भारत के पास कितने दिनों का बचा कच्चे तेल का भंडार? इजरायल-ईरान जंग लंबी चली तो कैसे होगी सप्लाई
मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच बने युद्ध के हालात के चलते बाजार में उथलपुथल देखने को मिल रही है. युद्ध का असर सिर्फ कच्चे तेल और शेयर मार्केट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG)की कीमतों में भी देखने को मिल रहा है. यानी अगर हालात सामान्य नहीं रहे तो आने वाले समय में इन चीजों पर भारी उछाल देखने को मिलेगा. यह असर खासकर यूरोप और एशिया के देशों में देखने को मिलेगा. इनमें भारत भी शामिल हैं.
सरकारी सूत्रों ने बताया कि कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी के मामले में हमारी स्थिति काफी आरामदायक है. हमारे पास 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार है. साथ ही 25 दिनों का उत्पाद भंडार है. इसमें ट्रांसपोर्ट में मौजूद माल भी शामिल है.
इजरायल और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत हो गई है. इधर, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है. साथ ही कहा है कि होर्मुज से ईरान तेल की एक बूंद भी नहीं गुजरने देगा. ईरान की इस धमकी के बाद से वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई में कमी आएगी, इनकी कीमतों भी इजाफा देखने को मिलेगा.
होर्मुज बंद होने से भारत पर कितना असर
अगर ईरान के इस फैसले से भारत पर क्या असर पड़ेगा, तो भारत का 20 प्रतिशत क्रूड ऑयल का आयात-निर्यात इसी रास्ते से होता है. भारत का 40 प्रतिशत तेल और 50 प्रतिशत गैस इसी रास्ते से होकर गुजरती है. ऐसे में रास्ता बंद होने से आने वाले समय में भारत को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. ईरान ने अमेरिका का समर्थन करने वाले खाड़ी देशों पर भी हमले किए हैं. उनकी रिफाइनरी पर अटैक किया है. कच्चा तेल की कीमत वर्तमान में 78.52 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है. इसके अलावा LNG के टैंकर की कीमत 2 लाख डॉलर के आसपास कीमत है.
अगर युद्ध लंबा खींचा तो भारत के लिए मुश्किलें बढ़ सकती है. ऐसे में भारत फिर से रूस से तेल खरीद को बढ़ा सकता है. भारत के पास रूस से तेल खरीदना एक सस्ता विकल्प है.
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