मानसून से पहले काम पूरा करने का लक्ष्य:एएन कॉलेज सीवरेज पंपिंग स्टेशन से जुड़ेगा आनंदपुरी नाला, राजीवनगर इलाके को जलजमाव से मुक्ति मिलेगी
दीघा एसटीपी का उपयोग बढ़ेगा, ज्यादा पानी साफ होगा आनंदपुरी नाला अब एएन कॉलेज के पास बने सीवरेज पंपिंग स्टेशन से जुड़ेगा। अभी इस नाले का पानी बोरिंग रोड चौराहे के पास स्थित पंपिंग स्टेशन में जाता है। उसकी क्षमता कम होने के कारण मानसून में यह नाला ओवरफ्लो हो जाता है, जिससे राजीवनगर और आसपास के मोहल्लों में जलजमाव होता है। अब इस नाले का 30 एमएलडी पानी रोजाना एएन कॉलेज के पास वाले पंपिंग स्टेशन में भेजा जाएगा। वहां से दीघा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में पहुंचेगा। इस ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 100 एमएलडी की है। अभी इसमें रोज 40 एमएलडी गंदे पानी का ही ट्रीटमेंट हो रहा है। आनंदपुरी नाले के जुड़ने के बाद 70 एमएलडी पानी का ट्रीटमेंट होगा। बुडको के एमडी अनिमेष कुमार पराशर के निर्देश पर नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत इस नई कवायद को मानसून से पहले पूरा कर लिया जाएगा। इससे राजीवनगर और आसपास के मोहल्लों को जलजमाव से निजात मिलेगी। इसके साथ ही राजीवनगर, पाटलिपुत्र और अटल पथ में बन रहे सीवरेज नेटवर्क का काम तेजी से चल रहा है। इसे भी मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य है। घरों के सीवरेज कनेक्शन को इस नए नेटवर्क से जोड़कर एएन कॉलेज एसपीएस तक पहुंचाया जाएगा। सफलता : नालों की टैपिंग से साफ हो रहा गंदा पानी शहर के बड़े नालों का पानी सीधे एसटीपी तक पहुंचाने का प्रयोग सफल रहा है। कुर्जी और राजापुर नाले की टैपिंग कर प्रतिदिन 50 एमएलडी गंदा पानी दीघा एसटीपी तक पहुंचाया जा रहा है। कंकड़बाग एसटीपी तक भी कुछ नालों के 23 एमएलडी पानी को लाकर ट्रीटमेंट किया जा रहा है। इस एसटीपी की क्षमता 50 एमएलडी है। अब राजापुर, मंदिरी, मित्तन घाट, अंटा घाट और कुर्जी घाट जैसे पांच अन्य नालों को भी सीधे एसटीपी से जोड़ने की योजना है। बड़ा बदलाव : अब नहीं खोदी जाएंगी सड़कें जहां खुदाई मुश्किल, वहां काम बंद : शहर में सीवर लाइन बिछाने के लिए होने वाली सड़क खुदाई और उससे पैदा होने वाली समस्याओं को देखते हुए नमामि गंगे प्रशासन ने अपनी रणनीति बदल दी है। जिन इलाकों में प्रोजेक्ट चल रहे हैं, उन्हें पूरा किया जाएगा। भविष्य में नई सीवर लाइन के लिए कहीं भी सड़कों या संकरी गलियों की खुदाई नहीं होगी। जहां खुदाई मुश्किल है, वहां काम बंद कर दिया गया है। इंटरसेप्शन एंड डाइवर्जन मॉडल : सड़क खोदने के बजाय अब इंटरसेप्शन एंड डाइवर्जन तकनीक अपनाई जाएगी। इसके तहत नालों के प्रवाह को ही आधुनिक तकनीक से मोड़कर एसटीपी से जोड़ा जाएगा। इस प्रोजेक्ट में समय कम लगेगा और लागत भी काफी कम आएगी। इधर...खोदी गई सड़कों में भरा पानी पटना | राजधानी में बुधवार को कुछ देर की बारिश ने ही सड़कों को खतरनाक बना दिया। खोदी गई सड़कों में पानी भर गया और वहां से गुजरना मुश्किल हो गया। कंकड़बाग, गर्दनीबाग, बोरिंग रोड और राजीवनगर तक के इलाके में नमामि गंगे परियोजना के अलावा कई अन्य कार्यों के लिए सड़कों की खुदाई चल रही है। बुडको के एमडी अनिमेष कुमार पराशर ने गुरुवार को सड़क खुदाई वाली परियोजनाओं की समीक्षा की। काम पूरा होते ही सड़कों का रीस्टोरेशन और मरम्मत कराने का निर्देश दिया। इसमें लापरवाही होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। सैदपुर : बांध काटकर निकाला गया पानी सैदपुर नाला निर्माण को लेकर साइंस सिटी के पास बनाए गए अस्थायी बांध की वजह से बारिश के बाद सड़कों पर जलजमाव हो गया। नंदनगर के पास पानी भर गया। बुडको के इंजीनियरों ने तुरंत बादशाही पईन का बांध काट दिया, जिसके बाद पानी निकल गया। बुडको के अधिकारियों के मुताबिक, मानसून से पहले रामपुर संप तक लगभग 700 मीटर नाले का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है। काम को पैच में बांटकर किया जा रहा है, जिससे पानी के बहाव में रुकावट आ रही है।
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