बांका-भागलपुर तक 15.71 करोड़ का अवैध बालू धंधा:एक दिन में 10 लाख थाने की कमाई, दलाल भी कमा लेते 2 लाख; मजदूरों का भी हिस्सा बंटा है

Feb 9, 2026 - 17:34
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बांका-भागलपुर तक 15.71 करोड़ का अवैध बालू धंधा:एक दिन में 10 लाख थाने की कमाई, दलाल भी कमा लेते 2 लाख; मजदूरों का भी हिस्सा बंटा है
भागलपुर में अवैध बालू का कारोबार हो रहा है। जिसका कनेक्शन बांका से जुड़ा है। बांका के रजौन में 3 बालू घाट हैं। जहां बालू का अवैध खनन होता है, जिसमें 300 ट्रैक्टर लगे हैं। ये अवैध धंधा करीब 15.71 करोड़ रुपए का है। इसमें सभी का पैसा बंटा है। एक दिन में थाने की कमाई 10 लाख रुपए तक है। पुलिस इसमें डायरेक्ट वसूली नहीं करती है। थाने को पैसा दलाल लाकर देते हैं। जिसके बाद थाना मैनेज हो जाता है। इसके अलावा मजदूरों का भी इसमें हिस्सा बंटा है। जो बालू को लोड करते हैं। ये खुलासा तब हुआ जब स्थानीय मदन कुमार समेत 6 लोगों ने डीजीपी विनय कुमार से मामले की शिकायत 28 जनवरी को की थी। जिसके बाद पुलिस एक्शन में आई और 4 फरवरी को 24 ट्रैक्टर जब्त किया था, किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। पुलिस के एक्शन के बाद भी आजतक अवैध धंधा बंद नहीं हुआ है, खनन जारी है। अवैध धंधे में माफियाओं का रूट, कब-किसे और कैसे मैनेज करना है, किसकी कितनी बटी है हिस्सेदारी जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट... पहले देखें अवैध बालू धंधे की कुछ तस्वीरें… सबसे पहले जानें बालू घाट पर क्या होता है रजौन की तीन बालू (डरपा, सैदपुर और डवान) पर ट्रैक्टर जाते हैं। वहां ट्रैक्टर पर बालू लोड होता है। एक ट्रैक्टर पर एक बार में 150 किलो (सेफ्टी) बालू लादा जाता है। घाट पर भी सभी के रुपए बंटे हैं। बालू लोड करने वाला मजदूर 600 रुपए लेता है। घाट पर एक रंगबाज भी होता है, जो 200 रुपए लेता है। घाट पर अवैध खनन चलता रहे इसके लिए घाट पर मौजूद पुलिस के आदमी को भी 500 रुपए दिए जाते हैं। ये सब प्रति ट्रैक्टर के हिसाब से लिए जाते हैं। घाट से निकलने के बाद दो रास्ते से बालू ट्रैक्टर पहुंचते भागलपुर पहला जगदीशपुर होते हुए पहला रास्ता है जगदीशपुर होते हुए भागलपुर का। ये रूट करीब 15 किमी का है। इस रास्ते में सिर्फ जगदीशपुर थाने को मैनेज करना पड़ता है। यहां का दलाल हीरा यादव और निखिल है। जो थाने को मैनेज करने के लिए हर टैक्टर से 1200 रुपए लेता है। इसमें 1100 रुपए थाने को देने पड़ते हैं और दलाल खुद 100 रुपए रख लेता है। इस रूट से हर दिन 100 ट्रैक्टर गुजरते हैं। 1200 प्रति ट्रैक्टर के हिसाब से 1.20 लाख रुपए की वसूली होती है। जिसमें हर दिन 1.10 लाख रुपए सिर्फ थाना रखता है। दूसरा रास्ता 40 किमी का है दूसरा रास्ता 40 किमी वाला है। इस रूट में 4 थाने मैनेज करने होते हैं। पहला रजौन थान जो घाट पर ही मैनेज हो जाता है। इसके बाद बालू लदा ट्रैक्टर नवादा थाना क्षेत्र में घुसता है। यहां पुलिस को मैनेज करने के लिए अक्षय कुमार नाम का दलाल है। जो प्रति ट्रैक्टर हर महीने 6000 रुपए लेता है। इसमें 5000 रुपए थाने को जाता है। बाकी 1000 हजार रुपए दलाल खुद रखता है। इसके बाद गोराहीड थाना क्षेत्र आता है। यहां दलाल भूखन चौधरी है। यहां भी 6000 रुपए रेट फिक्स है। इसके बाद लोदीपुर थाने को मैनेज करना होता है। इसके लिए थाने का चालक बीरू यादव है। यहां भी मंथली 6000 रुपए तय है। 5 हजार थाने को जाता है। आगे जाने पर सबौर थाना पड़ता है। यहां यादव जी नाम का शख्स दलाल है। यहां महीने के 3000 देने होते हैं। 2 हजार थाने को जाते हैं। 1 हजार दलाल लेता है। इसके आलावा रास्ते में गश्ती गाड़ी को भी 100 रुपए देने होते हैं। 10 लाख रुपए थाने की हो रही कमाई 40 किमी वाले रूट से हर दिन 200 ट्रैक्टर गुजरते हैं। हर एक ट्रैक्टर से महीने में 3 थानों को 5000-5000 रुपए मिलते हैं। इस हिसाब से महीने में एक थाने की कमाई 10 लाख रुपए हो जाती है। वहीं, सबौर थाने की बात करें तो इसकी आमदनी तय नहीं है क्योंकि यहां हर महीने कितनी गाड़ियां आती हैं ये तय नहीं। वहीं, थाने को मैनेज करने वाला दलाल महीने में 2 लाख रुपए कमा रहा है। सबौर थाने को मैनेज करने के लिए कम क्यों लग रहे रुपए दलालों के अनुसार सबौर थाने क्षेत्र में ज्यादा चेकिंग नहीं होती है। इसका कारण है कई ट्रैक्टर सबौर पहुंचते ही नहीं है। वे बालू को भागलपुर शहर में डंप करने की जगह सबौर से पहले ही कहीं कर दते हैं। वहीं, कुछ ट्रैक्टर भागलपुर शहर में जाते हैं। जो भी व्यक्ति बालू का ऑर्डर करता है। वो बालू माफिया को एक तय जगह पर आने के लिए कहता है। वहां ट्रैक्टर से बालू को गिरा दिया जाता है। जिसके बाद बालू को आम लोगों के बीच बेचा जाता है। कौन है हीरा यादव और निखिल आनंद… खनन विभाग के अनुसार हीरा यादव पर बालू से जुड़े 8 से ज्यादा मुकदमे दर्ज है, हाल में ही निरीक्षक अपूर्व सिंह ने अवैध बालू उत्खनन में छापेमारी के दौरान जब्त किए ट्रैक्टर मामले में एक एफआईआर दर्ज की थी। उसमें हीरा यादव का नाम शामिल किया, उसमें लिखा कि हीरा सालों से ये धंधा कर रहा है। हीरा यादव पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा चल रहा है। 26 जनवरी 2026 को उनका एक फोटो भी सामने आया जिसमें हीरा यादव निखिल यादव के साथ था। जो जगदीशपुर थाना अध्यक्ष अभय शंकर का करीबी माना जाता है। खनन निरीक्षक को अवैध बालू का भंडार मिला था खनन निरीक्षक अपूर्वा सिंह ने कार्रवाई के एप्लिकेशन कॉपी में लिखा था कि गुप्त सूचना मिली कि भागलपुर जिला जगदीशपुर थाना अन्तर्गत मुस्तफापुर में बालू का अवैध खनन, भंडारण और परिवहन किया जा रहा है। सूचना के सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई के लिए मुस्तफापुर, पुरेनी में छापेमारी की गई। छापामारी के दौरान नदी किनारे अवैध रूप से बालू का भंडारण मिला। स्थल पर किसी व्यक्ति की ओर से वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। स्थनीय ग्रामीणों से पूछताछ की गई। लोगों ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि इस जगह पर बालू माफियाओं के एक संगठित गिरोह की ओर से बालू का अवैध धंधा किया जा रहा है। इस गिरोह में पंकज यादव, हीरा यादव, मो. रेहान के अलावा 10-12 अन्य अज्ञात व्यक्ति भी शामिल हैं। सभी का अवैध खनन का पुराना गिरोह गिरोह के सभी लोग अपराधी प्रवृति के हैं। इन सभी का अवैध खनन का पुराना गिरोह है। स्थानीय लोगों को डरा-धमका कर रखते हैं। साथ ही इस गिरोह में इंट्री माफिया के तौर पर पूरे क्षेत्र में लाइनर और पासर का जाल फैला रखा है। जिसमें ये लोग कार और बाइक से घूम कर खनन और पुलिस अधिकारिकयों की रेकी करते हैं और उनका लोकेशन ट्रैक करते हैं, जिसमें इनका उद्देश्य अवैध वाहनों को पास करवाना होता है। एंट्री माफिया ने क्या कहा… जगदीशपुर के दलाल निखिल ने बताया, अभय शंकर के थानेदार बनने के बाद धंधे में शामिल हुआ, लेकिन मैं इसमें कुछ नहीं करता हूं। हीरा यादव करता है। मैं बस देख रेख करता हूं। सीधे तौर पर मैं शामिल नहीं हूं। हीरा यादव ने बताया, इस मामले को छोड़ दीजिए। अखबार में नहीं छपिएगा, नहीं तो सिस्टम किसी और के हाथ में चला जाएगा, फिर हम लोगों को दिक्कत होगी। डीजीपी को लेकर लिख कर शिकायत की 28 जनवरी को स्थानीय निवासी मदन कुमार ने डीजीपी को पत्र लिखा, उसमें निखिल का जिक्र है। कहा कि निखिल के मकान में थानाध्यक्ष अभय शंकर डेरा डालकर रह रहे हैं, जबकि थानाध्यक्ष के लिए भव्य और सुंदर घर है। निखिल के मकान वे इसलिए हैं कि वहां पर अवैध वसूली के अलावे शराब की स्थाई व्यवस्था रहती है। निखिल BS का खुलेआम बिक्री करवाता है। अवैध बालू खनन कराने के लिए ट्रैक्टर मालिकों से पुलिस के हिस्सा का वसूली करता है। निखिल साह के घर में थाना प्रभारी के रहने से निखिल साह का मनोबल काफी बढ़ने लगा। थाना प्रभारी के सहयोग से 3 साल के अंदर निखिल साह ने अवैध बालू खनन और ब्राउन सुगर के धंधे से करीब 10 करोड़ से अधिक संपत्ति बना ली है। पांच साल पहले निखिल के पास घर चलाने के लिए रुपए तक नहीं थे। एसएसपी बोले- दोषी के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई SSP प्रमोद कुमार ने कहा है कि हमें सूचना मिली थी। इसके बाद कई इलाकों में छापेमारी की गई। जीरोमाइल रूट में भी विशेष अभियान चलाया गया। जहां-जहां से जानकारी मिल रही है, वहां टीम भेजकर लगातार छापेमारी करवाई जा रही है। इस मामले में खनन विभाग को भी सूचित किया गया है और फॉलो-अप किया जा रहा है। जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एंट्री माफियाओं को चिह्नित किया जा रहा है। इसमें जो भी लोग शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 107 के तहत कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से अर्जित संपत्ति जब्त की जाएगी। जगदीशपुर थानाध्यक्ष अभय शंकर को नोटिस दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे किराए के मकान में रहते हैं। इसके बावजूद इस मामले में एसडीपीओ से रिपोर्ट मंगाई जा रही है। यदि जांच में दोषी पाए जाते हैं, तो जगदीशपुर थानाध्यक्ष अभय शंकर के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला