहीं उठा सकता।*

जो भगवन्नामकी निन्दा, तिरस्कार करता हो, उसको भगवन्नाम नहीं सुनाना चाहिये।

ईस्वर अंस जीव अबिनासी पृष्ठ १४० गीता प्रकाशन 

*परम श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज*

नारायण! नारायण! नारायण! नारायण!

TRN  LIVE 

यूपी: लखनऊ में बसपा सुप्रीमो मायावती की प्रेस कॉन्फ़्रेंस उस वक्त अचानक बाधित हो गई जब कार्यक्रम स्थल की लाइट से धुआँ निकलने लगा। धुआँ दिखते ही मौके पर अफ़रा-तफ़री मच गई और सुरक्षा कारणों से प्रेस कॉन्फ़्रेंस तुरंत समाप्त करनी पड़ी। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। तकनीकी खराबी की जाँच की जा रही है।

#Lucknow #Mayawati #BSP #PressConference #BreakingNews

7 hours ago

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला