स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हुआ तो किन देशों की आर्थिक तरक्की के रास्ते होंगे बंद? देखें पूरी लिस्ट
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव (Israel-Iran War) के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद करने का ऐलान किया है. यह वही समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस गुजरता है. अगर यह 30 मील चौड़ा रास्ता बंद होता है, तो इसका असर सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं सीधे इसकी चपेट में आ सकती हैं.
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्यों अहम है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर्शियन गल्फ को गल्फ ऑफ ओमान और आगे अरब सागर से जोड़ता है. यह करीब 30 मील चौड़ा समुद्री रास्ता है, लेकिन इसकी रणनीतिक अहमियत बहुत बड़ी है. दुनिया की लगभग 70 फीसदी सतह समुद्र से घिरी है और करीब 80 फीसदी वैश्विक व्यापार समुद्री रास्तों से होता है. ऐसे में कुछ खास जगहें, जिन्हें चोक प्वाइंट कहा जाता है, बेहद अहम हो जाती हैं. होर्मुज ऐसा ही चोक पॉइंट है.
किन देशों के लिए जीवन रेखा है यह रास्ता?
पर्शियन गल्फ से आठ देश जुड़े हैं- ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, कतर, यूएई और ओमान. इनमें से कई देशों के लिए खुला समुद्री रास्ता सिर्फ होर्मुज के जरिए है. मिडिल ईस्ट की पहचान उसके तेल और गैस भंडार से है और दुनिया की कुल ऊर्जा खपत का करीब 33 फीसदी हिस्सा तेल से आता है. ट्रांसपोर्ट, बिजली उत्पादन और इंडस्ट्री में तेल की बड़ी भूमिका है.
दुनिया के कुल प्रमाणित तेल भंडार का लगभग आधा हिस्सा इसी क्षेत्र में है. प्राकृतिक गैस का भी करीब 40 फीसदी हिस्सा इन्हीं देशों में मौजूद है. वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का करीब 15 फीसदी हिस्सा सीधे पर्शियन गल्फ से आता है और इसका मुख्य रास्ता होर्मुज है. अब सवाल है कि अगर यह रास्ता बंद हुआ तो किन देशों की अर्थव्यवस्था ढह जाएगी, चलिए जानते हैं.
चीन
चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और सबसे बड़ा पेट्रोलियम आयातक भी है. चीन के कुल तेल आयात का लगभग 45 फीसदी हिस्सा होर्मुज से गुजरकर आता है. अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद होता है, तो चीन को वैकल्पिक सप्लाई ढूंढनी होगी, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और उसकी मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट पर असर पड़ेगा.
जापान
जापान अपनी लगभग 100 फीसदी ऊर्जा जरूरतें आयात से पूरी करता है. इसके तेल आयात का करीब 80 फीसदी हिस्सा होर्मुज से आता है. ऐसी स्थिति में जापान के लिए ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है, जिसका सीधा असर उसकी इंडस्ट्री और टेक सेक्टर पर पड़ेगा.
भारत
भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. भारत अपने कुल कच्चे तेल का लगभग 70 फीसदी और गैस का करीब 50 फीसदी हिस्सा पर्शियन गल्फ देशों से आयात करता है. अगर होर्मुज बंद होता है, तो भारत के लिए तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. इसका असर पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर और महंगाई पर पड़ेगा. चालू खाता घाटा और रुपये पर दबाव भी बढ़ सकता है.
दक्षिण कोरिया
दक्षिण कोरिया दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. इसका लगभग 70 फीसदी तेल आयात खाड़ी देशों से होता है. तेल सप्लाई रुकने से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और भारी उद्योगों पर असर पड़ेगा, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है.
ईरान का रणनीतिक कंट्रोल
होर्मुज के आसपास आठ छोटे द्वीप हैं, जिनमें से सात पर ईरान का नियंत्रण है. यह इलाका सैन्य रूप से बेहद संवेदनशील है. अगर यहां जहाजों की आवाजाही रोकी जाती है, तो टैंकर ट्रैफिक ठप हो सकता है. ईरान पहले भी कई बार इस रास्ते को बंद करने की धमकी दे चुका है. हालांकि पूरी तरह लंबे समय तक बंद करना अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया को आमंत्रित कर सकता है.
होमुर्ज बंद का वैश्विक असर
अगर होर्मुज बंद होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक बाजार में तेजी से बढ़ सकती हैं. इससे अमेरिका और यूरोप भी प्रभावित होंगे. महंगाई बढ़ेगी, शेयर बाजार गिर सकते हैं और वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ सकता है. दुनिया की दूसरी, तीसरी, छठी और 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं ऊर्जा संकट में फंस सकती हैं. इसलिए होर्मुज को दुनिया का सबसे अहम और संवेदनशील चोक प्वाइंट माना जाता है.
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