पटना में 445 जगह होगा होलिका दहन, 500 मीटर की परिधि में दमकल तैनात

Mar 2, 2026 - 09:18
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पटना में 445 जगह होगा होलिका दहन, 500 मीटर की परिधि में दमकल तैनात
होलिका दहन को लेकर अग्निशमन विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है। पटना समेत राज्यभर में 2500 जवानों को लगाया गया है। साथ ही 578 दमकल को अलर्ट पर रखा गया है। सभी फायर अफसरों और कर्मियों की छुट्टी रद्द कर दी गई है। सभी जिलों में कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। पटना में 445 स्थानों पर होलिका दहन होगा। दमकलों को इन स्थानों से 500 मीटर से एक किमी की दूरी पर रखा गया है। साथ ही इन स्थानों के पास जहां-जहां वाटर हाइड्रेंट हैं, उन्हें चिह्नित कर लिया गया है। होमगार्ड आैर अग्निशमन सेवाएं की ओर से गाइडलाइन जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि जहां-जहां होलिका दहन होना है, वहां दो ड्राम में पानी और बालू रखना है। डीआईजी होमगार्ड सह फायर के प्रभारी मनोज नट ने बताया कि फायरकर्मियों को किसी भी अनहोनी होने पर फौरन निपटने का आदेश दिया गया है। नोडल पदाधिकारी समय-समय पर यह जांच करते रहेंगे कि सभी कर्मी अपने निर्धारित स्थान पर मौजूद हैं या नहीं? ड्यूटी में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पटना : दो मिनट में पहुंचने का टारगेट पटना शहर को चार जोन में विभाजित कर करीब 445 जवानों की प्रतिनियुक्ति की गई है। कंट्रोल रूम से पूरे शहर में होने वाले होलिका दहन की निगरानी रखी जाएगी। अग्निशमन विभाग ने रूट मैपिंग कर ली है। अधिकारियों का दावा है कि इस व्यवस्था के तहत किसी भी घटना की सूचना मिलने पर दो मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचने का टारगेट रखा गया है। इसके लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को रणनीतिक रूप से विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया है। फेफड़े को नुकसान, कैंसर का भी खतरा टायर जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड सहित अन्य जहरीली गैसों का उत्सर्जन होता है। यह सांस के जरिए शरीर में जाकर खून में ऑक्सीजन की कमी कर देती है। यह अस्थमा के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचाती है। कैंसर का खतरा रहता है। इम्यून सिस्टम पर भी असर करती है।-डॉ. दिवाकर तेजस्वी, जनरल फिजिशियन पटना प्रदूषित शहर... होलिका में नहीं जलाएं टायर, पॉलीथिन आैर कूड़ा, इनसे निकलेंगी जहरीली गैसें होलिका दहन सोमवार को है। लोग इसमें वाहनों के पुराने टायर, पॉलीथिन, कूड़ा-कचरा आदि भी डाल देते हैं। इन चीजों के जलने से वातावरण में जहरीली गैस की मात्रा बढ़ जाती है। इससे पर्यावरण दूषित होने के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। पटना देश के प्रदूषित शहरों में शामिल है। ऐसे में होलिका दहन में ऐसी चीजों को डालने से परहेज करना चाहिए। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने भी प्लास्टिक, टायर और थर्मोकोल जलाने पर रोक लगाई है। पर्षद के सदस्य सचिव नीरज नारायण के मुताबिक, प्लास्टिक जलाने से कार्बन मोनो ऑक्साइड, फ्यूरान जैसी जहरीली गैस निकलती है, जो स्वच्छ हवा में घुलती है। यह भी ध्यान रखें : बिजली के तार के नीचे न जलाएं ऊर्जा विभाग ने बिजली के खंभों-ट्रांसफॉर्मरों के पास या तार के नीचे होलिका दहन न करने की सलाह दी है। आग की लपटों से तारों और बिजली के केबलों के जलने या टूटने से खतरा पैदा हो सकता है। इससे त्योहार का रंग फीका हो सकता है। शहर का एक्यूआई लेवल सचिवालय 156 तारामंडल 99 वेटनरी मैदान 125 गांधी मैदान 127 पटना सिटी 133 संवेदनशील स्थलों की पहचान विभाग की ओर से शहर में 445 ऐसे स्थलों को चिह्नित किया गया है, जो सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माने गए हैं। इनमें वे स्थान शामिल हैं, जहां पास में हाईराइज बिल्डिंग हैं। भीड़भाड़ वाले चौक-चौराहे हैं। पेट्रोल पंप या वेंडिंग जोन जैसे महत्वपूर्ण स्थल हैं। साथ ही मिक्स्ड टेक्नोलॉजी बाइक के जरिए एरिया डोमिनेशन अभियान चलाया जा रहा है। विभागीय टीमों ने गली-मोहल्लों में जाकर लोगों को अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक भी किया है, ताकि लापरवाही से किसी प्रकार की घटना न हो। विकल्प : गोबर के उपले, सूखी लकड़ियां, धूप आदि। कदमकुआं स्थित चूड़ी मार्केट शिव मंदिर के पास वर्ष 2018 से ही होलिका सजाने के लिए केवल सूखी लकड़ी, गौ-गोबर के उपले और पुआल का उपयोग होता है। कपूर, लौंग, इलायची, गुग्गुल, धूना और घी की आहुति से वातावरण को शुद्ध रखा जाता है। मीठापुर और दरियापुर गोला स्थित फकीरबाड़ा के पास भी पारंपरिक तरीके से होलिका दहन किया जाता है।

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला