जिस तेल के लिए 'जल' रही पूरी दुनिया, आज की ही तारीख में मिला था उसका पहला कुआं
जैसे-जैसे अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है ग्लोबल एनर्जी मार्केट एक बार फिर से तनाव में आ चुकी है. दरअसल ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दे दी है. दुनिया की तेल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इस पतले समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है. इसी बीच आपको बता दें कि आज ही के दिन एक ऐसी खोज हुई थी जिसने सऊदी अरब को हमेशा के लिए बदल दिया था.
एक बड़ी खोज
3 मार्च मॉडर्न हिस्ट्री में क्रूड ऑयल की कहानी में एक काफी बड़ा दिन है. 3 मार्च 1938 को सऊदी अरब में दम्मम वेल नंबर 7 में कमर्शियल क्वांटिटी में तेल खोजा गया था. यह एक ऐसी खोज थी जिसने ना सिर्फ एक देश बल्कि पूरे ग्लोबल एनर्जी ऑर्डर को बदल दिया था. इस कुएं को बाद में प्रोस्पेरिटी वेल नाम दिया गया था.
यह सऊदी अरब के ईस्टर्न प्रोविंस के धाहरान में है. महिनों की मेहनत और बार-बार फेल होने के बाद आखिरकार लगभग 1440 मीटर की गहराई पर काफी क्वांटिटी में तेल मिला. उस पल से सऊदी अरब की एक बड़े रेगिस्तानी इकॉनमी से दुनिया की सबसे बड़ी एनर्जी पावर हाउस बनने की शुरुआत हुई. इस खोज से पहले सऊदी अरब के पास सीमित इकॉनमिक रिसोर्स थे. तेल से होने वाले रेवेन्यू का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर, मॉडर्नाइजेशन, एजुकेशन और बड़े डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाता था.
सफलता से पहले 6 असफलताएं
कुआं नंबर 7 की सफलता आसानी से नहीं मिली. इससे पहले ड्रिल किए गए 6 कुएं कमर्शियली तौर पर फेल हो गए थे. इन्वेस्टर का भरोसा कम हो रहा था और साथ ही प्रोजेक्ट लगभग बंद होने वाला था. चीफ जियोलॉजिस्ट मैक्स स्टाइनके ने हार मानने से मना कर दिया. बढ़ते दबाव के बावजूद उन्होंने और गहरी ड्रिलिंग करने पर जोर दिया. उनकी मेहनत तब रंग लाई जब 3 मार्च 1938 को आखिरकार तेल के रिजर्व मिले. उनके ड्रिलिंग जारी रखने के एक फैसले ने पूरे देश की किस्मत को बदल दिया.
शुरू हुआ दमदार प्रोडक्शन
आंकड़ों ने जल्द ही यह कंफर्म कर दिया कि यह कोई छोटी खोज नहीं थी. 4 मार्च 1938 को सफलता के ठीक 1 दिन बाद कुएं से हर दिन 1585 बैरल तेल निकलता था. मार्च के आखिर तक प्रोडक्शन बढ़कर 3810 बैरल प्रतिदिन हो गया. कुआं नंबर 7 45 सालों तक चलता रहा और 1982 में बंद होने से पहले 32 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल का प्रोडक्शन किया. यह सिर्फ एक सफल कुआं नहीं था बल्कि इसी ने पूरी इंडस्ट्री की नींव रखी थी.
इस खोज ने कैलिफोर्निया अरब स्टैंडर्ड ऑयल कंपनी के लिए नींव रखी थी. यही कंपनी बाद में सऊदी अरामको बनी और आज दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे कीमती एनर्जी कंपनियों में से एक है.
एक खोज ने बदल दी ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स
कुआं नंबर 7 में मिले तेल ने सऊदी अरब को अमीर बनने से कहीं ज्यादा किया. इसने ग्लोबल पावर बैलेंस को बदल दिया. मिडिल ईस्ट ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी का सेंटर बन गया. इसी के साथ इंडस्ट्रियलाइज्ड देश गल्फ ऑयल पर डिपेंड हो चुके थे. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे स्ट्रैटेजिक समुद्री रास्तों को काफी ज्यादा अहमियत मिली. समय के साथ-साथ तेल ने अलग-अलग महाद्वीपों में गठबंधन बनाए, झगड़ा शुरू किया और विदेश नीति के फसलों पर असर डाला.
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान
1999 में क्राउन प्रिंस अब्दुल्ला ने इस जगह के ऐतिहासिक महत्व को सम्मान देने के लिए ऑफीशियली इसका नाम बदलकर प्रोस्पेरिटी वेल कर दिया. आज यह सऊदी अरब के इंडस्ट्रियल विकास और राष्ट्रीय बदलाव की एक बड़ी निशानी है. इतना ही नहीं बल्कि इस जगह को इसकी ऐतिहासिक अहमियत को पहचान देने के लिए यूनेस्को की टेंटेटिव वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में भी शामिल किया गया है.
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